SBI Funds Management IPO: खुल गया ₹9813 करोड़ का इश्यू, ग्रे मार्केट में गिरी सेहत, निवेश से पहले जान लें ये 10 अहम बातें

SBI Funds Management IPO: देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट का ₹9813 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए आज खुल चुका है। पहले यह आईपीओ ₹11,693 करोड़ का था लेकिन प्री-आईपीओ राउंड में 30 बड़े निवेशकों से ₹1880 करोड़ जुटाने के बाद यह आईपीओ अब ₹9813 करोड़ है। यहां इस आईपीओ से जुड़ी 10 अहम बातें बताई जा रही है, जिसे जान लें और फिर आईपीओ में निवेश से जुड़ा फैसला लें।

1. प्राइस बैंड और लॉट साइज

एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के ₹9813 करोड़ के आईपीओ में ₹545-₹574 के प्राइस बैंड और 26 शेयरों के लॉट में पैसे लगा सकते हैं। एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट और एसबीआई के एंप्लॉयीज को हर शेयर ₹54 के डिस्काउंट पर मिलेगा। एसबीआई के शेयरहोल्डर्स के लिए कोई छूट नहीं है।

2. अहम डेट्स

एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट का आईपीओ आज 14 जुलाई को खुला है और 16 जुलाई को बंद होगा। आईपीओ के तहत शेयरों का अलॉटमेंट 17 जुलाई को फाइनल होगा। फिर बीएसई और एनएसई पर 21 जुलाई को एंट्री होगी।

3. एंकर बुक

आईपीओ खुलने से पहले कंपनी ने 129 एंकर निवेशकों से ₹2663 करोड़ जुटाए। इसके तहत ब्लैकरॉक, अबूधाबी इंवेस्टमेंट अथॉरिटी, मॉर्गन स्टैनले, गोल्डमैन सैक्स, सिटीग्रुप और गवर्नमेंट ऑफ सिंगापुर समेत अन्य एंकर निवेशकों को ₹574 के भाव पर 17.09 करोड़ शेयर जारी हुए हैं। इसमें से ₹991 करोड़ के 1.72 करोड़ शेयर एचडीएफसी एएमसी, एक्सिस म्यूचुअल फंड, टाटा म्यूचुअल फंड और मोतीलाल ओसवाल एएमसी समेत 23 घरेलू म्यूचुअल फंड्स को 70 स्कीम्स के जरिए जारी हुए हैं।

4. ग्रे मार्केट में स्थिति यानी GMP

ग्रे मार्केट में एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के शेयरों की स्थिति कमजोर हुई है और आईपीओ खुलने से पहले इसकी जीएमपी ₹110 तक चली गई थी। हालांकि अब यह आईपीओ के अपर प्राइस बैंड से ₹93 यानी 16.20% की GMP (ग्रे मार्केट प्रीमियम) पर है। हालांकि मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक ग्रे मार्केट से मिले संकेतों की बजाय कंपनी के फंडामेंटल्स और फाइनेंशियल के आधार पर ही निवेश का फैसला लेना चाहिए।

5. आईपीओ में कितने शेयर होंगे जारी

एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के आईपीओ के तहत कोई नया शेयर नहीं जारी होगा बल्कि ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत ₹1 की फेस वैल्यू वाले 17,09,56,631 शेयरों की बिक्री हो रही है। इसमें से 12,83,34,397 शेयर एसबीआई और 7,53,74,842 शेयर एमुंडी इंडिया होल्डिंग बेच रहा है।

6. रजिस्ट्रार

एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के आईपीओ का रजिस्ट्रार केफिन टेक है यानी कि शेयरों का अलॉटमेंट फाइनल होने के बाद इसकी साइट पर जारी अलॉटमेंट स्टेटस देख सकेंगे कि कितने शेयर मिले। इसके अलावा बीएसई की साइट पर भी स्टेटस देख सकेंगे।

7. कैसे होगा आईपीओ के पैसों का इस्तेमाल?

चूंकि यह इश्यू पीरी तरह से ऑफर फॉर सेल का है तो आईपीओ का पैसा कंपनी को नहीं मिलेगा बल्कि शेयर बेचने वाले प्रमोटर्स एसबीआई और एमुंडी इंडिया को मिलेगा।

8. कंपनी के बारे में?

AUM (एसेट्स अंडर मैनेजमेंट) के हिसाब से देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट एसबीआई म्यूचुअल फंड को मैनेज करती है। यह एसबीआई और एमुंडी का ज्वाइंट वेंचर है। यह इक्विटी फंड्स, डेट फंड्स, हाइब्रिड फंड्स, ईटीएफ और PMS (पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज) जैसे निवेश प्रोडक्ट्स ऑफर करती है। 2025 तक के आंकड़ों के मुताबिक यह र्16.32 लाख करोड़ के एसेट्स मैनेज कर रही है जोकि म्यूचुअल फंड्स को कुल एयूएम का करीब 15.5% है। दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के हिसाब से इंडिविजुअल और इंस्टीट्यूशनल मिलाकर इसके 1.60 करोड़ सब्सक्राइबर्स हैं। इसके पोर्टफोलियो में 126 म्यूचुअल फंड स्कीम्स हैं।

9. कैसी है कारोबारी सेहत?

एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के वित्तीय सेहत की बात करें तो वित्त वर्ष 2024-26 के दौरान इसका शुद्ध मुनाफा सालाना 21% से अधिक की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹3,067.38 करोड़ और टोटल इनकम भी इस दौरान 20% के सीएजीआर से उछलकर ₹4,976.11 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 के आखिरी में कंपनी के रिजर्व और सरप्लस में ₹326.73 करोड़ पड़े थे।

10. क्या है ब्रोकरेजेज का रुझान

एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के आईपीओ पर ब्रोकरेजेज का रुझान पॉजिटिव है। म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में लीडरशिप पोजिशन, एसबीआई के दमदार डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के सपोर्ट, मजबूत प्रॉफिटेबिलिटी और हाई ऑपरेटिंग मार्जिन के चलते ब्रोकरेजेज इसे लेकर बुलिश हैं। स्वास्तिक इंवेस्टमार्ट ने इसे सब्सक्राइब रेटिंग दी है तो अरिहंत कैपिटल ने भी लॉन्ग टर्म के लिए इसे सब्सक्राइब करने की सलाह दी है।

अनलिस्टेड मार्केट में निवेश आपकी पॉकेट पर पड़ सकता है भारी

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Upcoming IPO: जुलाई के आखिर तक आएंगे 5 बड़े IPO, कंपनियां जुटाएंगी ₹15000 करोड़

Upcoming IPO: पिछले दो महीनों से रफ्तार पकड़ रहा भारत का IPO बाजार अब और गर्म होने वाला है। अगले हफ्ते SBI Funds Management का IPO खुलने के बाद जुलाई के अंत तक 5 और बड़ी कंपनियां शेयर बाजार में दस्तक दे सकती हैं। सूत्रों के मुताबिक, ये कंपनियां मिलकर करीब ₹15,000 करोड़ जुटाने की तैयारी में हैं।

कौन-कौन से IPO आएंगे?

जुलाई के अंत तक जिन कंपनियों के IPO आने की उम्मीद है, उनमें शामिल हैं…

  • Caliber Mining & Logistics
  • Milky Mist Dairy Foods
  • Juniper Green Energy
  • Lohia Corp
  • Manipal Health Enterprises

जून और जुलाई में बढ़ी रफ्तार

जून में 7 IPO आए थे, जिनके जरिए कंपनियों ने ₹2,718 करोड़ जुटाए। वहीं जुलाई में अब तक Knack Packaging, Kusumgar और Laser Power & Infra के IPO लॉन्च हो चुके हैं।

अगले हफ्ते SBI Funds Management और Alpine Texworld के IPO भी खुलने वाले हैं।

किस कंपनी का IPO कितना बड़ा होगा?

  • Caliber Mining & Logistics करीब ₹500-600 करोड़ जुटा सकती है। यह देश की शीर्ष 10 कोयला खनन सेवा कंपनियों में शामिल है।
  • Milky Mist Dairy Foods का IPO करीब ₹2,000 करोड़ का हो सकता है। यह तमिलनाडु की प्रमुख डेयरी कंपनी है।
  • Juniper Green Energy करीब ₹1,800 करोड़ जुटाने की तैयारी में है। पहले इसका IPO ₹3,000 करोड़ का प्रस्तावित था, लेकिन अब इसका आकार घटा दिया गया है।
  • Lohia Corp करीब ₹500 करोड़ का ऑफर फॉर सेल (OFS) लाएगी। कंपनी टेक्निकल टेक्सटाइल मशीनरी बनाने वाली दुनिया की प्रमुख कंपनियों में शामिल है।
  • Manipal Health Enterprises का IPO सबसे बड़ा हो सकता है। कंपनी करीब ₹9,500 करोड़ जुटाने की तैयारी में है। यह Manipal Hospitals चेन का संचालन करती है।

Zepto भी एंट्री कर सकती है

बेंगलुरु की Tonbo Imaging और मध्य प्रदेश की Symbiotec Pharmalab भी जुलाई के आखिरी या अगस्त के पहले हफ्ते में IPO ला सकती हैं। हालांकि, इनके इश्यू का साइज पहले की योजना से छोटा हो सकता है।

इसके अलावा Zepto भी IPO की कतार में शामिल हो सकती है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि कंपनी पहले के मुकाबले कम वैल्यूएशन पर बाजार में आ सकती है।

IPO बाजार में क्यों लौटी रौनक?

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि Jio Platforms और NSE के ड्राफ्ट पेपर दाखिल होने के बाद प्राइमरी मार्केट में फिर से उत्साह बढ़ा है। इसके अलावा अमेरिका-ईरान तनाव कम होने, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार में बढ़ती खरीदारी से भी IPO बाजार को समर्थन मिल रहा है।

आमतौर पर जुलाई और अगस्त को IPO बाजार के लिए सबसे व्यस्त महीनों में गिना जाता है। ऐसे में आने वाले हफ्तों में निवेशकों को कई बड़े पब्लिक इश्यू देखने को मिल सकते हैं।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

