8th Pay Commission extends deadline: 8वें वेतन आयोग ने अब 31 जुलाई की आखिरी डेडलाइन फिक्स की, सैलरी और भत्तों पर आया लेटेस्ट अपडेट!

केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की सैलरी, भत्तों और पेंशन को लेकर आठवें केंद्रीय वेतन आयोग से एक बड़ा अपडेट सामने आया है। वेतन आयोग ने विभिन्न श्रेणियों के सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, भत्तों और पेंशन ढांचे पर केंद्र शासित प्रदेशों, केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों से सिफारिशें और जरूरी डेटा लेने की आखिरी तारीख को एक बार फिर आगे बढ़ा दिया है। अब इसके लिए 31 जुलाई की डेडलाइन तय की गई है।

15 जून से बढ़ाकर 31 जुलाई की गई आखिरी तारीख

इससे पहले आठवें वेतन आयोग ने अपने आधिकारिक ऑनलाइन वेब पोर्टल के माध्यम से सुझाव और मेमोरेंडम जमा करने की अंतिम तिथि 15 जून निर्धारित की थी। वेतन आयोग द्वारा जारी किए गए एक सर्कुलर के मुताबिक चूंकि कई मंत्रालय, विभाग और केंद्र शासित प्रदेश तय समय सीमा के भीतर आवश्यक डेटा जमा करने का काम पूरा नहीं कर पाए थे, इसलिए यह निर्णय लिया गया है कि डेटा कलेक्शन पोर्टल के माध्यम से डेटा जमा करने की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 31 जुलाई, 2026 कर दिया जाए।

सिर्फ ऑनलाइन स्वीकार होंगे मेमोरेंडम

आयोग ने स्पष्ट किया है कि सभी मंत्रालयों और विभागों को अपने मेमोरेंडम विशेष रूप से आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ही जमा करने होंगे। आयोग ने साफ कहा है कि किसी भी तरह की हार्ड कॉपी स्वीकार नहीं की जाएगी। फिजिकल सबमिशन मान्य नहीं होंगे। ईमेल के जरिए भेजे गए सुझावों पर भी आयोग विचार नहीं कर सकता है।

अगले 10 वर्षों के लिए तैयार की जा रही हैं सिफारिशें

समय सीमा बढ़ाए जाने पर ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉइज फेडरेशन के अध्यक्ष मनजीत सिंह पटेल का भी रिएक्शन सामने आया है। उन्होंने कहा कि जब पूरी स्पीड से काम चल रहा होता है तो आयोग के लिए भी समय सीमा को बार-बार आगे बढ़ाना आसान फैसला नहीं होता। उन्होंने कहा कि आठवें वेतन आयोग को देशभर के केंद्रीय कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और दूसरे हितधारकों की असल जरूरतों का विश्लेषण करने के लिए मंत्रालयों, विभागों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय स्वायत्त निकायों से संबंधित डेटा की जरूरत होती है। इसी डेटा के आधार पर आयोग अगले 10 वर्षों के लिए निष्पक्ष, व्यावहारिक और दूरदर्शी सिफारिशें पेश की जा सकेंगी।

लखनऊ, भुवनेश्वर और कोलकाता का दौरा करेगा वेतन आयोग

इस बीच राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के चल रहे परामर्श दौरों के क्रम में आठवें वेतन आयोग ने अपने अगले दौर के दौरों का भी ऐलान कर दिया है। आयोग लखनऊ, भुवनेश्वर और कोलकाता के दौरे करेगा। भुवनेश्वपर में बैठक 6-7 जुलाई और कोलकाता में 9-10 जुलाई को तय की गई है।

आयोग से मिलने और अपॉइंटमेंट लेने के लिए केंद्रीय सरकारी संगठनों, संस्थानों, कर्मचारी संघों और यूनियनों को आयोग की वेबसाइट के माध्यम से एक ऑनलाइन अनुरोध जमा करना होगा।

इन राज्यों में पहले ही हो चुका है परामर्श

आठवां वेतन आयोग लगातार अलग अलग क्षेत्रों के हितधारकों के साथ बैठकें कर रहा है। हाल ही में आयोग ने उत्तर प्रदेश, दिल्ली, लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हैदराबाद (तेलंगाना) और महाराष्ट्र में हितधारकों के साथ चर्चा की है। इससे पहले, आयोग ने 26 अप्रैल को उत्तराखंड के कर्मचारी संघों के साथ अपनी पहली बातचीत की थी।

कल का मौसम 4 जुलाई: राजस्थान-MP से यूपी-बिहार, बंगाल तक मौसम का रौद्र रूप, IMD ने इन 25 से ज्यादा जगहों पर भारी बारिश का अलर्ट दिया

देश भर में दक्षिण-पश्चिम मानसून अपने पूरे शबाब पर आ चुका है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा बुलेटिन के मुताबिक मानसून की उत्तरी सीमा इस समय जामनगर, उदयपुर, अजमेर, झुंझुनू, हिसार और बठिंडा से होकर गुजर रही है। उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे सटे उत्तरी ओडिशा व पश्चिम बंगाल के तटों पर एक कम दबाव का क्षेत्र सक्रिय है। इसके साथ ही समुद्र तल पर दक्षिण गुजरात से कर्नाटक तट तक ऑफ-शोर ट्रफ और मध्य क्षोभमंडल में पश्चिमी विक्षोभ बना हुआ है। इन मजबूत मौसमी प्रणालियों के असर की वजह से मौसम विभाग ने 4 जुलाई को देश के 25 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भारी से अत्यंत भारी बारिश और गरज-चमक के साथ तेज अंधड़ का ऑरेंज और रेड अलर्ट जारी किया है।

5 राज्यों में अत्यंत भारी बारिश का रेड अलर्ट

मौसम विभाग के मुताबिक 4 जुलाई को देश के पांच प्रमुख राज्यों में मानसून का सबसे रौद्र रूप देखने को मिल सकता है। यहां छिटपुट स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश होने की प्रबल आशंका है-

  • गुजरात (गुजरात क्षेत्र, सौराष्ट्र और कच्छ)
  • कोंकण और गोवा
  • मध्य महाराष्ट्र
  • ओडिशा
  • पश्चिमी मध्य प्रदेश

इन राज्यों में होगी बहुत भारी बारिश

आईएमडी के पूर्वानुमान के मुताबिक 4 जुलाई को कुछ राज्यों में मूसलाधार यानी बहुत भारी बारिश दर्ज की जाएगी:

  • पूर्वी राजस्थान
  • पूर्वी मध्य प्रदेश
  • विदर्भ
  • तेलंगाना
  • तटीय कर्नाटक

उत्तर-पश्चिम भारत: यूपी-राजस्थान में आंधी और बिजली का अलर्ट

उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी और पहाड़ी इलाकों में कल मौसम का मिजाज काफी बदला हुआ रहेगा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 4 जुलाई को अलग-अलग स्थानों पर गरज-चमक और बिजली गिरने की चेतावनी दी गई है। 4 से 7 जुलाई के दौरान यहां छिटपुट से लेकर बिखरी हुई बारिश होने का अनुमान है। पूर्वी राजस्थान में 4 जुलाई को बहुत भारी बारिश होगी जबकि पश्चिमी राजस्थान में भारी बारिश का अलर्ट है। इसके साथ ही पूर्वी राजस्थान में 40-50 किमी प्रति घंटे और पश्चिमी राजस्थान में 4-9 जुलाई के दौरान 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से धूलभरी हवाएं और अंधड़ चलने की आशंका है।

जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और पंजाब-हरियाणा में 4 जुलाई को गरज-चमक के साथ 40-50 किमी प्रति घंटे (झोंके 60 किमी प्रति घंटे तक) की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और बिजली गिरने का अलर्ट है। पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में 3-5 जुलाई के दौरान छिटपुट से बिखरी हुई बारिश होगी। हिमाचल प्रदेश में 4 जुलाई को छिटपुट बारिश होगी जबकि उत्तराखंड में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश के साथ बिजली गिरने की चेतावनी जारी की गई है।

मध्य और पूर्वी भारत: मध्य प्रदेश-बिहार में तेज अंधड़ की चेतावनी

मध्य प्रदेश के दोनों हिस्सों (पूर्वी व पश्चिमी) और विदर्भ में 4 जुलाई को भारी से अत्यंत भारी बारिश के साथ ही 30-40 किमी प्रति घंटे (झोंके 50 किमी प्रति घंटे तक) की रफ्तार से तेज आंधी चलने और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका है। छत्तीसगढ़ में 4 जुलाई को छिटपुट स्थानों पर भारी बारिश का दौर जारी रहेगा। बिहार में 3-9 जुलाई तक छिटपुट बारिश का दौर रहेगा लेकिन 4 जुलाई को राज्य में 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और बिजली कड़कने का अलर्ट है। झारखंड में 4 जुलाई को मध्यम से तीव्र बिजली गिरने की गतिविधि और तेज हवाएं चलने का अनुमान है।

