Mutual Fund vs EPF vs PPF vs NPS: इमरजेंसी में पैसों की जरूरत? जानिए किस निवेश से पैसा सबसे जल्दी निकलता है

Mutual Fund vs EPF vs PPF vs NPS: जब अचानक पैसों की जरूरत पड़ जाए, तो सिर्फ रिटर्न मायने नहीं रखता। यह भी उतना ही जरूरी है कि पैसा आपके बैंक खाते में कितनी जल्दी पहुंचे। किसी निवेश में रकम अगले कारोबारी दिन मिल सकती है। कुछ योजनाओं में कई दिन या हफ्ते भी लग सकते हैं। ऐसे में अगर आप रिटायरमेंट के लिए निवेश कर रहे हैं, तो हर स्कीम का विड्रॉल टाइमलाइन जानना जरूरी है।

आनंद राठी वेल्थ के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर जसमीत सिंह के मुताबिक, हर निवेश का मकसद अलग होता है। लिक्विड और शॉर्ट ड्यूरेशन डेट म्यूचुअल फंड सबसे ज्यादा लिक्विड माने जाते हैं, जबकि EPF, PPF और NPS को लंबे समय के निवेश के लिए बनाया गया है।

सबसे पहले एक नजर में विड्रॉल टाइमलाइन

निवेश विकल्प
पैसा मिलने का समय

लिक्विड/ओवरनाइट म्यूचुअल फंड
अगले कारोबारी दिन

इक्विटी म्यूचुअल फंड1-3 कारोबारी दिन
NPST+2
EPF3-5 दिन (ऑनलाइन), अधिकतम 20 दिन
PPFआमतौर पर कुछ कारोबारी दिन

NPS में T+2 में प्रोसेस हो सकता है विड्रॉल

नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) का विड्रॉल टाइमलाइन सबसे साफ माना जाता है। PFRDA ने सितंबर 2022 में एग्जिट विड्रॉल का समय T+4 से घटाकर T+2 कर दिया था। इसका मतलब है कि जरूरी मंजूरी मिलने के बाद विड्रॉल दो कारोबारी दिनों के भीतर प्रोसेस हो सकता है। हालांकि, रिटायरमेंट पर एन्युटी खरीदने जैसी प्रक्रिया होने पर पूरा पैसा तुरंत खाते में नहीं आता।

आंशिक निकासी के लिए भी नियम तय हैं। NPS में अपनी जमा राशि का अधिकतम 25% तक आंशिक विड्रॉल किया जा सकता है। इसके लिए तय शर्तें पूरी करनी होती हैं।

PPF में तय T+1 या T+2 नियम नहीं

पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) में कोई तय T+1 या T+2 भुगतान नियम नहीं है। निकासी की अनुमति मिलने के बाद बैंक या पोस्ट ऑफिस में आवेदन देना होता है। इसके बाद रकम संबंधित संस्था की प्रोसेसिंग के अनुसार खाते में आती है।

बैंक वाले PPF खातों में आमतौर पर कुछ कारोबारी दिनों में पैसा मिल जाता है। हालांकि, समय बैंक, ब्रांच और ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन पर निर्भर करता है। जसमीत सिंह के मुताबिक, PPF में पांच वित्तीय वर्ष पूरे होने के बाद ही साल में एक बार आंशिक निकासी की जा सकती है।

EPF में 3-5 दिन में भी मिल सकता है पैसा

EPF में 2026 के बाद प्रक्रिया पहले से तेज हुई है। नए Employees’ Provident Funds Scheme, 2026 के तहत पूरी तरह सही क्लेम का निपटारा 20 दिनों के भीतर करना होगा। अगर बिना वजह देरी होती है, तो संबंधित अधिकारी पर 12% सालाना पेनल ब्याज भी लगाया जा सकता है।

साथ ही, ऑटोमेटेड प्रोसेसिंग के तहत कई ऑनलाइन क्लेम लगभग 3 दिन में भी निपटाए जा रहे हैं। हालांकि, आधार-UAN लिंकिंग, नियोक्ता की जानकारी या दूसरे वेरिफिकेशन की वजह से समय 2-3 हफ्ते तक भी जा सकता है।

म्यूचुअल फंड सबसे तेज विकल्पों में शामिल

अगर सिर्फ जल्दी पैसा निकालना प्राथमिकता है, तो ओपन-एंडेड म्यूचुअल फंड सबसे आसान विकल्पों में गिने जाते हैं। AMFI के मुताबिक, कारोबारी दिनों में रिडेम्प्शन करने पर आमतौर पर पैसा 1 से 3 कारोबारी दिनों में मिल जाता है। लिक्विड और ओवरनाइट फंड में यह अगले कारोबारी दिन भी आ सकता है।

इक्विटी फंड में आमतौर पर लिक्विड फंड की तुलना में थोड़ा ज्यादा समय लगता है।

किस स्कीम में सबसे ज्यादा पाबंदियां हैं?

स्कीमनिकासी की स्थिति
म्यूचुअल फंडसबसे आसान
EPFतय उद्देश्यों के लिए
PPFसीमित निकासी
NPS Tier-1सबसे ज्यादा नियम

NPS Tier-1 में निकासी सिर्फ तय परिस्थितियों में होती है। वहीं PPF और EPF में भी आंशिक निकासी के अपने नियम हैं।

निवेशकों के लिए सबसे जरूरी सीख

सबसे जल्दी पैसा देने वाला विकल्प हमेशा सबसे अच्छा रिटायरमेंट निवेश नहीं होता। म्यूचुअल फंड लिक्विड हैं, लेकिन बाजार के उतार-चढ़ाव से जुड़े रहते हैं। PPF सरकार की गारंटी वाली सुरक्षा देता है, जबकि NPS पूरी तरह रिटायरमेंट को ध्यान में रखकर बनाया गया है।

जसमीत सिंह की सलाह है कि कम से कम 6 महीने के खर्च ऐसी जगह रखें, जहां जरूरत पड़ने पर तुरंत पैसा मिल सके। इससे PPF, EPF या NPS जैसे लंबे समय के निवेश को बीच में तोड़ने की नौबत नहीं आएगी।

मिडिल क्लास को अमीर बनने से रोकती हैं 5 आदतें, कहीं आप भी तो नहीं करते ये गलतियां?

