Lawrence Bishnoi US Charges: रंगदारी का मॉडल, डर को बनाया बिजनेस वेपन! समझिए कैसे दुनिया का सबसे खतरनाक सिंडिकेट बना बिश्नोई गैंग

सितंबर 2023 में कनाडा ने आरोप लगाया था कि कनाडा में सिख अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारतीय अधिकारियों का हाथ था। इस आरोप के बाद भारत और कनाडा के रिश्तों में तनाव बढ़ गया और दोनों देशों के बीच बड़ा राजनयिक विवाद खड़ा हो गया। अब करीब तीन साल बाद, अमेरिका के न्याय विभाग (DOJ) ने जेल में बंद भारतीय गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और उसके साथी गोल्डी बराड़ पर इस हत्या का आरोप लगाया है। अमेरिका और कनाडा की एजेंसियों ने ‘ऑपरेशन हार्ड बॉल’ नाम से संयुक्त जांच की थी। इस जांच के तहत भारत से जुड़े तीन संगठित अपराध गिरोहों के 37 लोगों पर रैकेटियरिंग, जबरन वसूली और ड्रग तस्करी जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) ने अपने बयान में कहा कि कुल 37 लोगों के खिलाफ तीन अलग-अलग आरोप पत्र दाखिल किए गए हैं। इनमें दो ऐसे आरोपी भी शामिल हैं, जो भारत की जेल में बंद रहते हुए भी अपने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क चला रहे थे। DOJ के मुताबिक, अमेरिका में गिरफ्तार किए गए 13 आरोपियों में से 11 को कैलिफोर्निया, एक को इंडियाना और एक को जॉर्जिया में पकड़ा गया है। इन सभी को मंगलवार को संघीय अदालत में पेश किए जाने की उम्मीद है।

इस मामले में आरोप तय होने के बाद, अमेरिकी जांच एजेंसी FBI ने गोल्डी बराड़ (असल नाम सतविंदरजीत सिंह) की गिरफ्तारी में मदद करने वाली जानकारी देने पर 50,000 डॉलर तक के इनाम की घोषणा की है। साथ ही, अमेरिका लॉरेंस बिश्नोई को भारत से प्रत्यर्पित कराने की तैयारी भी कर रहा है। उस पर गंभीर संघीय रैकेटियरिंग के आरोप हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि वह जेल में रहते हुए अपने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क को संचालित न कर सके।

कौन है लॉरेंस बिश्नोई?

लॉरेंस बिश्नोई को बिश्नोई गैंग का सरगना माना जाता है। फिलहाल वह गुजरात की साबरमती जेल में बंद है। लॉरेंस बिश्नोई का जन्म किसी अपराधी परिवार में नहीं, बल्कि एक संपन्न परिवार में हुआ था। उसका जन्म 1993 में पंजाब के फाजिल्का जिले में हुआ। उसका परिवार इलाके के सबसे अमीर परिवारों में गिना जाता था और उनके पास कई एकड़ जमीन थी। परिवार एक बड़े बंगले में रहता था।

लॉरेंस के पिता पहले पुलिस विभाग में नौकरी करते थे, लेकिन बाद में उन्होंने खेती और परिवार की जमीन की देखभाल के लिए नौकरी छोड़ दी। परिवार के एक रिश्तेदार के अनुसार, लॉरेंस का नाम ब्रिटिश अधिकारी हेनरी मोंटगोमरी लॉरेंस के नाम पर रखा गया था, जिन्होंने सनावर में प्रसिद्ध लॉरेंस स्कूल की स्थापना की थी। लॉरेंस ने कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ाई की। वह आठवीं कक्षा से ही बाइक चलाता था और महंगे जूते पहनता था। उस समय उसके पास ऐसी कई सुविधाएं थीं, जो आम लोगों को आसानी से नहीं मिलती थीं।

स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद लॉरेंस बिश्नोई आगे की पढ़ाई के लिए चंडीगढ़ चला गया। वहीं उसने छात्र राजनीति में कदम रखा। इसी दौरान उसका सामना विरोधी छात्र गुटों से हुआ और धीरे-धीरे वह अपराध की दुनिया की ओर बढ़ता चला गया। कई लोगों का मानना है कि अपने गांव में अमीर और प्रभावशाली परिवार से होने के बावजूद, चंडीगढ़ जैसे बड़े शहर में उसकी पहचान और परिवार की दौलत का ज्यादा असर नहीं था। इसी वजह से वह गैंग और अपराध के रास्ते पर चला गया।

उत्तर भारत में गैंगवार पर लंबे समय से नजर रखने वाले लेखक जुपिंदरजीत सिंह के मुताबिक, लॉरेंस अपने गांव में बेहद संपन्न परिवार से था। उसके परिवार के पास बड़ी जमीन थी और बचपन से उसे हर तरह की सुविधाएं मिली थीं। लेकिन चंडीगढ़ पहुंचने के बाद उसे एहसास हुआ कि वहां पहचान बनाने के लिए सिर्फ जमीन नहीं, बल्कि पैसा, रुतबा और सामाजिक प्रभाव भी जरूरी है। माना जाता है कि इसी सोच ने उसे अपराध की दुनिया की ओर धकेल दिया।

गोल्डी बराड़ कौन है?

गोल्डी बराड़ का असली नाम सतविंदरजीत सिंह है। उसे लॉरेंस बिश्नोई का सबसे करीबी साथी माना जाता है। उसका जीवन भी काफी हद तक बिश्नोई जैसा रहा है। गोल्डी का जन्म 1994 में पंजाब में हुआ था। बताया जाता है कि कॉलेज के दौरान उसकी लॉरेंस बिश्नोई से गहरी दोस्ती हो गई थी। ‘ओपन’ मैगज़ीन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बिश्नोई और बराड़ 2012 से पहले ही हिंसक घटनाओं में शामिल हो चुके थे। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि छात्र संघ चुनाव के दौरान एक विरोधी उम्मीदवार पर गोली चलाई गई थी। बाद में जमानत पर बाहर आने के बाद चुनावी रंजिश में उस उम्मीदवार के एक रिश्तेदार की भी हत्या कर दी गई, जिसने चुनाव जीता था।

इसके बाद दोनों ने धीरे-धीरे अपना आपराधिक नेटवर्क बढ़ाया। उन पर जबरन वसूली, कॉन्ट्रैक्ट किलिंग और पंजाब समेत उत्तर भारत के कई इलाकों में विरोधी गैंग के लोगों पर हमले कराने के आरोप लगते रहे हैं। बताया जाता है कि 2017 में गोल्डी बराड़ स्टूडेंट वीज़ा पर कनाडा चला गया। इसके बाद से उस पर कनाडा में रहते हुए बिश्नोई गैंग की गतिविधियों को संचालित करने के आरोप लगते रहे हैं।

बिश्नोई गैंग कैसे बना अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क?

