Semiconductor Mission 2.0: सरकार की ₹1.27 लाख करोड़ की सेमीकंडक्टर स्कीम, इन 10 स्टॉक्स को मिल सकता है तगड़ा फायदा

Semiconductor Mission 2.0: केंद्र सरकार ने India Semiconductor Mission (ISM 2.0) के लिए ₹1.27 लाख करोड़ के बजट को मंजूरी दे दी है। इस बार सरकार का फोकस सिर्फ चिप फैक्ट्री लगाने पर नहीं है। अब चिप डिजाइन, मशीनें, कच्चा माल, एडवांस पैकेजिंग, रिसर्च और पूरी सप्लाई चेन को भारत में विकसित किया जाएगा।

ऐसे में कई भारतीय कंपनियों को इसका सीधा फायदा मिल सकता है। आइए जानते हैं किन 10 कंपनियों पर निवेशकों को नजर रखनी चाहिए।

Tata Electronics

टाटा ग्रुप भारत की पहली सेमीकंडक्टर फैब लगाने की दिशा में काम कर रहा है। कंपनी पहले से इस सेक्टर में बड़े निवेश कर रही है। ISM 2.0 से इसके विस्तार को और रफ्तार मिल सकती है।

CG Power & Industrial Solutions

CG Power सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग में निवेश कर रही है। कंपनी की चिप मैन्युफैक्चरिंग योजनाओं को सरकार की नई नीति से मजबूत सपोर्ट मिल सकता है।

Kaynes Technology

Kaynes Technology पहले ही सेमीकंडक्टर पैकेजिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में एक्टिव है। सरकार की ATMP और OSAT पर बढ़ती फोकस से कंपनी को फायदा हो सकता है।

Tata Elxsi

टाटा ग्रुप की Tata Elxsi चिप डिजाइन, एम्बेडेड सिस्टम और ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी में काम करती है। ISM 2.0 में डिजाइन कंपनियों को बढ़ावा मिलने से इसके लिए नए अवसर बन सकते हैं।

Dixon Technologies

Dixon भारत की सबसे बड़ी इलेक्ट्रॉनिक्स कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों में शामिल है। घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन मजबूत होने का फायदा इसे भी मिल सकता है।

Syrma SGS Technology

Syrma SGS इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और PCB असेंबली में काम करती है। सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के विस्तार से कंपनी का कारोबार बढ़ सकता है।

MosChip Technologies

MosChip चिप डिजाइन और सेमीकंडक्टर इंजीनियरिंग सेवाएं देती है। सरकार का डिजाइन और IP डेवलपमेंट पर जोर कंपनी के लिए सकारात्मक माना जा रहा है।

HCL Technologies

HCLTech चिप डिजाइन और इंजीनियरिंग R&D सेवाओं में वैश्विक कंपनियों के साथ काम करती है। भारत में डिजाइन इकोसिस्टम बढ़ने से नए प्रोजेक्ट मिल सकते हैं।

Tata Consultancy Services (TCS)

टटा ग्रुप यह आईटी कंपनी TCS सेमीकंडक्टर, AI और इंजीनियरिंग सेवाओं में दुनिया की कई चिप कंपनियों के साथ काम करती है। घरेलू निवेश बढ़ने से इस कारोबार में भी तेजी आ सकती है।

Cyient

Cyient सेमीकंडक्टर डिजाइन, एम्बेडेड इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स डिजाइन सेवाएं देती है। नई नीति से इस क्षेत्र में मांग बढ़ने की उम्मीद है।

निवेशकों को क्या ध्यान रखना चाहिए?

यह समझना जरूरी है कि सरकार ने किसी कंपनी का नाम नहीं लिया है। इस लिस्ट में कंपनियां उनके मौजूदा कारोबार और सेमीकंडक्टर सेक्टर में मौजूदगी के आधार पर चुनी गई हैं।

ISM 2.0 से इन्हें नए ऑर्डर, निवेश या साझेदारी के अवसर मिल सकते हैं। लेकिन, इसका मतलब यह नहीं है कि सभी कंपनियों को तुरंत या समान रूप से फायदा होगा। निवेश का फैसला हमेशा कंपनी के नतीजों, वैल्यूएशन और भविष्य की योजनाओं को देखकर ही करना चाहिए।

Semiconductor Mission 2.0: ₹1.27 लाख करोड़ के मिशन को मंजूरी, भारत को चिप हब बनाने की तैयारी

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

एकदिवसीय और T-20I विश्वकप का बदला फॉर्मेट, इस टेबल से समझिए

कुछ दिन पहले मीडिया में छपी खबरों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद एकदिवसीय विश्वकप के लिए सुपर 6 प्रणाली का क्रियान्वन करने वाला था जो कि साल 2003 की प्रणाली से मेल खाती थी। लेकिन अब ने ना केवल एकदिवसीय विश्वकप में सुपर 6 की जगह सुपर 7 चरण बल्कि टी-20 विश्वकप में सुपर 8 की जगह सुपर 10 चरण प्रणाली अपनाई है। इसे फैंस आसानी से इन दो टेबल से समझ सकते हैं।

