WhatsApp पर फोटो-वीडियो को अपने आप डाउनलोड होने से कैसे रोकें? जानें स्टेप-बाय-स्टेप गाइड

WhatsApp यूजर्स को कई ऐसे फीचर्स देता है, जो रोजाना के इस्तेमाल को आसान बनाते हैं। लेकिन अगर इन फीचर्स का सही तरीके से इस्तेमाल न किया जाए, तो ये परेशानी भी बढ़ा सकते हैं। ऐसा ही एक फीचर ऑटो-डाउनलोड है। दरअसल, WhatsApp में फोटो, वीडियो, ऑडियो और डॉक्यूमेंट अपने आप डाउनलोड होने का ऑप्शन मिलता है। अगर आप कई WhatsApp ग्रुप में जुड़े हैं या रोजाना अलग-अलग चैट के जरिए आपको कई फाइलें मिलती हैं, तो ये फाइलें बिना आपकी जानकारी के फोन में ऑटोमैटिक रूप से डाउनलोड होती रहती हैं। इससे फोन की स्टोरेज जल्दी भर सकती है। ऐसे में आप इस समस्या बाहर निकलने के लिए WhatsApp पर ऑटो-डाउनलोड को बंद कर सकते हैं। चलिए स्टेप-बाय-स्टेप समझते हैं कि आप इस फीचर का यूज कैसे कर सकते हैं।

सभी चैट और ग्रुप से WhatsApp पर फोटो और वीडियो का ऑटो-डाउनलोड कैसे बंद करें:

  1. सबसे पहले अपने फोन में WhatsApp खोलें।
  2. अब स्क्रीन के नीचे दाईं तरफ दिखाई दे रही अपनी प्रोफाइल फोटो पर टैप करें।
  3. इसके बाद WhatsApp की Settings में जाएं।
  4. यहां Storage and data वाले ऑप्शन पर टैप करें।
  5. अब स्क्रीन को नीचे की तरफ स्क्रॉल करें।
  6. यहां आपको Media auto-download का ऑप्शन दिखाई देगा। इसमें आप अलग-अलग तरह की फाइलों का ऑटो-डाउनलोड बंद कर सकते हैं।
  7. अगर आप WhatsApp पर आने वाली फोटो अपने आप डाउनलोड होने से रोकना चाहते हैं, तो Photos पर टैप करें।
  8. फोटो का ऑटो-डाउनलोड पूरी तरह बंद करने के लिए Never ऑप्शन चुनें।
  9. अगर आप चाहते हैं कि फोटो सिर्फ Wi-Fi से कनेक्ट होने पर डाउनलोड हों, तो Wi-Fi ऑप्शन चुन सकते हैं।
  10. इसी तरह आप अपनी जरूरत के हिसाब से Audio, Videos और Documents का ऑटो-डाउनलोड भी बंद कर सकते हैं।
  11. अगर आप ऑटो-डाउनलोड की सेटिंग को दोबारा पहले जैसा करना चाहते हैं, तो स्क्रीन के नीचे दिए गए Reset auto-download settings ऑप्शन पर टैप करें।

किसी खास चैट या ग्रुप से WhatsApp पर फोटो अपने आप सेव होने से कैसे रोकें:

  1. सबसे पहले अपने फोन में WhatsApp खोलें।
  2. अब उस ग्रुप या पर्सनल चैट को खोलें, जिसकी फोटो आप फोन में अपने आप सेव नहीं करना चाहते हैं।
  3. इसके बाद ऊपर दिए गए कॉन्टैक्ट या ग्रुप के नाम पर टैप करें।
  4. अब नीचे स्क्रॉल करें और Save to Photos ऑप्शन खोजें।
  5. यहां Save to Photos पर टैप करें और Default (Off) या Never ऑप्शन चुनें।

इसके बाद उस खास चैट या ग्रुप से आने वाली फोटो आपके फोन की Photos/Gallery में अपने आप सेव नहीं होंगी।

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LPG Price 19 September 2026: दिल्ली-मुंबई समेत इन शहरों में LPG का क्या है भाव? देखें पूरी लिस्ट

LPG Price 19 September 2026: रसोई गैस सिलेंडर की कीमत आम आदमी के घर के बजट पर सीधा असर डालती है। महीने की शुरुआत में जब घरेलू खर्च का हिसाब लगाया जाता है, तो LPG सिलेंडर की कीमत भी उसमें अहम हिस्सा होती है। वहीं, कमर्शियल गैस के दाम होटल, रेस्तरां, ढाबों और दूसरे कारोबारों की लागत को प्रभावित करते हैं। ऐसे में तेल कंपनियों की ओर से जारी होने वाले नए LPG रेट पर हर महीने ग्राहकों की नजर रहती है।

आज 19 सितंबर 2026 को भी LPG सिलेंडर के दामों को लेकर अपडेट सामने आया है। अगर आप इस महीने सिलेंडर बुक करने की तैयारी में हैं, तो ऑर्डर करने से पहले अपने शहर में लागू कीमत जरूर चेक कर लें। अलग-अलग शहरों में टैक्स और स्थानीय परिस्थितियों के चलते LPG के दाम अलग हो सकते हैं। आइए जानते हैं आज आपके शहर में घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर कितने रुपये में मिल रहा है।

घरेलू गैस के दाम स्थिर, कमर्शियल सिलेंडर में हुआ था बदलाव

आज 14.2 किलो वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। 19 किलो वाला कमर्शियल सिलेंडर भी आज उसी रेट पर मिल रहा है। हालांकि, सितंबर की शुरुआत में सरकारी तेल कंपनियों ने कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में 9.50 रुपये की बढ़ोतरी की थी। घरेलू LPG के दाम में कोई संशोधन नहीं किया गया था।

दिल्ली से चेन्नई तक, जानिए कितने में मिल रहा सिलेंडर

शहरघरेलू LPGकमर्शियल LPG
दिल्ली₹942₹2,747.50
मुंबई₹941.50₹2,701
कोलकाता₹968₹2,884
बेंगलुरु₹944.50₹2,831
हैदराबाद₹994₹2,996
चेन्नई₹957.50₹2,916.50
जयपुर₹945.50₹2,776
नोएडा₹939.50₹2,747.50
गुरुग्राम₹950.50₹2,764.50