समय के साथ लॉरेंस बिश्नोई और उसके भाई अनमोल बिश्नोई ने अपने गैंग का नेटवर्क लगातार बढ़ाया। आज इस गैंग की पहुंच पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और दिल्ली समेत कई राज्यों तक बताई जाती है। इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कनाडा, अमेरिका, थाईलैंड, फिलीपींस, मध्य एशिया, चीन और यूरोप के कुछ देशों में भी इसके नेटवर्क होने की बात कही जाती है।

रिपोर्टों के अनुसार, बिश्नोई गैंग के पास दुनिया भर में 700 से ज्यादा शूटर होने का दावा किया जाता है। जेल में बंद होने के बावजूद लॉरेंस पर आरोप है कि वह अपने गैंग की गतिविधियां संचालित करता रहता है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) का कहना है कि लॉरेंस अपने मजबूत संपर्कों और अलग-अलग आपराधिक गठजोड़ का इस्तेमाल करता है। एजेंसी का यह भी आरोप है कि उसके कुछ संबंध खालिस्तान समर्थक संगठनों से भी रहे हैं। वहीं, कुछ मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, लॉरेंस जानबूझकर जमानत की अर्जी नहीं देता और जेल के अंदर से अपने साथियों से “डब्बा कॉलिंग” और VoIP जैसी तकनीकों के जरिए संपर्क में रहता है।

रिपोर्टों के मुताबिक, लॉरेंस बिश्नोई अपने गैंग को चलाने के लिए एक खास “बिजनेस मॉडल” अपनाता है। इसके तहत वह अलग-अलग राज्यों के जेल में बंद गैंगस्टरों से गठजोड़ करता है। इनमें उत्तर प्रदेश के धनंजय सिंह, हरियाणा के काला जठेड़ी, राजस्थान के रोहित गोदारा और दिल्ली के रोहित मोई व हाशिम बाबा जैसे नाम शामिल बताए जाते हैं। बिश्नोई गैंग की ताकत उसके सक्रिय सदस्यों की वजह से भी बढ़ी है। गोल्डी बराड़ के अलावा रोहित गोदारा को भी गैंग का अहम सदस्य माना जाता है। बताया जाता है कि वह लॉरेंस का करीबी है और ब्रिटेन (UK) से गैंग की गतिविधियां संभालता है। राजस्थान के बीकानेर का रहने वाला रोहित गोदारा हत्या, रंगदारी और अन्य गंभीर मामलों समेत 35 से ज्यादा आपराधिक मामलों में आरोपी है।

हरदीप सिंह निज्जर से लेकर सलमान खान तक, किन लोगों को बनाया गया निशाना?

बिश्नोई गैंग का नाम कई चर्चित लोगों को निशाना बनाने के आरोपों में सामने आ चुका है। अमेरिका ने जून 2023 में कनाडा के सरे शहर में गुरु नानक सिंह गुरुद्वारे के बाहर खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के मामले में लॉरेंस बिश्नोई पर आरोप लगाए हैं। अमेरिकी आरोप पत्र के अनुसार, 18 जून 2023 या उससे पहले लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ ने निज्जर की हत्या का आदेश दिया था। आरोप है कि इस साजिश के लिए बिश्नोई ने अपने एक साथी को निज्जर की तस्वीर और उसके ठिकानों की जानकारी भी उपलब्ध कराई थी। इसके अलावा, साल 2022 में पंजाबी गायक सिद्धू मूसे वाला की हत्या की जिम्मेदारी भी बिश्नोई गैंग ने ली थी। हत्या के कुछ घंटों बाद ही गोल्डी बराड़ ने फेसबुक पर पोस्ट कर इस वारदात की जिम्मेदारी लेने का दावा किया था।

जब बीबीसी ने गोल्डी बराड़ से पूछा कि सिद्धू मूसे वाला को क्यों निशाना बनाया गया, तो उसने कहा कि मूसे वाला ने ऐसी गलतियां की थीं जिन्हें वह माफ नहीं कर सकता था। बराड़ का दावा था कि उनके पास उसे मारने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा था। करीब दो साल बाद, बिश्नोई गैंग का नाम मुंबई में हुए चर्चित नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या में भी सामने आया। अक्टूबर 2024 में बांद्रा इलाके में उनके बेटे के ऑफिस के पास 66 वर्षीय बाबा सिद्दीकी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

बाबा सिद्दीकी तीन बार विधायक रह चुके थे और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री भी रहे थे। वे बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान के करीबी दोस्त माने जाते थे। हत्या की जिम्मेदारी लेते हुए बिश्नोई गैंग से जुड़े एक व्यक्ति की कथित फेसबुक पोस्ट में लिखा गया था कि उनकी किसी से निजी दुश्मनी नहीं है, लेकिन जो भी सलमान खान की मदद करेगा, उसे इसके परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

Yamaha का नया इलेक्ट्रिक स्कूटर लॉन्च, मिलेगी 117 km की IDC रेंज, जानें कीमत

Yamaha Aerox E: Yamaha ने भारत में अपना नया इलेक्ट्रिक स्कूटर Yamaha Aerox E लॉन्च कर दिया है। इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 2.82 लाख रुपये (दिल्ली) रखी गई है। इस इलेक्ट्रिक स्कूटर को पिछले साल पेश किया गया था और अब इसे भारत के कुछ शहरों में खरीदने के लिए उपलब्ध करा दिया गया है। फिलहाल Yamaha Aerox E दिल्ली, बेंगलुरु, चेन्नई, मुंबई और पुणे में बिक्री के लिए उपलब्ध है। बता दें कि यह इलेक्ट्रिक स्कूटर बाजार में मौजूद Ather 450 Apex, TVS X और Ola S1 Pro जैसे दमदार इलेक्ट्रिक स्कूटर को टक्कर देगा।

पावरट्रेन और रेंज

Yamaha Aerox E में दो 1.5kWh की हटाने योग्य (Removable) बैटरी पैक दिए गए हैं। इसमें Permanent Magnet Synchronous Motor (PMSM) लगी है, जो 9.4 kW (12.60hp) की पावर और 48Nm का टॉर्क जनरेट करती है। कंपनी के अनुसार, यह इलेक्ट्रिक स्कूटर फुल चार्ज होने पर 117 किलोमीटर तक की IDC सर्टिफाइड रेंज दे सकता है। वहीं, Power Mode में Boost फीचर ऑन करने पर इसकी टॉप स्पीड 95.5 किमी/घंटा तक पहुंच सकती है।

