Delhi AQI today: दिल्ली का AQI पहुंचा 480 के पार, कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज

Delhi AQI today: गुरुवार सुबह दिल्ली की हवा की गुणवत्ता ‘खतरनाक’ (hazardous) श्रेणी में बनी रही। सुबह 8:01 बजे कुल वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 482 दर्ज किया गया, जबकि राष्ट्रीय राजधानी के कई हिस्सों में प्रदूषण का स्तर ‘गंभीर’ (severe) बना रहा।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, सात निगरानी केंद्रों (monitoring stations) पर AQI का स्तर 400 से ऊपर दर्ज किया गया, जो इसे ‘गंभीर’ श्रेणी में रखता है। जहांगीरपुरी सबसे ज्यादा प्रभावित इलाका रहा, जहां AQI 459 दर्ज किया गया। इसके बाद पंजाबी बाग में सबसे अधिक AQI 446 दर्ज किया गया, इसके बाद नरेला में 434, रोहिणी में 431, आरके पुरम में 416, बवाना में 412, दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस में 408 और पटपड़गंज में 405 AQI दर्ज किया गया।

कई अन्य इलाकों में हवा की गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ (very poor) श्रेणी में रही। ओखला फेज-2 और इंडिया गेट दोनों जगह AQI 399 दर्ज किया गया, इसके बाद ITO में 397, द्वारका सेक्टर 8 में 396, चांदनी चौक में 356 और वसुंधरा एन्क्लेव में 330 AQI रहा।

आनंद विहार में AQI 293 दर्ज किया गया, जबकि IMD लोधी रोड स्टेशन पर यह 268 रहा; ये दोनों ही ‘खराब’ (poor) श्रेणी में आते हैं। दिल्ली में हवा की गुणवत्ता के ‘गंभीर’ (severe) श्रेणी में पहुंचने पर, केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने मंगलवार को कहा कि केंद्र का वायु गुणवत्ता पैनल मौसम संबंधी स्थितियों – जैसे हवा की दिशा, गति और हवा के बहाव – पर लगातार नजर रख रहा है।

उन्होंने भरोसा दिलाया कि जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। हवा की गुणवत्ता में तेजी से गिरावट तब आई है, जब पिछले वर्षों की तुलना में पराली जलाने की घटनाओं में ‘कमी’ आई है। सरकार का दावा है कि धान की पराली के एक बड़े हिस्से का प्रबंधन ‘एक्स-सीटू’ (ex-situ) तरीके से किया गया है।

पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सहित पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की घटनाओं में कमी के बारे में पूछे जाने पर यादव ने कहा- “हां, मैंने पहले ही बताया है कि इस बार धान की लगभग 40 प्रतिशत पराली का इस्तेमाल ‘एक्स-सीटू’ (खेत के बाहर) प्रबंधन के जरिए किया गया है।”

इन उपायों के बावजूद हवा की गुणवत्ता (एयर क्वालिटी) के ‘गंभीर’ (सीवियर) श्रेणी में बने रहने को लेकर ANI के सवाल का जवाब देते हुए यादव ने कहा कि CAQM मौसम संबंधी स्थितियों पर बारीकी से नजर रख रहा है और अपने आकलन के आधार पर जरूरी कदम उठा रहा है। उन्होंने कहा- “CAQM लगातार मौसम संबंधी स्थितियों पर नजर रख रहा है, जिसमें हवा की दिशा, हवा की गति और हवा का बहाव शामिल है। इन आकलनों के आधार पर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।”

दिवाली से पहले दिल्ली-एनसीआर में जहरीली हुई हवा, रोहिणी-बवाना समेत कई इलाकों में AQI ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंचा

