जानें क्यों Gen Z की पहली पसंद बन रहे हैं दुनिया के ये 10 शहर! जहां लाइफ, करियर और मस्ती का मिलेगा पूरा पैकेज

आज की जेन जी जनरेशन अपने रहने के लिए ऐसी जगह पसंद करती है, जहां काम और पढ़ाई के साथ घूमने-फिरने, एंटरटेनमेंट और सोशल लाइफ का भी अच्छा बैलेंस हो। उनके लिए किसी शहर की पहचान सिर्फ बड़ी इमारतों या अच्छे जॉब ऑप्शन से नहीं होती, बल्कि वहां का कल्चर, नाइटलाइफ, खाने-पीने की जगहें और रोज की जिंदगी भी काफी मायने रखती है।

इसी वजह से दुनिया के कुछ शहर जेन जी के बीच तेजी से पॉपुलर हो रहे हैं। यहां किफायती लाइफस्टाइल, आसानी से घूमने की सुविधा और क्वालिटी ऑफ लाइफ जैसी कई चीजें युवाओं को अट्रैक्ट करती हैं। ‘टाइम आउट’ ने भी इन्हीं पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जेन जी के लिए दुनिया के बेहतरीन शहरों की एक स्पेशल लिस्ट तैयार की है।

1. टोक्यो, जापान

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टोक्यो इस लिस्ट में पहले नंबर पर है। यहां सर्वे में शामिल सभी यूथ ने रोज खुश रहने की बात कही। शहर की तेज और आसान पब्लिक ट्रांसपोर्ट, देर रात तक चलने वाली नाइटलाइफ, म्यूजिक बार और कई जगहों पर मुफ्त म्यूजियम एंट्री जैसी फैसिलिटी यूथ को काफी पसंद आती हैं। यहां काम, मनोरंजन और घूमने के लिए बहुत सारे ऑप्शन मिलते हैं।

2. वेलेंसिया, स्पेन

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समुद्र के किनारे बसा वेलेंसिया अपने खूबसूरत मौसम और आरामदायक माहौल के लिए जाना जाता है। यहां रहने का खर्च कई बड़े यूरोपीय शहरों की तुलना में कम है। समुद्र तट, आउटडोर एक्टिविटीज और अच्छे लोगों की वजह से यहां की लाइफस्टाइल काफी सुकून भरी है। घर से काम करने वाले यूथ के लिए यह अच्छा शहर माना जाता है।

3. बैंकॉक, थाईलैंड

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बैंकॉक अपनी चहल-पहल, स्वादिष्ट स्ट्रीट फूड और शानदार नाइटलाइफ के लिए यूथ के बीच काफी पॉपुलर है। यहां कम बजट में खाने, घूमने और एंटरटेनमेंट के कई ऑप्शन मिल जाते हैं। शहर का माहौल काफी एनर्जेटिक है, इसलिए यहां रहने वाले युवा काम के साथ घूमने और दोस्तों के साथ समय बिताने का मजा भी ले सकते हैं।

4. कोपेनहेगन, डेनमार्क

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कोपेनहेगन को अच्छी लाइफ क्वालिटी और बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस के लिए पसंद किया जाता है। यहां साइकिल से घूमना काफी आसान है और शहर में हरियाली भी खूब देखने को मिलती है। साफ-सुथरा माहौल और पर्यावरण को लेकर जागरूक लाइफस्टाइल इसे उन युवाओं के लिए खास बनाती है, जो करियर के साथ अपनी सेहत और प्राइवेट लाइफ पर भी ध्यान देना चाहते हैं।

5. पोर्टो, पुर्तगाल

पोर्टो अपनी खूबसूरत पुरानी इमारतों, समुद्र तटों और मिलनसार लोगों के लिए जाना जाता है। यहां कम्युनिटी का माहौल काफी अच्छा है, जिससे नए लोगों के लिए घुलना-मिलना आसान हो जाता है। बाहर खाना-पीना भी कई दूसरे यूरोपीय शहरों की तुलना में कम खर्चीला है। शहर की संस्कृति और शांत माहौल युवाओं को काफी अट्रैक्ट करता है।

6. बर्लिन, जर्मनी

बर्लिन को युवा और क्रिएटिव लोगों का शहर कहा जा सकता है। यहां की नाइटलाइफ, आर्ट सीन, म्यूजिक और बड़े पार्क युवाओं को खूब पसंद आते हैं। शहर में मनोरंजन के कई बजट-फ्रेंडली ऑप्शन हैं। साथ ही स्टार्टअप और क्रिएटिव इंडस्ट्री में काम करने वालों के लिए भी यहां अच्छे मौके मिलते हैं।

7. न्यूयॉर्क, अमेरिका

न्यूयॉर्क अपनी तेज रफ्तार जिंदगी और हर समय एक्टिव रहने वाले माहौल के लिए मशहूर है। शहर में पैदल घूमना आसान है और यहां हर तरह के म्यूजियम, थिएटर, रेस्टोरेंट और कल्चरल इवेंट मिल जाते हैं। नौकरी और करियर के बहुत सारे मौके होने के कारण यह युवाओं को अट्रैक्ट करता है, लेकिन यहां रहना काफी महंगा हो सकता है।

8. शंघाई, चीन

शंघाई आधुनिक इमारतों, शानदार इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षित माहौल के लिए जाना जाता है। यहां टेक्नोलॉजी और बिजनेस से जुड़े करियर के कई मौके मिलते हैं। नए लोगों के लिए भी शहर में कई तरह की फैसिलिटीज हैं। यही वजह है कि करियर पर फोकस करने वाले युवा इसे एक अच्छा ऑप्शन मानते हैं।

