5,000 किलोमीटर की फ्लाइटों पर ईयू का उत्सर्जन शुल्क

Air India Flight

ओंकार सिंह जनौटी

अमेरिका ने यूरोपीय संघ की नई कार्बन उत्सर्जन योजना को लेकर एक बार फिर चिंता जताई है। लंबी दूरी की उड़ान पर शुल्क के इस प्रस्ताव से भारत और ब्राजील समेत कई देश नाखुश हैं। ALSO READ: कमजोर हो सकती है दुनिया की सबसे असरदार पर्यावरण नीति 'ईटीएस'

 

अमेरिकी परिवहन विभाग ने कहा है कि वह यूरोपीय संघ की उत्सर्जन व्यापार प्रणाली (ETS) के किसी भी विस्तार को लेकर “गहरी चिंता” में है। असल में यूरोपीय आयोग ने हाल में प्रस्ताव दिया है कि यूरोप से रवाना होने वाली कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर कार्बन उत्सर्जन शुल्क लागू किया जाएगा। यह यूरोप से उड़ान भरकर 5,000 किलोमीटर की दूरी तय करने वाली फ्लाइटों पर लागू होगा।

 

2029 से लागू होने वाले इस कदम से जर्मनी, फ्रांस, इटली या डेनमार्क से रूस, सऊदी अरब, यूएई, तुर्की और मिस्र जाने वाली फ्लाइटें प्रभावित होंगी। हालांकि एक तरफ 5,000 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तय करने वाली उड़ानें इसके दायरे से बाहर रहेंगी। माना जा रहा है कि ईयू ने यह सीमा अमेरिका को नाराज ना करने के लिए रखी है। अमेरिका और यूरोपीय संघ के देशों के बीच हवाई दूरी 5,000 किलोमीटर से ज्यादा है। इसके साथ ही भारत, जापान और चीन से यूरोप पहुंचने वाली उड़ानों पर पहले चरण में इसका असर नहीं पड़ेगा।

 

यूरोपीय संघ के जलवायु कमिश्नर होप्के वोएकस्त्रा कहते हैं, “उड्डयन ही एकमात्र ऐसा बड़ा सेक्टर है, जिसमें उत्सर्जन घटने के बजाए बढ़ रहा है।” यूरोपीय अधिकारी के मुताबिक उत्सर्जन व्यापार प्रणाली से जुड़े शुल्क में प्राइवेट जेट और चार्टर्ड उड़ानें भी आएंगी।

 

यूरोपीय संघ 2012 से सभी इंटरनेशनल फ्लाइटों को ETS के दायरे में लाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन इस व्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखा विरोध झेलना पड़ रहा है। यह विरोध अब भी जारी है। सोमवार को अमेरिका के परिवहन मंत्रालय के प्रवक्ता ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स के सामने ETS को लेकर गहरी चिंता जताई।

 

असल में यूरोपीय आयोग ने 17 जुलाई को ETS से जुड़े प्रस्ताव प्रकाशित किए। यह प्रस्ताव यूरोप से उड़ान भरने वाली अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को लेकर थे। इन प्रस्तावों के सामने आने के बाद अमेरिकी परिवहन मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, “हम यूरोपीय आयोग के प्रस्ताव की समीक्षा कर रहे हैं और हम अमेरिकी उपभोक्ताओं और कारोबारों को बचाने के लिए जरूरी कदम उठा रहे हैं।” ALSO READ: दोहरे मापदंडों के चलते घिरे दिग्गज जर्मन नेता का इस्तीफा

 

क्यों ETS का विस्तार चाहता है ईयू

यूरोपीय संघ को लगता है कि जलवायु को गर्म करने वाली गैसों के उत्सर्जन को कम करने के लिए अगर संघ में कड़े नियम लागू किए जाते हैं, तो कई कंपनियां ईयू से बाहर निकलकर, करीबी पड़ोसी देशों में जा सकती हैं। इससे उत्सर्जन भी कम नहीं होगा और कंपनियां स्वच्छ ऊर्जा से जुड़ी तकनीक में निवेश करने के लिए भी प्रोत्साहित नहीं होंगी।

 

हालांकि ईयू के भीतर भी चेक गणराज्य, इटली और पोलैंड जैसे देश ETS का विरोध कर रहे हैं। इन देशों का कहना है कि इससे छोटे और मध्यम श्रेणी के उद्योगों व कारोबारों पर बेहताशा बोझ पड़ेगा जिससे वे बिखर सकते हैं।

 

वहीं आयोग का कहना है कि यूरोपीय संघ में परिवहन की वजह से होने वाला उत्सर्जन अभी कुल उत्सर्जन का 14 फीसदी है। यूरोपीय संघ के कुल सीओटू उत्सर्जन में एविएशन सेक्टर की हिस्सेदारी करीब 4 फीसदी है। आयोग का कहना है कि अगर ETS जैसे कदम नहीं उठाए गए तो 2050 तक यह उत्सर्जन बढ़कर 90 फीसदी हो सकता है और इसके लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार लंबी दूरी की उड़ानें होंगी। ALSO READ: चैट जीपीटी के ज्यादा इस्तेमाल से दिमाग कमजोर होने का डर

 

विरोध करने वालों की साफ चेतावनियां

ईयू से बाहर के देशों ने चेतावनी दी है कि ETS अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और जहाजरानी उद्योग को प्रभावित करेगा। इसका सीधा असर यूरोपीय बंदरगाहों से निकलने वाले विमानों और मालवाहक जहाजों पर पड़ेगा। अमेरिका, चीन, तुर्की और यूएई जैसे देश ETS को अंतरराष्ट्रीय परिवहन समझौतों का उल्लंघन  बता रहे हैं।

 

अमेरिका और अन्य कारोबारी साझेदार, यूरोपीय संघ को जवाबी कदमों की चेतावनी भी दे चुके हैं। ETS का विरोध कर रहे देशों का कहना है कि अगर यूरोपीय संघ कार्बन प्राइसिंग पॉलिसी पर आगे बढ़ा तो वे भी अपने उद्योगों को इसके वित्तीय बोझ से बचाएंगे।

