Petrol Diesel Price: क्या सस्ते होने वाले हैं पेट्रोल-डीजल? पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी का आया बड़ा बयान

Petrol Diesel Price Cut: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट के बाद देश भर में पेट्रोल और डीजल के दाम घटने की अटकलें तेज हो गई हैं। कच्चा तेल अब पश्चिम एशिया विवाद के शुरू होने से पहले के स्तर पर वापस आ चुका है।

इस बीच केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने देश में तेल की कीमतें घटने की संभावनाओं पर सरकार का रुख साफ किया है। उन्होंने बताया कि अगर वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम इसी तरह स्थिर बने रहते हैं, तो सरकार स्थिति की समीक्षा करेगी। आइए समझते हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल कितना सस्ता हुआ है और आपकी जेब को इसका फायदा कब से मिलेगा।

कच्चा तेल $120 से गिरकर $70 पर आया, फिर भी क्यों नहीं घटे दाम?

पश्चिम एशिया में तनाव के दौरान जब होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया गया था, तब ब्रेंट क्रूड की कीमतें उछलकर 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई थीं। लेकिन हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव खत्म करने के लिए हुए एक समझौते के बाद कच्चे तेल के दाम वापस 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गए हैं।

इसके बावजूद घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतें तुरंत न घटने के पीछे पेट्रोलियम मंत्री ने दो मुख्य कारण बताए हैं:

पुराने महंगे स्टॉक की प्रोसेसिंग: तेल विपणन कंपनियां अभी भी उस कच्चे तेल को प्रोसेस कर रही हैं, जिसे पश्चिम एशिया संकट के चरम पर महंगे दामों में खरीदा गया था।

पहले का भारी नुकसान: इस विवाद के दौरान आम जनता को महंगाई से बचाने के लिए कंपनियों ने लागत से कम कीमत पर ईंधन बेचा, जिससे 30 जून तक कंपनियों को ₹74781 करोड़ का भारी नुकसान उठाना पड़ा है।

प्राइवेट कंपनी ने घटाईं कीमतें: राहत की शुरुआत?

सरकारी तेल कंपनियों द्वारा समीक्षा किए जाने से पहले ही निजी क्षेत्र की दिग्गज तेल कंपनी नायरा एनर्जी ने आम जनता को राहत देने की शुरुआत कर दी है। नायरा एनर्जी ने अपने 7000 से अधिक फ्यूल स्टेशनों के नेटवर्क पर पेट्रोल की कीमतों में ₹5 प्रति लीटर और डीजल में ₹3 प्रति लीटर की कटौती का ऐलान किया है। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि अगर क्रूड ऑयल की कीमतें $70 के आसपास स्थिर रहीं, तो जल्द ही सरकारी तेल कंपनियां भी बड़ी राहत दे सकती हैं।

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IT Stocks के दम पर Sensex में 500 अंकों का उछाल, 5 वजहों से Nifty भी 24150 के पार

Share Market Rally: इस वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही के दूसरे दिन भी मार्केट में शानदार रौनक है। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत आगे बढ़ी तो कच्चे तेल फिसल गया और मार्केट में रौनक छा गई। घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स इंट्रा-डे में 500 प्वाइंट्स से अधिक उछल पड़ा तो निफ्टी भी 24150 के पार चला गया। ब्रोडर लेवल पर भी रौनक है और निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप आधे-आधे फीसदी मजबूत हुए हैं। अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो फिलहाल 10:25 AM पर सेंसेक्स 295.10 प्वाइंट्स यानी 0.38% की बढ़त के साथ 77,217.74 और निफ्टी 50 भी 89.45 प्वाइंट्स यानी 0.37% की बढ़त के साथ 24,095.30 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 526.61 प्वाइंट्स चढ़कर 77,449.25 और निफ्टी 153.60 प्वाइंट्स उछलकर 24,159.45 तक पहुंचा था।

Share Market Rally: ये है वजह

अमेरिका-ईरान वार्ता

कतर का कहना है कि ईरान और अमेरिका के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य यानी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बातचीत आगे बढ़ी है। यह रास्ता कच्चे तेल के लिए काफी अहम है क्योंकि युद्ध से पहले वैश्विक सप्लाई का पांचवा हिस्सा यहीं से होकर गुजरता था।

कच्चे तेल में गिरावट

लगातार तीसरे दिन कच्चे तेल में गिरावट ने मार्केट में रौनक बिखेरी है। अमेरिका और ईरान के बातचीत की प्रक्रिया आगे बढ़ने पर इस पर दबाव बढ़ा। ब्रेंट क्रूड 1% से अधिक गिरकर प्रति बैरल $71 के नीचे आ गया को यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट भी 1% से अधिक टूटकर प्रति बैरल $68 के नीचे आ गया।

रुपये की मजबूती

कच्चे तेल की गिरावट से रुपये को सपोर्ट मिला। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले यह 32 पैसे मजबूत 94.93 के भाव पर खुला।

India VIX में गिरावट

मार्केट को घबराहट को मापने वाले इंडिया विक्स में गिरावट ने मार्केट में अनिश्चितता कम होने का संकेत दिया। फिलहाल यह 3.85% की गिरावट के साथ 12.73 पर है।

आईटी शेयरों की जोरदार खरीदारी

लगातार चार कारोबारी दिनों की गिरावट के बाद निफ्टी आईटी ने आज जोरदार वापसी की और 3% से अधिक उछल पड़ा। फिलहाल सभी सेक्टर के निफ्टी इंडेक्स ग्रीन हैं लेकिन आईटी और मेटल को छोड़ सभी में 1% से कम तेजी है। निफ्टी मेटल में 1% से अधिक की बढ़त है।

