यूरोप के 23 देशों में रिकॉर्ड-तोड़ हीटवेव:गर्मी से 11 लाख करोड़ का नुकसान, अगले साल 34% आबादी पानी को तरसेगी

यूरोप में इस साल गर्मी का लोगों की जिंदगी व अर्थव्यवस्था, दोनों पर सीधा असर पड़ा। यूरोप के 23 देशों में रिकॉर्ड-ब्रेकिंग हीटवेव दर्ज की गई। कई हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचा और कई शहरों में अस्पतालों, बिजली ग्रिड, परिवहन और खेती पर दबाव बढ़ गया। अलग-अलग अनुमानों में इस गर्मी से 20 हजार से ज्यादा मौतों का दावा किया जा रहा है। भीषण गर्मी का यूरोप की जीडीपी पर भी असर हुआ है। एलियांज रिसर्च मॉडल के आधार पर की गई गणनाओं के अनुसार, गर्मी यूरोपीय अर्थव्यवस्था को ₹11 लाख करोड़ तक का झटका दे सकती हैं। वहीं, 2030 तक यूरोप को 61 लाख करोड़ रु. तक का आर्थिक नुकसान सहना पड़ सकता है। इसकी सबसे बड़ी वजह उत्पादकता में गिरावट, बिजली की मांग में उछाल, फसल नुकसान, पर्यटन पर असर और इन्फ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ता दबाव है। विशेषज्ञों के मुताबिक संकट यहीं नहीं रुकेगा। यूरोपीय पर्यावरण एजेंसी का अनुमान है कि अगले साल तक यूरोप की करीब 34% आबादी जल संकट की चपेट में आ सकती है। दक्षिणी यूरोप में यह संकट और गहरा होगा, जहां गर्मियों में पानी की मांग और बढ़गी। भारत में 45 डिग्री झेल लेते हैं फिर यूरोप में 36 आफत क्यों? भारत में 45 डिग्री तापमान सूखी गर्मी में होता है, इसलिए पसीना जल्दी सूखकर शरीर को ठंडा करता है। यूरोप में 36° डिग्री गर्मी भी उमस के साथ आती है, तो पसीना सूख नहीं पाता और शरीर गर्म रहता है। इसे वेट-बल्ब खतरा कहते हैं। वेट-बल्ब तापमान लंबे समय तक रहे तो स्वस्थ व्यक्ति के लिए भी जानलेवा हो सकता है। इससे हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है और किडनी और लिवर फेल हो सकते हैं। उछाल… ब्रिटेन में एसी बिक्री 330%, फ्रांस में 1000% बढ़ी भीषण गर्मी ने एसी को लग्जरी से जरूरत बना दिया है। ब्रिटेन में एसी की बिक्री 330% तक तो फ्रांस में 1000% तक बढ़ी। तापमान बढ़ते ही कई बाजार में स्टॉक घटने लगा। पंखों व पोर्टेबल कूलर की मांग भी कई गुना तेजी से बढ़ी। 23 देशों में गर्मी के रिकॉर्ड टूटे, स्पेन में पारा 45 डिग्री पार हुआ यूरोप की हीटवेव ने तापमान के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। कम से कम 23 देशों में जून की गर्मी ने नए रिकॉर्ड बनाए। स्पेन में पारा 45 डिग्री के पार पहुंचा, जबकि फ्रांस, जर्मनी, इटली, स्विट्जरलैंड, नीदरलैंड्स व ब्रिटेन में भी रिकॉर्ड गर्मी दर्ज हुई। भास्कर एनालिसिस भीषण हीटवेव के पीछे ओमेगा ब्लॉक; इसमें गर्म हवा फंसकर बढ़ा रही तबाही ओमेगा ब्लॉक क्या पैटर्न होता है? यह मौसम का ऐसा पैटर्न है, जिसमें हाई-प्रेशर सिस्टम दो लो-प्रेशर सिस्टम के बीच फंस जाता है। इसका आकार ग्रीक अक्षर ओमेगा जैसा दिखता है। इस पैटर्न से गर्मी क्यों बढ़ने लगती है? हाई-प्रेशर सिस्टम गर्म हवा को एक जगह रोक देता है। बादल कम बनते हैं, बारिश रुकती है और जमीन लगातार गर्म होती रहती है। इससे यह संकट होता है। यूरोप की हीटवेव इस पैटर्न से कैसे जुड़ी है? ओमेगा ब्लॉक ने उत्तरी अफ्रीका और भूमध्यसागर की गर्म हवा को यूरोप के ऊपर रोक दिया। इसलिए कई देशों में तापमान 40 डिग्री या उससे ऊपर रहा। इस पैटर्न से और क्या असर पैदा होता है? जहां हाई-प्रेशर रहता है, वहां गर्मी और सूखा बढ़ता है। लो-प्रेशर में भारी बारिश-बाढ़ का खतरा बढ़ता है। जलवायु बदलाव से खतरा क्यों बढ़ गया है? ओमेगा ब्लॉक पहले भी बनते थे, लेकिन अब धरती ज्यादा गर्म है। इसलिए ऐसे पैटर्न में फंसी हवा पहले से ज्यादा गर्म और जानलेवा होने लगी हैं। यूरोप दुनिया में सबसे तेजी से गर्म हो रहा है। इसलिए ओमेगा ब्लॉक यहां ज्यादा खतरनाक हो रहे हैं। यूरोप के 20% घरों में ही एसी; इसलिए भी संकट ज्यादा यूरोप में हीटवेव इसलिए भी ज्यादा घातक साबित हो रही है, क्योंकि वहां सिर्फ 20% घरों में ही एसी है। अमेरिका में एसी 90% से भी ज्यादा घरों में है। यूरोप की ज्यादातर इमारतें ठंडे मौसम के हिसाब से बनी हैं। इसलिए तापमान ज्यादा होने पर घर, अस्पताल व नर्सिंग होम तक गर्म हो जाते हैं। बुजुर्गों, बच्चों व बीमार लोगों पर खतरा और बढ़ जाता है।

