सोना ₹2,000 से ज्यादा चढ़ा, चांदी 4 हफ्ते के हाई पर पहुंची, इंडियन कंज्यूमर के लिए इस तेजी का क्या है मतलब!

Gold Silver Price Outlook: देश और दुनिया में सोने और चांदी की कीमतों में 5 अगस्त को बढ़त देखने को मिली। मजबूत ग्लोबल संकेतों, जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता और सुरक्षित निवेश के तौर पर इन कीमती धातुओं की मांग के कारण घरेलू वायदा बाजार (फ्यूचर्स मार्केट) में दोनों में तेजी देखी गई।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी का सबसे ज्यादा ट्रेड होने वाला सितंबर कॉन्ट्रैक्ट 4,545 रुपये या 2.05 फीसदी बढ़कर 2,26,160 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया। इस साल 9 जुलाई को भी चांदी इसी स्तर के आसपास ट्रेड कर रही थी, जब कमोडिटी एक्सचेंज पर इसकी कीमत 2,26,377 रुपये प्रति किलोग्राम थी। वहीं अक्टूबर कॉन्ट्रैक्ट के लिए सोने के वायदा भाव ₹2,165 या 1.5% बढ़कर ₹1.46 लाख प्रति 10 ग्राम हो गए।

ग्लोबल बाज़ार में, दिसंबर डिलीवरी के लिए कॉमेक्स (Comex) गोल्ड फ्यूचर्स लगभग 2% बढ़कर $4,226.50 प्रति औंस हो गए, जबकि चांदी के वायदा भाव 3.21% बढ़कर $61.46 प्रति औंस हो गए।

सोने और चांदी की कीमतों में क्यों आ रही है तेजी?

जानकारों का कहना है कि यह तेजी जियोपॉलिटिकल हालात, कमज़ोर अमेरिकी डॉलर और ग्लोबल मॉनेटरी पॉलिसी को लेकर बदलती उम्मीदों के बीच कीमती धातुओं की बढ़ती मांग की वजह से आई है।

लेमन मार्केट्स डेस्क के रिसर्च हेड गौरव गर्ग ने कहा, “सोने की कीमतों में लगातार दूसरे सेशन में भी बढ़त देखी गई, क्योंकि जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता और कमज़ोर अमेरिकी डॉलर के कारण निवेशकों ने ‘सेफ-हेवन’ (सुरक्षित निवेश) के तौर पर सोना खरीदना बढ़ाया है।”

जानकारों के मुताबिक, मार्केट में नए सौदे होने से चांदी की कीमतों को भी फायदा हुआ।

चॉइस ब्रोकिंग की कमोडिटी फंडामेंटल एनालिस्ट पिंकी यादव के अनुसार, होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने की बातचीत में प्रगति की खबरों से एनर्जी सप्लाई में रुकावट की चिंता कम हुई और कच्चे तेल की कीमतें गिरीं, जिसके बाद बुलियन की कीमतों में बढ़त हुई।

कच्चे तेल की कम कीमतें महंगाई के दबाव को कम कर सकती हैं, जिससे ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की उम्मीदों पर असर पड़ता है और कीमती धातुओं की मांग को बढ़ावा मिलता है।

RBI का पॉलिसी फ़ैसला और उसका असर

यह तेज़ी ऐसे समय में आई है जब रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) ने लगातार चौथी पॉलिसी मीटिंग में बेंचमार्क रेपो रेट को 5.25% पर ही बनाए रखने का फैसला किया है।

कैपिटलXB के को-फ़ाउंडर और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अजिताभ भारती ने कहा कि RBI का यथास्थिति बनाए रखने का फैसला आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और महंगाई के जोखिमों पर नजर रखने के बीच संतुलन को दिखाता है। “हालांकि अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव ग्लोबल महंगाई के आउटलुक पर असर डाल रहा है, लेकिन RBI का ध्यान विकास को बढ़ावा देने और साथ ही महंगाई पर बारीकी से नजर रखने पर बना रहेगा।”

इंडियन कंज्यूमर के लिए इस बढ़ोतरी का क्या है मतलब?

सोने-चांदी की कीमतों में यह बढ़ोतरी त्योहारी सीजन से ठीक पहले हुई है, जब भारत में आमतौर पर सोने की मांग बढ़ जाती है। ऊंची कीमतें गहने खरीदने के फैसलों पर असर डाल सकती हैं, खासकर उन ग्राहकों के लिए जो अपनी मर्जी से या गैर-जरूरी चीजों के लिए खरीदारी करते हैं।

कामा ज्वैलरी के मैनेजिंग डायरेक्टर कॉलिन शाह ने कहा कि दुनिया भर में अनिश्चितता और बदलती आर्थिक स्थितियों की वजह से ग्राहक ज़्यादा सतर्क हो सकते हैं।शाह ने कहा, “आर्थिक हालात के अनिश्चित होने की वजह से लोग सतर्क हो रहे हैं। जैसे-जैसे हम त्योहारी सीजन की ओर बढ़ रहे हैं, इसका असर घरेलू मांग पर थोड़ा दिखेगा, खासकर सोना खरीदने के मामले में।”हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सोने की पारंपरिक भूमिका यानी मूल्य को सुरक्षित रखने का जरिया – लंबे समय तक इसकी मांग को बनाए रख सकती है।