बैटरी चार्जिंग की बात करें तो, एक बैटरी पैक को 0 से 100% चार्ज होने में करीब 3 घंटे 10 मिनट का समय लगता है। अगर दोनों बैटरियों को एक साथ चार्ज किया जाए, तो इन्हें पूरी तरह चार्ज होने में लगभग 6 घंटे 20 मिनट लग सकते हैं।

Yamaha Aerox E का डिजाइन और डायमेंशन

देखने में, Aerox E काफी हद तक अपने पेट्रोल वाले मॉडल, Aerox 155 जैसी ही लगती है। इसमें सबसे बड़ा बदलाव नया TFT डिस्प्ले है, जिसने ICE मॉडल वाले LCD कंसोल की जगह ली है। इसके अलावा, इसमें आपको शार्प बॉडीवर्क के साथ वही स्पोर्टी मैक्सी-स्कूटर स्टाइलिंग मिलती है। इस स्कूटर का व्हीलबेस 1,360mm और कर्ब वेट 139 kg है, जो इसे स्टैंडर्ड Aerox 155 से लगभग 13 kg भारी बनाता है।

इस इलेक्ट्रिक स्कूटर में 14-इंच के अलॉय व्हील्स दिए गए हैं। इसमें आगे की तरफ 110/80 टायर और पीछे की तरफ 140/70 टायर मिलते हैं, जो इसे बेहतर स्टेबिलिटी और स्पोर्टी राइडिंग अनुभव देने में मदद करते हैं।

Yamaha Aerox E के फीचर्स

Yamaha नई Aerox E में इकॉनमी, स्टैंडर्ड और पावर राइडिंग मोड देता है। इस इलेक्ट्रिक स्कूटर में बूस्ट मोड, रिवर्स मोड और ट्रैक्शन कंट्रोल सिस्टम भी है। इसकी अन्य खासियतों में Yamaha Y-Connect के साथ ब्लूटूथ कनेक्टिविटी, आगे और पीछे डिस्क ब्रेक, LED हेडलैंप और LED टेललैंप, TFT इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर और सिंगल-चैनल ABS शामिल हैं।

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पूरा देश घूमने के बराबर है इन शानदार लाइब्रेरीज का सफर करना, जहां मिलती है ज्ञान की अनमोल दुनिया!

भारत में लाइब्रेरी सिर्फ किताबों को रखने की जगह नहीं हैं, बल्कि ये देश के इतिहास, संस्कृति, साहित्य और ज्ञान की धरोहर को संभालकर रखने वाले सेंटर हैं। कई लाइब्रेरी ऐसी हैं जो 100 साल से भी ज्यादा पुरानी हैं और आज भी रिसर्चर, स्टूडेंट और हिस्ट्री लवर के लिए नॉलेज का बड़ा सोर्स बनी हुई हैं। आइए जानते हैं भारत की कुछ सबसे पुरानी और पॉपुलर लाइब्रेरी के बारे में:

1. रज़ा लाइब्रेरी, रामपुर

रज़ा लाइब्रेरी - विकिपीडिया

रज़ा लाइब्रेरी भारत की सबसे पॉपुलर ऐतिहासिक लाइब्रेरी में से एक है। इसकी स्थापना 1774 में रामपुर के नवाब परिवार द्वारा की गई थी। यहां अरबी, फारसी, उर्दू, संस्कृत और हिंदी भाषा की हजारों दुर्लभ पांडुलिपियां और किताबें सेफ रखी गई हैं।

इस लाइब्रेरी में इस्लामी आर्ट, भारतीय इतिहास, साहित्य, खगोल विज्ञान, गणित और दर्शन से जुड़ी दुर्लभ मटेरियल मौजूद है। यहां रखी कई पांडुलिपियां हाथ से लिखी हुई हैं और ऐतिहासिक नजर से बेहद जरुरी मानी जाती हैं।

रज़ा लाइब्रेरी अपनी खूबसूरत आर्किटेक्टर और दुर्लभ संग्रह के लिए दुनियाभर में जानी जाती है।

2. कोनेमारा पब्लिक लाइब्रेरी, चेन्नई

Chennai: Newly revamped Connemara Library offers better spaces for book lovers, researchers - The Hindu

कोनेमारा पब्लिक लाइब्रेरी की स्थापना 1896 में चेन्नई में हुई थी। यह भारत की चार राष्ट्रीय डिपॉजिटरी लाइब्रेरी में से एक है, जहां देश में पब्लिश्ड हर पुस्तक, समाचार पत्र और पत्रिका की एक सेफ रखी जाती है।

इस लाइब्रेरी में लाखों किताबों का विशाल संग्रह मौजूद है, जिसमें साहित्य, विज्ञान, इतिहास, कला और कई अन्य विषय शामिल हैं। यहां दुर्लभ किताबों और पुराने डॉक्यूमेंट का भी बड़ा संग्रह है।

इसकी इमारत इंडो-सारासेनिक आर्किटेक्टर का सुंदर उदाहरण है। यह जगह न सिर्फ किताबों के लिए बल्कि अपनी ऐतिहासिक इमारत और शांत वातावरण के लिए भी पॉपुलर है।

3. नेशनल लाइब्रेरी ऑफ इंडिया, कोलकाता

National Library, Calcutta

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ इंडिया भारत की सबसे बड़ी लाइब्रेरी मानी जाती है। इसकी शुरुआत 1836 में कलकत्ता पब्लिक लाइब्रेरी के रूप में हुई थी और बाद में इसे नेशनल लेवल की लाइब्रेरी का दर्जा मिला।

इस लाइब्रेरी में करोड़ों किताबें, पांडुलिपियां, समाचार पत्र और ऐतिहासिक डॉक्यूमेंट मौजूद हैं। यहां भारतीय भाषाओं के साथ-साथ दुनिया की कई भाषाओं की किताबें अवेलेबल हैं।

यह लाइब्रेरी शोधकर्ताओं, इतिहासकारों और विद्यार्थियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण स्थान है। यहां भारत के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक इतिहास से जुड़ी कई दुर्लभ मटेरियल सेफ है।

4. इलाहाबाद पब्लिक लाइब्रेरी, प्रयागराज

Allahabad Public Library also known as Thornhill Mayne Memorial is a public library situated at Alfred Park in Prayagraj, India. Established in 1864, it is the biggest library in the state of

इलाहाबाद पब्लिक लाइब्रेरी की स्थापना 1863 में हुई थी। यह उत्तर भारत की सबसे पुरानी सार्वजनिक लाइब्रेरी में से एक है। इसे पहले थॉर्नहिल मेमोरियल लाइब्रेरी के नाम से भी जाना जाता था।