घर बैठे ऐसे पता करें LPG का ताजा भाव

सिलेंडर का रेट जानने के लिए अब गैस एजेंसी के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं है। संबंधित तेल कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर LPG प्राइसिंग सेक्शन में जाकर अपनी लोकेशन चुनें और लागू कीमत देख लें।

  • IndianOil (Indane): cx.indianoil.in
  • Bharat Petroleum (Bharat Gas): ebharatgas.com
  • Hindustan Petroleum (HP Gas): myhpgas.in

मोबाइल ऐप से बुकिंग और ट्रैकिंग भी आसान

ग्राहक संबंधित कंपनी के मोबाइल ऐप से कीमत देखने के साथ-साथ सिलेंडर बुक और डिलीवरी ट्रैक कर सकते हैं। IndianOil के लिए IndianOil One, Bharat Gas के लिए Hello BPCL और HP Gas के लिए HP Pay ऐप उपलब्ध हैं।

WhatsApp और SMS से भी मिल सकती है जानकारी

अगर ऐप या वेबसाइट इस्तेमाल नहीं करना चाहते, तो रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर के जरिए WhatsApp या SMS सेवा का सहारा लिया जा सकता है। इससे ग्राहक अपने LPG अकाउंट से जुड़ी जानकारी और सिलेंडर की कीमत आसानी से पता कर सकते हैं।

Petrol Diesel Price Today: 19 सितंबर को जारी हुए पेट्रोल-डीजल के नए रेट, जानें आपके शहर में कितना है भाव

Hormuz Strait में अमेरिकी पनडुब्बी पकड़ने का ईरान का दावा, ट्रंप के सामने बढ़ी चुनौती

Hormuz Strait में अमेरिकी पनडुब्बी पकड़ने का ईरान का दावा, ट्रंप के सामने बढ़ी चुनौती

donald trump

ईरान-अमेरिका तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट से बड़ी खबर सामने आई है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया है कि उसने होर्मुज स्ट्रेट के प्रवेश द्वार के पास एक अमेरिकी बिना क्रू वाले अंडरवाटर व्हीकल को पकड़ लिया है। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, यह डिवाइस कैलिफोर्निया की डिफेंस कंपनी एंडुरिल का बनाया हुआ DIVE-LD ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल (AUV) है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि होर्मुज स्ट्रेट में हुए इस घटनाक्रम के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव किस दिशा में जाता है।

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हालांकि, अमेरिका ने इस घटना को अलग तरीके से पेश किया है। पेंटागन के एक प्रवक्ता के मुताबिक, एक अंडरवाटर ड्रोन एक दिन से ज्यादा पहले खराब हो गया था। अमेरिकी पक्ष ने कहा कि यह ड्रोन चल रहे ऑपरेशन के समर्थन में इलाके के पानी का सर्वे कर रहा था।

ईरान ने क्या दावा किया?

 

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की नेवी ने दावा किया कि उसने होर्मुज स्ट्रेट के एंट्री पॉइंट पर अमेरिकी सेना के एक आधुनिक मानवरहित सबमर्सिबल को अपने कब्जे में ले लिया। ईरानी सरकारी मीडिया ने इसे DIVE-LD बताया है। यह एक बड़े आकार का ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल है, जिसे समुद्र के भीतर बिना चालक के अलग-अलग मिशन को अंजाम देने के लिए डिजाइन किया गया है। ईरानी पक्ष ने दावा किया कि यह सिस्टम अत्याधुनिक तकनीक से लैस था।

क्या है DIVE-LD और इसका इस्तेमाल किस काम में होता है?

DIVE-LD एक ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल है। कंपनी के मुताबिक करीब 19 फीट यानी 5.8 मीटर लंबा यह सबमर्सिबल कई तरह के समुद्री मिशन में इस्तेमाल किया जा सकता है।

 

इसके संभावित मिशनों में—

 

समुद्र के भीतर माइंस की पहचान और उनसे निपटने से जुड़े ऑपरेशन

सीबेड मैपिंग

समुद्र के भीतर जानकारी जुटाना

केबल और पाइपलाइन जैसे अंडरवाटर इंफ्रास्ट्रक्चर का निरीक्षण शामिल हैं।

 

अमेरिका ने क्या कहा?

 

ईरान के दावे के बाद अमेरिकी रक्षा विभाग ने घटना को लेकर अलग बयान दिया। पेंटागन के प्रवक्ता ने कहा कि एक अंडरवाटर ड्रोन एक दिन से अधिक समय पहले खराब हो गया था। उनके मुताबिक यह ड्रोन चल रहे ऑपरेशन के समर्थन में इलाके के पानी का सर्वे कर रहा था। अमेरिकी पक्ष ने यह भी कहा कि खराब हुआ ड्रोन पुराना मॉडल था और उसमें संवेदनशील डेटा इकट्ठा करने की क्षमता या क्लासिफाइड सोनार अथवा रडार उपकरण नहीं था। इस तरह ईरान और अमेरिका के बयानों में घटना की अहमियत को लेकर स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है।

 

एंडुरिल ने भी की अपने सिस्टम के नुकसान की पुष्टि

 

DIVE-LD बनाने वाली अमेरिकी कंपनी एंडुरिल ने अपने एक सिस्टम के नुकसान की पुष्टि की है, लेकिन कंपनी ने घटना को लेकर इसकी अहमियत कम करके बताई। कंपनी के अनुसार DIVE-LD एक ऐसा ऑटोनॉमस सिस्टम है जिसे खतरनाक वातावरण में काम करने के लिए तैयार किया गया है और ऐसे मिशनों में वाहन के नुकसान की संभावना को डिजाइन का हिस्सा माना जाता है।

 

समुद्र में मानवरहित सिस्टम पर अमेरिका का बढ़ता जोर

 

