PM Modi Independence Day Speech: ‘Fortune 500 में भारत की 50 कंपनियां क्यों नहीं?’ PM मोदी ने कॉरपोरेट सेक्टर के सामने रखा बड़ा लक्ष्य

PM Modi Independence Day Speech: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को देश के कारोबार जगत के सामने एक बड़ा और महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा। उन्होंने कहा कि आने वाले 10 साल में Fortune 500 की 50 कंपनियां भारत की क्यों नहीं हो सकतीं? पीएम मोदी ने भारतीय कंपनियों से बैंकिंग, फार्मास्यूटिकल्स, कंसल्टिंग, टेक्नोलॉजी समेत कई क्षेत्रों में दुनिया की अग्रणी कंपनियां बनने का आह्वान किया।

स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत को छोटी-छोटी उपलब्धियों से संतुष्ट नहीं होना चाहिए, बल्कि दुनिया में नेतृत्व करने का लक्ष्य रखना चाहिए।

‘Fortune 500 में शामिल हो भारत की 50 कंपनियां’

उन्होंने कहा, “हम अक्सर Fortune 500 कंपनियों के बारे में सुनते हैं। आने वाले दशक में Fortune 500 की 50 कंपनियां भारत की क्यों नहीं हो सकतीं? क्या यह हमारा लक्ष्य नहीं होना चाहिए?”

प्रधानमंत्री ने कहा कि बैंकिंग सेक्टर फल-फूल रहा है और सवाल किया कि कोई भारतीय बैंक दुनिया के टॉप पांच बैंकों में क्यों शामिल नहीं हो सकता। उन्होंने कहा, “भारत का कोई एक बैंक दुनिया के टॉप पांच बैंकों में शामिल होना चाहिए।”

फार्मास्युटिकल और बैंकिग सेक्टर भी आगे बढ़ें 

पीएम मोदी ने फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री के लिए भी एक बड़ा लक्ष्य तय किया और कहा कि भारत को अपनी मौजूदा खूबियों को ग्लोबल लीडरशिप में बदलना होगा। उन्होंने कहा, “भारत ने फार्मास्युटिकल सेक्टर में बहुत काम किया है। लेकिन अभी जरूरत इस बात की है कि भारत की कोई फार्मास्युटिकल कंपनी दुनिया की पांच सबसे बड़ी फार्मास्युटिकल कंपनियों में शामिल हो। भारत को वहां अपनी जगह बनानी होगी।”

प्रधानमंत्री का ग्लोबल लीडर बनने का विजन सिर्फ बैंकिंग और फार्मा तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने कहा कि भारतीय लॉ फर्म, रेटिंग एजेंसियां, कंसल्टिंग कंपनियां और अकाउंटिंग फर्म भी दुनिया में अपनी पहचान बनाएं। उन्होंने भारतीय टेक्नोलॉजी कंपनियों को भी वैश्विक स्तर पर नंबर-1 बनने का लक्ष्य रखने की बात कही।

उन्होंने कहा, “हमारी कंसल्टिंग या अकाउंटिंग फर्मों में से कोई एक दुनिया की टॉप फर्मों में शामिल होनी चाहिए। भारतीय टेक्नोलॉजी कंपनियों को दुनिया में लीडर बनना चाहिए। यही हमारा लक्ष्य होना चाहिए।”

ऐसे ब्रांड बनाएं जो दुनिया में भारत की पहचान बनें

उन्होंने भारतीय कंपनियों से ऐसे ब्रांड बनाने का भी आह्वान किया जो दुनिया भर में देश की पहचान बन सकें। उन्होंने कहा, “हमें ऐसे ब्रांड बनाने चाहिए जो दुनिया को आकर्षित करें। हमारे ब्रांड हमारे देश की पहचान बनें और भारत को दुनिया के लिए एक खास डेस्टिनेशन बनाएं।”

प्रधानमंत्री मोदी ने इस चुनौती को 2047 तक भारत को एक विकसित देश बनाने के बड़े लक्ष्य से जोड़ा। उन्होंने कहा कि इसे हासिल करने के लिए तेजी से सुधार करने और केंद्र, राज्यों, स्थानीय सरकारों और इंडस्ट्री के बीच बेहतर सहयोग की जरूरत होगी। उन्होंने कहा, “हमें अपने सुधारों की रफ्तार बढ़ानी होगी। हमें 2047 के लक्ष्य के हिसाब से अपने सिस्टम को विकसित करना होगा।” उन्होंने यह भी कहा कि भारत अब “पुरानी नीतियों और नियमों” के आधार पर नहीं चल सकता।

प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि सुधार मजबूरी के बजाय महत्वाकांक्षा से प्रेरित होने चाहिए। उन्होंने कहा, “हम सुधार मजबूरी में नहीं, बल्कि पूरे विश्वास के साथ कर रहे हैं। हम अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए ये सुधार कर रहे हैं।”

