8th Pay Commission: वेतन आयोग के इस नियम से टेंशन में पेंशनर्स, REWA ने PM मोदी से कर दी ये बड़ी मांग

8th Pay Commission Pension Revision: 8वें वेतन आयोग को लेकर एक तरफ जहां बैठकों का दौर जारी है, वहीं दूसरी तरफ देश के करीब 69 लाख पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स की धड़कनें तेज हो गई हैं। पेंशनभोगियों के मन में यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि क्या 8वां वेतन आयोग उनकी पेंशन में भी बढ़ोतरी की सिफारिश करेगा या नहीं?

इसी भ्रम को दूर करने के लिए रिटायर्ड एंप्लाइज वेलफेयर एसोसिएशन (REWA) ने सीधा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी है। एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि 8वें वेतन आयोग के नियम और शर्तों यानी ‘टर्म्स ऑफ रेफरेंस’ (ToR) में तुरंत संशोधन किया जाए, ताकि 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए कर्मचारियों की पेंशन रिवीजन का रास्ता पूरी तरह साफ हो सके।

आइए आसान भाषा में समझते हैं कि पूरा मामला क्या है और पेंशनर्स क्यों चिंतित हैं।

बैठकों का दौर जारी, लेकिन पेंशनर्स को क्यों है डर?

8वां वेतन आयोग इन दिनों अलग-अलग राज्यों का दौरा कर कर्मचारियों और यूनियनों के साथ बैठकें कर रहा है। आयोग ने 7 और 8 सितंबर को चेन्नई के आईटीसी ग्रैंड चोल में बैठकें कीं और आज, 10 सितंबर को पुडुचेरी में दिनभर की अहम बैठक चल रही है। इन बैठकों में केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की सैलरी, भत्तों और पेंशन ढांचे पर मंथन हो रहा है।

लेकिन इस सब के बीच पेंशनर्स एसोसिएशन REWA का कहना है कि सरकार द्वारा तय किए गए नियमों (ToR) में पेंशनर्स को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है।

नियमों का वो पेच, जिसने बढ़ाई 69 लाख पेंशनर्स की चिंता

REWA के मुताबिक, सारा भ्रम वेतन आयोग के नोटिफिकेशन के पॉइंट 2(e) की वजह से पैदा हुआ है। इस नियम में डेथ-कम-रिटायरमेंट ग्रैच्युटी (DCRG), एनपीएस (NPS), यूपीएस (UPS) और पेंशन स्ट्रक्चर की समीक्षा की बात तो कही गई है, लेकिन यह ‘कर्मचारियों’ के संदर्भ में लिखा गया है।

REWA का कहना है कि इसमें 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हो चुके पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स का स्पष्ट रूप से जिक्र नहीं है। इसी वजह से लाखों पेंशनभोगियों में यह डर पैदा हो गया है कि कहीं आयोग की सिफारिशें केवल मौजूदा कर्मचारियों तक ही सीमित न रह जाएं।

पिछले वेतन आयोगों से कैसे अलग है 8वां CPC?

एसोसिएशन ने पीएम मोदी को भेजी अपनी चिट्ठी में पुराने वेतन आयोगों के आंकड़ों का हवाला भी दिया है:

7वां वेतन आयोग: इसके नियम (ToR) में रिटायरमेंट से जुड़े फायदों और प्री-रिटायरमेंट (पुराने) पेंशनर्स की पेंशन रिवीजन का साफ जिक्र था।

5वां और 6ठा वेतन आयोग: इन दोनों आयोगों के नियमों में भी ‘पेंशनर्स’ और ‘फैमिली पेंशनर्स’ शब्द को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया था।

REWA का कहना है कि उन्होंने इससे पहले वित्त मंत्री और वित्त सचिव से भी इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण मांगा था, लेकिन सरकार की ओर से कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया। इसी वजह से सोशल मीडिया और पेंशनर्स यूनियनों के बीच इस पर असमंजस लगातार बढ़ रहा है।

पेंशनर्स एसोसिएशन की सरकार से क्या हैं 2 मुख्य मांगें?

REWA ने प्रधानमंत्री से अपील करते हुए दो प्रमुख बातें रखी हैं:

नियमों में हो औपचारिक बदलाव: 8वें वेतन आयोग के ToR में आधिकारिक संशोधन कर यह साफ लिखा जाए कि आयोग 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए सभी पेंशनभोगियों और फैमिली पेंशनर्स की पेंशन बढ़ाने की सिफारिश करेगा।

अंतरिम प्रेस नोट जारी हो: जब तक औपचारिक संशोधन नहीं होता, तब तक केंद्र सरकार एक प्रेस नोट या बयान जारी कर लाखों पेंशनर्स का भ्रम और तनाव दूर करे।

Wealth Building Tips: बड़ी सैलरी नहीं, ये 5 आदतें बनाएंगी आपको अमीर! CA से जानिए ‘गोल्डन रूल्स’

5 Wealth Building Money Habits: अक्सर हम सोचते हैं कि अगर हमारी सैलरी लाखों में हो जाए, तो हमारी सारी आर्थिक दिक्कतें दूर हो जाएंगी और हम रातों-रात अमीर बन जाएंगे। लेकिन कड़वा सच यह है कि केवल ज्यादा सैलरी होने से कोई अमीर नहीं बनता। अगर पैसे का सही मैनेजमेंट न हो, तो लाख रुपये कमाने वाला इंसान भी महीने के आखिर में खाली हाथ रह सकता है।

न्यूज18 तेलुगु से बातचीत में हैदराबाद स्थित ‘अखिल कंचर्ला एंड एसोसिएट्स’ के फाउंडर और सीए अखिल कंचर्ला ने बताया कि अमीर बनने के लिए बड़ी सैलरी से ज्यादा जरूरी आपकी ‘फाइनेंशियल हैबिट्स’ होती हैं। उन्होंने ऐसे 5 आसान मनी हैबिट्स शेयर किए हैं, जो आपको आर्थिक रूप से मजबूत बना सकते हैं।

