Top News 17 October: आडवाणी अस्पताल में भर्ती, ट्रंप का बड़ा दांव और शिमला में भूकंप के झटके

Top News 17 October: आडवाणी अस्पताल में भर्ती, ट्रंप का बड़ा दांव और शिमला में भूकंप के झटके

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Top News 17 October: नेहा बोरा रिहा, अभिजीत दिपके की कोर्ट में पेशी। लालकृष्ण आडवाणी अस्पताल में भर्ती। हिमाचल के शिमला में भूकंप के झटके। अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी तेल और गैस खरीद से हटाया बैन। भारत और वेस्टइंडीज के बीच 5वां और आखिरी टी20 मैच आज। 17 अक्टूबर की बड़ी खबरें: 
 

नेहा बोरा रिहा, दिपके की कोर्ट में पेशी

दिल्ली पुलिस ने तिरंगा मार्च के दौरान हिरासत में ली गई नेहा बोरा को रिहा किया। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके को आज अदालत में पेश किया जाएगा। लेफ्ट दल आज दोपहर 2 बजे जंतर-मंतर मार्च करेंगे। दिल्ली पुलिस ने मार्च की इजाजत नहीं दी, कनॉट पैलेस का सेंट्रल पार्क आज भी बंद। 

 

आडवाणी अस्पताल में भर्ती

वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी को शुक्रवार देर शाम दिल्ली के अपोलो हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। 98 वर्षीय आडवाणी को सीने में संक्रमण की शिकायत के बाद अस्पताल लाया गया। उनकी हालत फिलहाल स्थिर है और डॉक्टरों की टीम उनकी निगरानी कर रही है। ALSO READ: Lal Krishna Advani : लालकृष्ण आडवाणी अपोलो अस्पताल में भर्ती, सीने में संक्रमण की शिकायत के बाद कराया गया एडमिट

 

हिमाचल के शिमला में भूकंप

हिमाचल प्रदेश के शिमला में आज सुबह 4 बजकर 36 मिनट पर भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 4.3 दर्ज की गई। हालांकि इस घटना में जान-माल के नुकसान की कोई खबर नहीं है।

 

ट्रंप ने रूसी तेल और गैस खरीद से हटाया बैन

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने से जुड़े कानून के तहत प्रतिबंधों, पाबंदियों और शुल्कों से छूट देने का आदेश जारी किया है। उन्होंने इसे अमेरिका के राष्ट्रीय हित में उठाया गया कदम बताया। इस फैसले से भारत और चीन को बड़ी राहत मिली है।

 

टीम इंडिया के सामने सीरीज बचाने की चुनौती

भारत और वेस्टइंडीज के बीच पांच मैचों की टी20 सीरीज का निर्णायक मुकाबला शनिवार को खेला जाएगा। दोनों टीमें फिलहाल सीरीज में दो-दो की बराबरी पर हैं। दोनों टीमों के लिए ये मैच सीरीज बचाने के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है। बंगलूरू के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में होने वाले इस मैच में बारिश की भी संभावना।

LPG Price 17 October 2026: घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर के नए रेट जारी, जानें ताजा भाव

LPG Price 17 October 2026: रसोई का बजट बनाते समय गैस सिलेंडर की कीमत को नजरअंदाज करना आसान नहीं है। महीने में एक बार सिलेंडर भरवाने वाले परिवारों से लेकर रोजाना बड़ी मात्रा में गैस इस्तेमाल करने वाले कारोबारियों तक, एलपीजी के दाम सभी के खर्च को प्रभावित करते हैं। ऐसे में सिलेंडर बुक कराने से पहले ताजा कीमतों की जानकारी होना जरूरी है। घरेलू और कमर्शियल गैस सिलेंडर के रेट अलग-अलग होते हैं और शहर के हिसाब से भी इनमें अंतर देखने को मिलता है।

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 942 रुपये है, जबकि 19 किलोग्राम के कमर्शियल सिलेंडर के लिए 2,810 रुपये देने पड़ रहे हैं। अक्टूबर की शुरुआत में घरेलू सिलेंडर के दाम स्थिर रहे, लेकिन कमर्शियल गैस की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसका असर होटल, रेस्तरां और अन्य खाद्य कारोबारों के खर्च पर पड़ सकता है। आइए, जानते हैं प्रमुख शहरों में घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर के ताजा बताए गए रेट।

घरेलू गैस सिलेंडर के ताजा रेट

घरेलू एलपीजी सिलेंडर हर घर की जरूरत है। इसकी कीमत में बदलाव का असर सीधे परिवारों के मासिक खर्च पर पड़ता है। अलग-अलग शहरों में स्थानीय करों और अन्य कारणों से कीमतों में अंतर देखने को मिल सकता है।

आपके शहर में घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर कितने का है?

अगर आप घरेलू या कमर्शियल गैस सिलेंडर बुक कराने जा रहे हैं, तो नीचे दी गई सूची में अपने शहर का रेट देख सकते हैं। इसमें 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू और 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमतें एक साथ दी गई हैं।

शहरघरेलू सिलेंडर (14.2 KG)कमर्शियल सिलेंडर (19 KG)
दिल्ली₹942₹2,810
मुंबई₹941.50₹2,764.50
कोलकाता₹968₹2,954
चेन्नई₹957.50₹2,983
नोएडा₹939.50₹2,810
गुरुग्राम₹950.50₹2,828
लखनऊ₹979.50₹2,932.50
जयपुर₹945.50₹2,839
पटना₹1,031.50₹3,100.50
हैदराबाद₹994₹3,065

कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम में कितनी बढ़ोतरी हुई?

