Daayra Trailer: कॉप ड्रामा ‘दायरा’ का ट्रेलर रिलीज, करीना कपूर- पृथ्वीराज सुकुमारन का दिखा दमदार अंदाज

Daayra Trailer: ‘दायरा’ का ट्रेलर रिलीज हो गया है। यह आने वाली क्राइम थ्रिलर फिल्म करीना कपूर और पृथ्वीराज सुकुमारन को पहली बार एक साथ स्क्रीन पर लाएगी, जिसमें दोनों कलाकार पुलिस अधिकारियों की भूमिका निभा रहे हैं जो एक ही केस में आमने-सामने हैं।

मेघना गुलज़ार की डायरेक्ट की गई यह फिल्म पिछले हफ़्ते से कई प्रोमोशनल खुलासों के ज़रिए काफ़ी चर्चा में रही है। करीना ने DCP अजूनी कोहली और पृथ्वीराज ने DCP रमन कुमार का किरदार निभाया है। उनके दमदार ‘फ़र्स्ट लुक’ से ही इस प्रोजेक्ट की गंभीरता का अंदाज़ा लग गया था, और अब ट्रेलर से फ़िल्म की दुनिया की और बेहतर झलक मिलती है।

ट्रेलर को YouTube पर इस जानकारी के साथ रिलीज़ किया गया- “सच्ची घटनाओं पर आधारित, ‘दायरा’ एक ज़बरदस्त क्राइम थ्रिलर है जो DCP रमन कुमार और DCP अजूनी कोहली की कहानी दिखाती है, जब एक केस उन्हें एक ही सिस्टम में आमने-सामने खड़ा कर देता है।” जैसा कि ट्रेलर में दिखाया गया है, ‘दायरा’ एक ऐसी जांच के इर्द-गिर्द घूमती है जो रमन और अजूनी को एक ही सिस्टम के अंदर मुश्किल हालात में डाल देती है। कहानी की यह झलक न्याय और उसे देने के तरीके पर सवाल खड़े करती है, जबकि केस की डिटेल्स को अभी भी राज़ ही रखा गया है।

‘दायरा’ फिल्म के साथ मेघना गुलज़ार ‘तलवार’ और ‘राज़ी’ जैसी अपनी मशहूर फिल्मों के बाद ‘जंगली पिक्चर्स’ में वापसी कर रही हैं। ‘तलवार’ में दिवंगत एक्टर इरफान खान और तब्बू थे, जबकि ‘राज़ी’ में आलिया भट्ट और विक्की कौशल मुख्य भूमिकाओं में थे। आने वाली यह फिल्म एक इन्वेस्टिगेटिव ड्रामा है, जिसे मेघना गुलज़ार, सीमा अग्रवाल और यश केसवानी ने लिखा है। सौरभ गोस्वामी ने सिनेमैटोग्राफर के तौर पर काम किया है, जबकि चारू श्री रॉय इसकी एडिटर हैं।

मेघना के साथ काम करने के अपने अनुभव के बारे में बात करते हुए पृथ्वीराज ने पहले एक ऑफिशियल बयान में कहा था, “मेघना के साथ काम करने में मुझे बहुत मज़ा आया – मुझे नहीं लगता कि मैंने किसी फिल्ममेकर के साथ इतनी बहस की है। वह एक कमाल की फिल्ममेकर हैं। वह बहुत अच्छी इंसान और बेहतरीन फिल्ममेकर हैं। और मैं बहुत शुक्रगुजार हूं कि उन्होंने सोचा कि मुझे यह फिल्म करनी चाहिए।”

एक्टर ने ‘दायरा’ पर फिल्ममेकर के काम की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि यह फिल्म दर्शकों को सीधे जवाब दिए बिना कई मुश्किल सवाल उठाती है। उन्होंने आगे कहा, “यह एक ऐसी फिल्म है जिसमें हमारे सिस्टम में न्याय और न्याय मिलने की प्रक्रिया पर बहुत निष्पक्ष नज़रिए की ज़रूरत है।”‘दायरा’ को जंगली पिक्चर्स और पेन स्टूडियोज़ का सपोर्ट मिला है। यह फिल्म करीना कपूर और पृथ्वीराज सुकुमारन की मेघना गुलज़ार के साथ पहली बार साथ काम करने वाली फिल्म भी है।

‘8 अरब लोगों के लिए लैपटॉप खरीदने लायक काला धन मौजूद’, ग्लोबल मनी लॉन्ड्रिंग पर बोले CJI सूर्यकांत