दिवाली से पहले दिल्ली-एनसीआर में जहरीली हुई हवा, रोहिणी-बवाना समेत कई इलाकों में AQI 'गंभीर' श्रेणी में पहुंचा

delhi pollution

Delhi Pollution : दिवाली से पहले दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण ने चिंता बढ़ा दी है। दिल्ली और उसके आसपास के शहरों की हवा की हालत खराब है। मंगलवार सुबह 8 बजे दिल्ली के कई इलाकों में एक्यूआई 400 के पार पहुंच गया। इससे पूरे शहर में प्रदूषण के बिगड़ते स्तर को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। ALSO READ: Top News 3 November: आंध्र प्रदेश से टकराया चक्रवात मुरासु, दिल्ली में AQI 400 पार; देश-दुनिया की 5 बड़ी खबरें

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के कई निगरानी केंद्रों पर एक्यूआई का स्तर ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज किया गया, जबकि कई अन्य इलाकों में हवा की गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ बनी रही।

 

सीपीसीबी के सुबह 8 बजे के आंकड़ों के अनुसार, रोहिणी में एक्यूआई 429 दर्ज किया गया, पंजाबी बाग में 424 और बवाना में 408 रहा। इस तरह ये तीनों इलाके ‘गंभीर’ श्रेणी में आ गए हैं। पटपड़गंज में एक्यूआई 379 दर्ज किया गया। आर के पुरम में एक्यूआई 374, आईटीओ में 373, ओखला फेज-2 में 352, चांदनी चौक में 352, जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में 355 और जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में 328 रहा।

 

सीपीसीबी के अनुसार, अक्षरधाम मंदिर के आसपास के इलाके में एक्यूआई 373 है, जिसे ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रखा गया है। दिल्ली एयरपोर्ट के टर्मिनल 3 पर एक्यूआई 287 दर्ज किया गया, आनंद विहार में 279, उत्तम नगर में 274 और आईएमडी लोधी रोड पर 226 रहा।

 

दिल्ली-NCR में ग्रेप 2 की पाबंदियां

दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण बढ़ने के बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने सोमवार को ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के दूसरे चरण यानी GRAP-2 के तहत पाबंदियां लागू कर दी हैं।

 

GRAP के दूसरे चरण को तब लागू किया जाता है, जब दिल्ली की हवा खराब से बेहद खराब श्रेणी की ओर बढ़ती है। इसका उद्देश्य प्रदूषण के स्रोतों पर नियंत्रण करना और हवा की गुणवत्ता को और बिगड़ने से रोकना है। इसके तहत सड़क की सफाई, पानी का छिड़काव, धूल नियंत्रण और यातायात से होने वाले प्रदूषण को कम करने जैसे कदम उठाए जाते हैं।
 

 

इन बातों का रखें ध्यान

प्रदूषण बढ़ने के दौरान खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी परेशानी वाले लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। सुबह और देर शाम बाहर व्यायाम करने से बचें। जरूरत पड़ने पर बाहर निकलते समय अच्छी गुणवत्ता वाला मास्क इस्तेमाल करें और आंखों में जलन, खांसी या सांस लेने में परेशानी होने पर चिकित्सकीय सलाह लें।

क्या बोले पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा?

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा, मैं अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया से विनती करता हूं कि दिल्ली के साथ ऐसा अत्याचार ना करें। आप जो 10 साल में दिल्ली को बर्बाद करके गए, अब दिल्ली वापस अपने दिल्ली वाले रूप में आ रही है। दिल्ली का प्रदूषण लगातार कम हो रहा है। दिल्ली के लोग अपने आपको ठीक करने के लिए EV गाड़ियां खरीद रहे हैं। दिल्ली के लोग मिलकर इस प्रदूषण की जंग से लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब में पराली जलाना बंद कर दीजिए। पराली के जलने से जो दिल्ली पिछले एक साल से साफ थी, आपने पंजाब में आग लगाकर (पराली जलाकर) फिर से दिल्ली में गंदी हवा भेजने का काम किया है।

दिल्ली-NCR में सांस लेना हुआ मुश्किल! AQI 370 के पार, क्या अब और सख्त होंगी पाबंदियां?

