Top 5 most powerful 125cc bikes under Rs 1 lakh in India

Top 5 most powerful 125cc bikes under Rs 1 lakh in India
Top 5 most powerful 125cc bikes under Rs 1 lakh in India

Until fairly recently, the 125cc segment in India was dominated by simple, no-frills commuters. However, that’s begun to change, with manufacturers introducing models that add more character, features and performance to the mix while still keeping prices in check. With that in mind, we’ve rounded up the most powerful 125cc motorcycles you can currently buy in India for under Rs 1 lakh.

All prices are ex-showroom, Delhi.

1. Honda SP 125

10.9hp – Rs 97,335 onwards

The 123.94cc single-cylinder air-cooled engine on the Honda SP 125 produces a modest 10.9hp and 10.9Nm. As part of its 2025 update to meet OBD2B emission norms, it also gained the Bluetooth-enabled 4.2-inch TFT display from the Activa 125, along with a USB charging port.

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Honda SP 125 BS6 review, test ride

2. TVS Raider 125

11.4hp – Rs 83,910 onwards

Launched in 2021, the TVS Raider 125 played a key role in redefining what a 125cc bike could look and feel like. With its sporty design and a larger-than-usual presence for a commuter, it’s a motorcycle aimed at younger riders.

Power comes from a 124.8cc single-cylinder engine producing 11.4hp and 11.2Nm. We’ve tested the Raider on both the track and the street, and its engine impresses with tractable performance for daily commuting, along with a playful edge that keeps things entertaining. 

Equipment levels are strong too, with an LCD unit, two ride modes (Eco and Power) that adjust the rev limit and TVS’s Glide Through Technology. There are seven variants in total, all using the same engine, and only the top-end SX variant crosses the Rs 1 lakh mark at Rs 1.01 lakh.

Also see:

TVS Raider 125 review, test ride

3. Hero Glamour X

11.5hp – Rs 88,517 

The Glamour X launched late last year, with cruise control functionality being the headlining feature for this humble 125cc commuter. Unheard of in two or three segments above, Hero managed to plonk this convenience feature in a 125cc along with a few others such as riding modes and a segmented colour LCD dash. Priced from Rs 88,517, the base variant misses out on a front-disc brake and some standout features. However, the top variant with all the tech is priced at Rs 96,876. It comes powered by a 124.7cc, air-cooled, single-cylinder engine producing 11.5hp and 10.5Nm. This engine is shared with the Xtreme 125R.  

4. Hero Xtreme 125R

11.5hp – Rs 98,425 onwards

The Hero Xtreme 125R is powered by a 124.7cc single-cylinder air-cooled engine producing 11.5hp and 10.5Nm. Much of its visual appeal comes from the fact that it borrows heavily from its larger sibling, the Xtreme 160 – including a chassis based on that bike and the same 37mm telescopic fork. The Xtreme 125R is offered in three variants, with only the IBS (Integrated Braking System) version priced under Rs 1 lakh.

Also see:

Hero Xtreme 125R vs TVS Raider 125 performance compared

5. Bajaj Pulsar 125

12.1hp – Rs 92,990 onwards

At long last, Bajaj has updated the Classic Pulsar range, and it has moved on to the second generation after 25 years. It would be wrong to say that the models weren’t updated over the years, since the first Pulsar came out with a round headlight, and subsequently, the Classic Pulsar range moved on to the iconic ‘Wolf-eye’ design. Now, in 2026, Bajaj has launched a new generation of the Pulsar 125 that is also the most powerful motorcycle in its segment. It comes with a brand-new 124.58cc single-cylinder air/oil-cooled engine producing 12.1hp at 8,500rpm (a gain of 0.3hp) and 11.4Nm at 6,500rpm (a gain of 0.6Nm). This makes it the most powerful 125cc motorcycle, and it also comes generously equipped with features such as an LED headlight and a TFT dash on the top variants. 

Impact Player को हटाने के पक्ष में भारतीय क्रिकेट बोर्ड, मांगे फ्रैंचाइजी के सुझाव

इंडियन प्रीमियर लीग में 3 साल पहले आए इम्पैक्ट प्लेयर नियम की चौतरफा आलोचना के बाद भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने आखिरकार फ्रैंचाइजी से इसके बारे में अपना अंतिम विचार जानने के लिए सोमवार 31 अगस्त तक की समय सीमा निर्धारित की है। अगर ज्यादातर फ्रैंचाइजी इसके खिलाफ होंगी तो यह नियम अगले सत्र के लिए बरकरार नहीं रहेगा।

3 साल पहले में लाया गया था यह नियम

 भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने इंडियन प्रीमियर लीग को रोमांचक बनाने के लिये पहली बार यह नियम पेश किया था।यह नियम टीमों को एक मैच में स्थिति के आधार पर एक और गेंदबाज या बल्लेबाज को मैदान पर उतारने की अनुमति देता था। नियम का उद्देश्य खेल में एक रणनीतिक आयाम जोड़ना था जिससे टीमें मैच की स्थिति के आधार पर सामरिक परिवर्तन कर सकें।

इस तरह के किसी भी विकल्प को हालांकि पारी के 14वें ओवर से पहले किया जाता था। इसके तहत टीम में ‘इंपैक्ट प्लेयर’ के तौर पर शामिल होने वाला खिलाड़ी अपने कोटे की पूरी गेंदबाजी या नए बल्लेबाज की तरह बल्लेबाजी कर सकता था।

इसके अतिरिक्त, यदि शुरुआती एकादश में पहले से ही चार विदेशी खिलाड़ी शामिल थे, तो इम्पैक्ट प्लेयर विदेशी नहीं हो सकता था। यदि शुरुआती एकादश में चार से कम विदेशी खिलाड़ी शामिल थे, तो एक गैर-भारतीय इम्पैक्ट प्लेयर को पेश किया जा सकता था।

टूर्नामेंट की समिति ‘इम्पैक्ट सब्स्टीट्यूशन’ (इम्पैक्ट खिलाड़ी के स्थानापन्न) की घोषणा हुई थी जिसमें एक नये खिलाड़ी को मैच के दौरान पांच निर्धारित स्थानापन्न खिलाड़ियों से बदला जा सकता था।

सचिन समेत कई दिग्गजों ने की थी इस नियम की आलोचना

इंडियन प्रीमियर लीग में जान फूंकने के लिए दिग्गज बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। सचिन तेंदुलकर ने इंडियन प्रीमियर लीग IPL में बल्ले और गेंद के बीच संतुलन बनाने के लिए विवादास्पद इम्पैक्ट प्लेयर नियम को खत्म करने की वकालत की और साथ ही कुछ अन्य बदलाव करने के लिए भी सुझाव दिए।

तेंदुलकर ने एक अग्रणी क्रिकेट वेबसाइट द्वारा आयोजित पुरस्कार समारोह में कहा, ‘‘मेरी निजी राय है कि कुछ ऐसी बातें हैं जिनसे मुझे लगता है कि ‘इम्पैक्ट प्लेयर’ का नियम खत्म कर देना चाहिए।’’उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि टी20 प्रारूप में आपको केवल 20 ओवर खेलने होते हैं। फिर आप उस लाइन-अप में एक और बल्लेबाज जोड़ देते हैं। जहां गेंदबाजों को पहले से ही चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

