अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी आर्थिक कार्रवाई का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि ईरान ने समझौते का मौका गंवा दिया, इसलिए अब उसे आर्थिक तौर पर अलग-थलग किया जाएगा। ट्रम्प ने चेतावनी दी कि ईरान की मदद करने वाले देशों और संस्थाओं पर भी कार्रवाई होगी। इसमें बैंक, कंपनियां, एयरपोर्ट और सरकारी संस्थाएं शामिल हैं। उन्होंने तेल तस्करी नेटवर्क पर कार्रवाई करने और कैश ट्रांसफर, करेंसी एक्सचेंज, जहाजों के रजिस्ट्रेशन और फर्जी कंपनियों के जरिए ईरान तक पहुंचने वाली आर्थिक मदद को रोकने की बात कही। ट्रम्प का दावा- ईरान की सैन्य ताकत को भारी नुकसान
ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान की नौसेना और वायुसेना को बड़ा नुकसान हुआ है और उसके कई सैन्य कारखाने तबाह हो गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की मुद्रा की हालत बहुत खराब है और देश आर्थिक संकट में है। ट्रम्प ने अमेरिका की नई आर्थिक कार्रवाई को ‘इकोनॉमिक डी-डे’ बताया। आसान भाषा में इसका मतलब है कि अमेरिका ईरान पर बहुत बड़ा आर्थिक दबाव बनाने जा रहा है। उन्होंने दूसरे देशों से भी ईरान की मदद बंद करने और अमेरिका के साथ इस अभियान में शामिल होने की अपील की। अमेरिकी प्रतिबंधों का ईरान पर क्या असर पड़ेगा? अमेरिका की नई कार्रवाई का सबसे बड़ा असर ईरान के तेल कारोबार और पैसे के लेनदेन पर पड़ सकता है। ईरान की कमाई का बड़ा हिस्सा तेल बेचने से आता है। अगर दूसरे देश, बैंक और कंपनियां अमेरिकी कार्रवाई के डर से ईरान के साथ कारोबार कम करते हैं, तो ईरान के लिए तेल बेचना और विदेशों से पैसा लेना मुश्किल हो सकता है। तेल की तस्करी और फर्जी कंपनियों पर कार्रवाई होने से ईरान के लिए छिपकर कारोबार करना और अमेरिकी कार्रवाई से बचना भी मुश्किल होगा। ट्रम्प का कहना है कि अमेरिका अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर ईरान को दुनिया से आर्थिक तौर पर अलग करने की कोशिश करेगा। ईरान का तेल तस्करी नेटवर्क कैसे काम करता है तेल बेचकर कमाई, पहचान छिपाकर सप्लाई तेल के बाद पैसे की बारी अमेरिका पूरी चेन तोड़ना चाहता है —————————- ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प बोले- 2020 चुनाव में 24,000 गैर-नागरिकों ने वोट डाले:चुनाव में मेरी जीत हुई थी, धांधली रोकने के लिए कानून बनाऊंगा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर दावा किया है कि 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में धांधली हुई थी। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि मतदाता और नागरिकता रिकॉर्ड की जांच में 24 हजार से ज्यादा गैर-अमेरिकी नागरिकों के वोट डालने का पता चला है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
RBI Minutes: RBI की अगस्त बैठक के मिनट्स से साफ संकेत मिले हैं कि फिलहाल ब्याज दरों में और राहत की उम्मीद कम है। केंद्रीय बैंक का पूरा फोकस अब महंगाई पर है। अगर कीमतों का दबाव और बढ़ा, तो इस साल रेपो रेट बढ़ाने की नौबत भी आ सकती है।
5 अगस्त को हुई MPC बैठक में RBI ने लगातार चौथी बार रेपो रेट को 5.25% पर ही रखा था। वहीं SDF 5% और MSF 5.5% पर बरकरार रहे। नीति का रुख भी ‘Neutral’ ही रखा गया।
गवर्नर ने क्या कहा?
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था अभी मजबूत बनी हुई है। उनका अनुमान है कि इस वित्त वर्ष में महंगाई औसतन करीब 5% रह सकती है।
उन्होंने कहा कि अभी महंगाई का बड़ा कारण सप्लाई से जुड़ी दिक्कतें हैं। अच्छी बात यह है कि यह पूरे बाजार में नहीं फैली है। कोर महंगाई भी अभी ज्यादा नहीं है।
उनका मानना है कि तीसरी तिमाही के बाद महंगाई कुछ कम हो सकती है। इसलिए अभी ब्याज दरों में बदलाव की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर महंगाई हर सेक्टर में फैलने लगी, तो RBI सख्ती कर सकता है।
डिप्टी गवर्नर का रुख ज्यादा सख्त
RBI की डिप्टी गवर्नर पूणम गुप्ता ने साफ कहा कि अभी ब्याज दरों में और कटौती की गुंजाइश नहीं दिखती।
उन्होंने यह भी कहा कि साल के दौरान रेपो रेट बढ़ाने की जरूरत भी पड़ सकती है। हालांकि फिलहाल उनका सुझाव यही है कि कुछ समय और इंतजार किया जाए।
दूसरे सदस्यों की क्या राय रही?