पीएम मोदी ने इस चुनौती को एक सामूहिक राष्ट्रीय परियोजना के तौर पर भी पेश किया और कहा कि भारत की तरक्की सिर्फ सरकार के दम पर नहीं हो सकती। उन्होंने कहा, “राष्ट्र का मतलब सिर्फ सरकार नहीं है। राष्ट्र में हर नागरिक शामिल होता है।”

यह भी पढ़ें: Independence Day 2026: बड़े सपने देखने’ से लेकर ‘विकसित भारत’ के संकल्प तक, PM मोदी के भाषण की बड़ी बातें

Patanjali Foods Q1 Results: प्रॉफिट 86% बढ़कर ₹335 करोड़, दो अंतरिम डिविडेंड का ऐलान

पतंजलि फूड्स ने जून तिमाही के नतीजों का ऐलान किया है। इस दौरान कंपनी का प्रदर्शन अच्छा रहा। एफएमसीजी और ए़डिबल ऑयल बिजनेसेज में अच्छी ग्रोथ दिखी। जून तिमाही में कंपनी का कंसॉलिडेटेड प्रॉफिट 86 फीसदी बढ़कर 335.7 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले की समान अवधि में यह 180.4 करोड़ रुपये था।

रेवेन्यू 29 फीसदी बढ़कर 11337 करोड़ रुपये

Patanjali Foods का ऑपरेशंस से रेवेन्यू जून तिमाही में 29 फीसदी बढ़कर 11,337.5 करोड़ रुपये रहा। EBITDA 69 फीसदी बढ़कर 543.3 करोड़ रुपये रहा। एबिड्टा मार्जिन भी इस दौरान बढ़कर 4.8 फीसदी हो गया। एक साल पहले की समान अवधि में यह 3.7 फीसदी था। कंपनी ने कहा है कि लगातार चौथी तिमाही कंपनी ने सबसे ज्यादा रेवेन्यू हासिल किया।

अच्छे प्रदर्शन में एफएमसीजी बिजनेस का बड़ा हाथ

जून तिमाही में अच्छे प्रदर्शन में एफएमसीजी सेगमेंट का सबसे बड़ा हाथ रहा। इस सेगमेंट का रेवेन्यू साल दर साल आधार पर 35.39 फीसदी बढकर 2,937.75 करोड़ रुपये रहा। एडिबल ऑयल बिजनेस का रेवेन्यू 27.28 फीसदी बढ़क 8,504.72 करोड़ रुपये रहा।

ब्रांड और डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क को मजबूत बनाने पर फोकस

पतंजलि फूड्स के सीईओ संजीव अस्थाना ने कहा कि कंपनी का फोकस ब्रांड को मजूबत बनाने, डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क और कॉस्ट मैनेजमेंट पर बना हुआ है। उन्होंने कहा, “हम लगातार रेवेन्यू के नए कीर्तिमान बना रहे हैं। यह तब है जब ऑपरेटिंग इनवायरमेंट लगातार बदल रहा है।”

कंपनी ने शेयरहोल्डर्स के लिए दो अंतरिम डिविडेंड का एलान किया

पतंजलि फूड्स ने तीसरे अंतरिम डिविडेंड का ऐलान किया। FY26 के लिए यह प्रति शेयर 1.50 रुपये होगा। कंपनी ने FY27 के पहले अंतरिम डिविडेंड का भी ऐलान किया। यह प्रति शेयर 0.80 रुपये होगा। दोनों को मिलाकर प्रति शेयर डिविडेंड 2.30 रुपये होगा। दोनों डिविडेंड के लिए रिकॉर्ड डेट 21 अगस्त होगी।

14 अगस्त को कंपनी के शेयर गिरकर हुए बंद

कंपनी ने आचार्य बालकृष्णन को दोबारा चेयरमैन और नॉन-एग्जिक्यूटिव नॉन-इंडिपेंडेंट डायरेक्टर नियुक्त करने का ऐलान किया। कंपनी अगली एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में इस प्रस्ताव पर शेयरहोल्डर्स का एप्रूवल हासिल करेगी। Patanjali Foods का शेयर 14 अगस्त को एनएसई पर 0.52 फीसदी गिरकर 352 रुपये पर बंद हुआ।

यह भी पढ़ें: Rakesh Jhunjhunwala Death Anniversary: राकेश झुनझुनवाला के 10 निवेश मंत्र, इन्हें हर इनवेस्टर को जानना चाहिए

बीते एक साल में 41 फीसदी गिरा है शेयर 

पतंजलि फूड्स का शेयर बीते एक साल में करीब 41 फीसदी गिरा है। 2026 में यह शेयर अब तक 36 फीसदी से ज्यादा गिर चुका। कंपनी ने जून तिमाही के नतीजों का ऐलान 14 अगस्त को शेयर बाजार बंद होने के बाद किया। 16 अगस्त को शेयर बाजार खुलने पर शेयरों पर जून तिमाही के नतीजों का असर दिखेगा।