कप्तान रोहित शर्मा से सहमति जताते हुए स्टार बल्लेबाज विराट कोहली ने इंपैक्ट खिलाड़ी के नियम की आलोचना करते हुए कहा कि इससे खेल का संतुलन बिगड़ रहा है।आईपीएल के पिछले सत्र से पारी के बीच में स्थानापन्न खिलाड़ी को उतारने का नियम शुरू हुआ है जिस पर रोहित ने भी नाराजगी जताई थी।

कोहली ने कहा ,‘‘ मैं रोहित का समर्थन करता हूं। मनोरंजन खेल का एक पहलू है लेकिन संतुलन भी होना चाहिये। इससे खेल का संतुलन बिगड़ा है और कई लोगों को ऐसा लगता है , सिर्फ मुझे नहीं।’’

रोहित ने पॉडकास्ट में कहा ,‘‘ मैं इस नियम का मुरीद नहीं हूं। इससे हरफनमौलाओं पर विपरीत असर पड़ेगा। क्रिकेट 11 खिलाड़ियों का खेल है, 12 का नहीं।’’आईपीएल के इस सत्र में आठ बार 250 रन से अधिक का स्कोर बना और कोहली गेंदबाजों का दर्द समझते हैं।

Nifty से ज्यादा Gold ETF में गिरावट, दो वजहों से 4 % तक आया नीचे

Gold ETF Big Fall: गोल्ड और सिल्वर के ईटीएफ (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स) में आज बिकवाली का तेज दबाव दिखा और यह 4% तक टूट गया। इसमें अमेरिकी फेडरल रिजर्व के प्रमुख केविन वार्श (Kevin Warsh) की हॉकिश यानी सख्त कमेंट्स से झटका लगा, जिससे ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें बढ़ीं तो सोने-चांदी के ईटीएफ की चमक फीकी पड़ी। यह बिकवाली वैश्विक मार्केट में सोने-चांदी की कीमतों में आई तेजी के मुताबिक ही है। इंटरनेशनल मार्केट में सोने की कीमतों में सोमवार को भी गिरावट जारी रही।

शुक्रवार को सोने में 3% से अधिक की गिरावट आई, जो जून की शुरुआत के बाद इसकी सबसे बड़ी गिरावट थी। सिंगापुर में कारोबार के दौरान स्पॉट गोल्ड 0.7% गिरकर प्रति औंस $4,422.75 प्रति औंस तो सिल्लर भी 0.4% गिरकर $66.12 प्रति औंस पर आ गया। इसका असर घरेलू बूलियन मार्केट में भी दिखा और MCX Gold प्रति 10 ग्राम 1.14% गिरकर ₹1,54,496 और MCX Silver Futures करीब 1.28% गिरकर ₹2,39,341 प्रति किग्रा पर आ गया।

Gold ETF की तुलना में Silver ETF में अधिक गिरावट

आज 31 अगस्त तो गोल्ड ईटीएफ की तुलना में सिल्वर ईटीएफ में अधिक गिरावट रही। एसबीआई सिल्वर ईटीएफ (SBI Silver ETF) 4.05% गिरकर ₹226.55 पर आ गया, तो निप्पॉन इंडिया सिल्वर ईटीएफ (Nippon India Silver ETF- Silver BeES) 4.06% गिरकर ₹221.07 पर आ गया। टाटा सिल्वर ईटीएफ (Tata Silver ETF) भी 3.98% गिरकर ₹22.44 और आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल सिल्वर ईटीएफ (ICICI Prudential Silver ETF) भी 3.87% गिरकर ₹231.21 पर आ गया।

गोल्ड ईटीएफ में भी भारी गिरावट रही। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल गोल्ड ईटीएफ (ICICI Prudential Gold ETF) 3.59% गिरकर ₹130.75, एसबीआई गोल्ड ईटीएफ (SBI Gold ETF) 3.50% टूटकर ₹130.30 और निप्पॉन इंडिया ईटीएफ गोल्ड बीईएसएस (Nippon India ETF Gold BeES) 3.48% गिरकर ₹126.30 पर आ गया। वहीं टाटा गोल्ड ईटीएफ (Tata Gold ETF) 3.19% गिरकर ₹14.87 पर आ गया।

क्या है US Fed का रुझान

फेडरल रिजर्व की सालाना जैक्सन होल कॉन्फ्रेंस में केविन वॉर्श ने कहा कि वह महंगाई को केंद्रीय बैंक के 2% के लक्ष्य पर वापस लाने के लिए प्रतिबंध है। इसके बाद सोना-चांदी धड़ाम हो गया क्योंकि इससे अमेरिकी मौद्रिक नीतियों के सख्त होने की उम्मीदें बढ़ गई। ट्रेडर्स का मानना है कि सितंबर में नीतिगत बैठक में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना 50% से अधिक है। आमतौर पर ऊंची ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड का असर सोने और चांदी जैसी बिना यील्ड वाली एसेट्स पर पड़ता है।

सोने-चांदी की चमक पर अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई गहहाने से तेल की कीमतों में उबाल ने और दबाव बनाया। अमेरिकी सेना ने रविवार को ईरान के रॉकेट लॉन्चरों पर हमला किया जोकि एक महीने से अधिक समय में ईरान के खिलाफ अमेरिका की पहली सैन्य कार्रवाई थी। कच्चे तेल की कीमतों में इस बढ़ोतरी ने महंगाई की चिंताओं को और बढ़ा दिया, जबकि बाजार पहले से ही आने वाले समय में अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर कैलकुलेशन कर रहा था।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

IIT-IIM के बाद लंदन में थी शानदार नौकरी, UPSC के लिए छोड़ा करियर; अब IAS दिव्या मित्तल ने दिया इस्तीफा

दिव्या मित्तल की कहानी उस सोच से बिल्कुल अलग है, जिसमें अच्छी पढ़ाई, विदेश की नौकरी और शानदार करियर को सफलता की आखिरी मंजिल माना जाता है। IIT Delhi और IIM Bangalore जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से पढ़ाई करने के बाद उन्होंने लंदन में ट्रेडर के तौर पर काम किया। बाहर से उनकी जिंदगी पूरी तरह सफल नजर आती थी, लेकिन उनके मन में अपने देश के लिए कुछ करने की इच्छा बनी रही। इसी सोच ने उन्हें विदेश की नौकरी छोड़कर भारत लौटने और IAS बनने के लिए प्रेरित किया। करीब 13 साल तक सिविल सेवा में रहने के बाद अब उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

30 अगस्त को सोशल मीडिया पर साझा किए गए भावुक पोस्ट में उन्होंने अपने सफर और उससे जुड़ी यादों को साझा किया। उनका ये फैसला इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि उन्होंने सफलता की कई मंजिलें हासिल करने के बाद भी अपनी राह बदलने का साहस दिखाया।