अमेरिकी सेना पिछले कुछ समय से मानवरहित नेवल सिस्टम में निवेश बढ़ा रही है। इनमें समुद्र की सतह पर और पानी के भीतर काम करने वाले ऑटोनॉमस सिस्टम शामिल हैं। इन तकनीकों का इस्तेमाल बड़े समुद्री इलाकों की निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने और दुश्मन के जहाजों या पनडुब्बियों पर नजर रखने जैसे अभियानों में किया जा सकता है। इसका एक बड़ा फायदा यह है कि ऐसे मिशनों में मानव सैनिकों को सीधे खतरे में डालने की जरूरत कम हो सकती है।

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ईरान पर अमेरिका ने लगाए नए प्रतिबंध

 

होर्मुज स्ट्रेट की घटना के बीच अमेरिका ने ईरान के विमानन क्षेत्र पर भी नए प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिकी वित्त मंत्रालय के विदेशी परिसंपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान के विमानन नेटवर्क, हथियारों के हस्तांतरण और कथित अवैध खरीद योजनाओं से जुड़े 36 संस्थाओं और व्यक्तियों को प्रतिबंधों के दायरे में रखा है।

 

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक इन प्रतिबंधों का निशाना ईरान की सक्रिय एयरलाइंस के साथ-साथ वे विदेशी बिचौलिए, मुखौटा कंपनियां और अन्य संस्थाएं हैं, जिन पर ईरान को विमान, विमान के कलपुर्जे और विमानन तकनीक हासिल करने में मदद करने का आरोप है। अमेरिका का आरोप है कि ईरान के विमानन क्षेत्र का इस्तेमाल उसके शासन की गतिविधियों और कथित आतंकवादी नेटवर्क को समर्थन देने के लिए किया जाता रहा है।

 

होर्मुज स्ट्रेट क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

 

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ने वाला यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम है। यही वजह है कि यहां किसी अमेरिकी सैन्य सिस्टम के पकड़े जाने या क्षतिग्रस्त होने की घटना को लेकर तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

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ईरान और अमेरिका के बीच पहले से जारी तनाव के बीच यह घटनाक्रम ट्रंप प्रशासन के लिए नई चुनौती पैदा कर सकता है। हालांकि, अमेरिका की ओर से ड्रोन को लेकर दिया गया बयान यह संकेत देता है कि वॉशिंगटन इस घटना को ईरानी दावे के मुताबिक बड़ा सैन्य झटका नहीं मान रहा है।

Opinion: The Konarc is Ather’s ticket to the big leagues

Opinion: The Konarc is Ather's ticket to the big leagues
Ather Konarc DRL in a dark studio

Ather has a wonderful problem on its hands. The company says that it is now raking in a monthly demand of around 50,000 units from its dealer base, but is struggling to supply much more than half that figure. Fortunately, the solution is just a few months away, and the upcoming manufacturing facility in Chhatrapati Sambhajinagar will begin to scale up in the first half of next year.

The Konarc plays a key role in Ather’s growth ambitions. This scooter is based on a new steel platform that’s designed to be cheaper and faster – not only to build, but also to service. With this cost-effective new platform in place, the expectation was that the Konarc would occupy a new space for Ather, one that slots in comfortably below the Rizta and 450 models. As it turns out, that is not entirely the case. 

The base Konarc is priced at Rs 99,999, which is a good Rs 22,000 less than the base Rizta. Ather is excited about the new market space that this scooter will unlock for them, and it surely will bring in a new client base. However, a closer examination of the spec sheet suggests that the base Konarc variant is a bit too stripped down, and we’d suggest you pick from the next variant onwards.

When you do that, you’ll realise that the Konarc is effectively priced on par with the Rizta for a similar battery pack size, and this took me by surprise. Conversations with company officials unearthed the very sound rationale that manufacturing input costs have risen by a massive 30-40 percent over the past year. However, I still can’t shake the feeling that the Konarc is not as affordable as expected. 

To be fair, most EVs have gotten quite a bit more expensive in the recent past, and the iQube range is priced at a similar level to the Konarc. However, that’s before you pay the extra amount for Ather’s optional StackPro features, which is something you’d want to do because they add valuable appeal and functionality. What I find disappointing is that none of the Konarc S models come with a full colour TFT display, and that means it’s not compatible with a lot of Ather’s more uniquely clever features like pothole alerts, WhatsApp alerts, voice control and more. 

While the Konarc is not as affordable as expected, there is no doubt that it lives up to Ather’s premium image. Quality and finish are excellent, and more importantly, it is genuinely comfortable to ride, which isn’t something you could say about previous Athers. The fundamentals are in place with this scooter, and that is a solid win for the company.

The fact remains that Ather is already experiencing such big demand for its existing scooters, which don’t come cheap. The customer’s appetite to spend appears to be in place, and the new Konarc will certainly widen it, although I’m sure it will also eat into the Rizta’s market share. With its superior comfort, practical on-board charger and promise of lower running costs, I’m convinced it’s a better scooter than the more flashy looking Rizta. Whether customers feel the same way remains to be seen, but Ather appears well on course to reach new heights in 2027.

लागत जीरो मुनाफा 100%, ऐसे 6 बिजनेस आईडिया जो कभी फेल नहीं होते!

आज के समय में अपना काम शुरू करने के लिए बड़ी दुकान, हैवी इन्वेस्टमेंट या महंगे सेटअप की जरूरत नहीं है। यदि आपके पास कोई हुनर है और आप लोगों की जरूरत को समझकर काम शुरू करते हैं, तो छोटे लावेल से भी अच्छी कमाई की जा सकती है। शुरुआत में खर्च कम होने की वजह से नुकसान का रिस्क भी ज्यादा नहीं रहता और काम चलने पर इसे धीरे-धीरे बड़ा किया जा सकता है।

किसी भी बिजनेस को शुरू करने से पहले यह समझना जरूरी है कि आपके आसपास के लोगों को किस चीज की सबसे ज्यादा जरूरत है। इसके लिए आप अपने आसपास के 10-15 लोगों से बात करके उनकी पसंद, जरूरत और बजट के बारे में जान सकते हैं। अपनी पसंद और हुनर के हिसाब से सही बिजनेस चुनकर आप धीरे-धीरे कस्टमर बना सकते हैं।