9. एडिनबर्ग, स्कॉटलैंड

एडिनबर्ग अपनी पुरानी बिल्डिंग, इतिहास और खूबसूरत हरियाली के लिए खास है। यहां सुरक्षा अच्छी है और शहर में पैदल घूमना भी आसान है। इसके अलावा यहां की अनोखी नाइटलाइफ युवाओं को अट्रैक्ट करती है। काम और आराम के बीच अच्छा बैलेंस बनाने के लिए भी यह शहर पसंद किया जाता है।

10. मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया

मेलबर्न अपनी क्रिएटिविटी, कला और खाने-पीने के लिए मशहूर है। यहां अच्छे रेस्टोरेंट के साथ इंडी थिएटर, लाइव कॉमेडी और म्यूजिक जैसे एंटरटेनमेंट के कई ऑप्शन मिलते हैं। शहर के अलग-अलग इलाकों में कम बजट में खाने-पीने की जगहें भी मिल जाती हैं। यही वजह है कि करियर की शुरुआत करने वाले युवा प्रोफेशनल्स के लिए मेलबर्न अट्रैक्टिव सिटी है।

Kangana Ranaut: कंगना रनौत बोलीं जंतर-मंतर पर जमा भीड़ में ‘शबाना आजमी जैसे’ लोग थे, ‘ये Gen Z कैसे हो सकते हैं?’

Kangana Ranaut: जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों के बारे में की गई अपनी टिप्पणी के लिए आलोचना झेलने के बाद, कंगना रनौत ने अपने विवादित “जेनरेशन गटर” वाले बयान पर एक और स्पष्टीकरण दिया है। एक्टर और बीजेपी सांसद ने जोर देकर कहा कि उन्होंने किसी पूरी पीढ़ी को निशाना नहीं बनाया था और कहा कि उनकी टिप्पणी केवल प्रदर्शनकारियों के एक खास वर्ग के लिए थी, जिन्हें उन्होंने प्रदर्शन के वीडियो में देखा था।

गुरुवार को इंस्टाग्राम स्टोरीज पर एक वीडियो शेयर करते हुए कंगना ने सवाल किया कि इस भीड़ को आम तौर पर ‘जेन जेड’ (Gen Z) का विरोध प्रदर्शन क्यों कहा जा रहा है और तर्क दिया कि असल में देश की युवा आबादी का केवल एक छोटा सा हिस्सा ही इसमें शामिल हुआ था।

कंगना ने ‘जेन ज़ेड प्रोटेस्ट’ लेबल पर सवाल उठाए

अपने वीडियो में कंगना ने इस बात को चुनौती दी कि यह प्रदर्शन पूरे भारत के युवाओं का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने जेन ज़ेड आबादी का अनुमान लगभग 30 से 35 करोड़ लगाया और इस संख्या की तुलना जंतर-मंतर पर जमा हुए लोगों की संख्या से की। उन्होंने कहा, “पूरे देश के युवा? अगर आप सिर्फ जेन जेड की बात करते हैं, तो लगभग 30-35 करोड़ के पास इनकी आबादी होने वाली है।”

कंगना ने दावा किया कि विरोध प्रदर्शन में लगभग 10,000 लोग मौजूद थे और इस सभा में विभिन्न आयु वर्ग के लोग शामिल थे। दिग्गज अभिनेत्री शबाना आज़मी का जिक्र करते हुए, जो मार्च में शामिल हुई थीं, उन्होंने कहा, “जो जंतर-मंतर है वहाँ पर 10,000 लोग एक साथ आए थे जिनमें से आधे से ज्यादा लोग शबाना आज़मी जैसे थे, आपने देखा कि हर तरह के आयु वर्ग के लोग घूम रहे थे।”

इसके बाद उन्होंने दावा किया कि सभा में केवल लगभग 2,000 लोग ही जेनरेशन Z से थे और सवाल किया कि इस विरोध प्रदर्शन को पूरी पीढ़ी का प्रतिनिधि क्यों बताया जा रहा है। कंगना ने कहा कि “अगर हम युवाओं की बात करते हैं, जेन ज़ेड की हम विशेष रूप से बात करते हैं तो लग भाग वाह 2000 जेन ज़ेड पर, तो कैसे ये लोग इसको जेन ज़ेड विरोध कह रहे हैं? क्या पूरे देश की जेन ज़ेड विरोध कर रहे हैं?”

‘मैं युवा-विरोधी नहीं हो सकती’

कंगना ने अपनी बात दोहराते हुए कहा कि उनकी पिछली टिप्पणियां खास तौर पर उन लोगों के बारे में थीं, जिन्हें उन्होंने विरोध प्रदर्शन में देखा था, न कि सभी युवा भारतीयों के बारे में। उन्होंने कहा, “यहां जो भीड़ जमा हुई थी, मैंने खास तौर पर उन्हीं के बारे में कहा था।” इसके बाद एक्ट्रेस ने उन लोगों को “खुली चुनौती” दी जो उन पर पूरी पीढ़ी का अपमान करने का आरोप लगा रहे थे।

उन्होंने कहा, “मैं आपको खुली चुनौती देती हूं, मेरा कोई ऐसा खास बयान बताइए जिसमें मैंने पूरी पीढ़ी को शामिल किया हो? मेरे साथ इस तरह का फालतू एजेंडा मत चलाइए!” कंगना ने इस आरोप को भी खारिज कर दिया कि वह युवाओं के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा, “मैं युवा-विरोधी नहीं हो सकती क्योंकि मैं खुद युवा हूं।”

कंगना ने पहले क्या कहा था

यह विवाद तब शुरू हुआ जब कंगना ने विरोध प्रदर्शन के वीडियो पर तीखी प्रतिक्रिया दी और प्रदर्शन में शामिल कुछ लोगों की भाषा और व्यवहार की आलोचना की। उन्होंने कहा था, “मैंने अपनी ज़िंदगी में कभी एक जगह इतनी बदसूरती नहीं देखी। Gen Z के विरोध प्रदर्शनों की ये रील्स देखकर उल्टी आती है।”