टेक्निकल आउटलुक

जियोजीत इंवेस्टमेंट्स के चीफ मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट आनंज जेम्स का कहना है कि अनुमान के मुताबिक कल की बढ़त 24000 के लेवल से आगे नहीं बढ़ पाई, लेकिन हाई VWAP से इसमें आगे तेजी का संकेत मिल रहा है। उनका कहना है कि निफ्टी को शुरुआत में 24170 के लेवल पर रेजिस्टेंस झेलना पड़ सकता है लेकिन इसके 24600 तक पहुंचने की संभावना अधिक है। हालांकि यह बुलिश रुझान तब तक है, जब तक निफ्टी का 23,970 का लेवल बना रहे।

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Crude Oil Price: US-ईरान बातचीत के बीच लगातार तीसरे सेशन में गिरे क्रूड के दाम, $71 के नीचे आया ब्रेंट का भाव

Crude Oil Price: ईरान और अमेरिका के बीच पॉजिटिव बातचीत की खबरों से कच्चे तेल में लगातार तीसरे सेशन में नरमी देखने को मिल रहा। क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट से कच्चे तेल की शिपमेंट बढ़ी और US और ईरान के बीच इनडायरेक्ट बातचीत में प्रोग्रेस के संकेत दिखे।

सितंबर डिलीवरी के लिए ब्रेंट क्रूड पिछले दो सेशन में 3% से ज़्यादा गिरने के बाद $71 प्रति बैरल के करीब ट्रेड कर रहा था, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट $68 प्रति बैरल के आसपास था।

आज कच्चे तेल की कीमतों को क्या चला रहा है?

ब्लूमबर्ग ने US अधिकारी के हवाले से कहा कि स्ट्रेटेजिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट से तेल शिपमेंट बढ़कर 10 मिलियन बैरल प्रति दिन से ज़्यादा हो गया है, जो समुद्री ट्रैफिक को रोकने की ईरान की घटती क्षमता को दिखाता है। इस बीच, US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने चल रही बातचीत में हुई प्रोग्रेस का स्वागत किया।

कतर ने कहा कि अगले राउंड की बातचीत ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के बाद जल्द से जल्द तय की जाएगी, जो लड़ाई शुरू होने पर एक एयर स्ट्राइक में मारे गए थे। ईरान की सरकारी मीडिया ने बताया कि ये सेरेमनी 4 जुलाई से शुरू होंगी और कई दिनों तक चलेंगी।

2020 के बाद से तिमाही में सबसे बड़ी गिरावट के बाद तेल की कीमतों में गिरावट जारी है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल का शिपमेंट – जो फारस की खाड़ी के प्रोड्यूसर्स को ग्लोबल मार्केट से जोड़ने वाला एक ज़रूरी रास्ता है – वीकेंड में हुई झड़पों के बावजूद बिना रुके जारी रहा। हालांकि कुल सप्लाई कुछ हद तक सीमित है, यूनाइटेड अरब अमीरात ने अल्टरनेटिव लॉजिस्टिक्स के ज़रिए एक्सपोर्ट को लड़ाई से पहले के लेवल पर वापस ला दिया है, जबकि अमेरिकी तेल की कमज़ोर मांग के बीच अमेरिका के बड़े कच्चे तेल के बेंचमार्क डिस्काउंट पर आ गए हैं।

कतर में बातचीत से पहले, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से शिपिंग पर कंट्रोल बनाए रखने के अपने इरादे को फिर से पक्का किया, और अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम और लेबनान में लड़ाई सहित कुछ खास रुकावटों पर ज़ोर दिया, जो 60-दिन के सीज़फ़ायर पीरियड के दौरान बातचीत को मुश्किल बना रहे हैं। इस बीच, अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को वर्जीनिया में रिपोर्टर्स से बात करते हुए दोहराया कि ईरान को न्यूक्लियर हथियार हासिल करने की इजाज़त नहीं दी जानी चाहिए।

Crude Oil Price: US-ईरान बातचीत में अनिश्चितता के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, ब्रेंट क्रूड $73 के पास

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Stock Market News: जून तिमाही में रिटेल निवेशकों ने इक्विटी में की जोरदार खरीदारी, बाजार में लगाए 35,328 करोड़ रुपये

Stock Market News: कई महीनों तक किनारा बनाए रहने के बाद,रिटेल निवेशक भारतीय इक्विटी मार्केट में वापस लौट रहे हैं। जून तिमाही में इनकी खरीदारी में तेजी देखने को मिली है। यह लंबे समय तक सावधानी बरतने के बाद निवेशकों की सोच में आए बदलाव का संकेत है। NSE के डेटा के मुताबिक रिटेल निवेशकों ने जून में 14,088 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। इसी तरह इनकी तरफ से मई में 3,018 करोड़ रुपये और अप्रैल में 18,222 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे गए। पूरी जून तिमाही की बात करें तो उनकी कुल खरीदारी 35,328 करोड़ रुपये रही। यह दिसंबर 2024 की तिमाही के बाद उनकी सबसे बड़ी तिमाही खरीदारी है। दिसंबर तिमाह में उन्होंने लगभग 56,126 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे।

जून तिमाही में विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बावजूद रिटेल निवेशकों की तरफ से जमकर खरीदारी हुई।

2025 की शुरुआत से ही रिटेल निवेशक बाजार से दूरी बनाए हुए थे। उन्होंने 2025 में 25,615 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे। जबकि 2026 के शुरुआती तीन महीनों में उन्होंने सिर्फ 2,750 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे।

SMC ग्लोबल सिक्योरिटीज में फंडामेंटल रिसर्च के हेड,सौरभ जैन ने कहा कि यह खरीदारी सट्टेबाजी के लिए गिरावट पर की गई खरीदारी नहीं है,बल्कि यह साइड में पड़ी पूंजी का रणनीतिक और मैक्रो-आधारित निवेश है। ब्रॉडर मार्केट के हालात भी इस नजरिए का सपोर्ट करते हैं।