MPC सदस्य इंद्रनील भट्टाचार्य ने भी जल्दबाजी से बचने की बात कही। उनका कहना है कि आने वाले महीनों में मानसून और महंगाई की तस्वीर ज्यादा साफ होगी।
उन्होंने कहा कि अभी दरों को स्थिर रखना RBI के लिए आगे फैसला लेने की लचीलापन बनाए रखता है। इसका मतलब यह नहीं कि दरें लंबे समय तक नहीं बदलेंगी।
RBI किन बातों से चिंतित है?
बैठक के मिनट्स में कई ऐसे जोखिम गिनाए गए हैं, जो महंगाई बढ़ा सकते हैं।
- मानसून का असमान रहना
- एल नीनो का असर
- पश्चिम एशिया में तनाव
- होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े जोखिम
MPC सदस्यों का मानना है कि इन वजहों से आने वाले महीनों में महंगाई पर नजर रखना पहले से ज्यादा जरूरी होगा।
एक ही दिन में 137% उछला फार्मा स्टॉक, कंपनी को कैंसर थेरेपी के ट्रायल में मिली बड़ी कामयाबी
Gold Silver Rates Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में 19 अगस्त को सोने में तेजी पर ब्रेक लग गया। सोना 800 रुपये गिरकर 1,58,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। चांदी में भी गिरावट दिखी। इसकी वजह मध्यपूर्व में जारी तनाव और क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी है। क्रूड की कीमतें लगातार 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं। इसका असर निवेशकों के सेंटीमेंट पर पड़ रहा है।
चांदी एक दिन में 5700 रुपये फिसली
19 अगस्त को चांदी में भी बड़ी गिरावट आई। इसकी वजह भारी बिकवाली है। इससे चांदी 5,730 रुपये गिरकर 2,35,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। सोने और चांदी की कीमतें ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के डेटा पर आधारित हैं। 18 अगस्त को सोने और चांदी में तेजी दिखी थी।
मध्यपूर्व में अनिश्चितता का असर बुलियन पर
एलकेपी सिक्योरिटीज में रिसर्च एनालिस्ट और वीपी जतिन त्रिवेदी ने कहा कि अमेरिका और ईरान में युद्धविराम की अवधि खत्म हो जाने के बाद मध्यपूर्व की स्थिति को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। इसका सीधा असर बुलियन खासकर सोने की कीमतों पर पड़ रहा है। इससे निवेशक भी सावधानी बरत रहे हैं।
ब्रेंट क्रूड लगातार 90 डॉलर के ऊपर चल रहा है
बीते कई दिनों से ब्रेंट क्रूड का भाव 90 डॉलर से ऊपर बना हुआ है। अगर कीमतें जल्द नीचे नहीं आती हैं तो दुनियाभर में महंगाई बढ़ सकती हैं। इसका असर इकोनॉमी की ग्रोथ पर भी पड़ेगा। महंगाई को काबू में करने के लिए अमेरिकी केंद्रीय बैंक सहित दूसरे देशों के केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकते हैं। इंटरेस्ट रेट बढ़ने पर गोल्ड की चमक घट जाती है।
फेड की मीटिंग के मिनट्स पर इनवेस्टर्स की नजरें
लेमन मार्केट्स डेस्क के रिसर्च हेड गौरव गर्ग ने कहा कि इनवेस्टर्स फेडरल रिजर्व की मीटिंग के मिनट्स का इंतजार कर रहे हैं। इससे भविष्य में इंटरेस्ट रेट की दिशा के बारे में संकेत मिलेगा। इसका दबाव बुलियन की कीमतों पर भी दिख रहा है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में घरेलू बाजार से अलग का ट्रेंड दिखा।
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अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में जोरदार तेजी
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में अच्छी तेजी दिखी। सोना 3.22 फीसदी चढ़कर 4,473 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। कई सत्रों के बाद सोना 4400 के पार गया है। चांदी में भी जोरदार तेजी दिखी। इसका भाव 3.26 फीसदी के उछाल के साथ 65.35 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि फिलहाल बुलियन की कीमतों में सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
Mutual Funds: जुलाई 2026 में सोने ने करीब 9% का रिटर्न दिया। इसके बावजूद भारतीय निवेशकों ने सबसे ज्यादा भरोसा मनी मार्केट फंड्स पर जताया। Vallum Capital की अगस्त 2026 की Monthly Macro Grid Chartbook के मुताबिक, जुलाई में इन फंड्स में 1.40 लाख करोड़ रुपये का निवेश आया। दिलचस्प बात यह है कि जून में इसी कैटेगरी से 65,530 करोड़ रुपये निकल गए थे।
सिर्फ मनी मार्केट फंड ही नहीं, फिक्स्ड इनकम फंड्स में भी वापसी देखने को मिली। जुलाई में इनमें 5,947 करोड़ रुपये का निवेश आया, जबकि जून में 53,006 करोड़ रुपये की निकासी हुई थी। दूसरी तरफ, सोने की कीमत बढ़ने के बावजूद प्रेशियस मेटल फंड्स में निवेश घटकर 4,084 करोड़ रुपये रह गया, जो जून में 8,680 करोड़ रुपये था।
SIP में लगातार बढ़ रहा निवेश
सुरक्षित निवेश की तरफ झुकाव का मतलब यह नहीं था कि निवेशकों ने शेयर बाजार से दूरी बना ली। Franklin Templeton India की रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई में SIP योगदान 12% बढ़कर 31,961 करोड़ रुपये पहुंच गया। वहीं SIP खातों की संख्या भी 12.5% बढ़कर 10.63 करोड़ हो गई।
हालांकि, औसत मासिक SIP योगदान में मामूली गिरावट आई। यह 3,012 रुपये से घटकर 3,007 रुपये रह गया।
म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री ने बनाया नया रिकॉर्ड
जुलाई में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर रिकॉर्ड 85.8 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। इस दौरान इक्विटी फंड्स का AUM 15.3% बढ़कर 38.40 लाख करोड़ रुपये हो गया। वहीं पैसिव फंड्स का AUM सालाना आधार पर 24% से ज्यादा बढ़ा।
सबसे ज्यादा पैसा कहां गया?