आइए आसान भाषा में समझते हैं इन 5 आदतों का पूरा गणित।

1. खर्च करने से पहले करें बचत

ज्यादातर लोग महीना शुरू होते ही पहले अपने सारे बिल, राशन और लग्जरी खर्च निपटाते हैं, और फिर जो बच जाता है उसे सेव करने की सोचते हैं। सीए अखिल कंचर्ला के मुताबिक यह तरीका पूरी तरह गलत है।

उन्होंने बताया कि अगर आपकी सैलरी ₹1 लाख महीना है, तो सैलरी आते ही सबसे पहले ₹20,000 से ₹30,000 अपनी बचत या SIP में डाल दें। इसके बाद जो ₹70,000-₹80,000 बचें, उसी में अपना पूरा महीना चलाएं।

2. जज्बाती होकर नहीं, अनुशासित होकर करें निवेश

शेयर बाजार ऊपर जाए या नीचे, निवेश की रफ्तार रुकनी नहीं चाहिए। अमीर बनने का कोई शॉर्टकट नहीं होता; यह लंबे समय तक लगातार निवेश करने से ही संभव है।अपनी रिस्क क्षमता और लक्ष्य के हिसाब से EPF, PPF, म्यूचुअल फंड्स, NPS या बॉन्ड्स चुनें।

जब बाजार गिरता है, तो पैनिक होकर निवेश रोकना सबसे बड़ी गलती होती है। गिरावट का मतलब यह नहीं कि आपका फंड खराब हो गया है। अनुशासन के साथ बने रहना ही असली समझदारी है।

3. ‘लाइफस्टाइल इंफ्लेशन’ से बचें

जैसे ही हमारी सैलरी ₹50,000 से बढ़कर ₹1 लाख होती है, हम तुरंत बड़ा घर, महंगी गाड़ी, महंगे फोन और छुट्टियां प्लान करने लगते हैं। इसे ‘लाइफस्टाइल इंफ्लेशन’ कहते हैं।

सीए की सलाह है कि अपनी जीवनशैली सुधारना बुरी बात नहीं है, लेकिन खर्च उसी रफ्तार से न बढ़ाएं जिस रफ्तार से सैलरी बढ़ी है। अगर आपकी सैलरी ₹30,000 बढ़ती है, तो उसमें से ₹10,000 अपनी लाइफस्टाइल सुधारने पर खर्च करें और बाकी ₹20,000 को अपनी सेविंग्स या इन्वेस्टमेंट में बढ़ा दें।

4. इंश्योरेंस को सुरक्षा समझें, निवेश का जरिया नहीं

बहुत से लोग हेल्थ या लाइफ इंश्योरेंस को भी रिटर्न देने वाली स्कीम मान लेते हैं। एक मेडिकल इमरजेंसी आपकी सालों की जमा पूंजी और निवेश को एक झटके में खत्म कर सकती है। हेल्थ कवर आपको इस वित्तीय झटके से बचाता है। लाइफ इंश्योरेंस आपके परिवार को आपकी गैरमौजूदगी में आर्थिक सुरक्षा देता है।इंश्योरेंस का मुख्य मकसद जोखिम प्रबंधन है, रिटर्न कमाना नहीं।

5. साल में कम से कम एक बार करें पैसों का रिव्यू

अमीर बनने की प्रक्रिया ‘एक बार निवेश करो और भूल जाओ’ जैसी नहीं है। अपनी कमाई, खर्च, लोन, इंश्योरेंस और पोर्टफोलियो की समय-समय पर समीक्षा करना जरूरी है। जो फंड आपने 5 साल पहले चुना था, हो सकता है कि अब वह वैसा प्रदर्शन न कर रहा हो।

साल में कम से कम एक बार अपने पोर्टफोलियो का रिव्यू करने से बेकार के खर्चों, खराब प्रदर्शन वाले फंड्स और टैक्स से जुड़ी गलतियों को समय रहते सुधारा जा सकता है।

सीए अखिल कंचर्ला कहते हैं, ‘अमीर बनना किसी जादुई स्कीम को ढूंढने के बारे में नहीं है, बल्कि एक ऐसा फाइनेंशियल सिस्टम बनाने के बारे में है जो हर महीने बिना रुके काम करे। इन 5 आदतों का निचोड़ बस इतना है- Earn, Save, Protect, Invest, Review। अगर अनुशासन नहीं है, तो आपकी सैलरी जितनी तेजी से बढ़ेगी, आपका पैसा उतनी ही तेजी से गायब भी होगा।’

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

 

NPS में रिटायरमेंट के बाद कैसे और कितनी पेंशन मिलती है? समझिए पूरा कैलकुलेशन

NPS retirement planning: बहुत से लोग रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में निवेश करते हैं। हालांकि, कई लोगों को पूरा आइडिया नहीं होता कि रिटायरमेंट के बाद एकमुश्त पैसा कितना मिलेगा और पेंशन कितनी मिलेगी।

नौकरी के दौरान NPS में जमा पैसा रिटायरमेंट के बाद दो हिस्सों में इस्तेमाल होता है। एक हिस्सा एकमुश्त निकाला जा सकता है। दूसरे हिस्से से एन्युटी खरीदी जाती है। इसी एन्युटी से नियमित पेंशन मिलती है। इसलिए रिटायरमेंट के समय कुल जमा रकम के साथ यह देखना भी जरूरी है कि कितनी रकम एन्युटी में लग रही है।

रिटायरमेंट पर NPS का पैसा कैसे मिलता है?

केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के NPS में सामान्य रिटायरमेंट पर अधिकतम 60% रकम एकमुश्त निकाली जा सकती है। कम से कम 40% रकम से एन्युटी खरीदनी होती है। चाहें तो 40% से ज्यादा रकम भी एन्युटी में लगाई जा सकती है।

एन्युटी खरीदने के बाद मिलने वाली पेंशन उसकी योजना और उस समय उपलब्ध दर पर निर्भर करती है। अलग-अलग विकल्पों में मिलने वाली पेंशन अलग हो सकती है। इसलिए NPS में जमा कुल रकम देखकर सीधे यह नहीं बताया जा सकता कि हर महीने कितनी पेंशन मिलेगी।

₹50 लाख के कॉर्पस पर समझिए पूरा हिसाब

मान लीजिए किसी कर्मचारी के रिटायरमेंट के समय NPS में ₹50 लाख जमा हैं। अगर वह 60% रकम एकमुश्त निकालता है, तो उसे ₹30 लाख मिलेंगे।

बाकी ₹20 लाख एन्युटी खरीदने में लगाए जाएंगे। अब सिर्फ उदाहरण के लिए मान लेते हैं कि इस एन्युटी से सालाना 7% की दर से पेंशन मिलती है। तब सालाना पेंशन होगी:

₹20 लाख × 7% = ₹1.40 लाख

यानी हर महीने करीब ₹11,667 पेंशन मिलेगी। यहां 7% की दर सिर्फ समझाने के लिए ली गई है। वास्तविक पेंशन एन्युटी के विकल्प और उस समय उपलब्ध दर पर निर्भर करेगी।

NPS में कुल कॉर्पसएकमुश्त रकम (60%)एन्युटी के लिए रकम (40%)
7% पर मासिक पेंशन

₹25 लाख₹15 लाख₹10 लाख₹5,833
₹50 लाख₹30 लाख₹20 लाख₹11,667
₹75 लाख₹45 लाख₹30 लाख₹17,500
₹1 करोड़₹60 लाख₹40 लाख₹23,333
₹1.5 करोड़₹90 लाख₹60 लाख₹35,000

₹1 करोड़ जमा हैं तो कितनी पेंशन बनेगी?

अब मान लेते हैं कि रिटायरमेंट के समय NPS में ₹1 करोड़ का कॉर्पस है। इसमें से 60% यानी ₹60 लाख एकमुश्त निकाले जा सकते हैं।

बाकी ₹40 लाख एन्युटी में लगाए जाएंगे। अगर उदाहरण के लिए सालाना 7% की दर मानें, तो इससे सालाना ₹2.80 लाख पेंशन बनेगी। यानी हर महीने करीब ₹23,333। ध्यान रखें कि ₹23,333 कोई तय NPS पेंशन नहीं है। यह सिर्फ 7% की उदाहरण वाली दर पर किया गया कैलकुलेशन है।

एन्युटी का विकल्प भी अहम है

एन्युटी खरीदते समय अलग-अलग विकल्प मिलते हैं। किसी विकल्प में व्यक्ति को जीवनभर पेंशन मिलती है। कुछ विकल्पों में पति या पत्नी को भी पेंशन जारी रखने का प्रावधान होता है। कुछ योजनाओं में मृत्यु के बाद एन्युटी खरीदने में लगी मूल रकम वापस करने का विकल्प भी होता है।

इन विकल्पों की शर्तें अलग होती हैं। इसलिए चुने गए विकल्प के हिसाब से मिलने वाली पेंशन भी बदल सकती है।

NPS में सिर्फ बड़ा कॉर्पस बनाना काफी नहीं

रिटायरमेंट की योजना बनाते समय सिर्फ यह देखना पर्याप्त नहीं है कि NPS में कितने रुपये जमा होंगे। यह भी देखना जरूरी है कि उस रकम में से कितना हिस्सा एन्युटी में जाएगा और किस तरह की एन्युटी चुनी जाएगी।

उदाहरण के लिए ₹1 करोड़ के कॉर्पस में 40% रकम एन्युटी में लगाने पर ₹40 लाख से पेंशन बनेगी। वहीं, अगर कोई व्यक्ति इससे ज्यादा रकम एन्युटी में लगाता है, तो नियमित पेंशन भी बढ़ सकती है।

NPS के सभी खातों में नियम समान नहीं

60% एकमुश्त और 40% एन्युटी का नियम सामान्य रिटायरमेंट पर केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के NPS के लिए है। NPS के दूसरे मॉडल और समय से पहले निकासी के नियम अलग हो सकते हैं। इसलिए अपने NPS मॉडल और रिटायरमेंट की स्थिति के हिसाब से नियम देखना जरूरी है।

कुल मिलाकर NPS में रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन का आधार एन्युटी में लगाई गई रकम और उससे मिलने वाली दर है। इसलिए NPS में बड़ा कॉर्पस बनाने के साथ यह समझना भी जरूरी है कि रिटायरमेंट के समय उस रकम का इस्तेमाल किस तरह किया जाएगा।

Retirement Planning: रिटायरमेंट के बाद इन 5 स्कीमों में लगाएं पैसा, सुरक्षित निवेश के साथ नियमित आमदनी मिलेगी

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

गुजरात सरकार का बड़ा ऐलान: सेवानिवृत्ति के बाद NPS से निकासी के नियमों में बदलाव

गुजरात सरकार का बड़ा ऐलान: सेवानिवृत्ति के बाद NPS से निकासी के नियमों में बदलाव

pension

गुजरात सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। नए सर्कुलर के अनुसार, सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारियों को पेंशन राशि की निकासी और एन्युइटी (Annuity) खरीदने के लिए अधिक सुविधाजनक विकल्प प्रदान किए गए हैं। इसके अलावा, सरकारी क्षेत्र के NPS सदस्यों को सेवानिवृत्ति के बाद भी 85 वर्ष की आयु तक इस योजना से जुड़े रहने की विशेष छूट दी गई है। ALSO READ: सरकारी नौकरी का सुनहरा मौका: GSRTC में 2510 हेल्पर पदों पर ऑनलाइन भर्ती शुरू

 

8 लाख तक की राशि पर पूर्ण निकासी की छूट 

नए नियमों के अनुसार, सामान्य रूप से सेवानिवृत्ति के समय मिलने वाली कुल पेंशन राशि में से कम से कम 40 प्रतिशत हिस्से की एन्युइटी खरीदना अनिवार्य होता है। हालांकि, छोटे निवेशकों को राहत देते हुए यह घोषणा की गई है कि यदि कुल संचित पेंशन राशि 8 लाख रुपए तक होगी, तो कर्मचारी को पूरी राशि एकमुश्त (एक साथ) निकालने का विकल्प मिलेगा। 

 