साधारण परिवार से IIT और IIM तक का सफर

दिव्या मित्तल ने बताया कि वह एक साधारण माहौल में पली-बढ़ीं और एक अच्छा और सफल जीवन बनाने का सपना देखा था। इस सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की और IIT Delhi में दाखिला लिया। इसके बाद उन्होंने IIM Bangalore से MBA किया और पढ़ाई पूरी करने के बाद लंदन में ट्रेडर के तौर पर काम शुरू किया। प्रतिष्ठित संस्थानों की डिग्री और विदेश में शानदार नौकरी के बावजूद उन्हें महसूस हुआ कि उनकी जिंदगी में कुछ कमी है।

लंदन की नौकरी छोड़ भारत लौटने का फैसला

विदेश में रहते हुए उन्हें अपने देश से दूर होने का एहसास लगातार परेशान करता रहा। Mittal के मुताबिक, उन्हें लगता था कि उनकी शिक्षा, आत्मविश्वास और मिले अवसरों पर देश का भी हक है। इसी सोच ने उन्हें वापस भारत आने और देश के लिए कुछ करने का फैसला लेने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद उन्होंने IAS को अपना रास्ता चुना और 2013 में सिविल सेवा में शामिल हो गईं।

उत्तर प्रदेश में अफसर रहते हुए बदली सफलता की परिभाषा

IAS बनने के बाद मित्तल ने उत्तर प्रदेश में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। वह Deoria, Mirzapur और Sant Kabir Nagar की District Magistrate भी रहीं। प्रशासनिक जिम्मेदारियों के दौरान उनके सामने ऐसे कई मौके आए, जिन्होंने उनके लिए सफलता का मतलब बदल दिया। किसी परिवार को पहली बार जमीन का अधिकार मिलना, दिव्यांग लोगों को सम्मान के साथ आगे बढ़ने का मौका मिलना या किसानों के खेतों तक पानी पहुंचना इन अनुभवों ने उन्हें महसूस कराया कि सरकारी काम सिर्फ फाइलों तक सीमित नहीं है।

उन्होंने लिखा कि हर सरकारी फाइल के पीछे एक इंसान की जिंदगी जुड़ी होती है।

एक बुजुर्ग महिला का आशीर्वाद कभी नहीं भूल पाईं

Mirzapur के Lahuriya Dih गांव की एक घटना मित्तल के दिल में हमेशा के लिए बस गई। उन्होंने याद किया कि जब पहली बार गांव में पानी पहुंचा तो एक बुजुर्ग महिला ने यह देखकर कुछ नहीं कहा। इसके बजाय उसने कांपते हाथों से Mittal के सिर पर हाथ रखा और उन्हें आशीर्वाद दिया। Mittal के लिए वह पल किसी पद या उपलब्धि से कहीं बड़ा था। उन्होंने भावुक होकर कहा कि पद आज भले पीछे छूट जाए, लेकिन उस बुजुर्ग महिला का स्पर्श उनकी जिंदगीभर की याद बनकर रहेगा।

13 साल बाद समझ आया- देने से ज्यादा पाया

IAS के 13 सालों को याद करते हुए Mittal ने बताया कि शुरुआत में उन्हें लगता था कि वह लोगों को कुछ देने के लिए सेवा में आई हैं। लेकिन समय के साथ उनकी सोच बदल गई। उन्हें एहसास हुआ कि लोगों से मिले प्यार, भरोसे और सम्मान ने उन्हें कहीं ज्यादा समृद्ध किया। जब भी वह थकतीं या खुद मुश्किल दौर से गुजरतीं, लोगों का विश्वास उन्हें आगे बढ़ने की ताकत देता था।

पद छोड़ा, लेकिन सपना अब भी वही है

साधारण परिवेश से निकलकर IIT और IIM तक पहुंचना, लंदन में ट्रेडर बनना और फिर देश की सेवा के लिए IAS में आना Mittal का सफर कई मोड़ों से गुजरा है।

अब उन्होंने 13 साल की सेवा के बाद IAS से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, पद छोड़ने के बावजूद उनका कहना है कि जिस भारत का सपना देखकर वह विदेश से वापस लौटी थीं, वह सपना आज भी उनके साथ है।

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KPSC Exam Scam: भर्ती परीक्षा धांधली में बड़ा एक्शन! IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र गंगवार गिरफ्तार, कौन हैं ये?

KPSC Exam Scam: कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) की पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं के मामले में क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) ने आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार को गिरफ्तार कर लिया है। इसके बाद उन्हें फर्स्ट एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के आवास पर उनके सामने पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

अधिकारियों ने बताया कि बाद में उन्हें परप्पना अग्रहारा जेल ले जाया गया। सूत्रों के अनुसार, जज ने निर्देश दिया कि भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी गंगवार को सोमवार 31 को अदालत में पेश किया जाए।

सीआईडी उनकी हिरासत की मांग कर सकती है। इससे पहले सीआईडी अधिकारियों ने शुक्रवार और शनिवार को गंगवार से पूछताछ की। वह जांच अधिकारी के सामने पेश होने के लिए जारी नोटिस के जवाब में पहुंचे थे। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, गंगवार से पूछताछ इसलिए की जा रही थी क्योंकि वह फरवरी 2024 से मार्च 2026 तक कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) में परीक्षा नियंत्रक (Controller of Examinations) पद पर तैनात थे।

MSME के डायरेक्टर पद पर थे तैनात

उन्होंने बताया कि जांच में सहयोग नहीं करने के आरोप में उन्हें हिरासत में लिया गया। 2016 बैच के आईएएस अधिकारी गंगवार फिलहाल उद्योग एवं वाणिज्य विभाग में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) के निदेशक के पद पर कार्यरत हैं। सीआईडी भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही है। इसमें परीक्षा से जुड़े रिकॉर्ड और ओएमआर शीट के रखरखाव तथा इसमें शामिल अधिकारियों और अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।

ED रेड के निशाने पर आए IAS

सूत्रों के अनुसार, सीआईडी आगे की जांच के लिए गंगवार को संबंधित अदालत में पेश कर उनकी हिरासत की मांग कर सकती है। हाल में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से केपीएससी में कथित अनियमितताओं के संबंध में छापेमारी किए जाने के बाद अधिकारी के पता-ठिकाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया था।

इसके बाद राज्य के गृह मंत्री प्रियंक खरगे ने कहा था कि गंगवार ने उन्हें सूचित किया था कि वह अपने पिता की तबीयत से जुड़ी आपात स्थिति के कारण उत्तर प्रदेश स्थित अपने पैतृक गांव गए थे। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों ने भी इस अधिकारी से जुड़े परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया था। अधिकारियों के अनुसार, केपीएससी से जुड़ी अनियमितताओं के मामले में सीआईडी और ईडी द्वारा अलग-अलग जांच की जा रही है।

भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं की जांच तेज

KPSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर CID की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। जांच एजेंसी परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ कर रही है। इसी क्रम में गंगवार से भी दो दिनों तक पूछताछ की गई।

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अब उनकी गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि कथित अनियमितताओं में उनकी क्या भूमिका थी और परीक्षा प्रक्रिया में किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं। फिलहाल IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार न्यायिक हिरासत में हैं। फिलहाल, मामले की जांच CID के स्तर पर जारी है।

HDFC Bank Share Price: MD और CEO पर नए ऐलान से दिखी 3% तक तेजी, अब ब्रोकरेज का क्या है नजरिया

