होर्मुज में अमेरिका का भयंकर अटैक, एयर डिफेंस सिस्टम और IRGC की नावों को बनाया निशाना; बंदर अब्बास के पास भी कई धमाकों की आवाज

अमेरिका ने ईरान के मिसाइल और एयर डिफेंस सिस्टम पर कई हमले किए और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास कई जगहों पर IRGC की छोटी स्पीडबोट्स को निशाना बनाया।ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर IRIB के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास ईरान के केशम द्वीप के निकट कई धमाकों की आवाज सु

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US-Iran War News: ईरान-अमेरिका युद्ध फिर भड़का! IRGC ने होर्मुज स्ट्रेट को किया बंद, अमेरिकी सेना ने शुरू किया घातक हमला

US-Iran War News: पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। शनिवार (11 जुलाई) देर रात ईरान ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को दोबारा बंद करने की घोषणा कर दी। इसके कुछ ही घंटों बाद अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर तीसरे दौर की हवाई और मिसाइल कार्रवाई शुरू कर दी। इन घटनाओं ने पिछले महीने हुए अस्थायी युद्धविराम (सीजफायर) के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य फिर बंद

ईरान का कहना है कि एक कमर्शियल जहाज ने उसकी ओर से निर्धारित रूट्स का पालन नहीं किया। इसके बाद ईरानी सेना इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जहाज की ओर चेतावनी स्वरूप गोलियां चलाईं। ईरान ने इसे अपनी समुद्री सुरक्षा का उल्लंघन बताते हुए घोषणा की है कि होर्मुज अगले आदेश तक बंद रहेगा।

रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने जहाजों को चेतावनी दी है कि वे ईरानी अधिकारियों द्वारा मंजूरी न किए गए किसी भी रास्ते से इसे पार करने की कोशिश न करें। यह फैसला ऐसे समय लिया गया है, जब ओमान की मध्यस्थता में समुद्री रूट्स को सुरक्षित रखने और युद्धविराम बनाए रखने की कोशिशें जारी थीं।

अमेरिका का तीसरा सैन्य हमला

ईरान की इस घोषणा के कुछ ही समय बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर तीसरे दौर की कार्रवाई शुरू कर दी है। अमेरिका का दावा है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की क्षमताओं को कमजोर करना है। जिनके जरिए वह अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों और नागरिक समुद्री ट्रैफिक को निशाना बना सकता है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरानी कार्रवाई में क्षतिग्रस्त हुए साइप्रस के झंडे वाले एक कंटेनर जहाज के इंजन रूम को भारी नुकसान पहुंचा है। उसका एक चालक दल का सदस्य अब भी लापता है।

सीजफायर पर मंडराया खतरा

अमेरिकी प्रशासन पहले ही स्पष्ट कर चुका था कि जब तक होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह सुरक्षित नहीं रहेगा, तब तक युद्धविराम को आगे बढ़ाने या नए समझौते पर बातचीत संभव नहीं होगी। वॉशिंगटन को उम्मीद थी कि ईरान सार्वजनिक रूप से सभी जहाजों की सुरक्षित आवाजाही की गारंटी देगा। लेकिन इसके उलट तेहरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने की घोषणा कर दी।

ओमान की मध्यस्थता जारी

तनाव के बीच ईरान और ओमान के विदेश मंत्रियों की शनिवार को बैठक हुई। दोनों देशों ने समुद्री रूट्स की सुरक्षा और भविष्य की व्यवस्था पर तकनीकी और राजनीतिक स्तर पर बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि बैठक में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए उपयुक्त तंत्र पर चर्चा हुई। इस बीच, ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अपने पिता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के बाद पहली बार सार्वजनिक बयान जारी किया है।

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‘घुटने टेको, गलती मानो और खाली करो होर्मुज का समुद्री रास्ता’, अमेरिका का ईरान को 24 घंटे का अल्टीमेटम

US Iran Ultimatum Strait of Hormuz: मिडिल ईस्ट में जारी महायुद्ध के बीच एक बाद अपडेट सामने आया है। अमेरिका ने ईरान को 24 घंटे की सख्त डेडलाइन दी है। US ने ईरान को सार्वजनिक रूप से यह घोषणा करने को कहा है कि वह रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के समुद्री रास्ते को खुला रखेगा और कमर्शियल जहाजों पर हो रहे हमलों को तुरंत रोकेगा।