CJI Surya Kant: भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने दुनिया भर में हो रही मनी लॉन्ड्रिंग के बड़े पैमाने पर प्रकाश डाला है। उन्होंने कहा कि एक साल में दुनिया भर में अवैध तरीके से घुमाया जाने वाला पैसा इतना हो सकता है कि उससे दुनिया के 8 अरब लोगों में से हर एक के लिए एक साधारण लैपटॉप खरीदा जा सके। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि उस पैसे का एक प्रतिशत से भी कम हिस्सा कभी वापस मिल पाता है।

शनिवार को कैम्ब्रिज में ‘इकोनॉमिक क्राइम’ पर 43वें इंटरनेशनल सिम्पोजियम के समापन सत्र में बोलते हुए, जस्टिस कांत ने आपराधिक गतिविधियों से कमाए गए पैसे का पता लगाने, उसे जब्त करने और उसे वापस पाने पर वैश्विक स्तर पर ज्यादा ध्यान देने का आह्वान किया।

न्यूज एजेंसी PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, CJI ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे धोखाधड़ी वाले मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय न्यायपालिका ने संसद के कदम उठाने का इंतजार करने के बजाय, ऐसे नए तरह के अपराधों पर तेजी से प्रतिक्रिया दी है।

‘100 में से एक से भी कम’ पैसा हो पाता है बरामद

जस्टिस कांत ने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग का दायरा इतना बड़ा है कि वैश्विक अनुमानों के आधार पर भी उसे समझना मुश्किल है। उन्होंने कहा, “अगर मनी लॉन्ड्रिंग के वैश्विक अनुमान मोटे तौर पर भी सही हैं, तो दुनिया एक साल में इतना पैसा लॉन्डर करती है कि उससे आज धरती पर मौजूद सभी 8 अरब लोगों के लिए एक साधारण लैपटॉप खरीदा जा सकता है, और फिर भी खजाने में कुछ पैसे बच जाएंगे।”

इसके बाद उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अवैध तरीके से कमाए गए धन का बहुत छोटा हिस्सा ही आखिरकार वापस मिल पाता है।

जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “अवैध धन की इस विशाल रकम में से सबसे उदार अनुमान के मुताबिक भी 100 में से एक फीसदी से कम ही कभी वापस हासिल किया जाता है।”

उन्होंने कहा, “हर 100 हिस्सों में से 99 हिस्सों का जिक्र सिर्फ भाषणों और रिपोर्टों में होता है, जबकि वास्तव में सिर्फ एक हिस्से को ही वापस हासिल किया जा पाता है।”

उन्होंने कहा कि आर्थिक अपराध के खिलाफ लड़ाई को सिर्फ समस्या पहचानने तक सीमित नहीं रखना चाहिए। अब ध्यान अपराध से कमाए गए पैसे का पता लगाने और उसे वापस हासिल करने पर होना चाहिए।

पुराने जमाने की धोखाधड़ी से लेकर डिजिटल अरेस्ट तक

CJI ने कहा कि आर्थिक अपराध कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह एक पुरानी बुराई है जो टेक्नोलॉजी और फाइनेंशियल सिस्टम में बदलाव के साथ बदलती रही है।

उन्होंने चौथी सदी ईसा पूर्व के एक यूनानी व्यापारी हेगेस्ट्रेटोस का उदाहरण दिया, जिसने कथित तौर पर इंश्योरेंस का क्लेम पाने के लिए अपना माल बेचने के बाद अपना जहाज डुबोने की योजना बनाई थी। जस्टिस कांत ने इस मामले को आर्थिक धोखाधड़ी का शुरुआती उदाहरण बताया।

उन्होंने कौटिल्य के अर्थशास्त्र का भी जिक्र किया, जिसमें उन 40 तरीकों की पहचान की गई थी जिनसे अधिकारी सरकारी राजस्व का गबन कर सकते थे। इस ग्रंथ में ऑडिट, मुखबिर, क्रॉस-वेरिफिकेशन और जब्ती जैसे उपाय भी बताए गए थे।

CJI ने कहा, “अर्थशास्त्र में बताए गए चोरी के 40 तरीकों के साथ-साथ अब पता लगाने, फ्रीज करने और वापस पाने के चालीस बेहतर तरीकों को भी शामिल किया जाए।”

भारत का कानूनी ढांचा

जस्टिस कांत ने आर्थिक अपराधों से निपटने के लिए भारत के कानूनी ढांचे का जिक्र किया, जिसमें ‘प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002’ और ‘फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स एक्ट, 2018’ शामिल हैं।

उन्होंने अपराध से मिली कमाई का पता लगाने, उसे जब्त करने और अपने कब्जे में लेने के लिए इस्तेमाल होने वाले संस्थागत सिस्टम के तहत खास एजेंसियों और स्पेशल कोर्ट का भी जिक्र किया।