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अप्रैल-जून तिमाही के दौरान,सेंसेक्स और निफ्टी में 6.3 प्रतिशत और 6.9 प्रतिशत की बढ़त हुई,जो पिछले चार तिमाहियों में उनकी सबसे बड़ी तिमाही बढ़त है। इस दौरान मेन इंडेक्स के मुकाबले ब्रॉडर मार्केट का प्रदर्शन बेहतर रहा। इस अवधि में BSE 150 मिडकैप इंडेक्स 16.7 प्रतिशत बढ़ा,जो जून 2024 के बाद की इसकी सबसे बड़ी तिमाही बढ़त रही।

छोटे-मझोले शेयरों में अच्छी खरीदारी

छोटे-मझोले शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। इसके चलते BSE 250 स्मॉलकैप इंडेक्स में 24.5% की बढ़त हुई,जो जून 2020 के बाद से इसका सबसे अच्छा तिमाही प्रदर्शन रहा। BSE 250 माइक्रोकैप इंडेक्स भी 30% उछला,जो मार्च 2025 में इंडेक्स के शुरू होने के बाद से इसकी सबसे बड़ी तिमाही बढ़त है। जून तिमाही के दौरान BSE पर लिस्टेड सभी कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइज़ेशन 15% बढ़ा।

जैन ने आगे कहा कि फरवरी के आखिर में शुरू हुई मिडिल-ईस्ट जंग और उसके चलते तेल की बढ़ती कीमतों और महंगाई के डर से निवेशकों का भरोसा शुरू में कमजोर हुआ था,लेकिन जून के मध्य में अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते ने एक बड़ी राहत का काम किया। इससे ब्रेंट क्रूड की कीमत चार महीने के निचले स्तर $72 पर आ गई और एनर्जी शॉक प्रीमियम का असर भी कम हुआ।

बाजार को मिला पॉलिसी सपोर्ट

उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया और केंद्र सरकार के 5 जून के बड़े पॉलिसी पैकेज से इस जियोपॉलिटिकल तनाव के असर को कम करने में काफी मदद मिली। इस पैकेज में FPI बॉन्ड निवेश पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स और विदहोल्डिंग टैक्स को हटाना,’फुल्ली एक्सेसिबल रूट’का विस्तार करना और लॉन्ग-टर्म FCNR फिक्स्ड डिपॉजिट व NRI इक्विटी निवेश के लिए बेहतर इंसेंटिव देना शामिल है।

उन्होंने आगे कहा कि इस पॉलिसी सपोर्ट ने FII की निकासी को रोका,रुपये को स्थिर किया और मैक्रो रिस्क को कम किया। इससे रिटेल निवेशकों को यह भरोसा मिला कि वे मार्केट में गिरावट(करेक्शन)का इस्तेमाल एंट्री के अच्छे मौकों के तौर पर कर सकते हैं और अपने कैश रिजर्व को व्यवस्थित तरीके से इक्विटी में फिर से लगा सकते हैं।

FIIs रहे नेट सेलर

बाजार जानकारों का कहना है कि इस तिमाही के ज्यादातर हिस्से में FIIs नेट सेलर बने रहे। उनकी बिकवाली मुख्य वजह ग्लोबल मैक्रो-इकोनॉमिक फैक्टर रहे। इसमें US बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी,कच्चे तेल की ऊंची कीमतें,जियो-पॉलिटिकल अनिश्चितताएं और ग्लोबल स्तर पर रिस्क-ऑफ का माहौल शामिल है। यह भारत के घरेलू मार्केट के फंडामेंटल्स में किसी खराबी के बजाय ग्लोबल एसेट एलोकेशन में बदलाव को दिखाता है।

विदेशी निवेशकों की निकासी को घरेलू निवेशकों ने किया बेअसर

घरेलू निवेशकों से मिले जबरदस्त सपोर्ट के चलते विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी के बावजूद,भारतीय बाजार मजबूत बने रहे। म्यूचुअल फंड SIP के जरिए लगातार निवेश,घरेलू संस्थागत निवेशकों की जोरदार खरीदारी और रिटेल निवेशकों की बढ़ती भागीदारी ने FII की बिकवाली से बनी सप्लाई को संभाल लिया। इससे बाजार में कोई बड़ी गिरावट नहीं आई और बाजार का ओवरऑल तेजी वाला ढांचा कायम रहा।

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हर गिरावट के बाद ज्यादा ट्रेडिंग वॉल्यूम के साथ बाजार में आई मजबूत रिकवरी

चॉइस ब्रोकिंग में टेक्निकल एनालिस्ट आकाश शाह का कहना है कि भले ही बेंचमार्क इंडेक्स में काफी उतार-चढ़ाव रहा, लेकिन कई लार्ज-कैप और अच्छे मिड-कैप शेयरों ने अपने लॉन्ग-टर्म सपोर्ट लेवल (जैसे 100 डे और 200 डे मूविंग एवरेज) को बनाए रखा। हर गिरावट के बाद ज्यादा ट्रेडिंग वॉल्यूम के साथ बाजार में मजबूत रिकवरी आई, जो इस बात का संकेत है कि निवेशक शेयर जमा (accumulate) कर रहे हैं,न कि बड़े पैमाने पर बेच रहे हैं। यह एक ऐसा प्राइस पैटर्न है जिसे आम तौर पर टेक्निकल नज़रिए से अच्छा माना जाता है।

डिस्क्लेमर:मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Silver Rates Today: एक जुलाई को चांदी की नई कीमतें जारी! जानिए दिल्ली, मुंबई और कोलकाता में क्या है रिटेल रेट

Silver Rates Today: जुलाई के पहले दिन घरेलू सर्राफा बाजार और वायदा बाजार में चांदी की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। कमजोर वैश्विक संकेतों और मुनाफावसूली के चलते चांदी के भाव दबाव में रहे, जिससे खरीदारों को राहत मिली। बुधवार, 1 जुलाई को भारत के रिटेल मार्केट में सोने की कीमत में भी गिरावट आई। प्रमुख शहरों में 24-कैरेट और 22-कैरेट सोने के रेट में थोड़ी कमी देखी गई। वहीं, घरेलू बुलियन मार्केट में चांदी की कीमतों में भी गिरावट आई है।

