KEI Industries Share Price:अच्छे तिमाही नतीजों से शेयर सरपट दौड़ा, 9% उछलकर 4 हफ्ते के हाई पर पहुंचा भाव, अब क्या करें?

KEI Industries Share Price: केबल इंडस्ट्रीज KEI Industries का शेयर 4 अगस्त को 9 फीसदी से ज्यादा तेजी देखने को मिली और यह आज ₹5,475 प्रति के चार हफ़्ते के हाई पर पहुंच गया। शेयर में यह तेजी तिमाही नतीजों के बाद देखने को मिली है। कंपनी ने जून तिमाही में उम्मीद से बेहतर नतीजे दिखाए, जिसकी वजह रेवेन्यू मिक्स और ऑपरेटिंग लेवरेज में सुधार था।

कंपनी ने जून तिमाही के लिए ₹3,190 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया, जो साल-दर-साल (YoY) आधार पर 23% की बढ़ोतरी है।

ब्रोकरेज फर्म JM फाइनेंशियल के अनुसार, जहां टॉपलाइन (रेवेन्यू) मजबूत रही, वहीं वॉल्यूम ग्रोथ सिंगल-डिजिट में ही रही। इसकी वजह इनपुट कॉस्ट में भारी बढ़ोतरी और पॉलीकैब, हैवेल्स और RR काबेल जैसी दूसरी कंपनियों के वॉल्यूम ट्रेंड में सुस्ती थी।

ऑपरेटिंग लेवल पर, EBITDA साल-दर-साल 53% बढ़कर ₹400 करोड़ हो गया, जबकि EBITDA मार्जिन 240 बेसिस पॉइंट्स बढ़कर 12.4% हो गया। इसकी वजह ऑपरेटिंग लेवरेज और बेहतर प्रोडक्ट मिक्स था। बॉटम लाइन (मुनाफ़े) की बात करें तो, कंपनी ने ₹270 करोड़ का नेट प्रॉफ़िट (PAT) दर्ज किया, जो साल-दर-साल 40% ज़्यादा है। हालाँकि, तिमाही के दौरान ‘अन्य आय’ (other income) कम होने के कारण प्रॉफ़िट ग्रोथ, EBITDA ग्रोथ के मुकाबले कम रही।

मज़बूत मार्जिन परफॉर्मेंस के बाद, ब्रोकरेज फर्म JM फाइनेंशियल का मानना ​​है कि इस बात की काफ़ी संभावना है कि कंपनी FY27 के लिए अपने 10.5%–11% के EBITDA मार्जिन गाइडेंस को बढ़ा सकती है।

ब्रोकरेज ने यह भी बताया कि डीलर और डिस्ट्रीब्यूटर चैनल ग्रोथ का मुख्य ड्राइवर बना रहा। इस तिमाही में कुल रेवेन्यू में इसका योगदान लगभग 59% रहा, जबकि एक साल पहले यह 51% था।

इस चैनल से रेवेन्यू साल-दर-साल 42% बढ़कर ₹1,880 करोड़ हो गया। चूंकि डीलर और डिस्ट्रीब्यूटर के ज़रिए होने वाली बिक्री पर आम तौर पर ज़्यादा मार्जिन मिलता है, इसलिए बेहतर होते चैनल मिक्स से भविष्य में मुनाफ़े को सहारा मिलने की उम्मीद है।

कंपनी ने अपनी सलारपुर फैसिलिटी में ₹700 करोड़ की कैपेसिटी बढ़ाने (क्षमता विस्तार) की भी घोषणा की, ताकि 50,000 km केबल मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी और 40,000 मीट्रिक टन GI वायर कैपेसिटी जोड़ी जा सके।

यह प्रोजेक्ट चरणों में पूरा किया जाएगा और इसके FY29 की दूसरी तिमाही तक पूरा होने की उम्मीद है। जून तिमाही के आखिर तक, कैपेसिटी यूटिलाइज़ेशन (क्षमता का उपयोग) केबल के लिए लगभग 72%, कम्युनिकेशन केबल के लिए 45%, हाउस वायर और वाइंडिंग वायर के लिए 61% और स्टेनलेस स्टील वायर के लिए 91% था।

ब्रोकरेज की शेयर पर क्या है राय

जून तिमाही के नतीजों के बाद, JM फाइनेंशियल ने KEI इंडस्ट्रीज़ पर अपनी ‘buy’ रेटिंग दी है और इसके लिए टारगेट प्राइस ₹5,800 तय किया। ब्रोकरेज का मानना ​​है कि कंपनी का EBITDA मार्जिन प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर रहा है, जिससे FY27 के लिए मार्जिन गाइडेंस में बढ़ोतरी की संभावना बढ़ गई है।उन्हें यह भी उम्मीद है कि FY28 में मार्जिन और बढ़ेगा, क्योंकि FY27 के आखिर तक एक्स्ट्रा-हाई वोल्टेज (EHV) केबल फैसिलिटीज़ शुरू हो जाएंगी।

वहीं, मोतीलाल ओसवाल ने भी स्टॉक पर अपनी ‘buy’ रेटिंग बनाए रखी और इसका टारगेट प्राइस ₹5,010 तय किया। हालांकि, स्टॉक अभी अपने टारगेट प्राइस से ऊपर ट्रेड कर रहा है।

ब्रोकरेज ने बताया कि KEI का Q1 FY27 EBITDA उनके अनुमान से ज़्यादा रहा। इसकी वजह केबल्स एंड वायर्स (C&W) और इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (EPC) सेगमेंट में मज़बूत रेवेन्यू ग्रोथ थी, हालांकि EPC बिजनेस को इस तिमाही में नुकसान हुआ।

मोतीलाल ओसवाल ने आगे कहा कि वे C&W सेक्टर को लेकर स्ट्रक्चरली पॉजिटिव हैं, क्योंकि इसमें लंबे समय तक ग्रोथ के मजबूत कारण मौजूद हैं और लगातार मांग बनी हुई है।

Restaurant Brands का शेयर बना रॉकेट, 18% दौड़ा, क्या यह है खरीदारी की सही समय?