CJI ने इस बात पर जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग तेजी से जरूरी होता जा रहा है क्योंकि गैर-कानूनी पैसा आसानी से सीमाओं के पार जा सकता है।

उन्होंने कहा, “दूसरे देशों के साथ ‘म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस ट्रीटी’ (आपसी कानूनी सहायता समझौते) – भले ही उनका सिस्टम और तौर-तरीके कितने भी अधूरे क्यों न हों – प्रत्यर्पण (extradition) की तुलना में बरामद संपत्ति को कहीं ज्यादा भरोसेमंद तरीके से वापस लाते हैं। आखिरकार, गैर-कानूनी दौलत शायद ही कभी उस जगह रहती है जहां से उसे चुराया गया था।”

उन्होंने गैर-कानूनी फंड का पता लगाने के लिए फाइनेंशियल इंटेलिजेंस शेयरिंग और ‘बेनिफिशियल ओनरशिप रजिस्ट्री’ जैसे टूल्स पर भी जोर दिया, जिन्हें एक साथ मिलकर काम करने की जरूरत है।

चोरी हुई संपत्ति वापस पाने पर ध्यान दें

जस्टिस कांत ने कहा कि कानून को सख्ती से लागू करने का काम कानून के दायरे में ही होना चाहिए। उन्होंने ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम का भी जिक्र किया, जिसमें धोखेबाज सरकारी या कानून लागू करने वाले अधिकारियों का रूप धारण कर लोगों से पैसे ऐंठते हैं।

उन्होंने कहा कि आर्थिक अपराधों के खिलाफ कोशिशों की कामयाबी को इस आधार पर नहीं मापा जाना चाहिए कि समस्या का वर्णन कितनी अच्छी तरह किया गया है, बल्कि इस आधार पर मापा जाना चाहिए कि चोरी हुई संपत्ति का पता लगाने, उसे फ्रीज करने और वापस लाने में कितनी कामयाबी मिली है।

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H-1B वीज़ा का झटका बनेगा नया मौका, भारत में मिल सकती है ग्लोबल पैकेज वाली जॉब्स, जानिए कैसे बदल रहा है IT सेक्टर का गणित?

H-1B वीज़ा का झटका बनेगा नया मौका, भारत में मिल सकती है ग्लोबल पैकेज वाली जॉब्स, जानिए कैसे बदल रहा है IT सेक्टर का गणित?

Indian IT Sector Jobs

Indian IT Sector Jobs: वैश्विक अर्थव्यवस्था और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) के परिदृश्य में एक बड़ा ढांचागत बदलाव देखने को मिल रहा है। दशकों से भारतीय आईटी पेशेवरों और बहुराष्ट्रीय टेक कंपनियों के लिए अमरीका का 'H-1B वीज़ा' पासपोर्ट से कहीं अधिक—वैश्विक अवसरों का सबसे बड़ा द्वार माना जाता रहा है। हालाँकि, अमेरिकी आव्रजन नीतियों में हालिया कड़े बदलावों, नए वीज़ा नियमों पर प्रस्तावित रिकॉर्ड शुल्क (जो लाख डॉलर तक की सीमा छू रहे हैं) और कड़े आव्रजन मानदंडों ने इस स्थापित समीकरण को गहरा झटका दिया है।

इस नए घटनाक्रम ने भारतीय आईटी दिग्गजों, नीति निर्माताओं और युवा टेक पेशेवरों के सामने एक यक्ष प्रश्न खड़ा कर दिया है: क्या अब अमरीका केंद्रित मॉडल से बाहर निकलकर खुद भारत के भीतर मजबूत और टिकाऊ विकल्प तलाशने का समय आ गया है?

आव्रजन नीतियों में बदलाव का नया दौर और पृष्ठभूमि

अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) और आव्रजन एजेंसियों द्वारा H-1B वीज़ा व्यवस्था को लेकर लगातार सख्त रुख अपनाया जा रहा है:

  • लागत में बेतहाशा वृद्धि : नए नियमों के तहत नए H-1B आवेदनों के लिए भारी-भरकम शुल्क के प्रस्ताव ने भारतीय आउटसोर्सिंग कंपनियों के लिए ऑन-साइट स्पॉन्सरशिप को आर्थिक रूप से बेहद महंगा बना दिया है।
  • वेतन मानदंड और लॉटरी प्रणाली : वीज़ा लॉटरी प्रक्रिया में न्यूनतम वेतन सीमाओं और उच्च दक्षता वाले आवेदकों को प्राथमिकता देने से शुरुआती करियर वाले टेक इंजीनियरों के लिए अमेरिकी वीज़ा हासिल करना पहले से कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गया है।
  • अंतरराष्ट्रीय छात्रों पर प्रभाव : अमेरिका में पढ़ाई पूरी करने वाले भारतीय STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) छात्रों के लिए 'OPT से H-1B' श्रेणी में नौकरी में ट्रांसफर होना मुश्किल हुआ है, जिससे 'अमेरिकन ड्रीम' की अनिश्चितता और बढ़ गई है।