गंगीय पश्चिम बंगाल में 4 जुलाई को भारी बारिश होगी। इसके साथ ही उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम और गंगीय पश्चिम बंगाल में 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से अंधड़ चलने की चेतावनी है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में भारी बारिश के साथ 30-40 किमी प्रति घंटे की हवाएं चलेंगी।

उत्तर-पूर्व भारत: असम-मेघालय सहित सातों राज्यों में भारी वर्षा

उत्तर-पूर्व के राज्यों में मानसूनी हवाएं लगातार नमी ला रही हैं। असम और मेघालय में 4 जुलाई को भारी बारिश का अनुमान है। साथ ही 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी और बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया गया है। नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा इन चारों राज्यों में 4 जुलाई को अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश के साथ ही गरज-चमक और बिजली गिरने की प्रबल संभावना है। अरुणाचल प्रदेश में 4 जुलाई को छिटपुट स्थानों पर बिजली गिरने और आंधी-तूफान की चेतावनी दी गई है।

दक्षिण भारत: कर्नाटक में मजबूत सतही हवाएं और मूसलाधार बारिश

तटीय कर्नाटक में बहुत भारी बारिश और आंतरिक कर्नाटक (उत्तरी व दक्षिणी) में भारी बारिश का अलर्ट है। इसके अलावा पूरे कर्नाटक में 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से धूलभरी आंधी चलेगी और तटीय व आंतरिक हिस्सों में तेज सतही हवाएं चलने की चेतावनी है। केरल, माहे और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल में 4 जुलाई को भारी बारिश होगी। तमिलनाडु में 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं भी चल सकती हैं। तटीय आंध्र प्रदेश में भारी बारिश होगी। रायलसीमा और लक्षद्वीप में 4 जुलाई को तेज सतही हवाएं चलेंगी जबकि तटीय आंध्र प्रदेश और यनम में 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से अंधड़ चलने का अलर्ट है।

समंदर में जाने वाले मछुआरों के लिए रेड वॉर्निंग

खराब मौसम और तूफानी हवाओं को देखते हुए मौसम विभाग ने मछुआरों को समंदर में न उतरने की सख्त हिदायत दी है-

अरब सागर: सोमालिया तट, ओमान तट, दक्षिण-पश्चिम अरब सागर और मध्य व उत्तरी अरब सागर में 45-55 किमी प्रति घंटे (झोंके 65 किमी प्रति घंटे तक) की रफ्तार से डरावनी हवाएं चलेंगी। इसके अलावा गुजरात, कोंकण, गोवा, कर्नाटक और केरल के तटों तथा लक्षद्वीप क्षेत्र में 40-50 किमी प्रति घंटे (झोंके 60 किमी प्रति घंटे तक) की रफ्तार से तूफानी मौसम रहेगा।

बंगाल की खाड़ी: मध्य और उससे सटे दक्षिणी बंगाल की खाड़ी, दक्षिण श्रीलंका और दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में 45-55 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी। वहीं गंगीय पश्चिम बंगाल, ओडिशा, उत्तरी और दक्षिणी आंध्र प्रदेश के तटों, उत्तरी व मध्य बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर में 40-50 किमी प्रति घंटे (झोंके 60 किमी प्रति घंटे तक) की रफ्तार से ऊंची लहरें और तूफानी मौसम रहने का अनुमान है।

Ketan Agarwal Murder Case: पुणे पुलिस को शक! केतन मर्डर केस में आ सकता है ‘सोनम रघुवंशी जैसा मोड़’

Ketan Agarwal Murder Case: मेघालय हनीमून मर्डर केस में सोनम रघुवंशी को जमानत दिलाने वाली कानूनी खामियों से सबक लेते हुए, पुणे ग्रामीण पुलिस अब पुणे के बिजनेसमैन केतन अग्रवाल की लोणावला (लोहगढ़ किले) में हुई हत्या के मामले में एक “पूरी तरह मजबूत और बिना गलती वाली” चार्जशीट तैयार करने में जुटी है। यह जानकारी महाराष्ट्र पुलिस के शीर्ष सूत्रों ने न्यूज18 को दी है।

जांच अधिकारी केतन की मंगेतर और मुख्य आरोपी सिया गोयल का पॉलीग्राफ (झूठ पकड़ने वाला) टेस्ट कराने पर जोर दे रहे हैं। हालांकि, यह टेस्ट कोर्ट में सीधे सबूत के तौर पर मान्य नहीं होता, लेकिन पुलिस का मानना है कि इससे कुछ अहम सुराग मिल सकते हैं, जिन्हें बाद में डिजिटल या फॉरेंसिक सबूतों से जांचकर पक्का किया जा सकता है।

यह सावधानी हाल ही में हुए सोनम रघुवंशी मामले को देखते हुए बरती जा रही है, जिसमें गिरफ्तारी की प्रक्रिया में हुई तकनीकी खामियों के कारण आरोपी को जमानत मिल गई थी और बाद में हाई कोर्ट ने भी उस जमानत को बरकरार रखा था। पुलिस सूत्रों का कहना है कि वे यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं कि सिया के खिलाफ उनके मुकदमे को किसी भी तरह की ऐसी तकनीकी चूक से कमजोर न होने दिया जाए।

पुलिस पॉलीग्राफ टेस्ट क्यों करवाना चाहती है?

भारतीय कानून के तहत, पॉलीग्राफ टेस्ट के नतीजे अदालत में मुख्य सबूत के तौर पर स्वीकार्य नहीं होते हैं। हालांकि, जांचकर्ताओं का कहना है कि यह टेस्ट जांच के दौरान नई जानकारियां या सुराग हासिल करने के लिए एक टूल के तौर पर काम आ सकता है।

महाराष्ट्र पुलिस के सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों को उम्मीद है कि पूछताछ से ऐसी जानकारी मिल सकती है जो पहले पता नहीं थी। उदाहरण के लिए, अगर सिया अनजाने में यह बता देती है कि उसने लोहागढ़ किले की चट्टान की ऊंचाई के बारे में जानकारी जुटाई थी, या ऐसी किसी डिजिटल गतिविधि का जिक्र करती है जिसके बारे में जांचकर्ताओं को पहले पता नहीं था, तो पुलिस उस डिजिटल सबूत को स्वतंत्र रूप से हासिल कर सकती है।

पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान ब्राउजर हिस्ट्री, लोकेशन डेटा या डिलीट की गई सर्च जैसी जानकारी, अगर सही कानूनी प्रक्रियाओं से हासिल की जाए, तो कोर्ट में सबूत के तौर पर मानी जा सकती है, भले ही पॉलीग्राफ टेस्ट के जवाब खुद सबूत के तौर पर मान्य न हों।

पुलिस के एक सीनियर अधिकारी ने कहा, “मकसद पॉलीग्राफ रिपोर्ट को सबूत के तौर पर इस्तेमाल करना नहीं है। इसका मकसद छिपे हुए तथ्यों का पता लगाना है, जिनकी बाद में कानूनी रूप से मान्य डिजिटल और फोरेंसिक सबूतों से पुष्टि की जा सके।”

प्रत्यक्ष सबूत नहीं, केवल परिस्थिति पर टिका पूरा मामला

जांच करने वाले मानते हैं कि उन्हें सबूत जुटाने में बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसा कोई चश्मदीद गवाह नहीं है जिसने केतन को चट्टान से धक्का देते हुए देखा हो। न ही इस कथित घटना का कोई CCTV फुटेज मौजूद है।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, उपलब्ध CCTV फुटेज में सह-आरोपी और सिया के प्रेमी चेतन चौधरी को हुडी पहने हुए घटना वाली जगह के पास ही देखा गया है, लेकिन इससे हत्या साबित नहीं होती।

पुलिस ने डमी का इस्तेमाल करके कथित अपराध वाली जगह का सीन भी दोबारा बनाया है, लेकिन अधिकारी निजी तौर पर मानते हैं कि ऐसे प्रदर्शनों का सबूत के तौर पर बहुत कम महत्व होता है। एक सूत्र ने कहा, “डमी किस तरह गिरती है, यह उसके वजन के बंटवारे, कोण और गति पर निर्भर करता है। इससे वैज्ञानिक रूप से यह साबित नहीं किया जा सकता कि पीड़ित को जान-बूझकर धक्का दिया गया था या वह गलती से फिसल गया था।”

इन्हीं सब वजह से, जांचकर्ता इस मामले को पूरी तरह से परिस्थितिजन्य सबूतों पर आधारित मानते हैं, जिसमें अपराध साबित करने के लिए हर सबूत का आपस में सही ढंग से जुड़ना जरूरी है ताकि कोई शक न रहे।

