Indian Railways timing: भारतीय रेलवे ने 2 ‘वंदे भारत’ ट्रेनों की टाइमिंग बदली, सफर से पहले चेक करें नया शेड्यूल

Indian Railways timing: भारतीय रेलवे ने यात्रियों के लिए बड़ा अपडेट जारी किया है। ‘वाराणसी-रांची’ और ‘वाराणसी-देवघर’ रूट पर चलने वाली दो ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ ट्रेनों के समय में बदलाव किया गया है। हमारे सहयोगी ‘न्यूज 18’ के मुताबिक, दोनों ट्रेनों की नई टाइमिंग 2 सितंबर 2026 से लागू होगी।

ऐसे में इन ट्रेनों से यात्रा करने वाले यात्रियों को स्टेशन पहुंचने से पहले नया शेड्यूल जरूर देख लेना चाहिए। दोनों वंदे भारत ट्रेनों के वाराणसी से रवाना होने के समय में 10-10 मिनट की कटौती की गई है। इसलिए 2 सितंबर के बाद यात्रा करने वाले यात्रियों को पुराने समय के आधार पर स्टेशन पहुंचने से बचना चाहिए।

‘वाराणसी-रांची वंदे भारत’ की टाइमिंग बदली

ट्रेन नंबर 20888/20887 वाराणसी-रांची-वाराणसी ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ का संचालन दक्षिण पूर्व रेलवे (SER) करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 मार्च 2024 को इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाई थी। यह देश की 49वीं ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ थी। 18 मार्च 2024 से इसका नियमित परिचालन शुरू हुआ।

यह ट्रेन मंगलवार को छोड़कर सप्ताह के बाकी सभी दिन चलती है। वाराणसी से रांची के बीच करीब 536 किलोमीटर की दूरी यह ट्रेन लगभग 7 घंटे 50 मिनट में पूरी करती है। रास्ते में ट्रेन पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन, सासाराम, गया, कोडरमा, हजारीबाग रोड, पारसनाथ, बोकारो स्टील सिटी और मुरी जैसे रेलवे स्टेशनों पर रुकती है।

नई टाइमिंग इस प्रकार है:-

  • फिलहाल ट्रेन नंबर 20888 वाराणसी से शाम 4:05 बजे रवाना होती है। अब 2 सितंबर से यह ट्रेन शाम 3:55 बजे वाराणसी से रवाना होगी। यानी इसके डिपार्चर टाइमिंग में 10 मिनट का बदलाव किया गया है।
  • हालांकि, वाराणसी के आगे ट्रेन के शेड्यूल में कोई बदलाव नहीं होगा। इस ट्रेन में यात्रियों के लिए AC चेयर कार और एग्जीक्यूटिव चेयर कार की सुविधा है। वाराणसी से रांची तक एसी चेयर कार का किराया 1,470 रुपये, जबकि एग्जीक्यूटिव चेयर कार का किराया 2,695 रुपये है।

वाराणसी-देवघर वंदे भारत भी 10 मिनट पहले चलेगी

  • रेलवे ने ट्रेन नंबर 22500 वाराणसी-देवघर वंदे भारत एक्सप्रेस के समय में भी बदलाव किया है। इसका नया टाइमटेबल भी 2 सितंबर 2026 से लागू होगा।
  • अभी यह ट्रेन वाराणसी से सुबह 6:20 बजे रवाना होती है। अब यह सुबह 6:10 बजे रवाना होगी। यानी यात्रियों को अब ट्रेन पकड़ने के लिए 10 मिनट पहले स्टेशन पहुंचना होगा।
  • भारतीय रेलवे के मुताबिक, वाराणसी के बाद दूसरे स्टेशनों पर ट्रेन की टाइमिंग में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

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LAPL Automotive IPO Listing: ₹135 पर लिस्ट ₹94 का शेयर, आईपीओ को मिली थी 344 गुना बोली

LAPL Automotive IPO Listing: दोपहिया से लेकर बस तक के लिए ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स और एक्सेसरीज बनाने वाली एलएपीएल ऑटोमोटिव के शेयरों की आज BSE SME पर धांसू एंट्री हुई। इसके आईपीओ को निवेशकों का जबरदस्त रिस्पांस मिला था और ओवरऑल इसे 344 गुना से अधिक बोली मिली थी। आईपीओ के तहत ₹94 के भाव पर शेयर जारी हुए हैं। आज BSE SME पर इसकी ₹135.00 पर एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को 43.62% का लिस्टिंग गेन (Krystal Integrated Services Listing Gain) मिला। हालांकि आईपीओ निवेशकों की खुशी थोड़ी ही देर में थोड़ी फीकी हो गई जब शेयर टूट गए। टूटकर यह ₹130.00 (LAPL Automotive Share Price)  पर आ गया यानी कि आईपीओ निवेशक अब 38.30% मुनाफे में हैं।

LAPL Automotive IPO के पैसे कैसे होंगे खर्च

एलएपीएल ऑटोमोटिव का ₹32 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 6-10 अगस्त तक खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों का धांसू रिस्पांस मिला था और ओवरऑल यह 344.31 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 200.23 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 433.26 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 387.78 गुना भरा था।

इस आईपीओ के तहत ₹10 की फेस वैल्यू वाले 34,46,400 नए शेयर जारी हुए हैं। इन शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹19.56 करोड़ औरंगाबाद के औरिक सिटी में एक अतिरिक्त मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने, ₹4.79 करोड़ कर्ज हल्का करने, ₹3.24 करोड़ आईपीओ से जुड़े खर्चों को भरने और ₹4.81 करोड़ आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।

