Gwalior Accident: CM मोहन यादव ने किया मुआवजे का ऐलान, मृतकों के परिजनों को ₹4 लाख और घायलों को ₹2 लाख

Gwalior Accident: CM मोहन यादव ने किया मुआवजे का ऐलान, मृतकों के परिजनों को ₹4 लाख और घायलों को ₹2 लाख

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ग्वालियर में शनिवार-रविवार की दरमियानी रात हुए ट्रक हादसे में श्रद्धालुओं की मृत्यु का समाचार अत्यंत ही हृदयविदारक है। दुःख की इस घड़ी में राज्य सरकार सभी प्रभावित परिवारों के साथ है। मुख्यमंत्री ने सभी मृतकों के परिजनों के प्रति आत्मीय संवेदनाएं व्यक्त की हैं।

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ‘एक्स’ पर कहा कि राज्य शासन की ओर से मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये, गंभीर घायलों को 2-2 लाख रूपये और अन्य घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। सभी घायलों का नि:शुल्क उपचार किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभावित परिवार ग्वालियर, शिवपुरी और श्योपुर से हैं। मंत्रीद्वय एदल सिंह कंषाना और राकेश शुक्ला को यथाशीघ्र ग्वालियर पहुंचने के निर्देश भी दिए हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा महाकाल से दिवंगतों को अपने श्रीचरणों में स्थान देने एवं शोकाकुल परिजनों को यह गहन दुःख सहन करने की शक्ति देने एवं घायलों को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ प्रदान करने की प्रार्थना की है।

पावन दीयों का सियासी शस्त्रीकरण

गणेश जी का उत्सव दस दिनों तक मनाया जाता है। दुर्गापूजा भी नौ रात्रियों तक मनाई जाती है। रामलीला का आयोजन भी आमतौर पर दस दिनों तक चलता है। भगवान कृष्ण की जन्माष्टमी भी मथुरा-वृंदावन में पूरे सप्ताह मनाई जाती है। पुरी में भगवान जगन्नाथ का रथ उत्सव भी दस दिनों तक चलता है। तिरुपति बालाजी का श्रीवरी ब्रह्मोत्सव नौ दिनों तक धूमधाम से मनाया जाता है। अब इस परंपरा में नरेंद्र भाई के ‘सेवा-संकल्प’ में पूरे एक महीने उत्सव और जुड़ने का हमें सौभाग्य मिला है।

ज़िंदगी रोशन करने के लिए अपने घर की मुंडेर पर दीया जलाने की हमारी परंपरा ज़्यादा नहीं तो कम-से-कम पांच हज़ार साल पुरानी तो है ही। मेरी दादी, मेरी नानी और फिर मेरी मां भी हर दिन गोधूलि बेला में घर के मंदिर और तुलसी के चौबारे पर घी का दीया जलाती थीं। मां जब तक थीं, उन्होंने इस रीत का अनवरत निर्वाह किया। वे नहीं रहीं तो बहुत अरसे तक मेरी पत्नी भी ऐसा ही करती रही। घर के छोटे-से मंदिर में रोज़ सुबह-शाम दीया-बाती करने का उस का नियम था। दिल्ली के घरों में चौबारा तो कहां से बनाएं, सो, तुलसी गमले में उगती है और मिट्टी का दीया वह हर शाम पूरे श्रद्धा भाव से उस पर रख दिया करती थी।

मगर कुछ बरस से यह नियम ज़रा लड़खड़ा-सा गया है। प्रतिदिन दीया बालने की पत्नी की हुमक अब वैसी नहीं रही है। एक तो कोरोना-काल में डर के मारे दिल्ली छोड़ कर बहुत दिनों मां, मैं और पत्नी अरण्यवास में चले गए तो गमले में लगी तुलसी सूख गई। और, सूखी तो ऐसी सूखी कि कई बार लगाने की कोशिश की, पर नहीं पनपी, तो नहीं पनपी। सो, तुलसी का दीया आजकल मौन है। फिर पत्नी-बेटियों के आग्रह पर अरसे बाद घर के भीतर हल्का-फुल्का नवीनीकरण कराया तो मंदिर के पट कुछ महीनों के लिए पूरी तरह बंद रखने पड़े और सुबह-शाम दीया लगाने का पत्नी का दस्तूर भंग हो गया। उस के बाद पट तो खुले, लेकिन दीये की निरंतरता नैपथ्य में चली गई।

नरेंद्र भाई मोदी के जन्मदिन पर देश भर में जले करोड़ों आशीर्वाद-दीयों ने मुझे दादी-नानी-मां-पत्नी के सहारे प्राणवान रहे अपने घर के परंपरागत दीये की याद दिला दी। वह दीया मेरे गांव, ननिहाल और जंगल-जंगल पदस्थ मेरे पिता के कवेलू-आवासों से ले कर अंततः दिल्ली तक के घर की सुखदायी-संतोषदायी जीवनीशक्ति बना रहा। दीये की यह भीनी टिमटिमाहट ही आज भी, जब-जब मन उदास होता है, हमारा संबल बनती है। सो, जब नरेंद्र भाई के जन्मदिन पर आशीर्वाद-दीये जलाने के आयोजन-प्रयोजन की होड़ में लगे उन के कल्याणाकांक्षियों की सघन उंदुर-दौड़ मैं ने देखी तो मेरे तो होश फ़ाख़्ता हो गए। मैं तो कभी सोच भी नहीं सकता था कि सनातनी सभ्यता की आधारशिला पावन दीये को भी कभी ऐसे सियासी शस्त्रीकरण का ज़रिया बनाने की हद तक हमारे हुक्मरान उतर सकते हैं।