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Restaurant Brands का शेयर बना रॉकेट, 18% दौड़ा, क्या यह है खरीदारी का सही समय?

Restaurant Brands Asia Share Price: बर्गर किंग इंडिया की पैरेंट कंपनी रेस्टोरेंट ब्रांड्स एशिया (Restaurant Brands Asia) के शेयरों में मंगलवार 4 अगस्त को तेज छलांग लगाते नजर आए। शेयर इंट्राडे में 19 फीसदी से ज्यादा चढ़ा। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर, रेस्टोरेंट ब्रांड्स एशिया के शेयर की कीमत ₹84 के दिन के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई, जो पिछले क्लोजिंग प्राइस ₹70.76 से 18.56% ज़्यादा है। इस क्विक-सर्विस रेस्टोरेंट (QSR) स्टॉक में इस साल अब तक 28% की बढ़त हुई है।

शेयर में आज की तेज़ी इस स्मॉल-कैप स्टॉक को उसके 52-हफ़्ते के उच्चतम स्तर ₹87.65 के करीब ले आई है, जो पिछले साल सितंबर में बना था। वहीं, इसका 52-हफ़्ते का निचला स्तर ₹57.15 है।

कैसे रहे Q1 नतीजे

जून 2026 को समाप्त तिमाही के लिए, कंपनी ने ₹28.3 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट लॉस दर्ज किया, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह नुकसान ₹48 करोड़ था। मैनेजमेंट ने कहा कि वे प्राइसिंग ऑप्टिमाइज़ेशन, मेन्यू में नए बदलाव और फिक्स्ड कॉस्ट (जिसमें यूटिलिटीज़ भी शामिल हैं) पर बेहतर नियंत्रण के ज़रिए मुनाफा बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

इस बीच, समीक्षाधीन तिमाही के दौरान कंपनी के रेवेन्यू में साल-दर-साल (Y-o-Y) 18% की बढ़त हुई और यह ₹822.6 करोड़ हो गया। इसकी मुख्य वजह भारत के कारोबार में मज़बूत प्रदर्शन था, जबकि इंडोनेशिया का कारोबार कुल ग्रोथ पर दबाव डालता रहा।

कंपनी ने 13% की इंडस्ट्री-लीडिंग सेम-स्टोर सेल्स ग्रोथ (SSSG) बनाए रखी। इसे डाइन-इन और डिलीवरी दोनों चैनलों पर अच्छी मांग और वैल्यू ऑफरिंग से मदद मिली।

इसने Q1 में नौ स्टोर जोड़े और FY27 में 80 स्टोर खोलने की अपनी योजना को दोहराया। इंडोनेशिया में, इसकी टर्नअराउंड स्ट्रैटेजी पर काम चल रहा है और RBA लागत पर बेहतर नियंत्रण और ऑपरेशनल सुधारों के ज़रिए नुकसान कम करने पर ध्यान दे रही है।

क्या यह है खरीदारी की सही समय

घरेलू ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (MOFSL) इस शेयर को लेकर पॉजिटिव बनी हुई है। कंपनी ने बेहतर मार्जिन को देखते हुए FY27 के लिए EBITDA (ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमॉर्टाइजेशन से पहले की कमाई) के अनुमान को 5% और FY28 के लिए 8% बढ़ा दिया है।

MOFSL का कहना है कि जैसे-जैसे और स्टोर मैच्योर होंगे और नेटवर्क में नए आउटलेट्स का योगदान बेहतर होगा, उनसे मार्जिन रिकवरी में मदद मिलने की उम्मीद है। कंपनी को उम्मीद है कि इंडोनेशियाई बिजनेस में धीरे-धीरे सुधार होगा क्योंकि कंपनी ने खराब प्रदर्शन करने वाले स्टोर बंद करके अपने पोर्टफोलियो को बेहतर बनाया है। हालांकि, उसे उम्मीद है कि इंडोनेशिया में निकट भविष्य में चुनौतियां बनी रहेंगी।

ब्रोकरेज ने 125 रुपये के टारगेट प्राइस के साथ अपनी ‘BUY’ रेटिंग को दोहराया है, जो पिछले क्लोजिंग प्राइस से 75% की बढ़त का संकेत है।

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10 अगस्त को आ रहा है एक और धमाकेदार IPO! टेमासेक-मोतीलाल ओसवाल का सपोर्ट, जानें पूरी डिटेल्स

Molbio Diagnostics IPO: मेडिकल डायग्नोस्टिक क्षेत्र की दिग्गज कंपनी मोल्बियो आईपीओ बाजार में दांव लगाने का बड़ा मौका लेकर आ रही है। दिग्गज ग्लोबल निवेशक टेमासेक और मोतीलाल ओसवाल ग्रुप के समर्थन वाली इस कंपनी ने रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के पास अपना रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) दाखिल कर दिया है।

कंपनी का आईपीओ आम जनता के लिए 10 अगस्त 2026 को खुलेगा। इसी दिन धूत ट्रांसमिशन का ₹3,067 करोड़ का आईपीओ भी दस्तक दे रहा है, जिससे 10 अगस्त को प्राइमरी मार्केट में दो बड़े मेनबोर्ड इश्यू के बीच दिलचस्प मुकाबला देखने को मिलेगा।