‘एक्सियोस’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वाशिंगटन ने ईरान को सीधे शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर वह इस अल्टीमेटम को नहीं मानता है, तो उसे इसके ‘गंभीर परिणाम’ भुगतने होंगे और अमेरिकी सेना किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है। आइए जानते हैं अमेरिका और ईरान के बीच छिड़े इस नए विवाद की पूरी इनसाइड स्टोरी क्या है।

‘कल का दिन उनके लिए अच्छा नहीं होगा’

अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान तक यह कड़ा संदेश सीधे तौर पर और क्षेत्र के मध्यस्थ देशों के जरिए पहुंचा दिया गया है। एक अमेरिकी अधिकारी ने बेहद सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा, ‘अगर कल तक ईरान अपना रुख साफ नहीं करता है, तो कल का दिन उनके लिए बिल्कुल भी अच्छा नहीं रहने वाला है।’ अमेरिकी प्रशासन चाहता है कि ईरान दुनिया के सामने सार्वजनिक रूप से यह ऐलान करे कि होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाला व्यापार पूरी तरह सुरक्षित रहेगा।

एक अन्य अधिकारी ने कहा, ‘हम चाहते हैं कि वे सार्वजनिक रूप से कहें कि वे जहाजों पर गोलीबारी बंद करेंगे और प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से यह स्वीकार करेंगे कि उन्होंने बहुत बड़ी गलती की है।’ इसके साथ ही अमेरिका चाहता है कि ईरान यह भी घोषित करे कि इस समुद्री रास्ते से गुजरने वाले सभी जहाजों के लिए यह चैनल पूरी तरह ‘टोल-फ्री’ रहेगा।

समझौते के उल्लंघन का आरोप: पहले भी हो चुकी है एयरस्ट्राइक

अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ईरान ने पिछले महीने हुए आपसी सहमति पत्र का खुलेआम उल्लंघन किया है। ईरान द्वारा लगातार कमर्शियल और व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाए जाने के बाद ही अमेरिका दो बार ईरान पर जवाबी हवाई हमले कर चुका है। अमेरिका का कहना है कि डिप्लोमेसी फेल होने की सूरत में उसके पास प्लान-बी तैयार है।

ओमान में आज होने वाली बैठक पर टिकी दुनिया की नजरें

इस भयंकर तनाव के बीच शनिवार, 11 जुलाई को ओमान की राजधानी मस्कट में एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची शनिवार को ओमान की यात्रा पर पहुंच रहे हैं। ओमान और ईरान के अधिकारियों के बीच होने वाली इस बातचीत का मुख्य फोकस होर्मुज जलमार्ग और वहां जहाजों की सुरक्षा ही है।

अमेरिका को उम्मीद है कि इस बैठक के दौरान ओमान के दबाव में आकर तेहरान ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के जरिए फ्री नेविगेशन को फिर से बहाल करने पर सहमत हो जाएगा। ईरानी सरकारी मीडिया ने भी इस दौरे की पुष्टि करते हुए इसे पिछले दो महीनों से ओमान के साथ चल रही बातचीत का ही हिस्सा बताया है।

क्यों पूरी दुनिया के लिए आफत है ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का बंद होना?

‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ‘ऑयल चोकपॉइंट’ कहा जाता है।दुनिया के कुल तेल और गैस सप्लाई का लगभग 20% इसी पतले समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है। सऊदी अरब, यूएई, कुवैत और इराक जैसे देश इसी रास्ते से दुनिया को कच्चा तेल भेजते हैं।

LPG Price Today: घरेलू और कमर्शियल गैस सिलेंडर के ग्राहकों को राहत! जानिए आपके शहर में आज क्या है कीमत

LPG Price Today: अगर आप आज (10 जुलाई) गैस सिलेंडर बुक कराने की योजना बना रहे हैं, तो पहले ताजा एलपीजी (LPG) रेट जरूर देख लें। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने 10 जुलाई 2026 के लिए नई कीमतें जारी कर दी हैं। आज भी 14 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर और 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के साथ शांति समझौते को खत्म बताने और अमेरिका द्वारा नए हमले शुरू करने के बाद LPG, CNG और PNG की कीमतों को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ गई हैं।

