VIDEO: ‘आज शायद यमराज की छुट्टी थी’ खाई के किनारे चट्टान से टकराई बाइक, देखें रोंगटे खड़े कर देने वाला ये वीडियो

बारिश के मौसम में सड़कें काफी फिसलन भरी हो जाती हैं, जिसकी वजह से हादसे होने का खतरा बढ़ जाता है। इसी वजह से प्रशासन लगातार लोगों से सावधानी के साथ और धीमी रफ्तार में वाहन चलाने की अपील करता है। वहीं इसी बीच सोशल मीडिया पर पश्चिम बंगाल का एक हैरान कर देने वाला वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में बारिश के दौरान तेज रफ्तार में बाइक चला रहा एक युवक मोड़ पर अपना बैलेंस खो देता है और सड़क किनारे चट्टान से टकरा जाता है। गनीमत रही कि सड़क के पास गहरी खाई होने के बावजूद उसकी जान बच गई। इस घटना के बाद लोग बारिश में सावधानी से वाहन चलाने की सलाह दे रहे हैं।

वायरल हो रहा वीडियो

ये घटना पश्चिम बंगाल के कुर्सियांग व्यू पॉइंट की बताई है। ये जगह सिलीगुड़ी और दार्जिलिंग के बीच स्थित एक लोकप्रिय टूरिस्ट प्लेस है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में एक बाइक सवार रेनकोट पहनकर बारिश से भीगी सड़क पर तेज रफ्तार में बाइक चलाता नजर आता है। इसी दौरान वह चलते-चलते पीछे की ओर भी देखता है, जिससे उसका ध्यान सड़क से हट जाता है। कुछ ही देर बाद बाइक सवार सड़क के किनारे खाई की तरफ बढ़ने लगता है। ये देखकर वीडियो बना रहा व्यक्ति उसे जोर से आवाज देकर सावधान करता है।

काफी तेज थी चक्कर

इसके बाद मोड़ पर बाइक का बैलैंस बिगड़ जाता है और वह सड़क किनारे मौजूद एक चट्टान से जाकर टकरा जाती है। सड़क के ठीक पास गहरी खाई होने की वजह से ये हादसा बेहद खतरनाक साबित हो सकता था। अगर समय रहते बाइक नहीं रुकती तो बड़ा हादसा हो सकता था। टक्कर इतनी तेज थी कि बाइक सवार का एक जूता दूर जाकर गिर गया। इसके बाद उसने किसी तरह बाइक को संभालने की कोशिश की, लेकिन बैलैंस बिगड़ने से वह सड़क के दूसरी ओर घास पर गिर पड़ा और उसकी मोटरसाइकिल भी वहीं गिर गई।

 

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उसी समय पीछे आ रहा एक अन्य बाइक सवार तुरंत उसकी मदद के लिए पहुंच गया। फिलहाल इस हादसे में बाइक सवार को कितनी चोट आई, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। वीडियो पर लिखा था, “आज शायद यमराज का दिन छुट्टी का था।” वहीं पोस्ट के कैप्शन में राइडर ने लिखा, “सेफ ड्राइव सेव लाइफ।”

यूजर ने किया कमेंट

इस वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने अलग-अलग तरह की रिएक्शन दे रहे हैं। कई यूजर्स ने बारिश के मौसम में सावधानी से वाहन चलाने की सलाह दी, जबकि कुछ ने इस घटना पर मजाकिया अंदाज में भी कमेंट किए। एक यूजर ने लिखा, “गलती पूरी तरह राइडर की थी। आगे मोड़ होने के बावजूद वह दूसरी तरफ देख रहा था। भाई, जिम्मेदारी से बाइक चलाओ।” दूसरे यूजर ने कहा, “तुम्हारे दोस्त ने तुम्हें दूसरी जिंदगी दे दी।” वहीं एक यूजर ने मजाक करते हुए लिखा, “यमराज का मिस्ड कॉल था, लेकिन रिसीव नहीं हुआ।”

बारिश में कुछ टेस्टी खाने का है मन? ट्राई करें ये 5 मानसून स्पेशल रेसिपीज

The image caption features a message about monsoon special snack recipes, accompanied by a photo of plates arranged with Palak Patta Chaat, Dal Vada, Samosas, and Potato Tacos

Rainy Day Snacks: रिमझिम फुहारें और ठंडी हवाएं… मानसून का मौसम आते ही दिल कुछ गरमा-गरम और चटपटा खाने के लिए मचलने लगता है। इस मौसम में बालकनी में बैठकर बारिश को निहारते हुए अगर हाथ में स्नैक्स की प्लेट हो, तो मजा दोगुना हो जाता है। अगर आप भी इस बार पारंपरिक पकौड़ों से हटकर कुछ नया और बेहद लाजवाब ट्राई करना चाहते हैं, तो यहाँ 5 मानसून स्पेशल स्नैक्स रेसिपीज दी गई हैं:ALSO READ: बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

 

1. चटपटा 'पालक पत्ता चाट' 

बारिश में चाट खाने का अपना ही मजा है। यह स्नैक दिखने में जितना फैंसी है, बनाने में उतना ही आसान।

 

कैसे बनाएं: पालक के बड़े और साफ पत्तों को बेसन, अजवाइन और नमक के गाढ़े घोल में डुबोकर एकदम क्रिस्पी होने तक तल लें। अब इन कुरकुरे पत्तों को एक प्लेट में सजाएं। ऊपर से फेंटा हुआ मीठा दही, हरी चटनी, इमली की खट्टी-मीठी चटनी, चाट मसाला और नायलॉन सेव डालकर तुरंत सर्व करें।

 

2. गरमा-गरम 'दाल वड़ा' 

दक्षिण भारत का यह मशहूर स्नैक मानसून में कमाल का लगता है। यह ऊपर से बेहद कुरकुरा और अंदर से सॉफ्ट होता है।

 

कैसे तैयार करें: चना दाल को 3-4 घंटे भिगोकर बिना पानी के दरदरा पीस लें। अब इसमें बारीक कटा प्याज, हरी मिर्च, ढेर सारा कढ़ी पत्ता, अदरक और हींग मिलाएं। इस मिश्रण की छोटी-छोटी टिक्कियां बनाकर गरम तेल में सुनहरा होने तक डीप फ्राई करें। इसे नारियल की चटनी के साथ परोसें। चाय के साथ गरमा-गरम 'दाल वड़ा' का आनंद लें।

 

3. अचारी पनीर टिक्का समोसा

आलू समोसा तो हमेशा खाते हैं, इस बार बारिश में कुछ रॉयल ट्राई करें। समोसे के अंदर पनीर टिक्का की स्टफिंग हर बाइट में मजा ला देगी।

 