आगे कहां तक जाएंगे भाव

रिद्धि-सिद्धि बुलियंस के मैनेजिंग डायरेक्टर और इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट पृथ्वीराज कोठारी ने कहा कि अगर सोने की कीमत $4,200 प्रति औंस से ऊपर बनी रहती है, तो इसके $4,500 प्रति औंस तक पहुंचने की संभावना बन सकती है।

उन्होंने कहा कि घरेलू स्तर पर, इससे सोने की कीमतें लगभग ₹1.55 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकती हैं।

वहीं चांदी के आउटलुक पर अगर कीमत लगातार $63 प्रति औंस से ऊपर बनी रहती है, तो यह $70-$71 प्रति औंस की रेंज तक जा सकती है, जो लगभग ₹2.50-2.55 लाख प्रति किलोग्राम के बराबर है।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Dubai Blast: जेबेल अली इंडस्ट्रियल एरिया में 20 मिनट में 7 धमाके, आसमान में उठा धुएं का गुबार, देखें वीडियो

Dubai Blast: दुबई के जेबेल अली इंडस्ट्रियल एरिया में बुधवार सुबह धमाकों की खबर से हड़कंप मच गया। सोशल मीडिया पर सामने आए कई वीडियो में आसमान में घना धुआं उठता हुआ दिखाई दे रहा है। ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी के मुताबिक, अमीराती अधिकारियों ने बताया कि 20 मिनट के अंदर कम से कम सात धमाके हुए। हालांकि, इस घटना की वजह का अभी तक पता नहीं चल पाया है।

बता दें कि ये धमाके दक्षिणी दुबई में जेबेल अली पोर्ट और इंडस्ट्रियल एरिया के पास हुए, जो संयुक्त अरब अमीरात में लॉजिस्टिक्स और ईंधन का एक अहम केंद्र है। हालांकि, अधिकारियों ने हताहतों या नुकसान के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, धमाकों और उसके बाद लगी आग के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगे थे। इसके बाद अमीराती अधिकारियों ने घटना की रिकॉर्डिंग करने वाले दो लोगों को हिरासत में लिया।

ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी ने दावा किया कि ये धमाके यमन से दागी गई मिसाइल के हमले के कारण हुए, जबकि अमीराती मीडिया ने पुष्टि की कि कई धमाकों की आवाज सुनी गई थी, लेकिन कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया।

इस बीच, स्थानीय मीडिया के अनुसार, NASA की थर्मल इमेजिंग में जेबेल अली पोर्ट के पास एक गोदाम में आग लगने का पता चला है। यह इलाका ईंधन जमा करने और उसे एक जगह से दूसरी जगह भेजने के काम आता है। इससे धमाकों के बाद लगी बड़ी आग की खबरों को और बल मिला है।

लगभग उसी समय, यमन की राजधानी सना में भी धमाकों की खबरें आईं। कुछ खबरों में इन आवाजों को हवाई हमलों का नतीजा बताया गया, जबकि अन्य में कहा गया कि यमन के इलाके से मिसाइलें दागी गई थीं, जिससे घटनाओं के क्रम को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई।

कुछ स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि यमन के हूथी विद्रोहियों ने जेबेल अली इंडस्ट्रियल एरिया को निशाना बनाया हो सकता है। प्रत्यक्षदर्शियों ने इलाके में कई जगह आग, आसमान तक उठते धुएं के गुबार और लगातार हो रहे धमाकों की जानकारी दी है।

हालांकि, इस घटना की जिम्मेदारी को लेकर अमीराती अधिकारियों या हूतियों की तरफ से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

बता दें कि यह घटनाक्रम ईरान के साथ चल रहे तनाव के बीच सामने आया है, जिससे रणनीतिक रूप से अहम खाड़ी क्षेत्र में हाई अलर्ट बना हुआ है और टकराव जारी है।

वहीं, UAE के अधिकारियों ने अभी तक धमाकों की वजह के बारे में कोई विस्तृत बयान जारी नहीं किया है और न ही इस बात की पुष्टि की है कि यह घटना किसी हमले का नतीजा थी।

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Gift Nifty Indicator: क्रूड में नरमी क्या बाजार में भरेगी जोश, जानें गिफ्ट निफ्टी क्या दे रहा हैं संकेत, RBI की पॉलिसी पर नजर

Gift Nifty Indicator: बुधवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी के बढ़त के साथ खुलने की उम्मीद है। वॉल स्ट्रीट के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने और जियोपॉलिटिकल तनाव कम होने , कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट के कारण एशियाई बाजारों में तेजी के बाद GIFT निफ्टी मजबूत शुरुआत का संकेत दे रहा है। आज सबकी नजरें RBI के पॉलिसी फ़ैसले पर होंगी, जिससे बैंकों, NBFCs, ऑटो और रियल्टी जैसे ब्याज दरों से असर पड़ने वाले सेक्टर के शेयरों पर ध्यान रहेगा।