इससे एनर्जी सप्लाई के लिए अहम रास्ते, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर भी चिंता पैदा हो गई है। ट्रंप ने कहा है कि US-ईरान युद्ध को खत्म करने का अंतरिम समझौता खत्म हो गया है। 17 जून के समझौते को खत्म करने के कुछ घंटों बाद, अमेरिका ने बुधवार को ईरान के खिलाफ नए और बड़े सैन्य हमले किए। इन हमलों में देश के दक्षिणी तट पर मौजूद ठिकानों को निशाना बनाया गया। इसका मकसद होर्मुज जलडमरूमध्य से कमर्शियल शिपिंग की सुरक्षा करना बताया गया। अमेरिकी सेना ने कहा कि शुरुआती शांति समझौते और चल रही बातचीत के बावजूद उसने फिर से हमले शुरू कर दिए हैं।

भारत में इंडियन ऑयल ने 1 जुलाई से 19-kg वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत कम की, जो 2026 में पहली कटौती थी। अलग-अलग शहरों में यह कटौती ₹173 से ₹183.50 के बीच थी। सरकार ने कहा कि देश भर में घरेलू LPG, PNG और CNG की सप्लाई पूरी तरह से बनाए रखी जा रही है। सरकार ने यह भी कहा कि सप्लाई को लेकर चिंताएं कम होने के बाद होटलों, रेस्तरां और दूसरे व्यवसायों को कमर्शियल LPG की सप्लाई संकट से पहले के स्तर पर बहाल कर दी गई है।

पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, कमर्शियल LPG की कीमतों में कटौती पिछले हफ्ते कमर्शियल ग्राहकों को सप्लाई बहाल होने के बाद की गई। घरेलू उत्पादन में सुधार और इंपोर्टेड LPG कार्गो के आने की उम्मीद के कारण कमर्शियल LPG सप्लाई पर लगी पाबंदियां हटा ली गई थीं। इसके अलावा, बुधवार को एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमतों में ₹5 प्रति लीटर की कटौती की गई, जिससे दिल्ली में इसकी कीमत घटकर ₹110 प्रति लीटर हो गई। ईरान-अमेरिका संघर्ष के कारण जेट फ्यूल की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद यह पहली कटौती थी। इससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय रूट पर एयरलाइंस के ऑपरेटिंग खर्च में कमी आने की उम्मीद है।

14 किलो घरेलू LPG सिलेंडर के दाम (रुपये में)

दिल्ली: ₹942

नोएडा: ₹939.50

मुंबई: ₹941.50

कोलकाता: ₹968

पटना: ₹1,031.50

लखनऊ: ₹979.50

चेन्नई: ₹957.50

चंडीगढ़: ₹951.50

जयपुर: ₹945.50

हरियाणा: ₹943.50

असम: ₹991

19 किलो कमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम (रुपये में)

दिल्ली: ₹2,930

नोएडा: ₹2,930

मुंबई: ₹2,885.50

कोलकाता: ₹3,081.50

पटना: ₹3,227

लखनऊ: ₹3,052.50

चेन्नई: ₹3,106

चंडीगढ़: ₹2,954.50

जयपुर: ₹2,957.50

हरियाणा: ₹2,932

असम: ₹3,173.50

कब बदलती हैं LPG की कीमतें?

ऑयल मार्केटिंग कंपनियां आमतौर पर हर महीने की पहली तारीख को एलपीजी सिलेंडर की कीमतों की समीक्षा करती हैं। हालांकि, जरूरत पड़ने पर महीने के बीच में भी घरेलू या कमर्शियल सिलेंडर के दाम बदले जा सकते हैं।

घर बैठे ऐसे करें अपने शहर का LPG रेट चेक

अगर आप अपने शहर में एलपीजी सिलेंडर की सटीक कीमत जानना चाहते हैं, तो इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ताजा रेट देख सकते हैं। वहां हर शहर के अनुसार अपडेटेड कीमतें उपलब्ध रहती हैं। फिलहाल 10 जुलाई 2026 को एलपीजी उपभोक्ताओं को कीमतों में किसी तरह की राहत नहीं मिली है। घरेलू एवं कमर्शियल दोनों कैटेगरी के सिलेंडरों के दाम स्थिर बने हुए हैं।

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FII DII Data: क्या रिटेल निवेशकों ने घबराकर बेच दिए शेयर? FII और DII ने मार्केट क्रैश में की ₹2753 करोड़ की खरीदारी

