Retirement Planning: क्या सिर्फ पोस्ट ऑफिस स्कीम के भरोसे आपका रिटायरमेंट सुरक्षित होगा? 8.2% रिटर्न देने वाली योजना की लिमिटेशन भी जानिए

Retirement Planning:  जीवन के पड़ाव में रिटायरमेंट एक ऐसा समय होता है जब पहली बार नियमित वेतन आना बंद हो जाता है। इसके बाद सबसे बड़ी चुनौती यही होती है कि वर्षों की अपनी जमा-पूंजी और बचत को अगले 20 या 30 सालों तक सुरक्षित और प्रभावी ढंग से कैसे चलाया जाए। ऐसी स्थिति में अगर पोस्ट ऑफिस की बचत योजनाएं सेवानिवृत्त लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं है। पोस्ट ऑफिस की योजनाएं पूरी तरह से भारत सरकार द्वारा समर्थित हैं और इनमें निवेश करने के बाद निवेशकों को रोजाना शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव पर नजर रखने की जरूरत नहीं पड़ती है।

हालांकि, रिटायरमेंट प्लानिंग का मतलब सिर्फ पैसों को सुरक्षित जगह पर रखना भर नहीं होता है। बावजूद इसके कि सुरक्षित निवेश पसंद करने वाले निवेशकों के लिए पोस्ट ऑफिस योजनाएं एक महत्वपूर्ण विकल्प बनी हुई हैं, लेकिन वे तब सबसे अच्छा काम करती हैं जब वे एक बड़ी और व्यापक फाइनेंशियल प्लानिंग की जाए। अपनी गाढ़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा वहां लगाने से पहले, यह समझना भी बेहद जरूरी है कि आप अपनी बचत का कैसा इस्तेमाल चाहते हैं।

क्या सिर्फ सुरक्षित होना काफी है?

अधिकांश सेवानिवृत्त लोग असाधारण रिटर्न पाने के पीछे नहीं भागते हैं। वे आमतौर पर यह भरोसा चाहते हैं कि जब भी उन्हें जरूरत हो उनकी बचत सुरक्षित और उपलब्ध रहे। इस मामले में पोस्ट ऑफिस की योजनाएं बेहतरीन साबित होती हैं। सरकार समर्थित होने की वजह से इनमें एक तय अवधि के लिए मिलने वाला रिटर्न पहले से पता होता है। जो लोग बाजार के जोखिमों से डरते हैं, उनके लिए यह निश्चितता काफी राहत देने वाली होती है। लेकिन रिटायरमेंट सिर्फ पैसे की रक्षा करने के बारे में नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने के बारे में भी है कि आपका पैसा समय के साथ आपके लिए काम करता रहे।

विभिन्न जरूरतें और पोस्ट ऑफिस की प्रमुख योजनाएं

हर पोस्ट ऑफिस निवेश योजना एक ही उद्देश्य को पूरा नहीं करती है। कुछ स्कीम नियमित इनकम देने के लिए बनाई गई हैं, जबकि अन्य लंबी अवधि की बचत के लिए बेहतर हैं।

सीनियर सिटीजन्स सेविंग्स स्कीम: 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए यह एक सुरक्षित 5-वर्षीय सरकारी जमा योजना है। इस पर वर्तमान में 8.2 प्रतिशत प्रति वर्ष की उच्च ब्याज दर के साथ तिमाही भुगतान मिलता है। इस खाते में न्यूनतम 1000 रुपये के मल्टिपल में ही जमा किया जा सकता है और अधिकतम निवेश की सीमा 30 लाख रुपये से अधिक नहीं हो सकती।

पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम (POMIS): यह भी 5 साल की एक निवेश योजना है जिसमें एकल (Single) या संयुक्त (Joint) खाता खोला जा सकता है। यह 7.4 प्रतिशत प्रति वर्ष की ब्याज दर पर गारंटीकृत मासिक आय प्रदान करती है।

नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS): इंडिया पोस्ट आम जनता के लिए कोई एक्सक्लूसिव रिटायरमेंट पेंशन तो खुद नहीं देता, लेकिन यह एनपीएस जैसी प्रमुख सरकारी योजनाओं के लिए ऑथराइज डिस्ट्रिब्यूटर के रूप में काम करता है। 18 से 70 वर्ष की आयु के नागरिकों के लिए यह एक स्वैच्छिक, बाजार से जुड़ी योजना है। इसमें काम करने के दौरान नियमित योगदान दिया जाता है और 60 वर्ष की आयु पर जमा राशि का एक हिस्सा कर-मुक्त निकाला जा सकता है, जबकि शेष राशि से मासिक एन्युटी (खरीदी जाती है।

अटल पेंशन योजना (APY): 18 से 40 वर्ष की आयु के व्यक्तियों को टारगेटेट यह एक गारंटीकृत पेंशन योजना है। इसमें अंशदान के स्तर के आधार पर 60 वर्ष की आयु से 1000 रुपये से लेकर 5000 रुपये तक की निश्चित मासिक पेंशन मिलती है।

बेहतर विकल्प का चुनाव केवल ब्याज दर पर निर्भर नहीं करता बल्कि इस बात पर निर्भर करता है कि आप अपने मासिक खर्चों को कैसे पूरा करने की योजना बनाते हैं।

पूरा फंड एक जगह न लॉक करें: लिक्विडिटी का रखें ध्यान

सुरक्षित महसूस होने वाले प्रॉडक्ट्स में अपनी पूरी रिटायरमेंट पूंजी निवेश कर देना लुभावना लग सकता है। लेकिन रिटायरमेंट के बाद जिंदगी में योजना के मुताबिक सब कुछ चलना मुश्किल होता है। कोई मेडिकल इमरजेंसी, घर की मरम्मत या परिवार के किसी सदस्य की अचानक आर्थिक मदद करने जैसी स्थितियों में तुरंत कैश (नकद) की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में अगर आपका एक-एक रुपया तय अवधि वाले फिक्स्ड-टेन्योर निवेशों में बंधा होगा, तो कम समय में पैसे का इंतजाम करना काफी कठिन हो सकता है।