सीएम डॉ. मोहन यादव ने भोपाल में किया इंडस्ट्रियल पार्क का भूमि-पूजन, बोले- गरीब-अन्नदाता-युवा-नारी का होगा कल्याण

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को राजधानी भोपाल के सतगढ़ी में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क का भूमि-पूजन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश इकलौता राज्य है, जिससे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का विशेष नाता रहा है। आज डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर भोपाल को सतगढ़ी स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क और कन्वेंशन सेंटर की बड़ी सौगात मिली है। आज एक नया इतिहास बन रहा है। यह इंडस्ट्रियल पार्क देश के पहले उद्योग मंत्री डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम से जाना जाएगा। हम जो कहते हैं, करके दिखाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अपनी अलग पहचान बना रहा है। उन्होंने गरीब, अन्नदाता, युवा और नारी कल्याण पर विशेष जोर दिया। राज्य सरकार प्रदेश के हर वर्ग के कल्याण के लिए कार्य कर रही है।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में विकसित हो रहे औद्योगिक क्षेत्र हमारे किसानों के लिए भी समृद्धि का द्वार खोलेंगे। युवाओं को रोजगार मिलेगा। गारमेंट इंडस्ट्री से कपास उत्पादक किसानों को लाभ मिलेगा। हमारी सरकार खेत से कारखाने और उद्योग को बाजार से जोड़ने के लिए कार्य कर रही है। भोपाल प्राकृतिक सुंदरता और झील-तालाबों की नगरी है, लेकिन अब यह स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क भी राजधानी की पहचान बनेगा। अनेक क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

भोपाल औद्योगिक नगरी के रूप में नई पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि यहां से प्रदेश के विकास का नया सूर्योदय हो रहा है। प्रदेश के प्रत्येक अंचल में देश-दुनिया के निवेशक औद्योगिक इकाइयां स्थापित कर रहे हैं। कल ही चंबल के शिवपुरी में ढाई हजार करोड़ लागत से रक्षा क्षेत्र की बड़ी औद्योगिक ईकाई का भूमि-पूजन किया है। इससे पूर्व मुरैना को सोलर सेक्टर की बड़ी सौगात दी है। उन्होंने कहा कि रोजगार आधारित उद्योगों के लिए गुना में 2 हजार करोड़ का सीमेंट प्लांट भी बनाया जा रहा है। शिवपुरी में बनने वाली मिसाइलों की क्षमता 1000 किलोमीटर की होगी, जो पाकिस्तान के किसी भी कोने तक पहुंच सकेगी।

 

हजारों युवाओं को मिलेगा रोजगार-मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विकसित भारत@2047 के संकल्प की पूर्ति में मध्यप्रदेश भी विकास के मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। भोपाल में पहली बार जीआईएस जैसे बड़ा आयोजन संपन्न हुआ, जिसे प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का आशीर्वाद मिला। जीआईएस 2025 में आए 30 लाख करोड़ से अधिक निवेश को देखकर विरोधियों ने दांतों तले अंगुलियां दबा लीं। इस आयोजन में देश-दुनिया के बड़े उद्योगपति और औद्योगिक घराने शामिल हुए।

राज्य सरकार की प्रतिबद्धता के बलबूते आज 30 लाख करोड़ के निवेश में से 10 लाख करोड़ का निवेश धरातल पर आ चुका है। प्रदेश में पहली बार 30 प्रतिशत निवेश धरातल पर आने का नया कीर्तिमान बना है। किसान कल्याण वर्ष में जनवरी से लेकर अब तक निवेशकों के साथ 86 हजार करोड़ के एमओयू साइन हुए हैं। प्रदेशभर में हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा। सतगढ़ी स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क में ही 15 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। रक्षाबंधन से पहले प्रदेश की बहनों को भी हर महीने सौगात मिल रही है। अब तक मुख्यमंत्री लाड़ली बहन योजना में राज्य सरकार 50 हजार करोड़ से अधिक राशि लाड़ली बहनों को दे चुकी है। अब बहनें रोजगार आधारित उद्योगों में काम करेंगी तो उन्हें 5000 रुपए अलग से दिया मिलेगा।

 

सभी के लिए कानून एक जैसा होना चाहिए-मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने 'एक देश, एक विधान, एक निशान, एक प्रधान' की बात कही थी। उनके इस संकल्प को साकार करने के लिए राज्य में अब समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। समाज के हर वर्ग के लिए कानून एक जैसा होना चाहिए। प्रदेश की जनता ने तय कर लिया है कि डंके की चोट पर हर हालत में यूसीसी मध्यप्रदेश में लागू होगा। इसके लिए कमेटी ने सभी धर्म-समुदाय के सुझाव लिए ताकि किसी के साथ भेदभाव न हो। अब मध्यप्रदेश एक समान कानून लागू करने वाला देश के बड़े राज्यों में शामिल प्रदेश बन जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन से हम इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज अमेरिका, जापान, ब्रिटेन, कनाडा और दक्षिण कोरिया जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश हमारे साथ काम कर रहे हैं। इन देशों से 10 हजार करोड़ का विदेशी निवेश भी मध्यप्रदेश को मिला है।

प्रदेश में छोटे-मझोले उद्योगों की देनदारी खत्म कर दी गई है। बिजली, पानी और सड़क हर क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हो रही है। सतगढ़ी स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क से राजाभोज विमानतल की दूरी महज 25 किलोमीटर है। रानी कमलापति स्टेशन भी मात्र 15 किलोमीटर की दूरी पर है। भोपाल का वेस्टर्न बायपास भी यहीं से गुजरेगा। उन्होंने कहा कि सतगढ़ी के 25 एकड़ क्षेत्र में 10 हजार क्षमता वाला एक आधुनिक कन्वेंशन सेंटर भी बनेगा। यह प्रदेश का सबसे बड़ा कन्वेंशन सेंटर होगा। मध्यप्रदेश अपने औद्योगिक विकास और पारदर्शी व्यवस्था के साथ तेजी से आगे बढ़ता जाएगा। सतगढ़ी क्षेत्र औद्योगिक विकास की दिशा में एक मंदिर के समान होगा। सागर ग्रुप के सुधीर अग्रवाल सतगढ़ी में 100 करोड़ का निवेश करेंगे।