यहां हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, उर्दू और अन्य भाषाओं की हजारों किताबें अवेलेबल हैं। लाइब्रेरी में इतिहास, साहित्य, धर्म, विज्ञान और कला से संबंधित कई पुस्तकें मौजूद हैं।

इसकी इमारत विक्टोरियन और गोथिक शैली की वास्तुकला का उदाहरण है। ऐतिहासिक महत्व के कारण यह जगह किताब प्रेमियों और टूरिस्ट को भी अट्रैक्ट करता है।

5. स्टेट सेंट्रल लाइब्रेरी, बेंगलुरु

The State Central Library in Bengaluru, Karnataka

बेंगलुरु की स्टेट सेंट्रल लाइब्रेरी की स्थापना 1915 में हुई थी। यह कर्नाटक की सबसे सार्वजनिक लाइब्रेरी में से एक है। यह कब्बन पार्क के पास अपनी लाल रंग की खूबसूरत इमारत के लिए पॉपुलर है।

इस लाइब्रेरी में लाखों किताबों का कलेक्शन है, जिसमें साहित्य, विज्ञान, इतिहास और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी पुस्तकें शामिल हैं। यहां स्टूडेंट और रिसर्चर बड़ी संख्या में आते हैं।

यह लाइब्रेरी लंबे समय से बेंगलुरु के लोगों के लिए ज्ञान और शिक्षा का प्रमुख केंद्र बनी हुई है।

6. खुदा बख्श ओरिएंटल लाइब्रेरी, पटना

Visit Patna's Khuda Baksh Oriental Library | Incredible India

खुदा बख्श ओरिएंटल लाइब्रेरी की स्थापना 1891 में पटना में हुई थी। इसकी शुरुआत खुदा बख्श खान ने अपने प्राइवेट कलेक्शन को सार्वजनिक रूप देकर की थी।

यहां अरबी, फारसी, उर्दू और इस्लामी साहित्य की हजारों दुर्लभ पांडुलिपियां सेफ हैं। इसके संग्रह में मुगलकालीन चित्र, ऐतिहासिक दस्तावेज और दुर्लभ किताबें भी शामिल हैं।

यह लाइब्रेरी एशिया की ओरिएंटल लाइब्रेरी में गिनी जाती है और दुनियाभर के रिसर्चर यहां स्टडी के लिए आते हैं।

7. डेविड ससून लाइब्रेरी, मुंबई

Old David Sassoon Library Stock Photos - Free & Royalty-Free Stock Photos from Dreamstime

डेविड ससून लाइब्रेरी की स्थापना 1870 में मुंबई में हुई थी। इसका नाम पॉपुलर बिजनेसमैन और समाजसेवी डेविड ससून के नाम पर रखा गया है।

यह लाइब्रेरी अपनी सुंदर गोथिक आर्किटेक्टर, लकड़ी की अलमारियों और पुराने जमाने के शांत एनवायरनमेंट के लिए पॉपुलर है। यहां साहित्य, इतिहास, कला और अन्य विषयों की हजारों किताबें मौजूद हैं।

मुंबई की विरासत इमारतों में शामिल यह लाइब्रेरी आज भी पाठकों और टूरिस्ट के अट्रैक्शन हब है।

8. सरस्वती महल लाइब्रेरी, तंजावुर

Saraswathi Mahal Library #Thanjuvur

सरस्वती महल लाइब्रेरी भारत की सबसे पुरानी लाइब्रेरी में से एक है। इसकी शुरुआत तंजावुर के नायक और मराठा शासकों के समय हुई थी।

इस लाइब्रेरी में संस्कृत, तमिल, तेलुगु और मराठी भाषाओं की हजारों दुर्लभ पांडुलिपियां सेफ हैं। यहां आयुर्वेद, खगोल विज्ञान, साहित्य, इतिहास और धर्म के मटेरियल सेफ है।

यह लाइब्रेरी भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा का अनमोल खजाना मानी जाती है और रिसर्चर के लिए बेहद महत्वपूर्ण स्थान रखती है।

भारत की ये पुरानी लाइब्रेरी सिर्फ किताबों का कलेक्शन नहीं हैं, बल्कि देश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत की पहचान हैं। इन जगहों पर सेफ रेयर डॉक्यूमेंट और पांडुलिपियां आने वाली पीढ़ियों को भारत के ज्ञान और इतिहास से जोड़ने का काम करती हैं।

LPG Price Today: दिल्ली से पटना तक क्या है घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर के दाम? चेक करें अपने शहर का रेट

LPG Price Today: 8 जुलाई को भी घरेलू और कमर्शियल LPG गैस सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं देखा गया। इससे करीब एक हफ्ते पहले यानी 1 जुलाई को तेल कंपनियों ने इस साल पहली बार 19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम 183.50 रुपये कम किए थे। जिसके बाद दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 2,930 रुपये, मुंबई में 2,885.50 रुपये और कोलकाता में 3,081.50 रुपये हो गई थी।

इसके अलावा, सरकारी तेल कंपनियों ने 5 किलो वाले फ्री ट्रेड LPG (FTL) सिलेंडर के दाम में भी 13 रुपये की कमी की है। इसे आमतौर पर मुन्ना या छोटू सिलेंडर भी कहा जाता है। अब इसकी कीमत 808.50 रुपये हो गई है।

वहीं, 14.2 किलो वाले घरेलू कुकिंग गैस की कीमत में 7 जून को हुई बढ़ोतरी के बाद से कोई बदलाव नहीं किया गया है। उस समय कीमतें ₹29 बढ़ाई गई थीं, जो 28 फरवरी को शुरू हुए US-ईरान संघर्ष के बाद दूसरी बार की गई बढ़ोतरी थी। इस संघर्ष के कारण होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) से तेल टैंकरों की आवाजाही में रुकावट आई, जिससे दुनिया भर में ऊर्जा की सप्लाई में दिक्कतें हुईं।

शहर के हिसाब से घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर के लेटेस्ट रेट यहां देखें