HDFC Bank के मौजूदा मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) और चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) शशिधर जगदीशन अपना कार्यकाल (टर्म) खत्म होने के बाद फिर से नियुक्ति नहीं चाहते हैं। उनका टर्म 26 अक्टूबर 2026 को खत्म हो रहा है। इस ऐलान के बाद 31 अगस्त को दिन में बैंक के शेयर में करीब 3 प्रतिशत तक की बढ़त दिखी। बीएसई पर शेयर 739.50 रुपये के हाई तक गया। कई ब्रोकरेज फर्मों ने मैनेजमेंट में संभावित बदलाव को लेकर सकारात्मक रुख बरकरार रखा है। लेकिन नए CEO की नियुक्ति को लेकर निकट भविष्य की अनिश्चितता के कारण सावधान भी हैं।

HDFC Bank ने नए MD और CEO की तलाश शुरू कर दी है। कहा है कि उसका बोर्ड उत्तराधिकारी चुनने की प्रक्रिया में तेजी लाएगा। मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, बैंक को उम्मीद है कि वह जगदीशन के 26 अक्टूबर को रिटायर होने से पहले ही अपने नए CEO की नियुक्ति कर लेगा। HDFC Bank के नए MD और CEO के रोल के लिए इंटरनल और एक्सटर्नल दोनों तरह के कैंडिडेट्स पर विचार किया जा रहा है।

HDFC Bank स्टॉक पर ब्रोकरेज की राय

ब्रोकरेज फर्मों के रुख की बात करें तो HDFC Bank पर कवरेज करने वाले एनालिस्ट्स इस डेवलपमेंट को लेकर बंटे हुए हैं। बर्नस्टीन ने बैंक के स्टॉक के लिए ‘आउटपरफॉर्म’ रेटिंग बरकरार रखी है। टारगेट प्राइस 1,150 रुपये प्रति शेयर तय किया है। ब्रोकरेज लीडरशिप में बदलाव को सकारात्मक मानता है। उसका कहना है कि नया CEO बैंक की कहानी को नए सिरे से पेश करने का स्वाभाविक मौका दे सकता है।

जेपी मॉर्गन ने भी स्टॉक पर अपनी ‘ओवरवेट’ रेटिंग बरकरार रखी है। टारगेट प्राइस 990 रुपये तय किया है। ब्रोकरेज का कहना है कि इस घटनाक्रम का असर निकट भविष्य में स्टॉक पर पड़ सकता है, लेकिन समय पर उत्तराधिकार की प्रक्रिया पूरी होने से नेतृत्व को लेकर बनी अनिश्चितता कम हो सकती है। निवेशकों का भरोसा बहाल करने के लिए नेट इंटरेस्ट इनकम (शुद्ध ब्याज आय) में बढ़ोतरी का फिर से शुरू होना काफी मायने रखता है है।

एक्सिस कैपिटल ने ‘बाय’ कॉल के साथ 1,030 रुपये का टारगेट प्राइस बरकरार रखा है। ब्रोकरेज का कहना है कि जगदीशन के फैसले से दूसरे कार्यकाल के छोटा होने की आशंका खत्म हो गई है। नए उत्तराधिकारी को पूरे 3 साल का कार्यकाल मिल सकता है।

IIFL, जेफरीज, ICICI सिक्योरिटीज की क्या राय

IIFL ने जगदीशन के फैसले को न्यूट्रल से थोड़ा पॉजिटिव बताया है। तर्क है कि इससे रेगुलेटरी मंजूरी मिलने पर अगला कार्यकाल छोटा होने का जोखिम खत्म हो जाता है। हालांकि कैजाद भरूचा एक संभावित इंटरनल कैंडिडेट (अंदरूनी उम्मीदवार) हो सकते हैं, लेकिन IIFL का कहना है कि कार्यकाल की पाबंदियों के कारण उन्हें काम करने के लिए कम समय मिल सकता है। भरूचा का HDFC Bank के बोर्ड में फुल-टाइम डायरेक्टर के तौर पर 15 साल का कार्यकाल 2029 में खत्म होगा। इसके चलते उन्हें टॉप पोजिशन पर बहुत कम मौका मिलेगा। कहा जा रहा है कि यह उनके नाम पर विचार करने में रुकावट बन सकता है। IIFL के मुताबिक, इसके उलट कोई भरोसेमंद बाहरी उम्मीदवार लीडरशिप में एक नई शुरुआत और लंबा कार्यकाल दे सकता है।

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अन्य ब्रोकरेज ने इस बदलाव को लेकर ज्यादा सावधानी भरा रुख अपनाया है। जेफरीज ने ‘बाय’ रेटिंग तो बनाए रखी है, लेकिन टारगेट प्राइस को 1,050 रुपये से घटाकर 880 रुपये कर दिया है। FY27-29 के लिए कमाई के अनुमानों में भी 3-3 प्रतिशत की कटौती की है। ब्रोकरेज का मानना है कि नेतृत्व में बदलाव से बैंक के रेवेन्यू की रफ्तार, खासकर डिपॉजिट जुटाने और फीस से होने वाली आय पर असर पड़ सकता है। साथ ही बढ़ती अनिश्चितता से बैंक की कॉस्ट ऑफ इक्विटी बढ़ सकती है और वैल्यूएशन पर दबाव पड़ सकता है।

जेफरीज का कहना है कि इन सबके बावजूद HDFC Bank की वैल्यूएशन इतनी ज्यादा नहीं है कि रेटिंग घटाई जाए। ICICI सिक्योरिटीज ने भी अपनी ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखी है, लेकिन टारगेट प्राइस 1,020 रुपये से घटाकर 920 रुपये प्रति शेयर कर दिया है।

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Asia Cup: लचर बल्लेबाजी के बाद भी भारत ने थाईलैंड को 94 रनों से रौंदा

ओपनर शेफाली वर्मा (64) के शानदार अर्धशतक और नंदनी शर्मा तथा दीप्ति शर्मा (तीन-तीन विकेट) की अगुवाई में गेंदबाजों के दमदार प्रदर्शन से भारत ने महिला एशिया कप में रविवार को ग्रुप बी मैच में थाईलैंड को 94 रन से पीटकर विजयी शुरुआत की।

भारत ने निर्धारित 20 ओवर में नौ विकेट पर 159 रन का सम्मानजनक स्कोर बनाने के बाद थाईलैंड को 16.1 ओवर में 65 रन पर निपटा दिया। थाईलैंड की तरफ से नान्नापात कोंचारोएंकाई ने सर्वाधिक 41 रन बनाये और दहाई की संख्या में पहुंचने वाली एकमात्र बल्लेबाज रहीं। नंदनी शर्मा ने 18 रन पर तीन विकेट, श्रीचरणी ने 10 रन पर दो विकेट और दीप्ति शर्मा ने एक रन पर तीन विकेट लिए। क्रांति गौड़ को 26 रन पर एक विकेट मिला।

