लखनऊ में घर खरीदने का सुनहरा मौका! LDA दे रहा फ्लैट्स पर ₹2 लाख तक की सीधी छूट, जानें कब तक है मौका

लखनऊ में अपना घर खरीदने का प्लान कर रहे लोगों के लिए अच्छी खबर है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने जन्माष्टमी और गणेश चतुर्थी 2026 के मौके पर चुनिंदा फ्लैट्स की कीमतों में खास छूट देने का ऐलान किया है। इससे खरीदारों को कम कीमत में अपना घर खरीदने का मौका मिल सकता है। ये ऑफर 4 सितंबर से 14 सितंबर 2026 तक लागू रहेगा। यानी इस योजना के तहत घर खरीदने के लिए 11 दिनों का समय होगा। त्योहारों के मौके पर LDA ने अपने मौजूदा फ्लैट खरीदारों के लिए 2 लाख रुपये तक की छूट का विशेष ऑफर भी शुरू किया है। वहीं फ्लैट की बुकिंग से पहले इस ऑफर की पूरी जानकारी एक बार जरूर चेक कर लें।

इस ऑफर के तहत LDA की ‘पहले आओ, पहले पाओ’ योजना के कुछ चुनिंदा फ्लैट्स पर खरीदारों को विशेष छूट मिलेगी। LDA के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने गुरुवार को इस बारे में आदेश जारी किया।

किस फ्लैट पर मिल रही कितनी छूट

त्योहारी सीजन को देखते हुए LDA ने अपनी कुछ आवासीय योजनाओं में खास छूट देने का फैसला किया है। यह ऑफर FCFS योजना के तहत उपलब्ध चुनिंदा 1 BHK, 2 BHK और 3 BHK फ्लैट्स पर मिलेगा। LDA के फ्लैट्स पर मिलने वाली छूट उनकी कीमत के हिसाब से तय होगी। 20 से 50 लाख रुपये तक के फ्लैट पर 1 लाख रुपये, 50 से 75 लाख रुपये तक के फ्लैट पर 1.5 लाख रुपये और 75 लाख रुपये से ज्यादा कीमत वाले फ्लैट पर 2 लाख रुपये तक की छूट मिलेगी। यानी महंगे फ्लैट खरीदने वालों को इस ऑफर में ज्यादा छूट का फायदा मिलेगा। जो लोग ऑफर की अवधि में LDA की वेबसाइट के जरिए इन फ्लैट्स की बुकिंग करेंगे, वे तय नियमों के अनुसार इस छूट का लाभ उठा सकेंगे।

नियमों को एक बार जरूर करें चेक

इस ऑफर में शामिल फ्लैट ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर दिए जाएंगे। यानी खरीदार को लॉटरी का इंतजार नहीं करना होगा। फ्लैट की उपलब्धता और जरूरी बुकिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र ग्राहक इसे खरीद सकेंगे। यह छूट सीमित समय के लिए दी जा रही है। घर खरीदने वालों को बुकिंग से पहले फ्लैट की उपलब्धता, पात्रता, कीमत और बाकी नियमों की जानकारी जरूर जांच लेनी चाहिए। फ्लैट की कीमत के हिसाब से खरीदारों को 1 लाख, 1.5 लाख और 2 लाख रुपये तक की छूट मिलेगी। ऐसे में LDA की आवासीय योजनाओं में घर खरीदने वालों के लिए यह ऑफर अच्छी बचत का मौका दे सकता है।

Hanuman Ansh Director: ‘जिन लोगों ने मेरी मदद नहीं की, वे अब मुझे बधाई दे रहे हैं’, ‘हनुमान अंश’ के डायरेक्टर ने खोली बॉलीवुड की पोल

Hanuman Ansh Director: ‘हनुमान अंश’ एक ऐसी फिल्म साबित हुई है जिसे शुरू में ज़्यादा उम्मीद नहीं थी, लेकिन यह हाल के हफ़्तों की बॉक्स-ऑफ़िस पर सबसे चौंकाने वाली सफल फ़िल्मों में से एक बन गई है। 7 अगस्त को रिलीज़ हुई यह फ़िल्म देश भर में सैकड़ों शो के साथ सिनेमाघरों में शुरू हुई थी। शुरुआत में ‘हनुमान अंश’ के पूरे भारत में 350 से ज़्यादा शो थे। लेकिन दूसरी फ़िल्मों के साथ मुक़ाबले की वजह से सिनेमाघरों में इसकी मौजूदगी काफ़ी कम हो गई।

‘द रौनक पॉडकास्ट’ पर बात करते हुए विशाल ने कहा, “लोगों ने ही इस फ़िल्म को आगे बढ़ाया। जिन सिनेमाघरों में बड़ी फ़िल्में रिलीज़ होने वाली थीं, उन्होंने हमारी फ़िल्म के लिए स्क्रीन की संख्या कम कर दी। हमारे शो की संख्या 250 से घटकर 25 रह गई। अच्छी जगहों पर मौजूद PVR और सिनेपोलिस जैसे मल्टीप्लेक्स हमारे शो चलाने को लेकर हिचकिचा रहे थे।”