उन्होंने आगे कहा, “जिस तरह से वे बात करते हैं और जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल करते हैं… मैंने अपनी ज़िंदगी में कभी भी हर फ्रेम में सब कुछ इतना अजीब और भद्दा एक साथ नहीं देखा… मैं उन्हें ‘जेनरेशन गटर’ कहती हूँ। उनमें से कुछ के पास सिस्टम को देने के लिए कुछ भी नहीं है। वे पढ़ाई में अच्छे नहीं हैं…”

उनकी इन बातों पर लोगों ने नाराज़गी जताई और आलोचकों ने उन पर युवा प्रदर्शनकारियों के बारे में सामान्य और तीखी टिप्पणी करने का आरोप लगाया। कंगना पहले ही अपनी ‘कॉकरोच’ वाली टिप्पणी पर सफाई दे चुकी थीं। आलोचना के बाद, कंगना ने ANI को बताया था कि उनका मकसद विरोध प्रदर्शन में शामिल सभी लोगों के बारे में कोई सामान्य टिप्पणी करना नहीं था। उन्होंने कहा कि वह “कुछ लोगों या कुछ महिलाओं” के बारे में बात कर रही थीं।

अपनी टिप्पणी के एक और विवादित हिस्से पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा, “जो लोग खुद को कॉकरोच कहते हैं, और हम कहते हैं कि कॉकरोच गटर से निकलते हैं, तो इसमें क्या गलत है?” कंगना ने आगे कहा कि अगर कोई खुद को कॉकरोच बताता है, तो उन्हें उन्हें गटर से जोड़ने में कोई विरोधाभास नहीं दिखता।

उन्होंने कहा, “मैं खुद को कॉकरोच बिल्कुल नहीं मानती। अगर कोई कहे कि मैं गटर में रहती हूँ, तो मैं इससे इनकार करूँगी। लेकिन अगर कोई खुद को कॉकरोच कहता है, तो ज़ाहिर है कि वह गटर में ही रहेगा और कहां रहेगा?” उन्होंने फिर कहा, “लेकिन यह कहना कि मैं सभी युवाओं की बात कर रही थी, बिल्कुल गलत है।”

शबाना आज़मी विरोध प्रदर्शन में शामिल हुई थीं

शबाना आज़मी उन लोगों में शामिल थीं, जो 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए थे। 75 वर्षीय अभिनेत्री ने मार्च की तस्वीरें और वीडियो शेयर किए, जिनमें उन्हें ट्रक में यात्रा करते और प्रदर्शनकारियों के साथ बैरिकेड पार करते हुए देखा जा सकता है।

प्रदर्शन के दौरान अभिनेता प्रकाश राज भी उनके साथ दिखे

कंगना का ताज़ा बयान उनकी पहले दी गई सफाई को ही और मज़बूत करता है। उनका कहना है कि उनकी बातों की आलोचना करते हुए, एक खास ग्रुप पर की गई टिप्पणी को गलत तरीके से देश की पूरी ‘जेन ज़ी’ (Gen Z) आबादी पर हमले के तौर पर पेश किया गया है।

Kangana Ranaut: ‘पाकिस्तान के प्यार में मारे रहते हैं’, कंगना रनौत ने नसीरुद्दीन शाह को सुनाई खरी-खोटी

Kangana Ranaut: एक्टर और BJP सांसद कंगना रनौत ने हाल ही में स्टूडेंट प्रोटेस्ट पर सीनियर एक्टर नसीरुद्दीन शाह की टिप्पणियों पर तीखा तंज कसते हुए उन्हें “लोमड़ी” कहा। अब कंगना ने अपनी बात का बचाव किया है और एक्टर पर “पाकिस्तान के प्रति उनके प्यार” को लेकर निशाना साधा है, साथ ही फिल्म इंडस्ट्री पर “दोहरेपन” का आरोप भी लगाया है।

कंगना रनौत ने नसीरुद्दीन शाह को ‘लोमड़ी’ कहने का बचाव किया

ANI के साथ बातचीत में, कंगना ने फ़िल्म इंडस्ट्री के “लगातार बने हुए रवैये” की आलोचना की और जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान मची अफरातफरी को याद किया। उन्होंने दावा किया कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान, उनके कई सांसद दोस्तों की गाड़ियों पर लोग चढ़ गए थे और उनकी खिड़कियां तोड़ दी थीं, जबकि उनके घर के बाहर करीब 2,500 लोग जमा हो गए थे, जिसके कारण भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा और उनके परिवार को रात भर जागना पड़ा।

उन्होंने आगे कहा, “तो जब जंतर-मंतर पर ऐसी स्थिति बन रही थी, तो वे सभी मगरमच्छ के आंसू बहा रहे थे। लेकिन अब जब झारखंड में बच्चे इस तरह के उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं, तो क्या वे भी ‘जेन ज़ी’ (Gen Z) नहीं हैं? क्या कोई व्यक्ति तभी ‘जेन ज़ी’ माना जाता है जब वह देश के खिलाफ काम करता है या प्रधानमंत्री को अपशब्द कहता है? उन्हें खुद ही युवाओं के खिलाफ दिखाया गया है। फिल्म इंडस्ट्री का यह पाखंड नहीं चलेगा। फ़िल्म इंडस्ट्री के लोग जंतर-मंतर के लिए जो मगरमच्छ के आंसू बहा रहे थे, उन्हें झारखंड के बच्चों के लिए भी वैसे ही आंसू बहाने चाहिए।”

इसके बाद उन्होंने नसीरुद्दीन शाह के बारे में अपनी “लोमड़ी” टिप्पणी का बचाव करते हुए कहा, “मैंने नसीरुद्दीन शाह के बारे में ऐसा इसलिए कहा क्योंकि उन्होंने एक बेहद आपत्तिजनक वीडियो बनाया था जिसमें वे इस तरह की धमकियां दे रहे थे। और जब भी आप उनकी फिल्में, साक्षात्कार या बयान देखें, बात हमेशा पाकिस्तान की ही होती है। ये पाकिस्तान की प्रेम कथा कब खत्म होगी? जब देखो पाकिस्तान के प्रेम में ये मरे रहते हैं। अब बंटवारे को भी इतने साल हो गए हैं तो ये प्रेम कहानी खत्म क्यों नहीं हो रही है?”

