Tata Punch EV new vs old real-world range comparison

Tata Punch EV new vs old real-world range comparison
Tata Punch EV new vs old

In February 2026, Tata Motors brought incremental updates to the Punch EV. The carmaker’s most affordable electric SUV saw a bump in battery size, subtle cosmetic revisions, and feature additions, while also being more affordable than its predecessor. To see how much the 2026 Punch EV has improved over its older iteration, we put it through our real-world range tests and compare it to its predecessors. 

Tata Punch EV new vs old: Specifications

Tata Punch EV new vs old: Specifications

 

Tata Punch EV New

Tata Punch EV Old

Battery size

40

35

Electric motor setup

Single motor, front

Single motor, front

Power (hp)

129

122

Torque (Nm)

154

190

ARAI range (km)

468

365

Kerb weight (kg)

1365

1,360

0-100kph time (claimed, in seconds)

9

9.5

With the newer Punch EV, Tata has increased the battery size in its long-range version by 5kWh and bumped the motor’s power slightly. However, the older Punch EV’s motor delivered 36Nm more torque than the newer model. In the new Punch EV, Tata introduced a new 6-in-1 drivetrain setup, replacing the older one’s 3-in-1 unit. With this new setup, Tata claims a 50 percent reduction in packaging size, a 28 percent reduction in weight, and a 6 percent increase in efficiency. Despite the larger battery, this new drivetrain setup on the Punch EV has led to a weight increase of a mere 5kg over its predecessor.

Tata Punch EV new vs old: Real-world range 

In our real-world range tests, the newer Tata Punch EV delivered much higher range than its predecessor. On average, the former goes 75km further than the latter on a single charge. This is because the more efficient drivetrain setup (see table below), coupled with the larger battery pack on the new Punch EV, has translated into going farther on a single charge. 

Tata Punch EV new vs old: Efficiency 

 

Tata Punch EV New

Tata Punch EV Old

City efficiency (km/kWh)

7.92

6.92

Highway efficiency (km/kWh)

7.29

6.17

Average efficiency (km/kWh)

7.61

6.54

Tata Punch EV new vs old: Prices

Tata Punch EV new vs old: Prices

 

Tata Punch EV New

Tata Punch EV Old

Long Range version price range (Rs lakh)

10.99 – 12.79

12.99 to 14.49

Despite the updates and higher real-world range, the new Tata Punch EV is much more affordable than the older model. In fact, depending on the variant chosen, the former is up to Rs 2 lakh cheaper than the latter. 

Autocar India’s range testing

Before our real-world range tests, the battery of our test car was fully charged, and we maintained tyre pressures in accordance with the manufacturer’s recommendations. The car was driven on a weekday in Mumbai city and on the adjoining state highway in a fixed loop, and we maintained the set average speeds. At the end of each cycle, we calculated the range based on the percentage charge consumed.

Throughout our tests, the climate control was set to 22deg C in a full-auto setting, and other electricals, such as the audio system, indicators and ventilated front seats, were used when required, just as a regular user would. We take pride in our testing data, which isn’t merely consistent but also gives users an accurate indication of what they can expect in the real world.

कौशांबी की पटाखा फैक्ट्री में जोरदार ब्लास्ट, 3 की मौत, 10 से ज्यादा लोग झुलसे, कई मकान भी जमींदोज

Kaushambi Firecracker Factory Blast: यूपी के कौशांबी जिले में दर्दनाक हादसा हो गया है। यहां के पिपरी थाना के मनौरी में एक पटाखा फैक्ट्री में ब्लास्ट होने से 3 लोगों की मौत हो गई, जबकि 10 से अधिक लोग गभीर रूप से झुलसे गए। इन सभी घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बता दें कि इस ब्लास्ट में मकान भी जमींदोज हुए है।

वहीं हादसे की खबर सुनते ही मौके पर पहुंची पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम घटना स्थल पर रेस्क्यू करने में जुटी गई है। डीएम और एसपी भी घटनास्थल पर पहुंचकर जायजा ले रहे हैं। यह पटाखा फैक्ट्री आदिल डीजे पुत्र निजामुद्दीन की बताई जा रही है।

आसपास का इलाका धुएं से भर गया

बता दें कि हादसा कौशांबी जिले के मोहम्मदपुर गांव में हुआ, जो प्रयागराज बॉर्डर पर स्थित है। यहां से मनौरी स्थित एयरफोर्स स्टेशन करीब डेढ़ किलोमीटर दूर है। हादसे के वक्त फैक्ट्री में करीब 25 मजदूर काम कर रहे थे। धमाके की आवाज करीब दो किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। विस्फोट के बाद फैक्ट्री से धुएं का घना गुबार उठा और आसपास का इलाका धुएं से भर गया। पटाखों में आग लगने के कारण लगातार धमाके होते रहे।