Molbio Diagnostics IPO: टाइमलाइन और महत्वपूर्ण तारीखें

एंकर बुक ओपनिंग: 7 अगस्त 2026

पब्लिक इश्यू ओपनिंग-क्लोजिंग डेट: 10- 12 अगस्त 2026

शेयर अलॉटमेंट की तारीख: 13 अगस्त 2026

लिस्टिंग की तारीख: 17 अगस्त 2026

इश्यू का साइज और OFS की डिटेल्स

फ्रेश इश्यू: ₹200 करोड़ मूल्य के नए शेयर जारी किए जाएंगे।

ऑफर फॉर सेल (OFS): मौजूदा शेयरधारक और प्रमोटर्स 91.66 लाख शेयरों की बिक्री करेंगे।

OFS साइज में कटौती: इससे पहले अगस्त 2025 में दाखिल DRHP में 1.25 करोड़ शेयरों की बिक्री की योजना थी, जिसे अब घटाया गया है। सेबी ने दिसंबर 2025 में इसके आईपीओ पेपर्स को मंजूरी दी थी।

शेयरहोल्डिंग पैटर्न: प्रमोटर्स एक्सोरा ट्रेडिंग और डॉ. चंद्रशेखर भास्करन नायर के पास 46.65% हिस्सेदारी है। बाकी 53.35% हिस्सेदारी टेमासेक की सहायक कंपनी ‘V Sciences Investments’ और मोतीलाल ओसवाल के ‘India Business Excellence Fund’ जैसे निवेशकों के पास है।

जुटाए गए फंड का कहां होगा इस्तेमाल?

कंपनी फ्रेश इश्यू से प्राप्त नेट प्रोसीड्स का इस्तेमाल इस प्रकार करेगी:

  • R&D और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (₹105.5 करोड़): पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी ‘Bigtec’ द्वारा संचालित रिसर्च एंड डेवलपमेंट फैसिलिटी और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने में।
  • प्लांट व मशीनरी (₹72.2 करोड़): गोवा यूनिट I, गोवा यूनिट II और विशाखापत्तनम यूनिट के लिए नए प्लांट, उपकरण और मशीनरी की खरीद में।
  • कॉर्पोरेट उद्देश्य: शेष राशि का उपयोग सामान्य कॉर्पोरेट जरूरतों के लिए किया जाएगा।

बिजनेस मॉडल और पेटेंट टेक्नोलॉजी

अक्टूबर 2000 में शुरू हुई मोल्बियो डायग्नोस्टिक्स एक पॉइंट-ऑफ-केयर (POC) डायग्नोस्टिक्स कंपनी है। कंपनी ने ‘Truenat’ नामक पीसीआर (PCR) प्लेटफॉर्म विकसित किया है, जो 100 से अधिक देशों में पेटेंटेड है। यह तकनीक टीबी (TB), कोविड-19, हेपेटाइटिस B & C, एचआईवी (HIV) और एचपीवी (HPV) जैसी संक्रामक और गैर-संक्रामक बीमारियों की जांच 1 घंटे के भीतर कर सकती है। प्रोग्नोसिस और ऑप्ट्रास्कैन जैसी सहायक कंपनियों के माध्यम से यह डिजिटल पैथोलॉजी, रेडियोलॉजी और ब्रेस्ट हेल्थ स्क्रीनिंग डिवाइस भी मुहैया कराती है।

कंपनी का फाइनेंशियल प्रदर्शन

मोल्बियो डायग्नोस्टिक्स का वित्तीय प्रदर्शन पिछले कुछ वर्षों में मजबूत रहा है। मार्च 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर में कंपनी का शुद्ध लाभ (PAT) 14.8% बढ़कर ₹166.6 करोड़ पर पहुंच गया। राजस्व पिछले वित्त वर्ष की तुलना में कुल राजस्व 41.7% की जोरदार बढ़त के साथ ₹1,445.7 करोड़ रहा।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Sterlite Tech के शेयर में सोमवार को दिख सकता है दमदार एक्शन, ₹960 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट देगा बूस्ट

ऑप्टिकल कनेक्टिविटी सॉल्यूशंस उपलब्ध कराने वाली स्टरलाइट टेक्नोलोजिज के शेयरों में सोमवार, 3 अगस्त को तेजी देखने को मिल सकती है। ऐसी उम्मीद की वजह है कंपनी को 960 करोड़ रुपये का एक कॉन्ट्रैक्ट मिलना। कंपनी ने शेयर बाजारों को बताया है कि उसे एक घरेलू टेलिकॉम ऑपरेटर से यह कॉन्ट्रैक्ट मिला है। यह ग्राहक की जरूरतों के अनुसार ऑप्टिकल फाइबर केबल की सप्लाई के लिए है।

स्टरलाइट टेक्नोलोजिज का कहना है कि यह एक मल्टी ईयर सप्लाई एग्रीमेंट है। इसकी अवधि 2 साल है लेकिन इसे आपसी सहमति से और 2 साल के लिए बढ़ाया जा सकता है। यह डील रिलेटेड पार्टी ट्रांजेक्शन के तहत नहीं आती है।

स्टरलाइट टेक को ऑप्टिकल कनेक्टिविटी प्रोडक्ट बनाने में 30 साल से ज्यादा का अनुभव है। कंपनी AI रेडी इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने, FTTx, रूरल कनेक्टिविटी, एंटरप्राइज और डेटा सेंटर नेटवर्क्स के लिए एंड-टू-एंड सॉल्यूशंस उपलब्ध कराती है।

