महंगाई ने बिगाड़ा शेयर बाजार का मूड, सेंसेक्स 453 अंक टूटा; अगले हफ्ते इन सेक्टर्स पर नजर

महंगाई ने बिगाड़ा शेयर बाजार का मूड, सेंसेक्स 453 अंक टूटा; अगले हफ्ते इन सेक्टर्स पर नजर

share market weekly outlook 22 August

Share Market Weekly Review : क्रूड के दामों में उतार चढ़ाव, महंगाई के आंकड़ें और मेटल में तेजी की बदौलत भारतीय शेयर बाजार इस हफ्ते रेंज बाउंड ही रहा। सेंसेक्स में 453 अंक गिरा तो निफ्टी में 114 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। 3 दिन बाजार लाल निशान में तो 2 दिन हरे निशान में रहा। जानिए मार्केट ट्रेड और निवेशकों के लिए कैसा रहेगा अगस्त का पहला सप्ताह।

 

कैसी रही सेंसेक्स और निफ्टी की चाल

हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को सेंसेक्स 281 अंकों की गिरावट के साथ 77728 पर बंद हुआ। निफ्टी 78 अंक गिरकर 24,287 पर आ गया। मंगलवार को सेंसेक्स 493 अंकों की गिरावट के साथ 77235 पर बंद हुआ वहीं निफ्टी 133 अंक गिरकर 24,155 पर पहुंच गया। बुधवार को भी सेंसेक्स में 310 अंकों की गिरावट के साथ 77,000 के नीचे पहुंच गया। निफ्टी 77 अंक गिरकर 24,078 पर बंद हुआ। 

 

गुरुवार को हफ्ते में पहली बार भारतीय शेयर बाजार हरे निशान में दिखाई दिए। सेंसेक्स 628 अंकों की बढ़त के साथ 77538 पर बंद हुआ तो दिन का कारोबार खत्म होने पर निफ्टी 154 अंक बढ़कर 24,232 पर था। शुक्रवार को बाजार लगभग फ्लैट ही बंद हुआ। सेंसेक्स 3 अंकों की बढ़त के साथ 77541 पर बंद हुआ, निफ्टी 20 अंक बढ़कर 24,252 पर था। 

 

महंगाई की मार

देश में रिटेल में चीनी के दाम बढ़कर 70 रुपए प्रति किलो हो गए। त्योहारी सीजन में चीनी की कीमत में 15 दिन में लगभग 20 रुपए की बढ़ोतरी से कई वस्तुओं के दाम बढ़ गए। तेल, नमक, चावल, बिस्किट, साबुन, कार, टायर और पेंट समेत कई वस्तुओं के दाम तेजी से बढ़े। रिजर्व बैंक के अनुसार, आने वाले दिनों में इन वस्तुओं के कम होने की गुंजाइश कम है। ऐसे में आगामी महिनों में महंगाई और बढ़ सकती है। ALSO READ: क्या भारत में और महंगी होने वाली है चीनी और क्यों करना पड़ रहा है आयात?

 

नुकसान में रहे 87.7% रिटेल इनवेस्टर्स 

सेबी की अवेयरनेस रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में डेरिवेटिव ट्रेडिंग में रिटल निवेशको की भागीदारी 18% घटकर 87.5 लाख रह गई। इस दौरान 87.7% रिटेल इनवेस्टर्स को शुद्ध घाटा हुआ। इस दौरान छोटे ट्रेडर्स को 91,685 करोड़ रुपए का कुल घाटा हुआ। घाटे का 92% हिस्सा ऑप्शन ट्रेडिंग से आया था। हालांकि इस दौरान बड़ी ट्रेडिंग फर्मों ने 44,000 करोड़ रुपए कमाए। एक लाख रुपए से कम का इ्क्विटी पोर्टफोलियो रखने वाले ट्रेडरो के हिस्से में नुकसान का 70 फिसदी हिस्सा आया।

 

बाजार विशेषज्ञ योगेश बागौरा ने कहा कि यह रिपोर्ट इस बात का संकेत दे रही है कि बाजार फिलहाल बड़े निवेशकों का है। रिटेल निवेशकों को डिलिवरी बेसिस पर लांग टर्म के लिए निवेश करना चाहिए। साथ ही इंट्रा डे और ऑपशन ट्रेडिंग से दूरी भी बनाए रखनी चाहिए। ALSO READ: E20 पेट्रोल पर CEA नागेश्वरन ने उठाए सवाल, E-10 पर लौटने की दी सलाह

 

इन फैक्टर्स से तय हुई बाजार की चाल

इस हफ्ते बाजार पर सबसे बड़ा असर वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का रहा। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़कर लगभग 94 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं। महंगाई और 

 

मानसून की कमजोर चाल ने भी बाजार को प्रभावित किया। विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा लगातार बिकवाली किए जाने से बाजार के बड़े शेयरों पर दबाव बना रहा। अमेरिका में बॉन्ड यील्ड में तेजी और कमजोर वैश्विक संकेतों के कारण उभरते बाजारों से निवेशकों का रुझान कुछ समय के लिए कम हुआ। हालांकि इस दौरान DII ने बाजार को संभाले रखा। इंफोसिस, टीसीएस और एचसीएल टेक्नोलॉजीज के शेयरों में भारी मुनाफावसूली और बिकवाली देखने को मिली।

 

कैसा रहेगा अगला हफ्ता?