मेरा जन्म मध्यप्रदेश में हुआ। अगर उसे लालन-पालन कहा जा सके तो लालन-पालन भी मध्यप्रदेश में हुआ। औपचारिक शिक्षा भी मध्यप्रदेश में हुई। पत्रकारिता के संस्कार भी मध्यप्रदेश से मिले। जब राजनीति में कूदने का चस्का लगा तो उस की मैदानी धरती भी मध्यप्रदेश ही रही। तो ज़ाहिर है कि मध्यप्रदेश से अतिरिक्त लगाव मेरी धमनियों में है। इसलिए नरेंद्र भाई के लिए देश भर में बुधवार को रोशन किए गए दीयों में मेरी नज़र सब से पहले मध्यप्रदेश के दीयों पर पड़ी। वहां के मुख्यमंत्री मोहन यादव इस वज़ह से थोड़े परिचित रहे हैं कि वे भी उज्जैन के उसी विक्रम विश्वविद्यालय से पढ़ कर निकले हैं, जहां से मैं। विक्रम की शिक्षण-अध्ययन परंपरा बहुत अर्थपूर्ण और संजीदा मानी जाती रही है। महाकाल के मंदिर से उत्तर दिशा में पांच-छह किलोमीटर दूर आज भी सांदीपनि ऋषि का आश्रम मौजूद है। इसी आश्रम में श्रीकृष्ण, उन के बड़े भाई बलराम और सुदामा ने एक साथ शिक्षा प्राप्त की थी।

तो मुझे लगा कि हमारे मोहन यादव में सांदीपनि की धरती की धूल का कुछ तो असर ज़रूर होगा। मगर फिर मैं ने पाया कि नरेंद्र भाई को आशीर्वाद देने के लिए 3 करोड़ 55 लाख दीये तो अकेले मध्यप्रदेश में जलाए गए। मुख्यमंत्री के ख़ुद के गृह-नगर उज्जैन में महाकाल महालोक के आसपास और क्षिप्रा नदी के घाटों पर 33 लाख 27 हज़ार दीये जला कर एक नया विश्व रिकॉर्ड बनाया गया। अब तक नहीं समझ पा रहा हूं कि इस तिलिस्म की रचना पर गर्व करूं या दूर कहीं जा कर किसी चुल्लू की तलाश में जुटूं? मैं तो अब तक घर-बाहर के मंदिर में आनंद से झूमती दीये की लौ में ही ऐसे शक्तिपुंज के दर्शन करता रहा हूं कि ये लाखों-करोड़ों दीयो की आक्रामक दीपशिखाएं तो मेरे सामने डेढ़ दर्जन परमाणु अस्त्र ढो कर अठारह हज़ार किलोमीटर दूर तक चली जाने वाली सटन-2 मिसाइल का दृश्य पेश कर रही हैं।

नरेंद्र भाई के स्वयं गृह-प्रदेश गुजरात में साढ़े अठारह हज़ार स्थानों पर 88 लाख दीयों ने अपनी माटी के लाल पर आशीष बरसाया। अहमदाबाद की कांकरिया झील किनारे सवा लाख और अटल-पुल पर 76 हज़ार दीये जलाए गए। सूरत में दस हज़ार स्थानों पर दस लाख दीये जले। अहमदाबाद के विश्व उमियाधाम में नरेंद्र भाई के जीवन के 76 बरस पूरे होने पर 76 हज़ार दीये प्रज्वलित कर आरती की गई। गृह मंत्री अमित भाई शाह नरेंद्र भाई के जन्मस्थान वडनगर पहंुचे और आरती-पूजन समारोह का हिस्सा बने। उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्रियों ने भी दीयों की झड़ी लगा दी। नरेंद्र भाई के निर्वाचन क्षेत्र बनारस में दशाश्वमेध घाट, अस्सी घाट और काशी विष्वनाथ धाम क्षेत्र में 5 लाख से अधिक दीये जले। राजधानी लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने मंत्रियों के साथ हज़ारों प्रज्वलित दीयों से बनाई गई नरेंद्र भाई की आकृति की आरती उतारी।

बिहार में 21 लाख आशीर्वाद-दीये जले। छत्तीसगढ़ में 36 लाख दीये जले। पश्चिम बंगाल में एक करोड़ घरों में दीप प्रज्वलन प्रायोजन हुआ। राजस्थान से ले कर महाराष्ट्र तक, आंध्र प्रदेश से ले कर अरुणाचल तक, ओडिशा से ले कर गोवा तक और हरियाणा से ले कर असम, त्रिपुरा, मणिपुर तक हर मतदान केंद्र के क्षेत्र को इकाई मान कर दीप प्रज्वलन के कार्यक्रम आयोजित हुए। सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों से अपने-अपने घरों के बाहर पांच-पांच, ग्यारह-ग्यारह दीये जलवा कर नरेंद्र भाई मोदी को शुभाशीष दिलवाया गया। भारतीय जनता पाटी की सरकारों वाले 22 राज्यों के बीच इस मामले में एक-दूसरे को पटखनी देने की होड़-सी मच गई।

आजकल देश भर में गणपति विराजे हुए हैं। गणेश जी का उत्सव दस दिनों तक मनाया जाता है। दुर्गापूजा भी नौ रात्रियों तक मनाई जाती है। रामलीला का आयोजन भी आमतौर पर दस दिनों तक चलता है। भगवान कृष्ण की जन्माष्टमी भी मथुरा-वृंदावन में पूरे सप्ताह मनाई जाती है। पुरी में भगवान जगन्नाथ का रथ उत्सव भी दस दिनों तक चलता है। तिरुपति बालाजी का श्रीवरी ब्रह्मोत्सव नौ दिनों तक धूमधाम से मनाया जाता है। राजस्थान और मध्यप्रदेश में तेजाजी महाराज का उत्सव छह दिनों तक मनाया जाता है। हमारे देश में प्रमुख से प्रमुख देवी-देवताओं और लोकदेवताओं तक के जन्मोत्सव कई दिनों तक मनाने की प्राचीन परंपरा है।

सो, भला हुआ कि नरेंद्र भाई 76 के हुए तो अब इस परंपरा में पूरे एक महीने मनाया जाने वाला सालाना ‘सेवा-संकल्प’ उत्सव और जुड़ने का सौभाग्य हमें मिल गया है। भारत एक उत्सवधर्मी देष है। हम हर बात का उत्सव मनाते हैं। जब सात बरस पहले नरेंद्र भाई ने कहा था कि ‘डर होना चाहिए, डर अच्छी चीज़ है’ तो मुझे नहीं मालूम था कि एक दिन आएगा कि वे मेरे मन के दीये को भी सियासी-धमक का डर फैलाने के साधन में तब्दील कर लेंगे। नरेंद्र भाई के लिए एक सद्भावना-दीप मैं भी दीप्तिमान करने का मेरा भी मन था। मगर अब मेरे उंगलियां ही नहीं, टांगें तक थर-थर कांप रही हैं।