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1. पौधों से कमाई

पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने का शौक को छोटे बिजनेस में बदला जा सकता है। इसके लिए किसी छोटी नर्सरी से कम कीमत पर मनी प्लांट, एलोवेरा, स्नेक प्लांट, तुलसी और छोटे सजावटी पौधे खरीदें। शुरुआत में ज्यादा स्टॉक रखने की जरूरत नहीं है, 10-20 पौधों से भी काम शुरू किया जा सकता है। पौधों की अच्छी फोटो खींचकर WhatsApp और सोशल मीडिया पर डालें और आसपास के लोगों को इसकी जानकारी दें। कस्टमर खुद पौधे लेने आ सकते हैं या आसपास डिलीवरी की फैसिलिटी भी दी जा सकती है।

2. क्लाउड किचन

खाना बनाने का शौक है, तो बिना रेस्टोरेंट खोले घर से क्लाउड किचन शुरू किया जा सकता है। शुरुआत में कुछ चुनिंदा डिश जैसे पराठे, थाली, स्नैक्स या घर का खाना रखें और आसपास के इलाके में डिलीवरी की फैसिलिटी दें। व्हाट्सएप और सोशल मीडिया से ऑर्डर लिए जा सकते हैं। अच्छा टेस्ट, साफ-सफाई और समय पर डिलीवरी मिलने पर धीरे-धीरे कस्टमर बढ़ाए जा सकते हैं।

3. कार-बाइक क्लीनिंग

कार और बाइक रखने वाले कई लोगों के पास रोज सफाई करने का समय नहीं होता, ऐसे में घर जाकर सफाई की सर्विस देना कमाई का अच्छा तरीका बन सकता है। शुरुआत में बाल्टी, माइक्रोफाइबर कपड़े, कार शैम्पू, ब्रश और सफाई का जरूरी सामान खरीदकर करीब 1 हजार रुपये के आसपास से काम शुरू किया जा सकता है। इसके लिए दुकान किराए पर लेने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि आसपास की सोसाइटी, कॉलोनी और मोहल्लों में जाकर ग्राहकों के घर पर ही सर्विस दे सकते हैं।

4. डिजिटल मार्केटिंग

छोटे दुकानदारों और लोकल बिजनेस को सोशल मीडिया पर प्रमोट करने की जरूरत होती है। आपको Instagram, Facebook, पोस्ट डिजाइन, रील या ऑनलाइन प्रमोशन की जानकारी है, तो आप उनके लिए डिजिटल मार्केटिंग की सर्विस दे सकते हैं। शुरुआत में 2-3 लोकल बिजनेस को सैंपल काम दिखाकर क्लाइंट बनाया जा सकता है और बाद में हर महीने के पैकेज के हिसाब से कमाई की जा सकती है।

5. स्किल से कमाई

किसी सब्जेक्ट में आपकी अच्छी पकड़ है या आपको ड्राइंग, म्यूजिक, कंप्यूटर या इंग्लिश जैसी कोई स्किल आती है, तो इसे कमाई का जरिया बनाया जा सकता है। इस काम के लिए दुकान या महंगे सेटअप की जरूरत नहीं होती और घर के एक कमरे से ही शुरुआत की जा सकती है। करीब 1 हजार रुपये में व्हाइटबोर्ड, मार्कर और जरूरी स्टेशनरी खरीदकर मोहल्ले के 4-5 बच्चों को छोटे बैच में पढ़ाना शुरू करें। कम बच्चों से शुरुआत करने पर हर बच्चे पर अच्छी तरह ध्यान दिया जा सकेगा।

6. शेयर मार्केट फाइनेंस कवर पेज

आपको फाइनेंस और शेयर मार्केट की अच्छी जानकारी है, तो इस विषय पर कंटेंट बनाकर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम शुरू किया जा सकता है। शेयर मार्केट की बेसिक जानकारी, बजटिंग, सेविंग और पर्सनल फाइनेंस जैसे सब्जेक्ट पर वीडियो, पोस्ट या ब्लॉग तैयार किए जा सकते हैं। शुरुआत में लगातार उपयोगी और आसान भाषा में कंटेंट बनाकर ऑडियंस तैयार करें और आगे चलकर ब्रांड सहयोग या डिजिटल प्रोडक्ट्स से कमाई के रास्ते बनाए जा सकते हैं।

Ather Konarc launched from Rs 1 lakh, up to 200km IDC range

Ather Konarc launched from Rs 1 lakh, up to 200km IDC range
Ather Konarc launched from Rs 1 lakh, up to 200km IDC range

Ather has launched the Konarc electric scooter in India at its Annual community day, with prices starting at Rs 1 lakh (ex-showroom, Bengaluru). It is available in three variants – S 100, S 125 and S 161 – with the numbers corresponding to their respective IDC range figures. A 200km version is also in the pipeline, while a feature-loaded Z variant with a 125km IDC range will also join the line-up.

  1. New AEBS braking system and MagicKey boot access headline the technology package.
  2. 100mm rear suspension travel and a 1,352mm wheelbase are aimed at improving ride comfort and stability.
  3. Up to 200km IDC range, 31-litre boot and 1.35kW combined charging add to its practicality.

Ather Konarc is based on the EL-platform

The Konarc is aimed at delivering improved ride comfort and stability, with 90mm of front and 100mm of rear suspension travel. It has a 1,352mm wheelbase, the longest of any Ather scooter, along with a 14-inch front wheel and 12-inch rear wheel. The S 100 gets drum brakes at both ends, while the S 125 and S 161 get a 220mm front disc and 130mm rear drum.

Ather Konarc Battery and range information

The S 100 gets a 2.1kWh battery and produces 4kW and 16Nm, while the S 125 and S 161 use 2.7kWh and 3.5kWh batteries, respectively, and produce 4.7kW and 16Nm. All three have a claimed top speed of 70kph. While their TrueRange figures are 80km, 100km and 130km, respectively.

The Konarc comes with a 450W onboard charger as standard. Ather says this can be combined with a 900W off-board charger, giving a total charging capacity of 1.35kW. The claimed home charging time from 0-80 percent with the standard charger is 4 hours for the S 100, 4hr 30min for the S 125 and 5hr 40min for the S 161. With the combined charger, these times fall to two hours, 2hr 25min and 3hr 10min, respectively. The charging speed is claimed at 13km in 10 minutes for the S 100 and 15km in 10 minutes for the S 125 and S 161.