 

ब्रिटेन के साथ साथ ETS को लेकर भारत और ब्राजील की भी आपत्तियां हैं। ब्राजील और भारत अंतरराष्ट्रीय सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेश (ICAO) के जरिए उड्डयन क्षेत्र में ETS का विरोध कर रहे हैं। दोनों देशों का आरोप है कि यूरोपीय देशों ने ऐतिहासिक रूप से ग्रीनहाउस गैसों का सबसे ज्यादा उत्सर्जन किया है और अब जब उनका एविएशन सेक्टर विकास कर रहा है तो ब्रसेल्स उस पर बंदिशें लगाने की कोशिश कर रहा है।

 

18% टूटे Medplus Health के शेयर, निवेश के दो तगड़े ऐलान के बावजूद कमजोर रिजल्ट पड़ा भारी

Medplus Health Share Price: देश की सबसे बड़ी रिटेल फार्मेसी ओमनी चैनल मेडप्लस हेल्थ सर्विसेज के शेयरों को जून तिमाही के रिजल्ट से तगड़ा शॉक लगा है। इसके झटके से मेडप्लस के शेयर करीब 18% टूट गए और फिसलकर एक साल के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गए। शेयरों को निवेश के दो बड़े ऐलान से भी सपोर्ट नहीं मिल पाया। अभी की बात करें तो फिलहाल 14.95% की गिरावट के साथ मेडप्लस का शेयर ₹676.45 के भाव पर है। इंट्रा-डे में यह 17.80% टूटकर ₹653.80 तक आ गया था।

Medplus Health Services Q1 Results: खास बातें

चालू वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही मेडप्लस हेल्थ सर्विसेज के लिए किसी झटके से कम नहीं रही। जून तिमाही में कंपनी का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 21.7% गिरकर ₹33.17 करोड़ पर आ गया। मुनाफे में यह गिरावट ऐसे समय में आई, जब कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू इस दौरान 21.84% बढ़कर ₹1879.60 करोड़ पर पहुंच गया। ऑपरेटिंग लेवल पर कंपनी का ईबीआईटीडीए इस दौरान 1.9% बढ़कर ₹130.7 करोड़ पर पहुंचा लेकिन ईबीआईटीडीए मार्जिन 8.5% से फिसलकर 7.1% पर आ गया। जून तिमाही में कंपनी ने 146 नए स्टोर खोले जिसमें 131 फ्रेंचाइजी स्टोर्स थीं।

कहां निवेश कर रही मेडप्लस?

एक्सचेंज फाइलिंनग में नतीजे के साथ-साथ कंपनी ने बताया कि इसकी मुख्य सब्सिडियरी ऑप्टिवल हेल्थ सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड तेलंगाना के हैदराबाद में एक फूड पार्क बनाने की योजना बना रही है। इसमें कोल्ड प्रेस ऑयल निकालने वाली यूनिट भी शामिल होगी। इसमें करीब ₹40 करोड़ की पूंजी लगेगी। इसके अलावा कंपनी की योजना हैदराबाद में एक कॉन्सिअर्ज हेल्थ एंड वेलनेस सर्विसेज फैसिलिटी शुरू करने की भी है। इसमें करीब ₹115 करोड़ का निवेश होगा जिसमें ₹90 करोड़ का कैपिटल एक्सपेंडिचर है।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल?

मे़डप्लस हेल्थ सर्विसेज के शेयरों ने निवेशकों के पोर्टफोलियो को कुछ ही महीने में बीमार कर दिया। 21 मई 2026 को बीएसई पर यह ₹1,020.35 के भाव पर था जो इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है। इस हाई लेवल से दो ही महीने में यह 35.92% फिसलकर आज 22 जुलाई 2026 को ₹653.80 पर आ गया जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है।

Trump Tariffs: जेनेरिक्स पर ट्रंप का एक ऐलान, फार्मा सेक्टर में कोहराम, भारतीय कंपनियों पर पड़ेगा इतना गहरा असर

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Indo-MIM IPO: पैसे कर लें तैयार! कल से खुलेगा ₹3,811 करोड़ का मेगा मेनबोर्ड आईपीओ, ग्रे मार्केट में 40% ऊपर चल रहा भाव

Indo MIM IPO Details & GMP: अगर आप आईपीओ मार्केट में दांव लगाने की योजना बना रहे हैं, तो बेंगलुरु बेस्ड प्रिसिजन इंजीनियरिंग कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर इंडो-एमआईएम का बड़ा आईपीओ कल यानी 23 जुलाई से खुल रहा है। ₹3,811.21 करोड़ का यह मेनबोर्ड आईपीओ बाजार में दस्तक देने से पहले ही ग्रे मार्केट में धमाल मचा रहा है।

मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, कंपनी के शेयर ग्रे मार्केट में करीब 40% के तगड़े प्रीमियम (GMP) पर ट्रेड कर रहे हैं, जो लिस्टिंग के दिन शानदार रिटर्न का संकेत दे रहा है। आइए जानते हैं इस आईपीओ की प्राइस बैंड, जरूरी तारीखें, वित्तीय सेहत और अन्य प्रमुख बातें।

Indo-MIM IPO की सभी जरूरी डिटेल्स

  • एंकर इनवेस्टर्स के लिए बिडिंग: 22 जुलाई
  • इश्यू ओपनिंग और क्लोजिंग डेट: 23 से 27 जुलाई
  • प्राइस बैंड: ₹461 से ₹485 प्रति शेयर
  • रिटेल निवेशकों के लिए न्यूनतम निवेश: ₹14,550
  • शेयर अलॉटमेंट की तारीख: 28 जुलाई
  • लिस्टिंग डेट (BSE & NSE): 30 जुलाई