महंगाई दर पर ध्यान देना है बेहद जरूरी

सेवानिवृत्ति के बाद आपके खर्चे साल-दर-साल एक समान नहीं रहते हैं। स्वास्थ्य सेवा का खर्च, बिजली के बिल और दैनिक घरेलू सामान समय के साथ महंगे होते जाते हैं। अगर आपकी पूरी रिटायरमेंट पूंजी दशकों तक केवल फिक्स्ड रिटर्न ही कमाती है, तो समय के साथ आपकी पर्चेजिंग पावर धीरे-धीरे कमजोर हो सकती है। यही वजह है कि कई रिटायर्ड लोग अपनी बचत का कम से कम एक हिस्सा ऐसे निवेशों में रखते हैं जो जोखिम उठाने की क्षमता के आधार पर लंबी अवधि में महंगाई को मात देने वाला बेहतर ग्रोथ दे सकें।

आपकी रिटायरमेंट आय का स्रोत तय करेगा सही रणनीति

जिस व्यक्ति को पर्याप्त पेंशन मिल रही है, उसका निवेश का तरीका उस व्यक्ति से अलग हो सकता है जो पूरी तरह से अपनी बचत पर ही निर्भर है। अगर आपकी पेंशन, किराया या अन्य निवेश पहले से ही अधिकतर मासिक खर्चों को कवर कर रहे हैं तो पोस्ट ऑफिस की योजनाएं आपके पोर्टफोलियो का सिर्फ एक हिस्सा बन सकती हैं। लेकिन अगर आपकी जमा पूंजी ही आपकी आय का प्राथमिक जरिया है तो सही प्रॉडक्ट्स का मिश्रण चुनना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

सिर्फ ब्याज दरों के आधार पर निर्णय लेने के बजाय, यह अनुमान लगाकर शुरुआत करें कि आपको वास्तव में हर महीने कितने पैसे की आवश्यकता होगी। पोस्ट ऑफिस बचत योजनाएं भारत में सबसे भरोसेमंद रिटायरमेंट निवेशों में से एक हैं और जीवन के उस मोड़ पर स्थिरता प्रदान करती हैं जब वित्तीय निश्चितता का मूल्य सबसे अधिक होता है। फिर भी उन्हें आपके पूरे रिटायरमेंट कॉर्पस का एकमात्र ठिकाना नहीं बनना चाहिए। एक अच्छी तरह से नियोजित रिटायरमेंट में आमतौर पर भरोसेमंद आय, आसानी से उपलब्ध बचत (लिक्विडिटी) और बढ़ते खर्चों के साथ तालमेल बिठाने वाले निवेश का सही संतुलन शामिल होता है।

SIP vs Lumpsum: ₹2000 की SIP या ₹2 लाख का लंपसम? आपके बच्चे के लिए कौन-सा निवेश बेस्ट रहेगा, पूरा कैलकुलेशन समझिए

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

8th Pay Commission: 3%, 5% और 6% एनुअल इंक्रीमेंट से 5 साल में कितनी बढ़ेगी बेसिक सैलरी? समझें लेवल 1 से 3 तक का पूरा कैलकुलेशन

8th Pay Commission Increment Calculation: पूर्व जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित 8वें केंद्रीय वेतन आयोग को बने 9 महीने हो चुके हैं। जानकारी के मुताबिक, आयोग साल 2027 की शुरुआत में अपनी अंतिम सिफारिशें केंद्र सरकार को सौंपेगा। वेतन आयोग की सिफारिशों में जहां फिटमेंट फैक्टर की सबसे ज्यादा चर्चा है, वहीं सालाना वेतन वृद्धि दर भी कर्मचारियों की सैलरी तय करने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

7वें वेतन आयोग के तहत केंद्रीय कर्मचारियों को बेसिक पे का 3% सालाना इंक्रीमेंट मिलता है। हालांकि, विभिन्न कर्मचारी यूनियनों ने 8वें वेतन आयोग से एनुअल इंक्रीमेंट को बढ़ाकर 5%, 6% या 7% करने की मांग की है। आइए अनुमानित आंकड़ों के जरिए समझते हैं कि इंक्रीमेंट 3%, 5% या 6% होने पर अगले 5 सालों में कर्मचारियों की बेसिक सैलरी कितनी बढ़ सकती है।

कर्मचारी यूनियनों ने कितने % इंक्रीमेंट की मांग की है?

8वें केंद्रीय वेतन आयोग के समक्ष विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने सालाना वेतन वृद्धि की दर में बढ़ोतरी को लेकर अपनी मांगें रखी हैं। इसमें नेशनल काउंसिल ऑफ द जेसीएम (NC-JCM), ऑल इंडिया डिफेंस एंप्लाइज फेडरेशन (AIDEF) और फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशंस (FNPO) ने मौजूदा 3% इंक्रीमेंट को बढ़ाकर 6% करने का प्रस्ताव दिया है। इसके अलावा, इंडियन रेलवे सुपरवाइजर्स एसोसिएशन (IRTSA) ने 5% और ऑल इंडिया एनपीएस एंप्लाइज फेडरेशन (AINPSEF) ने 7% वार्षिक इंक्रीमेंट की सिफारिश की है, ताकि लंबी अवधि में केंद्रीय कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में बेहतर बढ़ोतरी हो सके।

लेवल 1 कर्मचारियों की सैलरी का गणित

7वें पे मैट्रिक्स के अनुसार लेवल 1 की शुरुआती बेसिक पे ₹18,000 है। अलग-अलग इंक्रीमेंट रेट के हिसाब से 5 साल में बेसिक सैलरी का ट्रेंड ऐसा हो सकता है:

लेवल 1 कर्मचारियों की सैलरी का गणित

लेवल 2 कर्मचारियों की सैलरी का गणित

लेवल 2 की शुरुआती बेसिक पे ₹19,900 होती है। 5 साल में यह इस प्रकार बढ़ सकती है:

लेवल 2 कर्मचारियों की सैलरी का गणित

लेवल 3 कर्मचारियों की सैलरी का गणित

लेवल 3 की शुरुआती बेसिक पे ₹21,700 है। देखिए 5 साल में यह कितनी बढ़ेगी:

लेवल 3 कर्मचारियों की सैलरी का गणित

बेसिक पे बढ़ने का अलाउंस और पेंशन पर क्या पड़ेगा असर?