अगले हफ्ते में भारतीय शेयर बाजार की चाल रेंज बाउंड ही रहने की संभावना है। यदि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आती है, तो इससे घरेलू बाजार को राहत मिल सकती है। बैंकिंग, वित्तीय 

 

सेवाएं और मेटल/यूटिलिटी सेक्टर बाजार को संभालने की कोशिश कर सकते हैं। आईटी सेक्टर की निर्भरता वैश्विक संकेतों पर ज्यादा दिखाई दे रही है। बाजार की चाल FII और DII के रुख पर भी निर्भर करेगी।

 

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

बागौरा ने बताया कि बाजार फिलहाल रेंज बाउंड है। निफ्टी 24,000 से 24700 की रेंज में रहने की संभावना है। उन्होंने कहा कि सेबी ने क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) सिस्टम में मैनिपुलेशन के मामले में सख्‍त कार्रवाई करते हुए 2 कंपनियों ‘कॉपथॉल मॉरीशस इन्वेस्टमेंट लिमिटेड’ और ‘मानसी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकिंग प्राइवेट लिमिटेड’ को सिक्योरिटीज मार्केट से रोक दिया है। उनसे गलत तरीके से कमाए गए 3.68 करोड़ रुपये जब्त करने का आदेश दिया है। इनके खिलाफ 13 अगस्त, 2026 को इंडेक्स की एक्सपायरी के दिन CAS के दौरान सेंसेक्स में हेरफेर के शुरुआती सबूत मिले थे।

 

अस्वीकरण : यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर लें।

दूसरे टेस्ट के पहले दिन गिरे 18 विकेट, स्टार्क के बाद शोरिफुल का जलवा

AUSvsBAN मैके में एक रोमांचक पहले दिन 18 विकेट गिरे। क्वींसलैंड के इस तटीय मैदान पर पहले टेस्ट के शुरुआती दिन बाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज़ों ने छह-छह विकेट लेकर इसे पुराने ज़माने के गेंदबाज़ों का खेल बना दिया। डार्विन में मिली करारी हार के कुछ ही दिनों बाद, ऑस्ट्रेलिया ने ज़बरदस्त वापसी की। मिशेल स्टार्क के शानदार प्रदर्शन की बदौलत उन्होंने बंगलादेश को 64 रन पर ऑल-आउट कर दिया – जो उनका चौथा सबसे कम टेस्ट स्कोर है। हालांकि, बाद में ऑस्ट्रेलिया की पारी भी लड़खड़ाई, लेकिन दिन का खेल खत्म होने तक उन्होंने 101 रनों की अहम बढ़त बना ली।

पैट कमिंस ने टॉस जीता और बिना किसी हिचकिचाहट के बंगलादेश को पहले बल्लेबाज़ी के लिए बुलाया। इसके बाद स्टार्क ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने मैच की पहली ही गेंद पर शादमान इस्लाम को गली में कैच आउट करा दिया। विकेटों के गिरने का सिलसिला तेज़ी से चला; टॉप-6 बल्लेबाज़ों में से चार बिना खाता खोले आउट हो गए और बंगलादेश का स्कोर सात ओवर के अंदर 5 विकेट पर 12 रन हो गया।

नई गेंद के साथ स्टार्क की गति और स्विंग का बल्लेबाज़ों के पास कोई जवाब नहीं था। उन्होंने 22 गेंदों के अंदर पांच बल्लेबाज़ों को पवेलियन भेज दिया, लेकिन मुशफिकुर रहीम के डटकर खेलने की वजह से उन्हें हैट्रिक का मौका नहीं मिला। पारी के बीच में थोड़ी देर के लिए बंगलादेश की स्थिति संभली। मेहदी हसन मिराज और हसन महमूद ने पहला सेशन निकाला और ब्रेक तक बांग्लादेश का स्कोर 6 विकेट पर 35 रन तक पहुंचा, लेकिन यह राहत ज़्यादा देर नहीं रही। लंच के बाद कमिंस ने दो और विकेट लिए, जबकि जोश हेज़लवुड ने भी एक विकेट चटकाया।

इसके बाद स्टार्क ने वापसी की और बाकी बचे विकेट लेकर 10 ओवर में 12 रन देकर 6 विकेट का शानदार कारनामा पूरा किया। इस प्रदर्शन के साथ ही उन्होंने डेल स्टेन के 439 टेस्ट विकेटों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। बंगलादेश की टीम सिर्फ़ 34 ओवर में ऑल-आउट हो गई। दूसरे सेशन के एक घंटे से भी कम समय में उनकी पारी खत्म हो गई। निचले क्रम के बल्लेबाजों की हिम्मत भरी बल्लेबाजी की वजह से ही वे इस फ़ॉर्मेट में अपने अब तक के सबसे कम स्कोर (वेस्टइंडीज के खिलाफ़ 43 रन) से आगे निकल पाए।

वापसी कर रहे मैट रेनशॉ, ट्रैविस हेड और मार्नस लाबुशेन के नाकाम रहने के बावजूद, ऑस्ट्रेलिया की शुरुआत अच्छी रही। कुछ समय के लिए ऐसा लगा कि वे दिन का खेल पूरी तरह से दबदबे के साथ खत्म करेंगे। स्टीवन स्मिथ और कैमरन ग्रीन ने ऐसी पिच पर बल्लेबाजी को आसान बना दिया, जिसने सुबह से ही बल्लेबाजों को परेशान किया था। उन्होंने हल्के हाथों से गैप में शॉट खेले और छोटी या सीधी गेंदों का फायदा उठाकर स्कोरिंग रेट को पांच रन प्रति ओवर से ऊपर पहुंचाया। इस जोड़ी ने चौथे विकेट के लिए सिर्फ़ 108 गेंदों में 77 रन जोड़े।

फिर शोरिफुल इस्लाम की धीमी गेंद का कमाल दिखा। बांग्लादेश की पारी में सबसे ज़्यादा 14 रन बनाने और हेड व लाबुशेन का विकेट लेने के बाद, इस बाएं हाथ के गेंदबाज ने वही अनुशासन और लाइन-लेंथ दिखाई जिससे स्टार्क को दिन की शुरुआत में सफलता मिली थी। उन्होंने सबसे अहम विकेट लिया और आखिरी सेशन में ड्रिंक्स ब्रेक के ठीक समय पर स्मिथ को 42 रन पर पगबाधा आउट कर दिया।

यहीं से पारी का रुख बदल गया। ऑस्ट्रेलिया के लिए जो दिन अब तक आसान लग रहा था, वह अचानक मुश्किलों में घिर गया। एलेक्स कैरी आगे बढ़कर खेलने की कोशिश में लेंथ बॉल को ठीक से नहीं खेल पाए और मिड-ऑन पर कैच दे बैठे, जिससे ऑस्ट्रेलिया का स्कोर 5 विकेट पर 145 रन हो गया। इसके बाद उन्होंने 3 रन के अंदर 3 विकेट गंवा दिए; शोरिफुल ने ब्यू वेबस्टर और पैट कमिंस को शून्य पर आउट किया और फिर स्टार्क को भी बोल्ड कर दिया।