शेफ़ाली के आक्रामक अर्धशतक से एक समय लग रहा था कि भारत 200 के टोटल को भी छू सकता है लेकिन एक समय भारत के ऊपर ऑलआउट होने का ख़तरा मंडराने लगा लेकिन क्रांति गौड़ और श्री चरणी ने मिलकर यह नौबत नहीं आने दी और भारत के स्कोर को 150 के पार ले गईं। थाईलैंड ने अच्छी फ़ील्डिंग की, कुछ अच्छे कैच लपकने के साथ स्मृति मंधाना और दीप्ति शर्मा के रूप में अहम रन आउट भी किए। सुलीपॉर्न लाओमी ने थाईलैंड की ओर से सर्वाधिक तीन और सुनीदा चतुरोंगरतना ने दो विकेट हासिल किए।

भारत की तरफ से शेफाली ने 36 गेंदों पर 64 रन में आठ चौके और तीन छक्के लगाए। प्रतीका रावल ने 22, मंधाना ने 19 और भारती फूलमाली ने 13 रनों का योगदान दिया। अंत में क्रांति गौड़ ने आठ गेंदों में एक चौके और एक छक्के की मदद से महत्वपूर्ण नाबाद 15 रन बनाकर भारत को 159 रनों तक पहुंचाया।हालांकि थाईलैंड ने भारत को 160 से कम पर रोककर क्या शानदार प्रदर्शन किया। लेकिन उनकी बल्लेबाजों ने बाद में निराश किया।

कानपुर में महिला की मौत पर बवाल; पथराव में एसओ और चौकी इंचार्ज के सिर फटे, हाइवे जाम किया

कानपुर के महाराजपुर में महिला का शव फंदे पर लटका मिलने के बाद परिजनों ने पति और ससुरालियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर प्रयागराज हाईवे जाम कर दिया। पुलिस पर पथराव में तीन थाना प्रभारी घायल हुए। पांच उपद्रवी हिरासत में लिए गए।

मैडिसन स्क्वायर पर मोहन भागवत के हिंदु-मुस्लिम वाले बयान और ज़ोहरान ममदानी के विरोध के असली मायने

मैडिसन स्क्वायर पर मोहन भागवत के हिंदु-मुस्लिम वाले बयान और ज़ोहरान ममदानी के विरोध के असली मायने

Mohan Bhagwat

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अपने शताब्दी वर्ष के मुहाने पर खड़ा है। इस अवसर पर संघ प्रमुख मोहन भागवत का अमरीका दौरा सिर्फ प्रवासी भारतीयों से संवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संघ के वैश्विक अक्स को नए सिरे से परिभाषित करने का एक कूटनीतिक और सामाजिक प्रयास है।

न्यू यॉर्क में 'एएचईएडी' (AHEAD) फोरम द्वारा आयोजित 'फेथ लीडर्स कॉन्फ्रेंस' और मैडिसन स्क्वायर गार्डन के मंच से मोहन भागवत ने जो कहा—यदि कोई हिंदू यह मानता है कि भारत में कोई मुस्लिम नहीं होना चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रह सकता”—यह महज एक बयान नहीं है। यह घरेलू राजनीति, वैश्विक आख्यान (global narrative) और अमरीका में उभरती दक्षिण एशियाई राजनीति के त्रिकोण पर टकराता हुआ एक बड़ा वैचारिक मोड़ है।

1. समावेशी हिंदुत्व या वैचारिक निरंतरता?
भागवत का यह बयान कि “विविधता हमारी सहज एकता का आभूषण है” और “सभी मार्ग एक ही ईश्वर की ओर ले जाते हैं”—संघ की पारंपरिक छवि से भिन्न एक अत्यंत उदारवादी और दार्शनिक आख्यान गढ़ता है।

  • 2018 के दिल्ली भाषण की निरंतरता: 2018 में दिल्ली के विज्ञान भवन में दिए गए भाषण में भी भागवत ने स्पष्ट कहा था कि “मुसलमानों के बिना हिंदुत्व अधूरा है।” न्यू यॉर्क में 2018 का ही संदर्भ देकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह संदेश देने की कोशिश की है कि संघ की विचारधारा बहिष्कारवादी (exclusionary) नहीं, बल्कि समावेशी (inclusive) है।
  • 'सेवा और संवाद' बनाम राजनीति: भागवत ने राजनीति को “स्वार्थ का खेल” बताते हुए सामाजिक शक्ति निर्माण पर बल दिया। 1996 के चरखी दादरी विमान हादसे का उदाहरण देकर, जहाँ संघ स्वयंसेवकों ने पीड़ितों का धर्म देखे बिना मदद की थी, उन्होंने यह स्थापित करने का प्रयास किया कि संघ का मूल चरित्र बहुसंख्यकवादी राजनीति से परे केवल सामाजिक सेवा (Seva) है।

2. ज़ोहरान ममदानी का विरोध: अमरीका की आंतरिक राजनीति और भारतीय डायस्पोरा का विभाजन
संघ प्रमुख के अमरीका पहुँचते ही न्यू यॉर्क शहर के पहले भारतीय-अमरीकी मेयर ज़ोहरान ममदानी का कड़ा रुख सामने आया। ममदानी ने संघ की विचारधारा को “बहिष्कारवादी” बताते हुए कहा कि यह उस बहुलतावादी और धर्मनिरपेक्ष भारत के विचारों के विपरीत है, जिसमें वे पले-बढ़े हैं।
इस विरोध के तीन प्रमुख राजनीतिक पहलू हैं:

  1. अमरीकी प्रथम संशोधन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता: ममदानी ने वैचारिक विरोध के बावजूद यह स्वीकार किया कि न्यू यॉर्क शहर के पास किसी निजी स्थल (मैडिसन स्क्वायर गार्डन) पर आयोजित कानून-सम्मत कार्यक्रम को रद्द करने का अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) नहीं है। अमरीकी संविधान का प्रथम संशोधन (First Amendment) विचार के आधार पर किसी भी शांतिपूर्ण आयोजन पर रोक लगाने से राज्य को रोकता है।
  2. डायस्पोरा का बदलता स्वरूप: भारतीय-अमरीकी समुदाय अब केवल आर्थिक रूप से समृद्ध वर्ग नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक रूप से दो ध्रुवों में बँट चुका है। एक तरफ पारंपरिक संघ-समर्थक संस्थाएं हैं जो भारत के सांस्कृतिक पुनरुत्थान को अमरीका में स्थापित करना चाहती हैं; दूसरी तरफ ममदानी जैसे प्रगतिशील नेता और नागरिक अधिकार समूह (जैसे 'हिंदूज़ फॉर ह्यूमन राइट्स') हैं जो भारत में बहुसंख्यकवाद की राजनीति के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आवाज़ उठाते हैं।
  3. 'हिंदूफोबिया' बनाम 'सिविल राइट्स' की जंग: अमरीकी विश्लेषकों का मानना है कि संघ प्रमुख का दौरा अमरीकी संस्थानों में 'हिंदूफोबिया' के खिलाफ माहौल बनाने और भारत विरोधी आख्यान को कुंद करने की रणनीति का हिस्सा है, जबकि विपक्षी समूह इसे भारत की संस्कृति-युद्ध (culture wars) को अमरीका में एक्सपोर्ट करने का प्रयास मानते हैं।