शो की संख्या में अचानक आई कमी से विशाल को लगा कि उनका यह पसंदीदा प्रोजेक्ट शायद फ़ेल हो गया है। इसी दौरान, इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट ने उन्हें उम्मीद से ज़्यादा हिम्मत दी। उन्होंने कहा, “इस अनिश्चितता के बीच, मुझे इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट दिखा, जिसे मैं आम तौर पर नज़रअंदाज़ कर देता हूं।

ये वो पोस्ट होते हैं जिन्हें लोग खुद लिखते हैं और महाराज जी के संदेश के तौर पर पेश करते हैं। मन ही मन मुझे लग रहा था कि मेरी फ़िल्म बुरी तरह पिट गई है। हालाँकि, ऐसे समय में उस पोस्ट में लिखा था, ‘अपना काम करो, बाकी मैं संभाल लूँगा।’ इसने पहले हफ़्ते के आखिर में मुझे अजीब तरह से प्रेरित किया।”

सिर्फ़ पारंपरिक प्रमोशन पर निर्भर रहने के बजाय, विशाल ने अपनी टीम के साथ यात्रा करने और दर्शकों से खुद मिलने का फ़ैसला किया। आज़ादी के दिन से पहले वाले शुक्रवार को, वह मुख्य अभिनेता शोबिनव सत्या और संगीतकार ऋषि पाठक के साथ सूरत गए। टीम तब पहुंची जब फ़िल्म की स्क्रीनिंग चल रही थी। दर्शकों से मिले रिस्पॉन्स ने आखिरकार फ़िल्म के प्रति थिएटर मालिक का नज़रिया बदल दिया।

उन्होंने बताया, “हम सूरत के लिए निकले, जहां उन्होंने सिर्फ़ एक शो रखा था। हम तब पहुंचे जब शो चल रहा था। जब उन्होंने हमें देखकर लोगों का रिएक्शन देखा—लोग हमें गले लगा रहे थे और रो रहे थे—तो थिएटर मालिक हैरान रह गए। उस व्यक्ति ने दूसरे थिएटरों को फ़ोन करना शुरू किया और शो की संख्या बढ़ गई। फिर हम वडोदरा और अलीगढ़ जैसी जगहों पर गए और शो की संख्या में ज़बरदस्त बढ़ोतरी हुई।”

इसके बाद विशाल और उनकी टीम ने कई जगहों का दौरा किया, थिएटर और मंदिरों में गए और सीधे दर्शकों से बातचीत की। उन्होंने बताया कि अलीगढ़ में, उस हफ़्ते जोड़े गए पहले शो के सभी टिकट 15 मिनट में ही बिक गए।

इसके बाद फ़िल्म की थिएटर यात्रा ने रफ़्तार पकड़ी; फ़िल्ममेकर से मिली जानकारी के मुताबिक, ‘हनुमान अंश’ अब 75 करोड़ रुपये के आंकड़े के करीब पहुँच रही है। उन्होंने यह भी बताया कि फ़िल्म 2 करोड़ रुपये के बजट में बनी थी और अब इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिलीज़ किया जाएगा।

‘हनुमान अंश’ थिएटर में ‘आवारापन 2’ और ‘बंटवारा’ के साथ रिलीज़ हुई थी। फ़िल्म की सफलता के बावजूद, विशाल ने कहा कि जब फ़िल्म संघर्ष कर रही थी, तब उन्हें हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री से वैसी मदद नहीं मिली जैसी उन्हें उम्मीद थी।

उन्होंने कहा, “फ़िल्म के अच्छा प्रदर्शन करने के बाद, कई लोगों ने मुझे बधाई देने के लिए फ़ोन किया। मैं उनके नाम नहीं लेना चाहता। बधाई देने वालों में मधुर भंडारकर भी शामिल थे, जिनसे मैंने कोई मदद नहीं मांगी थी। हालांकि, मैं दूसरों का ज़िक्र नहीं कर रहा हूं क्योंकि मैंने उन लोगों से मदद मांगी थी और उन्होंने मेरी मदद नहीं की। इसलिए, मैं अभी उनके नाम नहीं लेना चाहता, सिर्फ़ इसलिए कि वे मुझे बधाई दे रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “ज़्यादातर लोगों को पता नहीं होता कि क्या चलेगा, फिर भी वे दूसरों को अपनी सलाह देते रहते हैं। इंडस्ट्री उलझन में पड़े लोगों से भरी हुई है। यहां दो तरह के लोग हैं – एक वे जो सच में फ़िल्में बनाना चाहते हैं, और दूसरे वे जिनमें कोई जुनून नहीं है और वे सोचते हैं कि फ़िल्म बनाना एक ऐसी चीज़ है जिसे उन्हें आज़माना चाहिए।”

SBI Scholarship 2026: स्टूडेंट्स को SBI दे रहा ₹15 लाख तक की स्कॉलरशिप! 19 सितंबर तक है मौका, जानें पूरी डिटेल्स

SBI Asha Scholarship 2026-27: अगर आप या आपके घर में कोई स्टूडेंट स्कूल, कॉलेज, IIT, IIM, मेडिकल या विदेश में पढ़ाई कर रहा है और पढ़ाई का खर्च आड़े आ रहा है, तो देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक की यह स्कीम आपके बड़े काम आ सकती है। एसबीआई फाउंडेशन ने ‘एसबीआई प्लेटिनम जुबली आशा स्कॉलरशिप 2026-27’ के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है।

क्या है इस स्कीम में?