सुबह करीब 8 बजे GIFT निफ्टी 165 अंक या 0.67 फीसदी की बढ़त के साथ 24,745 पर ट्रेड कर रहा था, जो यह संकेत देता है कि निफ्टी 50 मंगलवार के 24,614.90 के क्लोजिंग स्तर से काफी ऊपर खुल सकता है। बाजार के सकारात्मक शुरुआत के संकेत तब आए हैं जब भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स ने मंगलवार को लगातार चार सत्रों की बढ़त का सिलसिला तोड़ दिया था। सेंसेक्स 210.08 अंक या 0.27 प्रतिशत गिरकर 78,428.95 पर आ गया, जबकि निफ्टी 159.40 अंक या 0.64 प्रतिशत गिरकर 24,614.90 पर बंद हुआ। RBI के पॉलिसी फैसले और साप्ताहिक डेरिवेटिव्स एक्सपायरी से पहले निवेशकों ने मुनाफावसूली की।

एशियाई बाजारों में तेजी, वॉल स्ट्रीट रिकॉर्ड ऊंचाई पर

बुधवार को एशियाई इक्विटी में वैश्विक तेजी जारी रही, क्योंकि टेक्नोलॉजी कंपनियों की अच्छी कमाई और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने की दिशा में प्रगति की उम्मीदों ने निवेशकों का उत्साह बढ़ाया। जापान का निक्केई 225 3 फीसदी बढ़ा, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी 3.4 फीसदी चढ़ा। जापान के बाहर एशिया-पैसिफिक शेयरों का MSCI का सबसे व्यापक इंडेक्स 1.5 फीसदी ऊपर चढ़ा।

शुरुआती एशियाई कारोबार में अमेरिकी फ्यूचर्स मिले-जुले रहे, जिसमें बेंचमार्क के नए ऑल-टाइम हाई पर पहुंचने के बाद S&P 500 फ्यूचर्स 0.2 फीसदी ऊपर चढ़े।

अमेरिकी इक्विटी में रात भर आई तेजी के बाद वैश्विक धारणा में काफी सुधार हुआ। अच्छी कॉर्पोरेट कमाई और जियोपॉलिटिकल चिंताओं में कमी के कारण डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज और S&P 500 रिकॉर्ड ऊंचाई पर बंद हुए। डॉव 1.71 प्रतिशत चढ़ा, जबकि S&P 500 में 1.79 फीसदी और नैस्डैक कंपोजिट में 2.59 फीसदी की बढ़त हुई। पैलांटिर टेक्नोलॉजीज और कैटरपिलर जैसी AI से जुड़ी कंपनियों के शानदार तिमाही नतीजों और सालाना अनुमानों में बढ़ोतरी के बाद निवेशकों का भरोसा बढ़ा। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने भी जोखिम लेने की क्षमता को बढ़ावा दिया।

तेल की कीमतों में गिरावट जारी

पिछले सेशन में 5 प्रतिशत से ज़्यादा गिरने के बाद कच्चे तेल की कीमतें दबाव में रहीं, क्योंकि US-ईरान विवाद को खत्म करने के लिए बातचीत में प्रगति की उम्मीदों ने लंबे समय तक सप्लाई में रुकावट के डर को कम कर दिया। ब्रेंट क्रूड 0.4 फीसदी गिरकर $79.02 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 0.5 फीसदी गिरकर $75.35 पर आ गया।

RBI के पॉलिसी फैसले पर नज़र

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि US-ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर उम्मीद और उसके कारण कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने बाजार के निकट-अवधि के नजरिए को मजबूत किया है, जबकि विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों की लगातार खरीदारी से भी बाजार की धारणा को मजबूती मिल रही है।

पोनमुडी ने कहा कि निवेशकों का ध्यान अब पूरी तरह से बुधवार को आने वाले RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी के फैसले पर है। बाजार के प्रतिभागी महंगाई, लिक्विडिटी, ग्रोथ और व्यापक पॉलिसी आउटलुक पर केंद्रीय बैंक की टिप्पणी पर बारीकी से नज़र रखेंगे।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा बाजार के मजबूत खुलने की शुरुआत, RBI पॉलिसी पर होगी बाजार की नजर

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Crude Oil Price: होर्मुज खुलने की उम्मीद से कच्चे तेल में बड़ी गिरावट, 5% से ज्यादा गिरकर $79 के पास

Crude Oil Price: होर्मुज खुलने की उम्मीद से कच्चे तेल में गिरावट बड़ी है। कच्चा तेल 5% से ज्यादा गिरकर 79 डॉलर के  पास आया। यह दबाव इस उम्मीद के बीच बना रहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने और फारस की खाड़ी से कच्चे तेल की सप्लाई बहाल करने के लिए कोई समझौता हो सकता है। ब्रेंट क्रूड गिरकर $79 प्रति बैरल के आसपास आ गया और $79.14 पर ट्रेड कर रहा था। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 0.9% गिरकर $75.06 पर आ गया। इससे पहले पिछले दो सेशन में बेंचमार्क में 10% से ज़्यादा की गिरावट आ चुकी थी।

कच्चे तेल की कीमतें क्यों बदल रही हैं?