इश्यू साइज और फंड का इस्तेमाल

यह आईपीओ कुल ₹3,811.21 करोड़ का है जिसमें ₹500 करोड़ का फ्रेश इश्यू और ₹3,312 करोड़ ऑफर फॉर सेल (OFS) है। ओएफएस के तहत ग्रीन मीडोज इन्वेस्टमेंट्स 6.05 करोड़ शेयर, अनुराधा कोडुरी 54.59 लाख शेयर और आईआईटी मद्रास 23.07 लाख शेयर बेच रहे हैं।

फ्रेश इश्यू से मिलने वाले ₹500 करोड़ में से ₹400 करोड़ का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए किया जाएगा। कंपनी का मई 2026 तक कंपनी पर कुल ₹1,212.3 करोड़ का बकाया कर्ज था। बाकी फंड का इस्तेमाल सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए होगा।

कंपनी का फाइनेंशियल परफॉर्मेंस और बिजनेस

1996 में स्थापित इंडो-एमआईएम (Indo-MIM) मेटल इंजेक्शन मोल्डिंग (MIM) टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके प्रिसिजन इंजीनियरिंग कंपोनेंट्स बनाती है। कंपनी ऑटोमोटिव, डिफेंस, मेडिकल, कंज्यूमर और एयरोस्पेस सेक्टर्स के लिए काम करती है। फाइनेंशियल ग्रोथ की बात करें तो वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का नेट प्रॉफिट साल-दर-साल (YoY) 26% बढ़कर ₹533.5 करोड़ हो गया। इसी अवधि में परिचालन राजस्व भी 26% बढ़कर ₹4,193 करोड़ पर पहुंच गया।

ग्रे मार्केट में कितना चल रहा है जीएमपी?

आईपीओ मार्केट पर नजर रखने वाले प्लेटफॉर्म्स Investorgain और IPO Watch के मुताबिक, 22 जुलाई की सुबह इंडो-एमआईएम के शेयर का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) ₹194 से ₹195 प्रति शेयर दर्ज किया गया। इसकी संभावित लिस्टिंग प्राइस ₹485 (अपर प्राइस बैंड) + ₹195 (GMP) = ₹680 प्रति शेयर हो सकती है। निवेशकों को इस आईपीओ की लिस्टिंग पर ही करीब 40.21% का मुनाफा हो सकता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Bandhan Bank Share Price: RoA गाइडेंस में कटौती से शेयर 15% टूटा, ब्रोकरेज फर्मों ने भी घटाया भरोसा, अब क्या निवेशक!

Bandhan Bank Share Price: प्राइवेट सेक्टर की लीडिंग बैंक बंधन बैंक (Bandhan Bank) के शेयर में बुधवार को भारी गिरावट देखने को मिली। तिमाही नतीजों में शानदार बढ़त के बावजूद शेयर इंट्राडे में 15 फीसदी टूट गया। अच्छे नतीजों के बाद भी शेयरों में गिरावट की मुख्य वजह ‘एग्जिट RoA’गाइडेंस में कटौती रही है। बंधन बैंक के मैनेजमेंट ने अपनी अर्निंग्स कॉल में बताया है कि इसने अपने ‘एग्जिट RoA’ गाइडेंस को पहले के 1.6%-1.8% से घटाकर 1.2%-1.4% कर दिया है। मैनेजमेंट ने यह भी कहा कि डिपॉजिट की अधिक लागत के कारण मार्जिन पर दबाव बना रह सकता है।

मैनेजमेंट ने डिपॉजिट कॉस्ट, अनिश्चित ग्लोबल माहौल, मॉनसून और टेक्नोलॉजी पर अधिक खर्च को बैंक के लिए कुछ मुख्य जोखिमों के तौर पर बताया है। यहीं कारण है कि बैंक का शेयर 208.60 रुपये के मुकाबले सीधे 10 फीसदी लोअर सर्किट के साथ 187.75 रुपये पर खुला है और इसके बाद करीब 10 बजे तक ये 14 फीसदी गिरकर 179.25 रुपये पर है।

नतीजों के बाद ब्रोकरेज की क्या है राय

मैनेजमेंट के बयान के बाद ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने स्टॉक पर अपनी रेटिंग बदल दी है। इसने पिछली “Buy” रेटिंग को घटाकर “hold” कर दिया है। हालांकि इसका प्राइस टारगेट ₹225 प्रति शेयर बनाए रखा है, जो मंगलवार के क्लोजिंग लेवल से 8% ऊपर की बढ़त दिखाता है।

मोतीलाल ओसवाल ने बंधन बैंक के लिए फाइनेंशियल ईयर 2027 और 2028 के अर्निंग्स एस्टिमेट में क्रमशः 14% और 6% की कटौती की है और उम्मीद है कि लेंडर अगले दो सालों में क्रमशः 1% और 1.4% का रिटर्न ऑन एसेट्स (RoA) देगा।

जेपी मॉर्गन 

जेपी मॉर्गन ने बंधन बैंक पर अपनी “Neutral” रेटिंग बनाए रखी है और 175 रुपये प्रति शेयर का टारगेट दिया है, जो स्टॉक में 15% की गिरावट दिखाता है। जेपी मॉर्गन का कहना है कि गाइडेंस में कटौती बंधन बैंक की अर्निंग्स कॉल में एक मुख्य फोकस पॉइंट थी, जिसमें RoA और ग्रोथ गाइडेंस में बड़ी कटौती की गई थी।

ब्रोकरेज ने यह भी कहा कि लेंडर ने अपने लोन ग्रोथ गाइडेंस को 14% से 15% के टारगेट के निचले सिरे तक घटा दिया है। बंधन बैंक ने ज़्यादा एनर्जी कॉस्ट और सप्लाई चेन में रुकावटों से बढ़ते एसेट क्वालिटी रिस्क के साथ-साथ अनिश्चित मॉनसून के कारण ग्रोथ में जानबूझकर मंदी का हवाला दिया है।