एसबीआई की इस योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आने वाले मेधावी छात्रों को ₹15,000 से लेकर ₹15 लाख सालाना तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। इसके लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह से निःशुल्क और ऑनलाइन है। आधिकारिक पोर्टल के अनुसार, 2026-27 सत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन की लास्ट डेट बढ़ाकर 19 सितंबर 2026 कर दी गई है।

किस कैटेगरी में मिलेगी कितनी स्कॉलरशिप?

एसबीआई आशा स्कॉलरशिप अलग-अलग शैक्षणिक स्तर के हिसाब से दी जा रही है:

  • कक्षा 9वीं से 12वीं के छात्र: ₹15,000 सालाना।
  • अंडरग्रेजुएट (UG) छात्र: ₹75,000 तक।
  • पोस्टग्रेजुएट (PG) छात्र: ₹1.5 लाख तक।
  • MBBS (मेडिकल) छात्र: ₹2 लाख तक।
  • IITs (इंजीनियरिंग) छात्र: ₹2 लाख तक।
  • IIMs (MBA/PGDM) छात्र: ₹5 लाख तक।
  • विदेश में पढ़ाई करने वाले : ₹15 लाख तक।

कौन कर सकता है अप्लाई?

स्कॉलरशिप पाने के लिए एसबीआई फाउंडेशन ने कुछ शैक्षणिक और फैमिली इनकम की शर्तें तय की हैं:

कक्षा 9 से 12वीं के लिए: पिछली कक्षा में कम से कम 75% अंक या 7.5 CGPA होना अनिवार्य है। SC/ST छात्रों के लिए न्यूनतम अंक 65% और दिव्यांग छात्रों (PwBD) के लिए 60% तय किए गए हैं। पारिवारिक आय सीमा ₹3 लाख सालाना से अधिक नहीं होनी चाहिए।

ग्रेजुएशन और पोस्टग्रेजुएशन (UG/PG): UG छात्रों के लिए पारिवारिक आय सीमा ₹6 लाख सालाना है। कॉलेज/संस्थान NIRF ओवरऑल रैंकिंग की टॉप 300 सूची में या NAAC ‘A’ ग्रेड प्राप्त होना चाहिए।

MBBS: AIIMS या NIRF टॉप 50 मेडिकल कॉलेज में एडमिशन होना चाहिए। साथ ही NEET स्कोरकार्ड अनिवार्य है।

IIT: देश के 23 IITs में से किसी एक में पढ़ाई और वैध JEE Advanced स्कोरकार्ड।

IIM: देश के 22 IIMs में अध्ययनरत छात्र और वैध CAT स्कोरकार्ड (आय सीमा व शैक्षणिक नियम लागू)।

विदेश में उच्च शिक्षा: QS टॉप 200 यूनिवर्सिटीज में पढ़ाई कर रहे या एडमिशन ऑफर लेटर पाने वाले भारतीय छात्र पात्र हैं। पारिवारिक आय ₹6 लाख सालाना से कम होनी चाहिए। वैध GRE, GMAT, MCAT, LNAT या LSAT स्कोरकार्ड होना अनिवार्य है।

आवेदन कैसे करें और क्या-क्या डॉक्यूमेंट्स चाहिए?

पोर्टल पर जाएं: आधिकारिक SBI Asha Scholarship पोर्टल पर जाकर अपना अकाउंट बनाएं।

कैटेगरी चुनें: अपनी योग्यता के अनुसार सही स्कॉलरशिप कैटेगरी का चयन करें और फॉर्म भरें।

डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें: पिछली शैक्षणिक मार्कशीट, पहचान पत्र (Aadhaar/Govt ID), आय प्रमाण पत्र, बैंक पासबुक डिटेल्स, एडमिशन/बोनाफाइड सर्टिफिकेट और फीस रसीद, प्रवेश परीक्षा स्कोरकार्ड (JEE/NEET/CAT/GRE/GMAT आदि), कास्ट सर्टिफिकेट या दिव्यांग प्रमाण पत्र (अगर लागू हो)।

ध्यान दें: एक बार फॉर्म सबमिट होने के बाद इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया जा सकेगा। शॉर्टलिस्ट किए गए छात्रों का टेलीफोनिक इंटरव्यू और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के बाद फाइनल सिलेक्शन होगा।

Rentomojo IPO 9 सितंबर से, ₹384-₹404 रहेगा प्राइस बैंड; ग्रे मार्केट में अभी से चढ़ा शेयर