कैसे तैयार करें: पनीर के छोटे टुकड़ों को दही, तंदूरी मसाला, कसूरी मेथी और थोड़े से अचार के मसाले के साथ मैरीनेट करें और तवे पर हल्का सा टॉस कर लें। अब समोसे की पट्टी (शीट्स) में इस अचारी पनीर को भरकर समोसे का आकार दें और फ्राई करें। पुदीने की तीखी चटनी के साथ यह लाजवाब लगता है।

 

4. क्रिस्पी पोटैटो टाकोस

अगर बच्चों और बड़ों दोनों को खुश करना है, तो यह इंडो-मैक्सिकन फ्यूजन स्नैक बेस्ट है।

 

कैसे बनाएं: उबले हुए आलुओं में चाट मसाला, चिली फ्लेक्स, प्याज और हरा धनिया मिलाकर एक स्टफिंग तैयार करें। अब बची हुई रोटियों या मैदा की शीट पर इस स्टफिंग को फैलाएं, ऊपर से ढेर सारा चीज डालें और इसे आधे चांद के आकार में मोड़ लें। तवे पर मक्खन या तेल लगाकर इसे दोनों तरफ से एकदम क्रिस्पी होने तक सेकें।

 

5. मॉनसून स्पेशल 'चीज़ कॉर्न बॉल्स' 

बारिश और भुट्टे का रिश्ता बहुत पुराना है। इस बार भुट्टे को एक चीजी और क्रिस्पी ट्विस्ट दें।

 

कैसे तैयार करें: उबले हुए कॉर्न को थोड़ा दरदरा क्रश कर लें। इसमें उबला आलू, कद्दूकस किया हुआ मोजेरेला चीज, काली मिर्च और नमक मिलाएं। इसके छोटे-छोटे बॉल्स बनाएं, उन्हें कॉर्नफ्लोर के घोल में डुबोएं और फिर ब्रेड क्रम्ब्स में लपेटकर कुरकुरा होने तक तल लें।

 

स्मार्ट कुकिंग टिप: बारिश के मौसम में स्नैक्स को और भी क्रिस्पी बनाने के लिए बेसन या मैदे के घोल में 1 से 2 चम्मच चावल का आटा या गरम तेल जरूर मिलाएं। इससे स्नैक्स लंबे समय तक कुरकुरे रहते हैं।

 

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: Monsoon Special Recipes: मानसून की 5 बेहतरीन रेसिपीज, देखते ही मुंह में आ जाएगा पानी

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

The image depicts the problems that occur when blood sugar levels drop

Signs of Low Blood Sugar: शरीर में शुगर यानी ग्लूकोज का स्तर कम होना एक ऐसी स्थिति है जिसे मेडिकल भाषा में हाइपोग्लाइसीमिया (Hypoglycemia) कहा जाता है। हमारे दिमाग और शरीर को ठीक से काम करने के लिए ग्लूकोज की लगातार जरूरत होती है। जब इसका स्तर 70 mg/dL से नीचे चला जाता है, तो शरीर तुरंत खतरे के संकेत भेजने लगता है।

 

आमतौर पर यह समस्या मधुमेह (डायबिटीज) के मरीजों में अधिक देखी जाती है, लेकिन कई बार लंबे समय तक भूखे रहने, अत्यधिक व्यायाम, कुछ दवाओं के सेवन या अन्य स्वास्थ्य कारणों से गैर-डायबिटिक लोगों में भी हो सकती है। शुरुआत में हल्की कमजोरी, पसीना आना या चक्कर जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं, लेकिन यदि समय पर ध्यान न दिया जाए तो यह स्थिति गंभीर भी हो सकती है। इसलिए यह जानना जरूरी है कि शुगर कम होने पर शरीर में क्या-क्या परेशानियां हो सकती हैं, उनके शुरुआती संकेत क्या हैं और ऐसी स्थिति में तुरंत क्या करना चाहिए।

 

शरीर में शुगर कम होने पर दिखने वाले लक्षणों को हम इस तरह समझ सकते हैं:ALSO READ: Monsoon Health Tips: बारिश के मौसम के लिए जानें खास 7 डाइट प्लान और इम्युनिटी बढ़ाने वाले घरेलू उपाय

 

1. जब शुगर कम होना शुरू होती है, जानें शुरुआती लक्षण

जैसे ही ब्लड शुगर का लेवल गिरता है, शरीर में एड्रेनालाईन (Adrenaline) हार्मोन बढ़ने लगता है, जिससे ये शुरुआती परेशानियां होती हैं:

 

अचानक तेज भूख लगना: शरीर ऊर्जा की कमी को पूरा करने के लिए तुरंत खाने के संकेत देता है।

 

चक्कर आना या कमजोरी: सिर हल्का महसूस होने लगता है और पैर डगमगाने लगते हैं।

 

चिड़चिड़ापन या मूड बदलना: अचानक बिना बात के गुस्सा आना, रोने का मन करना या घबराहट होना।

 

हाथ-पैरों में कंपन या घबराहट: बिना किसी कारण के शरीर में कंपकंपी महसूस होने लगती है।

 

अत्यधिक पसीना आना और ठंड लगना: बिना गर्मी के भी अचानक विशेषकर गर्दन के पीछे ठंडा पसीना आने लगता है।

 

दिल की धड़कन तेज होना: ऐसा महसूस होना कि दिल बहुत तेजी से धड़क रहा है (Palpitations)।

 

2. जब शुगर बहुत ज्यादा गिर जाएल जानें गंभीर लक्षण

यदि शुरुआती लक्षणों पर ध्यान न दिया जाए और दिमाग को पर्याप्त ग्लूकोज न मिले, तो स्थिति गंभीर हो सकती है:

 

आंखों के सामने धुंधलापन आना: साफ दिखाई न देना या एक की जगह दो चीजें दिखना।

 

भ्रम की स्थिति: बात समझने में दिक्कत होना या लड़खड़ाती आवाज में बोलना या सही से बोल न पाना।

 

नींद न खुलना या सुस्ती: बहुत ज्यादा सुस्ती छा जाना और सोने की इच्छा होना।

 

दौरे पड़ना या बेहोशी: यह सबसे खतरनाक स्थिति है, जहां व्यक्ति अचानक अचेत (Unconscious) हो सकता है।ALSO READ: पोहा, समोसा खाकर हो गए हैं बोर तो नाश्ते में खाएं स्प्राउट्स चाट, 5 फायदे: Healthy Breakfast Ideas

 

आपातकालीन स्थिति में क्या करें? 

