UP Elections 2027 Bulletproof Jacket Security: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले नेताओं की सुरक्षा को लेकर अब तक का सबसे बड़ा और अभूतपूर्व कदम उठाया है। गृह मंत्रालय की सलाह पर यूपी के सुरक्षा मुख्यालय ने राज्य के 52 प्रमुख नेताओं को करीब 1.5 लाख रुपए की कीमत वाली हाई-टेक बुलेटप्रूफ जैकेट मुहैया कराई हैं।
प्रदेश के इतिहास में यह पहला मौका है जब अलग-अलग सुरक्षा श्रेणी (Y से Z+ तक) वाले नेताओं को सुरक्षा घेरे के साथ बुलेटप्रूफ जैकेट भी दी गई है। बताया जा रहा है कि सुरक्षा अलर्ट के चलते राज्य सरकार ने यह कदम उठाया है।
फैसले से जुड़ी मुख्य बातें
दो चरणों में वितरण : सुरक्षा मुख्यालय ने पहले चरण में 8 और दूसरे चरण में 44 नेताओं को जैकेट सौंपी, जिससे कुल संख्या 52 हो गई है।
विपक्ष और सहयोगियों पर भी भरोसा : सुरक्षा केवल सत्ता पक्ष तक सीमित नहीं है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती के साथ-साथ भाजपा व उसके सहयोगी दलों के नेताओं को भी यह कवर मिला है।
इन नेताओं को मिली बुलेटप्रूफ जैकेट
अखिलेश यादव और मायावती के अलावा कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी', संजय निषाद, ओपी राजभर, रामपुर से विधायक आकाश सक्सेना, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव, संगीत सोम और सुरेश राणा जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इस सुरक्षा व्यवस्था में योगी सरकार के 11 कैबिनेट मंत्रियों को भी शामिल किया गया है।
गौरतलब है कि वर्तमान में UP के लगभग 98 नेताओं को विभिन्न श्रेणियों की सुरक्षा (Y, X, Z, Z+) प्राप्त है, जिसमें अब इस जैकेट को अनिवार्य सुरक्षा उपकरण के रूप में जोड़ा गया है।
यूपी विधानसभा चुनाव कब होंगे?
उत्तर प्रदेश की 18वीं विधानसभा का कार्यकाल मई 2027 में समाप्त हो रहा है। नियमानुसार, अगले यानी 19वीं विधानसभा के चुनाव फरवरी- मार्च 2027 के दौरान आयोजित होने प्रस्तावित हैं। चुनाव की घोषणा जनवरी 2027 की शुरुआत में हो सकती है। यूपी में कुल 403 विधानसभा सीटें हैं।
वर्तमान में सत्तारूढ़ भाजपा के पास 257 सीटें हैं, जबकि उसके सहयोगी दलों- अपना दल (सोनेलाल) 13, राष्ट्रीय लोक दल (RLD) 9, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) 6, निषाद पार्टी के पास 5 सीटें हैं। दूसरी ओर मुख्य विपक्षी पार्टी समाजवादी पार्टी के पास वर्तमान में 100 सीटें हैं, जबकि कांग्रेस के पास 2 सीटें हैं। शेष सीटें निर्दलीय और अन्य दलों के पास हैं।
Awarapan 2 Box Office Collection Day 8: इमरान हाशमी की फिल्म ‘आवारापन 2’ बॉक्स ऑफिस पर अपने दूसरे हफ़्ते में भी अच्छी रफ़्तार से आगे बढ़ रही है। 14 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हुई यह रोमांटिक-एक्शन ड्रामा फिल्म, शानदार ओपनिंग के बाद भी दर्शकों को अपनी ओर खींच रही है।
इंडस्ट्री ट्रैकर Sacnilk के अनुसार, ‘आवारापन 2’ ने भारत में आठवें दिन 5.50 करोड़ रुपये (नेट) की कमाई की। इसके साथ ही, फिल्म का घरेलू नेट कलेक्शन 119 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। भारत में इसका ग्रॉस कलेक्शन अभी 141.87 करोड़ रुपये है।
फ़िल्म विदेशों में भी अच्छा प्रदर्शन कर रही है। आठवें दिन, ‘आवारापन 2’ ने विदेशी बाजार में 1 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन किया, जिससे इसका इंटरनेशनल कलेक्शन 27.30 करोड़ रुपये हो गया। फ़िल्म का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन अब 169.17 करोड़ रुपये है, जो इसे 170 करोड़ रुपये के आंकड़े के करीब ले आया है।
आठवें दिन ‘आवारापन 2’ की भारत में कुल ऑक्यूपेंसी 15.19 प्रतिशत रही और फिल्म के 9,858 शो दिखाए गए। ये आंकड़े बताते हैं कि दूसरे हफ़्ते में भी फ़िल्म की पकड़ मज़बूत बनी हुई है।
फिल्म ने पहले दिन ₹22 करोड़ की कमाई के साथ शुरुआत की और वीकेंड पर इसकी कमाई में उछाल आया। इसने दूसरे दिन ₹33.75 करोड़ और तीसरे दिन ₹26 करोड़ कमाए। इसके बाद चौथे दिन कमाई घटकर ₹9.25 करोड़ हो गई, फिर पांचवें दिन ₹9.75 करोड़, छठे दिन ₹6.75 करोड़ और सातवें दिन ₹6 करोड़ रही। आठवें दिन फिल्म ने ₹5.50 करोड़ और कमाए, जिससे पहले आठ दिनों में इसकी कुल भारत नेट कमाई ₹119 करोड़ हो गई।