एकदिवसीय विश्वकप 2027

टूर्नामेंट के लिए 12वें से 14वें स्थान पर क्वालीफाई करने वाली टीम पहले सुपर सीरीज दौर खेलेंगी। इसमें सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली टीम दूसरे चरण में पहुंचेगी जहां छह टीमों को दो समूहों में बांटा जाएगा।प्रत्येक ग्रुप की शीर्ष तीन टीम और दोनों ग्रुप में अगली सबसे बेहतर टीम Super-7 चरण के लिए क्वालीफाई करेंगी (पहले यहां Super-6 चरण होना था)। सुपर-7 चरण की चार सर्वश्रेष्ठ टीम सेमीफाइनल में पहुंचेंगी।

इस टूर्नामेंट में 10 टीम सीधे क्वालीफाई करेंगी। तीन मेजबान देशों में से दक्षिण अफ्रीका और जिम्बाब्वे पूर्ण सदस्य देश होने के कारण अपने आप क्वालीफाई करेंगे। तीसरा मेजबान देश नामीबिया एसोसिएट सदस्य होने के कारण सीधे क्वालीफाई नहीं कर पाएगा।वनडे रैंकिंग की शीर्ष आठ टीमें बाकी 10 स्थानों को पूरा करेंगी। बची हुई चार टीम का फैसला वैश्विक क्वालीफायर के जरिए होगा।

T20I विश्व कप 2028

ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में 2028 में होने वाले टी20 विश्व कप में ग्रुप चरण के बाद अब सुपर-8 की जगह सुपर-10 चरण होगा।टूर्नामेंट में चार-चार टीम के पांच ग्रुप बनाए जाएंगे। प्रत्येक ग्रुप की शीर्ष दो टीम सुपर-10 में पहुंचेंगी।

पिछले चरण में सुपर-8 के प्रत्येक ग्रुप से शीर्ष दो टीम सीधे सेमीफाइनल में पहुंचती थीं। नए प्रारूप में अब प्रत्येक ग्रुप की केवल शीर्ष टीम ही सीधे अंतिम चार में पहुंचेगी। ग्रुप में दूसरे स्थान पर रहने वाली टीम विपरीत ग्रुप की तीसरे स्थान वाली टीम के खिलाफ एलिमिनेटर मुकाबला खेलेंगी जिससे प्रतियोगिता में एक नया रोमांच जुड़ जाएगा।

वहीं 2026 टी20 विश्व कप में खेलने वाली लेकिन स्वतः क्वालीफाई नहीं कर पाने वाली बाकी टीम सीधे वैश्विक क्वालीफायर में पहुंचेंगी।वैश्विक क्वालीफायर के अन्य आठ स्थानों के लिए क्षेत्रीय क्वालीफिकेशन होगा। इनमें अफ्रीका, एशिया और यूरोप से दो-दो टीम जबकि अमेरिका और पूर्वी एशिया प्रशांत क्षेत्र से एक-एक टीम क्वालीफाई करेगी।वैश्विक क्वालीफायर में प्रत्येक क्षेत्र की शीर्ष टीम और कुल मिलाकर अगली तीन सर्वश्रेष्ठ टीम 2028 टी20 विश्व कप के लिए क्वालीफाई करेंगी।

Stocks to Watch: 16 जुलाई को इन 12 शेयरों पर रखें नजर, मिल सकता है तगड़ी कमाई का मौका

Stocks to Watch: शेयर बाजार में 16 जुलाई के कारोबार के दौरान कई शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है। इसकी वजह तिमाही नतीजे, बड़े ऑर्डर, अहम नियुक्तियां और कारोबार से जुड़े नए अपडेट हैं। आइए जानते हैं कि गुरुवार के कारोबारी सत्र में कौन से 12 स्टॉक्स निवेशकों और ट्रेडर्स के रडार पर रहेंगे।

HDFC Bank

प्राइवेट सेक्टर के बैंक HDFC Bank के पार्टटाइम चेयरमैन के रूप में राजीव कुमार की नियुक्ति को RBI ने मंजूरी दे दी है। उनकी नियुक्ति 15 जुलाई 2026 से तीन साल के लिए प्रभावी होगी।

Adani Power

पावर कंपनी Adani Power ने महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी (MSEDCL) के साथ 25 साल के लिए 1,600 मेगावाट बिजली आपूर्ति का समझौता किया है। इससे कंपनी के लंबे समय के रेवेन्यू को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

Jana Small Finance Bank

स्मॉल फाइनेंस बैंक Jana Small Finance Bank का जून तिमाही में शुद्ध मुनाफा 52.3% बढ़कर ₹155 करोड़ हो गया। NII 33.6% बढ़कर ₹783 करोड़ रही। वहीं, ग्रॉस NPA 2.46% से घटकर 2.39% पर आ गया।

Sai Silks (Kalamandir)

रिटेल और एथनिक वियर कंपनी Sai Silks (Kalamandir) का जून तिमाही में शुद्ध मुनाफा 14.7% घटकर ₹26 करोड़ रह गया। रेवेन्यू 1% घटकर ₹375 करोड़ रहा। EBITDA मार्जिन भी 15% से घटकर 13.8% पर आ गया।

TVS Holdings

ऑटो और फाइनेंशियल सर्विसेज समूह TVS Holdings की सहायक कंपनी Home Credit India, Varthana Finance में 100% हिस्सेदारी ₹967 करोड़ में खरीदेगी। इस अधिग्रहण से कंपनी की वित्तीय सेवाओं के कारोबार का विस्तार होगा।

Himadri Speciality Chemical

स्पेशलिटी केमिकल कंपनी Himadri Speciality Chemical ने जून तिमाही में अब तक का सबसे ज्यादा तिमाही रेवेन्यू दर्ज किया। कंपनी का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 26.3% बढ़कर ₹230 करोड़ हो गया। एक साल पहले यह ₹182 करोड़ था।