3. 'वसुधैव कुटुंबकम' बनाम धरातल का यथार्थ
मोहन भागवत ने न्यू यॉर्क में पश्चिमी अवधारणा “जियो और जीने दो” (Live and let live) के मुकाबले भारतीय अवधारणा “दूसरों को जीने में मदद करो” (Help others live) को ऊपर रखा। लेकिन इस अंतरराष्ट्रीय दार्शनिक वक्तव्य के साथ कुछ जमीनी विरोधाभास भी सामने आते हैं:

  • आंतरिक और बाह्य आख्यान का अंतर: असदुद्दीन ओवैसी जैसे घरेलू राजनीतिक विरोधियों ने भागवत के बयान को “संघ की पुरानी रणनीति” करार दिया है। उनका तर्क है कि विदेश में वैश्विक जनमत के सामने 'उदारवादी हिंदुत्व' की बात की जाती है, जबकि भारत के भीतर धार्मिक अल्पसंख्यकों को संदिग्ध दृष्टिकोण से देखने वाले विमर्श को बढ़ावा मिलता है।
  • संवाद की निरंतरता: भागवत ने स्वयं स्वीकार किया कि मुस्लिम और ईसाई प्रतिनिधि अक्सर उनसे कहते हैं कि “कई बैठकों के बाद भी कुछ नहीं बदला”। इस पर भागवत का उत्तर—”बैठते रहिए, नियत सच्ची है तो बदलाव होगा”—यह दर्शाता है कि संघ स्वीकार करता है कि अविश्वास की खाई गहरी है और इसे भरने में लंबा समय लगेगा।

वैश्विक मंच पर संघ की नई पहचान की परीक्षा
मोहन भागवत का न्यू यॉर्क भाषण और ज़ोहरान ममदानी की तीखी प्रतिक्रिया यह साबित करती है कि भारतीय राजनीति का दायरा अब भौगोलिक सीमाओं को पार कर चुका है।

आरएसएस प्रमुख का यह कहना कि जो हिंदू मुसलमानों को भारत से बाहर निकालना चाहता है, वह हिंदू नहीं है”, निश्चित रूप से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संघ की छवि को एक समावेशी संगठन के रूप में पेश करने का एक रणनीतिक और दार्शनिक प्रयास है। हालाँकि, इस 'वैश्विक दर्शन' की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि संघ भारत के भीतर अपने जमीनी तंत्र और अनुषांगिक संगठनों में इस समावेशी सोच को किस हद तक लागू कर पाता है।

अमरीका की धरती से 'सत्य, विविधता और एकता' का जो संदेश भागवत ने दिया है, वह केवल एक भाषण बनकर रहेगा या भारत के सामाजिक-राजनीतिक ताने-बाने में कोई ठोस बदलाव लाएगा—दुनिया भर की निगाहें अब इसी पर टिकी हैं।

क्या ‘जीवन का अधिकार’ सिर्फ कागजी वादा है? इंदौर के MY अस्‍पताल पर बढ़ता रेफरल सिस्‍टम का बोझ और स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत

क्या 'जीवन का अधिकार' सिर्फ कागजी वादा है? इंदौर के MY अस्‍पताल पर बढ़ता रेफरल सिस्‍टम का बोझ और स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत

Indore MY Hospital

दोपहर 12 बजे इंदौर के महाराजा यशवंतराव (MYH) अस्पताल की कैजुअल्टी के बाहर एम्बुलेंस के सायरन की आवाज थमने का नाम नहीं लेती। धार के ग्रामीण इलाके से आई 28 वर्षीय सीता बाई गंभीर प्रसव पीड़ा में हैं। परिजन पिछले तीन घंटे से 150 किलोमीटर दूर से एम्बुलेंस में भटकते हुए पहुंचे हैं, क्योंकि जिला अस्पताल में ऑक्सीजन और विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं थे।

MYH पहुंचने पर उन्हें जो मिला, वह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार और गरिमा) का सीधा उल्लंघन है—एक ही बेड पर दो महिलाएं दर्द से कराह रही थीं, और कुछ मरीज कॉरिडोर की ठंडी टाइलों पर अपनी गंदी चादर बिछाकर बोतल चढ़वाने को मजबूर थे।

दरअसल, इंदौर का एमवाय अस्‍तपाल इस सूबे का इकलौता बड़ा अस्‍पताल है, मालवा से लेकर निमाड़ तक के मरीज इस अस्‍पताल पर निर्भर हैं। आलम यह है कि मालवा-निमाड़ के अस्‍पतालों से रोजाना सैंकड़ों मरीजों को रेफर किया जाता है। ऐसे में एमवाय पर लगातार दबाव बढता है, जिसका नतीजा यह होता है कि मरीज को बेहतर इलाज नहीं मिल पाता है, इसके उलट मरीज और डॉक्‍टरों के बीच लगातार विवाद और टकराव की घटनाएं सामने आती हैं।

महात्‍मा गांधी मेडिकल कॉलेज (एमजीएम) इंदौर के पूर्व डीन डॉ संजय दीक्षित बताते हैं कि हां, यह सही है। जिला अस्‍पतालों से अक्‍सर मरीजों को एमवाय रेफर किया जाता है, क्‍योंकि उनके पास भी संसाधन नहीं है या विशेषज्ञ डॉक्‍टर उनके पास नहीं होते हैं। ऐसे में एमवाय पर मरीजों का बोझ ज्‍याद हो जाता है। ऐसे में यहां मरीज के स्‍वास्‍थ्‍य के साथ समझौता करना मजबूरी हो जाता है। जब यह दबाव बढ़ता है तो मरीज की हेल्‍थ प्रभावित होने से लेकर मरीज की मौत तक का ग्राफ बढ़ता है और फिर मरीज और डॉक्‍टर के बीच टकराव बढ़ते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि मरीज को स्‍वास्‍थ्‍य का अधिकार नहीं मिल पाता है। ऐसे मामलों में ज्‍यादातर वही लोग प्रभावित होते हैं जो वंचित वर्ग के होते हैं और ग्रामीण इलाकों से रेफर कि जाते हैं। डॉ संजय दीक्षित बताते हैं कि सरकार को जिला अस्‍पतालों को ज्‍यादा रिस्‍पॉन्सिबल बनाना चाहिए, क्‍योंकि ज्‍यादातर नेशनल हेल्‍थ मिशन से मिला फंड इन्‍हीं जिला अस्‍पतालों, प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्रों और हेल्‍थ सेंटर्स को जाता है। मेडिकल कॉलेजों को सरकार से किसी तरह का सीधा फंड नहीं मिलता है।

'रेफरल सिस्टम' की विफलता और MYH पर बेकाबू बोझ
मध्य भारत के सबसे बड़े इस 1400 से अधिक बेड वाले सरकारी अस्पताल की क्षमता अब दम तोड़ रही है। झाबुआ, खरगोन, खंडवा, देवास और बड़वानी जैसे जिलों से प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC/CHC) द्वारा प्राथमिक इलाज दिए बिना ही मरीजों को सीधे 'रेफर' कर दिया जाता है।