सीएम योगी ने अधिकारियों को दिए निर्देश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनपद कौशाम्बी में हुए हादसे का संज्ञान लेते हुए मृतकों के शोक संतप्त परिजन के प्रति संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि घायलों का इलाज अच्छी तरह से किया जाए। इसके अलावा, सीएम योगी ने मृतकों के परिजनों से बात कर हर संभव सहायता मुहैया करवाने की भी बात कही है। साथ ही, घायलों के जल्द स्वस्थ होने की भी कामना की है।

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अघोरी ने शमशान से जलते शव का मांस निकालकर खाया, कहा- ‘यह बहुत टेस्टी है’, वीडियो शेयर किया, उज्‍जैन का संत समाज भड़का

अघोरी ने शमशान से जलते शव का मांस निकालकर खाया, कहा- ‘यह बहुत टेस्टी है’, वीडियो शेयर किया, उज्‍जैन का संत समाज भड़का

Aghori

उज्जैन के चक्रतीर्थ श्मशान घाट से एक बेहद खौफनाक और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। किन्नर अखाड़े से जुड़ी अघोरी तांत्रिक काली उर्फ नंद गिरी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो साझा किया है, जिसमें वह जलती चिता से तलवार के जरिए इंसानी मांस निकालकर खाते हुए नजर आ रही है। वीडियो में तांत्रिक को “यह बहुत टेस्टी है” और “मैं तुम्हारे जीवन से खेलूंगी” जैसी अमानवीय बातें कहते हुए सुना जा सकता है।

इस वीभत्स वीडियो के वायरल होने के बाद आम जनता के साथ-साथ संत समाज में भी भारी आक्रोश है। महामंडलेश्वर शैलेशानंद गिरी ने इस कृत्य की कड़ी निंदा करते हुए इसे वैदिक परंपरा और अघोर मर्यादा के खिलाफ बताया है। आक्रोशित लोग अब इस कृत्य को अमानवीय बताते हुए अघोरी तांत्रिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग कर रहे हैं।

वीडियो में खुद को अघोरी और किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर बताने वाली काली उर्फ नंद गिरी श्मशान घाट में जलती चिता से कुछ निकालकर खाती नजर आ रही हैं। वीडियो सामने आने के बाद संत समाज और आम लोगों में नाराजगी जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि वीडियो महिला के इंस्टाग्राम अकाउंट से साझा किया गया था।

इस वीडियो के बाद इस तरह की तांत्रिक प्रैक्‍टिस को लेकर बहस चल पडी है। इसके बाद उज्‍जैन के संत समाज ने इस अभ्‍यास को अघौर परंपरा में खिलाफ मानते हुए एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

क्‍या है वायरल वीडियो में : वायरल वीडियो में महिला यह कहते हुए नजर आती है कि वह चिता से मांस खाएगी। इसके बाद वह हाथ में तलवार लेकर जलती चिता के पास जाती और उसमें से कुछ निकालकर खाने का दावा किया जा रहा है। हालांकि वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। वीडियो सामने आने के बाद उज्जैन के साधु-संतों और अघोर परंपरा से जुड़े लोगों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है।

इंस्‍टाग्राम पर शेयर किया श्मशान का वीडियो : वायरल हो रहे इस वीडियो में महिला हाथ में तलवार लिए जलती चिता के पास खड़ी दिखाई दे रही है। वीडियो में वह यह कहती हुई सुनाई देती है कि ‘हम आज इंसान का मांस खाएंगे। इसके बाद वह तलवार की मदद से चिता में से कुछ निकालती है और उसे खाने का दावा करती है। बताया जा रहा है कि यह वीडियो महिला ने अपने ही इंस्टाग्राम अकाउंट से शेयर किया गया था, जिसके बाद यह तेजी से फैल गया। हालांकि, इस वीडियो की प्रामाणिकता की आधिकारिक तौर पर स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

संत समाज ने जताया कड़ा ऐतराज : वीडियो के सामने आते ही उज्जैन के साधु-संतों और अघोर परंपरा से जुड़े लोगों ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर शैलेशानंद गिरी महाराज समेत कई प्रमुख संतों ने इस कृत्य की कड़े शब्दों में निंदा की है। संतों का स्पष्ट कहना है कि अंतिम संस्कार और शव से जुड़ी एक तय मर्यादा होती है। इस तरह का व्यवहार सनातन धर्म और अघोर परंपरा की मर्यादा के पूरी तरह खिलाफ है।

FIR दर्ज करने और कार्रवाई की मांग: संतों का कहना है कि जलते शव का इस तरह अपमान करना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। इससे धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। संत समाज ने पुलिस प्रशासन से इस मामले पर तुरंत संज्ञान लेने, आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

