Delhi AQI today: दिल्ली का AQI पहुंचा 480 के पार, कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज

Delhi AQI today: गुरुवार सुबह दिल्ली की हवा की गुणवत्ता ‘खतरनाक’ (hazardous) श्रेणी में बनी रही। सुबह 8:01 बजे कुल वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 482 दर्ज किया गया, जबकि राष्ट्रीय राजधानी के कई हिस्सों में प्रदूषण का स्तर ‘गंभीर’ (severe) बना रहा।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, सात निगरानी केंद्रों (monitoring stations) पर AQI का स्तर 400 से ऊपर दर्ज किया गया, जो इसे ‘गंभीर’ श्रेणी में रखता है। जहांगीरपुरी सबसे ज्यादा प्रभावित इलाका रहा, जहां AQI 459 दर्ज किया गया। इसके बाद पंजाबी बाग में सबसे अधिक AQI 446 दर्ज किया गया, इसके बाद नरेला में 434, रोहिणी में 431, आरके पुरम में 416, बवाना में 412, दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस में 408 और पटपड़गंज में 405 AQI दर्ज किया गया।

कई अन्य इलाकों में हवा की गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ (very poor) श्रेणी में रही। ओखला फेज-2 और इंडिया गेट दोनों जगह AQI 399 दर्ज किया गया, इसके बाद ITO में 397, द्वारका सेक्टर 8 में 396, चांदनी चौक में 356 और वसुंधरा एन्क्लेव में 330 AQI रहा।

आनंद विहार में AQI 293 दर्ज किया गया, जबकि IMD लोधी रोड स्टेशन पर यह 268 रहा; ये दोनों ही ‘खराब’ (poor) श्रेणी में आते हैं। दिल्ली में हवा की गुणवत्ता के ‘गंभीर’ (severe) श्रेणी में पहुंचने पर, केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने मंगलवार को कहा कि केंद्र का वायु गुणवत्ता पैनल मौसम संबंधी स्थितियों – जैसे हवा की दिशा, गति और हवा के बहाव – पर लगातार नजर रख रहा है।

उन्होंने भरोसा दिलाया कि जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। हवा की गुणवत्ता में तेजी से गिरावट तब आई है, जब पिछले वर्षों की तुलना में पराली जलाने की घटनाओं में ‘कमी’ आई है। सरकार का दावा है कि धान की पराली के एक बड़े हिस्से का प्रबंधन ‘एक्स-सीटू’ (ex-situ) तरीके से किया गया है।

पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सहित पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की घटनाओं में कमी के बारे में पूछे जाने पर यादव ने कहा- “हां, मैंने पहले ही बताया है कि इस बार धान की लगभग 40 प्रतिशत पराली का इस्तेमाल ‘एक्स-सीटू’ (खेत के बाहर) प्रबंधन के जरिए किया गया है।”

इन उपायों के बावजूद हवा की गुणवत्ता (एयर क्वालिटी) के ‘गंभीर’ (सीवियर) श्रेणी में बने रहने को लेकर ANI के सवाल का जवाब देते हुए यादव ने कहा कि CAQM मौसम संबंधी स्थितियों पर बारीकी से नजर रख रहा है और अपने आकलन के आधार पर जरूरी कदम उठा रहा है। उन्होंने कहा- “CAQM लगातार मौसम संबंधी स्थितियों पर नजर रख रहा है, जिसमें हवा की दिशा, हवा की गति और हवा का बहाव शामिल है। इन आकलनों के आधार पर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।”

LIVE: दिल्ली की हवा जहरीली, एम्स के पास AQI 400 पार

LIVE: दिल्ली की हवा जहरीली, एम्स के पास AQI 400 पार

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Latest News Today Live Updates in Hindi : दिल्ली में हवा की गुणवत्ता गुरुवार को भी गंभीर स्तर पर बनी हुई है। दिल्ली एम्स के पास AQI 400 पार। पल पल की जानकारी…

-मध्यावधि चुनाव में ट्रंप के हारने पर अमेरिकी शेयर बाजार चमके। 1500 से अधिक अंकों का उछाल। भारतीय बाजारों में भी दिखेगा असर।

-कच्चे तेल में भारी गिरावट। अमेरिकी मिडटर्म इलेक्शन में ट्रंप की करारी हार के बाद क्रूड के दामों में भारी गिरावट। ब्रेंट क्रूड घटकर 94.09 पर पहुंचा। WTI क्रूड 87.28 डॉलर प्रति बैरल।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, दिल्ली एम्स के आसपास के इलाके में वायु गुणवत्ता सूचकांक 402 है, जिसे ‘गंभीर’ श्रेणी में रखा गया है। जहांगीरपुरी, बवाना समेत कई इलाकों में भी AQI 400 पार पहुंच गया। इंडिया गेट के आसपास के इलाके में AQI 399 है, जो ‘बहुत खराब’ की श्रेणी में आता है। आनंद विहार के आस-पास के क्षेत्र में AQI 296 है, जिसे ‘खराब’ श्रेणी में रखा गया है।