फर्नीचर, अप्लायंसेज किराए पर देने वाली कंपनी रेंटोमोजो का ₹1,255.57 करोड़ का IPO 9 सितंबर को खुलने वाला है। इसके लिए प्राइस बैंड ₹384-₹404 प्रति शेयर तय किया गया है। लॉट साइज 37 शेयर है। इस इश्यू में ₹150 करोड़ के 37.15 लाख नए शेयर जारी होंगे। साथ ही ₹1,105.57 करोड़ के 2.74 करोड़ शेयरों का ऑफर फॉर सेल (OFS) रहेगा। OFS में कंपनी के प्रमोटर गीतांश बामनिया के साथ-साथ एक्सेल इंडिया IV (मॉरीशस), एडलवाइस डिस्कवरी फंड-सीरीज I, IDG वेंचर्स इंडिया फंड III LLC, वैल्यू क्वेस्ट S.C.A.L.E. फंड, मैडिसन इंडिया, चिराटे वेंचर्स, GMO पेमेंट गेटवे समेत कई निवेशक शेयरों को बिक्री के लिए रखेंगे।

IPO में एंकर निवेशक 8 सितंबर को बोली लगा सकेंगे। इश्यू की क्लोजिंग 11 सितंबर को होगी, जिसके बाद अलॉटमेंट 15 सितंबर को फाइनल होगा। कंपनी के शेयर NSE और BSE पर 17 सितंबर को लिस्ट हो सकते हैं। इश्यू के लिए मोतीलाल ओसवाल इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स, एक्सिस कैपिटल और IIFL कैपिटल सर्विसेज बुक रनिंग लीड मैनेजर हैं। रजिस्ट्रार Kfin Technologies Ltd. है।

रेंटोमोजो ग्राहकों को घर के फर्नीचर और अप्लायंसेज के लिए किफायती, फ्लेक्सिबल और लॉन्ग टर्म सब्सक्रिप्शन प्लान उपलब्ध कराती है। इसके प्रोडक्ट्स में घर की जरूरी चीजें जैसे बेड, गद्दे, वॉशिंग मशीन, रेफ्रिजरेटर, अलमारी, सोफा, टेलीविजन, वॉशिंग मशीन, वॉटर प्योरिफायर आदि शामिल हैं। IPO में 50 प्रतिशत हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए, 35 प्रतिशत हिस्सा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए और 15 प्रतिशत हिस्सा नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व है।

IPO के पैसे कैसे होंगे इस्तेमाल

रेंटोमोजो अपने पब्लिक इश्यू में नए शेयर जारी कर हासिल होने वाले पैसों का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए, वेयरहाउस और एक्सपीरियंस स्टोर्स के लिए लीज रेंटल/लाइसेंस फीस का पेमेंट करने के लिए और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए करेगी। ग्रे मार्केट में कंपनी का शेयर 8.17 प्रतिशत प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है।

ESDS Software Solution Listing: ब्लॉकबस्टर एंट्री, शेयर 76% तक बढ़त में लिस्ट

Rentomojo की वित्तीय सेहत

कंपनी का वित्त वर्ष 2025-26 में रेवेन्यू 45 प्रतिशत बढ़कर 394 करोड़ रुपये हो गया। शुद्ध मुनाफा 142 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 104.30 करोड़ रुपये रहा। इस बीच कंपनी पर 187.59 करोड़ रुपये की उधारी थी। एक साल पहले रेवेन्यू 271.96 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 43.11 करोड़ रुपये रहा था।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

लंदन में सीक्रेट मीटिंग, मुनीर का मैसेज और पाकिस्तान का नक्शा बदलने का प्लान! इस नए दांव से उड़े जरदारी-शहबाज के होश

Pakistan Political Crisis: पाकिस्तान की सियासत में एक बार फिर बड़ा भूचाल आने के संकेत मिल रहे हैं। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और गृह मंत्री मोहसिन नकवी के बीच लंदन में हुई 90 मिनट की एक सीक्रेट बैठक ने इस्लामाबाद से लेकर लाहौर तक राजनीतिक हलचल तेज कर दी है।

CNN-News18 के सूत्रों के हवाले से आई खबर के मुताबिक, गृह मंत्री मोहसिन नकवी फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का एक बेहद ‘सीक्रेट मैसेज’ लेकर लंदन में जरदारी के पास पहुंचे थे। इस बैठक का मुख्य एजेंडा पाकिस्तान के प्रशासनिक नक्शे को बदलना यानी नए प्रांत और प्रशासनिक इकाइयां बनाना था।

आइए आपको बताते हैं कि लंदन की इस बैठक का क्या मतलब है, पाक सेना नया नक्शा क्यों बनाना चाहती है और इसमें नवाज शरीफ की एंट्री कैसे हुई है।

असीम मुनीर का मैसेज और जरदारी की चाल

जानकारी के मुताबिक, पाक आर्मी देश में नए प्रांत बनाने के प्रस्ताव पर तेजी से काम आगे बढ़ाना चाहती है और इसके लिए राष्ट्रपति जरदारी पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रपति जरदारी नए प्रांत बनाने के पूरी तरह खिलाफ नहीं हैं, लेकिन वे इसे बेहद धीमी और चरणबद्ध प्रक्रिया के तहत लागू करना चाहते हैं।

जरदारी का सुझाव है कि नए प्रांतों के गठन की शुरुआत पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा (KPK) से की जानी चाहिए, क्योंकि इन दोनों राज्यों की प्रांतीय असेंबलियों में नए प्रांत बनाने को लेकर पहले ही प्रस्ताव पारित हो चुके हैं।

PPP के लिए सिंध क्यों बना है सबसे बड़ा रोड़ा?