इक्विटी फंड्स के भीतर भी निवेशकों की पसंद साफ नजर आई। स्मॉलकैप फंड्स में जुलाई के दौरान 7,768 करोड़ रुपये आए, जबकि मिडकैप फंड्स में 6,192 करोड़ रुपये का निवेश हुआ। Vallum Capital के मुताबिक, जुलाई में माइक्रोकैप शेयर 4.6% और स्मॉलकैप शेयर 2.8% चढ़े।
निवेशकों ने क्यों सुरक्षित विकल्प चुने?
डेटा बताता है कि जुलाई में निवेशकों ने सिर्फ सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाली एसेट क्लास का पीछा नहीं किया। एक तरफ SIP और इक्विटी में निवेश जारी रहा, तो दूसरी तरफ बड़ी रकम मनी मार्केट और फिक्स्ड इनकम फंड्स में गई। इससे साफ है कि निवेशक बेहतर रिटर्न के साथ-साथ लिक्विडिटी और कम जोखिम वाले विकल्पों को भी प्राथमिकता दे रहे थे।
Vallum Capital का कहना है कि जुलाई में सोने की तेजी की बड़ी वजह अमेरिका की उम्मीद से कमजोर जॉब्स रिपोर्ट रही। इससे फेडरल रिजर्व की अगली ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीद कुछ कमजोर पड़ी। साथ ही अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नरमी ने भी सोने की कीमतों को सहारा दिया।
SBI खाताधारकों को बड़ा झटका! 1 अक्टूबर से बैंक से कैश निकालना होगा महंगा, जानें ये नया नियम
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।
कोटक एएमसी के एमडी और सीईओ निलेश शाह ने सेबी को एक खास सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि परिवारों को सेविंग्स का पैसा फाइनेंशियल एसेट्स में लगाने के लिए प्रोत्साहित करने की जरूरत है। इसके लिए सेबी को नए प्रोडक्ट स्ट्रक्चर पर विचार करना चाहिए। इनमें गोल्ड लिंक्ड प्रोडक्ट, चेक राइटिंग फैसिलिटी वाले मनी मार्केट फंड्स और रीट्स के लिए डेडिकेटेड म्यूचुअल फंड हो सकते हैं।
बड़ी संख्या में लोग घरों में सोना और कैश रखते हैं
शाह ने FICCI के 23वें एनुअल मार्केट्स कॉन्फ्रेंस में इनवेस्टमेंट के बारे में कई अहम बातें कहीं। उन्होंने कहा कि देश में बड़ी संख्या में लोग गोल्ड और कैश में पैसा रखते हैं। फाइनेंशियल इंडस्ट्री को ऐसे प्रोडक्ट्स लाने की जरूरत है, जिनमें लोग सेविंग्स का अपना पैसा लगा सकें।
शाह ने सेबी के होल-टाइम मेंबर के सवाल के दिए जवाब
कोटक एएमसी के प्रमुख ने सेबी के होल-टाइम मेंबर अमरजीत सिंह के उस सवाल का जवाब दिया, जिसमें उन्होंने पूछा था कि क्या मौजूदा नियम म्यूचुअल फंड्स को घरेलू सेविंग्स को अट्रैक्ट करने की पूरी छूट नहीं देते और क्या इंडियन मार्केट में प्रोडक्ट स्ट्रक्चर्स मौजूद नहीं हैं।
2005 में गोल्ड-लिंक्ड प्रोडक्ट शुरू करने पर हुआ था विचार
शाह ने एक प्रोडक्ट के बारे में बताया, जिसका प्रस्ताव 2005 में आया था। इस प्रोडक्ट में रिटेल इनवेस्टर के 100 रुपये के निवेश को गोल्ड-लिंक्ड ऑप्शन और गवर्नमेंट सिक्योरिटीज में बांटने का प्रस्ताव था। उन्होंने कहा, “हम रिटेल इनवेस्टर से 100 रुपये लेते और 7 रुपये गोल्ड ऑप्शन में लगाते। बाकी गवर्नमेंट सिक्योरिटीज में इनवेस्ट करते।”
रेगुलेशन से जुड़ी चिंता की वजह से बाजार में नहीं आ सका प्रोडक्ट
उन्होंने कहा, “हम ऐसे प्रोडक्ट पर विचार कर रहे थे, जिसमें गोल्ड की कीमतें गिरने पर निवेशकों का पैसा नहीं डूबता। लेकिन, गोल्ड की कीमतें बढ़ने पर उन्हें फायदा होता। इसके अलावा उन्हें अपने पैसे पर सुरक्षा मिलती। इतना ही नहीं, उन्हें कुछ रिटर्न भी मिलता।” लेकिन, रेगुलेटर से जुड़ी चिंता की वजह से यह प्रोडक्ट नहीं आ सका।