नोमुरा

नोमुरा ने बंधन बैंक पर अपनी “Neutral” रेटिंग की राय दी है और इसके लिए 190 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। नोमुरा ने कहा कि बंधन बैंक के एवरेज सेविंग्स अकाउंट रेट्स को 20 बेसिस पॉइंट्स और पीक टर्म डिपॉजिट रेट्स को भी पहली तिमाही के आखिर में 20 बेसिस पॉइंट्स बढ़ाने के कदम का हवाला दिया, क्योंकि डिपॉजिट में बहुत ज़्यादा कॉम्पिटिशन था और इसलिए, ब्रोकरेज को उम्मीद है कि आने वाली तिमाहियों में कॉस्ट पर इसका असर दिखेगा।

ब्रोकरेज ने अपने फाइनेंशियल ईयर 2027-2028 अर्निंग्स पर शेयर अनुमानों में 4% की कटौती करके 7% कर दिया है और क्रेडिट कॉस्ट अनुमानों को पहले के 2% से घटाकर 1.8% करने के बाद भी, 18-24 बेसिस पॉइंट्स कम मार्जिन बना रहे हैं।

CLSA

डाउनग्रेड और सतर्क कमेंट्री के बीच, CLSA ने बंधन बैंक पर अपनी “Outperform” रेटिंग बनाए रखते हुए इसके लिए ₹235 टारगेट प्राइस तय किया है। CLSA का कहना है कि बैंक के RoA गाइडेंस में कटौती से बाजार डर सकता है, लेकिन फाइनेंशियल ईयर 2028 के लिए 1.3% का उनका अनुमान वैसे भी कम था।

बंधन बैंक पर 26 एनालिस्ट का कवरेज है, जिनमें से 15 ने “buy” रेटिंग दी है, सात ने “hold” कहा है, और चार ने स्टॉक पर “Sell” रेटिंग दी है।

Stock Market Live Update: सेंसेक्स 585 अंक टूटा, निफ्टी 24000 के करीब, फार्मा, बैंक शेयरों में दबाव, ऑटो चमके

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Trump Tariffs: जेनेरिक्स पर ट्रंप का एक ऐलान, फार्मा सेक्टर में कोहराम, भारतीय कंपनियों पर पड़ेगा इतना गहरा असर

Trump Tariffs: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार 22 जुलाई को 1 अगस्त 2026 से अमेरिका में आयात होने वाली जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ लगाने की नई टाइमलाइन का ऐलान किया है। इस ऐलान के बाद अब सन फार्मा (Sun Pharma), ल्यूपिन (Lupin), सिप्ला (Cipla) समेत देश की कई दवा कंपनियां निवेशकों के रडार पर आ गई हैं। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा कि अमेरिका में आयात होने वाली दवाईयों पर सभी जेनेरेकि दवाओं पर अब दो साल तक कोई टैरिफ नहीं लगाया जाएगा। ट्रंप के ऐलान के मुताबिक इसके बाद 1 अगस्त 2028 से इन पर 100% टैरिफ लगाया जाएगा और 1 अगस्त 2029 से इसे बढ़ाकर 200% कर दिया जाएगा।

Trump Tariffs: अमेरिका के लिए कितना अहम है जेनेरिक्स?

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के मुकाबिक जेनेरिक दवाओं का उत्पादन अमेरिका में करने के लिए टैरिफ पॉलिसी बनाई गई है। उन्होंने कहा कि जो कंपनियां तय समय के भीतर अमेरिका में अपने प्लांट और इक्विपमेंट नहीं लगाएंगी, उन्हें टैरिफ झेलना पड़ेगा। इससे पहले ट्रंप ने जो टैरिफ लगाए थे, उसके दायरे में ब्रांडेड और पेटेंट वाली दवाईयां थीं, जिसमें अभी भी कोई बदलाव नहीं किया गया है। पहले वाली पॉलिसी में जेनेरिक्स दवाईयां शामिल नहीं थीं क्योंकि अमेरिका में डॉक्टर्स करीब 90% जेनेरिक्स दवाईयां ही लिखते हैं। ट्रंप सरकार ने ट्रेड एक्सपेंशन एक्ट के सेक्शन 232 के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर फार्मा इंडस्ट्री की जांच भी शुरू की थी। इसके अलावा आम लोगों सीधे सस्ती दवाओं की बिक्री के लिए Trump RX नाम से एक प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किया।

भारतीय फार्मा कंपनियों पर क्या असर?

जेनेरिक्स पर अमेरिकी टैरिफ का भारतीय कंपनियों पर बहुत असर पड़ सकता है। इसकी वजह ये है कि भारतीय दवा कंपनियों का अमेरिका में जितना सेल्स वॉल्यूम है, उसका करीब 90% तो जेनेरिक्स दवाईयों का है तो अमेरिका जितना जेनेरिक्स आयात करता है, उसमें 40% भारत से है। भारत से अमेरिका को करीब $1 हजार करोड़ का फार्मा एक्सपोर्ट है। इसके अलावा भारत के बाहर अमेरिकी दवा नियामक एफडीए से मंजूरी मिली हुई मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स में सबसे अधिक भारतीय कंपनियों की ही हैं, जिनकी संख्या लगभग 670 है।

अमेरिका की तुलना में भारत में क्यों बनती हैं अधिक दवाईयां

भारत में दवा बनाने की लागत अमेरिका की तुलना में 30-50% तक सस्ती पड़ती है। सीएनबीसी-टीवी18 की रिपोर्ट के मुताबिक इंडस्ट्री के कई जानकारों का मानना है कि अभी यह देखना बाकी है कि इस नीति को वास्तव में कैसे लागू किया जाएगा और ट्रंप के कार्यकाल के बाद इस पर क्या होगा। एक्सपर्ट्स के मुताबिक लगातार कीमतों में गिरावट, तगड़े कॉम्पटीशन , अलग-अलग प्रकार की डोजेज और सख्त मैन्युफैक्चरिंग क्वालिटी के चलते अमेरिका में बड़े पैमाने पर जेनेरिक दवाओं का उत्पादन आसान नहीं है। एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि अमेरिका में बड़े वॉल्यूम में प्रोडक्शन कैपेसिटी डेवलप करने में कई दशक लग सकते हैं, क्योंकि कम लागत वाली जेनेरिक दवाइयां बनाने को लेकर अमेरिका की क्षमता काफी हद तक कम हो चुकी है।