Delhi Pollution: देश की राजधानी दिल्ली में एक बार फिर प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगा है। बढ़ते प्रदूषण की वजह से लोगों को खराब हवा में सांस लेने पर मजबूर होना पड़ रहा है। मंगलवार को इंडिया गेट के आसपास AQI 374 दर्ज किया गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने एक दिन पहले ही ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के दूसरे चरण यानी स्टेज-II की पाबंदियां लागू की थीं। इसके बावजूद राजधानी में प्रदूषण का स्तर चिंताजनक बना हुआ है। वहीं, ठंड बढ़ने, हवाओं की रफ्तार कम होने और आसपास के राज्यों में पराली जलाने से आने वाले दिनों में प्रदूषण की समस्या और बढ़ सकती है।

सोमवार को कितना था AQI

सोमवार को दिल्ली का औसत AQI 324 दर्ज किया गया था, जो हवा की ‘बहुत खराब’ स्थिति को दर्शाता है। दिवाली से पहले बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए CAQM ने पूरे दिल्ली-NCR में GRAP के दूसरे चरण की पाबंदियां लागू कर दीं। इसके तहत सड़कों की मशीनों से सफाई और धूल कम करने के लिए नियमित रूप से पानी का छिड़काव किया जाएगा। इसके अलावा, निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करने के लिए पार्किंग शुल्क बढ़ाया गया है। लोगों को सार्वजनिक परिवहन अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने के मकसद से मेट्रो, CNG और इलेक्ट्रिक बसों की संख्या और सेवाओं को भी बढ़ाया जाएगा।

हर साल बढ़ता है प्रदुषण

दिल्ली में हर साल अक्टूबर से प्रदूषण बढ़ने लगता है। इस साल देर तक हुई बारिश और तेज हवाओं के कारण कुछ समय तक प्रदूषण का असर कम रहा। लेकिन अब ठंड बढ़ने और हवाओं की रफ्तार कम होने से प्रदूषण फिर बढ़ने लगा है। हवा धीमी होने के कारण धुआं और धूल के कण एक जगह जमा हो जाते हैं, जिससे लोगों को सांस लेने में परेशानी होती है। वहीं, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में पराली जलाने से निकलने वाला धुआं भी दिल्ली की हवा को खराब कर रहा है। इस साल बारिश देर तक होने की वजह से पंजाब और हरियाणा में फसलों की कटाई भी देर से हुई। इसके कारण पराली जलाने का समय अक्टूबर के आखिरी दिनों से बढ़कर नवंबर तक पहुंच गया है। इस दौरान सर्दियों में हवाएं भी धीमी चलती हैं, जिससे पराली का धुआं हवा में फैलने के बजाय आसपास जमा हो जाता है और प्रदूषण बढ़ जाता है।

21 अक्टूबर को ही लगाया गया GRAP-1

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए CAQM ने 21 अक्टूबर को ही GRAP का पहला चरण लागू कर दिया था। उस समय राजधानी का AQI 244 दर्ज किया गया था। इसके तहत लोगों को निजी वाहनों की जगह सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। साथ ही, वाहनों के PUC सर्टिफिकेट की जांच तेज करने, सड़क किनारे खाने-पीने की दुकानों और व्यावसायिक तंदूरों में कोयले व लकड़ी जलाने पर रोक लगाने जैसे कदम उठाए गए। इसके अलावा, प्रदूषण कम करने के लिए डीजल जनरेटर के इस्तेमाल को भी सीमित किया गया।

