सुनील सिंघानिया के फंड ने इस स्टॉक में बड़ी हिस्सेदारी खरीदी, 20% का अपर सर्किट लगा

Bai-Kakaji Polymers: प्लास्टिक पैकेजिंग सेक्टर की कंपनी बाई-काकाजी पॉलिमर्स का शेयर गुरुवार को 20% के अपर सर्किट के साथ बंद हुआ। यह कंपनी की दिसंबर 2025 में लिस्टिंग के बाद सबसे बड़ी एक दिन की तेजी रही। इस उछाल की वजह दिग्गज निवेशक सुनील सिंघानिया के Abakkus Venture Opportunities Fund की बड़ी खरीदारी रही।

बल्क डील में खरीदे 6.08 लाख शेयर

बल्क डील में Abakkus Venture Opportunities Fund ने कंपनी के 6.08 लाख शेयर खरीदे। यह कंपनी की करीब 2.8% हिस्सेदारी के बराबर है। यह सौदा ₹200.34 प्रति शेयर के औसत भाव पर बीएसई में हुआ।

शेयर में तेजी के साथ ट्रेडिंग वॉल्यूम भी कई गुना बढ़ गया। गुरुवार को 13.13 लाख शेयरों में कारोबार हुआ, जबकि पिछले 20 दिनों का औसत दैनिक वॉल्यूम करीब 1 लाख शेयर था।

किन निवेशकों ने बेचे शेयर?

निवेशक संजय पोपटलाल जैन ने बाई-काकाजी पॉलिमर्स के 3.42 लाख शेयर बेचे। यह कंपनी की करीब 1.6% हिस्सेदारी के बराबर है। इस सौदे की वैल्यू करीब ₹6.8 करोड़ रही। जून 2026 तक उनके पास कंपनी में 2.5% हिस्सेदारी थी। वहीं, Tiger Strategies Fund ने भी 1.08 लाख शेयर बेचकर अपनी हिस्सेदारी घटाई। इस सौदे की वैल्यू करीब ₹2.2 करोड़ रही।

बाई-काकाजी पॉलिमर्स के शेयर का हाल

बाई-काकाजी पॉलिमर्स का शेयर गुरुवार को 20% के अपर सर्किट के साथ 240 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 1 साल में स्टॉक करीब 27.52% चढ़ा है। कंपनी का मार्केट कैप करीब ₹514 करोड़ पहुंच गया। इसमें प्रमोटर्स की हिस्सेदारी 74.1% है।

कंपनी का आईपीओ ₹186 प्रति शेयर के भाव पर आया था और 30 दिसंबर 2025 को इसकी शेयर बाजार में लिस्टिंग हुई थी। इससे पहले लिस्टिंग के बाद एक दिन में सबसे बड़ी तेजी करीब 10% रही थी, जो जून 2026 में दर्ज की गई थी।

बाई-काकाजी पॉलिमर्स  का कारोबार

बाई-काकाजी पॉलिमर्स प्लास्टिक पैकेजिंग प्रोडक्ट्स बनाती है। कंपनी PET प्रीफॉर्म, प्लास्टिक कैप और क्लोजर तैयार करती है। इसके ग्राहक पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर, सॉफ्ट ड्रिंक, जूस और डेयरी जैसे उद्योग हैं। कंपनी की शुरुआत 2013 में महाराष्ट्र के लातूर से हुई थी और यह बाई काकाजी ग्रुप का हिस्सा है।

वित्त वर्ष 2025-26 में बाई-काकाजी पॉलिमर्स का शुद्ध मुनाफा 47% बढ़कर ₹27 करोड़ हो गया। वहीं, रेवेन्यू 12.1% बढ़कर ₹365 करोड़ रहा।

सुनील सिंघानिया कौन हैं?

