Delhi Air Pollution Severe: दिल्ली की जहांगीरपुरी में AQI 452 पहुंचा, जानिए क्यों शहर में सबसे खराब हुई यहां की हवा

दिल्ली में वायु प्रदूषण की स्थिति लगातार चिंताजनक बनी हुई है। राजधानी के कई इलाकों में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में पहुंच चुकी है लेकिन जहांगीरपुरी में प्रदूषण का स्तर सबसे ज्यादा दर्ज किया गया है। बुधवार को यहां एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 452 तक पहुंच गया। इसे एयर पलूशन की गंभीर (Severe) कैटिगरी माना जाता है।

आपको बता दें कि जहांगीरपुरी में पिछले कुछ दिनों से लगातार प्रदूषण का स्तर ऊंचा बना हुआ है। यहां का 24 घंटे का औसत AQI भी लगातार बढ़ा है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक इलाके में औद्योगिक गतिविधियों से होने वाला उत्सर्जन, हवा की रफ्तार में कमी और प्रदूषकों को फैलने से रोकने वाली प्रतिकूल परिस्थितियां इसकी बड़ी वजह हो सकती हैं। एक्सपर्ट्स ने यह भी आशंका जताई है कि जहांगीरपुरी के एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन के पास स्थित एक ऊंची इमारत प्रदूषकों के उचित तरीके से फैलने में बाधा डाल सकती है। हालांकि प्रदूषण के लगातार बढ़े स्तर के पीछे किसी एक वजह को जिम्मेदार नहीं बताया गया है। इसके लिए स्थानीय उत्सर्जन और मौसम से जुड़ी परिस्थितियों के मिले-जुले असर की बात कही गई है।

जहांगीरपुरी में AQI 452, लगातार बढ़ रहा प्रदूषण

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक बुधवार दोपहर 2 बजकर 5 मिनट पर जहांगीरपुरी के मॉनिटरिंग स्टेशन पर AQI 452 दर्ज किया गया। यह गंभीर श्रेणी में आता है। पिछले कुछ दिनों के आंकड़े भी बताते हैं कि यहां प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ा है। जहांगीरपुरी में 31 अक्टूबर को 243 के स्तर पर रहा AQI अगले कुछ दिनों में तेजी से बढ़ा। रविवार को यह 378 और सोमवार को 436 तक पहुंच गया। मंगलवार को 24 घंटे का औसत AQI 462 दर्ज किया गया। बुधवार को दोपहर के समय भी यहां का AQI 452 रहा। पिछले कुछ दिनों से जहांगीरपुरी दिल्ली के उन प्रदूषण हॉटस्पॉट में शामिल है, जहां शहर के दूसरे मॉनिटरिंग स्टेशनों के मुकाबले सबसे अधिक AQI दर्ज किया जा रहा है।

जहांगीरपुरी में प्रदूषण बढ़ने की क्या है वजह?

जहांगीरपुरी में प्रदूषण के बढ़ते स्तर के पीछे कई कारण हो सकते हैं। Envirocatalysts के संस्थापक और लीड एनालिस्ट सुनील दहिया ने पीटीआई से बातचीत में इसके लिए तीन प्रमुख कारकों की ओर इशारा किया है। इनमें औद्योगिक उत्सर्जन, हवा की कम होती रफ्तार और प्रदूषकों के फैलाव में संभावित बाधा शामिल हैं। सुनील दहिया के मुताबिक जहांगीरपुरी के आसपास औद्योगिक गतिविधियां काफी ज्यादा हैं। उद्योगों में होने वाली दहन प्रक्रिया (Combustion) से प्रदूषकों का उत्सर्जन होता है, जिससे हवा में PM2.5 का स्तर बढ़ सकता है। उनका कहना है कि इलाके में औद्योगिक गतिविधियों के कारण होने वाला उत्सर्जन प्रदूषण के ऊंचे स्तर की एक प्रमुख वजह हो सकता है। जब पहले से ही प्रदूषण का स्तर अधिक हो और स्थानीय स्तर पर उत्सर्जन जारी रहे, तो हवा की गुणवत्ता और खराब हो सकती है।

प्रदूषण बढ़ने की दूसरी वजह पिछले कुछ दिनों में हवा की स्पीड में आई गिरावट बताई गई है। सुनील दहिया के मुताबिक हवा की रफ्तार कम होने से वातावरण में मौजूद प्रदूषकों को फैलने का पर्याप्त मौका नहीं मिल पा रहा है। पहले से प्रदूषण का स्तर ऊंचा होने और हवा का वेंटिलेशन ठीक नहीं रहने के कारण प्रदूषक एक ही क्षेत्र में जमा हो सकते हैं। इससे जहांगीरपुरी में प्रदूषण का स्तर लगातार ऊंचा बना रह सकता है। सुनील दहिया ने जहांगीरपुरी के एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन के पास मौजूद एक ऊंची इमारत की ओर भी ध्यान दिलाया है। उनके मुताबिक स्टेशन के एक तरफ स्थित यह इमारत प्रदूषकों के उचित तरीके से फैलने में रुकावट पैदा कर सकती है। अगर प्रदूषकों को फैलने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिलती, तो मॉनिटरिंग स्टेशन के आसपास उनका जमाव बढ़ सकता है।

दिल्ली का औसत AQI भी 378, हवा बहुत खराब श्रेणी में

जहांगीरपुरी में प्रदूषण का स्तर गंभीर श्रेणी में पहुंचने के साथ ही दिल्ली की समग्र वायु गुणवत्ता भी चिंताजनक बनी हुई है। बुधवार दोपहर 3 बजकर 5 मिनट पर राजधानी का औसत AQI 378 दर्ज किया गया। यह बहुत खराब (Very Poor) श्रेणी में आता है।

आपको बता दें कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मानकों के मुताबिक AQI को छह श्रेणियों में बांटा गया है। इनके आधार पर हवा की गुणवत्ता और प्रदूषण के स्तर का आकलन किया जाता है। 0-50 अच्छी (Good),

51-100 संतोषजनक (Satisfactory), 101-200 मध्यम (Moderate), 201-300 खराब (Poor), 301-400 बहुत खराब (Very Poor), 401-500 गंभीर (Severe).