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Rajeev Thakkar: ‘AUM को कोसना बंद कीजिए…’, कमजोर रिटर्न पर बोले राजीव ठक्कर, याद दिलाया ₹100 करोड़ वाले फंड का किस्सा

PPFAS Flexi Cap Fund Underperformance: जब भी कोई बड़ा म्यूचुअल फंड प्लान हाल के दिनों में कमजोर प्रदर्शन करती है, तो अक्सर उसके विशालकाय फंड साइज या AUM को जिम्मेदार ठहराया जाता है। लेकिन देश के सबसे लोकप्रिय फंड्स में से एक PPFAS Mutual Fund के मुख्य निवेश अधिकारी राजीव ठक्कर इस दलील से इत्तेफाक नहीं रखते।

निवेशकों को लिखे अपने मैसेज में राजीव ठक्कर ने कहा, ‘जो लोग शॉर्ट टर्म में हमारी स्कीम के कमजोर प्रदर्शन का कारण हमारे बड़े AUM को मानते हैं, वे हम पर ‘कुछ ज्यादा ही मेहरबान’ हो रहे हैं।’

आइए आपको बताते हैं कि ₹1.43 लाख करोड़ के बड़े फंड को संभालने वाले फंड मैनेजर ने स्कीम के अंडरपरफॉर्मेंस, बाजार के रुख और 2007 के उस दौर के बारे में क्या-क्या बातें कही हैं।

जब ₹100 करोड़ के PMS में भी झेलना पड़ा था बड़ा अंडरपरफॉर्मेंस

राजीव ठक्कर ने अपने पुराने दिनों का जिक्र करते हुए स्पष्ट किया कि किसी फंड का साइज छोटा या बड़ा होना उसके प्रदर्शन की इकलौती वजह नहीं होता। उन्होंने बताया, ‘मैंने साल 2007 में PMS में महज ₹100 करोड़ से थोड़े अधिक के AUM बेस पर आज से भी बड़े अंडरपरफॉर्मेंस का दौर देखा और संभाला है।’

उनका मानना है कि शॉर्ट टर्म में फंड का रिटर्न कैसा रहेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने किन शेयरों में निवेश किया है और वे उस समय बाजार के ट्रेंड में हैं या नहीं।

कैसा रहा है हालिया प्रदर्शन?

राजीव ठक्कर देश की सबसे बड़ी फ्लेक्सी कैप स्कीम PPFAS Flexi Cap Fund का प्रबंधन करते हैं, जिसका कुल AUM करीब ₹1.43 लाख करोड़ पहुंच चुका है। पिछले एक साल में इस फंड ने लगभग 0.4% का रिटर्न दिया है। इसकी तुलना में इसी कैटेगिरी का औसत रिटर्न लगभग 7% रहा है। बाजार में चल रहे कंसोलिडेशन और कुछ सेक्टर्स में आई तेज गिरावट का असर इस फंड पर भी देखने को मिला है।

आउट ऑफ फेवर सेक्टर्स में खरीदारी: क्यों बिगड़ता है शॉर्ट टर्म रिटर्न?

अंडरपरफॉर्मेंस के कारणों पर बात करते हुए ठक्कर ने अपनी निवेश शैली पर प्रकाश डाला:

बाजार के रुझान से अलग सोच: पराग पारिख फ्लेक्सी कैप फंड अक्सर उन सेक्टर्स या शेयरों में खरीदारी करता है जो उस समय बाजार की पसंद नहीं होते या डिस्काउंट पर मिल रहे होते हैं।

शॉर्ट टर्म में अस्थिरता: जब फंड ऐसे सेक्टर्स में पैसा लगाता है जो फिलहाल बाजार की रेस में पीछे हैं, तो 3 महीने, 1 साल या उससे अधिक समय के लिए पोर्टफोलियो के रिटर्न कमजोर दिख सकते हैं।

‘ट्रेंड’ के पीछे न भागना: उन्होंने साफ किया कि फंड सिर्फ इसलिए किसी लोकप्रिय शेयर या सेक्टर में पैसा नहीं लगाएगा क्योंकि वह उस समय काफी चल रहा है। फंड का पूरा फोकस केवल रिस्क-रिवॉर्ड के आधार पर सही वैल्यू तलाशने पर रहता है।

निवेशकों के लिए राजीव ठक्कर का संदेश

राजीव ठक्कर के मुताबिक, अगर आपने किसी फंड को उसकी लंबी अवधि की रणनीति को देखकर चुना है, तो शॉर्ट टर्म में कमजोर रिटर्न मिलने पर किसी आसान बहाने की तलाश करने के बजाय धैर्य बनाए रखना सबसे ज्यादा जरूरी है।

उनका मानना है कि मौजूदा अंडरपरफॉर्मेंस का दौर न तो समय के लिहाज से बहुत लंबा है और न ही नुकसान के आंकड़े के हिसाब से कोई अभूतपूर्व घटना है। लंबी अवधि में प्रक्रिया और रिस्क मैनेजमेंट ही निवेशकों के लिए सही वैल्यू जनरेट करता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