 

Indian IT Sector Jobs

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Indian IT Sector Jobs

डीप-टेक और स्वदेशी AI/डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर : भारत का UPI, ONDC और 'डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर' (DPI) विश्व स्तर पर मिसाल बन चुका है। देश में जेनेरेटिव एआई (GenAI), सेमीकंडक्टर डिज़ाइन और क्लाउड आर्किटेक्चर जैसे डीप-टेक क्षेत्रों में भारी निवेश आ रहा है।

'रिवर्स ब्रेन ड्रेन' (Reverse Brain Drain) : आव्रजन की जटिलताओं और भारत में बेहतर जीवनशैली, आकर्षक पैकेज व जीवंत स्टार्टअप कल्चर के चलते पिछले दो-तीन वर्षों में हजारों अनुभवी भारतीय आईटी विशेषज्ञ अमेरिका व यूरोप छोड़कर स्वदेश लौट चुके हैं। यह प्रतिभा पूल भारत के स्थानीय इनोवेशन इकोसिस्टम को अत्यधिक मजबूती दे रहा है।

क्या भारत के अलावा अन्य वैश्विक विकल्प भी हैं?

अमेरिकी बाज़ार पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने के लिए भारतीय आईटी उद्योग अब वैश्विक स्तर पर अपनी रणनीतियों का विविधीकरण (Diversification) कर रहा है:

  • यूरोप व ब्रिटेन : जर्मनी और ब्रिटेन जैसे देश अपनी घटती कार्यबल आबादी के कारण भारतीय टेक पेशेवरों के लिए अधिक अनुकूल वीज़ा और वर्क-परमिट नीतियां पेश कर रहे हैं।
  • मध्य पूर्व (GCC Region) : दुबई, रियाद और अबू धाबी जैसे केंद्र भारी डिजिटल रूपांतरण (Digital Transformation) से गुजर रहे हैं, जहाँ भारतीय डेवलपर्स के लिए बड़े पैमाने पर अवसर उभर रहे हैं।
  • दक्षिण-पूर्व एशिया व जापान : जापान में वृद्ध होती आबादी के चलते सॉफ्टवेयर और रोबोटिक्स इंजीनियर्स की भारी मांग है।

चुनौतियाँ : स्वदेशी इकोसिस्टम बनाने में क्या रुकावटें हैं?

यद्यपि भारत में विकल्प मौजूद हैं, फिर भी कुछ बड़ी चुनौतियाँ बनी हुई हैं:

  1. वेतन और क्रय शक्ति विषमता: भारत में शीर्ष-स्तरीय पैकेज बढ़े हैं, लेकिन शुरुआती और मध्य-स्तरीय टेक पेशेवरों का औसत वेतन अमेरिकी मानकों की तुलना में अभी भी कम है।
  2. रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) में निवेश की कमी: भारतीय आईटी क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा अभी भी सेवाओं (Services) पर आधारित है, उत्पाद विकास (Product-based R&D) पर नहीं।
  3. बुनियादी ढाँचा और जीवन की गुणवत्ता: मेट्रो शहरों में बुनियादी ढाँचे का दबाव (ट्रैफिक, प्रदूषण) भी कई पेशेवरों को विदेश जाने का विकल्प चुनने के लिए प्रेरित करता है।

संकट नहीं, बल्कि स्वावलंबन का अवसर

अमेरिकी वीज़ा और आव्रजन नीतियों में बढ़ती सख्ती भारतीय टेक इंडस्ट्री के लिए कोई विनाशकारी संकट नहीं, बल्कि एक बड़ा रणनीतिक अवसर (Blessing in Disguise) है।

दशकों से 'ब्रेन ड्रेन' की समस्या से जूझ रहे भारत के लिए यह समय अपने टेक-इकोसिस्टम को सिर्फ सर्विस-प्रोवाइडर बनाने के बजाय वैश्विक इनोवेशन हब बनाने का है। GCCs का बढ़ता दायरा, स्वदेशी AI स्टार्टअप्स और घरेलू डिजिटल बाज़ार यह साबित करते हैं कि भारतीय आईटी सेक्टर को अब अमेरिका के 'H-1B वीज़ा' पर पूरी तरह निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं है। भारत में ही वैश्विक स्तर के विकल्प मौजूद हैं और यह समय देश को प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में 'विश्व गुरु' बनाने की दिशा में अपने संसाधन लगाने का है।