LAPL Automotive के बारे में

एलएपीएल ऑटोमोटिव कई प्रकार के ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स और एक्सेसरीज की डिजाइनिंग कर उन्हें बनाती है और सप्लाई करती है। इसे ऑटोमोटिव लाइटिंग और सिग्नलिंग प्रोडक्ट्स बनाने में महारत हासिल है। इसकी मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी महाराष्ट्र के औरंगाबाद में है। इसके प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में लाइटिंग डिविजन के तहत टेल लैम्प्स, ब्लिंकर लैम्प्स और हेडलैम्प्स हैं तो मोटर डिविजन के तहक स्टार्टर मोटर्स, वाइपर मोटर्स और रोटर्स हैं। इसके अलावा कंपनी के प्रोडक्ट्स पोर्टफोलियो में मिरर डिविजन के तहत दोपहिया और तिपहिया गाड़ियों के लिए रियर-व्यू मिरर्स हैं।

कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2024-26 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना 99% से अधिक की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹8.63 करोड़ और टोटल इनकम 24% से अधिक के सीएजीआर से ₹94.32 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹7.84 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹16.45 करोड़ पड़े थे।

वंदे भारत ट्रेनों के लिए पार्ट्स बनाने वाली कंपनी लाएगी ₹1350 करोड़ का IPO

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Gland Pharma के शेयर बन सकते हैं रॉकेट, नोमुरा ने दिया ₹3330 का टारगेट प्राइस

ग्लैंड फार्मा का शेयर 12 अगस्त को 1.69 फीसदी गिरकर 2,875 रुपये पर बंद हुआ। लेकिन, यह शेयर एक हफ्ते में करीब 11 फीसदी चढ़ा है। ब्रोकरेज फर्म नोमुरा ने इस शेयर को खरीदने की अपनी सलाह बनाए रखी है। इसकी वजह इसके जून तिमाही के अच्छे नतीजे हैं।

इस साल 68 फीसदी चढ़ा शेयर 

Gland Pharma का शेयर इस साल करीब 68 फीसदी चढ़ा है। कंपनी का प्रदर्शन जून तिमाही में अच्छा रहा। इसका रेवेन्यू साल दर साल आधार पर इस दौरान 19.6 फीसदी बढ़ा। EBITDA साल दर साल आधार पर 33.1 फीसदी बढ़ा। टैक्स बाद प्रॉफिट साल दर साल आधार पर 47.1 फीसदी बढ़ा।

जून तिमाही में शानदार प्रदर्शन

कंपनी के जून तिमाही के कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू में CDMO सेगमेंट की हिस्सेदारी करीब 50 फीसदी रही। Cenexi को छोड़ दिया जाए तो रेवेन्यू में सीडीएमओ की हिस्सेदारी करीब 29 फीसदी रही। साल दर साल आधार पर इसकी ग्रोथ करीब 37 फीसदी रही। कंपनी का ग्रॉस मार्जिन साल दर साल आधार पर फ्लैट रहा। हालांकि, EBITDA मार्जिन 276 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ा।

टेक-ट्रांसफर/सीडीएमओ पार्टनरशिप पर फोकस

नोमुरा ने कहा है कि ग्लैंड फार्मा ने आईपी-आधारित प्रोग्राम की जगह टेक-ट्रांसफर/सीडीएमओ पार्टनरशिप पर फोकस बढ़ाया है। इस मॉडल को कंपनी के इंजेक्टेबल मैन्युफैक्चरिंग कपैबिलिटी, यूरोप में सेनेक्सी की मौजूदगी और कंपनी के स्ट्रॉन्ग रेगुलेटरी और क्वालिटी ट्रैक रिकॉर्ड का सपोर्ट मिलेगा।

मोतीलाल ओसवाल ने भी दी खरीदने की सलाह

ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने ग्लैंड फार्मा के शेयर के लिए 3,080 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। उसने कहा है कि कंपनी का प्रदर्शन जून तिमाही में उम्मीद से बेहतर रहा। इसमें अमेरिकी और यूरोपीय यूनियन मार्केट्स में कंपनी की अच्छी सेल्स ग्रोथ का हाथ रहा। हालांकि, दूसरे बाजारों में प्रदर्शन कमजोर रहा। अमेरिकी और यूरोपीय यूनियन मार्केट्स में अच्छे प्रदर्शन में नए प्रोडक्ट लॉन्चेज के साथ ही मौजूदा प्रोडक्ट्स की अच्छी सेल्स ग्रोथ का हाथ है।

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शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर दबाव

12 अगस्त को शेयर बाजारों पर दबाव दिखा। निफ्टी 0.15 फीसदी यानी 35 अंक गिरकर 24,435 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 0.24 फीसदी यानी 187 अंक गिरकर 77,966 पर क्लोज हुआ। हालांकि, बैंक निफ्टी में 0.77 फीसदी की तेजी दिखी। निफ्टी फार्मा इंडेक्स भी हरे निशान में बंद हुआ।

वंदे भारत ट्रेनों के लिए पार्ट्स बनाने वाली कंपनी लाएगी ₹1350 करोड़ का IPO

वंदे भारत के लिए पार्ट्स बनाने वाली निफा 1,350 करोड़ रुपये का आईपीओ लाने का प्लान बना रही है। मामले से जुड़े लोगों ने यह जानकारी दी। निफा कोलकाता की कंपनी है। इसने इश्यू के प्रबंधन के लिए नोमुरा और एक्सिस कैपिटल को एडवाइजर नियुक्त किया है। शेयर बाजार का सेंटीमेंट बेहतर हुआ है। इससे आईपीओ बाजार में हलचल बढ़ी है।

आईपीओ के पैसे का इस्तेमाल उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए

Nipha के आईपीओ में नए शेयर इश्यू करने की संभावना है। कंपनी इश्यू से मिले पैसे का इस्तेमाल उत्पादन क्षमता बढ़ाने, कर्ज चुकाने और बिजनेस से जुड़ी दूसरी जरूरतों के लिए करेगी। अभी इश्यू के बारे में बातचीत जारी है। इससे बाद में इश्यू के साइज और दूसरी चीजों में बदलाव हो सकता है।

आधुनिकीकरण पर रेलवे के फोकस से होगा फायदा 

आईपीओ के प्लान की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने बताया, “इनवेस्टर्स के बीच मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस की अच्छी डिमांड है। रेलवे के आधुनिकीकरण के लिए पूंजीगत खर्च बढ़ा है। इसका फायदा निफा जैसी कंपनियों को मध्यम से लंबी अवधि में मिलेगा।”

कंपनी की 10 मैन्युफैक्चरिंग इकाइयां हैं

निफा की 10 मैन्युफैक्चरिंग इकाइयां हैं। इनमें से 9 पश्चिम बंगाल में है और एक हरियाणा में है। कंपनी रेलवे के अलावा एग्रीकल्चर, इलेक्ट्रिकल-स्विच गियर और इंजीनियरिंग इंडस्ट्रीज को प्रोडक्ट्स सप्लाई करती है। आईपीओ के प्लान के बारे में जानने के लिए कंपनी को भेजे गए ईमेल का जवाब नहीं मिला।

कंपनी के रेलवे पोर्टफोलियो में कई प्रोडक्ट्स शामिल

कंपनी वंदे भारत के लिए कंपोनेंट्स की सप्लाई के साथ ही रेलवे को LHB कोच और EMU सप्लाई करती है। इसके रेलवे पोर्टफोलियो में लोकोमोटिव कास्टिंग्स, ट्रैक और पर्मानेंट-वे कंपोनेंट्स, ट्रेन कपलिंग और ड्राफ्ट सिस्टम्स, फ्रेट रेल प्रोडक्ट्स और रेल-व्हील सेट्स शामिल हैं।

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2030 तक वंदे भारत ट्रेनों की संख्या बढ़ाकर 800 करने का प्लान

आधुनिकीकरण पर रेलवे के फोकस का फायदा निफा को मिलेगा। सरकार वंदे भारत ट्रेनों की संख्या बढ़ाना चाहती है। दिसंबर 2025 तक वंदे भारत ट्रेनों की संख्या 164 थी। सरकार का प्लान 2030 तक इसे बढ़ाकर 800 और 20247 तक 4,500 करने का प्लान है। FY26 में निफा का प्रदर्शन अच्छा रहा। कंपनी का कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू बढ़कर 634 करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले यह 475 करोड़ रुपये था। इसका ऑपरेटिंग मार्जिन करीब 19 फीसदी था।

जल्द शुरू होगी बेंगलुरु-मुंबई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन, 24 नहीं सिर्फ 16 घंटे में पूरा होगा सफर! जानें रूट, किराया और स्टॉपेज की लिस्ट

Bengaluru-Mumbai Vande Bharat sleeper: बेंगलुरु और मुंबई के बीच सफर करने वाले रेल यात्रियों को जल्द ही आरामदायक सफर मिलने वाला है। जल्द ही बेंगलुरु और मुंबई के बीच वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की नई सुविधा शुरू हो सकती है। साउथ वेस्टर्न रेलवे ने इस रूट के लिए दो वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट तैयार कर लिए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, जल्द ही तय किए गए रूट पर ट्रेन का ट्रायल किया जाएगा। सेवा शुरू करने से पहले रिसर्च डिजाइन्स एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन (RDSO) की ओर से स्पीड टेस्ट भी किया जाएगा, ताकि ट्रेन की रफ्तार और सुरक्षा की जांच हो सके।

16-16 होंगे कोच

अधिकारियों के मुताबिक, जरूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही वंदे भारत स्लीपर सेवा की शुरुआत होगी। वहीं अभी तक रेलवे की ओर से ट्रेन के चलने की तारीख और पूरा टाइमटेबल जारी नहीं किया गया है। News18 के मुताबिक, दोनों वंदे भारत ट्रेनों में 16-16 कोच हैं, जिन्हें बेंगलुरु स्थित BEML ने चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) के कार्यक्रम के तहत बनाया है। इस सेवा के शुरू होने से दोनों शहरों के बीच रात में सफर करने वाले यात्रियों को तेज और आरामदायक रेल यात्रा का ऑप्शन मिल सकेगा।

जल्द ही होगी तारीखों की घोषणा

बेंगलुरु-मुंबई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को शहर के किस स्टेशन से चलाया जाएगा, इस पर अभी फैसला नहीं हुआ है। रेलवे अधिकारी तय करेंगे कि ट्रेन KSR बेंगलुरु स्टेशन से शुरू होगी या सर एम. विश्वेश्वरैया टर्मिनल (SMVT) से। ट्रेन के शुरुआती स्टेशन का फैसला होने के बाद ही उसके रखरखाव के लिए मुख्य सुविधा केंद्र भी तय किया जाएगा। ट्रेन का ट्रायल और जरूरी जांच पूरी होने के बाद रेलवे इसकी समय-सारणी और शुरू होने की तारीख की घोषणा करेगा।

इन शहरों से होकर जाएगी ट्रेन

बेंगलुरु-मुंबई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के प्रस्तावित रूट में कर्नाटक के कई प्रमुख शहर शामिल होंगे। ट्रेन बेंगलुरु से चलकर रायचूर, यादगीर और कलबुर्गी होते हुए मुंबई पहुंचेगी। इस पूरे सफर की दूरी करीब 1,137 किलोमीटर होगी। यह रेल मार्ग पूरी तरह बिजली से चलने वाली ट्रेनों के लिए तैयार है और डबल लाइन होने के कारण यहां ट्रेन संचालन को बेहतर तरीके से किया जा सकता है। रूट के ज्यादातर हिस्सों पर ट्रेन 130 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से चल सकती है। वहीं इस ट्रेन में 3AC का किराया करीब ₹3,000 रहने की उम्मीद है।