मंगलवार को कतर ने घोषणा की कि एक अंतरिम प्रस्ताव तैयार किया गया है, जबकि अमेरिका और ईरान दोनों ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने के लिए बातचीत में प्रगति का संकेत दिया है।

पिछले दो हफ़्तों में तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने राजनयिक बातचीत के लिए और समय देने के लिए ईरान पर नए सैन्य हमलों को टाल दिया है। हालाँकि, भले ही जलडमरूमध्य से व्यावसायिक शिपिंग को बहाल करने के लिए कोई अस्थायी समझौता हो जाए, लेकिन इससे संघर्ष का स्थायी समाधान नहीं हो सकता है या ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर वाशिंगटन की चिंताओं का समाधान नहीं हो सकता है।

अमेरिका और ईरान के बीच पिछला संघर्ष-विराम एक महीने से भी कम समय तक चला और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास तनाव के कारण टूट गया। नए सिरे से हुए संघर्ष के कारण पिछले महीने ब्रेंट क्रूड की कीमतों में लगभग $32 का उतार-चढ़ाव आया, क्योंकि तनाव रेड सी (Red Sea) तक फैल गया था। जुलाई के अंत में लड़ाई में कुछ समय के लिए रुकावट आई थी, जिसका उद्देश्य राजनयिक प्रयासों का समर्थन करना था, लेकिन वह भी अंततः विफल हो गया।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, कतरी सरकार ने बताया कि ट्रंप ने मंगलवार को कतर के अमीर, शेख तमीम बिन हमद अल-थानी से भी बात की, ताकि वाशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव कम करने के प्रयासों पर चर्चा की जा सके। व्हाइट हाउस ने बातचीत की पुष्टि की लेकिन आगे कोई विवरण नहीं दिया।

संभावित राजनयिक प्रगति के एक और संकेत के रूप में, चर्चाओं से परिचित राजनयिकों के अनुसार, ईरान यूरोपीय देशों को होर्मुज जलडमरूमध्य से बारूदी सुरंगें (माइंस) हटाने की अनुमति देने पर विचार कर रहा है। अलग से, सरकारी IRIB न्यूज़ ने बताया कि ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि ओमान के साथ बातचीत रचनात्मक रही और रणनीतिक जलमार्ग के माध्यम से सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने पर केंद्रित थी।

इस बीच, मामले से परिचित लोगों के अनुसार, सऊदी अरब ने संघर्ष को फैलने से रोकने के प्रयास में ओमान के मध्यस्थों के माध्यम से यमन के हूथी विद्रोहियों के साथ चर्चा की है। सूत्रों ने कहा कि बातचीत विफल होने की स्थिति में किंगडम सैन्य आकस्मिक योजनाएँ भी तैयार कर रहा है।

आपूर्ति के मोर्चे पर, पिछले सप्ताह अमेरिकी कच्चे तेल के भंडार में 2.7 मिलियन बैरल की वृद्धि हुई, जबकि कुशिंग, ओक्लाहोमा( जो WTI क्रूड के लिए डिलीवरी हब है) में भंडार 2.4 मिलियन बैरल बढ़ गया। यदि बुधवार को बाद में आधिकारिक सरकारी आंकड़ों से इसकी पुष्टि हो जाती है, तो यह मार्च के बाद से कुशिंग में सबसे बड़ी साप्ताहिक वृद्धि होगी और भंडार को वापस 20 मिलियन-बैरल के स्तर से ऊपर ले जाएगी, जिसे सुचारू संचालन के लिए न्यूनतम आवश्यक स्तर माना जाता है।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

PoK का सच दिखाया तो भड़का पाकिस्तान! ‘अल जजीरा’ पर कसा शिकंजा, जानिए क्या है PoK की हकीकत

Al Jazeera ban in Pakistan

Al Jazeera ban in Pakistan: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में हालिया चुनावी घटनाक्रम और सरकार विरोधी प्रदर्शनों की निष्पक्ष कवरेज करने पर कतर के अंतरराष्ट्रीय समाचार नेटवर्क 'अल जजीरा' पर पाकिस्तान सरकार की गाज गिरी है। पाकिस्तान में अल जजीरा की वेबसाइट को ब्लॉक किए जाने की खबरें हैं। जानिए इस पूरे विवाद का विवरण और क्या है PoK से जुड़ा ऐतिहासिक व राजनीतिक मामला।

 

मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया दावों के मुताबिक, शहबाज शरीफ सरकार ने कतर के इस प्रमुख समाचार नेटवर्क की अंग्रेजी वेबसाइट तक पहुंच को बाधित (ब्लॉक) कर दिया है। हालांकि पाकिस्तान सरकार ने औपचारिक रूप से बैन का आदेश जारी नहीं किया है, लेकिन देश भर में यूजर्स अल जजीरा की वेबसाइट एक्सेस नहीं कर पा रहे हैं। ALSO READ: PoK के रावलकोट में पाकिस्तानी सेना की बर्बरता, मुनीर ने पाकिस्तानी क्रिकेटर को ही गोलियों से भून डाला