8 से 12 लाख रुपए तक की राशि के लिए भुगतान के नए विकल्प

यदि संचित पेंशन राशि 8 लाख से 12 लाख रुपए के बीच है, तो कर्मचारी अधिकतम 6 लाख रुपए तक की राशि एकमुश्त निकाल सकेंगे। जबकि शेष राशि के लिए कम से कम छह वर्षों तक समय-समय पर (किस्तों में) भुगतान प्राप्त करने या एन्युइटी खरीदने का विकल्प दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, कर्मचारी अपनी एन्युइटी खरीद और एकमुश्त राशि की निकासी को 85 वर्ष की आयु तक टाल (Defer) भी सकते हैं। ALSO READ: GIDC प्लॉट धारकों के लिए बड़ी राहत: राज्य सरकार ने घोषित की 'GIDC एम्नेस्टी स्कीम'
 

स्वेच्छा से सेवानिवृत्ति (VRS) और अन्य विशेष प्रावधान 

स्वेच्छा से सेवानिवृत्ति (VRS) या अन्य निर्धारित मामलों में, कर्मचारी को अपनी कुल संचित राशि का कम से कम 80 प्रतिशत हिस्सा एन्युइटी के लिए आवंटित करना होगा। लेकिन यदि ऐसी स्थिति में कुल संचित राशि 5 लाख या उससे कम है, तो पूरी राशि एकमुश्त निकालने की अनुमति होगी। इन नए सुधारों के माध्यम से NPS के सरकारी और गैर-सरकारी क्षेत्र के सदस्यों के लिए निकासी के अलग-अलग और स्पष्ट प्रावधान लागू किए गए हैं।

Silver Rate Today 2 September: चांदी के दाम में फिर गिरावट, दिल्ली से चेन्नई तक जानें आज की कीमत

Silver Rate Today 2 September: चांदी खरीदने वालों के लिए आज बाजार से मिला-जुला संकेत सामने आया है। पिछले कुछ समय से कीमती धातु की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है और इसका असर आज के रेट पर भी दिखाई दिया। दिल्ली के सर्राफा बाजार में बुधवार को चांदी की कीमत ₹2,40,500 प्रति किलो (सभी टैक्स सहित) दर्ज की गई, जो पिछले कारोबारी दिन के मुकाबले ₹5,000 कम है। वहीं, घरेलू वायदा बाजार में भी चांदी कमजोर नजर आई। MCX पर सुबह के कारोबार में चांदी का भाव 0.24 फीसदी गिरकर ₹2,28,993 प्रति किलो पर पहुंच गया।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी हलचल का असर भी कीमती धातु पर देखने को मिल रहा है। ऐसे में अगर आप चांदी खरीदने, गहने बनवाने या निवेश के लिए भाव पर नजर रख रहे हैं, तो आज के रेट आपके लिए जानना जरूरी है। आगे जानिए देश के प्रमुख शहरों में चांदी कितने रुपये किलो बिक रही है।

MCX पर भी चांदी हुई कमजोर

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर भी चांदी के वायदा भाव में गिरावट देखने को मिली। आज सुबह तक चांदी का भाव 0.24 फीसदी यानी ₹556 की गिरावट के साथ ₹2,28,993 प्रति किलो रह गया। इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में MCX पर चांदी ₹2,29,549 प्रति किलो पर बंद हुई थी।

दिल्ली समेत शहरों में चांदी कितने की मिल रही है?

अगर आप अपने शहर में चांदी खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो नीचे प्रमुख शहरों के ताजा भाव देख सकते हैं। ज्यादातर शहरों में चांदी की कीमत ₹2.55 लाख प्रति किलो के आसपास है।

शहर 1 किलो चांदी का भाव

दिल्ली ₹2,55,000

मुंबई  ₹2,55,000

कोलकाता     ₹2,55,000

चेन्नई ₹2,60,000

पटना  ₹2,55,000

लखनऊ      ₹2,55,000

मेरठ  ₹2,55,000

अयोध्या      ₹2,55,000

कानपुर ₹2,55,000

गाजियाबाद   ₹2,55,000

नोएडा ₹2,55,000

गुरुग्राम      ₹2,55,000

चंडीगढ़ ₹2,55,000

जयपुर ₹2,55,000

अहमदाबाद   ₹2,55,000

पुणे   ₹2,55,000

लुधियाना     ₹2,55,000

गुवाहाटी      ₹2,55,000

इंदौर  ₹2,55,000

सूरत  ₹2,55,000

नागपुर ₹2,55,000

नासिक ₹2,55,000

बैंगलोर ₹2,55,000

वडोदरा ₹2,55,000

भुवनेश्वर     ₹2,60,000

रायपुर ₹2,55,000

हैदराबाद      ₹2,60,000

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी पर दबाव

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी की कीमत कमजोर हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, चांदी करीब $64.74 प्रति औंस पर पहुंच गई। इससे संकेत मिलता है कि वैश्विक बाजार में बिकवाली का असर घरेलू कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है।

एक दिन पहले कितनी थी चांदी?

पिछले कारोबारी सत्र में दिल्ली के सर्राफा बाजार में चांदी ₹2,45,500 प्रति किलो पर स्थिर थी। इसके बाद इसमें ₹5,000 की गिरावट आई और कीमत घटकर ₹2,40,500 प्रति किलो रह गई। विदेशी बाजारों में भी चांदी पर दबाव रहा। हाजिर चांदी की कीमत करीब 3 फीसदी गिरकर $64.68 प्रति औंस रह गई थी।

मंगलवार को वायदा बाजार में क्या हुआ था?

इससे ठीक एक दिन पहले घरेलू वायदा बाजार में तस्वीर थोड़ी अलग थी। मजबूत हाजिर मांग और कारोबारियों की ताजा खरीदारी के चलते चांदी वायदा 0.19 फीसदी बढ़कर ₹2,40,577 प्रति किलो पहुंच गया था। MCX पर दिसंबर डिलीवरी वाले चांदी कॉन्ट्रैक्ट में ₹27 की तेजी दर्ज की गई थी। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में न्यूयॉर्क में चांदी 0.17 फीसदी गिरकर $66.46 प्रति औंस पर आ गई थी।

खरीदारी करने वालों के लिए क्या समझना जरूरी है?