FII DII Data: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव की वजह से बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दिखी। इसके बावजूद विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने भारतीय बाजार में लगातार चौथे कारोबारी सत्र में खरीदारी जारी रखी। एक्सचेंज के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, 9 जुलाई को FIIs ने 1,962.80 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) भी खरीदारी के मूड में रहे और उन्होंने 790.16 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। यानी दोनों ने मिलकर 2,753 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। ऐसे में बाजार की तेज गिरावट यह संकेत देती है कि अन्य निवेशक वर्गों, खासकर रिटेल निवेशकों की ओर से घबराहट में बिकवाली हुई होगी।

FII-DII ने कितना खरीदा, कितना बेचा

बुधवार के कारोबारी सत्र में FIIs ने कुल 17,463.95 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे और 15,501.15 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। वहीं, DIIs ने 19,165.13 करोड़ रुपये की खरीदारी और 18,374.97 करोड़ रुपये की बिकवाली की।

एक दिन पहले यानी 8 जुलाई को भी FIIs ने 393.19 करोड़ रुपये की खरीदारी की थी। हालांकि, उस दिन DIIs 383.43 करोड़ रुपये के शेयर बेचकर नेट सेलर रहे थे।

इस हफ्ते कैसा रहा FII-DII का रुख?

इस सप्ताह अब तक FIIs लगातार चारों कारोबारी सत्र में खरीदार रहे हैं। वहीं, DIIs ने भी चार में से तीन सत्रों में खरीदारी की है। इससे साफ है कि बाजार में भारी उतार-चढ़ाव के बावजूद संस्थागत निवेशकों का भरोसा अभी बना हुआ है।

तारीखFII नेट फ्लोDII नेट फ्लो
9 जुलाई 2026₹1,962.80 करोड़₹790.16 करोड़
8 जुलाई 2026₹393.19 करोड़-₹383.43 करोड़
7 जुलाई 2026₹243.03 करोड़₹3,791.42 करोड़
6 जुलाई 2026₹1,355.33 करोड़-₹1,953.89 करोड़

भारी गिरावट के बावजूद जारी रही खरीदारी

विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी के बावजूद बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में जोरदार बिकवाली देखने को मिली। इसकी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह बयान रहा, जिसमें उन्होंने कहा कि ईरान के साथ हुआ शांति समझौता अब खत्म हो चुका है। इससे वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव फिर बढ़ गया।

शेयर बाजार कितना गिरा

BSE Sensex 1,677 अंक टूटकर 76,504 पर बंद हुआ। वहीं, Nifty 50 517 अंक गिरकर 23,882 पर आ गया। इसके साथ ही निफ्टी 23,900 के अहम स्तर से नीचे फिसल गया।

बाजार में लगभग हर सेक्टर में बिकवाली रही। Nifty 50 के 50 में से 46 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। Nifty PSU Bank और Nifty Chemicals सबसे ज्यादा टूटने वाले सेक्टर रहे। वहीं, Nifty Bank 1,458 अंक गिरकर 56,743 और Nifty Midcap 963 अंक टूटकर 61,323 पर बंद हुआ।

रुपये पर भी बढ़ा दबाव

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और डॉलर की मजबूती का असर रुपये पर भी दिखा। भारतीय रुपया 59 पैसे कमजोर होकर डॉलर के मुकाबले 95.55 पर बंद हुआ। अमेरिका के ईरान पर नए हमलों और Hormuz Strait में बढ़े तनाव के बाद कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ा।

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LPG Price Today: दिल्ली से पटना तक क्या है घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर के दाम? चेक करें अपने शहर का रेट

LPG Price Today: 8 जुलाई को भी घरेलू और कमर्शियल LPG गैस सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं देखा गया। इससे करीब एक हफ्ते पहले यानी 1 जुलाई को तेल कंपनियों ने इस साल पहली बार 19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम 183.50 रुपये कम किए थे। जिसके बाद दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 2,930 रुपये, मुंबई में 2,885.50 रुपये और कोलकाता में 3,081.50 रुपये हो गई थी।

इसके अलावा, सरकारी तेल कंपनियों ने 5 किलो वाले फ्री ट्रेड LPG (FTL) सिलेंडर के दाम में भी 13 रुपये की कमी की है। इसे आमतौर पर मुन्ना या छोटू सिलेंडर भी कहा जाता है। अब इसकी कीमत 808.50 रुपये हो गई है।