7 चौके और छक्के, दलीप ट्रॉफी में शतक चूके लेकिन वैभव ने बना दिया यह अनोखा रिकॉर्ड

इस्ट जोन बनाम सेंट्रल जोन की दलीप ट्रॉफी सेमीफाइनल मैच में वैभव सूर्यवंशी भले ही 8 रनों से शतक चूक गए हों लेकिन उन्होंने दलीप ट्रॉफी में सबसे अर्धशतक जमा कर सबसे कम उम्र में यह कारनमा किया। वैभव सूर्यवंशी ने 15 साल 157 दिनों में दिलीप ट्रॉफी में अर्धशतक जड़ा इससे पहले उनसे युवा सिर्फ लक्ष्मण सिंह थे जिन्होंने 16 साल 23 दिनों में अर्धशतक जमाया था।

लाल गेंद के टूर्नामेंट दिलीप ट्रॉफी में वैभव सफेद गेंद की तरह ही खेले और उन्होंने 81 गेंदों में खेली 92 रनों की पारी में 7 चौके और छक्के लगाए। इससे पहले ईस्ट जोन के उपकप्तान वैभव सूर्यंवशी ने दलीप ट्रॉफी क्वार्टरफाइनल में नॉर्थ इस्ट जोन के खिलाफ 4 गेंदों में 2 विकेट चटकाए थे । उन्होंने नॉर्थ ईस्ट के किशन को 25 रनों पर और इमलिवती को 4 रनों पर आउट किया था।

15 साल के इस खिलाड़ी के लिए यह सीज़न शानदार रहा है। इस उभरते हुए बल्लेबाज ने इंग्लैंड में तीन टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में 14, 13 और 15 रन बनाए। इनमें से दो पारियों में सूर्यवंशी जोफ्रा आर्चर की शॉर्ट गेंद पर आउट हुए। इंग्लैंड दौरे पर भारत के लिए अपने डेब्यू में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन न कर पाने के बाद, सूर्यवंशी ने ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ टी20 सीरीज़ में प्रभावित किया। वहाँ उन्होंने कई मैचों में जीत दिलाने वाला प्रदर्शन किया और ‘प्लेयर ऑफ़ द सीरीज़’ चुने गए।

हालांकि इस 15 वर्षीय खिलाड़ी ने बिहार के लिए आठ प्रथम श्रेणी मैचों की 12 पारियों 17 से अधिक के औसत से रन बनाए हैं जो कि आकर्षक नहीं हैं। उनका सर्वोच्च स्कोर 93 रन है।ईस्ट ज़ोन ने एक मज़बूत टीम चुनी है जिसमें कई अनुभवी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी शामिल हैं। चुने गए प्रमुख खिलाड़ियों में भारत के अनुभवी तेज़ गेंदबाज़ मोहम्मद शमी, बंगाल के कप्तान अभिमन्यु ईश्वरन, तेज़ गेंदबाज़ मुकेश कुमार, ऑलराउंडर शाहबाज़ अहमद और विकेटकीपर-बल्लेबाज़ कुमार कुशाग्र शामिल हैं।


भोपाल में आवासीय इलाकों में कमर्शियल एक्टिविटी पर सीलिंग की कार्रवाई, 10 नंबर व्यापारी संघ ने जताया विरोध, निगम की कार्रवाई पर उठे सवाल

भोपाल में आवासीय इलाकों में कमर्शियल एक्टिविटी पर सीलिंग की कार्रवाई, 10 नंबर व्यापारी संघ ने जताया विरोध, निगम की कार्रवाई पर उठे सवाल

भोपाल। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आखिरकार भोपाल नगर निगम ने शहर के आवासीय क्षेत्रों में नियमों के विपरीत संचालित हो रही कमर्शियल गतिविधियों के खिलाफ सीलिंग की  कार्रवाई शुरू कर दी है। सोमवार को निगम की टीम ने अरेरा कॉलोनी के ई-3 क्षेत्र सहित सर्वधर्म बी सेक्टर और रचना नगर में पहुंचकर होटल और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई की। कार्रवाई के दौरान रचना नगर स्थित एक होटल को बंद कराने के साथ जूंबा डांस हाउस को सील किया गया। निगम के अफसर करीब 17 व्यावसायिक संस्थानों की सूची लेकर निकली और एक के बाद एक सीलिंग की कार्रवाई की। 

 