सालाना इंक्रीमेंट से केवल टेक-होम सैलरी ही नहीं बढ़ती, बल्कि इससे जुड़े कई अन्य भत्तों में भी कंपाउंडिंग का फायदा मिलता है:

महंगाई भत्ता (DA) & HRA: डीए और एचआरए की गणना बेसिक पे के प्रतिशत के आधार पर होती है। बेसिक पे ज्यादा होने पर डीए और एचआरए की रकम भी अपने आप बढ़ जाएगी।

NPS / PF योगदान: एनपीएस या प्रोविडेंट फंड में बेसिक+डीए का 10% कटता है, जिससे रिटायरमेंट कॉर्पस मजबूत होगा।

पेंशन और रिटायरमेंट बेनेफिट्स: रिटायरमेंट के समय मिलने वाली ग्रेच्युटी और पेंशन भी अंतिम बेसिक पे पर निर्भर करती है।

नोट: ये आंकड़े केवल 7वें पे मैट्रिक्स के आधार पर तैयार किए गए अनुमानित कैलकुलेशन हैं। 8वें वेतन आयोग ने अभी इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है।

NPS Pension Calculation: NPS से रिटायरमेंट पर कितनी पेंशन मिलेगी? उम्र और निवेश के हिसाब से समझिए पूरा कैलकुलेशन

NPS Pension Calculation: रिटायरमेंट के बाद हर महीने नियमित आमदनी हो, ये हर नौकरीपेशा और निवेशक की सबसे बड़ी चिंता होती है। इसी जरूरत को पूरा करने के लिए नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) बनाया गया है। इसमें आप नौकरी के दौरान थोड़ा-थोड़ा निवेश करते हैं। रिटायरमेंट के समय एक हिस्सा एकमुश्त मिलता है। बाकी रकम से एन्युटी (Annuity) खरीदी जाती है, जिससे हर महीने पेंशन मिलती है।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि अगर हर महीने 2,000, 5,000 या 10,000 रुपये जमा करें, तो रिटायरमेंट के बाद कितनी पेंशन मिल सकती है? आइए आसान कैलकुलेशन से समझते हैं।

NPS में रिटायरमेंट पर पैसा कैसे मिलता है?

NPS में 60 साल की उम्र पर रिटायरमेंट के समय निकासी के अलग-अलग विकल्प उपलब्ध हैं। हमने यह कैलकुलेशन 60% रकम एकमुश्त निकालने और 40% रकम से एन्युटी खरीदने के मॉडल के आधार पर किया गया है। इसी एन्युटी से हर महीने पेंशन मिलती है।

हमने कैलकुलेशन के लिए NPS पर 10% सालाना औसत रिटर्न और एन्युटी पर 7% सालाना रिटर्न का अनुमान लिया है। हालांकि, NPS एक मार्केट-लिंक्ड स्कीम है। इसमें कोई तय ब्याज दर या गारंटीड रिटर्न नहीं मिलता। यानी असव रिटर्न शेयर बाजार के प्रदर्शन के हिसाब से कम या ज्यादा हो सकता है।

अगर 25 साल की उम्र से निवेश शुरू करें

25 साल की उम्र में निवेश शुरू करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि निवेश के लिए लंबा समय मिलता है। इससे कंपाउंडिंग को अपना असर दिखाने का पूरा मौका मिलता है। यही वजह है कि कम मासिक निवेश से भी बड़ा रिटायरमेंट फंड और बेहतर मासिक पेंशन बनाई जा सकती है।

मासिक निवेश60 साल पर अनुमानित कॉर्पस60% एकमुश्त40% एन्युटी
अनुमानित मासिक पेंशन

₹2,000₹76 लाख₹45.6 लाख₹30.4 लाख₹17,700
₹5,000₹1.90 करोड़₹1.14 करोड़₹76 लाख₹44,300
₹10,000₹3.80 करोड़₹2.28 करोड़₹1.52 करोड़₹88,700

अगर 30 साल की उम्र से निवेश शुरू करें

30 साल की उम्र में भी NPS की शुरुआत करने पर अच्छा रिटायरमेंट फंड बनाया जा सकता है। हालांकि, 25 साल की तुलना में निवेश के लिए पांच साल कम मिलते हैं। इसका असर अंतिम कॉर्पस और रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन पर साफ दिखाई देता है।

मासिक निवेश60 साल पर अनुमानित कॉर्पस60% एकमुश्त40% एन्युटी
अनुमानित मासिक पेंशन

₹2,000₹45 लाख₹27 लाख₹18 लाख₹10,500
₹5,000₹1.13 करोड़₹67.8 लाख₹45.2 लाख₹26,300
₹10,000₹2.26 करोड़₹1.36 करोड़₹90.4 लाख₹52,700

अगर 35 साल की उम्र से निवेश शुरू करें

35 साल की उम्र में निवेश शुरू करने पर भी अच्छा रिटायरमेंट फंड बनाया जा सकता है। लेकिन रिटायरमेंट तक निवेश के लिए सिर्फ 25 साल बचते हैं। इसलिए समान मासिक निवेश के बावजूद कॉर्पस और पेंशन, कम उम्र में निवेश शुरू करने वालों की तुलना में काफी कम हो जाते हैं।

मासिक निवेश60 साल पर अनुमानित कॉर्पस60% एकमुश्त40% एन्युटी
अनुमानित मासिक पेंशन

₹2,000₹26 लाख₹15.6 लाख₹10.4 लाख₹6,100
₹5,000₹65 लाख₹39 लाख₹26 लाख₹15,200
₹10,000₹1.30 करोड़₹78 लाख₹52 लाख₹30,300

उदाहरण से समझिए

मान लीजिए आपकी उम्र 30 साल है और आप हर महीने 5,000 रुपये NPS में जमा करते हैं। अगर अगले 30 साल तक औसतन 10% सालाना रिटर्न मिलता है, तो रिटायरमेंट तक आपका फंड करीब 1.13 करोड़ रुपये हो सकता है।

इसमें से करीब 67.8 लाख रुपये आप एकमुश्त निकाल सकते हैं। बाकी 45.2 लाख रुपये से एन्युटी खरीदनी होगी। अगर एन्युटी पर 7% सालाना रिटर्न मिलता है, तो आपको करीब 26,300 रुपये महीने पेंशन मिल सकती है।

उम्र का कितना असर पड़ता है?

NPS में सबसे बड़ा फायदा कंपाउंडिंग का है। जितनी जल्दी निवेश शुरू करेंगे, उतना बड़ा रिटायरमेंट फंड तैयार होगा।

उदाहरण के लिए, अगर कोई व्यक्ति 25 साल की उम्र से हर महीने 5,000 रुपये निवेश करता है, तो उसकी अनुमानित मासिक पेंशन करीब 44,300 रुपये हो सकती है। वहीं, अगर यही निवेश 35 साल की उम्र से शुरू किया जाए, तो पेंशन घटकर करीब 15,200 रुपये रह सकती है। यानी सिर्फ 10 साल की देरी से रिटायरमेंट फंड और पेंशन, दोनों में बड़ा अंतर आ सकता है।

NPS में कौन निवेश कर सकता है?

नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में 18 से 70 साल तक का कोई भी भारतीय नागरिक निवेश कर सकता है। इसमें सरकारी और प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारी, स्वरोजगार करने वाले, कारोबारी और फ्रीलांसर भी शामिल हैं। अगर आप केंद्रीय कर्मचारी हैं, तो सरकार भी आपके NPS खाते में योगदान करती है।

वहीं, प्राइवेट सेक्टर में सरकार कोई योगदान नहीं देती। हालांकि, अगर कंपनी चाहे तो वह भी अपने कर्मचारियों के NPS खाते में योगदान कर सकती है। निवेशक अपनी सुविधा के हिसाब से हर महीने, तिमाही या सालाना निवेश कर सकते हैं।

EPF: इंटरेस्ट का पैसा आपके ईपीएफ अकाउंट में नहीं आया है? जानिए क्या है वजह

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Retirement Planning: रिटायरमेंट के लिए कौन-सी पेंशन स्कीम सबसे बढ़िया? समझिए पूरा हिसाब

Retirement Planning: रिटायरमेंट की प्लानिंग जितनी जल्दी शुरू करेंगे, उतना बेहतर रहेगा। आज लोगों के पास कई विकल्प हैं। कोई NPS में निवेश करता है, कोई PPF में पैसा जमा करता है। नौकरीपेशा लोगों के लिए EPF है। वहीं, कम आय वाले लोगों के लिए Atal Pension Yojana (APY) और प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन (PM-SYM) जैसी योजनाएं भी हैं।

ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर सबसे बेहतर स्कीम कौन-सी है? इसका जवाब एक नहीं है। यह आपकी नौकरी, आय, उम्र और रिटायरमेंट के लक्ष्य पर निर्भर करता है। आइए एक-एक करके समझते हैं।

स्कीम किसके लिए सबसे बड़ा फायदा

स्कीमकिसके लिएसबसे बड़ा फायदा
NPSसभी भारतीय नागरिक
बड़ा रिटायरमेंट फंड और टैक्स छूट

EPFनौकरीपेशा कर्मचारी
कर्मचारी और कंपनी दोनों का योगदान

PPFसभी भारतीय नागरिक
पूरी तरह टैक्स-फ्री रिटर्न

APYकम आय वाले लोग
₹1,000 से ₹5,000 तक गारंटीड पेंशन

PM-SYMअसंगठित क्षेत्र के कामगार₹3,000 मासिक गारंटीड पेंशन, सरकार भी बराबर योगदान देती है
UPSकेंद्र सरकार के पात्र कर्मचारीतय शर्तों पर निश्चित पेंशन

NPS: लंबी अवधि में बड़ा फंड बनाने का मौका

अगर आपकी उम्र 20 से 45 साल के बीच है और आप लंबे समय तक निवेश कर सकते हैं, तो National Pension System (NPS) अच्छा विकल्प माना जाता है। इसमें आपका पैसा शेयर बाजार और बॉन्ड में निवेश होता है। इसलिए लंबे समय में अच्छा रिटर्न मिलने की संभावना रहती है। हालांकि, रिटर्न तय नहीं होता।

मान लीजिए आपकी उम्र 30 साल है और आप हर महीने ₹5,000 निवेश करते हैं। अगर औसतन 10% सालाना रिटर्न मिलता है और आप 60 साल की उम्र तक निवेश करते हैं, तो आपका कुल निवेश ₹18 लाख होगा। वहीं, अनुमानित फंड करीब ₹1.13 करोड़ बन सकता है।

रिटायरमेंट के समय करीब ₹68 लाख (60%) टैक्स-फ्री निकाले जा सकते हैं। बाकी करीब ₹45 लाख से एन्युटी खरीदनी होगी। इसी से हर महीने पेंशन मिलेगी।

EPF: नौकरीपेशा लोगों की मजबूत बचत

अगर आप नौकरी करते हैं, तो EPF आपकी रिटायरमेंट प्लानिंग की सबसे मजबूत नींव है। इसमें कर्मचारी और कंपनी दोनों हर महीने योगदान करते हैं। सरकार हर साल ब्याज भी देती है।

मान लीजिए आपकी बेसिक सैलरी ₹40,000 है। ऐसे में कर्मचारी और कंपनी मिलाकर हर महीने करीब ₹9,600 EPF खाते में जमा हो सकते हैं। अगर 30 साल तक नियमित योगदान होता है, तो रिटायरमेंट के समय बड़ा फंड तैयार हो सकता है।

PPF: बिना जोखिम वालों के लिए

अगर आप जोखिम नहीं लेना चाहते, तो Public Provident Fund (PPF) अच्छा विकल्प है। इसमें सरकार ब्याज देती है। ब्याज और मैच्योरिटी दोनों टैक्स-फ्री रहते हैं।

अगर आप हर साल ₹1.5 लाख निवेश करते हैं और ब्याज दर 7.1% रहती है, तो 15 साल बाद करीब ₹40 लाख का फंड बन सकता है। जरूरत पड़ने पर इस खाते को आगे भी बढ़ाया जा सकता है।

APY : कम आय वालों के लिए बेहतर

अगर आपकी आय कम है और आप गारंटीड पेंशन चाहते हैं, तो Atal Pension Yojana (APY) अच्छा विकल्प हो सकती है। इसमें 60 साल की उम्र के बाद ₹1,000 से ₹5,000 तक मासिक पेंशन मिलती है। जितनी कम उम्र में योजना से जुड़ेंगे, उतना कम योगदान देना होगा।

मान लीजिए आपकी उम्र 25 साल है और आप ₹5,000 महीने की पेंशन चाहते हैं। ऐसे में आपको करीब ₹376 महीने जमा करने होंगे। 60 साल के बाद आपको तय पेंशन मिलनी शुरू हो जाएगी।

PM-SYM : रेहड़ी पटरी या मजदूरी वालों के लिए

अगर आप असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं, जैसे रेहड़ी-पटरी लगाते हैं, मजदूरी करते हैं या छोटे दुकानदार हैं, तो प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन (PM-SYM) भी अच्छा विकल्प है। इस योजना में 60 साल की उम्र के बाद ₹3,000 महीने की गारंटीड पेंशन मिलती है। इसकी सबसे खास बात यह है कि जितना पैसा आप जमा करते हैं, उतना ही पैसा सरकार भी जमा करती है।

उदाहरण के लिए, अगर आपकी उम्र 30 साल है, तो आपको हर महीने ₹100 जमा करने होंगे। सरकार भी ₹100 जमा करेगी। यानी हर महीने कुल ₹200 खाते में जमा होंगे। 60 साल की उम्र के बाद आपको ₹3,000 महीने की पेंशन मिलेगी। अगर पेंशनधारक की मृत्यु हो जाती है, तो उसके जीवनसाथी को 50% फैमिली पेंशन मिलती है।

UPS: सरकारी कर्मचारियों के लिए नया विकल्प

अगर आप केंद्र सरकार के पात्र कर्मचारी हैं, तो Unified Pension Scheme (UPS) भी अच्छा विकल्प हो सकता है।

इस योजना में तय शर्तें पूरी होने पर रिटायरमेंट के बाद आखिरी 12 महीने की औसत बेसिक सैलरी का 50% तक पेंशन मिल सकती है। इससे रिटायरमेंट के बाद नियमित आय बनी रहती है।

आखिर कौन-सी स्कीम सबसे बेहतर?

