Delhi-NCR Pollution: दिवाली से पहले दिल्ली की हवा हुई ‘जहरीली’, GRAP-II की पाबंदियां लागू, इन चीजों पर लगी रोक

Delhi-NCR Pollution: दिवाली से पहले देश की राजधानी में बढ़ते प्रदूषण का स्तर को देखते हुए दिल्ली को GRAP के दूसरे चरण में शामिल कर दिया गया है। सोमवार को दिल्ली की हवा की गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में पहुंच गई। दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 310 से 324 के बीच दर्ज किया गया। इसके बाद अधिकारियों ने प्रदूषण पर काबू पाने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। दिवाली से पहले हवा को साफ रखने और प्रदूषण कम करने के लिए ये उपाय लागू किए गए है।

GRAP के दूसरे चरण के लागू होने से दिल्ली में निर्माण कार्यों, डीजल जनरेटर चलाने और वाहनों के इस्तेमाल पर सख्ती बढ़ गई है। वहीं इस दौरान स्कूल, ऑफिस, दुकानें और सार्वजनिक परिवहन सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी। आइए जानते हैं GRAP 2 में किन-किन पर चीजों पर रहेगी रोक।

अभी और खराब होगी दिल्ली की हवा

कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने 2 नवंबर को जारी आदेश में इस स्थिति का जिक्र किया। आयोग के मुताबिक, मौसम की खराब परिस्थितियों के कारण प्रदूषण का स्तर बढ़ा है। वहीं, IMD और IITM के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में भी दिल्ली की हवा की गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में बनी रह सकती है। फिलहाल ये पाबंदियां एहतियात के तौर पर लगाई गई हैं। दिवाली पर पूरी रोक नहीं है, लेकिन पटाखों के धुएं से प्रदूषण बढ़ने की आशंका है। इसलिए लोगों को प्रदूषण से जुड़े नियमों का पालन करना होगा।

कब लागू होता है GRAP 2

GRAP का दूसरा चरण तब लागू किया जाता , जब AQI 301 से 400 के बीच पहुंच जाता है। दिल्ली-NCR में इन पाबंदियों को लागू करने से पहले CAQM की विशेष समिति ने प्रदूषण के स्तर, मौसम की स्थिति और आने वाले दिनों के पूर्वानुमान की समीक्षा की। दिवाली से ठीक पहले लिए गए इस फैसले के पीछे मौसम की खराब स्थिति, पराली जलाने से निकलने वाला धुआं और पटाखों से बढ़ने वाले प्रदूषण की आशंका भी बड़ी वजह है।

इन चीजों पर होगी पाबंदी

प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए दिल्ली में धूल फैलाने वाले निर्माण और तोड़-फोड़ के कामों पर रोक लगा दी गई है। हालांकि, जरूरी सरकारी और बुनियादी ढांचे से जुड़े प्रोजेक्ट्स को कुछ शर्तों के साथ छूट मिलेगी। आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर भी पाबंदी रहेगी। इसके अलावा, 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक दिल्ली के बाहर रजिस्टर्ड नॉन-BS-VI गाड़ियों को राजधानी में चलाने या प्रवेश करने की अनुमति नहीं होगी। इसमें BS-IV और उससे पुरानी पेट्रोल-डीजल गाड़ियां भी शामिल हैं।

‘नो PUC, नो फ्यूल’ नियम लागू

दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए पेट्रोल पंपों पर ‘नो PUC, नो फ्यूल’ नियम भी लागू होगा। इसके तहत वैध प्रदूषण प्रमाणपत्र (PUC) नहीं होने पर गाड़ियों को पेट्रोल, डीजल और CNG नहीं मिलेगी। इसके अलावा, निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करने के लिए अधिकृत पार्किंग स्थलों पर 28 फरवरी 2027 तक पार्किंग शुल्क दोगुना कर दिया गया है। सड़कों पर धूल कम करने के लिए मशीनों से सफाई और पानी के छिड़काव का काम भी बढ़ाया जाएगा।

इलेक्ट्रिक और CNG वाहनों पर होगा प्रतिबंध

GRAP के दूसरे चरण में निजी वाहनों पर पूरी तरह पाबंदी नहीं लगाई गई है। दिल्ली में BS-VI गाड़ियां पहले की तरह चल सकेंगी, जबकि इलेक्ट्रिक और CNG वाहनों को भी कुछ प्रतिबंधों से छूट दी गई है। एंबुलेंस, दमकल और अन्य जरूरी सरकारी वाहनों को भी राहत मिलेगी। इसके अलावा, स्कूल, ऑफिस, दुकानें और सार्वजनिक परिवहन सामान्य रूप से चलते रहेंगे। जरूरी निर्माण और बुनियादी ढांचे से जुड़े काम भी विशेष अनुमति और धूल रोकने के नियमों का पालन करने पर जारी रखे जा सकेंगे।