 

रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है पार्क-मध्य प्रदेश में औद्योगिक नीति एवं निवेश संवर्धन विभाग (IPIP) तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग (MSME) के प्रमुख सचिव राघवेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि आज का भूमिपूजन केवल एक औद्योगिक परियोजना का शुभारंभ नहीं, बल्कि भोपाल और मध्यप्रदेश के औद्योगिक भविष्य की नई आधारशिला रखने का अवसर है। सतगढ़ी स्थित यह स्मार्ट इंडस्ट्रियल टाउनशिप लगभग 70 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित की जा रही है। पार्क का स्थान रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्ग से लगभग 1.4 किमी की दूरी पर स्थित है तथा रानी कमलापति रेलवे स्टेशन, राजा भोज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और प्रमुख शहरी क्षेत्रों से उत्कृष्ट संपर्क रखता है। इससे भोपाल पारंपरिक उद्योगों के साथ-साथ नई अर्थव्यवस्था के उद्योगों का भी केंद्र बनेगा।

Agniveer Bharti 2026: अग्निवीरों को मिल सकती है बड़ी राहत! 25% नहीं, अब 50% से 75% तक को स्थायी नौकरी देने की तैयारी

Agniveer Bharti 2026: अग्निपथ योजना के तहत भर्ती हुए पहले बैच की चार साल की सेवा अवधि इस साल पूरी होने वाली है। इससे पहले भारतीय सशस्त्र बल अग्निवीरों को स्थायी सेवा में रखने की मौजूदा 25% सीमा बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, नौसेना 75% तक और सेना तथा वायुसेना करीब 50% अग्निवीरों को नियमित सेवा में रखने का प्रस्ताव दे सकती हैं। हालांकि, इस पर अभी कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है।

‘इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक, भारतीय सशस्त्र बलों में अग्निपथ योजना के तहत भर्ती हुए अग्निवीरों के भविष्य को लेकर बड़ा बदलाव जल्द ही संभव है। मौजूदा नियमों के अनुसार, चार साल की सेवा पूरी करने के बाद प्रत्येक बैच के केवल 25% अग्निवीरों को मेरिट और संगठन की जरूरत के आधार पर नियमित सैनिक, नाविक या एयरमैन के रूप में नियुक्त किया जाता है।

हालांकि, मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सरकार अब तीनों सेनाएं इस सीमा को बढ़ाने पर विचार कर रही हैं। यह प्रस्ताव अभी रक्षा मामलों के विभाग (DMA) और तीनों सेनाओं के बीच चर्चा के चरण में है। सरकार या सेना की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

क्या हो सकता है नया प्रस्ताव?

  • भारतीय नौसेना लगभग 75% अग्निवीरों को स्थायी सेवा में रखने का प्रस्ताव दे सकती है।
  • भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना करीब 50% अग्निवीरों को नियमित सेवा में शामिल करने की सिफारिश कर सकती हैं।
  • चार वर्षों की सेवा के दौरान अग्निवीर आधुनिक हथियार प्रणालियों, नई तकनीकों और फील्ड ऑपरेशन का अनुभव हासिल करते हैं।
  • सैन्य योजनाकारों का मानना है कि ऐसे प्रशिक्षित जवानों को अधिक संख्या में बनाए रखने से सेना की परिचालन क्षमता मजबूत हो सकती है।

स्पेशल यूनिटों में ज्यादा मौका

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यदि कुल रिटेंशन सीमा नहीं भी बढ़ती है, तब भी कुछ विशेष सैन्य यूनिट्स जैसे सेना की नई भैरव बटालियन में अनुभवी अग्निवीरों की संख्या अधिक रखी जा सकती है,। जबकि अन्य यूनिटों में चार साल के कार्यकाल वाले अग्निवीरों की तैनाती जारी रहेगी। फिलहाल अग्निपथ योजना के नियमों के अनुसार, प्रत्येक बैच के केवल 25 प्रतिशत अग्निवीरों को मेरिट और संगठन की आवश्यकता के आधार पर नियमित सैनिक, नाविक या एयरमैन के रूप में नियुक्त किया जाता है।

भर्ती भी बढ़ेगी

रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले ट्रेनिंग के दौरान करीब 70,000 अग्निवीरों ने सेना में हिस्सा लिया। अगले भर्ती में लगभग 90,000 पदों पर भर्तियां निकाली जा सकती हैं। इसके अलावा सेना अगले दो वर्षों में करीब 1.8 लाख कर्मियों की कमी को भी अग्निवीर भर्ती के जरिए पूरा करने की योजना बना रही है। अग्निवीरों की स्थायी भर्ती बढ़ाने को लेकर अभी कोई आधिकारिक निर्णय नहीं लिया गया है। यह फिलहाल मीडिया रिपोर्ट के आधार पर विचाराधीन प्रस्ताव है।

सेवा निधि पैकेज क्या है और कितना मिलता है? (Seva Nidhi Package)

4 साल की सेवा पूरी होने के बाद, जो 75% अग्निवीर बाहर आएंगे (या जो परमानेंट भी होंगे), उन्हें एकमुश्त सेवा निधि पैकेज दिया जाता है। यह फंड इस तरह तैयार होता है:-

  • अग्निवीर का कुल 4 साल का योगदान: लगभग ₹5.02 लाख
  • सरकार का बराबर का योगदान: लगभग ₹5.02 लाख
  • कुल जमा राशि (ब्याज सहित): लगभग ₹11.71 लाख

सबसे बड़ा फायदा: यह ₹11.71 लाख का सेवा निधि पैकेज पूरी तरह से टैक्स-फ्री (Income Tax Free) होता है। इस पर कोई आयकर नहीं देना पड़ता।

