Hanuman Ansh: सीएम देवेंद्र फडणवीस ने अपने आवास पर ‘हनुमान अंश’ की टीम से मुलाकात की, शेयर किया वीडियो

Hanuman Ansh: ‘हनुमान अंश’ बॉक्स ऑफिस पर लगातार धूम मचा रही है। भले ही फिल्म की शुरुआत धीमी रही, लेकिन दूसरे वीक में इसने रफ्तार पकड़ी तब से यह सारे रिकॉर्ड तोड़ रही है। बॉक्स ऑफिस पर फिल्म की इस कामयाबी के बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुंबई में अपने आवास ‘वर्षा’ पर ‘हनुमान अंश’ की टीम से मुलाकात की।

टीम के साथ मुलाकात के बाद CM फडणवीस ने एक वीडियो शेयर किया और दिल से एक नोट लिखा। मुलाकात का वीडियो शेयर करते हुए फडणवीस ने लिखा- “कल शाम गणपति बप्पा का आशीर्वाद लेने के लिए ‘हनुमान अंश’ की टीम का ‘वर्षा’ में स्वागत करना बहुत अच्छा लगा। विशाल चतुर्वेदी और उनकी टीम को उनके शानदार काम के लिए बधाई दी और उनके सभी प्रयासों में और सफलता की कामना की!”

सैक्निलक (Sacnilk) के अनुसार ‘हनुमान अंश’ ने 43वें दिन भारत में 5 करोड़ रुपये की कमाई की, जिससे इसका भारत में नेट कलेक्शन 248.38 करोड़ रुपये हो गया। फिल्म ने शुक्रवार को कुल मिलाकर 18.72% ऑक्यूपेंसी दर्ज की, जिसमें नाइट शो में सबसे ज्यादा 27.08% ऑक्यूपेंसी रही। फिल्म ने 43वें दिन विदेशी बाजारों से भी 1.25 करोड़ रुपये कमाए, जिससे इसका विदेशी ग्रॉस कलेक्शन 23 करोड़ रुपये हो गया। इसका भारत में ग्रॉस कलेक्शन 293.30 करोड़ रुपये है, जिससे इसका वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन 316.30 करोड़ रुपये हो गया है।

अपने छठे वीक में, ‘हनुमान अंश’ ने भारत में 80.25 करोड़ रुपये की कमाई की। इसने 36वें दिन 10.50 करोड़ रुपये, 37वें दिन 18.50 करोड़ रुपये और 38वें दिन 22.50 करोड़ रुपये कमाए। इसके बाद 39वें और 40वें दिन 8.25-8.25 करोड़ रुपये, 41वें दिन 6 करोड़ रुपये और 42वें दिन 6.25 करोड़ रुपये की कमाई की।

‘हनुमान अंश’ विशाल चतुर्वेदी की किताब ‘डिवाइन डिटूर दैट चेंज्ड माई लाइफ’ (Divine Detour: That Changed My Life) पर आधारित है। यह फिल्म नीम करौली बाबा के जीवन पर बनी है। फिल्म में शोभिनव सत्या और चंदन आनंद मुख्य भूमिकाओं में हैं। यह फिल्म आजादी से पहले के भारत में रहने वाले लक्ष्मी नारायण नाम के एक युवा लड़के की कहानी है, जो अपनी मां की मौत के बाद भगवान की तलाश में घर छोड़ देता है। उत्तर भारत की उनकी यात्रा उन्हें अंतत नीम करौली बाबा के रूप में बदल देती है। फिल्म की कास्ट में अनिल रस्तोगी, सुगंधा मल्होत्रा, भगवानदास पटेल और नेहा परांजपे भी शामिल हैं।

यह फिल्म 7 अगस्त, 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी और यह एक नियोजित ट्राइलॉजी की पहली फिल्म है। इस फिल्म को विशाल चतुर्वेदी ने अपने बैनर, स्वयंभू मीडिया नेटवर्क के तहत लिखा, निर्देशित और प्रोड्यूस किया है।

Hanuman Ansh Box Office Collection Day 43: ‘हनुमान अंश’ का सातवें शुक्रवार को भी जलवा कायम, 43वें दिन करोड़ों में कमाई, बॉक्स ऑफिस कलेक्शन हैरान कर देगा

Hanuman Ansh Box Office Collection Day 43: ‘हनुमान अंश’ का बॉक्स ऑफिस पर जलवा बरकरार है। यह लंबे समय से सिनेमाघरों में चल रही है। फिल्म ने अपनी जर्नी में एक और मुकाम हासिल किया है, जिसके तहत 43वें दिन के नए आंकड़े सामने आए हैं।

‘हनुमान अंश’ बॉक्स ऑफिस कलेक्शन 43वां दिन

43वें दिन, ‘हनुमान अंश’ ने 16.0% ऑक्यूपेंसी के साथ 5,220 शो से 5 करोड़ की कमाई की। Sacnilk की रिपोर्ट के अनुसार भारत में इसका कुल नेट कलेक्शन ₹248.38 करोड़ और ग्रॉस कलेक्शन ₹293.30 करोड़ है। नए आंकड़े अभी भी अपडेट किए जा रहे हैं।

फिल्म के हिंदी वर्शन ने 43वें दिन कुल 15.72% ऑक्यूपेंसी दर्ज की। मॉर्निंग शो में 8.00% ऑक्यूपेंसी रही, इसके बाद दोपहर में 16.38% और रात को 27.8% ऑक्यूपेंसी दर्ज की गई। फिल्म लगातार बेहद अच्छा परफॉम कर रही है। वहीं वर्ल्डवाइड कलेक्शन की बात करें तो फिल्म का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन 316.30 करोड़ हो चुका है।

बीक वाइज कलेक्शन

Sacnilk के अनुसार ‘हनुमान अंश’ ने पहले दिन ₹10 लाख से शुरुआत की और पहला हफ्ता ₹1.08 करोड़ के कलेक्शन के साथ खत्म किया। इसने दूसरे वीक में ₹40 लाख और तीसरे वीक में ₹10.40 करोड़ जोड़े। फिल्म ने चौथे हफ्ते में ₹61 करोड़, पांचवें हफ्ते में ₹90.25 करोड़ और छठे हफ्ते में ₹80.25 करोड़ का कलेक्शन किया। सातवें हफ्ते में प्रवेश करते हुए, ‘हनुमान अंश’ ने अब तक 43वें दिन ₹2.60 करोड़ की कमाई की है।

‘हनुमान अंश’ के बारे में

विशाल चतुर्वेदी द्वारा लिखित और निर्देशित, ‘हनुमान अंश’ एक आध्यात्मिक ड्रामा है जो नीम करौली बाबा (जिन्हें महाराज जी के नाम से भी जाना जाता है) के जीवन और शिक्षाओं से प्रेरित है। शोभिनव सत्या ने नीम करौली बाबा की भूमिका निभाई है, जबकि विहान शेडगे ने बचपन का किरदार निभाया है। फिल्म की कास्ट में चंदन आनंद, पूर्णिमा तिवारी, अनिल के. रस्तोगी और गुलशन पांडे भी शामिल हैं। यह फिल्म भारत में 7 अगस्त, 2026 को रिलीज हुई थी।