चेक-राइटिंग फैसिलिटी वाले मनी मार्केट प्रोडक्ट पर भी होना चाहिए विचार
शाह ने कहा कि ऐसे प्रोडक्ट पर हम फिर से विचार कर सकते है, क्योंकि अब देश के फाइनेंशियल मार्केट्स और रेगुलेटरी फ्रेमवर्क विकसित हो चुके हैं। उन्होंने एक मनी मार्केट फंड का भी प्रस्ताव दिया, जिसमें चेक-राइटिंग फैसिलिटी शामिल हो सकती है।
दुनियाभर में चेक-इन फैसिलिटी वाले मनी मार्केट फंड का होता है इस्तेमाल
उन्होंने कहा कि ऐसे प्रोडक्ट में बैंक अकाउंट जैसी लिक्विडिटी मिलेगी। साथ ही उतना रिटर्न मिलेगा जितना शॉर्ट टर्म मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश पर मिलता है। उन्होंने कहा, “दुनियाभर में इनवेस्टर्स चेक-इन फैसिलिटी वाले मनी मार्केट फंड में निवेश करते हैं और उसका इस्तेमाल पेमेंट के लिए करते हैं।”
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सिर्फ REITs में निवेश करना वाला फंड शुरू करने की सलाह
शाह ने कहा, “सेबी ने रिटेल इनवेस्टर्स को REIT में निवेश के लिए प्रोत्साहित करने के लिए काफी कोशिश की है। हमने रिटेल REIT में निवेश की इजाजत दी। क्या हम अब ऐसा फंड बना सकते हैं, जो सिर्फ रिटेल REIT में निवेश करेगा?” उन्होंने यह माना कि REIT की पर्याप्त लिस्टिंग, ट्रेड़िंग और सेकेंडरी मार्केट में लिक्विडिटी के बाद यह प्रोडक्ट अट्रैक्टिव बन सकता है।
SBI BSBD Account Withdrawal Charges: देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट (BSBD) खाताधारकों के लिए कैश निकालने के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। SBI शाखा से नकद पैसे निकालने पर नए सर्विस चार्ज लागू करने जा रहा है, जिसका सीधा असर आम ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा।
बैंक द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार, ये नए नियम 1 अक्टूबर से पूरे देश में लागू हो जाएंगे। अगर आपका भी SBI में बेसिक सेविंग्स अकाउंट है, तो आपके लिए इन नए नियमों को जानना बेहद जरूरी है।
1 अक्टूबर से क्या बदल जाएगा?
SBI के नए चार्ज शेड्यूल के मुताबिक, बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट (BSBD) अकाउंट (प्रॉडक्ट कोड: 1011-1701) के तहत हर महीने बैंक ब्रांच से 4 बार कैश निकालना पूरी तरह से मुफ्त रहेगा। साथ ही महीने में 4 बार से ज्यादा कैश निकालने पर ₹15 प्रति ट्रांजैक्शन + GST का चार्ज देना होगा।
अगर आप बैंक ब्रांच जाकर महीने में 6 बार कैश निकालते हैं, तो पहली 4 निकासी पर कोई चार्ज नहीं लगेगा। लेकिन 5वीं और 6ठी निकासी के लिए आपको ₹15 + GST प्रति ट्रांजैक्शन के हिसाब से अतिरिक्त चार्ज चुकाना पड़ेगा।
क्या होता है SBI Basic Savings (BSBD) अकाउंट?
बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट (BSBD) अकाउंट मुख्य रूप से समाज के उन वर्गों के लिए डिजाइन किया गया है जिन्हें बुनियादी बैंकिंग सुविधाएं चाहिए। इसमें न्यूनतम बैलेंस बनाए रखने का कोई झंझट नहीं होता। इस खाते में पैसे जमा करने और निकालने की बुनियादी सुविधाएं मुफ्त मिलती हैं, लेकिन ब्रांच से ज्यादा बार ट्रांजैक्शन करने पर अब बैंक ने लिमिट तय कर दी है।
किन ग्राहकों पर पड़ेगा इसका सीधा असर?