यदि आपको या आपके आस-पास किसी को शुगर कम होने के लक्षण दिखें, तो तुरंत '15:15 का नियम' अपनाएं:

 

1. तुरंत करें ये उपाय

15 ग्राम तुरंत पचने वाला कार्बोहाइड्रेट लें: जैसे ही लक्षण दिखें, मरीज को 3-4 चम्मच चीनी/ग्लूकोज पाउडर, 1/2 कप फ्रूट जूस, या 4-5 टॉफी चूसने के लिए दें। ध्यान रखें: चॉकलेट या बिस्कुट न दें, क्योंकि इनमें मौजूद फैट शुगर को जल्दी बढ़ने नहीं देता।

 

2. 15 मिनट का इंतजार करें

कुछ भी मीठा खिलाने के बाद मरीज को शांत बैठने दें या आराम करने दें और 15 मिनट तक इंतजार करें ताकि शुगर शरीर में एब्जॉर्ब हो सके।

 

3. ब्लड शुगर दोबारा चेक करें

15 मिनट बाद ग्लूकोमीटर से शुगर लेवल दोबारा मापें। यदि लेवल अभी भी 70 mg/dL से कम है, तो स्टेप 1 को दोबारा दोहराएं।

 

4. नॉर्मल खाना या स्नैक दें

जब शुगर लेवल 70 mg/dL से ऊपर आ जाए, तो मरीज को एक रोटी या बिस्कुट जैसी ठोस चीज खिलाएं ताकि शुगर लेवल दोबारा नीचे न गिरे। यह शुगर लेवल को स्थिर रखने में मदद करेंगा।

 

महत्वपूर्ण चेतावनी: यदि व्यक्ति बेहोश हो गया हो या कुछ भी निगलने की स्थिति में न हो, तो उसके मुंह में जबरदस्ती पानी, जूस या चीनी बिल्कुल न डालें। इससे वह उसकी सांस की नली में फंस सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत मरीज को नजदीकी अस्पताल ले जाएं ताकि उसे ग्लूकोज का इंजेक्शन (IV Fluids) दिया जा सके।

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: Monsoon Health Tips: बारिश में फिट कैसे रहें?

योगी सरकार में बिना भेदभाव सभी जिलों में निर्धारित शेड्यूल से अधिक की जा रही विद्युत आपूर्ति

2017 से पहले चंद जिलों तक सीमित थी बिजली की तय आपूर्ति, योगी सरकार ने आते ही समाप्त किया वीआईपी कल्चर

 

निर्बाध बिजली के लिए अब गर्मी, बारिश और तेज हवाओं के बीच भी फील्ड में डटे रहते बिजलीकर्मी

 

बरसात के मौसम को देखते हुए सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश जारी

 

लखनऊ 20 जुलाई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था में पिछले नौ वर्षों में उल्लेखनीय बदलाव हुआ है। साल 2017 से पहले प्रदेश में घंटों बिजली कटौती आम बात थी, जबकि आज सभी 75 जिलों में शहरों से लेकर गांवों तक निर्धारित शेड्यूल से अधिक बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। भीषण गर्मी, उमस, तेज बारिश और खराब मौसम के बावजूद प्रदेशवासियों को लगातार बिजली मिल रही है, जिससे आम जनजीवन, कृषि, व्यापार और उद्योगों को बड़ी राहत मिली है।

 

योगी सरकार के कार्यकाल में बिजली व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए उत्पादन, पारेषण और वितरण तीनों स्तरों पर व्यापक सुधार किए गए हैं। परिणामस्वरूप प्रदेश में बिजली आपूर्ति पहले की तुलना में अधिक विश्वसनीय, पारदर्शी और उपभोक्ता केंद्रित बनी है। सरकार का लक्ष्य केवल बिजली उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना भी है।

 

*2017 से पहले चंद जिले थे वीआईपी, अन्य जिलों में तरसती रहती थी जनता*

 

2017 से पहले प्रदेश में जनपद मुख्यालयों पर औसतन 17 घंटे, तहसील मुख्यालयों पर 12 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में मात्र 11 घंटे बिजली आपूर्ति का प्रावधान था। हालांकि तय किए गए समय में भी लंबी कटौती होती रहती थी। इतना ही नहीं, पिछली सरकारों के दौरान कुछ चुनिंदा वीआईपी जिलों में ही निर्बाध बिजली आपूर्ति होती थी, जबकि अधिकांश जिलों के लोग लंबे समय तक बिजली कटौती से परेशान रहते थे। योगी सरकार ने इस व्यवस्था को पूरी तरह बदलते हुए पूरे प्रदेश में समान और बेहतर बिजली आपूर्ति की व्यवस्था लागू की। वर्तमान में जनपद मुख्यालयों पर 24 घंटे, तहसील मुख्यालयों पर 21.30 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे बिजली आपूर्ति का शेड्यूल निर्धारित है। विशेष बात यह है कि गांव से लेकर महानगर तक में निर्धारित शेड्यूल से भी अधिक बिजली उपलब्ध कराई जा रही है।

 

*भीषण गर्मी के बीच योगी सरकार में रिकॉर्ड बिजली आपूर्ति*

 

प्रदेश की बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने में भी योगी सरकार ने नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। वर्ष 2014 में जहां प्रदेश की अधिकतम पीक डिमांड 12,327 मेगावाट थी और वर्ष 2017 में यह 16,110 मेगावाट तक पहुंची थी, वहीं अब उत्तर प्रदेश लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। 24 जून 2026 को प्रदेश में रिकॉर्ड 32,673 मेगावाट की पीक डिमांड की सफलतापूर्वक आपूर्ति की गई है। वहीं लगातार और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड की टीमें प्रदेशभर में नियमित अनुरक्षण और निरीक्षण कार्य कर रहीं हैं। 

 

बिजली कर्मी पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ फील्ड में डटे

 

बारिश, तेज हवाओं और खराब मौसम जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी बिजलीकर्मी पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ फील्ड में डटे हैं। उनका उद्देश्य किसी भी स्थिति में उपभोक्ताओं तक सुरक्षित, विश्वसनीय और निर्बाध बिजली पहुंचाना है।

प्रदेशभर में वरिष्ठ अधिकारी लगातार उपकेंद्रों का निरीक्षण कर बिजली व्यवस्था की समीक्षा कर रहे हैं। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि उपभोक्ताओं को हर परिस्थिति में गुणवत्तापूर्ण और निरंतर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। ट्रिपिंग और फॉल्ट की घटनाओं को कम करने के लिए बिजली लाइनों के संपर्क में आने वाली पेड़ों की शाखाओं की नियमित कटाई-छंटाई कराई जा रही है, जिससे बरसात के मौसम में भी आपूर्ति बाधित न हो।

 

रात्रिकालीन मेंटेनेंस पर भी दिया जा रहा विशेष जोर

 