कंगना रनौत ने नसीरुद्दीन शाह को ‘लोमड़ी’ क्यों कहा?

पिछले हफ्ते, अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज़ पर, कंगना ने नसीरुद्दीन की टिप्पणी पर अभिनेता पीयूष मिश्रा की एक टिप्पणी को दोबारा पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने झारखंड में छात्र विरोध प्रदर्शन पर अनुभवी अभिनेता की चुप्पी पर सवाल उठाया था। उन्होंने एक अलग नोट जोड़ा जिसमें लिखा था, “सच तो ये है कि हर कोई न किसी का कुत्ता है लेकिन मुझे इस बात का गर्व है कि मैं जिस घर (देश) की रोटी खाती हूं उसकी रखवाली करती हूं, उसके लिए लड़की हूं। नसीर साहब खाते तो इस देश के हैं लेकिन लड़ते पड़ोसी देश के लिए हैं।” (सच्चाई यह है कि हममें से हर कोई किसी न किसी का पालतू है। मुझे गर्व है कि मैं उसी घर की रक्षा और बचाव करता हूं जहां से मुझे खाना मिलता है। लेकिन नसीर साहब इस जमीन से खाते हैं और पड़ोसी देश की रक्षा करते हैं)।”

उन्होंने आगे कहा, “PS: आज के समय में कुत्ता कहलाना एक तारीफ़ है क्योंकि वफ़ादारी और क्यूटनेस बहुत कम देखने को मिलती है। मैं नसीरुद्दीन की तरह लोमड़ी बनने के बजाय कुत्ता बनना ज़्यादा पसंद करूंगी।” इससे पहले नसीरुद्दीन शाह ने NEET पेपर लीक को लेकर CJP के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों के ख़िलाफ़ कथित पुलिस बर्बरता के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई थी।

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BGauss Oowah

भारत में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की मांग लगातार बढ़ रही है। इसी बढ़ती डिमांड को देखते हुए कंपनियां नए-नए इलेक्ट्रिक स्कूटर बाजार में उतार रही हैं। अब BGauss ने भारतीय बाजार में अपना नया इलेक्ट्रिक स्कूटर Oowah लॉन्च किया है। कंपनी ने इसे खास तौर पर शहरों के युवाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया है। इसकी कीमत ₹1.22 लाख (एक्स-शोरूम) रखी गई है।

 

3kWh बैटरी और 145KM तक की रेंज

 

BGauss Oowah में 3kWh की रिमूवेबल लिथियम-आयन फॉस्फेट बैटरी दी गई है। कंपनी के मुताबिक, यह बैटरी स्कूटर को एक बार चार्ज करने पर 145 किलोमीटर तक की रेंज देने में सक्षम है। रिमूवेबल बैटरी होने की वजह से इसे आसानी से निकालकर चार्ज किया जा सकता है।

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मिलते हैं ये फीचर्स

 

BGauss Oowah को चार कलर ऑप्शन में पेश किया गया है। इलेक्ट्रिक स्कूटर में LED लाइट्स, USB पोर्ट, पर्याप्त स्टोरेज स्पेस, रिवर्स असिस्ट, Distance to Empty Display और साइड स्टैंड सेंसर जैसे फीचर्स दिए गए हैं। कंपनी का कहना है कि Oowah को खास तौर पर शहरों के युवाओं की जरूरतों और उनकी बदलती पसंद को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। इसका डिजाइन आधुनिक होने के साथ-साथ इसे रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए व्यावहारिक बनाने की कोशिश की गई है।

 

BGauss ने क्या कहा?

 

लॉन्च के मौके पर BGauss के फाउंडर हेमंत काबरा ने कहा कि भारत में टू-व्हीलर खरीदने वाले ग्राहकों की पसंद तेजी से बदल रही है। खास तौर पर Gen Z ऐसे प्रोडक्ट पसंद कर रही है जो उनकी पर्सनैलिटी को दर्शाने के साथ आधुनिक और इस्तेमाल में मजेदार हों।

 

उन्होंने कहा कि Oowah के जरिए कंपनी बोल्ड डिजाइन और भरोसेमंद इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को एक साथ लाने की कोशिश कर रही है। कंपनी के मुताबिक, यह स्कूटर राइडर की अलग पहचान को दर्शाने के साथ जरूरी और व्यावहारिक फीचर्स भी उपलब्ध कराता है।

₹1.22 लाख है कीमत

BGauss Oowah की भारत में एक्स-शोरूम कीमत ₹1.22 लाख रखी गई है। 3kWh बैटरी और 145 किलोमीटर तक की रेंज के साथ कंपनी ने इसे भारतीय इलेक्ट्रिक स्कूटर बाजार में युवाओं को ध्यान में रखकर उतारा है।

‘शॉर्टकट आपको नुकसान पहुंचा सकता है’; Insta reels पसंद करने वाली Gen Z को PM मोदी का संदेश

PM Modi message to reel-loving Gen Z: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं से आत्मकथाएं पढ़ने और दूसरों के संघर्षों से सीखने की अपील। एक कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में पीएम मोदी ने बुधवार (12 अगस्त) को अपील करते हुए कहा कि रील के युग में रह रहे युवाओं को याद रखना चाहिए कि शॉर्टकट आपको नुकसान पहुंचा सकता है।

PM मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा ‘ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक: माय लाइफ, माय स्ट्रगल्स’ के विमोचन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि कोविंद का जीवन दिखाता है कि दृढ़ संकल्प किसी व्यक्ति को मुश्किलों से उबरने और सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने में कैसे मदद कर सकता है।