पाकिस्तान सरकार का आरोप

पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने अल जजीरा की रिपोर्टिंग पर सख्त ऐतराज जताते हुए उस पर 'चुनिंदा रिपोर्टिंग' और 'पीत पत्रकारिता' करने का आरोप लगाया है। मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर जारी बयान में कहा कि अल जजीरा ने PoK की राजधानी मुजफ्फराबाद के कुछ चुनिंदा मतदान केंद्रों से एकतरफा रिपोर्टिंग की और चुनिंदा लोगों के बयानों को दिखाकर पूरी चुनाव प्रक्रिया को बदनाम करने की कोशिश की। पाकिस्तान का दावा है कि इस तरह की कवरेज बाहरी ताकतों के उस एजेंडे को बढ़ावा देती है जिसका मकसद लोकतांत्रिक प्रक्रिया और जनादेश को कमजोर करना है। ALSO READ: PoK में विरोध प्रदर्शन पर MEA का बड़ा बयान, Hormuz और Pakistan को लेकर क्या है भारत का प्लान

CPJ की चिंता, पत्रकारों के गायब होने से बवाल

दूसरी ओर, प्रेस की स्वतंत्रता पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था 'कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स' (CPJ) ने पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में मीडिया पर बढ़ते प्रतिबंधों और सेंसरशिप पर गहरी चिंता व्यक्त की है। CPJ के अनुसार, 1 अगस्त को स्वतंत्र पत्रकार राजी ताहिर और उनके सहयोगी मुहम्मद सैफ को इस्लामाबाद स्थित उनके दफ्तर से पुलिस की वर्दी में आए लोग उठा ले गए, जिसके बाद से वे लापता हैं।

 

एक अन्य कश्मीरी पत्रकार राजा इकराम को भी 1 अगस्त को हिरासत में लिया गया था, हालांकि उन्हें बाद में छोड़ दिया गया। CPJ का कहना है कि 5 जून से ही PoK में आंशिक इंटरनेट बंदी, टेलीकॉम सेवाओं पर कड़े प्रतिबंध और अल जजीरा जैसी वैश्विक वेबसाइट्स को ब्लॉक करना यह साबित करता है कि पाकिस्तान मीडिया की आवाज दबाने के लिए हर संभव हथकंडा अपना रहा है। ALSO READ: पाक अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoK/PoJK): कब बनेगा भारत का हिस्सा, जानिए इतिहास

क्या है PoK से जुड़ा पूरा मामला?

वर्ष 1947 में भारत के विभाजन के बाद, पाकिस्तान ने कबायलियों के वेश में अपनी सेना भेजकर जम्मू-कश्मीर रियासत के एक बड़े भू-भाग पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया था। इसे भारत पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (PoK) कहता है। पाकिस्तान इस क्षेत्र को दो हिस्सों में बांटकर देखता है— एक हिस्से को वह 'आजाद जम्मू-कश्मीर (AJK)' कहता है और दूसरे हिस्से को 'गिलगित-बाल्टिस्तान'।

भारत का आधिकारिक रुख

भारत का स्पष्ट और निरंतर रुख रहा है कि पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख (जिसमें PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान शामिल हैं) भारत का अखंड और अभिन्न अंग है। 1994 में भारतीय संसद में सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव के तहत, पाकिस्तान को अपने अवैध कब्जे वाले भारतीय क्षेत्रों को खाली करना होगा।

PoK में जनता का आक्रोश

PoK में पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ स्थानीय जनता में भारी असंतोष है। महंगाई, भारी टैक्स, बुनियादी सुविधाओं की कमी, राजनीतिक अधिकारों के हनन और चुनावों में धांधली को लेकर मुजफ्फराबाद, रावलकोट, और कोटली जैसे इलाकों में अक्सर बड़े पैमाने पर उग्र प्रदर्शन होते रहे हैं। पाकिस्तान जब भी यहां दिखावे के लिए चुनाव कराता है, तो उस पर भारी धांधली और सेना के हस्तक्षेप के आरोप लगते हैं।

Asian Markets: एशिया बाजारों में दबाव, कोस्पी 3% टूटा, निक्केई 1.5% नीचे, क्रूड ऑयल में नरमी

Asian Markets: सोमवार को एशिया बाजारों में दबाव देखने को मिल रहा है। कोस्पी 4 फीसदी तो निक्केई 3 फीसदी नीचे है। निक्केई करीब 1.42 फीसदी की गिरावट के साथ 63,545.00 के आसपास दिख रहा है। वहीं, स्ट्रेट टाइम्स में 0.03फीसदी की कमजोरी दिखा रहा है। ताइवान का बाजार 1.02 फीसदी चढ़कर 43,558.34 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। जबकि हैंगसेंग 0.09 फीसदी की बढ़त के साथ 25,909.00 के स्तर पर नजर आ रहा है। वहीं, कोस्पी 3.25 फीसदी टूटा है। वहीं शंघाई कम्पोजिट 0.61 फीसदी की बढ़त के साथ 3,807.37 के स्तर पर दिख रहा है।

वॉल स्ट्रीट

रविवार शाम को अमेरिकी स्टॉक फ्यूचर्स में बढ़त देखी गई क्योंकि निवेशक जुलाई की रोज़गार रिपोर्ट और अगस्त के पहले हफ़्ते में आने वाले कई कंपनियों के नतीजों (अर्निंग्स कैलेंडर) पर नज़र बनाए हुए थे। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज फ्यूचर्स में लगभग 200 अंक या 0.4% की बढ़त हुई, जबकि S&P 500 फ्यूचर्स 0.5% ऊपर चढ़े। नैस्डैक-100 फ्यूचर्स ने बेहतर प्रदर्शन किया और 0.8% की बढ़त हासिल की।