1 जुलाई को अगस्त फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट के लिए MCX गोल्ड रेट 0.94% गिरकर ₹141,600 प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा था। वहीं, MCX सिल्वर फ्यूचर्स सुबह करीब 9:13 बजे 1.86% गिरकर ₹224,520 प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रहा था। मंगलवार को तेल की कीमतों में भारी गिरावट के साथ महीने का समापन हुआ। एनर्जी मार्केट के ट्रेडर्स कतर में अमेरिका और ईरान के बीच नई बातचीत की संभावना पर बारीकी से नजर रखे हुए थे।

चांदी की कीमतों में भारी गिरावट

अगस्त डिलीवरी के लिए ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स (जो इंटरनेशनल बेंचमार्क है) गिरकर $72.92 प्रति बैरल पर आ गया। जून में इस कॉन्ट्रैक्ट में लगभग 21% की गिरावट आई, जो मार्च 2020 के बाद से इसकी सबसे बड़ी मासिक गिरावट थी। सुबह के कारोबार में Comex पर इंटरनेशनल स्पॉट गोल्ड 1.09% गिरकर $3,994.40 प्रति औंस हो गया। जबकि चांदी 2.93% गिरकर $57.73 प्रति औंस पर आ गई।

घरेलू बाजार में अगस्त कॉन्ट्रैक्ट के लिए MCX गोल्ड फ्यूचर्स 0.84% ​​गिरकर ₹1,41,337 प्रति 10 ग्राम हो गया। वहीं, सितंबर कॉन्ट्रैक्ट के लिए सिल्वर फ्यूचर्स 1.8% गिरकर ₹2,24,268 प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रहा था। बाजार की नजर US ADP एम्प्लॉयमेंट चेंज, नॉन-फार्म पेरोल्स और बेरोजगारी के आंकड़ों पर है। इनसे बुलियन की कीमतों में अगली बड़ी हलचल आने की उम्मीद है।

LKP सिक्योरिटीज के VP रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी ने कहा, “फेड की सख्त पॉलिसी के बाद, Comex गोल्ड में जून में पहले ही लगभग 12% की गिरावट आ चुकी है। यह $4,500 से गिरकर $3,950 पर आ गया है, जिससे बाजार ‘ओवरसोल्ड’ स्थिति में पहुंच गया है। $4,000 के स्तर के आसपास सोने में खरीदारी की अच्छी दिलचस्पी दिख रही है। इस स्तर से नीचे जाने पर नई मांग आ रही है।”

एमसीएक्स पर चांदी का भाव

MCX पर चांदी के जुलाई/सितंबर वायदा में सुबह कारोबार के दौरान करीब 1.86% की गिरावट देखी गई। चांदी का वायदा भाव लगभग ₹2,24,520 प्रति किलोग्राम पर कारोबार करता दिखाई दिया।

गिरावट की वजह क्या है?

एक्सपर्ट के अनुसार चांदी की कीमतों पर कई कारणों का असर पड़ा है:-

  • अमेरिकी डॉलर में मजबूती।
  • अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें ऊंची बनाए रखने की उम्मीद।
  • वैश्विक बाजार में निवेशकों की सतर्कता।
  • अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता से सुरक्षित निवेश (Safe Haven) की मांग में कमी।

खरीदारों के लिए क्या मतलब है?

चांदी के दाम में आई गिरावट से आभूषण खरीदने वाले ग्राहकों और औद्योगिक उपयोगकर्ताओं को राहत मिल सकती है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम के कारण आने वाले दिनों में कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

आज के प्रमुख रेट (999 सिल्वर)

दिल्ली: लगभग ₹2,22,400 से ₹2,24,500 प्रति किलोग्राम तक रेट है।

मुंबई: लगभग ₹2,23,800 प्रति किलोग्राम।

कोलकाता: लगभग ₹2,24,000 प्रति किलोग्राम।

MCX पर भी चांदी में कमजोरी देखने को मिली। सुबह के कारोबार में सिल्वर फ्यूचर्स करीब 1.86% टूटकर ₹2,24,520 प्रति किलोग्राम के आसपास कारोबार कर रहे थे। वैश्विक बाजार में डॉलर की मजबूती, मुनाफावसूली और निवेशकों की सतर्कता के कारण चांदी की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय संकेतों के आधार पर आने वाले दिनों में कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

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Crude Oil Price: US-ईरान बातचीत में अनिश्चितता के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, ब्रेंट क्रूड $73 के पास

US-ईरान युद्ध: बुधवार, 1 जुलाई को शुरुआती कारोबार में तेल की कीमतों में तेजी आई, जब ईरान ने कहा कि वह US अधिकारियों के साथ सीधी बातचीत नहीं करेगा, जिससे दोनों देशों के बीच चार महीने से चल रहे संघर्ष को कुछ समय के लिए रोकने वाले नाज़ुक सीज़फ़ायर को लेकर नई चिंताएं बढ़ गई।

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 50 सेंट, या 0.69% बढ़कर $73.45 प्रति बैरल हो गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 63 सेंट, या 0.91% बढ़कर $70.13 प्रति बैरल हो गया।

आज कच्चे तेल की कीमतों में क्या तेजी है?