सुनील सिंघानिया जाने-माने निवेशक और फंड मैनेजर हैं। वह पहले Reliance Mutual Fund (अब Nippon India Mutual Fund) के Chief Investment Officer (CIO) रह चुके हैं। 2018 में उन्होंने अपनी निवेश कंपनी Abakkus Asset Manager LLP की शुरुआत की।

Abakkus के जरिए वह शेयर बाजार में निवेश करते हैं और Abakkus Venture Opportunities Fund जैसे फंड मैनेज करते हैं। मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों में उनके निवेश पर बाजार की खास नजर रहती है। यही वजह है कि जब उनके फंड की किसी कंपनी में खरीदारी की खबर आती है, तो उस शेयर में अक्सर बड़ी हलचल देखने को मिलती है।

Stocks to Watch: 31 जुलाई को फोकस में रहेंगे ये 12 स्टॉक्स, दिख सकती है बड़ी हलचल

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Best Agrolife Q1 Results: एग्रोकेमिकल कंपनी का मुनाफा 104% बढ़ा, फोकस में रहेगा स्टॉक

Best Agrolife Q1 Results: एग्रोकेमिकल कंपनी Best Agrolife ने जून तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। इस बार कंपनी का प्रदर्शन बेहतर रहा। अप्रैल-जून तिमाही में कंपनी का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 104% बढ़कर 41 करोड़ रुपये पहुंच गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह 20 करोड़ रुपये था।

कंपनी का कहना है कि बेहतर प्रोडक्ट मिक्स, कीमतों में बढ़ोतरी, लागत पर नियंत्रण और ऑपरेशनल एफिशिएंसी की वजह से मुनाफे में यह तेज उछाल आया है।

रेवेन्यू भी बढ़ा, मार्जिन में बड़ा सुधार

बेस्ट एग्रोलाइफ का ऑपरेशन होने वाली रेवेन्यू भी बढ़ी है। जून तिमाही में यह 4% बढ़कर 396 करोड़ रुपये रही। एक साल पहले इसी तिमाही में रेवेन्यू 381 करोड़ रुपये थी। ग्रॉस प्रॉफिट 32% बढ़कर 146 करोड़ रुपये पहुंच गया।

ग्रॉस मार्जिन 29% से बढ़कर 37% हो गया। EBITDA 70% बढ़कर 78 करोड़ रुपये रहा। वहीं EBITDA मार्जिन 12% से बढ़कर 20% पर पहुंच गया। PAT मार्जिन भी 5% से बढ़कर 10% हो गई।

तिमाही आधार पर भी रिकवरी दिखी

तिमाही आधार पर भी कंपनी का प्रदर्शन काफी मजबूत रहा। मार्च तिमाही में बेस्ट एग्रोलाइफ का रेवेन्यू 156 करोड़ रुपये था, जो जून तिमाही में बढ़कर 396 करोड़ रुपये पहुंच गई। यानी इसमें 154% की बढ़ोतरी हुई।

EBITDA मार्च तिमाही में 27 करोड़ रुपये के घाटे में था, लेकिन जून तिमाही में 78 करोड़ रुपये के मुनाफे पर पहुंच गया। कंपनी का शुद्ध मुनाफा भी मार्च तिमाही में 37 करोड़ रुपये के नुकसान से निकलकर जून तिमाही में 41 करोड़ रुपये के फायदे में आ गया।

मानसून की देरी के बावजूद अच्छा प्रदर्शन

बेस्ट एग्रोलाइफ के मैनेजिंग डायरेक्टर विमल कुमार ने कहा कि इस बार मानसून देर से आया। कई इलाकों में बारिश भी बराबर नहीं हुई। इसका असर खरीफ की बुवाई और फसल सुरक्षा वाले उत्पादों की मांग पर पड़ा। इसके बावजूद कंपनी ने रेवेन्यू और मुनाफे दोनों में बढ़ोतरी दर्ज की।

उनके मुताबिक Bestman, Fetagen, Warden Extra और Ronfen जैसे प्रोडक्ट्स की मांग मजबूत रही। हाल में लॉन्च किए गए Fluzam और Cubax Power Extra को भी बाजार में अच्छा रिस्पॉन्स मिला।

आगे भी ग्रोथ की उम्मीद

बेस्ट एग्रोलाइफ को उम्मीद है कि अब मानसून की रफ्तार बढ़ने के साथ खरीफ सीजन में मांग भी तेज होगी।

कंपनी का कहना है कि वह नए प्रोडक्ट्स, बाजार विस्तार और ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर फोकस बनाए रखेगी। इससे आने वाली तिमाहियों में भी बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है।