IPO News: पैसों का कर लें इंतजाम! 14 जुलाई को खुलेंगे ₹10100 करोड़ के तीन आईपीओ

IPO News: 13 जुलाई से शुरू हो रहे अगले कारोबारी हफ्ते आईपीओ मार्केट में काफी रौनक रहने वाली है। तीन कंपनियों के ₹10,100 करोड़ के आईपाीओ पब्लिक सब्सक्रिप्शन के लिए खुलने वाले हैं जिसमें से एक तो एसबीआई फंड मैनेजमेंट (SBI Funds Management) मेगा आईपीओ है। इनमें से एक एसएमआई आईपीओ है जो मिलवर्क्स टेक्नोलॉजीज (Millworks Technologies) का है। ये तीनों इश्यू 14 जुलाई को पब्लिक सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा और 16 जुलाई को बंद होगा। वैसे इनके अलावा कुछ और इश्यू में भी पैसे लगाने का मौका मिलेगा जोकि अभी खुले हैं और अभी कल यानी सोमवार 13 जुलाई को बंद होंगे। जैसे कि पावर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन प्रोडक्ट्स मैन्युफैक्चरर लेजर पावर एंड इंफ्रा का ₹742 करोड़ का मेनबोर्ड आईपीओ कल बंद होगा तो एसएमई सेगमेंट में भी देवसन केटेलिस्ट और हैप्पी स्टील्स का भी आईपीओ कल बंद होगा। इनकी मार्केट में 16 जुलाई को एंट्री होगी।

तीनों आईपीओ की डिटेल्स

देश के सबसे बड़े लेंडर एसबीआई (SBI) और फ्रेंच एसेट मैनेजर एमुंडी (Amundi) की प्रमोटेड कंपनी एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट ₹9,812.91 करोड़ का आईपीओ ला रही है। इसका प्राइस बैंड ₹545-₹574 फिक्स किया गया है। इसका ऑफर साइज पहले ₹11,692.9 करोड़ का था लेकिन प्री-आईपीओ राउंड में 30 निवेशकों से फंड जुटाने के बाद एसबीआई फंड मैनेजमेंट ने आईपीओ साइज कम कर दिया है। यह इश्यू पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल का है और इसके तहत एसबीआई 9.95 करोड़ शेयर (4.89% होल्डिंग) और एमुंडी इंडिया होल्डिंग 7.14 करोड़ शेयर (3.51% होल्डिंग) बेच रहे हैं।

मेनबोर्ड सेगमेंट में एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के साथ-साथ गुजरात की टेक्सटाइल कंपनी एल्पाइन टेक्सवर्ल्ड का भी आईपीओ आ रहा है। इसके ₹126.25 करोड़ के आईपीओ के तहत सिर्फ नए शेयर जारी होंगे। इसमें निवेशक ₹100-₹105 के प्राइस बैंड में बोली लगा सकेंगे। इस आईपीओ के पैसों का इस्तेमाल ग्रे फैब्रिक प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ाने को लेकर एक नई वीविंग यूनिट लगाने, लोन हल्का करने और आम कॉर्पोरेट उद्देश्यों में किया जाएगा।

14 जुलाई को एक एसएमई मिलवर्क्स टेक्नोलॉजीज का भी ₹160.3 करोड़ का आईपीओ खुलेगा। इसका प्राइस बैंड प्रति शेयर ₹315-₹331 फिक्स किया गया है। बेंगलुरु की प्रिसिजन इंजीनियरिंग कंपनी आईपीओ के पैसों का इस्तेमाल प्लांट और मशीनरी खरीदने, वर्किंग कैपिटल की जरूरतों और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों में भी करेगी।

इस साल कैसा है आईपीओ मार्केट में हाल

इस कैलेंडर ईयर में अब तक 30 मेनबोर्ड आईपीओ लॉन्च हुए हैं, जिनकी कुल वैल्यू ₹24,404 करोड़ है। एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट और अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड के जुड़ने से इस साल अब तक मेनबोर्ड में 32 आईपीओ के जरिए कुल फंड-रेजिंग ₹34,343 करोड़ तक पहुंच जाएगी। एसएमई सेगमेंट में इस साल अब तक 90 कंपनियों के ₹3,861 करोड़ के आईपीओ सफल हुए हैं और मिलवर्क्स टेक्नोलॉजीज़ को मिलाकर कुल फंड-रेजिंग बढ़कर ₹4,022 करोड़ हो जाएगी।

Happy Steels या Devson Catalyst, किसके IPO में लगाएं पैसे, 13 जुलाई को आखिरी मौका

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Happy Steels या Devson Catalyst, किसके IPO में लगाएं पैसे, 13 जुलाई को आखिरी मौका

IPO News: हैप्पी स्टील्स और देवसन कैटेलिस्ट के आईपीओ में कल यानी 13 जुलाई को पैसा लगाने का आखिरी मौका है। ये दोनों इश्यू पूरी तरह ओवरसब्सक्राइब हो चुके हैं लेकिन देवसन कैटेलिस्ट के आईपीओ को अधिक बेहतर रिस्पांस मिलता दिख रहा है। ग्रे मार्केट में भी इसकी सेहत अधिक मजबूत है। ग्रे मार्केट में हैप्पी स्टील्स आईपीओ के अपर प्राइस बैंड से ₹14 यानी 21.21% और देवसन कैटेलिस्ट ₹45 यानी 38.14% की जीएमपी पर है। हालांकि मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक ग्रे मार्केट से मिले संकेतों की बजाय किसी आईपीओ में बोली लगाने से पहले कंपनी के फंडामेंटल्स और फाइनेंशियल्स पर ध्यान देना चाहिए। इनके लिस्टिंग की बात करें तो हैप्पी स्टील के शेयर एनएसई एसएमई पर और देवसन कैटेलिस्ट के शेयर बीएसई एसएमई पर 16 जुलाई को लिस्ट होंगे।