आस्था का कारोबार, सिनेमा की जीत: ‘हनुमान अंश’

कभी-कभी कोई फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर नहीं चलती, वह समाज के भीतर चलती है। ‘हनुमान अंश’ के साथ कुछ ऐसा ही होता हुआ दिखाई देता है। लगभग दो करोड़ की लागत से बनी यह फ़िल्म तीन सौ करोड़ से ज़्यादा का वैश्विक कारोबार कर चुकी है। लेकिन इस वाक्य में सबसे महत्वपूर्ण शब्द दो करोड़ या तीन सौ करोड़ नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण शब्द है, दर्शक।

‘हनुमान अंश’ की तीन सौ करोड़ से ज़्यादा की यात्रा को सिर्फ़ एक फ़िल्म की सफलता की तरह देखना शायद उसके साथ नाइंसाफ़ी होगी। यह उस दर्शक की कहानी भी है जो तेज़ी से बदलती दुनिया में किसी स्थिर, भरोसेमंद और आत्मीय चीज़ की तलाश में है। लेकिन क्या सिनेमा उसे सिर्फ़ विश्वास दे या विश्वास के भीतर सवाल करने की जगह भी?

कभी-कभी कोई फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर नहीं चलती, वह समाज के भीतर चलती है। ‘हनुमान अंश’ के साथ कुछ ऐसा ही होता हुआ दिखाई देता है। लगभग दो करोड़ की लागत से बनी यह फ़िल्म तीन सौ करोड़ से ज़्यादा का वैश्विक कारोबार कर चुकी है। लेकिन इस वाक्य में सबसे महत्वपूर्ण शब्द दो करोड़ या तीन सौ करोड़ नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण शब्द है, दर्शक। वह दर्शक, जिसने शुरुआत में इस फ़िल्म को शायद कोई बड़ी सिनेमाई घटना नहीं माना। जिसने फिर किसी दोस्त से इसके बारे में सुना। किसी परिवार के सदस्य ने कहा, “एक बार देखना”। किसी सोशल मीडिया पोस्ट ने उत्सुकता जगाई। किसी ने फ़िल्म देख कर अपनी अनुभूति साझा की। और धीरे-धीरे एक फ़िल्म, फ़िल्म से बढ़ कर एक अनुभव बन गई।

यही सिनेमा की सबसे पुरानी और सबसे ताक़तवर मार्केटिंग है, किसी दूसरे इंसान का विश्वास। और इसलिए ‘हनुमान अंश’ को समझने के लिए हमें आज से नहीं, 1975 से शुरुआत करनी चाहिए। ‘जय संतोषी मां’। एक ऐसी फ़िल्म, जिसने उस दौर में धार्मिक सिनेमा को सिर्फ़ एक जॉनर नहीं रहने दिया, बल्कि उसे सामूहिक आस्था के अनुभव में बदल दिया। कई जगह दर्शक सिनेमाघर में फ़िल्म देखने नहीं, मानो दर्शन करने जाते थे। फूल चढ़ते थे, आरती होती थी, और फ़िल्म का पर्दा कुछ समय के लिए पूजा और सिनेमा के बीच की सीमा को धुंधला कर देता था।

सोचिए, 1975 का भारत। न सोशल मीडिया था, न इंस्टाग्राम, न यूट्यूब, न डिजिटल मार्केटिंग। लेकिन वर्ड ऑफ़ माउथ था। मोहल्ला था। परिवार था। भरोसा था। आज 51 साल बाद तकनीक बदल गई है। दर्शक की जेब में पूरा मीडिया संसार आ गया है। लेकिन मनुष्य की कुछ ज़रूरतें शायद उतनी नहीं बदलीं। उसे अभी भी उम्मीद चाहिए। उसे अभी भी किसी ऐसी कहानी की ज़रूरत है जो कहे कि अंधेरे के बाद उजाला होता है। उसे अभी भी किसी ऐसे पात्र की तलाश होती है जिसके सामने वह अपने निजी दुःख, अपनी असुरक्षा और अपनी असमर्थता रख सके। और शायद यही वह जगह है जहां आस्था सिनेमा से मिलती है।

हम अक्सर पूछते हैं कि लोग धार्मिक फ़िल्में क्यों देख रहे हैं? मुझे लगता है, हमें इसके उलट सवाल पूछना चाहिए। आज के समय में लोगों को ऐसी फ़िल्मों की ज़रूरत क्यों महसूस हो रही है? हम एक ऐसे समय में हैं जहां जानकारी की कोई कमी नहीं है, लेकिन निश्चितता की बहुत कमी है। हमारे पास हर सवाल का उत्तर खोजने के लिए गूगल है, लेकिन हर बेचैनी का उत्तर नहीं है। हमारे पास दुनिया से जुड़े रहने के लिए सोशल मीडिया है, लेकिन अपने भीतर टिके रहने का हुनर कम होता जा रहा है। हमारे पास विकल्प बहुत हैं, लेकिन शांति कम है। ऐसे समय में आस्था एक भावनात्मक आश्रय बन सकती है। इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है।

मनुष्य जब अनिश्चितता से घिरता है, तो वह अर्थ खोजता है। कभी दर्शन में। कभी प्रेम में। कभी कला में। कभी राजनीति में। और कभी ईश्वर में। इसलिए किसी धार्मिक फ़िल्म के दर्शक को पिछड़ा हुआ, अंधविश्वासी या अविवेकी मान लेना शायद सबसे आसान और सबसे ग़लत रास्ता होगा। वह दर्शक भी हमारी तरह ही जटिल है। वह मंदिर भी जाता है और अस्पताल भी। वह भगवान से प्रार्थना भी करता है और डॉक्टर की रिपोर्ट भी देखता है। वह अपने बच्चे को विज्ञान पढ़ाता है और घर में पूजा भी करता है। भारत की असली कहानी शायद इसी सह अस्तित्व में है। और इसलिए असली सवाल यह नहीं है कि आस्था हो या तर्क। सवाल यह है कि क्या आस्था और तर्क साथ रह सकते हैं? मेरे लिए जवाब होना चाहिए, हां।