अतिरिक्त भत्ते (Allowances): इस फिक्स सैलरी के अलावा अग्निवीरों को उनकी पोस्टिंग के हिसाब से रिस्क एंड हार्डशिप भत्ता (Risk & Hardship Allowance), राशन भत्ता, यूनिफॉर्म भत्ता और यात्रा भत्ता (Travel Allowance) भी मिलता है।

परमानेंट होने पर मिलने वाले फायदे (Permanent Salary & Benefits)

चार साल पूरे होने के बाद, बैच के 25% अग्निवीरों (जिसके बढ़ने की संभावना पर सेना विचार कर रही है) को भारतीय सेना के रेगुलर कैडर में शामिल किया जाएगा। परमानेंट होने के बाद उन्हें निम्नलिखित लाभ मिलेंगे:-

नियमित सैलरी और रैंक: परमानेंट होते ही वे भारतीय सेना के फुल-टाइम सैनिक बन जाएंगे। उनका पे-स्केल (Pay Scale) रेगुलर सैनिकों जैसा हो जाएगा, जिसमें बेसिक पे, डीए (DA), एचआरए (HRA) और अन्य सभी मिलिट्री अलाउंस शामिल होंगे।

पेंशन का अधिकार (Pension Benefits): 4 साल की कॉन्ट्रैक्ट अवधि के दौरान पेंशन नहीं मिलती। लेकिन परमानेंट कैडर में चुने जाने के बाद, जब वे अपनी अगली 15 साल की न्यूनतम सेवा पूरी करके रिटायर होंगे, तो वे पूरी लाइफटाइम पेंशन और ग्रेच्युटी (Gratuity) के हकदार होंगे।

मेडिकल और कैंटीन की सुविधा: परमानेंट होने के बाद उन्हें और उनके परिवार को ECHS (भूतपूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना) के तहत आजीवन मुफ्त इलाज और CSD कैंटीन की पूरी सुविधाएं मिलेंगी।

प्रमोशन और सर्विस: वे सेना में नियमित रूप से प्रमोशन (जैसे लांस नायक, नायक, हवलदार, जेसीओ) पा सकेंगे और उनके पास आगे अधिकारी (Officer) बनने के लिए विभागीय परीक्षाएं देने का मौका भी होगा।

अन्य लाभ (Other Security Benefits)

4 साल की सर्विस के दौरान सभी अग्निवीरों को ये सुरक्षा कवर भी दिए जाते हैं:-

लाइफ इंश्योरेंस: ₹48 लाख का गैर-अंशदायी (Non-contributory) जीवन बीमा कवर।

शहादत पर मुआवजा: ड्यूटी के दौरान शहीद होने पर परिवार को ₹44 लाख की अनुग्रह राशि (Ex-gratia), बचे हुए कार्यकाल की पूरी सैलरी और सेवा निधि पैकेज समेत कुल ₹1 करोड़ से अधिक की आर्थिक मदद मिलती है।

दिव्यांगता मुआवजा (Disability): सेवा के दौरान चोट लगने या दिव्यांग होने पर ₹44 लाख (100% दिव्यांगता पर), ₹25 लाख (75% पर) और ₹15 लाख (50% दिव्यांगता पर) एकमुश्त दिए जाते हैं।

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FIFA World Cup 2026: क्वार्टर फाइनल की 4 टीमें हुई तय, जानें बाकी मैचों का शेड्यूल और लाइव स्ट्रीमिंग डिटेल्स

FIFA World Cup 2026: फीफा वर्ल्ड कप 2026 अब अपने चौथे सप्ताह में पहुंच चुका है और खिताब की जंग पहले से कहीं ज्यादा रोमांचक हो गई है। टूर्नामेंट में अबतक कई रोमांचक मुकाबले देखने को मिले हैं। फीफा वर्ल्ड कप की शुरुआत 48 टीमों के साथ हुई थी, लेकिन अब आधे से भी कम टीमें ट्रॉफी जीतने की दौड़ में बची हैं। नॉकआउट मुकाबले तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और क्वार्टर फाइनल की शुरुआत के साथ आखिरी आठ में जगह बनाने वाली चार टीमों के नाम भी तय हो चुके हैं।

क्वार्टर फाइनल में पहुंचने वाली टीमों का सफर एक जैसा नहीं रहा। कुछ टीमों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए आसानी से जीत हासिल की, जबकि कुछ को आखिरी समय तक कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा। लेकिन, मुश्किल हालात के बावजूद उन्होंने मुकाबला अपने नाम किया और अगले दौर में जगह पक्की कर ली।

अबतक कौन-कौन सी टीमें पहुंची क्वार्टर फाइनल में

मोरक्को

फ्रांस

नॉर्वे

इंग्लैंड

राउंड ऑफ 16 के बाकी मुकाबले

राउंड ऑफ 16 के बाकी मुकाबले भी बेहद रोमांचक होने वाले हैं। 6 जुलाई को दोपहर 2 बजे पुर्तगाल की भिड़ंत स्पेन से होगी, जबकि उसी दिन अमेरिका का सामना बेल्जियम से होगा। इसके बाद 7 जुलाई को स्विट्जरलैंड और कोलंबिया आमने-सामने होंगे। वहीं, एक और बड़े मुकाबले में अर्जेंटीना की टीम मिस्र के खिलाफ मैदान में उतरेगी। इन मैचों के बाद क्वार्टर फाइनल की सभी टीमें तय हो जाएंगी।

किस दिन होगा किसका मुकाबला

क्वार्टर फाइनल का आगाज भारत में 10 जुलाई से होगा। पहले मुकाबले में फ्रांस और मोरक्को की टीमें आमने-सामने होंगी। ये मैच अमेरिका के बोस्टन स्टेडियम में खेला जाएगा। दोनों के बीच मुकाबले की शुरूआत सुबर 1:30 पर होगी। इसके बाद 11 जुलाई को दूसरा क्वार्टर फाइनल लॉस एंजिल्स स्टेडियम में खेला जाएगा, जिसमें पुर्तगाल और स्पेन के विजेता का मुकाबला अमेरिका और बेल्जियम के विजेता से होगा।