Ather described EL as a scalable platform capable of underpinning different scooter formats while sharing major components. Developed using 26 lakh kilometres of field data, it features a new chassis, powertrain and electronics architecture. Ather says reducing the component count could make assembly 15 percent faster and periodic servicing up to twice as quick. The company also demonstrated the platform’s serviceability on stage, with trained technicians dismantling and reassembling the Konarc’s battery and motor in around three minutes, highlighting the potential to significantly reduce workshop time for major component replacement jobs.

The Konarc offers 31 litres of underseat storage, along with an 18W USB Type-C port and an underseat lamp. The S 100 gets a 4.2-inch DeepView display, while the higher variants get a 7-inch DeepView display. Other features include Park Assist reverse, which uses the motor to help manoeuvre the scooter backwards, and AutoHold, which holds the scooter stationary when stopped.

Ather Konarc features

The Konarc Z gets some of Ather’s more significant new technology, including Advanced Electronic Braking System (AEBS). The system uses electronic control to improve braking performance, with Ather saying it reduces stopping distances and minimises rear-wheel lock-ups. It is intended to offer greater braking control, particularly during hard braking.

The Z also gets MagicKey, which allows the rider to unlock the scooter’s boot through the Ather app rather than using a physical key. On the Konarc Z 161, MagicKey works with the boot’s AutoPop function, allowing the boot to open automatically.

Other Z-specific technology includes Google Maps and WhatsApp on the dashboard, while cricket scores can also be displayed when the scooter is stationary. The Konarc gets Ather Connect with features such as theft and tow alerts, ride statistics, Find My Scooter and remote charging-status monitoring. OTA updates are also supported.

The Konarc uses a PMSM motor with IP67 protection, while its battery is also IP67-rated and housed in an aluminium casing. The S 100 weighs 126.5kg, while the S 161 weighs 129kg.

Ather Konarc Price and warranty details

The Konarc also introduces longer service intervals, with periodic maintenance scheduled once every 10,000km or one year, whichever comes first. The Konarc S 100 is priced at Rs 1 lakh, while the S 125 costs Rs 1.22 lakh and the S 161 is priced at Rs 1.45 lakh. Ather has also revealed Konarc Z variants with 125km and 161km IDC range figures, although their prices are yet to be announce

Ather Konarc variants

VariantPrice (ex-showroom)IDC rangeBattery pack
Konarc S 100Rs 1 lakh100km2.1kWh
Konarc S 125Rs 1.22 lakh125km2.7kWh
Konarc S 161Rs 1.45 lakh161km3.5kWh
Konarc Z 125To be announced125kmNot specified in the sheet
Konarc Z 161To be announced161kmNot specified in the sheet

Reforms in Public Examinations: सरकार ने शुरू की सार्वजनिक परीक्षा व्यवस्था में बदलाव की तैयारी, जनता से मांगा सुझाव

Reforms in Public Examinations: हाल के महीनों में आयोजित बड़ी और प्रमुख परीक्षाओं में सामने आई गड़बड़ियों के बीच सरकार देश की सार्वजनिक परीक्षा व्यवस्था में व्यापक पैमाने पर बदलाव की तैयारी कर रही है। इसके तहत सरकार ने छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों और अन्य हितधारकों से सुझाव मांगे हैं। देश की परीक्षा व्यवस्था में बदलाव पर आम जनता 13 सितंबर 2026 तक सुझाव दे सकती है। इसके लिए पहले ही नंदन नीलकेणी की अगुवाई में एक उच्च स्तरीय टास्क फोर्स (HPTF) बनाई गई है। यह फोर्स नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित सार्वजनिक परीक्षा समेत उसके आयोजन, सुरक्षा, डिजाइन और गवर्नेंस में बड़े सुधारों की जांच करेगी और सुझाव देगी।

टास्क फोर्स संस्थागत व्यवस्था और प्रक्रिया को मजबूत करने, परीक्षा की शुचिता और सुरक्षा में सुधार करने, सही तकनीक का इस्तेमाल करने और एग्जामिनेशन इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने के तरीकों की जांच कर रही है। यह परीक्षा प्रक्रिया के दौरान सुगमता और समावेश को बढ़ावा देने और छात्रों की सुरक्षा के तरीकों पर भी गौर कर रही है। इसका मकसद एक ऐसी सार्वजनिक परीक्षा व्यवस्था बनाना है जो मजबूत, सुरक्षित, पारदर्शी, बराबर और भविष्य के लिए तैयार हो।

कौन सुझाव दे सकता है?

एचपीटीएफ ने छात्रों और उम्मीदवारों, अभिभावकों, शिक्षकों और शैक्षिक संस्थानों, परीक्षा आयोजित करने वाली और टेस्ट इंडेंट करने वाली संस्थाओं, विषय विशेषज्ञों, तकनीकी पेशेवरों, औद्योगिक संस्थानों और सिविल सोसाइटी संस्थानों सहित कई स्टेकहोल्डर्स से सुझाव मांगे हैं। दूसरे इच्छुक स्टेकहोल्डर भी अपने इनपुट दे सकते हैं।

इन मुख्य बिंदुओं पर विचार किया जा रहा है

सुझावों में सार्वजनिक परीक्षा का आयोजन और सुरक्षा, परीक्षा तंत्र का प्रारूप और मूल्यांकन का तरीका, गवर्नेंस और जवाबदेही, और संस्थागत व्यवस्था शामिल हो सकते हैं।स्टेकहोल्डर परीक्षा में होने वाली गड़बड़ियों को रोकने, उनका पता लगाने और उन्हें ठीक करने के साथ-साथ सुरक्षित कंप्यूटर-बेस्ड टेस्टिंग सहित टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल पर भी इनपुट दे सकते हैं।

