भारतीय मूल के अमेरिकी डेमोक्रेटिक सांसद रो खन्ना ने कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नीतियों की वजह से भारत और अमेरिका के रिश्ते पिछले 30 साल में सबसे खराब दौर में पहुंच गए हैं। वॉशिंगटन में आयोजित यूएस-इंडिया स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप फोरम (USISPF) लीडरशिप समिट 2026 में उन्होंने कहा कि ट्रम्प की टैरिफ नीति, ईरान के साथ युद्ध और सहयोगी देशों से बिना सलाह लिए फैसले करने से अमेरिका की साख को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका ने भारत, यूरोप और कनाडा जैसे अपने सहयोगी देशों से बात किए बिना ईरान पर सैन्य कार्रवाई की। इस तरह के फैसलों से अपने सहयोगी देशों का भरोसा कमजोर हुआ है। खन्ना बोले- टैरिफ से भरोसे की एक पीढ़ी खत्म हो गई रो खन्ना ने ट्रम्प की टैरिफ नीति को भी गलत बताया। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में चीन यात्रा के दौरान उनकी मुलाकात एक भारतीय राजदूत से हुई। खन्ना के मुताबिक, राजदूत ने उनसे कहा, “आपके राष्ट्रपति की वजह से भरोसे की एक पूरी पीढ़ी खत्म हो गई है।” उन्होंने कहा कि अगर ट्रम्प की नीतियों से हुए नुकसान को स्वीकार नहीं किया गया तो यह सच्चाई से मुंह मोड़ने जैसा होगा। रो खन्ना ने ट्रम्प को ‘लेम डक’ राष्ट्रपति बताते हुए दावा किया कि डेमोक्रेटिक पार्टी अगले मिड-टर्म चुनाव में प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल करेगी और 2028 का राष्ट्रपति चुनाव भी जीतेगी। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अमेरिका के साथ-साथ दुनिया के देशों के साथ उसके रिश्ते भी दोबारा मजबूत करने होंगे। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट का जिक्र करते हुए कहा कि वे दुनिया के देशों के साथ मिलकर चलने में विश्वास रखते थे और भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का भी समर्थन करते थे। अमेरिकी राजदूत बोले- भारत के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं कार्यक्रम में भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा है कि अमेरिका भारत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करना चाहता है और दुनिया में भारत की बढ़ती ताकत को पूरी तरह स्वीकार करता है। गोर ने कहा, “हम भारत के साथ एक और बड़े समझौते को पूरा करने के बहुत करीब हैं। प्रस्तावित व्यापार समझौता अंतिम चरण में पहुंच गया है।” गोर ने बताया कि कुछ सप्ताह पहले नई दिल्ली में एक भारतीय मंत्री से उनकी मुलाकात हुई थी। मंत्री ने उनसे कहा, खबरों में चाहे जो दिखे, 50 साल बाद भी भारत और अमेरिका दोस्त रहेंगे। अमेरिका दुनिया का सबसे पुराना लोकतंत्र है और भारत सबसे बड़ा लोकतंत्र। गोर ने मोदी-ट्रम्प की दोस्ती का किस्सा भी सुनाया गोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रम्प की दोस्ती का एक किस्सा भी सुनाया। उन्होंने बताया कि कुछ महीने पहले ट्रम्प सुबह 6 बजे (भारतीय समयानुसार) ही पीएम मोदी को फोन करना चाहते थे। गोर ने बताया कि वह मियामी में एक UFC इवेंट के दौरान ट्रम्प के साथ बैकस्टेज बैठे थे। तभी ट्रम्प ने कहा, “चलो प्रधानमंत्री मोदी को फोन करते हैं।” जब गोर ने बताया कि भारत में उस समय सुबह के 6 बजे हैं, तो ट्रम्प ने जवाब दिया, “वो उठे होंगे। वो मेरी तरह हैं, सोते नहीं।” हालांकि, ट्रम्प को कुछ देर बाद मंच पर जाना था, इसलिए दोनों नेताओं की बातचीत अगले दिन तय की गई। गोर ने कहा कि यह दिखाता है कि ट्रम्प, प्रधानमंत्री मोदी को अपना करीबी दोस्त मानते हैं। उन्होंने कहा, “जब कोई आपका दोस्त होता है तो हर बातचीत पहले से तय नहीं करनी पड़ती। आप सीधे फोन करके पूछ सकते हैं कि कैसे हैं।” उन्होंने कहा कि ट्रम्प भारत का सम्मान करते हैं और प्रधानमंत्री मोदी को कई दूसरे विश्व नेताओं से अलग नजर से देखते हैं। गोर के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच यही भरोसा भारत-अमेरिका संबंधों को भी मजबूत करता है।