घरेलू सिलेंडर के मुकाबले कमर्शियल एलपीजी का इस्तेमाल मुख्य रूप से होटल, रेस्तरां, ढाबों और मिठाई की दुकानों में किया जाता है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 1 अक्टूबर 2026 को 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में शहर के अनुसार करीब 62.50 रुपये से 70 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई थी।

कमर्शियल गैस महंगी होने से होटल और रेस्तरां संचालकों का खर्च बढ़ सकता है। इसका असर आगे चलकर खाने-पीने की कुछ चीजों की कीमतों पर भी पड़ने की आशंका रहती है।

गैस सिलेंडर बुक करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग करते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए, ताकि बाद में किसी तरह की परेशानी न हो।

  • ताजा रेट जांचें: बुकिंग से पहले अपनी गैस कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप पर शहर के अनुसार लागू कीमत देखें।
  • डिलीवरी का बिल लें: सिलेंडर मिलने पर बिल जरूर लें और उसमें दर्ज कीमत की जांच करें।
  • सब्सिडी का स्टेटस देखें: यदि आप सब्सिडी के पात्र हैं, तो अपने बैंक खाते में इसकी स्थिति जांच लें।
  • शिकायत के लिए आधिकारिक माध्यम अपनाएं: कीमत, डिलीवरी या सिलेंडर से जुड़ी समस्या होने पर गैस कंपनी की ग्राहक सेवा से संपर्क करें।

गौरतलब है कि एलपीजी सिलेंडर के दाम शहर और लागू शुल्क के अनुसार अलग हो सकते हैं। इसलिए बुकिंग करने से पहले अपनी गैस कंपनी के आधिकारिक माध्यम से ताजा कीमत की पुष्टि जरूर कर लें।

Petrol Diesel Price Today: पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आज क्या हुआ बदलाव? चेक करें ताजा रेट

Petrol Diesel Price Today: पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आज क्या हुआ बदलाव? चेक करें ताजा रेट

Petrol Diesel Price Today: हर दिन की शुरुआत सिर्फ सूरज की किरणों से नहीं होती, बल्कि पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों से भी होती है, जो आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालती हैं। सुबह 6 बजे देश की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) ताजा दरें जारी करती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपए की विनिमय दर में आए बदलावों पर आधारित होती हैं। ये बदलाव रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं, चाहे वो ऑफिस जाने वाला व्यक्ति हो या फल-सब्जी बेचने वाला व्यापारी।

ऐसे में हर दिन की कीमतों की जानकारी रखना सिर्फ जरूरी ही नहीं, बल्कि समझदारी भी है। सरकार की यह प्रणाली पारदर्शिता सुनिश्चित करती है ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की भ्रमित जानकारी न मिले।

आपके शहर में आज का पेट्रोल-डीजल का भाव

ये रहे 17 अक्टूबर 2026 के प्रमुख शहरों के पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट

नई दिल्ली: पेट्रोल ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर।

मुंबई: पेट्रोल ₹111.18 और डीजल ₹97.83 प्रति लीटर।

कोलकाता: पेट्रोल ₹113.47 जबकि डीजल ₹99.82 प्रति लीटर।

चेन्नई: पेट्रोल ₹107.77 और डीजल ₹99.55 प्रति लीटर।

गुरुग्राम: पेट्रोल ₹102.77 तथा डीजल ₹95.44 प्रति लीटर।

नोएडा: पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹95.56 प्रति लीटर।

बेंगलुरु: पेट्रोल ₹110.93 जबकि डीजल ₹98.80 प्रति लीटर।

भुवनेश्वर: पेट्रोल ₹109.92 और डीजल ₹100.92 प्रति लीटर।

चंडीगढ़: पेट्रोल ₹98.10 तथा डीजल ₹86.09 प्रति लीटर।

हैदराबाद: पेट्रोल ₹115.69 और डीजल ₹103.82 प्रति लीटर।

जयपुर: पेट्रोल ₹112.66 जबकि डीजल ₹97.78 प्रति लीटर।

लखनऊ: पेट्रोल ₹102.05 और डीजल ₹95.55 प्रति लीटर।

पटना: पेट्रोल ₹113.35 तथा डीजल ₹99.36 प्रति लीटर।

तिरुवनंतपुरम: पेट्रोल ₹115.49 और डीजल ₹104.40 प्रति लीटर।

पिछले दो साल से स्थिर क्यों हैं कीमतें?

मई 2022 के बाद से केंद्र और कई राज्यों द्वारा टैक्स में कटौती की गई, जिसके बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता देखी जा रही है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव होता रहता है, फिर भी भारतीय उपभोक्ताओं के लिए कीमतें तुलनात्मक रूप से स्थिर बनी हुई हैं।

किन कारणों से तय होती हैं ईंधन की कीमतें?

  1. कच्चे तेल की कीमतें:

पेट्रोल और डीजल का उत्पादन मुख्य रूप से कच्चे तेल से होता है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ता है।

  1. डॉलर के मुकाबले रुपया:

भारत अधिकतर कच्चा तेल आयात करता है, और यह डॉलर में खरीदा जाता है। यदि रुपया कमजोर होता है, तो ईंधन महंगा हो जाता है।

  1. सरकारी टैक्स और शुल्क:

केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स लगाती हैं, जो खुदरा मूल्य का बड़ा हिस्सा होते हैं। यही कारण है कि राज्यों में कीमतों में अंतर होता है।

  1. रिफाइनिंग की लागत:

कच्चे तेल को इस्तेमाल लायक बनाने की प्रक्रिया (रिफाइनिंग) में भी खर्च होता है। ये लागत कच्चे तेल की गुणवत्ता और रिफाइनरी की क्षमता पर निर्भर करती है।

  1. मांग और आपूर्ति का संतुलन:

बाजार में ईंधन की मांग अगर बढ़ जाती है, तो कीमतें भी ऊपर जाने लगती हैं। खासकर त्योहारों, गर्मी या सर्दी के मौसम में ईंधन की खपत ज्यादा होती है।

कैसे करें अपने शहर की कीमतें SMS से चेक?

