Divi’s Lab Share Price: ये क्या! Q1 नतीजों से पहले मैक्वेरी ने बढ़ाया स्टॉक का 36% टारगेट, दिया ₹10,000 के ऊपर का लक्ष्य

Divi’s Laboratories Share Price: दवा बनाने वाली कंपनी Divi’s Laboratories के शेयर में आज 31 जुलाई को तेजी देखने को मिली। कंपनी के जून तिमाही के नतीजे शनिवार 1 अगस्त को जारी होगें बावजूद उसके शेयर 2 फीसदी से ज्यादा चढ़ा। इसकी वजह ब्रोकरेज फर्म मैक्वेरी के स्टॉक के टारगेट प्राइस को बढ़ाना माना जा रहा है।

ब्रोकरेज फर्म मैक्वेरी ने स्टॉक पर ‘आउटपरफॉर्म’रेटिंग की राय को बरकरार रखते हुए इसके लिए टारगेट प्राइस को 36% बढ़ाकर 7500 रुपये से बढ़ाकर 10,200 रुपये कर दिया है। मैक्वेरी द्वारा दिया गया यह नया टारगेट प्राइस Divi’s Laboratories के गुरुवार के क्लोजिंग प्राइस ₹7,835 से लगभग 30.2% की बढ़त दिखाता है।बता दें कि बाजार में Divi’s Laboratories के लिए यह पहला और एकमात्र टारगेट है जो ₹10,000 प्रति शेयर से अधिक है।

टारगेट प्राइस में बढ़ोतरी के लिए क्या है ब्रोकरेज का तर्क

मैक्वेरी का मानना ​​है कि बढ़ती मांग के कारण पेप्टाइड CDMO मार्केट में मध्यम अवधि में अच्छी ग्रोथ की संभावना है। ब्रोकरेज को उम्मीद है कि GLP-1 और अन्य पेप्टाइड थेरेपी के बढ़ते इस्तेमाल, एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट (API) की अधिक जरूरत और फेज 3 पेप्टाइड एसेट्स की बढ़ती पाइपलाइन के कारण यह मार्केट 2025 में लगभग $4 बिलियन से बढ़कर 2030 तक $20 बिलियन-$25 बिलियन का हो जाएगा।

ब्रोकरेज ने कहा कि Divi’s की इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्षमताएं और बड़े पैमाने पर काम करने की क्षमता उसे इस मौके का फायदा उठाने और पेप्टाइड CDMO मैन्युफैक्चरिंग में लीडर बनने के अपने लक्ष्य को पूरा करने में मदद करेगी।

मैक्वेरी ने अपनी कमाई के अनुमानों को भी बढ़ाया और उन्हें जून 2028 के EBITDA अनुमानों तक आगे बढ़ाया, जिससे टारगेट प्राइस में बढ़ोतरी हुई।

ब्रोकरेज के अनुसार, Divi’s ने बिल्डिंग ब्लॉक्स, रिएजेंट्स और रेजिन को शामिल करते हुए एक वर्टिकली इंटीग्रेटेड पेप्टाइड मैन्युफैक्चरिंग प्लेटफॉर्म बनाया है, जो इसे अपने प्रतिस्पर्धियों की तुलना में लागत और गुणवत्ता के मामले में फायदा देता है। कंपनी के पास अभी 20,000-लीटर की सॉलिड-फेज पेप्टाइड सिंथेसिस क्षमता है और वह इंडस्ट्री में सबसे आगे रहने वाले 18,600-लीटर के लिक्विड-फेज पेप्टाइड सिंथेसिस (LPPS) रिएक्टर के साथ इसे और बढ़ाने की योजना बना रही है।

मैक्वेरी का अनुमान है कि मौजूदा सॉलिड-फेज पेप्टाइड सिंथेसिस क्षमता ही $550 मिलियन से अधिक के रेवेन्यू पोटेंशियल को सपोर्ट कर सकती है, साथ ही लिक्विड-फेज पेप्टाइड सिंथेसिस से अतिरिक्त बढ़त भी मिल सकती है।