शहरघरेलू LPG सिलेंडर (14.2 किलो)कमर्शियल LPG सिलेंडर (19 किलो)
नई दिल्ली₹942.00₹2,930 (₹183.50 की कटौती)
कोलकाता₹968.00₹3,081.50 (₹174 की कटौती)
मुंबई₹941.50₹2,885.50 (₹182 की कटौती)
चेन्नई₹957.50₹3,106 (₹177 की कटौती)
गुरुग्राम₹950.50₹2,947.50 (₹182.50 की कटौती)
नोएडा₹939.50₹2,930 (₹183.50 की कटौती)
बेंगलुरु₹944.50₹3,021 (₹177 की कटौती)
भुवनेश्वर₹968₹3,114.50 (₹175.50 की कटौती)
चंडीगढ़₹951.50₹2,954.50 (₹181.50 की कटौती)
हैदराबाद₹994₹3,191 (₹176 की कटौती)
जयपुर₹945.50₹2,957.50 (₹183.50 की कटौती)
लखनऊ₹979.50₹3,052.50 (₹183.50 की कटौती)
पटना₹1,031.50₹3,227 (₹173 की कटौती)
तिरुवनंतपुरम₹951₹2,971.50 (₹180.50 की कटौती)

ईरान पर अमेरिकी हमलों के बाद तेल की कीमतें बढ़ीं

बुधवार को, अमेरिका और ईरान के बीच फिर से शुरू हुई लड़ाई के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतों में तेजी देखने को मिली।  होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजर रहे तीन कमर्शियल जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में अमेरिका द्वारा ईरान पर जवाबी हमले किए जाने के बाद तेल की कीमतें बढ़ गईं। वहीं, वाशिंगटन ने तेहरान पर क्रूड की बिक्री से जुड़े प्रतिबंध भी फिर से लागू कर दिए।

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8th Pay Commission पर केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बिग अपडेट! सैलरी में 70% से ज्यादा बढ़ोतरी का प्रस्ताव, जानें HRA और DA का ये नया गणित

8th Pay Commission Salary Hike Proposals: केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए आठवें वेतन आयोग को लेकर एक बेहद जबरदस्त खबर आ रही है। विभिन्न कर्मचारी संगठनों और यूनियनों की ओर से सौंपे गए नए प्रस्तावों के बाद यह उम्मीद जताई जा रही है कि आठवें वेतन आयोग के लागू होने से कर्मचारियों की सैलरी में 70% से ज्यादा की भारी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

यह अनुमानित बढ़ोतरी सिर्फ फिटमेंट फैक्टर पर निर्भर नहीं है। बल्कि, बेसिक पे में संशोधन, हाउस रेंट अलाउंस (HRA), ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TA) में बढ़ोतरी और डियरनेस अलाउंस (DA) के मर्जर के संयुक्त प्रभाव के कारण यह आंकड़ा 70% के पार जा रहा है। आइए समझते हैं कि इस नए प्रस्ताव का पूरा गणित क्या है और लेवल-1 के कर्मचारियों की सैलरी पर इसका क्या असर पड़ेगा।

लेवल-1 कर्मचारियों की सैलरी ₹37080 से बढ़कर हो जाएगी ₹63500

ऑल इंडिया नेशनल पब्लिक सेक्टर एम्प्लॉइज फेडरेशन (AINPSEF) सहित कई प्रमुख कर्मचारी यूनियनों ने सरकार को जो प्रस्ताव भेजे हैं, उनके अनुसार एक्स-कैटेगरी (X-Category) के शहरों में काम करने वाले लेवल-1 कर्मचारियों की मौजूदा सैलरी करीब ₹37080 से बढ़ाकर लगभग ₹63500 करने की सिफारिश की गई है। यह सीधे तौर पर 71% तक की कुल बढ़ोतरी को दर्शाता है।

आपको बता दें कि ये आंकड़े कर्मचारी यूनियनों द्वारा की गई सिफारिशों और प्रस्तावों पर आधारित हैं। यह सरकार या आठवें वेतन आयोग का अंतिम फैसला नहीं है। अंतिम निर्णय वेतन आयोग की रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद केंद्र सरकार द्वारा ही लिया जाएगा।

70% से ज्यादा सैलरी बढ़ने की मुख्य वजहें क्या हैं?

सिर्फ बेसिक पे बढ़ने से सैलरी इतनी ज्यादा नहीं भागती, बल्कि बेसिक पे के साथ जुड़े अन्य भत्ते भी ऑटोमैटिकली बढ़ जाते हैं। यूनियनों ने ये मांगें रखी हैं:

DA का बेसिक पे में विलय: कर्मचारी संगठनों ने मांग की है कि नए पे-स्केल को तय करने और लागू करने से पहले महंगाई भत्ते (DA) को बेसिक पे में मर्ज किया जाए। इससे सैलरी का आधार काफी बड़ा हो जाएगा।

हायर ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TA): मासिक भत्ते को सीधे बढ़ाने के लिए ऊंचे ट्रांसपोर्ट अलाउंस की सिफारिश की गई है।

HRA दरों में संशोधन: शहरों की कैटेगरी के हिसाब से हाउस रेंट अलाउंस बढ़ाने का प्रस्ताव है।

HRA में बड़े बदलाव की तैयारी: X, Y और Z शहरों का नया ढांचा

केंद्र सरकार ने रहने के खर्च और आबादी के हिसाब से शहरों को तीन श्रेणियों- X, Y और Z में बांटा है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, अहमदाबाद और पुणे जैसे बड़े महानगर X कैटेगरी में आते हैं, जहाँ रहने का खर्च सबसे ज्यादा है।

वर्तमान में HRA की दरें 30%, 20% और 10% हैं। यूनियनों ने आठवें वेतन आयोग के तहत इसे बढ़ाकर 36%, 24% और 12% करने का प्रस्ताव रखा है।

कितनी बढ़ सकती है सैलरी?

8th Pay Commission पर केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बिग अपडेट! सैलरी में 70% से ज्यादा बढ़ोतरी का प्रस्ताव, जानें HRA और DA का ये नया गणित

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

प्रोजेक्शंस और अनुमानों के अनुसार एक्सपर्ट्स का मानना है कि, ‘70% से अधिक की अनुमानित वृद्धि केवल फिटमेंट फैक्टर पर नहीं, बल्कि कई मान्यताओं के संयोजन पर आधारित है। हालांकि संशोधित बेसिक पे मुख्य ड्राइवर है, लेकिन चूंकि HRA और ट्रांसपोर्ट अलाउंस जैसे घटक सीधे बेसिक पे से जुड़े होते हैं, इसलिए बेस बढ़ते ही पूरी सैलरी का पैकेज काफी बड़ा दिखने लगता है।’

वैसे ये सभी बातें इस पर निर्भर करेंगी कि अंतिम फिटमेंट फैक्टर क्या रहता है और सरकार अलाउंस के इस नए स्ट्रक्चर को किस तरह स्वीकार करती है। जब तक आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट नहीं सौंपता, इसे एक मजबूत उम्मीद या संकेतक के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

ओडिशा में यूनियनों की बैठकें समाप्त होने और पश्चिम बंगाल में नए दौर की चर्चाएं शुरू होने के साथ ही, कर्मचारियों के बीच इस 70% सैलरी हाईक के फॉर्मूले पर बहस और तेज हो गई है।