अगर आप मोबाइल से ईंधन की कीमत जानना चाहते हैं, तो ये प्रक्रिया आसान है:

Indian Oil ग्राहक: अपने शहर का कोड टाइप करें और उसे “RSP” के साथ 9224992249 पर भेजें।

BPCL ग्राहक: “RSP” लिखकर 9223112222 पर भेजें।

HPCL ग्राहक: “HP Price” लिखकर 9222201122 पर भेजें।

ट्रम्प ने 5 दिन में ही प्रेस सेक्रेटरी को हटाया:वकील होने के दावे पर सवाल उठे, पहली ब्रीफिंग में जुबान लड़खड़ाईं थी

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपनी नई प्रेस सेक्रेटरी केटी जकारिया को पद से हटा दिया है। जकारिया ने सोमवार को काम शुरू किया था और सिर्फ 5 दिन बाद, 16 अक्टूबर को उन्होंने पद छोड़ दिया। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा कि जकारिया पद से हट रही हैं। ट्रम्प ने उनसे नौकरी पर दोबारा विचार करने को कहा था। जकारिया के वकील होने की योग्यता पर सवाल उठे थे। इसके अलावा वे अपनी पहली प्रेस ब्रीफिंग सही से नहीं दे पाईं थीं। एक सवाल पर अपने पति को उन्होंने गलती से माय प्रेसिडेंट कह दिया था। जकारिया के पास वकालत का लाइसेंस नहीं मिला ट्रम्प ने जकारिया को प्रेस सेक्रेटरी बनाने का ऐलान करते हुए कहा था कि उन्होंने पेपरडाइन यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की है। लेकिन उनके पास अमेरिका में वकालत का लाइसेंस होने का सबूत नहीं मिला। गुरुवार को फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में जकारिया ने कहा कि उन्होंने वकालत की परीक्षा पास नहीं की है। अमेरिका में वकील बनने के लिए आमतौर पर परीक्षा पास कर लाइसेंस लेना जरूरी होता है। जकारिया ने अंतरराष्ट्रीय कारोबारी कानून के क्षेत्र में काम करने की बात कही थी, लेकिन कानून की पढ़ाई करना और वकालत का लाइसेंस होना अलग-अलग बातें हैं। जकारिया इससे पहले ट्रम्प की सोशल मीडिया कंपनी ट्रम्प मीडिया एंड टेक्नोलॉजी ग्रुप में कम्युनिकेशन सलाहकार थीं। उनके लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक, उन्होंने जून 2026 में यह काम शुरू किया था। इससे पहले वह कुछ समय अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग में जनसंपर्क से जुड़ा काम भी कर चुकी थीं। ट्रम्प बोले- मीडिया उन्हें परेशान कर रहा शुक्रवार को व्हाइट हाउस से निकलते समय ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने जकारिया से पद पर बने रहने के फैसले पर दोबारा सोचने को कहा था। ट्रम्प के मुताबिक, उन्होंने जकारिया से कहा कि उन्हें मीडिया के दबाव में परेशान होने की जरूरत नहीं है। वे चाहें तो नौकरी छोड़ सकती हैं। ट्रम्प ने कहा, मुझे नहीं लगता कि मीडिया के केटी को परेशान करने की वजह से उन्हें इतना कष्ट उठाना चाहिए। शायद यह नौकरी जकारिया के लिए सही नहीं है। पहली ब्रीफिंग के बाद भी हुई आलोचना जकारिया ने 13 अक्टूबर को व्हाइट हाउस में पहली बार प्रेस ब्रीफिंग की थी। जो 14 मिनट चली। उनके जवाबों की बहुत आलोचना हुई थी। करोलिन लेविट की जगह मिली थी जिम्मेदारी जकारिया को करोलिन लेविट की जगह व्हाइट हाउस का प्रेस सेक्रेटरी बनाया गया था। ट्रम्प ने उनकी नियुक्ति का ऐलान करते हुए उनकी तारीफ की थी। इससे पहले ट्रम्प के पहले कार्यकाल में एंथनी स्कारामुची ने व्हाइट हाउस के कम्युनिकेशन डायरेक्टर के रूप में 10 दिन काम किया था। इस तरह जकारिया का कार्यकाल उनसे भी छोटा रहा। ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल में इन महिलाओं की भी कुर्सी गई क्रिस्टी नोएम – गृह सुरक्षा मंत्री: मार्च 2026 में ट्रम्प ने उन्हें पद से हटाया। विभाग के कामकाज को लेकर आलोचना हुई थी। पैम बॉन्डी – अटॉर्नी जनरल: अप्रैल 2026 में हटाई गईं। एपस्टीन फाइलों और कामकाज को लेकर सवाल उठे थे। लॉरी चावेज-डीरिमर – श्रम मंत्री: अप्रैल 2026 में निजी क्षेत्र में जाने के लिए पद छोड़ा। तुलसी गबार्ड – राष्ट्रीय खुफिया निदेशक: जून 2026 में इस्तीफा दिया। उन्होंने पति की बीमारी को कारण बताया। ——————— यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका के स्कूल में गोलीबारी, 4 की मौत: इनमें 3 बच्चे, स्थानीय नागरिक ने हमलावर को मार गिराया; इस साल स्कूलों में फायरिंग का 26वां मामला अमेरिका के ओरेगन राज्य के बेंड शहर में गुरुवार को एक स्कूल में गोलीबारी हुई। इसमें 3 बच्चों समेत 4 लोगों की मौत हो गई। पूरी खबर पढ़ें…