चांदी के भाव में इस समय तेजी से उतार-चढ़ाव हो रहा है। घरेलू बाजार, MCX और अंतरराष्ट्रीय कीमतों में अलग-अलग तस्वीर दिखाई दे रही है। ऐसे में अगर आप चांदी के गहने, सिक्के या निवेश के लिए सिल्वर खरीदने जा रहे हैं, तो खरीदारी से पहले अपने स्थानीय सर्राफा बाजार का ताजा भाव जरूर जांच लें। साथ ही, चांदी की शुद्धता, मेकिंग चार्ज और लागू टैक्स के कारण अंतिम कीमत अलग हो सकती है।

NPS Calculator: रिटायरमेंट के बाद चाहिए ₹20,000 महीना पेंशन? जानिए 60 की उम्र में कितना बड़ा होना चाहिए कॉर्पस

NPS Calculator: रिटायरमेंट के बाद चाहिए ₹20,000 महीना पेंशन? जानिए 60 की उम्र में कितना बड़ा होना चाहिए कॉर्पस

NPS Pension Calculation: रिटायरमेंट के बाद बिना किसी टेंशन के जीवन जीने के लिए एक फिक्स मंथली इनकम का होना बेहद जरूरी है। नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) देश में रिटायरमेंट प्लानिंग का सबसे लोकप्रिय और टैक्स-एफिशिएंट जरिया बन चुका है। लेकिन अधिकांश निवेशकों के मन में यह सवाल रहता है कि ‘अगर मुझे 60 की उम्र के बाद हर महीने ₹20,000 की पेंशन चाहिए, तो मुझे अपने एनपीएस खाते में कितना फंड जमा करना होगा?’

इसका जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि आप रिटायरमेंट के समय अपने कुल फंड का कितना हिस्सा ऐन्यूटी में जमा करते हैं और कितना कैश निकालते हैं। आइए आसान भाषा में समझते हैं इसका पूरा गणित।

₹20,000 पेंशन के लिए कितना फंड जरूरी?

NPS के नियमों के मुताबिक, 60 साल की उम्र में आपको अपने कुल कॉर्पस का कम से कम 40% हिस्सा ऐन्यूटी में लगाना अनिवार्य होता है, जिससे आपको आजीवन पेंशन मिलती है। बाकी 60% हिस्सा आप एकमुश्त टैक्स-फ्री कैश निकाल सकते हैं। फिलहाल भारत में प्रमुख बीमा कंपनियों की ऐन्यूटी दर औसतन 6% प्रति वर्ष के आसपास है।

स्थिति 1: जब आप 100% पैसा ऐन्यूटी में लगाते हैं (मैक्सिमम पेंशन)

अगर आप रिटायरमेंट पर कोई एकमुश्त कैश नहीं निकालते और अपना पूरा 100% फंड पेंशन के लिए ऐन्यूटी में डाल देते हैं:

जरूरी ऐन्यूटी कॉर्पस: ₹40 लाख

मासिक पेंशन (6% ऐन्यूटी दर पर): ₹20,000 / महीना

कुल रिटायरमेंट फंड: ₹40 लाख

स्थिति 2: जब आप 40% ऐन्यूटी और 60% लंपसम का विकल्प चुनते हैं

अगर आप 60% पैसा कैश निकालना चाहते हैं और केवल अनिवार्य 40% हिस्से से ही ₹20,000/माह पेंशन बनाना चाहते हैं:

जरूरी ऐन्यूटी हिस्सा (40%): ₹40 लाख

एकमुश्त कैश निकासी (60%): ₹60 लाख (पूरी तरह टैक्स-फ्री)

कुल रिटायरमेंट फंड (100%): ₹1 करोड़

NPS कैलकुलेटर: कॉर्पस और पेंशन का ब्रेकअप

NPS कैलकुलेटर: कॉर्पस और पेंशन का ब्रेकअप

₹20,000 पेंशन पाने के लिए हर महीने कितना SIP निवेश करना होगा?

अगर हम NPS में इक्विटी (E), कॉर्पोरेट बॉन्ड्स (C) और सरकारी सिक्योरिटीज़ (G) के कॉम्बिनेशन से औसतन 10% वार्षिक रिटर्न मानकर चलें, तो आपकी उम्र के हिसाब से हर महीने की जाने वाली SIP इस प्रकार होगी:

लक्ष्य: ₹1 करोड़ का कुल फंड बनाना (₹60 लाख कैश + ₹20k मासिक पेंशन)

  • उम्र 25 साल (35 साल का समय): केवल ₹2,630 / महीना
  • उम्र 30 साल (30 साल का समय): लगभग ₹4,450 / महीना
  • उम्र 35 साल (25 साल का समय): लगभग ₹7,750 / महीना
  • उम्र 40 साल (20 साल का समय): लगभग ₹13,170 / महीना

लक्ष्य: ₹40 लाख का कुल फंड बनाना (0% कैश, 100% ऐन्यूटी से ₹20k मासिक पेंशन)

  • उम्र 25 साल (35 साल का समय): केवल ₹1,050 / महीना
  • उम्र 30 साल (30 साल का समय): लगभग ₹1,780 / महीना
  • उम्र 35 साल (25 साल का समय): लगभग ₹3,100 / महीना
  • उम्र 40 साल (20 साल का समय): लगभग ₹5,270 / महीना

NPS में निवेश के 3 बड़े फायदे

एक्स्ट्रा टैक्स बचत: आयकर अधिनियम की धारा 80CCD (1B) के तहत 80C की ₹1.5 लाख की सीमा के अलावा ₹50,000 की अतिरिक्त टैक्स छूट मिलती है।

कम लागत वाला प्रोडक्ट: NPS दुनिया के सबसे कम फंड मैनेजमेंट फीस वाले निवेश विकल्पों में से एक है, जिससे लॉन्ग टर्म में कंपाउंडिंग का बड़ा फायदा मिलता है।

कम जोखिम पर बेहतर रिटर्न: NPS का ऑटो चॉइस और एक्टिव चॉइस आपको उम्र के हिसाब से इक्विटी और डेट में एसेट एलोकेशन मैनेज करने की सुविधा देता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

PPF vs NPS: किस स्कीम में निवेश से बड़ा रिटायरमेंट फंड बनेगा? पूरा कैलकुलेशन समझिए

PPF vs NPS: जब रिटायरमेंट प्लानिंग की बात होती है, तो दो स्कीमों पर सबसे अधिक जोर रहता है… पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) और नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) इन दोनों को अच्छा विकल्प माना जाता हैं, लेकिन दोनों में फर्क है। PPF सुरक्षित निवेश है। इसका ब्याज सरकार तय करती है। वहीं NPS बाजार से जुड़ा है। इसमें ज्यादा रिटर्न मिलने की संभावना होती है, लेकिन रिटर्न तय नहीं होता।

किस स्कीम में कितना फंड बनेगा?