जानिए मशहूर कंटेंट क्रिएटर अंकुर वारिकू और उनकी पत्नी रुचि के 5 मनी रूल्स

सेलिब्रिटीज की रुपये-पैसे से जुड़ी आदतों में लोग काफी दिलचस्पी रखते हैं। मशहूर कंटेंट क्रिएटर अंकुर वारिकू और उनकी पत्नी रुचि ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लिंक्डइन पर रुपये-पैसे से जुड़ी अपनी आदतों के बारे में बताया है। उन्होंने बताया है कि खर्च के मामले में उनका जोर किन बातों पर होता है।

वारिकू और उनकी पत्नी ने बताया है कि दोनों में किसी का संबंध अमीर परिवार से नहीं था। जिंदगी में ज्यादातर समय उनके पास ज्यादा पैसे नहीं थे। बीते 6-7 सालों में उनके पास काफी पैसे आए। दोनों के दो बच्चे हैं जिनकी उम्र 15 और 9 साल है।

1. अमीर दिखने के लिए खर्च नहीं करते

अंकुर और उनकी पत्नी अमीर बनने के लिए पैसे का इस्तेमाल करते हैं। उनका ज्यादा पैसा एसेट्स, स्टॉक्स और गोल्ड में निवेश पर खर्च होता है। उनके पास एक घर और किराए की एक कार है। वे दिखावे के लिए पैसे खर्च नहीं करते।

2. हेलदी फूड्स पर खर्च करने में कंजूसी नहीं

दोनों का कहना है कि अगर आप हेल्दी फूड पर पैसे खर्च करते हैं तो इसमें कोई खराबी नहीं है। हेल्दी फूड महंगे हैं, लेकिन उन्हें उनपर खर्च करने में परेशानी नहीं है। वे फार्म में ऑर्गेनिक तरीके से उगाई सब्जियों का इस्तेमाल करते हैं।

3. एक्सपीरिएंस पर खर्च करें, चीजों पर नहीं

कई लोग भौतिक चीजों पर काफी पैसे खर्च करते हैं। इसकी जगह अपनी ग्रोथ के लिए पैसे खर्च करना चाहिए। इसमें नई जगह घूमना जैसी चीजें शामिल हैं, जो आपको काफी कुछ सिखाती हैं। उन्होंने कहा, “हम चीजों से ज्यादा अनुभव के लिए खर्च करते हैं। चीजें आपको एक बार खुशी देती हैं और उनका कोई अंत नहीं है। पिछले साल हमने 116 दिन घूमने में बिताए।”

4. पहले इनवेस्ट करें फिर खर्च करें

ज्यादातर लोग पहले खर्च करते हैं, फिर जो पैसे बचते हैं उसका निवेश करते हैं। लेकिन, वारिकू परिवार पहले निवेश करता है और फिर खर्च करता है। वारिकू ने कहा, “जैसे ही सैलरी आती है, उसका बड़ा हिस्सा हम निवेश कर देते हैं। बाकी पैसा हम खर्च के लिए इस्तेमाल करते हैं।

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5. पढ़ने और सीखने पर खर्च करने पर जोर

अगर आप नई किताबें खरीदने या नई चीजें सीखने पर खर्च करते हैं तो इसमें कोई खराबी नहीं है। वारिकू ने कहा, “रुचि पॉटरी, वाटरकलरिंग और टेनिस सीख रही हैं। हमारे बच्चे भी कई क्लासेज में जाते हैं।”

Bandhan Mutual Fund ने लॉन्च किया कॉन्ट्रा फंड, निवेश से पहले जानिए इस फंड की खास बातें

बंधन म्यूचु्अल फंड ने एक नया फंड लॉन्च किया है। इसका नाम बंधन कॉन्ट्रा फंड है। यह एक ओपन-एंडेड इक्विटी स्कीम है, जो मजबूत फंडामेंटल्स वाली कंपनियों के शेयरों में निवेश के लिए कंट्रेरियन इनवेस्टमेंट स्ट्रेटेजी का इस्तेमाल करेगी। यह निवेश की एक अलग स्ट्रेटेजी है।

10 अगस्त को खुलेगा यह एनएफओ

Bandhan Contra Fund का न्यू फंड ऑफर (NFO) 10 अगस्त को खुलेगा। यह 24 अगस्त को बंद हो जाएगा। कंट्रेरियन इनवेस्टमेंट स्ट्रेटेजी में उन कंपनियों के शेयरों में निवेश किया जाता है, जिनके अच्छे प्रदर्शन का भरोसा मार्केट को नहीं होता है। इस एप्रोच के साथ यह स्कीम उन कंपनियों के शेयरों की पहचान करेगी, जिनमें लंबी अवधि में ग्रोथ की अच्छी संभावना है, लेकिन शेयर की कीमतें कम चल रही हैं।

लंबी अवधि के निवेश के लिए फायदेमंद

ऐसे शेयरों की कीमतें कम होने की कई वजहें हो सकती हैं। इनमें किसी खास से जुड़ी कमजोरी, साइक्लिकल डाउनटर्न और निगेटिव मार्केट सेंटीमेंट शामिल हैं। इस इनवेस्टमेंट स्ट्रेटेजी में यह माना जाता है कि कंपनी के फंडामेंटल्स बदलते ही शेयरों में तेजी आएगी। उसके बाद मार्केट शेयरों की रीरेटिंग करेगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह स्ट्रेटेजी उन निवेशकों के लिए फायदेमंद है, जो लंबी अवधि के लिहाज से निवेश करते हैं।

अभी बाजार में कंट्रेरियन इनवेस्टिंग के अच्छे मौके

Bandhan Mutual Fund ने कहा है कि यह स्कीम को शामिल करने से ट्रेडिशनल ग्रोथ और वैल्यू-ओरिएंटेड इक्विटी पोर्टफोलियो को मजबूती मिल सकती है। एएमसी के सीईओ विशाल कपूर ने कहा कि सभी सेक्टर्स में वैल्यूएशन के बीच का फर्क बढ़ रहा है। ऐसे में कंट्रेरियन इनवेस्टमेंट के मौके दिख रहे हैं।