भारतीय परंपरा की एक बड़ी खूबी यही रही है कि यहां प्रश्न पूछने की परंपरा भी उतनी ही पुरानी है जितनी प्रार्थना की। उपनिषदों में संवाद हैं। बुद्ध के सामने प्रश्न हैं। कबीर के यहां सवाल हैं। नानक की वाणी में जिज्ञासा है। हमारी आध्यात्मिक परंपरा ने हमेशा मनुष्य को सिर्फ़ सिर झुकाना नहीं सिखाया; कई बार उसने सिर उठाकर देखने को भी कहा है। फिर सिनेमा क्यों न पूछे? यहीं ‘हनुमान अंश’ मेरे लिए एक दिलचस्प फ़िल्म बन जाती है। एक संत की कहानी को पर्दे पर उतारना अपने आप में मुश्किल काम है। क्योंकि संत के जीवन में चमत्कार दिखाना आसान है, लेकिन उनकी मनुष्यता दिखाना मुश्किल। चमत्कार आंखों को आकर्षित करता है। मनुष्यता दिल में ठहरती है।

अगर किसी संत की पूरी सिनेमाई यात्रा सिर्फ़ इस बात पर टिकी हो कि उन्होंने कितने चमत्कार किए, तो हम शायद उनके सबसे बड़े चमत्कार को ही भूल जाएंगे कि उन्होंने लोगों के जीवन को कैसे छुआ? किसी डरे हुए आदमी को साहस देना क्या चमत्कार नहीं है? किसी टूटे हुए इंसान को अपने पैरों पर खड़ा कर देना क्या चमत्कार नहीं है? किसी भूखे को खाना देना? किसी अकेले के पास बैठना?

किसी के दुःख को बिना जज किए सुन लेना?

शायद सिनेमा का सबसे सुंदर आध्यात्मिक क्षण वह नहीं होता जब आसमान से कोई चमत्कार उतरता है। वह होता है जब एक इंसान दूसरे इंसान के लिए खड़ा होता है। और यहीं से धार्मिक सिनेमा की अगली यात्रा शुरू हो सकती है। हमें संतों की कहानियां चाहिए। लेकिन हमें उनके भीतर के इंसान की कहानियां भी चाहिए। हमें आस्था चाहिए। लेकिन उसके साथ सवाल भी चाहिए। हमें चमत्कार चाहिए। लेकिन उसके साथ चरित्र भी चाहिए। हमें भगवान चाहिए। लेकिन उसके साथ इंसान भी चाहिए। क्योंकि अगर भगवान को बड़ा करने के लिए इंसान को छोटा करना पड़े, तो शायद हमने भगवान को समझा ही नहीं।

‘हनुमान अंश’ जैसी फ़िल्मों के बहाने एक और सामाजिक सवाल उठता है, जिस पर हमारी फ़िल्में बहुत कम बात करती हैं। जब कोई व्यक्ति भौतिक संसार छोड़कर आध्यात्मिक यात्रा पर निकलता है, तो पीछे कौन रह जाता है? उसकी पत्नी? उसके बच्चे? उसके माता-पिता? उसकी रोज़मर्रा की ज़िम्मेदारियां? हम अक्सर त्याग की कहानी सिर्फ़ उस व्यक्ति की नज़र से देखते हैं, जिसने घर छोड़ा। लेकिन जिसने घर में रहकर जीवन सम्भाला, उसका त्याग किस कहानी में है? यह सवाल किसी संत की महानता को कम नहीं करता, बल्कि त्याग की परिभाषा को और मानवीय बनाता है। और शायद यही वह जगह है, जहां भविष्य का आध्यात्मिक सिनेमा हमारे समय से संवाद कर सकता है।

आज की महिला अपने पति की आध्यात्मिक यात्रा की सिर्फ़ दर्शक नहीं है। वह उस यात्रा की सामाजिक कीमत को भी समझती है। आज का परिवार भी बदल चुका है। आज का दर्शक भी। इसलिए आने वाली धार्मिक फ़िल्में अगर सिर्फ़ पुराने सांचे दोहराएंगी, तो वे शायद उस दर्शक से आधा ही संवाद कर पाएंगी, जिसके लिए वे बनाई जा रही हैं। ‘जय संतोषी मां’ के समय आस्था का सिनेमाई अनुभव सामूहिक था। ‘हनुमान अंश’ के समय वह सामूहिक होने के साथ-साथ डिजिटल भी है। लेकिन दोनों के बीच एक अदृश्य धागा वही है- कहानी पर विश्वास।

और शायद सिनेमा का भविष्य भी यहीं छिपा है। अगर निर्माता इस सफलता से सिर्फ़ यह सीखेंगे कि “धार्मिक फ़िल्म बनाओ, कम बजट रखो और तीन सौ करोड़ कमाओ”, तो वे सबसे ज़रूरी बात नहीं समझेंगे। दर्शक फ़ॉर्मूला नहीं खरीदता। दर्शक विश्वास खरीदता है। और विश्वास की नकल नहीं की जा सकती।

एक और संत की कहानी बना देने से वही परिणाम नहीं आएगा। एक और चमत्कार दिखा देने से वही भाव पैदा नहीं होगा। एक और भक्ति गीत डाल देने से वही सामूहिक अनुभव नहीं बनेगा। क्योंकि दर्शक को कहानी में कुछ अपना मिलना चाहिए। यही वजह है कि ‘हनुमान अंश’ की सफलता को केवल धार्मिक फ़िल्मों की सफलता कह देना भी अधूरा होगा। यह उस भारतीय दर्शक की वापसी है जो शायद बहुत समय से अपने सिनेमा में अपने सांस्कृतिक अनुभव की कोई सच्ची प्रतिध्वनि खोज रहा था।

लेकिन यहां सिनेमा की ज़िम्मेदारी भी शुरू होती है। आस्था को बेचने और आस्था को समझने में फ़र्क़ है। पहले रास्ते में फ़ॉर्मूला बनता है। दूसरे में सिनेमा। और मुझे उम्मीद है कि इस नई लहर में दूसरा रास्ता चुना जाएगा। ऐसी फ़िल्में बनेंगी जो धार्मिक हों, लेकिन प्रचारात्मक नहीं। जो आध्यात्मिक हों, लेकिन उपदेशात्मक नहीं। जो चमत्कार दिखाएं, लेकिन सवाल से न डरें। जो परंपरा का सम्मान करें, लेकिन इंसान की स्वतंत्र सोच का भी। क्योंकि हमारा संविधान भी नागरिकों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानवतावाद और जिज्ञासा की भावना विकसित करने की बात करता है।

इसका मतलब यह नहीं कि भारत को अपनी आस्था छोड़ देनी चाहिए। इसका मतलब शायद यह है कि भारत अपनी आस्था को इतना मज़बूत बनाए कि वह सवाल सह सके। मुझे लगता है, यही हमारे समय की सबसे सुंदर सिनेमाई संभावना है। एक ऐसी फ़िल्म जहां कोई बच्चा मंदिर में हाथ जोड़कर खड़ा हो और उसी शाम अपने पिता से पूछे- “भगवान होते कहां हैं”? और पिता उसके सवाल से डरने के बजाय मुस्कुराकर कहे- “शायद यह सवाल पूछना भी भगवान को खोजने का एक रास्ता है”। अगर हमारा सिनेमा वहां तक पहुंच गया, तो उसने सिर्फ़ फ़िल्म नहीं बनाई। उसने समाज के भीतर एक संवाद शुरू किया। और शायद ‘हनुमान अंश’ की असली उपलब्धि यही है कि उसने यह संवाद फिर से शुरू कर दिया है।