नगर निगम की टीम अरेरा कॉलोनी ई-3 पहुंची और यहां आवासीय क्षेत्र में संचालित व्यावसायिक गतिविधियों की जांच की। निगम अधिकारियों के अनुसार नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। इसके बाद निगम की टीम सर्वधर्म बी सेक्टर भी पहुंची, जहां कमर्शियल गतिविधियों को लेकर कार्रवाई की गई। निगम की कार्रवाई से क्षेत्र के व्यापारियों में हड़कंप की स्थिति रही।

 

नगर निगम की इस कार्रवाई के बाद अब व्यापारी संघ ने कार्रवाई के तरीके को लेकर सवाल खड़े किए हैं। शहर से सबसे पॉश इलाके में जब नगर निगम के दल ने छोटे व्यापारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरु की तो दुकानदारों ने हंगामा शुरु कर दिया। दुकानदारों का आऱोप है कि नगर निगम केवल छोटे दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है, बड़े प्रतिष्ठानों पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। 

 

निगम की कार्रवाई शुरू होते ही व्यापारी संगठनों ने निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। व्यापारियों का आरोप है कि निगम की कार्रवाई मुख्य रूप से छोटे दुकानदारों और छोटे व्यवसायियों तक सीमित दिखाई दे रही है, जबकि आवासीय क्षेत्रों में बड़े स्तर पर संचालित व्यावसायिक गतिविधियों और प्रभावशाली लोगों के प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई नहीं की जा रही है।

 

10 नंबर मार्केट व्यापारी संघ के अध्यक्ष आनंस सोनी ने निगम की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार के मास्टर प्लान नहीं लाने का खामियाजा आज व्यापारी भुगत रहे है। उन्होंने कहा कि सीलिंग की कार्रवाई से भोपाल का 90 प्रतिशत व्यापार बंद हो जाएगा। उन्होंने सरकार से जल्द से जल्द मास्टर प्लान लागू करने की मांग की। वहीं व्यापारियों को तत्काल राहत देने  के लिए मिक्स लैंड यूज व्यवस्था को लागू करने की मांग की। 

 

इसके साथ ही व्यापरियों ने कहा कि यदि आवासीय क्षेत्रों में कमर्शियल गतिविधियां नियम विरुद्ध हैं तो कार्रवाई सभी पर समान रूप से होनी चाहिए। व्यापारियों ने सवाल उठाया कि छोटे दुकानदारों को सील कर देने से पहले निगम को पूरे क्षेत्र का सर्वे कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि किन-किन भवनों में नियमों का उल्लंघन कर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं।

व्यापारियों का यह भी आरोप है कि कार्रवाई में समानता नहीं दिखाई दे रही है। उनका कहना है कि कई बड़े और रसूखदार लोगों के प्रतिष्ठान भी आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित कर रहे हैं, लेकिन उन पर कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। कार्रवाई के दौरन निगम के अमले से जब 10 नंबर इलाके में संचालित शराब दुकान और अन्य बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई न करने को लेकर सवाल उठाया गया तो अधिकारी बिना कुछ जवाब दिए वहां से निकल गए।

 

 

1 सितंबर से बदल जाएंगे आपकी जेब और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े ये नियम, LPG से लेकर विदेश यात्रा तक जानें क्या बदलेगा

1 सितंबर से बदल जाएंगे आपकी जेब और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े ये नियम, LPG से लेकर विदेश यात्रा तक जानें क्या बदलेगा

september changes

अगस्त का आज आखिरी दिन है। सितंबर की शुरुआत के साथ ही आम लोगों के जीवन, खर्च और बचत से जुड़े कई बड़े बदलाव लागू होने जा रहे हैं। बैंकिंग, गैस सिलेंडर, टैक्स, यात्रा और क्रेडिट कार्ड जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के ये बदलाव आपकी जेब पर सीधा असर डाल सकते हैं। इनमें से कुछ बदलावों के कारण आपको अधिक पैसे चुकाने पड़ सकते हैं, तो वहीं कुछ नियमों से आपको बड़ी राहत मिलने की संभावना है। किसी भी परेशानी या अतिरिक्त शुल्क से बचने के लिए, नए नियमों के बारे में जानना बेहद जरूरी है।

 