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अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपनी नई प्रेस सेक्रेटरी केटी जकारिया को पद से हटा दिया है। जकारिया ने सोमवार को काम शुरू किया था और सिर्फ 5 दिन बाद, 16 अक्टूबर को उन्होंने पद छोड़ दिया। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा कि जकारिया पद से हट रही हैं। ट्रम्प ने उनसे नौकरी पर दोबारा विचार करने को कहा था। जकारिया के वकील होने की योग्यता पर सवाल उठे थे। इसके अलावा वे अपनी पहली प्रेस ब्रीफिंग सही से नहीं दे पाईं थीं। एक सवाल पर अपने पति को उन्होंने गलती से माय प्रेसिडेंट कह दिया था। जकारिया के पास वकालत का लाइसेंस नहीं मिला ट्रम्प ने जकारिया को प्रेस सेक्रेटरी बनाने का ऐलान करते हुए कहा था कि उन्होंने पेपरडाइन यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की है। लेकिन उनके पास अमेरिका में वकालत का लाइसेंस होने का सबूत नहीं मिला। गुरुवार को फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में जकारिया ने कहा कि उन्होंने वकालत की परीक्षा पास नहीं की है। अमेरिका में वकील बनने के लिए आमतौर पर परीक्षा पास कर लाइसेंस लेना जरूरी होता है। जकारिया ने अंतरराष्ट्रीय कारोबारी कानून के क्षेत्र में काम करने की बात कही थी, लेकिन कानून की पढ़ाई करना और वकालत का लाइसेंस होना अलग-अलग बातें हैं। जकारिया इससे पहले ट्रम्प की सोशल मीडिया कंपनी ट्रम्प मीडिया एंड टेक्नोलॉजी ग्रुप में कम्युनिकेशन सलाहकार थीं। उनके लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक, उन्होंने जून 2026 में यह काम शुरू किया था। इससे पहले वह कुछ समय अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग में जनसंपर्क से जुड़ा काम भी कर चुकी थीं। ट्रम्प बोले- मीडिया उन्हें परेशान कर रहा शुक्रवार को व्हाइट हाउस से निकलते समय ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने जकारिया से पद पर बने रहने के फैसले पर दोबारा सोचने को कहा था। ट्रम्प के मुताबिक, उन्होंने जकारिया से कहा कि उन्हें मीडिया के दबाव में परेशान होने की जरूरत नहीं है। वे चाहें तो नौकरी छोड़ सकती हैं। ट्रम्प ने कहा, मुझे नहीं लगता कि मीडिया के केटी को परेशान करने की वजह से उन्हें इतना कष्ट उठाना चाहिए। शायद यह नौकरी जकारिया के लिए सही नहीं है। पहली ब्रीफिंग के बाद भी हुई आलोचना जकारिया ने 13 अक्टूबर को व्हाइट हाउस में पहली बार प्रेस ब्रीफिंग की थी। जो 14 मिनट चली। उनके जवाबों की बहुत आलोचना हुई थी। करोलिन लेविट की जगह मिली थी जिम्मेदारी जकारिया को करोलिन लेविट की जगह व्हाइट हाउस का प्रेस सेक्रेटरी बनाया गया था। ट्रम्प ने उनकी नियुक्ति का ऐलान करते हुए उनकी तारीफ की थी। इससे पहले ट्रम्प के पहले कार्यकाल में एंथनी स्कारामुची ने व्हाइट हाउस के कम्युनिकेशन डायरेक्टर के रूप में 10 दिन काम किया था। इस तरह जकारिया का कार्यकाल उनसे भी छोटा रहा। ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल में इन महिलाओं की भी कुर्सी गई क्रिस्टी नोएम – गृह सुरक्षा मंत्री: मार्च 2026 में ट्रम्प ने उन्हें पद से हटाया। विभाग के कामकाज को लेकर आलोचना हुई थी। पैम बॉन्डी – अटॉर्नी जनरल: अप्रैल 2026 में हटाई गईं। एपस्टीन फाइलों और कामकाज को लेकर सवाल उठे थे। लॉरी चावेज-डीरिमर – श्रम मंत्री: अप्रैल 2026 में निजी क्षेत्र में जाने के लिए पद छोड़ा। तुलसी गबार्ड – राष्ट्रीय खुफिया निदेशक: जून 2026 में इस्तीफा दिया। उन्होंने पति की बीमारी को कारण बताया। ——————— यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका के स्कूल में गोलीबारी, 4 की मौत: इनमें 3 बच्चे, स्थानीय नागरिक ने हमलावर को मार गिराया; इस साल स्कूलों में फायरिंग का 26वां मामला अमेरिका के ओरेगन राज्य के बेंड शहर में गुरुवार को एक स्कूल में गोलीबारी हुई। इसमें 3 बच्चों समेत 4 लोगों की मौत हो गई। पूरी खबर पढ़ें…

डोनाल्ड ट्रंप की ‘सुपर इंटेलिजेंस फोर्स’ क्या है

डोनाल्ड ट्रंप की ‘सुपर इंटेलिजेंस फोर्स’ क्या है

trump

-मिया आर्मिटेज

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘सुपर इंटेलिजेंस फोर्स’ की घोषणा करते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को “औद्योगिक क्रांति और इंटरनेट से भी बड़ा” बदलाव बताया। इस तुलना के बारे में उन्होंने कहा कि “कई दूसरे लोग” भी ऐसा मानते हैं। ALSO READ: 100 साल पहले मिले जीवाश्म ने दी नए डायनासोर की खबर

 

एआई उद्योग के तेजी से विस्तार को देखते हुए ट्रंप ने यह कदम सितंबर के आखिर में प्रमुख एआई कंपनियों के अधिकारियों से मुलाकात के बाद उठाया है। यह घोषणा नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से लगभग एक महीने पहले की गई। इस तकनीक पर ज्यादातर कोई सख्त नियम-कानून न होने के कारण ट्रंप पर कारोबारी और राजनीतिक नेताओं का दबाव बढ़ता जा रहा है। वे इस बारे में लगातार चेतावनी भी दे रहे हैं।

 

यह नाम ट्रंप के सितंबर के उस कार्यकारी आदेश की याद दिलाता है, जिसमें उन्होंने ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (एआई) का नाम बदलकर ‘सुपर इंटेलिजेंस’ (एसआई) कर दिया था। राष्ट्रीय सुरक्षा निदेशक और राष्ट्रपति के नवनियुक्त एआई सलाहकार जे क्लेटन को इस टास्क फोर्स की कमान सौंपी गई है।

 

ट्रंप ने कहा कि यह टास्क फोर्स सरकार की कोशिशों के साथ तालमेल बिठाएगी, “ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अमेरिका ‘सुपर इंटेलिजेंस’ के क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व करना जारी रखे।” साथ ही, यह “सभी अमेरिकियों के हितों की रक्षा करेगी और उनके जीवन को बेहतर बनाएगी।”

 

ट्रंप ने साफ कर दिया है कि वह ऐसे नियम नहीं चाहते, जो सुपर इंटेलिजेंस (एसआई) उद्योग की प्रगति को रोकें। इस समूह के कथित चार्टर में कहा गया है कि यह “अत्यधिक नियम-कानूनों और रेगुलेटरी कैप्चर” को रोकने के लिए काम करेगा। ALSO READ: पुतिन और ट्रंप की डीजल डील क्या है?