वहीं, 14.2 किलो वाले घरेलू कुकिंग गैस की कीमत में 7 जून को हुई बढ़ोतरी के बाद से कोई बदलाव नहीं किया गया है। उस समय कीमतें ₹29 बढ़ाई गई थीं, जो 28 फरवरी को शुरू हुए US-ईरान संघर्ष के बाद दूसरी बार की गई बढ़ोतरी थी। इस संघर्ष के कारण होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) से तेल टैंकरों की आवाजाही में रुकावट आई, जिससे दुनिया भर में ऊर्जा की सप्लाई में दिक्कतें हुईं।

शहर के हिसाब से घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर के लेटेस्ट रेट यहां देखें

शहरघरेलू LPG सिलेंडर (14.2 किलो)कमर्शियल LPG सिलेंडर (19 किलो)
नई दिल्ली₹942.00₹2,930 (₹183.50 की कटौती)
कोलकाता₹968.00₹3,081.50 (₹174 की कटौती)
मुंबई₹941.50₹2,885.50 (₹182 की कटौती)
चेन्नई₹957.50₹3,106 (₹177 की कटौती)
गुरुग्राम₹950.50₹2,947.50 (₹182.50 की कटौती)
नोएडा₹939.50₹2,930 (₹183.50 की कटौती)
बेंगलुरु₹944.50₹3,021 (₹177 की कटौती)
भुवनेश्वर₹968₹3,114.50 (₹175.50 की कटौती)
चंडीगढ़₹951.50₹2,954.50 (₹181.50 की कटौती)
हैदराबाद₹994₹3,191 (₹176 की कटौती)
जयपुर₹945.50₹2,957.50 (₹183.50 की कटौती)
लखनऊ₹979.50₹3,052.50 (₹183.50 की कटौती)
पटना₹1,031.50₹3,227 (₹173 की कटौती)
तिरुवनंतपुरम₹951₹2,971.50 (₹180.50 की कटौती)

ईरान पर अमेरिकी हमलों के बाद तेल की कीमतें बढ़ीं

बुधवार को, अमेरिका और ईरान के बीच फिर से शुरू हुई लड़ाई के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतों में तेजी देखने को मिली।  होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजर रहे तीन कमर्शियल जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में अमेरिका द्वारा ईरान पर जवाबी हमले किए जाने के बाद तेल की कीमतें बढ़ गईं। वहीं, वाशिंगटन ने तेहरान पर क्रूड की बिक्री से जुड़े प्रतिबंध भी फिर से लागू कर दिए।

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FII DII Data: विदेशी निवेशकों की लगातार तीसरे दिन खरीदारी, क्या अब आने वाली है बड़ी तेजी?

FII DII Data: फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (FII) ने मंगलवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार में खरीदारी जारी रखी। एक्सचेंज के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, FIIs ने 393.19 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। वहीं, डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (DII) 383.43 करोड़ रुपये के शेयर बेचकर नेट सेलर रहे।

सोमवार को भी FIIs ने 243.03 करोड़ रुपये की खरीदारी की थी। उस दिन DIIs ने 3,791.42 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे। इससे पहले 3 जुलाई को FIIs ने चार दिन की लगातार बिकवाली के बाद वापसी करते हुए 1,355.33 करोड़ रुपये की खरीदारी की थी। उसी दिन DIIs ने 1,953.89 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे।

बाजार में रही कमजोरी

हालांकि, विदेशी निवेशकों की खरीदारी के बावजूद मंगलवार को घरेलू शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ। BSE Sensex 104 अंक टूटकर 78,181 पर बंद हुआ। वहीं Nifty 50 32 अंक गिरकर 24,399 पर बंद हुआ। इसके साथ ही निफ्टी चार दिनों की लगातार तेजी के बाद 24,400 के स्तर से नीचे फिसल गया।

Nifty Bank 91 अंक गिरकर 58,201 पर बंद हुआ। वहीं Nifty Midcap 186 अंक टूटकर 62,285 पर आ गया। कारोबार के दौरान यह अपने ऊपरी स्तर से 300 अंकों से ज्यादा फिसल गया।

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किन वजहों से गिरा बाजार?