टास्क फोर्स परीक्षा व्यवस्था का ढांचा बनाने और उसे बढ़ाने और सोशल, इकोनॉमिक, रीजनल और भाषाई ग्रुप्स तक पहुंच को बेहतर बनाने के लिए एक समावेशी परीक्षा फ्रेमवर्क विकसित करने पर भी सुझाव मांग रही है। दूसरे बिंदुओं में पारदर्शिता, शिकायत का समाधान, स्टेकहोल्डर कम्युनिकेशन और परीक्षा प्रक्रिया के दौरान छात्रों की भलाई को बढ़ावा देने के उपाय शामिल हैं। स्टेकहोल्डर कोई और उपाय भी सुझा सकते हैं जो परीक्षा व्यवस्था में वैल्यू ऐड कर सके।

सुझाव देने की आखिरी तारीख

एचपीटीएफ ने स्टेकहोल्डर्स से 13 सितंबर, 2026 तक अपने सुझाव देने को कहा है। सुझाव आधिकारिक वेबसाइट, फोन, WhatsApp या ईमेल से इंग्लिश, हिंदी और दूसरी रीजनल भाषाओं में दिए जा सकते हैं।

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Highest Paying Jobs: सॉफ्टवेयर इंजीनियर नहीं, ये लोग कमा रहे लाखों! PG मालिक से चायवाले तक की लिस्ट वायरल

भारत में अक्सर युवाओं को बताया जाता है कि IIT की पढ़ाई, FAANG जैसी बड़ी टेक कंपनियों में नौकरी या Data Structures and Algorithms (DSA) में महारत हासिल करना अच्छी कमाई का सबसे आसान रास्ता है। लेकिन टेक और AI कमेंटेटर साक्षी ने सोशल मीडिया पर एक मजेदार लिस्ट शेयर कर इस सोच को ही उलट दिया। उन्होंने भारत में इस समय सबसे ज्यादा कमाई करने वाले लोगों की एक मजाकिया रैंकिंग साझा की, जिसमें सॉफ्टवेयर इंजीनियर टॉप पर नहीं, बल्कि काफी पीछे नजर आए। इस लिस्ट में PG मालिक, मकान मालिक, पानी के टैंकर वाले और चाय-सिगरेट की दुकान चलाने वाले शामिल हैं।

नंबर-1 पर PG मालिक, एक कमरे से लाखों की कमाई

साक्षी की इस मजेदार रैंकिंग में सबसे ऊपर PG मालिक को रखा गया। उन्होंने बताया कि शहरों में बढ़ती नौकरी और किराए की मांग का फायदा PG के मालिकों को मिल रहा है। उनके मुताबिक, एक कमरे में तीन लोगों को रखा जाता है और हर व्यक्ति से करीब ₹10,000 से ₹15,000 तक किराया लिया जाता है। इस हिसाब से कुछ PG मालिक किराया और दूसरे खर्च निकालने के बाद भी ₹1 लाख से ₹1.5 लाख महीने तक कमा सकते हैं। यही वजह है कि पोस्ट में PG बिजनेस को आज के दौर के सबसे कमाई वाले कामों में से एक बताया गया।

बेंगलुरु के मकान मालिक भी पीछे नहीं

लिस्ट में तीसरे नंबर पर बेंगलुरु के मकान मालिक का जिक्र किया गया। टेक सिटी में किराए की बढ़ती मांग को लेकर अक्सर सोशल मीडिया पर चर्चाएं होती रहती हैं। पोस्ट में मजाकिया अंदाज में बताया गया कि दो बेडरूम का फ्लैट खरीदकर उसे करीब ₹50,000 महीने के किराए पर देना, हर साल किराया बढ़ाना और WhatsApp पर सिर्फ ‘last price’ लिखकर बातचीत खत्म करना भी कमाई का शानदार तरीका बन गया है।

पानी के टैंकर वाले भी बने ‘बिजनेस किंग’

बेंगलुरु में पानी की समस्या किसी से छिपी नहीं है। इसी को लेकर साक्षी ने पानी के टैंकर संचालकों को भी अपनी लिस्ट में जगह दी। उन्होंने मजाकिया अंदाज में लिखा कि ये लोग बेंगलुरु का ही पानी वापस बेंगलुरु के लोगों को बेचते हैं। पानी की कमी के समय टैंकरों की मांग बढ़ने से इस कारोबार की कमाई भी बढ़ जाती है।

ब्रोकरों की कमाई का भी किया जिक्र

रैंकिंग में प्रॉपर्टी ब्रोकर भी शामिल हैं। पोस्ट के मुताबिक, कुछ ब्रोकर किरायेदारों को कई ऐसे घर दिखाते हैं जो उनकी जरूरत के मुताबिक नहीं होते और आखिर में डील होने पर किरायेदार और मकान मालिक, दोनों से करीब एक महीने के किराए के बराबर कमीशन ले लेते हैं। बेंगलुरु जैसे शहरों में लगातार घर बदलने वाले किरायेदारों की बड़ी संख्या के कारण यह काम भी अच्छी कमाई वाला बताया गया।

टेक पार्क के बाहर चाय-सिगरेट वाला भी हिट

इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर जिस शख्स को रखा गया, वह शायद सबसे ज्यादा चौंकाने वाला नाम है टेक पार्क के बाहर चाय, सिगरेट और स्नैक्स बेचने वाला दुकानदार। साक्षी ने उसे टेक इंडस्ट्री का ‘अनसंग हीरो’ बताया। उनके अनुसार, हजारों सॉफ्टवेयर इंजीनियर रोजाना चाय, सिगरेट और स्नैक्स के लिए ऐसी दुकानों पर निर्भर रहते हैं। पोस्ट में अनुमान लगाया गया कि अच्छी लोकेशन वाली ऐसी दुकान से कुछ दुकानदार ₹30,000 से ₹50,000 महीने तक कमा सकते हैं।

न MBA, न फंडिंग, फिर भी कमाई!