Sterlite Tech का शेयर 3 महीनों में 90 प्रतिशत मजबूत

कंपनी के शेयर की कीमत वर्तमान में BSE पर 556.50 रुपये है। शेयर 2 कारोबारी सत्रों में 7 प्रतिशत चढ़ा है। कंपनी का मार्केट कैप 28600 करोड़ रुपये के करीब है। शेयर की फेस वैल्यू 2 रुपये है। यह BSE 1000 इंडेक्स का हिस्सा है। शेयर 3 महीनों में लगभग 90 प्रतिशत चढ़ा है। 6 महीनों में यह 420 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी देख चुका है। शेयर का BSE पर 52 सप्ताह का एडजस्टेड हाई 684.45 रुपये और एडजस्टेड लो 84.65 रुपये है।

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इस साल जून महीने में स्टरलाइट टेक्नोलोजिज क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) लाई थी। इसमें कंपनी ने 2.57 करोड़ शेयर अलॉट किए और करीब 1,500 करोड़ रुपये जुटाए। QIP में मोतीलाल ओसवाल, नोमुरा, HSBC, बैंक ऑफ इंडिया, ऑक्सबो, थिंक इनवेस्टमेंट्स समेत कई घरेलू और वैश्विक निवेशकों ने हिस्सा लिया।QIP वह तरीका है, जिसमें कोई लिस्टेड कंपनी पैसे जुटाने के लिए अपने नए शेयर आम जनता को नहीं, बल्कि सिर्फ बड़े इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स जैसे म्यूचुअल फंड्स, इंश्योरेंस कंपनीज, बैंक और विदेशी संस्थागत निवेशकों को बेचती है।

कंपनी की वित्तीय सेहत

कंपनी का अप्रैल-जून 2026 तिमाही में स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 929 करोड़ रुपये रहा। इस बीच शुद्ध मुनाफा 125 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। पूरे वित्त वर्ष 2026 के लिए स्टरलाइट टेक का स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 2,446 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 2 करोड़ रुपये रहा।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Swiggy Stock Outlook: Q1 नतीजों से कुछ ब्रोकरेज नाखुश, टारगेट प्राइस घटाया; फिर भी 23% तक उछाल की उम्मीद

ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म स्विगी के शेयर के लिए कुछ ब्रोकरेज ने टारगेट प्राइस घटा दिया है। CLSA ने तो रेटिंग भी कम कर दी है। कंपनी के तिमाही नतीजों के बाद ब्रोकरेज का व्यू सामने आया है। अभी भी स्विगी पर नजर रखने वाले 30 एनालिस्ट्स में से 70 प्रतिशत यानि कि 21 एनालिस्ट्स की ओर से रेटिंग “बाय” है। 6 ने “होल्ड” और 3 ने “सेल” की सलाह दी है। कंपनी इंस्टामार्ट के जरिए क्विक कॉमर्स सेक्टर में भी है। अब नए टारगेट प्राइस के आधार पर स्विगी के शेयरों में आगे 23 प्रतिशत तक उछाल की उम्मीद है।

स्विगी का अप्रैल-जून 2026 तिमाही में कंसोलिडेटेड बेसिस पर शुद्ध घाटा सालाना आधार पर 34 प्रतिशत घटकर 791 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले घाटा 1,197 करोड़ रुपये था। ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 37 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 6,812 करोड़ रुपये हो गया। जून 2025 तिमाही में रेवेन्यू 4,961 करोड़ रुपये था। खर्च बढ़कर 7,813 करोड़ रुपये के हो गए, जो जून 2025 तिमाही में 6,244 करोड़ रुपये के थे। फूड डिलीवरी बिजनेस की ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू पिछले साल के मुकाबले 17.4 प्रतिशत बढ़ी। इंस्टामार्ट की नेट ऑर्डर वैल्यू साल-दर-साल 38.9 प्रतिशत बढ़ी।

स्विगी के शेयर की कीमत वर्तमान में BSE पर 284.95 रुपये है। कंपनी का मार्केट कैप 78600 करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर की फेस वैल्यू 1 रुपये है। यह BSE 200 इंडेक्स का हिस्सा है। शेयर एक महीने में 19 प्रतिशत चढ़ा है। वहीं एक साल में करीब 30 प्रतिशत गिरा है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 94.92 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।

Swiggy पर CLSA ने घटाई रेटिंग

ब्रोकरेज CLSA ने स्विगी के स्टॉक के लिए रेटिंग को “एक्युमुलेट” से घटाकर “होल्ड” कर दिया है। टारगेट प्राइस 357 रुपये से घटाकर 318 रुपये प्रति शेयर कर दिया है। ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी के फूड डिलीवरी बिजनेस की ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू (GOV) ग्रोथ उम्मीद से कम रही। यह जोमैटो से पीछे है। एडजस्टेड EBITDA मार्जिन भी अनुमान से कम रहा। JM फाइनेंशियल ने भी स्विगी की रेटिंग को “रिड्यूस” से घटाकर “सेल” कर दिया है। प्राइस टारगेट 250 रुपये रखा है।

CNBC-TV18 की रिपोर्ट के अनुसार, मैक्वेरी ने शेयर के लिए 230 रुपये के टारगेट प्राइस के साथ “अंडरपरफॉर्म” रेटिंग बरकरार रखी है। कहा है कि डार्क स्टोर थ्रूपुट और मंथली ट्रांजेक्शन करने वाले यूजर्स सहित मुख्य ऑपरेटिंग मेट्रिक्स में तिमाही के दौरान सुधार नहीं हुआ। मोतीलाल ओसवाल ने ‘बाय’ रेटिंग के साथ 350 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। ब्रोकरेज का कहना है कि स्विगी का 68.1 अरब रुपये का नेट रेवेन्यू उसके अनुमान से ज्यादा रहा। फूड डिलीवरी बिजनेस की GOV (ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू) सालाना आधार पर 17.4 प्रतिशत बढ़ी।