आसिफ अली जरदारी अपने राजनीतिक गढ़ सिंध के किसी भी तरह के बंटवारे के सख्त खिलाफ हैं। सिंध प्रांत पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) की सत्ता का मुख्य आधार है। जरदारी को डर है कि सिंध को बांटने का कोई भी कदम उठाने पर वहां के राष्ट्रवादी गुट उग्र विरोध प्रदर्शन शुरू कर सकते हैं, जिससे पीपीपी का सियासी वर्चस्व खत्म हो जाएगा।

वहीं बलूचिस्तान में पहले से जारी उग्रवाद और नाजुक सुरक्षा स्थितियों के कारण भी जरदारी वहां फिलहाल कोई नया प्रशासनिक प्रयोग करने से बच रहे हैं।

सीधा बंटवारा नहीं, तो क्या है अल्टरनेटिव प्लान?

संविधान में तुरंत संशोधन करके नक्शा बदलने के बजाय एक बीच का रास्ता भी तलाशा जा रहा है:

नई प्रशासनिक इकाइयां बनाना: पहले चरण में प्रांतों को विभाजित करने के बजाय नई प्रशासनिक इकाइयां बनाई जाएं और स्थानीय निकायों को मजबूत किया जाए।

संवैधानिक संशोधन: इसके बाद संविधान के अनुच्छेद 140 और अनुच्छेद 160 में संशोधन पर विचार किया जा सकता है।

अनुच्छेद 140: स्थानीय सरकारों के ढांचे से संबंधित है।

अनुच्छेद 160: राष्ट्रीय वित्त आयोग (NFC) और केंद्र-राज्यों के बीच वित्तीय संसाधनों के बंटवारे का फैसला करता है।

नवाज शरीफ की एंट्री और रायविंड में बड़ी बैठक

सैन्य प्रतिष्ठान के बढ़ते दबाव के बीच राष्ट्रपति जरदारी ने पीएमएल-एन (PML-N) के सुप्रीम नेता नवाज शरीफ से संपर्क साधा है। CNN-News18 के सूत्रों के अनुसार, हाल ही में लाहौर के रायविंड में नवाज शरीफ की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल मीटिंग हुई, जिसमें प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज मौजूद थीं। बैठक में तय हुआ कि नए प्रांतों के इस संवेदनशील मुद्दे पर पहला स्टैंड पीपीपी लेगी, जिसके बाद ही PML-N अपना अगला कदम तय करेगी।

पाक सेना क्यों बदलना चाहती है देश का नक्शा?

सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तानी सेना/सैन्य प्रतिष्ठान छोटे प्रांत या प्रशासनिक इकाइयां बनाकर PML-N (पंजाब में मजबूत) और PPP (सिंध में मजबूत) के पारंपरिक राजनीतिक वर्चस्व को कमजोर करना चाहती है।

अगर पंजाब और सिंध जैसे बड़े सूबों को बांटा जाता है, तो सत्ता के नए केंद्र बनेंगे और पुरानी स्थापित राजनीतिक पार्टियों की पकड़ ढीली पड़ जाएगी। यही वजह है कि यह कोई सामान्य प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि पाकिस्तान का राजनीतिक समीकरण बदलने वाला खेल है।

Mirzapur Viral Dialogues: ‘मिर्जापुर द मूवी’ हुई रिलीज, सोशल मीडिया पर वायरल हुए डायलॉग

Mirzapur Viral Dialogues: अमेजन प्राइम वीडियो की सबसे पॉपुलर सीरीज ‘मिर्जापुर’ का प्रीक्वल आखिरकार सिनेमाघरों में रिलीज हो गया है। अली फजल, पंकज त्रिपाठी, श्वेता त्रिपाठी, दिव्येंदु, अभिषेक बनर्जी, रवि किशन और श्रिया पिलगांवकर जैसे कलाकारों से सजी इस फिल्म ने फैंस के बीच खूब एक्साइटमेंट बनाकर रखा हुआ है। रिलीज के बीच सोशल मीडिया पर इस सीरीज के फेमस डायलॉग तेजी से वायरल हो रहे हैं।

1-बंदूकों की मदद से डर नहीं बढ़ाना है, डर की मदद से बंदूकें बढ़ाना है….

2-अटैक में भी गन, डिफेंस में भी गन, हम बनाएंगे मिर्जापुर को अमेरिका…..

3-माता जी यहां है, बहन यहां है, मां बहन करने में आसानी होगी…

4-डर की यही दिक्कत है कि कभी भी खतम हो सकता है….

5-सुरू मजबूरी में किये थे, अब मजा आ रहा है….

6-इज्जत नहीं करते हैं, डरते हैं सब….