तीसरा क्वार्टर फाइनल 12 जुलाई को मियामी स्टेडियम में खेला जाएगा, जहां नॉर्वे और इंग्लैंड की टीमें भिड़ेंगी। ये मुकाबला भारतीय समयानुसार सुबह 2 बजे से शुरू होगा। वहीं, चौथा और आखिरी क्वार्टर फाइनल 12 जुलाई को कैनसस सिटी स्टेडियम में होगा। इस मुकाबले में अर्जेंटीना और मिस्र के मैच के विजेता का सामना स्विट्जरलैंड और कोलंबिया के मैच के विजेता से होगा। यह मैच भारतीय समयानुसार सुबह 6:30 बजे से शुरू होगा।

भारत में कहां पर देखें मुकाबला

फीफा वर्ल्ड कप 2026 के मुकाबलों का प्रसारण भारत में जी एंटरटेनमेंट के नए स्पोर्ट्स नेटवर्क Unite8 स्पोर्ट्स पर किया जाएगा। दर्शक मैचों का आनंद Unite8 स्पोर्ट्स 1 (हिंदी कमेंट्री), Unite8 स्पोर्ट्स 1 HD (हिंदी कमेंट्री), Unite8 स्पोर्ट्स 2 (इंग्लिश कमेंट्री), और Unite8 स्पोर्ट्स 2 HD (इंग्लिश कमेंट्री) पर मुकाबले देखने को मिल सकते हैं। वहीं इनकी लाइव स्ट्रीमिंग जी5 ऐप और जी5 की आधिकारिक वेबसाइट पर देखी जा सकेगी।

ISRO की सैटेलाइट तस्वीरों में दिखा मानसून का रौद्र रूप! इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

ISRO Satellite Images: देश के कई हिस्सों में अभी लोग बारिश का इंतजार कर रहे हैं। इस साल मनसून के देरी से आने की वजह से लोगों को गर्मी से अभी तक राहत नहीं मिल पाई है। वहीं भीषण गर्मी से परेशान और फसलों के लिए बारिश की राह देख रहे किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (ISRO) की सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून इस समय अपने सबसे मजबूत दौर में है। नई तस्वीरों में अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के ऊपर घने बादलों का बड़ा क्षेत्र दिखाई दे रहा है। इन बादलों की वजह से महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में कई जगह तेज बारिश हो रही है।

सामने आई ISRO की ये तस्वीरें 

इसरो के INSAT-3DR उपग्रह से मिली तस्वीरों के अनुसार, बादलों का एक बड़ा समूह पूर्वी-मध्य अरब सागर से लेकर कोंकण तट तक फैला हुआ है। वहीं, दूसरा बड़ा बादल तंत्र उत्तरी बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना हुआ है, जिसका असर पश्चिम बंगाल के गंगा के मैदानी इलाकों, बांग्लादेश और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में भी देखा जा रहा है। सैटेलाइट की थर्मल इन्फ्रारेड तस्वीरों में दोनों बादल तंत्रों के ऊपरी हिस्से चमकीले सफेद दिखाई दे रहे हैं। यह इस बात का संकेत है कि इन इलाकों में तेज़ बादल बनने की प्रक्रिया चल रही है और गरज-चमक के साथ भारी बारिश हो सकती है। कई जगह बहुत ज़्यादा बारिश होने की भी संभावना है।

मौसम विभाग ने दी ये जानकारी

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक मानसून पूरी तरह सक्रिय रहेगा। इस दौरान महाराष्ट्र, कोंकण, गोवा, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने का अनुमान है। भारत के पश्चिमी हिस्से में अरब सागर के ऊपर बना मौसम तंत्र कोंकण तट के पास और अधिक मजबूत हो गया है। समुद्र का गर्म पानी और मानसून की तेज़ हवाएं इसे लगातार ताकत दे रही हैं। पिछले कुछ दिनों से तटीय इलाकों में कई जगह लगातार तेज बारिश हो रही है। इससे निचले क्षेत्रों में पानी भरने का खतरा बना हुआ है। कई सड़कों पर जलभराव होने और बारिश के कारण कम दिखाई देने से लोगों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

पूर्वी भारत में भी मानसून पूरी तरह सक्रिय है। बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी और ऊपरी स्तर की हवाओं के कारण बादल तेजी से ऊपर उठ रहे हैं और बड़े तूफानी बादलों का रूप ले रहे हैं। इसी वजह से पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार और उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ इलाकों में लगातार भारी से बहुत भारी बारिश हो रही है। कई जगह तेज़ बारिश के कारण जनजीवन भी प्रभावित हुआ है।

शुरुआत में मानसून की रफ्तार धीमी थी, लेकिन अब इसके फिर से सक्रिय होने से बारिश की कमी काफी हद तक पूरी हो गई है। हालांकि, लगातार हो रही तेज़ बारिश के कारण शहरों में जलभराव, पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन, सड़कें बंद होने और लोगों के आने-जाने में दिक्कतें भी बढ़ गई हैं। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में बारिश और तेज़ हो सकती है। ऐसे में जिन इलाकों में बाढ़ या भूस्खलन का खतरा है, वहां रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने और मौसम विभाग की सलाह का पालन करने की जरूरत है।

Snake: ये सांप नहीं, चलते-फिरते इंद्रधनुष हैं! रोशनी पड़ते ही बदल जाता है इनका पूरा रंग