Ranbir Kapoor-Alia Bhatt: रणबीर कपूर-आलिया भट्ट ने PM मोदी को दिया जन्मदिन का तोहफा, मुंबई के 20 स्कूलों का कराएंगे कायाकल्प

Ranbir Kapoor-Alia Bhatt: आलिया भट्ट ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके 76वें जन्मदिन पर बधाई दी। एक्ट्रेस ने यह भी घोषणा करते हुए कहा कि वह और उनके पति- एक्टर रणबीर कपूर 20 स्कूलों को बेहतर बनाने का संकल्प लेकर #SevaSankalpAbhiyaan का समर्थन करेंगे।

पीएम मोदी के लिए जन्मदिन का संदेश शेयर करते हुए आलिया ने लिखा, “हमारे माननीय प्रधानमंत्री @narendramodi जी को जन्मदिन की बधाई! आने वाला साल आपके लिए सेहतमंद और खुशियों भरा हो। #SevaSankalpAbhiyaan की भावना सामूहिक प्रयास और समाज को कुछ वापस देने की शानदार सोच को दिखाती है। इस दिन को मनाने और इस नेक काम में सहयोग करने के लिए रणबीर और मैं @mybmc की सिफारिशों के अनुसार 20 स्कूलों को बेहतर बनाने का संकल्प ले रहे हैं, ताकि हमारे बच्चों को सीखने और आगे बढ़ने के लिए बेहतर और अच्छी सुविधाओं वाली जगहें मिल सकें।”

आलिया का यह पोस्ट तब आया जब कई मशहूर हस्तियों ने पीएम मोदी को उनके जन्मदिन पर बधाई दी।

सेलेब्स ने पीएम मोदी को बधाई दी

X पर सलमान खान ने लिखा, “माननीय पीएम साहब, आपको जन्मदिन मुबारक हो। नरेंद्र भाई मोदी आपको जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई। जय हिंद।” शाहरुख खान ने भी अपने X हैंडल से PM मोदी को जन्मदिन की बधाई दी। उन्होंने लिखा, “माननीय PM @narendramodi जी, आपको जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई। आप हमेशा अच्छी सेहत, खुशी और संतुष्टि के साथ रहें। देश को प्रेरित करने की ताकत और सकारात्मकता आपमें हमेशा बनी रहे।”

अक्षय कुमार ने X पर लिखा, “आज हमारे सम्मानित प्रधानमंत्री जी का जन्मदिन है और यह दिन सेवा के संकल्प के साथ मनाया जा रहा है। मेरा मानना ​​है कि जन्मदिन मनाने का इससे बेहतर तरीका और कोई नहीं हो सकता।”

उन्होंने आगे कहा, “हम किसी की सेवा करें, किसी जरूरतमंद की मदद करें, किसी के चेहरे पर मुस्कान लाएं… बस यही एक साधारण सा संकल्प। जन्मदिन मुबारक हो @narendramodi जी। हमारे महान देश को प्रेरित करते रहें। जय भारत। जय महाकाल।”

मोहनलाल ने X पर लिखा, “हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई। देश की तरक्की के लिए आपका अथक समर्पण लाखों लोगों को प्रेरित करता रहता है। यह साल आपके लिए अच्छी सेहत, ताकत और देश की सेवा में लगातार सफलता लेकर आए।”एक्टर और MP कंगना रनौत ने PM मोदी के साथ एक तस्वीर शेयर की और दिल से एक नोट लिखा। जैकी श्रॉफ ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर PM मोदी के साथ तस्वीर शेयर की और लिखा, “हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई!”

पीएम मोदी के जन्मदिन पर बीजेपी उनके 25 साल के जन-सेवा कार्य के उपलक्ष्य में ‘सेवा संकल्प अभियान’ शुरू करेगी। इससे पहले 9 सितंबर को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने पार्टी मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए घोषणा की थी कि पीएम मोदी 7 अक्टूबर को जन-सेवा के 25 साल पूरे करेंगे और इस मौके पर बीजेपी एक महीने तक चलने वाला विशेष अभियान ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलाएगी।

पिथौरागढ़ में भारत के बनाए पुल पर नेपाल की आपत्ति:कहा- बोर्ड पर नाम बदलें, यह हमारा इलाका; पुल चालू होने से बचेगा 200km का सफर