दिल्ली में GRAP का दूसरा चरण लागू, प्रदूषण रोकने के लिए क्या हो रहे उपाय?

दिल्ली में फिलहाल ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का दूसरा चरण लागू है। यह तब लागू किया जाता है जब शहर की वायु गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में पहुंच जाती है। GRAP के दूसरे चरण के तहत 12 सूत्रीय कार्ययोजना के माध्यम से प्रदूषण पर नियंत्रण के उपाय किए जाते हैं। इसमें मुख्य रूप से सड़कों की सफाई, धूल नियंत्रण और निर्माण गतिविधियों से होने वाले प्रदूषण पर निगरानी बढ़ाने जैसे कदम शामिल हैं।

दिल्ली-NCR में GRAP-2 की पाबंदियां लागू, बेहद खराब श्रेणी में पहुंची हवा, AQI 324 दर्ज

दिल्ली-NCR में GRAP-2 की पाबंदियां लागू, बेहद खराब श्रेणी में पहुंची हवा, AQI 324 दर्ज

delhi pollution

दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण बढ़ने के बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने सोमवार को ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के दूसरे चरण यानी GRAP-2 के तहत पाबंदियां लागू कर दी हैं। राजधानी की हवा बेहद खराब (Very Poor) श्रेणी में पहुंच गई है। सोमवार को दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 324 दर्ज किया गया।

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CAQM के मुताबिक, दिल्ली का AQI 31 अक्टूबर को 117 था, जो मध्यम (Moderate) श्रेणी में आता है। इसके बाद 1 नवंबर को यह बढ़कर 261 पहुंच गया और हवा खराब (Poor) श्रेणी में दर्ज की गई। वहीं, 2 नवंबर को AQI में और बढ़ोतरी हुई और यह 324 पर पहुंच गया, जो बेहद खराब श्रेणी में है।

 

आयोग ने बताया कि प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों के कारण प्रदूषण के स्तर में तेजी से इजाफा हुआ है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में भी दिल्ली की वायु गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में बने रहने की आशंका है।

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क्या है GRAP-2 और क्यों लागू किया गया?

 

GRAP के दूसरे चरण को तब लागू किया जाता है, जब दिल्ली की हवा खराब से बेहद खराब श्रेणी की ओर बढ़ती है। इसका उद्देश्य प्रदूषण के स्रोतों पर नियंत्रण करना और हवा की गुणवत्ता को और बिगड़ने से रोकना है। इसके तहत सड़क की सफाई, पानी का छिड़काव, धूल नियंत्रण और यातायात से होने वाले प्रदूषण को कम करने जैसे कदम उठाए जाते हैं।

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लोगों को किन बातों का रखना चाहिए ध्यान?

 

प्रदूषण बढ़ने के दौरान खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी परेशानी वाले लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। सुबह और देर शाम बाहर व्यायाम करने से बचें। जरूरत पड़ने पर बाहर निकलते समय अच्छी गुणवत्ता वाला मास्क इस्तेमाल करें और आंखों में जलन, खांसी या सांस लेने में परेशानी होने पर चिकित्सकीय सलाह लें।

Delhi-NCR Pollution: दिवाली से पहले दिल्ली की हवा हुई ‘जहरीली’, GRAP-II की पाबंदियां लागू, इन चीजों पर लगी रोक

Delhi-NCR Pollution: दिवाली से पहले देश की राजधानी में बढ़ते प्रदूषण का स्तर को देखते हुए दिल्ली को GRAP के दूसरे चरण में शामिल कर दिया गया है। सोमवार को दिल्ली की हवा की गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में पहुंच गई। दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 310 से 324 के बीच दर्ज किया गया। इसके बाद अधिकारियों ने प्रदूषण पर काबू पाने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। दिवाली से पहले हवा को साफ रखने और प्रदूषण कम करने के लिए ये उपाय लागू किए गए है।

GRAP के दूसरे चरण के लागू होने से दिल्ली में निर्माण कार्यों, डीजल जनरेटर चलाने और वाहनों के इस्तेमाल पर सख्ती बढ़ गई है। वहीं इस दौरान स्कूल, ऑफिस, दुकानें और सार्वजनिक परिवहन सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी। आइए जानते हैं GRAP 2 में किन-किन पर चीजों पर रहेगी रोक।

अभी और खराब होगी दिल्ली की हवा

कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने 2 नवंबर को जारी आदेश में इस स्थिति का जिक्र किया। आयोग के मुताबिक, मौसम की खराब परिस्थितियों के कारण प्रदूषण का स्तर बढ़ा है। वहीं, IMD और IITM के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में भी दिल्ली की हवा की गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में बनी रह सकती है। फिलहाल ये पाबंदियां एहतियात के तौर पर लगाई गई हैं। दिवाली पर पूरी रोक नहीं है, लेकिन पटाखों के धुएं से प्रदूषण बढ़ने की आशंका है। इसलिए लोगों को प्रदूषण से जुड़े नियमों का पालन करना होगा।