इस पूरी पोस्ट का सबसे मजेदार हिस्सा यही था। चाय-सिगरेट की दुकान के लिए न किसी MBA की जरूरत है, न pitch deck की और न ही startup funding की। साक्षी ने इसी अंदाज में टेक इंडस्ट्री पर तंज कसते हुए बताया कि जहां इंजीनियर नौकरी और प्रमोशन के लिए लगातार मेहनत कर रहे हैं, वहीं कुछ छोटे कारोबारी रोजमर्रा की जरूरतों के दम पर अच्छी कमाई कर रहे हैं।

सॉफ्टवेयर इंजीनियरों पर आया सबसे बड़ा तंज

पोस्ट के अंत में सॉफ्टवेयर इंजीनियरों को लेकर सबसे मजेदार टिप्पणी की गई। साक्षी ने लिखा कि जब बाकी लोग अलग-अलग तरीकों से कमाई कर रहे हैं, तब सॉफ्टवेयर इंजीनियर रात 2 बजे तक DSA के सवाल हल कर रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि अगली salary hike अच्छी होगी।

सोशल मीडिया यूजर्स ने भी लिए मजे

साक्षी की पोस्ट को सोशल मीडिया पर जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली और इसे खबर लिखने तक 1.5 लाख से ज्यादा व्यूज मिले। यूजर्स ने भी अपने-अपने अंदाज में इस रैंकिंग पर मजेदार प्रतिक्रियाएं दीं। एक यूजर ने मजाक करते हुए कहा कि सॉफ्टवेयर इंजीनियरों ने कमाई का सबसे मुश्किल रास्ता चुना है और उन्हें DSA की तैयारी के बजाय पानी का टैंकर खरीद लेना चाहिए था। एक अन्य यूजर ने बेंगलुरु का असली ‘product-market fit’ AI या सॉफ्टवेयर नहीं, बल्कि चाय, प्रॉपर्टी और मेट्रो से दूरी का गणित बताया। एक यूजर ने टैक्स को लेकर भी तंज कसा और कहा कि इन कामों में कमाई करने वालों में शायद सॉफ्टवेयर इंजीनियर ही ऐसा व्यक्ति है जो नियमित रूप से इनकम टैक्स और ITR जैसी चीजों से जूझता है।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।

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नेपाल में तबाही के बाद यूपी अलर्ट पर! सीमावर्ती जिलों में बढ़ाई गई निगरानी, राकेश टिकैत भी बाढ़ में फंसे

Nepal Flood: बुधवार को उत्तर प्रदेश प्रशासन ने महाराजगंज और कुशीनगर जैसे सीमावर्ती जिलों में निगरानी बढ़ा दी है। साथ ही, नेपाल में आई भयानक अचानक बाढ़ के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ने की आशंका को देखते हुए किसी भी आपात स्थिति से निपटने की तैयारी शुरू कर दी है। अधिकारियों ने बताया कि नेपाल में आई बाढ़ से इन दोनों जिलों में गंडक और नारायणी नदियों का जलस्तर बढ़ने की संभावना है।

वहीं, राहत आयुक्त कार्यालय ने नेपाल में बाढ़ से प्रभावित उत्तर प्रदेश के निवासियों के लिए एक एडवाइजरी जारी की है। इसमें कहा गया है कि अगर राज्य का कोई व्यक्ति नेपाल में फंसा है या उसे किसी मदद की जरूरत है, तो उनके रिश्तेदार तुरंत राज्य के हेल्पलाइन नंबर 1070 पर संपर्क करें।

माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के कई लोग पड़ोसी देश में फंसे हुए हैं। किसान नेता राकेश टिकैत, जो अपने साथियों के साथ सड़क मार्ग से नेपाल गए थे, पोखरा में फंस गए।

बता दें कि बाढ़ ने चितवा, रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग जिलों में कई सड़कों और पुलों को बहा दिया है।

भाकियू के नेता जारी किया वीडियो संदेश

भारतीय किसान यूनियन के नेता ने एक वीडियो संदेश में कहा, “हालात को देखते हुए हम कल फ्लाइट से काठमांडू पहुंचेंगे और वहां से फ्लाइट से दिल्ली जाएंगे। हम अपनी गाड़ियां वहीं छोड़ देंगे क्योंकि सड़क मार्ग से यात्रा करना संभव नहीं होगा।”

उन्होंने कहा कि यूपी के किसान संगठनों के सदस्य नेपाल में हैं और उनसे कहा गया है कि वे वहां फंसे भारतीयों और स्थानीय लोगों की मदद करें।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नेपाल में अचानक आई बाढ़ से हुए नुकसान को गंभीर चिंता का विषय बताया और प्रभावित सभी लोगों की सुरक्षा और भलाई के लिए भगवान पशुपतिनाथ से प्रार्थना की। साथ ही स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिया कि वे नदी के जलस्तर पर कड़ी नजर रखें और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क रहें।

महराजगंज में अलर्ट, गंडक नदी की 24 घंटे निगरानी

वहीं, महाराजगंज में जिला प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है और गंडक नदी की चौबीसों घंटे निगरानी के आदेश दिए हैं, क्योंकि पानी का बढ़ा हुआ बहाव भोटेकोशी-त्रिशूली नदी प्रणाली के जरिए निचले इलाकों को प्रभावित कर सकता है।

जिला मजिस्ट्रेट गौरव सिंह सोगरवाल ने राजस्व विभाग, पुलिस, SDRF और अन्य एजेंसियों को अलर्ट पर रहने और जरूरत पड़ने पर निचले और नदी के किनारे बसे जोखिम वाले इलाकों से लोगों को सुरक्षित, ऊंचे स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था करने का निर्देश दिया है।

प्रशासन ने निवासियों से अपील की है कि वे नदियों, नालों और पानी से भरे इलाकों के पास न जाएं और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें, साथ ही बच्चों, बुज़ुर्गों और मवेशियों को जोखिम वाले इलाकों से दूर रखें।

कुशीनगर में गांवों को खाली कराने का आदेश, प्रशासन अलर्ट

कुशीनगर में जिला प्रशासन ने मर्चहवा, शिवपुर समेत कई गांवों को खाली कराने का आदेश दिया है। साथ ही लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने की सलाह देने के लिए लगातार लाउडस्पीकर से ऐलान भी किया जा रहा है।

अधिकारियों के मुताबिक, नारायणी नदी का जलस्तर अगले दो घंटे में और बढ़ सकता है। इसे देखते हुए प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने को कहा है।

जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने बताया कि नेपाल में हुई भारी बारिश से पैदा हुई स्थिति को देखते हुए सभी संबंधित विभागों को अलर्ट कर दिया गया है।