HDFC Life Insurance

लाइफ इंश्योरेंस कंपनी HDFC Life ने जून तिमाही में मजबूत प्रदर्शन किया। कंपनी का VNB और VNB मार्जिन बाजार के अनुमान से बेहतर रहा। प्रोटेक्शन बिजनेस और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क में भी अच्छी ग्रोथ देखने को मिली।

HDB Financial Services

NBFC कंपनी HDB Financial Services का जून तिमाही में शुद्ध मुनाफा 38.3% बढ़कर ₹785 करोड़ पहुंच गया। यह कंपनी का अब तक का सबसे ज्यादा तिमाही मुनाफा है।

Angel One

फिनटेक और ब्रोकिंग कंपनी Angel One का शुद्ध मुनाफा जून तिमाही में सालाना आधार पर 102% बढ़ गया। रेवेन्यू में भी अच्छी बढ़त रही। बेहतर ऑपरेटिंग प्रदर्शन से कंपनी का प्रॉफिट मजबूत हुआ।

Network18 Media & Investments

मीडिया कंपनी Network18 Media & Investments का कंसोलिडेटेड ऑपरेटिंग रेवेन्यू जून तिमाही में 10% बढ़कर ₹516 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹468 करोड़ था।

ICICI Lombard General Insurance

जनरल इंश्योरेंस कंपनी ICICI Lombard का जून तिमाही में शुद्ध मुनाफा 46% घटकर ₹403 करोड़ रह गया। एक साल पहले यह ₹747 करोड़ था। एकमुश्त खर्च (Exceptional Items) की वजह से कंपनी की कमाई पर असर पड़ा।

India Pesticides

एग्रोकेमिकल कंपनी India Pesticides को अपने एक फंगीसाइड प्रोडक्ट के लिए यूरोपीय संघ (EU) से Technical Equivalence (TEQ) की मंजूरी मिल गई है। इससे कंपनी को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कारोबार बढ़ाने में मदद मिलेगी।

HDFC Bank के पार्ट-टाइम चेयरमैन पद पर राजीव कुमार की नियुक्ति को आरबीआई की मंजूरी

Disclaimer: मनीकंट्रोल, नेटवर्क18 ग्रुप का हिस्सा है। नेटवर्क18 का नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसकी एकमात्र लाभार्थी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

आयुष्मान योजना में लापरवाही पर बड़ा एक्शन, बिजनौर के 16 अस्पतालों पर कार्रवाई, 6 पर निलंबन की तैयारी

yogi adityanath in rampur

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी और समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए साचीज लगातार सख्त निगरानी कर रही है। इसी के तहत बिजनौर के 20 अस्पतालों का औचक निरीक्षण किया गया। इस दौरान लापरवाही मिलने पर 16 चिकित्सालयों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
 

6 चिकित्सालयों को निलंबन नोटिस के साथ भुगतान पर रोक 

साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि निरीक्षण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि योजना से जुड़े सभी अस्पताल केंद्र और राज्य सरकार द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों, स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट गाइडलाइंस (एसटीजी) तथा गुणवत्ता मानकों का पूरी तरह पालन कर रहे हैं या नहीं। साचीज द्वारा गठित तीन सदस्यीय विशेष टीम ने बिजनौर के 20 विभिन्न सूचीबद्ध अस्पतालों का बिना पूर्व सूचना के निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अस्पतालों में मरीजों को दी जा रही स्वास्थ्य सेवाओं, उपचार प्रक्रिया, दस्तावेजों, रिकॉर्ड, क्लेम प्रक्रिया और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का गहन परीक्षण किया गया। जांच में कई अस्पताल योजना के निर्धारित मानकों का पूर्ण अनुपालन करते हुए नहीं पाए गए। कई स्थानों पर स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट गाइडलाइंस के पालन में कमी तथा गुणवत्ता संबंधी खामियां सामने आईं। 16 अस्पतालों में दिशा निर्देशों का पालन नहीं पाया गया। इनमें से 6 अस्पतालों को निलंबन नोटिस के साथ भुगतान रोकने का आदेश दिया गया है जबकि 10 अस्पतालों को अनियमितताओं के लिए नोटिस जारी किया गया है। अब जुर्माने की गणना की जाएगी और 10 गुना जुर्माना लगाया जाएगा। इन अस्पतालों में एक ही परिवार के मरीजों को बार-बार भर्ती करने, बिना आवश्यकता के आईसीयू बुक करने आदि के कारण गड़बड़ी पाई गई। ऑडिट एजेंसी को भी नोटिस जारी करने के साथ जिला कार्यक्रम समन्वयक को भी कारण बताओ नोटिस दिया गया है।

 

आगे भी जारी रहेगी कार्रवाई

सीईओ अर्चना वर्मा ने कहा कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना से जुड़े प्रत्येक सूचीबद्ध चिकित्सालय के लिए योजना के सभी दिशा-निर्देशों, स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट गाइडलाइंस तथा गुणवत्ता मानकों का शत-प्रतिशत अनुपालन अनिवार्य है। यदि कोई चिकित्सालय निर्धारित मानकों की अनदेखी करता है या लाभार्थियों को गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने में लापरवाही बरतता है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

एजेंसी ने यह भी दोहराया कि मरीजों के हितों से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। प्रदेश के सभी सूचीबद्ध चिकित्सालयों में योजना के मानकों के अनुपालन की नियमित निगरानी आगे भी जारी रहेगी। समय-समय पर औचक निरीक्षण किए जाएंगे और जहां भी अनियमितता मिलेगी, वहां तत्काल नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के प्रत्येक पात्र लाभार्थी को पारदर्शी, मानक आधारित और उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं समय पर उपलब्ध हों ताकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्वस्थ और सशक्त उत्तर प्रदेश के संकल्प को प्रभावी रूप से साकार किया जा सके।

ITR Filing 2026: NPS, PPF या EPF… रिटायरमेंट के लिए कौन-सी स्कीम टैक्स में सबसे ज्यादा फायदा दिलाएगी?