अमेरिका में किन भारतीय कंपनियों की है मौजूदगी

कई भारतीय कंपनियों की अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स हैं। अरबिंदो फार्मा की अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग में अच्छी मौजूदगी है तो डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज, ल्यूपिन, सिप्ला और जाइडस लाइफ जैसी कंपनियों का भी अमेरिका में कारोबार फैला हुआ है। वहीं एल्केम लैब्स और टोरेंट फार्मा जैसी कंपनियां पूरी तरह से भारत में मौजूद मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स पर निर्भर हैं और अमेरिका से उनकी कमाई बहुत अधिक नहीं होती है। बायोकॉन जैसी कंपनियां बायोसिमिलर और जेनेरिक दवाओं के प्रोडक्शन के लिए भारत और मलेशिया की यूनिट्स पर निर्भर हैं, जबकि सेनोरेस फार्मा की अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग मौजूदगी है।

Market Insight : IT की रैली पर फिर मंडरा रहा खतरा, ट्रंप ने फार्मा सेक्टर को  दिया झटका, जानिए इनमें अब क्या हो रणनीति

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Share Market Crash: खास वजहों से IT-Pharma Sector में बिकवाली की आंधी, 500 प्वाइंट्स टूट गया Sensex

Share Market Crash: अधिकतर एशियाई बाजारों में रौनक के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की आंच में घरेलू बेंचमार्क इंडेक्सेज सेंसेक्स और निफ्टी फिसल गए। फार्मा सेक्टर में जेनेरिक्स दवाईयों पर अमेरिकी टैरिफ और एआई से जुड़े शेयरों में तेजी के चलते भारतीय आईटी स्टॉक्स पर दबाव में सेंसेक्स 500 प्वाइंट्स से अधिक टूट गया तो निफ्टी 50 भी फिसलकर 24000 के एकदम करीब आ गया। ब्रोडर लेवल पर भी बिकवाली का दबाव दिख रहा है और निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में करीब आधे फीसदी तक की गिरावट है।

अब घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो फिलहाल 09:34 AM पर सेंसेक्स (Sensex) 564.77 प्वाइंट्स यानी 0.73% की गिरावट के साथ 76,905.34 और निफ्टी (Nifty) 158.00 प्वाइंट्स यानी 0.65% की फिसलन के साथ 24,029.70 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 581.61 प्वाइंट्स टूटकर 76,888.50 और निफ्टी 168.30 प्वाइंट्स गिरकर 24,019.40 तक आ गया था।

Share Market Crash: ये है वजह

US-Iran War

अमेरिका ने ईरान पर लगातार 11वीं रात हवाई हमले किए। इन हमलों में मिलिट्री ऑपरेशन सेंटर, एयरक्राफ्ट हैंगर और ड्रोन स्टोरेज साइट्स को निशाना बनाया गया। इन हमलों के बाद वॉशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव कम होने के फिलहाल कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। इसने मार्केट में सेंटिमेंट कमजोर किया है।

आईटी-फार्मा सेक्टर में तेज बिकवाली

मार्केट पर आज सबसे अधिक दबाव फार्मा सेक्टर ने बनाया है। ट्रंप ने अपनी पॉलिसी में जेनेरिक्स दवाईयों को भी शामिल किया तो इस सेक्टर की कंपनियों को झटका लगा और निफ्टी फार्मा 1% से अधिक फिसल गया। इसके अलावा एआई से जुड़े स्टॉक्स में तेजी के चलते भारतीय मार्केट में आईटी कंपनियों पर दबाव पड़ा और निफ्टी आईटी 1% से अधिक टूट गया। इसके अलावा बैंकिंग सेक्टर में भी बिकवाली का तेज दबाव है और सरकारी और प्राइवेट बैंकों के निफ्टी इंडेक्स में आधे-आधे फीसदी से अधिक की गिरावट है।

India VIX में उछाल

मार्केट की घबराहट को मापने वाले इंडिया विक्स में गिरावट ने मार्केट पर दबाव बनाया। फिलहाल यह 3.25% की गिरावट के साथ 13.01 पर है। इसके अधिक होने का मतलब वोलैटिलिटी अधिक होने की आशंका है तो कम होने का मतलब वोलैटिलिटी कम होने की संभावना है।

स्टॉक मार्केट में आज की लाइव हलचल के लिए यहां जुड़ें

US-Iran War: अब आर-पार के मूड में ट्रंप! अमेरिका ने ईरान के मिलिट्री ऑपरेशन सेंटर पर की बमबारी, होर्मुज में बढ़ा तनाव

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

SIP Investment: ₹10,000 की SIP से बना ₹28.89 लाख, इस फंड ने 10 साल में निवेशकों को किया मालामाल

Bank of India Debt Fund Returns: म्यूचुअल फंड में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए लंबी अवधि तक निवेश बनाए रखना पैसा जुटाने का एक बेहद कारगर जरिया साबित हुआ है। एक ऐसे ही हाइब्रिड फंड ने बीते 10 वर्षों में निवेशकों को मालामाल कर दिया है। Value Research के आंकड़ों के अनुसार, बैंक ऑफ इंडिया के Mid & Small Cap Equity & Debt Fund (रेगुलर प्लान) में जिन निवेशकों ने 10 साल पहले ₹10,000 की मासिक एसआईपी शुरू की थी, उनका फंड आज ₹28 लाख से अधिक हो चुका है।