विदेश यात्रा करने वालों के लिए बड़ी राहत

1 सितंबर से भारत से अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलने वाली है। इमिग्रेशन काउंटर पर अब यात्रियों के बोर्डिंग पास पर भौतिक (फिजिकल) मुहर नहीं लगाई जाएगी। इमिग्रेशन ब्यूरो ने प्रक्रिया को सुगम और तेज बनाने के लिए यह महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इस नए नियम के अनुसार, यात्री अपने मोबाइल फोन पर इलेक्ट्रॉनिक बोर्डिंग पास या उसकी प्रिंटेड कॉपी दिखाकर आसानी से अपनी इमिग्रेशन प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे। इससे यात्रियों के समय की बचत होगी और अस्पष्ट मुहरों जैसी पुरानी तकनीकी समस्याएं हमेशा के लिए खत्म हो जाएंगी।

 

LPG सिलेंडर

31 अगस्त को एलपीजी कनेक्शन के लिए ई-केवाईसी या बायोमेट्रिक सत्यापन आखिरी दिन है। ई-केवाईसी की प्रक्रिया 1 सितंबर को बंद हो जाएगी। यदि आपने इस अवधि में यह प्रक्रिया पूरी नहीं की, तो आप घरेलू सब्सिडीयुक्त सिलेंडर प्राप्त करने से वंचित हो सकते हैं। इंडियन ऑयल, एचपीसीएल और बीपीसीएल जैसी प्रमुख तेल कंपनियां ग्राहकों को इस प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करने की सलाह देते हुए लगातार संदेश भेज रही हैं। 1 सितंबर से एलपीजी या पेट्रोल-डीजल के दामों में कोई बदलाव हो सकता है। 

 

बैंकिंग नियमों में बड़े बदलाव

बैंकों में बड़ी सावधि जमा (एफडी) करने वालों के लिए भी नियमों में पारदर्शिता लाई जा रही है। नए दिशानिर्देशों के अनुसार, बैंकों को 3 करोड़ रुपये या उससे अधिक की बड़ी जमा राशि पर दिए जाने वाले ब्याज दर रोजाना सुबह 10:10 बजे तक अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर घोषित करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, बैंक की अलग-अलग शाखाएं एक ही दिन जमा की गई एक ही राशि पर अलग-अलग ब्याज दरें नहीं दे सकेंगी। हालांकि, इस नियम का आम नागरिकों की छोटी एफडी पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं पड़ेगा। ध्यान दें कि एफडी पारदर्शिता के ये नए नियम 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे। 1 सितंबर से एटीएम से जुड़े चार्जेस में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में ज्यादा ट्रांजैक्शन करने पर बैंक आपसे मोटी फीस वसूल सकता है।

 

ईटीएफ पर नए नियम

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी (SEBI) ने ईटीएफ (ETF) कारोबार को लेकर 1 सितंबर से नए नियम लागू करने का फैसला किया है। नए नियमों के हिसाब से ईटीएफ की कीमत की सीमा तय के लिए पिछले कारोबारी दिन के आखिरी 30 मिनट की ट्रेडिंग वॉल्यूम की औसत कीमत को आधार बनाया जाएगा। इससे ईटीएफ की कीमत बाजार की ताजा स्थिति के आसपास बनी रहेगी।

 

विदेश यात्रा से जुड़ा बड़ा बदलाव

1 सितंबर 2026 से विदेश यात्रा से जुड़ा एक बड़ा बदलाव होने वाला है। भारत से विदेश जाने वाले यात्रियों को इमिग्रेशन काउंटर पर अब बोर्डिंग पास पर स्टैम्प लगवाने की जरूरत नहीं होगी. यात्री मोबाइल में इलेक्ट्रॉनिक बोर्डिंग पास या उसकी प्रिंटेड कॉपी दिखाकर इमिग्रेशन प्रोसेस पूरा कर सकेंगे। इस नए नियम से हवाई यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।

हाथ में तलवार और जलती चिता से इंसानी मांस खाया! किन्नर अघोरी के वीडियो से हड़कंप; संत समाज भड़का

उज्जैन के एक वीडियो ने सोशल मीडिया पर बवाल मचा दिया है। एक किन्नर अघोरी हाथ में तलवार लेकर जलती चिता से इंसानी मांस खाने का दावा कर रहा है। इस वीडियो से संत समाज में आक्रोश है।

Tata Punch EV new vs old real-world range comparison

Tata Punch EV new vs old real-world range comparison
Tata Punch EV new vs old

In February 2026, Tata Motors brought incremental updates to the Punch EV. The carmaker’s most affordable electric SUV saw a bump in battery size, subtle cosmetic revisions, and feature additions, while also being more affordable than its predecessor. To see how much the 2026 Punch EV has improved over its older iteration, we put it through our real-world range tests and compare it to its predecessors. 