अभियोजन पक्ष मकसद और डिजिटल सबूतों पर भरोसा कर रहा है

जांचकर्ताओं के मुताबिक, प्रॉसिक्यूशन की मुख्य थ्योरी यह है कि सिया और चेतन ने केतन को रास्ते से हटाने की साजिश रची थी, क्योंकि सिया कथित तौर पर उससे शादी नहीं करना चाहती थी।

इसलिए, चार्जशीट दाखिल करने से पहले पुलिस डिजिटल, फोरेंसिक और हालात से जुड़े सबूत इकट्ठा करने पर ध्यान दे रही है, जो इस कथित साजिश को पुख्ता कर सकें।

जांचकर्ता डिजिटल सर्च हिस्ट्री, मोबाइल फोन डेटा और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की भी जांच कर रहे हैं, जिनसे साजिश या पहले से योजना बनाने की बात साबित हो सके। सूत्रों का कहना है कि ऐसे डिजिटल सबूत हासिल करना, जिनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि की जा सके, जांच की सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गई है।

‘एक कमजोर कड़ी पूरे केस को गिरा सकती है’

पुलिस सूत्रों का मानना ​​है कि केस का नतीजा काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या वे घटनाओं की एक अटूट कड़ी बना पाते हैं या नहीं।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “अगर बचाव पक्ष उस कड़ी की एक भी अहम कड़ी को तोड़ने में कामयाब हो जाता है, तो अभियोजन पक्ष का केस काफी कमजोर पड़ सकता है।” उन्होंने ऐसे हाई-प्रोफाइल मामलों का जिक्र किया जिनमें सबूतों की कमी के कारण कोर्ट में मुश्किलें आईं।

यही एक वजह है कि जांच करने वाले अधिकारी फाइनल चार्जशीट दाखिल करने से पहले बहुत सावधानी बरत रहे हैं।

सोनम रघुवंशी का मामला एक सबक क्यों बन गया है?

पुलिस सूत्रों के अनुसार, हाल ही का सोनम रघुवंशी मामला-जिसमें उन पर अपने पति राजा रघुवंशी की हत्या का आरोप है-अब पुलिस के लिए एक चेतावनी बन गया है। यह केस भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत जांच प्रक्रिया के कड़ाई से पालन करने के महत्व को और पुख्ता करता है।

सोनम के मामले में, कोर्ट में प्रक्रिया से जुड़ी कमियां सामने आने के बाद अभियोजन पक्ष को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। जमानत के आदेश के मुताबिक, पुलिस आरोपी को हिरासत में लेते समय गिरफ्तारी के असल कारणों के बारे में साफ तौर पर नहीं बता पाई। गिरफ्तारी मेमो और उससे जुड़े दस्तावेजों में BNS की धारा 403(1) का जिक्र किया गया था, जो संपत्ति के बेईमानी से गबन से जुड़ी है, जबकि हत्या के मामले में उसकी जांच धारा 103(1) के तहत हो रही थी।

कोर्ट ने माना कि ऐसी गलतियों की वजह से आरोपी के संवैधानिक अधिकारों पर असर पड़ा, जिससे उसे शुरुआती जांच चरण में अपना बचाव ठीक से करने का मौका नहीं मिला। इसी आधार पर कोर्ट ने उसे जमानत दे दी, जिसे बाद में हाई कोर्ट ने भी बरकरार रखा।

पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह मामला इस बात की याद दिलाता है कि मजबूत जनमत या मीडिया की कड़ी नजर भी अदालत में हुई प्रक्रियात्मक गलतियों की भरपाई नहीं कर सकती। महाराष्ट्र पुलिस के एक वरिष्ठ सूत्र ने News18 को बताया, “अदालतें सबूतों और कानूनी वैधता के आधार पर मामले तय करती हैं। यहां तक ​​कि क्लर्क की कोई छोटी सी गलती या तय कानूनी प्रक्रिया का पालन न करना भी बचाव पक्ष के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है।”

चूंकि कोई चश्मदीद गवाह या सीधा वीडियो सबूत नहीं है, इसलिए पुणे ग्रामीण पुलिस अब इस बात पर ध्यान दे रही है कि प्रक्रिया का हर कदम कानूनी रूप से सही हो। साथ ही, वे डिजिटल और फोरेंसिक सबूतों को भी मजबूत कर रहे हैं, जिनके बारे में उनका मानना ​​है कि ये सिया के खिलाफ उनके मामले का मुख्य आधार बनेंगे।

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बुलेट ट्रेन को लेकर भारत-जापान की बड़ी डील! 2027 की टाइमलाइन और 7000 किमी नेटवर्क पर काम अब दौड़ेगा

भारत में बुलेट ट्रेन परियोजना को लेकर एक बहुत बड़ा अपडेट सामने आया है। मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर कोलैबरेशन को बड़ा पुश देते हुए जापान ने मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (MAHSR) परियोजना के प्राथमिकता वाले सेक्शन पर साल 2027 तक कमर्शियल ऑपरेशन शुरू करने के भारत के लक्ष्य को पूरा करने के लिए हर संभव सहयोग देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापानी पीएम साने ताकाइची के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद विदेश मंत्रालय ने इसे लेकर जॉइंट स्टेटमेंट जारी किया है। इसके मुताबिक यह फ्लैगशिप बुलेट ट्रेन परियोजना दोनों नेताओं के बीच एक व्यापक संयुक्त समझौते का मुख्य आधार है। दोनों प्रधानमंत्रियों ने इस नेटवर्क में E10 ट्रेनों को शामिल करने के मील के पत्थर जैसे लक्ष्य को भी स्वीकार किया।

7000 किलोमीटर के नेशनल नेटवर्क के लिए पीएम मोदी का न्यौता

भारत में बुलेट ट्रेन नेटवर्क के भविष्य के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापानी कंपनियों को भारत के भावी हाई-स्पीड कॉरिडोर में भागीदारी के अवसर तलाशने के लिए स्पष्ट रूप से आमंत्रित किया है। इसका उद्देश्य 7000 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के भारत के व्यापक विज़न को हकीकत में बदलना है। इस ट्रांजिट अलाइनमेंट को आगे बढ़ाने के लिए दोनों देशों के बीच नेक्स्ट-जेनरेशन मोबिलिटी पार्टनरशिप पर एक एमओयू साइन किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य जापान की हाइटेक मोबिलिटी तकनीकों को भारत की बाजार क्षमता और मानव संसाधनों के साथ जोड़ना है।

शिंकेन्सन तकनीक से बदल जाएगी भारतीय रेलवे की तस्वीर

मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण के प्रयासों में एक बड़ा मील का पत्थर है। देश के पहले हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के रूप में यह इंटर सिटी मोबिलिटी को पूरी तरह से बदलने और घरेलू रेलवे क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में तेजी से पूरी की जा रही है। यह पूरा कॉरिडोर जापान की प्रसिद्ध शिंकेन्सन तकनीक और परिचालन मानकों का उपयोग करके डेवलप कियाजा रहा है। इसमें ट्रैक्शन, इलेक्ट्रिफिकेशन, ट्रैक इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑपरेशन्स के लिए हाइटेक टेक्नोलॉजी को शामिल किया गया है।

भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र का रणनीतिक विकास

रेलवे के बुनियादी ढांचे से आगे बढ़कर दोनों नेताओं ने ऐक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत एक लचीले भारत-प्रशांत क्षेत्र के निर्माण के लिए भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र के रणनीतिक महत्व पर विशेष जोर दिया है। जापान ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में सड़क नेटवर्क, पुलों और आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए मजबूत समर्थन का संकल्प लिया। दोनों देशों ने इस क्षेत्र को बंगाल की खाड़ी और बिम्सटेक भागीदारों से जोड़ने वाली औद्योगिक मूल्य श्रृंखलाओं को विकसित करने की भी प्रतिबद्धता जताई।

इन 4 बड़े प्रोजेक्ट्स पर भी हो रही है तेज प्रगति

दोनों देशों के बीच सामाजिक-आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए जापानी विकास सहायता से जुड़े चार अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स पर भी लगातार प्रगति हो रही है:

  • मुंबई मेट्रो लाइन 11
  • बेंगलुरु मेट्रो फेज 3
  • महाराष्ट्र में स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा का बुनियादी ढांचा
  • पंजाब में सस्टेनेबल हॉर्टिकल्चर
  • पर्यटन, संस्कृति और जापानी भाषा को बढ़ावा

इन आर्थिक और ढांचागत समझौतों को मजबूती देने के लिए दोनों देश लोगों के बीच आपसी संपर्क और प्रतिभाओं के आदान-प्रदान को बढ़ा रहे हैं। दोनों प्रधानमंत्रियों ने इस बात का स्वागत किया कि साल 2025 में दोनों देशों के बीच आने-जाने वाले पर्यटकों की संख्या 540000 को पार कर गई है। उन्होंने द्विपक्षीय पर्यटन को बढ़ावा देने और कांसुलर मामलों पर बातचीत का विस्तार करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