 

सुपर इंटेलिजेंस फोर्स क्या करेगी?

व्हाइट हाउस ने सुपर इंटेलिजेंस फोर्स के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है, लेकिन इस समूह की जिम्मेदारियों का विवरण देने वाले चार्टर की एक प्रति ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ और ‘पॉलिटिको’ में प्रकाशित हुई है।

 

इस दस्तावेज से पता चलता है कि टास्क फोर्स को कई तरह के काम करने हैं। इसमें जैव सुरक्षा और जल आपूर्ति के लिए खतरों को खास तौर पर ध्यान देने वाले क्षेत्रों में शामिल किया गया है। हाल के साइबर हमलों में अमेरिका में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया है।

 

यह समूह अमेरिका की कुछ सबसे अहम सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर काम करेगा। इनमें पेंटागन, न्याय विभाग, गृह सुरक्षा विभाग और संघीय व्यापार आयोग (एफटीसी) शामिल हैं। इसका उद्देश्य ऐसे नए कानूनों के लिए सुझाव तैयार करना है, जिनसे सरकार की प्रतिक्रिया और कार्रवाई को बेहतर बनाया जा सके।

 

इसमें इस बात पर विचार किया जाएगा कि एआई लैब के लिए यह कानूनी रूप से अनिवार्य कर दिया जाए कि वे किसी भी तरह के ‘ब्रीच (सुरक्षा उल्लंघन), हैक या जेलब्रेक’ की जानकारी सरकार को दें। इसके अलावा, अपने आप अलर्ट जारी करने की व्यवस्था (ऑटोमैटिक अलर्ट) पर भी विचार किया जा सकता है।

 

रिपोर्ट किए गए दस्तावेज में कहा गया है, “हालांकि, एआई लैब अपने मॉडल के कारण बढ़ने वाले जोखिमों और मिलने वाले अवसरों के लिए आखिरकार खुद जिम्मेदार हैं, लेकिन इस बदलाव के दौर को पहचानना और समझना संघीय सरकार की जिम्मेदारी है। सरकार का काम देश के कानूनों को लागू करना भी है, ताकि हमारे गणतंत्र के बुनियादी सिद्धांतों की रक्षा हो सके और उन्हें आगे बढ़ाया जा सके।”

 

इस चार्टर के तहत वित्तीय सेवाओं, ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचे, परिवहन, कृषि और आपातकालीन सेवाओं जैसे क्षेत्रों को शामिल किया गया है। ट्रंप ने कहा कि यह टास्क फोर्स आम लोगों, जनहित समूहों और धार्मिक संगठनों के साथ-साथ महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा मुहैया कराने वाली संस्थाओं और एआई कंपनियों के साथ सरकार के संपर्क और सहयोग में तालमेल बिठाएगी। हालांकि, कुछ आलोचकों ने इस बात पर ध्यान दिलाया कि इसमें कामगारों का कोई जिक्र नहीं है।

 

इस टास्क फोर्स को एआई से जुड़े खतरों पर रिपोर्ट सौंपने के लिए 120 दिन का समय दिया गया है। रिपोर्ट में नागरिक स्वतंत्रता के लिए संभावित खतरे, साइबर सुरक्षा, उन्नत एआई मॉडल के मानक और जरूरत से ज्यादा नियम बनाने के संभावित असर पर खास ध्यान दिया जाएगा।

 

सुपर इंटेलिजेंस फोर्स में कौन-कौन शामिल है?

अक्टूबर की शुरुआत में ट्रंप ने क्लेटन को एआई सलाहकार नियुक्त किया था। अब वह इस टास्क फोर्स की अध्यक्षता करेंगे। उन्होंने ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ से कहा कि उन्हें उम्मीद है कि एआई सिस्टम “बातचीत के जरिए विकसित” किए जाएंगे। उन्होंने इसके लिए ‘सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन’ (एसईसी) और ‘फेडरल रिजर्व’ की ओर से वित्तीय उद्योग के लिए बनाए गए रिस्क मॉडल का उदाहरण दिया। बता दें कि ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान क्लेटन एसईसी के प्रमुख थे।

 

सामने आए चार्टर में टास्क फोर्स के तीन उपाध्यक्षों के नाम भी दिए गए हैं:

  • एंड्रयू फर्ग्यूसन, एफटीसी के चेयरमैन
  • एमिल माइकल, रक्षा विभाग में रिसर्च और इंजीनियरिंग के अंडरसेक्रेटरी
  • स्कॉट कुपोर, ऑफिस ऑफ पर्सनल मैनेजमेंट के डायरेक्टर

रिपोर्ट किए गए चार्टर के मुताबिक, फर्ग्यूसन को उपभोक्ताओं के हितों और उनके अधिकारों के लिए काम करने वाले समूहों की जिम्मेदारी दी गई है। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब एफटीसी, ओपनएआई, एंथ्रोपिक और एमईटीआर की जांच कर रहा है। ये ऐसे एआई एजेंटों से जुड़े मामले को लेकर जांच के दायरे में हैं जो नियंत्रण से बाहर होकर नुकसान पहुंचाने वाले काम कर सकते हैं।

 

माइकल पहले टेक्नोलॉजी सलाहकार के रूप में काम कर चुके हैं और ‘परप्लेक्सिटी एआई’ के सलाहकार बोर्ड में भी रह चुके हैं। अब वह एआई कंपनियों के साथ संपर्क और तालमेल का काम संभालेंगे। कुपोर महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे से जुड़ी संस्थाओं और उद्योग के दूसरे संबंधित लोगों के साथ तालमेल बनाएंगे।

 

ट्रंप के मंत्रिमंडल के कई अहम सदस्य भी इस टास्क फोर्स में शामिल हैं। इनमें उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ शामिल हैं। चार्टर में ट्रंप के पूर्व एआई सलाहकार डेविड सैक्स और पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के कार्यकाल में विदेश मंत्री रहीं कोंडोलीजा राइस के नाम भी बाहरी सदस्यों के रूप में दर्ज हैं।