लंबी अवधि में औसत रिटर्न 14-18  फीसदी के बीच

कंट्रेरियन या कॉन्ट्रा फंड्स का लंबी अवधि का औसत रिटर्न आम तौर पर 14 से 18 फीसदी रहता है। उदाहरण के लिए SBI Contra Fund ने शुरुआत से अब तक 15-18 फीसदी के बीच रिटर्न दिया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि पिछले रिटर्न को देख किसी स्कीम में निवेश करना ठीक नहीं है। निवेशकों को निवेश से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर की राय लेनी चाहिए।

निवेश से पहले इनवेस्टमेंट इडवाइजर की राय लें

इनवेस्टर्स को किसी एनएफओ में निवेश करने में भी सावधानी बरतनी चाहिए। अगर आप बंधन कॉन्ट्रा फंड में निवेश करना चाहते हैं तो आपको बाजार में पहले से मौजूदा कॉन्ट्रा फंड के प्रदर्शन को जान लेना चाहिए। इससे आपको निवेश का फैसला लेने में आसानी होगी। एसेट मैनेजमेंट कंपनी जब कोई नई स्कीम पेश करती है तो उसे न्यू फंड ऑफर कहते हैं।

SBI म्यूचुअल फंड का बड़ा धमाका: कम जोखिम में ज्यादा रिटर्न के लिए नई SIF स्ट्रेटेजी लॉन्च, जानिए कितना करना होगा मिनिमम निवेश

SBI Mutual Fund New SIF Launch: देश के सबसे बड़े एसेट मैनेजर एसबीआई म्यूचुअल फंड ने अपने स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड (SIF) फ्रेमवर्क के तहत दूसरी इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजी पेश की है। फंड हाउस ने ‘मैग्नम इक्विटी एक्स-टॉप 100 लॉन्ग शॉर्ट फंड’ लॉन्च किया है।

यह फंड मुख्य रूप से मार्केट कैप के आधार पर भारत की टॉप 100 कंपनियों के बाहर की कंपनियों में निवेश करेगा। साथ ही उतार-चढ़ाव और जोखिम को मैनेज करने के लिए डेरिवेटिव्स के जरिए सीमित शॉर्ट पोजिशन्स का इस्तेमाल करेगा।

NFO की प्रमुख तारीखें और बेंचमार्क

अगर आप एसबीआई म्यूचुअल फंड की इस नई स्ट्रेटेजी में निवेश करने का विचार कर रहे हैं, तो ये मुख्य तारीखें याद रखें:

  • NFO ओपनिंग डेट: 7 अगस्त 2026
  • NFO क्लोजिंग डेट: 20 अगस्त 2026
  • फंड का प्रकार: ओपन-एंडेड स्ट्रेटेजी
  • बेंचमार्क: BSE 500 TRI (टोटल रिटर्न इंडेक्स)

पैसा कहां और कैसे निवेश करेगा यह फंड?

फंड हाउस के अनुसार, यह फंड अपनी कुल एसेट्स का बंटवारा इस तरह करेगा:

इक्विटी एलोकेशन: कुल एसेट्स का 65% से 100% हिस्सा टॉप-100 से बाहर की कंपनियों के शेयरों और इक्विटी-लिंक्ड इंस्ट्रूमेंट्स में लगाया जाएगा।

टॉप-100 कंपनियों में एक्सपोजर: जरूरत पड़ने पर 35% तक का हिस्सा टॉप-100 कंपनियों में लगाया जा सकता है।

डेट और अन्य विकल्प: 35% तक डेट और मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में, 20% तक InvITs में और 35% तक गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ (ETFs) सहित अन्य म्यूचुअल फंड यूनिट्स में निवेश किया जा सकता है।

विदेशी बाजारों में निवेश: रेगुलेटरी नियमों के तहत नेट एसेट्स का 35% तक ओवरसीज इक्विटीज, विदेशी ईटीएफ और डेट सिक्योरिटीज में अलॉट किया जा सकता है।

कम से कम कितना करना होगा निवेश?

सेबी के स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड (SIF) नियमों के तहत इसमें निवेश की सीमाएं इस प्रकार हैं:

नए निवेशकों के लिए: मिनिमम इन्वेस्टमेंट ₹10 लाख रखा गया है।

मौजूदा मैग्नम SIF निवेशकों के लिए: अगर पैन लेवल पर उनकी कुल मैग्नम SIF होल्डिंग कम से कम ₹10 लाख है, तो वे प्रति एप्लिकेशन ₹1 लाख से भी एक्स्ट्रा निवेश कर सकते हैं।

फंड मैनेजर, एग्जिट लोड और टैक्सेशन नियम

इस स्ट्रेटेजी का प्रबंधन गौरव मेहता करेंगे, जो एसबीआई के पहले SIF ऑफरिंग ‘मैग्नम हाइब्रिड लॉन्ग शॉर्ट फंड’ को भी मैनेज करते हैं। अलॉटमेंट के 3 महीने के भीतर यूनिट्स रिडीम या स्विच करने पर 1% का एग्जिट लोड लगेगा। 3 महीने पूरे होने के बाद निकासी पर कोई एग्जिट लोड नहीं लगेगा।

चालू टैक्स नियमों के अनुसार, 12 महीने से अधिक समय तक होल्ड की गई यूनिट्स पर मिलने वाले लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) पर 12.5% टैक्स (प्लस सरचार्ज और सेस) लगेगा। एक वित्त वर्ष में ₹1.25 लाख तक का कैपिटल गेन पूरी तरह टैक्स-फ्री रहेगा।

एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के एमडी और सीईओ देबाशीष मिश्रा के अनुसार, ‘यह नया फंड शोध-आधारित निवेश और भारत के बढ़ते बाजार में निवेशकों के लिए विविधता लाने के उद्देश्य से पेश किया गया है।’ बता दें कि अप्रैल-जून 2026 तिमाही के दौरान एसबीआई म्यूचुअल फंड का औसतन एयूएम (AAUM) ₹12.57 लाख करोड़ से अधिक रहा है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

सुनील सिंघानिया के फंड ने इस स्टॉक में बड़ी हिस्सेदारी खरीदी, 20% का अपर सर्किट लगा

Bai-Kakaji Polymers: प्लास्टिक पैकेजिंग सेक्टर की कंपनी बाई-काकाजी पॉलिमर्स का शेयर गुरुवार को 20% के अपर सर्किट के साथ बंद हुआ। यह कंपनी की दिसंबर 2025 में लिस्टिंग के बाद सबसे बड़ी एक दिन की तेजी रही। इस उछाल की वजह दिग्गज निवेशक सुनील सिंघानिया के Abakkus Venture Opportunities Fund की बड़ी खरीदारी रही।

बल्क डील में खरीदे 6.08 लाख शेयर

बल्क डील में Abakkus Venture Opportunities Fund ने कंपनी के 6.08 लाख शेयर खरीदे। यह कंपनी की करीब 2.8% हिस्सेदारी के बराबर है। यह सौदा ₹200.34 प्रति शेयर के औसत भाव पर बीएसई में हुआ।

शेयर में तेजी के साथ ट्रेडिंग वॉल्यूम भी कई गुना बढ़ गया। गुरुवार को 13.13 लाख शेयरों में कारोबार हुआ, जबकि पिछले 20 दिनों का औसत दैनिक वॉल्यूम करीब 1 लाख शेयर था।

किन निवेशकों ने बेचे शेयर?

निवेशक संजय पोपटलाल जैन ने बाई-काकाजी पॉलिमर्स के 3.42 लाख शेयर बेचे। यह कंपनी की करीब 1.6% हिस्सेदारी के बराबर है। इस सौदे की वैल्यू करीब ₹6.8 करोड़ रही। जून 2026 तक उनके पास कंपनी में 2.5% हिस्सेदारी थी। वहीं, Tiger Strategies Fund ने भी 1.08 लाख शेयर बेचकर अपनी हिस्सेदारी घटाई। इस सौदे की वैल्यू करीब ₹2.2 करोड़ रही।

बाई-काकाजी पॉलिमर्स के शेयर का हाल

बाई-काकाजी पॉलिमर्स का शेयर गुरुवार को 20% के अपर सर्किट के साथ 240 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 1 साल में स्टॉक करीब 27.52% चढ़ा है। कंपनी का मार्केट कैप करीब ₹514 करोड़ पहुंच गया। इसमें प्रमोटर्स की हिस्सेदारी 74.1% है।

कंपनी का आईपीओ ₹186 प्रति शेयर के भाव पर आया था और 30 दिसंबर 2025 को इसकी शेयर बाजार में लिस्टिंग हुई थी। इससे पहले लिस्टिंग के बाद एक दिन में सबसे बड़ी तेजी करीब 10% रही थी, जो जून 2026 में दर्ज की गई थी।

बाई-काकाजी पॉलिमर्स  का कारोबार

बाई-काकाजी पॉलिमर्स प्लास्टिक पैकेजिंग प्रोडक्ट्स बनाती है। कंपनी PET प्रीफॉर्म, प्लास्टिक कैप और क्लोजर तैयार करती है। इसके ग्राहक पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर, सॉफ्ट ड्रिंक, जूस और डेयरी जैसे उद्योग हैं। कंपनी की शुरुआत 2013 में महाराष्ट्र के लातूर से हुई थी और यह बाई काकाजी ग्रुप का हिस्सा है।

वित्त वर्ष 2025-26 में बाई-काकाजी पॉलिमर्स का शुद्ध मुनाफा 47% बढ़कर ₹27 करोड़ हो गया। वहीं, रेवेन्यू 12.1% बढ़कर ₹365 करोड़ रहा।

सुनील सिंघानिया कौन हैं?

सुनील सिंघानिया जाने-माने निवेशक और फंड मैनेजर हैं। वह पहले Reliance Mutual Fund (अब Nippon India Mutual Fund) के Chief Investment Officer (CIO) रह चुके हैं। 2018 में उन्होंने अपनी निवेश कंपनी Abakkus Asset Manager LLP की शुरुआत की।

Abakkus के जरिए वह शेयर बाजार में निवेश करते हैं और Abakkus Venture Opportunities Fund जैसे फंड मैनेज करते हैं। मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों में उनके निवेश पर बाजार की खास नजर रहती है। यही वजह है कि जब उनके फंड की किसी कंपनी में खरीदारी की खबर आती है, तो उस शेयर में अक्सर बड़ी हलचल देखने को मिलती है।

Stocks to Watch: 31 जुलाई को फोकस में रहेंगे ये 12 स्टॉक्स, दिख सकती है बड़ी हलचल

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Juniper Green Energy IPO: दिग्गज एंकर निवेशकों ने लगाए ₹539 करोड़! आज से खुला इश्यू, निवेश करें या नहीं? जानें

Juniper Green Energy IPO Opening: रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की प्रमुख कंपनी जुपिटर ग्रीन एनर्जी का ₹1,800 करोड़ का इश्यू आज, 30 जुलाई को आम निवेशकों के लिए खुल गया है। निवेशक इस इश्यू में 3 अगस्त तक बोली लगा सकते हैं। अगर आप भी रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर के इस आईपीओ में दांव लगाने की सोच रहे हैं, तो कंपनी के प्राइस बैंड, एंकर बुक, वित्तीय स्थिति और ब्रोकरेज रिपोर्ट से जुड़ी हर अहम बातें जान लें।