दिल्ली में लागू है GRAP 2

GRAP के दूसरे चरण में प्रदूषण कम करने के लिए कई अतिरिक्त कदम उठाए गए हैं। इसके तहत सड़कों की मशीनों से बार-बार सफाई की जाएगी और धूल कम करने के लिए पानी का छिड़काव बढ़ाया जाएगा। साथ ही, निजी गाड़ियों का इस्तेमाल कम करने के लिए पार्किंग शुल्क बढ़ाने और सार्वजनिक परिवहन की सुविधाएं बेहतर करने पर जोर दिया गया है। अगर प्रदूषण का स्तर और बढ़ता है, तो GRAP के तीसरे और चौथे चरण की सख्त पाबंदियां लागू की जा सकती हैं। इनमें BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल कारों के चलने पर रोक लगाने के साथ-साथ सबसे गंभीर स्थिति में ऑड-ईवन नियम लागू करना भी शामिल है।

Delhi Air Pollution: दिल्ली में हवा हुई जहरीली! AQI 327 पहुंचा, GRAP-2 लागू, कोयला-तंदूर पर बैन, जानें क्या-क्या बंद होगा?

दिल्ली-NCR में प्रदूषण एक बार फिर बेकाबू हो गया है, हवा की गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। राजधानी का Air Quality Index (AQI) सोमवार को 327 तक पहुंच गया, जो इस बार का अब तक का सबसे खराब स्तर है। CAQM (Commission for Air Quality Management) ने हालात को देखते हुए तुरंत GRAP का स्टेज-2 पूरे NCR में लागू करने का निर्देश दिया है।

AQI में इस तेज उछाल की सबसे बड़ी वजह खराब मौसम बताया जा रहा है। सिर्फ 3 दिन में AQI 117 से सीधा 324 पर पहुंच गया, जबकि 31 अक्टूबर को AQI 117 (Moderate), 1 नवंबर को 261 (Poor) और 2 नवंबर को 324 (Very Poor) रहा।

सबसे खराब हालत जहांगीरपुरी की है, जहां AQI 447 रिकॉर्ड किया गया, जो Severe कैटेगरी में है। रोहिणी में 420 और पंजाबी बाग में 415 AQI दर्ज हुआ। 58 में से 38 मॉनिटरिंग स्टेशनों पर हवा बहुत खराब है।

GRAP-2 में क्या-क्या बैन हुआ?

Stage-2 लागू होने के साथ ही दिल्ली-NCR में कई सख्त पाबंदियां लगाई गई हैं, जो Stage-1 के साथ मिलकर लागू रहेंगी:

  1. कोयला और लकड़ी पर बैन: होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों में कोयले और लकड़ी के तंदूर के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
  2. DG सेट पर रोक: इमरजेंसी को छोड़कर सभी डीजल जनरेटर सेट के इस्तेमाल पर सख्त पाबंदी है।
  3. गाड़ियों पर शिकंजा: दिल्ली में BS-IV और उससे पुरानी गाड़ियों की एंट्री बैन रहेगी। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने साफ किया है कि नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद से आने वाली Non BS-VI गाड़ियों को भी 31 जनवरी तक दिल्ली में एंट्री नहीं मिलेगी। बिना PUC वाली गाड़ियों पर भी एक्शन होगा।
  4. पार्किंग फीस बढ़ी: प्राइवेट गाड़ियों को रोकने के लिए पार्किंग फीस बढ़ा दी गई है।
  5. सड़कों की सफाई: सभी सड़कों पर रोजाना Mechanical Sweeping और पानी का छिड़काव, Anti-Smog Gun का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा।
  6. कंस्ट्रक्शन साइटों पर सख्ती: धूल रोकने के नियमों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है।

क्या स्कूल बंद रहने वाले हैं?

फिलहाल स्कूल-कॉलेज बंद नहीं होंगे। CAQM के नियमों के मुताबिक स्कूल बंद करना या ऑनलाइन क्लास GRAP Stage-III (AQI 401-450) और Stage-IV (AQI 450+) में ही होता है। हालांकि प्राइवेट स्कूल आउटडोर एक्टिविटी और मॉर्निंग असेंबली को लेकर अपनी एडवाइजरी जारी कर सकते हैं। IMD और IITM का अनुमान है कि अगले कुछ दिन तक AQI Very Poor कैटेगरी में ही बना रहेगा, 5 नवंबर तक इसमें सुधार की उम्मीद कम है।