अभी यात्रा करने में लगते हैं 24 घंटे

बेंगलुरु और मुंबई के बीच मौजूदा रेल सेवाओं में यात्रियों को सफर पूरा करने में करीब 24 घंटे लगते हैं। नई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के आने से इस रूट पर यात्रा पहले के मुकाबले काफी कम समय में पूरी होने की उम्मीद है। अनुमान है कि सफर का समय करीब 16 घंटे तक हो सकता है, लेकिन ट्रेन की सही गति और यात्रा अवधि का पता ट्रायल और अंतिम टाइमटेबल जारी होने के बाद ही चलेगा।

हुबली को क्यों नहीं चुना गया

बेंगलुरु-मुंबई वंदे भारत स्लीपर के लिए चुना गया रास्ता हुबली वाले विकल्प की तुलना में छोटा और तेज है। हुबली के रास्ते की दूरी करीब 1,216 किलोमीटर होती और इस रूट के कुछ हिस्से सिंगल लाइन वाले हैं। इसके अलावा कई जगहों पर ट्रेन की रफ्तार भी सीमित रहती है। इसी वजह से तेज स्लीपर ट्रेन के लिए मौजूदा रूट को ज्यादा बेहतर विकल्प माना जा रहा है।

राजधानी सा आराम, बुलेट जैसी रफ्तार, वंदे भारत ने बदल दिए 6 ट्रेन के रुट!

आज के टाइम में कम समय में लंबी दूरी का सफर करने के लिए वंदे भारत एक्सप्रेस बेहतरीन ऑप्शन है। देश के कई प्रमुख शहरों के बीच चलने वाली ये ट्रेनें हाई स्पीड, मॉडर्न सुविधाओं और कम ट्रैवल टाइम के लिए जानी जाती हैं। ये रही वंदे भारत ट्रेनें जो कुछ ही घंटों में लंबी दूरी तय कर देती हैं।

 

कोयंबटूर-बेंगलुरु सफर

कोयंबटूर-बेंगलुरु कैंटोनमेंट वंदे भारत एक्सप्रेस तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच ट्रैवल करने वाले ट्रैवलर के लिए सबसे तेज और सहूलियत भरी ट्रेनों में से एक है। यह सुबह 7:25 बजे कोयंबटूर से रवाना होती है और दोपहर 1:45 बजे बेंगलुरु कैंटोनमेंट स्टेशन पहुंच जाती है। करीब 377 किलोमीटर का सफर यह लगभग 6 घंटे 20 मिनट में पूरा करती है। इस ट्रेन के जरिए दोनों शहरों के बीच बिजनेस ट्रिप, ऑफिस मीटिंग और टूरिस्ट पहले की तुलना में काफी आसान और समय बचाने वाला बन गया है।

 

पटना-हावड़ा रूट

पटना-हावड़ा वंदे भारत एक्सप्रेस बिहार और पश्चिम बंगाल के बीच चलने वाली सबसे तेज ट्रेनों में शामिल है। यह ट्रेन सुबह 6 बजे पटना जंक्शन से रवाना होती है और 11:35 बजे हावड़ा स्टेशन पहुंच जाती है। लगभग 532 किलोमीटर की दूरी यह केवल 5 घंटे 35 मिनट में तय करती है। इसकी औसत रफ्तार 78 से 81 किमी/घंटा रहती है, जबकि मैक्सिमम स्पीड 130 किमी/घंटा तक पहुंच सकती है। कम समय में सफर पूरा होने के कारण यह रोज ट्रैवल करने वाले लोगों, बिजनेस ट्रैवलर और स्टूडेंट्स के लिए भी एक बेहतरीन ऑप्शन बन चुकी है।

 

दिल्ली-वाराणसी यात्रा

नई दिल्ली-वाराणसी वंदे भारत एक्सप्रेस राजधानी दिल्ली और धार्मिक नगरी वाराणसी के बीच सबसे पॉपुलर हाई-स्पीड ट्रेनों में से एक है। यह ट्रेन सुबह 6 बजे नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से चलती है और दोपहर 2 बजे वाराणसी पहुंचती है। करीब 771 किलोमीटर की दूरी यह सिर्फ 8 घंटे में पूरी करती है। ट्रेन की औसत रफ्तार लगभग 95 किमी/घंटा रहती है, जबकि मैक्सिमम स्पीड 130 किमी/घंटा तक है। कम समय में लंबी दूरी तय करने की वजह से यह ट्रेन तीर्थयात्रियों, टूरिस्ट और कामकाजी लोगों के बीच काफी पॉपुलर है।

 

 

मुंबई-गांधीनगर रूट

मुंबई सेंट्रल-गांधीनगर कैपिटल वंदे भारत एक्सप्रेस महाराष्ट्र और गुजरात के बीच तेज रेल कनेक्टिविटी अवेलेबल कराती है। यह सुबह 6:10 बजे मुंबई सेंट्रल से रवाना होती है और दोपहर 12:35 बजे गांधीनगर कैपिटल पहुंच जाती है। करीब 522 किलोमीटर की दूरी यह लगभग 6 घंटे 25 मिनट में तय करती है। ट्रेन की औसत रफ्तार करीब 81 किमी/घंटा रहती है, जबकि कुछ सेक्शन में यह 130 किमी/घंटा तक की रफ्तार से चल सकती है। यह ट्रेन दोनों राज्यों के बीच ट्रैवल को पहले की तुलना में ज्यादा तेज, आरामदायक बनाती है।

 

 