7-अब चाहे सांप आके घर में दोस्ती करले..रहता तो जहरीला ही है ना….

8-कुछ लोग बाहुबली पैदा होते हैं, और कुछ बनाना पढ़ते हैं…इनको बनाएंगे…..

9-अगर नेता बनना है तो गुंडे पालो, गुंडे बनो मत…..

10-जो आया है, वो जाएगा भी बस मर्जी हमारी होगी….

ट्रेन बदली, स्टेशन बदले और बन गया रिकॉर्ड! दिल्ली मेट्रो एम्प्लॉई की अनोखी कहानी

दिल्ली मेट्रो के एम्प्लॉई ने सभी मेट्रो स्टेशनों का सफर सबसे कम समय में पूरा करके नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने बहुत ही कम टाइम में पूरी जर्नी कर पिछला रिकॉर्ड तोड़ दिया। इससे पहले भी वह 2022 में यह कोशिश कर चुके थे, लेकिन इस बार सही रूट और बेहतर प्लानिंग के साथ उन्होंने अपना ही परफॉरमेंस काफी बेहतर किया। दिल्ली मेट्रो के कामकाज और रूट की अच्छी जानकारी ने भी इस रिकॉर्ड को बनाने में उनकी काफी मदद की।

metro

सिर्फ 15 घंटे में रचा इतिहास

दिल्ली मेट्रो के एम्प्लॉई ने सभी मेट्रो स्टेशनों का सफर सबसे कम समय में पूरा करके नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने यह पूरी जर्नी 14 घंटे, 54 मिनट और 36 सेकंड में पूरी की। सिंह ने 23 मई को सुबह करीब 6 बजे वायलेट लाइन के राजा नाहर सिंह मेट्रो स्टेशन से अपनी जर्नी शुरू की थी। इसके बाद उन्होंने अलग-अलग मेट्रो लाइनों और इंटरचेंज का इस्तेमाल करते हुए सफर जारी रखा और रात करीब 9 बजे गुरुग्राम के मिलेनियम सिटी सेंटर मेट्रो स्टेशन पर पहुंचकर इसे पूरा किया। इतने बड़े नेटवर्क में इतने कम समय में सफर पूरा करना आसान नहीं था।

सही रूट ने बचाया समय

प्रफुल्ल सिंह ने इस बार जून 2023 में बनाए गए पुराने गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। इससे पहले सुजॉय कुमार मित्रा और शिप्रा गुप्ता ने 15 घंटे, 21 मिनट और 4 सेकंड में दिल्ली मेट्रो के सभी स्टेशनों का सफर पूरा किया था। सिंह ने इस समय से करीब 26 मिनट कम में अपना सफर पूरा किया। भले ही यह अंतर ज्यादा बड़ा न लगे, लेकिन मेट्रो के इतने बड़े नेटवर्क में कुछ मिनट बचाना भी काफी मुश्किल होता है। एक लाइन से दूसरी लाइन पर जाने में थोड़ा सा भी समय ज्यादा लग जाए, तो पूरी प्लानिंग बिगड़ सकती है।

पुरानी गलती से मिली सीख

इस रिकॉर्ड को बनाने की कोशिश सिंह ने पहली बार नहीं की थी। वह 2022 में भी दिल्ली मेट्रो के 254 स्टेशनों का सफर कर चुके हैं। उस समय उन्होंने यह जर्नी 16 घंटे, 2 मिनट और 17 सेकंड में पूरी की थी। पहली कोशिश के दौरान गलत रूट लेने की वजह से उनका काफी समय खराब हो गया था। इस एक्सपीरियंस से सीखते हुए उन्होंने इस बार पहले से ज्यादा तैयारी की। ‘द प्रिंट’ की रिपोर्ट के मुताबिक, सिंह ने बताया कि पिछली बार उन्हें गलत रूट की वजह से करीब डेढ़ घंटे की देरी हुई थी, लेकिन इस बार उन्हें भरोसा था कि वह अच्छा परफॉर्म करेंगे।

मेट्रो की जानकारी बनी ताकत

प्रफुल्ल सिंह के लिए उनकी नौकरी का एक्सपीरियंस भी इस चुनौती में काफी फायदेमंद रहा। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन यानी DMRC के ऑपरेशन्स सेक्टर में काम करने की वजह से उन्हें मेट्रो के रूट, ट्रेन के शेड्यूल, इंटरचेंज स्टेशन और अलग-अलग लाइनों की कनेक्टिविटी की अच्छी जानकारी थी। इसी वजह से वह जर्नी में सही रास्ता चुनने और समय बचाने में कामयाब रहे। पूरे मेट्रो नेटवर्क को कम से कम समय में कवर करना एक तरह की स्पीड चैलेंज जैसा है, जिसमें हर मिनट मायने रखता है। एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन तक पहुंचने के साथ-साथ सही समय पर ट्रेन बदलना भी जरूरी होता है।