दिल्ली-NCR की हवा अगले कुछ दिनों तक जहरीली ही रहने वाली है। 5 नवंबर तक AQI में सुधार की कोई उम्मीद नहीं है, ऐसे में GRAP-2 की पाबंदियां सख्ती से लागू रहेंगी। लोगों को सलाह है कि बिना जरूरी काम के बाहर न निकलें और N95 मास्क का इस्तेमाल करें।

दिल्ली-NCR में GRAP-2 की पाबंदियां लागू, बेहद खराब श्रेणी में पहुंची हवा, AQI 324 दर्ज

दिल्ली-NCR में GRAP-2 की पाबंदियां लागू, बेहद खराब श्रेणी में पहुंची हवा, AQI 324 दर्ज

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दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण बढ़ने के बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने सोमवार को ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के दूसरे चरण यानी GRAP-2 के तहत पाबंदियां लागू कर दी हैं। राजधानी की हवा बेहद खराब (Very Poor) श्रेणी में पहुंच गई है। सोमवार को दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 324 दर्ज किया गया।

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CAQM के मुताबिक, दिल्ली का AQI 31 अक्टूबर को 117 था, जो मध्यम (Moderate) श्रेणी में आता है। इसके बाद 1 नवंबर को यह बढ़कर 261 पहुंच गया और हवा खराब (Poor) श्रेणी में दर्ज की गई। वहीं, 2 नवंबर को AQI में और बढ़ोतरी हुई और यह 324 पर पहुंच गया, जो बेहद खराब श्रेणी में है।

 

आयोग ने बताया कि प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों के कारण प्रदूषण के स्तर में तेजी से इजाफा हुआ है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में भी दिल्ली की वायु गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में बने रहने की आशंका है।

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क्या है GRAP-2 और क्यों लागू किया गया?

 

GRAP के दूसरे चरण को तब लागू किया जाता है, जब दिल्ली की हवा खराब से बेहद खराब श्रेणी की ओर बढ़ती है। इसका उद्देश्य प्रदूषण के स्रोतों पर नियंत्रण करना और हवा की गुणवत्ता को और बिगड़ने से रोकना है। इसके तहत सड़क की सफाई, पानी का छिड़काव, धूल नियंत्रण और यातायात से होने वाले प्रदूषण को कम करने जैसे कदम उठाए जाते हैं।

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लोगों को किन बातों का रखना चाहिए ध्यान?

 

प्रदूषण बढ़ने के दौरान खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी परेशानी वाले लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। सुबह और देर शाम बाहर व्यायाम करने से बचें। जरूरत पड़ने पर बाहर निकलते समय अच्छी गुणवत्ता वाला मास्क इस्तेमाल करें और आंखों में जलन, खांसी या सांस लेने में परेशानी होने पर चिकित्सकीय सलाह लें।

Delhi-NCR Pollution: दिवाली से पहले दिल्ली की हवा हुई ‘जहरीली’, GRAP-II की पाबंदियां लागू, इन चीजों पर लगी रोक

Delhi-NCR Pollution: दिवाली से पहले देश की राजधानी में बढ़ते प्रदूषण का स्तर को देखते हुए दिल्ली को GRAP के दूसरे चरण में शामिल कर दिया गया है। सोमवार को दिल्ली की हवा की गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में पहुंच गई। दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 310 से 324 के बीच दर्ज किया गया। इसके बाद अधिकारियों ने प्रदूषण पर काबू पाने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। दिवाली से पहले हवा को साफ रखने और प्रदूषण कम करने के लिए ये उपाय लागू किए गए है।

GRAP के दूसरे चरण के लागू होने से दिल्ली में निर्माण कार्यों, डीजल जनरेटर चलाने और वाहनों के इस्तेमाल पर सख्ती बढ़ गई है। वहीं इस दौरान स्कूल, ऑफिस, दुकानें और सार्वजनिक परिवहन सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी। आइए जानते हैं GRAP 2 में किन-किन पर चीजों पर रहेगी रोक।