यह नया नियम केवल उन खाताधारकों को प्रभावित करेगा जो हर महीने 4 से अधिक बार SBI की शाखा जाकर नकद राशि निकालते हैं। जो ग्राहक डिजिटल बैंकिंग (UPI, नेट बैंकिंग) या ATM का सीमित इस्तेमाल करते हैं, उन पर इसका ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।
एक्स्ट्रा चार्ज से कैसे बचें?
कैश निकालने की योजना बनाएं: महीने की शुरुआत में ही अपनी जरूरत के हिसाब से बड़ी राशि निकालें, ताकि 4 की फ्री लिमिट खत्म न हो।
डिजिटल पेमेंट अपनाएं: दुकानों पर कैश देने के बजाय UPI, QR कोड या डेबिट कार्ड से भुगतान करें।
एटीएम का इस्तेमाल करें: छोटे खर्चों के लिए सीधे ब्रांच जाने से बचें।
Samsung Galaxy S26 Ultra: Samsung Galaxy S26 Ultra को Amazon पर ₹87,400 की प्रभावी कीमत में खरीदा जा सकता है। इसमें फोन की कीमत के साथ एक्सचेंज वैल्यू और अधिकतम मिलने वाला कैशबैक शामिल है। फिलहाल Galaxy S26 Ultra Amazon पर ₹1,24,999 में लिस्टेड है, जबकि इसकी लिस्टेड MRP ₹1,69,999 है।
हालांकि, ₹87,400 की प्रभावी कीमत तभी आपको मिल पाएगी, जब आपको एक्सचेंज पर बताई गई पूरी वैल्यू मिले और आप अधिकतम कैशबैक ऑफर के लिए पात्र हों।
Samsung Galaxy S26 Ultra: एक्सचेंज ऑफर
Amazon पर Samsung Galaxy S26 Ultra खरीदते समय Apple iPhone 16 (8GB+128GB) को एक्सचेंज करने पर ₹31,350 तक की एक्सचेंज वैल्यू मिल रही है। यह वैल्यू Amazon के एक्सचेंज पेज पर दिखाई गई खास कंडीशन और कॉन्फिगरेशन वाले फोन के लिए है।
हालांकि, यह एक्सचेंज वैल्यू तभी मिलेगी जब पुराना फोन बताई गई कंडीशन में हो। डिलीवरी के समय फोन की जांच और वेरिफिकेशन किया जाएगा, जिसके बाद एक्सचेंज की फाइनल वैल्यू तय होगी।
चुने गए एक्सचेंज ऑफर के लिए गणना इस प्रकार है:
| ऑफर | रकम |
|---|---|
| Galaxy S26 Ultra की कीमत | ₹1,24,999 |
| iPhone 16 की एक्सचेंज वैल्यू | ₹31,350 |
| एक्सचेंज के बाद कीमत | ₹93,649 |
| अधिकतम कैशबैक | ₹6,249 तक |
| प्रभावी कीमत | ₹87,400 |
Amazon यह भी बताता है कि अगर डिलीवरी के समय पुराना फोन बताई गई कंडीशन के मुताबिक नहीं मिलता है, तो भी कुछ मामलों में ग्राहक आंशिक एक्सचेंज डिस्काउंट का फायदा ले सकते हैं। इसके लिए उन्हें बची हुई रकम डिलीवरी एजेंट को देनी होगी।
वहीं, अगर पुराना फोन वेरिफिकेशन में पूरी तरह फेल हो जाता है, तो तय शर्तों के तहत ग्राहक कैश या कार्ड से एक्सचेंज डिस्काउंट की रकम चुकाकर नया फोन अपने पास रख सकते हैं।
6,249 रुपये तक का कैशबैक
Galaxy S26 Ultra की लिस्टिंग पर ₹6,249 तक का कैशबैक भी दिया जा रहा है। यह कैशबैक Amazon Pay Balance के रूप में मिलेगा और इसके लिए चुनिंदा क्रेडिट कार्ड से पेमेंट करना होगा। हालांकि, आपको मिलने वाला कैशबैक कितना होगा, यह आपके कार्ड और ऑफर की लागू शर्तों पर निर्भर करेगा।
प्रोडक्ट पेज पर नो-कॉस्ट EMI और बैंक डिस्काउंट जैसे कुछ अन्य ऑफर्स भी दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, इन ऑफर्स को ₹87,400 की प्रभावी कीमत में अपने आप शामिल नहीं किया जा सकता, क्योंकि इनका लाभ तभी मिलेगा जब आपका पेमेंट संबंधित ऑफर की शर्तों के तहत योग्य होगा।
Samsung Galaxy S26 Ultra: स्पेसिफिकेशन्स
यह ऑफर Galaxy S26 Ultra के 12GB RAM और 256GB स्टोरेज वाले वेरिएंट के लिए है। इस फोन में 200MP कैमरा, 5,000mAh की बैटरी और Snapdragon 8 Elite Gen 5 Galaxy प्रोसेसर दिया गया है।
Samsung ने इसमें बिल्ट-इन प्राइवेसी डिस्प्ले, Androi 16, One UI 8.5 और AI-पावर्ड फीचर्स जैसे नाउ Now Nudge, Finder, Photo Assist और Creative Studio भी शामिल किए हैं।
यह फोन 60W तक की चार्जिंग और 25W तक की वायरलेस चार्जिंग को सपोर्ट करता है।
क्या-क्या Galaxy S26 Ultra की यह डील खरीदने लायक है?
