बेंजामिन नेतन्याहू को बड़ा झटका, अरब पार्टियों ने गादी आइजेनकोट को दिया समर्थन, इजराइल में बदल सकता है सत्ता का समीकरण

बेंजामिन नेतन्याहू को बड़ा झटका, अरब पार्टियों ने गादी आइजेनकोट को दिया समर्थन, इजराइल में बदल सकता है सत्ता का समीकरण

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। देश के सबसे बड़े अरब राजनीतिक गठबंधन ‘जॉइंट लिस्ट’ और रा’म पार्टी ने गुरुवार को पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट को अगली सरकार बनाने के लिए समर्थन देने का ऐलान किया। इसके बाद 27 अक्टूबर को हुए चुनाव के बाद आइजेनकोट के प्रधानमंत्री बनने की संभावनाएं मजबूत हो गई हैं।

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इजरायल के राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग लगातार दूसरे दिन राजनीतिक दलों के साथ चर्चा कर रहे हैं। इन बैठकों का मकसद यह तय करना है कि अगली सरकार बनाने की जिम्मेदारी किस नेता को सौंपी जाए। चुनाव में न तो नेतन्याहू और न ही आइजेनकोट को स्पष्ट बहुमत मिला है। नेतन्याहू दक्षिणपंथी राजनीति के प्रमुख चेहरे हैं और पिछले तीन वर्षों से युद्ध के दौरान इजरायल का नेतृत्व कर रहे हैं। वहीं, आइजेनकोट ने देश में राष्ट्रीय एकता बहाल करने का वादा किया है।

 

राष्ट्रपति को सरकार बनाने के लिए किसी नेता को आमंत्रित करने का अधिकार है, लेकिन परंपरा के अनुसार वह आमतौर पर उसी उम्मीदवार को मौका देते हैं, जिसे सबसे अधिक सांसदों का समर्थन हासिल होता है। ताजा समर्थन के बाद आइजेनकोट की स्थिति मजबूत हुई है।
 

अरब पार्टियां बनीं किंगमेकर, चुनाव में मिलीं 19 सीटें

इजरायल के चुनाव में अरब बहुल राजनीतिक दलों ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए कुल 19 सीटें हासिल की हैं। ऐसे में सरकार गठन के दौरान उनकी भूमिका निर्णायक हो सकती है। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि आइजेनकोट का समर्थन करने वाली ये पार्टियां औपचारिक रूप से उनके गठबंधन में शामिल होंगी या नहीं।

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11 सीटें जीतने वाली जॉइंट लिस्ट ने बयान जारी कर कहा कि वह राष्ट्रपति हर्जोग को अपनी सिफारिश से अवगत कराएगी और आइजेनकोट को सरकार बनाने का मौका देने का समर्थन करेगी। वहीं, आठ सीटें जीतने वाली रा’म पार्टी ने भी आइजेनकोट के समर्थन का ऐलान किया है। इस समर्थन के बाद आइजेनकोट को नई नेसेट (इजरायल की संसद) के 67 सांसदों की सिफारिश मिलने की संभावना है। इजरायल की संसद में कुल 120 सीटें हैं।

नेतन्याहू को सत्ता से बाहर रखना अरब दलों का साझा मकसद

जॉइंट लिस्ट ने कहा कि उसके तीनों घटक दलों ने सर्वसम्मति से आइजेनकोट का समर्थन करने का फैसला किया है। गठबंधन के मुताबिक, यह फैसला जनता की उस मांग के जवाब में लिया गया है, जिसमें नेतन्याहू और उनकी सरकार को दोबारा सत्ता में आने से रोकने की बात कही गई है।

 

हालांकि, गठबंधन ने यह भी स्वीकार किया कि विपक्षी खेमे ने अभी तक नेतन्याहू की राजनीतिक नीतियों को चुनौती देने और अरब नागरिकों के खिलाफ कथित भड़काऊ बयानों को रोकने के मामले में पर्याप्त इच्छाशक्ति नहीं दिखाई है। अरब नागरिकों की राजनीतिक भागीदारी की वैधता पर सवाल उठाने की कोशिशों को लेकर भी गठबंधन ने चिंता जताई।

 