Delhi Air Pollution Severe: दिल्ली की जहांगीरपुरी में AQI 452 पहुंचा, जानिए क्यों शहर में सबसे खराब हुई यहां की हवा

दिल्ली में वायु प्रदूषण की स्थिति लगातार चिंताजनक बनी हुई है। राजधानी के कई इलाकों में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में पहुंच चुकी है लेकिन जहांगीरपुरी में प्रदूषण का स्तर सबसे ज्यादा दर्ज किया गया है। बुधवार को यहां एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 452 तक पहुंच गया। इसे एयर पलूशन की गंभीर (Severe) कैटिगरी माना जाता है।

आपको बता दें कि जहांगीरपुरी में पिछले कुछ दिनों से लगातार प्रदूषण का स्तर ऊंचा बना हुआ है। यहां का 24 घंटे का औसत AQI भी लगातार बढ़ा है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक इलाके में औद्योगिक गतिविधियों से होने वाला उत्सर्जन, हवा की रफ्तार में कमी और प्रदूषकों को फैलने से रोकने वाली प्रतिकूल परिस्थितियां इसकी बड़ी वजह हो सकती हैं। एक्सपर्ट्स ने यह भी आशंका जताई है कि जहांगीरपुरी के एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन के पास स्थित एक ऊंची इमारत प्रदूषकों के उचित तरीके से फैलने में बाधा डाल सकती है। हालांकि प्रदूषण के लगातार बढ़े स्तर के पीछे किसी एक वजह को जिम्मेदार नहीं बताया गया है। इसके लिए स्थानीय उत्सर्जन और मौसम से जुड़ी परिस्थितियों के मिले-जुले असर की बात कही गई है।

जहांगीरपुरी में AQI 452, लगातार बढ़ रहा प्रदूषण

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक बुधवार दोपहर 2 बजकर 5 मिनट पर जहांगीरपुरी के मॉनिटरिंग स्टेशन पर AQI 452 दर्ज किया गया। यह गंभीर श्रेणी में आता है। पिछले कुछ दिनों के आंकड़े भी बताते हैं कि यहां प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ा है। जहांगीरपुरी में 31 अक्टूबर को 243 के स्तर पर रहा AQI अगले कुछ दिनों में तेजी से बढ़ा। रविवार को यह 378 और सोमवार को 436 तक पहुंच गया। मंगलवार को 24 घंटे का औसत AQI 462 दर्ज किया गया। बुधवार को दोपहर के समय भी यहां का AQI 452 रहा। पिछले कुछ दिनों से जहांगीरपुरी दिल्ली के उन प्रदूषण हॉटस्पॉट में शामिल है, जहां शहर के दूसरे मॉनिटरिंग स्टेशनों के मुकाबले सबसे अधिक AQI दर्ज किया जा रहा है।

जहांगीरपुरी में प्रदूषण बढ़ने की क्या है वजह?

जहांगीरपुरी में प्रदूषण के बढ़ते स्तर के पीछे कई कारण हो सकते हैं। Envirocatalysts के संस्थापक और लीड एनालिस्ट सुनील दहिया ने पीटीआई से बातचीत में इसके लिए तीन प्रमुख कारकों की ओर इशारा किया है। इनमें औद्योगिक उत्सर्जन, हवा की कम होती रफ्तार और प्रदूषकों के फैलाव में संभावित बाधा शामिल हैं। सुनील दहिया के मुताबिक जहांगीरपुरी के आसपास औद्योगिक गतिविधियां काफी ज्यादा हैं। उद्योगों में होने वाली दहन प्रक्रिया (Combustion) से प्रदूषकों का उत्सर्जन होता है, जिससे हवा में PM2.5 का स्तर बढ़ सकता है। उनका कहना है कि इलाके में औद्योगिक गतिविधियों के कारण होने वाला उत्सर्जन प्रदूषण के ऊंचे स्तर की एक प्रमुख वजह हो सकता है। जब पहले से ही प्रदूषण का स्तर अधिक हो और स्थानीय स्तर पर उत्सर्जन जारी रहे, तो हवा की गुणवत्ता और खराब हो सकती है।