Video: भारतीयों की सेविंग्स की आदत के पीछे क्या है असली वजह, यूरोप में 10 साल रहे शख्स ने बताए 4 बड़े कारण

भारत में बचत करना सिर्फ एक अच्छी आदत नहीं, बल्कि जिंदगी का अहम हिस्सा माना जाता है। ज्यादातर परिवार बचपन से ही बच्चों को पैसे संभालकर खर्च करने और भविष्य के लिए बचत करने की सीख देते हैं। नौकरी लगने के बाद भी लोगों की पहली प्राथमिकता अक्सर सेविंग्स बढ़ाना और आने वाले समय के लिए आर्थिक सुरक्षा तैयार करना होती है। वहीं, यूरोप के कई देशों में रहने वाले लोगों की जीवनशैली इससे काफी अलग नजर आती है। वहां लोग भविष्य की चिंता के बजाय वर्तमान में खुलकर खर्च करते हुए दिखाई देते हैं।

आखिर दोनों जगहों की सोच में इतना बड़ा अंतर क्यों है? क्या इसकी वजह सिर्फ लोगों की मानसिकता है या इसके पीछे कोई और कारण भी छिपा है? इसी सवाल का जवाब यूरोप में लंबे समय से रह रहे एक भारतीय कंटेंट क्रिएटर ने अपने अनुभव के आधार पर दिया है, जिसने सोशल मीडिया पर नई चर्चा छेड़ दी है।

  1. इलाज का खर्च सबसे बड़ी चिंता

मुकुल के मुताबिक, यूरोप में लोग टैक्स और सोशल सिक्योरिटी के जरिए हेल्थकेयर का लाभ लेते हैं। किसी बड़ी मेडिकल इमरजेंसी में उन्हें इलाज के खर्च की ज्यादा चिंता नहीं करनी पड़ती।

वहीं भारत में कई परिवारों को अस्पताल का खर्च खुद उठाना पड़ता है। यही वजह है कि लोग मेडिकल इमरजेंसी के लिए पहले से पैसे बचाकर रखते हैं।

  1. बच्चों की पढ़ाई पर होता है भारी खर्च

उन्होंने बताया कि यूरोप के कई देशों में सरकारी स्कूलों में अच्छी और मुफ्त या बेहद कम खर्च वाली शिक्षा मिल जाती है। जहां भारत में बड़ी संख्या में माता-पिता अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाना चाहते हैं, जहां फीस और दूसरे खर्च काफी ज्यादा होते हैं। इसलिए बच्चों की पढ़ाई के लिए पहले से बचत करना जरूरी माना जाता है।

  1. रिटायरमेंट के लिए खुद बनाना पड़ता है सहारा

मुकुल का कहना है कि यूरोप में सोशल सिक्योरिटी और पेंशन जैसी सुविधाएं लोगों को भविष्य को लेकर कुछ राहत देती हैं।

जबकि भारत में अधिकतर लोग अपनी रिटायरमेंट के लिए खुद ही पैसा जोड़ते हैं। नौकरी के दौरान लगातार बचत करने की यही एक बड़ी वजह है।

  1. शादियों पर होता है लाखों का खर्च

उन्होंने ये भी कहा कि भारत में शादी सिर्फ एक समारोह नहीं, बल्कि बड़ा पारिवारिक आयोजन होती है। कई परिवार शादी पर अपनी सालों की बचत खर्च कर देते हैं।

यूरोप में आमतौर पर शादियां काफी सादगी से होती हैं, इसलिए वहां लोगों पर ऐसा आर्थिक दबाव कम होता है।

लोगों ने क्या कहा?

वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और इस पर लोगों ने अलग-अलग राय दी।

एक यूजर ने लिखा, “आपकी बातें हमेशा जानकारी बढ़ाने वाली होती हैं।”

दूसरे यूजर ने कहा, “भारत में सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि माता-पिता और पूरे परिवार की जिम्मेदारी भी निभानी पड़ती है। खासकर 90 के दशक की पीढ़ी पर ये दबाव ज्यादा है।”

एक अन्य व्यक्ति ने लिखा, “आपके सभी पॉइंट सही हैं।”

वहीं एक यूजर का कहना था कि भारत की बड़ी आबादी भी इसकी एक अहम वजह है, क्योंकि इतनी बड़ी जनसंख्या को सभी तरह की सरकारी सुविधाएं देना आसान नहीं है।

बचत की आदत के पीछे सिर्फ सोच नहीं, व्यवस्था भी

मुकुल आनंद का मानना है कि भारत और यूरोप के लोगों की बचत की आदत में सबसे बड़ा फर्क उनके देश की व्यवस्था से आता है। जहां यूरोप में कई जरूरी खर्चों का बोझ सरकार और सोशल सिक्योरिटी सिस्टम संभाल लेते हैं, वहीं भारत में लोगों को अपने भविष्य की सुरक्षा के लिए खुद पहले से आर्थिक तैयारी करनी पड़ती है।

Viral Post: ‘ऑफिस में सिर्फ 3 मिनट, रास्ते में 1 घंटा…’ मुंबई की बारिश पर महिला प्रोफेशनल का पोस्ट हुआ वायरल

Viral Post: ‘ऑफिस में सिर्फ 3 मिनट, रास्ते में 1 घंटा…’ मुंबई की बारिश पर महिला प्रोफेशनल का पोस्ट हुआ वायरल

मुंबई में लगातार हो रही भारी बारिश ने लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर दिया है। कई इलाकों में जलभराव और ट्रैफिक की समस्या की वजह से कई ऑफिस ने अपने कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति दी है। वहीं हाल ही में एक महिला प्रोफेशनल ने बताया कि, उसको वर्क फ्रॉम होम मिलने के बावजूद सिर्फ लैपटॉप लेने के लिए ऑफिस जाना पड़ा। उन्होंने बताया कि ऑफिस तक पहुंचने में कुल 1 घंटे का समय लगा। वहीं कई यूजर्स ने मुंबई में हर साल मानसून के दौरान होने वाली परेशानियों और बारिश के बीच भी कर्मचारियों पर पड़ने वाले काम के दबाव को लेकर अपनी राय रखी।