इसके बावजूद जॉइंट लिस्ट का मानना है कि आइजेनकोट को समर्थन देने से नेतन्याहू और उनके बीच राजनीतिक अंतर बढ़ेगा। इससे मौजूदा सरकार को बदलने की संभावनाएं मजबूत होंगी और ऐसी एकता सरकार बनने की आशंका कम होगी, जिसमें नेतन्याहू सत्ता में बने रह सकें। जॉइंट लिस्ट का एक प्रतिनिधिमंडल गुरुवार दोपहर राष्ट्रपति हर्जोग के सामने अपनी सिफारिश पेश करने वाला था।

सरकार बनाने के लिए मिलेंगे 28 दिन

इजरायल के राष्ट्रपति जब किसी सांसद को औपचारिक रूप से सरकार बनाने की जिम्मेदारी सौंपेंगे, तो उस नेता को इसके लिए 28 दिन का समय मिलेगा। जरूरत पड़ने पर राष्ट्रपति 14 दिन का अतिरिक्त समय भी दे सकते हैं। यदि तय समय में नेता सरकार बनाने में नाकाम रहता है, तो राष्ट्रपति किसी दूसरे सांसद को यह जिम्मेदारी सौंप सकते हैं।

चुनाव के बाद नेतन्याहू और आइजेनकोट की स्थिति क्या है?

आइजेनकोट को मिल रहे समर्थन के बावजूद नेतन्याहू का गठबंधन संसदीय सीटों के मामले में आगे है। रिपोर्ट के मुताबिक, यूनाइटेड टोरा जूडिज्म सहित नेतन्याहू के खेमे के पास नई संसद में 53 सीटें हैं, जबकि आइजेनकोट के विपक्षी खेमे के पास 48 सीटें हैं।

 

नेतन्याहू की दक्षिणपंथी सरकार के खिलाफ व्यापक नाराजगी के बीच अरब बहुल दलों ने चुनाव में ऐतिहासिक बढ़त हासिल की है। निवर्तमान सरकार के कई मंत्रियों को गाजा और कब्जे वाले वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनियों को लेकर उनके रुख के कारण आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है।

 

आइजेनकोट अरब पार्टियों के समर्थन से सरकार बनाने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन ऐसा करने से विपक्ष के कुछ सांसद नाराज हो सकते हैं। इनमें अविग्दोर लिबरमैन भी शामिल हैं। वह पहले नेतन्याहू के सहयोगी रहे हैं, लेकिन अब प्रधानमंत्री के मुखर आलोचक हैं। हालांकि, फिलिस्तीनियों के मुद्दे पर लिबरमैन का रुख भी निवर्तमान सरकार की तरह सख्त माना जाता है।

 

नेतन्याहू विपक्ष पर अरब सांसदों के साथ गठबंधन बनाने की संभावनाओं को लेकर लगातार निशाना साधते रहे हैं। बुधवार को प्रधानमंत्री कार्यालय में रिकॉर्ड किए गए एक वीडियो में उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव प्रचार अभियान में विदेशी ताकतों की ओर से फंडिंग किए जाने को लेकर गंभीर संदेह हैं।

जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले में CJP नेताओं से 4 घंटे पूछताछ, क्राइम ब्रांच ने पूछे करीब 70 सवाल

जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले में CJP नेताओं से 4 घंटे पूछताछ, क्राइम ब्रांच ने पूछे करीब 70 सवाल

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जंतर-मंतर पर 13 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन के मामले में क्राइम ब्रांच ने CJP नेताओं से करीब चार घंटे तक पूछताछ की। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, नेता सुबह करीब 11 बजे राजौरी गार्डन स्थित क्राइम ब्रांच कार्यालय पहुंचे थे। पूछताछ दोपहर करीब 3 बजे समाप्त हुई।

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पुलिस सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान नेताओं से करीब 70 सवाल किए गए। हालांकि, उन्होंने कुछ सवालों का जवाब नहीं दिया। CJP नेताओं को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से जुड़े दो एफआईआर के सिलसिले में पूछताछ के लिए बुलाया गया था।

जंतर-मंतर पहुंचने के लिए निजी संपत्ति से गुजरने का आरोप

ये दोनों मामले 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से जुड़े हैं। आरोप है कि प्रदर्शनकारी उस स्थान तक पहुंचने के लिए निजी संपत्ति से होकर गए थे, जबकि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर कुछ प्रतिबंध लागू थे। शुरुआत में ये एफआईआर कनॉट प्लेस और संसद मार्ग थानों में दर्ज की गई थीं। बाद में जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई। CJP नेताओं ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया था और वहां राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा भी फहराया था।