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में धारचूला के पास काली नदी पर बने भारत-नेपाल मोटर पुल के स्वागत बोर्ड को लेकर दोनों देशों की सीमा पर विवाद खड़ा हो गया है। पुल के नेपाल वाले हिस्से में लगाए गए बोर्ड पर भारतीय क्षेत्र के गांव ‘छारछुम’ का नाम लिखे जाने पर नेपाल ने आपत्ति जताई है। नेपाली पक्ष का कहना है कि नेपाल की जमीन पर लगे बोर्ड में भारतीय पता नहीं, बल्कि नेपाल के संबंधित क्षेत्र का नाम होना चाहिए। 32.98 करोड़ रुपए की लागत से बने इस पुल का पूरा खर्च भारत ने उठाया है, जबकि इसका दूसरा छोर नेपाल में है। आपत्ति के बाद भारत की तरफ से नाम ढक दिया गया है। पिथौरागढ़ से नेपाल जाने के लिए अब तक कोई मोटर पुल नहीं होने के कारण लोगों को करीब 200 किलोमीटर दूर बनबसा जाना पड़ता था। इससे समय और खर्च दोनों बढ़ते थे। छारछुम पुल शुरू होने के बाद धारचूला से नेपाल के सीमावर्ती इलाकों तक सड़क संपर्क आसान होगा और आवाजाही के साथ व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। विवाद से जुड़ी दो तस्वीरें- 5 पॉइंट में पूरी खबर… 1. उद्घाटन से पहले बोर्ड पर विवाद- पिथौरागढ़ के धारचूला में छारछुम के पास काली नदी पर भारत और नेपाल को जोड़ने वाला मोटर पुल बनकर तैयार है। संचालन शुरू होने से पहले नेपाल की ओर लगाए गए स्वागत बोर्ड को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। नेपाली हिस्से में लगे बोर्ड पर भारतीय क्षेत्र के गांव ‘छारछुम’ का नाम लिखे जाने पर स्थानीय स्तर पर आपत्ति जताई गई है। 2. नेपाली हिस्से में भारतीय गांव का नाम लिखने पर आपत्ति- नेपाल की ओर लगे ‘वेलकम टू नेपाल’ बोर्ड पर ‘काली नदी, छारछुम’ लिखा गया है। नेपाल के स्थानीय नागरिकों और राजनीतिक दलों ने इस पर आपत्ति जताते हुए बोर्ड पर नेपाली क्षेत्र का नाम लिखने की मांग की है। नेपाल की ओर इस स्थान का पता महाकाली नगरपालिका-8, असिगड़ा, दार्चुला बताया गया है। मामले की जानकारी नेपाल के परराष्ट्र मंत्रालय और जिला प्रशासन को भी दी गई है। 3. आपत्ति के बाद भारतीय पक्ष ने सुधार का दिया आश्वासन- स्थानीय स्तर पर आपत्ति के बाद भारतीय पक्ष की ओर से बोर्ड में सुधार का आश्वासन दिए जाने की बात सामने आई है। धारचूला के एसडीएम आशीष जोशी के अनुसार, नेपाल की ओर लगे बोर्ड में भारतीय गांव के नाम को ढक दिया गया है। वहां नेपाल के स्थानीय क्षेत्र का नाम दर्ज करते हुए नया बोर्ड लगाए जाने की तैयारी है। 4. 2022 में शिलान्यास, ₹32.98 करोड़ की लागत- मल्ला छारछुम में काली नदी पर बने इस करीब 110 मीटर लंबे मोटर पुल का शिलान्यास सितंबर 2022 में किया गया था। इसकी निर्माण लागत 32 करोड़ 98 लाख रुपए है। भारत सरकार के अनुसार, फरवरी 2022 में भारत और नेपाल के बीच महाकाली नदी पर मोटरेबल पुल बनाने के लिए समझौता हुआ था। परियोजना का वित्तीय सहयोग भारत सरकार की अनुदान सहायता के तहत किया गया है। 5. 200 KM का चक्कर बचेगा, व्यापार को भी बढ़ावा- पिथौरागढ़ जिले में भारत-नेपाल के बीच मोटर पुल नहीं होने के कारण वाहनों से नेपाल जाने के लिए लोगों को करीब 200 किलोमीटर दूर बनबसा जाना पड़ता था। छारछुम पुल शुरू होने के बाद धारचूला से नेपाल के सीमावर्ती इलाकों तक सड़क संपर्क आसान होगा। इससे यात्रा का समय और खर्च कम होने के साथ व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। पिथौरागढ़ की नेपाल से करीब 275 किलोमीटर लंबी सीमा लगती है और दोनों देशों के बीच आवाजाही के लिए जिले में 10 अंतरराष्ट्रीय झूलापुल भी हैं। ————————————– ये खबर भी पढ़ें… टनल के अंदर चार मंजिला बिल्डिंग, बिना ऑक्सीजन फंसे मजदूर:माउंट एवरेस्ट विजेता रेस्क्यू में जुटे; कहीं बिना सिर की बॉडी, कहीं सिर्फ पैर मिला ‘मैं टनल में रेस्क्यू के लिए घुसा, तो दलदल में धंसने लगा। जितना हिलता, उतना ही धंसता गया। फिर समझ आया कि यहां जमीन ही निगल रही है। मैं कमर तक धंसा था। निकलने में करीब 1 घंटे लग गए। रसुवा की इस टनल में जो देखा, ऐसा अनुभव पहले कभी नहीं हुआ।’ ये बता रहे माउंटेन गाइड विक्रम कर्के रसुवा की टनल में चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन का हिस्सा हैं। वे चिलिमे, त्रिशूली-1 और त्रिशूली-3 A टनल के रेस्क्यू में शामिल हैं, जहां 100 से ज्यादा लोग फंसे हुए हैं। इन्हें निकालने के लिए नेपाल और भारतीय सेना समेत कई देशों की रेस्क्यू टीमें जुटी हैं। टनल के अंदर का हाल बताते हुए विक्रम कहते हैं, ‘मशीनों के बिना यहां फंसे लोगों तक पहुंचना मुश्किल है। विक्रम ने हमें रेस्क्यू की पूरी कहानी बताई…(पढ़ें पूरी खबर)

Nepal Flood Alert: नेपाल में फिर मंडराया बाढ़ का खतरा, दारचुला में लैंडस्लाइड से चौलानी नदी का रास्ता रुका; हाई अलर्ट पर प्रशासन

Nepal Flood: नेपाल 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ से हुए नुकसान से अभी पूरी तरह उबर भी नहीं पाया है कि अब एक और चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। नेपाल के दारचुला जिले में बड़े लैंडस्लाइड के बाद चौलानी नदी का बहाव कुछ समय के लिए प्रभावित हुआ है। इसके चलते प्रशासन ने नदी के आसपास और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। अधिकारियों ने अचानक पानी बढ़ने और बाढ़ जैसी स्थिति पैदा होने की आशंका को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने को कहा है। लोगों से कहा गया है कि वे नदी के पास जाने से बचें और किसी भी खतरे की स्थिति में सुरक्षित जगह पर चले जाएं।

भट्टर इलाके में हुआ लैंडस्लाइड

नेपाल के दारचुला जिले के अपी हिमाल रूरल म्युनिसिपैलिटी के भट्टर इलाके में लैंडस्लाइड की वजह से बड़ी मात्रा में मलबा चौलानी नदी में जा गिरा है। इससे नदी का पानी कुछ समय के लिए रुक गया है। प्रशासन को आशंका है कि अगर आगे और लैंडस्लाइड हुआ तो नदी का रास्ता पूरी तरह बंद हो सकता है। ऐसे में अचानक पानी का बहाव बढ़ने से निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है। प्रशासन ने चौलानी नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। सुरक्षा कर्मियों को भी संवेदनशील इलाकों में तैनात किया गया है, ताकि लोगों को समय पर जानकारी दी जा सके और जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद पहुंचाई जा सके।