Rain Forecast: अगले 48 घंटे 5 राज्यों पर भारी! यूपी, बिहार, झारखंड से MP तक IMD ने जारी किया मूसलाधार बारिश का अलर्ट, जानिए कैसा रहेगा मौसम

IMD Heavy Rain Alert: देश के कई हिस्सों में मानसूनी बारिश का दौर एक बार फिर बेहद उग्र होता नजर आ रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 31 अगस्त से अगले कुछ दिनों के लिए मौसम का विस्तृत पूर्वानुमान जारी करते हुए चेतावनी जारी की है कि अगले 48 घंटे देश के 5 प्रमुख राज्यों ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए बेहद भारी साबित हो सकते हैं। गांगेय पश्चिम बंगाल और उससे सटे ओडिशा तट पर बने गहरे कम दबाव के क्षेत्र के असर से इन इलाकों में मूसलाधार बारिश होने की प्रबल संभावना है।

ओडिशा और छत्तीसगढ़ में बेहद भारी बारिश का रेड अलर्ट

मौसम विभाग के मुताबिक गांगेय पश्चिम बंगाल और उससे सटे उत्तर तटीय ओडिशा व उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना गहरा कम दबाव का क्षेत्र अगले 24 घंटों के दौरान पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ेगा। इसके असर से ओडिशा में 31 अगस्त को और छत्तीसगढ़ में 31 अगस्त से 1 सितंबर तक अलग-अलग जगहों पर बेहद भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। छत्तीसगढ़ में बीते 24 घंटों में भी 20 सेमी से अधिक की भारी बारिश दर्ज की जा चुकी है। छत्तीसगढ़ और पूर्वी मध्य प्रदेश में 31 अगस्त से 5 सितंबर तक लगातार बारिश का दौर जारी रहेगा।

यूपी, बिहार और झारखंड में मूसलाधार बारिश का अलर्ट

पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के निवासियों के लिए भी 31 अगस्त और 1 सितंबर का दिन काफी संभलकर रहने वाला है। IMD ने इन तीनों राज्यों में 31 अगस्त और 1 सितंबर के दौरान अत्यंत से बहुत भारी बारिश होने की आशंका जताई है। उत्तर प्रदेश में मध्य ट्रोपोस्फीयर स्तर पर बनी एक ट्रफ लाइन के असर से पूर्वी और पश्चिमी यूपी में 1 सितंबर से 6 सितंबर तक गरज-चमक के साथ बारिश का सिलसिला बना रहेगा। बिहार और झारखंड में भी 4 सितंबर तक 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और आकाशीय बिजली कड़कने की चेतावनी दी गई है।

पहाड़ी राज्यों और पूर्वोत्तर भारत में कैसा रहेगा मौसम

उत्तरी और पहाड़ी क्षेत्रों में पश्चिमी विक्षोभ और मानसूनी ट्रफ की वजह से मौसम बदला हुआ रहेगा। उत्तराखंड में 31 अगस्त से 6 सितंबर तक और हिमाचल प्रदेश में 4 सितंबर तक अधिकांश जगहों पर बारिश होगी। उत्तराखंड में 31 अगस्त से 1 सितंबर के बीच बहुत भारी बारिश होने का अनुमान है। वहीं पूर्वोत्तर भारत में असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 31 अगस्त और 1 सितंबर को भारी से बहुत भारी बारिश जारी रहने की संभावना है।

मध्य प्रदेश, पश्चिम भारत और दक्षिण भारत का पूर्वानुमान

मध्य भारत के राज्यों में पूर्वी मध्य प्रदेश में 31 अगस्त से 5 सितंबर के बीच बहुत भारी बारिश देखने को मिलेगी जबकि पश्चिम मध्य प्रदेश में 3 से 5 सितंबर के दौरान मूसलाधार बारिश देखने को मिल सकती है। कोंकण और गोवा में 6 सितंबर तक लगातार व्यापक बारिश का दौर बना रहेगा। दक्षिण भारत के प्रायद्वीपीय हिस्सों में अगले एक सप्ताह के दौरान मानसूनी गतिविधियां थोड़ी धीमी बनी रहेंगी। हालांकि तटीय कर्नाटक और केरल में कुछ दिनों तेज हवाओं के साथ बारिश होने के आसार हैं।

India Bike Week 2026 dates announced

India Bike Week 2026 dates announced
An outside shot showing enduro champion and rally racer Pol Tarrés performing a jump on his Yamaha Ténéré 700 at IBW 2025

The event dates for India Bike Week, touted to be the country’s largest motorcycle festival, has been announced to be December 4 and 5, 2026. The festival is returning to Panchgani, Maharashtra for the second year in a row, away from Vagator, Goa. Last year, the change happened after local zilla parishad election dates conflicted with the event dates.