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जांच में सहयोग करने की कही बात

पूछताछ के बाद क्राइम ब्रांच कार्यालय के बाहर पत्रकारों से बातचीत करते हुए रांका ने इसे 13 अक्टूबर की घटना से जुड़ी सामान्य जांच बताया। उन्होंने कहा कि पार्टी के नेता जांच में पूरा सहयोग करेंगे। रांका ने कहा, “हम पहले भी कह चुके हैं और फिर कह रहे हैं कि जो भी जांच हो रही है, उसमें हम सहयोग करेंगे। कहीं भी तिरंगा फहराना अपराध नहीं होना चाहिए।

हमें पूरी उम्मीद है कि जांच सही तरीके से होगी और हम इसमें सहयोग करेंगे।” पुलिस सूत्रों के मुताबिक, नेताओं से पूछताछ इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारियों ने की। इससे पहले भी नेताओं को जांच में शामिल होने के लिए समन भेजा गया था, लेकिन उन्होंने अधिक समय मांगा था और पेश नहीं हुए थे। फिलहाल मामले में आगे की जांच जारी है।

Delhi Air Pollution Severe: दिल्ली की जहांगीरपुरी में AQI 452 पहुंचा, जानिए क्यों शहर में सबसे खराब हुई यहां की हवा

दिल्ली में वायु प्रदूषण की स्थिति लगातार चिंताजनक बनी हुई है। राजधानी के कई इलाकों में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में पहुंच चुकी है लेकिन जहांगीरपुरी में प्रदूषण का स्तर सबसे ज्यादा दर्ज किया गया है। बुधवार को यहां एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 452 तक पहुंच गया। इसे एयर पलूशन की गंभीर (Severe) कैटिगरी माना जाता है।

आपको बता दें कि जहांगीरपुरी में पिछले कुछ दिनों से लगातार प्रदूषण का स्तर ऊंचा बना हुआ है। यहां का 24 घंटे का औसत AQI भी लगातार बढ़ा है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक इलाके में औद्योगिक गतिविधियों से होने वाला उत्सर्जन, हवा की रफ्तार में कमी और प्रदूषकों को फैलने से रोकने वाली प्रतिकूल परिस्थितियां इसकी बड़ी वजह हो सकती हैं। एक्सपर्ट्स ने यह भी आशंका जताई है कि जहांगीरपुरी के एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन के पास स्थित एक ऊंची इमारत प्रदूषकों के उचित तरीके से फैलने में बाधा डाल सकती है। हालांकि प्रदूषण के लगातार बढ़े स्तर के पीछे किसी एक वजह को जिम्मेदार नहीं बताया गया है। इसके लिए स्थानीय उत्सर्जन और मौसम से जुड़ी परिस्थितियों के मिले-जुले असर की बात कही गई है।

जहांगीरपुरी में AQI 452, लगातार बढ़ रहा प्रदूषण

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक बुधवार दोपहर 2 बजकर 5 मिनट पर जहांगीरपुरी के मॉनिटरिंग स्टेशन पर AQI 452 दर्ज किया गया। यह गंभीर श्रेणी में आता है। पिछले कुछ दिनों के आंकड़े भी बताते हैं कि यहां प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ा है। जहांगीरपुरी में 31 अक्टूबर को 243 के स्तर पर रहा AQI अगले कुछ दिनों में तेजी से बढ़ा। रविवार को यह 378 और सोमवार को 436 तक पहुंच गया। मंगलवार को 24 घंटे का औसत AQI 462 दर्ज किया गया। बुधवार को दोपहर के समय भी यहां का AQI 452 रहा। पिछले कुछ दिनों से जहांगीरपुरी दिल्ली के उन प्रदूषण हॉटस्पॉट में शामिल है, जहां शहर के दूसरे मॉनिटरिंग स्टेशनों के मुकाबले सबसे अधिक AQI दर्ज किया जा रहा है।

जहांगीरपुरी में प्रदूषण बढ़ने की क्या है वजह?