विभागीय बिजलीकर्मी रात के समय आवश्यक अनुरक्षण कार्य कर दिन के दौरान निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कर रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं को कम से कम असुविधा होती है और बिजली व्यवस्था अधिक प्रभावी बनी रहती है। बरसात के मौसम को देखते हुए बिजली विभाग ने सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश भी जारी किए हैं। सभी फील्ड कर्मचारियों को सुरक्षा उपकरण पहनकर ही अनुरक्षण कार्य करने के लिए कहा गया है ताकि किसी भी प्रकार की विद्युत दुर्घटना से बचा जा सके। अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित भ्रमण कर आवश्यक मरम्मत एवं अनुरक्षण कार्य समय पर पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं। यूपीपीसीएल के निदेशक वितरण ज्ञानेंद्र धर द्विवेदी ने बताया कि वितरण क्षेत्र की स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए पूरी टीम बारिश, गर्मी में निरन्तर कार्य कर रही है। शत- प्रतिशत व्यक्तिगत समस्याओं तथा लाइन व फीडर की समस्याओं का निराकरण कराया जा रहा है।

कमजोर मानसून का असर: खरीफ बुवाई पिछले साल से 6% पीछे, दालों-तिलहन की खेती पर पड़ा ये इंपैक्ट

Weak Monsoon Impact: देश के कई प्रमुख फसल उत्पादक क्षेत्रों में मानसून की भारी कमी और बारिश में देरी का सीधा असर इस साल खरीफ फसलों की बुवाई पर देखने को मिल रहा है। मनी कंट्रोल के ईशान गेरा की रिपोर्ट के मुताबिक 17 जुलाई तक देश में खरीफ फसलों का रकबा पिछले साल की तुलना में 6 प्रतिशत पीछे चल रहा है। किसानों ने इस अवधि तक 65.82 मिलियन हेक्टेयर में बुवाई की है जबकि 2025 की इसी अवधि के दौरान यह आंकड़ा 70.05 मिलियन हेक्टेयर था। बारिश की इस लगातार बनी हुई कमी से सबसे ज्यादा मार दालों, मोटे अनाज, तिलहन और कपास की खेती पर पड़ी है। आइए जानते हैं कि मानसून की सुस्ती ने किस फसल की बुवाई को कितना प्रभावित किया है और देश में पानी के जलाशयों का क्या हाल है.

दालों की बुवाई में आई सबसे बड़ी गिरावट (15.1% की कमी)

खरीफ फसलों में दालों की खेती सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। दालों का कुल रकबा पिछले साल के 81.52 लाख हेक्टेयर से 15.1 प्रतिशत घटकर अब 69.23 लाख हेक्टेयर रह गया है। अरहर की बुवाई में करीब 18 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है और यह घटकर 2.48 मिलियन हेक्टेयर पर आ गई है। मूंग का रकबा 11 प्रतिशत घटकर 2.398 मिलियन हेक्टेयर रहा। उड़द की बुवाई में लगभग 6 प्रतिशत की कमी आई है और यह 1.351 मिलियन हेक्टेयर दर्ज की गई।

क्यों चिंताजनक है यह गिरावट?

दालों की बुवाई में यह कमी बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत घरेलू उत्पादन और खपत के बीच के अंतर को पूरा करने के लिए पहले से ही आयात पर निर्भर रहता है।

धान, मोटे अनाज, तिलहन और कपास का क्या है हाल?

राहत की बात यह है कि धान की बुवाई पर मानसून की कमी का असर अपेक्षाकृत कम पड़ा है। यह 16.64 मिलियन हेक्टेयर पर पहुंच चुकी है जो पिछले साल की इसी अवधि के 16.78 मिलियन हेक्टेयर की तुलना में सिर्फ 0.8 प्रतिशत कम है। मोटे अनाज के रकबे में 11.2 प्रतिशत की तेज गिरावट आई है। यह पिछले साल के 13.41 मिलियन हेक्टेयर से गिरकर 11.9 मिलियन हेक्टेयर पर आ गया है। इसमें बाजरा की बुवाई में 18.5 प्रतिशत और मक्का की बुवाई में 5 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। तिलहन का रकबा 5.5 प्रतिशत घटकर 14.71 मिलियन हेक्टेयर रह गया है। कपास की बुवाई में भी 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

मानसून में 24% की कमी, इन राज्यों में गंभीर सूखा

1 जून से 19 जुलाई के बीच भारत में 253.2 मिमी बारिश दर्ज की गई है जो सामान्य स्तर से 24 प्रतिशत कम है। देश के अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश का यह घाटा अलग अलग है-

  • पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत: सामान्य से 35 प्रतिशत कम बारिश
  • दक्षिण प्रायद्वीप: 27 प्रतिशत की कमी
  • उत्तर-पश्चिम भारत: 23 प्रतिशत की कमी
  • मध्य भारत: 14 प्रतिशत की कमी

राज्यों के स्तर पर बारिश का घाटा

कृषि के लिहाज से महत्वपूर्ण कई राज्यों में बारिश का गंभीर संकट बना हुआ है। बिहार में सामान्य से 44 प्रतिशत कम बारिश हुई है। झारखंड में 41 प्रतिशत की कमी देखने को मिली है। पंजाब में ये कमी 41 प्रतिशत की है। केरल में 34 प्रतिशत कम बारिश हुई है। तेलंगाना में 31 प्रतिशत बारिश कम हुई है। तटीय कर्नाटक में 31 फीसदी कम बारिश देखने को मिली है।

जलाशयों का जलस्तर पिछले साल से 39% नीचे

कम बारिश की वजह से देश के जलाशयों में पानी का भंडारण भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। अभी देश के 166 प्रमुख जलाशयों में कुल क्षमता का सिर्फ 34.46 प्रतिशत पानी ही बचा है। यह उपलब्ध पानी पिछले साल की इसी अवधि के जलस्तर का सिर्फ 60.84 प्रतिशत ही है। यानी 39 प्रतिशत की भारी गिरावट देखने को मिली है। यह जलस्तर पिछले 10 वर्षों के औसत स्तर से भी 1.8 प्रतिशत नीचे चला गया है।

कल का मौसम 21 जुलाई: जम्मू कश्मीर, हिमाचल के लिए IMD की रेड वॉर्निंग! यूपी संग इन 21 राज्यों में भयंकर बारिश का अलर्ट

India Weather Update: देश भर में मानसून ने अपना सबसे विकराल और आक्रामक रूप धारण कर लिया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 21 जुलाई के लिए मौसम का बड़ा बुलेटिन जारी किया है। मौसम विभाग ने जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के लिए अत्यंत भारी बारिश की रेड कलर वॉर्निंग जारी की है। इसका मतलब है कि इन जगहों पर अथॉरिटी को ऐक्शन लेने के लिए तैयार रहना होगा। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली-एनसीआर और उत्तराखंड समेत देश के 21 से अधिक राज्यों में भयंकर बारिश और आंधी-तूफान का ऑरेंज और येलो कलर वॉर्निंग भी जारी की गई है।