प्रशासन रखें है नजर

सुदूरपश्चिम के मुख्यमंत्री खगराज भट्ट ने अधिकारियों और सुरक्षा एजेंसियों को पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पहले से तैयारी रखने को कहा है। प्रशासन ने बाढ़ या किसी अन्य आपदा की स्थिति में लोगों की मदद के लिए इमरजेंसी फोन नंबर भी जारी किए हैं। आर्म्ड पुलिस फोर्स के मुताबिक, फिलहाल चौलानी नदी का पानी नॉर्मल लेवल पर बह रहा है। इसके बावजूद सुरक्षा टीम को बलांच इलाके में तैनात किया गया है, ताकि नदी की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सके और खतरा बढ़ने पर आसपास के लोगों को समय रहते जानकारी दी जा सके।

प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव काम जारी

चौलानी नदी को चमेलिया नदी के नाम से भी जाना जाता है। यह अपी हिमाल क्षेत्र से निकलकर आगे महाकाली नदी में जाकर मिलती है, जो नेपाल और भारत की सीमा का हिस्सा है। नेपाल के कई हिस्से पहले से ही बाढ़ और अचानक आई बाढ़ से प्रभावित हैं। हाल की बारिश और बाढ़ के कारण कई लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा है और जान-माल का भी नुकसान हुआ है। प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव का काम अभी जारी है। ऐसे में चौलानी नदी के बहाव में आई रुकावट ने चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि अगर फिर से तेज बारिश होती है तो नदी का पानी अचानक बढ़ सकता है और स्थिति गंभीर हो सकती है।

ओरछा में रामराजा लोक के निर्माण कार्यों का CM डॉ. मोहन यादव ने लिया जायजा, स्थानीय दुकानदारों से किया संवाद

ओरछा में रामराजा लोक के निर्माण कार्यों का CM डॉ. मोहन यादव ने लिया जायजा, स्थानीय दुकानदारों से किया संवाद

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ओरछा को पर्यटन के अद्भुत केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। ओरछा का राम राजा मंदिर हमारे गौरवशाली अतीत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संपदा है। यहां के मंदिर एवं महल तत्कालीन समृद्ध स्थापत्य के प्रत्यक्ष उदाहरण हैं, जो हमें हमारी प्राचीन धरोहर और संस्कृति से जोड़े रखते हैं। ये तत्कालीन उन्नत तकनीक और स्थापत्य के भी अद्भुत उदाहरण हैं, पहले एअर कंडीशनर नहीं होते थे, लेकिन यहां के भवन वातानुकूलित बने है, जो गर्मी में ठंडे और ठंड में गर्मी का एहसास कराते हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज ओरछा स्थित ऐतिहासिक एवं आस्था के प्रमुख केन्द्र श्री रामराजा लोक में जारी निर्माण कार्यों का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने  निर्माण कार्यों की प्रगति की जानकारी लेते हुए संबंधित अधिकारियों को कार्यों को गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निरीक्षण के बाद मीडिया से चर्चा में यह विचार-व्यक्त किए।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्माणाधीन रामराजा लोक परिसर में विभिन्न प्रतिष्ठानों का निरीक्षण करते हुए प्रतिष्ठान संचालकों से संवाद किया तथा उनकी समस्याओं और सुझावों को सुना। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को प्राप्त समस्याओं के निराकरण के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जुझार सिंह महल में चल रहे निर्माण तथा जीर्णोद्धार कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने जहांगीर महल का भ्रमण कर यहां की ऐतिहासिक एवं समृद्ध स्थापत्य कला का अवलोकन भी किया।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव को निरीक्षण के दौरान आर्किटेक्ट द्वारा मंदिर परिसर स्थित प्राचीन एवं ऐतिहासिक ‘सावन-भादो’ स्तंभों के संरक्षण एवं उनके स्थापत्य महत्व के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। बताया कि रामराजा लोक की संरचना एवं विकास कार्यों को आकार देते समय मंदिर परिसर की प्राचीन धरोहरों, विशेषकर ‘सावन-भादो’ स्तंभों के मूल स्वरूप एवं ऐतिहासिक महत्व का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। बुंदेलखंड की विशिष्ट स्थापत्य कला के प्रतीक इन प्राचीन स्तंभों की संरचना एवं निर्माण शैली अपने समय की उन्नत तकनीक को दर्शाती है। नए निर्माण कार्यों के दौरान इन प्राचीन संरचनाओं को किसी प्रकार की क्षति नही पहुंचे, इसका विशेष ध्यान रखते हुए उनके आसपास के क्षेत्र को व्यवस्थित, सुंदर एवं श्रद्धालुओं के लिए सुगम बनाया जा रहा है।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे गौरवशाली बुन्देला राजाओं का ओरछा बुंदेलखंड की राजधानी के रूप पहचाना जाता था। यहां के प्राचीन महल और भवन, हमारी समृद्ध विरासत हैं, उसे जीवंत करने के लिए सरकार काम कर रही है। तत्कालीन समय में निर्माण कार्यों में जिस प्रकार की सामग्री लगाई जाती थी, उसी सामग्री से भवनों का जीर्णोद्धार कराया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य यह है कि हमारे गौरवशाली अतीत के प्रतीक ये भवन उसी स्वरूप में दिखें जिस स्वरूप में वह वर्षों पहले थे। इसके लिए हमारे अधिकारियों के नेतृत्व और मार्गदर्शन में कुशल कारीगर काम कर रहे हैं।

 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि श्री महाकाल महालोक के निर्माण के बाद उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, उज्जैन की अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है। इसी तर्ज पर मध्यप्रदेश के प्रमुख तीर्थस्थलों जैसे ओरछा, चित्रकूट, दतिया, नलखेड़ा, पशुपतिनाथ मंदसौर आदि का भी समग्र विकास किया जा रहा है। इससे धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहन मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