बेस्ट एग्रोलाइफ के शेयर

बेस्ट एग्रोलाइफ का गुरुवार को 1.49% की गिरावट के साथ 16.49 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 1 महीने में स्टॉक 6.87% चढ़ा है। हालांकि, बीते 6 महीने इसने 12.98% का नेगेटिव रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 586.21 करोड़ रुपये है।

बेस्ट एग्रोलाइफ कृषि रसायन (Agrochemicals) सेक्टर की कंपनी है। यह फसल सुरक्षा के लिए कीटनाशक, खरपतवारनाशक, फफूंदनाशक और अन्य क्रॉप प्रोटेक्शन प्रोडक्ट्स बनाती और बेचती है। कंपनी का कारोबार भारत के साथ-साथ कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी फैला है।

Stocks to Watch: 31 जुलाई को फोकस में रहेंगे ये 12 स्टॉक्स, दिख सकती है बड़ी हलचल

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stocks to Watch: 31 जुलाई को फोकस में रहेंगे ये 12 स्टॉक्स, दिख सकती है बड़ी हलचल

Stocks to Watch: गुरुवार 31 जुलाई को शेयर बाजार में कई बड़े स्टॉक्स पर निवेशकों की नजर रहेगी। तिमाही नतीजों की रिपोर्ट के बाद इन कंपनियों के शेयरों में तेज हलचल देखने को मिल सकती है। कुछ कंपनियों ने मजबूत नतीजे पेश किए हैं, जबकि कुछ का प्रदर्शन उम्मीद से कमजोर रहा। आइए जानते हैं शुक्रवार के कारोबार में किन 12 स्टॉक्स पर फोकस रहेगा।

Tata Steel

स्टील सेक्टर की दिग्गज कंपनी टाटा स्टील का जून तिमाही में कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा 11.6% बढ़कर ₹2,318.4 करोड़ रहा। यह बाजार के अनुमान से थोड़ा कम रहा। हालांकि, रेवेन्यू 14.3% बढ़कर ₹60,794.3 करोड़ पहुंचा और अनुमान से बेहतर रहा।

LIC Housing Finance

हाउसिंग फाइनेंस कंपनी एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस का जून तिमाही में शुद्ध मुनाफा 9.9% बढ़कर ₹1,499 करोड़ पहुंच गया। हालांकि, कंपनी की मुख्य कमाई का पैमाना नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) सिर्फ 0.6% बढ़कर ₹2,087 करोड़ रहा।

Thermax

इंजीनियरिंग कंपनी थरमैक्स का जून तिमाही में कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा 83.4% गिर गया। हालांकि, इस दौरान कंपनी का रेवेन्यू बढ़ा। इसके बावजूद प्रॉफिटेबिलिटी पर भारी दबाव रहा, जिससे मुनाफे में बड़ी गिरावट दर्ज की गई।

Indegene

लाइफ साइंसेज और हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी कंपनी इंडीजीन का जून तिमाही में शुद्ध मुनाफा ₹116 करोड़ पर स्थिर रहा। हालांकि, कंपनी का रेवेन्यू 39.7% बढ़कर ₹1,063 करोड़ पहुंच गया। कारोबार तेजी से बढ़ा, लेकिन मुनाफे पर दबाव रहने से कमाई में बढ़ोतरी नहीं हो सकी।

Mazagon Dock Shipbuilders

डिफेंस सेक्टर की सरकारी कंपनी मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स ने जून तिमाही में मजबूत नतीजे पेश किए। कंपनी का शुद्ध मुनाफा 21.5% बढ़कर ₹549.4 करोड़ हो गया। वहीं, ऑपरेशंस से रेवेन्यू 12.1% बढ़कर ₹2,943 करोड़ पहुंच गया।

Nucleus Software Exports

बैंकिंग और फिनटेक सॉफ्टवेयर कंपनी न्यूक्लियस सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट्स का जून तिमाही में शुद्ध मुनाफा 32.2% घटकर ₹23.87 करोड़ रह गया। कंपनी का रेवेन्यू 3.35% गिरकर ₹210.43 करोड़ रहा। बढ़ते ऑपरेटिंग खर्च की वजह से मुनाफे और प्रॉफिटेबिलिटी पर दबाव देखने को मिला।