इन सबके बीच, एक खिलाड़ी अडिग रहा। कैमरन ग्रीन ने उसी स्पष्टता और शांति के साथ बल्लेबाजी की, जो उन्हें डार्विन में फॉर्म में वापसी वाली सेंचुरी के दौरान मिली थी। उनकी नाबाद 51 रनों की पारी वाकई शानदार थी, खासकर ऐसी पिच पर जिसने लगभग हर दूसरे बल्लेबाज को मुश्किल में डाला था। उनके डटे रहने की वजह से ऑस्ट्रेलिया दिन का खेल खत्म होने तक 101 रन आगे रहा। पहले दिन की उथल-पुथल को देखते हुए यह बढ़त काफी अहम साबित हो सकती है।

संक्षिप्त स्कोर: बांग्लादेश 64 (शोरिफुल इस्लाम 14; मिशेल स्टार्क 6-12, पैट कमिंस 3-25), ऑस्ट्रेलिया 165/8 (कैमरन ग्रीन 51*, स्टीव स्मिथ 42; शोरिफुल इस्लाम 6-35) से 101 रन पीछे।

अयोध्या में सरयू खतरे के निशान के ऊपर, प्रभावितों को सरकार से मिली मदद

Saryu River Water Level: ​अयोध्या में घाघरा (सरयू) नदी का जलस्तर खतरे के निशान (92.730 मीटर) से ऊपर दर्ज किए जाने के बावजूद, उत्तर प्रदेश सरकार और स्थानीय जिला प्रशासन की पूर्व तैयारी के चलते बाढ़ की स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। नदी का वर्तमान जलस्तर खतरे के निशान से 0.310 मीटर ऊपर (93.040 मीटर) है, जो 2009 के सर्वकालिक उच्चतम स्तर (94.010 मीटर) की तुलना में काफी कम है।

​बाढ़ नियंत्रण एवं राहत कार्यों की मुख्य झलकियां

  • ​सुरक्षित तटबंध : रौनाही (14.550 किमी), अयोध्या-बिल्वहरि घाट (13.140 किमी) और तमसा नदी पर गोसाईंगंज (5.340 किमी) तटबंधों की नियमित मरम्मत से बड़े नुकसान से बचा गया। शहरी क्षेत्रों में जलभराव या फसल क्षति की कोई सूचना नहीं है।
  • ​प्रभावित क्षेत्र: वर्तमान में जिले के 11 ग्राम बाढ़ से प्रभावित हैं (तहसील सदर के 4, सोहावल का 1 और रुदौली के 6 ग्राम)।
  • राहत किट एवं सामग्री वितरण : प्रभावित परिवारों तक 2,370 बाढ़ राहत किट (सदर : 1,500, रुदौली : 645, सोहावल : 225), 1450 लंच पैकेट और पशुओं के लिए 350 क्विंटल भूसा वितरित किया गया है।

बाढ़ को ध्यान में रखते हुए कुल 14 बाढ़ शेल्टरहोम चिन्हित हैं। सहारा बाग (सोहावल) स्थित शेल्टरहोम में 100 प्रभावित व्यक्ति रह रहे हैं। निगरानी के लिए 10 बाढ़ चौकियां बनाई गई हैं और 18 नावों का संचालन किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की 37 टीमों ने 1224 ओआरएस पैकेट और 2912 क्लोरीन टैबलेट बांटे हैं। पशु चिकित्सा की 21 टीमें पशु टीकाकरण और उपचार में जुटी हैं।

 

​जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी के अनुसार प्रशासनिक सतर्कता और विभागों के समन्वय से स्थिति सामान्य है। उप जिलाधिकारी और तहसीलदार स्तर के अधिकारी लगातार क्षेत्रों में निगरानी कर रहे हैं और राहत कार्य निर्बाध जारी हैं।

iPhone 18 Pro Max में Apple करने वाला है बड़ा खेल! कैमरे से लेकर डिस्प्ले तक में होंगे ये बदलाव

उम्मीद है कि Apple अपने सालाना सितंबर लॉन्च इवेंट में iPhone 18 Pro Max को पेश करेगा। इस इवेंट में कंपनी iPhone 18 Pro और एक नया iPhone Ultra भी लॉन्च कर सकती है। हालांकि Apple ने अभी तक इस इवेंट की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन कई रिपोर्ट्स से पता चलता है कि यह इवेंट 9 सितंबर को हो सकता है। इसके बाद उसी हफ्ते प्री-ऑर्डर शुरू हो सकते हैं और महीने के आखिर तक बिक्री भी शुरू होने की उम्मीद है।

मौजूदा लीक और रिपोर्ट्स के आधार पर iPhone 18 Pro Max से क्या-क्या उम्मीदें हैं, आइए उन पर एक नजर डालते हैं।

अनुमानित लॉन्च डेट

Apple हर साल सितंबर में अपने नए फ्लैगशिप iPhone लॉन्च करता है। इस साल भी कंपनी इसी परंपरा को जारी रख सकती है। अगर सामने आ रही रिपोर्ट्स सही साबित होती हैं, तो iPhone 18 Pro Max को 9 सितंबर को कैलिफोर्निया के क्यूपर्टिनो स्थित Steve Jobs Theatre में लॉन्च किया जा सकता है।

यह इवेंट Apple के CEO John Ternus के कार्यकाल में होने वाला कंपनी का पहला iPhone लॉन्च भी हो सकता है।

डिजाइन और डिस्प्ले

iPhone 18 Pro Max के डिजाइन में कोई बड़ा बदलाव होने की उम्मीद नहीं है। इसके बजाय, Apple पिछली जेनरेशन के डिजाइन को ही बरकरार रख सकता है और इसमें कुछ छोटे-मोटे बदलाव कर सकता है।