₹1,24,999 की कीमत पर Galaxy S26 Ultra अभी भी एक प्रीमियम स्मार्टफोन है। हालांकि, अगर आपके पास पहले से iPhone 16 है, तो एक्सचेंज ऑफर आपकी शुरुआती लागत को काफी कम कर सकता है। अगर iPhone 16 पर ₹31,350 की पूरी एक्सचेंज वैल्यू और ₹6,249 का अधिकतम कैशबैक मिलता है, तो Galaxy S26 Ultra की प्रभावी कीमत ₹87,400 रह जाती है।
हालांकि, अंतिम बचत एक्सचेंज किए गए फोन की स्थिति और वेरिफिकेशन के साथ-साथ कैशबैक ऑफर की पात्रता पर निर्भर करेगी।
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Sensex-Nifty closes red: होर्मुज को अमेरिकी नक्शे में दिखाने पर मची खलबली और कच्चे तेल में लगातार चौथे दिन उबाल पर एशियाई मार्केट झुलस गया और इसकी आंच घरेलू मार्केट में भी महसूस हुई। लगातार सातवें कारोबारी दिन आज मार्केट में बिकवाली का दबाव दिख रहा। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 400 प्वाइंट्स से अधिक टूट गया तो निफ्टी भी फिसलकर 24000 के करीब आ गया और दिन के आखिरी में ये गिरावट के साथ बंद हुए। ब्रोडर लेवल पर भी मार्केट में तेज दबाव दिखा। निफ्टी मिडकैप 100 आज 0.21% और निफ्टी स्मॉलकैप 100 भी 0.51% की गिरावट के साथ बंद हुआ।
की गिरावट के साथ बंद हुए।
सेक्टरवाइज आज आईटी सेक्टर ने मार्केट को संभालने की कोशिश की और निफ्टी आईटी आधे फीसदी से अधिक मजबूत हुआ। हालांकि एफएमसीजी और ऑटो सेक्टर में बिकवाली की आंधी ने मार्केट को तोड़ दिया। निफ्टी एफएमसीजी 0.55 तो निफ्टी ऑटो 0.27% की गिरावट के साथ बंद हुआ है। बिकवाली के इस माहौल में आज BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप ₹3 लाख करोड़ से अधिक घट गया।
अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो आज 19 अगस्त को सेंसेक्स (Sensex) 325.78 प्वाइंट्स यानी 0.42% की गिरावट के साथ 76,909.68 और निफ्टी 76.60 प्वाइंट्स यानी 0.32% की फिसलन के साथ 24,078.30 पर बंद हुआ है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 412.57 प्वाइंट्स टूटकर 76,822.89 और निफ्टी 129.25 प्वाइंट्स गिरकर 24,025.65 तक आ गया था। 10 अगस्त 2026 के लगभग फ्लैट क्लोजिंग 24,583.80 से निफ्टी इन सात दिनों में आज के इंट्रा-डे के निचले स्तर से 558.15 और सेंसेक्स 13 अगस्त को 0.15% की बढ़त के साथ 78,079.96 के क्लोजिंग से चार दिन में 1,257.07 प्वाइंट्स टूटा।
निवेशकों के ₹3.47 लाख करोड़ स्वाहा
एक कारोबारी दिन पहले यानी 18 अगस्त 2026 को बीएसई पर लिस्टेड सभी शेयरों का कुल मार्केट कैप ₹4,92,18,400.66 करोड़ था। आज यानी 18 अगस्त 2026 को यह घटकर ₹4,88,71,168.96 करोड़ पर आ गया। इसका मतलब हुआ कि निवेशकों की पूंजी में आज ₹347,231.69 करोड़ की गिरावट आई है।
Sensex के 9 स्टॉक्स ग्रीन
सेंसेक्स पर 30 शेयर लिस्टेड हैं जिसमें आज 9 ग्रीन जोन में बंद हुए हैं। दिन के आखिरी में आज एचसीएलटेक, जोमैटो की एटर्नल और कोटक बैंक में सबसे अधिक बढ़त रही तो दूसरी तरफ सबसे अधिक गिरावट पावरग्रिड, बजाज फाइनेंस और एलएंडटी में रही। नीचे सेंसेक्स पर लिस्टेड सभी शेयरों के लेटेस्ट भाव और आज उतार-चढ़ाव की डिटेल्स देख सकते हैं-

166 शेयर एक साल के हाई पर
बीएसई पर आज 4521 शेयरों की ट्रेडिंग हुई। इसमें 1807 शेयर आज मजबूत हुए तो 2483 में गिरावट रही जबकि 231 में कोई बदलाव नहीं हुआ। इसके अलावा 166 शेयर एक साल के हाई और 111 शेयर एक साल के निचले स्तर पर आ गए। वहीं 11 शेयर अपर सर्किट पर पहुंच गए तो 42 शेयर लोअर सर्किट पर आ गए।

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4 वजहों से मार्केट में मचा हाहाकार