अभी और खराब होगी दिल्ली की हवा

कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने 2 नवंबर को जारी आदेश में इस स्थिति का जिक्र किया। आयोग के मुताबिक, मौसम की खराब परिस्थितियों के कारण प्रदूषण का स्तर बढ़ा है। वहीं, IMD और IITM के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में भी दिल्ली की हवा की गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में बनी रह सकती है। फिलहाल ये पाबंदियां एहतियात के तौर पर लगाई गई हैं। दिवाली पर पूरी रोक नहीं है, लेकिन पटाखों के धुएं से प्रदूषण बढ़ने की आशंका है। इसलिए लोगों को प्रदूषण से जुड़े नियमों का पालन करना होगा।

कब लागू होता है GRAP 2

GRAP का दूसरा चरण तब लागू किया जाता , जब AQI 301 से 400 के बीच पहुंच जाता है। दिल्ली-NCR में इन पाबंदियों को लागू करने से पहले CAQM की विशेष समिति ने प्रदूषण के स्तर, मौसम की स्थिति और आने वाले दिनों के पूर्वानुमान की समीक्षा की। दिवाली से ठीक पहले लिए गए इस फैसले के पीछे मौसम की खराब स्थिति, पराली जलाने से निकलने वाला धुआं और पटाखों से बढ़ने वाले प्रदूषण की आशंका भी बड़ी वजह है।

इन चीजों पर होगी पाबंदी

प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए दिल्ली में धूल फैलाने वाले निर्माण और तोड़-फोड़ के कामों पर रोक लगा दी गई है। हालांकि, जरूरी सरकारी और बुनियादी ढांचे से जुड़े प्रोजेक्ट्स को कुछ शर्तों के साथ छूट मिलेगी। आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर भी पाबंदी रहेगी। इसके अलावा, 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक दिल्ली के बाहर रजिस्टर्ड नॉन-BS-VI गाड़ियों को राजधानी में चलाने या प्रवेश करने की अनुमति नहीं होगी। इसमें BS-IV और उससे पुरानी पेट्रोल-डीजल गाड़ियां भी शामिल हैं।

‘नो PUC, नो फ्यूल’ नियम लागू

दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए पेट्रोल पंपों पर ‘नो PUC, नो फ्यूल’ नियम भी लागू होगा। इसके तहत वैध प्रदूषण प्रमाणपत्र (PUC) नहीं होने पर गाड़ियों को पेट्रोल, डीजल और CNG नहीं मिलेगी। इसके अलावा, निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करने के लिए अधिकृत पार्किंग स्थलों पर 28 फरवरी 2027 तक पार्किंग शुल्क दोगुना कर दिया गया है। सड़कों पर धूल कम करने के लिए मशीनों से सफाई और पानी के छिड़काव का काम भी बढ़ाया जाएगा।

इलेक्ट्रिक और CNG वाहनों पर होगा प्रतिबंध

GRAP के दूसरे चरण में निजी वाहनों पर पूरी तरह पाबंदी नहीं लगाई गई है। दिल्ली में BS-VI गाड़ियां पहले की तरह चल सकेंगी, जबकि इलेक्ट्रिक और CNG वाहनों को भी कुछ प्रतिबंधों से छूट दी गई है। एंबुलेंस, दमकल और अन्य जरूरी सरकारी वाहनों को भी राहत मिलेगी। इसके अलावा, स्कूल, ऑफिस, दुकानें और सार्वजनिक परिवहन सामान्य रूप से चलते रहेंगे। जरूरी निर्माण और बुनियादी ढांचे से जुड़े काम भी विशेष अनुमति और धूल रोकने के नियमों का पालन करने पर जारी रखे जा सकेंगे।