  • अगर आप प्राइवेट नौकरी करते हैं, तो EPF और NPS का कॉम्बिनेशन सबसे मजबूत माना जाता है। EPF सुरक्षित बचत देता है, जबकि NPS लंबी अवधि में बड़ा फंड बनाने में मदद कर सकता है।
  • अगर आप खुद का कारोबार करते हैं, तो NPS और PPF अच्छा विकल्प हो सकता है। एक तरफ बेहतर ग्रोथ की संभावना रहती है, तो दूसरी तरफ सुरक्षित और टैक्स-फ्री बचत भी होती है।
  • अगर आपकी आय कम है या आप असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं, तो APY और प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन जैसी योजनाएं रिटायरमेंट के बाद नियमित पेंशन का सहारा बन सकती हैं।
  • अगर आप केंद्र सरकार के पात्र कर्मचारी हैं, तो UPS पर भी विचार कर सकते हैं।

रिटायरमेंट के लिए कितना फंड होना चाहिए?

एक आसान नियम है। रिटायरमेंट के बाद हर महीने जितना खर्च चाहिए, उसका कम से कम 200 से 250 गुना फंड बनाने की कोशिश करें।

मान लीजिए रिटायरमेंट के बाद हर महीने ₹20,000 खर्च होगा। ऐसे में कम से कम ₹50 लाख से ₹60 लाख का रिटायरमेंट फंड बनाने का लक्ष्य रखना चाहिए। हालांकि, महंगाई को देखते हुए इससे बड़ा फंड तैयार करना हमेशा बेहतर रहेगा।

₹2 लाख सैलरी, नो लोन और अच्छी सेविंग्स… फिर भी 26 साल के युवक को क्यों लगता है कि वह गरीब है

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

 

8th Pay Commission: बेसिक पे से लेकर भत्तों तक, जानिए 7 और 10 अगस्त को वेतन आयोग किस बात पर करेगा महत्वपूर्ण चर्चा

8th Pay Commission Salary Structure: देश के करीब एक करोड़ सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स में आठवां वेतन आयोग को लेकर खूब चर्चा है। यह आयोग अब अपने सबसे महत्वपूर्ण फेज में पहुंच चुका है। इस दौरान कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, भत्ते और पेंशन में संशोधन के लिए हितधारकों, कर्मचारी यूनियनों से लगातार चर्चा की जा रही है।

7 और 10 अगस्त को होगी बड़ी बैठक

आठवें केंद्रीय वेतन आयोग ने अगले वेतन संशोधन पर चल रहे परामर्श के तहत दिल्ली स्थित केंद्र सरकार और केंद्र शासित प्रदेशों (UT) के कर्मचारी संघों, परिसंघों और यूनियनों को 7 अगस्त और 10 अगस्त 2026 को बैठक के लिए आमंत्रित किया है। 23 जुलाई 2026 को जारी एक नोटिस में आयोग ने बताया कि यह बैठक उसकी हितधारक परामर्श प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसके जरिए वह अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करने से पहले कर्मचारी प्रतिनिधियों के सुझाव और सिफारिशें जुटा रहा है।

सैलरी स्ट्रक्चर के 3 मुख्य पिलर, जिन पर टिकी है पूरी चर्चा

8वें वेतन आयोग में केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी का नया गणित मुख्यतः तीन हिस्सों में तय किया जा रहा है:

A. बेसिक पे और फिटमेंट फैक्टर

बेसिक पे आपकी सैलरी और पेंशन की सबसे मजबूत नींव है, क्योंकि ग्रेच्युटी, पीएफ और बाकी भत्ते इसी के आधार पर तय होते हैं। पुराने बेसिक पे को नए बेसिक पे में बदलने के लिए फिटमेंट फैक्टर का इस्तेमाल किया जाता है। नेशनल काउंसिल – जेसीएम (NC-JCM) ने 3.83 फिटमेंट फैक्टर की मांग रखी है।

वहीं ऑल इंडिया एनपीएस एंप्लाइज फेडरेशन (AINPSEF) ने परिवार की निर्भरता इकाई को 3 से बढ़ाकर 4.4 करने का प्रस्ताव दिया है, जिससे बेसिक पे में बड़ा उछाल आएगा।

B. भत्ते (DA, HRA और TA)

नए बेसिक पे के लागू होते ही उस पर आधारित सभी प्रमुख भत्ते री-कैलकुलेट होंगे:

HRA (मकान किराया भत्ता): एआईएनपीएसईएफ ने X कैटेगरी के शहरों के लिए 36%, Y के लिए 24% और Z कैटेगरी के लिए 12% HRA करने की सिफारिश की है। साथ ही यह भी प्रस्ताव है कि जब भी DA बढ़े, HRA में खुद-ब-खुद बढ़ोतरी हो।

TA (ट्रेवल भत्ता): लेवल-1 के कर्मचारियों के लिए न्यूनतम TA बढ़ाकर ₹9,000 प्रति महीने करने का प्रस्ताव है।

C. ग्रॉस सैलरी

बेसिक पे और सभी भत्तों को मिलाकर आपकी कुल कमाई तय होती है। उदाहरण के तौर पर, अगर यूनियनों के ये सभी प्रस्ताव मान लिए जाते हैं, तो लेवल-1 के कर्मचारियों की सैलरी ₹37,080 से बढ़कर सीधे ₹61,344 तक पहुंच सकती है यानी करीब 65% तक की भारी बढ़ोतरी!

कब तक लागू हो सकती हैं सिफारिशें?

आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को 18 महीने की अवधि के लिए किया गया था। इसके अनुसार, आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट फरवरी 2027 से मध्य-2027 के बीच सौंप सकता है।

अगर हम ऐतिहासिक ट्रेंड्स को देखें तो सिफारिशें आने के बाद सरकार द्वारा इसे पूरी तरह लागू करने में 2 से 3 साल का समय लगता है। हालांकि, कयास लगाए जा रहे हैं कि यह बढ़ोतरी 1 जनवरी 2026 से एरियर के साथ प्रभावी हो सकती है।

Invest Rs 10 Lakh: हाथ में हैं ₹10 लाख? जानें पैसा बढ़ाने की 5 सबसे सेफ और स्मार्ट स्ट्रेटेजी

10 Lakh Investment Options & Strategies: अपने जीवन का पहला ₹10 लाख का फंड जमा करना किसी भी व्यक्ति के लिए बहुत बड़ा फाइनेंशियल माइलस्टोन होता है। चाहे यह पैसा सैलरी की बचत, बोनस, बिजनेस प्रॉफिट, या किसी प्रॉपर्टी की बिक्री से आया हो, इसे हासिल करने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि इस ₹10 लाख को कहां और कैसे इन्वेस्ट करें ताकि भविष्य में इससे बड़ा वेल्थ बनाया जा सके।

फाइनेंशियल विशेषज्ञों का मानना है कि ₹10 लाख का निवेश करने के लिए ‘वन साइज फिट्स ऑल’ यानी एक जैसा नियम सब पर लागू होने का फॉर्मूला काम नहीं करता। आइए आपको बताते हैं कि सही रणनीति के साथ अपने ₹10 लाख को कैसे निवेश करें।

निवेश से पहले निपटाएं ये 3 सबसे जरूरी काम

₹10 लाख को सीधे बाजार में लगाने की जल्दबाजी न करें। सबसे पहले इन तीन बुनियादी बातों को मजबूत करें:

1- इमरजेंसी फंड: क्या आपके पास कम से कम 6 महीने के खर्चों के बराबर इमरजेंसी फंड है? अगर नहीं, तो इस ₹10 लाख में से कुछ हिस्सा लिक्विड फंड या बैंक एफडी में अलग रखें।

2- हेल्थ इंश्योरेंस: अपने और परिवार के लिए पर्याप्त हेल्थ कवर जरूर लें ताकि मेडिकल इमरजेंसी में आपकी बचत न डूबे।

3- महंगे कर्ज: अगर आप पर क्रेडिट कार्ड का बिल या पर्सनल लोन जैसा कोई भारी ब्याज वाला कर्ज है, तो निवेश करने से पहले उसे चुकता करें।

एक साथ पैसा लगाने से बचें, स्टैगर्ड तरीका अपनाएं

बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव के जोखिम को कम करने के लिए पूरा ₹10 लाख एक बार में निवेश न करें। अपने पैसे को किसी लिक्विड फंड में रखें और वहां से अगले 6 से 12 महीनों के दौरान सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान (STP) के जरिए इक्विटी फंड्स में ट्रांसफर करें। इससे बाजार के ऊंचे और निचले दोनों स्तरों का फायदा मिलेगा और रिस्क कम होगा।

अपने वित्तीय लक्ष्यों के हिसाब से बांटें पैसा

हर निवेशक का लक्ष्य अलग होता है, इसलिए समय सीमा के हिसाब से अपने पैसों का बंटवारा करें:

शॉर्ट टर्म गोल (1 से 3 साल): अगर आपको बच्चे की पढ़ाई, कार या घर की डाउन पेमेंट के लिए जल्द पैसा चाहिए, तो लो-रिस्क ऑप्शन जैसे डेट म्यूचुअल फंड, एफडी या आर्बिट्राज फंड चुनें।

लॉन्ग टर्म गोल (5 साल से ज्यादा): रिटायरमेंट या लंबी अवधि के वेल्थ क्रिएशन के लिए इक्विटी म्यूचुअल फंड्स (Flexi Cap, Large Cap), एनपीएस, या डायरेक्ट स्टॉक्स में निवेश करें।

एसेट एलोकेशन और डाइवर्सिफिकेशन का नियम

एसेट एलोकेशन और डाइवर्सिफिकेशन का नियम

पोर्टफोलियो की नियमित समीक्षा करें

₹10 लाख का निवेश करने के बाद रोज-रोज के बाजार के उतार-चढ़ाव को देखकर पैनिक न हों। अगर आप पहले से एसआईपी (SIP) चला रहे हैं, तो उसे जारी रखें। साल में एक या दो बार अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करें और जरूरत पड़ने पर रीबैलेंसिंग करें।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

8th Pay Commission Updates: फिटमेंट फैक्टर पर निर्भर करेगी सैलरी में होने वाली बढ़ोतरी, जानिए कितना रहेगा फिटमेंट फैक्टर

आठवें वेतन आयोग ने केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के वेतन में संशोधन की सिफारिशें देने से पहले चर्चा की प्रक्रिया तेज कर दी है। एंप्लॉयीज की नजरें वेतन आयोग की सिफारिशों पर लगी हैं। इस बार आयोग वेतन में संशोधन, अलाउन्सेज, सैलरी स्ट्रक्चर सहित कई मसलों के बारे में अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपेगा। इसका फायदा एक करोड़ से ज्यादा लोगों को मिलेगा। इनमें केंद्र सरकार के करीब 50 लाख एंप्लॉयीज और 65 लाख पेंशनर्स शामिल हैं।

आयोग की 9 दौर की बैठकें हो चुकी हैं

आठवां वेतन आयोग अब तक रीजनल और केंद्रीय एंप्लॉयीज यूनियंस और दूसरे पक्षों के साथ नौ दौर की बैठकें पूरी कर चुका है। इस महीने की 9 और 10 तारीख को उसने कोलकाता में बैठक की। इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों को कहना है कि आयोग की सिफारिशें अगले साल जून-जुलाई तक आने की उम्मीद है। उसके बाद केंद्र सरकार सिफारिशों पर विचार करने के बाद उन्हें लागू करने के बारे में अंतिम फैसला लेगी।

फैमिली यूनिट्स की परिभाषा बदलने की मांग

ऑल इंडिया एनपीएस एंप्लॉयीज फेडरेशन ने आयोग से फैमिली यूनिट्स की परिभाषा में बदलाव करने की सलाह दी है। आयोग फैमिली यूनिट्स के आधार पर वेतन में संशोधन का कैलकुलेशन करता है। फेडरेशन का कहना है कि फैमिली यूनिट्स 3 से बढ़ाकर 4.4 की जानी चाहिए। इसमें आश्रित माता-पिता को भी शामिल किया जाना चाहिए। इससे फिटमेंट फैक्टर 2.05 से बढ़कर 2.10 हो जाएगा। फिटमेंट फैक्टर बढ़ने से बेसिक सैलरी भी बढ़ जाएगी।