भारत में निहंगो पार्टनर्स कार्यक्रम के माध्यम से जापानी भाषा की शिक्षा को बढ़ावा देने पर सहमति बनी। साथ ही युवाओं के बीच सांस्कृतिक संबंधों को गहरा करने में एनिमे, मंगा, गेमिंग और फिल्मों जैसे रचनात्मक उद्योगों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला गया।

भारत के राज्यों और जापानी प्रांतों के बीच दोस्ती का नया नेटवर्क

इस रिश्ते को जमीनी स्तर पर और ठोस बनाने के लिए सब-नेशनल डिप्लोमेसी का भरपूर इस्तेमाल किया जा रहा है। दोनों प्रधानमंत्रियों ने स्थानीय आर्थिक नेटवर्क बनाने में भारतीय राज्यों और जापानी प्रान्तों और नगर पालिकाओं द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार किया। इसी कड़ी में दोनों देशों के बीच इंडिया-जापान गवर्नर्स नेटवर्क फॉर फ्रेंडशिप एंड एक्सचेंज की स्थापना का स्वागत किया गया। वर्तमान में इन क्षेत्रीय जोड़ियों के बीच उच्च स्तरीय सहयोग सक्रिय है-

  • उत्तर प्रदेश और यामानाशी प्रान्त
  • आंध्र प्रदेश और टोयामा प्रान्त
  • गुजरात और शिज़ुओका प्रान्त
  • अहमदाबाद और हमामात्सू शहर
  • महाराष्ट्र और वाकायामा प्रान्त
  • केरल और सैन’इन क्षेत्र
  • तमिलनाडु और एहिमे प्रान्त
  • दिल्ली और फुकुओका प्रान्त
  • तेलंगाना और किताक्युशु शहर

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भारत की बेहतरीन मॉनसून सफ़ारी, जहां बारिश में भी खत्म नहीं होता वाइल्डलाइफ़ सीज़न और भी बन जाता है रोमांचक!

भारत में मॉनसून का मौसम केवल हरियाली और ठंडी फुहारों का ही नहीं, बल्कि वन्यजीवन को उसके सबसे जीवंत और प्राकृतिक रूप में देखने का भी अवसर लेकर आता है। बारिश के साथ जंगल नई ऊर्जा से भर उठते हैं, नदियां और झरने लबालब हो जाते हैं तथा वनस्पतियां अपने पूरे सौंदर्य के साथ खिल उठती हैं। कुछ नेशनल पार्क इस मौसम में संरक्षण कार्यों के कारण बंद रहते हैं, लेकिन कई ऐसे स्थान भी हैं जहां मॉनसून सफ़ारी नेचर को बेहद करीब से महसूस करने का अनूठा एक्सपीरियंस देती है। आइए जानते हैं भारत के ऐसे ही कुछ शानदार मॉनसून सफ़ारी स्थलों के बारे में:

पश्चिम बंगाल में सुंदरबन

How to Plan a Sundarban Tour | Beginner's Travel Guide by Anahita

सुंदरबन नेशनल पार्क दुनिया का सबसे बड़ा मैंग्रोव वन है और यह गंगा, ब्रह्मपुत्र तथा मेघना नदियों के विशाल डेल्टा क्षेत्र में फैला हुआ है। मॉनसून के दौरान यहां की नदियां, जलमार्ग और घने मैंग्रोव जंगल एक अनोखा प्राकृतिक दृश्य प्रस्तुत करते हैं। यहां सफ़ारी जीप से नहीं बल्कि नाव के माध्यम से की जाती है, जो इसे भारत के अन्य राष्ट्रीय उद्यानों से अलग बनाती है। यह क्षेत्र Royal Bengal Tiger, Saltwater Crocodile, Fishing Cat, Water Monitor Lizard और Irrawaddy Dolphin सहित अनेक दुर्लभ जीवों का प्राकृतिक आवास है। पक्षी प्रेमियों और वन्यजीव फोटोग्राफरों के लिए भी यह एक शानदार डेस्टिनेशन माना जाता है।

उत्तराखंड का वैली ऑफ़ फ्लावर्स नेशनल पार्क

फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान: उत्तराखंड में यूनेस्को की धरोहर का एक अनमोल रत्न – रहस्यमय हिमाचल

हिमालय की गोद में बसा वैली ऑफ़ फ्लावर्स नेशनल पार्क मॉनसून के दौरान प्रकृति का सबसे मनमोहक रूप प्रस्तुत करता है। जुलाई से सितंबर के बीच पूरी घाटी 500 से ज्यादा प्रजातियों के रंग-बिरंगे जंगली फूलों से ढक जाती है, जिनमें ब्लू पॉपी, प्रिमुला, एनीमोन, कोबरा लिली और कई दुर्लभ हिमालयी वनस्पतियां शामिल हैं। UNESCO की विश्व धरोहर सूची में शामिल यह राष्ट्रीय उद्यान ट्रेकिंग, प्रकृति दर्शन और फोटोग्राफी के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। यहां Himalayan Black Bear, Musk Deer, Blue Sheep और दुर्लभ Snow Leopard जैसे वन्यजीव भी पाए जाते हैं। बारिश के मौसम में बहते झरने, बादलों से घिरी पर्वत श्रृंखलाएँ और हरी-भरी वादियां इस स्थान को किसी स्वर्ग से कम नहीं बनातीं।

दक्षिण में केरल का पेरियार नेशनल पार्क

घूमिये केरल स्थित पेरियार नेशनल पार्क, लीजिए जीप सफारी और नौका विहार का आनंद

पेरियार नेशनल पार्कपश्चिमी घाट के सबसे समृद्ध वन क्षेत्रों में से एक है और मॉनसून के दौरान इसकी हरियाली और भी घनी हो जाती है। पार्क के बीचों-बीच स्थित Periyar Lake इसकी सबसे बड़ी पहचान है, जहां बोट सफ़ारी के दौरान हाथियों के झुंड, Gaur, Sambar Deer, Wild Boar और कभी-कभी Bengal Tiger की झलक भी मिल सकती है। यह पार्क 300 से अधिक पक्षी प्रजातियों का घर है और यहां बांस राफ्टिंग, नेचर वॉक, जंगल ट्रेक तथा इको-टूरिज़्म एक्टिविटीज पर्यटकों को प्रकृति के बेहद करीब ले जाती हैं। मॉनसून में झील के आसपास का शांत वातावरण और घने जंगल इसे यादगार एक्सपीरियंस बनाते हैं।

मध्य प्रदेश में बांधवगढ़ नेशनल पार्क

बांधवगढ़ नेशनल पार्क में अद्भुत शेष शैय्या, 65 फ़ीट लंबी शयन मुद्रा में है विष्णु मूर्ति - नियो पॉलिटिको

बेहद सुंदर हैं Madhya Pradesh के ये 2 नेशनल पार्क, दूर-दूर से इन्हें देखने आते हैं Tourist

बांधवगढ़ नेशनल पार्क भारत के सबसे प्रसिद्ध टाइगर रिज़र्वों में से एक है और यहां बाघों की अच्छी-खासी आबादी पाई जाती है। घने साल के जंगल, बांस के वन, घास के मैदान और प्राचीन Bandhavgarh Fort इस पार्क की ऐतिहासिक और प्राकृतिक पहचान हैं। यहां Bengal Tiger के अलावा Leopard, Sloth Bear, Jackal, Chital और Sambar Deer जैसे वन्यजीव बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। मॉनसून के दौरान पर्यटन क्षेत्र सामान्यतः कुछ समय के लिए बंद रहते हैं, लेकिन बारिश के बाद जंगल की ताज़गी, हरियाली और प्राकृतिक सुंदरता देखते ही बनती है।

कर्नाटक का अगुम्बे रेनफ़ॉरेस्ट

दक्षिण का चेरापूंजी कहलाता है कर्नाटक का यह गांव, बारिश, झरनों और हरियाली का ऐसा नजारा मानसून में स्वर्ग जैसा लगता है - News18 हिंदी

अगुम्बे रेनफ़ॉरेस्ट को “दक्षिण भारत का चेरापूंजी” कहा जाता है क्योंकि यहाँ देश में सबसे ज्यादा वर्षा वाले क्षेत्रों में से एक है। Western Ghats का हिस्सा होने के कारण यह जैव विविधता से भरपूर वर्षावन है। मॉनसून के दौरान यहां ऊंचे-ऊंचे झरने, घने जंगल, बादलों से ढकी पहाड़ियां और हरियाली मन मोह लेती है। यह क्षेत्र King Cobra के संरक्षण और अध्ययन के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। इसके अलावा Lion-tailed Macaque, Malabar Giant Squirrel, Malabar Pit Viper तथा अनेक दुर्लभ पक्षी, मेंढक और तितलियों की प्रजातियां भी यहां पाई जाती हैं। ट्रेकिंग, बर्ड वॉचिंग, प्रकृति अध्ययन और वाइल्डलाइफ़ फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए अगुम्बे मॉनसून के दौरान एक आइडियल डेस्टिनेशन माना जाता है।