लीक से पता चलता है कि फोन में 6.9-इंच का LTPO OLED डिस्प्ले हो सकता है, जिसमें ProMotion टेक्नोलॉजी और 120Hz तक का अडैप्टिव रिफ्रेश रेट होगा। Apple के आउटडोर में बेहतर विजिबिलिटी के लिए पीक ब्राइटनेस को भी बेहतर बनाने की उम्मीद है। जहां कुछ रिपोर्ट में छोटे Dynamic Island का संकेत मिलता है, वहीं दूसरी रिपोर्ट बताती हैं कि यह बदलाव आने वाली किसी दूसरी जेनरेशन में देखने को मिल सकता है।

नया A20 Pro प्रोसेसर

iPhone 18 Pro Max में Apple का A20 Pro चिपसेट होने की उम्मीद है, जो खबरों के अनुसार 2nm मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस पर बेस्ड है।

इस प्रोसेसर के साथ 12GB RAM मिल सकती है, जिससे मल्टीटास्किंग बेहतर होने के साथ फोन में AI से जुड़े काम भी तेजी से किए जा सकेंगे। नया चिपसेट ग्राफिक्स परफॉर्मेंस, पावर एफिशिएंसी और फोन की ओवरऑल स्पीड को भी बेहतर बना सकता है।

कैमरा अपग्रेड

उम्मीद है कि Apple कैमरे में सुधार पर ध्यान देगा, खासकर Pro Max मॉडल के लिए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस स्मार्टफोन में वेरिएबल अपर्चर वाला कैमरा हो सकता है, जिससे यूजर्स सेंसर में आने वाली रोशनी की मात्रा को एडजस्ट कर सकेंगे। इससे डेप्थ ऑफ फील्ड और कम रोशनी में फोटोग्राफी पर बेहतर कंट्रोल मिलेगा।

इसके अलावा, इस फोन में ट्रिपल-कैमरा सेटअप बरकरार रहने की उम्मीद है, साथ ही A20 Pro चिप की वजह से बेहतर इमेज प्रोसेसिंग का फायदा भी मिलेगा, जिससे फोटो और वीडियो दोनों की क्वालिटी बेहतर होगी।

बैटरी और चार्जिंग

बैटरी की क्षमता के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं मिली है, लेकिन रिपोर्ट्स बताती हैं कि Apple बैटरी का साइज बहुत ज्यादा बढ़ाने के बजाय हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर ऑप्टिमाइजेशन पर ध्यान देगा।

A20 Pro प्रोसेसर और iOS में सुधार के कॉम्बिनेशन से बैटरी लाइफ बेहतर होने की उम्मीद है।

भारत में अनुमानित कीमत

उम्मीद है कि iPhone 18 Pro Max अपने पिछले मॉडल से महंगा होगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, Apple दुनिया भर में इसकी कीमत में लगभग $200 की बढ़ोतरी कर सकता है, जिससे भारत में भी इसकी लॉन्च कीमत 20,000 रुपये तक बढ़ सकती है।

लॉन्च से पहले की सभी जानकारियों की तरह, ये डिटेल्स भी लीक और इंडस्ट्री रिपोर्ट्स पर आधारित हैं। उम्मीद है कि Apple सितंबर में होने वाले लॉन्च इवेंट के दौरान इसके स्पेसिफिकेशन्स, कीमत और उपलब्धता की पुष्टि करेगा।

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UN में पहली बार महिला चीफ बन सकती है:रेस में अभी 8 दावेदार, इनमें 5 महिलाएं; गुयाना की बिर्केट सबसे आगे

UN के 80 साल के इतिहास में पहली बार कोई महिला महासचिव बन सकती है। फिलहाल इस रेस में कुल 8 दावेदार हैं। इनमें 5 महिलाएं हैं। शुक्रवार को हुई दूसरे दौर की अनौपचारिक वोटिंग में गुयाना की कैरोलिन रोड्रिग्स बिर्केट सबसे आगे हैं। वहीं दूसरे पायदान पर कोस्टा रिका की रेबेका ग्रिन्सपैन हैं। संयुक्त राष्ट्र के मौजूदा महासचिव एंतोनियो गुटेरेस का दूसरा पांच साल का कार्यकाल 31 दिसंबर 2026 को खत्म होगा। इसलिए अगला महासचिव चुनने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। UN महासचिव का चुनाव कैसे होता है? महासचिव बनने के लिए UNSC के स्थायी सदस्यों का साथ जरूरी विकसित देशों से महासचिव क्यों नहीं बनता ? 1. हर इलाके को मौका देने की कोशिश संयुक्त राष्ट्र में यह कोशिश रहती है कि महासचिव का पद दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के देशों को मिलता रहे। यानी हर बार एक ही इलाके के व्यक्ति को यह पद न मिले। इससे बाकी देशों को भी लगता है कि संयुक्त राष्ट्र सबका है। 1997 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने भी कहा था कि महासचिव चुनते समय अलग-अलग क्षेत्रों को मौका देने और महिला-पुरुष बराबरी का ध्यान रखा जाना चाहिए। हालांकि, यह कोई पक्का नियम नहीं है। 2. महासचिव किसी एक बड़े देश का आदमी न लगे महासचिव को पूरी दुनिया का चेहरा माना जाता है। इसलिए अगर अमेरिका या चीन जैसी बड़ी ताकत के किसी बड़े नेता को यह पद मिल जाए, तो दूसरे देशों को डर हो सकता है कि संयुक्त राष्ट्र पर उस देश का असर बढ़ जाएगा। इसी वजह से ऐसे व्यक्ति को तरजीह मिलती है, जिसे किसी एक बड़ी ताकत के करीब न माना जाए। 3. एशिया-अफ्रीका के देशों की संख्या ज्यादा संयुक्त राष्ट्र में कुल 193 देश हैं। इनमें एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के बहुत से देश हैं। इन देशों की भी इच्छा रहती है कि संयुक्त राष्ट्र का मुखिया सिर्फ यूरोप या अमेरिका की सोच वाला न हो, बल्कि दुनिया के बाकी हिस्सों की आवाज भी समझता हो। लेकिन ऐसा नहीं है कि विकसित देशों के लोगों को कभी मौका ही नहीं मिला। 1991 में कनाडा, नीदरलैंड और नॉर्वे के उम्मीदवार भी महासचिव पद की दौड़ में थे। 2016 में पुर्तगाल के एंतोनियो गुटेरेस महासचिव बने। उस समय पूर्वी यूरोप से महासचिव बनाने की मांग भी काफी जोर पकड़ रही थी। 2006 में शशि थरूर भी भारत से दावेदार रहे भारत के सांसद शशि थरूर भी UN महासचिव पद के दावेदार रह चुके हैं। 2006 में मनमोहन सिंह सरकार ने उन्हें UN महासचिव पद के लिए उम्मीदवार बनाया था। थरूर 1978 से UN में काम कर रहे थे। भारत ने उनके लंबे UN अनुभव और अंतरराष्ट्रीय मामलों की समझ को उनकी ताकत बताया। साथ ही, भारत ने कहा कि अब अगला महासचिव एशिया से होना चाहिए। भारत ने दुनियाभर में थरूर के लिए समर्थन जुटाया। मनमोहन सिंह ने कई देशों के नेताओं को पत्र लिखे, जबकि थरूर ने खुद भी अलग-अलग देशों के नेताओं से मुलाकात की। हालांकि, वे महासचिव नहीं बन सके। अनौपचारिक वोटिंग में थरूर दूसरे नंबर पर रहे, जबकि दक्षिण कोरिया के बान की-मून लगातार सबसे आगे रहे। —————— यह खबर भी पढ़ें… संयुक्त राष्ट्र में इजराइली राजदूत ने UN अफसर को फटकारा:यौन हिंसा से जुड़ी रिपोर्ट में इजराइल का नाम आने से नाराज थे संयुक्त राष्ट्र (UN) में शुक्रवार को एक बैठक के दौरान इजराइल के राजदूत डैनी डैनन और UN महासचिव की विशेष प्रतिनिधि प्रमिला पैटन के बीच तीखी बहस हो गई। पूरी खबर पढ़ें…