वॉल स्ट्रीट ने शुक्रवार का सत्र सकारात्मक रुख के साथ समाप्त किया; डॉव जोन्स 276.97 अंक या 0.53% बढ़कर 52,485.03 पर बंद हुआ। S&P 500 में 0.7% की बढ़त के साथ यह 7,489.72 पर पहुंचा, जबकि नैस्डैक कम्पोजिट 1% चढ़कर 25,373.85 पर बंद हुआ।

शुक्रवार को प्रमुख अमेरिकी इंडेक्स के रिकॉर्ड स्तर के करीब बंद होने के बाद, अब निवेशक यह देख रहे हैं कि क्या हालिया तेज़ी को बढ़ावा देने वाले कारक बाज़ार में आगे भी बढ़त बनाए रखने में मदद करेंगे।

कच्चे तेल की कीमतें

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के खिलाफ़ नियोजित सैन्य हमले को रद्द करने और सोमवार से ईरान के साथ नई बातचीत शुरू करने की घोषणा के बाद तेल की कीमतों में गिरावट आई।

अक्टूबर डिलीवरी के लिए ब्रेंट क्रूड शुरुआती एशियाई कारोबार में 7.3% तक गिर गया, जबकि जुलाई में इसमें लगभग 25% की तेजी आई थी , जो मार्च के बाद से इसकी सबसे बड़ी मासिक बढ़त थी। इस बीच, वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 81 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से नीचे आ गया।

अमेरिका-ईरान युद्ध

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को एयर फ़ोर्स वन में कहा कि उन्होंने ईरान पर बड़े पैमाने पर होने वाले सैन्य हमले को रद्द कर दिया है। ऐसा उन्होंने सऊदी अरब समेत मध्य-पूर्व के प्रमुख सहयोगियों के कहने पर किया, जिन्होंने अमेरिका से कूटनीतिक समाधान खोजने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन इस शर्त पर रद्द किया गया कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने के लिए जल्द समझौता करने की कोशिशें जारी रहेंगी, साथ ही उन्होंने सभी पक्षों से बातचीत में तेज़ी लाने को भी कहा।

आज सोने की कीमत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के यह कहने के बाद कि सोमवार को ईरान के साथ फिर से बातचीत शुरू होगी, सोने की कीमतों में थोड़ी बढ़ोतरी हुई। इससे उम्मीद जगी कि लंबे समय से चल रहे इस टकराव में कोई समाधान निकलने से ऊर्जा-जनित महंगाई को कम करने में मदद मिल सकती है।

जुलाई में 1% की बढ़त के बाद सोने का कारोबार $4,070 प्रति औंस के आसपास हुआ; फरवरी के बाद यह सोने में पहली मासिक बढ़त थी।

हालिया बढ़ोतरी के बावजूद, पांच महीने से ज़्यादा समय पहले शुरू हुए अमेरिका-ईरान टकराव के बाद से सोने की कीमत में 20% से ज़्यादा की गिरावट आई है। ऊर्जा की ऊंची कीमतों ने महंगाई की चिंताएं बढ़ा दी हैं, जिससे यह उम्मीद बढ़ गई है कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती हैं,जो सोने जैसी बिना रिटर्न वाली संपत्तियों के लिए एक नकारात्मक बात है।

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Iran-US War Update: ईरान को धमकाते हुए क्यों पीछे हटे ट्रंप? फिलहाल ईरान पर हमला नहीं करेगा अमेरिका, सैन्य कार्रवाई रोकी

Iran-US War Update: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका ने ईरान पर प्रस्तावित सैन्य हमला फिलहाल टाल दिया है। ट्रंप के अनुसार, ईरान और मध्य पूर्व के कुछ अन्य देशों ने संभावित समझौते को अंतिम रूप देने के लिए अतिरिक्त समय मांगा है। इसके बाद उन्होंने वैश्विक हित को ध्यान में रखते हुए सैन्य कार्रवाई रोकने का फैसला किया। ट्रंप ने अपने पोस्ट में कहा कि वॉशिंगटन ने ईरान पर तय सैन्य हमला इसलिए रद्द कर दिया क्योंकि तेहरान और मध्य पूर्व के दूसरे देशों ने एक प्रस्तावित समझौते को अंतिम रूप देने के लिए और समय मांगा था।

इस समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत फिर से खोलना और ईरान के परमाणु खतरे को खत्म करना शामिल होगा। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर ट्रंप ने लिखा कि अमेरिकी सेना ईरान के खिलाफ ऐसी सैन्य कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार थी, जिसकी ताकत और क्षमता द्वितीय विश्व युद्ध के बाद नहीं देखी गई। हालांकि, उन्होंने कहा कि बातचीत में प्रगति होने की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने हमले को फिलहाल रद्द करने का निर्णय लिया।