  1. Consists of races, launches, food and gear stalls and more
  2. Registrations to races are separate from event registrations
  3. Ride to the event and merch have also been teased

India Bike 2026: What’s in store?

Stunt shows, live music, camping, and more

Besides the location change seemingly sticking, the itinerary remains as packed as ever with two days of various events catering to motorcyclists and motorcycle enthusiasts of all kinds. According to the schedule posted on the organisation’s website, there are five different race events, three music performances (artists line-up yet to be revealed), and other staples like food and gear stalls. The races vary between dirt, off-road, time trial, and arena. Each race requires separate registrations and registering to the races are separate from registering for the event itself. Riders interested in racing will need to have an FMSCI licence, although the website clarifies that a one-time licence can be obtained when signing up for one (or more) of the races.

There are also events scheduled for custom builds, stunt shows, and camping and bonfire. IBW is also organising rides to the event from all major cities, and have announced event-specific merch too. However, registrations and further details on all of these are yet to be revealed. If you’re hearing about IBW for the first time, the organisers clarify that owning a motorcycle is not a criterion to attend the event, and it’s open to fans from all walks of life.

Last year, refunds on the tickets were offered when the venue changed from Goa to Maharashtra. This time, the website clarifies that the tickets are non-refundable and non-transferable. More information should be available closer to the dates, and can be found on the brand’s website and social media pages.
 

तमिलनाडु में छिड़ी रार! TVK के दावों पर भड़की कांग्रेस, कहा- राहुल गांधी ही होंगे PM फेस

तमिलनाडु में छिड़ी रार! TVK के दावों पर भड़की कांग्रेस, कहा- राहुल गांधी ही होंगे PM फेस

Tamil Nadu Politics 2029 PM Candidate

2029 PM Candidate: साल 2029 के लोकसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन विपक्षी खेमे में प्रधानमंत्री पद के चेहरे को लेकर सियासत अभी से गरमाने लगी है। विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री का चेहरा कौन होगा? इसे लेकर तमिलनाडु में राजनीतिक खींचतान शुरू हो गई है। सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) और उसकी गठबंधन सहयोगी कांग्रेस के बीच पीएम पद की उम्मीदवारी को लेकर सीधा टकराव दिखाई दे रहा है। स्थिति इस कदर बिगड़ चुकी है कि कांग्रेस के मंत्रियों ने राज्य सरकार से इस्तीफा देने तक का ऐलान कर दिया है।

राहुल गांधी के नाम पर समर्थन दें वरना देंगे इस्तीफा

तमिलनाडु के मंत्री एस. राजेश कुमार ने दो-टूक कहा है कि यदि गठबंधन सहयोगी TVK 2029 के चुनाव में राहुल गांधी को पीएम उम्मीदवार बनाने के फैसले का समर्थन नहीं करती है, तो वह और उनके साथी मंत्री पी. विश्वनाथन तुरंत अपने पदों से इस्तीफा दे देंगे। कन्याकुमारी में एक कार्यक्रम के दौरान राजेश कुमार ने आक्रामक तेवर दिखाते हुए कहा कि राहुल गांधी ही भारत के अगले प्रधानमंत्री होंगे। हम अपने रुख से कोई समझौता नहीं करने वाले। इससे पहले शुक्रवार को उच्च शिक्षा मंत्री पी. विश्वनाथन ने भी स्पष्ट किया था कि INDIA गठबंधन की ओर से राहुल गांधी ही पीएम पद के निर्विवाद चेहरा हैं। ALSO READ: तमिलनाडु CM विजय के यू-टर्न पर भड़के CJP नेता अभिजीत दीपके, कहा डर लग रहा है तो सुधारो व्यवस्था

TVK नेताओं की अलग ही मांग 

विवाद की शुरुआत TVK नेताओं के उस बयान से हुई जिसमें मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय (अभिनेता थलपति विजय) को 2029 का प्रधानमंत्री उम्मीदवार बनाने की मांग की गई। राज्य के मंत्री एम. शरतकुमार ने हाल ही में विजय की तारीफ करते हुए कहा था, जो हमारे दिलों में, घरों में और सेंट जॉर्ज फोर्ट में सीएम हैं, वही देश के अगले प्रधानमंत्री हैं। TVK खेमे से लगातार उठ रही इस मांग ने कांग्रेस को असहज कर दिया है।

तमिलनाडु विधानसभा का सीटों का गणित

तमिलनाडु विधानसभा की कुल 234 सीटों में से TVK के पास 107 विधायक हैं, जबकि बहुमत का आंकड़ा 118 है। सरकार बनाने के लिए TVK को 5 सीटों वाली कांग्रेस, MDMK और अन्य सहयोगियों के समर्थन की आवश्यकता पड़ी थी। मई में कांग्रेस के समर्थन के बाद ही राज्य में सरकार का गठन हो सका था। ALSO READ: तमिलनाडु की विजय सरकार का यू-टर्न, CJP और लेफ्ट के प्रदर्शन में जाने से छात्रों को रोकने वाला आदेश वापस