तीन सौ करोड़ की संख्या कल किसी और फ़िल्म की हो सकती है। लेकिन जिस समय का कोई सवाल सिनेमा के ज़रिए हमारे भीतर उतर जाता है, वह संख्या से कहीं ज़्यादा देर तक रहता है। आस्था रहे। ज़रूर रहे। क्योंकि आस्था मनुष्य को संभाल सकती है। लेकिन उसके साथ विवेक भी रहे। क्योंकि विवेक मनुष्य को गिरने से बचा सकता है। और सवाल? सवाल तो रहने ही चाहिए। क्योंकि जिस आस्था को एक सवाल से डर लगने लगे, वह शायद आस्था से ज़्यादा भय बन जाती है। और जिस आस्था के भीतर सवाल के लिए जगह हो, वह शायद इंसान को ईश्वर के थोड़ा और क़रीब ले जाती है। सिनेमा का काम हमारी आस्था छीनना नहीं है। उसका काम शायद इतना भर है कि वह हमें अपनी आस्था को थोड़ा और गहराई से देखने का मौक़ा दे। फ़िल्म ख़त्म होती है। लेकिन सवाल वहीं से शुरू होता है।

‘हनुमान अंश’ के तीन सौ करोड़ सिर्फ़ एक फ़िल्म की कमाई नहीं, उस दर्शक की तलाश भी हैं जो बदलती दुनिया में भरोसा, अर्थ और शायद अपने भीतर का कोई जवाब खोज रहा है।

बहरहाल, आपके नज़दीकी सिनेमाघरों में है। देख लीजिएगा। (पंकज दुबे पॉप कल्चर क़िस्सागो, उपन्यासकार और यूट्यूब चैट शो ‘स्मॉल टाउन्स बिग स्टोरीज़”के होस्ट हैं।)

अब यूपी में गूंजेगा बाबा का नाम! कैंची धाम के बाद अब जन्मभूमि से समाधि तक बदलेगा पूरा नक्शा

नीम करौली बाबा को लेकर लोगों की बढ़ती दिलचस्पी भी देखने को मिल रही है और उनके जीवन पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ की रिलीज के बाद उनका नाम एक बार फिर चर्चा में आया है। खबरों के मुताबिक, करीब 2 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने भी बाबा के जीवन और उनकी आध्यात्मिक विरासत से जुड़े विषय को लोगों के बीच पहुंचाया है।

नीम करौली बाबा का जन्म उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में हुआ था और उन्होंने अपने जीवन का काफी समय इसी क्षेत्र में साधना और तपस्या करते हुए बिताया। बाबा की समाधि भी उत्तर प्रदेश में ही स्थित है, इसलिए उनके भक्तों के लिए राज्य में मौजूद ये जगहें खास महत्व रखती हैं। अब उत्तर प्रदेश सरकार इन स्थानों को धार्मिक पर्यटन के लिहाज से विकसित करने की योजना बना रही है। फिरोजाबाद स्थित उनकी जन्मस्थली को एक बड़े धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी है।

जन्म स्थान पर बनेगा भव्य कॉरिडोर

फिरोजाबाद में नीम करौली बाबा की जन्मस्थली को बड़े धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। इस परियोजना के लिए करीब 87.5 बीघा जमीन तय की गई है। यहां भव्य प्रवेश द्वार, डिजिटल म्यूजियम और इंटरप्रिटेशन सेंटर बनाया जाएगा, जहां लोग बाबा के जीवन और उनकी आध्यात्मिक यात्रा से जुड़ी जानकारी हासिल कर सकेंगे। इसके अलावा मीटिंग हॉल, मल्टी लेवल पार्किंग, कम्युनिटी किचन, फूड कोर्ट, मेडिटेशन सेंटर और वेलनेस सेंटर जैसी सुविधाएं भी प्रस्तावित हैं।

जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी

इस प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। जमीन मालिकों को सरकारी नियमों के अनुसार मुआवजा दिया जाएगा और यह राशि जमीन की मौजूदा कीमत से चार गुना होने की बात कही गई है। बाबा के परिवार के सदस्यों समेत कुछ ग्रामीणों ने कथित तौर पर अनापत्ति प्रमाण पत्र भी दिया है, जिसे मंजूरी के लिए सरकार के पास भेजा गया है। सरकार की मंजूरी के बाद जमीन अधिग्रहण पूरा होने पर निर्माण का काम शुरू किया जा सकेगा।

तपस्या स्थल पर भी बढ़ेंगी सुविधाएं

सरकार की योजना जन्म स्थान के साथ फर्रुखाबाद के नीब करौरी गांव में भी विकास कार्य किए जाने की तैयारी है। माना जाता है कि नीम करौली बाबा ने इस इलाके में करीब 12 साल तक तपस्या की थी और इसी गांव के नाम से बाद में वे नीम करौली बाबा के नाम से प्रसिद्ध हुए। यहां करीब 5 एकड़ जमीन को विकसित करने की योजना है। प्रस्तावित कामों में पानी की टंकी, सड़कों को चौड़ा करना, अतिक्रमण हटाना और व्यवस्थित पार्किंग जैसी सुविधाएं शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, फिल्म ‘हनुमान अंश’ की रिलीज के बाद यहां श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी है और रोजाना करीब 60 से 70 हजार लोगों के पहुंचने की बात कही गई है।

वृंदावन के समाधि स्थल का भी होगा विकास

नीम करौली बाबा से जुड़ी धार्मिक पर्यटन योजना में वृंदावन स्थित उनके समाधि स्थल को भी शामिल किया गया है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ आसपास के इलाके में सड़क संपर्क और दूसरी जरूरी सुविधाओं को मजबूत करने की योजना है। इसका मकसद समाधि स्थल तक पहुंच को आसान बनाना और वहां आने वाले भक्तों के लिए बेहतर माहौल तैयार करना है।

हनुमान सेतु से शुरू होगा प्रस्तावित बाबा सर्किट

लखनऊ का गोमती नदी के किनारे स्थित हनुमान सेतु मंदिर भी प्रस्तावित ‘नीम करौली बाबा सर्किट’ का अहम हिस्सा होगा। यह मंदिर बाबा की प्रेरणा से बनाया गया था और इसे सर्किट के शुरुआती केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। उम्मीद है कि उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम लिमिटेड की ओर से यहां से गाइडेड टूर भी शुरू किए जा सकते हैं। मंदिर परिसर में फिलहाल नीम करौली बाबा की दो मूर्तियां और भगवान हनुमान की एक बड़ी मूर्ति मौजूद है।