Trading plan : कच्चे तेल में उछाल से बाजार में लगातार सातवें दिन भी बिकवाली देखने को मिल रही है। निफ्टी करीब 100 अंक प्वाइंट फिसलकर गिरकर 24050 के करीब करीब कारोबार कर रहा है। निफ्टी में लोअर हाईज,लोअर लोज का सिलसिला कायम है। बैंक निफ्टी में भी दबाव देखने को मिल रहा है। छोटे-मझोले शेयरों में भी आज बिकवाली आई है। लेकिन फीयर इंडेक्स INDIA VIX में कोई उछाल नहीं है।
डिफेंस शेयरों में आज तगड़ा करेक्शन देखने को मिल रहा है। डिफेंस इंडेक्स करीब 1.75 फीसदी फिसला है। सोलार इंडस्ट्रीज और BDL तीन फीसदी से ज्यादा फिसलकर वायदा के टॉप लूजर्स में शामिल हैं। कैपिटल गुड्स और केमिकल में भी दबाव है। लेकिन चुनिंदा EMS शेयरों में दूसरे दिन भी रौनक है। KAYNES TECH वायदा का टॉप गेनर बना है।
कमजोर बाजार में न्यू एज शेयर कमाल कर रहे हैं। करीब 2 फीसदी की तेजी के साथ इटरनल निफ्टी के टॉप गेनर्स में शुमार है। वहीं PAYTM, PB फिनटेक भी दो फीसदी से ज्यादा चढ़कर वायदा के टॉप गेनर्स में शामिल हैं। साथ ही नायिका,मीशो और ग्रो में भी जोश देखने को मिल रहा है।
चीनी शेयरों में मिठास बढ़ी है। त्योहारों से पहले चीनी के भाव बढ़ने और सप्लाई पर दबाव से इनकी रफ्तार में तेजी आई है। बजाज हिंदुस्तान 9% से ज्यादा चढ़ा है। साथ ही धामपुर,त्रिवेणी और रेणुका भी तीन से पांच फीसदी ऊपर हैं।
बाजार: एक और खराब दिन
बाजार पर अपनी राय साझा करते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने कहा कि बाजार में फिर गिरावट हावी हो गई है। CNBC-आवाज़ पर लगातार करेक्शन का नजरिया रहा है। 8 दिनों से लोअर हाईज का सिलसिला चल रहा है। निफ्टी और बैंक निफ्टी काफी अहम स्तर पर हैं। आज मिडकैप में भी काफी बिकवाली है। IPO बाजार गुलजार है और सेकेंडरी मार्केट खराब है। बड़े प्राइवेट बैंकों में फिर बिकवाली का दबाव है। चुनिंदा IT शेयरों में आज अच्छी रैली हुई है। India VIX आज भी सिर्फ 1% ही ऊपर है। बड़ा सवाल है कि क्या ये बड़ी वाली करेक्शन है या सिर्फ छोटी वाली?
बाजार: अब क्या?
CNBC-आवाज़ पर पिछले सोमवार से हमारा शॉर्ट का नजरिया रहा है। वहां से अब निफ्टी करीब 550-600 अंक गिर चुका है। लगातार बात हुई थी कि बाजार के इनटर्नल्स अच्छे नहीं हैं। VIX का खराब बाजार में ना चलना बड़ा निगेटिव था। FIIs का सीरीज के बीच में शॉर्ट जोड़ना निगेटिव था। अब निफ्टी का ट्रेंडलाइन सपोर्ट 23,950 पर है। बाजार में रिकवरी की उम्मीद यहीं से रहेगी।
निफ्टी-बैंक निफ्टी पर रणनीति
निफ्टी के लिए 23,950 पर सपोर्ट और 24,180-24,250 पर रेजिस्टेंस है। बैंक निफ्टी के लिए 56,800-57,000 पर सपोर्ट और 57,300-57,500 पर रेजिस्टेंस है।
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करीब तीन साल पहले ऑटो रिक्शा लगाने वाले एक शख्स के खाते में गलती से ₹9,000 करोड़ जमा हुए थे। इसके बाद प्राइवेट सेक्टर का दिग्गज बैंक तमिलनाड मर्केंटाइल बैंक (Tamilnad Mercantile Bank) जांच के घेरे में आ गया था। पैसा तो आधे घंटे के भीतर ही रिवर्स हो गया था लेकिन इस घटना ने बैंक के रिस्क मैनेजमेंट और विश्वसनीयता को लेकर सवाल खड़े कर दिए। हालांकि तूतीकोरिन में स्थित इस बैंक ने धीरे-धीरे अपनी तकनीकी क्षमताओं को मजबूत किया है और अब वह रियल-टाइम ट्रांजैक्शन मॉनिटरिंग और एआई-एनेबल्ड सिस्टम की तरफ बढ़ रहा है।
जब ₹9000 करोड़ की यह गलती हुई थी तो यह बैंक की ₹53 हजार करोड़ की बैलेंस शीट का एक बड़ा हिस्सा था। अब इस वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में बैंक की बैलेंस शीट बढ़कर करीब ₹75,300 करोड़ हो चुकी है।