Juniper Green Energy IPO: मुख्य तारीखें और प्राइस बैंड

आईपीओ खुलने-बंद होने की तारीख: 30 जुलाई-3 अगस्त 2026

प्राइस बैंड: ₹214 से ₹225 प्रति शेयर

कुल इश्यू साइज: ₹1,800 करोड़ (पूरी तरह से फ्रेश इश्यू )

लिस्टिंग की संभावित तारीख: 6 अगस्त 2026 (BSE और NSE पर)

मर्चेंट बैंकर: आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज, एचएसबीसी सिक्योरिटीज, जेएम फाइनेंशियल और कोटक महिंद्रा कैपिटल।

एंकर निवेशकों से जुटाए ₹539.4 करोड़

आईपीओ खुलने से ठीक एक दिन पहले कंपनी ने एंकर निवेशकों से ₹539.4 करोड़ का फंड जुटाया है। बीएसई सर्कुलर के अनुसार, कंपनी ने ₹225 के अपर प्राइस बैंड पर 31 फंड्स को 2.4 करोड़ इक्विटी शेयर आवंटित किए हैं। कुल एंकर पोर्शन का 74.79% (₹403.43 करोड़) हिस्सा देश के 9 बड़े म्यूचुअल फंड हाउस को मिला। इनमें SBI Mutual Fund, ICICI Prudential, WhiteOak Capital, Nippon India, HSBC और Edelweiss शामिल हैं।

दिग्गज ग्लोबल और इंश्योरेंस इन्वेस्टर फर्म अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी ने करीब ₹80 करोड़ का निवेश किया। इसके अलावा HDFC Life, Bajaj Life और Tata AIG जैसी इंश्योरेंस कंपनियों ने भी एंकर बुक में हिस्सा लिया।

आईपीओ से मिले पैसों का क्या करेगी कंपनी?

कंपनी आईपीओ के जरिए जुटाए गए ₹1,800 करोड़ में से बड़ा हिस्सा अपना कर्ज चुकाने में इस्तेमाल करेगी। कंपनी पर कुल ₹13,266 करोड़ का कर्ज है। इसमें से ₹683.24 करोड़ सीधे कंपनी के कर्ज को चुकाने/कम करने में इस्तेमाल होंगे, जबकि ₹728.69 करोड़ इसकी सहायक कंपनियों के बकाए लोन को चुकाने के लिए दिए जाएंगे। बची हुई राशि सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल होगी।

कंपनी का बिजनेस और वित्तीय स्थिति

गुरुग्राम बेस्ड जुपिटर ग्रीन एनर्जी भारत की टॉप 10 सबसे बड़ी रिन्यूएबल इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स (IPP) में शामिल है। यह सोलर, विंड, हाइब्रिड और बैटरी एनर्जी स्टोरेज प्रोजेक्ट्स डेवलप और ऑपरेट करती है।

जून 2026 तक कंपनी का कुल प्रोजेक्ट पोर्टफोलियो 7,910.20 MW तक पहुंच गया है। वर्तमान में इसकी चालू क्षमता 1,795 MW है, जबकि 6,115 MW क्षमता के प्रोजेक्ट्स निर्माण के अधीन हैं। वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में कंपनी का शुद्ध लाभ 10.9% बढ़कर ₹40.5 करोड़ रहा, जो FY25 में ₹36.5 करोड़ था। इसी अवधि में कंपनी की आय 41.3% उछलकर ₹718.9 करोड़ पर पहुंच गई, जो पिछले वित्त वर्ष में ₹508.7 करोड़ थी।

ब्रोकरेज की क्या है सलाह?

एसबीआई सिक्योरिटीज ने लंबी अवधि के नजरिए से इस आईपीओ को ‘Subscribe’ करने की सलाह दी है। ब्रोकरेज का कहना है कि कंपनी की विंड-सोलर हाइब्रिड( WSH) और FDRE एसेट्स में मजबूत पकड़ है। इसके अलावा, कंपनी की चालू क्षमता 1,795 MW है और 6,115 MW के प्रोजेक्ट्स निर्माणाधीन हैं, जो आने वाले समय में प्रोजेक्ट्स के चालू होने पर कंपनी को लंबे समय तक मजबूत ग्रोथ विजिबिलिटी प्रदान करेंगे।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

₹30000 की SIP और हर 3 साल में ₹50 लाख का रिटर्न! जानिए म्यूचुअल फंड कंपाउंडिंग का असली जादू

Mutual Fund SIP Compounding Formula: ‘मेरे म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो में कुछ भी खास नहीं हो रहा है, पैसा वहीं का वहीं अटका हुआ लगता है।’ अगर आप भी हर महीने रेगुलर एसआईपी कर रहे हैं और शुरुआती 2-3 सालों में बड़े रिटर्न न देखकर निराश हो रहे हैं, तो आज के मार्केट कंडीशन में ये थिंकिंग स्वाभाविक है। म्यूचुअल फंड में नए निवेशकों के धैर्य खोने और SIP बंद करने की सबसे बड़ी वजह यही शुरुआती धीमी रफ्तार होती है।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि ₹30,000 की मंथली एसआईपी से पहला ₹50 लाख का फंड बनने में जहां 8 साल से ज्यादा का समय लगता है, वहीं आगे चलकर हर 2 से 3 साल में पोर्टफोलियो में ₹50-50 लाख रुपये जुड़ने लगते हैं?

आइए ‘फंड्सइंडिया’ (FundsIndia) के आंकड़ों से समझते हैं कि कंपाउंडिंग की ताकत कैसे काम करती है और शुरुआत में धीमा दिखने वाला निवेश बाद में रॉकेट की रफ्तार कैसे पकड़ता है।

₹30,000 की SIP से कैसे घटती जाती है ₹50 लाख की टाइमलाइन?