ट्रंप के मुताबिक, ईरान के साथ प्रस्तावित समझौते में हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को तत्काल, पूरी तरह और बिना किसी बाधा के खोलना तथा ईरानी परमाणु खतरे को समाप्त करना शामिल है। उन्होंने कहा कि यदि जल्द समझौता हो जाता है तो यह पूरी दुनिया और ईरान दोनों के लिए फायदेमंद होगा।

इजरायल ने अमेरिका का किया सपोर्ट

अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया कि इजरायल ने भी वार्ता जारी रहने तक सैन्य कार्रवाई टालने के फैसले में अमेरिका का साथ दिया है। उन्होंने सभी पक्षों से जल्द से जल्द समझौता पूरा करने की अपील की। उधर, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका, इजरायल या क्षेत्र का कोई अन्य देश ईरान के खिलाफ नई सैन्य कार्रवाई करता है, तो तेहरान उसका निर्णायक जवाब देगा।

अराघची ने यह बात तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान, पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद के साथ अलग-अलग बातचीत के दौरान कही। तुर्किये के विदेश मंत्री ने भी पुष्टि की है कि दोनों पक्षों के बीच जारी वार्ता की ताजा स्थिति पर चर्चा हुई।

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हालांकि, ट्रंप के इन दावों पर ईरान या अन्य संबंधित देशों की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए संभावित समझौते और हमले को टालने संबंधी दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है। डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी दावा किया कि बातचीत जारी रहने के दौरान सैन्य कार्रवाई में देरी करने में इजरायल भी अमेरिका के साथ शामिल हो गया है।

होर्मुज में ईरान का बड़ा धमाका! US सुरक्षा को चीरते हुए तेहरान ने 2 ऑयल टैंकरों पर दागीं मिसाइलें

Iran US Hormuz Conflict Update: मिडिल ईस्ट से एक बेहद हैरान करने वाली खबर सामने आ रही है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसने अमेरिकी सैन्य ‘एयर एस्कॉर्ट’ के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करने की कोशिश कर रहे दो तेल टैंकरों पर हमला कर उन्हें रोक दिया है।

ईरान ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल समुद्री मार्ग अभी भी पूरी तरह बंद है और बिना उसकी इजाजत के किसी भी जहाज को गुजरने नहीं दिया जाएगा।

अमेरिकी सुरक्षा के बावजूद ईरान का हमला

IRGC द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, दोनों तेल टैंकर अमेरिकी सैन्य विमानों की सुरक्षा के बीच एक ‘अनाधिकृत मार्ग’ से होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करने की कोशिश कर रहे थे।

ईरान ने दावा किया कि नियमों का पालन न करने वाले इन दो टैंकरों पर निशाना साधा गया, जिससे वे वहीं रुकने पर मजबूर हो गए। इस हमले के तुरंत बाद पीछे आ रहे चार अन्य तेल टैंकरों ने अपना रास्ता बदल लिया और वापस अपनी पुरानी स्थिति में लौट गए।

होर्मुज पर ईरान का दावा और नया नियम

सीजफायर टूटने के बाद ईरान ने इस समुद्री मार्ग पर दोबारा अपनी नाकेबंदी सख्त कर दी है। ईरान का कहना है कि, ‘होर्मुज से गुजरने वाले किसी भी मर्चेंट वेसल को अब ईरान से विशेष परमिट लेना होगा और ट्रांजिट टैक्स चुकाना होगा। ईरान ने जहाजों की आवाजाही को केवल अपने तटीय क्षेत्र से सटे पानी के गलियारों तक सीमित कर दिया है।

अमेरिका का रुख और नया प्रतिबंध

दूसरी ओर अमेरिका ने ईरान के इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए खुला और सुरक्षित है। अमेरिका ने भी ईरान के प्रमुख बंदरगाहों पर अपनी नौसैनिक नाकेबंदी बरकरार रखी है।

हाल ही में ट्रंप प्रशासन ने IRGC से जुड़ी संस्थाओं पर नए कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिका ने ईरान पर अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों से अवैध वसूली करने का आरोप लगाया है।

होर्मुज में डेरा डाले क्यों बैठा है ईरान?

होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी और हिंद महासागर के बीच एक बेहद संकरा और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। दुनिया के कुल कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी इस गतिरोध और नाकेबंदी के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और एलएनजी (LNG) की कीमतों में भारी उछाल और अस्थिरता देखी जा रही है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।

Global Market Today: ग्लोबल बाजार में कोहराम, चिप शेयरों में बिकवाली से कोस्पी 8% टूटा, निक्केई 4% से ज्यादा लुढ़का

Global Market Today: एशियाई बाजारों में 28 जुलाई को गिरावट देखने को मिली। US में चिप कंपनियों में बिकवाली के चलते कोरिया का बाजार 8 फीसदी के लोअर सर्किट पर फिसल गया। निक्केई 4.40 फीसदी टूटा है। अमेरिकी बाजार भी ऊपरी स्तरों से फिसले है। बेंचमार्क कोस्पी (Kospi) 8.70 फीसदी गिरा। जबकि स्मॉल-कैप कोस्डैक (Kosdaq) में 3.63% की गिरावट आई। जापान का निक्केई 225 (Nikkei 225) 4.21% गिरा और व्यापक टॉपिक्स (Topix) इंडेक्स में 0.63% की गिरावट दर्ज की गई। वहीं, ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 शुरुआती कारोबार में 0.38% नीचे आ गया।