Tata Punch EV new vs old: Specifications

Tata Punch EV new vs old: Specifications

 

Tata Punch EV New

Tata Punch EV Old

Battery size

40

35

Electric motor setup

Single motor, front

Single motor, front

Power (hp)

129

122

Torque (Nm)

154

190

ARAI range (km)

468

365

Kerb weight (kg)

1365

1,360

0-100kph time (claimed, in seconds)

9

9.5

With the newer Punch EV, Tata has increased the battery size in its long-range version by 5kWh and bumped the motor’s power slightly. However, the older Punch EV’s motor delivered 36Nm more torque than the newer model. In the new Punch EV, Tata introduced a new 6-in-1 drivetrain setup, replacing the older one’s 3-in-1 unit. With this new setup, Tata claims a 50 percent reduction in packaging size, a 28 percent reduction in weight, and a 6 percent increase in efficiency. Despite the larger battery, this new drivetrain setup on the Punch EV has led to a weight increase of a mere 5kg over its predecessor.

Tata Punch EV new vs old: Real-world range 

In our real-world range tests, the newer Tata Punch EV delivered much higher range than its predecessor. On average, the former goes 75km further than the latter on a single charge. This is because the more efficient drivetrain setup (see table below), coupled with the larger battery pack on the new Punch EV, has translated into going farther on a single charge. 

Tata Punch EV new vs old: Efficiency 

 

Tata Punch EV New

Tata Punch EV Old

City efficiency (km/kWh)

7.92

6.92

Highway efficiency (km/kWh)

7.29

6.17

Average efficiency (km/kWh)

7.61

6.54

Tata Punch EV new vs old: Prices

Tata Punch EV new vs old: Prices

 

Tata Punch EV New

Tata Punch EV Old

Long Range version price range (Rs lakh)

10.99 – 12.79

12.99 to 14.49

Despite the updates and higher real-world range, the new Tata Punch EV is much more affordable than the older model. In fact, depending on the variant chosen, the former is up to Rs 2 lakh cheaper than the latter. 

Autocar India’s range testing

Before our real-world range tests, the battery of our test car was fully charged, and we maintained tyre pressures in accordance with the manufacturer’s recommendations. The car was driven on a weekday in Mumbai city and on the adjoining state highway in a fixed loop, and we maintained the set average speeds. At the end of each cycle, we calculated the range based on the percentage charge consumed.

Throughout our tests, the climate control was set to 22deg C in a full-auto setting, and other electricals, such as the audio system, indicators and ventilated front seats, were used when required, just as a regular user would. We take pride in our testing data, which isn’t merely consistent but also gives users an accurate indication of what they can expect in the real world.

कौशांबी की पटाखा फैक्ट्री में जोरदार ब्लास्ट, 3 की मौत, 10 से ज्यादा लोग झुलसे, कई मकान भी जमींदोज

Kaushambi Firecracker Factory Blast: यूपी के कौशांबी जिले में दर्दनाक हादसा हो गया है। यहां के पिपरी थाना के मनौरी में एक पटाखा फैक्ट्री में ब्लास्ट होने से 3 लोगों की मौत हो गई, जबकि 10 से अधिक लोग गभीर रूप से झुलसे गए। इन सभी घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बता दें कि इस ब्लास्ट में मकान भी जमींदोज हुए है।

वहीं हादसे की खबर सुनते ही मौके पर पहुंची पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम घटना स्थल पर रेस्क्यू करने में जुटी गई है। डीएम और एसपी भी घटनास्थल पर पहुंचकर जायजा ले रहे हैं। यह पटाखा फैक्ट्री आदिल डीजे पुत्र निजामुद्दीन की बताई जा रही है।

आसपास का इलाका धुएं से भर गया

बता दें कि हादसा कौशांबी जिले के मोहम्मदपुर गांव में हुआ, जो प्रयागराज बॉर्डर पर स्थित है। यहां से मनौरी स्थित एयरफोर्स स्टेशन करीब डेढ़ किलोमीटर दूर है। हादसे के वक्त फैक्ट्री में करीब 25 मजदूर काम कर रहे थे। धमाके की आवाज करीब दो किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। विस्फोट के बाद फैक्ट्री से धुएं का घना गुबार उठा और आसपास का इलाका धुएं से भर गया। पटाखों में आग लगने के कारण लगातार धमाके होते रहे।

सीएम योगी ने अधिकारियों को दिए निर्देश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनपद कौशाम्बी में हुए हादसे का संज्ञान लेते हुए मृतकों के शोक संतप्त परिजन के प्रति संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि घायलों का इलाज अच्छी तरह से किया जाए। इसके अलावा, सीएम योगी ने मृतकों के परिजनों से बात कर हर संभव सहायता मुहैया करवाने की भी बात कही है। साथ ही, घायलों के जल्द स्वस्थ होने की भी कामना की है।

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