प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद भी कोविंद के लगातार सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहने का जिक्र करते हुए कहा कि पद छोड़ने के बाद भी उन्होंने आराम नहीं किया। बल्कि ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पहल पर काम कर रहे हैं, जो भारतीय लोकतंत्र में एक नया अध्याय खोल सकती है। पीएम मोदी ने कहा कि इस मुद्दे पर पूर्व राष्ट्रपति के प्रयास भारतीय लोकतंत्र को मजबूत करने में उनके निरंतर योगदान का हिस्सा हैं।

युवाओं से आत्मकथाएं पढ़ने की अपील

प्रधानमंत्री ने युवाओं से आत्मकथाएं पढ़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि इनसे किसी खास दौर को उस व्यक्ति के जीवन के जरिए समझने का मौका मिलता है जिसने उसे खुद अनुभव किया हो। उन्होंने कहा, “आज रील का जमाना है, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर आपको कहीं न कहीं खींच ले जाते हैं लेकिन इस दौर में भी, रेलवे स्टेशन पर लिखी बात याद रखें, ‘शॉर्टकट’ आपको नुकसान पहुंचा सकता है।”

PM मोदी की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब सरकार और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सोशल मीडिया पर ‘जेन जी’ से जुड़ने की कोशिशें तेज कर दी हैं। नीट का पेपर लीक होने के खिलाफ पिछले महीने हुए विरोध-प्रदर्शनों के बाद पीएम मोदी ने अपने मंत्रियों से कहा था कि वे युवाओं से जुड़ने के लिए इंस्टाग्राम का सक्रिय रूप से इस्तेमाल करें और रील पोस्ट करें।

पीएम मोदी भी शेयर कर रहे हैं रील्स

हाल के हफ्तों में पीएम मोदी ने स्वयं युवाओं को संबोधित करते हुए कई बार रील शेयर की हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि कोविंद की आत्मकथा भारतीय लोकतंत्र की धरोहर बनेगी। साथ ही नई पीढ़ी को इससे बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।

पीएम मोदी ने कहा, “हमें भविष्य में और ऐसे कई युवाओं की जरूरत है जो कोविंद की हों। ऐसे लोग जो हालात से हार न मानें, बल्कि हर चुनौती से पार पाने का पुख्ता इरादा रखें। वे आत्मनिर्भर भारत का रास्ता बनाएंगे और यह आत्मकथा युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।”

उन्होंने कहा कि आत्मकथा का शीर्षक बिल्कुल सही है क्योंकि कोविंद का जीवन और संघर्ष भले ही व्यक्तिगत थे। लेकिन उन संघर्षों की जीत भारतीय लोकतंत्र की है। पीएम मोदी ने याद किया कि बचपन में घर का सामान बचाने की कोशिश के दौरान लगी आग में कोविंद ने अपनी मां को खो दिया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह दुखद घटना कोविंद को तोड़ सकती थी। लेकिन इसके बजाय इसने उन्हें और मजबूत बनाया।

अच्छे संस्कार का किया जिक्र

पीएम मोदी ने कहा कि कोविंद में अच्छे संस्कार डालने में उनके पिता की अहम भूमिका रही। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति भवन में कोविंद के साथ अपनी मुलाकातों को याद करते हुए कहा कि पूर्व राष्ट्रपति उनसे ऐसी बातें करते थे जिनकी प्रोटोकॉल के तहत आम तौर पर अनुमति नहीं होती थी। PM मोदी के मना करने के बावजूद वे उन्हें खुद कार तक छोड़ने आते थे। कोविंद ने इस अवसर पर अपने बचपन की मुश्किलों और अपने आस-पास के माहौल से मिली सीख को याद किया।

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उन्होंने याद किया कि कैसे उनके घर की छत से बारिश का पानी टपकता था। उनका परिवार बारिश रुकने का इंतजार करता था। कोविंद ने कहा कि सरकारी आवास योजनाओं के तहत करोड़ों गरीब परिवारों को सिर पर छत मिली है और उन्हें सम्मान के साथ जीने का मौका मिला है। कोविंद ने कहा कि वह BJP से इसलिए जुड़े क्योंकि उनकी नजर में यह पार्टी परिवार या समुदाय के हितों से ऊपर देश को रखती है।

‘Gen Z को गुमराह करने की कोशिश…’; शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने पर धर्मेंद्र प्रधान ने पहली बार तोड़ी चुप्पी

Dharmendra Pradhan: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और संबलपुर से सांसद धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देने के बाद पहली बार मामले में अपनी चुप्पी तोड़ी है। प्रधान ने शनिवार (8 जुलाई) को कहा कि नीट पेपर लीक मामले को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान ‘जेन जी’ को गुमराह करने की कोशिशें की गईं। इसके बाद उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। प्रधान ने इस मुद्दे को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए बड़े विरोध प्रदर्शनों के बीच पद छोड़ने के दो सप्ताह बाद संबलपुर के जीएम यूनिवर्सिटी में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए अपने इस्तीफे पर पहली बार प्रतिक्रिया दी।

प्रधान ने कहा, “जेन जी हमारे बच्चे हैं। कुछ लोगों ने उन्हें गुमराह करने की कोशिश की। भारत में हर साल कम से कम दो करोड़ बच्चे जन्म लेते हैं। पिछले 10 वर्षों में 20 करोड़ बच्चे पैदा हुए हैं। उनकी अपनी आकांक्षाएं हैं। वे भारत को ‘विश्व गुरु’ बनाएंगे। मेरे लिए पद महत्वपूर्ण नहीं था।”

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा देने की पेशकश की थी। प्रधान ने 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। NEET मुद्दे पर भारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय मंत्रिपरिषद से हटने के ठीक दो हफ़्ते बाद उन्होंने यह बयान दिया।

‘मेरे लिए पद महत्वपूर्ण नहीं था’

शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफे पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए प्रधान ने कहा कि उस समय उन्हें कोई निजी समस्या नहीं थी। उनके लिए मंत्री पद से अधिक जरूरी युवा भारतीयों की उम्मीदें थीं। प्रधान ने कहा, “Gen Z हमारे बच्चे हैं। कुछ लोगों ने उन्हें गुमराह करने की कोशिश की। तब मुझे कोई निजी समस्या नहीं थी।” उन्होंने कहा कि भारत में हर साल लगभग दो करोड़ बच्चे पैदा होते हैं। पिछले दशक में करीब 20 करोड़ बच्चे पैदा हुए हैं।

प्रधान ने यह भी बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से संपर्क किया था और केंद्रीय मंत्रिपरिषद से हटने की पेशकश की थी। रायराखोल में एक और बैठक में प्रधान ने अपने खिलाफ आयोजित विरोध-प्रदर्शनों को लेकर ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और BJD प्रमुख नवीन पटनायक पर निशाना साधा। उन्होंने अपनी आलोचना किए जाने को लेकर पटनायक पर भी पलटवार किया।

प्रधान ने कहा, “नवीन बाबू मुझे ओडिशा के लोगों के लिए शर्म की बात और बुरा इंसान भी कहते हैं।” उन्होंने BJD अध्यक्ष पर अपने खिलाफ विरोध-प्रदर्शनों में युवाओं को शामिल करने का आरोप लगाया। उन्होंने पूछा, “क्या मैंने कभी ऐसा कुछ किया है जिससे ओडिशा के लोगों को शर्मिंदगी उठानी पड़े?” इस पर वहां मौजूद लोगों ने ‘नहीं’ में जवाब दिया।

प्रधान ने कहा कि भले ही उन्होंने ओडिशा का नाम रोशन न किया हो। लेकिन उन्होंने अपने काम से कभी ऐसा कुछ नहीं किया जिससे राज्य की बदनामी हो। उन्होंने कहा, “हो सकता है कि मैं राज्य के लिए सम्मान न लाया होऊं। लेकिन मैंने अपने काम से कभी लोगों को शर्मिंदा नहीं किया। मैं कभी ऐसा कोई काम नहीं करूंगा जिससे राज्य की प्रतिष्ठा पर आंच आए।”

‘भगवान जगन्नाथ के आशीर्वाद से केंद्रीय मंत्री बना’

प्रधान ने अपने राजनीतिक सफर के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि भगवान जगन्नाथ और संबलपुर की आराध्य देवी समलेश्वरी के आशीर्वाद से वे 12 साल पहले केंद्रीय मंत्री बने थे। पटनायक के खिलाफ उनकी यह टिप्पणी एक ऐसे कार्यक्रम में आई जहां BJD विधायक और ओडिशा विधानसभा में उप-नेता प्रसन्न आचार्य भी मौजूद थे।

प्रधान ने कहा कि BJD के विरोध-प्रदर्शनों को देखते हुए उन्होंने आचार्य से सलाह ली थी कि क्या उन्हें कार्यक्रम में शामिल होना चाहिए। BJD के संबलपुर जिला अध्यक्ष और पूर्व मंत्री रोहित पुजारी ने प्रधान के आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि BJP नेता को इसलिए आलोचना का सामना करना पड़ा क्योंकि सरकार ने छात्र विरोध-प्रदर्शनों को जिस तरह से संभाला, वह गलत था।

उन्होंने तर्क दिया कि प्रधान को उन घटनाओं की वजह से आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सवाल किया कि पुलिस की कार्रवाई के लिए ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री को क्यों दोषी ठहराया जाएगा। सूत्रों ने PTI को बताया कि संबलपुर पुलिस ने एहतियात के तौर पर BJD के लगभग 30 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया।

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Gold Outlook: सोने में अगली तेजी में Gen Z का होगा बड़ा हाथ, जानिए WGC की रिपोर्ट क्या कहती है

Gold Outlook: गोल्ड के साथ रिश्ता बदल रहा है। इसमें जेनजी का बड़ा हाथ है। इस बारे में वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (डब्ल्यूजीसी) की नई रिपोर्ट में बताया गया है। इसमें कहा गया है कि इंडिया में गोल्ड में अगली बड़ी तेजी में सिर्फ ज्वेलरी की खरीदारी नहीं बल्कि टेक्नोलॉजी, डिजिटल फाइनेंस और न्यू-एज इनवेस्टमेंट प्रोडक्ट्स का हाथ होगा।

गोल्ड में निवेश के तरीके में आ रहा है बदलाव

WGC की स्वर्णिम उड़ान 20247 में कई दिलचस्प बातें बताई गई हैं। यह रिपोर्ट तब आई है, जब सोने की कीमतों में पिछले कुछ सालों में बड़ी तेजी से लोगों की खरीदारी की आदत में बदलाव आ रहा है। हालांकि, अब भी भारत में लोग ज्वेलरी पर काफी पैसे खर्च कर रहे हैं।

भारत में लोगों के पास 31000 टन सोना

इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में लोगों के पास 31,000 टन सोना है। इसकी कीमत करीब 315 लाख करोड़ रुपये (3.4 ट्रिलियन डॉलर) है। इसमें से ज्यादातर सोना घरों में बेकार पड़ा है। इस वजह से भारत में यह सबसे ज्यादा अंडरयूटिलाइज्ड एसेट है। हालांकि, इसके पीछे सोने को लेकर लोगों की पारंपरिक सोच है।

Gen Z गोल्ड को अलग नजरिए से देख रहे

WGC के मुताबिक, 1997 से 2012 के बीच जन्म लेने वाले लोग सोने को सिर्फ विरासत में मिले एसेट के रूप में नहीं देखते हैं। उनका जोर सोने की लिक्विडिटी और डिजिटल एक्सेस जैसी चीजों पर भी है। यही वजह है कि सिर्फ फिजिकल ज्वेलरी के बजाय वे डिजिटल गोल्ड और टेक्नोलॉजी आधारित इनवेस्टमेंट प्रोडक्ट्स में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