जोधपुर-दिल्ली सफर

जोधपुर-दिल्ली कैंटोनमेंट वंदे भारत एक्सप्रेस राजस्थान और राष्ट्रीय राजधानी के बीच तेज़ यात्रा का बेहतर विकल्प है। यह सुबह 5:30 बजे जोधपुर से रवाना होती है और दोपहर 1:30 बजे दिल्ली कैंटोनमेंट स्टेशन पहुंचती है। करीब 606 किलोमीटर का सफर यह लगभग 8 घंटे में पूरा करती है। ट्रेन की औसत रफ्तार लगभग 75 किमी/घंटा है, जबकि इसकी मैक्सिमम स्पीड 130 किमी/घंटा तक पहुंचती है। इससे पैसेंजर को रोड ट्रैवल की तुलना में कम समय में बिना परेशानी के सफर का एक्सपीरियंस मिलता है।

 

 

मैसूरु-चेन्नई यात्रा

मैसूरु-MGR चेन्नई सेंट्रल वंदे भारत एक्सप्रेस कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच यात्रा करने वालों के लिए मॉडर्न और तेज रेल सर्विस है। यह ट्रेन सुबह करीब 6 बजे मैसूरु से निकलती है और दोपहर 12:45 बजे चेन्नई पहुंच जाती है। लगभग 500 किलोमीटर की दूरी यह 6 घंटे 45 मिनट में तय करती है। इसकी औसत रफ्तार 76 से 79 किमी/घंटा रहती है, जबकि मैक्सिमम स्पीड 130 किमी/घंटा तक पहुंच सकती है। यह ट्रेन दोनों राज्यों के प्रमुख शहरों के बीच फास्ट, सेफ और आरामदायक जर्नी है।

 

सिकंदराबाद-विशाखापत्तनम रूट

सिकंदराबाद-विशाखापत्तनम वंदे भारत एक्सप्रेस तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के बीच ट्रैवल को पहले से ज्यादा तेज और बेहतर बनाती है। यह सुबह 5 बजे सिकंदराबाद से रवाना होती है और दोपहर 1:50 बजे विशाखापत्तनम पहुंचती है। लगभग 699 किलोमीटर की दूरी यह 8 घंटे 50 मिनट में पूरी करती है। ट्रेन की औसत रफ्तार 79 से 82 किमी/घंटा रहती है, जबकि इसकी मैक्सिमम स्पीड 130 किमी/घंटा है। लंबी दूरी तय करने के बावजूद यह ट्रेन कम समय में डेस्टिनेशन तक पहुंचाती है, जिससे पैसेंजर का काफी समय बचता है और जर्नी आसान होती है।

दिल्ली लैंड रिकॉर्ड बिल: दिल्ली में बनेगा प्रॉपर्टी आधार कार्ड! जानिए क्या है ये और कैसे करेगा काम

Delhi Land Record Bill 2026: दिल्ली में प्रॉपर्टी और जमीन के मालिकाना हक से जुड़े रिकॉर्ड्स को पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और विवाद-मुक्त बनाने के लिए दिल्ली सरकार एक ऐतिहासिक कदम उठाने जा रही है। दिल्ली सरकार द्वारा तैयार किए जा रहे दिल्ली लैंड रिकॉर्ड बिल, 2026 के तहत दिल्ली की हर संपत्ति को एक खास डिजिटल पहचान दी जाएगी। इसे प्रॉपर्टी आधार कार्ड कहा जा रहा है। इस नए कानून को पारित कराने के लिए दिल्ली विधानसभा का एक विशेष सत्र बुलाया जाएगा। इसके बाद पूरी दिल्ली में वैज्ञानिक सर्वे शुरू होगा। इसके माध्यम से हर गांव के घर, जमीन के टुकड़े से लेकर शहरों के फ्लैट्स और कमर्शियल बिल्डिंग्स तक का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।

क्या है नया बिल और कैसे होगा सर्वे?

इस कानून के तहत दिल्ली के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों को मिलाकर पूरी दिल्ली का वैज्ञानिक सर्वे अनिवार्य किया जाएगा। जमीन और प्रॉपर्टी की सीमाओं मैपिंग ड्रोन से सर्वे करके की जाएगी। इसमें सर्वे ऑफ इंडिया की भी मदद ली जाएगी। अभी अलग-अलग सरकारी विभागों और स्थानीय निकायों के पास जो रिकॉर्ड्स हैं उन्हें एक ही सिंगल प्लेटफॉर्म पर लेकर आया जाएगा।

बहुमंजिला इमारतों में हर फ्लोर के लिए एक अलग डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा, ताकि इसमें इंडिविजुअल यूनिट्स भी शामिल की जा सकें। सरकार को उम्मीद है कि इस पूरी व्यवस्था से प्रॉपर्टी से जुड़े विवादों में कमी आएगी और अदालतों व राजस्व अधिकारियों का बोझ घटेगा।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस पहल की तुलना लोगों के आधार कार्ड से करते हुए कहा कि दिल्ली लैंड रिकॉर्ड बिल, 2026 के माध्यम से दिल्ली की हर संपत्ति को अब एक सुरक्षित और प्रामाणिक डिजिटल पहचान मिलेगी। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की स्वामित्व (SVAMITVA) योजना के तहत 30 ग्रामीण गांवों में सफल क्रियान्वयन के अनुभवों के आधार पर इसे पूरी दिल्ली में लागू किया जाएगा। फिलहाल यह विधेयक मंत्रियों के समूह की समीक्षा के बाद मंजूरी की प्रक्रिया से गुजर रहा है और सरकार इसे आगे बढ़ाने के लिए एक विशेष विधानसभा सत्र आयोजित करने की योजना बना रही है।

लाल डोरा क्षेत्रों के लिए क्यों अहम है यह कदम?