मेट्रो शहरों के लिए 36 फीसदी एचआरए की मांग

एंप्लॉयीज यूनियंस को उम्मीद है कि वेतन आयोग डीए, एचआरए और ट्रैवल अलाउंसेज पर भी विचार करेगा और इनके कैलकुलेशन के तरीकों में जरूरी संशोधन करेगा। एंप्लॉयीज के प्रतिनिधि एक्स कैटेगरी के शहरों के लिए 36 फीसदी एचआरए की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि वाय कैटेगरी के शहरों के लिए एचआरए 24 फीसदी और जेड कैटेगरी के शहरों के लिए 12 फीसदी होना चाहिए। ट्रैवल अलाउंसेज को भी लेवल 1 एंप्लॉयीज के लिए कम से कम प्रति माह 9000 रुपये करने की मांग की जा रही है।

यह भी पढ़ें: क्या आप भी अनलिस्टेड मार्केट में शेयर खरीद रहे हैं? तो पहले ये बातें जान लीजिए

एंप्लॉयीज की सबसे ज्यादा नजरें फिटमेंट फैक्टर पर 

एंप्लॉयीज की सबसे ज्यादा नजरें फिटमेंट फैक्टर पर है। एंप्लॉयीज के प्रतिनिधि और यूनियंस 3.83 फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे हैं। सातवें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 था। अगर 3.83 फिटमेंट फैक्टर की मांग मान ली जाती है तो केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज का मिनिमम बैसिक पे बढ़कर प्रति माह 69,000 रुपये हो जाएगा। अभी यह 18,000 रुपये है। हालांकि, जानकारों का कहना है कि क्रूड की कीमतों में उछाल से सरकार पर वित्तीय दबाव बढ़ा है। ऐसे में फिटमेंट फैक्टर 1.82-2.57 के बीच रह सकता है।

SBI Recruitment 2026: एसबीआई में हो रही है मेडिकल ऑफिसर की भर्ती, फॉर्म भरने की लास्ट डेट 14 जुलाई से बढ़कर हुई 21 जुलाई

SBI Recruitment 2026: भारतीय स्टेट बैंक (SBI) देश का सबसे बड़ा सार्वजनिक बैंक माना जाता है। इससे जुड़ने की इच्छा ढेरों युवाओं की होगी, मगर सबको ऐसा मौका नहीं मिल पाता है। लेकिन, अभी मेडिकल क्षेत्र से जुड़े युवाओं के पास इससे जुड़ने का मौका है। एसबीआई ने बैंक मेडिकल ऑफिसर (BMO) के पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए है। खास बात यह है कि इन पदों पर भर्ती के लास्ट डेट 14 जुलाई से बढ़ा कर 21 जुलाई कर दी गई है। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार एसबीआई बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। एसबीआई इस भर्ती के जरिए देश के 14 सर्किलों में मौजूद अपनी ब्रांचों में बैंक मेडिकल ऑफिसर की नियुक्ति करेगा।

एसबीआई बीएमओ भर्ती 2026: जरूरी जानकारी

बैंक : स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI)

पद : बैंक मेडिकल ऑफिसर (BMO) (मिडल मैनेजमेंट ग्रेड-II)

वैकेंसी : 35

ऑफिशियल वेबसाइट : sbi.bank.in

अप्लाई करने की लास्ट डेट : 21 जुलाई 2026

योग्यता : MMBS+ अनुभव

सैलरी : बेसिक पे ₹64820-₹93960 तक+ डीए, एचआरए, सीसीए, पीएफ, एनपीएस, एलएफसी, मेडिकल फैसिलिटी आदि सुविधाएं

चयन प्रकिया : रिटन टेस्ट , इंटरव्यू, लोकल लैंग्वेज प्रोफिशिएंसी टेस्ट

एसबीआई बीएमओ के लिए योग्यता

शैक्षिक योग्यता : इन पर आवेदन करने वाले अभ्यर्थी के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC)/राज्य मेडिकल काउंसिल से मान्यता प्राप्त कॉलेज से एमबीबीएस डिग्री होनी चाहिए। पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा या पोस्ट ग्रेजुएट एमडी डिग्री/एमएस या समकक्ष योग्यता वाले अभ्यर्थी भी आवेदन कर सकते हैं।

अनुभव : एनएमसी एमबीबीएस के साथ बतौर जनरल प्रैक्टिश्नर कम से कम 5 साल का अनुभव भी होना चाहिए। यह अनुभव इंटर्नशिप की अवधि से अलग होना जरूरी है। अगर पोस्ट ग्रेजुएशन डिग्री है, तो 3 साल का अनुभव मान्य होगा।

उम्र सीमा : 31 मई 2026 को कैंडिडेड की उम्र अधिकतम 35 साल तक होनी चाहिए। ऊपरी उम्र में (ओबीसी नॉन क्रीमी लेयर) को 3 साल, एससी/एसटी को 5 साल, पीडब्ल्यूबीडी को 10-15 साल तक की छूट मिलेगी।

एसबीआई मेडिकल ऑफिसर चयन प्रक्रिया

ऑनलाइन रिटन टेस्ट : रिटन टेस्ट में रीजनिंग, क्वांटिटेटिव एप्टीट्यूड, इंग्लिश लैंग्वेज और प्रोफेशनल नॉलेज से 100 सवाल पूछे जाएंगे, जिसमें निगेटिव मार्किंग नहीं होगी। परीक्षा की अवधि 45 मिनट की होगी। यह अगले महीने अगस्त में हो सकती है।

इंटरव्यू : ऑनलाइन रिटन टेस्ट के आधार पर अभ्यर्थियों को अगले स्टेज में इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा। यह 100 अंकों का होगा।

लोकल लैंग्वेज प्रोफिशिएंसी टेस्ट (LLPT): आप जिस भी सर्किल से अप्लाई करते हैं, उससे जुड़ी भाषा में आपको लोंकल लैंग्वेज प्रोफिशिएंसी टेस्ट भी क्लियर करना होगा। इसमें फेल अभ्यर्थी नियुक्ति के लिए योग्य नहीं होंगे। अगर अभ्यर्थी ने 10वीं/12वीं में लोकल लैंग्वेज की पढाई की है, तो उन्हें इस टेस्ट से छूट मिलेगी।

एसबीआई मेडिकल भर्ती में कैसे अप्लाई करें?