बाजार पर हैवीवेट शेयरों में कमजोरी, मिडकैप शेयरों में मुनाफावसूली और डिफेंस व रियल्टी सेक्टर में बिकवाली का दबाव रहा। हालांकि, आईटी शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, जिससे गिरावट कुछ हद तक सीमित रही।

इस बीच, वैश्विक जोखिम कम होने और Hormuz Strait से जहाजों की आवाजाही सामान्य होने से सप्लाई बाधित होने की चिंता घटी। इसका असर रुपये पर भी दिखा। भारतीय रुपया 48 पैसे मजबूत होकर डॉलर के मुकाबले 94.95 के स्तर पर बंद हुआ।

क्या अब गिरावट का दौर खत्म?

मार्केट के जानकार FII की लगातार तीन दिनों की खरीदारी को पॉजिटिव संकेत मान रहे हैं। Quant Mutual Fund के फाउंडर और चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर संदीप टंडन का मानना है कि भारतीय शेयर बाजार का सबसे मुश्किल दौर अब पीछे छूट चुका है।

संदीप टंडन के मुताबिक, विदेशी निवेशकों (FII) की वापसी से भारतीय बाजार को मजबूती मिलेगी और यह दूसरे वैश्विक बाजारों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। उनका मानना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर, पावर, यूटिलिटीज और चुनिंदा एनर्जी कंपनियां आने वाले समय में निवेश के लिए सबसे आकर्षक सेक्टर बने रहेंगे।

Market Outlook: ‘बाजार का सबसे बुरा दौर खत्म’, Quant Mutual Fund ने कहा- अब सही स्टॉक्स चुनने का समय

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LPG Cylinder Price Today: क्या आज सस्ता हुआ घरेलू LPG सिलेंडर? चेक करें अपने शहर का रेट

LPG Cylinder Price Today: आज भी देशभर में 14.2 किलो वाले घरेलू LPG सिलेंडर के दाम स्थिर बने हुए हैं। जबकि 1 जुलाई को 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर के दाम 183.50 रुपये घटाए गए थे। बता दें कि इससे पहले पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच इसकी कीमत बढ़कर 3100 रुपये के पार पहुंच गई थी। वहीं, रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में आखिरी बार बदलाव जून महीने में हुआ था, जब इसके दाम में 29 रुपये तक की कमी की गई थी। फिलहाल दिल्ली में 14.2 किलो वाले सिलेंडर की कीमत 942 रुपये और 19- किलो वाले सिलेंडर की कीमत 2930 रुपये है।

चेक करें अपने शहर का रेट

शहर घरेलू सिलेंडर की कीमतकमर्शियल सिलेंडर की कीमत
दिल्ली942.0 रुपये2930.0 रुपये
मुंबई941.5 रुपये2885.5 रुपये
कोलकाता968.0 रुपये3082.0 रुपये
चेन्नई957.5 रुपये3106.0 रुपये
नोएडा939.50 रुपये2917.0 रुपये
देहरादून961.0 रुपये2983.5 रुपये
हैदराबाद934.0 रुपये2052.5 रुपये
गोवा पणजी956.0 रुपये3006.5 रुपये
तिरुवनंतपुरम 951.0 रुपये2970.5 रुपये

सऊदी अरब ने कर दिया बड़ा ऐलान

सऊदी अरब ने एशियाई देशों में अपने खरीदारों को कम कीमत पर कच्चा तेल बेचना शुरू कर दिया है। इसकी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में हालात सामान्य होना और वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई बढ़ना है। जिस वजह से तेल बेचने वाली कंपनियों के बीच कंपटीशन भी तेज हो गया है।

सोमवार को जारी प्राइस लिस्ट के हवाले से ब्लूमबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में बताया, सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी सऊदी अरामको अगले महीने के लिए अपने प्रमुख ग्रेड ‘अरब लाइट’ कच्चे तेल की कीमत में 11 डॉलर प्रति बैरल की कटौती करने जा रही है। नई कीमत क्षेत्रीय बेंचमार्क से करीब 1.50 डॉलर प्रति बैरल कम होगी। रिपोर्ट के अनुसार, साल 2000 के बाद यह पहली बार है जब किसी एक महीने में कच्चे तेल की कीमतों में इतनी बड़ी कटौती की गई है। इससे एशियाई खरीदारों को सस्ते दाम पर तेल मिलने की उम्मीद है।

क्या अब कम हो जाएगी LPG की कीमत?