GRAP 3 भी हो सकता है लागू

अगर दिल्ली में प्रदूषण का स्तर और बढ़ता है, तो GRAP के तीसरे चरण की पाबंदियां लागू की जा सकती हैं। यह चरण AQI के 401 से 450 के बीच पहुंचने पर लागू होता है, जबकि 450 से ऊपर जाने पर चौथा चरण लागू किया जाता है। इन चरणों में निर्माण कार्यों, वाहनों और ट्रैफिक पर और सख्ती बढ़ सकती है। साथ ही, स्कूलों और दफ्तरों के कामकाज पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे में GRAP का दूसरा चरण प्रदूषण की स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए शुरुआती चेतावनी के तौर पर काम करता है।

Delhi Air Quality: लगातार तीसरे भी खराब रही दिल्ली-NCR की हवा, अब सरकार ने उठाया ये बड़ा कदम

दिल्ली में एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी AQI लगातार तीसरे दिन भी खराब श्रेणी में दर्ज की गई। ताजा आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स 180 रहा। दशहरे के बाद शहर में प्रदूषण बढ़ गया है। धुएं और मौसम की खराब स्थिति के कारण हवा की गुणवत्ता पर असर पड़ा है। इस सप्ताह की शुरुआत में ही दिल्ली की हवा खराब श्रेणी में पहुंच गई थी। इसके बाद एयर क्वालिटी मैनेजमेंट आयोग ने दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए कई फेज में चलने वाले एक्शन प्लान के पहले फेज को लागू कर दिया। इसका उद्देश्य प्रदूषण को नियंत्रित करना और एयर क्वालिटी इंडेक्स को और खराब होने से रोकना है।

जारी रहेंगी पाबंदियां

दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण पर काबू पाने के लिए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (ग्रैप) का पहला चरण लागू रहेगा। प्रदूषण कम करने के लिए अधिकारी लगातार जरूरी कदम उठा रहे हैं। इस चरण के तहत सड़कों की धूल पर नियंत्रण, निर्माण और तोड़फोड़ से जुड़ी गतिविधियों की निगरानी, कचरे का सही प्रबंधन और वाहनों से निकलने वाले धुएं को कम करने पर ध्यान दिया जाएगा। इन उपायों का मकसद प्रदूषण को बढ़ने से रोकना और हवा की गुणवत्ता में सुधार करना है।

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री ने दिया निर्देश

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए सरकार ने इसे नियंत्रित करने के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे प्रदूषण से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों के लिए अलग-अलग कार्ययोजना तैयार करें। इन योजनाओं में प्रदूषण के कारणों की पहचान करने, संबंधित विभागों की जिम्मेदारी तय करने और सुधार के लिए समय सीमा निर्धारित करने पर जोर दिया जाएगा। समीक्षा बैठक के दौरान सिरसा ने अधिकारियों से कहा कि वे वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) के आंकड़ों के आधार पर स्थानीय स्तर पर प्रदूषण के स्रोतों का पता लगाएं।

कार्रवाई करने का दिया निर्देश

सिरसा ने कहा कि प्रदूषण फैलने के कारणों की पहचान करके मौके पर ही कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि हर विभाग के पास काम करने की स्पष्ट योजना और उसे पूरा करने की समय सीमा होनी चाहिए। साथ ही, सभी विभागों को अपने काम के नतीजों की जिम्मेदारी भी लेनी होगी। उन्होंने संबंधित एजेंसियों को सड़कों और सार्वजनिक जगहों से अतिक्रमण हटाने, गड्ढों की मरम्मत करने, सड़क किनारे खुली मिट्टी को ढकने या उसका उचित उपचार करने और धूल वाली जगहों पर नियमित रूप से पानी छिड़कने के निर्देश दिए। इन कदमों का मकसद धूल से होने वाले प्रदूषण को कम करना है।

सबसे ज्यादा इस वजह से होता प्रदूषण

सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में वायु प्रदूषण की सबसे बड़ी वजह परिवहन है। कुल प्रदूषण में इसकी हिस्सेदारी 20.3 प्रतिशत रही। इसके बाद घरों से होने वाले प्रदूषण का हिस्सा 5.2 प्रतिशत, उद्योगों का 4.2 प्रतिशत और निर्माण कार्यों का 2.6 प्रतिशत रहा। वहीं, ऊर्जा क्षेत्र की हिस्सेदारी 2 प्रतिशत, कचरा जलाने की 1.8 प्रतिशत और सड़कों की धूल की 1.4 प्रतिशत रही। अन्य स्रोतों से होने वाला प्रदूषण 1.3 प्रतिशत दर्ज किया गया।

लोगों से की ये अपील

सिरसा ने कहा कि दिल्ली की हवा को साफ रखने के लिए सरकार की ओर से कार्रवाई करने के साथ-साथ लोगों का सहयोग भी जरूरी है। उन्होंने लोगों से कचरा जलाने से बचने और निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करने की अपील की, ताकि वायु प्रदूषण पर काबू पाया जा सके। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे कचरा न जलाएं, सड़कों पर गंदगी न फैलाएं और अपने वाहनों के प्रदूषण नियंत्रण (पीयूसी) प्रमाणपत्र की वैधता बनाए रखें।

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