सांपों को आमतौर पर डर और खतरे से जोड़ा जाता है, लेकिन प्रकृति ने कुछ ऐसे दुर्लभ और बेहद खूबसूरत सांप भी बनाए हैं जो अपनी चमकदार त्वचा से लोगों को हैरान कर देते हैं। ये सांप रोशनी पड़ते ही इंद्रधनुषी रंगों में चमकने लगते हैं, जैसे किसी ने उन पर रंगों की परत बिखेर दी हो। यह खूबसूरती किसी जादू का नहीं बल्कि उनकी त्वचा की माइक्रो-लेवल संरचना और प्रकाश के परावर्तन का नतीजा होती है। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में पाए जाने वाले ये इरिडेसेंट स्नेक्स विज्ञान और प्रकृति का अनोखा मेल पेश करते हैं।

जंगलों, नदियों और यहां तक कि जमीन के नीचे रहने वाले ये जीव अपने अनोखे रंगों और पैटर्न की वजह से बेहद खास माने जाते हैं। आमतौर पर नजरअंदाज किए जाने वाले ये सांप इस बात का सबूत हैं कि प्रकृति सिर्फ डरावनी नहीं, बल्कि उतनी ही खूबसूरत और रहस्यमयी भी हो सकती है।

रेनबो बोआ

मध्य और दक्षिण अमेरिका में पाया जाने वाला यह सांप अपनी शानदार इंद्रधनुषी चमक के लिए जाना जाता है। इसकी स्किन पर मौजूद सूक्ष्म संरचनाएं रोशनी को अलग-अलग एंगल से तोड़ती हैं, जिससे नीला, हरा, सुनहरा और बैंगनी रंग झलकता है।

सनबीम स्नेक

दक्षिण-पूर्व एशिया में मिलने वाला यह सांप सामान्य रूप से गहरे भूरे रंग का होता है, लेकिन धूप में इसकी त्वचा अचानक चमकदार रंगों में बदल जाती है। इसकी खास बात यह है कि त्वचा के नीचे मौजूद पिगमेंट इसकी चमक को और बढ़ा देता है।

व्हाइट-लिप्ड पाइथन

न्यू गिनी का यह पाइथन अपने सफेद होंठों की वजह से पहचाना जाता है, लेकिन इसकी असली खूबसूरती इसकी चमकदार स्किन में छिपी है। इसकी त्वचा में मौजूद माइक्रो-लेयर्स रोशनी को परावर्तित करके इसे चमकदार बना देते हैं।

बोएलेंस पाइथन

यह सांप अपने जीवन में रंग बदलता है—छोटे में लाल और सफेद धारियों वाला, जबकि बड़े होने पर यह काला और सुनहरा दिखने लगता है। इसकी चमकदार स्किन इसे “ऑयल-स्लिक” जैसा इफेक्ट देती है।

इरिडेसेंट शील्डटेल

भारत के पश्चिमी घाटों में पाया जाने वाला यह सांप बहुत कम दिखाई देता है। इसकी त्वचा पर मौजूद चमकदार परतें इसे जमीन के अंदर भी हल्की इंद्रधनुषी चमक देती हैं, जिससे यह बेहद खास बन जाता है।

ईस्टर्न इंडिगो स्नेक

उत्तर अमेरिका में पाया जाने वाला यह सांप काले रंग का होता है, लेकिन सूरज की रोशनी पड़ते ही इसमें नीले रंग की चमक दिखाई देती है। यह अपने पारिस्थितिकी तंत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

क्यूबन बोआ: सादगी में छिपी हल्की चमक

क्यूबा का यह सबसे बड़ा सांप अपने भूरे और तन रंग के कारण आसानी से छिप जाता है। इसकी चमक बहुत तेज नहीं होती, लेकिन सही रोशनी में यह हल्की कांच जैसी चमक दिखाता है, जो इसे रहस्यमय बनाती है।

पाकिस्तानी फेयरनेस क्रीम लगाने से 18 महिलाओं की किडनी पर संकट! भारत में बिक्री को लेकर उठे बड़े सवाल

ईशान किशन ने बताया इंग्लैंड में जीत का स्वाद चखना है तो बल्लेबाजों को करना होगा यह (Video)

विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन का मानना ​​है कि भारत को इंग्लैंड की परिस्थितियों में बेहतर तरीके से ढलना होगा और बीच के ओवरों में धीमी गति से बल्लेबाजी करने की समस्या से निजात पाना होगा जिसके कारण उसे दूसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच में हार का सामना करना पड़ा।भारत अपने पिछले चार टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में जीत हासिल नहीं कर पाया है।

आयरलैंड के खिलाफ दोनों मैच हारने के बाद इंग्लैंड के खिलाफ श्रृंखला का पहला मैच बारिश के कारण रद्द कर दिया गया था जबकि दूसरे मैच में वह चार विकेट से हार गया था। इस मैच में भारतीय टीम बीच के ओवरों में अपेक्षित तेजी से रन नहीं बना पाई थी।

किशन ने पत्रकारों से कहा, ‘‘बिल्कुल उनके पास गेंदबाजी के सबसे अच्छे विकल्प होंगे। उन्हें परिस्थितियों की बेहतर समझ होगी। लेकिन हम भी सुधार की कोशिश कर रहे हैं।’’उन्होंने कहा, ‘‘हम सभी यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि उनके खिलाड़ी हमारे खिलाफ क्या कर रहे हैं क्योंकि उनके पास ज्यादा जानकारी है। हमें यह समझना होगा कि हम एक टीम के रूप में 20 अतिरिक्त रन कहां बना सकते हैं। हम इस पर बात करेंगे और आगे इससे बेहतर प्रदर्शन करेंगे।’’

किशन ने कहा, ‘‘मैच शुरू से ही हमारी पकड़ में था। मैच हमारे हाथ में था लेकिन दो फ्री हिट मिलने से इंग्लैंड के बल्लेबाजों पर दबाव कम हुआ। उन्होंने इसका फायदा उठाया।’’उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि हमने काफी अच्छी गेंदबाजी की। हमारी अपनी रणनीति थीं, लेकिन साथ ही, हमें बेथेल को इसका श्रेय देना होगा क्योंकि वह लंबे समय तक टिके रहे और उन्होंने मौके का पूरा फायदा उठाया।’’