ITR Filing 2026: रिटायरमेंट की प्लानिंग करते समय ज्यादातर लोग NPS, PPF और EPF में से किसी एक या एक से ज्यादा स्कीम में निवेश करते हैं। तीनों का मकसद रिटायरमेंट के लिए पैसा जोड़ना है। हालांकि, टैक्स छूट, ब्याज और निकासी के नियम अलग-अलग हैं। साथ ही, यह भी मायने रखता है कि आपने पुराना टैक्स रिजीम चुना है या नया।

NPS में सबसे ज्यादा टैक्स छूट

अगर आप पुराना टैक्स रिजीम चुनते हैं, तो NPS सबसे ज्यादा टैक्स बचाने वाली स्कीम बन सकती है।

NPS Tier-I में निवेश पर Section 80CCD(1) के तहत ₹1.5 लाख तक की छूट मिलती है। यह सीमा Section 80C का हिस्सा है। इसके अलावा Section 80CCD(1B) के तहत ₹50,000 की अतिरिक्त छूट भी मिलती है। यानी NPS के जरिए कुल ₹2 लाख तक टैक्स डिडक्शन का फायदा लिया जा सकता है।

अगर आप नया टैक्स रिजीम चुनते हैं, तो अपनी तरफ से किए गए निवेश पर छूट नहीं मिलेगी। हालांकि, अगर आपका नियोक्ता NPS में योगदान देता है, तो Section 80CCD(2) के तहत बेसिक सैलरी और DA के 14% तक की रकम पर टैक्स छूट मिल सकती है।

रिटायरमेंट के समय NPS की 60% रकम टैक्स-फ्री निकाली जा सकती है। बाकी 40% से एन्युटी खरीदनी होती है। उस पर मिलने वाली पेंशन आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्सेबल होती है।

PPF में पूरा टैक्स-फ्री फायदा

PPF को EEE (Exempt-Exempt-Exempt) कैटेगरी की स्कीम माना जाता है। पुराने टैक्स रिजीम में PPF में निवेश पर Section 80C के तहत ₹1.5 लाख तक की टैक्स छूट मिलती है। इसके अलावा मिलने वाला ब्याज भी टैक्स-फ्री रहता है और मैच्योरिटी पर मिलने वाली पूरी रकम पर भी कोई टैक्स नहीं लगता।

अगर आपने नया टैक्स रिजीम चुना है, तो नए निवेश पर टैक्स छूट नहीं मिलेगी। हालांकि, ब्याज और मैच्योरिटी की रकम पहले की तरह टैक्स-फ्री रहेगी।

EPF का फायदा नौकरीपेशा लोगों को

EPF संगठित क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए रिटायरमेंट सेविंग स्कीम है।

पुराने टैक्स रिजीम में कर्मचारी का EPF योगदान Section 80C के तहत टैक्स छूट के दायरे में आता है। तय शर्तें पूरी होने पर ब्याज और निकासी भी टैक्स-फ्री रहती है। हालांकि, अगर समय से पहले पैसा निकाला जाता है, तो कुछ मामलों में टैक्स देना पड़ सकता है।

पुराने और नए टैक्स रिजीम में क्या फर्क?

अगर आपने पुराना टैक्स रिजीम चुना है, तो NPS, PPF और EPF तीनों में टैक्स बचाने का फायदा मिलता है। इनमें भी NPS सबसे आगे है, क्योंकि इसमें ₹50,000 की अतिरिक्त टैक्स छूट मिलती है।

वहीं, नए टैक्स रिजीम में Section 80C की छूट नहीं मिलती। इसलिए PPF और EPF में निवेश पर टैक्स डिडक्शन का फायदा नहीं मिलेगा। NPS में भी सिर्फ नियोक्ता के योगदान पर ही टैक्स छूट मिलती है।

किसे स्कीम को चुनना बेहतर?

अगर आपका लक्ष्य सबसे ज्यादा टैक्स बचाना है, तो पुराने टैक्स रिजीम में NPS बेहतर विकल्प हो सकता है। अगर आप पूरी तरह टैक्स-फ्री रिटर्न चाहते हैं, तो PPF मजबूत विकल्प है। वहीं, नौकरीपेशा लोगों के लिए EPF रिटायरमेंट बचत का अहम हिस्सा बना रहता है।

हालांकि, फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का मानना है कि बेहतर रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए इन तीनों का संतुलित इस्तेमाल करना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है।

Gold Jewellery Price: 10 ग्राम का नेकलेस या 5 ग्राम की अंगूठी खरीदने जा रहे? जानिए कितना बनेगा बिल

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

NH-31 से काशी रेलवे स्टेशन सिर्फ 20 मिनट में! वरुणा के किनारे अप्रूव्ड हुए 6/4 लेन एलिवेटेड कॉरिडोर का मैप और फुल डिटेल