80 साल बाद पहली बार महिला बन सकती UN चीफ:रेस में अभी 8 दावेदार, इनमें 5 महिलाएं; गुयाना की बिर्केट सबसे आगे

UN के 80 साल के इतिहास में पहली बार कोई महिला महासचिव बन सकती है। फिलहाल इस रेस में कुल 8 दावेदार हैं। इनमें 5 महिलाएं हैं। शुक्रवार को हुई दूसरे दौर की अनौपचारिक वोटिंग में गुयाना की कैरोलिन रोड्रिग्स बिर्केट सबसे आगे रहीं। वहीं कोस्टा रिका की रेबेका ग्रिन्सपैन दूसरे नंबर पर रहीं। संयुक्त राष्ट्र के मौजूदा महासचिव एंतोनियो गुटेरेस का दूसरा पांच साल का कार्यकाल 31 दिसंबर 2026 को खत्म होगा। इसलिए अगले महासचिव को चुनने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। UN महासचिव का चुनाव कैसे होता है? महासचिव बनने के लिए UNSC के स्थायी सदस्यों का साथ जरूरी वोटिंग की प्रक्रिया अनौपचारिक वोटिंग में UNSC के 15 सदस्य हर उम्मीदवार के लिए अपनी राय देते हैं। इसमें तीन विकल्प होते हैं: 1. समर्थन
2. विरोध
3. कोई राय नहीं इसका मतलब यह है कि हर देश को उम्मीदवार के पक्ष या विपक्ष में ही वोट देना जरूरी नहीं है। वह ‘कोई राय नहीं’ भी चुन सकता है। जैसे 30 जुलाई की पहली अनौपचारिक वोटिंग में रेबेका ग्रिन्सपैन को सबसे ज्यादा समर्थन मिला था। उन्हें 10 देशों का समर्थन, 1 का विरोध और 4 देशों ने कोई राय नहीं दी थी। 21 अगस्त की अनौपचारिक वोटिंग में कैरोलिन रोड्रिग्स बिर्केट सबसे आगे रहीं। उन्हें 8 देशों का समर्थन, 3 का विरोध और 4 देशों ने कोई राय नहीं दी। हालांकि इन वोटिंग के ये आंकड़े अंतिम चुनाव के नतीजे नहीं होते। इनका मकसद सिर्फ यह पता लगाना होता है कि कौन उम्मीदवार सबसे मजबूत स्थिति में है और किसके नाम पर UNSC में सहमति बन सकती है। विकसित देशों से महासचिव क्यों नहीं बनता ? 1. हर इलाके को मौका देने की कोशिश संयुक्त राष्ट्र में यह कोशिश रहती है कि महासचिव का पद दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के देशों को मिलता रहे। यानी हर बार एक ही इलाके के व्यक्ति को यह पद न मिले। इससे बाकी देशों को भी लगता है कि संयुक्त राष्ट्र सबका है। 1997 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने भी कहा था कि महासचिव चुनते समय अलग-अलग क्षेत्रों को मौका देने और महिला-पुरुष बराबरी का ध्यान रखा जाना चाहिए। हालांकि, यह कोई पक्का नियम नहीं है। 2. महासचिव किसी एक बड़े देश का आदमी न लगे महासचिव को पूरी दुनिया का चेहरा माना जाता है। इसलिए अगर अमेरिका या चीन जैसी बड़ी ताकत के किसी बड़े नेता को यह पद मिल जाए, तो दूसरे देशों को डर हो सकता है कि संयुक्त राष्ट्र पर उस देश का असर बढ़ जाएगा। इसी वजह से ऐसे व्यक्ति को प्रायोरिटी मिलती है, जिसे किसी एक बड़ी ताकत के करीब न माना जाए। 3. एशिया-अफ्रीका के देशों की संख्या ज्यादा संयुक्त राष्ट्र में कुल 193 देश हैं। इनमें एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के बहुत से देश हैं। इन देशों की भी इच्छा रहती है कि संयुक्त राष्ट्र का मुखिया सिर्फ यूरोप या अमेरिका की सोच वाला न हो, बल्कि दुनिया के बाकी हिस्सों की आवाज भी समझता हो। लेकिन ऐसा नहीं है कि विकसित देशों के लोगों को कभी मौका ही नहीं मिला। 1991 में कनाडा, नीदरलैंड और नॉर्वे के उम्मीदवार भी महासचिव पद की दौड़ में थे। 2016 में पुर्तगाल के एंतोनियो गुटेरेस महासचिव बने। उस समय पूर्वी यूरोप से महासचिव बनाने की मांग भी काफी जोर पकड़ रही थी। 2006 में शशि थरूर भी भारत से दावेदार रहे भारत के सांसद शशि थरूर भी संयुक्त राष्ट्र महासचिव पद की दौड़ में शामिल रह चुके हैं। 2006 में मनमोहन सिंह सरकार ने उन्हें भारत की ओर से उम्मीदवार बनाया था। उस समय थरूर का सबसे बड़ा मजबूत पक्ष उनका लंबा संयुक्त राष्ट्र अनुभव था। वे 1978 से संयुक्त राष्ट्र में काम कर रहे थे। भारत ने उनकी अंतरराष्ट्रीय मामलों की समझ और संयुक्त राष्ट्र में लंबे अनुभव को देखते हुए उनकी उम्मीदवारी रखी थी। भारत का यह भी तर्क था कि अब महासचिव का पद एशिया को मिलना चाहिए। थरूर के समर्थन में भारत ने कई देशों से संपर्क किया। तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दूसरे देशों के नेताओं को पत्र लिखे, जबकि थरूर ने भी अलग-अलग देशों के नेताओं से मुलाकात कर समर्थन जुटाया। अमेरिका के विरोध की वजह से हारे थरूर 2006 में हुई अनौपचारिक वोटिंग के हर दौर में थरूर दक्षिण कोरिया के बान की-मून के बाद दूसरे नंबर पर रहे। पहली वोटिंग में बान की-मून को 12 और थरूर को 10 वोट मिले थे। थरूर के मुताबिक, इन 10 वोटों में चीन का वोट भी शामिल था। बाद की वोटिंग में चीन ने उनके खिलाफ वीटो का इस्तेमाल नहीं किया। आखिरी वोटिंग में थरूर को 10 देशों का समर्थन मिला, जबकि 3 देशों ने उनके खिलाफ वोट दिया। इनमें अमेरिका भी शामिल था। अमेरिका UNSC के पांच स्थायी सदस्यों में से एक है और उसके पास वीटो पावर है। आखिरकार बान की-मून महासचिव चुने गए। थरूर ने बाद में लिखा कि उनकी उम्मीदवारी को रोकने में अमेरिका की भूमिका थी। उनके मुताबिक, अमेरिका बान की-मून के समर्थन में था और उसने दूसरे सुरक्षा परिषद सदस्यों के बीच भी उनके पक्ष में समर्थन जुटाया। थरूर के अनुसार, अमेरिका के रुख के पीछे दक्षिण कोरिया के साथ उसके रिश्ते और उस समय कोफी अन्नान के साथ अमेरिकी रिश्तों में आई खटास जैसे कारण भी थे। —————— यह खबर भी पढ़ें… UN में चीफ गुटेरेस की जगह किसे मिलेगी:आज दूसरे दौर की वोटिंग, रेस में 8 दावेदार, कोस्टा रिका की ग्रिन्सपैन सबसे आगे संयुक्त राष्ट्र के मौजूदा महासचिव एंतोनियो गुटेरेस का दूसरा पांच साल का कार्यकाल 31 दिसंबर 2026 को खत्म होगा। उनके बाद अगला महासचिव चुनने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस पद के लिए इस समय 8 उम्मीदवार मैदान में हैं। पूरी खबर पढ़ें…