हर शेयर पर मिलेगा ₹270 का शानदार डिविडेंड, 4 अगस्त रिकॉर्ड डेट; स्टॉक 3 महीनों में 14% चढ़ा

HSBC और नोमुरा की राय

HSBC ने स्विगी के शेयर के लिए “होल्ड” रेटिंग और 300 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। ब्रोकरेज का कहना है कि भले ही स्विगी की वैल्यूएशन बहुत ज्यादा नहीं है, फिर भी कंपनी को अभी बहुत कुछ साबित करना है और कामकाज में सुधार कंपनी के लिए सबसे जरूरी है। मॉर्गन स्टेनली ने “इक्वलवेट” रेटिंग दी है। टारगेट 322 रुपये सेट किया है।

नोमुरा ने स्विगी के लिए “बाय” रेटिंग दी है और प्राइस टारगेट 435 रुपये प्रति शेयर है। ब्रोकरेज का अनुमान है कि इंस्टामार्ट में कैश लॉस वित्त वर्ष 2027 में भी जारी रहेगा। एडजस्टेड EBITDA लॉस वित्त वर्ष 2027 में 3,100 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2028 में 2,300 करोड़ रुपये रह सकता है। स्विगी इन नुकसानों की भरपाई 14,300 करोड़ रुपये के कैश बैलेंस और फूड डिलीवरी बिजनेस से होने वाली कमाई से कर सकती है।

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Hyundai Motor India Share Price: मुनाफा 35% घटने के बावजूद ब्रोकरेज बुलिश, शेयर 9% तक भागा

हुंडई मोटर इंडिया के शेयर में 31 जुलाई को दिन में 9 प्रतिशत तक की बढ़त दिखी। BSE पर शेयर 2,208.90 रुपये के हाई तक गया। अप्रैल-जून 2026 तिमाही में कंपनी का मुनाफा गिरने और रेवेन्यू कम रहने के बावजूद शेयर चढ़ा है। इसकी वजह है कि शेयर पर ब्रोकरेज अभी भी बुलिश हैं। कंपनी का मार्केट कैप बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है।

जून 2026 तिमाही में हुंडई मोटर इंडिया का शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 35 प्रतिशत घटकर 888.62 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले मुनाफा 1369.23 करोड़ रुपये था। ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 16,334.63 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो जून 2025 तिमाही में 16,412.88 करोड़ रुपये था। कंपनी का कुल खर्च बढ़कर 15,407.35 करोड़ रुपये हो गया, जबकि जून 2025 तिमाही में यह 14,780.47 करोड़ रुपये था।

हुंडई मोटर इंडिया वित्त वर्ष 2026 के लिए 21 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड दे रही है। इसके लिए रिकॉर्ड डेट 5 अगस्त है। इस तारीख तक जिन लोगों के नाम शेयरों के लाभार्थी मालिकों के तौर पर रजिस्टर ऑफ मेंबर्स ऑफ द कंपनी या डिपॉजिटरीज के रिकॉर्ड्स में दर्ज हो चुके होंगे, वे डिविडेंड के हकदार होंगे। इस डिविडेंड पर 26 अगस्त को कंपनी की सालाना आम बैठक में शेयरहोल्डर्स की मंजूरी ली जाएगी। मंजूरी मिलने के बाद पेमेंट किया जाएगा।

Hyundai Motor India शेयर पर ब्रोकरेज की राय

CLSA ने 2,300 रुपये के टारगेट प्राइस के साथ स्टॉक पर ‘आउटपरफॉर्म’ रेटिंग को दोहराया है। कहा है कि हुंडई का EBITDA मार्जिन 9.3 प्रतिशत रहा, जो उम्मीद के मुताबिक था। एडजस्टेड ग्रॉस मार्जिन पिछली तिमाही के मुकाबले 40 बेसिस पॉइंट्स कम रहा। ब्रोकरेज ने कहा कि कीमतों में लगातार बढ़ोतरी, डिस्काउंट में कमी और लागत कम करने के उपायों से कंपनी को कमोडिटी की लागत के दबाव के बावजूद ग्रॉस मार्जिन को मैनेज करने में मदद मिली। कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद कंपनी ने अपने मार्जिन गाइडेंस को दोहराया है।

नोमुरा ने हुंडई मोटर इंडिया के स्टॉक पर ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखी है। टारगेट प्राइस 2,498 रुपये तय किया है। ब्रोकरेज का कहना है कि हुंडई का पहली तिमाही का EBITDA मार्जिन उम्मीद के मुताबिक रहा। उम्मीद है कि जुलाई-सितंबर 2026 में 2 नए मॉडल लॉन्च होने से कंपनी का प्रदर्शन बेहतर होगा। नोमुरा का कहना है कि वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही से कंपनी की ग्रोथ इंडस्ट्री की ग्रोथ से बेहतर रहेगी।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (MOSL) ने भी हुंडई मोटर इंडिया पर ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखी है और टारगेट प्राइस 2,334 रुपये प्रति शेयर तय किया है। ब्रोकरेज का कहना है कि जून तिमाही का शुद्ध मुनाफा उसके अनुमान से अधिक रहा। कमोडिटी की महंगाई और कम वॉल्यूम के कारण EBITDA मार्जिन पर असर पड़ा। ब्रोकरेज को उम्मीद है कि कंपनी का वॉल्यूम FY26-28 के दौरान 9 प्रतिशत CAGR (कंपाउंडेड एनुअल ग्रोथ रेट) और अर्निंग्स 16 प्रतिशत CAGR से बढ़ेगी।