आइए जानते हैं कि इस फंड ने बीते एक दशक में कैसा प्रदर्शन किया है, इसका पोर्टफोलियो कैसा है और इसमें निवेश करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

10 साल के SIP कैलकुलेशन का पूरा हिसाब

वैल्यू रिसर्च के एसआईपी कैलकुलेटर के अनुसार, इस फंड का 10 साल का रिपोर्ट कार्ड कुछ इस प्रकार है:

मासिक SIP राशि: ₹10,000

कुल निवेश (10 साल में): ₹12,000,000 (12 लाख रुपये)

कुल फंड वैल्यू: ₹28,89,000 (28.89 लाख रुपये)

वार्षिक रिटर्न (XIRR): 16.76%

फंड हाउस द्वारा जारी डेटा के मुताबिक, इस हाइब्रिड स्कीम ने 20 जुलाई 2016 से 31 मार्च 2026 के बीच 13.2% का चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) दर्ज किया है। इसी अवधि के दौरान निफ्टी मिडस्मॉलकैप 400 टीआरआई ने 15.4% और निफ्टी 100 टीआरआई ने 11.7% का सीएजीआर दिया।

कहां और कैसे पैसा लगाता है यह फंड?

बैंक ऑफ इंडिया के Mid & Small Cap Equity & Debt Fund एक ओपन-एंडेड हाइब्रिड स्कीम है। इसका मुख्य उद्देश्य शेयर बाजार की तेजी का फायदा उठाने के साथ-साथ डेट के जरिए पोर्टफोलियो को स्थिरता देना है।

  • इक्विटी आवंटन: यह फंड अपने कुल एसेट का 65% से 80% हिस्सा मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों के शेयरों में निवेश करता है।
  • डेट आवंटन: बाकी बचा हिस्सा (20% से 35%) डेट और मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में लगाया जाता है।
  • बेंचमार्क: इस स्कीम का बेंचमार्क कंपोजिट इंडेक्स है।

पोर्टफोलियो एलोकेशन: 31 मार्च 2026 तक का आंकड़ा

31 मार्च 2026 तक फंड हाउस द्वारा जारी डेटा के अनुसार, पोर्टफोलियो का बंटवारा इस प्रकार था:

मार्केट कैप के हिसाब से निवेश:

मिड-कैप स्टॉक्स: 48.96%

स्मॉल-कैप स्टॉक्स: 28.63%

डेट एवं अन्य इंस्ट्रूमेंट्स: 22.41%

टॉप सेक्टर्स:

फाइनेंशियल सर्विसेज: 31.33% (सबसे बड़ा हिस्सा)

कैपिटल गुड्स: 13.75%

हेल्थकेयर: 12.35%

मेटल्स एंड माइनिंग: 7.10%

ऑटोमोबाइल एंड ऑटो कंपोनेंट्स: 6.41%

प्रमुख स्टॉक्स: फंड के टॉप 10 स्टॉक्स का कुल पोर्टफोलियो में हिस्सा 23.46% है, जो दिखाता है कि फंड का निवेश किसी एक-दो शेयरों तक सीमित न होकर विविधता से भरा हुआ है। इसके प्रमुख शेयरों में एबॉट इंडिया, यूएनओ मिंडा, इंडियन बैंक, ग्लेनमार्क फार्मास्यूटिकल्स, अरबिंदो फार्मा, लॉयड्स मेटल्स एंड एनर्जी, भारत डायनामिक्स, एरिस लाइफसाइंसेज, जेके सीमेंट और जिंदल स्टेनलेस शामिल हैं।

निवेशकों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में बड़ा हिस्सा होने के कारण यह फंड पारंपरिक बैलेंस्ड फंड्स की तुलना में अधिक रिटर्न की क्षमता रखता है, लेकिन इसमें बाजार का जोखिम भी अधिक होता है। हालांकि फंड का डेट वाला हिस्सा उतार-चढ़ाव को थोड़ा नियंत्रित करने में मदद करता है, लेकिन यह बाजार के जोखिम को पूरी तरह खत्म नहीं करता।

अतीत का प्रदर्शन गारंटी नहीं: म्यूचुअल फंड निवेश बाजार के जोखिमों के अधीन हैं। केवल बीते समय के रिटर्न को देखकर ही फैसला न लें, बल्कि अपने वित्तीय लक्ष्यों, निवेश की अवधि और जोखिम लेने की क्षमता के आधार पर ही निवेश का निर्णय लें।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Silver Gold Price Today : सोना दो हफ्तों के हाई के आसपास, चांदी 1.7% भागी, जानिए कमोडिटी में आज कहां हो सकती है कमाई

Silver Gold Price Today : बुधवार,22 जुलाई को सोने की कीमतों में और बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। ग्लोबल मार्केट में गोल्ड लगभग दो हफ्ते के उच्चतम स्तर पर पहुच गया है। वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव के बीच निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर रुख कर रहे हैं। इसके अलावा ब्याज दरों से जुड़े नए संकेतों के लिए अगले हफ्ते होने वाली US फ़ेडरल रिज़र्व की पॉलिसी मीटिंग पर भी बाजार की नजर है। ऐसे में सोने के सपोर्ट मिल रहा है।

COMEX पर गोल्ड फ़्यूचर्स 1.17% बढ़कर 4,124 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है। जबकि, इंट्राडे में इसने $4,128.40 प्रति औंस का उच्चतम स्तर छुआ था। चांदी का प्रदर्शन और भी बेहतर रहा। COMEX सिल्वर 1.70% बढ़कर 60.115 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया है।

घरेलू बाजार में प्रेशियस मेटल्स की कीमतों में तेजी आने के एक दिन बाद विदेशी बाजारो में भी इनमें तेजी आई है। दिल्ली में सोने की कीमत ₹800 बढ़कर ₹1.47 लाख प्रति 10 ग्राम हो गई है।

लोकल सर्राफा कारोबारियों के मुताबिक मंगलवार, 21 जुलाई को ग्लोबल मार्केट से मिले मजबूत संकेतों और फिजिकल डिमांड के कारण चांदी की कीमत ₹2.21 लाख प्रति किलोग्राम पर सपाट रही।

क्यों बढ़ रही हैं सोने की कीमतें ?