अंतरराष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आने के बाद भारत में पेट्रोल, डीजल और LPG के दाम तुरंत कम नहीं होंगे। जानकारों के मुताबिक, अगर कच्चा तेल इसी स्तर पर लंबे समय तक बना रहता है, तो जुलाई के अंत या अगस्त में घरेलू कीमतों में कुछ राहत मिल सकती है।

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होर्मुज में तेल टैंकर पर भीषण मिसाइल हमला, सीजफायर खत्म होते ही तबाही की आहट; कच्चे तेल की कीमतों में लग सकती है आग!

Iran US Conflict Near Strait of Hormuz: वैश्विक कच्चे तेल की सप्लाई के लिए दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील समुद्री रास्ते ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ के पास सोमवार को एक बड़े तेल टैंकर पर मिसाइल हमला हुआ है। यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) के मुताबिक, ओमान के तट से करीब 8 समुद्री मील दूर एक अज्ञात मिसाइल या ड्रोन टकराने के बाद तेल टैंकर में भीषण आग लग गई।

इस घटना के तुरंत बाद अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया है कि ईरान के ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) ने जानबूझकर दो कमर्शियल जहाजों पर मिसाइलें दागी हैं। इस हमले के बाद अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुआ एक हफ्ते का संघर्ष विराम समझौता खत्म हो गया है, जिससे वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने का खतरा फिर से बढ़ गया है।

UKMTO और अमेरिका का क्या है दावा?

ब्रिटिश नौसेना की विंग UKMTO के अनुसार, यह तेल टैंकर होर्मुज जलडमरूमध्य से होते हुए दक्षिण की तरफ बढ़ रहा था, तभी इसके पोर्ट साइड पर एक मिसाइल आकर लगी। राहत की बात यह है कि इस हमले में किसी भी क्रू मेंबर के हताहत होने या किसी तरह के बड़े पर्यावरणीय नुकसान की खबर नहीं है।

अमेरिका की जवाबी कार्रवाई की तैयारी

अमेरिकी मीडिया आउटलेट ‘एक्सियोस’ से बात करते हुए दो यूएस अधिकारियों ने पुष्टि की है कि ईरान ने दो व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया है, जिससे जहाजों को भारी नुकसान पहुंचा है। इसके जवाब में अमेरिका अब ईरानी ठिकानों पर जवाबी सैन्य हमले करने की तैयारी कर रहा है।

क्यों टूटा अमेरिका-ईरान का शांति समझौता?

यह हमला ठीक उस समय हुआ है जब वाशिंगटन और तेहरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में हमलों को रोकने के लिए हुआ एक हफ्ते का समझौता समाप्त हो गया। केवल तीन हफ्ते पहले ही दोनों देशों ने एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए थे, जो अब पूरी तरह टूटता नजर आ रहा है। पिछले हफ्ते कतर की राजधानी दोहा में दोनों पक्षों के बीच हुई अप्रत्यक्ष बातचीत भी इस रणनीतिक समुद्री रास्ते के भविष्य को लेकर बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गई थी।

इससे पहले भी ईरान ने इस रास्ते की घेराबंदी कर दी थी और कई कमर्शियल जहाजों पर हमले किए थे, जिसके जवाब में अमेरिका ने नौसैनिक नाकेबंदी की थी। पिछले महीने हुए समझौते के बाद जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हुई थी, जो अब दोबारा खतरे में है।

ईरान अब जहाजों से वसूलेगा ‘टोल’

ईरान ने साफ कर दिया है कि वह युद्ध से पहले वाली स्थिति में वापस नहीं जाएगा, जहां जहाजों को इस रास्ते से मुफ्त में गुजरने की आजादी थी। ईरान ने चेतावनी दी है कि कोई भी जहाज उसके तय किए गए समुद्री कॉरिडोर से बाहर नहीं जाएगा।

बीजिंग में वर्ल्ड पीस फोरम के दौरान ईरानी राजदूत अब्दोलरेज़ा रहमानी फजली ने बड़ा बयान देते हुए कहा, ‘चूंकि होर्मुज का एक बड़ा हिस्सा ईरान के प्रादेशिक जल क्षेत्र में आता है, इसलिए ईरान अब यहां से गुजरने वाले जहाजों से ‘सर्विस फीस’ वसूलेगा। हालांकि उन्होंने इसे टैक्स या टोल टैक्स कहने से इनकार किया’।

ईरानी राजदूत ने यह भी साफ किया कि जो देश मुश्किल वक्त में ईरान के साथ खड़े रहे जैसे- भारत और अन्य मित्र देश, उन्हें इस सर्विस फीस में ‘विशेष छूट’ दी जाएगी।

दुनिया के लिए क्यों इतना महत्वपूर्ण है ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’?