Happy Steels IPO

ऑटोमोटिव फॉर्ज्ड एंड मशीन्ड कंपोनेंट्स के लिए एक्सल्स बनाने वाली हैप्पी स्टील्स के ₹25 करोड़ के आईपाओ में ₹62-₹66 के प्राइस बैंड और 2000 शेयरों के लॉट में पैसे लगा सकते हैं। अभी तक यह इश्यू 3.14 गुना भर चुका है जिसमें QIB (क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स) के हिस्से को 0.63 गुना, NII (नॉन-इंस्टीट्यूशनल इंवेस्टर्स) के हिस्से को 5.40 गुना और खुदरा निवेशकों के आरक्षित हिस्से को 3.61 गुना बोली मिली है। इस इश्यू के तहत 37.88 लाख लाख नए शेयर जारी होंगे। कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो वित्त वर्ष 2024-26 के दौरान कंपनी का शुद्ध मुनाफा उठा-पटक के साथ 14% के सीएजीआर से बढ़कर ₹7.10 करोड़ और टोटल इनकम सालाना 5% की रफ्तार से बढ़कर ₹96.57 करोड़ पर पहुंच गया।

Devson Catalyst IPO

ऑयल और गैस रिफाइनरीज, पेट्रोकेमिकल्स, स्टील, फर्टिलाइजर्स और अन्य इंडस्ट्रियल प्रोसेसिंग सेक्टर्स के लिए कैटेलिस्ट्स एडजॉर्बेंट्स और सेरामिक बाल बनाने वाली देवसन कैटेलिस्ट के ₹42 करोड़ के आईपीओ में ₹112-₹118 और 1200 शेयरों के लॉट में पैसे लगा सकते हैं। ओवरऑल यह इश्यू 29.35 गुना सब्सक्राब हो चुका है जिसमें से QIB के आरक्षित हिस्से को 2.60 गुना, एनआईआई के हिस्से को 36.48 गुना, इंडिविजुअल इंवेस्टर्स के हिस्से को 42.92 गुना और एंप्लॉयीज के हिस्से को 0.81 गुना बोली मिली है। इस इश्यू के तहत ₹39 करोड़ के नए शेयर जारी होंगे और ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत 2.5 लाख शेयरों की बिक्री होगी। कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो वित्त वर्ष 2024-26 के दौरान कंपनी का शुद्ध मुनाफा सालाना 45% से अधिक की रफ्तार से बढ़कर ₹12.52 करोड़ और टोटल इनकम भी 9% के सीएजीआर से बढ़कर ₹56.84 करोड़ पर पहुंच गया।

SBI Funds Management IPO: प्री-IPO राउंड के बाद साइज घटकर ₹9813 करोड़

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

NSE के आईपीओ के बारे में बड़ा अपडेट, अगले महीने मिल सकती है सेबी की मंजूरी

सेबी अगले महीने एनएसई के आईपीओ को मंजूरी दे सकता है। मर्चेंट बैंकिंग के सूत्रों ने यह जानकारी दी है। इसके बाद एनएसई के लिए विदेश में रोड शो करने का रास्ता साफ हो जाएगा। एनएसई का आईपीओ इस साल सितंबर में आ सकता है। यह देश के सबसे बड़े आईपीओ में से एक होगा। इनवेस्टर्स काफी समय से इस आईपीओ का इंतजार कर रहे हैं।

अगले महीने मिल सकता है ग्रीन सिग्नल

मर्चेंट बैंकिंग के सूत्रों के मुताबिक, “मौजूदा रफ्तार से इस आईपीओ को अगले महीने ग्रीन सिग्नल मिल जाने की संभावना है। इश्यू से जुड़े सभी सवालों के जवाब दे दिए गए हैं।” सूत्र ने यह नहीं बताया कि किस तरह के सवालों के जवाब दिए गए हैं। लेकिन, उन्होंने कहा कि ज्यादातर समय इसका संबंध डिसक्लोजर के लैंग्वेज से होता है।

17 जुलाई से विदेश में रोड शो का प्लान

एक दूसरे सूत्र ने कहा, “चूंकि को-लोकेशन और डार्क फाइबर जैसे बड़े मसलों को पहले से ही आईपीओ से डीलिंक्ड कर दिया गया है और ये सेटलमेंट प्रोसेस में हैं, जिससे अब बड़ा मसला नहीं रह गया है। इसलिए अब सेबी और एक्सचेंज को बाकी चीजों पर फोकस करना है।” सूत्र ने बताया कि घरेलू निवेशकों के लिए रोड शो का प्लान बन चुका है। मर्चेंट बैंकर्स ने विदेशी निवेशकों के लिए 17 जुलाई से रोड शो का प्लान बनाया है। ये रोड शो अमेरिका, यूनाइटेड किंग्डम, हांगकांग और सिंगापुर में होंगे।

सितंबर में आ सकता है आईपीओ

अगर सबकुछ प्लान के हिसाब से चलता है तो एनएसई का आईपीओ सितंबर में आ सकता है। हालांकि, सबकुछ सेबी के ऑब्जर्वेशन लेटर पर निर्भर करता है। NSE ने आईपीओ के एप्रूवल के समय और रोड शो के बारे में कुछ बताने से इनकार कर दिया। मनीकंट्रोल के सवाल के जवाब में एनएसई के प्रवक्ता ने कहा, “कंपनी (NSE) ने सेबी के पास डीआरएचपी फाइल कर दिया है। इस वक्त हम इससे ज्यादा कुछ बताने की स्थिति में नहीं हैं।”