इसकी सबसे बड़ी वजह’सेफ़-हेवन'(सुरक्षित निवेश) के तौर पर सोने की मांग है। पश्चिम एशिया को लेकर तब नई चिंताएं पैदा हो गईं, जब ऐसी खबरें आईं कि सऊदी अरब से एशिया जा रहे दो तेल टैंकरों को यमन के ईरान-समर्थित हूथी विद्रोहियों की धमकियों के बाद लाल सागर में अपना रास्ता बदलना पड़ा। इस घटना से ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ गईं और निवेशकों का रुझान सोने जैसी सुरक्षित निवेश वाली संपत्तियों की ओर बढ़ा।

हालांकि, इस तनाव को कम करने के लिए डिप्लोमैटिक कोशिशें जारी हैं और ईरान बातचीत को आसान बनाने के लिए पाकिस्तान से मदद मांग रहा है। फिर भी मार्केट आगे तनाव बढ़ने की संभावना को लेकर सतर्क हैं।

सोने को आमतौर पर जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता के समय में फायदा होता है क्योंकि जब ग्लोबल ग्रोथ या फाइनेंशियल मार्केट के लिए रिस्क बढ़ता है तो इसमें इन्वेस्टर्स की रुचि बढ़ जाती है।

Gold Price Today: लगातार तीसरे दिन बढ़ी गोल्ड की चमक, चेक करें दिल्ली से पटना तक 24 से 18 कैरट सोने का भाव

फेड की पॉलिसी पर नजर

भू-राजनीतिक घटनाओं के अलावा,निवेशक अगले हफ्ते होने वाली US फेडरल रिजर्व की मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग से पहले भी अपनी पोजीशन बना रहे हैं। बाजार में आम धारणा है कि फेडरल रिज़र्व ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। हालांकि,ट्रेडर मॉनेटरी पॉलिसी की भविष्य की दिशा के संकेत पाने के लिए सेंट्रल बैंक की टिप्पणी और आगे के आर्थिक अनुमानों पर बारीकी से नजर रखेंगे।

सोने की कीमतों पर असर डालने वाले सबसे बड़े फैक्टर्स में से एक ब्याज दरें भी हैं। चूंकि सोने से कोई ब्याज आय नहीं होती,इसलिए ब्याज दरें बढ़ने पर फिक्स्ड-इनकम एसेट्स (जैसे बॉन्ड या फिक्स्ड डिपॉजिट) से मिलने वाला रिटर्न बढ़ जाता है,जिससे सोने का आकर्षण आम तौर पर कम हो जाता है। इसके उलट,ब्याज दरें घटने की उम्मीद या नरम नीतिगत रुख से सोने की कीमतों को सपोर्ट मिलता है।

फिजिकल डिमांड बढ़ने से भी मिल रहा सपोर्ट

जानकारों का कहना है कि ग्लोबल मैक्रो-इकोनॉमिक कारणों के अलावा फिजिकल गोल्ड की खरीदारी में हुई बढ़त से भी सोने की कीमतों में इजाफा हुआ है।

सोने की कीमतों में बढ़त के बावजूद इसके बड़े कंज्यूमर देशों, खासकर चीन से मज़बूत मांग बनी हुई है। साथ ही,पिछले कुछ महीनों में सेंट्रल बैंकों की लगातार खरीदारी ने बुलियन की कीमतों एडिशनल सपोर्ट दिया है।

इसके अलावा चांदी को भी इंडस्ट्रियल मेटल्स के लिए बेहतर होते सेंटीमेंट का फायदा मिला है। इसका इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स,सोलर पैनल और क्लीन-एनर्जी टेक्नोलॉजी में बड़े पैमाने पर होता है।

जानकारों की राय

LKP सिक्योरिटीज में रिसर्च एनालिस्ट (कमोडिटी और करेंसी) और वाइस प्रेसिडेंट जतिन त्रिवेदी का कहना है कि सोने की कीमतों में हालिया गिरावट से बिकवाली का दबाव कम हुआ,जिससे कीमतें तेजी से वापस ऊपर आईं। अमेरिका-ईरान के बीच जारी जियोपॉलिटिकल तनाव के बीच सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) के तौर पर सोने की नई खरीदारी से कीमतों में यह उछाल आया।

त्रिवेदी ने आगे कहा कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और फेडरल रिजर्व के सतर्क रुख की उम्मीदों के बावजूद,जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता ने निवेशकों की सोने में दिलचस्पी फिर से बढ़ा दी है। टेक्निकल नज़रिए से,उन्हें उम्मीद है कि MCX गोल्ड अगले कुछ सेशन में ₹1.41 प्रति 10 ग्राम से ₹1.45 प्रति 10 ग्राम के दायरे में ट्रेड करेगा।

वहीं,HDFC सिक्योरिटीज में कमोडिटीज के सीनियर एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा कि हालिया बढ़त को मजबूत फिजिकल डिमांड और सेंट्रल बैंकों की लगातार खरीदारी का भी सपोर्ट मिला है।

कमोडिटी में कमाई वाले कॉल

कमोडिटी में कमाई वाले कॉल के लिए आज हमारे साथ हैं केडिया एडवाइजरी (Kedia Advisory) के अजय केडिया। इनकी आज एमसीएक्स गोल्ड में 142500 रुपए के आसपास, 141500 रुपए के स्टॉपलॉस के साथ, 144000 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है। वहीं, एमसीएक्स सिल्वर में इनकी 223000 रुपए के आसपास, 221000 रुपए के स्टॉपलॉस के साथ,228000 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है।

 