  • एक बेड पर दो-दो मरीज: बर्न यूनिट, पीडियाट्रिक और मेडिसिन वार्डों में स्थिति सबसे गंभीर है। 100% से अधिक ऑक्यूपेंसी के कारण एक बेड पर दो मरीजों को सुलाया जाता है।
  • वेंटीलेटर और स्ट्रेचर की मारामारी: गंभीर रूप से बीमार मरीजों के परिजनों को खुद स्ट्रेचर खींचते या आईसीयू में खाली वेंटीलेटर के लिए घंटों मिन्नतें करते देखा जा सकता है।


डॉक्टरों और मरीजों के बीच तनाव और हिंसक टकराव

अत्यधिक दबाव और संसाधनों की कमी का सीधा असर डॉक्टर-मरीज के रिश्तों पर पड़ रहा है। MYH में रेजिडेंट डॉक्टर प्रतिदिन 16-18 घंटे की ड्यूटी करते हैं।

  • केस 1 (कैजुअल्टी में झड़प): धार से आए एक गंभीर मरीज की समय पर वेंटिलेटर न मिलने से मौत के बाद परिजनों ने जूनियर डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाकर तोड़फोड़ की। सुरक्षा में तैनात गार्ड स्थिति को नियंत्रित नहीं कर पाए और डॉक्टरों ने हड़ताल की चेतावनी दे दी।
     
  • केस 2 (ओपीडी में डॉक्टरों से अभद्रता): मेडिसिन ओपीडी में एक डॉक्टर प्रतिदिन 300 से अधिक मरीज देखने को मजबूर हैं। परामर्श में महज 30 सेकंड का समय मिलने से नाराज मरीजों के परिजनों और जूनियर डॉक्टरों के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की आम बात बन चुकी है।

स्वास्थ्य व्यवस्था के आंकड़ों की हकीकत

जिला अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं, वेंटिलेटर और विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी के कारण 'रेफरल बोझ' अकेले MYH पर आ गिरता है।

क्षेत्र MYH (इंदौर) की स्थिति मालवा-निमाड़ के जिला अस्पताल
रोजाना ओपीडी भार 3,000 से 4,500 मरीज 300 से 600 मरीज (अधिकांश रेफर)
डॉक्टर-मरीज अनुपात 1 डॉक्टर पर ~150-200 मरीज/दिन विशेषज्ञों (M.D./M.S.) के 50%-60% पद खाली
वेंटिलेटर उपलब्धता मांग की तुलना में 30%-40% कम अधिकांश जिलों में शो-पीस बने या ऑपरेटर नहीं
नर्सिंग व पैरामेडिकल स्टाफ स्वीकृत पदों की तुलना में 35% कमी 45% से 50% तक पद रिक्त

 
एमवाय अस्‍पताल में समय पर इलाज नहीं मिलने से मौत का आरोप : एमवायएच (MYH) कैंपस स्थित सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में हाल ही में घटी घटना ढहते रेफरल सिस्टम और भारी दबाव का प्रत्यक्ष प्रमाण है। झाबुआ जिले से गंभीर स्थिति में लाई गई 42 वर्षीय महिला मरीज को प्राथमिक उपचार में हुई देरी और वेंटिलेटर बेड न मिलने के कारण अपनी जान गंवानी पड़ी।

महिला की मौत के बाद आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल के आईसीयू और कॉरिडोर में जमकर हंगामा किया। परिजनों का सीधा आरोप था कि मरीज को घंटों स्ट्रेचर पर रखा गया और डॉक्टरों ने ‘बेड खाली नहीं हैं’ का हवाला देकर समय पर वेंटिलेटर सपोर्ट नहीं दिया। दूसरी ओर, ऑन-ड्यूटी जूनियर डॉक्टरों का कहना था कि अस्पताल के सभी वेंटिलेटर और आईसीयू बेड पहले से ही अन्य गंभीर मरीजों से फुल थे।

महिला की मौत के बाद इंदौर के सुपरस्‍पेशलिटी के आईसीयू में घुसे परिजन : सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में एक मरीज की मौत के बाद परिजन और मेडिकल स्टाफ के बीच विवाद हो गया। करीब 30 से 35 लोग ICU में घुस आए। ICU में हंगामे के साथ तोड़फोड़ की गई। घटना अस्पताल की छठी मंजिल पर स्थित ICU में शाम करीब 7 बजे हुई। हंगामे के दौरान डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ को अपनी सुरक्षा के लिए वहां से बाहर निकलना पड़ा। मृतक की पहचान 60 वर्षीय ताहिरा कपाड़िया के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार ताहिरा को पिछले रविवार को तबीयत खराब होने के बाद एमवाय अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिवार का कहना है कि डॉक्टरों ने उनके दिल में ब्लॉकेज की जानकारी दी थी। इसके बाद उन्हें उपचार के लिए सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल लाया गया था। मोईज के मुताबिक मंगलवार को ताहिरा कपाड़िया को ऑपरेशन के लिए ले जाया गया था। परिवार का कहना है कि ऑपरेशन से पहले ताहिरा कपाड़िया सामान्य स्थिति में थीं और परिवार के लोगों से बातचीत भी कर रही थीं। ऑपरेशन थिएटर ले जाने के करीब 20 मिनट बाद एक डॉक्टर बाहर आए और इमरजेंसी की बात कही।

एमवाय अस्पताल (MYH) के अधीक्षक प्रो. (डॉ.) अशोक यादव, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. डी.के. शर्मा और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव प्रसाद हसानी की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रियाएं।

मालवा-निमाड़ के 8 से अधिक जिलों (धार, झाबुआ, खरगोन, खंडवा, बड़वानी आदि) से मरीजों का सीधे इंदौर रेफर होना, MYH और सुपर स्पेशलिटी अस्पताल पर बेकाबू बोझ, डॉक्टरों पर अत्यधिक मानसिक तनाव, संसाधनों का अभाव और आए दिन होने वाले डॉक्टर-मरीज विवादों पर MYH अधीक्षक, सुपर स्पेशलिटी अधीक्षक और इंदौर CMHO का दृष्टिकोण व बयान:

क्षेत्रीय दबाव और संसाधनों की कमी से डॉक्टरों पर मानसिक और भावनात्मक दबाव बढ़ता।
एमवाय अस्पताल पूरे मालवा-निमाड़ का एकमात्र प्रमुख टर्शरी केयर सेंटर है। हमारे पास स्वीकृत क्षमता 1,400पलंग की है, लेकिन कई बार ओपीडी और कैजुअल्टी को मिलाकर रोजाना 3,000 से 4,000 मरीजों की देखरेख करनी पड़ती है। आसपास के जिला अस्पतालों से ऐसे मरीजों को भी अंतिम समय में रेफर कर दिया जाता है, जिन्हें बुनियादी स्तर पर रोका जा सकता था। हमारे जूनियर और रेजिडेंट डॉक्टर 18-18 घंटे लगातार काम कर रहे हैं। जब एक ही बेड पर दो मरीजों का इलाज करना पड़ता है या वेंटिलेटर वेटिंग में होते हैं, तो डॉक्टरों पर भारी मानसिक और भावनात्मक दबाव बनता है। इस बीच यदि किसी मरीज की मौत हो जाती है तो परिजन सारा गुस्सा डॉक्टरों पर निकालते हैं। हिंसा और अभद्रता से डॉक्टरों का मनोबल टूटता है, जबकि कमी संसाधनों की है, डॉक्टरों की मंशा की नहीं।”
प्रो. (डॉ.) अशोक यादव — अधीक्षक, एमवाय अस्पताल (MYH), इंदौर
 