प्रदूषण बढ़ने की दूसरी वजह पिछले कुछ दिनों में हवा की स्पीड में आई गिरावट बताई गई है। सुनील दहिया के मुताबिक हवा की रफ्तार कम होने से वातावरण में मौजूद प्रदूषकों को फैलने का पर्याप्त मौका नहीं मिल पा रहा है। पहले से प्रदूषण का स्तर ऊंचा होने और हवा का वेंटिलेशन ठीक नहीं रहने के कारण प्रदूषक एक ही क्षेत्र में जमा हो सकते हैं। इससे जहांगीरपुरी में प्रदूषण का स्तर लगातार ऊंचा बना रह सकता है। सुनील दहिया ने जहांगीरपुरी के एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन के पास मौजूद एक ऊंची इमारत की ओर भी ध्यान दिलाया है। उनके मुताबिक स्टेशन के एक तरफ स्थित यह इमारत प्रदूषकों के उचित तरीके से फैलने में रुकावट पैदा कर सकती है। अगर प्रदूषकों को फैलने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिलती, तो मॉनिटरिंग स्टेशन के आसपास उनका जमाव बढ़ सकता है।

दिल्ली का औसत AQI भी 378, हवा बहुत खराब श्रेणी में

जहांगीरपुरी में प्रदूषण का स्तर गंभीर श्रेणी में पहुंचने के साथ ही दिल्ली की समग्र वायु गुणवत्ता भी चिंताजनक बनी हुई है। बुधवार दोपहर 3 बजकर 5 मिनट पर राजधानी का औसत AQI 378 दर्ज किया गया। यह बहुत खराब (Very Poor) श्रेणी में आता है।

आपको बता दें कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मानकों के मुताबिक AQI को छह श्रेणियों में बांटा गया है। इनके आधार पर हवा की गुणवत्ता और प्रदूषण के स्तर का आकलन किया जाता है। 0-50 अच्छी (Good),

51-100 संतोषजनक (Satisfactory), 101-200 मध्यम (Moderate), 201-300 खराब (Poor), 301-400 बहुत खराब (Very Poor), 401-500 गंभीर (Severe).

दिल्ली में GRAP का दूसरा चरण लागू, प्रदूषण रोकने के लिए क्या हो रहे उपाय?

दिल्ली में फिलहाल ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का दूसरा चरण लागू है। यह तब लागू किया जाता है जब शहर की वायु गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में पहुंच जाती है। GRAP के दूसरे चरण के तहत 12 सूत्रीय कार्ययोजना के माध्यम से प्रदूषण पर नियंत्रण के उपाय किए जाते हैं। इसमें मुख्य रूप से सड़कों की सफाई, धूल नियंत्रण और निर्माण गतिविधियों से होने वाले प्रदूषण पर निगरानी बढ़ाने जैसे कदम शामिल हैं।

आप ने दिल्ली में एक्यूआई आंकड़ों में हेरफेर का आरोप लगाया

आम आदमी पार्टी (आप) ने बुधवार को भाजपा के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार पर वायु गुणवत्ता के आंकड़ों में हेरफेर करने का आरोप लगाया और राष्ट्रीय राजधानी में बढ़ते प्रदूषण के बीच इस मामले में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की।

शहर के सबसे प्रदूषित इलाकों में शामिल जहांगीरपुरी स्थित निगरानी केंद्र का हवाला देते हुए ‘आप’ की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि प्रदूषण के स्तर की रीडिंग में हेरफेर करने के लिए वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों के आसपास पानी का छिड़काव किया जा रहा है। भारद्वाज ने कहा कि उनकी पार्टी ने मुख्यमंत्री गुप्ता और सिरसा के सामने बार-बार यह मुद्दा उठाया, लेकिन दोनों ने उनकी चिंताओं पर ध्यान नहीं दिया।

उन्होंने कहा मैंने और आम आदमी पार्टी के कई नेताओं तथा पार्षदों ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया है कि सबसे प्रदूषित इलाकों में शामिल जहांगीरपुरी में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) निगरानी केंद्र के आसपास पानी का छिड़काव किया जा रहा है।

भारद्वाज ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को औपचारिक शिकायत देकर वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) के आंकड़ों में कथित हेरफेर के लिए गुप्ता और सिरसा के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू करने की मांग की।

उन्होंने निगरानी केंद्रों में कथित तौर पर भौतिक हस्तक्षेप की तत्काल, स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच कराने के साथ ही दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) द्वारा संचालित आंकड़े जुटाने वाली प्रणालियों और निगरानी केंद्रों का सख्त ऑडिट कराने की भी मांग की।