US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के दामाद, जेरेड कुशनर, और स्पेशल दूत स्टीव विटकॉफ मंगलवार को दोहा पहुँचे, जिसे व्हाइट हाउस ने हाई-लेवल बातचीत बताया। हालाँकि, ईरान और मेज़बान देश कतर ने साफ़ किया कि US डेलीगेशन सीधे ईरानी प्रतिनिधियों के बजाय मीडिएटर्स से बात करेगा। कतर ने कहा कि प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी उन अधिकारियों में शामिल थे जो विटकॉफ और कुशनेर से मिले थे।

बुधवार की बढ़त के बावजूद, तिमाही आधार पर भारी गिरावट के बाद तेल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। ब्रेंट क्रूड साल की पहली और दूसरी तिमाही के बीच लगभग $45 प्रति बैरल गिरा, जो 2008 के ग्लोबल फाइनेंशियल संकट के बाद सबसे बड़ी तिमाही गिरावट है। इसी दौरान US क्रूड फ्यूचर्स लगभग $31 प्रति बैरल गिरा, जो 2020 के बाद सबसे बड़ी गिरावट है, जब COVID-19 महामारी ने ग्लोबल फ्यूल डिमांड को बुरी तरह प्रभावित किया था।

यह तेज गिरावट तब आई जब मिडिल ईस्ट में तनाव कम करने की दिशा में हुई प्रगति ने उस रिस्क प्रीमियम को उलट दिया जिसने संघर्ष के दौरान कीमतों को बढ़ा दिया था।

मंगलवार को जारी रॉयटर्स के एक पोल से पता चला कि एनालिस्ट्स ने ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद पहली बार 2026 के लिए अपने तेल कीमतों के अनुमान को कम किया, जिससे लगातार पांच महीनों से ऊपर की ओर बदलाव का सिलसिला खत्म हो गया। होर्मुज जलडमरूमध्य के फिर से खुलने से ग्लोबल तेल सप्लाई में लंबे समय से रुकावटों की चिंता कम हो गई है। इस बीच, US के वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस ने फिर कहा कि वॉशिंगटन ईरान को होर्मुज स्ट्रेट से गुज़रने वाले जहाजों पर ट्रांज़िट फीस लगाने की इजाज़त नहीं देगा। उन्होंने कहा कि यह स्थिति ईरान के स्ट्रेटेजिक रूप से ज़रूरी इस पानी के रास्ते का इस्तेमाल करने वाले “जहाजों पर टोल वसूलने” से खत्म नहीं होगी।

Crude Oil Price: US-ईरान बातचीत की संभावना से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, ब्रेंट $72 प्रति बैरल के करीब

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Asian Markets Today: एशिया बाजारों में मिला-जुला कारोबार, निक्केई 1% से ज्यादा चढ़ा, कोस्पी 2% गिरा, 40 साल के नए निचले स्तर पर येन

 Asian Market Today: बुधवार को एशियाई बाज़ारों में मिला-जुला कारोबार हुआ। जापान में बढ़त सबसे ज़्यादा रही, जिसमें निक्केई 225 1.79% और टॉपिक्स 1.07% चढ़ा। दक्षिण कोरिया में, कोस्पी 2.29% गिरा जबकि स्मॉल-कैप कोस्डैक 0.42% गिरा।

ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 ज़्यादातर फ्लैट रहा, जो 0.05% नीचे था। इस बीच, हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स फ्यूचर्स 22,990 पर था, जो 22,881.02 के पिछले क्लोज की तुलना में मज़बूत शुरुआत दिखाता है।

गिफ्ट निफ्टी 23,994 के लेवल के आसपास ट्रेड कर रहा था, जो निफ्टी फ्यूचर्स के पिछले क्लोज से लगभग 16 पॉइंट्स का डिस्काउंट था, जो भारतीय स्टॉक मार्केट इंडेक्स के लिए नेगेटिव शुरुआत दिखाता है।

वॉल स्ट्रीट

मंगलवार को वॉल स्ट्रीट का जून महीना मज़बूती के साथ खत्म हुआ, जिसमें S&P 500 और नैस्डैक ने 2020 के बाद अपनी सबसे बड़ी तिमाही बढ़त दर्ज की, क्योंकि आर्थिक मज़बूती और कॉर्पोरेट कमाई को लेकर निवेशकों की उम्मीद मिडिल ईस्ट संघर्ष से जुड़ी चिंताओं से ज़्यादा थी। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज ने भी 2022 के बाद अपना सबसे मज़बूत तिमाही प्रदर्शन दर्ज किया।

बड़े इंडेक्स भी दिन में ऊपर बंद हुए, जिसमें डॉव लगातार दूसरे सेशन में रिकॉxर्ड ऊंचाई पर बंद हुआ। S&P 500 सेक्टर में टेक्नोलॉजी स्टॉक्स ने रैली को लीड किया, जबकि फिलाडेल्फिया सेमीकंडक्टर इंडेक्स 3.9% बढ़ा।

डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 136.46 पॉइंट्स या 0.26% बढ़कर 52,319.20 पर बंद हुआ। S&P 500 58.93 पॉइंट्स या 0.79% बढ़कर 7,499.36 पर पहुंच गया, जबकि नैस्डैक कंपोजिट 393.58 पॉइंट्स या 1.52% बढ़कर 26,213.72 पर बंद हुआ।

US-ईरान बातचीत

हाल ही में इन्वेस्टर सेंटिमेंट को इस बढ़ती उम्मीद से सपोर्ट मिला है कि ईरान विवाद को हमेशा के लिए खत्म करने की कोशिशें चल रही हैं, भले ही मिलिट्री टेंशन चल रही हो।

17 जून को, ईरान और U.S. ने चार महीने से चल रहे विवाद को खत्म करने के मकसद से एक मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग पर साइन किए। हालांकि, वीकेंड में फिर से हुई गोलीबारी ने इस समझौते पर शक पैदा कर दिया है। अनिश्चितता को और बढ़ाते हुए, रॉयटर्स ने एक कतरी अधिकारी के हवाले से कहा कि अभी दोहा में मौजूद US के सीनियर दूतों के ईरानी अधिकारियों के साथ हाई-लेवल मीटिंग करने की उम्मीद नहीं है।

जापानी येन में गिरावट

बुधवार को जापानी येन US डॉलर के मुकाबले 40 साल के नए निचले स्तर पर आ गया, जबकि मंगलवार रात को 30-स्टॉक इंडेक्स के पांच साल में पहली छमाही का सबसे अच्छा परफॉर्मेंस देने के बाद डॉव फ्यूचर्स में गिरावट आई।