Petrol Diesel Price Today: 15 अगस्त को पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर, जानें आपके शहर में आज का रेट

Petrol Diesel Price Today: हर दिन की शुरुआत सिर्फ सूरज की किरणों से नहीं होती, बल्कि पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों से भी होती है, जो आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालती हैं। सुबह 6 बजे देश की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) ताजा दरें जारी करती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपए की विनिमय दर में आए बदलावों पर आधारित होती हैं। ये बदलाव रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं, चाहे वो ऑफिस जाने वाला व्यक्ति हो या फल-सब्जी बेचने वाला व्यापारी।

ऐसे में हर दिन की कीमतों की जानकारी रखना सिर्फ जरूरी ही नहीं, बल्कि समझदारी भी है। सरकार की यह प्रणाली पारदर्शिता सुनिश्चित करती है ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की भ्रमित जानकारी न मिले।

आपके शहर में आज का पेट्रोल-डीजल का भाव

ये रहे 15 आगस्त 2026 के प्रमुख शहरों के पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट

नई दिल्ली: पेट्रोल ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर।

मुंबई: पेट्रोल ₹111.18 और डीजल ₹97.83 प्रति लीटर।

कोलकाता: पेट्रोल ₹113.47 जबकि डीजल ₹99.82 प्रति लीटर।

चेन्नई: पेट्रोल ₹107.77 और डीजल ₹99.55 प्रति लीटर।

गुरुग्राम: पेट्रोल ₹102.77 तथा डीजल ₹95.44 प्रति लीटर।

नोएडा: पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹95.56 प्रति लीटर।

बेंगलुरु: पेट्रोल ₹110.93 जबकि डीजल ₹98.80 प्रति लीटर।

भुवनेश्वर: पेट्रोल ₹109.92 और डीजल ₹100.92 प्रति लीटर।

चंडीगढ़: पेट्रोल ₹98.10 तथा डीजल ₹86.09 प्रति लीटर।

हैदराबाद: पेट्रोल ₹115.69 और डीजल ₹103.82 प्रति लीटर।

जयपुर: पेट्रोल ₹112.66 जबकि डीजल ₹97.78 प्रति लीटर।

लखनऊ: पेट्रोल ₹102.05 और डीजल ₹95.55 प्रति लीटर।

पटना: पेट्रोल ₹113.35 तथा डीजल ₹99.36 प्रति लीटर।

तिरुवनंतपुरम: पेट्रोल ₹115.49 और डीजल ₹104.40 प्रति लीटर।

पिछले दो साल से स्थिर क्यों हैं कीमतें?

मई 2022 के बाद से केंद्र और कई राज्यों द्वारा टैक्स में कटौती की गई, जिसके बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता देखी जा रही है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव होता रहता है, फिर भी भारतीय उपभोक्ताओं के लिए कीमतें तुलनात्मक रूप से स्थिर बनी हुई हैं।

किन कारणों से तय होती हैं ईंधन की कीमतें?

  1. कच्चे तेल की कीमतें:

पेट्रोल और डीजल का उत्पादन मुख्य रूप से कच्चे तेल से होता है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ता है।

  1. डॉलर के मुकाबले रुपया:

भारत अधिकतर कच्चा तेल आयात करता है, और यह डॉलर में खरीदा जाता है। यदि रुपया कमजोर होता है, तो ईंधन महंगा हो जाता है।

  1. सरकारी टैक्स और शुल्क:

केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स लगाती हैं, जो खुदरा मूल्य का बड़ा हिस्सा होते हैं। यही कारण है कि राज्यों में कीमतों में अंतर होता है।

  1. रिफाइनिंग की लागत:

कच्चे तेल को इस्तेमाल लायक बनाने की प्रक्रिया (रिफाइनिंग) में भी खर्च होता है। ये लागत कच्चे तेल की गुणवत्ता और रिफाइनरी की क्षमता पर निर्भर करती है।

  1. मांग और आपूर्ति का संतुलन:

बाजार में ईंधन की मांग अगर बढ़ जाती है, तो कीमतें भी ऊपर जाने लगती हैं। खासकर त्योहारों, गर्मी या सर्दी के मौसम में ईंधन की खपत ज्यादा होती है।

कैसे करें अपने शहर की कीमतें SMS से चेक?