सीपीसीबी को लिखे पत्र में भारद्वाज ने कहा कि अस्थमा से पीड़ित मरीजों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और छोटे बच्चों सहित लाखों संवेदनशील लोग अपनी रोजमर्रा की गतिविधियों के बारे में अहम फैसले लेने के लिए आधिकारिक एक्यूआई आंकड़ों पर निर्भर रहते हैं।

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आप नेता ने आरोप लगाया जब दिल्ली सरकार एक्यूआई के मनगढ़ंत और कम दर्शाने वाले आंकड़े जारी करती है, तो इससे प्रभावित होने वाले मरीजों को सुरक्षा का झूठा एहसास होता है। उन्होंने दावा किया कि ऐसे आंकड़ों के कारण लोग बाहर निकल सकते हैं या जरूरी चिकित्सकीय सावधानियां बरतना छोड़ सकते हैं, जिससे वे खतरनाक प्रदूषकों के संपर्क में आ सकते हैं।

भारद्वाज ने आगाह किया कि इस तरह प्रदूषण के संपर्क में आने से सांस और हृदय संबंधी गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं। भारद्वाज ने कहा कि उनकी पार्टी को उम्मीद थी कि भाजपा सरकार के दूसरे वर्ष के कार्यकाल में प्रदूषण प्रबंधन में सुधार होगा, लेकिन स्थिति में बहुत कम बदलाव आया है। पार्टी ने वायु प्रदूषण और निगरानी के आंकड़ों में कथित हेरफेर के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए सोशल मीडिया अभियान शुरू करने की भी घोषणा की। भारद्वाज ने कहा प्रदूषण से प्रभावित होने वाले कई लोग शारीरिक रूप से विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं हो सकते, इसलिए हम जागरूकता फैलाने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करेंगे।

दिल्ली में बिगड़ती वायु गुणवत्ता को लेकर आप और भाजपा एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराती रही हैं। सिरसा ने इससे पहले राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण बढ़ाने वाली पराली जलाने की घटनाओं के लिए पंजाब की आप सरकार को जिम्मेदार ठहराया था। सीपीसीबी के अनुसार, बुधवार को दिल्ली की वायु गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रही और एक्यूआई 379 दर्ज किया गया। इन आरोपों पर दिल्ली सरकार या भाजपा की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।

Pic Credit : UNI

दिवाली से पहले दिल्ली-एनसीआर में जहरीली हुई हवा, रोहिणी-बवाना समेत कई इलाकों में AQI ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंचा

दिवाली से पहले दिल्ली-एनसीआर में जहरीली हुई हवा, रोहिणी-बवाना समेत कई इलाकों में AQI 'गंभीर' श्रेणी में पहुंचा

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Delhi Pollution : दिवाली से पहले दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण ने चिंता बढ़ा दी है। दिल्ली और उसके आसपास के शहरों की हवा की हालत खराब है। मंगलवार सुबह 8 बजे दिल्ली के कई इलाकों में एक्यूआई 400 के पार पहुंच गया। इससे पूरे शहर में प्रदूषण के बिगड़ते स्तर को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। ALSO READ: Top News 3 November: आंध्र प्रदेश से टकराया चक्रवात मुरासु, दिल्ली में AQI 400 पार; देश-दुनिया की 5 बड़ी खबरें

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के कई निगरानी केंद्रों पर एक्यूआई का स्तर ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज किया गया, जबकि कई अन्य इलाकों में हवा की गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ बनी रही।

 

सीपीसीबी के सुबह 8 बजे के आंकड़ों के अनुसार, रोहिणी में एक्यूआई 429 दर्ज किया गया, पंजाबी बाग में 424 और बवाना में 408 रहा। इस तरह ये तीनों इलाके ‘गंभीर’ श्रेणी में आ गए हैं। पटपड़गंज में एक्यूआई 379 दर्ज किया गया। आर के पुरम में एक्यूआई 374, आईटीओ में 373, ओखला फेज-2 में 352, चांदनी चौक में 352, जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में 355 और जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में 328 रहा।

 

सीपीसीबी के अनुसार, अक्षरधाम मंदिर के आसपास के इलाके में एक्यूआई 373 है, जिसे ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रखा गया है। दिल्ली एयरपोर्ट के टर्मिनल 3 पर एक्यूआई 287 दर्ज किया गया, आनंद विहार में 279, उत्तम नगर में 274 और आईएमडी लोधी रोड पर 226 रहा।

 

दिल्ली-NCR में ग्रेप 2 की पाबंदियां

दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण बढ़ने के बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने सोमवार को ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के दूसरे चरण यानी GRAP-2 के तहत पाबंदियां लागू कर दी हैं।