नीम करौली बाबा से जुड़ा कैंची धाम भले ही बाबा से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध जगहों में शामिल हो, लेकिन उत्तर प्रदेश में मौजूद इन स्थानों की अपनी अलग कहानी और महत्व है। प्रोजेस्ट में कैंची धाम की तरह श्रद्धालुओं के अनुभव और सुविधाओं को बेहतर बनाने की कोशिश की जाएगी, फिरोजाबाद की भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखकर विकास किया जाएगा। इस विकास के बाद इन जगहों पर सुविधाएं बेहतर होने के साथ बाबा के जीवन, उनकी साधना और आध्यात्मिक विरासत को करीब से समझने का मौका भी मिल सकता है।

Mirzapur The Movie Box Office Collection Day 11: ‘मिर्जापुर द मूवी’ की कमाई ने फिर मचाया तहलका, दूसरे सोमवार के बाद 300 करोड़ से इतनी दूर रह गई फिल्म

‘मिर्जापुर द मूवी’ का बॉक्स ऑफिस सफर लगातार चर्चा में बना हुआ है। रिलीज के बाद से ही फिल्म को दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है और अब दूसरे हफ्ते में भी इसकी कमाई की रफ्तार पूरी तरह थमती नजर नहीं आ रही। दूसरे सोमवार को कलेक्शन में मामूली गिरावट जरूर आई, लेकिन फिल्म ने जिस तरह से अपनी पकड़ बनाए रखी है, उसने मेकर्स और कलाकारों की उम्मीदों को कायम रखा है। ‘मिर्जापुर’ की लोकप्रिय दुनिया और इसके चर्चित किरदारों का आकर्षण एक बार फिर सिनेमाघरों में देखने को मिल रहा है। यही वजह है कि फिल्म लगातार बॉक्स ऑफिस पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही है।

अब फिल्म की नजर एक बड़े आंकड़े पर टिकी है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ‘मिर्जापुर द मूवी’ अपनी मौजूदा रफ्तार को बरकरार रखते हुए दुनिया भर में 300 करोड़ रुपये के क्लब में शामिल हो पाती है या नहीं।

भारत में 190 करोड़ के पार पहुंची कमाई

ट्रेड ट्रैकर Sacnilk के अनुसार, फिल्म ने दूसरे सोमवार को भारत में 7,014 शोज के जरिए करीब 5.50 करोड़ रुपये की नेट कमाई की। इसके साथ ही घरेलू बॉक्स ऑफिस पर फिल्म का कुल नेट कलेक्शन 190.20 करोड़ रुपये हो गया है। वहीं, भारत में फिल्म की ग्रॉस कमाई 226.64 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है।

विदेशों में भी जारी है कमाई

फिल्म ने 11वें दिन विदेशों में करीब 1 करोड़ रुपये का कारोबार किया। इसके साथ ही फिल्म की कुल विदेशी कमाई बढ़कर 47 करोड़ रुपये हो गई है। भारत और विदेशों की कमाई को मिलाकर ‘मिर्जापुर द मूवी’ का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन अब 273.64 करोड़ रुपये हो चुका है। यानी फिल्म 300 करोड़ के आंकड़े से करीब 26 करोड़ रुपये दूर है।

‘हैवान’ और ‘हनुमान अंश’ से मिल रही कड़ी टक्कर

बॉक्स ऑफिस पर ‘मिर्जापुर द मूवी’ के लिए राह आसान नहीं है। फिल्म को इन दिनों ‘हैवान’ और ‘हनुमान अंश’ जैसी फिल्मों से कड़ी प्रतिस्पर्धा मिल रही है। इसके बावजूद फिल्म की कमाई का लगातार बने रहना यह दिखाता है कि ‘मिर्जापुर’ के किरदारों और कहानी को लेकर दर्शकों की दिलचस्पी अभी भी बरकरार है।

बड़े पर्दे पर फिर लौटी ‘मिर्जापुर’ की दुनिया

गुरमीत सिंह के निर्देशन और पुनीत कृष्णा की कहानी पर बनी यह फिल्म लोकप्रिय ‘मिर्जापुर’ फ्रेंचाइजी को बड़े पर्दे पर लेकर आई है। कहानी सीजन 1 के छठे और सातवें एपिसोड के बीच की घटनाओं को दिखाती है। फिल्म की सबसे खास बात यह है कि इसमें ऐसे किरदार भी फिर नजर आते हैं, जो आगे चलकर कहानी में मारे गए थे। मुन्ना त्रिपाठी के किरदार में दिव्येंदु और गोलू गुप्ता के रूप में श्वेता त्रिपाठी की वापसी ने पुराने प्रशंसकों की यादें ताजा कर दी हैं।

पुराने चेहरे, वही दमदार अंदाज

फिल्म में पंकज त्रिपाठी एक बार फिर अखंडानंद ‘कालीन’ त्रिपाठी के किरदार में नजर आ रहे हैं। वहीं अली फजल गुड्डू पंडित और दिव्येंदु मुन्ना त्रिपाठी की भूमिका में लौटे हैं। फिल्म की स्टारकास्ट में रसिका दुगल, श्वेता त्रिपाठी शर्मा, श्रिया पिलगांवकर, जितेंद्र कुमार, रवि किशन, अभिषेक बनर्जी, सोनल चौहान, मोहित मलिक और सुशांत सिंह भी शामिल हैं।

अब 300 करोड़ पर टिकी नजर

273.64 करोड़ रुपये के वर्ल्डवाइड कलेक्शन के साथ ‘मिर्जापुर द मूवी’ 300 करोड़ के आंकड़े के काफी करीब पहुंच चुकी है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में फिल्म अपनी रफ्तार बरकरार रखते हुए इस बड़े आंकड़े को पार कर पाती है या नहीं।

Hanuman Ansh box office collection: 39 दिन बाद भी सिनेमाघरों में ‘हनुमान अंश’ का जलवा, 222 करोड़ पार हुई कमाई

अमेरिका में 50 मिनी इंडिया, पांच साल में 75 होंगे:ट्रम्प की सख्ती के बावजूद भारतीयों का ‘अमेरिकन ड्रीम’ कायम