नितिन कक्कड़ द्वारा निर्देशित, ‘आवारापन 2’ साल 2007 की फिल्म ‘आवारापन’ का सीक्वल है। फिल्म में इमरान हाशमी, दिशा पाटनी, पूरन गब्बी, अनिरुद्ध रावल, शबाना आज़मी, सुविंदर विक्की, विजयंत कोहली और अतुल कुमार मुख्य भूमिकाओं में हैं। विशेष फिल्म्स बैनर के तहत विशेष भट्ट और मुकेश भट्ट द्वारा प्रोड्यूस की गई यह फिल्म शिवम पंडित की कहानी है, जो प्यार, त्याग और प्रायश्चित से जूझते हुए अपराध की दुनिया में वापस खिंचा चला आता है।
पाकिस्तान ने PoK में हो रहे प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार और रिसर्चर दानिश इरशाद का नाम आतंकवाद से जुड़ी निगरानी सूची यानी फोर्थ शेड्यूल में डाल दिया है। खास बात यह है कि सरकार ने उनके खिलाफ न तो किसी आतंकी गतिविधि का आरोप बताया है और न ही किसी अदालत का फैसला सामने आया है। दानिश इरशाद पिछले करीब 10 साल से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान की राजनीति और वहां के हालात पर रिपोर्टिंग कर रहे हैं। हाल के महीनों में उन्होंने PoK में सुरक्षा बलों की कार्रवाई से प्रभावित लोगों और उनके परिवारों की लगातार रिपोर्टिंग की थी। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर दानिश इरशाद ने ऐसा क्या किया, जिसके आधार पर उनका नाम फोर्थ शेड्यूल में डाला गया? उपलब्ध सरकारी आदेश में इसका कोई साफ जवाब नहीं मिलता। 10 साल से पत्रकारिता कर रहे दानिश इरशाद दानिश इरशाद रावलपिंडी के रहने वाले हैं। उन्होंने 2015 में इस्लामाबाद से पत्रकारिता शुरू की थी। वे लाहौर स्थित नियो न्यूज के साथ काम करते हैं और जम्मू से प्रकाशित कश्मीर टाइम्स में कॉलम भी लिखते हैं। वे 1947 के बाद जम्मू-कश्मीर के इतिहास पर एक किताब भी लिख चुके हैं। कश्मीर टाइम्स के मुताबिक, PoK के 24 वॉन्टेड लोगों की सूची में इरशाद का नाम 12वें नंबर पर है। इसी आदेश में JAAC से जुड़े कार्यकर्ताओं का भी जिक्र है। पाकिस्तान सरकार ने जून में JAAC पर प्रतिबंध लगा दिया था। इरशाद के मुताबिक, उन्हें न तो किसी मामले में अदालत में पेश किया गया और न ही किसी अपराध में दोषी ठहराया गया। सरकार ने भी उन्हें सीधे यह नहीं बताया कि उनका नाम सूची में क्यों डाला गया। उन्हें 18 अगस्त को सोशल मीडिया के जरिए इस कार्रवाई का पता चला। इसके बाद उन्होंने PoK के गृह विभाग के एक सूत्र से इसकी पुष्टि की। फोर्थ शेड्यूल क्या है? पाकिस्तान में फोर्थ शेड्यूल आतंकवाद से जुड़ी निगरानी सूची है। इसमें उन लोगों को रखा जा सकता है, जिन्हें सरकार आतंकवाद या प्रतिबंधित संगठनों से जुड़ा मानती है। इस सूची में नाम आने के बाद उस व्यक्ति पर कई तरह की पाबंदियां लग सकती हैं। यानी वह आसानी से विदेश नहीं जा सकता, उसके बैंक खाते या पैसों से जुड़े कामों में दिक्कत आ सकती है और उस पर सरकारी निगरानी भी बढ़ सकती है। इसलिए किसी पत्रकार का नाम इस सूची में आना काफी गंभीर कार्रवाई मानी जाती है। PoK में क्या चल रहा है? इरशाद के खिलाफ यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब PoK में लंबे समय से विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। इनका नेतृत्व JAAC कर रही है। प्रदर्शनकारी राजनीतिक प्रतिनिधित्व, सब्सिडी और शासन व्यवस्था से जुड़े कई मुद्दे उठा रहे हैं। उनकी मांगों में PoK विधानसभा में पाकिस्तान में बसे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों को खत्म करना भी शामिल है। पाकिस्तान सरकार ने 5 जून को JAAC पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव बढ़ गया। इस दौरान इंटरनेट बंद करने और मीडिया पर पाबंदियां लगाने जैसी कार्रवाई भी हुई। JAAC का दावा है कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 80 से ज्यादा नागरिक मारे गए हैं। इसी दौरान इरशाद ने प्रदर्शनों, सुरक्षा बलों की कार्रवाई और प्रभावित परिवारों की स्थिति को लगातार कवर किया। पाकिस्तानी पत्रकारों ने क्या कहा? दानिश इरशाद को फोर्थ शेड्यूल में डाले जाने की पाकिस्तान के कुछ पत्रकारों और कार्यकर्ताओं ने भी आलोचना की है। पाकिस्तानी पत्रकार सालेह सफीर अब्बासी ने इसे प्रेस की आजादी पर सीधा हमला बताया। उन्होंने कहा कि असहमति रखना अपराध नहीं, बल्कि एक अधिकार है। ब्रिटेन में रहने वाले पाकिस्तानी कार्यकर्ता अजहर अहमद ने भी इस कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि किसी पत्रकार के खिलाफ आतंकवाद रोधी कानून का इस्तेमाल बेहद चिंताजनक है। इससे उन पत्रकारों में डर पैदा हो सकता है, जो विरोध प्रदर्शनों, सरकारी कार्रवाई और मानवाधिकारों की स्थिति पर रिपोर्टिंग करते हैं। न्यूयॉर्क की पाकिस्तानी खोजी पत्रकार अरीबा फातिमा ने भी सवाल उठाया कि इरशाद के खिलाफ न कोई मुकदमा है और न अदालत का आदेश, फिर उन्हें आतंकवाद से जुड़ी निगरानी सूची में किस आधार पर डाला गया। ——————————- यह खबर भी पढ़ें… शांत रहने वाला PoK पाकिस्तान के लिए परेशानी कैसे बना:12 रिजर्व सीटें क्यों खत्म कराना चाहते हैं प्रदर्शनकारी, मांगें क्यों नहीं मान रही सरकार