ब्लूमबर्ग के एनालिस्ट्स की सलाह के अनुसार, Divi’s Laboratories पर नजर रखने वाले 33 में से 16 एनालिस्ट्स ने इस स्टॉक के लिए ‘Buy’ रेटिंग दी है, जबकि 7 ने ‘Hold’ और 10 ने ‘Sell’ रेटिंग दी है।

शुक्रवार को Divi’s Laboratories के शेयर 2.7% बढ़कर ₹8,046.5 पर ट्रेड कर रहे हैं। इस साल अब तक स्टॉक में 27% की बढ़त हुई है। कंपनी शनिवार, 1 अगस्त को जून तिमाही के नतीजे जारी करेगी।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Hyundai Motor India Share Price: मुनाफा 35% घटने के बावजूद ब्रोकरेज बुलिश, शेयर 9% तक भागा

हुंडई मोटर इंडिया के शेयर में 31 जुलाई को दिन में 9 प्रतिशत तक की बढ़त दिखी। BSE पर शेयर 2,208.90 रुपये के हाई तक गया। अप्रैल-जून 2026 तिमाही में कंपनी का मुनाफा गिरने और रेवेन्यू कम रहने के बावजूद शेयर चढ़ा है। इसकी वजह है कि शेयर पर ब्रोकरेज अभी भी बुलिश हैं। कंपनी का मार्केट कैप बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है।

जून 2026 तिमाही में हुंडई मोटर इंडिया का शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 35 प्रतिशत घटकर 888.62 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले मुनाफा 1369.23 करोड़ रुपये था। ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 16,334.63 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो जून 2025 तिमाही में 16,412.88 करोड़ रुपये था। कंपनी का कुल खर्च बढ़कर 15,407.35 करोड़ रुपये हो गया, जबकि जून 2025 तिमाही में यह 14,780.47 करोड़ रुपये था।

हुंडई मोटर इंडिया वित्त वर्ष 2026 के लिए 21 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड दे रही है। इसके लिए रिकॉर्ड डेट 5 अगस्त है। इस तारीख तक जिन लोगों के नाम शेयरों के लाभार्थी मालिकों के तौर पर रजिस्टर ऑफ मेंबर्स ऑफ द कंपनी या डिपॉजिटरीज के रिकॉर्ड्स में दर्ज हो चुके होंगे, वे डिविडेंड के हकदार होंगे। इस डिविडेंड पर 26 अगस्त को कंपनी की सालाना आम बैठक में शेयरहोल्डर्स की मंजूरी ली जाएगी। मंजूरी मिलने के बाद पेमेंट किया जाएगा।

Hyundai Motor India शेयर पर ब्रोकरेज की राय

CLSA ने 2,300 रुपये के टारगेट प्राइस के साथ स्टॉक पर ‘आउटपरफॉर्म’ रेटिंग को दोहराया है। कहा है कि हुंडई का EBITDA मार्जिन 9.3 प्रतिशत रहा, जो उम्मीद के मुताबिक था। एडजस्टेड ग्रॉस मार्जिन पिछली तिमाही के मुकाबले 40 बेसिस पॉइंट्स कम रहा। ब्रोकरेज ने कहा कि कीमतों में लगातार बढ़ोतरी, डिस्काउंट में कमी और लागत कम करने के उपायों से कंपनी को कमोडिटी की लागत के दबाव के बावजूद ग्रॉस मार्जिन को मैनेज करने में मदद मिली। कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद कंपनी ने अपने मार्जिन गाइडेंस को दोहराया है।