महाराष्ट्र का संजय गांधी नेशनल पार्क

610+ Sanjay Gandhi National Park Stock Photos, Pictures & Royalty-Free Images - iStock | Mumbai, Delhi india, Jaipur

देश के सबसे अनोखे नेशनल पार्क में गिना जाने वाला यह पार्क महानगर मुंबई के बीचों-बीच स्थित है। लगभग 104 वर्ग किलोमीटर में फैला यह नेशनल पार्क मॉनसून के दौरान घने जंगलों, हरे-भरे पहाड़ी रास्तों, झरनों और समृद्ध जैव विविधता के कारण प्रकृति प्रेमियों का पसंदीदा टूरिस्ट डेस्टिनेशन बन जाता है। यहाँ Leopard, Spotted Deer, Sambar Deer, Rhesus Macaque और अनेक पक्षियों एवं तितलियों की प्रजातियां पाई जाती हैं। पार्क के भीतर स्थित लगभग 2,000 वर्ष पुरानी Kanheri Caves इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को और भी खास बनाती हैं। मॉनसून में यहां की हरियाली, छोटी-छोटी जलधाराएं, नेचर ट्रेल, साइक्लिंग मार्ग और वन्यजीवों की एक्टिविटीज टूरिस्ट को शहर की भागदौड़ से दूर प्रकृति के बीच सुकून का एक्सपीरियंस कराती हैं।

मॉनसून सफ़ारी यह साबित करती है कि बारिश का मौसम वन्यजीवन के रोमांच को कम नहीं करता, बल्कि प्रकृति को और भी जीवंत बना देता है। हरे-भरे जंगल, कल-कल बहते झरने, धुंध से ढकी पहाड़ियां और वन्यजीवों की अनोखी एक्टिविटीज इस मौसम को खास बनाती हैं। यदि आप प्रकृति की असली खूबसूरती और जैव विविधता को करीब से महसूस करना चाहते हैं, तो मॉनसून में इन राष्ट्रीय उद्यानों की यात्रा एक यादगार अनुभव साबित हो सकती है। बस यात्रा से पहले पार्क के नियमों और मौसम की जानकारी जरूर ले, ताकि आपका सफर सेफ रहे।

IMD Weather Forecast Update: यूपी से बिहार तक मौसम का तांडव! इन 20 से ज्यादा राज्यों में भारी बारिश और आंधी-तूफान का अलर्ट

Aaj Ka Mausam 3 July: देश भर में मानसून की रफ्तार तेज होने के साथ ही मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 3 जुलाई के लिए अपना मॉर्निंग वेदर बुलेटिन जारी कर दिया है। मौसम विभाग के मुताबिक बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिम और उससे सटे उत्तरी ओडिशा-पश्चिम बंगाल के तटों पर कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। इसके अगले 2-3 दिनों में और मजबूत होने के आसार हैं। इस मजबूत सिस्टम और कई अन्य चक्रवातीय परिसंचरणों के कारण आज देश के 20 से अधिक राज्यों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश, वज्रपात और तेज आंधी-तूफान का अलर्ट जारी किया गया है। उत्तर भारत के कुछ मैदानी इलाकों और पहाड़ी राज्यों में अगले दो दिनों तक बारिश थोड़ी कम रहेगी लेकिन 5 जुलाई से एक बार फिर मूसलाधार बारिश का नया दौर शुरू होगा। राहत की बात यह है कि देश के अधिकतम तापमान में 8 जुलाई तक कोई बड़ा बदलाव होने की उम्मीद नहीं है।

इन 5 राज्यों में बेहद से बेहद बारिश की चेतावनी

आईएमडी के मॉर्निंग बुलेटिन के मुताबिक आज देश के पांच प्रमुख राज्यों/क्षेत्रों में मानसून का सबसे उग्र रूप देखने को मिल सकता है। इन इलाकों में कुछ स्थानों पर बेहद भारी बारिश का अलर्ट है:

  • गुजरात
  • कोंकण और गोवा
  • मध्य महाराष्ट्र (3 से 5 जुलाई के दौरान कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश)
  • पश्चिम मध्य प्रदेश (3 और 4 जुलाई को अलग-अलग स्थानों पर मूसलाधार से अत्यंत भारी बारिश)
  • ओडिशा (3 और 4 जुलाई को अत्यधिक भारी बारिश की संभावना)

यहां होगी भारी से बहुत भारी बारिश

मौसम विभाग ने देश के मध्य, पहाड़ी और दक्षिणी तटीय क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है।

मध्य और पूर्वी भारत: छत्तीसगढ़, विदर्भ और पूर्वी मध्य प्रदेश में आज बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। इसके साथ ही पूरे मध्य भारत में आज मध्यम से तीव्र आकाशीय बिजली चमकने की चेतावनी दी गई है।

उत्तर-पश्चिम भारत: पहाड़ी राज्यों हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में आज बहुत भारी बारिश हो सकती है। पूर्वी राजस्थान में 3 से 6 जुलाई के बीच अलग-अलग स्थानों पर बहुत भारी बारिश का अनुमान है।

दक्षिण भारत: केरल व माहे और तटीय कर्नाटक।

उत्तर प्रदेश और बिहार समेत इन राज्यों में भारी बारिश

देश के कई अन्य हिस्सों में भी आज भारी बारिश का दौर जारी रहेगा:

उत्तर प्रदेश और बिहार: उत्तर प्रदेश (पूर्वी और पश्चिमी दोनों हिस्से) और बिहार में आज अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है। यूपी और बिहार में 3-4 जुलाई को छिटपुट से मध्यम बारिश के बाद 5 से 7 जुलाई के बीच फिर से व्यापक बारिश का दौर आएगा।

उत्तर-पश्चिम भारत: जम्मू-कश्मीर-लद्दाख में आज भारी बारिश का अलर्ट है। दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़ और पंजाब में आज और कल (3-4 जुलाई) केवल छिटपुट बारिश होगी, लेकिन यहां 5 से 8 जुलाई के बीच भारी बारिश की वापसी होगी।

पश्चिम और पूर्वी भारत: मराठवाड़ा, गंगीय पश्चिम बंगाल और झारखंड (4 से 8 जुलाई के बीच व्यापक बारिश)।

दक्षिण भारत: आंतरिक कर्नाटक, तटीय आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल।

पूर्वोत्तर भारत: असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा (इन राज्यों में 3-4 जुलाई को भारी बारिश का अलर्ट है)।

आंधी-तूफान का अलर्ट: 50 किमी/घंटे की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

बारिश के साथ-साथ मौसम विभाग ने देश के अलग-अलग हिस्सों में थंडरस्टॉर्म और तेज हवाओं की चेतावनी जारी की है:

40-50 किमी/घंटे की रफ्तार वाली आंधी और बिजली: दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब, राजस्थान, उत्तर-पश्चिम भारत के पहाड़ी क्षेत्रों, झारखंड, गंगीय पश्चिम बंगाल, गुजरात राज्य, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और अंडमान व निकोबार द्वीप समूह में आज 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने (झोंके 60 किमी/घंटे तक) और बिजली चमकने की आशंका है।

30-40 किमी/घंटे की रफ्तार वाली आंधी और बिजली: उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, विदर्भ, पूर्वी मध्य प्रदेश, असम व मेघालय, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल व सिक्किम, पूरे कर्नाटक, केरल व माहे, लक्षद्वीप, तेलंगाना और तमिलनाडु में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी।

तेज सतही हवाएं: कर्नाटक, तेलंगाना और रायलसीमा में आज तेज सतही हवाएं चलने का अनुमान है।

उमस भरा मौसम: अरुणाचल प्रदेश और असम व मेघालय के मैदानी इलाकों में 3 से 6 जुलाई के दौरान मौसम काफी गर्म और उमस भरा बना रहेगा।

मछुआरों के लिए समुद्री चेतावनी

समुद्र में उठने वाली तेज लहरों और खराब मौसम को देखते हुए मछुआरों को तटीय इलाकों में न जाने की सलाह दी गई है-

अरब सागर: गुजरात, कोंकण, गोवा और कर्नाटक तटों के साथ-साथ सोमालिया व ओमान तटों पर 45-55 किमी प्रति घंटे (झोंके 65 किमी प्रति घंटे तक) की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलने की संभावना है। केरल तट और लक्षद्वीप क्षेत्र में भी 3 से 5 जुलाई के दौरान मौसम बेहद खराब रहेगा। मछुआरों को 7 जुलाई तक इन क्षेत्रों में न जाने की हिदायत है।