मौसम विभाग के मुताबिक, देश भर में एक साथ 8 से अधिक चक्रवाती परिसंचरण और ट्रफ प्रणालियां सक्रिय हैं, जो मानसून को और अधिक घातक बना रही हैं।

इन 2 पहाड़ी राज्यों के लिए IMD की रेड कलर वॉर्निंग

मौसम विभाग ने 21 जुलाई को दो राज्यों में भारी बारिश को लेकर रेड कलर वॉर्निंग जारी की है। यहां भूस्खलन, बादल फटने और बाढ़ के खतरे को देखते हुए उच्चतम स्तर का अलर्ट जारी किया है। हिमाचल प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश के साथ अत्यंत भारी बारिश होने का अलर्ट है। इसी तरह जम्मू-कश्मीर-लद्दाख में कई जगहों पर मूसलाधार बारिश के साथ अत्यंत भारी वर्षा होने की प्रबल आशंका है।

यूपी, बिहार और दिल्ली-एनसीआर समेत 11 राज्यों में बहुत भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग के अनुसार, 21 जुलाई को देश के मैदानी और पहाड़ी इलाकों के 11 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में भयंकर बारिश होने की संभावना है। यूपी के अलग-अलग जिलों में 21 जुलाई को मूसलाधार से बहुत भारी बारिश का दौर जारी रहेगा। बिहार में मानसून पूरी तरह मेहरबान है, यहां भी कई स्थानों पर बहुत भारी बारिश का अलर्ट है। हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में गरज-चमक के साथ बहुत भारी बारिश होने का अनुमान है।

पंजाब के अलग-अलग हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज की जाएगी। देवभूमि उत्तराखंड में 21 जुलाई को कई जगहों पर बहुत भारी वर्षा की चेतावनी दी गई है। असम और मेघालय में बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा इन चारों राज्यों में कल तेज बारिश और बहुत भारी बारिश की संभावना है।

मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में बादलों का जमघट रहेगा और बहुत भारी बारिश होगी। कोंकण और गोवा में तटीय इलाकों में मूसलाधार से बहुत भारी बारिश की चेतावनी है। महाराष्ट्र के मध्य अंचलों में 21 जुलाई को बहुत भारी बारिश का अनुमान जताया गया है।

राजस्थान, एमपी और झारखंड समेत 8 राज्यों में भारी बारिश

देश के 8 राज्यों में अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश दर्ज की जाएगी। पूर्वी व पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों में भारी बारिश का अलर्ट रहेगा। एमपी के पश्चिमी इलाकों में 21 जुलाई को भारी बारिश हो सकती है। छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में मध्यम से भारी बारिश का अनुमान है। झारखंड और ओडिशा दोनों राज्यों में 21 जुलाई को भारी वर्षा होने की संभावना जताई गई है।

गुजरात के मैदानी अंचलों में 21 जुलाई को भारी बारिश का अलर्ट है। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भारी बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। अरुणाचल प्रदेश में भारी बारिश हो सकती है।

आंधी-तूफान, तेज हवाएं और बिजली कड़कने की चेतावनी

बारिश के साथ-साथ कई राज्यों में आकाशीय बिजली और तूफानी हवाएं चलने का भी अलर्ट जारी किया गया है। आंध्र प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल में गरज-चमक के साथ 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं चलेंगी और आकाशीय बिजली गिरने का खतरा रहेगा। बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान, तेलंगाना, आंतरिक कर्नाटक और अंडमान व निकोबार द्वीप समूह में गरज-चमक के साथ 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अलर्ट है।

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उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, विदर्भ, पश्चिम बंगाल व सिक्किम और नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम व त्रिपुरा में गरज-चमक के साथ तेज आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी जारी की गई है। आंध्र प्रदेश, आंतरिक कर्नाटक और तेलंगाना में दिन के समय काफी तेज सतही हवाएं चलने की संभावना है।

5 एक्टिव चक्रवाती सिस्टम से अगले 7 दिन खतरनाक मौसम, इन 18 राज्यों में IMD ने दिया भारी बारिश का अलर्ट, यूपी से बिहार तक मूसलाधार

देश भर में मानसून एक बार फिर अत्यंत विकराल और सक्रिय रूप में आ गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने ताजा वेदर बुलेटिन में चेतावनी दी है कि अगले 4 से 5 दिनों के दौरान उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्व भारत में मानसून की स्थिति काफी आक्रामक रहने वाली है। मौसम विभाग के मुताबिक वायुमंडल में 5 प्रमुख चक्रवाती परिसंचरण और 2 बड़ी ट्रफ प्रणालियां एक साथ एक्टिव हैं। इनके संयुक्त प्रभाव से उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और असम-मेघालय सहित देश के 18 से अधिक राज्यों में मूसलाधार से लेकर अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने ये भी बताया है कि अगले 7 दिनों के दौरान पश्चिम-मध्य और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में बारिश का जोर थोड़ा धीमा रहेगा।

आइए जानते हैं मौसम विभाग के वैज्ञानिक विश्लेषण के मुताबिक आने वाले 7 दिनों में आपके राज्य में कैसा रहेगा मौसम का मिजाल।

वायुमंडल में एक्टिव हैं ये 5 चक्रवाती सिस्टम और ट्रफ प्रणालियां

  • मौसम विभाग के बुलेटिन के मुताबिक, देश के अलग-अलग हिस्सों में बने ये मौसमी सिस्टम बारिश की गतिविधि को तेज कर रहे हैं:
  • पंजाब पर चक्रवाती सिस्टम: निचले क्षोभमंडल स्तर में पंजाब और उसके आस-पास के इलाके पर एक ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है।
  • दक्षिण यूपी के मध्य में चक्रवाती परिसंचरण: निचले क्षोभमंडल में दक्षिण उत्तर प्रदेश के मध्य भागों पर एक चक्रवाती सिस्टम सक्रिय है।
  • उत्तरी झारखंड और बिहार पर सिस्टम: निचले क्षोभमंडल स्तर में उत्तरी झारखंड और उससे सटे बिहार पर एक चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। इस सिस्टम से लेकर त्रिपुरा तक निचले क्षोभमंडल में एक ट्रफ लाइन भी गुजर रही है।
  • दक्षिण-पश्चिम राजस्थान पर सिस्टम: निचले क्षोभमंडल स्तर में दक्षिण-पश्चिम राजस्थान और उसके पड़ोस पर चक्रवाती सिस्टम बरकरार है।
  • पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी पर चक्रवाती सिस्टम: मध्य क्षोभमंडल स्तर में पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी और उससे सटे उत्तरी तटीय आंध्र प्रदेश पर एक चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय है। यहाँ से उत्तर-पूर्वी अरब सागर तक मध्य क्षोभमंडल स्तर में एक ट्रफ लाइन फैली हुई है।
  • इसके अलावा निचले क्षोभमंडल में मध्य असम और उससे सटे नागालैंड पर भी एक चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है जबकि मानसून ट्रफ समुद्र तल पर अपनी सामान्य स्थिति के आसपास बनी हुई है।

पिछले 24 घंटों में कहां कैसी हुई बारिश?