लाल डोरा क्षेत्र वे ग्रामीण आवासीय क्षेत्र हैं जिन्हें राजस्व रिकॉर्ड में लाल स्याही से मार्क किया जाता है। इनका इस्तेमाल खेती और गैर खेती दोनों ही उद्देश्यों के लिए होता है और यहां कंस्ट्रक्शन पर कुछ पाबंदियां होती हैं। सीएम रेखा गुप्ता के मुताबिक लाल डोरा क्षेत्रों में लंबे समय से व्यवस्थित और प्रामाणिक संपत्ति रिकॉर्ड का अभाव रहा है। स्वामित्त्व पहल का उद्देश्य इन क्षेत्रों के निवासियों को पहली बार औपचारिक और सत्यापन योग्य दस्तावेज प्रदान करके दशकों पुराने इस अंतर को दूर करना है।

कैसे काम करेगा स्मार्ट प्रॉपर्टी आधार कार्ड?

स्वामित्व योजना के तहत जारी होने वाला यह कार्ड PVC फॉर्मेट में होगा। इसे UIDAI मानकों के अनुरूप तैयार किया जाएगा। इस कार्ड में कई जानकारियां दर्ज की जाएंगी। कार्ड पर एक प्रॉपर्टी आइडेंटिफिकेशन नंबर (PID), जारी करने की तारीख, गांव व जिले का विवरण, कब्जाधारक व परिवार की जानकारी, जमीन का क्षेत्रफल और एक ‘भू-आधार नंबर’ मौजूद होगा। कार्ड पर मौजूद क्यूआर कोड को स्कैन करने पर संपत्ति का पूरा डिजिटल स्केच, सीमाओं का विवरण, आसपास की संपत्तियों के PID, खसरा नंबर और कानूनी रूप से मान्य सर्टिफिकेट ऑफ ऑक्यूपेंसी लिंक रहेगा।

वैसे सरकार ने अभी यह जानकारी नहीं दी है कि ये प्रॉपर्टी कार्ड स्वयं मालिकाना हक के प्रमाण के रूप में काम करेगा या मौजूदा दस्तावेजों से जुड़े एक यूनिक आइडेंटिफिकेशन रिकॉर्ड के रूप में। स्वामित्व सत्यापन, त्रुटियों के सुधार और विवादित प्रविष्टियों से संबंधित नियम विधानसभा में बिल पास होने के बाद तय किए जाएंगे।

पायलट प्रोजेक्ट: अब तक कितना हुआ काम?

दिल्ली के 48 ग्रामीण गांवों में से 30 गांवों को इस प्रोजेक्ट के पायलट फेज में शामिल किया गया है। इन गांवों में सर्वे और पहचान का काम पूरा हो चुका है।संबंधित दस्तावेजों को संकलित करते हुए प्रॉपर्टी कार्ड तैयार किए जा रहे हैं। अब तक 12232 संपत्तियों का सर्वेक्षण किया जा चुका है। इनमें से 8423 (लगभग 69 प्रतिशत) संपत्तियां पूरी तरह विवाद-मुक्त पाई गई हैं। दक्षिण और उत्तर-पश्चिम जिलों में सर्वे की गई सभी संपत्तियों के मामलों का शत-प्रतिशत समाधान हो चुका है। इन रिकॉर्ड्स को अंततः दिल्ली ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन इंफॉर्मेशन सिस्टम (DORIS) के साथ रियल-टाइम में इंटिग्रेट किया जाएगा। इन 30 गांवों के अनुभवों के आधार पर पायलट फेज पूरा होते ही इस प्रोजेक्ट का विस्तार पूरी दिल्ली की आवासीय, व्यावसायिक और अन्य श्रेणियों की संपत्तियों पर किया जाएगा।

दिल्लीवासियों को क्या होगा फायदा?

व्यवस्थित रिकॉर्ड न होने की वजह से दिल्लीवासियों को दशकों से मालिकाना हक साबित करने, संपत्ति के लेन-देन, विरासत, बैंक लोन प्राप्त करने, नक्शा पास कराने और अदालती विवादों को सुलझाने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। प्रामाणिक डिजिटल रिकॉर्ड बनने से सीमा विवाद खत्म होंगे और नागरिकों को संपत्ति के हस्तांतरण, बैंक ऋण लेने, उत्तराधिकार और मकान का नक्शा पास कराने में काफी आसानी, पारदर्शिता और भरोसा मिलेगा।

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पटरियों पर किसी के लिए धड़कती जिंदगी को लेकर दौड़ी ट्रेन! पहली बार वंदे भारत ट्रेन से पहुंचाया गया लाइव डोनर हार्ट

भारतीय रेलवे ने स्वास्थ्य सेवा और मानव जीवन को बचाने के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान बना दिया है। भारत में पहली बार ट्रेन के जरिए एक लाइव डोनर हार्ट एक शहर से दूसरे शहर पहुंचाया गया है। इस लाइफसेविंग मिशन को मुंबई सेंट्रल-गांधीनगर कैपिटल वंदे भारत एक्सप्रेस के जरिए अंजाम दिया गया। दिल को सूरत से अहमदाबाद लाया गया। यूएन मेहता इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी एंड रिसर्च सेंटर अहमदाबाद में ट्रांप्लांट के लिए इसके सफलतापूर्वक डिलिवर किया गया है।