कब लागू होता है GRAP 2

GRAP का दूसरा चरण तब लागू किया जाता , जब AQI 301 से 400 के बीच पहुंच जाता है। दिल्ली-NCR में इन पाबंदियों को लागू करने से पहले CAQM की विशेष समिति ने प्रदूषण के स्तर, मौसम की स्थिति और आने वाले दिनों के पूर्वानुमान की समीक्षा की। दिवाली से ठीक पहले लिए गए इस फैसले के पीछे मौसम की खराब स्थिति, पराली जलाने से निकलने वाला धुआं और पटाखों से बढ़ने वाले प्रदूषण की आशंका भी बड़ी वजह है।

इन चीजों पर होगी पाबंदी

प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए दिल्ली में धूल फैलाने वाले निर्माण और तोड़-फोड़ के कामों पर रोक लगा दी गई है। हालांकि, जरूरी सरकारी और बुनियादी ढांचे से जुड़े प्रोजेक्ट्स को कुछ शर्तों के साथ छूट मिलेगी। आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर भी पाबंदी रहेगी। इसके अलावा, 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक दिल्ली के बाहर रजिस्टर्ड नॉन-BS-VI गाड़ियों को राजधानी में चलाने या प्रवेश करने की अनुमति नहीं होगी। इसमें BS-IV और उससे पुरानी पेट्रोल-डीजल गाड़ियां भी शामिल हैं।

‘नो PUC, नो फ्यूल’ नियम लागू

दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए पेट्रोल पंपों पर ‘नो PUC, नो फ्यूल’ नियम भी लागू होगा। इसके तहत वैध प्रदूषण प्रमाणपत्र (PUC) नहीं होने पर गाड़ियों को पेट्रोल, डीजल और CNG नहीं मिलेगी। इसके अलावा, निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करने के लिए अधिकृत पार्किंग स्थलों पर 28 फरवरी 2027 तक पार्किंग शुल्क दोगुना कर दिया गया है। सड़कों पर धूल कम करने के लिए मशीनों से सफाई और पानी के छिड़काव का काम भी बढ़ाया जाएगा।

इलेक्ट्रिक और CNG वाहनों पर होगा प्रतिबंध

GRAP के दूसरे चरण में निजी वाहनों पर पूरी तरह पाबंदी नहीं लगाई गई है। दिल्ली में BS-VI गाड़ियां पहले की तरह चल सकेंगी, जबकि इलेक्ट्रिक और CNG वाहनों को भी कुछ प्रतिबंधों से छूट दी गई है। एंबुलेंस, दमकल और अन्य जरूरी सरकारी वाहनों को भी राहत मिलेगी। इसके अलावा, स्कूल, ऑफिस, दुकानें और सार्वजनिक परिवहन सामान्य रूप से चलते रहेंगे। जरूरी निर्माण और बुनियादी ढांचे से जुड़े काम भी विशेष अनुमति और धूल रोकने के नियमों का पालन करने पर जारी रखे जा सकेंगे।

GRAP 3 भी हो सकता है लागू

अगर दिल्ली में प्रदूषण का स्तर और बढ़ता है, तो GRAP के तीसरे चरण की पाबंदियां लागू की जा सकती हैं। यह चरण AQI के 401 से 450 के बीच पहुंचने पर लागू होता है, जबकि 450 से ऊपर जाने पर चौथा चरण लागू किया जाता है। इन चरणों में निर्माण कार्यों, वाहनों और ट्रैफिक पर और सख्ती बढ़ सकती है। साथ ही, स्कूलों और दफ्तरों के कामकाज पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे में GRAP का दूसरा चरण प्रदूषण की स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए शुरुआती चेतावनी के तौर पर काम करता है।

Diwali 2026: इस बार दिवाली पर होगी जमकर आतिशबाजी! सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में ग्रीन पटाखे जलाने की दी इजाजत

Diwali 2026: राजधानी में बढ़ते प्रदूषण के बीच सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में 7 और 8 नवंबर, 2026 को ‘ग्रीन पटाखे’ जलाने की अनुमति दे दी है। हालांकि, शीर्ष अदालत ने इसके लिए कुछ समय की पाबंदियां और अन्य शर्तें लागू की हैं। कोर्ट ने कहा कि 15 अक्टूबर, 2025 के अपने पुराने आदेश के अनुसार, ग्रीन पटाखे केवल सुबह 6 बजे से 7 बजे तक और रात 8 बजे से 10 बजे तक ही जलाए जा सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद अब राजधानी दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद और आसपास के NCR इलाकों में 7 और 8 नवंबर 2026 को ही ग्रीन पटाखे जलाए जा सकेंगे।

यह अनुमति ऐसे समय में दी गई है जब राजधानी की हवा दिवाली से पहले ही खराब होने लगी है। दिवाली के बाद प्रदूषण का स्तर और बढ़ने की आशंका है। सोमवार 2 नवंबर को इस सीजन में पहली बार राष्ट्रीय राजधानी का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) ‘बहुत खराब’ (very poor) कैटेगरी में पहुंच गया, जो सुबह 9 बजे 312 दर्ज किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि अस्पतालों, नर्सिंग होम, प्राथमिक और जिला स्वास्थ्य केंद्रों, वृद्धाश्रमों और ‘साइलेंस ज़ोन’ (शांत क्षेत्र) घोषित किए गए इलाकों के 300 मीटर के दायरे में कोई भी पटाखा नहीं जलाया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश की बड़ी बातें