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एक्सचेंज को भी डिसक्लोजर नियमों का पालन करना है जरूरी

सूत्र ने बताया, “एक्सचेंज और सभी मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशंस सेबी के नियम के तहत उन सभी नियमों का पालन करते हैं, जिनका पालन दूसरी कंपनियों को करना पड़ता है।” मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशंस (MIIs) सेबी के सभी डिसक्लोजर नियमों का पालन करते हैं। इसके बाद भी बीएसई और एमसीएक्स के आईपीओ के रिव्यू में लगा समय एक समान नहीं था। बीएसई ने सेबी के पाश 12 सितंबर, 2016 को डीआरएचपी फाइल किया था। उसे सेबी का ऑब्जर्वेशन 30 दिसंबर, 2016 को मिला था। इसके मुकाबले एमसीएक्स का आईपीओ करीब 7 महीने में एप्रूव्ड हो गया था।

Market Outlook: ‘बाजार का सबसे बुरा दौर खत्म’, Quant Mutual Fund ने कहा- अब सही स्टॉक्स चुनने का समय

Market Outlook: Quant Mutual Fund के फाउंडर और चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर संदीप टंडन का मानना है कि भारतीय शेयर बाजार अब अपने सबसे कमजोर दौर से बाहर निकल चुका है। उनके मुताबिक, अगले दो तिमाहियों में पूरे बाजार के बजाय चुनिंदा शेयर बेहतर रिटर्न दे सकते हैं।

संदीप टंडन का कहना है कि विदेशी निवेशकों (FII) की वापसी से भारत दूसरे बाजारों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। वहीं, इंफ्रास्ट्रक्चर, पावर, यूटिलिटीज और चुनिंदा एनर्जी कंपनियां निवेश के लिहाज से पसंदीदा सेक्टर बने रहेंगे।

इंफ्रा और पावर पर सबसे ज्यादा भरोसा

संदीप टंडन का कहना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर उनकी सबसे पसंदीदा थीम बनी हुई है। इसकी वजह सरकार और निजी कंपनियों का बढ़ता कैपेक्स है।

उनके मुताबिक, पोर्ट, एयरपोर्ट, सड़क, पावर, रिन्यूएबल एनर्जी, यूटिलिटीज, टेलीकॉम और चुनिंदा डिफेंस कंपनियों में अच्छे मौके हैं। ऐसे शेयरों पर फोकस करना चाहिए, जिनके फंडामेंटल मजबूत हों। कैश फ्लो अच्छा हो। लेकिन अभी उन पर बाजार की ज्यादा नजर न गई हो।

FII की वापसी से मिलेगा सहारा

संदीप टंडन का मानना है कि विदेशी निवेशकों की बिकवाली लगभग खत्म हो चुकी है। अब FII धीरे-धीरे भारतीय बाजार में लौट रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में गिरावट आती है, तो भारत और आकर्षक बन सकता है।

बैंकिंग और IT पर क्या राय?

संदीप टंडन का कहना है कि प्राइवेट बैंकों में रिकवरी जारी रह सकती है। लेकिन यह तेजी बहुत लंबी चलेगी, ऐसा जरूरी नहीं है।

आईटी सेक्टर को लेकर उनका नजरिया पहले से बेहतर हुआ है। कमजोर प्रदर्शन के बाद अब वैल्यूएशन आकर्षक दिख रहे हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि अभी इस सेक्टर में आक्रामक खरीदारी का समय नहीं है। Quant Mutual Fund ने सिर्फ चुनिंदा आईटी शेयरों में खरीदारी शुरू की है।

FMCG और स्मॉलकैप में कहां हैं मौके?

उनके मुताबिक, FMCG सेक्टर में सुधार के संकेत मिल रहे हैं। लेकिन वैल्यूएशन अभी भी ऊंचे हैं। इसलिए यहां भी चुनिंदा शेयरों में निवेश करना बेहतर रहेगा।

संदीप टंडन का मानना है कि मिडकैप के मुकाबले स्मॉलकैप और माइक्रोकैप में ज्यादा अवसर हैं। हालांकि, निवेश से पहले मैनेजमेंट की गुणवत्ता और कैश फ्लो की जांच जरूर करनी चाहिए।

IPO बाजार पर भी भरोसा

संदीप टंडन आने वाले बड़े IPO को लेकर भी सकारात्मक हैं। उन्होंने SBI Funds, NSE और Jio के संभावित IPO का जिक्र किया। उनका कहना है कि भारतीय बाजार अब इतने बड़े इश्यू को संभालने में सक्षम है। हालांकि, कंपनियों का उचित वैल्यूएशन पर आना जरूरी होगा।

संदीप टंडन का कहना है कि अगले कुछ महीनों में स्टॉक-स्पेसिफिक रणनीति ज्यादा काम आएगी। इसलिए निवेशकों को इंडेक्स के बजाय मजबूत कंपनियों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।

Eternal Share Price: नए रिकॉर्ड हाई पर पहुंच सकता है इटनरल, मोतीलाल ओसवाल ने दिया 34% तेजी का अनुमान