संदीप रेड्डी वांगा की फिल्मों और नजरिए से दीपिका पादुकोण नहीं रखती हैं इत्तेफाक? फुल नरेशन के बिना नहीं करतीं कमिटमेंट

अप्रैल 2025 में दीपिका पादुकोण ने संदीप रेड्डी वांगा की फिल्म ‘स्पिरिट’ का हिस्सा नहीं बनने का फैसला किया था। अगस्त 2026 आ गया है और किसी न किसी वजह से अब भी इस मामले की चर्चा हो रही है। पैन-इंडिया फिल्म से दीपिका के बाहर होने के बाद काफी विवाद हुआ था। फिल्ममेकर ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाए और इंडस्ट्री में कलाकारों के काम के घंटों को लेकर बहस छिड़ गई। इस हफ्ते एक बार फिर यह विवाद तब सामने आया, जब फिल्ममेकर के भाई प्रणय ने दावा किया कि दीपिका के फिल्म छोड़ने की एक वजह उनका प्रॉफिट शेयर मांगना था। अब  घटनाक्रम से जुड़े एक बेहद करीबी सूत्र से दीपिका के फिल्म नहीं करने की दूसरी कहानी पता चली है।

घटनाक्रम से जुड़े सूत्र ने बताया, “दीपिका पादुकोण अपनी जिंदगी में संदीप रेड्डी वांगा से सिर्फ एक बार मिली हैं। इतना ही नहीं फिल्ममेकर इस मुलाकात के लिए पूरे एक घंटे की देरी से पहुंचे थे! दीपिका ने बाकी की मुलाकात प्रोफेशनल तरीके से पूरी की। इस मुलाकात में फिल्म के बारे में सिर्फ एक लाइन बताई गई थी। उन्हें फिल्म की पूरी कहानी नहीं सुनाई गई थी। दीपिका पूरी कहानी का नरेशन मिले बिना कभी किसी प्रोजेक्ट के लिए कमिटमेंट नहीं करतीं। इसलिए ‘स्पिरिट’ शुरुआत से ही दीपिका के विचार में शामिल नहीं थी।”

सूत्र ने आगे कहा कि दीपिका की फिल्ममेकर के साथ काम करने में कोई दिलचस्पी नहीं है। सूत्र ने कहा, “संदीप रेड्डी वांगा ऐसे फिल्ममेकर हैं, जिनके साथ दीपिका पादुकोण कभी काम नहीं करेंगी, क्योंकि उनका नजरिया महिलाओं के प्रति पुरुषवादी है। यह बात न सिर्फ उनके ऑफ-स्क्रीन व्यक्तित्व में, बल्कि उनकी फिल्मों में भी साफ तौर पर दिखाई देती है।”