LSEG डेटा के मुताबिक, येन कमजोर होकर 162.28 प्रति डॉलर पर आ गया, जिससे पिछले सेशन से हो रही गिरावट और बढ़ गई क्योंकि ट्रेडर्स जापानी अधिकारियों के किसी भी संभावित दखल पर नज़र रखे हुए थे।

आज सोने का रेट

नए इकोनॉमिक डेटा के बाद इन्वेस्टर्स ने US मॉनेटरी पॉलिसी के आउटलुक का अंदाज़ा लगाया, जिससे सोना $4,000 प्रति औंस के लेवल से ऊपर ट्रेड कर रहा था। फरवरी के आखिर में ईरान में लड़ाई शुरू होने के बाद से यह कीमती मेटल लगभग 24% गिर गया है, और 200-दिन के मूविंग एवरेज सहित ज़रूरी टेक्निकल सपोर्ट लेवल से नीचे चला गया है, जिसे आमतौर पर लॉन्ग-टर्म मोमेंटम का गेज माना जाता है।

स्पॉट सोना $4,013.75 प्रति औंस पर लगभग बिना बदले रहा, जबकि चांदी 1.2% बढ़कर $58.98 प्रति औंस पर ट्रेड कर रही थी।

कच्चे तेल की कीमतें

बुधवार को शुरुआती कारोबार में तेल की कीमतों में तेज़ी आई, जब ऐसी खबरें आईं कि ईरान अमेरिकी दूतों के साथ बातचीत नहीं करेगा, जिससे दोनों देशों के बीच चार महीने से चल रहे संघर्ष के बाद नाजुक अंतरिम सीज़फ़ायर को लेकर नई चिंताएं बढ़ गई।

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 50 सेंट, या 0.69% बढ़कर $73.45 प्रति बैरल हो गया, जबकि यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 63 सेंट, या 0.91% बढ़कर $70.13 प्रति बैरल हो गया।

डॉलर

मंगलवार को अमेरिकी डॉलर मज़बूत हुआ, जिससे जापानी येन 1986 के बाद अपने सबसे कमज़ोर लेवल पर पहुँच गया और इस बात की अटकलें तेज़ हो गईं कि जापानी अधिकारी सीधे बाज़ार में दखल देने वाले हैं।

सेशन के दौरान ग्रीनबैक 162.66 येन के हाई लेवल पर पहुंच गया और आखिरी बार 0.4% बढ़कर 162.59 येन पर कारोबार कर रहा था। अमेरिकी फ़ेडरल रिज़र्व द्वारा ब्याज़ दर में एक और बढ़ोतरी की बढ़ती बाज़ार उम्मीदों से डॉलर को सपोर्ट मिला है। फेड के टारगेट से ऊपर लगातार महंगाई, लगातार आर्थिक मजबूती, और सेंट्रल बैंक के नए तिमाही अनुमान—जिसमें दिखाया गया कि 19 पॉलिसीमेकर्स में से नौ को साल के आखिर से पहले रेट में एक और बढ़ोतरी की उम्मीद है—ने करेंसी की मजबूती को और मजबूत किया है।

 

GIFT Nifty में दबाव, US-ईरान की घबराहट के बीच लाल निशान में खुल सकता है बाजार, क्रूड ऑयल फिसला

GIFT Nifty ने मंगलवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स के लिए कमजोर शुरुआत का संकेत दिया, जो वॉल स्ट्रीट में रात भर की बढ़त और एशियाई बाजारों में तुलनात्मक रूप से स्थिर बढ़त को ट्रैक करता है, भले ही निवेशक US-ईरान की नई बातचीत से पहले सावधानी बरत रहे थे और मिडिल ईस्ट में हो रहे डेवलपमेंट पर नज़र रख रहे थे।

GIFT Nifty सुबह 8.31 बजे के आसपास 24,004 पर ट्रेड कर रहा था, जो 23.80 पॉइंट या 0.23 प्रतिशत नीचे था, जिससे पता चलता है कि सोमवार का सेशन गिरावट के साथ खत्म होने के बाद सेंसेक्स और निफ्टी आज फिर दबाव के साथ खुल सकते हैं।

भारतीय इक्विटी ने 29 जून को दो दिन की बढ़त का सिलसिला तोड़ दिया क्योंकि बड़े पैमाने पर प्रॉफिट बुकिंग ने सेंटिमेंट पर असर डाला। सेंसेक्स 372.10 पॉइंट या 0.48 प्रतिशत गिरकर 76,728.37 पर आ गया, जबकि निफ्टी 109.75 पॉइंट या 0.46 प्रतिशत गिरकर 23,946.25 पर बंद हुआ। सेशन के दूसरे हाफ में ऑटो, IT, ऑयल एंड गैस और बैंकिंग स्टॉक्स की वजह से बिकवाली का दबाव बढ़ गया, जबकि बड़े मार्केट में कमजोरी ने गिरावट को और बढ़ा दिया।

AI स्टॉक्स में रिकवरी के साथ वॉल स्ट्रीट में उछाल

US मार्केट्स में रात भर टेक्नोलॉजी शेयरों की वजह से अच्छी रिकवरी हुई, क्योंकि पिछले हफ्ते की तेज बिकवाली के बाद इन्वेस्टर्स पिटे हुए AI से जुड़े स्टॉक्स में लौट आए। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 0.59 परसेंट बढ़कर रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया, जबकि S&P 500 में 1.18 परसेंट और नैस्डैक कंपोजिट में 2.07 परसेंट की बढ़त हुई।