भगवान श्रीराम ने अपने 14 वर्ष के वनवास में, लम्बी अवधि चित्रकूट में व्यतीत की। भगवान श्रीकृष्ण की जहां शिक्षा भी हुई, उज्जैन के सांदीपनि आश्रम सहित भगवान श्रीकृष्ण की जहां-जहां लीलाएं हुईं, उन सब स्थानों को तीर्थ के रूप में विकसित किया जाएगा। हमारी गौरवशाली विरासत को धार्मिक सांस्कृतिक भावनाओं के अनुरूप आने वाली पीढ़ियों से जोड़ने और उन्हें इस अतीत से परिचित कराने के लिए विभिन्न गतिविधियां संचालित हैं, इन्हें संरक्षित करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। ओरछा में भव्य श्री रामराजा लोक का निर्माण किया जा रहा है, जो आने वाले समय में देश-दुनिया के श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख तीर्थस्थल बनेगा।

सीएम डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन के वाल्मीकि आश्रम में की छड़ी पूजा, प्रदेशवासियों के लिए मांगी सुख-समृद्धि

सीएम डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन के वाल्मीकि आश्रम में की छड़ी पूजा, प्रदेशवासियों के लिए मांगी सुख-समृद्धि

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को उज्जैन स्थित वाल्मीकि धाम आश्रम पहुंचे। उन्होंने भुजरिया पर्व के अवसर पर यहां विधि-विधान से छड़ी पूजन भी किया। उन्होंने प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, शांति एवं खुशहाली की कामना की और शुभकामनाएं दीं। 

 

इस मौके पर सीएम डॉ. यादव ने कहा कि हमारे लिए यह सौभाग्य की बात है कि आज भुजरिया पर्व के पावन अवसर पर उज्जैन स्थित बाबा महाकाल की नगरी से भगवान जाहरवीर गोगादेव जी महाराज के ध्वज-चिह्न की शोभायात्रा निकलेगी। उज्जैन की पावन धरती से पूरे देश में सामाजिक समरसता और एकता का संदेश जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज हम अपने गौरवशाली अतीत और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को पुनः जीवंत कर रहे हैं। 

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश हर क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर रहा है और इसके साथ ही आध्यात्मिक चेतना का भी विस्तार हो रहा है। भुजरिया पर्व हमारी लोक परंपराओं, आस्था और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। मेरी ओर से समस्त प्रदेशवासियों को भुजरिया पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं। यह पर्व सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली लेकर आए, यही कामना है।

अक्षय खन्ना शादी और बच्चों को ‘लाइफस्टाइल में बहुत बड़े बदलाव’ मानते हैं, बोले- ‘मैं अपनी जिंदगी पर पूरा कंट्रोल चाहता हूं’

मशहूर स्टार अक्षय खन्ना ने खुलकर बताया है कि उन्होंने कभी शादी क्यों नहीं की। उनका कहना है कि बात कमिटमेंट की नहीं, बल्कि शादी के बाद जैसी ज़िंदगी जीनी पड़ती है, उसकी है। 2019 में हिंदुस्तान टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में एक्टर ने कहा था कि उन्हें अपनी पर्सनल ज़िंदगी पर अपना कंट्रोल बनाए रखना पसंद है और वे इसे छोड़ना नहीं चाहते।

अक्षय खन्ना ने बताया कि उन्होंने कभी शादी क्यों नहीं की

जब अक्षय से पूछा गया कि क्या वे भविष्य में शादी करने के बारे में सोचते हैं, तो उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि वे उस तरह की जिंदगी के लिए सही हैं। उन्होंने कहा कि शादी का मतलब होगा अपनी मौजूदा जीवनशैली में बड़े बदलाव करना और अपनी जिंदगी का कंट्रोल किसी और के साथ शेयर करना।

“मैं खुद को शादी करते हुए नहीं देखता, मैं शादी के लिए सही इंसान नहीं हूं। मैं उस तरह की ज़िंदगी के लिए नहीं बना हूं। यह एक कमिटमेंट है, लेकिन जीवनशैली में बहुत बड़ा बदलाव भी है। शादी सब कुछ बदल देती है। मैं अपनी ज़िंदगी पर पूरा कंट्रोल चाहता हूं। जब आप किसी और के साथ अपनी ज़िंदगी शेयर करते हैं, तो आपका पूरा कंट्रोल नहीं रहता। आपको बहुत सारा कंट्रोल छोड़ना पड़ता है। आप एक-दूसरे की ज़िंदगी शेयर करते हैं।”

एक्टर से यह भी पूछा गया कि क्या शादी का फैसला उनके निजी स्वभाव की वजह से लिया गया है। उन्होंने कहा कि उनके इस फैसले के पीछे कोई खास घटना या वजह नहीं थी और वे हमेशा से ऐसे ही रहे हैं, बचपन से ही।

उन्होंने बच्चे गोद लेने की बात भी खारिज कर दी

अक्षय से पूछा गया कि अगर वे शादी नहीं करते हैं तो क्या वे बच्चे गोद लेने के बारे में सोचेंगे। उन्होंने वैसा ही जवाब दिया, यह कहते हुए कि वे बच्चों की परवरिश के साथ आने वाली जीवनशैली में बदलाव भी नहीं चाहते। “मैं उस ज़िंदगी के लिए नहीं बना हूं। अपनी ज़िंदगी शेयर करने के लिए। चाहे शादी हो या बच्चे। वह भी आपकी ज़िंदगी को पूरी तरह बदल देता है।

आपके लिए जो चीजें ज़रूरी होती हैं, वे कम जरूरी हो जाती हैं, क्योंकि बच्चा सबसे ज़्यादा ज़रूरी हो जाता है। उस तरह के बदलाव ज़िंदगी में आते हैं… और अपनी ज़िंदगी में उस तरह के बदलाव करना मैं नहीं चाहता। मैं समझौता करने को तैयार नहीं हूं। मुझे नहीं लगता कि भविष्य में भी मैं ऐसा करने को तैयार होऊंगा।”

‘धुरंधर’ और ‘धुरंधर: द रिवेंज’ के बाद, अक्षय खन्ना ‘इक्का’ में नज़र आए। उनका अगला प्रोजेक्ट ‘महाकाली’ है, जो प्रशांत वर्मा सिनेमैटिक यूनिवर्स का हिस्सा है। अक्षय इसमें शुक्राचार्य का किरदार निभा रहे हैं और इसकी पहली झलक 24 अगस्त, 2026 को दिखाई जाएगी।

महाकाल मंदिर में 1000 से ज्यादा जूतों के ढेर में खो गया जूता, ChatGPT ने चुटकियों में खोज निकाला