प्रफुल्ल सिंह को मिला यह अचीवमेंट बताता है कि सही तैयारी, हिम्मत और लगन के साथ मुश्किल से मुश्किल चुनौती भी पूरी की जा सकती है। उनका रिकॉर्ड न सिर्फ उनकी मेहनत को दिखाता है, बल्कि यह भी बताता है कि अपने काम की अच्छी समझ किसी भी लक्ष्य को हासिल करने में कितनी मददगार हो सकती है।

बंगाल में खुलेंगे RSS के 1000 नए स्कूल, शिक्षा विभागों का होगा विलय; जानें बड़ा ऐलान

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक योजना के बारे में जानकारी दी है। इसके तहत अगले एक साल में हर जिले, नगर पालिका और पंचायत में RSS से जुड़ी संस्था विद्या भारती के कम से कम 1,000 स्कूल खोलने का लक्ष्य है। इसके अलावा राज्य के चार शिक्षा विभागों को मिलाकर एक विभाग बनाने की भी बात कही गई है। इस योजना के तहत मदरसा शिक्षा के लिए अलग विभाग नहीं होगा। सीएम ने विद्या भारती की 74वीं वर्षगांठ के मौके पर रामकृष्ण मिशन इंस्टीट्यूट ऑफ कल्चर में आयोजित कार्यक्रम में इसकी जानकारी दी है। वहीं इस कार्यक्रम में सुवेंदु अधिकारी ने संस्था की भूमिका को लेकर अपनी बात रखी।

सीएम ने इन जगहों पर स्कूलों खोलने की कही बात

उन्होंने विद्या भारती से बच्चों को देश और समाज से जुड़ी शिक्षा देने की दिशा में काम करने की अपील की। साथ ही, उन्होंने संस्था के वरिष्ठ पदाधिकारियों को सचिवालय बुलाकर सरकारी अधिकारियों के साथ बैठक करने और इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए कहा। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने संस्था से मुर्शिदाबाद और दक्षिण 24 परगना में स्कूलों की संख्या बढ़ाने पर खास ध्यान देने को कहा। उन्होंने इन इलाकों में ज़्यादा एंटी-नेशनल एक्टिविटीज होने का दावा भी किया। अधिकारी ने पिछली टीएमसी सरकार पर शिक्षा का माहौल खराब करने का आरोप लगाते हुए कहा कि विद्या भारती जैसी संस्थाओं को राज्य में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद करनी चाहिए।

टीएमसी पर लगाए ये आरोप

उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली टीएमसी सरकार के दौरान शिक्षा का माहौल खराब हो गया था। उन्होंने टीएमसी पर लोगों को बांटने के लिए बंगाली पाठ्यक्रम में बदलाव करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम में ‘मां’ की जगह ‘अम्मा’ शब्द का इस्तेमाल किया गया। साथ ही, उन्होंने दावा किया कि पाठ्यक्रम में ईश्वर चंद्र विद्यासागर और स्वामी विवेकानंद की शिक्षाओं को भी नजरअंदाज किया गया। श्यामा प्रसाद मुखर्जी के “एक देश, एक विधान, एक निशान, एक प्रधान” के नारे का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यही सोच शिक्षा के क्षेत्र में भी लागू होनी चाहिए।

सीएम ने क्या कहा

सीएम ने कहा कि, “हम ऐसा कोई इंतजाम नहीं होने देंगे जहां हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट सभी यूनिवर्सिटीज को देखेगा, वहीं दूसरा डिपार्टमेंट आलिया यूनिवर्सिटी को देखेगा।” आलिया यूनिवर्सिटी को अभी राज्य का माइनॉरिटी अफेयर्स डिपार्टमेंट मैनेज करता है। सीएम ने आगे कहा,” मैंने बोर्ड टॉपर्स को सम्मानित किया। बाद में, माइनॉरिटी अफेयर्स डिपार्टमेंट ने 27 मुस्लिम स्टूडेंट्स के नामों वाली एक अलग फाइल भेजी। मैंने पूछा क्यों? मैं पहले ही 20 स्टूडेंट्स को सम्मानित कर चुका हूँ, और उनमें मुस्लिम, जैन और बौद्ध शामिल हैं।” पश्चिम बंगाल में फिलहाल विद्या भारती के 313 स्कूल चल रहे हैं, जबकि पूरे देश में यह संस्था 12,000 से ज्यादा स्कूल और 10,000 बाल संस्कार केंद्र संचालित करती है।

Mausam 4 Sep: आज इन राज्यों में मूसलाधार बारिश! MP में ऑरेंज कलर अलर्ट जारी, जानें दिल्ली-यूपी से लेकर दक्षिण भारत तक के मौसम का हाल

जानिए न्यू-एज पैरेंटिंग के 5 जरूरी नियम, जहां बच्चों का बचपन मार्क्स और रैंक की रेस में नहीं निकलता!