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Kalyan Jewellers में एक म्यूचुअल फंड हाउस बेच सकता है 5 करोड़ शेयर, कीमत फिसली

ज्वेलरी सेक्टर की कंपनी कल्याण ज्वेलर्स इंडिया के शेयरों में 27 जुलाई को गिरावट है। दिन में शेयर पिछले बंद भाव से 1.6 प्रतिशत तक नीचे आया। BSE पर कीमत 563.65 रुपये के लो तक गई। ऐसी खबर है कि एक बड़ा घरेलू म्यूचुअल फंड हाउस ब्लॉक डील के जरिए कल्याण ज्वेलर्स के लगभग 5 करोड़ शेयर बेच सकता है। एनडीटीवी प्रॉफिट की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि शेयर में कम समय में आए तेज उछाल को देखते हुए म्यूचुअल फंड कुछ हिस्सेदारी बेचने पर विचार कर रहा है। इस डील के लिए दो बैंकर नियुक्त किए गए हैं।

शेयर बिक्री करने वाले म्यूचुअल फंड का नाम सामने नहीं आया है। कल्याण ज्वेलर्स में जून 2026 के आखिर तक पब्लिक शेयरहोल्डर्स के पास 37.14 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। इसमें से 15.41 प्रतिशत हिस्सा म्यूचुअल फंड्स के पास था। सुंदरम म्यूचुअल फंड के पास सुंदरम मिड कैप फंड के जरिए 1.33 प्रतिशत, फ्रैंकलिन इंडिया फ्लेक्सी कैप फंड के पास 1.64 प्रतिशत और मोतीलाल ओसवाल मिडकैप फंड के पास 9.17 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।

कल्याण ज्वेलर्स का मार्केट कैप 58500 करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये है। यह BSE 200 इंडेक्स का हिस्सा है। शेयर एक महीने में करीब 50 प्रतिशत मजबूत हो चुका है। 2 सप्ताह में यह लगभग 11 प्रतिशत की बढ़त देख चुका है। कंपनी 4 अगस्त को अपने जून 2026 तिमाही के नतीजे जारी करेगी। जून तिमाही में कंपनी ने 12 कल्याण शोरूम और 5 कैंडेरे स्टोर खोले। 30 जून तक इसके कुल आउटलेट्स की संख्या 524 तक पहुंच गई।

Kalyan Jewellers पर सिटी है बुलिश

जुलाई महीने की शुरुआत में कल्याण ज्वेलर्स के शेयर के लिए ब्रोकरेज सिटीग्रुप ने ‘बाय’ रेटिंग दोहराई थी। टारगेट प्राइस 750 रुपये प्रति शेयर बरकरार रखा था। अप्रैल-जून 2026 तिमाही में कंपनी के बिजनेस पर अपडेट सामने आने के बाद ब्रोकरेज ने अपना व्यू दिया था। तिमाही के दौरान कल्याण ज्वेलर्स का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर लगभग 38 प्रतिशत बढ़ा। इंटरनेशनल ऑपरेशंस से रेवेन्यू में लगभग 35 प्रतिशत की ग्रोथ देखी गई। तिमाही के दौरान इंटरनेशनल मार्केट ने कंसोलिडेटेड रेवेन्यू में लगभग 14 प्रतिशत का योगदान दिया।

सिटी ने स्टॉक पर अपना कंस्ट्रक्टिव लॉन्ग-टर्म व्यू बरकरार रखा है। उसे उम्मीद है कि कंपनी की फ्रेंचाइजी-लेड एक्सपेंशन स्ट्रैटेजी प्रॉफिटेबल ग्रोथ को सपोर्ट करती रहेगी, साथ ही रिटर्न ऑन कैपिटल एंप्लॉइड (RoCE) में भी सुधार करेगी।

Meesho Share Price: मोतीलाल ओसवाल बुलिश, Buy के साथ शुरू किया कवरेज; बुल केस में 81% तक उछाल की जताई उम्मीद

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Meesho Share Price: मोतीलाल ओसवाल बुलिश, Buy के साथ शुरू किया कवरेज; बुल केस में 81% तक उछाल की जताई उम्मीद

ई-कॉमर्स कंपनी मीशो के शेयर पर ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल बुलिश है। ब्रोकरेज ने इस शेयर पर ‘बाय’ रेटिंग के साथ कवरेज शुरू किया है। टारगेट प्राइस 240 रुपये प्रति शेयर रखा है। यह शेयर की पिछली क्लोजिंग से 30 प्रतिशत ज्यादा है। बुल केस में टारगेट प्राइस 335 रुपये प्रति शेयर दिया है। यह पिछली क्लोजिंग से 81 प्रतिशत तक ज्यादा है। ब्रोकरेज का यह व्यू मीशो के जून 2026 तिमाही के नतीजे जारी होने के बाद आया है।