किशन ने स्वीकार किया कि लगातार हार से मानसिकता में बहुत बड़ा फर्क पड़ता है, लेकिन उन्होंने कहा कि खिलाड़ी इतने परिपक्व हैं कि वे एक टीम के रूप में हार को समझ सकते हैं और उससे उबर सकते हैं।उन्होंने कहा, ‘‘भले ही हम जीत नहीं पाए लेकिन मुझे लगता है कि हम अच्छा क्रिकेट खेल रहे हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हम यह समझें कि हम कहां सुधार कर सकते हैं। हम सब सुधार करने की कोशिश कर रहे हैं।’’

किशन ने कहा, ‘‘हारने से भी सोच पर प्रभाव पड़ता है लेकिन हम सभी इतने परिपक्व हैं जो यह समझते हैं कि क्या हो रहा है और एक टीम के रूप में हम कहां सुधार कर सकते हैं।’’

Satluj Controversy: कौन हैं जसवंत सिंह खालरा? भारत में ‘सतलुज’ को किया गया बैन, जानें अब तक फिल्म मामले में क्या-क्या हुआ

Satluj Controversy: इस शुक्रवार को Zee5 पर आने के बाद, हनी त्रेहान की काफी चर्चा में रही है। उनकी फिल्म ‘सतलुज’ को रविवार को बिना किसी इंफॉर्मेशन के प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। इस फिल्म में दिलजीत दोसांझ ने दिवंगत मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा की भूमिका निभाई है।

फिल्म को बनने में चार साल से ज्यादा का समय लगा, जिसमें सेंसर बोर्ड के साथ तीन साल तक लड़ाई की और फिल्म के नाम में दो बार बदलाव शामिल हैं। अब, देर सवेर से रिलीज होने के कुछ ही दिनों बाद, यह फिल्म फिर से दर्शकों तक पहुंचने के लिए संघर्ष कर रही है। लेकिन यह किस बारे में है और इसे लेकर इतना विवाद क्यों है? आइए जानते हैं…

‘पंजाब 95’ नाम क्यों दिया गया था?

‘सतलुज’ एक बायोपिक ड्रामा है, जिसका नाम पहले ‘पंजाब 95’ था। यह फिल्म जसवंत सिंह खालरा की जिदगी से लेकर मौत तक की कहानी बताती है। खालरा एक बैंक क्लर्क थे, जो 90 के दशक के बीच पंजाब में मानवाधिकारों के लिए लड़ने वाले एक बड़े कार्यकर्ता बन गए थे। उन्होंने 1984 से 1994 के बीच राज्य में 25,000 लोगों के अंतिम संस्कार की जांच की थी। इस फिल्म में दिलजीत दोसांझ ने खालरा का किरदार निभाया है और उनके साथ गीतिका विद्या ओहलन, अर्जुन रामपाल, सुविंदर विक्की और कंवलजीत सिंह भी हैं। यह फिल्म सच्ची घटनाओं पर आधारित है और इसमें कुछ असली किरदारों को काल्पनिक रूप दिया गया है। इसके जरिए 80 और 90 के दशक में पंजाब में उग्रवाद के खिलाफ पंजाब पुलिस की लड़ाई का काला चेहरा दिखाया गया है।

फिल्म को लेकर इतना विवाद क्यों है?

2022 में, यह फिल्म ‘घल्लूघारा’ नाम से शुरू की गई थी। यह शब्द सिखों के ऐतिहासिक नरसंहार के लिए इस्तेमाल किया जाता है। उसी साल नवंबर में, जब इसे सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफ़िकेशन (CBFC) के पास भेजा गया, तो बोर्ड ने इसका नाम बदलकर ‘पंजाब 95’ करने और इसमें 21 कट लगाने का सुझाव दिया। चिंता यह थी कि फिल्म में प्रशासन को गलत तरीके से दिखाया गया है। फिल्म बनाने वालों ने बॉम्बे हाई कोर्ट में इन कट के खिलाफ अपील की, जिसने मामले को रिविजन कमेटी के पास भेज दिया। कमेटी ने 120 कट लगाने की भारी-भरकम मांग की। आखिरकार, लगभग चार साल की कानूनी लड़ाई के बाद, यह फिल्म इस शुक्रवार को Zee5 पर ‘सतलुज’ नाम से चुपचाप रिलीज हुई। दिलजीत दोसांझ ने इंस्टाग्राम लाइव पर कहा कि फिल्म की टीम ने प्रमोशन न करने का फैसला किया, क्योंकि उन्हें डर था कि अगर वे इसका प्रमोशन या प्रचार करते, तो रिलीज में देरी हो सकती थी।

जसवंत सिंह खालरा कौन थे?

‘सतलुज’ फिल्म का मुख्य विषय पंजाब पुलिस पर खालरा के वे आरोप हैं, जिनमें कहा गया था कि पुलिसकर्मियों ने हजारों लोगों की गैर-न्यायिक हत्याएं कीं। खालरा ने इसके लिए तत्कालीन पंजाब DGP केपीएस गिल को जिम्मेदार ठहराया था और उन्हें लाइव बहस की चुनौती भी दी। उन्होंने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उठाया और कनाडा के हाउस ऑफ कॉमन्स में भी इस पर बात की थी। फिल्म में यह सब दिखाया गया है, हालांकि इसमें केपीएस गिल का नाम बदलकर IPS बिट्टा कर दिया गया है और पंजाब के मुख्यमंत्री बेअंत सिंह (फिल्म में अनंत सिंह) की हत्या की घटना को भी थोड़ा काल्पनिक रूप दिया गया है।

खालरा का 1995 में अपहरण कर लिया गया था और आरोप है कि उसी साल उनकी हत्या कर दी गई। उनकी लाश कभी नहीं मिली। 2005 में, पंजाब पुलिस के चार कर्मचारियों को उनके अपहरण और हत्या का दोषी ठहराया गया और सात साल की जेल की सजा सुनाई गई। दो साल बाद, पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने उनकी सजा बढ़ाकर उम्रकैद कर दी। फिल्म में पंजाब पुलिस के कर्मचारियों द्वारा खालरा के अपहरण की पूरी कहानी दिखाई गई है और यह भी दिखाया गया है कि हिरासत में उन्हें कैसे प्रताड़ित किया गया और उनकी हत्या कर दी गई।

