Upcoming IPO: जुलाई के आखिर तक आएंगे 5 बड़े IPO, कंपनियां जुटाएंगी ₹15000 करोड़

Upcoming IPO: पिछले दो महीनों से रफ्तार पकड़ रहा भारत का IPO बाजार अब और गर्म होने वाला है। अगले हफ्ते SBI Funds Management का IPO खुलने के बाद जुलाई के अंत तक 5 और बड़ी कंपनियां शेयर बाजार में दस्तक दे सकती हैं। सूत्रों के मुताबिक, ये कंपनियां मिलकर करीब ₹15,000 करोड़ जुटाने की तैयारी में हैं।

कौन-कौन से IPO आएंगे?

जुलाई के अंत तक जिन कंपनियों के IPO आने की उम्मीद है, उनमें शामिल हैं…

  • Caliber Mining & Logistics
  • Milky Mist Dairy Foods
  • Juniper Green Energy
  • Lohia Corp
  • Manipal Health Enterprises

जून और जुलाई में बढ़ी रफ्तार

जून में 7 IPO आए थे, जिनके जरिए कंपनियों ने ₹2,718 करोड़ जुटाए। वहीं जुलाई में अब तक Knack Packaging, Kusumgar और Laser Power & Infra के IPO लॉन्च हो चुके हैं।

अगले हफ्ते SBI Funds Management और Alpine Texworld के IPO भी खुलने वाले हैं।

किस कंपनी का IPO कितना बड़ा होगा?

  • Caliber Mining & Logistics करीब ₹500-600 करोड़ जुटा सकती है। यह देश की शीर्ष 10 कोयला खनन सेवा कंपनियों में शामिल है।
  • Milky Mist Dairy Foods का IPO करीब ₹2,000 करोड़ का हो सकता है। यह तमिलनाडु की प्रमुख डेयरी कंपनी है।
  • Juniper Green Energy करीब ₹1,800 करोड़ जुटाने की तैयारी में है। पहले इसका IPO ₹3,000 करोड़ का प्रस्तावित था, लेकिन अब इसका आकार घटा दिया गया है।
  • Lohia Corp करीब ₹500 करोड़ का ऑफर फॉर सेल (OFS) लाएगी। कंपनी टेक्निकल टेक्सटाइल मशीनरी बनाने वाली दुनिया की प्रमुख कंपनियों में शामिल है।
  • Manipal Health Enterprises का IPO सबसे बड़ा हो सकता है। कंपनी करीब ₹9,500 करोड़ जुटाने की तैयारी में है। यह Manipal Hospitals चेन का संचालन करती है।

Zepto भी एंट्री कर सकती है

बेंगलुरु की Tonbo Imaging और मध्य प्रदेश की Symbiotec Pharmalab भी जुलाई के आखिरी या अगस्त के पहले हफ्ते में IPO ला सकती हैं। हालांकि, इनके इश्यू का साइज पहले की योजना से छोटा हो सकता है।

इसके अलावा Zepto भी IPO की कतार में शामिल हो सकती है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि कंपनी पहले के मुकाबले कम वैल्यूएशन पर बाजार में आ सकती है।

IPO बाजार में क्यों लौटी रौनक?

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि Jio Platforms और NSE के ड्राफ्ट पेपर दाखिल होने के बाद प्राइमरी मार्केट में फिर से उत्साह बढ़ा है। इसके अलावा अमेरिका-ईरान तनाव कम होने, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार में बढ़ती खरीदारी से भी IPO बाजार को समर्थन मिल रहा है।

आमतौर पर जुलाई और अगस्त को IPO बाजार के लिए सबसे व्यस्त महीनों में गिना जाता है। ऐसे में आने वाले हफ्तों में निवेशकों को कई बड़े पब्लिक इश्यू देखने को मिल सकते हैं।

टाटा की TCS 8900 खास इंजीनियरों की टीम बनाएगी, OpenAI और माइक्रोसॉफ्ट को टक्कर देने की तैयारी