  • अत्यंत भारी बारिश (21 सेमी या अधिक): उत्तराखंड और मेघालय में बेहद मूसलाधार बारिश दर्ज की गई।
  • बहुत भारी बारिश (12 से 20 सेमी): उत्तर प्रदेश, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल व सिक्किम, ओडिशा, झारखंड, बिहार, कोंकण, मध्य महाराष्ट्र, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम व त्रिपुरा और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में दर्ज हुई।
  • भारी बारिश (7 से 11 सेमी): जम्मू-कश्मीर, पूर्वी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, अरुणाचल प्रदेश, तटीय कर्नाटक, केरल व माहे और उत्तरी आंतरिक कर्नाटक में रिकॉर्ड की गई।

इन राज्यों में अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग ने 20 और 21 जुलाई को देश के कई राज्यों में अत्यधिक वर्षा की चेतावनी जारी की है। 20 जुलाई को यूपी और उत्तराखंड के अलग-अलग इलाकों में मूसलाधार से अत्यंत भारी बारिश होने का अलर्ट है। 20 जुलाई को बिहार के कई जिलों में कुछ स्थानों पर अत्यंत भारी वर्षा हो सकती है। जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश की बात करें तो 20 और 21 जुलाई को दोनों राज्यों में अत्यंत भारी बारिश की आशंका जताई गई है। 20 जुलाई को असम और मेघालय में भीषण बारिश देखने को मिल सकती है।

अगले 7 दिनों का विस्तृत राज्यवार पूर्वानुमान

  • 1-उत्तर-पश्चिम भारत (यूपी, उत्तराखंड, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान)

उत्तर प्रदेश: पूर्वी यूपी में 20-23 जुलाई और पश्चिमी यूपी में 20-24 जुलाई के दौरान व्यापक बारिश होगी। 20 जुलाई को पूरे यूपी में अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट है। इसके अलावा 20-21 जुलाई को पूर्वी यूपी और 20-22 जुलाई को पश्चिमी यूपी में बहुत भारी बारिश हो सकती है। 22-24 जुलाई (पूर्वी यूपी) और 23-25 जुलाई (पश्चिमी यूपी) के दौरान भारी बारिश का सिलसिला जारी रहेगा।

उत्तराखंड: 20 से 26 जुलाई तक लगातार व्यापक बारिश होगी। 20 जुलाई को अत्यंत भारी बारिश, 21 जुलाई को बहुत भारी बारिश और 20 व 22-26 जुलाई के दौरान भारी बारिश की चेतावनी है।

हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर: दोनों राज्यों में 20-24/26 जुलाई तक व्यापक बारिश होगी। 20-21 जुलाई को अत्यंत भारी बारिश होगी। इसके बाद जम्मू-कश्मीर में 22-23 जुलाई और हिमाचल में 22 जुलाई को बहुत भारी बारिश दर्ज की जा सकती है।

दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़ और पंजाब: यहां 20 से 23 जुलाई के दौरान व्यापक बारिश का दौर रहेगा। 20 से 22 जुलाई के बीच हरियाणा, दिल्ली, पंजाब में बहुत भारी बारिश का अलर्ट है जबकि 23 जुलाई को भारी बारिश की संभावना है।

राजस्थान: पूर्वी राजस्थान में 23-26 जुलाई को व्यापक बारिश और 20-25 जुलाई के दौरान भारी बारिश हो सकती है। पश्चिमी राजस्थान में 20-24 जुलाई के बीच भारी बारिश दर्ज हो सकती है।

  • 2 – पूर्वी भारत (बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा)

बिहार: 20 से 22 जुलाई के दौरान व्यापक बारिश होगी (23-26 जुलाई को छिटपुट)। 20 जुलाई को अत्यंत भारी बारिश और 21 जुलाई को बहुत भारी बारिश का अलर्ट है। 20 से 23 जुलाई तक भारी बारिश का दौर बना रहेगा।

झारखंड: 20 से 26 जुलाई तक लगातार व्यापक बारिश होगी। 20 जुलाई को बहुत भारी बारिश और 21 जुलाई को भारी बारिश की संभावना है।

पश्चिम बंगाल और सिक्किम: उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल व सिक्किम में 20-26 जुलाई तक व्यापक वर्षा होगी, जिसमें 20 जुलाई को बहुत भारी बारिश का अलर्ट है। गांगेय पश्चिम बंगाल में 20, 22 और 23 जुलाई को भारी बारिश का अनुमान है।

ओडिशा: 20 से 22 जुलाई के दौरान ओडिशा के अलग-अलग जिलों में भारी बारिश की संभावना है।

  • 3- उत्तर-पूर्व भारत (असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश)

असम और मेघालय: 20 से 26 जुलाई तक लगातार व्यापक बारिश का अलर्ट है। 20 जुलाई को अत्यंत भारी बारिश और 21 जुलाई को बहुत भारी बारिश की संभावना है, जिसके बाद 22-26 जुलाई तक भारी बारिश होगी।

नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा: यहाँ 20-26 जुलाई तक भारी से व्यापक बारिश होगी। 20 और 21 जुलाई को बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

अरुणाचल प्रदेश: 20-21 जुलाई और 25-26 जुलाई के दौरान भारी बारिश दर्ज की जाएगी।

  • 4- मध्य भारत (मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, विदर्भ)

मध्य प्रदेश: पूर्वी मध्य प्रदेश में 20-26 जुलाई तक व्यापक बारिश होगी। 21 जुलाई को बहुत भारी बारिश और 20 व 22-23 जुलाई को भारी बारिश का पूर्वानुमान है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में 22-24 जुलाई को व्यापक बारिश और 20-23 जुलाई के दौरान भारी बारिश होगी।

छत्तीसगढ़: 20 से 26 जुलाई तक लगातार व्यापक बारिश और भारी बारिश की गतिविधियां देखने को मिलेंगी।