होर्मुज जलडमरूमध्य खाड़ी देशों से अंतरराष्ट्रीय बाजारों, विशेष रूप से एशिया तक कच्चे तेल के निर्यात का सबसे बड़ा लाइफलाइन रूट है। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) के आंकड़ों के मुताबिक, इस समुद्री रास्ते से हर दिन लगभग 2 करोड़ बैरल कच्चा तेल गुजरता है। यह मात्रा पूरी दुनिया की कुल कच्चे तेल की सप्लाई का लगभग पांचवां हिस्सा (20%) है। यही कारण है कि यहां होने वाली मामूली हलचल भी दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को आसमान पर पहुंचा देती है।

सऊदी अरब ने सस्ता किया तेल, 26 साल में सबसे बड़ी कटौती; जानिए क्या है वजह

सऊदी अरब ने एशियाई ग्राहकों के लिए बड़ा दांव खेला है। सरकारी तेल कंपनी Saudi Aramco ने अगस्त के लिए अपने सबसे ज्यादा बिकने वाले Arab Light Crude की कीमत में 11 डॉलर प्रति बैरल की कटौती कर दी है। यह कम से कम 26 साल में सबसे बड़ी कटौती मानी जा रही है।

अब कंपनी एशिया के ग्राहकों को Arab Light क्षेत्रीय बेंचमार्क के मुकाबले 1.50 डॉलर प्रति बैरल की छूट पर बेचेगी। दिलचस्प बात यह है कि Bloomberg के सर्वे में एनालिस्टों ने औसतन 8 डॉलर प्रति बैरल की कटौती का अनुमान लगाया था। लेकिन Saudi Aramco ने उससे भी बड़ी कटौती कर दी।

आखिर कीमत घटाने की जरूरत क्यों पड़ी?

इसकी सबसे बड़ी वजह है कच्चे तेल की बढ़ती सप्लाई। जून के बीच से ही तेल की कीमतों में लगातार गिरावट आ रही है। इस दौरान अमेरिका और ईरान के बीच संघर्षविराम हुआ। इसके बाद Strait of Hormuz से जहाजों की आवाजाही फिर सामान्य होने लगी।

जब तेल की सप्लाई आसान हुई, तो बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ गया। इसी का असर Brent Crude पर भी दिखा। इसकी कीमत गिरकर करीब 72 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। यानी लगभग वहीं, जहां यह फरवरी के आखिर में थी।

मिडिल ईस्ट से तेजी से बढ़ रही है सप्लाई

मध्य पूर्व से अब पहले के मुकाबले ज्यादा तेल बाजार में आ रहा है। युद्ध के दौरान Saudi Aramco ने फारस की खाड़ी के Ras Tanura बंदरगाह से निर्यात कम कर दिया था। उस समय कंपनी ने ज्यादातर तेल Yanbu बंदरगाह के जरिए भेजा था, क्योंकि Strait of Hormuz में आवाजाही बुरी तरह प्रभावित थी।

अब हालात बदल चुके हैं। समुद्री यातायात फिर सामान्य हो रहा है। ऐसे में Aramco ने Ras Tanura से भी निर्यात बढ़ा दिया है। एक समय यह युद्ध शुरू होने से पहले के स्तर के करीब 90% तक पहुंच गया।

OPEC+ ने भी बढ़ाया उत्पादन

तेल बाजार पर दबाव बढ़ने की एक और वजह OPEC+ का फैसला है। इस समूह की अगुवाई सऊदी अरब और रूस कर रहे हैं। OPEC+ ने अगस्त के लिए एक बार फिर उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है।

युद्ध के दौरान कई खाड़ी देशों के लिए उत्पादन बढ़ाना आसान नहीं था, क्योंकि Hormuz के रास्ते तेल भेजने में दिक्कत थी। अब समुद्री रास्ता सामान्य हो रहा है। ऐसे में सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश अपने बढ़े हुए उत्पादन कोटे का पूरा फायदा उठा सकेंगे।

एनालिस्टों का मानना है कि OPEC+ के इस फैसले से साफ संकेत मिलता है कि फिलहाल संगठन अपने सदस्य देशों को ज्यादा तेल निकालने से नहीं रोकना चाहता। अगर सप्लाई इसी तरह बढ़ती रही, तो आने वाले महीनों में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।

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