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

टाटा की TCS 8900 खास इंजीनियरों की टीम बनाएगी, OpenAI और माइक्रोसॉफ्ट को टक्कर देने की तैयारी

देश की सबसे बड़ी आईटी सर्विसेज कंपनी Tata Consultancy Services (TCS) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर बड़ा दांव लगाने की तैयारी में है। टाटा ग्रुप की यह कंपनी AI से जुड़ी नई सर्विसेज को बढ़ाने के लिए 5,900 से 8,900 तक फॉरवर्ड-डिप्लॉयड इंजीनियर्स (FDEs) की टीम तैयार करेगी। इसके साथ ही AI से जुड़ी कंपनियों को खरीदने (Acquisition) के विकल्प भी तलाश रही है।

आखिर FDE क्या होते हैं?

फॉरवर्ड-डिप्लॉयड इंजीनियर्स (FDEs) ऐसे सॉफ्टवेयर इंजीनियर होते हैं, जो सिर्फ कंपनी के ऑफिस में बैठकर कोड नहीं लिखते। वे सीधे क्लाइंट के साथ काम करते हैं और उसकी समस्याओं के हिसाब से AI या टेक्नोलॉजी सॉल्यूशन तैयार करते हैं।

अब मान लीजिए किसी बैंक को AI से अपने कस्टमर सर्विस सिस्टम को बेहतर बनाना है। ऐसे में TCS का FDE उस बैंक के साथ मिलकर काम करेगा। वह बैंक के मौजूदा सॉफ्टवेयर, डेटा और बिजनेस प्रोसेस को समझेगा। फिर AI मॉडल को उसी हिसाब से जोड़ेगा और उसे लागू करेगा।

इन इंजीनियरों का काम क्या होगा?

TCS के CEO के. कृतिवासन ने रॉयटर्स से कहा कि कंपनी अपने कुल कर्मचारियों में से 1% से 1.5% को फॉरवर्ड-डिप्लॉयड इंजीनियर बनाना चाहती है।

ये इंजीनियर सीधे क्लाइंट के साथ काम करेंगे। उनका काम कंपनियों में AI टूल्स को लागू करना, उन्हें मौजूदा सिस्टम से जोड़ना और कारोबार की जरूरत के हिसाब से AI सॉल्यूशन तैयार करना होगा।

OpenAI और Microsoft से मुकाबला

TCS की यह रणनीति ऐसे समय आई है, जब OpenAI, Anthropic और Microsoft जैसी कंपनियां भी फॉरवर्ड-डिप्लॉयड इंजीनियर्स की भर्ती बढ़ा रही हैं। इन इंजीनियरों की मदद से कंपनियां अपने ग्राहकों के यहां AI को तेजी से लागू कर रही हैं।

AI, डेटा सिक्योरिटी में अधिग्रहण की तैयारी

TCS अब AI, डेटा सिक्योरिटी और साइबर सिक्योरिटी से जुड़े अधिग्रहणों पर भी विचार कर रही है। TCS के CFO समीर सेक्सरिया ने कहा कि कंपनी ऐसे कारोबार तलाश रही है, जो उसकी रणनीतिक स्थिति को और मजबूत बना सकें।

AI से आउटसोर्सिंग मॉडल को खतरा नहीं

कई निवेशकों को डर है कि AI की वजह से आईटी कंपनियों को मिलने वाले प्रोजेक्ट कम हो सकते हैं। लेकिन TCS के CEO का मानना है कि ऐसा नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि कंपनियों को AI अपनाने के लिए ऐसे पार्टनर की जरूरत होगी, जो उनके मौजूदा सिस्टम, डेटा और प्रक्रियाओं को अच्छी तरह समझते हों। यही TCS की सबसे बड़ी ताकत है। उनके मुताबिक, यह सिर्फ कम लागत का मामला नहीं, बल्कि कंपनी के अनुभव और प्रतिभा का फायदा है।

AI कारोबार की ग्रोथ धीमी हुई

हालांकि, जून तिमाही में TCS के AI कारोबार की रफ्तार कुछ धीमी पड़ी है। पहली तिमाही में AI से होने वाली सालाना आय की ग्रोथ 13% रही, जबकि पिछली तिमाही में यह 28% थी।