PoK में महंगाई के खिलाफ शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब एक बड़े राजनीतिक आंदोलन में बदल चुका है। इसे कई वर्षों में पाकिस्तान सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
अगर आप एक ऐसा फोन खरीदने की सोच रहे हैं, जो प्रीमियम भी हो और आपके बजट में भी हो तो यह आर्टिकल आपको जरूर पढ़नी चाहिए। दरअसल, Amazon पर Samsung Galaxy S26 Ultra 5G (12GB RAM + 256GB स्टोरेज) को ऑफर के तहत 87,400 रुपये की प्रभावी कीमत में खरीदा जा सकता है। इसमें मौजूदा डिस्काउंट के साथ योग्य स्मार्टफोन एक्सचेंज और कैशबैक ऑफर का फायदा शामिल है। फिलहाल यह स्मार्टफोन Amazon पर 1,24,999 रुपये में लिस्टेड है, जबकि इसकी MRP 1,69,999 रुपये है।
₹87,400 की कीमत कैसे पाएं
Samsung Galaxy S26 Ultra 5G की कीमत 87,400 रुपये तक लाने के लिए आपको Amazon पर मिल रहे अलग-अलग ऑफर्स का फायदा एक साथ उठाना होगा।
अगर आपके पास अच्छी कंडीशन में Apple iPhone 16 (128GB) है, तो उसे एक्सचेंज करने पर 31,350 रुपये तक का एक्सचेंज वैल्यू मिल सकता है। इसके अलावा, एलिजिबल क्रेडिट कार्ड से पेमेंट करने पर 6,249 रुपये तक का Amazon Pay Balance कैशबैक भी मिल सकता है।
इन दोनों ऑफर्स का फायदा लेने के बाद Samsung Galaxy S26 Ultra 5G की प्रभावी कीमत 87,400 रुपये तक आ जाती है।
EMI और दूसरे ऑफर
ग्राहक एलिजिबल कार्ड पर 18 महीने के लिए ₹6,944 प्रति महीने से शुरू होने वाली ‘नो कॉस्ट EMI’ का विकल्प भी चुन सकते हैं। चुने गए बैंक और पेमेंट के तरीके के आधार पर पेमेंट से जुड़े अतिरिक्त ऑफर भी मिल सकते हैं।
Samsung Galaxy S26 Ultra के फीचर्स
Samsung Galaxy S26 Ultra में 200MP का प्राइमरी कैमरा दिया गया है। फोन में Snapdragon 8 Elite Gen 5 प्रोसेसर, 5,000mAh की बैटरी, 12GB RAM और 256GB स्टोरेज मिलती है। इसके अलावा, फोन में Samsung के AI-powered फीचर्स भी दिए गए हैं। इनमें Photo Assist, Creative Studio और Built-in Privacy Display जैसे फीचर्स शामिल हैं।
ध्यान रखने वाली बातें
₹87,400 की कीमत एक ‘इफेक्टिव प्राइस’ (असरदार कीमत) है और यह ज्यादा से ज्यादा एक्सचेंज वैल्यू और कैशबैक ऑफर का फायदा उठाने के बाद ही मिलती है। एक्सचेंज की रकम पुराने डिवाइस की हालत और पिकअप के समय सफल वेरिफिकेशन पर निर्भर करती है, जबकि कैशबैक के लिए संबंधित कार्ड की शर्तें और नियम लागू होते हैं।
दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) मास्टर प्लान दिल्ली-2047 (MPD-2047) के तहत राजधानी के बाहरी इलाकों के विकास को लेकर बड़ा प्लान तैयार किया गया है। MPD-2047 के तहत दिल्ली के बाहरी इलाकों में करीब 200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को विकसित करने की योजना है। लैंड पूलिंग के जरिए यहां व्यवस्थित तरीके से विकास किया जाएगा। इस इलाके में करीब 600 किलोमीटर लंबी नई सड़कें बनाने की योजना है। 30 मीटर या उससे ज्यादा चौड़ी सड़कों को दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) विकसित करेगा। यह योजना विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है।
जानें इस विकास मॉडल के बारे में
अर्बन एक्सटेंशन रोड-2 (UER-II) के आसपास घने और मिश्रित तरीके से विकास को बढ़ावा देने की योजना है। यहां सस्ते घरों के साथ दुकानों, दफ्तरों, संस्थानों, लॉजिस्टिक्स और गोदामों जैसी सुविधाओं को विकसित किया जा सकेगा। MPD-2047 में अलग-अलग विकास मॉडल रखे गए हैं, जिससे जरूरत के अनुसार इलाकों को विकसित किया जा सकेगा।
MPD-2047 के जरिए होगा विकास
