Delhi Air Quality: लगातार तीसरे भी खराब रही दिल्ली-NCR की हवा, अब सरकार ने उठाया ये बड़ा कदम

दिल्ली में एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी AQI लगातार तीसरे दिन भी खराब श्रेणी में दर्ज की गई। ताजा आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स 180 रहा। दशहरे के बाद शहर में प्रदूषण बढ़ गया है। धुएं और मौसम की खराब स्थिति के कारण हवा की गुणवत्ता पर असर पड़ा है। इस सप्ताह की शुरुआत में ही दिल्ली की हवा खराब श्रेणी में पहुंच गई थी। इसके बाद एयर क्वालिटी मैनेजमेंट आयोग ने दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए कई फेज में चलने वाले एक्शन प्लान के पहले फेज को लागू कर दिया। इसका उद्देश्य प्रदूषण को नियंत्रित करना और एयर क्वालिटी इंडेक्स को और खराब होने से रोकना है।

जारी रहेंगी पाबंदियां

दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण पर काबू पाने के लिए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (ग्रैप) का पहला चरण लागू रहेगा। प्रदूषण कम करने के लिए अधिकारी लगातार जरूरी कदम उठा रहे हैं। इस चरण के तहत सड़कों की धूल पर नियंत्रण, निर्माण और तोड़फोड़ से जुड़ी गतिविधियों की निगरानी, कचरे का सही प्रबंधन और वाहनों से निकलने वाले धुएं को कम करने पर ध्यान दिया जाएगा। इन उपायों का मकसद प्रदूषण को बढ़ने से रोकना और हवा की गुणवत्ता में सुधार करना है।

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री ने दिया निर्देश

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए सरकार ने इसे नियंत्रित करने के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे प्रदूषण से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों के लिए अलग-अलग कार्ययोजना तैयार करें। इन योजनाओं में प्रदूषण के कारणों की पहचान करने, संबंधित विभागों की जिम्मेदारी तय करने और सुधार के लिए समय सीमा निर्धारित करने पर जोर दिया जाएगा। समीक्षा बैठक के दौरान सिरसा ने अधिकारियों से कहा कि वे वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) के आंकड़ों के आधार पर स्थानीय स्तर पर प्रदूषण के स्रोतों का पता लगाएं।

कार्रवाई करने का दिया निर्देश

सिरसा ने कहा कि प्रदूषण फैलने के कारणों की पहचान करके मौके पर ही कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि हर विभाग के पास काम करने की स्पष्ट योजना और उसे पूरा करने की समय सीमा होनी चाहिए। साथ ही, सभी विभागों को अपने काम के नतीजों की जिम्मेदारी भी लेनी होगी। उन्होंने संबंधित एजेंसियों को सड़कों और सार्वजनिक जगहों से अतिक्रमण हटाने, गड्ढों की मरम्मत करने, सड़क किनारे खुली मिट्टी को ढकने या उसका उचित उपचार करने और धूल वाली जगहों पर नियमित रूप से पानी छिड़कने के निर्देश दिए। इन कदमों का मकसद धूल से होने वाले प्रदूषण को कम करना है।

सबसे ज्यादा इस वजह से होता प्रदूषण

सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में वायु प्रदूषण की सबसे बड़ी वजह परिवहन है। कुल प्रदूषण में इसकी हिस्सेदारी 20.3 प्रतिशत रही। इसके बाद घरों से होने वाले प्रदूषण का हिस्सा 5.2 प्रतिशत, उद्योगों का 4.2 प्रतिशत और निर्माण कार्यों का 2.6 प्रतिशत रहा। वहीं, ऊर्जा क्षेत्र की हिस्सेदारी 2 प्रतिशत, कचरा जलाने की 1.8 प्रतिशत और सड़कों की धूल की 1.4 प्रतिशत रही। अन्य स्रोतों से होने वाला प्रदूषण 1.3 प्रतिशत दर्ज किया गया।