नोमुरा ने हुंडई मोटर इंडिया के स्टॉक पर ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखी है। टारगेट प्राइस 2,498 रुपये तय किया है। ब्रोकरेज का कहना है कि हुंडई का पहली तिमाही का EBITDA मार्जिन उम्मीद के मुताबिक रहा। उम्मीद है कि जुलाई-सितंबर 2026 में 2 नए मॉडल लॉन्च होने से कंपनी का प्रदर्शन बेहतर होगा। नोमुरा का कहना है कि वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही से कंपनी की ग्रोथ इंडस्ट्री की ग्रोथ से बेहतर रहेगी।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (MOSL) ने भी हुंडई मोटर इंडिया पर ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखी है और टारगेट प्राइस 2,334 रुपये प्रति शेयर तय किया है। ब्रोकरेज का कहना है कि जून तिमाही का शुद्ध मुनाफा उसके अनुमान से अधिक रहा। कमोडिटी की महंगाई और कम वॉल्यूम के कारण EBITDA मार्जिन पर असर पड़ा। ब्रोकरेज को उम्मीद है कि कंपनी का वॉल्यूम FY26-28 के दौरान 9 प्रतिशत CAGR (कंपाउंडेड एनुअल ग्रोथ रेट) और अर्निंग्स 16 प्रतिशत CAGR से बढ़ेगी।

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Thermax Share Price: Q1 नतीजों के बाद स्टॉक क्रैश, 15% टूटा शेयर, कमजोर नतीजों का दिखा असर

Thermax Share Price: कैपिटल गुड्स सेक्टर की कंपनी थर्मेक्स (Thermax) के शेयर में भारी बिकवाली देखने को मिली। शेयर आज 15 फीसदी टूटा। स्टॉक में यह गिरावट जून तिमाही के कमजोर नतीजों के बाद देखने को मिली है। कंपनी का मुनाफा ₹25.24 करोड़ रहा, जो ₹151 करोड़ के बाज़ार अनुमान से 83.28% कम था। यह पिछले साल के ₹152.4 करोड़ से भी 83.44% कम था।

इसका ऑपरेशन से रेवेन्यू ₹2,303 करोड़ रहा, जो CNBC-TV18 के ₹2,433 करोड़ के अनुमान से 5.34% कम था। यह पिछले साल के ₹2,157 करोड़ से 6.77% ज़्यादा था।

कंपनी का EBITDA (ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमॉर्टाइज़ेशन से पहले की कमाई) ₹69.5 करोड़ रहा, जो ₹219 करोड़ के बाज़ार अनुमान से 68.26% और पिछले साल के ₹224.8 करोड़ से 69.08% कम था।

वहीं EBITDA मार्जिन एक साल पहले की समान अवधि के 10.42% से घटकर तेज़ी से 3.02% हो गया और यह 9% के बाज़ार अनुमान से भी कम था।

हालांकि कंपनी के ऑर्डर इनफ्लो में 2% की बढ़ोतरी हुई और यह पिछले साल के ₹2,748 करोड़ से बढ़कर ₹2,809 करोड़ हो गया। 30 जून तक इसकी कुल ऑर्डर बुक 23% बढ़कर ₹14,045 करोड़ हो गई।

गाइडेंस

Thermax मैनेजमेंट ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में CNBC-TV18 को बताया कि कंपनी को पहली तिमाही में एक खास प्रोजेक्ट पर लागत बढ़ने के कारण ₹91 करोड़ का एकमुश्त नुकसान उठाना पड़ा। खाड़ी युद्ध के कारण आई रुकावटों की वजह से इसकी डिलीवरी लक्ष्य से कम रही।

मैनेजमेंट ने कॉन्फ्रेंस में कहा कि Thermax की दूसरी तिमाही पहली तिमाही से बेहतर होगी और कंपनी के मार्जिन इस फाइनेंशियल ईयर की दूसरी छमाही तक पुराने स्तर पर वापस आ जाएंगे।