विदर्भ: 20-24 जुलाई के दौरान व्यापक बारिश होगी जिसमें 23 जुलाई को भारी बारिश की संभावना है।

  • 5- पश्चिम भारत (महाराष्ट्र, गोवा, गुजरात)

कोंकण, गोवा और मध्य महाराष्ट्र: कोंकण व गोवा में 20-26 जुलाई और मध्य महाराष्ट्र में 22-23 जुलाई को व्यापक बारिश होगी। 21 और 22 जुलाई को कोंकण, गोवा और मध्य महाराष्ट्र में बहुत भारी बारिश का अलर्ट है जबकि 20 और 23-25 जुलाई को भारी बारिश हो सकती है।

गुजरात क्षेत्र: 20 जुलाई को बहुत भारी बारिश तथा 21-22 और 25-26 जुलाई के दौरान भारी बारिश का अनुमान है।

  • 6- दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत (कर्नाटक, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना)

दक्षिण भारत के अधिकांश हिस्सों में अगले 7 दिनों में बारिश थोड़ी सुस्त रहेगी लेकिन 20 जुलाई को तटीय आंध्र प्रदेश व यानम, तटीय कर्नाटक, केरल व माहे, उत्तर आंतरिक कर्नाटक, रायलसीमा, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक और तेलंगाना में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई गई है। केरल और तटीय कर्नाटक में 24 से 26 जुलाई के दौरान एक बार फिर व्यापक बारिश का दौर लौट सकता है।

आंधी-तूफान, तेज हवाएं और बिजली कड़कने की चेतावनी

जम्मू-कश्मीर (20-26 जुलाई): गरज-चमक के साथ 40 से 50 किमी/घंटा (झोंके 60 किमी/घंटा तक) की रफ्तार से तेज आंधी और बिजली गिरने का अलर्ट है।

राजस्थान और मध्य प्रदेश (20-25 जुलाई): गरज-चमक के साथ 30 से 40 किमी/घंटा (झोंके 50 किमी/घंटा तक) की रफ्तार से हवाएं चलेंगी।

बिहार, झारखंड, ओडिशा और बंगाल: बिहार व अंडमान-निकोबार (20-26 जुलाई) और झारखंड व ओडिशा (20-24 जुलाई) में 30-40 किमी/घंटा की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं और बिजली कड़कने की आशंका है।

दक्षिण भारत: तमिलनाडु, पुडुचेरी, तटीय आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में 20 से 24 जुलाई के दौरान तेज आंधी-तूफान के साथ आकाशीय बिजली और 40-50 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है।

इसके अलावा तटीय आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, रायलसीमा और कर्नाटक के विभिन्न हिस्सों में 20 से 26 जुलाई के दौरान काफी तेज सतही हवाएं चलने का पूर्वानुमान जारी किया गया है।

जम्मू-कश्मीर के डोडा में दर्दनाक हादसा: रग्गी नाला में भूस्खलन, कई वाहनों पर गिरे पत्थर

doda landslide

जम्मू कश्मीर के डोडा जिले के रग्गी नाला में सोमवार को एक यात्री बस और कई अन्य गाड़ियों पर तेजी से गिरते पत्थरों की चपेट में आने से दो लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। ALSO READ: कश्‍मीर में कई जगह फटे बादल, पुंछ और राजौरी में बारिश का कहर, 16 लोगों की मौत, दर्जनभर लापता

 

अधिकारियों ने बताया कि अचानक पत्थरों और मलबे के खिसकने से हाईवे पर मौजूद गाड़ियां इसकी चपेट में आ गईं, जिससे जान-माल का नुकसान हुआ। बचाव दल तुरंत मौके पर पहुँचे और घायलों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पतालों में पहुंचाया।

 

इस घटना के बाद, इलाके में मडस्लाइड (कीचड़ खिसकने) और लगातार गिरते पत्थरों के कारण हाईवे पर ट्रैफिक रोक दिया गया है।
 

अधिकारियों ने बताया कि अभी बहाली और सफाई का काम चल रहा है, लेकिन मौजूदा मौसम के हालात को देखते हुए इसमें काफी समय लगने की संभावना है।

 

यात्रियों को सलाह दी गई है कि जब तक मौसम ठीक नहीं हो जाता और सड़क को ट्रैफिक के लिए सुरक्षित घोषित नहीं कर दिया जाता, तब तक इस रास्ते पर अनावश्यक यात्रा करने से बचें।

दिल्ली जाने का नया ट्रेंड, लग्जरी बस से रोड ट्रिप पर कम खर्च में पाएं फाइव-स्टार जैसा सफर

बारिश का मौसम रोड ट्रिप का मजा कई गुना बढ़ा देता है। ऐसे में अब कई ट्रैवलर फ्लाइट की बजाय लग्जरी बसों को चुन रहे हैं। आरामदायक सीटें, मॉडर्न सुविधाएं और रास्तेभर दिखने वाले खूबसूरत नज़ारे इस सफर को सिर्फ जर्नी नहीं, बल्कि यादगार एक्सपीरियंस बना देते हैं:

 

सफर की शुरुआत बिना भागदौड़ के

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फ्लाइट पकड़ने के लिए घंटों पहले एयरपोर्ट पहुंचने और लंबी सुरक्षा जांच से गुजरने की जरूरत होती है। वहीं लग्ज़री बस में तय समय पर पहुंचकर आसानी से अपनी सीट पर बैठ सकते हैं। इससे जर्नी की शुरुआत ही स्ट्रेस फ्री हो जाती है।

 

 

 

आरामदायक सुविधाएं बनाती हैं लंबा सफर आसान

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आज की प्रीमियम बसों में रिक्लाइनर या स्लीपर सीट, मोबाइल चार्जिंग पॉइंट, एसी, पढ़ने की लाइट और साफ-सुथरा इंटीरियर जैसी सुविधाएं मिलती हैं। इससे रातभर का सफर भी काफी आरामदायक महसूस होता है।

 

 

 

रास्ते के खूबसूरत नज़ारों का मिलता है आनंद

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मानसून (monsoon) के दौरान हरे-भरे पहाड़, झरने, जंगल और बादलों से ढकी रोड जर्नी को खास बना देती हैं। बस की खिड़की से इन प्राकृतिक दृश्यों का आनंद लिया जा सकता है, जो फ्लाइट में पॉसिबल नहीं होता।

 

 

 

जेब पर भी पड़ता है कम असर

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कई बार अचानक बढ़े हुए फ्लाइट किराए की तुलना में लग्ज़री बसें काफी किफायती ऑप्शन साबित होती हैं। खासकर वीकेंड (weekend) या मानसून ट्रिप के दौरान यह बजट में कम्फर्टेबल ट्रैवल का अच्छा ऑप्शन बन जाती हैं।