रेफरल सिस्टम की नाकामी, अनियंत्रित केस लोड और डॉक्टर-मरीज के बीच बढ़ता टकराव।
पेरिफेरल और जिला अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों (Cardiologists, Neurologists) और टेक्नीशियनों की कमी के कारण मरीज सीधे हमारे सुपर स्पेशलिटी सेंटर में भेजे जा रहे हैं। जब मरीज यहां पहुंचता है, तो उसकी स्थिति बेहद क्रिटिकल हो चुकी होती है। हमारे आईसीयू (ICU) हमेशा 100% से अधिक क्षमता पर चल रहे होते हैं। जब किसी गंभीर मरीज को बेड या वेंटिलेटर के लिए इंतजार करना पड़ता है, तो परिजनों का आक्रोश स्वाभाविक होता है, लेकिन डॉक्टरों के साथ मारपीट और आईसीयू में घुसकर तोड़फोड़ करना किसी समस्या का समाधान नहीं है। डॉक्टरों और मरीजों के बीच संवाद की कमी की मुख्य वजह समय और स्टाफ का अभाव है। जब तक निचले स्तर पर हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर मजबूत नहीं होगा, तब तक टर्शरी अस्पतालों पर यह दबाव और तनाव खत्म नहीं हो सकता।”
डॉ. डी.के. शर्मा — अधीक्षक, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, इंदौर
 
जिला व ग्रामीण स्वास्थ्य प्रणाली की स्थिति
यह सच है कि इंदौर के सरकारी अस्पतालों पर संभाग भर का भारी रीजनल बोझ है। ग्रामीण और जिला स्तर के प्राथमिक (PHC) व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) में बुनियादी सुविधाओं, डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी के चलते रेफरल की संख्या बढ़ी है। हमारा प्रयास है कि जिलों से बिना वजह होने वाले 'अनावश्यक रेफरल' को रोका जाए और एक 'स्टेबलाइजेशन प्रोटोकॉल' लागू किया जाए ताकि मरीज को इंदौर भेजने से पहले प्राथमिक उपचार वहीं मिले। साथ ही, जिला स्तर पर विशेषज्ञ डॉक्टरों के खाली पदों को भरने और वेंटिलेटर/ऑक्सीजन सुविधाओं को चालू रखने के लिए लगातार पत्राचार किया जा रहा है। इंदौर के अस्पतालों में डॉक्टरों की सुरक्षा और मरीजों को समय पर इलाज मिलना—दोनों हमारी प्राथमिकता हैं।”
डॉ. माधव प्रसाद हसानी — मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO), इंदौर

तीनों प्रशासनिक अधिकारियों की टिप्पणियों से स्पष्ट है कि समस्या की जड़ इंदौर का MYH या सुपर स्पेशलिटी अस्पताल नहीं, बल्कि पूरे मालवा-निमाड़ का ढह चुका रेफरल सिस्टम और प्राथमिक स्वास्थ्य ढांचे में संसाधनों की भारी कमी है। जब तक जिला अस्पतालों में वेंटिलेटर, ऑक्सीजन और विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं होंगे, तब तक इंदौर के अस्पतालों में डॉक्टरों पर मानसिक दबाव और मरीजों के परिजनों के साथ हिंसक झड़पों का सिलसिला थमता नजर नहीं आता है।

इंदौर के महाराजा यशवंतराव अस्पताल (MYH) और एमजीएम (MGM) मेडिकल कॉलेज से जुड़े पूरे परिसर की आधिकारिक और वर्तमान संसाधन क्षमता:
1. बेड और क्लिनिकल क्षमता

  • मूल एमवाय अस्पताल (मुख्य 7 मंजिला भवन): 1,300 बेड स्वीकृत (जो अत्यधिक दबाव के समय 1,500+ तक खींच दिए जाते हैं)।
  • संपूर्ण एमवाय समूह (MGM कैंपस के सभी अस्पताल मिलाकर): 3,000 बेड।

    • सुपर स्पेशलिटी अस्पताल: 600 बेड
    • एमटीएच महिला एवं प्रसूति अस्पताल: 500 बेड
    • चाचा नेहरू बाल अस्पताल: 200 बेड
    • कैंसर अस्पताल: 100 बेड
    • एम.आर. टीबी अस्पताल: 100 बेड
    • मानसिक अस्पताल (बाणगंगा): 100 बेड

2. क्रिटिकल केयर (ICU व वेंटिलेटर)

  • आईसीयू बेड (मुख्य MYH): 25-30 बेड की मेडिकल आईसीयू (MICU) (इसके अलावा SICU, NICU, PICU और बर्न यूनिट्स में पृथक बेड)।
  • वेंटीलेटर: पूरे कैंपस को मिलाकर लगभग 150-180 क्रियाशील वेंटिलेटर (सुपर स्पेशलिटी और एमवाय मिलाकर)।
  • डायलिसिस: 15 हीमोडायलिसिस मशीनें।

3. ओपीडी और दैनिक मरीज भार

  • दैनिक फुटफॉल (MYH मुख्य भवन): 3,000 से 4,500 मरीज प्रतिदिन।
  • कैजुअल्टी/इमरजेंसी: 300 से 500 इमरजेंसी केस रोजाना (जिसमें 40-50% केस मालवा-निमाड़ के अन्य जिलों से रेफर होकर आते हैं)।

4. डॉक्टर और मानव संसाधन (MGM मेडिकल कॉलेज संकाय)

  • डॉक्टर व फैकल्टी: 350-400 (प्रोफेसर, एसोसिएट/असिस्टेंट प्रोफेसर व कंसलटेंट)।
  • रेजिडेंट व जूनियर डॉक्टर (PGs/Interns): ~600-700 (इन्हीं पर 24 घंटे नाइट ड्यूटी और इमरजेंसी सेवाओं का मुख्य भार रहता है)।
  • नर्सिंग स्टाफ: स्वीकृत पदों (1,200) के मुकाबले 30% से 35% पद रिक्त हैं।
  • पैरामेडिकल व क्लास-4 कर्मचारी: लगभग 40% कमी, जिसे आउटसोर्स कर्मचारियों से पूरा किया जाता है।

गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार कहां?

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल खेत मजदूर समिति (1996) मामले में स्पष्ट किया था कि समय पर समयबद्ध चिकित्सीय उपचार न मिलना जीवन के मौलिक अधिकार का हनन है। जब एक नागरिक को इलाज के लिए फर्श पर सोने को मजबूर होना पड़े, तो यह केवल स्वास्थ्य सेवाओं की नाकामी नहीं, बल्कि एक संवैधानिक विफलता है। जब तक जिला और तहसील स्तर के अस्पतालों में डॉक्टरों की भर्ती और जरूरी उपकरण सुनिश्चित नहीं किए जाएंगे, तब तक एमवायएच की व्यवस्थाएं ऐसे ही चरमराती रहेंगी और आम नागरिक अपनी गरिमा गंवाता रहेगा।