Varanasi Elevated Corridor: वाराणसी (काशी) को ट्रैफिक जाम की बड़ी समस्या से परमानेंट मुक्ति दिलाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति बुधवार को वरुणा नदी के किनारे एक शानदार 6/4 लेन के एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने के फैसले को मंजूरी दे दी है। पीआईबी की रिलीज के मुताबिक 10998.32 करोड़ रुपये की कुल पूंजीगत लागत वाले इस प्रोजेक्ट को नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) के तहत बनाएगी। यह प्रोजेक्ट वाराणसी डीकन्जेशन प्लान का एक सबसे अहम हिस्सा है।

आइए जानते हैं इस मेगा प्रोजेक्ट के पूरे रूट, लागत, मैप स्पेसिफिकेशन्स और इससे काशी की तस्वीर कैसे बदलेगी इसकी पूरी डिटेल।

प्रोजेक्ट का पूरा मैप और रूट स्पेसिफिकेशन्स

यह नया कनेक्टर कॉरिडोर सीधे तौर पर राष्ट्रीय राजमार्ग-31 (NH-31) और वाराणसी रिंग रोड को आपस में कनेक्ट करेगा। इस लिंक/कनेक्टर कॉरिडोर की कुल लंबाई 43.218 किलोमीटर होगी। यह मुख्य रूप से एक 6/4 लेन का एलिवेटेड कॉरिडोर होगा। इसमें मुख्य कैरिजवे के साथ-साथ कई जगह फ्लाईओवर्स, लूप्स, रैंप्स और सर्विस रोड्स का एक आधुनिक नेटवर्क तैयार किया जाएगा। इस पूरे कॉरिडोर को 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की ऑपरेटिंग स्पीड के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसपर गाड़ियां बिना किसी रुकावट के सरपट दौड़ सकेंगी।

यहां नीचे देखिए प्रोजेक्ट का पूरा रूट मैप

कंस्ट्रक्शन से लेकर जमीन अधिग्रहण तक का खर्च

कैबिनेट द्वारा मंजूर किए गए ₹10998.32 करोड़ के इस कुल बजट को अलग-अलग हिस्सों में बांटा गया है। सिविल कंस्ट्रक्शन कॉस्ट के लिए 4565.33 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस प्रोजेक्ट के लिए आवश्यक जमीन के अधिग्रहण पर 934.91 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसके अलावा बाकी की राशि प्रोजेक्ट के अन्य तकनीकी और एसोसिएटेड खर्चों में इस्तेमाल होगी।

यात्रा समय में 50% की कटौती: 40 मिनट का सफर अब सिर्फ 20 मिनट में

इस कॉरिडोर के बन जाने के बाद वाराणसी आने-जाने वाले यात्रियों के समय में भारी बचत होगी। अभी NH-31 से काशी रेलवे स्टेशन तक पहुंचने में शहर के भारी जाम से जूझना पड़ता है। इसमें करीब 40 मिनट का समय लगता है। इस एक्सेस-कंट्रोल एलिवेटेड कॉरिडोर के शुरू होने के बाद यह यात्रा समय घटकर सिर्फ 20 मिनट रह जाएगा। यानी यात्रा के समय में सीधे 50 प्रतिशत की कमी आएगी। इससे शहर का आंतरिक रोड नेटवर्क पूरी तरह जाम मुक्त होगा, सड़क सुरक्षा में सुधार होगा और गाड़ियों की ऑपरेटिंग कॉस्ट में भी कमी आएगी।

काशी के इन प्रमुख रेलवे स्टेशनों, घाटों और एयरपोर्ट को मिलेगी डायरेक्ट कनेक्टिविटी

वरुणा नदी के किनारे बनने वाला यह एलिवेटेड कॉरिडोर वाराणसी शहर के भीतर और उसके आस-पास के सभी प्रमुख केंद्रों को आपस में बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। इससे कई जगहों पर पहुंचना आसान हो जाएगा-

  • काशी रेलवे स्टेशन
  • वाराणसी सिटी रेलवे स्टेशन
  • वाराणसी जंक्शन (कैंट स्टेशन)
  • पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन (DDU)
  • वाराणसी एयरपोर्ट (लाल बहादुर शास्त्री इंटरनेशनल एयरपोर्ट, बाबतपुर)
  • रामनगर पोर्ट (Ramnagar Port)
  • वाराणसी के सभी प्रमुख घाट
  • सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय
  • समीपवर्ती चंदौली क्षेत्र

पीएम गति शक्ति और आर्थिक विकास को मिलेगी नई रफ्तार

यह प्रोजेक्ट पूर्वी उत्तर प्रदेश में व्यापार, कृषि और लॉजिस्टिक्स के लिए एक गेम-चेंजर साबित होने वाला है। पीएम गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के अनुरूप यह प्रोजेक्ट मल्टीमॉडल इंटीग्रेशन को बढ़ावा देगा। यह कॉरिडोर सीधे तौर पर 1 इकोनॉमिक नोड (चंदौली सोशल इकोनॉमिक जोन), 1 सोशल नोड (चंदौली) और 6 बड़े लॉजिस्टिक्स नोड्स तक पहुंच को आसान और मजबूत बनाएगा। इस रास्ते कृषि उपज, औद्योगिक सामान, निर्माण सामग्री और खनिजों की तेज और बिना किसी दिक्कत के हो पाएगी। इससे पूरे पूर्वी यूपी की लॉजिस्टिक्स क्षमता बढ़ेगी।