महाकाल मंदिर में 1000 से ज्यादा जूतों के ढेर में खो गया जूता, ChatGPT ने चुटकियों में खोज निकाला

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कभी-कभी किसी छोटी-सी परेशानी का हल ऐसी जगह से मिल जाता है, जिसके बारे में हमने सोचा भी नहीं होता। उज्जैन के महाकाल मंदिर में दर्शन करने गए शुभांग बोरकर का जूता गूम गया। सामने 1000 से ज्यादा जूते चप्पल थे। ऐसे में उसके लिए अपना जूता खोजना बेहद मुश्किल भरा था। इस पर उसने AI की मदद से और कुछ ही देर में उसका जूता मिल भी गया।

 

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। वायरल हो रहे वीडियो को Shubhang borkar नाम के शख्स ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया है। वीडियो में वो उज्जैन के महाकाल मंदिर के बाहर दिखाई देने वाले जूतों के ढेर के बीच अपना जूता ढूंढने की कोशिश करते नजर आते हैं। यहां इतने ज्यादा जूते रखे हुए थे कि यह समझना मुश्किल था कि इनमें उनका जूता आखिर कौन सा है?

जूते की फोटो लेकर ChatGPT से मांगी मदद

शुभांग ने अपने जूतों की फोटो और जूतों के ढेर की तस्वीर ChatGPT के साथ शेयर की। उन्होंने AI को अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि वह उज्जैन के महाकाल मंदिर आए हैं और बाहर रखे ढेर सारे जूतों में से अपना जूता पहचानना मुश्किल हो रहा है।

 

वीडियो के मुताबिक, ChatGPT ने जूतों की तस्वीर को देखकर उनसे कुछ सवाल पूछे। जूते के रंग, डिजाइन और दूसरी पहचान से जुड़ी जानकारी के आधार पर AI ने तस्वीर में उनके जूते को पहचानने में मदद की। 

 

आमतौर पर लोग ChatGPT का इस्तेमाल सवालों के जवाब जानने, लिखने-पढ़ने, जानकारी हासिल करने या किसी काम में मदद लेने के लिए करते हैं। बहरहाल जूता ढूंढने जैसे रोजमर्रा के काम में AI का इस्तेमाल देखकर सोशल मीडिया यूजर्स भी हैरान हैं।

 

‘फूलों का तारों का…,’ गाते-गाते सीएम डॉ. मोहन ने लाड़ली बहनों को दिया गिफ्ट, 1500 के साथ मिला 250 रुपये का शगुन

'फूलों का तारों का...,' गाते-गाते सीएम डॉ. मोहन ने लाड़ली बहनों को दिया गिफ्ट, 1500 के साथ मिला 250 रुपये का शगुन

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवरा को प्रेम के अलग ही रंग में रंगे नजर आए। उन्होंने मैहर जिले में आयोजित कार्यक्रम में लाड़ली बहनों को विख्यात गाना 'फूलों का तारों का सबका कहना है..,' सुनाया और उनके खातों में 2148 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए। इस तरह राज्य की 1.25 करोड़ से ज्यादा लाड़ली बहनों को 1500 रुपये के साथ-साथ राखी का 250 रुपये का शगुन भी मिला। 

इसके अलावा सीएम डॉ. मोहन यादव ने 256 करोड़ से अधिक लागत के विकास कार्यों लोकार्पण एवं भूमि-पूजन भी किया। उन्होंने लाड़ली बहनों पर पुष्प वर्षा भी की और हितग्राहियों को हितलाभ वितरिए किया। उन्होंने यहां कई विभागों की प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। दूसरी ओर, जनअभियान परिषद की सखियों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को विशाल राखी भेंट की। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कई घोषणाएं भी कीं। 

 

इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हमारी सरकार हर महीने बहनों को लाड़ली बहना योजना की राशि प्रदान करती है। राखी त्योहार तो साल में एक बार आता है, लेकिन हम हर महीने इस उत्सव को मनाते हैं। आज लाड़ली बहनों के प्रेम को देखकर, उनकी संख्या देखकर आनंद आ रहा है। मैहर मां शारदा का अद्भुत स्थान है। बड़े लड़ैया महुआ वाले, जिनकी मार सही न जाए, एक को मारे दो मर जाए, तीसरा धौंस खाए मर जाए। सीएम डॉ. यादव ने कहा कि मां शारदा के अनन्य भक्त आला की अमरता की कहानी आज भी जीवंत है। जब तक आला दर्शन नहीं कर लेते, मां को भी आनंद नहीं आता। सनातन संस्कृति भी अपने आप में अद्भुत है।

उन्होंने कहा कि हमारे तीज-त्योहारों की वजह से हमारे कुटुम्ब जीवित हैं। हमारी संस्कृति में पूरी वसुधा को परिवार माना गया है। हम अपने पेड़-पौधे-नदी-पहाड़, सबको परिवार का हिस्सा मानते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरा देश दुनिया के सामने सिर ऊंचा करके खड़ा है। पिछले साल आतंकवादियों ने माताओं-बहनों के सिंदूर पर हाथ डालने का प्रयास किया, उस वक्त हमारे प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सेना ने दुश्मन के घर में घुसकर मारने का रिकॉर्ड बनाया। हमारी सेना हर तरह से दुश्मन से निपटने में सक्षम है।

बहनों को दिया अतिरिक्त उपहार-मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज मेरे दोनों हाथों में प्रेम का धागा है। मैं सौभाग्यशाली हूं। आज मैं मन में क्या महसूस कर रहा हूं, बताना मुश्किल है। मेरी सरकार और आपका जो संबंध है, वो अद्भुत है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के लोग दुर्भावना रखते हैं। हम जब भी लाड़ली बहनों को योजना की राशि ट्रांसफर करते हैं, तब कांग्रेसी हमें टोकते हैं। कांग्रेसी कहते हैं कि लाड़ली बहनों के खातों में पैसे मत डालो, ये शराब पी जाती हैं। कांग्रेसियों को डूब मरना चाहिए। सीएम डॉ. मोहन ने बहनों से अपील की, कि कांग्रेस की इस बात को गांठ बांधकर रखना। जिस दिन चुनाव आए, उस दिन कांग्रेस को बताना कि उसने क्या अपराध किया है। उनका हिसाब चुकता करना। लाड़ली बहनों का अपमान कोई बर्दाश्त नहीं करेगा।