कंपनी के अनुसार, उसके क्लाइंट्स बनाए गए इक्विपमेंट नहीं ले पाए, जिसके कारण पहली तिमाही में ₹300 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज नहीं किया जा सका। दूसरी तिमाही में कच्चे माल की ज़्यादा लागत का कुछ असर दिख सकता है। हालांकि, कंपनी ने कहा है कि नए ऑर्डर की कीमतें अब इन बढ़ी हुई लागतों को ध्यान में रखकर तय की जा रही हैं।

थर्मैक्स के मामले में, स्टॉक पर “BUY” (खरीदने) की सलाह देने वाले एनालिस्ट्स की तुलना में “sELL” (बेचने) की सलाह देने वाले एनालिस्ट्स ज़्यादा हैं। 22 एनालिस्ट्स में से 5 ने “BUY” रेटिंग दी है, 9 ने “HOLD” (बनाए रखने) की सलाह दी है, जबकि 8 ने स्टॉक पर “SELL” रेटिंग दी है।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Aarti Industries: केमिकल कंपनी का मुनाफा 260% उछला, मैनेजमेंट भी बड़े बदलाव हुए

Aarti Industries Q1 Results: केमिकल कंपनी आरती इंडस्ट्रीज ने जून 2026 तिमाही में दमदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा 260.47% बढ़कर ₹155 करोड़ पहुंच गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹43 करोड़ था। वहीं, रेवेन्यू 42.42% बढ़कर ₹2,387 करोड़ हो गया। एक साल पहले यह ₹1,676 करोड़ था।

कंपनी की ऑपरेटिंग कमाई भी मजबूत रही। EBITDA 79.8% बढ़कर ₹383 करोड़ पहुंच गया। वहीं, EBITDA मार्जिन 12.71% से बढ़कर 16.04% हो गया। मार्च तिमाही के मुकाबले भी मुनाफा 13.14% और रेवेन्यू 8.20% बढ़ा है।

सब्सिडियरी बेचने से भी हुआ फायदा

आरती इंडस्ट्रीज को तिमाही के दौरान ₹2 करोड़ का एक्सेप्शनल गेन मिला। यह फायदा Shanti Intermediates में अपनी हिस्सेदारी बेचने से हुआ। हालांकि, कंपनी का कहना है कि इससे कारोबार पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। वजह यह है कि इस सब्सिडियरी का रेवेन्यू और मुनाफे में योगदान 0.1% से भी कम था।

आगे की क्या है तैयारी?

आरती इंडस्ट्रीज के CEO और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सुयोग कोटेचा ने कहा कि FY27 की शुरुआत अच्छी रही है। हालांकि, दुनिया भर में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव का असर कारोबार पर पड़ा। इससे बिक्री का वॉल्यूम थोड़ा दबा रहा। कंपनी को उम्मीद है कि दूसरी तिमाही में मांग बढ़ेगी और वॉल्यूम भी सुधरेगा।

कंपनी ने बताया कि Zone IV Expansion और Chlorotoluene Value Chain प्रोजेक्ट में मजदूरों की कमी की वजह से 4 से 6 महीने की देरी हुई है। अब इन्हें अगले तीन तिमाहियों में चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाएगा।

FY27 के लिए ₹700-800 करोड़ के कैपेक्स का लक्ष्य भी बरकरार रखा गया है। वहीं, Superform Joint Venture और Re Aarti Chemical Recycling Venture भी तय योजना के मुताबिक आगे बढ़ रहे हैं।

मैनेजमेंट में भी होगा बड़ा बदलाव

आरती इंडस्ट्रीज को ने नेतृत्व में बदलाव का भी ऐलान किया है। 1 अक्टूबर 2026 से सुयोग कोटेचा कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO बन जाएंगे। इसके लिए शेयरधारकों की मंजूरी ली जाएगी।