आजकल बच्चों पर पढ़ाई को लेकर काफी दबाव रहता है। अच्छे नंबर लाना, क्लास में फर्स्ट आना और बाकी बच्चों से आगे निकलना, ये सब बातें छोटी उम्र से ही उनके दिमाग में आने लगती हैं। कई बार माता-पिता की ज्यादा उम्मीदों की वजह से भी बच्चों पर दबाव बढ़ जाता है। जब बच्चे को बार-बार उसके मार्क्स या रैंक से जज किया जाता है, तो उसे लगने लगता है कि अच्छे नंबर लाना ही सबसे जरूरी है।

लेकिन हर बच्चा अपने तरीके से सीखता है और हर बच्चे की अपनी खासियत होती है। इसलिए बच्चों की दूसरे बच्चों से तुलना करने या हर बार टॉप करने की उम्मीद रखने के बजाय उनकी मेहनत और पसंद को समझना जरूरी है। माता-पिता को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि उनकी बातें बच्चों के मन पर असर डालती हैं। बच्चों को सिर्फ अच्छे नंबर लाने के लिए नहीं, बल्कि खुश रहने, खुद पर भरोसा रखने और अपनी पसंद के काम करने के लिए भी आगे बढ़ाना चाहिए।

chuld parnt

1. सेल्फ-कॉन्फिडेंस बढ़ाएं

कई बार माता-पिता बच्चे के अच्छे नंबर आने के बाद भी इस बात पर ध्यान देते हैं कि वह फर्स्ट क्यों नहीं आया। जैसे, यदि बच्चे को 18 नंबर मिले हैं, तो उसकी तारीफ करने के बजाय उससे कहा जाता है कि तुम फर्स्ट नहीं आए। ऐसी बातें बार-बार सुनने से बच्चे को लग सकता है कि उसकी मेहनत की कोई कीमत नहीं है। धीरे-धीरे उसका सेल्फ-कॉन्फिडेंस कम हो सकता है और उसे हर हाल में दूसरों से आगे निकलने का प्रेशर फील होने लगता है।

2. कॉम्पिटिशन के लिए मोटिवेट करें

बच्चों के बीच थोड़ा कॉम्पिटिशन उन्हें मेहनत करने और बेहतर करने के लिए मोटिवेट कर सकता है। परेशानी तब शुरू होती है, जब बच्चा हर समय दूसरे बच्चों को हराने के बारे में सोचने लगे। माता-पिता को बच्चों को यह समझाना चाहिए कि मुकाबला किसी को नीचा दिखाने के लिए नहीं, बल्कि खुद को बेहतर बनाने के लिए होना चाहिए।

3. अपना काम खुद करना सिखाएं

एक स्कूल स्पोर्ट्स डे की रेस ने इस बात को समझने का एक अच्छा उदाहरण दिया। रेस में बच्चे को दौड़कर एक पानी की बोतल उठानी थी और वापस आना था। उसने अपनी पसंद की नीली बोतल उठाई, लेकिन बाद में अपनी बहन के पसंदीदा रंग की गुलाबी बोतल लेने के लिए भी रुक गया। इस वजह से वह रेस नहीं जीत पाया, लेकिन उसने अपनी बहन के बारे में सोचकर जो किया, वह जीत से कहीं ज्यादा खास था।

4. मार्क्सशीट नहीं, बच्चे की काबिलियत पहचानें

यदि कोई बच्चा दौड़ने में तेज है, तो जरूरी नहीं कि वह ड्राइंग में भी अच्छा हो। इसी तरह कोई बच्चा पढ़ाई में औसत हो सकता है, लेकिन खेल, कला या किसी दूसरी चीज में बहुत अच्छा कर सकता है। इसलिए बच्चों को सिर्फ रैंक या मार्क्स के बेस पर जज नहीं करना चाहिए। उन्हें यह समझाना जरूरी है कि किसी और का किसी चीज में बेहतर होना उनकी काबिलियत को कम नहीं करता। हर बच्चे का फर्स्ट आना जरूरी नहीं है, जरूरी है कि वह अपनी खूबियों को पहचाने और खुद पर भरोसा करना सीखे।

5. बच्चों की बात ध्यान से सुनकर दें सही सॉल्यूशन

हर बच्चे की अपनी पसंद, सोच और सीखने का तरीका अलग होता है। इसलिए सिर्फ यह पूछने के बजाय कि कितने नंबर आए या कौन-सी रैंक मिली, माता-पिता को यह भी पूछना चाहिए कि बच्चे को पढ़ाई में क्या अच्छा लगा, कहां परेशानी हुई और वह किस चीज में दिलचस्पी रखता है। जब बच्चों को अपनी बात खुलकर कहने का मौका मिलता है, तो वे ज्यादा सहज महसूस करते हैं और माता-पिता के साथ अपनी परेशानियां भी आसानी से शेयर कर पाते हैं।

बच्चों का बचपन मार्क्स और रैंक की रेस नहीं होना चाहिए। हर बच्चे की अपनी अलग खूबी होती है और जरूरी नहीं कि हर कोई पढ़ाई में ही सबसे आगे हो। माता-पिता बच्चों को मेहनत के लिए जरूर एप्रिशिएट करें, लेकिन उनकी तुलना दूसरों से न करें। उनकी मेहनत, रुचि और खूबियों की तारीफ करने से उनका सेल्फ-कॉफिडेंस बढ़ेगा। क्योंकि फर्स्ट आने से ज्यादा जरूरी है कि बच्चा खुश रहे और अच्छा इंसान बने।