कुल मिलाकर वरुणा नदी के किनारे बनने वाला यह आधुनिक, एक्सेस-कंट्रोल अर्बन ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर न सिर्फ वाराणसी के निवासियों और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों/तीर्थयात्रियों के जीवन को सुगम बनाएगा बल्कि काशी में पर्यटन और सतत आर्थिक विकास को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा।

यह भी पढ़ें: यूरिया के मामले में 100% आत्मनिर्भर बनेगा भारत! 8-9 नए प्लांट और 10 मिलियन टन कैपिसिटी का ये है पूरा प्लान

Lexus ES 350h image gallery

Lexus ES 350h front quarter static

Nearly four months after the all-electric ES 500e, Lexus has finally introduced the hybrid-powered ES 350h. It largely retains the electric versions’ exterior design, which comprises the signature L-shaped DRLs and sealed-off grille at the front, sloping fastback-like roofline and Z-shaped trim from the side, while the rear is characterised by a slim LED tail-lamp and sculpted design for the bumper. The exterior’s minimalist theme continues on the inside, with a clean look for the dashboard that does away with physical buttons and features a large 14-inch infotainment screen, a digital driver’s display, and proximity-sensing buttons that light up when they detect hand movement. Powering the 350h is a strong-hybrid petrol engine that’s mated to an e-CVT. Ex-showroom prices of the ES 350h range between Rs 66.10 lakh and Rs 71.80 lakh. 

LHD model used for representation.

Angel One Q1 Results: एंजल वन का मुनाफा 102% बढ़ा, डिविडेंड का भी ऐलान

Angel One Q1 Results: फिनटेक और ब्रोकिंग कंपनी Angel One ने जून तिमाही (Q1FY27) के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 102% यानी दोगुने से ज्यादा बढ़कर ₹231 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी ने ₹114 करोड़ का मुनाफा कमाया था।

रेवेन्यू और ऑपरेटिंग मुनाफा दोनों बढ़े

जून तिमाही में एंजल वन का ऑपरेटिंग रेवेन्यू 25.3% बढ़कर ₹1,430 करोड़ पहुंच गया। एक साल पहले यह ₹1,141 करोड़ था।

वहीं, EBITDA 76.5% बढ़कर ₹485 करोड़ हो गया। EBITDA मार्जिन भी 24% से बढ़कर 34% पहुंच गया। यानी कंपनी पहले के मुकाबले ज्यादा मुनाफे के साथ कारोबार कर रही है।

लोन कारोबार में रिकॉर्ड ग्रोथ

इस तिमाही में एंजल वन का क्लाइंट फंडिंग बुक रिकॉर्ड ₹6,140 करोड़ पर पहुंच गया। यह पिछले साल के मुकाबले 45.9% ज्यादा है।

वहीं, क्रेडिट डिस्ट्रीब्यूशन 129.7% बढ़कर ₹530 करोड़ हो गया। यानी कंपनी ने पहले से कहीं ज्यादा लोन बांटे।

वेल्थ मैनेजमेंट बिजनेस भी तेजी से बढ़ा

एंजल वन का वेल्थ मैनेजमेंट AUM 165.3% बढ़कर ₹13,440 करोड़ हो गया। जून 2026 तक इस कारोबार से 2,400 से ज्यादा ग्राहक जुड़े थे। वहीं, एसेट मैनेजमेंट AUM 81.4% बढ़कर ₹620 करोड़ पहुंच गया।

SIP में थोड़ी कमजोरी दिखी। जून तिमाही में कंपनी के जरिए 17 लाख यूनिक SIP रजिस्टर हुए। यह पिछले साल के मुकाबले 10.3% कम है।

एंजल वन ने क्या कहा?

Angel One के चेयरमैन और एमडी दिनेश ठक्कर ने कहा कि भारत में तेजी से बढ़ रहे निवेश और डिजिटल फाइनेंस का फायदा कंपनी को मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि कंपनी का लक्ष्य लोगों की हर वित्तीय जरूरत के लिए सबसे भरोसेमंद फिनटेक प्लेटफॉर्म बनना है। कंपनी यूजर्स की भागीदारी बढ़ाने और लंबे समय में बेहतर वैल्यू देने पर फोकस कर रही है।

₹1 का अंतरिम डिविडेंड

एंजल वन के बोर्ड ने FY27 के लिए ₹1 प्रति शेयर का पहला अंतरिम डिविडेंड घोषित किया है।

  • रिकॉर्ड डेट: 21 जुलाई 2026
  • भुगतान: 14 अगस्त 2026 या उससे पहले

Angel One का शेयर बुधवार को नतीजों से पहले 3.13% चढ़कर ₹344 पर बंद हुआ। इस साल यानी 2026 में स्टॉक अब तक 45.59% का रिटर्न दे चुका है।

Groww Q1 Results: जून तिमाही में 94% बढ़ा मुनाफा, रेवेन्यू में 60% का उछाल, शेयर रॉकेट

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

ODI और T20 World Cup का फॉर्मेट पूरी तरह बदल गया, ICC ने किया बड़ा ऐलान! जानिए क्या है सुपर 7 और सुपर 10 का गणित