 

GRAP के दूसरे चरण को तब लागू किया जाता है, जब दिल्ली की हवा खराब से बेहद खराब श्रेणी की ओर बढ़ती है। इसका उद्देश्य प्रदूषण के स्रोतों पर नियंत्रण करना और हवा की गुणवत्ता को और बिगड़ने से रोकना है। इसके तहत सड़क की सफाई, पानी का छिड़काव, धूल नियंत्रण और यातायात से होने वाले प्रदूषण को कम करने जैसे कदम उठाए जाते हैं।
 

 

इन बातों का रखें ध्यान

प्रदूषण बढ़ने के दौरान खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी परेशानी वाले लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। सुबह और देर शाम बाहर व्यायाम करने से बचें। जरूरत पड़ने पर बाहर निकलते समय अच्छी गुणवत्ता वाला मास्क इस्तेमाल करें और आंखों में जलन, खांसी या सांस लेने में परेशानी होने पर चिकित्सकीय सलाह लें।

क्या बोले पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा?

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा, मैं अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया से विनती करता हूं कि दिल्ली के साथ ऐसा अत्याचार ना करें। आप जो 10 साल में दिल्ली को बर्बाद करके गए, अब दिल्ली वापस अपने दिल्ली वाले रूप में आ रही है। दिल्ली का प्रदूषण लगातार कम हो रहा है। दिल्ली के लोग अपने आपको ठीक करने के लिए EV गाड़ियां खरीद रहे हैं। दिल्ली के लोग मिलकर इस प्रदूषण की जंग से लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब में पराली जलाना बंद कर दीजिए। पराली के जलने से जो दिल्ली पिछले एक साल से साफ थी, आपने पंजाब में आग लगाकर (पराली जलाकर) फिर से दिल्ली में गंदी हवा भेजने का काम किया है।

दिल्ली-NCR में सांस लेना हुआ मुश्किल! AQI 370 के पार, क्या अब और सख्त होंगी पाबंदियां?

Delhi Pollution: देश की राजधानी दिल्ली में एक बार फिर प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगा है। बढ़ते प्रदूषण की वजह से लोगों को खराब हवा में सांस लेने पर मजबूर होना पड़ रहा है। मंगलवार को इंडिया गेट के आसपास AQI 374 दर्ज किया गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने एक दिन पहले ही ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के दूसरे चरण यानी स्टेज-II की पाबंदियां लागू की थीं। इसके बावजूद राजधानी में प्रदूषण का स्तर चिंताजनक बना हुआ है। वहीं, ठंड बढ़ने, हवाओं की रफ्तार कम होने और आसपास के राज्यों में पराली जलाने से आने वाले दिनों में प्रदूषण की समस्या और बढ़ सकती है।

सोमवार को कितना था AQI

सोमवार को दिल्ली का औसत AQI 324 दर्ज किया गया था, जो हवा की ‘बहुत खराब’ स्थिति को दर्शाता है। दिवाली से पहले बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए CAQM ने पूरे दिल्ली-NCR में GRAP के दूसरे चरण की पाबंदियां लागू कर दीं। इसके तहत सड़कों की मशीनों से सफाई और धूल कम करने के लिए नियमित रूप से पानी का छिड़काव किया जाएगा। इसके अलावा, निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करने के लिए पार्किंग शुल्क बढ़ाया गया है। लोगों को सार्वजनिक परिवहन अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने के मकसद से मेट्रो, CNG और इलेक्ट्रिक बसों की संख्या और सेवाओं को भी बढ़ाया जाएगा।

हर साल बढ़ता है प्रदुषण

दिल्ली में हर साल अक्टूबर से प्रदूषण बढ़ने लगता है। इस साल देर तक हुई बारिश और तेज हवाओं के कारण कुछ समय तक प्रदूषण का असर कम रहा। लेकिन अब ठंड बढ़ने और हवाओं की रफ्तार कम होने से प्रदूषण फिर बढ़ने लगा है। हवा धीमी होने के कारण धुआं और धूल के कण एक जगह जमा हो जाते हैं, जिससे लोगों को सांस लेने में परेशानी होती है। वहीं, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में पराली जलाने से निकलने वाला धुआं भी दिल्ली की हवा को खराब कर रहा है। इस साल बारिश देर तक होने की वजह से पंजाब और हरियाणा में फसलों की कटाई भी देर से हुई। इसके कारण पराली जलाने का समय अक्टूबर के आखिरी दिनों से बढ़कर नवंबर तक पहुंच गया है। इस दौरान सर्दियों में हवाएं भी धीमी चलती हैं, जिससे पराली का धुआं हवा में फैलने के बजाय आसपास जमा हो जाता है और प्रदूषण बढ़ जाता है।