ज्वेलर्स युवा खरीदारों को अट्रैक्ट करने के तरीके तलाश रहे

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि युवा इनवेस्टर्स गोल्ड में निवेश करने से पहले ऑनलाइन रिसर्च करते हैं। इस वजह से ज्वेलर्स इन नए कस्टमर्स को अट्रैक्ट करने के तरीके तलाश रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक, 2035 तक जेनजी की कंज्यूमर स्पेंडिंग करीब 2 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच सकती है। इसका असर भविष्य में इंडिया के गोल्ड मार्केट पर दिखेगा।

फाइनेंशियल ईकोसिस्टम का हिस्सा बना रहा गोल्ड

डब्ल्यूजीसी के मुताबिक, इंडिया में गोल्ड की डिमांड अब सिर्फ ज्वेलरी तक सीमित रहने वाली नहीं है। गोल्ड अब फाइनेंशियल ईकोसिस्टम का हिस्सा बन रहा है। इसमें गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम, रिसाइक्लिंग नेटवर्क, इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स, डिजिटल गोल्ड और बुलियन बैंकिंग का बड़ा हाथ हो सकता है। इस इंटिग्रेशन से घरों में पड़ा सोना भी इकोनॉमी का हिस्सा बन सकता है।

Dog Surgery Viral Video: 26 साल के करोड़पति ने ‘कुत्ता’ बनने के लिए उड़ाए 220 करोड़? वायरल वीडियो ने खड़े किए सवाल

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक ऐसा वीडियो चर्चा में है, जिसने लोगों को हैरान कर दिया है। वायरल पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि जापान के 26 वर्षीय करोड़पति जासो ने खुद को कुत्ते जैसा दिखाने के लिए करीब 220 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। पोस्ट के मुताबिक, उन्होंने कई सर्जरी करवाईं और अब उनका हाव-भाव और रहन-सहन कुत्ते जैसा है। हालांकि, इस दावे की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा

वायरल पोस्ट में कहा गया है कि जासो ने अपनी शक्ल और शरीर को कुत्ते जैसा बनाने के लिए बड़ी रकम खर्च की। दावा यह भी है कि सर्जरी के बाद वह कुत्ते की तरह चलने-फिरने और रहने की कोशिश करते हैं। वीडियो के साथ शेयर किया गया यह दावा सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया और देखते ही देखते लोग इस असामान्य कहानी पर अपनी प्रतिक्रियाएं देने लगे।

करोड़पति ने चुना ऐसा अजीब शौक?

वीडियो वायरल होने के बाद यूजर्स के बीच सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हुई कि अगर किसी व्यक्ति के पास करोड़ों रुपये हैं तो वह उन्हें अपनी पसंद के मुताबिक खर्च कर सकता है, लेकिन 220 करोड़ रुपये खर्च कर खुद को कुत्ते जैसा बनाने का दावा लोगों को असामान्य लगा। कुछ यूजर्स ने इस पर मजेदार टिप्पणियां कीं, जबकि कुछ ने इसे इंसान के अनोखे शौक की मिसाल बताया।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

पोस्ट के कमेंट सेक्शन में लोगों की प्रतिक्रियाएं भी अलग-अलग रहीं। कुछ लोगों ने मजाक करते हुए कहा कि आमतौर पर करोड़पति महंगी कार, बंगला या लग्जरी लाइफस्टाइल पर पैसा खर्च करते हैं, लेकिन यहां मामला बिल्कुल अलग है। वहीं, कुछ यूजर्स ने वीडियो को लेकर हैरानी जताई और कहा कि अगर यह दावा सही है तो इतनी बड़ी रकम खर्च करने का फैसला वाकई चौंकाने वाला है।

कुछ लोगों ने वीडियो पर ही उठाए सवाल

हर कोई वायरल दावे को सच मानने के लिए तैयार नहीं है। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने सवाल किया कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति आखिर कौन है और क्या वाकई उसने इतनी बड़ी रकम सर्जरी पर खर्च की है। कुछ लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली तस्वीरों और वीडियो के साथ कई बार अधूरी या गलत जानकारी जोड़ दी जाती है। ऐसे में केवल पोस्ट या वीडियो के आधार पर किसी बड़े दावे को सच मानना सही नहीं होगा।

अभी तक दावे की पुष्टि नहीं

फिलहाल जासो के बारे में किए जा रहे इन दावों की किसी विश्वसनीय आधिकारिक स्रोत से पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए 220 करोड़ रुपये खर्च करने, कई सर्जरी कराने या कुत्ते जैसा जीवन जीने की बात को फिलहाल सोशल मीडिया का दावा ही माना जाना चाहिए। वीडियो जरूर तेजी से वायरल हो रहा है, लेकिन इसके पीछे की वास्तविक कहानी क्या है, यह आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।

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महिला आरक्षण पर राहुल गांधी का रिजिजू को जवाब, बोले- 2023 का कानून बिना शर्त लागू करें

kiren rijiju and rahul gandhi on women reservation

राहुल गांधी ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि महिला आरक्षण विधेयक 2023 में सर्वसम्मति से पारित हो चुका है। उन्होंने सवाल उठाया कि तीन साल बाद भी कानून लागू क्यों नहीं हुआ और इसे परिसीमन से क्यों जोड़ा जा रहा है। ALSO READ: IIT दिल्ली में PM मोदी का छात्रों को मंत्र, ‘जिंदगी की परीक्षा में सब आउट ऑफ सिलेबस’, चुनौतियों से मत घबराना
 

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि रिजिजू जी, संसदीय कार्य मंत्री होने के नाते आपसे बेहतर यह कौन जानता होगा – महिला आरक्षण विधेयक 2023 में ही सर्वसम्मति से पारित हो चुका है, कांग्रेस के पूर्ण समर्थन के साथ। सवाल यह है कि तीन साल बाद भी वह लागू क्यों नहीं हुआ और अब आप उसे परिसीमन से बेवजह क्यों जोड़ना चाहते हैं? 2023 का क़ानून लागू कीजिए। बिना किसी शर्त के। ALSO READ: 'क्या हम Gen Z की नब्ज नहीं पकड़ पाए?' राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' पर शशि थरूर का बड़ा बयान

 

राहुल के किस बयान ने रिजिजू को दी उम्मीद?