वहीं, मौजूदा चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर राजेंद्र गोगरी अब नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन की जिम्मेदारी संभालेंगे। राशेश गोगरी और रेनिल गोगरी को नॉन-एग्जीक्यूटिव वाइस चेयरमैन बनाया जाएगा। कंपनी का कहना है कि यह बदलाव लंबे समय की उत्तराधिकार योजना और बेहतर कॉरपोरेट गवर्नेंस का हिस्सा है।

आरती इंडस्ट्रीज के शेयरों का हाल

आरती इंडस्ट्रीज का शेयर गुरुवार को 0.91% की गिरावट के साथ 481.10 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में स्टॉक 29.35% चढ़ा है। वहीं, 1 साल में इसने करीब 8% का रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 17.42 हजार रुपये है।

आरती इंडस्ट्रीज भारत की प्रमुख स्पेशियलिटी केमिकल कंपनियों में से एक है। कंपनी ऐसे केमिकल बनाती है, जिनका इस्तेमाल कई बड़े उद्योगों में होता है। इनमें फार्मा, एग्रोकेमिकल, पॉलिमर, पेंट, डाई, पिगमेंट, एडिटिव्स और होम एंड पर्सनल केयर सेक्टर शामिल हैं।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Best Agrolife Q1 Results: एग्रोकेमिकल कंपनी का मुनाफा 104% बढ़ा, फोकस में रहेगा स्टॉक

Best Agrolife Q1 Results: एग्रोकेमिकल कंपनी Best Agrolife ने जून तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। इस बार कंपनी का प्रदर्शन बेहतर रहा। अप्रैल-जून तिमाही में कंपनी का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 104% बढ़कर 41 करोड़ रुपये पहुंच गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह 20 करोड़ रुपये था।

कंपनी का कहना है कि बेहतर प्रोडक्ट मिक्स, कीमतों में बढ़ोतरी, लागत पर नियंत्रण और ऑपरेशनल एफिशिएंसी की वजह से मुनाफे में यह तेज उछाल आया है।

रेवेन्यू भी बढ़ा, मार्जिन में बड़ा सुधार

बेस्ट एग्रोलाइफ का ऑपरेशन होने वाली रेवेन्यू भी बढ़ी है। जून तिमाही में यह 4% बढ़कर 396 करोड़ रुपये रही। एक साल पहले इसी तिमाही में रेवेन्यू 381 करोड़ रुपये थी। ग्रॉस प्रॉफिट 32% बढ़कर 146 करोड़ रुपये पहुंच गया।

ग्रॉस मार्जिन 29% से बढ़कर 37% हो गया। EBITDA 70% बढ़कर 78 करोड़ रुपये रहा। वहीं EBITDA मार्जिन 12% से बढ़कर 20% पर पहुंच गया। PAT मार्जिन भी 5% से बढ़कर 10% हो गई।

तिमाही आधार पर भी रिकवरी दिखी

तिमाही आधार पर भी कंपनी का प्रदर्शन काफी मजबूत रहा। मार्च तिमाही में बेस्ट एग्रोलाइफ का रेवेन्यू 156 करोड़ रुपये था, जो जून तिमाही में बढ़कर 396 करोड़ रुपये पहुंच गई। यानी इसमें 154% की बढ़ोतरी हुई।

EBITDA मार्च तिमाही में 27 करोड़ रुपये के घाटे में था, लेकिन जून तिमाही में 78 करोड़ रुपये के मुनाफे पर पहुंच गया। कंपनी का शुद्ध मुनाफा भी मार्च तिमाही में 37 करोड़ रुपये के नुकसान से निकलकर जून तिमाही में 41 करोड़ रुपये के फायदे में आ गया।

मानसून की देरी के बावजूद अच्छा प्रदर्शन

बेस्ट एग्रोलाइफ के मैनेजिंग डायरेक्टर विमल कुमार ने कहा कि इस बार मानसून देर से आया। कई इलाकों में बारिश भी बराबर नहीं हुई। इसका असर खरीफ की बुवाई और फसल सुरक्षा वाले उत्पादों की मांग पर पड़ा। इसके बावजूद कंपनी ने रेवेन्यू और मुनाफे दोनों में बढ़ोतरी दर्ज की।