जहांगीरपुरी में प्रदूषण के बढ़ते स्तर के पीछे कई कारण हो सकते हैं। Envirocatalysts के संस्थापक और लीड एनालिस्ट सुनील दहिया ने पीटीआई से बातचीत में इसके लिए तीन प्रमुख कारकों की ओर इशारा किया है। इनमें औद्योगिक उत्सर्जन, हवा की कम होती रफ्तार और प्रदूषकों के फैलाव में संभावित बाधा शामिल हैं। सुनील दहिया के मुताबिक जहांगीरपुरी के आसपास औद्योगिक गतिविधियां काफी ज्यादा हैं। उद्योगों में होने वाली दहन प्रक्रिया (Combustion) से प्रदूषकों का उत्सर्जन होता है, जिससे हवा में PM2.5 का स्तर बढ़ सकता है। उनका कहना है कि इलाके में औद्योगिक गतिविधियों के कारण होने वाला उत्सर्जन प्रदूषण के ऊंचे स्तर की एक प्रमुख वजह हो सकता है। जब पहले से ही प्रदूषण का स्तर अधिक हो और स्थानीय स्तर पर उत्सर्जन जारी रहे, तो हवा की गुणवत्ता और खराब हो सकती है।

प्रदूषण बढ़ने की दूसरी वजह पिछले कुछ दिनों में हवा की स्पीड में आई गिरावट बताई गई है। सुनील दहिया के मुताबिक हवा की रफ्तार कम होने से वातावरण में मौजूद प्रदूषकों को फैलने का पर्याप्त मौका नहीं मिल पा रहा है। पहले से प्रदूषण का स्तर ऊंचा होने और हवा का वेंटिलेशन ठीक नहीं रहने के कारण प्रदूषक एक ही क्षेत्र में जमा हो सकते हैं। इससे जहांगीरपुरी में प्रदूषण का स्तर लगातार ऊंचा बना रह सकता है। सुनील दहिया ने जहांगीरपुरी के एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन के पास मौजूद एक ऊंची इमारत की ओर भी ध्यान दिलाया है। उनके मुताबिक स्टेशन के एक तरफ स्थित यह इमारत प्रदूषकों के उचित तरीके से फैलने में रुकावट पैदा कर सकती है। अगर प्रदूषकों को फैलने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिलती, तो मॉनिटरिंग स्टेशन के आसपास उनका जमाव बढ़ सकता है।

दिल्ली का औसत AQI भी 378, हवा बहुत खराब श्रेणी में

जहांगीरपुरी में प्रदूषण का स्तर गंभीर श्रेणी में पहुंचने के साथ ही दिल्ली की समग्र वायु गुणवत्ता भी चिंताजनक बनी हुई है। बुधवार दोपहर 3 बजकर 5 मिनट पर राजधानी का औसत AQI 378 दर्ज किया गया। यह बहुत खराब (Very Poor) श्रेणी में आता है।

आपको बता दें कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मानकों के मुताबिक AQI को छह श्रेणियों में बांटा गया है। इनके आधार पर हवा की गुणवत्ता और प्रदूषण के स्तर का आकलन किया जाता है। 0-50 अच्छी (Good),

51-100 संतोषजनक (Satisfactory), 101-200 मध्यम (Moderate), 201-300 खराब (Poor), 301-400 बहुत खराब (Very Poor), 401-500 गंभीर (Severe).

दिल्ली में GRAP का दूसरा चरण लागू, प्रदूषण रोकने के लिए क्या हो रहे उपाय?

दिल्ली में फिलहाल ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का दूसरा चरण लागू है। यह तब लागू किया जाता है जब शहर की वायु गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में पहुंच जाती है। GRAP के दूसरे चरण के तहत 12 सूत्रीय कार्ययोजना के माध्यम से प्रदूषण पर नियंत्रण के उपाय किए जाते हैं। इसमें मुख्य रूप से सड़कों की सफाई, धूल नियंत्रण और निर्माण गतिविधियों से होने वाले प्रदूषण पर निगरानी बढ़ाने जैसे कदम शामिल हैं।

दिवाली से पहले दिल्ली-एनसीआर में जहरीली हुई हवा, रोहिणी-बवाना समेत कई इलाकों में AQI ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंचा

दिवाली से पहले दिल्ली-एनसीआर में जहरीली हुई हवा, रोहिणी-बवाना समेत कई इलाकों में AQI 'गंभीर' श्रेणी में पहुंचा

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Delhi Pollution : दिवाली से पहले दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण ने चिंता बढ़ा दी है। दिल्ली और उसके आसपास के शहरों की हवा की हालत खराब है। मंगलवार सुबह 8 बजे दिल्ली के कई इलाकों में एक्यूआई 400 के पार पहुंच गया। इससे पूरे शहर में प्रदूषण के बिगड़ते स्तर को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। ALSO READ: Top News 3 November: आंध्र प्रदेश से टकराया चक्रवात मुरासु, दिल्ली में AQI 400 पार; देश-दुनिया की 5 बड़ी खबरें