MDMK प्रमुख वाइकू का कांग्रेस को समर्थन

गठबंधन के अन्य सहयोगी MDMK के प्रमुख वाइकू ने भी राहुल गांधी की उम्मीदवारी का खुलकर समर्थन किया है। वाइकू ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस INDIA गठबंधन का नेतृत्व कर रही है, इसलिए राहुल गांधी के अलावा पीएम पद का कोई दूसरा विकल्प नहीं हो सकता। उन्होंने मुख्यमंत्री विजय को सलाह दी कि वे इस तरह के बेतुके दावे करने वाले अपने मंत्रियों पर तुरंत लगाम लगाएं।

तमिलनाडु में कितनी हैं लोकसभा सीटें?

उल्लेखनीय है कि तमिलनाडु में लोकसभा की 39 सीटें हैं। ऐसे में यदि आगामी लोकसभा चुनाव 2029 में उनकी पार्टी सभी 39 सीटें भी जीत लेती है, तो भी प्रधानमंत्री पद के लिए उनका दावा नहीं बनता। क्योंकि वर्तमान स्थिति में देखें तो विपक्ष में कांग्रेस ही सबसे बड़ी पार्टी है। ऐसे में टीवीके का दावा तो बनता ही नहीं है। 

Lust Stories 3: नेटफ्लिक्स इंडिया की ‘लस्ट स्टोरीज’ की होने जा रही वापसी, प्रीमियर डेट लॉक की गई

Lust Stories 3: ‘लस्ट स्टोरीज’ अपने तीसरे चैप्टर के साथ वापसी कर रही है। बॉलीवुड हंगामा को खास तौर पर पता चला है कि ‘लस्ट स्टोरीज़ 3’ का प्रीमियर 18 सितंबर को नेटफ्लिक्स इंडिया पर होगा। इंटरनेशनल एमी के लिए नॉमिनेट हुई इस एंथोलॉजी सीरीज़ के नए सीजन को विक्रमaditya मोटवाने, किरण राव, शकुन बत्रा और विशाल भारद्वाज ने डायरेक्ट किया है।

चार नई, छोटी लेकिन भावनाओं से भरपूर शॉर्ट फ़िल्मों के ज़रिए, यह एंथोलॉजी एक बार फिर लस्ट, प्यार, रिश्तों और दबी हुई इच्छाओं को दिखाएगी। उम्मीद है कि इसका ट्रेलर सितंबर के पहले हफ़्ते में रिलीज़ किया जाएगा। ‘लस्ट स्टोरीज़ 3’ में बॉलीवुड के कई बड़े कलाकार शामिल हैं।

विक्रमादित्य मोटवाने की फ़िल्म में राधिका आप्टे, कोंकणा सेन शर्मा, विजय वर्मा और अभिषेक बनर्जी हैं, जबकि अली फ़ज़ल और राधिका मदान शकुन बत्रा के सेगमेंट में नज़र आएंगे। असल ज़िंदगी की जोड़ी सिद्धार्थ और अदिति राव हैदरी विशाल भारद्वाज की कहानी में मुख्य भूमिका में हैं, वहीं किरण राव की फ़िल्म में गुरफ़तेह पीरज़ादा और नए कलाकार सना थम्पी मुख्य भूमिकाओं में हैं।

अलग-अलग और सोचने पर मजबूर करने वाली कहानियों के ज़रिए महिलाओं की कामुकता को बेबाकी से दिखाने के लिए सराही गई ‘लस्ट स्टोरीज़ 3’, नेटफ़्लिक्स इंडिया की पहली ऐसी एंथोलॉजी होगी जिसके तीन सीजन होंगे। नया सीज़न intimacy के सभी विरोधाभासों – जैसे शॉफ्टनेस, असहजता, सबर – को भी दिखाने का वादा करता है।

फ़रवरी 2026 में इस एंथोलॉजी की घोषणा करते हुए मेकर्स ने कहा था, “हर फ़िल्म इंसानी जुड़ाव को एक अलग नज़रिए से देखती है और दिखाती है कि कैसे इच्छा और रिश्ते हालात, खामोशी और कमज़ोरी (vulnerability) से बनते हैं। ये कहानियाँ मिलकर प्यार और चाहत के बारे में बातचीत को आगे बढ़ाती हैं और दर्शकों को जुड़ाव के मायने समझने का एक ईमानदार और आज के दौर का नज़रिया देती हैं।”