PPF और NPS में वक्त के साथ बड़ा रिटायरमेंट फंड सकता है। यहां ₹2,000, ₹5,000 और ₹12,500 मंथली निवेश का कैलकुलेशन है। इसमें 30 साल तक निवेश की अवधि मानी गई है। PPF पर 7.1% सालाना ब्याज और NPS में 10% सालाना औसत रिटर्न मानकर कैलकुलेशन किया गया है।

हर महीने निवेश30 साल में कुल निवेशPPF में अनुमानित फंड
NPS में अनुमानित फंड

₹2,000₹7.20 लाख₹25.03 लाख₹45.59 लाख
₹5,000₹18 लाख₹62.58 लाख₹1.14 करोड़
₹12,500₹45 लाख₹1.56 करोड़₹2.85 करोड़

दोनों स्कीम में निवेश की अवधि और रकम समान है। फर्क रिटर्न का है। इसी वजह से लंबे समय में NPS में बड़ा फंड बन सकता है।

₹2,000 की मंथली निवेश

अगर आप 30 साल तक हर महीने ₹2,000 निवेश करते हैं, तो कुल ₹7.20 लाख जमा होंगे। PPF में 7.1% के हिसाब से फंड करीब ₹25.03 लाख हो सकता है।

वहीं NPS में 10% औसत रिटर्न मिलने पर फंड करीब ₹45.59 लाख पहुंच सकता है। यानी ₹2,000 की छोटी मंथली निवेश भी लंबे समय में अच्छा फंड बना सकती है।

₹5,000 की मंथली निवेश

हर महीने ₹5,000 निवेश करने पर 30 साल में आपकी जेब से ₹18 लाख जाएंगे। PPF में अनुमानित फंड करीब ₹62.58 लाख बन सकता है।

वहीं NPS में 10% औसत रिटर्न के हिसाब से फंड करीब ₹1.14 करोड़ हो सकता है। यानी PPF के मुकाबले करीब ₹51 लाख ज्यादा फंड बन सकता है।

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₹12,500 की मंथली निवेश

हर महीने ₹12,500 निवेश करने पर 30 साल में कुल ₹45 लाख जमा होंगे। PPF में 7.1% ब्याज के हिसाब से फंड करीब ₹1.56 करोड़ तक पहुंच सकता है।

NPS में 10% औसत रिटर्न मिलने पर यही फंड करीब ₹2.85 करोड़ हो सकता है। दोनों के बीच करीब ₹1.29 करोड़ का अंतर है। यह अंतर कंपाउंडिंग और ज्यादा रिटर्न की वजह से बनता है।

NPS में ज्यादा फंड क्यों बन सकता है?

NPS का पैसा इक्विटी, सरकारी बॉन्ड और कॉरपोरेट बॉन्ड में लगाया जाता है। इक्विटी की वजह से लंबे समय में ज्यादा रिटर्न मिलने की संभावना रहती है।

लेकिन बाजार का जोखिम भी होता है। 10% रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है। खराब बाजार के दौरान फंड की वैल्यू कम हो सकती है।

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NPS का पूरा पैसा एकमुश्त नहीं मिलेगा

ऊपर टेबल में दिखाया गया NPS का फंड कुल रिटायरमेंट कॉर्पस है। मौजूदा सामान्य नियमों के तहत 60 साल की उम्र पर अधिकतम 60% रकम एकमुश्त निकाली जा सकती है। बाकी रकम से एन्युटी खरीदनी पड़ती है, जिससे नियमित पेंशन मिलती है।

उदाहरण के लिए, ₹12,500 की मंथली निवेश से ₹2.85 करोड़ का कॉर्पस बनता है। इसमें से 60% यानी करीब ₹1.71 करोड़ एकमुश्त मिल सकते हैं। बाकी करीब ₹1.14 करोड़ एन्युटी में जा सकते हैं।

PPF में मैच्योरिटी की रकम आपके हाथ में

PPF की मैच्योरिटी अवधि 15 साल है। इसे तय नियमों के तहत आगे बढ़ाया जा सकता है। PPF में बाजार का जोखिम नहीं होता।

सबसे बड़ी बात यह है कि मैच्योरिटी की पूरी रकम आपके नियंत्रण में रहती है। आपको एन्युटी खरीदना जरूरी नहीं होता। आप अपनी जरूरत के हिसाब से पैसा इस्तेमाल कर सकते हैं।

रिटायरमेंट के लिए कौन बेहतर?

अगर आपको सुरक्षित रिटर्न चाहिए, तो PPF बेहतर हो सकता है। अगर आपकी उम्र कम है और रिटायरमेंट में काफी समय बाकी है, तो NPS बड़ा कॉर्पस बनाने में मदद कर सकता है।

दोनों में निवेश करना भी एक विकल्प है। इससे बाजार की ग्रोथ और सुरक्षित निवेश, दोनों का फायदा मिल सकता है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

NPS Equity: किस पेंशन फंड ने NPS इक्विटी में सबसे ज्यादा रिटर्न दिया? समझिए 10 साल का पूरा हिसाब

NPS Equity: NPS यानी नेशनल पेंशन सिस्टम में रिटायरमेंट के लिए निवेश के सबसे अच्छे विकल्पों में गिना जाता है। इसमें इक्विटी यानी Scheme E एक अहम विकल्प है। इसमें आपके निवेश का पैसा मुख्य रूप से शेयरों और शेयर से जुड़े इंस्ट्रूमेंट्स में लगाया जाता है।

इसलिए इसमें डेट या सरकारी सिक्योरिटीज की तुलना में ज्यादा रिटर्न की संभावना रहती है। लेकिन बाजार गिरने पर नुकसान का जोखिम भी होता है। यह विकल्प खासतौर पर लंबे समय के रिटायरमेंट निवेश के लिए देखा जाता है।

NPS Scheme E में किसने सबसे ज्यादा रिटर्न दिया?