दिल्ली-2047 मास्टर प्लान के तहत राजधानी के बाहरी इलाकों में विकास को गति देने की तैयारी है। इसके लिए करीब 200 वर्ग किलोमीटर के अर्बन एक्सटेंशन क्षेत्र में लैंड पूलिंग व्यवस्था को मजबूत किया गया है। योजना का उद्देश्य इन क्षेत्रों में सड़क और दूसरी जरूरी सुविधाओं के साथ व्यवस्थित विकास करना है। इसके तहत करीब 600 किलोमीटर का नया सड़क नेटवर्क तैयार करने की योजना है, जिससे लैंड पूलिंग वाले इलाकों में बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकेगी। MPD-2047 में जमीन मालिकों की सुविधा के लिए अलग-अलग विकास मॉडल हैं। इससे जमीन के मालिक अपनी सुविधा के अनुसार योजना में शामिल हो सकेंगे और इलाकों में जरूरी सुविधाएं समय पर तैयार करने में मदद मिलेगी। वहीं, DDA सड़क, परिवहन और अन्य जरूरी सुविधाएं विकसित करेगा।
बेहतर आवास के साथ मिलेगी अच्छी सुविधा
MPD-2047 में शहर के विकास को पहले से ज्यादा व्यवस्थित और सुविधाओं पर आधारित बनाने पर जोर दिया गया है। 30 मीटर या उससे ज्यादा चौड़ी सड़कों को DDA की ओर से विकसित किया जाएगा। नए शहरी क्षेत्रों में सिर्फ घर ही नहीं बनाए जाएंगे, बल्कि स्कूल, अस्पताल, पार्क, हरित क्षेत्र, बाजार और दूसरी जरूरी सार्वजनिक सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। इसका उद्देश्य लोगों को बेहतर आवास के साथ अच्छी और सुविधाजनक जीवनशैली देना है।
20 हेक्टेयर जमीन की जरूरत
दिल्ली के बाहरी इलाकों में निजी जमीन को योजनाबद्ध तरीके से विकसित करने के लिए 2018 में लैंड पूलिंग पॉलिसी शुरू की गई थी। इसमें जमीन मालिक अपनी इच्छा से योजना में शामिल हो सकते हैं और DDA की भूमिका एक मददगार संस्था के तौर पर रहती है। अब MPD-2047 के तहत इस व्यवस्था को और आसान बनाने की तैयारी है। जमीन मालिक कंसोर्टियम के जरिए जमीन को एक साथ लाकर विकास कर सकते हैं। इसके अलावा टाउन प्लानिंग जैसे विकल्प भी दिए गए हैं, जिसमें कम से कम 20 हेक्टेयर जमीन की जरूरत होगी।
नए इलाकों में घरों को किया जाएगा विकसित
MPD-2047 के तहत नए इलाकों में घरों के साथ लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने वाली सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। सड़क की चौड़ाई के अनुसार रिहायशी क्षेत्रों में दुकान, छोटे कारोबार और दूसरी सेवाओं की अनुमति दी जा सकेगी। वहीं, UER-II के आसपास सस्ते घरों के साथ बाजार, संस्थान, लॉजिस्टिक्स और गोदाम बनाने की योजना है। इससे इन क्षेत्रों में रोजगार और कारोबार के नए अवसर मिलने की उम्मीद है।
जुलाई 2026 तक मिले इतने आवेदन
लैंड पूलिंग पॉलिसी को तेजी से लागू करने के लिए दिल्ली डेवलपमेंट एक्ट, 1957 में जरूरी बदलाव किए जाएंगे। यह योजना छह प्लानिंग जोन K-I, L, N, P-II, P-I का हिस्सा और J के 105 गांवों में लागू है, जिन्हें 138 सेक्टर में बांटा गया है। जुलाई 2026 तक इस योजना के तहत 7,615 से ज्यादा आवेदन मिल चुके थे और 7,885 हेक्टेयर से अधिक जमीन पूल की जा चुकी थी। 16 सेक्टर में तय लक्ष्य के 70 फीसदी से ज्यादा जमीन इकट्ठा हो चुकी है, जिसके बाद DDA ने वहां कंसोर्टियम बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
प्लानिंग जोन P-II का सेक्टर 8B लैंड पूलिंग योजना में आगे बढ़ने वाला पहला सेक्टर बन गया है। गाड़ी खसरो और इब्राहिम पुर गांवों में आने वाले इस सेक्टर में 70 फीसदी से ज्यादा जमीन एक साथ पूल हो चुकी है, इसलिए अब यहां विकास कार्य शुरू किए जा सकते हैं। इसके अलावा आठ अन्य सेक्टरों के जमीन मालिकों ने भी DDA को कंसोर्टियम बनाने की जानकारी दी है, जिससे योजना को जमीन पर लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
MPD-2047 के तहत लैंड पूलिंग के जरिए दिल्ली के बाहरी इलाकों को बेहतर तरीके से विकसित करने की योजना है। इन क्षेत्रों में सड़क और दूसरी जरूरी सुविधाओं के साथ घर, रोजगार के अवसर, सार्वजनिक सुविधाएं और हरित क्षेत्र भी तैयार किए जाएंगे।
सोचिए, आपने अपनी पसंद का पिज्जा ऑर्डर किया हो, उसकी पूरी कीमत चुकाई हो और डिलीवरी का इंतजार भी किया हो। लेकिन जब डिब्बा खुले तो सामने आया पिज्जा उम्मीद से काफी छोटा हो। उत्तराखंड के एक ग्राहक के साथ कुछ ऐसा ही हुआ, जब उसने 10 इंच का पिज्जा मंगाया, लेकिन उसे कथित तौर पर 7 इंच का पिज्जा मिला। आमतौर पर ऐसी स्थिति में लोग शिकायत करके या रिफंड मांगकर मामला खत्म कर देते हैं। लेकिन इस ग्राहक ने इसे सिर्फ छोटी सी गलती मानकर छोड़ने के बजाय अपनी शिकायत को आगे बढ़ाने का फैसला किया।