भारतीयों का ‘अमेरिकन ड्रीम’ अब भी जिंदा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की वीजा, ट्रेड और ग्रीन कार्ड से जुड़ी सख्त नीतियों के बावजूद भारतीयों का अमेरिका जाना और वहां बसना जारी है। पिछले 20 साल में अमेरिका में 50 से ज्यादा ‘मिनी इंडिया’ यानी भारतीयों की बड़ी बस्तियां विकसित हुई हैं। अनुमान है कि अगले 5 साल में इनकी संख्या 75 तक पहुंच सकती है। इन इलाकों में रहने वाले भारतीय परिवारों की औसत कमाई स्थानीय अमेरिकी परिवारों से लगभग दोगुनी है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, टेक, हेल्थकेयर और फार्मा सेक्टर में बढ़ते अवसरों की वजह से भारतीय परिवार अब पुराने भीड़भाड़ वाले इलाकों से निकल कर शहर से लगे नए इलाकों में में बस रहे हैं। भारतीय परिवारों की आय अमेरिकी परिवारों से ज्यादा भारतीय परिवारों की औसत सालाना आय करीब 1.54 करोड़ रुपए है, जबकि अमेरिकी परिवारों की औसत आय करीब 80 लाख रुपए है। रिपोर्ट के अनुसार आने वाले वर्षों में यह अंतर और बढ़ सकता है। कैलिफोर्निया में सबसे ज्यादा भारतवंशी अमेरिका में सबसे ज्यादा भारतीय मूल के लोग कैलिफोर्निया में रहते हैं। यहां उनकी संख्या करीब 9.3 लाख है। इसकी बड़ी वजह राज्य का मजबूत आईटी सेक्टर है। दूसरे नंबर पर टेक्सास है, जहां करीब 5.4 लाख भारतवंशी रहते हैं। भारतवंशी अमेरिकियों से पढ़ाई में भी आगे भारतीय मूल के लोग शिक्षा के मामले में भी आगे हैं। अमेरिका में जहां 25% लोगों के पास बैचलर्स डिग्री है, वहीं भारतवंशियों में यह आंकड़ा 54% है। मास्टर्स या पीएचडी डिग्री रखने वालों में भी भारतीयों की हिस्सेदारी करीब 60% है। किसी भी प्रवासी समुदाय में यह सबसे ज्यादा है। फ्रिस्को में 19% लोग भारतीय मूल के हैं टेक्सास का फ्रिस्को शहर 25 साल पहले तक ज्यादातर खेतों वाला इलाका था। आज यहां की आबादी 2.5 लाख से ज्यादा है और करीब 19% लोग भारतीय मूल के हैं। 2008 में बना कार्य सिद्धि हनुमान मंदिर अब भारतीय समुदाय का बड़ा केंद्र बन चुका है। आसपास के प्लेनो और एलन शहरों में भी भारतीय मंदिर, रेस्तरां और दुकानों की संख्या तेजी से बढ़ी है। डबलिन के स्कूलों में 41% छात्र भारतीय मूल के कैलिफोर्निया के डबलिन और सैन रेमन इलाके में भारतीय आबादी करीब 18% है। डबलिन के स्कूलों में 41% छात्र भारतीय मूल के हैं। यहां भारतीय संस्कृति की झलक साफ दिखाई देती है। नई पीढ़ी दिवाली भी मनाती है और वीकेंड पर क्रिकेट भी खेलती है। भारतीय खाने की लोकप्रियता इतनी बढ़ गई है कि कई जगह ड्राइव-थ्रू भारतीय फूड आउटलेट भी खुल गए हैं। सिलिकॉन वैली में भारतीयों का असर बढ़ेगा भास्कर एक्सपर्ट विलियम फ्रे के मुताबिक, सिलिकॉन वैली में भारतीयों की भूमिका आने वाले समय में और मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि भारतीयों का यह सफर करीब 25 साल पहले शुरू हुआ था और अब इसकी रफ्तार और बढ़ रही है। आज सिलिकॉन वैली के लगभग 35% स्टार्टअप्स में कम से कम एक भारतीय मूल का सह-संस्थापक है। फ्रे का मानना है कि आईटी सेक्टर में भारतीयों की मजबूत मौजूदगी के कारण अमेरिका के दूसरे राज्यों में भी नए ‘मिनी इंडिया’ विकसित होंगे। भारतीय समुदाय अमेरिका की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान दे रहा है और किसी भी अन्य प्रवासी समुदाय की तुलना में उसकी भूमिका ज्यादा मजबूत दिखाई देती है। ————————- ये खबर भी पढ़ें… आतंकी लादेन की हिट लिस्ट में भारत भी था: CIA के खुफिया दस्तावेज में खुलासा आतंकी संगठन अल-कायदा का सरगना ओसामा बिन लादेन 9/11 हमले से पहले भारत को भी निशाना बनाना चाहता था। पूरी खबर यहां पढ़ें…

Vishal Chaturvedi: ‘हनुमान अंश’ के बाद विशाल चतुर्वेदी ने नई फिल्म का किया ऐलान, गोस्वामी तुलसीदास पर बेस्ड होगी ‘रामबोला’

Vishal Chaturvedi: ‘हनुमान अंश’ में नीम करौली बाबा की कहानी सुनाने के बाद, फिल्ममेकर विशाल चतुर्वेदी अब गोस्वामी तुलसीदास की जिंदगी को बड़े पर्दे पर लाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने ‘रामबोला’ के लिए महावीर जैन फिल्म्स के साथ हाथ मिलाया है। यह फिल्म महान संत-कवि गोस्वामी तुलसीदास के जीवन पर आधारित है।

विशाल चतुर्वेदी ने अपनी अगली फिल्म ‘रामबोला’ की घोषणा की

विशाल चतुर्वेदी द्वारा लिखित और निर्देशित, ‘रामबोला’ तुलसीदास के सफर को दिखाएगी और उन अनुभवों को उजागर करेगी, जिन्होंने उन्हें भारतीय इतिहास के सबसे प्रभावशाली आध्यात्मिक व्यक्तित्वों में से एक बनाया। गोस्वामी तुलसीदास का प्रभाव पीढ़ियों से बना हुआ है, खासकर उनकी रचनाओं और भारत की भक्तिपूर्ण और साहित्यिक परंपराओं में उनके योगदान के माध्यम से। इस फिल्म का मकसद उस बड़ी विरासत को आज के दर्शकों तक पहुंचाना है।

गणेश चतुर्थी पर फिल्म की घोषणा करते हुए विशाल चतुर्वेदी और महावीर जैन फिल्म्स ने इंस्टाग्राम पर लिखा- “बप्पा के आशीर्वाद से इस शुभ दिन पर विनम्रता और कृतज्ञता के साथ हम आपके लिए “रामबोला” लेकर आए हैं – गोस्वामी तुलसीदास की अमर कहानी। विशाल चतुर्वेदी द्वारा लिखित और निर्देशित। महावीर जैन, विशाल चतुर्वेदी, अमित उपाध्याय और रघुवेंद्र सिंह द्वारा निर्मित। महावीर जैन फिल्म्स द्वारा प्रस्तुत।”