अप्रैल-जून 2026 ​तिमाही के दौरान मीशो का शुद्ध कंसोलिडेटेड घाटा सालाना आधार पर 54 प्रतिशत घटकर 132.83 करोड़ रुपये रह गया। ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 48 प्रतिशत बढ़कर 3,712.8 करोड़ रुपये हो गया। घाटा घटने की वजह ज्यादा बिक्री और ऑर्डर कैंसिलेशन (ऑर्डर रद्द होने) में कमी रही। जून 2026 तिमाही में कंपनी की ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू (GMV) सालाना आधार पर लगभग 26 प्रतिशत बढ़कर 19,054 करोड़ रुपये हो गई। नेट मर्चेंडाइज वैल्यू (NMV) यानि कि डिलीवर किए गए ऑर्डर की वैल्यू साल-दर-साल आधार पर 34 प्रतिशत बढ़कर 11,614 करोड़ रुपये हो गई।

कुल खर्च बढ़कर 3959.24 करोड़ रुपये के रहे, जो जून 2025 तिमाही में 2777.64 करोड़ रुपये के थे। मीशो को उम्मीद है कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही यानि कि जुलाई-सितंबर 2026 में यूजर्स की संख्या और खर्च में ज्यादा बढ़ोतरी दिखेगी, लेकिन NMV की ग्रोथ धीमी रहेगी।

Meesho पर ब्रोकरेज के तर्क

मोतीलाल ओसवाल का कहना है कि वित्त वर्ष 2026-2031 के दौरान मीशो की नेट मर्चेंडाइज वैल्यू (NMV) 27.5% CAGR (कंपाउंडेड एनुअल ग्रोथ रेट) से बढ़ेगी। यह मुख्य रूप से तेजी से बढ़ते ATU (एक्टिव ट्रांजेक्टिंग यूजर्स) और ऑर्डर करने की थोड़ी ज्यादा फ्रीक्वेंसी से प्रेरित होगी। इसके साथ ही, मजबूत ऑपरेटिंग लेवरेज की वजह से वित्त वर्ष 2031 तक Meesho के एडजस्टेड मार्केटप्लेस EBITDA मार्जिन में 760 बेसिस पॉइंट्स का इजाफा दिख सकता है। यह आंकड़ा 4.75% तक पहुंच सकता है।

ज्यादा ऐड मॉनेटाइजेशन और लॉजिस्टिक्स स्प्रेड के नॉर्मलाइजेशन से वित्त वर्ष 2031 तक कॉन्ट्रिब्यूशन मार्जिन में 400 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी हो सकती है और यह 7.5% तक पहुंच सकता है। वहीं, 255 बेसिस पॉइंट्स ऑपरेटिंग लेवरेज से वित्त वर्ष 2031 तक एडजस्टेड EBITDA ₹4,800 करोड़ (3.75% मार्जिन पर) तक पहुंच सकता है।

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Meesho का बिजनेस मॉडल एसेट-लाइट

ब्रोकरेज का कहना है कि Meesho एक मल्टी-साइडेड मार्केटप्लेस चलाती है, जो कंज्यूमर्स, सेलर्स, लॉजिस्टिक्स प्रोवाइडर्स और कंटेंट क्रिएटर्स को जोड़ता है। इससे एक ऐसा सेल्फ-रीइन्फोर्सिंग फ्लाईव्हील बनता है जो प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल को बढ़ावा देता है और इसके कॉस्ट एडवांटेज को बनाए रखता है। कंपनी ने कम लागत वाले लॉजिस्टिक्स, जीरो सेलर कमीशन और पहली बार इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों व सेलर्स के लिए ऑनबोर्डिंग की मुश्किलों को कम करके चीजों को सस्ता और आसान बनाया है।

मोतीलाल ओसवाल का मानना है कि पारंपरिक रिटेलर्स और दूसरे इंटरनेट प्लेटफॉर्म्स के उलट, Meesho का बिजनेस मॉडल असल में एसेट-लाइट है। इसमें फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर या इन्वेंट्री पर बहुत कम पूंजीगत खर्च (CAPEX) की जरूरत होती है। कंपनी नेगेटिव वर्किंग कैपिटल पर भी काम करती है, जिससे बड़ी फ्लोट इनकम होती है और काफी फ्री कैश फ्लो जेनरेट होता है। मीशो के स्टॉक को कवर करने वाले 14 एनालिस्ट्स में से 8 ने “बाय” रेटिंग दी है। 3 ने होल्ड और 3 ने सेल रेटिंग दी है।

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टॉप 10 कंपनियों में से 9 का M-Cap ₹2.74 लाख करोड़ घटा, HDFC Bank को सबसे ज्यादा नुकसान

बीते सप्ताह सेंसेक्स की टॉप 10 मोस्ट वैल्यूएबल कंपनियों में से 9 के बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) में कुल मिलाकर ₹2.74 लाख करोड़ की गिरावट आई। सबसे ज्यादा नुकसान HDFC Bank को हुआ। पिछले सप्ताह सेंसेक्स 2,091.68 अंक या 2.67 प्रतिशत टूट गया। वहीं निफ्टी 566.85 अंक या 2.32 प्रतिशत के नुकसान में रहा। टॉप 10 कंपनियों में केवल हिंदुस्तान यूनिलीवर के मार्केट कैप में बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं रिलायंस इंडस्ट्रीज, भारती एयरटेल, HDFC Bank, ICICI Bank, भारतीय स्टेट बैंक, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), बजाज फाइनेंस, भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) और लार्सन एंड टुब्रो (L&T) का मार्केट कैप घट गया।

बीते सप्ताह HDFC Bank का मार्केट कैप ₹1,18,383.91 करोड़ घटकर ₹11,43,985.90 करोड़ रह गया। रिलायंस इंडस्ट्रीज का मार्केट कैप ₹65,429.82 करोड़ घटकर ₹17,29,661.44 करोड़ रहा। इसी तरह भारतीय स्टेट बैंक (SBI) का मार्केट कैप ₹26,814.94 करोड़ घटकर ₹9,36,953.84 करोड़, बजाज फाइनेंस का ₹26,802.74 करोड़ घटकर ₹6,30,471.54 करोड़ और LIC का मार्केट कैप ₹15,116.74 करोड़ घटकर ₹5,33,007.56 करोड़ हो गया।