सोशल मीडिया पर किया पोस्ट

मार्केटिंग प्रोफेशनल और आईआईएम रायपुर से पढ़ाई कर चुकी इहिना डी ने मुंबई में रेड अलर्ट के दौरान अपना एक्सपीरिएंस लिंक्डइन पर शेयर किया। उन्होंने बताया कि, भारी बारिश के बीच, जब बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने लोगों को केवल जरूरी काम होने पर ही घर से बाहर निकलने की सलाह दी थी। महाराष्ट्र सरकार ने प्राइवेट कंपनियों से भी अपील की कि खराब मौसम को देखते हुए जहां संभव हो, कर्मचारियों को घर से काम करने की सुविधा दी जाए। इहिना डी ने बताया कि उनकी कंपनी ने भी भारी बारिश के कारण कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था लागू कर दी थी।

ऑफिस में भूल गई लैपटॉप

इहिना डी ने बताया कि उन्हें बाद में याद आया कि उनका लैपटॉप ऑफिस में ही रह गया है। उन्होंने लिखा, “मुंबई में कल रेड अलर्ट घोषित किया गया था, इसलिए आज मैं वर्क फ्रॉम होम कर रही हूं। लेकिन अपना लैपटॉप ऑफिस में ही छोड़ आई थी।” उन्होंने आगे लिखा, “जब पूरा शहर अपने प्लान रद्द कर रहा था और रेनकोट निकाल रहा था, तब मैं मजबूरी में कार से ऑफिस जा रही थी।” इहिना ने बताया कि ऑफिस पहुंचकर उन्होंने सिर्फ अपना लैपटॉप उठाया और करीब तीन मिनट में वापस निकल गईं। उन्होंने लिखा, “अपना लैपटॉप लिया, तीन मिनट में फिर कार में लौट आई। एक घंटे का सफर और ऑफिस में सिर्फ तीन मिनट।”

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इस एक्सपिरिएंस के बाद इहिना ने मुंबई में हर साल होने वाली बारिश को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने लिखा, “ये सिर्फ बारिश नहीं है। यह हर साल होने वाला ऐसा ठहराव है, जिसके आने का सभी को पता होता है, लेकिन पूरा शहर मानो ये दिखावा करता है कि यह आने वाला ही नहीं है।” उन्होंने हर साल मानसून के दौरान होने वाली पानी भरी सड़कों, जलभराव और आखिरी समय में होने वाली वर्क-फ्रॉम-होम की घोषणाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा, “हम जानते हैं कि बारिश जून में शुरू होगी। हमें यह भी पता है कि जुलाई में हालात और खराब होंगे। फिर भी हर साल ऐसा लगता है जैसे यह सब अचानक हो गया हो।”

उन्होंने ये भी माना कि हर किसी के पास घर से काम करने की सुविधा नहीं होती। उन्होंने लिखा, “आज मुझे वर्क फ्रॉम होम करने का मौका मिला, इसलिए मैं खुद को खुशकिस्मत मानती हूं। मेरा काम नहीं रुका और मेरा सफर सिर्फ मेरे बेडरूम से मेरी डेस्क तक था। लेकिन इससे मुझे यह भी एहसास हुआ कि लाखों मुंबईकरों के पास वर्क फ्रॉम होम का विकल्प नहीं है। वे फिर भी बारिश में, लोकल ट्रेन से और बाइक पर सफर करके काम पर पहुंचे। यह कोई ‘हसल कल्चर’ नहीं है, यह बस मुंबई है।”

महाराष्ट्र, यूपी और उत्तराखंड को रेलवे ने दिया बड़ा तोहफा, शुरू की ये नई ट्रेनें…जानें पूरी डिटेल्स

भारतीय रेलवे ने यात्रियों को बड़ी सौगात देते हुए कई नई ट्रेन सेवाएं शुरू की और कुछ ट्रेनों के रूट बढ़ाने का ऐलान किया है। इससे महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के यात्रियों को बेहतर रेल सुविधा मिलेगी। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को कई नई ट्रेन सेवाओं की शुरुआत की और महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड में कुछ मौजूदा रेल मार्गों का विस्तार करने का ऐलान किया। केंद्रीय रेल मंत्री ने भुवनेश्वर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इन सेवाओं को हरी झंडी दिखाई। अश्विनी वैष्णव पुरी की रथ यात्रा के लिए रेलवे की तैयारियों का जायजा लेने के लिए ओडिशा दौरे पर थे।

इन जगहों को जोड़ेगी

TOI की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बड़ी घोषणाओं में नांदेड़ से मुंबई के बीच एक नई एक्सप्रेस ट्रेन भी शामिल है। ये ट्रेन वाशिम और हिंगोली के रास्ते चलेगी, जिससे महाराष्ट्र के विदर्भ और मराठवाड़ा क्षेत्र के कई जिलों में रेल संपर्क बेहतर होगा और यात्रियों को आने-जाने में सुविधा मिलेगी। रेलवे ने टनकपुर से नांदेड़ के बीच नई एक्सप्रेस ट्रेन की भी शुरुआत की है। इससे उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के तराई क्षेत्र सहित दोनों इलाकों के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों, खासकर सिख समुदाय को काफी सुविधा मिलने की उम्मीद है।

इसके साथ ही टनकपुर-पीलीभीत ट्रेन का विस्तार अब शाहजहांपुर तक कर दिया गया है, जबकि टनकपुर-आगरा स्पेशल ट्रेन को नियमित ट्रेन सेवा के रूप में चलाने का फैसला लिया गया है।

इन जगहों पर भी रुकेगी ट्रेन

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि, नई ट्रेन सेवाएं लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग को ध्यान में रखकर शुरू की गई हैं। उन्होंने कहा कि इससे क्षेत्रीय रेल संपर्क और बेहतर होगा। साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि खटीमा और बनबसा में ट्रेन के ठहराव की मांग पर भी रेलवे विचार करेगा। मंत्री ने कहा, “अगर यह संभव हुआ, तो हम खटीमा और बनबसा में इस ट्रेन का स्टॉपेज जरूर देंगे।”

देश भर में बिछाए गए 37 हजार किलोमीटर ट्रैक

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देशभर में करीब 37 हजार किलोमीटर नए रेलवे ट्रैक बिछाए गए हैं और लगभग 99.6 प्रतिशत रेल नेटवर्क का इलेक्ट्रिफाइड पूरा हो चुका है। उन्होंने ये भी बताया कि ओणम के दौरान केरल के लिए 100 विशेष ट्रेनें चलाई जाएंगी, जबकि पुरी की रथ यात्रा में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 300 से अधिक स्पेशल ट्रेनें संचालित की जाएंगी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि, ओडिशा में रेलवे ढांचे को मजबूत बनाने के लिए बड़े स्तर पर काम किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि, राज्य में 90 हजार करोड़ रुपये से अधिक की रेल परियोजनाएं चल रही हैं, जिनका उद्देश्य रेल नेटवर्क का विस्तार करना और यात्रियों के लिए बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है।