हाल ही में वैल्यूएशन से हुई कमजोरी के बाद टेक्नोलॉजी स्टॉक्स ने बेहतर परफॉर्म किया, साथ ही इन्वेस्टर्स को मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने से भी राहत मिली। यूनाइटेड स्टेट्स और ईरान के इस हफ्ते डिप्लोमैटिक कोशिशें जारी रखने की उम्मीद है, हालांकि ईरान ने कहा कि वीकेंड में मिसाइल एक्सचेंज के बाद दोहा में अभी तक कोई मीटिंग तय नहीं हुई है, जिस पर इस महीने की शुरुआत में सहमति बनी थी।

एशियाई मार्केट्स मिले-जुले, US-ईरान बातचीत से पहले तेल में नरमी

शुरुआती बढ़त फीकी पड़ने के बाद मंगलवार को एशियाई मार्केट्स को दिशा पाने में मुश्किल हुई। तिमाही में अच्छी तेज़ी के बाद साउथ कोरिया के टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में गिरावट आई, जबकि हांगकांग का हैंग सेंग 0.5 परसेंट और शंघाई के स्टॉक्स 0.4 परसेंट गिरे। जापान का टॉपिक्स और ऑस्ट्रेलिया का ASX 200 थोड़ा बदला। US फ्यूचर्स मोटे तौर पर स्थिर रहे, जबकि यूरो स्टॉक्स 50 फ्यूचर्स 0.5 परसेंट बढ़े।

US-ईरान बातचीत के बारे में निवेशकों को ज़्यादा क्लैरिटी का इंतज़ार है, जिससे तेल की कीमतें कम हुईं। ब्रेंट क्रूड लगभग 1 परसेंट गिरकर $72.4 प्रति बैरल के करीब आ गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट $70.3 प्रति बैरल के करीब ट्रेड कर रहा था। यह गिरावट इस उम्मीद को दिखाती है कि वीकेंड में मिसाइल हमलों के फिर से होने के बावजूद डिप्लोमेसी से सप्लाई रिस्क कम हो सकता है।

दोहा बातचीत और मॉनसून की प्रोग्रेस पर मार्केट की नज़र

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि US-ईरान बातचीत के अगले राउंड से पहले इन्वेस्टर्स के डेवलपमेंट पर नज़र रखने की वजह से भारतीय इक्विटीज़ में सावधानी के साथ ट्रेड होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि हाल की जियोपॉलिटिकल उथल-पुथल के बावजूद ब्रेंट क्रूड $70-71 प्रति बैरल की रेंज के पास बना हुआ है, लेकिन चेतावनी दी कि होर्मुज स्ट्रेट से शिपिंग में कोई भी रुकावट महंगाई और ग्लोबल रिस्क सेंटिमेंट को लेकर चिंताएं फिर से जगा सकती है। घरेलू स्तर पर, निवेशक गर्मियों की फसल की बुआई पिछले साल की रफ्तार से पीछे रहने के बाद मानसून की प्रगति पर भी करीब से नज़र रखेंगे।

टेक्निकल नजरिए से, पोनमुडी ने कहा कि निफ्टी को 24,100-24,200 ज़ोन में तुरंत रेजिस्टेंस का सामना करना पड़ रहा है, जबकि 23,900 पहला अहम सपोर्ट बना हुआ है। बैंक निफ्टी के लिए, 58,200-58,300 रीजन मुख्य रुकावट बना हुआ है, जबकि 57,600-57,500 ज़ोन से तुरंत सपोर्ट मिलने की उम्मीद है।

टेक्निकल नजरिए से, पोनमुडी ने कहा कि निफ्टी को 24,100-24,200 ज़ोन में तुरंत रेजिस्टेंस का सामना करना पड़ रहा है, जबकि 23,900 पहला अहम सपोर्ट बना हुआ है। बैंक निफ्टी के लिए, 58,200-58,300 का इलाका मुख्य रुकावट बना हुआ है, जबकि 57,600-57,500 ज़ोन से तुरंत सपोर्ट मिलने की उम्मीद है।

पिछले सेशन में इंस्टीट्यूशनल फ्लो मिला-जुला रहा। विदेशी इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स ने 29 जून को 1,350 करोड़ रुपये के भारतीय इक्विटी बेचे, जबकि घरेलू इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स ने लगातार पांचवें सेशन में 2,800 करोड़ रुपये की नेट खरीदारी के साथ अपनी खरीदारी का सिलसिला जारी रखा।

Asian Markets Today: एशियाई बाजारों में मिला-जुला कारोबार, निक्केई में बढ़त,US-ईरान बातचीत पर फोकस

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Crude Oil Price: US-ईरान बातचीत की संभावना से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, ब्रेंट $72 प्रति बैरल के करीब

Crude Oil Price: मंगलवार को तेल की कीमतों में गिरावट आई क्योंकि इन्वेस्टर्स दोहा में होने वाली US-ईरान बातचीत के नतीजे का इंतज़ार कर रहे थे, जबकि दोनों पक्षों ने वीकेंड में मिसाइल हमले किए, जिससे चार महीने से चल रहे संघर्ष को खत्म करने के मकसद से किया गया अंतरिम सीजफ़ायर दबाव में आ गया।

मंगलवार को एक्सपायर होने वाला अगस्त डिलीवरी का ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 1.03%, या 75 सेंट गिरकर $72.40 प्रति बैरल पर आ गया। ज़्यादा एक्टिवली ट्रेड होने वाला सितंबर ब्रेंट कॉन्ट्रैक्ट 0.54%, या 40 सेंट गिरकर $73.51 प्रति बैरल पर आ गया।

इस बीच, US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 0.66%, या 47 सेंट गिरकर $70.32 प्रति बैरल पर आ गया।

आज कच्चे तेल की कीमतों को क्या चला रहा है?

ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री काजम गरीबाबादी के हवाले से रॉयटर्स ने सोमवार को कहा कि ईरानी और ओमानी एक्सपर्ट्स आने वाले दिनों में होर्मुज स्ट्रेट के जरिए ट्रांजिट रूट को फिर से तय करने पर बातचीत शुरू कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि ईरान जहाजों को तय शिपिंग लेन से बाहर जाने से रोकने की कोशिश करेगा।

साथ ही, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माईल बघाई ने साफ किया कि आने वाले दिनों में अमेरिका के साथ किसी भी लेवल पर कोई मीटिंग या बातचीत तय नहीं है।

संभावित बातचीत को लेकर अलग-अलग संकेतों ने 17 जून के सीज़फ़ायर समझौते की कमज़ोरी को दिखाया, जिसने होर्मुज स्ट्रेट के ज़रिए दुनिया भर में तेल शिपमेंट में रुकावट डालने वाली दुश्मनी को कुछ समय के लिए रोक दिया था और नवंबर में होने वाले कांग्रेस चुनावों से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक पॉलिटिकल टेस्ट खड़ा कर दिया था।

इज़राइल अमेरिका-ईरान शांति प्रक्रिया से बाहर रहा है और उसने सार्वजनिक रूप से इस समझौते से खुद को दूर रखा है।

शिपिंग डेटा के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर नए हमलों और अमेरिका और ईरान के बीच नए हमलों के बावजूद, मिडिल ईस्ट के एनर्जी प्रोड्यूसर कच्चे तेल और LNG कार्गो लोड करना जारी रखे हुए हैं।

Crude Oil Price: US- ईरान शांति वार्ता अटकी, क्रूड में उबाल, $70 के ऊपर बना है भाव

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Asian Markets Today: एशियाई बाजारों में मिला-जुला कारोबार, निक्केई में बढ़त,US-ईरान बातचीत पर फोकस

एशियाई बाज़ार

वॉल स्ट्रीट पर रात भर की तेज़ी के बाद, मंगलवार को एशियाई बाज़ार ज़्यादातर ऊपर कारोबार कर रहे थे। जापान का निक्केई 225 0.29% और टॉपिक्स 0.17% बढ़ा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 0.92% गिरा, जबकि कोसडैक 0.88% गिरा। हांगकांग हैंग सेंग इंडेक्स फ्यूचर्स ने कम शुरुआत का संकेत दिया।

गिफ्ट निफ्टी 24,011 के लेवल के आसपास कारोबार कर रहा था, जो निफ्टी फ्यूचर्स के पिछले क्लोज से लगभग 38 पॉइंट्स का प्रीमियम था, जो भारतीय स्टॉक मार्केट इंडेक्स के लिए हल्की पॉजिटिव शुरुआत का संकेत देता है।

वॉल स्ट्रीट

US स्टॉक मार्केट सोमवार को तेज़ी से ऊपर बंद हुआ, जिसमें डाउ जोन्स ने प्रमुख टेक्नोलॉजी शेयरों में तेज़ी के कारण रिकॉर्ड ऊंचाई पर क्लोजिंग की।

डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 306.63 पॉइंट्स या 0.59% बढ़कर 52,182.74 पर पहुंच गया, जबकि S&P 500 86.41 पॉइंट्स या 1.18% बढ़कर 7,440.43 पर पहुंच गया। नैस्डैक कंपोजिट 522.53 पॉइंट्स या 2.07% बढ़कर 25,820.14 पर बंद हुआ।

एनवीडिया के स्टॉक की कीमत 1.27% बढ़ी, AMD के शेयर 3.43% बढ़े, माइक्रोसॉफ्ट के शेयर 1.18% गिरे, अमेज़न के शेयर 3.20% बढ़े, एप्पल के स्टॉक की कीमत 0.72% गिरी, अल्फाबेट के शेयर 4.96% बढ़े, मेटा 2.24% बढ़ा, टेस्ला के स्टॉक की कीमत 8.46% बढ़ी और स्पेसएक्स के शेयर 7.15% बढ़े।

US-ईरान बातचीत

ईरान ने उन खबरों से इनकार किया है कि आने वाले दिनों में अमेरिका के साथ उसकी कोई बातचीत तय है। इस बीच, व्हाइट हाउस ने घोषणा की कि US के स्पेशल दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीनियर सलाहकार, जेरेड कुशनर, ईरानी अधिकारियों के साथ बातचीत के लिए मंगलवार को दोहा जाएंगे।

जापान फैक्ट्री आउटपुट

जापान का फैक्ट्री आउटपुट मई में पिछले महीने की तुलना में उम्मीद से कम गति से बढ़ा। मई में इंडस्ट्रियल आउटपुट पिछले महीने की तुलना में 0.5% बढ़ा, जबकि औसत बाजार अनुमान 1.1% बढ़ोतरी का था। यह बढ़ोतरी का दूसरा महीना था।

आज सोने का रेट

सोने की कीमतों में 1% से ज़्यादा की गिरावट आई और यह लगातार चौथे महीने गिरावट के लिए तैयार था। स्पॉट गोल्ड की कीमत 1.5% गिरकर $3,957.74 प्रति औंस हो गई और यह 12.7% की मासिक गिरावट के लिए तैयार थी। अगस्त डिलीवरी के लिए US गोल्ड फ्यूचर्स 1.7% गिरकर $3,971.60 पर आ गया। स्पॉट सिल्वर की कीमतें 2.4% गिरकर $56.89 प्रति औंस हो गईं।

क्रूड ऑयल की कीमतें

दोहा में US-ईरान बातचीत की उम्मीद से पहले क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट आई। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 1.03% गिरकर $72.40 प्रति बैरल हो गई, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 0.83% गिरकर $70.16 पर आ गया।

डॉलर

डॉलर इंडेक्स, जो US करेंसी को छह दूसरी यूनिट्स के मुकाबले मापता है, पिछले सेशन में 0.26% गिरने के बाद 101.6 पर था, लेकिन दूसरी तिमाही में 1.3% बढ़ने की उम्मीद है। येन 40 साल के सबसे निचले स्तर 162.27 प्रति डॉलर पर आ गया। यूरो $1.14165 पर था, जबकि स्टर्लिंग पिछली बार $1.3251 पर था।

 

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।