  • सुप्रीम कोर्ट ने 15 अक्टूबर 2025 के अपने पहले के आदेश के अनुसार, दिल्ली-NCR में 7 और 8 नवंबर 2026 को सुबह 6 से 7 बजे और रात 8 से 10 बजे के बीच ‘ग्रीन पटाखे’ जलाने की अनुमति दी है। अदालत ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि दिल्ली-एनसीआर में 7 और 8 नवंबर को सुबह 6 से 7 बजे तथा रात 8 से 10 बजे तक पटाखे फोड़ने की अनुमति दी जाए।
  • दिल्ली-एनसीआर में अस्पतालों और वृद्धाश्रमों के 300 मीटर के दायरे में पटाखे फोड़ने पर प्रतिबंध रहेगा। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि अस्पतालों, नर्सिंग होम, प्राथमिक और जिला स्वास्थ्य केंद्रों, वृद्धाश्रमों और अधिसूचित ‘साइलेंस जोन’ के 300 मीटर के दायरे में कोई भी पटाखा नहीं जलाया जाएगा।
  • सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि इन जगहों और शैक्षणिक संस्थानों को ‘नो-क्रैकर जोन’ (पटाखा-मुक्त क्षेत्र) घोषित किया जाएगा। इन्हें स्पष्ट रूप से चिह्नित करके लोगों को इसकी जानकारी दी जाएगी।
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिन पटाखा निर्माताओं के पास वैध प्रमाण-पत्र (सर्टिफिकेशन) है, उन्हें ही केवल ‘ग्रीन पटाखे’ बनाने की अनुमति होगी। अदालत ने फिर दोहराया कि बेरियम वाले पटाखों, और साथ ही उन पटाखों के इस्तेमाल की अनुमति नहीं होगी जिन्हें CSIR-NEERI ने ‘ग्रीन’ पटाखों के रूप में मंजूरी नहीं दी है।
  • देश की सबसे बड़ी अदालत ने दिल्ली-एनसीआर के अधिकारियों को अवैध और परम्परागत पटाखों की आपूर्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर पहले की तरह पूर्ण प्रतिबंध नौ नवंबर से फिर से लागू हो जाएगा।

‘पटाखों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के पक्ष में नहीं’

इस मामले पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा था कि वह पटाखों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के पक्ष में नहीं है। हालांकि जब तक अधिकारी जमीनी स्तर पर आदेशों को लागू नहीं करते, तब तक हर साल आदेश और दिशानिर्देश जारी करने का कोई मतलब नहीं है। सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने पीठ को वायु प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली सरकार और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी दी।

पीठ ने आदेशों को लागू करने पर जोर देते हुए कहा, “जब तक आप जमीनी स्तर पर उन्हें लागू नहीं करते, तब तक आदेश और निर्देश जारी करने का कोई मतलब नहीं है। ऐसा नहीं होने पर यह मजाक बनकर रह जाता है।” पीठ ने कहा कि अधिकारियों को इस मुद्दे को गंभीरता से लेकर कार्रवाई करनी होगी। उसने कहा, “आपको इस पर वास्तव में नियंत्रण करना होगा। हम हर साल संतुलन बनाने की कोशिश करते हैं। लेकिन सभी का सहयोग नहीं मिलने पर ऐसा नहीं किया जा सकता।”

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पीठ ने भाटी से कहा, “हम जनता की भावनाओं को भी समझते हैं। हम पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन हमें बहुत सख्त रुख अपनाने के लिए मजबूर न करें।” पीठ ने जन जागरूकता फैलाने के लिए प्रमुख हस्तियों की मदद लेने का सुझाव भी दिया।केंद्र ने पीठ को बताया कि पटाखों में बेरियम के इस्तेमाल से संबंधित मुद्दे पर उसके स्तर पर आंतरिक विचार-विमर्श जारी है। भाटी ने विचार-विमर्श पूरा करने के लिए तीन सप्ताह का समय देने का अनुरोध किया।

Delhi AQI Today: दिवाली से पहले दिल्ली की हवा में घुलने लगा जहर! पारा गिरा तो प्रदूषण ने दी टेंशन, AQI 349 तक पहुंचा

Delhi AQI Today: दिवाली का त्योहार करीब आते ही देश की राजधानी दिल्ली की हवा एक बार फिर जहरीली होने लगी है। राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ रहा है। सोमवार (2 नवंबर) सुबह दिल्ली के ITO इलाके में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 349 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ कैटेगरी में आता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, बीते कुछ दिनों में दिल्ली की हवा की गुणवत्ता में तेजी से गिरावट आई है। पिछले सप्ताह हुई बारिश और तेज हवाओं से लोगों को प्रदूषण से थोड़ी राहत मिली थी। लेकिन अब यह राहत खत्म होती दिखाई दे रही है। दिवाली से ठीक पहले प्रदूषण का बढ़ना राजधानी के लोगों के लिए चिंता का विषय बन गया है।

कितना बिगड़ा हवा का हाल?