अगर आप मोबाइल से ईंधन की कीमत जानना चाहते हैं, तो ये प्रक्रिया आसान है:

Indian Oil ग्राहक: अपने शहर का कोड टाइप करें और उसे “RSP” के साथ 9224992249 पर भेजें।

BPCL ग्राहक: “RSP” लिखकर 9223112222 पर भेजें।

HPCL ग्राहक: “HP Price” लिखकर 9222201122 पर भेजें।

Gold Price Today on I-Day: स्वतंत्रता दिवस पर सोना हुआ सस्ता, 24 और 22 कैरेट दोनों का लुढ़का भाव

आज, शनिवार को पूरा देश 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। 15 अगस्त के दिन देश में सोने की कीमत में गिरावट दिख रही है। राजधानी दिल्ली में सुबह के वक्त 24 कैरेट गोल्ड की कीमत घटकर 153030 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गई। अन्य शहरों में भी ​सोने का भाव टूटा है। सोने में हाल के दिनों में दिखी तेजी के बाद मुनाफावसूली हुई, जिससे कीमतें ​नीचे आई हैं।

हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने में हल्की तेजी है। हाजिर सोना 4,379.95 डॉलर प्रति औंस हो गया है। डॉलर में आई कमजोरी से सोने की वैश्विक कीमतों को बल मिला है। इस हफ्ते आए अमेरिकी महंगाई के आंकड़े उम्मीद के मुताबिक रहे, जिससे संकेत मिला कि अमेरिका का केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व अगले महीने होने वाली मीटिंग में बेंचमार्क ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा।

अमेरिका में लेबर डिपार्टमेंट के ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स के मुताबिक, जुलाई महीने में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स में 0.1 प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी हुई, जबकि जून में गिरावट आई थी। वहीं जुलाई तक के 12 महीनों में अमेरिका में खुदरा महंगाई 3.4 प्रतिशत बढ़ी। यह अर्थशास्त्रियों के अनुमान के मुताबिक रही। US प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स में जून के मुकाबले कोई बदलाव नहीं हुआ। जुलाई तक के 12 महीनों में यानि​ कि सालाना आधार पर प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स में 4.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

देश के कुछ बड़े शहरों में गोल्ड रेट

दिल्ली में सोने की कीमतदिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 153030 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 140290 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

मुंबई और कोलकाता: मुंबई और कोलकाता में 22 कैरेट सोने की कीमत 140140 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 152880 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

चेन्नई में सोने की कीमत: 24 कैरेट सोने की कीमत 153160 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 140390 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

पुणे और बेंगलुरु में कीमत: इन दोनों शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 152880 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 140140 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

शहर22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)
दिल्ली140290153030
मुंबई140140152880
अहमदाबाद140190152930
चेन्नई140390153160
कोलकाता140140152880
हैदराबाद140140152880
जयपुर140290153030
भोपाल140190152930
लखनऊ140290153030
चंडीगढ़140290153030

चांदी की कीमत

सोने की तरह दूसरी कीमती धातु चांदी की कीमत में भी गिरावट है। 15 अगस्त की सुबह कीमत गिरकर 254900 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी यानि कि स्पॉट सिल्वर की कीमत 64.88 डॉलर प्रति औंस है।

Indonesia Earthquake: इंडोनेशिया में फिर कांपी धरती, 7.6 की जोरदार भूकंप से हिला फ्लोरेस आईलैंड, सुनामी को लेकर अलर्ट

इंडोनेशिया के फ्लोरेस द्वीप के पास शनिवार तड़के आए 7.6 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने लोगों में दहशत पैदा कर दी। तेज झटकों के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक, भूकंप का केंद्र एंडे शहर से करीब 68 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में समुद्र के भीतर था। भूकंप महज 10 किलोमीटर की उथली गहराई पर आया, जिससे इसके प्रभाव को लेकर चिंता बढ़ गई। मुख्य झटके के बाद उसी क्षेत्र में 5.6 और 5.9 तीव्रता के दो मजबूत आफ्टरशॉक्स भी दर्ज किए गए।

भूकंप के बाद इंडोनेशिया की मौसम, जलवायु और भूभौतिकी एजेंसी (BMKG) ने संभावित सुनामी को लेकर चेतावनी जारी की। समुद्र में आए इस शक्तिशाली भूकंप के बाद प्रशासन और स्थानीय लोगों की निगाहें संभावित सुनामी लहरों पर टिकी हैं। इंडोनेशिया पहले से ही भूकंप और सुनामी के लिहाज से बेहद संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है।

5.6 और 5.9 तीव्रता के आफ्टरशॉक्स

मुख्य भूकंप के बाद उसी क्षेत्र में दो तेज झटके भी महसूस किए गए। इनकी तीव्रता क्रमशः 5.6 और 5.9 मापी गई। लगातार आए झटकों से स्थानीय स्तर पर चिंता बढ़ गई।

सुनामी को लेकर अलर्ट

भूकंप के बाद इंडोनेशिया की मौसम विज्ञान, जलवायु विज्ञान और भूभौतिकी एजेंसी (BMKG) ने संभावित सुनामी लहरों को लेकर चेतावनी जारी की। समुद्र के भीतर आए शक्तिशाली और उथले भूकंप के कारण सुनामी का खतरा पैदा हो सकता है।

‘रिंग ऑफ फायर’ में स्थित है इंडोनेशिया

इसका प्रमुख कारण इनका प्रशांत महासागर के ‘रिंग ऑफ फायर’ क्षेत्र में स्थित होना है। यह दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्रों में से एक है, जो जापान से दक्षिण-पूर्व एशिया होते हुए प्रशांत महासागर के आसपास तक फैला हुआ है।

Lamborghini Revuelto SV debuts as supercar’s track-focused version

Lamborghini Revuelto SV debuts as supercar's track-focused version
Lamborghini Revuelto SV in studio

Lamborghini has unveiled the Revuelto Super Veloce (SV), a more extreme version of the Italian marque’s flagship series-production supercar. Only 1,963 units of the Revuelto SV will be built – a reference to Lamborghini’s founding year – and that too for the brand’s “most loyal customers and collectors.” Pricing has not been disclosed yet, but the SV is expected to command a significant premium over the vanilla Revuelto, which costs Rs 8.89 crore before options. 