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जेफरीज ने बताई NSE की एक खास खूबी, 4% टूट गए BSE और MCX के शेयर

BSE-MCX Shares vs NSE IPO: वैश्विक ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने आईपीओ की तैयारियों में जुटी एनएसई को अधिक डाईवर्सिफाइड कह दिया तो बीएसई और एमसीएक्स के शेयर 4% तक टूट गए। तेज गिरावट के साथ ये निफ्टी कैपिटल मार्केट्स इंडेक्स के टॉप लूजर बन गए जो खुद 2% कमजोर हुआ है। बता दें कि एनएसई ने बाजार नियामक सेबी के पास ₹30 हजार करोड़ के रिकॉर्डतोड़ आईपीओ का ड्राफ्ट दाखिल किया है। इस ड्राफ्ट ने लिस्टेड मार्केट में हलचल बढ़ा दी है। यह इश्यू पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल का होगा। अभी देश में सबसे बड़ा आईपीओ लाने का रिकॉर्ड हुंडई मोटर इंडिया का है जिसने ₹27858 करोड़ का आईपीओ सालव 2024 में पेश किया था।

NSE को लेकर क्या कहना है Jefferies का

जेफरीज का कहना है कि एनएसई का प्रोडक्ट मिक्स बीएसई और एमसीएक्स की तुलना में अधिक डाईवर्सिफाईड है जिसमें से इंडेक्स ऑप्शंस और कमोडिटी एफएंडओ को छोड़ अधिकतर सेगमेंट में इसकी हिस्सेदारी 90% से अधिक है। जेफरीज ने जिक्र किया है कि एनएसई ने वैश्विक पियर्स की तुलना में अपना एक टेक प्रोडक्ट सुईट बनाया है और यह कमोडिटीज बिजनेस में विस्तार कर रही है। एनएसई के क्लियरिंग कॉरपोरेशन की कैश मार्केट में 88% और एफएंडओ मार्केट में 91% हिस्सेदारी है। एनएसई के पास टेक्नोलॉजी और डेटा ऑफरिंग्स का एक सुईट है जिसकी वित्त वर्ष 2026 के रेवेन्यू में 13% हिस्सेदारी है। जेफरीज के मुताबिक ओवरऑल इंडियन एक्सचेंज का 70% रेवेवन्यू एनएसई का है। इसके पोर्टफोलियो में इक्विटी कैश, इंडेक्स ऑप्शंस, सिंगल स्टॉक ऑप्शंस, इक्विटी फ्यूचर्स, कमोडिटी एफएंडओ, बॉन्ड्स और करेंसी डेरिवेटिव्स हैं।

कंपनी के सेहत की बात करें तो जेफरीज ने अपनी रिपोर्ट में जिक्र किया है कि कोलोकेशन और डार्क फाइबर केस से जुड़े प्रोविजंस में ₹1390 करोड़ और टीएपी मामले में ₹670 करोड़ के पेमेंट्स ने मिलकर एनएसई के वित्त वर्ष 2025 और वित्त वर्ष 2026 के ऑपरेशनल ईबीआईटीडीए पर दबाव डाला। जेफरीज के मुताबिक सेबी सेटलमेंट फीस एक बार का होता है तो इसे निकालने पर देखें तो एनएसई का नॉर्मलाइज्ड ऑपरेटिंग ईबीआईटीडीए मार्जिन 76-77% पर काफी हद तक स्थिर है।

Options कितनी कमाऊ है एक्सचेंजेज के लिए?

जेफरीज ने अपनी रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया है कि वित्त वर्ष 2020-26 के बीच इक्विटी ऑप्शंस सालाना 56% की रफ्तार से बढ़ा जबकि कैश मार्केट टर्नओवर इस दौरन 19% की ही रफ्तार से बढ़ा। ऑप्शंस प्रीमियम का एवरेज डेली टर्नओवर (ADTO) वित्त वर्ष 2026 में डेली कैश मार्केट मार्केट टर्नओवर का 70% रहा। इस प्रकार इंडियन एक्सचेंजेज पर ऑपरेटिंग रेवेन्यू की 70% हिस्सेदारी है। जेफरीज के मुताबिक यह एक्सचेंजों के रेवेन्यू को मार्केट परफॉरमेंस साइकिल से जोड़ता है क्योंकि ऑप्शन ट्रेडिंग प्राइस की बजाय वोलेटिलिटी से अधिक जुड़ी है। अमेरिका से तुलना करें तो भारत में ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट्स के ट्रेड्स अधिक हैं लेकिन प्रीमियम पांचवा हिस्सा।

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Adon Agro IPO Listing: लिस्ट होते ही अपर सर्किट, ₹70 के शेयरों ने बरसाया ताबड़तोड़ पैसा, खुदरा निवेशकों को नहीं पसंद था आईपीओ!