CPCB के मुताबिक, सोमवार सुबह ITO में AQI 349 दर्ज किया गया। वायु गुणवत्ता सूचकांक के मानकों के अनुसार, 301 से 400 के बीच AQI को ‘बेहद खराब’ (very poor) कैटेगरी में रखा जाता है। वहीं, 201 से 300 के बीच का AQI ‘खराब’ कैटेगरी में आता है। रविवार को दिल्ली का 24 घंटे का औसत AQI 261 दर्ज किया गया था। हालांकि, शाम होते-होते प्रदूषण का स्तर और बढ़ गया।

रविवार शाम 6 बजे AQI 272, रात 10 बजे 287 और रात 11 बजे तक 290 पहुंच गया था। रविवार का औसत AQI 17 अप्रैल के बाद सबसे अधिक रहा। इससे पहले 17 अप्रैल को दिल्ली में AQI 263 दर्ज किया गया था। शुक्रवार को बारिश और तेज हवाओं के कारण दिल्ली की हवा में काफी सुधार हुआ था और AQI गिरकर 60 पर पहुंच गया था। यह ‘संतोषजनक’ कैटेगरी में आता है। लेकिन महज दो दिनों में हालात फिर बिगड़ गए।

दिल्ली के इन इलाकों में सबसे ज्यादा प्रदूषण

रविवार को दिल्ली के 59 में से 57 वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों से आंकड़े उपलब्ध हुए। इनमें से 22 केंद्रों पर हवा की गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ कैटेगरी में दर्ज की गई। इन आंकड़ों से साफ है कि दिल्ली के कई प्रमुख इलाकों में प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ चुका है।

प्रमुख प्रदूषित इलाकों का AQI इस प्रकार रहा:-

इलाका                                                                                                                                         AQI

जहांगीरपुरी                                                                                                                                   378

रोहिणी                                                                                                                                           352

पंजाबी बाग                                                                                                                                     351

मुंडका                                                                                                                                            337

आरके पुरम                                                                                                                                    335

चांदनी चौक                                                                                                                                    328

PM2.5 बना प्रदूषण की सबसे बड़ी वजह

दिल्ली के अधिकांश निगरानी केंद्रों पर PM2.5 प्रमुख प्रदूषण के रूप में सामने आया। कुल 57 केंद्रों में से 50 पर PM2.5 का स्तर सबसे अधिक प्रभावी रहा। जबकि बाकी सात केंद्रों पर PM10 प्रमुख प्रदूषक था। PM2.5 बेहद सूक्ष्म कण होते हैं, जो सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंच सकते हैं। इनका लंबे समय तक संपर्क स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को अधिक सावधानी बरतने की जरूरत होती है।

क्या दिवाली तक और बिगड़ेगी दिल्ली की हवा?

केंद्र सरकार के एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम (AQEWS) के पूर्वानुमान ने भी चिंता बढ़ा दी है। इसके मुताबिक, सोमवार और मंगलवार को दिल्ली की हवा ‘खराब’ कैटेगरी में रह सकती है। जबकि बुधवार तक इसके ‘बेहद खराब’ कैटेगरी में पहुंचने की आशंका जताई गई है। अगले छह दिनों के पूर्वानुमान में भी दिल्ली की वायु गुणवत्ता ‘खराब’ से ‘बेहद खराब’ कैटेगरी के बीच रहने की आशंका जताई गई है। ऐसे में दिवाली से पहले राजधानी के लोगों को प्रदूषण से राहत मिलने की उम्मीद कम दिखाई दे रही है।

पराली जलाने से बढ़ा प्रदूषण का योगदान

दिल्ली के प्रदूषण में पराली जलाने का योगदान भी बढ़ा है। दिल्ली की वायु गुणवत्ता प्रबंधन से जुड़े डिसीजन सपोर्ट सिस्टम के आंकड़ों के अनुसार, रविवार को प्रदूषण में पराली जलाने का योगदान बढ़कर 18.57 प्रतिशत हो गया। इससे एक दिन पहले शनिवार को यह आंकड़ा महज 5.33 प्रतिशत था। यानी एक ही दिन में पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण का योगदान काफी बढ़ गया।

मौसम भी बन रहा प्रदूषण बढ़ने की वजह

दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने के पीछे मौसम में बदलाव भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है। तापमान में गिरावट, हवा की स्पीड कम होना और कोहरे जैसी परिस्थितियां प्रदूषक कणों को वातावरण में निचली सतह के करीब रोक सकती हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, रविवार को दिल्ली का न्यूनतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 1.9 डिग्री कम था। कम तापमान और धीमी हवाओं के कारण प्रदूषक तत्व आसानी से वातावरण से बाहर नहीं निकल पाते। यही वजह है कि दिल्ली में सुबह और रात के समय प्रदूषण का असर अधिक महसूस हो सकता है।

दिल्ली-NCR के लोगों के लिए बढ़ी चिंता

दिवाली से पहले दिल्ली की हवा का लगातार खराब होना स्वास्थ्य के लिहाज से चिंता बढ़ा रहा है। अगर प्रदूषण का स्तर इसी तरह बढ़ता रहा, तो आने वाले दिनों में लोगों को और मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। इस बीच दिल्ली प्रशासन ने ‘विंटर एक्शन प्लान’ के पहले दिन 68.4 लाख रुपये का जुर्माना और पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क लगाया। इस दौरान लगभग 15,000 गाड़ियों की जांच की गई। इनमें से सीमावर्ती इलाकों से 1,539 वाहनों को वापस लौटा दिया गया और पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट (PUCC) के नियमों का उल्लंघन करने पर 566 वाहनों का चालान काटा गया।