उसने पहले संबंधित प्लेटफॉर्म पर मामला उठाया और जब बात नहीं बनी तो उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। मामला वहां पहुंचने के बाद सिर्फ पिज्जा के साइज का विवाद नहीं रहा, बल्कि ग्राहक के अधिकार और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दी गई जानकारी के मुताबिक सामान मिलने की जिम्मेदारी का सवाल भी बन गया। अब इस मामले में आयोग का फैसला चर्चा में है।
रिफंड नहीं मिला तो बढ़ाया मामला
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्राहक ने ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म से दो पिज्जा ऑर्डर किए थे। इनकी कुल कीमत ₹505 थी और ऐप पर पिज्जा का साइज 10 इंच बताया गया था। डिलीवरी मिलने के बाद ग्राहक ने पिज्जा का साइज देखा तो उसे वह काफी छोटा लगा। उसका आरोप था कि पिज्जा सिर्फ 7 इंच का था। उसने तुरंत ऐप के ग्राहक सहायता केंद्र पर शिकायत की और रिफंड की मांग की। शिकायत के बावजूद जब मामला हल नहीं हुआ, तो उसने आगे शिकायत करने का फैसला किया।
हेल्पलाइन से लेकर उपभोक्ता आयोग तक पहुंचा
ग्राहक ने पहले राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद उसने सीपीजीआरएएमएस के जरिए भी शिकायत की और संबंधित पक्षों को कानूनी नोटिस भेजा।
जब इन कोशिशों के बाद भी रिफंड नहीं मिला, तो उसने हरिद्वार जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में मामला दर्ज करा दिया।
डिलीवरी प्लेटफॉर्म ने दी ये दलील
सुनवाई के दौरान ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनी ने कहा कि वह सिर्फ ग्राहक और रेस्टोरेंट के बीच एक माध्यम है। कंपनी के मुताबिक, पिज्जा बनाने, पैक करने और बेचने की जिम्मेदारी उसकी नहीं है।वहीं, संबंधित रेस्टोरेंट ने मामले में अपना जवाब दाखिल नहीं किया। इसके बाद आयोग ने उसके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की।
आयोग ने कंपनी की दलील नहीं मानी
आयोग ने शिकायतकर्ता और डिलीवरी प्लेटफॉर्म की ओर से पेश किए गए दस्तावेजों और हलफनामों की जांच की। इसमें पाया गया कि ग्राहक को मिला पिज्जा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बताए गए साइज से अलग था। आयोग ने यह भी माना कि शिकायत करने के बाद ग्राहक को रिफंड नहीं दिया गया। डिलीवरी प्लेटफॉर्म का यह कहना कि वह सिर्फ एक माध्यम है, आयोग को स्वीकार नहीं हुआ।
आयोग के अनुसार, ग्राहक का ऑर्डर स्वीकार करने, रेस्टोरेंट से तालमेल करने और उसे ग्राहक तक पहुंचाने में प्लेटफॉर्म की महत्वपूर्ण भूमिका थी। इसलिए वह पूरी सेवा प्रक्रिया का हिस्सा है।
3 इंच छोटे पिज्जा को माना सेवा में कमी
आयोग ने कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर जिस साइज का पिज्जा दिखाया गया था, ग्राहक को उसके मुताबिक पिज्जा नहीं मिला। 10 इंच की जगह 7 इंच का पिज्जा देना सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार माना गया। मामले की सुनवाई जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष गगन कुमार गुप्ता और सदस्य डॉ. अमरेश रावत व रंजना गोयल ने की।
₹505 के ऑर्डर पर मिलेंगे ₹10,520
ग्राहक ने पिज्जा के लिए ₹505 और ₹15 डिलीवरी शुल्क का भुगतान किया था। लेकिन आयोग के आदेश के बाद उसे सिर्फ पिज्जा की रकम वापस नहीं मिलेगी। आयोग ने फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म और रेस्टोरेंट को संयुक्त रूप से ₹10,520 देने का आदेश दिया है। यह रकम 45 दिनों के भीतर देनी होगी।
इसमें ₹520 पिज्जा और डिलीवरी शुल्क के लिए, ₹5,000 मानसिक और शारीरिक परेशानी के मुआवजे के तौर पर और ₹5,000 मुकदमे के खर्च के रूप में शामिल हैं।
यानी 10 इंच के पिज्जा की जगह 7 इंच का पिज्जा मिलने से शुरू हुआ विवाद आखिरकार ग्राहक को मूल ऑर्डर की कीमत से 20 गुना से भी ज्यादा रकम मिलने के आदेश तक पहुंच गया।
शेयर बाजारों का बुरा दौर खत्म हो चुका है। अब बाजार के अच्छे दिन शुरू होने जा रहे है। अल्फएक्युरेट एडवाइजर्स राजेश कोठारी का ऐसा मानना है। उनका कहना है कि भारतीय शेयर बाजार के लिए स्थितियां अनुकूल दिख रही हैं। क्रेडिट ग्रोथ, कंजम्प्शन और कैपिटल एक्सपेंडिचर्स से अगले 6 से 12 महीनों में बाजार को बड़ा सपोर्ट मिलेगा।
बाजार में तेजी के लिए ये तीन चीजें जरूरी