CEO ने कहा कि लंबी अवधि में वह AI कारोबार में करीब 25% तिमाही-दर-तिमाही ग्रोथ देखना चाहते हैं। हालांकि, उन्होंने माना कि यह बढ़ोतरी हर तिमाही एक जैसी नहीं रहेगी।

AI पर ₹8,500 करोड़ खर्च

TCS हर साल करीब 1 अरब डॉलर (लगभग ₹8,500 करोड़) टैलेंट डेवलपमेंट और AI पर खर्च करती है। इसमें कर्मचारियों की ट्रेनिंग, AI स्किल्स डेवलप करना और नई AI तकनीकों के लिए एक्सपर्ट्स की हायरिंग शामिल है।

*रॉयटर्स से इनपुट के साथ

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

पहली LinkedIn पोस्ट और उसमें नौकरी जाने की खबर! 37 साल तक Microsoft का दिया साथ, फिर एक झटके में गई जॉब

37 साल… किसी नौकरी में बिताया गया यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि मेहनत, भरोसे और अनगिनत यादों का सफर होता है। केविन लाचैपल ने माइक्रोसॉफ्ट में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में शुरुआत की और अपनी मेहनत के दम पर Xbox प्लेटफॉर्म के वाइस प्रेसिडेंट बने। उन्होंने कंपनी के कई बड़े प्रोजेक्ट्स को नई पहचान दी, लेकिन आखिरकार एक दिन उनका भी नाम छंटनी की लिस्ट में शामिल हो गया। सबसे भावुक बात यह रही कि 21 साल पुराने LinkedIn अकाउंट पर उन्होंने पहली बार कोई पोस्ट की और वह भी अपने 37 साल लंबे करियर के खत्म होने की खबर शेयर करने के लिए।

37 साल बाद नौकरी जाने की खबर बनी Xbox VP की पहली LinkedIn पोस्ट

केविन लाचैपल ने माइक्रोसॉफ्ट में 37 साल तक काम किया और इस दौरान कंपनी की कई बड़ी कंज्यूमर टेक्नोलॉजी विकसित करने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में शुरुआत की और बाद में Xbox प्लेटफॉर्म के वाइस प्रेसिडेंट बने। उन्होंने Xbox बैकवर्ड कम्पैटिबिलिटी और क्लाउड गेमिंग जैसे कई बड़े प्रोजेक्ट्स का नेतृत्व किया। लेकिन इस बार उनकी LinkedIn पोस्ट किसी नई उपलब्धि या प्रोडक्ट लॉन्च के बारे में नहीं थी, बल्कि नौकरी जाने की खबर थी। लाचैपल ने LinkedIn पर बताया कि वे Microsoft के Xbox डिवीजन में हाल ही में हुई छंटनी का हिस्सा बने हैं। उन्होंने लिखा, “आज Xbox से निकाले गए कर्मचारियों की सूची में मेरा भी नाम शामिल हो गया। इसके साथ ही माइक्रोसॉफ्ट में मेरा 37 साल का सफर खत्म हो गया।”

37 साल बाद पहली LinkedIn पोस्ट में सुनाई अपनी कहानी

केविन लाचैपल की यह पोस्ट उनके LinkedIn अकाउंट की पहली और अब तक की इकलौती पोस्ट है। उनका अकाउंट मई 2005 में बना था, लेकिन करीब 21 साल तक उस पर कोई अपडेट नहीं किया गया। आखिरकार उन्होंने अपने लगभग चार दशक लंबे करियर के खत्म होने की जानकारी इसी पोस्ट के जरिए साझा की। माइक्रोसॉफ्ट में बिताए अपने समय को याद करते हुए लाचैपल ने कहा कि उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक Xbox की उस टीम का नेतृत्व करना था, जिसने Xbox बैकवर्ड कम्पैटिबिलिटी फीचर तैयार किया। इसकी मदद से पुराने Xbox गेम्स नए कंसोल पर भी खेले जा सकते हैं।