उन्होंने कहा कि हमने चुनाव के पहले जो वादा किया और अभी तक हम महीने आपके खातों में राशि आ रही है। उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी एक बार जो वचन देती है, उसे निभाती है। आज मुझे वो गीत याद आ रहा है, 'फूलों का तारों का कहना है, सबका कहना है, एक हजार में मेरी बहना है….'। हमारी सरकार को 1.25 करोड़ बहनों का आशीर्वाद मिल रहा है। आज हमारी सरकार ने नियमित राशि के अलावा 250 रुपये अतिरिक्त सावन के महीने का उपहार दिया है। 

 

बहनें परिवार को बांधे रखती हैं-मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बहनों से निवेदन किया कि ये राशि जब आपको मिले, तो अपने भाइयों को मिठाई खिलाना और टीका करना। मैं समझूंगा कि टीका मुझे लगा। मुझे आपका आशीर्वाद मिल गया। हमारी माताओं-बहनों में जो हिम्मत है, वो पुरुष में नहीं है। वे अपना परिवार छोड़कर अंजान परिवार को अपना भविष्य समर्पित कर देती हैं। उन्होंने कहा कि एक बार विश्व हिंदू परिषद का सम्मेलन विदेश में हुआ। उस समय मार्गरेट थ्रेचर वहां की प्रधानमंत्री थीं। उन्होंने सम्मेलन में कहा कि भारत और लंदन में सबसे बड़ा अंतर कुटुम्ब परंपरा का है। आपके ऋषि-मुनियों ने परिवार की जो परंपरा खड़ी की है, इसकी धुरी माता है। माता अपने सारे बच्चों से जिस प्रकार प्रेम करती है, वह अद्भुत है। मां अपना पेट काटकर बच्चों की सारी मांग पूरी करती है। घर में भले कमाने वाला एक हो, लेकिन मां सबकी पूर्ति करती है। हमको खिलाते-खिलाते मां का पेट भर जाता है। यह संस्कृति केवल भारत में ही है। हमारी संस्कृति त्याग-परिवार की परंपरा को लेकर चलती है।

उन्होंने कहा कि हम लगातार विकास कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2022 के बाद महाकाल लोक का लोकार्पण किया। उससे हमारा पूरा जिला बदल गया। हमने देव स्थान को धार्मिक स्थल बनाने का फैसला किया है। हमारी सरकार स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आय बढ़ाने का काम कर रही है। हमने फैसला किया है कि जो भी उद्योग बहनों को मौका देगा, वहां सरकार उसे प्रति बहन 5 हजार रुपये देगी। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार के लिए स्लोगन है, सच्चा वादा पक्का काम-प्रेम से बोलो सीताराम। चित्रकूट में हमने 3 हजार करोड़ से ज्यादा के काम मंजूर किए हैं। अब मां मैहर के लोक के पहले फेज का भूमि-पूजन आज यहां हुआ है। कल कैबिनेट में हमने फैसला किया कि लाड़ली बहनों को आने वाले 5 साल तक राशि देंगे। बहनें इस राशि से सिलाई मशीन खरीदती हैं, ब्यूटी पार्लर चलाती हैं। बहने इस राशि से परिवार की पूर्ति करती हैं। 

 

कांग्रेस को लिया आड़े हाथ-मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पहले नक्सलियों को खत्म किया, और अब नशा विरोधी अभियान चला रहे हैं। हमारी सरकार ने 19 धार्मिक शहरों में शराब की दुकानें बंद की हैं। भविष्य की पीढ़ियों को बचाने के लिए, हर तरह के नशे के खिलाफ लड़ने के लिए हमारी सरकार संकल्पबद्ध है। परिवार के परिवार नशे की वजह से बर्बाद हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि आप बच्चों को पढ़ाओ-लिखाओ, बड़ा अधिकारी बनाओ, लेकिन नशे के मामले में उसे सावधान करो। उन्होंने कहा कि पहले कहा जाता था कि मां नर्मदा विंध्याचल पर्वत की तरह आ नहीं सकती है, उसे लाने के लिए नहर बनाई जा रही थी। जिस मशीन से नहर बन रही थी, वह कंपनी ही बंद हो गई। मशीनें खराब हो गईं। यह योजना बंद होने के कगार पर थी। लेकिन, हमने कहा कि खुशहाली के लिए इस इलाके में पानी आना जरूरी है। 2 हजार करोड़ की योजना 800 करोड़ से शुरू हुई। हमने कहा कि इसके लिए पैसे की कोई कमी नहीं है। मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि अब वो नहर पूरी हो गई है।

उन्होंने कहा कि अब इस क्षेत्र के हर गांव में नर्मदा का पानी पहुंचेगा। हमने फैसला किया कि किसानों को खाते पलटाने नहीं पड़ेंगे। इसके अलावा आने वाली फसल के समय सरकार दिन में बिजली देगी। जिन-जिन गरीबों के मकान रह गए हैं, उनका मकान बनेगा। मैहर में कलेक्टर सहित 16 बड़े पदों पर बहने हैं। 


मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि अगर कांग्रेसी अनुचित आचरण नहीं करते, तो विधानसभा में भी बहनों के लिए 33 फीसदी का आरक्षण हो जाता। कांग्रेस को पता नहीं किस बात का डर है। अगर माताएं-बहनें लोकसभा-विधानसभा में आएंगी तो क्या गलत हो जाएगा।    

 

सीएम ने की ये प्रमुख घोषणाएं

– मैहर में 25 करोड़ की लागत से आधुनिक स्टेडियम बनेगा।

– लिलजी जलाशय का 50 करोड़ की लागत से नवीकरण किया जाएगा। 

– मैहर में बड़ा अस्पताल बनाया जाएगा।

– मैहर में 5000 गौवंश क्षमता की बड़ी गौशाला बनेगी।

– मैहर में आईटीआई संस्थान बनेगा, स्कूलों का उन्नय किया जाएगा।

– आल्हा गायकों की समितियों को 25-25 हजार रुपए देने की घोषणा।