JBM Auto

ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर की कंपनी जेबीएम ऑटो का जून तिमाही में शुद्ध मुनाफा 14.7% बढ़ा। कंपनी को इलेक्ट्रिक व्हीकल और ऑटो कंपोनेंट्स कारोबार में अच्छी ग्रोथ का फायदा मिला।

RailTel Corporation of India

रेलवे सेक्टर की सरकारी टेलीकॉम कंपनी रेलटेल का जून तिमाही में शुद्ध मुनाफा ₹66 करोड़ पर स्थिर रहा। हालांकि, रेवेन्यू और ऑपरेटिंग प्रॉफिट में दोहरे अंक की बढ़त दर्ज की गई।

Swiggy

ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनी स्विगी का जून तिमाही में घाटा घटकर ₹791 करोड़ रह गया। पिछले साल समान तिमाही में कंपनी को ₹1,197 करोड़ का घाटा हुआ था। रेवेन्यू और ऑपरेटिंग प्रदर्शन बाजार के अनुमान के मुताबिक रहा।

Chambal Fertilisers and Chemicals

उर्वरक सेक्टर की कंपनी चंबल फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स का जून तिमाही में कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा 4.6% घटकर ₹544 करोड़ रह गया। हालांकि, इस दौरान कंपनी की ऑपरेटिंग प्रॉफिटेबिलिटी में सुधार देखने को मिला।

Torrent Pharmaceuticals

फार्मा सेक्टर की कंपनी टोरेंट फार्मास्यूटिकल्स ने जून तिमाही में मजबूत नतीजे पेश किए। कंपनी का शुद्ध मुनाफा 3.3% बढ़कर ₹566 करोड़ पहुंच गया। वहीं, रेवेन्यू 54.8% उछलकर ₹4,921 करोड़ रहा। घरेलू कारोबार और अमेरिकी बाजार में अच्छी मांग का फायदा मिला।

Rainbow Children’s Medicare

हेल्थकेयर सेक्टर की कंपनी रेनबो चिल्ड्रन्स मेडिकेयर का जून तिमाही में शुद्ध मुनाफा 13.2% बढ़कर ₹60.57 करोड़ हो गया। इस दौरान रेवेन्यू और ऑपरेटिंग प्रॉफिट में भी मजबूत दोहरे अंक की बढ़त दर्ज की गई।

Q1 Earnings (31 जुलाई)

अलग अलग सेक्टरों की कई कंपनियां शुक्रवार, 31 जुलाई को जून तिमाही के नतीजे जारी करेंगी। इनमें Aadhar Housing Finance, Aarti Drugs, Aditya Birla Capital, ABB India, Bajaj Holdings & Investment, Concord Biotech, CORONA Remedies, Dixon Technologies (India) और GAIL (India) समेत कई कंपनियां शामिल हैं।

Tata Steel Q1 Results: टाटा की कंपनी को ₹2318 करोड़ मुनाफा, रेवेन्यू उम्मीद से बेहतर

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Gokul Agro Q1 Results: गोकुल एग्रो का मुनाफा 74% उछला, EBITDA में 52% की शानदार बढ़त

Gokul Agro Q1 Results: खाद्य तेल और एग्री-प्रोसेसिंग सेक्टर की कंपनी गोकुल एग्रो रिसोर्सेज ने जून तिमाही में अच्छे नतीजे पेश किए हैं। कंपनी की बिक्री और मुनाफा दोनों बढ़े हैं। बेहतर ऑपरेटिंग एफिशिएंसी, वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स, एक्सपोर्ट और नॉन-एडिबल बिजनेस ने इस ग्रोथ में अहम भूमिका निभाई।

रेवेन्यू ₹5,295 करोड़ के पार

अप्रैल-जून तिमाही में गोकुल एग्रो का शुद्ध मुनाफा 74% बढ़कर ₹123 करोड़ पहुंच गया। वहीं, कंपनी की कुल आय 7% बढ़कर ₹5,295 करोड़ पहुंच गई।

EBITDA 52% बढ़कर ₹217 करोड़ रहा। कंपनी का PAT मार्जिन 2.34% रहा और EPS ₹4.16 दर्ज किया गया। यानी हर मोर्चे पर कंपनी की कमाई मजबूत हुई।