उन्होंने लिखा कि उनकी सबसे अच्छी यादें उन बेहतरीन इंजीनियरों के साथ काम करने की हैं, जिन्होंने इस प्रोजेक्ट को सफल बनाया। लाचैपल ने यह भी बताया कि उन्हें आज भी वह पल याद है, जब E3 2015 इवेंट में उस समय के Xbox प्रमुख फिल स्पेंसर ने पहली बार इस फीचर की घोषणा की थी। उस दौरान वह खुद भी ऑडिटोरियम में मौजूद थे।

लाचैपल ने बताया कि जब Xbox बैकवर्ड कम्पैटिबिलिटी फीचर की घोषणा की गई थी, तब दर्शकों की प्रतिक्रिया शानदार थी। उनके मुताबिक, वह पल उनके करियर की सबसे यादगार घटनाओं में से एक था। इसके बाद उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट की क्लाउड गेमिंग टीम का नेतृत्व किया। आगे चलकर यही प्रोजेक्ट ‘प्रोजेक्ट xCloud’ बना, जो Xbox की रणनीति का अहम हिस्सा बन गया। लाचैपल का मानना है कि आने वाले समय में लोग कहीं भी हों, मनोरंजन का ज्यादातर कंटेंट स्ट्रीमिंग के जरिए ही देखेंगे और इस्तेमाल करेंगे। कंपनी छोड़ते समय उन्होंने Xbox के पूर्व प्रमुख करीम चौधरी का भी धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि माइक्रोसॉफ्ट में अपने 37 साल के करियर के दौरान करीम चौधरी उनके सबसे अच्छे मैनेजर रहे।

विंडोज से लेकर Xbox क्लाउड गेमिंग तक, 37 साल का शानदार सफर

केविन लाचैपल ने तीन दशक से भी ज्यादा समय पहले माइक्रोसॉफ्ट में अपने करियर की शुरुआत की थी। Xbox प्लेटफॉर्म के वाइस प्रेसिडेंट बनने से पहले उन्होंने कंपनी के कई बड़े विभागों में काम किया और कई महत्वपूर्ण तकनीकी प्रोजेक्ट्स का हिस्सा रहे। उनके योगदान में Project xCloud को शुरू करने में अहम भूमिका निभाना, Microsoft Expression Encoder बनाने वाली टीम की स्थापना करना, HighMAT मल्टीमीडिया फॉर्मेट का सह-विकास करना, Windows के शुरुआती संस्करणों पर काम करना, Windows Movie Maker का पहला संस्करण लॉन्च करना और Xbox में वीडियो स्ट्रीमिंग व बैकवर्ड कम्पैटिबिलिटी जैसे फीचर विकसित करना शामिल है। अपने लंबे करियर के दौरान उन्हें स्ट्रीमिंग, वीडियो एडिटिंग और मल्टीमीडिया तकनीक से जुड़े 17 पेटेंट भी मिले।

माइक्रोसॉफ्ट छोड़ने से पहले लाचैपल Xbox के क्लाउड, कंसोल और पीसी प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। वह बड़ी इंजीनियरिंग टीमों का नेतृत्व करते थे और कंपनी की तकनीकी योजनाओं को बिजनेस रणनीति के साथ जोड़ने का काम करते थे।

Xbox में बड़े बदलाव के बीच गई केविन लाचैपल की नौकरी

केविन लाचैपल ऐसे समय में माइक्रोसॉफ्ट से अलग हुए हैं, जब Xbox अपने इतिहास के सबसे बड़े पुनर्गठन से गुजर रहा है। हाल ही में Xbox की सीईओ आशा शर्मा ने कर्मचारियों को बताया कि कंपनी बड़े बदलाव के तहत करीब 3,200 पद खत्म करेगी। यह Xbox के कुल कर्मचारियों का लगभग 20 प्रतिशत है। इनमें से 1,600 नौकरियां तुरंत समाप्त की जाएंगी, जबकि बाकी कटौती वित्त वर्ष 2027 तक पूरी की जाएगी। इसके अलावा कंपनी चार गेम स्टूडियो बेच रही है और एक अन्य स्टूडियो को भी अलग करने की तैयारी में है।