दीपिका पादुकोण पिछले साल प्रभास स्टारर ‘स्पिरिट’ के लिए संदीप रेड्डी वांगा के साथ बातचीत में थीं। लेकिन अप्रैल में खबर सामने आई कि दीपिका ने प्रोजेक्ट छोड़ दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, नई मां बनने के बाद एक्ट्रेस ने रोजाना तय 8 घंटे के काम की मांग की थी, जिसे फिल्म की प्रोडक्शन टीम ने स्वीकार नहीं किया। ‘कल्कि 2898 एडी’ के मेकर्स ने भी एक पोस्ट के जरिए सीक्वल से दीपिका के बाहर होने की जानकारी दी थी, जिसके बाद प्रोफेशनलिज्म, काम के घंटों की सीमा और बड़े बजट की फिल्मों में कलाकारों की फीस को लेकर ऑनलाइन बहस छिड़ गई थी।

जब खबरें सामने आईं कि दीपिका की जगह तृप्ति डिमरी को फिल्म में लिया जाएगा, तब दावा किया गया कि दीपिका कुछ इंटीमेट सीन्स को लेकर सहज नहीं थीं और इसी वजह से उन्होंने फिल्म छोड़ी। इसी दौरान निर्देशक संदीप रेड्डी वांगा ने ट्विटर पर दीपिका की ओर इशारा करते हुए एक नाराज पोस्ट शेयर किया। मई 2025 में उन्होंने लिखा, “जब मैं किसी एक्टर को कहानी सुनाता हूं, तो मैं उस पर 100% भरोसा करता हूं। हमारे बीच एक अनकहा NDA (नॉन-डिस्क्लोजर एग्रीमेंट) होता है। लेकिन ऐसा करके आपने उस इंसान को ‘DISCLOSED’ कर दिया जो आप हैं…. एक यंग एक्टर को नीचा दिखाना और मेरी कहानी से उसे बाहर करना? क्या आपका फेमिनिज्म यही कहता है?”

इस हफ्ते एक बार फिर विवाद तब बढ़ गया, जब संदीप के भाई प्रणय ने दावा किया कि दीपिका के ‘स्पिरिट’ छोड़ने की एक वजह फिल्म में 10 फीसदी प्रॉफिट शेयर की उनकी मांग थी। एनटीवी तेलुगु से बात करते हुए प्रणय रेड्डी वांगा ने कहा, “वजह वही है जो पहले बताई जा चुकी है। एक थी रेम्यूनरेशन और दूसरी थी टाइमिंग। इसके अलावा कुछ और कारण भी हैं। इसके तुरंत बाद सब कुछ हद से आगे बढ़ गया। देखिए, वह कुछ भी मांग सकती हैं। अगर हम देने के लिए तैयार हैं, तो दे सकते हैं। लेकिन हमारे लिए भी इसका हिसाब काम करना चाहिए। हमें लगा कि यह हमारे लिए काम नहीं कर रहा है। इसलिए हमने दूसरे विकल्पों के बारे में सोचा। जैसे ही हमने दूसरे विकल्प तलाशने शुरू किए, उन्होंने सब कुछ लीक करना शुरू कर दिया।”

दीपिका के बाद तृप्ति डिमरी को प्रभास के साथ फिल्म की फीमेल लीड के तौर पर कास्ट किया गया। दोनों का पहला लुक नए साल के दिन 2026 में रिलीज किया गया था। फिल्म में विवेक ओबेरॉय भी लीड रोल में नजर आएंगे और यह फिल्म 5 मार्च 2027 को रिलीज होने वाली है। वहीं, दीपिका पादुकोण के पास फिलहाल दो प्रोजेक्ट हैं। वह दिसंबर में रिलीज होने वाली ‘किंग’ में शाहरुख खान के साथ फिर नजर आएंगी। इसके बाद वह एटली की ‘राका’ में अल्लू अर्जुन के साथ दिखाई देंगी, जो अगले साल रिलीज होगी।

Lenskart Block Deal: पीयूष बंसल की कंपनी में SVF II Lightbulb बेच सकती है ₹2871 करोड़ के शेयर

चश्मे बनाने वाली कंपनी लेंसकार्ट सॉल्यूशंस में ब्लॉक डील के तहत लगभग 30 करोड़ डॉलर के शेयर बिक सकते हैं। CNBC-TV18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मामले की जानकारी रखने वाले लोगों का कहना है कि सॉफ्टबैंक विजन फंड (SVF) II लाइटबल्ब केमैन 2.6 प्रतिशत तक हिस्सेदारी की बिक्री कर सकती है। ट्रांजेक्शन के लिए फ्लोर प्राइस 635 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है। शेयर बेचने वाले के लिए बाकी हिस्सेदारी बेचने को लेकर 45 दिन का लॉक-अप पीरियड होगा।

लेंसकार्ट में जून 2026 तिमाही के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 17.53 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। पब्लिक शेयरहोल्डर्स के पास 82.05 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। स्टॉक एक्सचेंज पर उपलब्ध डेटा के अनुसार, इसमें से SVF II Lightbulb (Cayman) Ltd के पास 9.86 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। अगर ट्रांजेक्शन हुआ तो सोमवार, 24 अगस्त को लेंसकार्ट के शेयरों में बड़ा उतारचढ़ाव देखने को मिल सकता है। शेयर की कीमत वर्तमान में BSE पर 661.55 रुपये है।

कंपनी का मार्केट कैप 1.15 लाख करोड़ रुपये है। लेंसकार्ट ने 10 नवंबर, 2025 को शेयर बाजार में एंट्री की थी। इसका IPO 7278.02 करोड़ रुपये का था। शेयर साल 2026 में अब तक 50 प्रतिशत चढ़ा है। 3 महीनों में कीमत 32 प्रतिशत उछली है। हाल ही में MSCI इंडिया इंडेक्स में लेन्सकार्ट सॉल्यूशंस के साथ-साथ लॉरस लैब्स, अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस और ग्रो की पेरेंट कंपनी बिलियनब्रेन्स गैराज वेंचर्स की एंट्री हुई है।