उन्होंने आगे कहा कि खड्डा तहसील में नारायणी नदी के किनारे बाढ़ की आशंका वाले इलाकों में रहने वाले लोगों को खास तौर पर सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

गांव वालों से कहा गया है कि वे सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर जाने के लिए तैयार रहें, क्योंकि नदी का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में बाढ़ आ सकती है।

खड्डा तहसील के दियारा इलाके में शिवपुर, हरिहरपुर, नारायणपुर, मरचहवा और बसंतपुर गांवों में खास निगरानी रखी जा रही है, क्योंकि नेपाल में बारिश से नारायणी नदी का जलस्तर प्रभावित हो सकता है।

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हर 1,000 व्यूज पर ₹60! इस चीनी प्लेटफॉर्म ने क्रिएटर्स का खींचा ध्यान, YouTube को देगा कड़ी टक्कर

चीनी वीडियो-शेयरिंग प्लेटफॉर्म Bilibili अपने घरेलू बाजार से बाहर तेजी से विस्तार कर रहा है। ऐसे में एक खास कमाई के आंकड़े ने दुनिया भर के क्रिएटर्स का ध्यान अपनी ओर खींचा है। X पर RT की एक पोस्ट के अनुसार, Bilibili क्रिएटर्स को हर 1,000 व्यूज के लिए लगभग $0.70 (करीब 60 रुपये) का भुगतान कर रहा है। अगर यह दावा सही है, तो यह कदम प्लेटफॉर्म को कंटेंट क्रिएटर्स को आकर्षित करने में मदद कर सकता है क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर YouTube को टक्कर दे रहा है। हालांकि, कंपनी ने खुद इस पेमेंट की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

Bilibili की रिपोर्टेड पेमेंट

यह जानकारी RT के जरिए सामने आई, जिसने Bilibili के क्रिएटर प्रोग्राम पर चर्चा करते हुए यह आंकड़ा बताया। अगर यह सही है, तो एक मिलियन व्यूज पाने वाले क्रिएटर्स टैक्स और प्लेटफॉर्म के किसी भी एडजस्टमेंट से पहले लगभग $700 कमा सकते हैं। हालांकि, Bilibili के ऑफिशियल क्रिएटर प्रोग्राम डॉक्यूमेंटेशन में किसी तय CPM या RPM का जिक्र नहीं है।

इसके बजाय, प्लेटफॉर्म का कहना है कि कमाई ऑडियंस की लोकेशन, एडवर्टाइजर की डिमांड, कंटेंट कैटेगरी और मॉनेटाइजेशन प्रोडक्ट्स जैसी चीजों के आधार पर अलग-अलग हो सकती है। इसमें यह भी बताया गया है कि अनुमानित रेवेन्यू को इनवैलिड ट्रैफिक, रिफंड, फ्रॉड का पता लगाने, टैक्स और पॉलिसी लागू करने के आधार पर एडजस्ट किया जा सकता है।

मॉनेटाइजेशन के लिए जरूरी शर्तें

Bilibili के क्रिएटर प्रोग्राम की पॉलिसी के अनुसार, मॉनेटाइजेशन के लिए अप्लाई करने से पहले क्रिएटर्स के पास कम से कम 100 सब्सक्राइबर और 2,000 वैलिड पब्लिक व्यूज होने चाहिए। हालांकि, इन शर्तों को पूरा करने के बाद भी मोनेटाइजेशन मिलना तय नहीं है। क्योंकि प्लेटफॉर्म हर चैनल की जांच करता है। इसमें कंटेंट ओरिजिनल है या नहीं, कॉपीराइट नियमों का पालन हो रहा है या नहीं, कम्युनिटी गाइडलाइंस का उल्लंघन तो नहीं हुआ और अकाउंट की स्थिति जैसी चीजें देखी जाती हैं।

यह प्लेटफॉर्म खरीदे गए व्यूज, फेक सब्सक्राइबर, ऑटोमेटेड एंगेजमेंट और दूसरे तरह के बनावटी ट्रैफिक पर भी रोक लगाता है। इसके अलावा, क्रिएटर्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके द्वारा अपलोड किए गए सभी कंटेंट के मालिकाना हक उनके पास हों या उन्हें उस कंटेंट से कमाई करने की अनुमति मिली हो।

Bilibili का ग्लोबल विस्तार जारी है

यह पेमेंट की जानकारी तब सामने आई है जब Bilibili अपने इंटरनेशनल प्लान को तेजी से आगे बढ़ा रही है। सेमाफोर (Semafor) की एक पुरानी रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने अपना इंटरनेशनल ऐप फिर से लॉन्च किया है। इसके अलावा, वह इंग्लिश भाषा की वेबसाइट बना रही है और अमेरिका, यूरोप, जापान और लैटिन अमेरिका जैसे मार्केट में कम्युनिटी मैनेजर की भर्ती शुरू कर दी है।

बता दें कि Bilibili खुद को ऐसे क्रिएटर्स के लिए एक डेस्टिनेशन के तौर पर भी पेश कर रही है, जो नए ऑडियंस तक पहुंचना चाहते हैं और साथ ही कमाई का नए जरिया बनाना चाहते हैं। विज्ञापन के अलावा, कंपनी एक मार्केटप्लेस भी बना रही है जो स्पॉन्सरशिप के मौकों के लिए क्रिएटर्स को ब्रांड्स से जोड़ेगा।

हालांकि, प्रति 1,000 व्यूज पर $0.70 के पेमेंट की जानकारी ने काफी दिलचस्पी पैदा की है, लेकिन क्रिएटर्स को यह ध्यान रखना चाहिए कि Bilibili ने अभी तक आधिकारिक तौर पर स्टैंडर्ड पेमेंट रेट की पुष्टि नहीं की है। फिलहाल, प्लेटफॉर्म की पब्लिश्ड पॉलिसी में सिर्फ यह बताया गया है कि कमाई कई बातों पर निर्भर करेगी और जैसे-जैसे इसका ग्लोबल क्रिएटर इकोसिस्टम विकसित होगा, इसमें बदलाव हो सकता है।

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