Lamborghini Revuelto SV powertrain and performance

Makes 50hp more than the standard Revuelto

The Revuelto SV carries forward the standard model’s 825hp 6.5-litre naturally aspirated V12 (which revs to a wailing 9,500rpm), 7.3kWh battery pack, and trio of electric motors, but the latter’s output has been uprated from 190hp to 299hp. Combined output for the Revuelto SV’s V12 PHEV powertrain stands at 1,065hp – up 50hp over the standard version. The 8-speed dual-clutch automatic gearbox and AWD layout remain unchanged.

0-100kph flashes by in a brisk 2.4 seconds (claimed) for the Revuelto SV, with 0-200kph taking just 6.7 seconds. The top speed, meanwhile, remains in excess of 345kph. A new sports exhaust system is part of the package, and thanks to weight savings, the Revuelto SV boasts a power-to-weight ratio of 602.4hp/tonne, which is up from the standard version’s 571.4hp/tonne. A new ‘Pilota’ drive mode has been introduced too, unlocking a custom motorsport-derived state of tune built around a bespoke five-stage traction control system that adapts to track conditions and tyre wear.

Enhanced suspension damping and braking system

On the dynamics front, Lamborghini has upgraded the Revuelto SV’s suspension with manually adjustable dampers derived from GT3 racing, which promise a 17 percent increase in agility and a 10 percent bump in lateral grip over the Revuelto. The SV also packs a revised braking control system and new CCM-R carbon-ceramic brake discs (420mm up front, 410mm at the rear), claiming an 11 percent higher peak deceleration, 23 percent better heat dissipation, and a 12 percent drop in brake disc temperatures.

Thanks to all of the aforementioned mechanical improvements, the Revuelto SV clocked a lap time of 1:41.6 around Hockenheimring, making it the second-fastest car to be officially timed at the German circuit.

Lamborghini Revuelto SV exterior updates

More menacing body kit

On the outside, the Revuelto SV looks much more aggressive than the standard version, courtesy of a new front diffuser with red accents, a revised rear diffuser, a massive rear wing, exclusive SV liveries and badging, contrast accents, and extensive use of carbon-fibre trim pieces. It also features a fresh set of lightweight centre-lock alloy wheels (20 inches front, 21 inches rear) shod in bespoke Bridgestone Potenza Race R tyres.

Lamborghini Revuelto SV interior updates

Bucket seats and new interior finishes

The Revuelto SV’s interior layout is largely unchanged from that of the standard version, but you do get new racing bucket seats, SV badging, and an expanded roster of upholsteries and colour options.

दावा- चीनी सामान भारत के रास्ते अमेरिका भेजा जा रहा:टैरिफ से बचने की कोशिश; अमेरिकी रिपोर्ट में पुणे, गुजरात और चेन्नई नेटवर्क का हिस्सा