पश्चिमी यूपी में ‘पीडीए’ की नई बिसात, जाट बनाम जाटव-गुर्जर की सियासी गोलबंदी

पश्चिमी यूपी में ‘पीडीए’ की नई बिसात, जाट बनाम जाटव-गुर्जर की सियासी गोलबंदी

Akhilesh Yadav

मेरठ की घटना को अखिलेश यादव का राजनीतिक मंच बनाना महज पुलिस कार्रवाई का सवाल नहीं, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बदलते जातीय समीकरणों को साधने की कोशिश है। जाटों के बीच ‘चवन्नी’ विवाद से पैदा हुई नाराजगी के बीच सपा अब जाटव और गुर्जर समुदाय को अपने पीडीए प्लस के पाले में खड़ा करने की कवायद में लगी है। ALSO READ: शामली में पुलिस मुठभेड़, अंकित बालियान हत्याकांड के दो शूटर ढेर

 

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति हमेशा से सिर्फ चुनावी आंकड़ों का खेल नहीं रही, बल्कि जातीय अस्मिता, सामाजिक वर्चस्व और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के बीच संतुलन साधने की कवायद रही है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यही पुराना मैदान एक बार फिर नए किरदारों और नए समीकरणों के साथ अपनी बिसात बिछाता नजर आ रहा है। जाट, मुस्लिम, दलित, गुर्जर और सवर्ण मतदाताओं के बीच बनते-बिगड़ते रिश्ते यह तय करेंगे कि पश्चिमी यूपी में 2027 की अगली पटकथा कौन लिखेगा।

 

अखिलेश यादव द्वारा ललिता मर्डर केस में न्याय की मांग कर रहें दो नेताओं को सामने लाकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। यह वहीं नेता है जिन्होंने मेरठ एस एस पी अविनाश पांडे पर उनकी टीम पर बर्बरता से मारपीट का आरोप लगाया है। इस प्रेसवार्ता व्यापक राजनीतिक रणनीति के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। हालांकि पुलिस का अपना पक्ष है और दोनों आरोपियों के आपराधिक मुकदमों का रिकॉर्ड भी सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा है। पुलिस का कहना है कि दोनों ने पुलिस के खिलाफ तथ्यहीन और भ्रामक आरोप लगाए हैं। लेकिन राजनीति में कई बार घटना से ज्यादा महत्वपूर्ण उसका बनाया गया नैरेटिव होता है। अखिलेश ने इसी नैरेटिव को जातीय पहचान और पुलिस उत्पीड़न के सवाल से जोड़ने की कोशिश की है।

 

यहां सपा की रणनीति अपेक्षाकृत स्पष्ट दिखाई देती है, जाटव और गुर्जर समाज को यह संदेश देना कि सत्ता और पुलिस व्यवस्था के कथित अन्याय के खिलाफ खड़ा होने के लिए उनके पास एक राजनीतिक मंच मौजूद है। यानी किसी एक घटना को व्यापक सामाजिक असुरक्षा के प्रतीक में बदलना और फिर उसे ‘पीडीए’ की राजनीति से जोड़ देना।

 

पश्चिमी यूपी में यह प्रयोग इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां दलित राजनीति का अर्थ केवल दलित वोट नहीं है। जाटव मतदाता लंबे समय से बहुजन राजनीति का महत्वपूर्ण आधार रहा है, जबकि गुर्जर समुदाय भी कई विधानसभा क्षेत्रों में निर्णायक प्रभाव रखता है। मुस्लिम मतदाताओं के साथ इन समूहों का संभावित मेल सपा के लिए एक ऐसा सामाजिक गठजोड़ बना सकता है, जो जाट-केंद्रित राजनीति के मुकाबले नया संतुलन खड़ा करे।

 

लेकिन सपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती जाट राजनीति है। भाजपा और राष्ट्रीय लोकदल का गठबंधन पश्चिमी यूपी में जाट मतदाताओं के लिए वर्तमान में फेवीकोल का जोड़ है। जयंत चौधरी इस सामाजिक आधार को अपनी सबसे बड़ी राजनीतिक पूंजी मानते हैं। ऐसे में अखिलेश यादव और जयंत के बीच ‘चवन्नी’ विवाद महज दो नेताओं की व्यक्तिगत राजनीतिक तकरार नहीं रह गया है। इसे जाट सम्मान और राजनीतिक प्रतिबिंब से जोड़कर पेश किया जा रहा है। ALSO READ: लखनऊ के विकास में मुख्यमंत्री योगी का सबसे बड़ा सहयोग : राजनाथ सिंह

 