कारोबार लगातार बढ़ रहा

गोकुल एग्रो के पास 575 से ज्यादा डिस्ट्रीब्यूटर्स का नेटवर्क है। इसकी कुल प्रोसेसिंग क्षमता 20 लाख MTPA है। कंपनी के उत्पाद भारत के 28 राज्यों और 33 देशों में बिकते हैं। पिछले पांच साल में कंपनी का रेवेन्यू 23% CAGR, EBITDA 35% CAGR और शुद्ध मुनाफा 54% CAGR की दर से बढ़ा है।

नए कारोबार पर फोकस

गोकुल एग्रो के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर कनुभाई जे. ठक्कर ने कहा कि इस तिमाही में बायोडीजल प्लांट शुरू किया गया। साथ ही स्पेशलिटी फैट्स पोर्टफोलियो का विस्तार हुआ। ई-कॉमर्स, इंस्टीट्यूशनल ग्राहकों और एक्सपोर्ट के जरिए बाजार में पकड़ भी मजबूत हुई। इन कदमों से आने वाले समय में ग्रोथ को और रफ्तार मिलने की उम्मीद है।

आगे क्या है प्लान?

गोकुल एग्रो अब कंज्यूमर ब्रांड्स, वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स और एक्सपोर्ट बिजनेस पर ज्यादा जोर दे रही है। इसके साथ ही क्षमता बढ़ाने और मजबूत वित्तीय अनुशासन बनाए रखने पर भी फोकस रहेगा। कंपनी का मानना है कि खाद्य तेल की बढ़ती मांग और सरकार की नीतियों से आगे भी कारोबार को अच्छा सपोर्ट मिलेगा।

गोकुल एग्रो का शेयर गुरुवार को 0.75% की बढ़त के साथ 224.88 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में स्टॉक ने 38.87% का रिटर्न दिया है। वहीं, 1 साल में यह 45.79% चढ़ा है।

Tata Steel Q1 Results: टाटा की कंपनी को ₹2318 करोड़ मुनाफा, रेवेन्यू उम्मीद से बेहतर

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Mazagon Dock Q1 Results: सरकारी डिफेंस कंपनी का मुनाफा 22% बढ़ा, ऑर्डर बुक ₹18000 करोड़ के पार

Mazagon Dock Q1 Results: डिफेंस सेक्टर की सरकारी कंपनी मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स (Mazagon Dock Shipbuilders) ने जून तिमाही के मजबूत नतीजे जारी किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 21.5% बढ़कर ₹549.4 करोड़ रहा। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹452.2 करोड़ था।

रेवेन्यू में 12% की बढ़त

मझगांव डॉक का ऑपरेशंस से रेवेन्यू 12.1% बढ़कर ₹2,943 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी अवधि में यह ₹2,626 करोड़ था। कंपनी को अपने विभिन्न युद्धपोत और पनडुब्बी निर्माण प्रोजेक्ट्स में लगातार काम आगे बढ़ने का फायदा मिला।

मझगांव डॉक का जून तिमाही में EBITDA 48% बढ़कर ₹446.6 करोड़ पहुंच गया। वहीं, EBITDA मार्जिन 11.5% से बढ़कर 15.2% हो गया। इससे साफ है कि कंपनी की ऑपरेशनल एफिशिएंसी में अच्छी सुधार देखने को मिली। कंपनी की कुल आय ₹3,081 करोड़ रही, जो पिछले साल की समान तिमाही के ₹2,949 करोड़ से ज्यादा है।

ऑर्डर बुक ₹18,218 करोड़

30 जून 2026 तक मझगांव डॉक की ऑर्डर बुक ₹18,218 करोड़ रही। इससे आने वाली तिमाहियों में कंपनी के कारोबार और रेवेन्यू को अच्छी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

मझगांव डॉक के शेयरों का हाल

मझगांव डॉक का शेयर गुरुवार को 0.79% बढ़कर ₹2,326 पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में स्टॉक 9.60% गिरा है। वहीं, 1 साल में यह 15.72% टूटा है। हालांकि, पिछले 5 साल में स्टॉक ने 1,692% का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 93.62 हजार करोड़ रुपये हैय़