NPS Scheme E के 10 साल के आंकड़ों में HDFC पेंशन सबसे आगे है। सरकारी सेक्टर में इसने 10 साल में 13.01% का सालाना रिटर्न दिया। बेंचमार्क का रिटर्न 13.12% रहा। ICICI Prudential 12.90% के साथ दूसरे नंबर पर रहा। Kotak ने 12.75% रिटर्न दिया।

पेंशन फंड10 साल का रिटर्नशुरुआत से रिटर्न
HDFC Pension13.01%13.93%
ICICI Prudential12.90%12.44%
Kotak12.75%11.82%
UTI12.54%12.19%
LIC11.69%12.24%
SBI11.64%10.66%

नोट : आंकड़े NPS Trust के हैं। डेटा 25 अगस्त 2026 तक का है।

प्राइवेट सेक्टर में भी HDFC आगे

नॉन गवर्नमेंट सेक्टर में भी HDFC Pension का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा। इसने 10 साल में 12.99% का सालाना रिटर्न दिया। ICICI Prudential का रिटर्न 12.88% रहा। Kotak ने 12.74% रिटर्न दिया।

NPS में 100% इक्विटी का विकल्प

NPS में इक्विटी में ज्यादा पैसा लगाने के विकल्प भी हैं। Active Choice में निवेशक खुद एसेट अलोकेशन तय कर सकता है। Auto Choice में उम्र के हिसाब से इक्विटी का हिस्सा बदलता रहता है। Multiple Scheme Framework के तहत नॉन गवर्नमेंट सब्सक्राइबर्स के लिए 100% तक इक्विटी का विकल्प भी है।

सिर्फ रिटर्न देखकर फैसला न करें

किसी NPS फंड को चुनते समय सिर्फ रिटर्न देखना ठीक नहीं है। लंबी अवधि का प्रदर्शन देखना जरूरी है। बाजार गिरने पर फंड ने कैसा प्रदर्शन किया, यह भी देखना चाहिए।

इसके अलावा बेंचमार्क से तुलना करें। पोर्टफोलियो और जोखिम भी देखें। रिटायरमेंट के लिए निवेश है, इसलिए सिर्फ पिछले एक साल के अच्छे रिटर्न के पीछे भागना सही नहीं है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

PPF Maturity: 15 साल पूरे होने के बाद भी बंद न करें PPF अकाउंट! मैच्योरिटी पर मिलते हैं 3 बड़े ऑप्शंस, जानें कहां होगा सबसे ज्यादा फायदा

What to do after PPF Maturity: क्या आपका पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (PPF) अकाउंट 15 साल पूरे कर चुका है? अक्सर लोग 15 साल की अवधि खत्म होते ही इसे फिनिश लाइन मानकर पूरा पैसा निकाल लेते हैं। लेकिन ठहरिए! 15 साल बाद भी आपकी सेविंग्स की यह रफ्तार थमने की जरूरत नहीं है। PPF के नियम आपको मैच्योरिटी के बाद ऐसे कई शानदार ऑप्शंस देते हैं, जहां आप बिना कोई रिस्क लिए 7.1% की सालाना गारंटीड ब्याज दर का फायदा उठाना जारी रख सकते हैं।

आइए जानते हैं PPF मैच्योरिटी के बाद आपके पास कौन-कौन से 3 सबसे बड़े विकल्प हैं और आपको इनमें से क्या चुनना चाहिए।

ऑप्शन 1: पूरा पैसा निकालें और अकाउंट बंद करें

अगर आपके पास कोई बड़ा वित्तीय लक्ष्य (जैसे- बच्चों की पढ़ाई, शादी या घर खरीदना) सामने है, तो आप अकाउंट बंद करके पूरा पैसा निकाल सकते हैं। 15 साल का वित्त वर्ष पूरा होने पर आप संबंधित बैंक या पोस्ट ऑफिस में क्लोजर फॉर्म भरकर ब्याज सहित पूरा फंड निकाल सकते हैं। PPF ‘EEE’ कैटेगरी में आता है, इसलिए मैच्योरिटी पर मिलने वाली पूरी रकम 100% टैक्स-फ्री होगी।

ऑप्शन 2: बिना पैसा जमा किए अकाउंट चालू रखें

अगर आपको तुरंत पैसों की जरूरत नहीं है, लेकिन आप भविष्य के लिए नया पैसा भी लॉक नहीं करना चाहते, तो यह ऑप्शन आपके लिए बेस्ट है। आपके मौजूदा जमा पैसों पर सरकार की ओर से तय 7.1% सालाना दर से ब्याज जुड़ता रहेगा। इस विकल्प के तहत आपको हर साल एक बार अपनी जरूरत के मुताबिक पैसा निकालने की आजादी मिलती है।

ऑप्शन 3: नए निवेश के साथ 5-5 साल के लिए बढ़ाएं

अगर आप आगे भी अपनी बचत जारी रखना चाहते हैं, तो अपने अकाउंट को 5 साल के ब्लॉक में आगे बढ़ा सकते हैं।

1 साल का समय: यह विकल्प चुनने के लिए आपको मैच्योरिटी की तारीख से 1 साल के भीतर फॉर्म (Form 4/H) जमा करके एक्सटेंशन का विकल्प चुनना होगा।

कंटिन्यू रखें SIP/निवेश: इसमें आप पहले की तरह हर साल अधिकतम ₹1.5 लाख जमा कर सकते हैं और उस पर टैक्स छूट (सेक्शन 80C) और 7.1% का ब्याज पा सकते हैं।

गलती न करें: एक्सटेंशन के इन 2 नियमों में अंतर समझें

निवेशक सबसे बड़ी गलती एक्सटेंशन का चुनाव करने में करते हैं:

पैसा जमा करने के साथ एक्सटेंशन: अगर आपने 1 साल के भीतर ‘With Contribution’ का विकल्प चुन लिया, तो आप नए पैसे जमा करना जारी रख सकते हैं।

बिना पैसे के एक्सटेंशन: अगर आपने बिना योगदान के अकाउंट छोड़ दिया और 1 साल की समय-सीमा निकल गई, तो आप बाद में उसी एक्सटेंशन पीरियड में दोबारा नए पैसे जमा नहीं कर पाएंगे। इसलिए फैसला सोच-समझकर लें।

PPF मैच्योरिटी ऑप्शंस की पूरी डिटेल्स

PPF मैच्योरिटी ऑप्शंस की पूरी डिटेल्स

आपको क्या करना चाहिए?