कर्मचारियों को भेजे गए एक संदेश में आशा शर्मा ने कहा कि कंपनी का कारोबार उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर रहा है। उन्होंने बताया कि Xbox का मुनाफा (मार्जिन) इस क्षेत्र की दूसरी कंपनियों की तुलना में काफी कम है। उन्होंने गेमिंग इंडस्ट्री में चल रही हार्डवेयर से जुड़ी चुनौतियों का भी जिक्र किया और कहा कि अब Xbox के कारोबार को नए सिरे से मजबूत करने की जरूरत है।

Microsoft Layoff News: पिछले साल 15000 की छंटनी के बाद अब फिर तैयारी, माइक्रोसॉफ्ट के इन एंप्लॉयीज पर तलवार

Microsoft Layoff News: माइक्रोसॉफ्ट बड़े पैमाने पर एक बार फिर छंटनी की तैयारी कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक माइक्रोसॉफ्ट अपने वर्कफोर्स से करीब 2.5% एंप्लॉयीज के छुट्टी की तैयारी कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से किए गए दावे के मुताबिक माइक्रोसॉफ्ट इसके बारे में अगले हफ्ते तक ऐलान कर सकती है। बता दें कि पिछले कुछ महीनों में अमेरिकी कंपनियों ने ताबड़तोड़ छंटनी शुरू की है। टेक, मीडिया और फाइनेंस सेक्टर में इसकी एक नई लहर शुरू हुई है क्योंकि ये कंपनियां अपना लागत कम कर रही हैं और साथ ही एआई इंफ्रा में भारी निवेश भी कर रही हैं।

Microsoft Layoff: किन एंप्लॉयीज पर पड़ेगा असर?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक माइक्रोसॉफ्ट में जो छंटनी होनी है, उसमें हजारों एंप्लॉयीज की छुट्टी होगी। इसकी मार सेल्स और कंसल्टिंग के साथ-साथ Xbox गेमिंग डिविजन पर भी पड़ेगी। एसईसी फाइलिंग के मुताबिक पिछले साल 30 जून 2025 तक के आंकड़ों के मुताबिक माइक्रोसॉफ्ट के करीब 2.28 लाख फुल-टाइम एंप्लॉयीज थे।

पिछले साल दो बार में 15000 की छुट्टी

इस महीने की शुरुआत में आई ब्लूमबर्ग न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार Xbox ने वैश्विक स्तर पर पार्ट्स की कमी के चलते दुनिया भर में अपने गेमिंग कंसोल की कीमतें बढ़ा दी। कंपनी ने बड़े पैमाने पर एंप्लॉयीज की छंटनी करने के साथ-साथ मार्केटिंग और अन्य चीजों पर खर्च में भारी कटौती की योजना बनाई। एक और मीडिया रिपोर्ट में सामने आया था कि माइक्रोसॉफ्ट अपने Xbox गेमिंग यूनिट को अलग करने (स्पिन ऑफ) या इसे पूरी तरह अपनी सब्सिडरी कंपनी के तौर पर रीस्ट्रक्चर करने पर विचार कर रही है। पिछले साल जुलाई 2025 में कंपनी ने कहा था कि वह अपने करीब 4% एंप्लॉयीज की छुट्टी करेगी। बता दें कि पिछले साल मई 2025 में कंपनी ने 6 हजार एंप्लॉयीज की छंटनी की थी, जिसके बाद जुलाई में भी करीब 9 हजार एंप्लॉयीज की छंटनी का ऐलान और हुआ। अब एक बार फिर इसमें छंटनी की तैयारी हो रही है।

BlackRock Layoffs: दुनिया की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी में फिर छंटनी, इस बार 200 लोगों की जाएगी नौकरी