अमेरिकी टैरिफ से बचने के लिए चीनी प्रोडक्ट्स को भारत के रास्ते अमेरिकी बाजारों में पहुंचाया जा रहा है। यह दावा व्हाइट हाउस की रिपोर्ट ‘द ग्रेट ट्रांसशिपमेंट स्कैम: राइज, स्कोप एंड कॉस्ट्स’ में किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन से आने वाले सामान या पार्ट्स को पहले भारत समेत दूसरे एशियाई देशों में भेजा जाता है। वहां उन्हें प्रोसेस, असेंबल या किसी दूसरे प्रोडक्ट में इस्तेमाल किया जाता है। इसके बाद तैयार सामान को अमेरिका निर्यात किया जाता है। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि इससे चीन पर लगाए गए टैरिफ से बचने का रास्ता मिल सकता है। रिपोर्ट में इसके लिए दुनिया भर में ट्रेड रूट्स का नेटवर्क बनने की बात कही गई है। भारत के पुणे, गुजरात और चेन्नई को चीन से आने वाले सामान के एक अहम रास्ते के तौर पर बताया गया है। रिपोर्ट में यहां बनने वाले इंडस्ट्रियल पंप और कंप्रेसर में चीनी पार्ट्स का इस्तेमाल होने की संभावना का खास तौर पर जिक्र किया गया है। रिपोर्ट में रूट नेटवर्क को ‘अग्ली सिस्टर सिटीज’ कहा गया चीनी सामान को तीसरे देशों के जरिए अमेरिका भेजने के लिए इस्तेमाल हो रहे रूट नेटवर्क को रिपोर्ट में ‘अग्ली सिस्टर सिटीज’ कहा गया है। इसका मतलब शहरों की सुंदरता या बदसूरती से नहीं है। यह शब्द अलग-अलग देशों के ऐसे औद्योगिक शहरों के लिए इस्तेमाल किया गया है, जहां एक जैसे प्रोडक्ट बनते हैं और वे अमेरिकी बाजार में एक-दूसरे से मुकाबला करते हैं। भारत के मामले में रिपोर्ट ने पुणे, गुजरात और चेन्नई की तुलना अमेरिका के ओहायो राज्य के सिनसिनाटी, डेटन और कोलंबस से की है। इन अमेरिकी शहरों में भी पंप, कंप्रेसर और दूसरे औद्योगिक सामान का उत्पादन और कारोबार होता है। रिपोर्ट का तर्क है कि अगर तीसरे देशों के जरिए कम टैरिफ पर सामान अमेरिका पहुंचता है, तो वहां के स्थानीय निर्माताओं को नुकसान हो सकता है। अमेरिकी कंपनियों को कम कीमत वाले आयात से मुकाबला करना पड़ सकता है। इसका असर उत्पादन, ऑर्डर और नौकरियों पर भी पड़ सकता है। मलेशिया, इंडोनेशिया, वियतनाम और थाईलैंड का भी जिक्र व्हाइट हाउस की रिपोर्ट में सिर्फ भारत का जिक्र नहीं है। इसमें मलेशिया, इंडोनेशिया, वियतनाम और थाईलैंड के उन इलाकों का भी जिक्र है, जहां बड़े पैमाने पर सामान बनाया और दूसरे देशों को भेजा जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक ऐसे रास्तों से हर साल अरबों डॉलर का सामान अमेरिकी बाजार तक पहुंच सकता है, जिसमें चीनी पार्ट्स का इस्तेमाल किया गया हो। क्या ये टैरिफ से बचने की कोशिश को साबित करता है? किसी प्रोडक्ट में चीनी पार्ट का इस्तेमाल होना और चीन का सामान सिर्फ भारत के रास्ते अमेरिका भेजना, दोनों अलग बातें हैं। अगर भारत में किसी प्रोडक्ट की असली मैन्युफैक्चरिंग, असेंबली और उस पर काफी काम हो रहा है, तो उसे सिर्फ चीन का सामान घुमाकर अमेरिका भेजना नहीं माना जा सकता। इसलिए यह देखा जाता है कि प्रोडक्ट बनाने में असल काम और प्रोडक्ट की कीमत में कितना हिस्सा किस देश में तैयार हुआ है। सिर्फ किसी प्रोडक्ट में चीनी पार्ट लगा होने से यह साबित नहीं होता कि टैरिफ से बचने की कोशिश हुई है। आज की ग्लोबल सप्लाई चेन में एक प्रोडक्ट के अलग-अलग पार्ट कई देशों में बनते हैं और उसकी आखिरी असेंबली किसी दूसरे देश में हो सकती है। अमेरिका अब AI और डेटा से संदिग्ध शिपमेंट पकड़ेगा रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब अमेरिका तीसरे देशों के जरिए टैरिफ से बचने की कोशिशों पर निगरानी बढ़ा रहा है। व्हाइट हाउस ने सीमा पर आने वाले सामान की जांच में टेक्नोलॉजी और डेटा एनालिसिस के ज्यादा इस्तेमाल की बात कही है। रिपोर्ट में ऐसे AI सिस्टम का भी जिक्र है, जो अमेरिकी कस्टम अधिकारियों को संदिग्ध शिपमेंट की पहचान करने में मदद कर सकता है। इसका मकसद पूरी सप्लाई चेन को ट्रैक करना है। —————— यह खबर भी पढ़ें… अमेरिकी सर्वे-10 में 9 पाकिस्तानी भारत को खतरा मानते हैं: भारतीयों के लिए रूस सबसे अहम पार्टनर, पाकिस्तानियों की पहली पसंद चीन 10 में से 9 पाकिस्तानी भारत को खतरा मानते हैं, ये बात अमेरिकी प्यू रिसर्च सेंटर के सर्वे में सामने आई है। इंडियंस भी अपना सबसे बड़ा दुश्मन पाकिस्तान को ही मानते हैं। सर्वे में कहा गया कि दोनों देशों के लोग पड़ोसी के साथ अच्छे रिश्ते चाहते हैं, लेकिन भरोसे की कमी है। पूरी खबर पढ़ें…