तालमेल और ग्रीन कॉरिडोर से पूरा हुआ ये मिशन

आपको बता दें कि ऑर्गन ट्रांसप्लांट एक टाइम बाउंड वाली सेंसटिव प्रक्रिया है। इसमें एक-एक मिनट की कीमत होती है। इस ऑपरेशन के लिए भारतीय रेलवे, रेलवे सुरक्षा बल (RPF), गुजरात राज्य पुलिस और चिकित्सा टीमों के बीच सटीक योजना और बिना किसी ब्रेक के कोऑर्डिनेशन की जरूरत थी। ट्रांसप्लांट प्रक्रिया बिना किसी देरी के शुरू हो सके, इसके लिए रेलवे सुरक्षा बल और गुजरात पुलिस द्वारा अहमदाबाद रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 1 से यूएन मेहता अस्पताल तक एक ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया।

इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर अहमदाबाद के मंडल रेल प्रबंधक (DRM) वेद प्रकाश ने कहा कि यह भारतीय रेलवे के लिए बेहद गर्व और संतोष का क्षण है। वंदे भारत एक्सप्रेस के माध्यम से सूरत से अहमदाबाद तक लाइव डोनर हार्ट का सफल परिवहन पारंपरिक यात्री और माल ढुलाई से आगे बढ़कर समाज की सेवा करने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

उन्होंने आगे कहा कि ऐसे जीवनरक्षक मिशनों में हर मिनट बेहद महत्वपूर्ण होता है। भारतीय रेलवे, आरपीएफ, गुजरात राज्य पुलिस और मेडिकल टीमों के बीच उत्कृष्ट समन्वय ने इस मिशन की सफलता सुनिश्चित की। मानव जीवन को बचाने में योगदान देना न सिर्फ हमारी जिम्मेदारी है बल्कि सेवा और मानवता के प्रति हमारा सर्वोच्च कर्तव्य भी है।

इस सफलता ने वंदे भारत एक्सप्रेस की गति, समय की पाबंदी और विश्वसनीयता को एक बार फिर साबित कर दिया है। यह मिशन दिखाता है कि कैसे देश का आधुनिक रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर भारत के आपातकालीन स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। भारतीय रेलवे ने इस चुनौतीपूर्ण मिशन को सफल बनाने के लिए रेलवे सुरक्षा बल, गुजरात पुलिस, डॉक्टरों, अंग प्रत्यारोपण समन्वयकों और रेलवे अधिकारियों सभी के प्रयासों की तारीफ की है।

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Vande Bharat चलाने वाले पायलट की सैलरी जानकर रह जाएंगे हैरान, इतनी होती है महीने की कमाई!

वंदे भारत एक्सप्रेस सिर्फ अपनी रफ्तार और आधुनिक सुविधाओं के लिए ही नहीं, बल्कि इसे चलाने वाले लोको पायलटों की जिम्मेदारी और कौशल के लिए भी चर्चा में रहती है। देश की इस प्रीमियम ट्रेन को सुरक्षित तरीके से चलाने के लिए रेलवे अनुभवी और प्रशिक्षित लोको पायलटों का चयन करता है। यात्रियों को समय पर और सुरक्षित मंजिल तक पहुंचाने के पीछे इन पायलटों की अहम भूमिका होती है। ऐसे में यह जानना दिलचस्प है कि जिस ट्रेन को देश की सबसे खास ट्रेनों में गिना जाता है, उसे चलाने वाले लोको पायलट की कमाई कितनी होती है।

उनकी सैलरी सिर्फ बेसिक वेतन तक सीमित नहीं रहती, बल्कि कई तरह के भत्तों और सुविधाओं के साथ उनकी मासिक आय काफी बढ़ जाती है। आइए जानते हैं वंदे भारत लोको पायलट की सैलरी और मिलने वाली सुविधाओं के बारे में।

वंदे भारत लोको पायलट की सैलरी कितनी होती है?

भारतीय रेलवे में वंदे भारत लोको पायलट के लिए अलग से कोई विशेष पे-स्केल तय नहीं है। आमतौर पर इस ट्रेन को चलाने वाले लोको पायलट 7वें वेतन आयोग के तहत लेवल-6 के अनुभवी कर्मचारी होते हैं। इनका बेसिक पे करीब ₹35,400 से शुरू होता है, लेकिन भत्तों और अन्य सुविधाओं को जोड़ने के बाद उनकी कुल आय काफी बढ़ जाती है। अनुभव और पोस्टिंग के आधार पर उनकी बेसिक सैलरी लगभग ₹56,000 से ₹60,000 तक पहुंच सकती है।

भत्तों से बढ़ जाती है लाखों तक कमाई

लोको पायलट की कमाई सिर्फ मूल वेतन तक सीमित नहीं होती। उन्हें कई तरह के सरकारी भत्ते मिलते हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • महंगाई भत्ता (DA)
  • मकान किराया भत्ता (HRA)
  • रनिंग अलाउंस
  • नाइट ड्यूटी अलाउंस
  • ट्रांसपोर्ट अलाउंस
  • मेडिकल सुविधाएं और अन्य सरकारी लाभ

इन सभी को मिलाकर वंदे भारत के अनुभवी लोको पायलट की मासिक आय करीब ₹90,000 से ₹1.30 लाख या इससे ज्यादा तक पहुंच सकती है।

वंदे भारत चलाने वालों को ज्यादा सुविधाएं क्यों मिलती हैं?

वंदे भारत जैसी हाई-स्पीड ट्रेन चलाना बेहद जिम्मेदारी वाला काम है। लोको पायलट को तेज रफ्तार के दौरान सिग्नल, ट्रैक की स्थिति, मौसम और सुरक्षा नियमों पर लगातार नजर रखनी पड़ती है। छोटी सी लापरवाही भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। इसी जिम्मेदारी को देखते हुए उन्हें रनिंग अलाउंस समेत कई अतिरिक्त लाभ दिए जाते हैं।

कैसे बनते हैं वंदे भारत के लोको पायलट?