 

टास्क फोर्स को अपनी रिपोर्ट और सुझाव राष्ट्रपति ट्रंप और व्हाइट हाउस की चीफ ऑफ स्टाफ सूसी वाइल्स को सौंपने हैं।

 

टास्क फोर्स पर प्रतिक्रिया

पॉलिटिको के मुताबिक, ट्रंप की घोषणा से पहले कई प्रमुख रिपब्लिकन नेताओं को सुपर इंटेलिजेंस फोर्स की योजना के बारे में जानकारी नहीं दी गई थी। यह टास्क फोर्स ऐसे समय में बनाई गई है, जब रिपब्लिकन पार्टी के वरिष्ठ सीनेटर एआई से होने वाले खतरों को कम करने के उद्देश्य से एक बड़ा कानून लाने की तैयारी कर रहे हैं।

 

डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने राष्ट्रपति ट्रंप की आलोचना की है। हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (प्रतिनिधि सभा) की सदस्य लोरी ट्रेहन ने सीएनएन से कहा कि ट्रंप “सिर्फ एक एआई फोर्स बनाने की बात कर रहे हैं, लेकिन उनके पास यह बताने के लिए कोई ठोस योजना नहीं है कि इसे कांग्रेस की मंजूरी के जरिए कैसे लागू किया जाएगा।” उन्हें यह पहल समस्या के समाधान के बजाय उसे टालने की कोशिश ज्यादा लगी।

 

ट्रेहन ने कहा, “हमें अत्याधुनिक एआई पर काम करने वाली कंपनियों के लिए कानून बनाने और सुरक्षा उपाय तय करने चाहिए। लेकिन इस योजना में ऐसा कुछ भी नहीं है।”

 

डेमोक्रेटिक पार्टी के एक अन्य प्रतिनिधि जोश गॉटहाइमर ने भी पॉलिटिको से कहा कि उन्हें ट्रंप की मंशा पर संदेह है। बतौर गॉटहाइमर, “अगर राष्ट्रपति को अब एहसास हो रहा है कि एआई से जुड़े खतरे कोई मनगढ़ंत बातें नहीं हैं और वह अमेरिका की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठा रहे हैं, तो यह अच्छी बात है। लेकिन अगर यह सिर्फ अपनी छवि चमकाने और अपने परिवार के निवेश को बचाने की कोशिश है, तो मुझे इससे गंभीर आपत्ति है।”

दिल्ली में तिरंगा मार्च से पहले CJP संस्थापक अभिजीत दिपके हिरासत में, नेहा बोरा ने सरकार पर उठाए सवाल

Abhijeet Dipke: दिल्ली में तिरंगा फहराने को लेकर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके को हिरासत में लिया गया था। अब उन्हें एहतियातन हिरासत में रखा गया है। पार्टी ने कनॉट प्लेस में ‘लहरा दो तिरंगा’ नाम से प्रदर्शन करने की योजना बनाई थी।

वहीं, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की प्रमुख नेहा बोरा को रविवार को रिहा कर दिया गया। दिल्ली पुलिस एक्ट की धारा 65 के तहत जरूरी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उन्हें छोड़ा गया।

पुलिस के अनुसार, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत दिपके के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है। उन्हें आज, 17 अक्टूबर को एक विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) के सामने पेश किया जाएगा।

पुलिस ने बताया कि CJP के संस्थापक को दो नोटिस भेजे गए थे, जिनमें उन्हें प्रस्तावित आंदोलन के लिए कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में न जाने का निर्देश दिया गया था, लेकिन कथित तौर पर उन्होंने इन निर्देशों का पालन नहीं किया।

पुलिस के मुताबिक, उन्होंने 50,000 रुपये का एक बॉन्ड भी भरा था और उन्हें एक साल तक सार्वजनिक शांति भंग न करने का निर्देश दिया गया था।

‘कानून-व्यवस्था की हर तरह से धज्जियां उड़ाई जा रही हैं’

अपनी रिहाई के बाद ANI से बात करते हुए, AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा।

बोरा ने सवाल किया, “कानून-व्यवस्था की हर तरह से धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। आम नागरिकों के साथ ऐसा बर्ताव किया जाता है जैसे वे कोई खूंखार अपराधी हों; हमारे देश में लंबे समय से यही चलन चला आ रहा है। मौजूदा आंदोलन ने साफ कर दिया है कि लोगों को किस तरह हिरासत में लिया जा रहा है—चाहे दिन हो या शाम, उन्हें पूरी रात हिरासत में रखा जाता है और अगले दिन सुबह या शाम को ही छोड़ा जाता है। आखिर किस अधिकार के तहत इसे सही ठहराया जा सकता है? किस कानून या आदेश के तहत हिरासत में लिए गए लोगों को पूरी रात कैद में रखना जायज है?”

उन्होंने विवादित ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) प्रक्रिया को लेकर, मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग चलाने की CJP की मांग को फिर से दोहराया।

बोरा ने कहा, “कानूनी तौर पर, लोगों को-खासकर महिलाओं को सूर्यास्त के बाद रिहा कर दिया जाना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। इसके अलावा, एक नया नैरेटिव (विमर्श) फैलाया जा रहा है-अराजकता और अव्यवस्था का। कैसी अराजकता और अव्यवस्था? वैसी ही, जैसी आपने सेंट्रल दिल्ली में फैलाई थी? दिल्ली के लोग चैन की सांस भी नहीं ले पा रहे हैं; वे काम पर जाने के लिए जो भी रास्ता चुनते हैं, वह बंद मिलता है। आप पूरे देश में अराजकता और अव्यवस्था फैला रहे हैं। कृपया, भारत के लोगों को बख्श दें। ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग (impeachment) चलाएं और SIR को रोकें, ताकि इस देश के आम नागरिक चैन की सांस ले सकें, सुकून महसूस कर सकें और उनके मतदान के अधिकार सुरक्षित रह सकें।”

बोरा ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस उन्हें अपने वकीलों से बात नहीं करने दे रही थी।