21 अक्टूबर को ही लगाया गया GRAP-1

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए CAQM ने 21 अक्टूबर को ही GRAP का पहला चरण लागू कर दिया था। उस समय राजधानी का AQI 244 दर्ज किया गया था। इसके तहत लोगों को निजी वाहनों की जगह सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। साथ ही, वाहनों के PUC सर्टिफिकेट की जांच तेज करने, सड़क किनारे खाने-पीने की दुकानों और व्यावसायिक तंदूरों में कोयले व लकड़ी जलाने पर रोक लगाने जैसे कदम उठाए गए। इसके अलावा, प्रदूषण कम करने के लिए डीजल जनरेटर के इस्तेमाल को भी सीमित किया गया।

दिल्ली में लागू है GRAP 2

GRAP के दूसरे चरण में प्रदूषण कम करने के लिए कई अतिरिक्त कदम उठाए गए हैं। इसके तहत सड़कों की मशीनों से बार-बार सफाई की जाएगी और धूल कम करने के लिए पानी का छिड़काव बढ़ाया जाएगा। साथ ही, निजी गाड़ियों का इस्तेमाल कम करने के लिए पार्किंग शुल्क बढ़ाने और सार्वजनिक परिवहन की सुविधाएं बेहतर करने पर जोर दिया गया है। अगर प्रदूषण का स्तर और बढ़ता है, तो GRAP के तीसरे और चौथे चरण की सख्त पाबंदियां लागू की जा सकती हैं। इनमें BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल कारों के चलने पर रोक लगाने के साथ-साथ सबसे गंभीर स्थिति में ऑड-ईवन नियम लागू करना भी शामिल है।

जंगलों की आग ने बिगाड़े 3 देशों के रिश्ते:इंडोनेशिया के जहरीले धुएं से मलेशिया-सिंगापुर परेशान, विरोध करने पर गैस सप्लाई घटाई