विशाल चतुर्वेदी का दूसरा प्रोजेक्ट

‘रामबोला’ डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी के लिए आध्यात्मिक क्षेत्र में एक और प्रोजेक्ट है। उनकी पिछली फिल्म ‘हनुमान अंश’, नीम करौली बाबा पर केंद्रित थी और उनके जीवन और आध्यात्मिक सफर को दिखाती थी। ‘रामबोला’ के साथ, फिल्ममेकर एक बार फिर भारतीय संत परंपरा से गहराई से जुड़े व्यक्तित्व को चुन रहे हैं, इस बार आध्यात्मिकता, कविता और भारतीय साहित्य की दुनिया को एक साथ ला रहे हैं। फिल्म का निर्माण महावीर जैन, विशाल चतुर्वेदी, अमित उपाध्याय और रघुवेंद्र सिंह कर रहे हैं और इसे महावीर जैन फिल्म्स द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा।

‘हनुमान अंश’ के बारे में

इस बीच, ‘हनुमान अंश’ बॉक्स ऑफिस पर धूम मचा रही है। 7 अगस्त को रिलीज हुई ‘हनुमान अंश’ की बॉक्स ऑफिस पर शुरुआत औसत रही, लेकिन दूसरे हफ्ते में फिल्म ने रफ्तार पकड़ी। अब छठे हफ्ते में फिल्म ने 200 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है। अपनी रिलीज के 38वें दिन फिल्म ने भारत में 22.50 करोड़ रुपये की नेट कमाई की।

‘हनुमान अंश’ का निर्देशन और निर्माण विशाल चतुर्वेदी ने अपने बैनर स्वयंभू मीडिया नेटवर्क के तहत किया है। यह फिल्म उनकी किताब ‘डिवाइन डिटूर दैट चेंज्ड माई लाइफ’ पर आधारित है, जिसमें नीम करौली बाबा के जीवन की कहानी बताई गई है। शोभिनव सत्या और चंदन आनंद ने इसमें मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं। कहानी लक्ष्मी नारायण नाम के एक युवा लड़के की है, जो आजादी से पहले के भारत में रहता था और अपनी मां की मौत के बाद भगवान की खोज में घर छोड़ देता है। उत्तर भारत में उसकी यात्रा आखिरकार उसे नीम करौली बाबा के रूप में बदल देती है।

दिल्ली में बनेगी तीसरी रिंग रोड! नॉर्थ से साउथ तक का सफर 30 मिनट में होगा पूरा, जानिए ₹7000 करोड़ का पूरा मास्टर प्लान

Delhi Parallel Ring Road: दिल्ली में रोजाना लगने वाले ट्रैफिक जाम से लोगों को राहत दिलाने के लिए सरकार ने पैरलल रिंग रोड का मास्टर प्लान तैयार किया है। इसके लिए 2026-27 के बजट में व्यवहार्यता अध्ययन यानी फिजिबिलिटी स्टडी के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह प्रस्तावित तीसरी रिंग रोड मौजूदा इनर और आउटर रिंग रोड के समानांतर विकसित की जाएगी, जिससे राजधानी में ट्रैफिक का दबाव कम करने और कनेक्टिविटी बेहतर करने में मदद मिल सकेगी।

बता दें कि दिल्ली सरकार का फोकस राजधानी में ऐसी सड़कों का नेटवर्क तैयार करने पर है, जहां लोगों को बिना रूकावट के साथ बेहतर कनेक्टिविटी की सुविधा मिले। इसके तहत जलवायु के अनुकूल और आधुनिक तकनीक से लैस सड़कों के निर्माण पर जोर दिया जा रहा है। लोक निर्माण विभाग (PWD) ने इस प्रोजेक्ट पर काम भी तेज कर दिया है।

6 फेज में होगा 55 किमी एलिवेटेड रिंग रोड का निर्माण

प्रस्तावित 55 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड रिंग रोड कॉरिडोर की डीपीआर भी तैयार हो चुकी है। इस पूरे कॉरिडोर को 6 फेज में विकसित करने की योजना है। इसका पहला चरण मुकरबा चौक से आश्रम तक बनाया जाएगा।

इसके बाद प्रोजेक्ट के दूसरे हिस्सों पर भी काम शुरू किया जाएगा। इनमें आजादपुर फ्लाईओवर से आईएसबीटी हनुमान मंदिर तक करीब 9.5 किलोमीटर का खंड, चांदगी राम अखाड़ा से मजनू का टीला तक 2.5 किलोमीटर और आईएसबीटी से डीएनडी फ्लाईओवर तक 11.5 किलोमीटर का कॉरिडोर शामिल है। इन सभी हिस्सों को प्राथमिकता के आधार पर विकसित करने की योजना है, ताकि दिल्ली के प्रमुख ट्रैफिक रूट पर दबाव कम किया जा सके।

वहीं, पीडब्ल्यूडी ने ट्रैफिक पुलिस के साथ मिलकर 10 बड़े चोक पॉइंट्स की पहचान की थी। इसमें रिंग रोड, मथुरा रोड, अरबिंदो मार्ग, महरौली-महिपालपुर रोड और रानी झांसी रोड शामिल हैं। लोक निर्माण विभाग का मानना है कि सिर्फ फ्लाईओवर से काम नहीं चलेगा। शहर में पीक आवर में 2.5 लाख से ज्यादा गाड़ियां रिंग रोड पर होती हैं। इसलिए एक पूरी नई समानांतर रिंग रोड की जरूरत है।

दिल्ली सरकार ने PWD के बजट में किया था 54% का इजाफा

जानकारी के लिए बता दें कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 24 मार्च 2026 को पेश किए गए दिल्ली बजट में लोक निर्माण विभाग (PWD) के लिए 5,921 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था। यह रकम पिछले साल के 3,843 करोड़ रुपये के मुकाबले करीब 54 फीसदी ज्यादा है।

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Ramayana Poster: ‘रामायणम्’ का नया पोस्टर हुआ रिलीज, राम-सीता का दिखा मनमोहक अंदाज

Ramayana Poster: ‘रामायणम्’ के मेकर्स ने एक नया पोस्टर जारी किया है, जिसमें रणबीर कपूर राम के रोल में और साई पल्लवी सीता के रोल में नजर आ रहे हैं। यह बहुत प्यारा है। नया पोस्टर उनके रिश्ते के सॉफ्ट पल को खूबसूरती से दिखा रहा है। सोशल मीडिया पर पोस्टर तेजी से रिलीज हो रहा है।

‘रामायणम्’ का पोस्टर रिलीज

पोस्टर में राम और सीता को सेफ्रॉन कपड़ों में नदी के किनारे बैठे हुए दिखाया गया है। ये पल उनके वनवास के समय का है। राम प्यार से सीता के बाल ठीक करते हुए दिख रहे हैं, जबकि सीता शरमाते हुए मुस्कुरा रही हैं। यह एक बहुत ही साधारण पल है, लेकिन यही बात इस पोस्टर को खास बनाती है। मेकर्स ने “सिया राम के मजबूत रिश्के” का जश्न मनाते हुए इसे शेयर किया।

‘रामायणम्’ का पहला गाना आज रिलीज होगा!