अगर आप हर महीने ₹30,000 की एसआईपी करते हैं और इस पर औसतन 12% का सालाना रिटर्न मानकर चलते हैं, तो आपके पोर्टफोलियो की ग्रोथ का सफर कुछ ऐसा होगा:

  • पहला ₹50 लाख: बनने में लगभग 8 साल और 3 महीने का समय लगता है।
  • दूसरा ₹50 लाख (₹1 करोड़ का फंड): इसे जुड़ने में केवल 4 साल का वक्त लगता है।
  • तीसरा ₹50 लाख (₹1.5 करोड़ का फंड): यह पड़ाव 3 साल से भी कम समय में हासिल हो जाता है।
  • ₹1.5 करोड़ से ₹2 करोड़ का सफर: इसमें केवल 2 साल का समय लगता है।
  • ₹2 करोड़ से ₹2.5 करोड़ का सफर: यह माइलस्टोन महज 1 साल और 8 महीने में पूरा हो जाता है।
  • ₹4 करोड़ के पार: एक बार जब पोर्टफोलियो ₹4 करोड़ के पार पहुंच जाता है, तो हर अगला ₹50 लाख जुड़ने में लगभग 1 साल या उससे भी कम का समय लगता है।

यानी शुरुआत में जिस ₹50 लाख को बनाने में 8 साल लगे थे, वही ₹50 लाख आगे चलकर हर 1 से 3 साल में आपके खाते में जुड़ने लगते हैं!

ऐसा क्यों होता है? समझिए ‘Slowly, then Suddenly’ का सिद्धांत

शुरुआती सालों में आपके पोर्टफोलियो का बड़ा हिस्सा आपकी जेब से लगाई गई अपनी मूल पूंजी होता है। चूंकि उस समय आपका कुल जमा फंड छोटा होता है, इसलिए 12% का रिटर्न भी रुपयों के हिसाब से कम दिखता है।

लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता है, आपको मिले हुए रिटर्न पर भी रिटर्न मिलना शुरू हो जाता है। इसे ही कंपाउंडिंग या ब्याज पर ब्याज का जादू कहते हैं। एक समय के बाद पोर्टफोलियो की ग्रोथ आपकी जेब से जाने वाली मंथली SIP से नहीं, बल्कि आपके फंड द्वारा कमाए गए रिटर्न से तय होने लगती है।

आपकी जेब का पैसा vs कंपाउंडिंग का रिटर्न

FundsIndia के आंकड़ों के मुताबिक समय के साथ आपके निवेश में कितना बड़ा बदलाव आता है, इसे इस तुलना से समझिए:

 

आपकी जेब का पैसा vs कंपाउंडिंग का रिटर्न

जब आपका फंड ₹4.5 करोड़ से ₹5 करोड़ होता हैं, तो उस ₹50 लाख में आपकी जेब से जाने वाली ₹30,000 की SIP की हिस्सेदारी केवल 6% होती है, जबकि 94% पैसा आपके पुराने फंड पर मिले ब्याज और रिटर्न से आता है।

निवेशकों के लिए सबसे बड़ी सीख

म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय ज्यादातर लोग धैर्य इसलिए खो बैठते हैं क्योंकि शुरुआती सालों में मेहनत और अनुशासन सबसे ज्यादा लगता है, लेकिन उसका परिणाम सबसे कम दिखता है। पहला ₹50 लाख बनाने के लिए भारी अनुशासन, निरंतरता और धैर्य की जरूरत होती है। अगर आप शुरुआती 3-4 सालों में ही अपनी एसआईपी रोक देते हैं या पैसा निकाल लेते हैं, तो आप कंपाउंडिंग का असली फायदा उठाने से चूक जाते हैं।

एक बार जब आपका पोर्टफोलियो एक बड़े आकार तक पहुंच जाता है, तो आपकी वही ₹30,000 की मंथली एसआईपी बेहद कम समय में जबरदस्त रिटर्न देने लगती है।

कंपाउंडिंग का नियम सीधा है, ‘शुरुआत में बहुत धीमा, बाद में बहुत तेज’। अगर आप लंबी अवधि में बड़ा कॉर्पस और वित्तीय आजादी पाना चाहते हैं, तो बाजार के उतार-चढ़ाव और शुरुआती धीमी रफ्तार से घबराएं नहीं। अपनी एसआईपी जारी रखें और समय को अपना काम करने दें।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

SIP Calculator: क्या ₹50,000 महीने की सैलरी में बन सकते हैं करोड़पति? जानें एक्सपर्ट का SIP वाला ये फॉर्मूला

Mutual Fund SIP Calculator: ₹1 करोड़ का फंड तैयार करना हर किसी का सपना होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि पहला करोड़ बनने के बाद संपत्ति की रफ्तार तेजी से बढ़ती है। लेकिन क्या ₹50,000 महीने की कमाई करने वाला कोई सामान्य व्यक्ति ₹1 करोड़ का कॉर्पस बना सकता है?

फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह बिल्कुल संभव है, बशर्ते आप अनुशासन, धैर्य और सही रणनीति के साथ लंबी अवधि के लिए निवेशित रहें। आइए समझते हैं एसआईपी (SIP) के जरिए करोड़पति बनने का पूरा गणित।

₹50,000 की सैलरी में कैसे बनेगा ₹1 करोड़ का फंड?