 

 

टूरिस्ट डेस्टिनेशन तक सीधी पहुंच

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दिल्ली से मसूरी, नैनीताल, ऋषिकेश, धर्मशाला, कसौली और आगरा जैसे कई पॉपुलर टूरिस्ट डेस्टिनेशन के लिए लग्ज़री बस सेवाएं आसानी से अवेलेबल हैं। इससे बार-बार वाहन बदलने की परेशानी भी कम हो जाती है और सफर ज्यादा सुविधाजनक बनता है।

IMD Heavy Rain Alert: देशभर में मानसून का कहर! दिल्ली-मुंबई और कश्मीर समेत कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, बाढ़-भूस्खलन का भी खतरा

IMD Heavy Rain Alert: देशभर में दक्षिण-पश्चिम मानसून एक बार फिर पूरी तरह से एक्टिव हो गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अगले कुछ दिनों तक उत्तर, पूर्व, उत्तर-पूर्व और पश्चिम भारत के कई राज्यों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के अनुसार, लगातार हो रही बारिश के कारण कई इलाकों में अचानक बाढ़, भूस्खलन, जलभराव, नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी और ट्रैफिक बाधित होने की आशंका है।

जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, असम और नागालैंड समेत कई राज्यों में बारिश का असर पहले ही देखने को मिल रहा है। हालात को देखते हुए राज्य सरकारों और स्थानीय प्रशासन ने आपदा प्रबंधन की तैयारियां तेज कर दी हैं।

हिमाचल प्रदेश में फ्लैश फ्लड और भूस्खलन का खतरा

IMD ने हिमाचल प्रदेश के चंबा, कांगड़ा, शिमला और मंडी सहित कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। वहीं, ऊना, बिलासपुर, सोलन, हमीरपुर, कुल्लू और सिरमौर में भी तेज बारिश होने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने कहा है कि लगातार बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन, चट्टानें गिरने, कीचड़ धंसने और अचानक बाढ़ जैसी घटनाएं हो सकती हैं।

इसके अलावा जलभराव, कम विजिबिलिटी, ट्रैफिक जाम, परिवहन सेवाओं में बाधा, फसलों को नुकसान और बिजली-पानी जैसी आवश्यक सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। प्रशासन ने लोगों और पर्यटकों से भूस्खलन संभावित इलाकों, नदियों और तेज बहाव वाले नालों से दूर रहने की अपील की है।

जम्मू-कश्मीर में बाढ़ जैसे हालात, वैष्णो देवी यात्रा अस्थायी रूप से रोकी गई

जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में भारी बारिश के बाद बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। निचले इलाकों में पानी भर गया है और सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, इस दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि एक अन्य व्यक्ति लापता है।

पुंछ जिले में लगातार बारिश के चलते एक मकान गिर गया। इसमें एक ही परिवार के कई सदस्य घायल हो गए। खराब मौसम और भूस्खलन के खतरे को देखते हुए कटरा और त्रिकुटा पहाड़ियों में श्री माता वैष्णो देवी यात्रा को एहतियातन अस्थायी रूप से रोक दिया गया है।

मुंबई में ‘येलो अलर्ट’ जारी, जलभराव की आशंका

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में शनिवार रात से लगातार मध्यम से भारी बारिश हो रही है। अंधेरी, बांद्रा, विले पार्ले, दादर और मध्य उपनगरों के कई हिस्सों में अच्छी बारिश दर्ज की गई है। IMD ने मुंबई के लिए येलो अलर्ट जारी करते हुए बुधवार तक भारी बारिश की संभावना जताई है। पश्चिमी और मध्य उपनगरों में तेज बारिश के दौर जारी रह सकते हैं।

प्रशासन ने लोगों को जलभराव और ट्रैफिक प्रभावित होने की चेतावनी दी है। हालांकि, सेंट्रल, हार्बर और वेस्टर्न रेलवे की लोकल ट्रेन सेवाएं फिलहाल संचालित हो रही हैं, लेकिन कुछ स्थानों पर गति प्रतिबंध के कारण मामूली देरी देखी जा रही है।

दिल्ली-एनसीआर में गर्मी से राहत, तापमान में आएगी बड़ी गिरावट

दिल्ली-एनसीआर में सोमवार से बुधवार तक गरज-चमक के साथ भारी बारिश होने की संभावना है। इससे वीकेंड की उमस और गर्मी से लोगों को राहत मिलेगी। मौसम विभाग के अनुसार, रविवार को करीब 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा अधिकतम तापमान मंगलवार तक घटकर करीब 30 डिग्री सेल्सियस रह सकता है। इस दौरान तेज हवाएं, गरज-चमक और बिजली गिरने की भी संभावना जताई गई है।

उत्तर प्रदेश में भी सक्रिय होगा मानसून

उत्तर प्रदेश में अगले 24 घंटों के दौरान मानसून और अधिक सक्रिय होने का अनुमान है। मौसम विभाग ने प्रदेश के कई हिस्सों में गरज-चमक और बिजली गिरने के साथ व्यापक बारिश की संभावना जताई है। कई जिलों में भारी बारिश और कुछ स्थानों पर अति भारी बारिश हो सकती है। राजधानी लखनऊ समेत कई शहरों में रुक-रुक कर बारिश और तेज बौछारें पड़ने की संभावना है, जिससे तापमान सामान्य से नीचे बना रहेगा।

पश्चिम बंगाल में नदियों का जलस्तर बढ़ने की चेतावनी

उत्तर बंगाल के जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार जिलों में अगले दो दिनों के दौरान अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, दार्जिलिंग, कालिम्पोंग और कूचबिहार में भी बहुत भारी बारिश होने की संभावना है।

मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन, निचले क्षेत्रों में फ्लैश फ्लड और तीस्ता, तोर्सा, जलढाका और रायडाक जैसी नदियों का जलस्तर बढ़ सकता है। दक्षिण बंगाल के कई जिलों में भी 21 से 23 जुलाई के बीच भारी बारिश का अनुमान है।

उत्तर-पूर्वी राज्यों में जारी रहेगा बारिश का दौर

अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में पूरे सप्ताह व्यापक बारिश जारी रहने की आशंका है। गुवाहाटी में पहले से ही भारी बारिश हो चुकी है। जबकि नागालैंड के कई इलाकों में भूस्खलन, अचानक बाढ़ और सड़कें बंद होने जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं।

प्रशासन की लोगों से अपील

मौसम विभाग और प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने, नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने तथा स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी गाइडलाइंस का पालन करने की अपील की है। संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। IMD के मुताबिक, इस सप्ताह कई राज्यों में भारी बारिश जारी रहने की आशंका है।