यही वह बिंदु है जहां पश्चिमी यूपी की राजनीति दिलचस्प हो जाती है। सपा अगर जाटों के एक हिस्से को खोने की आशंका महसूस कर रही है, तो उसका विकल्प जाटव, गुर्जर, मुस्लिम और अन्य पिछड़े समूहों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करना है। दूसरी तरफ भाजपा-रालोद गठबंधन के लिए चुनौती यह है कि वह जाट आधार को बनाए रखते हुए मुस्लिम, गुर्जर, दलित और गैर-यादव पिछड़े मतदाताओं के बीच भी अपनी ग्राह्यता (उपयुक्तता) बढ़ाए।

 

दरअसल, पश्चिमी यूपी में 2027 का चुनाव केवल भाजपा बनाम सपा या गठबंधन बनाम विपक्ष की लड़ाई नहीं होगा। यह उस पुराने सामाजिक समीकरण के पुनर्गठन का चुनाव भी हो सकता है, जिसने दशकों तक उत्तर प्रदेश की राजनीति को दिशा दी है।

 

कांग्रेस का इतिहास इस बदलाव को समझने की एक महत्वपूर्ण कुंजी है। एक समय मुस्लिम, दलित और ब्राह्मण उसके मजबूत सामाजिक स्तंभ थे। मंडल-कमंडल की राजनीति, बहुजन आंदोलन और क्षेत्रीय दलों के उभार के साथ ये सामाजिक आधार अलग-अलग राजनीतिक खेमों में बंटते चले गए। दलितों का बड़ा हिस्सा बसपा के साथ गया, मुस्लिम मतदाता सपा की तरफ खिसका, ब्राह्मणों और अन्य सवर्णों का बड़ा हिस्सा भाजपा के साथ जुड़ा और पिछड़े वर्गों की राजनीति भी अलग-अलग क्षेत्रीय दलों में बंट गई। कांग्रेस का क्षरण इसी सामाजिक गठजोड़ के टूटने की कहानी है।

 

आज अखिलेश यादव उसी इतिहास को उलटने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन बदले हुए सामाजिक संदर्भ में। ‘पीडीए’ इसी कोशिश का राजनीतिक नाम है। पश्चिमी यूपी में इसका ‘प्लस’ संस्करण जाटव, गुर्जर, मुस्लिम और अन्य पिछड़े समूहों को जोड़कर तैयार करने की कोशिश है।

 

मगर सवाल यह है कि क्या एक घटना के जरिए जातीय अस्मिता को राजनीतिक गोलबंदी में बदला जा सकता है? और क्या जाटों के बीच पैदा हुई नाराजगी की भरपाई जाटव-गुर्जर-मुस्लिम समीकरण से संभव होगी?
 

2027 की पश्चिमी यूपी की सबसे बड़ी राजनीतिक पहेली

अखिलेश के लिए चुनौती केवल वोट जोड़ने की नहीं, बल्कि अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच ऐसा विश्वास पैदा करने की है कि उनका ‘पीडीए’ केवल चुनावी नारा नहीं, सत्ता में हिस्सेदारी का वास्तविक मॉडल है। जयंत चौधरी के लिए चुनौती जाट अस्मिता को भाजपा गठबंधन की राजनीति से जोड़कर रखना है। भाजपा के लिए चुनौती इन दोनों के बीच बनने वाले किसी भी नए सामाजिक समीकरण को प्रभावी होने से रोकना है।

 

इसलिए मेरठ की घटना के बाद अखिलेश यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस को केवल एक पुलिस विवाद के रूप में देखना पश्चिमी यूपी की मौजूदा राजनीति को छोटा करके देखना होगा। इसके पीछे असली लड़ाई नैरेटिव की है—कौन पीड़ित की आवाज बनेगा, कौन जातीय सम्मान का प्रतिनिधि बनेगा और कौन अलग-अलग सामाजिक समूहों को एक चुनावी गठजोड़ में बदल पाएगा।

 

एक बात और समझना जरूरी है। पश्चिमी उत्तरप्रदेश में जाट मतदाताओं ने बीजेपी से गलबहियां कर ली थीं। मुजफ्फरनगर और बागपत में अजित सिंह और जयंत चौधरी की कालांतर में हुई पराजय इसका स्पष्ट प्रमाण हैं। ऐसे में बीजेपी से हाथ मिलाकर सत्ता सुख भोगना जयंत को हितकर लगा और वे अखिलेश का साथ छोड़कर बीजेपी के कॉर्पोरेट का हिस्सा बन गए। जब से चवन्नी पलटी तब से आरएलडी लगातार कमजोर ही हुई है। आरएलडी के अनेक लॉयल नेता उनका साथ छोड़ चुके हैं। यहां यह भी समझना जरूरी है कि समाजवादी पार्टी का जाटों के बीच जनाधार नगण्य है।