KAARMIKA Wealth Mentors के डायरेक्टर किरण गांधी का कहना है कि अगर आप हर महीने ₹50,000 कमाते हैं, तो भी अनुशासित निवेश से करोड़पति बना जा सकता है। उन्होंने इसके लिए कुछ जरूरी नियम बताए हैं:

सैलरी का 20-30% निवेश: अपनी मासिक आय का कम से कम 20 से 30 फीसदी हिस्सा हर महीने म्यूचुअल फंड SIP में लगाएं।

स्टेप-अप एसआईपी: हर साल जब आपकी सैलरी बढ़े, तो अपने एसआईपी निवेश में भी 10% से 15% की बढ़ोतरी करें।

इमरजेंसी फंड तैयार रखें: अपने निवेश को बीच में टूटने से बचाने के लिए इमरजेंसी फंड अलग बनाकर रखें और बेवजह के कर्ज से बचें।

हाई रिटर्न का लालच न करें: केवल ज्यादा रिटर्न के पीछे भागने के बजाय एसेट एलोकेशन पर ध्यान दें और हर साल अपने पोर्टफोलियो का रिव्यू करें।

SIP Calculator: ₹12,000 प्रति महीने का गणित

किरण गांधी के अनुसार, अगर आप ₹12,000 महीने की एसआईपी शुरू करते हैं और इस पर औसतन 12% का सालाना रिटर्न मानकर चलते हैं, तो करीब 20 साल में आपका फंड लगभग ₹1 करोड़ हो जाएगा।

अगर आप हर साल अपनी एसआईपी की रकम में केवल 10% की बढ़ोतरी यानी स्टेप-अप SIP का रास्ता चुना, तो ₹1 करोड़ का यह लक्ष्य 20 साल से भी काफी पहले हासिल किया जा सकता है।

इस कैलकुलेशन के हिसाब से ₹50,000 महीने की सैलरी में करोड़पति बनना कोई नामुमकिन सपना नहीं है। इसके लिए सिर्फ एक सही रणनीति, अनुशासन और समय की जरूरत है। अगर आप 25-30 साल की उम्र से ही 15-20 सालों के लिए ₹10,000 से ₹12,000 की अनुशासित एसआईपी शुरू कर देते हैं, तो कंपाउंडिंग की ताकत से ₹1 करोड़ का लक्ष्य आसानी से हासिल किया जा सकता है।

भारत में SIP का नया रिकॉर्ड, जून में ₹31,781 करोड़ का निवेश

एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, देश में छोटे निवेशकों का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है। जून 2026 में मंथली एसआईपी योगदान ₹31,781 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। यह मई 2026 के मुकाबले 2.7% और जून 2025 के मुकाबले 16.5% ज्यादा है। सक्रिय एसआईपी खातों की संख्या बढ़कर 9.78 करोड़ हो गई है, जो एक साल पहले 8.64 करोड़ थी। म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का कुल SIP AUM बढ़कर ₹17.70 लाख करोड़ पर पहुंच गया है, जो पूरी इंडस्ट्री के कुल एसेट का 21.5% है।

Retirement Planning: रिटायरमेंट के लिए कितना फंड है पर्याप्त? एक्सपर्ट विवेक जैन से जानिए सही फॉर्मूला

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Orient Tech Share Price: NPCI से ₹76 करोड़ का ऑर्डर, अब 27 जुलाई को शेयरों पर रहेगा फोकस

Orient Tech Share Price: आईटी सॉल्यूशंस मुहैया कराने वाली दिग्गज कंपनी ओरिएंट टेक्नोलॉजीज को NPCI (नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया) से ₹76.2 करोड़ (जीएसटी छोड़कर) का पर्चेज ऑर्डर मिला। कंपनी ने एक दिन पहले 24 जुलाई को रात में एक्सचेंज फाइलिंग में इसकी जानकारी दी और अब सोमवार 27 जुलाई को इसके शेयरों पर असर दिख सकता है। अभी की बात करें तो एक कारोबारी दिन पहले बीएसई पर यह कमजोर मार्केट सेंटिमेंट के साथ 0.76% की बढ़त के साथ ₹259.05 के भाव पर बंद हुआ था जबकि घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी (Nifty) 0.43% की गिरावट के साथ 23,767.45 पर बंद हुआ था।

कैसा ऑर्डर मिला है Orient Tech को?

ओरिएंट टेक्नोलॉजीज ने एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि उसे नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) से सर्वर सप्लाई करने के लिए ₹76.2 करोड़ (GST छोड़कर) का पर्चेज ऑर्डर मिला है। इस ऑर्डर में सर्वर की सप्लाई के साथ-साथ बिक्री के बाद सपोर्ट सर्विसेज और सात साल की वारंटी भी शामिल है। एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार इस ऑर्डर के तहत कंपनी को 18 हफ्ते के भीतर सप्लाई पूरा करना है।

अब तक कैसी रही शेयरों की चाल

ओरिएंट टेक के ₹215 करोड़ के आईपीओ के तहत निवेशकों को ₹206 के भाव पर शेयर जारी हुए थे। 28 अगस्त 2024 को 40% पर एंट्री के बाद शेयर अपर सर्किट पर चले गए और इसी पर बंद भी हुए थे। धांसू लिस्टिंग के बाद 4 महीने से भी कम समय में यह 197.57% चढ़कर 20 जनवरी 2025 को ₹613 पर पहुंच गया जो इसके लिए रिकॉर्ड हाई लेवल है। हालांकि शेयरों की तेजी यहीं थम गई और इस हाई लेवल से टूटकर यह 30 मार्च 2026 को आईपीओ प्राइस के एकदम करीब ₹222.10 तक आ गया था। हालांकि इसमें ध्यान दें कि इसका मौजूदा भाव बोनस इश्यू के बाद का एडजस्टेड प्राइस है। कंपनी ने लिस्टिंग के बाद एक बार बोनस इश्यू जारी किया था जिसके तहत निवेशकों को 10 शेयरों पर एक शेयर बोनस में मिला था और इसकी एक्स-डेट 5 जनवरी 2026 थी।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।