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Delhi Pollution: बॉर्डर पर सख्ती, इन गाड़ियों की एंट्री पर लगा बैन; दिल्ली जाने से पहले जान लें नए नियम

Delhi Pollution: बॉर्डर पर सख्ती, इन गाड़ियों की एंट्री पर लगा बैन; दिल्ली जाने से पहले जान लें नए नियम

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राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण पर लगाम कसने के लिए प्रशासन पूरी तरह सख्त हो गया है। रविवार से दिल्ली की सीमाओं (बॉर्डर्स) पर कड़े प्रतिबंध लागू कर दिए गए हैं, जिसके तहत दिल्ली के बाहर रजिस्टर्ड गैर BS-6 वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है। यह सख्ती अगले तीन महीनों यानी जनवरी 2027 तक जारी रहेगी।

गौरतलब है कि राजधानी दिल्ली की हवा एक बार फिर जहरीली हो गई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, मंगलवार सुबह अक्षरधाम मंदिर के आसपास के इलाके में एयर क्वालिटी इंडेक्स 349 और इंडिया गेट तथा जनपथ के आसपास के इलाके में AQI 335 पर पहुंचा। इसे ‘बहुत खराब’ की श्रेणी में रखा गया है।

 

पुलिस ने दिखाई सख्ती

दिल्ली और गुरुग्राम पुलिस ने संयुक्त रूप से बॉर्डर्स पर मोर्चा संभाल लिया। नियमों का सख्ती से पालन कराने के लिए वाहनों की सघन जांच शुरू कर दी गई है और जगह-जगह बैरिकेडिंग कर दी गई है। गुरुग्राम यातायात पुलिस की पांच विशेष टीमें दिल्ली-जयपुर हाईवे पर स्थित सरहौल बॉर्डर, कापसहेड़ा, आया नगर, रजोकरी और बजघेड़ा बॉर्डर के साथ-साथ ग्वाल पहाड़ी पर तैनात की गई हैं।

 

मानेसर में पचगांव के पास भी एक विशेष नाका लगाया गया है। यहां दूसरे राज्यों से आने वाले कमर्शियल वाहनों को रोककर KMP एक्सप्रेसवे के रास्ते आगे भेजा जा रहा है। 2020 से पहले के भारी वाहनों को भी यहीं रोककर वैकल्पिक मार्गों से जाने की सलाह दी जा रही है।
 

ट्रैफिक की रफ्तार हुई धीमी, लंबी कतारें

बॉर्डर्स पर लगातार चल रहे चेकिंग अभियान की वजह से यातायात की रफ्तार धीमी पड़ गई है। कई जगहों पर वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं और चालकों को जांच प्रक्रिया पूरी होने के लिए काफी इंतजार करना पड़ रहा है। हालांकि, रविवार होने और ऑफिस बंद रहने के कारण भीषण जाम जैसी स्थिति से राहत रही और सुबह के वक्त सड़कों पर दबाव कम दिखा।

 

जनवरी 2027 तक लागू रहेंगे नियम

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, यह पाबंदियां जनवरी 2027 तक यानी पूरे तीन महीने लागू रहेंगी। नए नियमों के तहत 1 नवंबर से 31 जनवरी 2027 तक दिल्ली में केवल BS-6, CNG और इलेक्ट्रिक (EV) वाहनों को ही प्रवेश की अनुमति होगी। बिना वैध पीयूसी (PUC) सर्टिफिकेट के किसी भी वाहन को दिल्ली में एंट्री नहीं मिलेगी।

 

प्रशासन की इस सख्ती के चलते अगले तीन महीनों तक दिल्ली-NCR में आवाजाही करने वाले वाहन चालकों को कड़ी जांच और परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

Top News 2 November: चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ अलर्ट, दिल्ली-एनसीआर की हवा ‘बहुत खराब’, कुशीनगर सड़क हादसा समेत आज की 5 बड़ी खबरें

Top News 2 November: चक्रवाती तूफान 'मुरासु' अलर्ट, दिल्ली-एनसीआर की हवा 'बहुत खराब', कुशीनगर सड़क हादसा समेत आज की 5 बड़ी खबरें

top news 2 november

Top News 2 November : भीषण चक्रवाती तूफान में बदला ‘मुरासु’, दिल्ली-एनसीआर की हवा ‘बहुत खराब’, CBI महादेव एप सट्टेबाजी सिंडिकेट के मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत लाई, कुशीनगर में सड़क हादसे में 6 लोगों की मौत, फ्लोरिडा विमान हादसे में गई 9 लोगों की जान। 2 नवंबर की बड़ी खबरें…

 

भीषण चक्रवाती तूफान में बदला ‘मुरासु’

बंगाल की खाड़ी में उठा चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ (Murasu) और अधिक भयानक रूप लेते हुए एक भीषण चक्रवाती तूफान में बदल गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, यह तूफान 20 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ रहा है। चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ 2 नवंबर की आधी रात (रात 11:30 बजे) से 3 नवंबर तड़के (सुबह 4:00 बजे) के बीच आंध्र प्रदेश के दक्षिणी तट को पार करेगा। यह नेल्लोर और नरसापुर के बीच, ओंगोल के करीब, भीषण चक्रवाती तूफान के रूप में तट से टकराएगा। ALSO READ: भीषण चक्रवाती तूफान में बदला ‘मुरासु’, आंध्र प्रदेश तट से कब टकराएगा; इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

 