Mumbai Building Collapse: हाय रि किस्मत! अगले दिन घर छोड़ने वाला था परिवार, उससे पहले ही भरभराकर गिर गई बिल्डिंग

मुंबई के मानखुर्द इलाके से एक दिल दहला देने वाले घटना घटी है। मानखुर्द इलाके में शनिवार रात एक गैर-कानूनी चार मंजिला इमारत अचानक गिरकर पास बने टिन की छत वाले घर पर आ गिरी। इस हादसे में कई लोगों की जान चली गई। पड़ोसियों के मुताबिक, चार बच्चों की मां अख्तर जहां और उनके पति मोइनुद्दीन वाजिद अली शाह ने रविवार को घर छोड़ने का फैसला किया था। लगातार बारिश के कारण उस बिल्डिंग में दरारें पड़ गई थीं। इसी वजह से दोनों ने रविवार को घर छोड़कर दूसरी जगह जाने की योजना बनाई थी। लेकिन वह समय पर घर खाली नहीं कर पाए। वहीं इस हादसे में अबतक कुल 6 लोगों की मौत हुई है।

एक पड़ोसी ने बताया, “बारिश के कारण लोगों को डर था कि बिल्डिंग कभी भी गिर सकती है, इसलिए निवासी उसे खाली करने लगे थे। अख्तर जहां भी दूसरी जगह जाने के लिए अपना सामान पैक कर रही थीं, तभी यह दर्दनाक हादसा हो गया।” महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।

छोड़ने वाले थे घर

जनता नगर के न्यू मंडला इलाके में भारी बारिश के बीच एक चार मंजिला इमारत भरभराकर गिर गई और उसके मलबे की चपेट में आसपास के कई घर आ गए। बताया जा रहा कि इमारत में रहने वाले लोग पहले ही दरारें, टाइलें गिरने और भवन के झुकने जैसे संकेत देखकर बाहर निकल गए थे, लेकिन पास के मकानों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। मोइनुद्दीन इस हादसे में इसलिए बच गए क्योंकि घटना से कुछ देर पहले ही वह घर से बाहर निकल गए थे। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने परिवार से कह दिया था कि अगले दिन वे दूसरी जगह रहने चले जाएंगे। लेकिन उससे पहले ही पास की इमारत अचानक उनके घर पर गिर गई, जिससे परिवार के लोग मलबे के नीचे दब गए।

दर्ज किया गया केस

हादसे के बाद पुलिस ने गिरी हुई इमारत के मालिक और उसके निर्माण से जुड़े ठेकेदार को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है, जिसमें गैर-इरादतन हत्या का आरोप भी शामिल है। जांच एजेंसियां ये पता लगा रही हैं कि इमारत का निर्माण अवैध तरीके से किया गया था या नहीं और क्या सुरक्षा से जुड़े नियमों की अनदेखी की गई थी। नगर निगम के अधिकारियों ने भी पुष्टि की है कि गिरी हुई इमारत बिना अनुमति के बनाई गई थी। हादसे के बाद मुंबई फायर ब्रिगेड, पुलिस, नगर निगम और अन्य राहत दलों ने पूरी रात मलबे में फंसे लोगों को निकालने और मृतकों के शव बरामद करने के लिए बचाव अभियान चलाया।

Viral Video: ‘तुम्हारा न्यूमरोलॉजी नंबर क्या है?’ जवाब सुनते ही ओनर ने किराए पर घर देने से किया इनकार

Viral Video: मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में बजट में हर खोजना काफी मुश्किल होता है। इन दिनों सोशल मीडिया पर मुंबई में किराए पर घर लेने से जुड़ा एक अनोखा मामला चर्चा में है। एक आर्टिस्ट और इन्फ्लुएंसर ने बताया कि, उनकी एक दोस्त को मुंबई में सिर्फ उसके न्यूमरोलॉजी नंबर की वजह से किराए पर घर नहीं मिला। उनकी दोस्त ने एक मकान देखने के लिए मकान मालकिन से मुलाकात की थी, लेकिन बाद में उसे फ्लैट देने से इनकार कर दिया गया। ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोग इस वीडियो पर तरह-तरह के रिएक्शन दे रहे हैं।

फ्लैट देने से किया इनकार

एक आर्टिस्ट और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर वाग्मिता सिंह का इंस्टाग्राम पर ये वीडियो शेयर किया है। वीडियो में वाग्मिता सिंह ने बताया कि मकान मालकिन ने उनकी दोस्त से पूछा, “तुम्हारा नंबर क्या है?” पहले उनकी दोस्त को लगा कि वह मोबाइल नंबर पूछ रही हैं। लेकिन बाद में मकान मालकिन ने साफ किया कि वह जन्मतिथि के आधार पर निकलने वाले न्यूमरोलॉजी नंबर के बारे में पूछ रही थीं। वाग्मिता सिंह के अनुसार, मकान मालकिन ने फ्लैट और उनकी दोस्त के न्यूमरोलॉजी नंबर की तुलना की।

न्यूमरोलॉजी नंबर अलग थी

उन्होंने कहा कि, फ्लैट का नंबर 4 से जुड़ा है, जबकि उनकी दोस्त का नंबर 7 है। मकान मालकिन का कहना था कि दोनों नंबर एक-दूसरे के अनुकूल नहीं हैं, इसलिए उन्होंने फ्लैट किराए पर देने से इनकार कर दिया। इस घटना पर रिएक्शन देते हुए वाग्मिता सिंह ने कहा कि “मेरे पास इसे बयां करने के लिए शब्द नहीं हैं। मैं समझ नहीं पा रही हूं कि इस स्थिति को क्या कहूं।” इसके बाद उन्होंने मजाकिया अंदाज में गुनगुनाया, “इस मेंटल इलनेस को मैं क्या नाम दूँ,” और अपनी हैरानी जाहिर की। इस वीडियो पर लोगों ने कई मजेदार रिएक्शन दिए है।

 

सोशल मीडिया पर लोगों ने किया कमेंट

इस वीडियो पर सोशल मीडिया यूजर्स ने भी जमकर रिएक्शन दिया है। एक यूजर ने मजाक में लिखा, “लेकिन 4-7 तो बहुत अच्छा कॉम्बो है। आंटी ने एक अच्छा मौका गंवा दिया।” वहीं, दूसरे यूजर ने कहा, “अच्छा लगा कि कुछ लड़कियां सच में न्यूमरोलॉजी समझती हैं। 4 और 7 सबसे मजबूत जोड़ियों में से एक हैं।” वहीं एक और यूजर ने टिप्पणी की, “इंडिया इवॉल्व हो रहा है, लेकिन पीछे की ओर।”