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Asian Market Today: सेमीकंडक्टर स्टॉक्स में तेजी से कोस्पी 5% से ज्यादा उछला, जानें एशिया मार्केट में और कहां है आज हलचल

Asian Market Today: आज ग्लोबल बाजार में तेजी देखने को मिली। सेमीकंडक्टर स्टॉक्स में लगातार बढ़त की वजह से बुधवार को एशियाई मार्केट लगातार दूसरे सेशन में आगे बढ़े। यह तेजी तब आई जब US और ईरान के बीच लड़ाई में हालिया बढ़ोतरी के बाद वेस्ट एशिया में नए टेंशन के बाद क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ीं।

जापान का निक्केई 225 1.81% बढ़ा। वहीं, स्ट्रेट टाइम्स में 0.45 फीसदी की कमजोरी दिखा रहा है। ताइवान का बाजार 1.85 फीसदी चढ़कर 45,050.66 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। जबकि हैंगसेंग 0.86 फीसदी की गिरावट के साथ 24,901.00 के स्तर पर नजर आ रहा है। वहीं, कोस्पी में 5.24 फीसदी की बढ़त के साथ कारोबार हो रहा है। वहीं शंघाई कम्पोजिट 0.41 फीसदी की बढ़त के साथ 3,880.99 के स्तर पर दिख रहा है।

वॉल स्ट्रीट

US स्टॉक मार्केट मंगलवार को बढ़त के साथ बंद हुआ, जिसमें नैस्डैक सबसे ज़्यादा बढ़त पर रहा, जिसे सेमीकंडक्टर शेयरों में तेजी से बढ़ावा मिला। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 385.38 पॉइंट्स या 0.74% बढ़कर 52,224.64 पर पहुंच गया, जबकि S&P 500 65.92 पॉइंट्स या 0.89% बढ़कर 7,509.20 पर पहुंच गया। नैस्डैक कंपोजिट 329.13 पॉइंट्स या 1.29% बढ़कर 25,837.21 पर बंद हुआ।

एनवीडिया के स्टॉक प्राइस में 1.97% की बढ़ोतरी हुई, AMD के शेयर 8.11% बढ़े, इंटेल के शेयर 8.64% बढ़े, माइक्रोन टेक्नोलॉजी के शेयर 12.17% बढ़े, ब्रॉडकॉम 2.21% बढ़ा, माइक्रोसॉफ्ट के शेयर 1.13% गिरे, टेस्ला के स्टॉक प्राइस में 2.53% की बढ़ोतरी हुई और स्पेसएक्स के शेयर 3.08% बढ़े।

US-ईरान युद्ध

US मिलिट्री ने कहा कि उसने ईरान पर लगातार 11वें दिन हमला किया है, जिसमें ईरानी मिलिट्री ऑपरेशन सेंटर, समुद्री क्षमताएं, एयरक्राफ्ट हैंगर, ड्रोन स्टोरेज फैसिलिटी और मिलिट्री लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया गया है। इससे पहले, US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि US जल्द ही पिकैक्स माउंटेन के पास के इलाके को निशाना बनाएगा।

ट्रंप टैरिफ

US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने अगस्त 2028 से इम्पोर्टेड जेनेरिक दवाओं पर भारी टैरिफ लगाने का ऐलान किया। ट्रंप ने कहा कि 1 अगस्त से, US दो साल तक देश में लाई जाने वाली सभी जेनेरिक दवाओं पर 0% टैरिफ लगाए रखेगा, जिसके बाद इसे एक साल के लिए 100% और उसके बाद 200% कर दिया जाएगा।

जापान ट्रेड डेफिसिट

कमजोर येन के बीच जून में जापान का ट्रेड डेफिसिट बढ़ गया। जून में वैल्यू के हिसाब से कुल एक्सपोर्ट में YoY 19.3% की बढ़ोतरी हुई। जून में इम्पोर्ट में एक साल पहले के मुकाबले 25.4% की बढ़ोतरी हुई। इस वजह से, जून में जापान का ट्रेड डेफिसिट 406.9 बिलियन येन ($2.49 बिलियन) रहा, जबकि डेफिसिट का अनुमान 120 बिलियन येन था।

जापानी बॉन्ड यील्ड

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, देश के सबसे लंबे समय के कर्ज की बिक्री से पहले महंगाई की चिंता बढ़ने से जापानी सरकारी बॉन्ड (JGB) की यील्ड बढ़ी। बेंचमार्क 10-साल की JGB यील्ड 2.5 bps बढ़कर 2.745% हो गई। पांच-साल की यील्ड 2 bps बढ़कर 1.960% हो गई और दो-साल की यील्ड 1.435% पर स्थिर रही। 40-साल के बॉन्ड पर यील्ड 3.89% पर बिना बदले रही।

क्रूड में उछाल

US के ईरानी मिलिट्री ठिकानों पर हमले तेज करने के बाद सप्लाई में और रुकावट की आशंका से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गईं। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 1.22% बढ़कर $92.12 प्रति बैरल हो गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 1.09% बढ़कर $85.26 प्रति बैरल हो गया।

आज का सोने का रेट

पिछले सेशन में लगभग 2% की तेज़ी के बाद सोने की कीमतों में बढ़त जारी रही। स्पॉट गोल्ड की कीमत 0.1% बढ़कर $4,080.79 प्रति औंस हो गई, जबकि चांदी की कीमत $58.83 प्रति औंस पर स्थिर रही।

डॉलर

डॉलर एक हफ़्ते के हाई के पास रहा। US डॉलर इंडेक्स, जो छह करेंसी के मुकाबले डॉलर की ताकत को मापता है, 101.20 पर था। येन के मुकाबले डॉलर 0.1% गिरकर 163.06 येन पर आ गया। यूरो आखिरी बार $1.1401 पर था, और स्टर्लिंग $1.3385 पर आ गया।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, कमजोर हो सकती है बाजार की शुरुआत 

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।