  • आधिकारिक वेबसाइट sbi.bank.in पर जाएं।
  • करियर सेक्शन में करंट ओपनिंग्स में विज्ञापन संख्या CRPD/SCO/2026-27/03 के टैब पर जाएं।
  • Apply Online के लिंक पर क्लिक करते ही आप ibpsreg.ibps.in पर पहुंच जाएंगे।
  • अगर आप यहां पहले से रजिस्टर्ड हैं, तो सीधे Login for already Registered Candidates पर क्लिक करें। नए उम्मीदवार होने पर Click here for New Registration के लिंक पर जाएं।
  • अपना नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी की जानकारी भरकर सिक्योरिटी डालें और Save&Next करके आगे बढ़ें।
  • रजिस्ट्रेशन नंबर और पासवर्ड के जरिए लॉगइन करें।
  • फॉर्म में आगे की डिटेल्स ध्यान से भरें।
  • अगले चरण में फोटो और हस्ताक्षर सही साइज में स्कैन करने के बाद सही से अपलोड करें।
  • आवेदन शुल्क का भुगतान करें और भर्ती प्रक्रिया पूरी होने तक आवेदन पत्र अपने पास सुरक्षित रख लें।

आवेदन शुल्क

एसबीआई की इस भर्ती प्रक्रिया का हिस्सा बनने के लिए जनरल/ईडब्लयूएस/ओबीसी अभ्यर्थियों को 750 रुपये आवेदन शुल्क जमा करना होगा। वहीं एससी/एसटी/पीडब्ल्यूबीडी उम्मीदवार निशुल्क फॉर्म भर सकते हैं।

ITR Filing 2026: NPS, PPF या EPF… रिटायरमेंट के लिए कौन-सी स्कीम टैक्स में सबसे ज्यादा फायदा दिलाएगी?

ITR Filing 2026: रिटायरमेंट की प्लानिंग करते समय ज्यादातर लोग NPS, PPF और EPF में से किसी एक या एक से ज्यादा स्कीम में निवेश करते हैं। तीनों का मकसद रिटायरमेंट के लिए पैसा जोड़ना है। हालांकि, टैक्स छूट, ब्याज और निकासी के नियम अलग-अलग हैं। साथ ही, यह भी मायने रखता है कि आपने पुराना टैक्स रिजीम चुना है या नया।

NPS में सबसे ज्यादा टैक्स छूट

अगर आप पुराना टैक्स रिजीम चुनते हैं, तो NPS सबसे ज्यादा टैक्स बचाने वाली स्कीम बन सकती है।

NPS Tier-I में निवेश पर Section 80CCD(1) के तहत ₹1.5 लाख तक की छूट मिलती है। यह सीमा Section 80C का हिस्सा है। इसके अलावा Section 80CCD(1B) के तहत ₹50,000 की अतिरिक्त छूट भी मिलती है। यानी NPS के जरिए कुल ₹2 लाख तक टैक्स डिडक्शन का फायदा लिया जा सकता है।

अगर आप नया टैक्स रिजीम चुनते हैं, तो अपनी तरफ से किए गए निवेश पर छूट नहीं मिलेगी। हालांकि, अगर आपका नियोक्ता NPS में योगदान देता है, तो Section 80CCD(2) के तहत बेसिक सैलरी और DA के 14% तक की रकम पर टैक्स छूट मिल सकती है।

रिटायरमेंट के समय NPS की 60% रकम टैक्स-फ्री निकाली जा सकती है। बाकी 40% से एन्युटी खरीदनी होती है। उस पर मिलने वाली पेंशन आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्सेबल होती है।

PPF में पूरा टैक्स-फ्री फायदा

PPF को EEE (Exempt-Exempt-Exempt) कैटेगरी की स्कीम माना जाता है। पुराने टैक्स रिजीम में PPF में निवेश पर Section 80C के तहत ₹1.5 लाख तक की टैक्स छूट मिलती है। इसके अलावा मिलने वाला ब्याज भी टैक्स-फ्री रहता है और मैच्योरिटी पर मिलने वाली पूरी रकम पर भी कोई टैक्स नहीं लगता।

अगर आपने नया टैक्स रिजीम चुना है, तो नए निवेश पर टैक्स छूट नहीं मिलेगी। हालांकि, ब्याज और मैच्योरिटी की रकम पहले की तरह टैक्स-फ्री रहेगी।

EPF का फायदा नौकरीपेशा लोगों को

EPF संगठित क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए रिटायरमेंट सेविंग स्कीम है।

पुराने टैक्स रिजीम में कर्मचारी का EPF योगदान Section 80C के तहत टैक्स छूट के दायरे में आता है। तय शर्तें पूरी होने पर ब्याज और निकासी भी टैक्स-फ्री रहती है। हालांकि, अगर समय से पहले पैसा निकाला जाता है, तो कुछ मामलों में टैक्स देना पड़ सकता है।

पुराने और नए टैक्स रिजीम में क्या फर्क?

अगर आपने पुराना टैक्स रिजीम चुना है, तो NPS, PPF और EPF तीनों में टैक्स बचाने का फायदा मिलता है। इनमें भी NPS सबसे आगे है, क्योंकि इसमें ₹50,000 की अतिरिक्त टैक्स छूट मिलती है।

वहीं, नए टैक्स रिजीम में Section 80C की छूट नहीं मिलती। इसलिए PPF और EPF में निवेश पर टैक्स डिडक्शन का फायदा नहीं मिलेगा। NPS में भी सिर्फ नियोक्ता के योगदान पर ही टैक्स छूट मिलती है।

किसे स्कीम को चुनना बेहतर?

अगर आपका लक्ष्य सबसे ज्यादा टैक्स बचाना है, तो पुराने टैक्स रिजीम में NPS बेहतर विकल्प हो सकता है। अगर आप पूरी तरह टैक्स-फ्री रिटर्न चाहते हैं, तो PPF मजबूत विकल्प है। वहीं, नौकरीपेशा लोगों के लिए EPF रिटायरमेंट बचत का अहम हिस्सा बना रहता है।

हालांकि, फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का मानना है कि बेहतर रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए इन तीनों का संतुलित इस्तेमाल करना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है।

Gold Jewellery Price: 10 ग्राम का नेकलेस या 5 ग्राम की अंगूठी खरीदने जा रहे? जानिए कितना बनेगा बिल

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।