बंगाल की खाड़ी: आंध्र प्रदेश, ओडिशा और गंगीय पश्चिम बंगाल के तटों सहित मध्य, उत्तरी और दक्षिणी बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर में मौसम तूफानी रहेगा। यहां हवा की रफ्तार 40 से 50 किमी प्रति घंटे (झोंके 60 किमी प्रति घंटे) तक पहुंच सकती है।

मौसम विज्ञानियों के मुताबिक देश के वायुमंडल में इस समय कई शक्तिशाली प्रणालियां एक साथ काम कर रही हैं। दक्षिण-पश्चिम मानसून की सीमा आज 3 जुलाई को पोरबंदर, वल्लभ विद्यानगर, नीमच, टोंक, भिवानी और बठिंडा से होकर गुजर रही है। अगले 2-3 दिनों में इसके गुजरात, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और मध्य प्रदेश के बचे हुए हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं। उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और ओडिशा-पश्चिम बंगाल तट पर बना कम दबाव का क्षेत्र समुद्र तल से 7.6 किमी की ऊंचाई तक सक्रिय है। दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश और मध्य पाकिस्तान से सटे उत्तर-पश्चिम राजस्थान के ऊपर 1.5 किमी की ऊंचाई तक दो अलग-अलग चक्रवातीय हवाओं के क्षेत्र बने हुए हैं। उत्तर-पश्चिम राजस्थान से लेकर बंगाल की खाड़ी के लो-प्रेशर एरिया तक फैली मुख्य मानसूनी ट्रफ लाइन, दक्षिण गुजरात से कर्नाटक तक फैली ऑफ-शोर ट्रफ और मध्य क्षोभमंडल में सक्रिय वेस्टर्न डिस्टर्बेंस (जो वर्तमान में 66°E देशांतर के साथ सक्रिय है) मिलकर देश भर में इस भारी बारिश को बढ़ावा दे रहे हैं।

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Bullet Train: बुलेट ट्रेन चलाने में भारत का पूरा सहयोग करेगा जापान, प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने दिया भरोसा

Bullet Train: जापान ने एक बार फिर भारत के मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (बुलेट ट्रेन) प्रोजेक्ट को पूरा समर्थन देने का भरोसा दिया है। जापान ने कहा कि वह 2027 तक प्रोजेक्ट के प्राथमिक हिस्सों पर कमर्शियल ऑपरेशन शुरू करने के भारत के लक्ष्य को हासिल करने में पूरा सहयोग करेगा।

यह घोषणा भारत-जापान की 16वीं वार्षिक शिखर बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में की गई। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने दोनों देशों के बीच चल रहे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की।

2027 के लक्ष्य को मिला जापान का समर्थन

संयुक्त बयान के मुताबिक, जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने कहा कि उनकी सरकार भारत के 2027 तक मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन के प्राथमिक हिस्से पर कमर्शियल ऑपरेशन शुरू करने के लक्ष्य को पूरी तरह समझती है। इसे पूरा करने के लिए जापान हर जरूरी सहयोग देता रहेगा।

E10 Shinkansen ट्रेन भी चलेगी

दोनों देशों ने इस बात पर भी सहमति जताई कि इस कॉरिडोर पर अगली पीढ़ी की E10 Shinkansen बुलेट ट्रेनें शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे भारत-जापान के बीच लंबे समय से चल रही हाई-स्पीड रेल साझेदारी को और मजबूती मिलेगी।

7,000 किमी हाई-स्पीड रेल नेटवर्क

मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर के अलावा भारत और जापान ने भविष्य की दूसरी हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट पर भी साथ काम करने पर सहमति जताई।

भारत देशभर में करीब 7,000 किलोमीटर लंबा हाई-स्पीड रेल नेटवर्क डेवलप करना चाहता है। प्रधानमंत्री मोदी ने जापानी कंपनियों को इन नए कॉरिडोर के विकास में भाग लेने का न्योता भी दिया। जापान ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया।

निजी निवेश और नई मोबिलिटी पर फोकस

दोनों देशों ने हाई-स्पीड रेल और अन्य आधुनिक परिवहन परियोजनाओं में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने पर भी सहमति जताई। मकसद जापान की एडवांस ट्रांसपोर्ट टेक्नोलॉजी को भारत के कुशल ह्यूमन रिसोर्स और बड़े बाजार के साथ जोड़ना है।

इसके अलावा नेक्स्ट-जेनरेशन मोबिलिटी पार्टनरशिप पर एक Memorandum of Cooperation (MoC) पर हस्ताक्षर का भी स्वागत किया गया। इसका मकसद भविष्य की मोबिलिटी टेक्नोलॉजी में सहयोग बढ़ाना है।

मेट्रो और दूसरे प्रोजेक्ट्स पर भी बढ़ेगा सहयोग

संयुक्त बयान में शिपबिल्डिंग सेक्टर में सहयोग और स्किल डेवलपमेंट पर भी जोर दिया गया। इसके अलावा दोनों प्रधानमंत्रियों ने जापान की मदद से चल रहे चार बड़े प्रोजेक्ट्स की प्रगति का भी स्वागत किया।

इनमें मुंबई मेट्रो लाइन-11, बेंगलुरु मेट्रो फेज-3, महाराष्ट्र में स्वास्थ्य और शिक्षा परियोजनाएं और पंजाब में टिकाऊ बागवानी परियोजना शामिल हैं। दोनों देशों ने कहा कि वे भारत के सामाजिक और आर्थिक विकास से जुड़े ऐसे प्रोजेक्ट्स में आगे भी सहयोग जारी रखेंगे।

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कल का मौसम 3 जुलाई: दिल्ली, यूपी, बिहार समेत इन 15+ राज्यों में IMD ने दिया भारी बारिश, थंडरस्टॉर्म का अलर्ट, मानसून दिखाएगा ये असर

Weather Update July 3: देश भर में दक्षिण-पश्चिम मानसून ने अपनी रफ्तार पकड़ ली है। 2 जुलाई को मानसून ने पूरी दिल्ली, उत्तर प्रदेश के बचे हुए हिस्सों, अधिकांश मध्य प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के कुछ हिस्सों को कवर कर लिया है। इस बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 3 जुलाई के लिए मौसम का लेटेस्ट बुलेटिन भी जारी कर दिया है। मौसम विभाग के मुताबिक बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिम और उससे सटे उत्तरी ओडिशा-पश्चिम बंगाल तटों पर बना कम दबाव का क्षेत्र उसी क्षेत्र में सक्रिय है और अगले 2-3 दिनों में यह और मजबूत होने वाला है।

इसके प्रभाव से 3 जुलाई को दिल्ली, यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र समेत 15 से अधिक राज्यों में भारी से बेहद भारी बारिश और गरज-चमक के साथ आंधी-तूफान का अलर्ट जारी किया गया है। देश के अधिकतम तापमान में 8 जुलाई तक कोई बड़ा बदलाव होने की उम्मीद नहीं है।

इन राज्यों में बेहद भारी बारिश की चेतावनी

मौसम विभाग के मुताबिक 3 जुलाई को देश के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों में मानसून का सबसे रौद्र रूप देखने को मिल सकता है। इन राज्यों में अलग-अलग स्थानों पर मूसलाधार से अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट है:-

गुजरात

कोंकण और गोवा

मध्य महाराष्ट्र

ओडिशा

पश्चिम मध्य प्रदेश

(इन सभी क्षेत्रों में मध्यम से तीव्र आकाशीय बिजली चमकने की भी चेतावनी दी गई है।)

यहां होगी भारी से बहुत भारी बारिश

3 जुलाई को मध्य भारत, पहाड़ी राज्यों और दक्षिण तट पर मौसम काफी खराब रहेगा। आईएमडी ने नीचे दिए गए राज्यों में बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है:-

छत्तीसगढ़ और विदर्भ

पूर्वी मध्य प्रदेश

पूर्वी राजस्थान

हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड

तटीय कर्नाटक

केरल और माहे

दिल्ली, यूपी और बिहार समेत इन राज्यों में भारी बारिश

3 जुलाई को उत्तर भारत के मैदानी इलाकों से लेकर पूर्वोत्तर राज्यों तक भारी बारिश की स्थिति बनी रहेगी:-

उत्तर प्रदेश और बिहार: उत्तर प्रदेश और बिहार में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

उत्तर-पश्चिम भारत: जम्मू-कश्मीर-लद्दाख में भारी बारिश का अलर्ट है। वहीं, दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में 3-4 जुलाई को छिटपुट से मध्यम बारिश होगी जिसके बाद 5 से 8 जुलाई के बीच दोबारा व्यापक भारी बारिश शुरू होगी।