उनके मुताबिक Bestman, Fetagen, Warden Extra और Ronfen जैसे प्रोडक्ट्स की मांग मजबूत रही। हाल में लॉन्च किए गए Fluzam और Cubax Power Extra को भी बाजार में अच्छा रिस्पॉन्स मिला।

आगे भी ग्रोथ की उम्मीद

बेस्ट एग्रोलाइफ को उम्मीद है कि अब मानसून की रफ्तार बढ़ने के साथ खरीफ सीजन में मांग भी तेज होगी।

कंपनी का कहना है कि वह नए प्रोडक्ट्स, बाजार विस्तार और ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर फोकस बनाए रखेगी। इससे आने वाली तिमाहियों में भी बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है।

बेस्ट एग्रोलाइफ के शेयर

बेस्ट एग्रोलाइफ का गुरुवार को 1.49% की गिरावट के साथ 16.49 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 1 महीने में स्टॉक 6.87% चढ़ा है। हालांकि, बीते 6 महीने इसने 12.98% का नेगेटिव रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 586.21 करोड़ रुपये है।

बेस्ट एग्रोलाइफ कृषि रसायन (Agrochemicals) सेक्टर की कंपनी है। यह फसल सुरक्षा के लिए कीटनाशक, खरपतवारनाशक, फफूंदनाशक और अन्य क्रॉप प्रोटेक्शन प्रोडक्ट्स बनाती और बेचती है। कंपनी का कारोबार भारत के साथ-साथ कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी फैला है।

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Gokul Agro Q1 Results: गोकुल एग्रो का मुनाफा 74% उछला, EBITDA में 52% की शानदार बढ़त

Gokul Agro Q1 Results: खाद्य तेल और एग्री-प्रोसेसिंग सेक्टर की कंपनी गोकुल एग्रो रिसोर्सेज ने जून तिमाही में अच्छे नतीजे पेश किए हैं। कंपनी की बिक्री और मुनाफा दोनों बढ़े हैं। बेहतर ऑपरेटिंग एफिशिएंसी, वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स, एक्सपोर्ट और नॉन-एडिबल बिजनेस ने इस ग्रोथ में अहम भूमिका निभाई।

रेवेन्यू ₹5,295 करोड़ के पार

अप्रैल-जून तिमाही में गोकुल एग्रो का शुद्ध मुनाफा 74% बढ़कर ₹123 करोड़ पहुंच गया। वहीं, कंपनी की कुल आय 7% बढ़कर ₹5,295 करोड़ पहुंच गई।

EBITDA 52% बढ़कर ₹217 करोड़ रहा। कंपनी का PAT मार्जिन 2.34% रहा और EPS ₹4.16 दर्ज किया गया। यानी हर मोर्चे पर कंपनी की कमाई मजबूत हुई।

कारोबार लगातार बढ़ रहा

गोकुल एग्रो के पास 575 से ज्यादा डिस्ट्रीब्यूटर्स का नेटवर्क है। इसकी कुल प्रोसेसिंग क्षमता 20 लाख MTPA है। कंपनी के उत्पाद भारत के 28 राज्यों और 33 देशों में बिकते हैं। पिछले पांच साल में कंपनी का रेवेन्यू 23% CAGR, EBITDA 35% CAGR और शुद्ध मुनाफा 54% CAGR की दर से बढ़ा है।

नए कारोबार पर फोकस

गोकुल एग्रो के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर कनुभाई जे. ठक्कर ने कहा कि इस तिमाही में बायोडीजल प्लांट शुरू किया गया। साथ ही स्पेशलिटी फैट्स पोर्टफोलियो का विस्तार हुआ। ई-कॉमर्स, इंस्टीट्यूशनल ग्राहकों और एक्सपोर्ट के जरिए बाजार में पकड़ भी मजबूत हुई। इन कदमों से आने वाले समय में ग्रोथ को और रफ्तार मिलने की उम्मीद है।

आगे क्या है प्लान?