उन्होंने कहा, “उन्होंने (पुलिस ने) मेरा नाम, पता और अन्य विवरण मांगे। काफी देर तक, उन्होंने मुझे किसी कानूनी सलाहकार (वकील) से बात करने या सलाह लेने भी नहीं दिया। हमारे वकील 5-6 घंटे तक मुझसे संपर्क करने की कोशिश करते रहे; जब हमने किसी तरह उन्हें फोन किया, तब जाकर उन्हें मुझसे मिलने की अनुमति मिली। ये लोग लंबे समय से इसी तरह की हरकतें करते आ रहे हैं।”

CJP ने दिपके के ठिकाने के बारे में जानकारी मांगी

CJP ने आरोप लगाया है कि दिपके को किसी अज्ञात जगह पर ले जाया गया है और उनके वकीलों को उनसे बात नहीं करने दी जा रही है।

X पर एक पोस्ट में, CJP ने लिखा, “अभिजीत दिपके को दिल्ली पुलिस ने अगवा कर लिया है। उन्हें उठाए हुए 10 घंटे से ज्यादा हो चुके हैं, लेकिन अभी तक उनके माता-पिता, वकीलों या CJP की टीम को उनके ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है।”

यह घटनाक्रम CJP के अन्य सदस्यों, जिनमें सौरव दास और आशुतोष रांका शामिल हैं, को हिरासत में लिए जाने के बाद हुआ है। इन दोनों नेताओं को जंतर-मंतर में घुसने के आरोप में हिरासत में लिया गया था, जिसे अब विरोध-प्रदर्शन की जगह के रूप में मान्यता नहीं दी गई है।

बता दें कि CJP, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को वापस लेने और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध-प्रदर्शन कर रही है।

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Gold Price Today: सोना हुआ और सस्ता, नवरात्रि के 7वें दिन नीचे आया भाव; 10 बड़े शहरों में इतना है रेट

देश में सोने की कीमत और नीचे आ गई है। 17 अक्टूबर की सुबह राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 147580 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है। मुंबई में भाव 147430 रुपये प्रति 10 ग्राम है। हाजिर बाजार में इस सप्ताह सोने की कीमतों में 4,500 रुपये या 3 प्रतिशत की गिरावट आई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 4,165.12 डॉलर प्रति औंस पर है। इस सप्ताह सोने का वैश्विक भाव ​0.7 प्रतिशत कमजोर हुआ। सोने और चांदी की देश के अंदर कीमतें डोमेस्टिक फैक्टर्स के साथ-साथ ग्लोबल फैक्टर्स से भी प्रभावित होती हैं।

देश के कुछ बड़े शहरों में गोल्ड रेट

दिल्ली में सोने की कीमत: दिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 147580 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 135290 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

मुंबई और कोलकाता: मुंबई और कोलकाता में 22 कैरेट सोने की कीमत 135140 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 147430 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

चेन्नई में सोने की कीमत: 24 कैरेट सोने की कीमत 147430 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 135140 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

पुणे और बेंगलुरु में कीमत: इन दोनों शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 147430 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 135140 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

शहर22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)
दिल्ली135290147580
मुंबई135140147430
अहमदाबाद135190147480
चेन्नई135140147430
कोलकाता135140147430
हैदराबाद135140147430
जयपुर135290147580
भोपाल135190147480
लखनऊ135290147580
चंडीगढ़135290147580

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चांदी की कीमत

दूसरी कीमती धातु चांदी में भी गिरावट कायम है। 17 अक्टूबर की सुबह चांदी 229900 रुपये प्रति किलोग्राम पर है। हाजिर बाजार में इस सप्ताह चांदी के दाम में 13,500 रुपये या 6 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी यानि कि स्पॉट सिल्वर की कीमत 57.05 डॉलर प्रति औंस है।

सोने का आयात लगातार दूसरे महीने घटा

भारत में सोने के आयात में लगातार दूसरे महीने गिरावट दर्ज की गई है। सितंबर में सोने का आयात 81.27 प्रतिशत घटकर 1.8 अरब डॉलर का रह गया। कीमती धातुओं पर सीमा शुल्क में भारी बढ़ोतरी के कारण आयात में यह गिरावट आई। चांदी का आयात भी सितंबर में लगातार दूसरे महीने घटा। यह 49.11 प्रतिशत गिरकर 66.50 करोड़ डॉलर का रह गया। सरकार ने 13 मई 2026 से सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं पर आयात शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है। अप्रैल-सितंबर 2026 की अवधि के दौरान सोने का आयात 27.32 प्रतिशत घटकर 19.27 अरब डॉलर रह गया। वहीं, चांदी का आयात 25.17 प्रतिशत गिरकर 2.4 अरब डॉलर का रह गया।

LIVE: दिल्ली पुलिस ने नेहा बोरा को रिहा किया, दिपके की अदालत में पेशी होगी

LIVE: दिल्ली पुलिस ने नेहा बोरा को रिहा किया, दिपके की अदालत में पेशी होगी

neha bora

Latest News Today Live Updates in Hindi : दिल्ली पुलिस ने तिरंगा मार्च के दौरान हिरासत में ली गई नेहा बोरा को रिहा किया। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके को आज अदालत में पेश किया जाएगा। पल पल की जानकारी…

-दिल्ली पुलिस ने ‘दिल्ली पुलिस अधिनियम’ की धारा 65 के तहत औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को हिरासत से रिहा कर दिया है। उन्हें 16 अक्टूबर की शाम को एहतियाती धाराओं के तहत हिरासत में लिया गया था।

-अभिजीत दिपके के खिलाफ BNSS की धारा 126/170 के तहत कार्रवाई शुरू की गई है। उन्हें SEM कोर्ट के सामने पेश किया जाएगा।

-16 अक्टूबर की शाम को AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा और एक्टिविस्ट अभिजीत दिपके को एहतियाती धाराओं के तहत हिरासत में लिया गया था।

अमित शाह का इतना भरोसा!