मझगांव डॉक का बिजनेस

मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स भारत की प्रमुख रक्षा शिपबिल्डिंग कंपनी है। यह भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल के लिए युद्धपोत, पनडुब्बियां और अन्य रक्षा पोत बनाती है। यह देश की इकलौती सरकारी शिपयार्ड कंपनी है, जो डिस्ट्रॉयर और पनडुब्बियां दोनों बनाती है। साथ ही, इसमें एक साथ 11 पनडुब्बियां और 10 युद्धपोत बनाने की क्षमता है।

Vedanta Demerger: वेदांता अब रियल एस्टेट कारोबार भी अलग करेगी, शेयरधारकों को मिलेगा नया शेयर

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Zepto ने फिलहाल आईपीओ का प्लान रोका, प्री-आईपीओ प्लेसमेंट के जरिए मौजूदा इनवेस्टर्स से जुटा सकती है 1000 करोड़

जेप्टो ने फिलहाल आईपीओ पेश करने का प्लान रोक दिया है। इसकी जगह कंपनी ने मौजूदा निवेशकों से 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा फंड जुटाने की कोशिश शुरू कर दी है। क्विक कॉमर्स कंपनी यह पैसा प्री-आईपीओ प्लेसमेंट के जरिए जुटाएगी। इस मामले से जुड़े लोगों ने मनीकंट्रोल को यह बताया।

कई मौजूदा इनवेस्टर्स प्री-आईपीओ प्लेसमेंट में ले सकते हैं हिस्सा

जेप्टो के प्री-आईपीओ प्लेसमेंट राउंड में कई मौजूदा इनवेस्टर्स के हिस्सा लेने की संभावना है। इनमें Glade Brook, General Catalyst, Good Water Capital और नेक्सस वेंचर पार्टनर्स शामिल हैं। सेबी आईपीओ पेश करने जा रही कंपनियों को प्री-आईपीओ प्लेसमेंट के जरिए प्रस्तावित इश्यू का 20 फीसदी तक फंड जुटाने की इजाजत देता है।

सेबी कंपनी को प्री-आईपीओ प्लेसमेंट से पैसे जुटाने की इजाजत देता है

सेबी के नियम में कहा गया है कि अगर कोई कंपनी आईपीओ से पहले प्री-आईपीओ प्लेसमेंट के जरिए पैसे जुटाती है तो वह पैसा उसके इश्यू में से घटा दिया जाएगा। इसका मतलब है कि जेप्टो अपने आईपीओ के जरिए सिर्फ बाकी पैसे ही जुटा सकेगी। जेप्टो ने पहले आईपीओ से 8000 करोड़ रुपये जुटाने का प्लान बनाया था। बाद में इसे घटाकर करीब 5000-6000 करोड़ रुपये कर दिया था।

म्यूचुअल फंड्स ने जेप्टो की वैल्यूएशन 2.5-3 अरब डॉलर लगाई थी

मनीकंट्रोल ने पहले अपने खबर में बताया था कि जेप्टो के आईपीओ में निवेश में दिलचस्पी रखने वाले म्यूचुअल फंड्स ने कंपनी की वैल्यूएशन पोस्ट इश्यू 2.5-3 अरब डॉलर (24,000-24,900 करोड़ रुपये) के बीच लगाई थी। यह पहले के 5 अरब डॉलर के अनुमानित वैल्यूएशन से काफी कम था।

जेप्टो को 4-4.2 अरब डॉलर वैल्यूएशन पर पूंजी जुटा लेने की उम्मीद

जेप्टो ने सिर्फ छह महीने पहले इनवेस्टर्स से 7 अरब डॉलर की वैल्यूएशन पर फंड जुटाए थे। मामले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने मनीकंट्रोल को बताया, “जेप्टो के 4-4.2 अरब डॉलर वैल्यूएशन पर पूंजी जुटाने की संभावना है। आईपीओ में निवेश के लिए घरेलू म्यूचुअल फंडों की शर्तों से संतुष्ट नहीं होने के बाद जेप्टो ने प्री-आईपीओ प्लेसमेंट के जरिए पैसे जुटाने का फैसला लिया है। “

इन म्यूचुअल फंडों ने जेप्टो के कैश बर्न पर उठाए थे सवाल 

जेप्टो, ग्लेड ब्रुक, जनरल काटालिस्ट, गुडवाटर कैपिटल और नेक्सस वेंचर पार्टनर्स ने इस बारे मनीकंट्रोल के सवालों के जवाब नहीं दिए। इससे पहले SBI MF, ICICI Prudential, Kotak और HDFC सहित दूसरे म्यूचुअल फंडों ने कंपनी के भारी खर्च (Cash Burn) पर सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि लंबे समय तक इस तरह का खर्च नहीं किया जा सकता।