GRAP 3 भी हो सकता है लागू

अगर दिल्ली में प्रदूषण का स्तर और बढ़ता है, तो GRAP के तीसरे चरण की पाबंदियां लागू की जा सकती हैं। यह चरण AQI के 401 से 450 के बीच पहुंचने पर लागू होता है, जबकि 450 से ऊपर जाने पर चौथा चरण लागू किया जाता है। इन चरणों में निर्माण कार्यों, वाहनों और ट्रैफिक पर और सख्ती बढ़ सकती है। साथ ही, स्कूलों और दफ्तरों के कामकाज पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे में GRAP का दूसरा चरण प्रदूषण की स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए शुरुआती चेतावनी के तौर पर काम करता है।

Delhi Pollution: दशहरे के जश्न के बाद दिल्ली की हवा ‘खराब’ श्रेणी में, AQI 238 पर पहुंचा, GRAP-1 लागू

Delhi Pollution: दशहरे के जश्न के बाद दिल्ली की हवा एक बार फिर बिगड़ने लगी है। बुधवार को राजधानी का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) बढ़कर ‘खराब’ श्रेणी में पहुंच गया। हवा की गुणवत्ता में आई इस गिरावट को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने दिल्ली में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के पहले चरण यानी स्टेज-1 को लागू कर दिया है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, बुधवार सुबह 10 बजे दिल्ली का AQI 238 दर्ज किया गया। इस सीजन में यह पहला मौका है, जब राजधानी की हवा ‘खराब’ श्रेणी में पहुंची है। इससे एक दिन पहले यानी मंगलवार दोपहर AQI 179 था। इस तरह महज एक दिन में प्रदूषण का स्तर 59 अंक बढ़ गया।

दिल्ली के 59 में से 56 एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशनों से मिले आंकड़ों के मुताबिक, जहांगीरपुरी और पूसा में हवा की गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ श्रेणी में पहुंच गई। यहां AQI क्रमशः 308 और 314 दर्ज किया गया। वहीं, आनंद विहार समेत 16 मॉनिटरिंग स्टेशनों पर हवा की गुणवत्ता ‘मध्यम’ श्रेणी में रही।

GRAP की पाबंदियां क्यों लगाई जाती हैं?

दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने पर सिर्फ हवा की गुणवत्ता के आंकड़ों पर नजर नहीं रखी जाती, बल्कि इसे काबू करने के लिए कई तरह के कदम भी उठाए जाते हैं। इसी मकसद से ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) लागू किया जाता है। इसके तहत प्रदूषण का स्तर बढ़ने के साथ पाबंदियां भी सख्त होती जाती हैं।

GRAP को प्रदूषण की गंभीरता के आधार पर चार चरणों में बांटा गया है। AQI 201 से 300 के बीच होने पर स्टेज-1 (खराब), 301 से 400 के बीच स्टेज-2 (बेहद खराब), 401 से 450 के बीच स्टेज-3 (गंभीर) और 450 से ऊपर होने पर स्टेज-4 (गंभीर प्लस) लागू किया जाता है।

GRAP के स्टेज-1 के तहत, प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कई उपाय किए जाते हैं। इनमें धूल को रोकने के लिए नियमित रूप से सड़कों की सफाई और पानी का छिड़काव, निर्माण स्थलों पर धूल का बेहतर प्रबंधन, और कचरे का उचित निपटान शामिल हैं। इसके अलावा, प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की जांच, बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन, और उद्योगों, बिजली संयंत्रों तथा ईंट भट्ठों से होने वाले उत्सर्जन को कम करने के कदम भी उठाए जाते हैं।

मौसम में बदलाव भी बढ़ा रहा प्रदूषण

दिल्ली की हवा खराब होने के पीछे मौसम में हो रहे बदलाव भी एक वजह हैं। तापमान में गिरावट और हवा की रफ्तार में उतार-चढ़ाव के कारण प्रदूषक कण वातावरण में आसानी से फैल नहीं पाते। ऐसे में ये हवा में जमा होने लगते हैं और प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है।

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