इससे पहले शनिवार को राहुल गांधी द्वारा महिलाओं की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बात किए जाने के बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस को महिला आरक्षण विधेयक का बिना शर्त समर्थन करने की चुनौती दी थी। राहुल गांधी ने अपने वीडियो में कहा था कि देश की राजनीति का मकसद 'लोगों को यह समझाना होना चाहिए कि महिलाओं की अभिव्यक्ति के बिना हमारा देश अधूरा और पिछड़ा हुआ है। रिजिजू ने राहुल गांधी के इस बयान को कांग्रेस की ओर से एक सकारात्मक संदेश बताया।

 

राहुल गांधी के बयान पर रिजिजू ने क्या प्रतिक्रिया दी?

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह कांग्रेस पार्टी की ओर से एक सकारात्मक संदेश लगता है। राहुल गांधी जी की महिलाओं के प्रति सोच में बदलाव साफ दिख रहा है। अब, मुझे उम्मीद है कि कांग्रेस पार्टी महिला आरक्षण विधेयक का बिना शर्त समर्थन करेगी।

 

गौरतलब है कि कांग्रेस और विपक्षी दलों ने महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन किया है, लेकिन वे परिसीमन की प्रक्रिया का विरोध करते रहे हैं।

‘देश को आपकी जरूरत है…’, CJP प्रोटेस्ट के बाद PM मोदी का Gen Z को बड़ा संदेश

PM Modi: नई दिल्ली में हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध-प्रदर्शन के बाद अपने पहले सार्वजनिक संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को देश के युवाओं की क्षमता और ताकत पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश को युवा पीढ़ी की जरूरत है। बता दें कि पीएम मोदी ने यह बात दिल्ली स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) के वार्षिक दीक्षांत समारोह में कही।

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में छात्रों से कहा, “हमें आप पर भरोसा है, और देश को आपकी जरूरत है।”

उन्होंने कहा कि हर पीढ़ी की देश के प्रति जिम्मेदारी होती है और युवाओं के लक्ष्यों में देश का सर्वांगीण विकास शामिल होना चाहिए। उन्होंने कहा, “आप सभी जानते हैं कि हर पीढ़ी को अपने समय की खास चुनौतियों का सामना करना पड़ता है और देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी निभानी पड़ती है… अगले 30 से 35 सालों में आप जो कुछ भी करेंगे, उसका असर ‘विकसित भारत’ की ओर हमारे सफर पर पड़ेगा। इसलिए, आपके हर फैसले का आधार यह भी होना चाहिए कि इससे देश को क्या फायदा होगा? इससे देश की कौन-सी जरूरतें पूरी होंगी?”

पीएम मोदी ने आगे कहा कि आज की तेजी से बदलती दुनिया में टेक्नोलॉजी अहम भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि जो लोग इन बदलावों के हिसाब से खुद को ढाल लेंगे, वे “आखिरकार जीतेंगे”।

उन्होंने कहा, “…ग्लोबल स्ट्रैटेजिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। ग्लोबल पावर बैलेंस हर पल बदल रहा है, और इसकी मुख्य वजह टेक्नोलॉजी में हो रही तेजी से तरक्की है। कोई भी पक्के तौर पर नहीं कह सकता कि अगले 20 या 30 सालों में दुनिया कैसी दिखेगी… दुनिया, टेक्नोलॉजी, इंडस्ट्री और प्रोफेशन, सभी में बदलाव आएंगे। लेकिन इन सबके बीच एक बात याद रखें: जो लोग सीखते रहेंगे, वे ही सफल होंगे।”

प्रधानमंत्री के संबोधन में Gen Z की झलक

स्काईरूट के विक्रम-1 रॉकेट के सफल लॉन्च का जिक्र करते हुए, प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार ने युवाओं को अपना योगदान देने के लिए कई रास्ते खोले हैं।

उन्होंने कहा, “हमने ऐसे कई रास्ते खोले हैं जिनसे हमारे युवा योगदान दे सकते हैं। नए सेक्टर खुले हैं। मैंने पहले भी स्पेस सेक्टर के बारे में बात की थी। आज वही स्पेस सेक्टर हमारे युवाओं के लिए आसमान की ऊंचाइयों को छूने का जरिया बन गया है।”

अपने संबोधन में Gen Z वाली बात जोड़ते हुए पीएम मोदी ने कहा: “आज हमारे युवा कह रहे हैं, ‘अपने परिवार में रॉकेट बनाने वाला मैं पहला व्यक्ति हूं’। आज हमारे युवा रॉकेट लॉन्च कर रहे हैं।”

पीएम मोदी ने आगे कहा कि देश का ड्रोन सेक्टर भी तेजी से बढ़ रहा है। आज ड्रोन का इस्तेमाल सिर्फ तकनीक के तौर पर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से लेकर दवाइयां पहुंचाने जैसे जरूरी कामों में भी किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि ड्रोन के बढ़ते इस्तेमाल से युवाओं के लिए नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं और यह सेक्टर आने वाले समय में देश की तरक्की में अहम भूमिका निभा सकता है।

बता दें कि पीएम मोदी का यह संबोधन ऐसे समय में आया है, जब हाल ही में NEET-UG 2026 से जुड़े पेपर लीक विवाद को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP ने विरोध-प्रदर्शन किया था। इस विवाद के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

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