इंडोनेशिया के जंगलों में लगी आग का धुआं पड़ोसी देशों मलेशिया और सिंगापुर के लिए मुसीबत बन गया है। कालिमंतान, पापुआ और सुमात्रा के जंगलों से उठ रहा जहरीला धुआं हवा के साथ इन देशों तक पहुंच रहा है। इससे लोगों को सांस लेने में परेशानी और सिरदर्द जैसी समस्याएं हो रही हैं। मलेशिया के कुछ इलाकों में स्कूल बंद करने पड़े हैं। धुआं कई हफ्तों से बना हुआ है, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। मलेशिया में लोगों ने इंडोनेशिया के उत्पादों का बहिष्कार शुरू कर दिया है, जबकि सिंगापुर ने आग से जुड़ी कंपनियों की जांच शुरू की है। इस बीच इंडोनेशिया ने सिंगापुर को गैस का निर्यात घटाने का ऐलान किया है। उसने इसकी वजह अपने देश की ऊर्जा जरूरतों को बताया है। खेती के लिए जंगलों में लगाई जाती है आग इंडोनेशिया में जंगलों में आग लगने की घटनाएं हर साल होती हैं। इसकी बड़ी वजह खेती और कारोबार के लिए जंगलों को साफ करना है। खासतौर पर पाम ऑयल की खेती के लिए बड़े इलाकों में जमीन तैयार की जाती है। इसके लिए कई जगह जंगलों में आग लगाई जाती है। आग जमीन के नीचे मौजूद पीटलैंड तक फैल जाए तो इसे बुझाना और मुश्किल हो जाता है। पीटलैंड में मौजूद सूखे जैविक पदार्थ आग को लंबे समय तक सुलगाए रखते हैं। इस साल अल नीनो के कारण इंडोनेशिया के जंगलों और पीटलैंड में सूखे की स्थिति ज्यादा गंभीर रही। इससे आग तेजी से फैली और उस पर काबू पाना मुश्किल हो गया। आमतौर पर इस तरह के धुएं का असर मलेशिया और सिंगापुर में कुछ दिनों तक रहता है, लेकिन इस बार यह कई हफ्तों से बना हुआ है। मलेशिया में बहिष्कार, सिंगापुर में सरकार की आलोचना धुएं से परेशान मलेशिया के लोगों ने इंडोनेशिया के उत्पादों का बहिष्कार शुरू कर दिया है। मलेशियाई सांसद सैयद सादिक ने आग से जुड़ी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। उन्होंने लोगों से ऐसी कंपनियों को क्षेत्र में अलग-थलग करने की अपील भी की। सिंगापुर सरकार ने धुएं से लोगों को बचाने के लिए सैकड़ों राहत केंद्र बनाए हैं। बच्चों, बुजुर्गों और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे लोगों को मास्क बांटे जा रहे हैं। सरकार धुएं से जुड़े मौजूदा कानूनों को सख्त करने पर भी विचार कर रही है। हालांकि सिंगापुर में लोगों ने अपनी सरकार की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सरकार को पहले से पता था कि इस साल अल नीनो के कारण सूखे की स्थिति गंभीर होगी। इसके बावजूद धुएं से निपटने की पर्याप्त तैयारी नहीं की गई। इंडोनेशिया के अधिकारी के बयान से बढ़ा विवाद इस बीच इंडोनेशिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जंगलों में लगने वाली आग पर इंसानों का नियंत्रण नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि पड़ोसी देशों सिंगापुर और मलेशिया को मिलने वाली ऑक्सीजन भी इंडोनेशिया के जंगलों से आती है। इस बयान पर सिंगापुर ने नाराजगी जताई। वहां के वरिष्ठ मंत्री के. शनमुगम ने इसे निराशाजनक और गलत बताया। उन्होंने कहा कि जहरीले धुएं से लोगों की सेहत को गंभीर नुकसान हो रहा है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। शनमुगम ने कहा कि इस समस्या से दोनों देशों के नागरिक प्रभावित हो रहे हैं, इसलिए इसे आपसी विवाद का मुद्दा नहीं बनाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इंडोनेशिया के लोग भी प्रदूषण से परेशान हैं। ऐसे में आग लगाने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करना इंडोनेशिया के भी हित में है। इंडोनेशिया ने पहले धमकी दी फिर गैस सप्लाई रोकी विवाद के कुछ दिन बाद इंडोनेशिया ने सिंगापुर को गैस का निर्यात कम करने का ऐलान किया। सरकार ने इसकी वजह अपने देश में ऊर्जा की बढ़ती जरूरत बताई। इंडोनेशिया के कुछ हिस्सों में बिजली की कमी भी सामने आई है। हालांकि, इस फैसले को सिंगापुर की आलोचना के बाद दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। इससे पहले इंडोनेशिया के ऊर्जा मंत्री ने चेतावनी दी थी कि जो देश इंडोनेशिया का सम्मान नहीं करेंगे, उनकी गैस सप्लाई रोकी जा सकती है। राष्ट्रपति प्रबोवो ने भी जंगलों में आग के मुद्दे पर उन देशों का जिक्र किया था, जो इंडोनेशिया का अपमान करते हैं। सिंगापुर का कहना है कि गैस सप्लाई में यह कटौती उसकी कुल रोजाना जरूरत के 2% से भी कम है। इसलिए इससे उसकी ऊर्जा आपूर्ति पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। मलेशिया इंडोनेशिया से टकराव क्यों नहीं चाहता?

Delhi Air Pollution: दिल्ली में हवा हुई जहरीली! AQI 327 पहुंचा, GRAP-2 लागू, कोयला-तंदूर पर बैन, जानें क्या-क्या बंद होगा?

दिल्ली-NCR में प्रदूषण एक बार फिर बेकाबू हो गया है, हवा की गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। राजधानी का Air Quality Index (AQI) सोमवार को 327 तक पहुंच गया, जो इस बार का अब तक का सबसे खराब स्तर है। CAQM (Commission for Air Quality Management) ने हालात को देखते हुए तुरंत GRAP का स्टेज-2 पूरे NCR में लागू करने का निर्देश दिया है।

AQI में इस तेज उछाल की सबसे बड़ी वजह खराब मौसम बताया जा रहा है। सिर्फ 3 दिन में AQI 117 से सीधा 324 पर पहुंच गया, जबकि 31 अक्टूबर को AQI 117 (Moderate), 1 नवंबर को 261 (Poor) और 2 नवंबर को 324 (Very Poor) रहा।

सबसे खराब हालत जहांगीरपुरी की है, जहां AQI 447 रिकॉर्ड किया गया, जो Severe कैटेगरी में है। रोहिणी में 420 और पंजाबी बाग में 415 AQI दर्ज हुआ। 58 में से 38 मॉनिटरिंग स्टेशनों पर हवा बहुत खराब है।

GRAP-2 में क्या-क्या बैन हुआ?