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के कई निगरानी केंद्रों पर एक्यूआई का स्तर ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज किया गया, जबकि कई अन्य इलाकों में हवा की गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ बनी रही।

 

सीपीसीबी के सुबह 8 बजे के आंकड़ों के अनुसार, रोहिणी में एक्यूआई 429 दर्ज किया गया, पंजाबी बाग में 424 और बवाना में 408 रहा। इस तरह ये तीनों इलाके ‘गंभीर’ श्रेणी में आ गए हैं। पटपड़गंज में एक्यूआई 379 दर्ज किया गया। आर के पुरम में एक्यूआई 374, आईटीओ में 373, ओखला फेज-2 में 352, चांदनी चौक में 352, जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में 355 और जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में 328 रहा।

 

सीपीसीबी के अनुसार, अक्षरधाम मंदिर के आसपास के इलाके में एक्यूआई 373 है, जिसे ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रखा गया है। दिल्ली एयरपोर्ट के टर्मिनल 3 पर एक्यूआई 287 दर्ज किया गया, आनंद विहार में 279, उत्तम नगर में 274 और आईएमडी लोधी रोड पर 226 रहा।

 

दिल्ली-NCR में ग्रेप 2 की पाबंदियां

दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण बढ़ने के बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने सोमवार को ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के दूसरे चरण यानी GRAP-2 के तहत पाबंदियां लागू कर दी हैं।

 

GRAP के दूसरे चरण को तब लागू किया जाता है, जब दिल्ली की हवा खराब से बेहद खराब श्रेणी की ओर बढ़ती है। इसका उद्देश्य प्रदूषण के स्रोतों पर नियंत्रण करना और हवा की गुणवत्ता को और बिगड़ने से रोकना है। इसके तहत सड़क की सफाई, पानी का छिड़काव, धूल नियंत्रण और यातायात से होने वाले प्रदूषण को कम करने जैसे कदम उठाए जाते हैं।
 

 

इन बातों का रखें ध्यान

प्रदूषण बढ़ने के दौरान खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी परेशानी वाले लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। सुबह और देर शाम बाहर व्यायाम करने से बचें। जरूरत पड़ने पर बाहर निकलते समय अच्छी गुणवत्ता वाला मास्क इस्तेमाल करें और आंखों में जलन, खांसी या सांस लेने में परेशानी होने पर चिकित्सकीय सलाह लें।

क्या बोले पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा?

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा, मैं अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया से विनती करता हूं कि दिल्ली के साथ ऐसा अत्याचार ना करें। आप जो 10 साल में दिल्ली को बर्बाद करके गए, अब दिल्ली वापस अपने दिल्ली वाले रूप में आ रही है। दिल्ली का प्रदूषण लगातार कम हो रहा है। दिल्ली के लोग अपने आपको ठीक करने के लिए EV गाड़ियां खरीद रहे हैं। दिल्ली के लोग मिलकर इस प्रदूषण की जंग से लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब में पराली जलाना बंद कर दीजिए। पराली के जलने से जो दिल्ली पिछले एक साल से साफ थी, आपने पंजाब में आग लगाकर (पराली जलाकर) फिर से दिल्ली में गंदी हवा भेजने का काम किया है।

दिल्ली-NCR में सांस लेना हुआ मुश्किल! AQI 370 के पार, क्या अब और सख्त होंगी पाबंदियां?

Delhi Pollution: देश की राजधानी दिल्ली में एक बार फिर प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगा है। बढ़ते प्रदूषण की वजह से लोगों को खराब हवा में सांस लेने पर मजबूर होना पड़ रहा है। मंगलवार को इंडिया गेट के आसपास AQI 374 दर्ज किया गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने एक दिन पहले ही ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के दूसरे चरण यानी स्टेज-II की पाबंदियां लागू की थीं। इसके बावजूद राजधानी में प्रदूषण का स्तर चिंताजनक बना हुआ है। वहीं, ठंड बढ़ने, हवाओं की रफ्तार कम होने और आसपास के राज्यों में पराली जलाने से आने वाले दिनों में प्रदूषण की समस्या और बढ़ सकती है।