दिल्ली-एनसीआर की हवा ‘बहुत खराब’

राजधानी दिल्ली की हवा एक बार फिर जहरीली हो गई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, अक्षरधाम मंदिर के आसपास के इलाके में एयर क्वालिटी इंडेक्स 349 और इंडिया गेट तथा जनपथ के आसपास के इलाके में AQI 335 पर पहुंचा। इसे ‘बहुत खराब’ की श्रेणी में रखा गया है। 

 

सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत लाई CBI

महादेव एप सट्टेबाजी सिंडिकेट से जुड़े एक मामले में सीबीआई और अन्य जांच एजेंसी को बड़ी सफलता मिली है। मुख्य आरोपी और ऐप के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत प्रत्यार्पित किया गया है। मेडिकल जांच के बाद CBI उसे रायपुर ले जाएगी। ALSO READ: महादेव ऐप केस में बड़ा एक्शन, मुख्य सरगना सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत लाई CBI, क्या है महादेव सट्टेबाजी कांड?

 

कुशीनगर में सड़क हादसा, 6 मृत

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। हाटा कोतवाली क्षेत्र में एक पेट्रोल पंप के पास वैन और ट्रेलर की आमने-सामने की भीषण टक्कर में 6 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है, जबकि एक किशोर गंभीर रूप से घायल है। यह सभी लोग एक रिश्तेदार के तिलक समारोह से देर रात अपने घर लौट रहे थे। ALSO READ: कुशीनगर हादसा: तिलक समारोह से लौट रहे 6 लोगों की दर्दनाक सड़क हादसे में मौत, उड़े वैन के परखच्चे

 

फ्लोरिडा में बड़ा विमान हादसा

अमेरिका के फ्लोरिडा में रविवार को एक निजी बिजनेस जेट रिहायशी इलाके में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में विमान में सवार सभी नौ लोगों की मौत हो गई। टक्कर के बाद विमान में भीषण आग लग गई और आसमान में आग का बड़ा गोला दिखाई दिया। विमान सड़क के पास गिरा, जहां जमीन पर बड़ा गड्ढा बन गया।

Delhi Air Pollution: दिल्ली-NCR में प्रदूषण को लेकर सरकार सख्त, 5 नवंबर से लागू होंगी ये पाबंदियां

दिल्ली-NCR में सर्दियों की शुरुआत के साथ प्रदूषण की समस्या भी शुरू हो गई है। वहीं राजधानी में पिछले कुछ दिनों से AQI 200 के पार पहुंच गया था। वहीं 30 अक्टूबर शुक्रवार को बारिश की वजह से दिल्ली की हवा में थोड़ा सुधार हुआ और AQI मध्यम श्रेणी में दर्ज किया गया। इससे पहले 28 और 29 अक्टूबर को AQI 200 के पार पहुंच गया था, जिससे हवा खराब श्रेणी में आ गई थी। वहीं 31 अक्टूबर तक हवा की स्थिति ठीक रहेगी, लेकिन 1 नवंबर से प्रदूषण फिर बढ़ सकता है। इसके बाद अगले छह दिनों तक हवा की गुणवत्ता और खराब होने की आशंका है।

केंद्र सरकार ने उठाए सख्त कदम

इसी बीच दिल्ली-NCR में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए केंद्र सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। 5 से 20 नवंबर तक निर्माण कार्यों पर रोक लगाने के साथ सरकारी और निजी दफ्तरों में 50 फीसदी कर्मचारियों को ही बुलाने का निर्देश दिया गया है। वहीं, बाकी कर्मचारियों को घर से काम करना होगा, ताकि बढ़ते प्रदूषण पर काबू पाया जा सके। सरकार ने पाबंदियां लगाने की वजह बताते हुए कहा कि, पिछले कई सालों के आंकड़ों के अनुसार, नवंबर के मध्य में दिल्ली-NCR में प्रदूषण सबसे ज्यादा बढ़ जाता है। इस दौरान कई बार हवा की गुणवत्ता बेहद खराब हो जाती है और AQI गंभीर से भी ज्यादा खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है। ऐसे में लोगों को प्रदूषण से बचाने और हवा की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए पहले से ही जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

सरकार ने दिया ये आदेश

आदेश में कहा गया कि हर साल नवंबर के दौरान प्रदूषण बढ़ने का यह सिलसिला दिखाता है कि हवा की गुणवत्ता ज्यादा खराब होने से पहले और उस दौरान प्रदूषण फैलाने वाले कारणों को कम करने के लिए समय रहते जरूरी कदम उठाना बेहद जरूरी है। सरकार ने कुछ जरूरी कामों को इस रोक से बाहर रखा है। इनमें रेलवे, मेट्रो, एयरपोर्ट, अंतरराज्यीय बस अड्डों, अस्पतालों, पानी की सप्लाई और सफाई से जुड़े निर्माण कार्य शामिल हैं। इसके अलावा, राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा से जुड़े कामों और देश के लिए अहम मानी जाने वाली परियोजनाओं को भी जारी रखने की अनुमति दी गई है।