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने अपने सबसे बड़े और प्रमुख टूर्नामेंट्स के लिए एक बड़ा ऐलान किया है। एडिनबर्ग में आयोजित आईसीसी की वार्षिक कॉन्फ्रेंस में यह फैसला लिया गया कि साल 2027 में होने वाले वनडे (ODI) वर्ल्ड कप और 2028 में होने वाले टी20 वर्ल्ड कप के फॉर्मेट में बड़े बदलाव किए जाएंगे। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक इस नए बदलाव के तहत 2027 वनडे वर्ल्ड कप में ‘सुपर 7’ स्टेज को शामिल किया गया है। इसी तरह 2028 में प्रस्तावित टी20 वर्ल्ड कप के दूसरे चरण में ‘सुपर 8’ की जगह अब ‘सुपर 10’ स्टेज को आजमाने का फैसला किया गया है।

2027 वनडे वर्ल्ड कप: 3 चरणों का खेल और ‘सुपर 7’ का नया नियम

दक्षिण अफ्रीका में होने वाले 2027 वनडे वर्ल्ड कप में पहले की योजना के मुताबिक 14 टीमें हिस्सा लेंगी (जो पिछले संस्करण की 10 टीमों से अधिक है)। लेकिन आईसीसी ने प्रतियोगिता को अधिक रोमांचक बनाने के लिए नॉकआउट और फाइनल्स से पहले इसे तीन चरणों में बांट दिया है।

समझिए वनडे वर्ल्ड कप का नया गणित

चरण 1 (सुपर सीरीज राउंड): वर्ल्ड कप के लिए 12वें से 14वें स्थान पर क्वालीफाई करने वाली टीमों के बीच एक सुपर सीरीज राउंड खेला जाएगा। इस राउंड में जो टीम टॉप पर रहेगी वह दूसरे चरण (राउंड टू) में आगे बढ़ेगी।

चरण 2 (ग्रुप राउंड): दूसरे चरण में कुल 6 टीमों को दो ग्रुपों में विभाजित किया जाएगा।

चरण 3 (सुपर 7 स्टेज): पहले तय किए गए सुपर 6 की जगह पर अब सुपर 7 स्टेज को जोड़ा गया है। दोनों ग्रुपों में से टॉप-3 पर रहने वाली टीमें और इसके साथ ही दोनों ग्रुपों को मिलाकर अगले सर्वोच्च स्थान पर रहने वाली एक और टीम इस सुपर 7 स्टेज में पहुंचेगी।

सेमीफाइनल: इस सुपर 7 स्टेज में प्रदर्शन के आधार पर शीर्ष 4 स्थानों पर रहने वाली सर्वश्रेष्ठ टीमें सीधे सेमीफाइनल के लिए प्रोग्रेस करेंगी।

कैसे होगा टीमों का क्वालिफिकेशन?

इस टूर्नामेंट में 10 टीमों को ऑटोमैटिक क्वालिफिकेशन मिलेगा। तीन सह-मेजबानों में से दक्षिण अफ्रीका और जिम्बाब्वे को पूर्ण सदस्य होने के नाते सीधे प्रवेश मिलेगा। तीसरे सह-मेजबान नामीबिया को एसोसिएट सदस्य होने के कारण सीधा प्रवेश नहीं मिला है। वनडे रैंकिंग की शीर्ष 8 टीमें मिलकर टॉप-10 का हिस्सा बनेंगी। इसके बाद बची हुई 4 टीमों का फैसला एक ग्लोबल क्वालीफायर के जरिए होगा।

2028 टी20 वर्ल्ड कप: सुपर 8 की जगह अब दिखेगा सुपर 10 का रोमांच

ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की मेजबानी में होने वाले 2028 टी20 वर्ल्ड कप के लिए आईसीसी ने ग्रुप स्टेज के बाद सुपर 8 की जगह सुपर 10 आजमाने का फैसला किया है। आईसीसी ने बताया कि 2026 के टी20 वर्ल्ड कप में उभरती हुई टीमों के शानदार प्रदर्शन से उत्साहित होकर दूसरे चरण में टीमों की संख्या 8 से बढ़ाकर 10 करने का निर्णय लिया गया है।

समझिए टी20 वर्ल्ड कप का नया समीकरण

नया ग्रुप फॉर्मेट: शुरुआत में 4-4 टीमों के 5 ग्रुप बनाए जाएंगे। हर ग्रुप से टॉप-2 में रहने वाली टीमें सुपर 10 चरण में प्रवेश करेंगी।

सेमीफाइनल का नया रास्ता: पिछले संस्करण में जहां सुपर 8 के दोनों ग्रुपों से टॉप-2 टीमें सेमीफाइनल में जाती थीं, वहीं अब सिर्फ अपने-अपने ग्रुप में टेबल टॉप करने वाली टीम ही सीधे अंतिम चार (सेमीफाइनल) में जगह बनाएगी।

एलिमिनेटर राउंड का रोमांच: जो टीमें अपने ग्रुप में दूसरे स्थान पर रहेंगी वे दूसरे ग्रुप की तीसरे स्थान पर रहने वाली टीमों के खिलाफ एलिमिनेटर मुकाबला खेलेंगी। इससे टूर्नामेंट में नया रोमांच आएगा।

टी20 वर्ल्ड कप के लिए क्या हैं क्वालिफिकेशन नियम?