सोमवार को कितना था AQI

सोमवार को दिल्ली का औसत AQI 324 दर्ज किया गया था, जो हवा की ‘बहुत खराब’ स्थिति को दर्शाता है। दिवाली से पहले बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए CAQM ने पूरे दिल्ली-NCR में GRAP के दूसरे चरण की पाबंदियां लागू कर दीं। इसके तहत सड़कों की मशीनों से सफाई और धूल कम करने के लिए नियमित रूप से पानी का छिड़काव किया जाएगा। इसके अलावा, निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करने के लिए पार्किंग शुल्क बढ़ाया गया है। लोगों को सार्वजनिक परिवहन अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने के मकसद से मेट्रो, CNG और इलेक्ट्रिक बसों की संख्या और सेवाओं को भी बढ़ाया जाएगा।

हर साल बढ़ता है प्रदुषण

दिल्ली में हर साल अक्टूबर से प्रदूषण बढ़ने लगता है। इस साल देर तक हुई बारिश और तेज हवाओं के कारण कुछ समय तक प्रदूषण का असर कम रहा। लेकिन अब ठंड बढ़ने और हवाओं की रफ्तार कम होने से प्रदूषण फिर बढ़ने लगा है। हवा धीमी होने के कारण धुआं और धूल के कण एक जगह जमा हो जाते हैं, जिससे लोगों को सांस लेने में परेशानी होती है। वहीं, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में पराली जलाने से निकलने वाला धुआं भी दिल्ली की हवा को खराब कर रहा है। इस साल बारिश देर तक होने की वजह से पंजाब और हरियाणा में फसलों की कटाई भी देर से हुई। इसके कारण पराली जलाने का समय अक्टूबर के आखिरी दिनों से बढ़कर नवंबर तक पहुंच गया है। इस दौरान सर्दियों में हवाएं भी धीमी चलती हैं, जिससे पराली का धुआं हवा में फैलने के बजाय आसपास जमा हो जाता है और प्रदूषण बढ़ जाता है।

21 अक्टूबर को ही लगाया गया GRAP-1

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए CAQM ने 21 अक्टूबर को ही GRAP का पहला चरण लागू कर दिया था। उस समय राजधानी का AQI 244 दर्ज किया गया था। इसके तहत लोगों को निजी वाहनों की जगह सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। साथ ही, वाहनों के PUC सर्टिफिकेट की जांच तेज करने, सड़क किनारे खाने-पीने की दुकानों और व्यावसायिक तंदूरों में कोयले व लकड़ी जलाने पर रोक लगाने जैसे कदम उठाए गए। इसके अलावा, प्रदूषण कम करने के लिए डीजल जनरेटर के इस्तेमाल को भी सीमित किया गया।

दिल्ली में लागू है GRAP 2

GRAP के दूसरे चरण में प्रदूषण कम करने के लिए कई अतिरिक्त कदम उठाए गए हैं। इसके तहत सड़कों की मशीनों से बार-बार सफाई की जाएगी और धूल कम करने के लिए पानी का छिड़काव बढ़ाया जाएगा। साथ ही, निजी गाड़ियों का इस्तेमाल कम करने के लिए पार्किंग शुल्क बढ़ाने और सार्वजनिक परिवहन की सुविधाएं बेहतर करने पर जोर दिया गया है। अगर प्रदूषण का स्तर और बढ़ता है, तो GRAP के तीसरे और चौथे चरण की सख्त पाबंदियां लागू की जा सकती हैं। इनमें BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल कारों के चलने पर रोक लगाने के साथ-साथ सबसे गंभीर स्थिति में ऑड-ईवन नियम लागू करना भी शामिल है।

Delhi Air Pollution: दिल्ली में हवा हुई जहरीली! AQI 327 पहुंचा, GRAP-2 लागू, कोयला-तंदूर पर बैन, जानें क्या-क्या बंद होगा?