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अगले कुछ महीनों में आईपीओ बाजार में आ सकती है जेप्टो

जेप्टो को उम्मीद है कि वह आने वाले महीनों में मुनाफा बनाने की बेहतर क्षमता के साथ फिर से आईपीओ बाजार में आएगी। उसे अच्छी वैल्यूएशन का भी भरोसा है। कंपनी हर तिमाही करीब 700 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। इस हिसाब से कंपनी के पास आगे की दो तिमाहियों के लिए पैसे बचे हैं।

Gold Silver Price Today: सोना ₹1000 उछलकर ₹1.48 लाख के पार, चांदी ₹600 सस्ती हुई

Gold Silver Price Today: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में गुरुवार को सोने की कीमत ₹1,000 बढ़कर ₹1.48 लाख प्रति 10 ग्राम पहुंच गई। ज्वेलर्स और रिटेल खरीदारों की ताजा खरीदारी के साथ-साथ वैश्विक बाजार में मजबूती से सोने को सहारा मिला। इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में 99.9% शुद्धता वाला सोना ₹1,47,000 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था।

वहीं, चांदी ₹600 टूटकर ₹2,24,700 प्रति किलोग्राम पर आ गई। एक दिन पहले इसका भाव ₹2,25,300 प्रति किलोग्राम था। यह जानकारी ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन ने दी।

क्यों बढ़ी सोने की कीमत?

कारोबारियों के मुताबिक, ज्वैलर्स और स्टॉकिस्ट की बढ़ी खरीदारी से घरेलू बाजार में सोने की कीमतों को सहारा मिला। हालांकि, रुपये में मजबूती की वजह से तेजी सीमित रही।

HDFC Securities के सीनियर कमोडिटी एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति के बाद डॉलर में कमजोरी आई है। इससे सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने की मांग बढ़ी। उन्होंने बताया कि डॉलर इंडेक्स पिछले सत्र में करीब 1% गिरने के बाद 101 के आसपास कारोबार कर रहा था।

अंतरराष्ट्रीय बाजार का हाल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड मामूली बढ़त के साथ 4,071.55 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा। वहीं, स्पॉट सिल्वर 1% चढ़कर 58.25 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया।

Kotak Neo की एवीपी कमोडिटी रिसर्च कायनात चैनवाला के मुताबिक, फिलहाल बाजार की नजर अमेरिका के PCE महंगाई आंकड़ों और जॉबलेस क्लेम्स के डेटा पर है। आने वाले दिनों में यही तय करेगा कि सितंबर में फेड ब्याज दरों में बदलाव की संभावना कितनी मजबूत होती है। साथ ही, निवेशक अमेरिका-ईरान तनाव पर भी नजर बनाए हुए हैं।

भारत में घटी सोने की मांग

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल-जून तिमाही में भारत में सोने की मांग 6% घटकर 131.4 टन रह गई। पिछले साल इसी अवधि में यह 139.7 टन थी। मौसमी सुस्ती, ऊंची कस्टम ड्यूटी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोने की खरीद कम करने की अपील का असर मांग पर देखने को मिला।

वैश्विक स्तर पर अप्रैल-जून तिमाही में सोने की कुल मांग लगभग स्थिर रही। यह 1,269 टन रही, जबकि पिछले साल समान तिमाही में यह 1,268.6 टन थी।

MCX गोल्ड प्राइस का हाल

LKP Securities के वीपी रिसर्च एनालिस्ट (कमोडिटी एवं करेंसी) जतीन त्रिवेदी ने कहा कि COMEX Gold 4,030 से 4,080 डॉलर प्रति औंस के दायरे में कारोबार करता रहा। वहीं, MCX Gold करीब ₹1,42,500 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया और इसमें करीब ₹700 की तेजी आई।