पूर्वी और पश्चिम भारत: गंगीय पश्चिम बंगाल, झारखंड और मराठवाड़ा में भारी बारिश की उम्मीद है।

दक्षिण भारत: तेलंगाना, तटीय आंध्र प्रदेश, आंतरिक कर्नाटक, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल।

पूर्वोत्तर भारत: असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा।

थंडरस्टॉर्म अलर्ट: 50 किमी/घंटे की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

आईएमडी ने भारी बारिश के साथ-साथ कई राज्यों में बिजली चमकने और तेज आंधी-तूफान का अलर्ट जारी किया है:-

40-50 किमी/घंटे की रफ्तार वाली आंधी और बिजली: दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब, राजस्थान, उत्तर-पश्चिम भारत के पहाड़ी हिस्सों (J&K, लद्दाख), गुजरात, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, झारखंड, गंगीय पश्चिम बंगाल और अंडमान व निकोबार द्वीप समूह में 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और थंडरस्टॉर्म की आशंका है।

30-40 किमी/घंटे की रफ्तार वाली आंधी और बिजली: बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम मध्य प्रदेश, असम व मेघालय, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल व सिक्किम, पूरे कर्नाटक, तेलंगाना, केरल व माहे, लक्षद्वीप, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी। कर्नाटक, तेलंगाना और रायलसीमा में 3 जुलाई को तेज सतही हवाएं चलने का अनुमान है।

उमस भरा मौसम: अरुणाचल प्रदेश और असम व मेघालय के मैदानी इलाकों में 3 जुलाई को मौसम काफी गर्म और उमस भरा रहने की संभावना है।

मछुआरों के लिए समुद्री चेतावनी

समुद्र में खराब मौसम और तूफानी हवाओं को देखते हुए मौसम विभाग ने मछुआरों को तटीय इलाकों में न जाने की चेतावनी दी है:-

अरब सागर: गुजरात, कोंकण, गोवा, कर्नाटक और केरल तटों के साथ-साथ लक्षद्वीप क्षेत्र में 40-50 किमी प्रति घंटे (झोंके 60 किमी प्रति घंटे तक) की रफ्तार से हवाएं चलेंगी। सोमालिया और ओमान तटों के पास हवा की रफ्तार 45-55 किमी प्रति घंटे (झोंके 65 किमी प्रति घंटे) तक पहुंच सकती है। मछुआरों को 5 से 7 जुलाई तक इन क्षेत्रों में जाने से मना किया गया है।

बंगाल की खाड़ी: ओडिशा, गंगीय पश्चिम बंगाल, उत्तरी और दक्षिणी आंध्र प्रदेश के तटों, अंडमान सागर और मध्य व दक्षिण बंगाल की खाड़ी में मौसम बेहद खराब) रहेगा। यहां हवा की गति 40 से 55 किमी प्रति घंटे तक रह सकती है। मछुआरों को इन समुद्री क्षेत्रों से दूर रहने की हिदायत दी गई है।

मौसम विभाग के मुताबिक इस समय देश के ऊपर कई चक्रवातीय परिसंचरण सक्रिय हैं। उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और ओडिशा-पश्चिम बंगाल तट पर बना कम दबाव का क्षेत्र समुद्र तल से 7.6 किमी की ऊंचाई तक विस्तृत है और दक्षिण-पश्चिम की ओर झुका हुआ है। दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश के ऊपर 1.5 किमी की ऊंचाई तक एक चक्रवातीय हवाओं का क्षेत्र बना हुआ है।

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मध्य पाकिस्तान और उससे सटे उत्तर-पश्चिम राजस्थान के ऊपर भी एक अन्य चक्रवातीय परिसंचरण सक्रिय है। उत्तर-पश्चिम राजस्थान से लेकर बंगाल की खाड़ी के लो-प्रेशर एरिया तक फैली मुख्य मानसूनी ट्रफ लाइन के साथ-साथ दक्षिण गुजरात से कर्नाटक तट तक फैली अपतटीय ट्रफ और मध्य क्षोभमंडल में शेयर जोन सक्रिय हैं। ये सब मिलकर इस समय देश भर में भारी बारिश को नियंत्रित कर रहे हैं।

Monsoon Heavy Rain Alert: यूपी, बिहार, दिल्ली समेत इन 20+ राज्यों में भारी बारिश, आंधी-तूफान का अलर्ट! 8 जुलाई तक ऐसा रहेगा मौसम

Monsoon Heavy Rain Alert: मौसम विभाग(IMD) के मुताबिक, उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे सटे उत्तरी ओडिशा-पश्चिम बंगाल के तटों पर आज सुबह 08:30 बजे एक कम दबाव का क्षेत्र बन गया है। इसके अगले 2-3 दिनों में और अधिक मजबूत होने की संभावना है। मानसून की मुख्य ट्रफ लाइन इस समय उत्तर-पश्चिम राजस्थान से लेकर बंगाल की खाड़ी में बने इस लो-प्रेशर एरिया के केंद्र तक गुजर रही है। दक्षिण गुजरात से लेकर कर्नाटक तट तक एक अपतटीय ट्रफ भी सक्रिय है। इन मजबूत प्रणालियों के कारण देश भर में मूसलाधार बारिश का दौर शुरू हो गया है।

इन क्षेत्रों में अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी

आईएमडी ने चेतावनी दी है कि कुछ राज्यों में अलग-अलग स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है, जिससे बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है:-

दक्षिण गुजरात क्षेत्र और कोंकण: 2 से 5 जुलाई के दौरान अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट।

सौराष्‍ट्र और कच्‍छ: 2 से 4 जुलाई के बीच अत्यधिक भारी बारिश की संभावना।

पश्चिम मध्य प्रदेश और ओडिशा: 3 और 4 जुलाई को मूसलाधार से अत्यधिक भारी बारिश की आशंका।

मध्य महाराष्ट्र: 3 से 5 जुलाई के दौरान अलग-अलग स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी।

क्षेत्रवार मौसम का पूरा पूर्वानुमान और अलर्ट (2 से 8 जुलाई 2026)

1- उत्तर-पश्चिम भारत (दिल्ली, यूपी, हरियाणा, पंजाब और पहाड़ी राज्य)

दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़ और पंजाब: 2 जुलाई को व्यापक बारिश के बाद 3-4 जुलाई को हल्की से छिटपुट बारिश होगी लेकिन 5 से 8 जुलाई के बीच एक बार फिर यहां भारी बारिश का नया दौर शुरू होगा। 2 जुलाई को पंजाब और दिल्ली-एनसीआर में भारी बारिश दर्ज की गई है।

उत्तर प्रदेश: पश्चिमी यूपी में 2 से 7 जुलाई के बीच और पूर्वी यूपी में 2 से 8 जुलाई के बीच अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है। वहीं 3-4 जुलाई को दोनों क्षेत्रों में गरज-चमक की स्थिति रहेगी।

उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश: उत्तराखंड में 2 से 8 जुलाई तक लगातार व्यापक बारिश होगी। 2-3 जुलाई को बहुत भारी और 4-8 जुलाई को भारी बारिश का अलर्ट है। हिमाचल में 2-3 जुलाई और 5-6 जुलाई को बहुत भारी बारिश का अनुमान है।

जम्मू-कश्मीर-लद्दाख: 2-3 जुलाई और 7-8 जुलाई को व्यापक बारिश के साथ भारी बारिश हो सकती है।

राजस्थान: पूर्वी राजस्थान में 2 से 6 जुलाई के दौरान बहुत भारी बारिश और 7-8 जुलाई को भारी बारिश का अलर्ट है। पश्चिमी राजस्थान में 2 जुलाई को 50-60 किमी/घंटे की रफ्तार से थंडरस्क्वाल (आंधी) और धूल भरी आंधी चलने की चेतावनी है जबकि 5-7 जुलाई के बीच यहां भारी बारिश हो सकती है।

आंधी-तूफान का अलर्ट: दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में 2 से 8 जुलाई के दौरान 40-50 किमी/घंटे (झोंके 60 किमी/घंटे तक) की रफ्तार से हवाएं चलेंगी।

2- मध्य भारत (मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ)

मध्य प्रदेश: पूरे राज्य में 2 से 8 जुलाई तक व्यापक बारिश होगी। पश्चिम मध्य प्रदेश में 2 जुलाई और 5-8 जुलाई को बहुत भारी बारिश होगी जबकि 3-4 जुलाई को अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट है। पूर्वी मध्य प्रदेश में 3-4 जुलाई को बहुत भारी बारिश होगी।