सावन मास में अयोध्या में श्रद्धालुओं का सैलाब, अब तक 35 लाख से ज्यादा लोग पहुंचे

सावन मास में अयोध्या में श्रद्धालुओं का सैलाब, अब तक 35 लाख से ज्यादा लोग पहुंचे

Shravan month Ayodhya Ramlala Darshan: श्रावण मास में श्रीराम की पावन नगरी अयोध्या धाम में आस्था और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। देश के विभिन्न राज्यों एवं जनपदों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु अयोध्या पहुंचकर श्री रामलला के दर्शन-पूजन के साथ ही प्रमुख मंदिरों में पूजा-अर्चना कर रहे हैं तथा भगवान शिव के मंदिरों में जलाभिषेक कर रहे हैं। श्रावण मास के दौरान अब तक 35 लाख से अधिक श्रद्धालु अयोध्या धाम पहुंचकर दर्शन-पूजन कर चुके हैं।

 

इस वर्ष श्री रामलला के दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भी लगातार वृद्धि हो रही है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार 10 प्रतिशत से अधिक श्रद्धालुओं ने श्री रामलला के दर्शन किए हैं। प्रत्येक शनिवार एवं रविवार को भी एक लाख से अधिक श्रद्धालु अयोध्या धाम पहुंच रहे हैं।

 

श्रावण मास के प्रथम सोमवार को लगभग 3 लाख श्रद्धालुओं ने अयोध्या पहुंचकर दर्शन-पूजन किया, जबकि द्वितीय सोमवार को श्रद्धालुओं की संख्या बढ़कर लगभग 6 लाख तक पहुंच गई। लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए जिला प्रशासन एवं पुलिस द्वारा भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा, यातायात एवं श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर व्यापक स्तर पर व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।

भीड़ प्रबंधन एवं यातायात व्यवस्था पर विशेष फोकस

जिला प्रशासन द्वारा प्रमुख मंदिरों, घाटों एवं भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में लगातार निगरानी की जा रही है। श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन के लिए यातायात व्यवस्था को व्यवस्थित रखने के साथ ही आवश्यकता के अनुसार रूट डायवर्जन, बैरिकेडिंग एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। भीड़ के दबाव वाले क्षेत्रों में अधिकारियों एवं पुलिस बल की तैनाती कर स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। इसके लिए उच्च अधिकारी स्वयं रात्रि में भी मेला क्षेत्र का भ्रमण कर स्थिति का अवलोकन कर रहे है।

 

श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पेयजल, चिकित्सा, स्वच्छता, शौचालय, प्रकाश एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। घाटों एवं प्रमुख धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था को भी सुदृढ़ रखा गया है।

नोटों की गिनती के लिए नई व्यवस्था

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर मे विगत दिनों हुए चढ़ावा व दान चोरी की घटना ने सभी को हिला कर रख दिया हालांकि जांच अभी चल रही है। दोषी पाए गए आरोपियों को रिमांड पर लिया जा चुका है। इस बीच, SBI प्रबंधन राम मंदिर में नोटों की गिनती के लिए अपनी व्यवस्था मे बड़ा परिवर्तन करते हुए सेना के सेवानिवृत 10 कर्मियों का चुनाव किया है साथ ही इनका एक प्रभारी भी नियुक्त किया गया है।

 

वहीं दूसरी तरफ राम मंदिर में सिक्योरिटी सर्विस की सेवा समाप्ति के लिए सरकूलर जारी कर दिया गया है। जानकारी दे दें कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर ने दान व चढ़ावे चोरी की घटना के बाद SBI प्रबंधन ने सेक्युरिटी सेवा की समाप्ति के लिए एक सरकूलर भी जारी कर दिया है क्योंकि जेल मे बंद आठ आरोपियों मे से छह आरोपी इसी सिक्योरिटी एजेंसी के ही हैं। 

Independence Day Special: आजादी के साल में सोने में ₹1000 का निवेश आज बढ़कर कितना हुआ होता?

Independence Day Special: भारत 1947 में आजाद हुआ था। तब सोने की कीमत सिर्फ 88.62 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। करीब 80 साल बाद सोने की कीमत 1.51 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम है। इसका मतलब है कि 80 साल में सोने की कीमत 1,711 गुना हो गई है। सवाल है कि अगर किसी ने तब सोने में 1000 रुपये का निवेश किया होता तो आज उसकी वैल्यू कितनी होती?

1947 से अब तक सोने की कीमतें सालाना 9.9 फीसदी बढ़ी हैं

1947 में सोने में 1000 रुपये के निवेश की वैल्यू आज बढ़कर 17.1 लाख रुपये हो गई होती। इसका मतलब है कि इस दौरान सोने की कीमत सालाना करीब 9.9 फीसदी बढ़ी हैं। हालांकि, इस दौरान सोने की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव रहा। किसी खास पीरियड में सोने की कीमतों में नरमी दिखी तो किसी दूसरे पीरियड में ज्यादा तेजी दिखी।