गोकुल एग्रो अब कंज्यूमर ब्रांड्स, वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स और एक्सपोर्ट बिजनेस पर ज्यादा जोर दे रही है। इसके साथ ही क्षमता बढ़ाने और मजबूत वित्तीय अनुशासन बनाए रखने पर भी फोकस रहेगा। कंपनी का मानना है कि खाद्य तेल की बढ़ती मांग और सरकार की नीतियों से आगे भी कारोबार को अच्छा सपोर्ट मिलेगा।

गोकुल एग्रो का शेयर गुरुवार को 0.75% की बढ़त के साथ 224.88 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में स्टॉक ने 38.87% का रिटर्न दिया है। वहीं, 1 साल में यह 45.79% चढ़ा है।

Tata Steel Q1 Results: टाटा की कंपनी को ₹2318 करोड़ मुनाफा, रेवेन्यू उम्मीद से बेहतर

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Mazagon Dock Q1 Results: सरकारी डिफेंस कंपनी का मुनाफा 22% बढ़ा, ऑर्डर बुक ₹18000 करोड़ के पार

Mazagon Dock Q1 Results: डिफेंस सेक्टर की सरकारी कंपनी मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स (Mazagon Dock Shipbuilders) ने जून तिमाही के मजबूत नतीजे जारी किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 21.5% बढ़कर ₹549.4 करोड़ रहा। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹452.2 करोड़ था।

रेवेन्यू में 12% की बढ़त

मझगांव डॉक का ऑपरेशंस से रेवेन्यू 12.1% बढ़कर ₹2,943 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी अवधि में यह ₹2,626 करोड़ था। कंपनी को अपने विभिन्न युद्धपोत और पनडुब्बी निर्माण प्रोजेक्ट्स में लगातार काम आगे बढ़ने का फायदा मिला।

मझगांव डॉक का जून तिमाही में EBITDA 48% बढ़कर ₹446.6 करोड़ पहुंच गया। वहीं, EBITDA मार्जिन 11.5% से बढ़कर 15.2% हो गया। इससे साफ है कि कंपनी की ऑपरेशनल एफिशिएंसी में अच्छी सुधार देखने को मिली। कंपनी की कुल आय ₹3,081 करोड़ रही, जो पिछले साल की समान तिमाही के ₹2,949 करोड़ से ज्यादा है।

ऑर्डर बुक ₹18,218 करोड़

30 जून 2026 तक मझगांव डॉक की ऑर्डर बुक ₹18,218 करोड़ रही। इससे आने वाली तिमाहियों में कंपनी के कारोबार और रेवेन्यू को अच्छी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

मझगांव डॉक के शेयरों का हाल

मझगांव डॉक का शेयर गुरुवार को 0.79% बढ़कर ₹2,326 पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में स्टॉक 9.60% गिरा है। वहीं, 1 साल में यह 15.72% टूटा है। हालांकि, पिछले 5 साल में स्टॉक ने 1,692% का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 93.62 हजार करोड़ रुपये हैय़

मझगांव डॉक का बिजनेस

मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स भारत की प्रमुख रक्षा शिपबिल्डिंग कंपनी है। यह भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल के लिए युद्धपोत, पनडुब्बियां और अन्य रक्षा पोत बनाती है। यह देश की इकलौती सरकारी शिपयार्ड कंपनी है, जो डिस्ट्रॉयर और पनडुब्बियां दोनों बनाती है। साथ ही, इसमें एक साथ 11 पनडुब्बियां और 10 युद्धपोत बनाने की क्षमता है।

Vedanta Demerger: वेदांता अब रियल एस्टेट कारोबार भी अलग करेगी, शेयरधारकों को मिलेगा नया शेयर

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