कोठारी की इस उम्मीद की वजह यह है कि जब ये तीनों चीजें एक साथ होती हैं तो कंपनियों की अर्निंग्स ग्रोथ अच्छी रहती है। बीते एक-दो साल में शेयर बाजारों की कमजोरी में कंपनियों की खराब अर्निंग्स ग्रोथ का बड़ा हाथ है। हालांकि, अब स्थिति बदलती दिख रही है। जून तिमाही में अर्निंग्स ग्रोथ में काफी इम्प्रूवमेंट दिखा है।
बाजार में तेजी के लिए दूसरी स्थितियां भी अनुकूल
सीएनबीसी-टीवी18 को दिए इंटरव्यू में कोठारी ने कहा, “जब कभी क्रेडिट, कंजम्प्शन और कैपेक्स की ग्रोथ एक साथ दिखती है तो कंपनियों की अर्निंग्स में इम्प्रूवमेंट आता है।” हालांकि, शेयर बाजार का प्रदर्शन आगे बेहतर रहने की उनकी उम्मीद के पीछे सिर्फ एक यही वजह नहीं है।
क्रेडिट ग्रोथ बढ़ने से बाजार को मिलेगा सपोर्ट
उन्होंने कहा कि बीते एक साल में बाजार पर दबाव बढ़ाने वाली स्थितियों में अब बदलाव आ रहा है। इधर, वैल्यूएशन सही लेवल पर दिख रहा है। क्रेडिट ग्रोथ पिछले साल 9-10 फीसदी थी, जो अब करीब 18 फीसदी पर आ गई है। इससे यह संकेत मिलता है कि क्रेडिट साइकिल रफ्तार पकड़ रही है।
कंजम्प्शन पर बीते 4 सालों से दबाव दिख रहा था
कोठारी ने कहा कि कोविड के बाद से कंजम्प्शन बीते करीब 4 साल से दबाव में रहा है। अब स्थिति बदल रही है। कई कंज्यूमर कंपनियों के जून तिमाही के नतीजे काफी बेहतर रहे हैं। कंजम्प्शन बढ़ने का सीधा संबंध कंपनियों की अर्निंग्स ग्रोथ से है। इससे कंपनियों का अर्निंग्स साइकिल को लेकर भरोसा बढ़ता है।
कई बिल्डिंग मैटेरियल्स की मांग स्ट्रॉन्ग रहने की उम्मीद
उन्होंने कहा कि कैपिटल एक्सपेंडिचर बढ़ रहा है। उनका संकेत खासकर बिल्डिंग मैटेरियल्स पर था। हालांकि, वह अभी भी रियल एस्टेट को लेकर सावधानी बरतने के पक्ष में है। उनका मानना है कि अगले दो से तीन साल में टाइल्स, सैनटरीवेयर, वायर्स और केबल्स की डिमांड स्ट्रॉन्ग रह सकती है। पिछले कुछ सालों में शुरू हुए रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स अब पूरे होने के करीब हैं।
बीते एक साल में निफ्टी और सेंसेक्स का रिटर्न निगेटिव
बीते एक साल में भारतीय शेयर बाजारों का प्रदर्शन खराब रहा है। इस दौरान निफ्टी और सेंसेक्स दोनों का रिटर्न निगेटिव रहा है। निफ्टी में इस दौरान 2.49 फीसदी की गिरावट आई है। सेंसेक्स इस दौरान 4.63 फीसदी गिरा है। बाजार को इस दौरान कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ ने माहौल खराब किया। फिर, इस साल फरवरी के आखिर में अमरिका और ईरान में लड़ाई शुरू होने से क्रूड की कीमतें आसमान में पहुंच गईं।
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UPSC CSE Mains 2026: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) सिविल सर्विसेज मुख्य परीक्षा 2026 का आयोजन कर रहा है। 21 अगस्त से शुरू हुई यह परीक्षा 22 और 23 अगस्त के अलावा 29 और 30 अगस्त को भी होगी। इस परीक्षा में शामिल उम्मीदवारों के लिए यह अहम अपडेट है। यूपीएससी सीएसई मेन्स 2026 में शामिल कैंडिडेट परीक्षा के किसी प्रश्नपत्र या सवाल को चुनौती देना चाहते हैं, तो आयोग ने उसके लिए शेड्यूल निर्धारित कर दिया है।
आयोग ने घोषणा की है कि यूपीएससी सीएसई मेन्स 2026 में शामिल उम्मीदवार एक खास क्वेश्चन पेपर रिप्रेजेंटेशन पोर्टल (QPReP) के जरिए अपनी शिकायतें दे सकते हैं। यह पोर्टल 31 अगस्त से 4 सितंबर तक पांच दिनों के लिए उपलब्ध रहेगा। इस दौरान, कैंडिडेट्स सिविल सर्विसेज (मेन) एग्जामिनेशन 2026 के सवालों या प्रश्नपत्र से जुड़ी अपनी चिंताएं दे सकते हैं। यूपीएससी सीएसई मेन्स 2026 परीक्षा का आयोजन 2 चरणों में किया जाएगा। परीक्षा 21, 22 और 23 अगस्त को होगी, जबकि बाकी पेपर 29 और 30 अगस्त 2026 को आयोजित किए जाएंगे। परीक्षा खत्म होने के तुरंत बाद उम्मीदवार प्रश्नपत्रों की समीक्षा कर सकेंगे और जरूरत पड़ने पर अपनी आपत्ति दर्ज करा सकेंगे।
आयोग ने यह स्पष्ट किया है कि उम्मीदवारों को अपनी शिकायतें देने के लिए सिर्फ क्यूपीआरईपी पोर्टल का इस्तेमाल करना होगा। ईमेल, पोस्ट या किसी और तरीके से भेजी गई रिक्वेस्ट, या 4 सितंबर के बाद जमा की गई रिक्वेस्ट स्वीकार नहीं की जाएंगी। कैंडिडेट्स यूपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए क्यूपीआरईपी पोर्टल एक्सेस कर सकते हैं। कैंडिडेट्स को सलाह दी जाती है कि वे पांच दिन का समय ध्यान से नोट कर लें और अगर जरूरी हो तो डेडलाइन से पहले अपना रिप्रेजेंटेशन जमा कर दें।