बांग्लादेश की जगह अंतिम समय में शामिल होने और 2026 के टूर्नामेंट में विशेष परिस्थितियों के मद्देनजर स्कॉटलैंड को सीधे ‘यूरोप रीजनल फाइनल’ में प्रवेश दिया जाएगा। टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भाग लेने वाली वो टीमें जो ऑटोमैटिक क्वालिफिकेशन हासिल नहीं कर सकीं वे सीधे ग्लोबल क्वालीफायर में आगे बढ़ेंगी। ग्लोबल क्वालीफायर के बाकी 8 स्थान क्षेत्रीय क्वालिफिकेशन के जरिए भरे जाएंगे। इसमें अफ्रीका, एशिया और यूरोप से 2-2 टीमें और अमेरिका व पूर्वी एशिया-प्रशांत क्षेत्रों से 1-1 टीम क्वालीफाई करेगी। ग्लोबल क्वालीफायर में हर क्षेत्र से सर्वोच्च स्थान पाने वाली टीम और कुल मिलाकर अगली तीन सर्वोच्च स्थान हासिल करने वाली टीमें मिलकर 2028 टी20 वर्ल्ड कप के लिए क्वालीफाई करेंगी।

आईसीसी ने स्पष्ट किया है कि आईसीसी डेवलपमेंट और चीफ एग्जीक्यूटिव्स कमेटियों (CEC) की सिफारिश के बाद इस नए मार्की टूर्नामेंट ढांचे को बोर्ड द्वारा एंडोर्स कर दिया गया है। हालांकि नवंबर में होने वाली बैठकों में आईसीसी की फाइनेंस एंड कमर्शियल अफेयर्स कमेटी द्वारा समीक्षा किए जाने के बाद ही बोर्ड इस पर अपनी अंतिम मंजूरी देगा।

यह भी पढ़ें: लगातार दो सीरीज हारने के बाद टी20 टीम में होगी सूर्यकुमार यादव की वापसी? बीसीसीआई ने रखी ये शर्त

Gold Silver Price Today: सोना स्थिर, चांदी लगातार तीसरे दिन गिरी

दिल्ली सर्राफा बाजार में 15 जुलाई को सोने में स्थिरता रही। चांदी में हल्की गिरावट आई। लेकिन, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में बड़ी गिरावट आई। चांदी दिल्ली सर्राफा बाजार में लगातार तीसरे दिन गिरी। इसकी वजह कमजोर लोकल मांग बताई जा रही है। सोने का भाव 1,46,300 रुपये प्रति 10 ग्राम पर अपरिवर्तित रहा।

गोल्ड और फ्यूचर्स में मामूली नरमी

दिल्ली सर्राफा बाजार में चांदी 100 रुपये गिरकर 2,26,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई। ट्रेडर्स ने बताया कि ज्वेलर्स और इंस्ट्रियल यूजर्स की कमजोर खरीदारी से बुलियन की कीमतें सीमित दायरे में रहीं। इधर, भारत में गोल्ड फ्यूचर्स और सिल्वर फ्यूचर्स में कमजोरी दिखी। शाम के कारोबार में गोल्ड फ्यूचर्स 0.05 फीसदी नीचे चल रहा था। सिल्वर फ्यूचर्स 0.35 फीसदी नीचे था।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना फिसला

विदेशी बाजार में सोने में बड़ी गिरावट आई। इसकी वजह मध्यपूर्व में बढ़ता तनाव है। अमेरिका-ईरान के बीच चल रही लड़ाई की वजह से अमेरिका सहित दुनियाभर में इनफ्लेशन बढ़ने का खतरा है। इनफ्लेशन को कंट्रोल में करने के लिए अमेरिका का केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है। इसका असर सोने की कीमतों पर पड़ेगा। इंटरेस्ट रेट बढ़ने पर सोने की कीमतों में गिरावट आती है।

विदेश में चांदी में भी गिरावट 

अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 0.6 फीसदी गिरकर 4,030.50 डॉलर प्रति औंस चल रहा था। 14 जुलाई को सोने में 2 फीसदी से ज्यादा तेजी आई थी। इसकी वजह अमेरिका के रिटेल इनफ्लेशन के डेटा थे। अमेरिका में जून में महंगाई उम्मीद से कम बढ़ी है। 15 जुलाई को यूएस गोल्ड फ्यूचर्स (अगस्त डिलीवरी) 0.8 फीसदी गिरकर 4,036.20 प्रति औंस था। स्पॉट सिल्वर भी 1.1 फीसदी गिरकर 57.96 डॉलर प्रति औंस पर आ गया।

ईंधन महंगा होने से इंटरेस्ट रेट बढ़ने का अनुमान

यूबीएस ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, “क्रूड ऑयल, पेट्रोल और डीजल की ऊंची कीमतों की वजह से अगले महीने इनफ्लेशन में उछाल दिख सकता है। इससे फेडरल रिजर्व की पॉलिसी आक्रामक रहने की उम्मीद है।” दरअसल, इंटरेस्ट रेट बढ़ने पर सोने की डिमांड कम हो जाती है। इसका असर इसकी कीमतों पर पड़ता है। ट्रेडर्स को सितंबर में अमेरिका में इंटरेस्ट रेट बढ़ने की 61 फीसदी उम्मीद है।

यह भी पढ़ें: सोना खरीदने वालों के लिए राहत! अब कीमतें ज्यादा नहीं बढ़ेंगी? जानिए 5 बड़े कारण

बुलियन पर मध्यपूर्व में तनाव का असर 

इस साल जनवरी के आखिर में सोने और चांदी की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थीं। उसके बाद दोनों की कीमतों में बड़ी गिरावट आई। 2025 में सोने ने 70 फीसदी रिटर्न दिया था। लेकिन, इस साल सोने और चांदी पर दबाव दिख रहा है। मध्यपूर्व में लड़ाई का असर सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ा है।