सिर्फ स्थानीय स्तर पर किसी प्रभावशाली नेता को सामने रख सोशल इंजीनियरिंग कर अखिलेश यादव को कुछ प्राप्ति हो सकती है। इसलिए यह कहना कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अखिलेश के पास खोने के लिए अपना कुछ नहीं है लेकिन कुछ जिलें ऐसे हैं जिन्हें अखिलेश से संभल की तर्ज पर ही कुछ छीना जा सकता है, वरना इंडिया गठबंधन वहां उन्नीस-बीस  नहीं बल्कि 19-25 है।

अगर अखिलेश का दांव चल गया तो पश्चिमी यूपी में 2027 की लड़ाई दिलचस्प होगी! यह इस पर भी निर्भर होगा कि बीजेपी को अब तक अजेय बनाए रखने वाला ओबीसी किस करवट बैठता है! कांग्रेस के साथ होने पर इंडिया गठबंधन कितने प्रतिशत जाटव वोटों को अपने पाले में खींच पाता है! गुर्जरों का रुख क्या रहता है? ओवैसी कितने फीसदी वोट काटकर बीजेपी की राह को सुगम बना पाते हैं या नहीं?

इंदौर में फिर एक रेस्टोरेंट में मोमोज में रेंगती मिलीं इल्लियां, शिकायत के बाद फूड विभाग ने जारी किया नोटिस

इंदौर में फिर एक रेस्टोरेंट में मोमोज में रेंगती मिलीं इल्लियां, शिकायत के बाद फूड विभाग ने जारी किया नोटिस

Photo – Twitter

अपने खान-पान के लिए जाने जाने वाले इंदौर में खाद्य सामग्रियों में कभी इल्‍लियां तो कभी कॉकरोच मिलने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब एक रेस्‍टोरेंट में मोमोज में इल्‍लियां मिलने का मामला सामने आया है।

सी-21 मॉल के पीछे डायमेंशन फर्निचर के सामने स्थित एक रेस्टोरेंट में ग्राहकों को परोसे गए मोमोज में इल्लियां मिलने का आरोप लगाया गया है। मामला सामने आने के बाद ग्राहक ने खाद्य सुरक्षा विभाग में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत पर विभाग की टीम ने रेस्टोरेंट पहुंचकर जांच की और प्रबंधन को नोटिस जारी किया है।

क्‍या है पूरा मामला : शुक्रवार शाम दीपक मीणा अपने दोस्तों के साथ नाश्ता करने रेस्टोरेंट पहुंचे थे। उन्होंने वहां मोमोज का ऑर्डर दिया। प्लेट टेबल पर आने के बाद मोमोज में इल्लियां रेंगती दिखाई देने का दावा किया गया। यह देखकर ग्राहक हैरान रह गए और उन्होंने तत्काल रेस्टोरेंट प्रबंधन के सामने शिकायत दर्ज कराई। दीपक मीणा के मुताबिक, उन्होंने रेस्टोरेंट संचालक सिद्धार्थ मालवीय और कर्मचारी सोनू पाल से इस मामले को लेकर सवाल किया। आरोप है कि कर्मचारी ने यह कहते हुए जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया कि मोमोज रेस्टोरेंट में तैयार नहीं किए जाते हैं। इसको लेकर ग्राहकों और कर्मचारियों के बीच बहस भी हुई।

फ्रोजन मोमोज की बास्केट में भी इल्लियां : मामला सामने आने के बाद ग्राहकों ने रेस्टोरेंट में रखी फ्रोजन मोमोज की बास्केट की भी जांच की। शिकायतकर्ता का दावा है कि उसमें रखे अन्य मोमोज में भी इल्लियां दिखाई दीं। इसके बाद मौके पर फोटो और वीडियो बनाए गए और पूरे मामले की जानकारी खाद्य सुरक्षा विभाग को दी गई।

शिकायत में रेस्टोरेंट में खाद्य पदार्थों के रखरखाव, साफ-सफाई और गुणवत्ता की विस्तृत जांच कराने की मांग की गई। इसके साथ ही नियमों का उल्लंघन सामने आने पर रेस्टोरेंट को सील करने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई। शिकायत के साथ फोटो, वीडियो और रेस्टोरेंट की लोकेशन भी विभाग को उपलब्ध कराई गई। सीनियर फूड इंस्पेक्टर मनीष स्वामी के मुताबिक विभाग को रेस्टोरेंट के खिलाफ शिकायत मिली थी। शिकायत मिलने के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग की विशेष टीम मौके पर पहुंची और रेस्टोरेंट की जांच की। जांच के बाद रेस्टोरेंट प्रबंधन को नोटिस जारी किया गया है। अधिकारी के मुताबिक, फिलहाल दुकानदार रेस्टोरेंट नहीं खोल रहा है और विभाग नोटिस के जवाब का इंतजार कर रहा है। संचालक की ओर से दिए जाने वाले जवाब और विभागीय जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। इसी जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन किस स्तर तक हुआ है।