आयोग ने सभी अभ्यर्थियों से कहा है कि अगर उन्हें किसी प्रश्न या प्रश्नपत्र को लेकर कोई रिप्रजेंटेशन देना है, तो वे आखिरी तारीख का इंतजार न करें। पोर्टल खुलने के बाद तय 5 दिन की अवधि के भीतर ही अपनी आपत्ति दर्ज करें। इससे आयोग समय पर सभी रिप्रजेंटेशन का रिव्यू कर सकेगा और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आगे की कार्रवाई करेगा।
The Range Rover Sport EV has been a long time coming. After what feels like an eternity of teasers and test mules, the electric Range Rovers will finally be launched globally in September this year and should arrive in Indian showrooms around March 2027. Look at the car and you may wonder what took the company so long, because this appears to be just the regular Range Rover Sport. That, as it turns out, is entirely the point.
Under the familiar skin sit 300 patents’ worth of tech, a new 800V electrical architecture, two 326hp motors and a 118.5kWh battery, all validated over 60,000 hours of testing, the most for any Range Rover yet. The motors are Land Rover’s own design, developed in-house because nothing off the shelf could deliver the kind of instant, finely controlled torque the brand demanded for serious off-roading. The only real giveaways on the outside are a grille with narrower air slots and a new set of alloys with a more aero design, in keeping with the EV theme. Land Rover deliberately didn’t tamper with the styling because customers were clear – don’t change it, just make it better.
The new architecture, motors and battery have gone through 60,000 hours of testing.
So, is it better? A specially curated lap of the Goodwood circuit, complete with gravel stages and some party tricks, was our chance to find out.
Range Rover Sport Electric Prototype: performance, ride and handling
Set off, and the first impression is of eerie silence. All you can hear is the blower working overtime on a hot Goodwood day. Even when the tarmac ends and the gravel begins, the Sport EV feels like a magic carpet, gliding along on a pillow of velvet. The ride quality is absolutely exceptional, better even than the standard car’s, and that’s saying something.
When you want a quick turn of pace, the combined 550hp and 850Nm don’t leave you wanting. Engage launch control, and the Sport EV catapults forward hard enough to be a genuine shock, though the delivery is measured rather than manic. There is, however, a hint of torque steer from the front axle under hard acceleration, a slight tug at the wheel that reminds you how much force is being exerted. The brakes on our prototype also felt a bit grabby, with a sharp initial bite. Land Rover engineers admit this isn’t the final calibration and say production cars will have a more progressive pedal feel.
The Sport EV feels like a magic carpet, gliding along on a pillow of velvet.
Then came the fun exercises, laid out to prove that this plush, polished and uber-refined Range Rover can do things no owner would ever dare attempt. The Sport EV climbed a staircase – a cheeky nod to the brand’s world record 999-step climb – and we even drove it through the fuselage of an Airbus. Silly? Absolutely. But it showcased what makes an electric drivetrain so effective off road. Torque arrives instantly from zero rpm and builds with perfect linearity, and because the electronics can meter out drive to each motor with such precision, there’s no need for the old hardware of locking diffs and low-range gearboxes. Raise the suspension to off-road height, let the cameras and hill descent control do their thing, and the car simply walks over obstacles. The single-pedal mode is something the engineers have finally nailed too, and it works seamlessly alongside hill descent control when needed.