ICICI Bank का मार्केट कैप ₹6,223.84 करोड़ की गिरावट के साथ ₹10,28,217.93 करोड़, भारती एयरटेल का ₹6,021.64 करोड़ घटकर ₹11,85,046.13 करोड़, TCS का ₹5,191.95 करोड़ घटकर ₹8,15,480.75 करोड़ और लार्सन एंड टुब्रो (L&T) का मार्केट कैप ₹4,092.79 करोड़ की गिरावट के साथ ₹5,20,747.89 करोड़ पर आ गया।

हिंदुस्तान यूनिलीवर को कितना हुआ फायदा

इस रुख के उलट हिंदुस्तान यूनिलीवर के मार्केट कैप में बीते सप्ताह ₹152.73 करोड़ की बढ़ोतरी हुई और यह ₹5,03,928.59 करोड़ पर पहुंच गया। सेंसेक्स की टॉप 10 कंपनियों में रिलायंस इंडस्ट्रीज बाजार पूंजीकरण के लिहाज से देश की सबसे मूल्यवान कंपनी बनी रही। इसके बाद क्रमश: भारती एयरटेल, HDFC Bank, ICICI Bank, भारतीय स्टेट बैंक, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), बजाज फाइनेंस, भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC), लार्सन एंड टुब्रो और हिंदुस्तान यूनिलीवर का स्थान रहा।

Cyient Stock Outlook: तुरंत कर लें एग्जिट, 12% तक टूट सकता है भाव; मोतीलाल ओसवाल ने दी ‘सेल’ रेटिंग

नए सप्ताह में 27 जुलाई को BSE SME पर Gulf Lloyds के शेयर लिस्ट होने की उम्मीद है। 28 जुलाई को NSE SME पर Metalic Technoforge की लिस्टिंग होने वाली है। 29 जुलाई को BSE SME पर Shree Balaji Mala के शेयरों की लिस्टिंग हो सकती है। मेनबोर्ड सेगमेंट में 30 जुलाई को NSE और BSE पर Lohia Corp, Indo-MIM और Xtranet Technologies की लिस्टिंग की उम्मीद है। 31 जुलाई को BSE SME पर Silverstorm Parks & Resorts के शेयर लिस्ट हो सकते हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Cyient Stock Outlook: तुरंत कर लें एग्जिट, 12% तक टूट सकता है भाव; मोतीलाल ओसवाल ने दी ‘सेल’ रेटिंग

IT कंपनी साइएंट लिमिटेड के शेयरों में आगे 12 प्रतिशत तक की गिरावट देखने को मिल सकती है। ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल इस शेयर पर बेयरिश है। स्टॉक के लिए ‘सेल’ रेटिंग दी है। टारगेट प्राइस 740 रुपये प्रति शेयर रखा है। यह BSE पर शेयर के मौजूदा भाव 840 रुपये से करीब 12 प्रतिशत कम है। कंपनी के तिमाही नतीजे जारी होने के बाद ब्रोकरेज का रुख सामने आया है। साइएंट का अप्रैल-जून 2026 तिमाही में शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा 104.1 करोड़ रुपये रहा। यह एक साल पहले से 32 प्रतिशत कम है।

कुल इनकम सालाना आधार पर करीब 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 2082.6 करोड़ रुपये हो गई। खर्च 1910.3 करोड़ रुपये के रहे, जो जून 2025 तिमाही में 1565.4 करोड़ रुपये के थे। साइएंट का शेयर BSE 500 इंडेक्स का हिस्सा है।

Cyient पर ब्रोकरेज के तर्क

ब्रोकरेज ने अपने रिसर्च नोट में कहा कि Cyient के DET (डिजिटल, इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी) बिजनेस ने जून 2026 तिमाही में 16.3 करोड़ डॉलर का रेवेन्यू दर्ज किया। यह कॉन्स्टेंट करेंसी टर्म में तिमाही-दर-तिमाही आधार पर 0.5 प्रतिशत कम है। हालांकि यह ब्रोकरेज के अनुमान से बेहतर रहा। ट्रांसपोर्टेशन और मोबिलिटी में तिमाही दर तिमाही कॉन्स्टेंट करेंसी बेसिस पर 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। नेटवर्क और इंफ्रास्ट्रक्चर में कोई बदलाव नहीं हुआ और स्ट्रैटेजिक यूनिट्स में 8.2 प्रतिशत की गिरावट आई। DET बिजनेस का एडजस्टेड EBIT मार्जिन 13.2 प्रतिशत रहा, जो 12.5 प्रतिशत ​​के अनुमान से ज्यादा है।

DET का एडजस्टेड शुद्ध मुनाफा तिमाही-दर-तिमाही 2.1 प्रतिशत बढ़ा, लेकिन सालाना आधार पर 13.4 प्रतिशत घटा। आंकड़ा 141.2 करोड़ रुपये रहा, जबकि अनुमान 149.8 करोड़ रुपये का था। मोतीलाल ओसवाल को उम्मीद है कि साल-दर-साल DET बिजनेस का रेवेन्यू 6.4 प्रतिशत, EBIT 12.9 प्रतिशत और /एडजस्टेड शुद्ध मुनाफा 10.8 प्रतिशत बढ़ेगा।

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