वॉल स्ट्रीट

सोमवार को वॉल स्ट्रीट मिला-जुला बंद हुआ क्योंकि निवेशक इस हफ़्ते के आखिर में बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों के तिमाही नतीजों से पहले सतर्क रहे। बाज़ार के प्रतिभागियों ने तेल की बढ़ी हुई कीमतों पर भी कड़ी नज़र रखी, क्योंकि चिंता थी कि लगातार महंगाई का दबाव फेडरल रिजर्व को ब्याज दरों पर सख्त रुख बनाए रखने के लिए मजबूर कर सकता है।

S&P 500 मामूली रूप से 0.02% बढ़कर 7,413.18 पर बंद हुआ, जबकि डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 0.51% बढ़कर 52,210.08 पर बंद हुआ। वहीं, नैस्डैक 0.18% गिरकर 24,932.08 पर बंद हुआ।

टेक दिग्गज माइक्रोसॉफ्ट, अमेज़न, मेटा और एप्पल इस हफ़्ते अपने तिमाही नतीजे घोषित करने वाले हैं। निवेशक यह भी आकलन कर रहे हैं कि क्या पिछले कुछ वर्षों में बाज़ारों को आगे बढ़ाने वाली AI-संचालित तेज़ी अब अपनी रफ़्तार खो रही है।

अमेरिकी चिप शेयरों में बिकवाली

कई नकारात्मक घटनाक्रमों के बीच सोमवार को चिप शेयरों में लगातार तीसरे सत्र में गिरावट जारी रही। Nvidia और AMD के शेयरों में 5-5% की गिरावट आई, जबकि Seagate के शेयर कंपनी की तिमाही नतीजों की घोषणा से पहले 4% गिर गए।

इस बीच, SK Hynix के US-लिस्टेड शेयरों (ADRs) में रातों-रात 7.5% की गिरावट आई और वे अपने $149 के IPO प्राइस से नीचे बंद हुए। Micron और Western Digital के शेयर भी क्रमशः 2% और 4% गिरकर बंद हुए।

US-ईरान युद्ध

Bloomberg की रिपोर्ट के अनुसार, Axios की एक खबर में बताया गया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कूटनीति को एक और मौका देने के लिए ईरान पर सैन्य हमले टालने का फैसला किया है। इस कदम के बावजूद, यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों पक्षों के बीच कोई ठोस बातचीत हुई है या नहीं।

साथ ही, खबर है कि ईरान और ओमान के अधिकारी होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से शिपिंग बहाल करने के लिए बातचीत कर रहे हैं। यह फारस की खाड़ी को वैश्विक बाजारों से जोड़ने वाला एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मार्ग है। सामान्य समय में, इस जलमार्ग से दुनिया की दैनिक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है।

क्रूड में नरमी

मंगलवार, 28 जुलाई को कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट जारी रही। यह गिरावट तब आई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वाशिंगटन और तेहरान मध्य पूर्व के संघर्ष को सुलझाने के लिए बातचीत कर रहे हैं।

पिछले सत्र में 7% से ज़्यादा गिरने के बाद वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड $82 प्रति बैरल से नीचे आ गया, जबकि ब्रेंट क्रूड में तीन महीने से ज़्यादा समय में एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई और यह $88 प्रति बैरल के करीब बंद हुआ।

आज सोने की कीमत

सोने की कीमतें ऊंची बनी रहीं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के यह कहने के बाद कि वाशिंगटन और ईरान संघर्ष को खत्म करने के लिए बातचीत कर रहे हैं, युद्ध से महंगाई बढ़ने और ब्याज दरें बढ़ने की आशंकाएं कम हुईं।

सोमवार को 0.6% की बढ़त के बाद, शुरुआती कारोबार में यह कीमती धातु $4,075 प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रही थी। जून के आखिर से सोना $4,000 प्रति औंस के स्तर के करीब बना हुआ है। इसे ‘बार्गेन बाइंग’ (कम कीमत पर खरीदारी) का सहारा मिला है, जिससे यह ट्रेडर्स द्वारा बारीकी से देखे जाने वाले अहम मनोवैज्ञानिक स्तर से ऊपर बना हुआ है।

हालांकि, पांच महीने पहले संघर्ष शुरू होने के बाद से सोने की कीमतों में 20% से अधिक की गिरावट आई है। इससे उस कई साल की तेजी का अंत हो गया है, जिसने जनवरी के आखिर में कीमतों को लगभग $5,600 प्रति औंस के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंचा दिया था।

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‘ईरान और हूतियों को भयानक मिलिट्री सजा दी जाएगी, अब फिर हमला हुआ तो…’, सऊदी के जहाजों पर अटैक के बाद ट्रंप का फूटा गुस्सा; दे डाली धमकी

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आज कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में ईरान समर्थित हूतियों के किसी भी भविष्य के हमले के लिए अमेरिका ईरान को जिम्मेदार ठहराएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह समूह फिर से जहाजों को निशाना बनाता है, तो उन्हें बड़ी सैन्य सजा दी जाए

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