The big surprise is how tidily this near 2.8-tonne SUV handles. Flick the wheel suddenly, and you can feel the mass move, but otherwise, it stays impressively planted through corners, helped by a centre of gravity that sits a significant 73mm lower than in the combustion car. Range Rovers have always had a top-heavy feel when pushed; this one doesn’t.
Questions remain. A real-world range of 531km is promised, but given the bluff shape and sheer size of this flagship EV, that figure could prove optimistic if driven briskly. Some owners may have liked the convenience of a frunk in their EV, which is absent, and packaging the rear motor has killed off any seven-seat option. Then again, these are misses most owners may not miss at all.
Prototype badging aside, there’s little to separate this from the combustion-engined Sport.
Pricing isn’t announced yet, but expect it to sit above the locally assembled combustion equivalents. More importantly, on this evidence, it will set a new benchmark for luxury for the brand. The electric Range Rover Sport doesn’t reinvent the formula, but it quietly perfects it.
Canada US Trade War: अमेरिका और कनाडा के बीच जारी व्यापार वार्ता अचानक बड़े आर्थिक युद्ध में तब्दील हो गई है। कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिका द्वारा आखिरी वक्त पर रखी गई 'अव्यावहारिक” शर्तों का विरोध करते हुए ट्रेड वार्ता को तुरंत रोक दिया। इस फैसले से बौखलाए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कनाडा पर 50 प्रतिशत भारी टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया, जिसके बाद कार्नी ने भी 'ईंट का जवाब पत्थर से' देने की चेतावनी दे डाली है।
अमेरिका की 'अंतिम शर्त' पर भड़का कनाडा
उत्तरी अमरीका की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच संबंध अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। महीनों से चल रही व्यापार वार्ता को कनाडा ने अचानक बीच में ही तोड़ दिया है। कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने सख्त रुख अपनाते हुए अपने सभी शीर्ष वार्ताकारों को तुरंत ओटावा लौटने का फरमान जारी कर दिया। कनाडा का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का प्रशासन बातचीत के अंतिम दौर में ऐसी शर्तें थोप रहा था, जो कनाडाई उद्योगों और छोटे कारोबारियों के लिए बेहद आर्थिक नुकसानदायक थीं। ALSO READ: मैक्रों ने ट्रम्प की 'ईरान नीति' की धज्जियां उड़ाईं, युद्ध और नाटो पर फ्रांस के राष्ट्रपति का बड़ा बयान
50% टैरिफ का 'डॉलर-फॉर-डॉलर' जवाब
कनाडा के इस कड़े कदम से गुस्साए राष्ट्रपति ट्रम्प ने कनाडा से आने वाले करीब 28 अरब कनाडाई डॉलर के सामान पर आधी रात से 50 फीसदी टैरिफ (आयात शुल्क) ठोकने का ऐलान किया। ट्रम्प के इस फैसले पर पलटवार करते हुए पीएम कार्नी ने साफ कर दिया कि कनाडा झुकने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि अमेरिका जितने डॉलर का टैरिफ हम पर लगाएगा, हम भी 'डॉलर-फॉर-डॉलर' की तर्ज पर अमेरिकी सामानों पर ठीक उतना ही शुल्क लादेंगे।
एक दिन पहले तक बन रहे थे समझौते के आसार
चौंकाने वाली बात यह है कि इस गतिरोध से ठीक एक दिन पहले डोनाल्ड ट्रम्प ने सकारात्मक संकेत दिए थे। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में उम्मीद जताई थी कि कनाडा के साथ जल्द एक ऐतिहासिक डील हो सकती है और मार्क कार्नी के साथ उनके रिश्ते काफी बेहतर हैं। हालांकि, वाशिंगटन की ओर से अंतिम समय में बदले गए रुख ने पूरे समझौते की विश्वसनीयता पर पानी फेर दिया।
अमेरिका का आरोप : समझौते से मुकरा कनाडा
दूसरी तरफ, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने इस विफलता का ठीकरा कनाडा के सिर फोड़ा है। ग्रीर का कहना है कि अमेरिका ने कनाडा को अन्य देशों की तुलना में बेहद रियायती और बेहतर शर्तें ऑफर की थीं, लेकिन कनाडा की नई अनपेक्षित मांगों और प्रतिबद्धताओं से पीछे हटने की वजह से पूरी बातचीत पटरी से उतर गई।
अमेरिका पर निर्भरता घटाएगा कनाडा
वार्ता टूटने के बाद कनाडाई प्रधानमंत्री ने एक बड़े रणनीतिक बदलाव का संकेत दिया है। कार्नी ने कहा कि कनाडा अब अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए अमेरिका पर से निर्भरता कम करेगा। कनाडा अपने मौजूदा मुक्त व्यापार समझौतों का दायरा बढ़ाएगा, ताकि उसके व्यापार की पहुंच दुनिया भर के 1.5 अरब से ज्यादा उपभोक्ताओं तक हो सके। इसके साथ ही, कनाडाई सरकार ने घरेलू उद्योगों की सुरक्षा के लिए राहत पैकेज देने की भी योजना बनाई है।