फिल्म में उनके लापता होने और हत्या की जांच जिस तरह से आगे बढ़ी, उसमें भी असल घटनाओं से समानताएं हैं। इसमें SSP सुग्गा (सुविंदर विक्की) की मौत को आत्महत्या जैसा दिखाया गया है, ठीक वैसे ही जैसे 1997 में इस मामले के मुख्य आरोपी SSP अजीत सिंह संधू की मौत हुई थी। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने दावा किया था कि संधू की हत्या की गई थी और उनकी मौत को आत्महत्या का रूप दिया गया था।

पाकिस्तानी फेयरनेस क्रीम लगाने से 18 महिलाओं की किडनी पर संकट! भारत में बिक्री को लेकर उठे बड़े सवाल

बाजार में ऐसी कई स्किन-व्हाइटनिंग क्रीम मौजूद हैं जो कुछ ही दिनों में गोरा और बेदाग रंग देने का दावा करती हैं। आकर्षक विज्ञापनों और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के कारण बड़ी संख्या में लोग इन प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल भी कर रहे हैं। लेकिन हर चमकदार पैकेज के पीछे सुरक्षित उत्पाद हो, यह जरूरी नहीं है। हाल ही में एक मामले ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बिना जांचे-परखे ब्यूटी प्रोडक्ट्स पर आंख मूंदकर भरोसा करना सही है। इस घटना के बाद स्किन-केयर प्रोडक्ट्स की गुणवत्ता, उनमें इस्तेमाल होने वाले रसायनों और ऑनलाइन बिकने वाले कॉस्मेटिक सामान की निगरानी को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि त्वचा की देखभाल के लिए हमेशा प्रमाणित और भरोसेमंद उत्पादों का ही चुनाव करना चाहिए, क्योंकि सुंदर दिखने की जल्दबाजी कभी-कभी सेहत पर भारी पड़ सकती है।

तीन ब्यूटी प्रोडक्ट्स पर लगा तत्काल बैन

महाराष्ट्र FDA ने जांच के बाद तीन स्किन-केयर प्रोडक्ट्स की बिक्री, वितरण और इस्तेमाल पर तुरंत रोक लगा दी। इनमें Goree Beauty Cream, Face Fresh Gold (Beauty Cream और Beauty Serum) और Golden Star Beauty Cream शामिल हैं। जांच में इन्हें Not of Standard Quality (NSQ) घोषित किया गया।

लैब टेस्ट में मिला जहरीला सच

एफडीए की लैब जांच में इन क्रीमों में मरकरी (पारा) और लेड (सीसा) की मात्रा तय मानकों से कई गुना ज्यादा पाई गई। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे तत्व लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर शरीर के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं।

चेंबूर से खुली पूरे मामले की कड़ी

इस कार्रवाई से कुछ दिन पहले मुंबई के चेंबूर में एक दुकानदार के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। आरोप है कि उसने आयात प्रतिबंध के बावजूद कथित तौर पर पाकिस्तान में बनी Goree Beauty Cream का स्टॉक रखा और उसकी बिक्री की।

18 मरीज… और एक जैसी आदत

डॉक्टरों ने जब नागपुर में दो साल के दौरान किडनी की बीमारी से जूझ रही 18 महिलाओं के मामलों का अध्ययन किया तो एक समानता सामने आई। सभी महिलाएं लंबे समय से एक ही स्किन-व्हाइटनिंग क्रीम का इस्तेमाल कर रही थीं। इसी के बाद मामले की गहराई से जांच शुरू हुई।

752 गुना ज्यादा मरकरी होने का दावा

हेल्थ कंटेंट क्रिएटर चिराग बरजात्या ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि महाराष्ट्र FDA की रिपोर्ट में Goree Beauty Cream में मरकरी की मात्रा कानूनी सीमा से 752 गुना अधिक पाई गई। उनका कहना है कि यही कारण गंभीर स्वास्थ्य जोखिम की वजह बन सकता है।

कैसे नुकसान पहुंचाती है मरकरी?

विशेषज्ञों के अनुसार, मरकरी त्वचा में बनने वाले मेलानिन को कम कर देती है, जिससे रंग हल्का दिखाई देता है। लेकिन यह असली निखार नहीं बल्कि रासायनिक असर होता है। धीरे-धीरे यह धातु त्वचा के जरिए शरीर में पहुंचकर खासकर किडनी में जमा होने लगती है और गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा देती है।

ऑनलाइन बिक्री पर उठे बड़े सवाल

रिपोर्ट्स के मुताबिक यह क्रीम कई इंस्टाग्राम पेजों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म Meesho पर भी उपलब्ध थी। इसके बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने सवाल उठाए कि प्रतिबंध और आयात नियमों के बावजूद ऐसा प्रोडक्ट भारतीय बाजार तक कैसे पहुंचा।

लोगों की बढ़ी चिंता, मीशो ने क्या कहा?

सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने लोगों से बिना जांचे-परखे स्किन-व्हाइटनिंग प्रोडक्ट्स से दूर रहने की अपील की। वहीं Meesho ने कहा कि मामले की जानकारी मिलने के बाद उसने इसकी जांच शुरू कर दी है और आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

विशेषज्ञों की सलाह

अगर आप या आपके परिवार का कोई सदस्य ऐसी स्किन-व्हाइटनिंग क्रीम इस्तेमाल करता है, तो उसकी गुणवत्ता और सामग्री की जांच जरूर करें। बिना लेबल वाले या संदिग्ध स्रोत से खरीदे गए कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स से बचना ही सबसे सुरक्षित विकल्प माना जा रहा है।

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