Adon Agro IPO Listing: ड्राई फ्रूट्स बेचने वाली एडॉन एग्रो के शेयरों की आज बीएसई एसएमई पर धांसू एंट्री हुई। इसके आईपीओ को निवेशकों का मिला-जुला रिस्पांस मिला था और खुदरा निवेशकों का आरक्षित हिस्सा तो पूरा भर भी नहीं पाया था। आईपीओ के तहत ₹70 के भाव पर शेयर जारी हुए हैं। आज BSE SME पर इसकी ₹78.25 पर एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को 11.79% का लिस्टिंग गेन (Adon Agro Listing Gain) मिला। लिस्टिंग के बाद शेयर और ऊपर चढ़े। उछलकर यह ₹82.16 (Adon Agro Share Price) के अपर सर्किट पर पहुंच गया यानी कि आईपीओ निवेशक अब 17.37% मुनाफे में हैं।

Adon Agro IPO के पैसे कैसे होंगे खर्च

एडॉन एग्रो कमोडिटीज का ₹44 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 29 जून से 1 जुलाई तक खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों का मिला-जुला रिस्पांस मिला था और खुदरा निवेशकों का हिस्सा तो पूरा भर भी नहीं पाया था। ओवरऑल यह इश्यू 1.35 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 22.47 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 1.41 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 0.84 गुना भरा था। इस आईपीओ के तहत ₹10 की फेस वैल्यू वाले 62.90 लाख नए शेयर जारी हुए हैं। इन शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹32.00 करोड़ वर्किंग कैपिटल की जरूरतों और बाकी पैसे आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।

Adon Agro Commodities के बारे में

एडॉन एग्रो कमोडिटीज मुख्य रूप से ड्राई फ्रूट्स, नट्स, सीड्स और बेरीज की सोर्सिंग, इंपोर्ट, प्रोसेसिंग, पैकिंग और डिस्ट्रीब्यूशन का काम करती है। इसके प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में बादाम, काजू, अखरोट, पिस्ता, किशमिश, सूखी खजूर, खुबानी, अंजीर और अलग-अलग तरह के ड्राई फ्रूट मिक्स शामिल हैं, जो कई ग्रेड, रूप और पैक साइज में मिलते हैं। इन्हें कंपनी बिना प्रोसेस किए थोक में और प्रोसेस करके पैक करके, दोनों तरीके से बेचती है। कंपनी इसे अपने रिटेल ब्रांड हंगर नट्स (Hunger Nuts) ब्रांड के तहत 250 ग्राम से लेकर 30 किग्रा तक के पैक साइज में बेचती है। यह ड्राई फ्रूट हैम्पर्स और कस्टमाइज्ड मिक्स के जरिए कॉरपोरेट और फेस्टिव गिफ्टिंग का काम भी करती है। यह घरेलू मार्केट के साथ-साथ यूएई, अफगानिस्तान, यूएसए, चिली और श्रीलंका से कच्चा माल मंगाती है।

कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2023 में इसे ₹9 लाख का शुद्ध मुनाफा हुआ था जो अगले वित्त वर्ष 2024 में उछलकर ₹1.79 करोड़ और फिर वित्त वर्ष 2025 में ₹7.22 करोड़ पर पहुंच गया। इस दौरान कंपनी की टोटल इनकम भी सालाना औसतन 114% से अधिक की चक्रवृद्धि दर (CAGR) से बढ़कर ₹103.04 करोड़ पर पहुंच गई। चालू वित्त वर्ष 2026 की बात करें तो 10 महीने में कंपनी को ₹21.55 करोड़ का शुद्ध मुनाफा और ₹287.33 करोड़ का टोटल इनकम हासिल हो चुका है। जनवरी 2026 के आखिरी में कंपनी पर ₹10.19 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹30.45 करोड़ पड़े थे।

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Aastha Spintex IPO Listing: मुनाफा नहीं बुन पाया ₹136 का शेयर, रॉकेट की स्पीड से बढ़ रहा कंपनी का प्रॉफिट

Aastha Spintex IPO Listing: आस्था स्पिंटेक्स के शेयरों की आज घरेलू मार्केट में धांसू एंट्री हुई। इसके आईपीओ को ओवरऑल 5 गुना से अधिक बोली मिली थी। आईपीओ के तहत ₹136 के भाव पर शेयर जारी हुए हैं। आज BSE पर इसकी ₹130.00 और NSE पर ₹130.00 पर एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को कोई लिस्टिंग गेन नहीं मिला बल्कि लिस्टिंग पर 4.41% पूंजी ही घट गई। लिस्टिंग के बाद शेयरों ने रिकवरी की कोशिश की। उछलकर BSE पर यह ₹133.00 (Aastha Spintex Share Price) पर पहुंच गया यानी कि आईपीओ निवेशक अब 2.21% घाटे में हैं।

Aastha Spintex IPO के पैसे कैसे होंगे खर्च

आस्था स्पिंटेक्स का ₹170 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 29 जून से 1 जुलाई तक खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों का अच्छा रिस्पांस मिला था। ओवरऑल यह 5.05 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 3.59 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 8.29 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 2.54 गुना और एंप्लॉयीज का हिसा 5.43 गुना भरा था। इस आईपीओ के तहत ₹10 की फेस वैल्यू वाले 1.25 करोड़ नए शेयर जारी हुए हैं। इन शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹111.51 करोड़ फाल्कन यार्न्स प्राइवेट लिमिटेड के अधिग्रहण के पेमेंट का कुछ हिस्सा भरने, ₹10 करोड़ फाल्कन यार्न्स के वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने और बाकी पैसे आम कॉरपोरेट उद्देश्यों में खर्च होंगे।