जून तिमाही में Lenskart का मुनाफा 269 प्रतिशत बढ़ा

अप्रैल-जून 2026 तिमाही के दौरान कंपनी का शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 269.24 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोतरी के बाद 221.84 करोड़ रुपये हो गया। ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 43.3 प्रतिशत बढ़कर 2,714.18 करोड़ रुपये हो गया। भारत से रेवेन्यू 30.7 प्रतिशत बढ़कर 1,531 करोड़ रुपये रहा, जबकि अंतरराष्ट्रीय कारोबार से रेवेन्यू सालाना आधार पर 38 प्रतिशत बढ़कर 1,203 करोड़ रुपये हो गया।

लेंसकार्ट सॉल्यूशंस ने जून 2026 तिमाही के दौरान 132 नए स्टोर खोले। इसके बाद इसके एक्टिव स्टोर्स की कुल संख्या बढ़कर 3,459 हो गई है। कुल खर्च 2483.52 करोड़ रुपये के दर्ज किए गए, जो जून 2025 तिमाही में 1836.58 करोड़ रुपये के थे।

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स्टॉक पर ब्रोकरेज की राय

लेंसकार्ट के शेयर को कवर कर रहे 21 एनालिस्ट्स में से 17 ने ‘बाय’ रेटिंग दी है। 3 ने ‘होल्ड’ और एक ने ‘सेल’ की सलाह दी है। जेफरीज ने स्टॉक पर ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखी है। टारगेट प्राइस बढ़ाकर 680 रुपये प्रति शेयर कर दिया है। ब्रोकरेज का कहना है कि मांग के बजाय आपूर्ति कंपनी के लिए प्रमुख बाधा बनी हुई है। सिटी ने 650 रुपये प्रति शेयर के टारगेट प्राइस के साथ ‘न्यूट्रल’ रेटिंग बरकरार रखी है। कहा है कि लेंसकार्ट के मार्जिन को हायर एवरेज सेलिंग प्राइस, बेहतर प्रोडक्ट मिक्स, इन-हाउस मैन्युफैक्चरिंग और ऑपरेटिंग लेवरेज से लाभ होता है।

सिटी को उम्मीद है कि कंपनी की ग्रोथ की रफ्तार अच्छी बनी रहेगी। इसे स्टोर्स में बढ़ोतरी और कस्टमर एक्वीजीशन का सपोर्ट मिलेगा। HSBC ने स्टॉक के लिए ‘होल्ड’ रेटिंग बरकरार रखी है। टारगेट प्राइस 575 रुपये प्रति शेयर दिया है। ब्रोकरेज ने वित्त वर्ष 2027 और ​2028 के लिए EBITDA अनुमानों को क्रमशः 6 प्रतिशत और 5 प्रतिशत बढ़ाया है।

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MV Agusta Turismo Veloce SCS image gallery

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 MV Agusta Turismo Veloce SCS front three quarter black

The MV Agusta Turismo Veloce SCS is a sport-tourer that combines the Italian brand’s performance-focused approach with long-distance touring ability. It is powered by a 798cc, three-cylinder engine producing 110hp and 84Nm, paired with a six-speed gearbox and MV Agusta’s Smart Clutch System (SCS), which allows clutchless operation. The bike gets semi-active suspension, Brembo brakes, cornering ABS, traction control and a quickshifter. Touring equipment includes cruise control, heated grips, an adjustable windscreen and integrated panniers. With its distinctive styling and SCS system, the Turismo Veloce offers a different take on the conventional sport-tourer.

इंदौर के सारांश जैन कोलंबो टेस्ट में अंतरराष्ट्रीय डेब्यू के बेहद करीब

इंदौर के सारांश जैन कोलंबो टेस्ट में अंतरराष्ट्रीय डेब्यू के बेहद करीब

इंदौर के स्थानीय निवासी और ऑलराउंडर क्रिकेटर सारांश जैन कोलंबो टेस्ट में अंतरराष्ट्रीय डेब्यू के बेहद नजदीक खड़े हैं। इसका इशारा तब मिला जब श्रीलंका के मध्यक्रम में एक और बाएं हाथ का बल्लेबाज शामिल हुआ और सारांश को अभ्यास सत्र में काफी मेहनत करते हुए देखा गया। उनको कुलदीप यादव की जगह शामिल करने की आशंका है।

चंद्रकांत पंडित की कोचिंग में मध्य-प्रदेश की रणजी ट्रॉफी विजेता टीम के प्रमुख सदस्य रहे लंबे कद के Off-Spinner सारांश ने हाल ही में भारत A के श्रीलंका दौरे के दौरान शानदार प्रदर्शन करते हुए दो मैचों में छह विकेट लेने के साथ एक पारी में नाबाद 70 रन भी बनाए थे।

दिलचस्प बात यह है कि सारांश के पिता सुबोध भी मध्य प्रदेश के पूर्व ऑफ-स्पिनर रहे हैं और उनको यह बात सालती रही कि वह राष्ट्रीय टीम में जगह नहीं बना सके। लेकिन उन्होंने अपनी असफलता पर चिंतन करने से बेहतर बेटे की कुशलता पर मेहनत करना समझा। वह ही अपने बेटे के कोच है।

सारांश के पिता सुबोध ने 9 रणजी ट्रॉफी मैचों में 23 विकेट लिए थे। उन्होंने अपने बेटे को कोचिंग देनी शुरु की लेकिन भारतीय टेस्ट गेंदबाजी क्रम खासकर स्पिन गेंदबाजी का- इतना सुदृढ़ था कि इसका किला भेदना असंभव था। रविचंद्रन अश्विन, रविंद्र जड़ेजा ही टीम के लिए इतने विकेट निकाल देते थे कि कुलदीप यादव तक के 10 साल के करियर में 19 मैच हैं।

ऐसे में सारांज को 30 प्लस के बाद जाकर मौका मिला। अमूमन भारतीय चयनकर्ता इतनी उम्र के बाद किसी पर मेहरबान नहीं होते। लेकिन सारांश जैन का केस अलग था।