लेकिन सिर्फ पोस्टर ही नहीं आ रहा है। इसके रिलीज होने के बाद मेकर्स ‘रामायण’ का पहला गाना ‘जय जय राम’ लॉन्च करेंगे। इस गाने को एआर रहमान ने कंपोज किया है और इसके बोल डॉ. कुमार विश्वास ने लिखे हैं। इस गाने में भारतीय संगीत की दो सबसे बड़ी आवाजें – श्रेया घोषाल और अरिजीत सिंह – शामिल हैं।

मेकर्स ने बड़ी घोषणा की

मेकर्स ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि फिल्म का म्यूजिकल सफर आधिकारिक तौर पर गणेश चतुर्थी पर शुरू होगा, जिसमें ‘सिया राम’ पोस्टर का अनावरण किया जाएगा और उसके बाद पहला गाना ‘जय जय राम’ रिलीज किया जाएगा। नोट में लिखा था, “हर शुभ शुरुआत एक प्रार्थना के साथ होती है। इस गणेश चतुर्थी पर ‘रामायणम्’ का म्यूजिकल सफर सुबह 7:30 बजे (IST) हमारे ‘सिया राम’ पोस्टर के अनावरण के साथ शुरू होगा। इसके तुरंत बाद हमारा पहला म्यूजिकल तोहफा ‘जय जय राम’ आएगा। संगीत एआर रहमान बोल- डॉ. कुमार विश्वास, गायक- श्रेया घोषाल और अरिजीत सिंह।” इसके साथ ही मेकर्स ने कैप्शन में लिखा- “गणपति बप्पा के आशीर्वाद से हम कल ‘रामायणम्’ का म्यूजिकल सफर शुरू कर रहे हैं।”

‘रामायणम्’ के बारे में

नितेश तिवारी द्वारा निर्देशित ‘रामायणम्’ को इस महाकाव्य के दो-भाग वाले रूपांतरण के रूप में बनाया जा रहा है। रणबीर कपूर भगवान राम की भूमिका निभा रहे हैं, साई पल्लवी सीता के रूप में हैं, यश रावण की भूमिका निभा रहे हैं, रवि दुबे लक्ष्मण का किरदार निभा रहे हैं, और सनी देओल हनुमान के रूप में नजर आएंगे। इसके साथ ही मेकर्स ने कैप्शन में लिखा- “गणपति बप्पा के आशीर्वाद से हम कल ‘रामायणम्’ का म्यूजिकल सफर शुरू कर रहे हैं।”

Hanuman Ansh Box Office Collection Day 37: नीम करौली बाबा पर बनी फिल्म की कमाई में आया उछाल, जल्द ही 250 करोड़ रुपये का आंकड़ा करेगी पार

Hanuman Ansh Box Office Collection Day 37: विशाल चतुर्वेदी की फिल्म ‘हनुमान अंश’ बॉक्स ऑफिस पर मजबूती से टिकी हुई है। सैक्निलक (Sacnilk) के अनुसार इस डिवोशनल ड्रामा फिल्म की इंडिया नेट कमाई में छठे शनिवार को जबरदस्त उछाल आया और इसने 37वें दिन 18.50 करोड़ रुपये कमाए।

फिल्म की यह नई कमाई छठे शुक्रवार को हुई 10.50 करोड़ रुपये की कमाई के मुकाबले 76.2% ज्यादा है। ‘हनुमान अंश’ के शनिवार को 7449 शो हुए, जबकि एक दिन पहले 5743 शो हुए थे। इसकी ओवरऑल ऑक्यूपेंसी भी शुक्रवार के 38% से बढ़कर शनिवार को 52% हो गई।

इस नई कमाई के साथ फिल्म का इंडिया नेट कलेक्शन 192.13 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसका इंडिया ग्रॉस कलेक्शन अभी 227 करोड़ रुपये है। फिल्म ने ओवरसीज मार्केट में भी 9.50 करोड़ रुपये कमाए हैं, जिससे इसका वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन 236.50 करोड़ रुपये हो गया है।

12 सितंबर को ‘हनुमान अंश’ के हिंदी 2D वर्शन की ओवरऑल ऑक्यूपेंसी 56.31% रही। मॉर्निंग शो में 29.77% ऑक्यूपेंसी रही, जबकि दोपहर के शो में यह 60.31% तक पहुंच गई। शाम की ऑक्यूपेंसी 66.46% रही और रात के शो में सबसे ज्यादा 68.69% ऑक्यूपेंसी दर्ज की गई।

‘हनुमान अंश’ की शुरुआत आसान नहीं रही थी। फिल्म के रिलीज होने के बाद, ‘बंटवारा 1947’ और ‘आवारापन 2’ जैसी फिल्मों के आने से इसके स्क्रीन की संख्या घटकर सिर्फ 25 रह गई थी। हालांकि ‘बंटवारा 1947’ के उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन न कर पाने के बाद, ‘हनुमान अंश’ के लिए स्क्रीन की संख्या धीरे-धीरे बढ़ने लगी।

दर्शकों का रिस्पॉन्स भी बेहतर हुआ और लोग फिल्म देखने के लिए सिनेमाघरों में बड़ी संख्या में पहुंचने लगे। लगातार चले प्रमोशन कैंपेन का असर डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी की सेहत पर पड़ा है। वे अब मुंबई लौट रहे हैं। अपने प्लान के बारे में बात करते हुए विशाल ने कहा कि मुंबई में गणेश उत्सव शुरू हो रहा है और त्योहार के दौरान वे बप्पा का शुक्रिया अदा करने के लिए अलग-अलग पंडालों में जाएंगे।

विशाल चतुर्वेदी द्वारा लिखित और निर्देशित, ‘हनुमान अंश’ उत्तराखंड के सम्मानित संत बाबा नीम करौली (जिनका असली नाम लक्ष्मण नारायण शर्मा था) के जीवन की कहानी है। 1.75 करोड़ रुपये के बजट में बनी यह फिल्म लक्ष्मी नारायण नाम के एक युवा की कहानी है, जो अपनी मां की मौत के बाद भगवान की खोज में आध्यात्मिक यात्रा पर निकल पड़ता है।

जीवन, मृत्यु और इंसानी दुख-दर्द के सवालों के जवाब ढूंढते हुए उत्तर भारत की यात्रा के दौरान वह अंतत सम्मानित संत नीम करौली बाबा बन जाते हैं, जिनकी प्रेम, सेवा और करुणा की शिक्षाओं ने अनगिनत लोगों के जीवन को प्रभावित किया। इस फिल्म में शोभिनव सत्य मुख्य भूमिका में हैं, साथ ही विहान शेडगे, चंदन के आनंद, पूर्णिमा तिवारी, अनिल रस्तोगी, गुलशन पांडे और भगवानदास पटेल भी अहम भूमिकाओं में हैं।