Aastha Spintex के बारे में

कार्डेड, कॉम्बेड और कॉम्पैक्ट कॉम्बेड कॉटन यार्न और कॉटन बेल्स के मैन्युफैक्चरिंग और ट्रेडिंग को लेकर आस्था स्पिंटेक्स एक जानी-मानी कंपनी है। कंपनी अपने कॉटन बेल्स का इस्तेमाल दो तरह से करती है- अपने खुद के कॉटन यार्न के प्रोडक्शन के लिए और दूसरी स्पिनिंग मिलों को बेचने या सप्लाई करने के लिए। इसके अलावा कंपनी की गुजरात के मोरबी जिले में एक सेमी-ऑटोमेटेड स्पिनिंग और जिनिंग मैन्युफैक्चरिंग यूनिट है। कंपनी टेक्सटाइल प्रोडक्शन के दौरान निकलने वाले कॉटन यार्न वेस्ट को रीसायकल करके दूसरे प्रोडक्ट भी बनाती है।

कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2023-25 के बीच इसका रेवेन्यू सालाना आधार पर 21% की रफ्तार से बढ़कर ₹352.17 करोड़ पर पहुंच गया लेकिन शुद्ध मुनाफा रॉकेट की स्पीड से बढ़ा जोकि वित्त वर्ष 2023 में ₹1.06 करोड़ और वित्त वर्ष 2024 में ₹16.29 करोड़ से वित्त वर्ष 2025 में ₹22.92 करोड़ पर पहुंच गया। पिछले वित्त वर्ष 2026 के 9 महीने यानी अप्रैल-दिसंबर 2025 में इसे ₹314.02 करोड़ का रेवेन्यू और ₹17.56 करोड़ का शुद्ध मुनाफा हासिल हुआ।

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Kusumgar IPO: 8 जुलाई से खुलेगा ₹650 करोड़ का आईपीओ, 40% के पार पहुंचा GMP

Kusumgar IPO : मुंबई की इंजीनियर्ड फैब्रिक बनाने वाली कंपनी Kusumgar ने अपना 650 करोड़ रुपये का IPO ला रही है। यह IPO 8 जुलाई को खुलेगा और 10 जुलाई को बंद होगा। इसका प्राइस बैंड 398-419 रुपये प्रति शेयर तय किया है। ऊपरी प्राइस बैंड के हिसाब से कंपनी की वैल्यू करीब 4,399.1 करोड़ रुपये बैठती है।

पूरा IPO OFS होगा

यह IPO पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) है। यानी कंपनी को इस इश्यू से कोई पैसा नहीं मिलेगा। IPO से आने वाली पूरी रकम प्रमोटर शेयरधारकों के पास जाएगी।

शेयर बेचने वालों में सिद्धार्थ योगेश कुसुमगर, सपना सिद्धार्थ कुसुमगर और सिद्धार्थ योगेश कुसुमगर HUF शामिल हैं।

कम से कम 14665 रुपये लगाने होंगे

निवेशक कम से कम 35 शेयर के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद 35-35 शेयर के मल्टीपल में बोली लगानी होगी।

अगर IPO ऊपरी प्राइस बैंड पर आता है, तो रिटेल निवेशकों को कम से कम 14,665 रुपये लगाने होंगे। वहीं, अधिकतम 1,90,645 रुपये तक निवेश किया जा सकता है।

किसके लिए कितना हिस्सा रिजर्व?

कुसुमगर ने IPO का 50% हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए रखा है। 15% हिस्सा नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) के लिए रिजर्व है। बाकी 35% हिस्सा रिटेल निवेशकों के लिए रखा गया है।

कंपनी ने कर्मचारियों के लिए 3.5 करोड़ रुपये के शेयर रिजर्व रखे हैं। कर्मचारियों को अंतिम इश्यू प्राइस पर 39 रुपये प्रति शेयर की छूट मिलेगी।

Kusumgar IPO का GMP

कुसुमगर के आईपीओ को ग्रे मार्केट में काफी तगड़ा रिस्पॉन्स मिल रहा है। इनवेस्टरगेन के मुताबिक, इसका GMP 40.81% तक पहुंच गया है। इसका मतलब कि आईपीओ में अलॉटमेंट पाने वाले निवेशकों को एक लॉट पर लगभग 5,985 रुपये का मुनाफा हो सकता है। हालांकि, GMP सिर्फ एक अंदाजा होता है और यह लगातार बदलता रहता है।

Kusumgar क्या करती है?

कुसुमगर बुने हुए, कोटेड और लैमिनेटेड सिंथेटिक फैब्रिक बनाती है। कंपनी के पास 1,000 से ज्यादा तरह के फैब्रिक हैं।

इनका इस्तेमाल एयरोस्पेस और डिफेंस, इंडस्ट्रियल और ऑटोमोबाइल के साथ आउटडोर और लाइफस्टाइल सेक्टर में होता है। शेयर बाजार में कंपनी का मुकाबला Garware Technical Fibres, Arvind और SRF जैसी कंपनियों से है।

Kusumgar की कमाई कैसी रही?

मार्च 2026 में खत्म हुए वित्त वर्ष में कंपनी का शुद्ध मुनाफा 12.3% घटकर 98.2 करोड़ रुपये रह गया। एक साल पहले यह 112 करोड़ रुपये था। इसी दौरान कंपनी का रेवेन्यू 11.2% घटकर 692 करोड़ रुपये रहा। पिछले वित्त वर्ष में यह 779 करोड़ रुपये था।

Axis Capital, IIFL Capital Services और Motilal Oswal Investment Advisors इस IPO के बुक रनिंग लीड मैनेजर हैं।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।