Stage-2 लागू होने के साथ ही दिल्ली-NCR में कई सख्त पाबंदियां लगाई गई हैं, जो Stage-1 के साथ मिलकर लागू रहेंगी:

  1. कोयला और लकड़ी पर बैन: होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों में कोयले और लकड़ी के तंदूर के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
  2. DG सेट पर रोक: इमरजेंसी को छोड़कर सभी डीजल जनरेटर सेट के इस्तेमाल पर सख्त पाबंदी है।
  3. गाड़ियों पर शिकंजा: दिल्ली में BS-IV और उससे पुरानी गाड़ियों की एंट्री बैन रहेगी। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने साफ किया है कि नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद से आने वाली Non BS-VI गाड़ियों को भी 31 जनवरी तक दिल्ली में एंट्री नहीं मिलेगी। बिना PUC वाली गाड़ियों पर भी एक्शन होगा।
  4. पार्किंग फीस बढ़ी: प्राइवेट गाड़ियों को रोकने के लिए पार्किंग फीस बढ़ा दी गई है।
  5. सड़कों की सफाई: सभी सड़कों पर रोजाना Mechanical Sweeping और पानी का छिड़काव, Anti-Smog Gun का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा।
  6. कंस्ट्रक्शन साइटों पर सख्ती: धूल रोकने के नियमों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है।

क्या स्कूल बंद रहने वाले हैं?

फिलहाल स्कूल-कॉलेज बंद नहीं होंगे। CAQM के नियमों के मुताबिक स्कूल बंद करना या ऑनलाइन क्लास GRAP Stage-III (AQI 401-450) और Stage-IV (AQI 450+) में ही होता है। हालांकि प्राइवेट स्कूल आउटडोर एक्टिविटी और मॉर्निंग असेंबली को लेकर अपनी एडवाइजरी जारी कर सकते हैं। IMD और IITM का अनुमान है कि अगले कुछ दिन तक AQI Very Poor कैटेगरी में ही बना रहेगा, 5 नवंबर तक इसमें सुधार की उम्मीद कम है।

दिल्ली-NCR की हवा अगले कुछ दिनों तक जहरीली ही रहने वाली है। 5 नवंबर तक AQI में सुधार की कोई उम्मीद नहीं है, ऐसे में GRAP-2 की पाबंदियां सख्ती से लागू रहेंगी। लोगों को सलाह है कि बिना जरूरी काम के बाहर न निकलें और N95 मास्क का इस्तेमाल करें।

दिल्ली-NCR में GRAP-2 की पाबंदियां लागू, बेहद खराब श्रेणी में पहुंची हवा, AQI 324 दर्ज

दिल्ली-NCR में GRAP-2 की पाबंदियां लागू, बेहद खराब श्रेणी में पहुंची हवा, AQI 324 दर्ज

delhi pollution

दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण बढ़ने के बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने सोमवार को ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के दूसरे चरण यानी GRAP-2 के तहत पाबंदियां लागू कर दी हैं। राजधानी की हवा बेहद खराब (Very Poor) श्रेणी में पहुंच गई है। सोमवार को दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 324 दर्ज किया गया।

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CAQM के मुताबिक, दिल्ली का AQI 31 अक्टूबर को 117 था, जो मध्यम (Moderate) श्रेणी में आता है। इसके बाद 1 नवंबर को यह बढ़कर 261 पहुंच गया और हवा खराब (Poor) श्रेणी में दर्ज की गई। वहीं, 2 नवंबर को AQI में और बढ़ोतरी हुई और यह 324 पर पहुंच गया, जो बेहद खराब श्रेणी में है।

 

आयोग ने बताया कि प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों के कारण प्रदूषण के स्तर में तेजी से इजाफा हुआ है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में भी दिल्ली की वायु गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में बने रहने की आशंका है।

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क्या है GRAP-2 और क्यों लागू किया गया?

 

GRAP के दूसरे चरण को तब लागू किया जाता है, जब दिल्ली की हवा खराब से बेहद खराब श्रेणी की ओर बढ़ती है। इसका उद्देश्य प्रदूषण के स्रोतों पर नियंत्रण करना और हवा की गुणवत्ता को और बिगड़ने से रोकना है। इसके तहत सड़क की सफाई, पानी का छिड़काव, धूल नियंत्रण और यातायात से होने वाले प्रदूषण को कम करने जैसे कदम उठाए जाते हैं।

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लोगों को किन बातों का रखना चाहिए ध्यान?

 

प्रदूषण बढ़ने के दौरान खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी परेशानी वाले लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। सुबह और देर शाम बाहर व्यायाम करने से बचें। जरूरत पड़ने पर बाहर निकलते समय अच्छी गुणवत्ता वाला मास्क इस्तेमाल करें और आंखों में जलन, खांसी या सांस लेने में परेशानी होने पर चिकित्सकीय सलाह लें।