कोई भी व्यक्ति सीधे वंदे भारत ट्रेन का ड्राइवर नहीं बन सकता। इसके लिए सबसे पहले रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) के जरिए असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) के पद पर चयन होता है। इसके बाद वर्षों का अनुभव, विभागीय प्रमोशन, मेडिकल फिटनेस और विशेष तकनीकी प्रशिक्षण पूरा करने के बाद ही किसी लोको पायलट को वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेन चलाने का मौका मिलता है।

कितनी मुश्किल होती है लोको पायलट की नौकरी?

वंदे भारत के लोको पायलट का काम सिर्फ ट्रेन चलाना नहीं होता। उन्हें लंबे समय तक सतर्क रहकर ड्यूटी करनी पड़ती है। मौसम चाहे गर्मी का हो, सर्दी का या बारिश का, यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी हमेशा उनके कंधों पर रहती है। यही कारण है कि रेलवे इस जिम्मेदारी भरे पद के लिए अनुभवी और कुशल कर्मचारियों को ही चुनता है।

सैलरी के साथ मिलता है सम्मान भी

वंदे भारत ट्रेन चलाने वाले लोको पायलट की कमाई अनुभव, ड्यूटी घंटे, पोस्टिंग और मिलने वाले भत्तों के आधार पर बदलती रहती है। अच्छी सैलरी के साथ यह भारतीय रेलवे की सबसे जिम्मेदार और प्रतिष्ठित नौकरियों में से एक मानी जाती है।

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सफर में इश्क और नजारे दोनों चाहिए हो तो वंदे भारत के ये 5 रूट मत छोड़ना!

अगर आप अपने पार्टनर के साथ यादगार और सुकूनभरा सफर करना चाहते हैं, तो वंदे भारत ट्रेन बेहतरीन ऑप्शन हो सकती है। आरामदायक सीटें, बड़ी खिड़कियों से दिखते खूबसूरत नज़ारे और तेज़ सफर इस ट्रिप को खास बना देते हैं। यहां सफर की हर घड़ी साथ बिताने और खुलकर बातें करने का मौका मिलता है। आइए जानते हैं वंदे भारत की ऐसी शानदार जर्नी के बारे में, जो हर कपल को एक बार जरूर करनी चाहिए:

दिल्ली से जयपुर – शाही अंदाज में बिताएं यादगार पल

Planning A Weekend Trip? These 4 Vande Bharat Routes Lead To India's Holiest Towns

जयपुर का सफर कपल्स के लिए रोमांस, इतिहास और संस्कृति का शानदार मेल है। आरामदायक ट्रेन जर्नी के बाद आमेर किला, हवा महल, सिटी पैलेस और रंग-बिरंगे बाजार घूमने का अलग ही आनंद मिलता है। राजस्थानी खानपान और शाही विरासत इस ट्रिप को हमेशा के लिए यादगार बना देती है। इस रूट पर वंदे भारत एक्सप्रेस (20978) दिल्ली कैंटोनमेंट स्टेशन से रवाना होती है।

बेंगलुरु से मैसूरु – छोटी लेकिन यादगार ट्रिप 

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अगर आप कम समय में शानदार ट्रिप करना चाहते हैं, तो बेंगलुरु से मैसूरु का वंदे भारत रूट एक बेहतरीन ऑप्शन है। मैसूर पहुंचकर भव्य मैसूर पैलेस, खूबसूरत गार्डन और लोकल मार्केट की सैर करें। साथ ही मशहूर मैसूर पाक का स्वाद आपकी ट्रिप को और भी खास बना देगा। इस रूट पर वंदे भारत एक्सप्रेस (20607/20608) KSR बेंगलुरु स्टेशन से रवाना होती है।

मुंबई से अहमदाबाद – वीकेंड ट्रिप के लिए परफेक्ट

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कम समय में शानदार ट्रिप का प्लान बना रहे कपल्स के लिए मुंबई से अहमदाबाद का वंदे भारत रूट शानदार है। रास्ते में बदलते नेचुरल सीन का आनंद लेते हुए एक-दूसरे के साथ क्वालिटी टाइम बिताया जा सकता है। अहमदाबाद पहुंचकर साबरमती रिवरफ्रंट, लोकल मार्केट और टेस्टी गुजराती डिशेस का मजा लें। इस रूट पर वंदे भारत एक्सप्रेस (20901) मुंबई सेंट्रल से रवाना होती है।

दिल्ली से कटरा – पहाड़ों के बीच रोमांटिक सफर

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अगर आप अपने पार्टनर के साथ पहाड़ों की खूबसूरती और सुकूनभरा समय बिताना चाहते हैं, तो दिल्ली से कटरा का वंदे भारत रूट बेहतरीन ऑप्शन है। सफर के दौरान हरी-भरी वादियां और पहाड़ों के मनमोहक नज़ारे इस जर्नी को यादगार बना देते हैं। कटरा पहुंचकर माता वैष्णो देवी के दर्शन के साथ शांत पहाड़ी माहौल का आनंद लिया जा सकता है। इस रूट पर वंदे भारत एक्सप्रेस (22439) नई दिल्ली से रवाना होती है और पैसेंजर को तेज़ व आरामदायक सफर का एक्सपीरियंस कराती है।

दिल्ली से वाराणसी – आस्था और रोमांस का संगम

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दिल्ली से वाराणसी का सफर कपल्स के लिए आध्यात्मिकता और खूबसूरत यादों से भरा एक्सपीरियंस बन सकता है। ट्रेन में आरामदायक यात्रा के बाद गंगा घाट पर सूर्योदय, बोट राइड और शाम की भव्य गंगा आरती इस ट्रिप को खास बना देती है। यहां इतिहास, संस्कृति और आस्था का अनोखा संगम देखने को मिलता है। इस रूट पर वंदे भारत एक्सप्रेस (22416) नई दिल्ली से चलती है।