छत्तीसगढ़ और विदर्भ: दोनों क्षेत्रों में 2 और 3 जुलाई को बहुत भारी बारिश की संभावना है। छत्तीसगढ़ में 4 से 8 जुलाई और विदर्भ में 4 व 7-8 जुलाई को भारी बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। 2 और 3 जुलाई को इस पूरे क्षेत्र में तेज आकाशीय बिजली चमकने का अलर्ट है।

3- पूर्वी भारत (बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल)

बिहार: बिहार में 2 से 4 जुलाई और 7-8 जुलाई को छिटपुट से लेकर भारी बारिश होगी जबकि 5 और 6 जुलाई को राज्य के अधिकांश हिस्सों में व्यापक रूप से भारी बारिश का अनुमान है। 2 जुलाई और 5-6 जुलाई को यहां तेज आंधी चलने की भी संभावना है।

झारखंड: 4 से 8 जुलाई के बीच झारखंड में व्यापक रूप से भारी बारिश होने की संभावना है।

ओडिशा: लो-प्रेशर एरिया के कारण ओडिशा में 2 जुलाई को बहुत भारी बारिश, 3 और 4 जुलाई को अत्यधिक भारी बारिश तथा 7-8 जुलाई को पुनः भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

पश्चिम बंगाल और सिक्किम: गंगीय पश्चिम बंगाल में 4-5 जुलाई को बहुत भारी बारिश तथा उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल व सिक्किम में 7-8 जुलाई को भारी बारिश होने की उम्मीद है।

4- पश्चिम भारत (गुजरात, कोंकण और गोवा)

गुजरात क्षेत्र, कोंकण और गोवा: इन क्षेत्रों में 2 से 8 जुलाई तक लगातार व्यापक बारिश जारी रहेगी। गुजरात क्षेत्र और कोंकण में 2 से 5 जुलाई के दौरान कुछ जगहों पर मूसलाधार बारिश होगी, जबकि गुजरात क्षेत्र में 6 से 8 जुलाई के बीच बहुत भारी बारिश का अलर्ट है।

सौराष्‍ट्र और कच्‍छ: 2 से 4 जुलाई तक अत्यधिक भारी बारिश के बाद 5-6 जुलाई को बहुत भारी बारिश और 7-8 जुलाई को भारी बारिश होने की संभावना है।

मराठावाड़ा: 3 जुलाई को यहां भारी बारिश की संभावना है जिसके बाद 4 से 8 जुलाई के बीच मौसम थोड़ा धीमा रहेगा।

5- दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत (कर्नाटक, केरल, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश)

तटीय कर्नाटक: 2 से 8 जुलाई के दौरान लगातार बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

केरल, माहे और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक: केरल और माहे में 3 जुलाई को बहुत भारी बारिश होगी जबकि 4 से 8 जुलाई तक भारी बारिश जारी रहेगी। दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में 5 से 8 जुलाई के दौरान बहुत भारी बारिश का अनुमान है।

तेलंगाना और तटीय आंध्र प्रदेश: तेलंगाना में 2 जुलाई को व्यापक बारिश और 2-4 जुलाई के दौरान भारी बारिश की संभावना है। तटीय आंध्र प्रदेश और यानम में 2 से 5 जुलाई के बीच भारी बारिश हो सकती है।

तेज हवाओं का अलर्ट: कर्नाटक, तेलंगाना और रायलसीमा क्षेत्र में 2 से 8 जुलाई के दौरान तेज सतही हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है।

6- पूर्वोत्तर भारत (असम, मेघालय और त्रिपुरा)

नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 2 से 8 जुलाई के दौरान व्यापक बारिश होगी जिसमें 2 से 4 जुलाई के बीच भारी बारिश का अलर्ट है।

असम और मेघालय में 3 और 4 जुलाई को भारी बारिश के साथ 30-40 किमी/घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है।

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Bhaari Barish Alert: यूपी, बिहार समेत इन राज्यों के लिए अगले 48 घंटे भारी! मानसून यहां पूरा छा गया, हैवी बारिश का ये अलर्ट आया

Bhaari Barish Alert: देश भर में मानसून ने अपनी रफ्तार बेहद तेज कर दी है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा अपडेट के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून ने 2 जुलाई को पूरे उत्तर प्रदेश को कवर कर लिया है। इसके साथ ही 5 दिन देर से ही सही मानसून ने दिल्ली में भी एंट्री कर ली है। यूपी में मानसून के पूरी तरह छा जाने के साथ ही मौसम विभाग ने बिहार समेत देश के कई राज्यों के लिए अगले 48 घंटे बेहद भारी बताए हैं।

IMD ने कई क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट जारी किया है। अगले 2 दिनों के भीतर मानसून के दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब, उत्तर अरब सागर, गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश के बचे हुए हिस्सों और राजस्थान में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल बनी हुई हैं।

अगले 2 दिन: इन राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग के मुताबिक, आगामी दो दिनों के दौरान तटीय और पश्चिमी भारत के हिस्सों में आफत की बारिश हो सकती है। आईएमडी ने अगले 48 घंटों के लिए नीचे दिए गए क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है:-

उत्तर प्रदेश: 2 जुलाई को मानसून के पूरे राज्य में छा जाने के बाद यहां बारिश की गतिविधियां तेज हो गई हैं।

तटीय कर्नाटक

गुजरात

कोंकण और गोवा

मध्य महाराष्ट्र

अगले 3 दिन: मध्य भारत और पहाड़ी राज्यों में रहेगा ऐसा ही मौसम

आईएमडी ने अलर्ट जारी करते हुए बताया है कि अगले 3 दिनों के दौरान देश के मध्य, पूर्वी और पहाड़ी राज्यों में भी मौसम का मिजाज काफी आक्रामक रहेगा। इन क्षेत्रों में भी भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज होने का अनुमान है:-

उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश

छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और विदर्भ

ओडिशा

सौराष्ट्र और कच्छ

शनिवार तक बिहार और पूर्वोत्तर समेत इन राज्यों में हैवी रैन

मौसम विभाग के अनुसार, बिहार सहित देश के कई अन्य हिस्सों में शनिवार तक लगातार भारी बारिश की स्थिति बनी रहेगी। इस दायरे में आने वाले राज्य हैं:-

बिहार और झारखंड

उत्तर प्रदेश (पूरे राज्य में भारी बारिश का दौर जारी रहेगा)

जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख

केरल (केरलम) और माहे

आंतरिक कर्नाटक और तेलंगाना

पूर्वोत्तर क्षेत्र के हिस्से

ISRO के सैटेलाइट तस्वीरों में दिखा बादलों का महासागर

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के INSAT-3DS सैटेलाइट से जारी थर्मल इंफ्रारेड तस्वीरों में मानसून की एक बेहद हैरान करने वाली और नाटकीय प्रगति दर्ज की गई है। सैटेलाइट से मिली तस्वीरों में निम्नलिखित बड़ी बातें सामने आई हैं। अंतरिक्ष से ली गई तस्वीरों में पश्चिम बंगाल से लेकर सीधे जम्मू-कश्मीर तक फैली हुई लगभग 1,500 किलोमीटर लंबी एक लगातार सक्रिय रेन बैंड यानी बादलों की विशाल पट्टी साफ दिखाई दे रही है।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि ये मानसूनी बादल अलग-अलग या छितराए हुए नहीं हैं, बल्कि वे एक लंबी कतार में आपस में जुड़े हुए हैं। यह देश में एक बेहद सक्रिय मानसून परिसंचरण शुरू होने का सीधा संकेत है। ये विशालकाय बादल अपने साथ भारी मात्रा में नमी लेकर चल रहे हैं जो एक साथ देश के कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश कराने की क्षमता रखते हैं।

दो तरफ की मानसूनी हवाओं का मिलन, उत्तर भारत में रफ्तार तेज

सैटेलाइट तस्वीरों से यह भी साफ हुआ है कि अरब सागर और बंगाल की खाड़ी, दोनों ही दिशाओं से आने वाली नमी से लदी हवाएं इस समय उत्तर भारत के आसमान पर आकर आपस में मिल रही हैं। इसके कारण मानसून की ट्रफ लाइन अब अपनी सामान्य स्थिति की ओर खिसकने लगी है, जिसने मैदानी इलाकों में लगातार और भारी बारिश के लिए परिस्थितियां बेहद अनुकूल बना दी हैं।

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देश के सबसे सूखे जून महीनों में से एक का सामना करने के बाद मानसून ने उत्तर भारत में यह जोरदार वापसी की है। इस बढ़ी हुई मानसूनी सक्रियता की वजह से ही उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में पहले से ही व्यापक रूप से भारी बारिश हो रही है। मौसम विभाग के मुताबिक, व्यापक बारिश और आंधी-तूफान के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून 1 जुलाई को ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों और पूर्वी हरियाणा के कुछ इलाकों में प्रवेश कर चुका था, जिसके बाद अब इसने रफ्तार पकड़ ली है।