कैसे हुई थी गलती और अब क्या बदला
करीब तीन साल पहले NACH (नेशनल ऑटोमेटेड क्लियरिंग हाउस) में फाइल अपलोड करते समय गलती से अकाउंट नंबर के आगे एक अतिरिक्त अंक जुड़ गया था। इसके बाद यह फाइल बैंक के कोर बैंकिंग सिस्टम (CBS) में अपलोड की गई। उस समय यह प्रोसेस मैनुअली होती थी। बैंक के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट और आईटी हेड डेविस जोस थेट्टायिल (Davis Jose Thettayil) ने मनीकंट्रोल से बातचीत में कहा कि बैंक के मुताबिक यह फाइल को प्रोसेस करते समय हुई एक मैनुअल गलती के कारण हुआ था। उससे सबक लेते हुए अब बैंक ने अपने सिस्टम में कई बदलाव किए है। डेविस पिछले साल से बैंक से जुड़े हैं और उन्होंने बताया कि बैंक ने अपने ट्रांजैक्शन-प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड किया है और फ्रॉड-मॉनिटरिंग सिस्टम भी लागू किया है।
सीबीएस और क्लियरिंग हाउसेज के बीच अब कोई नहीं
पहले RBI या क्लियरिंग हाउस से आने वाली फाइलें एक सिस्टम में आती थीं और फिर उन्हें मैन्युअली प्रोसेस करके कोर बैंकिंग सिस्टम में अपलोड किया जाता था जैसे कि NACH या CTS (Cheque Truncation System) से आने वाली फाइलों को मैनुअली अपलोड करना पड़ता था। अब बैंक ने इस बीच की मैनुअल प्रोसेस को हटा दिया है। डेविस के मुताबिक अब फाइलें सीधे क्लियरिंग हाउस से बैंक के कोर बैंकिंग सिस्टम तक पहुंचती हैं ताकि साल 2023 जैसी घटना दोबारा न हो। बैंक का कोर बैंकिंग सिस्टम अब इंफोसिस के फिनेकल (Finacle) पर है।
इस साल बैंक ने अपने इंटरनेट बैंकिंग प्लेटफॉर्म को भी इंफोसिस डिजिटल एंगेजमेंट हब (DEH) में अपग्रेड किया है। तमिलनाड मर्केंटाइल बैंक इस फीचर को लागू करने वाले शुरुआती बैंकों में से एक है। DEH एक ऐसा यूनिफाइड प्लेटफॉर्म है जो अलग-अलग डिवाइसेज पर ग्राहकों को बैंक के बैकएंड सिस्टम, जैसे कि कोर बैंकिंग, पेमेंट्स और ट्रेड फाइनेंस के साथ जोड़ता है।
फर्जीवाड़े पर रियल-टाइम में कंट्रोल
डेविस ने मनीकंट्रोल से बातचीत में कहा कि भारी-भरकम पैसों के लेन-देन पर नजर रखने के लिए एक लेवल सिक्योरिटी और जोड़ी गई है। अगर कोई ग्राहक अपनी सामान्य रकम से काफी ज्यादा का ट्रांजैक्शन करता है, तो फ्रॉड रिस्क मैनेजमेंट (FRM) टीम को फ्रॉड मॉनिटरिंग सिस्टम एक अलर्ट भेज देगी जिसके बाद बैंक ग्राहक को कॉल करके ट्रांजैक्शन के बारे में पक्का करेगा और फिर पैसा जारी होगा। डेविस का कहना है कि कम से कम 99% अलर्ट झूठे हो सकते हैं तो इससे बचने के लिए एआई के जरिए पॉजिटिव अलर्ट की पहचान की जाएगी ताकि बैंक की टीम सिर्फ असली एलर्ट पर ध्यान दे सकें। इसके अलावा बैंक ने हाल ही में एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग मैकेनिज्म को हाल ही में एआई से लैस किया था।
क्या है आगे की योजना
बैंक कस्टमर से जुड़ी जानकारी जैसे कि बातचीत, कॉल-सेंटर डेटा, ईमेल और दूसरी स्ट्रक्चर्ड और अनस्ट्रक्चर्ड जानकारी को एक जगह इकट्ठा करने के लिए एक डेटा लेक बनाने की योजना बना रहा है। बैंक एक एआई और एनालिटिक्स यूनिट भी बनाएगा ताकि इस डेटा का इस्तेमाल टारगेटेड मार्केटिंग, एनपीए का अनुमान लगाने और कस्टमर के बैंक छोड़ने पर नजर रखने जैसे कामों के लिए किया जा सके। बैंक की योजना साइबर सिक्योरिटी पर खर्च बढ़ाने की है और डेविस ने उम्मीद जताई है कि इस वित्त वर्ष में यह उसके आईटी बजट का लगभग 20% होगा।
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