लोगों से की ये अपील

सिरसा ने कहा कि दिल्ली की हवा को साफ रखने के लिए सरकार की ओर से कार्रवाई करने के साथ-साथ लोगों का सहयोग भी जरूरी है। उन्होंने लोगों से कचरा जलाने से बचने और निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करने की अपील की, ताकि वायु प्रदूषण पर काबू पाया जा सके। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे कचरा न जलाएं, सड़कों पर गंदगी न फैलाएं और अपने वाहनों के प्रदूषण नियंत्रण (पीयूसी) प्रमाणपत्र की वैधता बनाए रखें।

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Delhi Pollution: दशहरे के जश्न के बाद दिल्ली की हवा ‘खराब’ श्रेणी में, AQI 238 पर पहुंचा, GRAP-1 लागू

Delhi Pollution: दशहरे के जश्न के बाद दिल्ली की हवा एक बार फिर बिगड़ने लगी है। बुधवार को राजधानी का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) बढ़कर ‘खराब’ श्रेणी में पहुंच गया। हवा की गुणवत्ता में आई इस गिरावट को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने दिल्ली में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के पहले चरण यानी स्टेज-1 को लागू कर दिया है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, बुधवार सुबह 10 बजे दिल्ली का AQI 238 दर्ज किया गया। इस सीजन में यह पहला मौका है, जब राजधानी की हवा ‘खराब’ श्रेणी में पहुंची है। इससे एक दिन पहले यानी मंगलवार दोपहर AQI 179 था। इस तरह महज एक दिन में प्रदूषण का स्तर 59 अंक बढ़ गया।

दिल्ली के 59 में से 56 एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशनों से मिले आंकड़ों के मुताबिक, जहांगीरपुरी और पूसा में हवा की गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ श्रेणी में पहुंच गई। यहां AQI क्रमशः 308 और 314 दर्ज किया गया। वहीं, आनंद विहार समेत 16 मॉनिटरिंग स्टेशनों पर हवा की गुणवत्ता ‘मध्यम’ श्रेणी में रही।

GRAP की पाबंदियां क्यों लगाई जाती हैं?

दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने पर सिर्फ हवा की गुणवत्ता के आंकड़ों पर नजर नहीं रखी जाती, बल्कि इसे काबू करने के लिए कई तरह के कदम भी उठाए जाते हैं। इसी मकसद से ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) लागू किया जाता है। इसके तहत प्रदूषण का स्तर बढ़ने के साथ पाबंदियां भी सख्त होती जाती हैं।

GRAP को प्रदूषण की गंभीरता के आधार पर चार चरणों में बांटा गया है। AQI 201 से 300 के बीच होने पर स्टेज-1 (खराब), 301 से 400 के बीच स्टेज-2 (बेहद खराब), 401 से 450 के बीच स्टेज-3 (गंभीर) और 450 से ऊपर होने पर स्टेज-4 (गंभीर प्लस) लागू किया जाता है।

GRAP के स्टेज-1 के तहत, प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कई उपाय किए जाते हैं। इनमें धूल को रोकने के लिए नियमित रूप से सड़कों की सफाई और पानी का छिड़काव, निर्माण स्थलों पर धूल का बेहतर प्रबंधन, और कचरे का उचित निपटान शामिल हैं। इसके अलावा, प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की जांच, बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन, और उद्योगों, बिजली संयंत्रों तथा ईंट भट्ठों से होने वाले उत्सर्जन को कम करने के कदम भी उठाए जाते हैं।

मौसम में बदलाव भी बढ़ा रहा प्रदूषण

दिल्ली की हवा खराब होने के पीछे मौसम में हो रहे बदलाव भी एक वजह हैं। तापमान में गिरावट और हवा की रफ्तार में उतार-चढ़ाव के कारण प्रदूषक कण वातावरण में आसानी से फैल नहीं पाते। ऐसे में ये हवा में जमा होने लगते हैं और प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है।

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