अगर आपको घर बनाने, मेडिकल इमरजेंसी या अन्य बड़े खर्च के लिए तुरंत पैसों की जरूरत नहीं है, तो PPF अकाउंट बंद करने के बजाय इसे आगे बढ़ाना ही समझदारी है। अपने अन्य पोर्टफोलियो (EPF, NPS, म्यूचुअल फंड्स) को देखने के बाद ही फैसला लें। PPF 15 साल बाद भी आपके वेल्थ क्रिएशन का सबसे सुरक्षित और टैक्स-फ्री जरिया बना रह सकता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

टैक्स बचाते-बचाते कहीं आप तो नहीं कर रहे ये 3 बड़ी गलतियां? समझें स्मार्ट सेविंग का गणित

Smart Financial Planning: अक्सर लोग टैक्स बचाने के लिए ऐसे फाइनेंशियल फैसले ले लेते हैं, जिनका नुकसान उन्हें सालों-साल उठाना पड़ता है। इनकम टैक्स के सेक्शन 80C के तहत ₹1.5 लाख की छूट पाने के चक्कर में ज्यादातर लोग बिना सोचे-समझे ट्रेडिशनल इंश्योरेंस प्लान या गलत जगह पैसा फंसा देते हैं।

अगर आप भी सिर्फ टैक्स की बचत को अपना एकमात्र मकसद मानकर निवेश कर रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। जानिए वे 3 बड़ी गलतियां जो आपकी वेल्थ को बढ़ाने के बजाय घटा रही हैं।

इंश्योरेंस और इन्वेस्टमेंट को एक साथ मिलाना

टैक्स बचाने के लिए लोग सबसे पहली गलती यह करते हैं कि वे एंडोमेंट या मनी-बैक पॉलिसी ले लेते हैं। इन पॉलिसियों में मिलने वाला रिटर्न महज 4% से 6% के आसपास होता है, जो महंगाई दर को भी मात नहीं दे पाता।

इसका दूसरा स्मार्ट ऑप्शन ये है कि इंश्योरेंस और इन्वेस्टमेंट को हमेशा अलग रखें। लाइफ कवर के लिए सिर्फ टर्म इंश्योरेंस लें, जो कम प्रीमियम में भारी-भरकम कवर देता है।

लॉक-इन और रिटर्न का गणित समझे बिना निवेश करना

केवल 80C की लिमिट भरने के लिए टैक्स-सेविंग एफडी (5 साल का लॉक-इन) या ऐसे प्रोडक्ट्स में पैसा लगा देना, जहाँ रिटर्न टैक्स-एडजस्टेड होने के बाद बेहद कम बचता है। इसका कड़वा सच ये है कि बैंक एफडी पर मिलने वाले ब्याज पर आपकी टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है, जिससे आपका असल रिटर्न और कम हो जाता है।

अगर आपकी रिस्क क्षमता इजाजत देती है, तो इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम(ELSS) में निवेश करें। इसमें केवल 3 साल का लॉक-इन होता है और लंबे समय में 12% से 15% तक का संभावित रिटर्न मिल सकता है।

इंश्योरेंस कवर को ही वेल्थ क्रिएटर्स समझ लेना

कई लोग गारंटीड रिटर्न वाली पॉलिसियों में यह सोचकर सालों तक प्रीमियम भरते हैं कि उनका पैसा सुरक्षित है और टैक्स भी बच रहा है। 20-25 साल बाद मिलने वाला ₹20 लाख का फंड महंगाई के कारण आज के ₹5-6 लाख के बराबर भी नहीं होगा। यानी आप सुरक्षित रहकर भी अपनी खरीदारी की ताकत खो रहे हैं।

स्मार्ट सेविंग का आसान गणित

टैक्स बचाने और वेल्थ क्रिएट करने के लिए सही एसेट एलोकेशन बेहद जरूरी है। जहां ट्रेडिशनल इंश्योरेंस प्लान 10 से 20 साल के लंबे लॉक-इन के साथ महज 4% से 6% का औसत रिटर्न देते हैं, वहीं ELSS (टैक्स सेविंग म्यूचुअल फंड) सिर्फ 3 साल के सबसे कम लॉक-इन पीरियड में 12% से 15% तक का शानदार अनुमानित रिटर्न और 80C के तहत छूट देता है। इसके अलावा 15 साल की अवधि वाला PPF 7.1% का पूरी तरह टैक्स-फ्री रिटर्न देता है, जबकि सबसे स्मार्ट रणनीति यानी ‘टर्म प्लान + इंडेक्स फंड’ का कॉम्बिनेशन टर्म प्लान पर 80C की छूट के साथ-साथ लॉन्ग टर्म में 12%+ का तगड़ा रिटर्न हासिल करने में मदद करता है।

कैसे करें स्मार्ट शुरुआत?

टैक्स बचाना निवेश की प्रक्रिया का एक छोटा सा हिस्सा होना चाहिए, मुख्य लक्ष्य नहीं। सबसे पहले अपनी उम्र और जरूरतों के हिसाब से पर्याप्त टर्म इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस लें। इसके बाद बचे हुए पैसों को ELSS, PPF या NPS जैसे बेहतर रिटर्न देने वाले साधनों में अपनी रिस्क प्रोफाइल के अनुसार बांटें।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।