दिल्ली-NCR में प्रदूषण एक बार फिर बेकाबू हो गया है, हवा की गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। राजधानी का Air Quality Index (AQI) सोमवार को 327 तक पहुंच गया, जो इस बार का अब तक का सबसे खराब स्तर है। CAQM (Commission for Air Quality Management) ने हालात को देखते हुए तुरंत GRAP का स्टेज-2 पूरे NCR में लागू करने का निर्देश दिया है।

AQI में इस तेज उछाल की सबसे बड़ी वजह खराब मौसम बताया जा रहा है। सिर्फ 3 दिन में AQI 117 से सीधा 324 पर पहुंच गया, जबकि 31 अक्टूबर को AQI 117 (Moderate), 1 नवंबर को 261 (Poor) और 2 नवंबर को 324 (Very Poor) रहा।

सबसे खराब हालत जहांगीरपुरी की है, जहां AQI 447 रिकॉर्ड किया गया, जो Severe कैटेगरी में है। रोहिणी में 420 और पंजाबी बाग में 415 AQI दर्ज हुआ। 58 में से 38 मॉनिटरिंग स्टेशनों पर हवा बहुत खराब है।

GRAP-2 में क्या-क्या बैन हुआ?

Stage-2 लागू होने के साथ ही दिल्ली-NCR में कई सख्त पाबंदियां लगाई गई हैं, जो Stage-1 के साथ मिलकर लागू रहेंगी:

  1. कोयला और लकड़ी पर बैन: होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों में कोयले और लकड़ी के तंदूर के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
  2. DG सेट पर रोक: इमरजेंसी को छोड़कर सभी डीजल जनरेटर सेट के इस्तेमाल पर सख्त पाबंदी है।
  3. गाड़ियों पर शिकंजा: दिल्ली में BS-IV और उससे पुरानी गाड़ियों की एंट्री बैन रहेगी। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने साफ किया है कि नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद से आने वाली Non BS-VI गाड़ियों को भी 31 जनवरी तक दिल्ली में एंट्री नहीं मिलेगी। बिना PUC वाली गाड़ियों पर भी एक्शन होगा।
  4. पार्किंग फीस बढ़ी: प्राइवेट गाड़ियों को रोकने के लिए पार्किंग फीस बढ़ा दी गई है।
  5. सड़कों की सफाई: सभी सड़कों पर रोजाना Mechanical Sweeping और पानी का छिड़काव, Anti-Smog Gun का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा।
  6. कंस्ट्रक्शन साइटों पर सख्ती: धूल रोकने के नियमों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है।

क्या स्कूल बंद रहने वाले हैं?

फिलहाल स्कूल-कॉलेज बंद नहीं होंगे। CAQM के नियमों के मुताबिक स्कूल बंद करना या ऑनलाइन क्लास GRAP Stage-III (AQI 401-450) और Stage-IV (AQI 450+) में ही होता है। हालांकि प्राइवेट स्कूल आउटडोर एक्टिविटी और मॉर्निंग असेंबली को लेकर अपनी एडवाइजरी जारी कर सकते हैं। IMD और IITM का अनुमान है कि अगले कुछ दिन तक AQI Very Poor कैटेगरी में ही बना रहेगा, 5 नवंबर तक इसमें सुधार की उम्मीद कम है।

दिल्ली-NCR की हवा अगले कुछ दिनों तक जहरीली ही रहने वाली है। 5 नवंबर तक AQI में सुधार की कोई उम्मीद नहीं है, ऐसे में GRAP-2 की पाबंदियां सख्ती से लागू रहेंगी। लोगों को सलाह है कि बिना जरूरी काम के बाहर न निकलें और N95 मास्क का इस्तेमाल करें।

Delhi-NCR Pollution: दिवाली से पहले दिल्ली की हवा हुई ‘जहरीली’, GRAP-II की पाबंदियां लागू, इन चीजों पर लगी रोक

Delhi-NCR Pollution: दिवाली से पहले देश की राजधानी में बढ़ते प्रदूषण का स्तर को देखते हुए दिल्ली को GRAP के दूसरे चरण में शामिल कर दिया गया है। सोमवार को दिल्ली की हवा की गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में पहुंच गई। दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 310 से 324 के बीच दर्ज किया गया। इसके बाद अधिकारियों ने प्रदूषण पर काबू पाने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। दिवाली से पहले हवा को साफ रखने और प्रदूषण कम करने के लिए ये उपाय लागू किए गए है।

GRAP के दूसरे चरण के लागू होने से दिल्ली में निर्माण कार्यों, डीजल जनरेटर चलाने और वाहनों के इस्तेमाल पर सख्ती बढ़ गई है। वहीं इस दौरान स्कूल, ऑफिस, दुकानें और सार्वजनिक परिवहन सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी। आइए जानते हैं GRAP 2 में किन-किन पर चीजों पर रहेगी रोक।