अमित शाह ने इस सप्ताह खम ठोंक कर कहा कि विपक्ष कुछ कर लें 2029 में मोदी जीतेंगे। कांग्रेस की लगातार चौथी हार होगी। सवाल है यह शाह की गणित है या अहंकार? आखिर 2029 के चुनाव में अभी ढाई वर्ष से अधिक का समय है। तब तक देश की आर्थिकी का कैसा कबाड़ा होगा? 35 वर्ष की उम्र से कम नौजवानों की उम्मीदों और बेकारी का गुस्सा किस करवट बैठेगा? नैरेटिव कैसा चलेगा? ट्रंप, शी जिनपिंग, मुनीर जैसी विदेशी ताकतें भारत का कितना टेंटुआ दबा चुकी होंगी? इसलिए कि घर के अंदर हो या घर के बाहर कोई ऐसा है नहीं, जिसे मोदी सरकार ने ठगा नहीं! बावजूद इसके अमित शाह के लिए 2029 का चुनाव चुटकी बजा कर जीतना वैसा ही है जैसे महाराष्ट्र, बिहार, बंगाल जीता और आने वाले महीनों में जीतेंगे। मानों चुनाव होना महज औपचारिकता हो। नतीजा उन्होंने पहले से लिखाया हुआ हो। 13 अक्टूबर का उनका वाक्य था, ‘2029 के चुनाव में भी कांग्रेस बुरी तरह से हारेगी’।

यों राजनीति में नेता की मजबूरी होती है कि वह आत्मविश्वास दिखाए। पर अमित शाह का हुंकारा उस समय और परिस्थितियों में है, जिसमें अब गारंटीशुदा माना जा रहा है कि मतदाता सूचियों में वोटरों के नाम कटवा कर, हटवा कर भाजपा पश्चिम बंगाल में चुनाव जीती है। 2024 के लोकसभा चुनाव में मतदाताओं के मोदी से मोहभंग को मोदी सरकार-चुनाव आयोग की मशीनरी ने वोट सूचियों में हेराफेरी से पलटा है। देश अब करोड़ों नामों (15 करोड़ मतदाताओं के अनुमान!) के कटने, नए नाम जुड़वाने की शर्तों, माता-पिता के दस्तावेजों, प्रवासी मजदूरों और पहली बार वोट देने वाले नौजवानों की पात्रता पर तलवार लटकी देख रहा है। चुनाव आयोग अराजक सूचियां बना रहा है!

सोचें, इसके पीछे की राजनीति पर। जरा सोचें। चुनाव में जनता किसे वोट देगी, उससे पहले यह तय होता है कि वोट देने वालों की सूची में कौन होगा? फिर यह कि किस इलाके के वोट किस लोकसभा क्षेत्र में (आगे की सीट परिसीमन योजना) गिने जाएंगे! फिर इरादा महिला आरक्षण लागू कराने का है। मतलब किस सीट पर किस तरह का उम्मीदवार खड़ा करने में मोदी-शाह का अपर हैंड। मुझे लग रहा है कि तीनों बातें चुनाव से पहले तय होंगी। तीनों के नियम, प्रक्रियाएं और प्रशासनिक फैसले (याकि सरकार) हैं। अब यदि इसी गेमप्लान में मोदी-शाह अपने चक्रवर्ती राजनीतिक भविष्य की गारंटी मान काम करें, सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग आदि सभी रास्ता बनवाएं तो सड़क पर राहुल गांधी या जेनरेशन ज़ेड कितना ही आंदोलन करें, हल्ला मचाएं पर 2029 के नतीजे मोदी के लिए पश्चिम बंगाल जैसे होंगे।

असली सवाल बूथ का है। मोदी की कमान में भाजपा ने बूथवार मतदाताओं का राजनीतिक हिसाब रखने के पेशेवरों (सर्वेयर, पन्ना प्रमुखों आदि) की फौज बनाई हुई है। इनके पास मतदाताओं की केवल जानकारी ही नहीं है, बल्कि मतदाता सूचियों में मनमाफिक छंटनी की सामर्थ्य भी है। फॉर्म-7 सबमिट करो और नाम कटाओ। फिलहाल इतना तो प्रमाणित है कि एसआईआर के बहाने बड़ी संख्या में मौजूद मतदाताओं के नाम हटे हैं। और नए नौजवानों के वोटर पंजीकरण की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल हैं। नौजवान पहले यों भी कम वोटर बनते थे लेकिन अब तो उनके आगे पंजीकरण में अतिरिक्त दस्तावेजी शर्तों को ऐसा बनाया है कि यूथ भले बेरोजगार भटकता रहे, सड़क पर आंदोलन करे लेकिन वोटर बनने के महत्त्व के प्रति लापरवाह बना रहेगा। जैसे नौकरी के आवेदनों से निराशा है वैसे ही वोटर बनने की भागदौड़ से बेरुखी रही तो 2029 में मोदी 2014 से भी बड़े बहुमत से जीतेंगे।

यही अमित शाह के आत्मविश्वास का बीजमंत्र है। सो, जेनरेशन ज़ेड का सड़क पर गुस्सा एक बात है और मतदाता सूची में उनका नाम होना दूसरी। फिर मतदान केंद्र पहुंचकर वोट डालना तीसरी। यदि पहली बार वोट देने वाले लाखों पात्र नौजवानों के पंजीकरण में बाधाएं हों तो उनकी राजनीतिक सक्रियता और चुनावी भागीदारी के बीच फासला अपने आप होगा।

अमित शाह ने कांग्रेस को याद दिलाया कि वह एसआईआर से पहले भी चुनाव हारती रही है। सही है। लेकिन इससे एसआईआर के सवाल का जवाब कैसे है? कांग्रेस 2014 और 2019 में हारी, 2024 में भी सरकार नहीं बना सकी। मगर 2024 में भाजपा की अपनी सीटें 303 से घटकर 240 हुई थीं। कांग्रेस 52 से 99 पर पहुंची थी। तब क्या उस चुनाव का सबक केवल कांग्रेस की हार था? या यह भी था कि पूर्ण बहुमत वाली भाजपा को गठबंधन के सहारे सरकार बनानी पड़ी? भाजपा के जीत के लाले पड़े तो एसआईआर को सुनियोजित नए फॉर्म, नई प्रक्रियाओं याकि झंझटों से भरपूर बनाने की धांधलेबाजी हुई।