1980 में सोने का भाव 1000 रुपये प्रति 10 ग्राम था

1950 में सोने का भाव 99.18 रुपये प्रति 10 ग्राम था। लेकिन, 1964 में कीमत गिरकर 63.25 रुपये पर आ गई। 1970 में फिर से भाव चढ़कर 184.50 रुपये पर पहुंच गया। 1980 तक भाव 1000 रुपये प्रति 10 ग्राम के लेवल को पार कर गया। तब इसका भाव 1,330 रुपये प्रति 10 ग्राम था।

साल 2000 के बाद से सोने की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं

साल 2000 के बाद सोने की कीमतों की रफ्तार काफी तेज रही। 2000-01 में सोने का औसत भाव 4,473.60 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा। 2010-11 में यह बढ़कर 19,227.08 रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंच गया। 2020-21 में सोने का भाव 48,723.22 रुपये पर पहुंच गया। 2024-25 में औसत भाव 75,841.87 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा।

1970-71 के मुकाबले आज चांदी की कीमत 370 गुना हो गई है

चांदी की बात की जाए तो 1970-71 से इसका आरबीआई का रेट उपलब्ध है। तब एक किलो चांदी की कीमत 536.08 रुपये थी। 14 अगस्त, 2026 को चांदी का भाव 1,98,461 रुपये प्रति किलोग्राम थी। इसका मतलब है इस दौरान चांदी कीमतें करीब 370 गुना हो गई हैं। सोने और चांदी को दशकों से सुरक्षित निवेश का सबसे भरोसेमंद जरिया माना जाता है।

यह भी पढ़ें: Gold Silver Prices Today: दिल्ली में सोना लगातार दूसरे दिन गिरा, चांदी की कीमतें अपरिवर्तित

सोने और चांदी की कीमतों का कैलकुलेशन PIB और RBI के डेटा के आधार पर

सोने की कीमतों का एतिहासिक डेटा प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो और इंडियन इकोनॉमी पर आरबीआई की हैंडबुक पर आधारित है। आरबीआई इस हैंडबुक में गोल्ड और सिल्वर के प्राइसेज पब्लिश करता है। कीमतों का उपर्युक्त कैलकुलेशन इसी दोनों स्रोतों से उपलब्ध डेटा के आधार पर किया गया है।

Gold Silver Prices Today: दिल्ली में सोना लगातार दूसरे दिन गिरा, चांदी की कीमतें अपरिवर्तित

Gold Silver Prices Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में 14 अगस्त यानी शुक्रवार को सोने में लगातार दूसरे दिन गिरावट आई। हालांकि, चांदी की कीमतों में स्थिरता रही। सोना 800 रुपये गिरकर 1,56,200 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। चांदी बगैर किसी बदलाव के 2,40,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बनी रही।

अंतरराष्ट्रीय बाजार से कमजोर संकेतों का असर

एचडीएफसी सिक्योरिटीज में सीनियर कमोडिटीज एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार के कमजोर संकेतों का असर घरेलू बाजार में सोने की कीमतों पर पड़ा। हालांकि, अमेरिका में प्रोड्यूसर प्राइस डेटा उम्मीद के मुकाबले नरम रहे। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सोने में गिरावट की दूसरी वजह मुनाफावसूली रही।

लगातार 7 सत्रों की तेजी के बाद सोने में मुनाफावसूली

13 अगस्त से पहले लगातार सात सत्रों में सोने में तेजी दिखी थी। इससे इसका भाव 12000 रुपये प्रति 10 ग्राम से ज्यादा चढ़ गया था। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इतनी तेजी आने के बाद मुनाफावसूली स्वाभाविक है। इनवेस्टर्स सोने में उछाल के बाद नई खरीदारी करने से हिचक रहे हैं। इसका असर भी सोने की कीमतों पर पड़ा।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने में नरमी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में हल्की नरमी दिखी। इसका भाव 4,351 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। हालांकि, चांदी में तेजी दिखी। इसका भाव 0.33 फीसदी की तेजी के साथ 64.68 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। एक्सपर्ट्स का कहना है कि क्रूड की कीमतों में 14 अगस्त को तेजी दिखी। जब तक क्रूड की कीमतें हाई लेवल पर बनी रहेगी, महंगाई बढ़ने का डर बना रहेगा। इससे फेडरल रिजर्व अनुमान से पहले इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है।

यह भी पढ़ें: ICICI Pru ने महिलाओं के लिए लॉन्च किया एक्सक्लूसिव इंश्योरेंस प्लान, जानिए इसकी खास बातें

क्रूड में उछाल जारी रहने से महंगाई बढ़ने का डर

अमेरिका और ईरान के बीच समझौते के कोई संकेत नहीं दिखे हैं। इसका सीधा असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पड़ रहा है। इस रास्ते ऑयल टैंकर्स की आवाजाही नाममात्र की हो रही है। इससे क्रूड की सप्लाई में कमी दिखी रही है। अगर यह स्थिति बनी रहती है तो क्रूड की कीमतों में बड़ा उछाल आ सकता है। इसका निगेटिव असर सोने की कीमतों पर पड़ेगा।