आगे कैसी रहेगी चाल

जतीन त्रिवेदी का कहना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया, लेकिन उसके बयान का रुख अब भी सख्त (Hawkish) रहा। तीन FOMC सदस्यों ने दरें बढ़ाने के पक्ष में वोट दिया। हालांकि, फेड ने आगे ब्याज दरों में बदलाव के समय को लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया। ऐसे में निवेशक फिलहाल सोने में सतर्क रुख अपना रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अब बाजार की नजर अमेरिका के Core PCE Price Index पर रहेगी। यह फेड का पसंदीदा महंगाई संकेतक है और इससे ब्याज दरों की आगे की दिशा तय होने के संकेत मिल सकते हैं। इसके आधार पर सोने की कीमतों में अगली बड़ी चाल देखने को मिल सकती है।

*पीटीआई से इनपुट के साथ

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South Korea Market Crash: किसी का फ्लैट खरीदने का पैसा डूबा तो किसी की शादी की पूरी सेविंग्स स्वाहा

South Korea Market Crash: दक्षिण कोरिया में शेयरों के निवेशकों की दुनिया सिर्फ एक महीने में पलट गई है। एक महीने पहले शेयरों में निवेश से मोटी कमाई का जश्न मनाने वाले कई इनेवस्टर्स आज गम में डूबे हैं। इसकी वजह बीते एक महीने में दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार में आई बड़ी गिरावट है। एक महीने में बाजार का प्रमुख सूचकांक कोस्पी 34 फीसदी क्रैश कर चुका है।

चिप बनाने वाली दो कंपनियों की बदौलत चढ़ा था बाजार

दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार में बीते एक साल में जबर्दस्त तेजी दिखी थी। यह दुनिया में सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाला बाजार बन गया था। हालिया गिरावट के बावजूद कोस्पी का एक साल का रिटर्न 71 फीसदी है। शायद ही दुनिया के किसी बाजार में एक साल में ऐसा उछाल आया होगा। इस तेजी में चिप बनाने वाली दो कंपनियों-SK Hynix और Samsung Electronics का सबसे बड़ा हाथ है। अब बाजार में गिरावट में भी इन्हीं दोनों का हाथ है।

एसके हायनिक्स के शेयर में बीते एक साल में 400% उछाल

फॉरेन इनवेस्टर्स ने एसके हायनिक्स और सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स में बीते एक साल में जमकर पैसे लगाए। इससे दोनों शेयरों की कीमतें रॉकेट जैसी रफ्तार से चढ़ीं। इसका अंदाजा बीते एक साल में दोनों शेयरों में आई तेजी से लगाया जा सकता है। SK Hynix का शेयर बीते एक साल में 400 फीसदी चढ़ा है। सैमसंग इलेक्ट्रानिक्स का शेयर इस दौरान 185 फीसदी चढ़ा है। यह रिटर्न हालिया गिरावट के बावजूद है। इन दोनों शेयरों का वेटेज कोस्पी में करीब 60 फीसदी है।

बीते एक महीने में एसके हायनिक्स 50 फीसदी फिसला 

SK Hynix का शेयर बीते एक महीने में 50 फीसदी से ज्यादा गिर चुका है। Samsung Electronics का शेयर बीते एक महीने में 38 फीसदी गिरा है। इस गिरावट ने उन रिटेल इनवेस्टर्स को बड़ी चोट पहुंचाई है, जिन्होंने शेयर बाजार में तेजी का फायदा उठाने के लिए अपनी जिंदगी भर की सेविंग्स शेयरों में लगा दिए थे। कई निवेशकों ने अपना दर्द सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बयां किए हैं। 29 जुलाई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ऐसे निवेशकों के कई पोस्ट देखने को मिले।

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घर खरीदने के पैसे से लेकर शादी की सेविंग्स तक स्वाहा

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म थ्रेड पर एक यूजर ने बताया कि शेयरों में निवेश से एक समय उसका मुनाफा करीब 4 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था। अब वह 4.6 करोड़ रुपये के घाटे पर बैठा है। एक दूसरे इनवेस्टर ने बताया कि उसके पोर्टफोलियो की वैल्यू 40 फीसदी घट गई है। उसने शादी के लिए अपनी सेविंग्स के पैसे शेयर बाजार में लगाए थे। एक दूसरे यूजर ने बताया कि उसे करीब 2 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। उसने फ्लैट खरीदने के लिए रखे पैसे को शेयर बाजार में लगा दिया था।