अभी और खराब होगी दिल्ली की हवा

कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने 2 नवंबर को जारी आदेश में इस स्थिति का जिक्र किया। आयोग के मुताबिक, मौसम की खराब परिस्थितियों के कारण प्रदूषण का स्तर बढ़ा है। वहीं, IMD और IITM के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में भी दिल्ली की हवा की गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में बनी रह सकती है। फिलहाल ये पाबंदियां एहतियात के तौर पर लगाई गई हैं। दिवाली पर पूरी रोक नहीं है, लेकिन पटाखों के धुएं से प्रदूषण बढ़ने की आशंका है। इसलिए लोगों को प्रदूषण से जुड़े नियमों का पालन करना होगा।

कब लागू होता है GRAP 2

GRAP का दूसरा चरण तब लागू किया जाता , जब AQI 301 से 400 के बीच पहुंच जाता है। दिल्ली-NCR में इन पाबंदियों को लागू करने से पहले CAQM की विशेष समिति ने प्रदूषण के स्तर, मौसम की स्थिति और आने वाले दिनों के पूर्वानुमान की समीक्षा की। दिवाली से ठीक पहले लिए गए इस फैसले के पीछे मौसम की खराब स्थिति, पराली जलाने से निकलने वाला धुआं और पटाखों से बढ़ने वाले प्रदूषण की आशंका भी बड़ी वजह है।

इन चीजों पर होगी पाबंदी

प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए दिल्ली में धूल फैलाने वाले निर्माण और तोड़-फोड़ के कामों पर रोक लगा दी गई है। हालांकि, जरूरी सरकारी और बुनियादी ढांचे से जुड़े प्रोजेक्ट्स को कुछ शर्तों के साथ छूट मिलेगी। आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर भी पाबंदी रहेगी। इसके अलावा, 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक दिल्ली के बाहर रजिस्टर्ड नॉन-BS-VI गाड़ियों को राजधानी में चलाने या प्रवेश करने की अनुमति नहीं होगी। इसमें BS-IV और उससे पुरानी पेट्रोल-डीजल गाड़ियां भी शामिल हैं।

‘नो PUC, नो फ्यूल’ नियम लागू

दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए पेट्रोल पंपों पर ‘नो PUC, नो फ्यूल’ नियम भी लागू होगा। इसके तहत वैध प्रदूषण प्रमाणपत्र (PUC) नहीं होने पर गाड़ियों को पेट्रोल, डीजल और CNG नहीं मिलेगी। इसके अलावा, निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करने के लिए अधिकृत पार्किंग स्थलों पर 28 फरवरी 2027 तक पार्किंग शुल्क दोगुना कर दिया गया है। सड़कों पर धूल कम करने के लिए मशीनों से सफाई और पानी के छिड़काव का काम भी बढ़ाया जाएगा।

इलेक्ट्रिक और CNG वाहनों पर होगा प्रतिबंध

GRAP के दूसरे चरण में निजी वाहनों पर पूरी तरह पाबंदी नहीं लगाई गई है। दिल्ली में BS-VI गाड़ियां पहले की तरह चल सकेंगी, जबकि इलेक्ट्रिक और CNG वाहनों को भी कुछ प्रतिबंधों से छूट दी गई है। एंबुलेंस, दमकल और अन्य जरूरी सरकारी वाहनों को भी राहत मिलेगी। इसके अलावा, स्कूल, ऑफिस, दुकानें और सार्वजनिक परिवहन सामान्य रूप से चलते रहेंगे। जरूरी निर्माण और बुनियादी ढांचे से जुड़े काम भी विशेष अनुमति और धूल रोकने के नियमों का पालन करने पर जारी रखे जा सकेंगे।

GRAP 3 भी हो सकता है लागू

अगर दिल्ली में प्रदूषण का स्तर और बढ़ता है, तो GRAP के तीसरे चरण की पाबंदियां लागू की जा सकती हैं। यह चरण AQI के 401 से 450 के बीच पहुंचने पर लागू होता है, जबकि 450 से ऊपर जाने पर चौथा चरण लागू किया जाता है। इन चरणों में निर्माण कार्यों, वाहनों और ट्रैफिक पर और सख्ती बढ़ सकती है। साथ ही, स्कूलों और दफ्तरों के कामकाज पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे में GRAP का दूसरा चरण प्रदूषण की स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए शुरुआती चेतावनी के तौर पर काम करता है।