‘जोहो का नाम लिया और 90% कम हो गई कीमत’ Zoho के को-फाउंडर ने शेयर किया किस्सा

माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस लाइसेंस की कीमत को लेकर जोहो के सह-संस्थापक श्रीधर वेम्बू का एक दावा सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। जोहो के को-फाउंडर और चीफ साइंटिस्ट श्रीधर वेम्बू ने दावा किया कि एक भारतीय कस्टमर को माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस लाइसेंस रिन्यूअल की कीमत में 90 परसेंट की कमी मिली, जब उसने सॉफ्टवेयर की बड़ी कंपनी को बताया कि वह जोहो के ऑफिस-सूट प्रोडक्ट्स को देख रही है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर की गई अपनी पोस्ट में श्रीधर वेम्बू ने बताया कि, संबंधित ग्राहक पहले से जोहो के कुछ प्रोडक्ट्स इस्तेमाल कर रहा था। उनके अनुसार, माइक्रोसॉफ्ट ने लाइसेंस रिन्यूअल साइकिल के दौरान कीमत में तेजी से बढ़ोतरी की थी। इसके बाद ग्राहक ने कंपनी को बताया कि वह जोहो के ऑफिस सॉफ्टवेयर को अपनाने पर विचार कर रहा है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुई पोस्ट

श्रीधर वेम्बू ने कस्टमर के हवाले से कहा, “माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस का एक बड़ा लाइसेंस रिन्यूअल आया और उन्होंने कीमत में भारी बढ़ोतरी कर दी। हमने उन्हें बताया कि हम जोहो ऑफिस सूट देख रहे हैं और उन्होंने कीमत में 90 परसेंट की कमी कर दी।” उन्होंने आगे कहा कि कस्टमर ने बाद में कंपनी के पैसे बचाने में मदद करने के लिए उन्हें धन्यवाद दिया, “भले ही हमारा ऑफिस सूट खरीदा न हो।” श्रीधर वेम्बू ने अपनी पोस्ट में ग्राहक की पहचान, माइक्रोसॉफ्ट के अनुबंध का आकार या छूट किन शर्तों पर दी गई, इसकी कोई जानकारी शेयर नहीं की।

उन्होंने सुझाव दिया कि जिन संस्थानों या कंपनियों का माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस लाइसेंस नवीनीकरण होने वाला है, वे बातचीत के दौरान जोहो को एक संभावित ऑप्शन के रूप में सामने रख सकते हैं। श्रीधर वेम्बू ने ये एग्जांपल तकनीकी क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा पर अपनी बात रखते हुए शेयर किया। वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नए मॉडलों को लेकर चर्चा कर रहे थे और उनका कहना था कि चीन के ओपन-सोर्स एआई मॉडल्स से बढ़ते मुकाबले के कारण बड़ी टेक कंपनियों को भी अपनी रणनीति और पेशकश में अधिक आक्रामक बदलाव करने पड़ रहे हैं।

श्रीधर वेम्बू ने कहा कि, सॉफ्टवेयर बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा का सबसे बड़ा फायदा ग्राहकों को मिलता है। उनके अनुसार, जब बाजार में कई मजबूत विकल्प मौजूद होते हैं, तो बड़ी कंपनियां मनमाने तरीके से कीमतें तय नहीं कर पातीं और ग्राहकों को बेहतर दाम व विकल्प मिलते हैं। उसी पोस्ट में श्रीधर वेम्बू ने अमेरिका में माइक्रोसॉफ्ट से जुड़े एंटीट्रस्ट मामले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि साल 2000 में एक संघीय अदालत ने कंपनी को मोनोपॉली से जुड़े मामले में दोषी माना था।

वेम्बू के मुताबिक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सॉफ्टवेयर और क्लाउड सेवाओं जैसे क्षेत्रों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बनी रहना जरूरी है, क्योंकि इससे बाजार संतुलित रहता है और ग्राहकों को बेहतर विकल्प मिलते हैं। श्रीधर वेम्बू ने दावा किया कि माइक्रोसॉफ्ट लंबे समय से अपने ग्राहकों से अधिक कीमत वसूलती रही है।