निर्माण कार्यों पर लगी रोक

सरकार ने कुछ जरूरी निर्माण कार्यों को इस रोक से छूट दी है। इनमें रेलवे, मेट्रो, एयरपोर्ट, अंतरराज्यीय बस अड्डे, अस्पताल, पानी की सप्लाई और सफाई से जुड़े काम शामिल हैं। इसके अलावा, राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा और देश के लिए जरूरी परियोजनाओं का काम भी जारी रहेगा। हालांकि, हाईवे, सड़क, फ्लाईओवर, ओवरब्रिज, बिजली की लाइनें, पाइपलाइन और दूरसंचार से जुड़े निर्माण कार्यों पर रोक लागू रहेगी। वहीं, वर्क फ्रॉम होम के नियम दिल्ली के साथ-साथ आसपास के पांच जिलों गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर में भी लागू होंगे। इन इलाकों के सरकारी और निजी दफ्तरों को 50 फीसदी कर्मचारियों के साथ काम करना होगा, जबकि बाकी कर्मचारी घर से काम करेंगे।

वहीं जरूरी सेवाओं और ऐसे औद्योगिक क्षेत्रों को इस नियम से छूट दी गई है, जहां कर्मचारियों का घर से काम करना संभव नहीं है। वहीं, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को दिल्ली-NCR में प्रदूषण फैलाने वाले नियमों का उल्लंघन करने वाली औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

Delhi Air Quality: लगातार तीसरे भी खराब रही दिल्ली-NCR की हवा, अब सरकार ने उठाया ये बड़ा कदम

दिल्ली में एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी AQI लगातार तीसरे दिन भी खराब श्रेणी में दर्ज की गई। ताजा आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स 180 रहा। दशहरे के बाद शहर में प्रदूषण बढ़ गया है। धुएं और मौसम की खराब स्थिति के कारण हवा की गुणवत्ता पर असर पड़ा है। इस सप्ताह की शुरुआत में ही दिल्ली की हवा खराब श्रेणी में पहुंच गई थी। इसके बाद एयर क्वालिटी मैनेजमेंट आयोग ने दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए कई फेज में चलने वाले एक्शन प्लान के पहले फेज को लागू कर दिया। इसका उद्देश्य प्रदूषण को नियंत्रित करना और एयर क्वालिटी इंडेक्स को और खराब होने से रोकना है।

जारी रहेंगी पाबंदियां

दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण पर काबू पाने के लिए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (ग्रैप) का पहला चरण लागू रहेगा। प्रदूषण कम करने के लिए अधिकारी लगातार जरूरी कदम उठा रहे हैं। इस चरण के तहत सड़कों की धूल पर नियंत्रण, निर्माण और तोड़फोड़ से जुड़ी गतिविधियों की निगरानी, कचरे का सही प्रबंधन और वाहनों से निकलने वाले धुएं को कम करने पर ध्यान दिया जाएगा। इन उपायों का मकसद प्रदूषण को बढ़ने से रोकना और हवा की गुणवत्ता में सुधार करना है।

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री ने दिया निर्देश

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए सरकार ने इसे नियंत्रित करने के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे प्रदूषण से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों के लिए अलग-अलग कार्ययोजना तैयार करें। इन योजनाओं में प्रदूषण के कारणों की पहचान करने, संबंधित विभागों की जिम्मेदारी तय करने और सुधार के लिए समय सीमा निर्धारित करने पर जोर दिया जाएगा। समीक्षा बैठक के दौरान सिरसा ने अधिकारियों से कहा कि वे वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) के आंकड़ों के आधार पर स्थानीय स्तर पर प्रदूषण के स्रोतों का पता लगाएं।

कार्रवाई करने का दिया निर्देश

सिरसा ने कहा कि प्रदूषण फैलने के कारणों की पहचान करके मौके पर ही कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि हर विभाग के पास काम करने की स्पष्ट योजना और उसे पूरा करने की समय सीमा होनी चाहिए। साथ ही, सभी विभागों को अपने काम के नतीजों की जिम्मेदारी भी लेनी होगी। उन्होंने संबंधित एजेंसियों को सड़कों और सार्वजनिक जगहों से अतिक्रमण हटाने, गड्ढों की मरम्मत करने, सड़क किनारे खुली मिट्टी को ढकने या उसका उचित उपचार करने और धूल वाली जगहों पर नियमित रूप से पानी छिड़कने के निर्देश दिए। इन कदमों का मकसद धूल से होने वाले प्रदूषण को कम करना है।

सबसे ज्यादा इस वजह से होता प्रदूषण

सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में वायु प्रदूषण की सबसे बड़ी वजह परिवहन है। कुल प्रदूषण में इसकी हिस्सेदारी 20.3 प्रतिशत रही। इसके बाद घरों से होने वाले प्रदूषण का हिस्सा 5.2 प्रतिशत, उद्योगों का 4.2 प्रतिशत और निर्माण कार्यों का 2.6 प्रतिशत रहा। वहीं, ऊर्जा क्षेत्र की हिस्सेदारी 2 प्रतिशत, कचरा जलाने की 1.8 प्रतिशत और सड़कों की धूल की 1.4 प्रतिशत रही। अन्य स्रोतों से होने वाला प्रदूषण 1.3 प्रतिशत दर्ज किया गया।

लोगों से की ये अपील

सिरसा ने कहा कि दिल्ली की हवा को साफ रखने के लिए सरकार की ओर से कार्रवाई करने के साथ-साथ लोगों का सहयोग भी जरूरी है। उन्होंने लोगों से कचरा जलाने से बचने और निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करने की अपील की, ताकि वायु प्रदूषण पर काबू पाया जा सके। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे कचरा न जलाएं, सड़कों पर गंदगी न फैलाएं और अपने वाहनों के प्रदूषण नियंत्रण (पीयूसी) प्रमाणपत्र की वैधता बनाए रखें।

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