भारतीय मूल के अमेरिकी डेमोक्रेटिक सांसद रो खन्ना ने कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नीतियों की वजह से भारत और अमेरिका के रिश्ते पिछले 30 साल में सबसे खराब दौर में पहुंच गए हैं। वॉशिंगटन में आयोजित यूएस-इंडिया स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप फोरम (USISPF) लीडरशिप समिट 2026 में उन्होंने कहा कि ट्रम्प की टैरिफ नीति, ईरान के साथ युद्ध और सहयोगी देशों से बिना सलाह लिए फैसले करने से अमेरिका की साख को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका ने भारत, यूरोप और कनाडा जैसे अपने सहयोगी देशों से बात किए बिना ईरान पर सैन्य कार्रवाई की। इस तरह के फैसलों से अपने सहयोगी देशों का भरोसा कमजोर हुआ है। खन्ना बोले- टैरिफ से भरोसे की एक पीढ़ी खत्म हो गई रो खन्ना ने ट्रम्प की टैरिफ नीति को भी गलत बताया। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में चीन यात्रा के दौरान उनकी मुलाकात एक भारतीय राजदूत से हुई। खन्ना के मुताबिक, राजदूत ने उनसे कहा, “आपके राष्ट्रपति की वजह से भरोसे की एक पूरी पीढ़ी खत्म हो गई है।” उन्होंने कहा कि अगर ट्रम्प की नीतियों से हुए नुकसान को स्वीकार नहीं किया गया तो यह सच्चाई से मुंह मोड़ने जैसा होगा। रो खन्ना ने ट्रम्प को ‘लेम डक’ राष्ट्रपति बताते हुए दावा किया कि डेमोक्रेटिक पार्टी अगले मिड-टर्म चुनाव में प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल करेगी और 2028 का राष्ट्रपति चुनाव भी जीतेगी। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अमेरिका के साथ-साथ दुनिया के देशों के साथ उसके रिश्ते भी दोबारा मजबूत करने होंगे। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट का जिक्र करते हुए कहा कि वे दुनिया के देशों के साथ मिलकर चलने में विश्वास रखते थे और भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का भी समर्थन करते थे। अमेरिकी राजदूत बोले- भारत के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं कार्यक्रम में भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा है कि अमेरिका भारत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करना चाहता है और दुनिया में भारत की बढ़ती ताकत को पूरी तरह स्वीकार करता है। गोर ने कहा, “हम भारत के साथ एक और बड़े समझौते को पूरा करने के बहुत करीब हैं। प्रस्तावित व्यापार समझौता अंतिम चरण में पहुंच गया है।” गोर ने बताया कि कुछ सप्ताह पहले नई दिल्ली में एक भारतीय मंत्री से उनकी मुलाकात हुई थी। मंत्री ने उनसे कहा, खबरों में चाहे जो दिखे, 50 साल बाद भी भारत और अमेरिका दोस्त रहेंगे। अमेरिका दुनिया का सबसे पुराना लोकतंत्र है और भारत सबसे बड़ा लोकतंत्र। गोर ने मोदी-ट्रम्प की दोस्ती का किस्सा भी सुनाया गोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रम्प की दोस्ती का एक किस्सा भी सुनाया। उन्होंने बताया कि कुछ महीने पहले ट्रम्प सुबह 6 बजे (भारतीय समयानुसार) ही पीएम मोदी को फोन करना चाहते थे। गोर ने बताया कि वह मियामी में एक UFC इवेंट के दौरान ट्रम्प के साथ बैकस्टेज बैठे थे। तभी ट्रम्प ने कहा, “चलो प्रधानमंत्री मोदी को फोन करते हैं।” जब गोर ने बताया कि भारत में उस समय सुबह के 6 बजे हैं, तो ट्रम्प ने जवाब दिया, “वो उठे होंगे। वो मेरी तरह हैं, सोते नहीं।” हालांकि, ट्रम्प को कुछ देर बाद मंच पर जाना था, इसलिए दोनों नेताओं की बातचीत अगले दिन तय की गई। गोर ने कहा कि यह दिखाता है कि ट्रम्प, प्रधानमंत्री मोदी को अपना करीबी दोस्त मानते हैं। उन्होंने कहा, “जब कोई आपका दोस्त होता है तो हर बातचीत पहले से तय नहीं करनी पड़ती। आप सीधे फोन करके पूछ सकते हैं कि कैसे हैं।” उन्होंने कहा कि ट्रम्प भारत का सम्मान करते हैं और प्रधानमंत्री मोदी को कई दूसरे विश्व नेताओं से अलग नजर से देखते हैं। गोर के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच यही भरोसा भारत-अमेरिका संबंधों को भी मजबूत करता है।
West Bengal OBC Bills: पश्चिम बंगाल विधानसभा ने सोमवार (29 जून) को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण से जुड़े दो संशोधन विधेयक पारित किए। इससे भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली सरकार के लिए पिछली ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार के समय तैयार की गई OBC लिस्ट को रद्द करने का रास्ता साफ हो गया है। नए प्रावधानों के तहत अब अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) से बाहर की 66 समुदायों को OBC आरक्षण का लाभ मिलेगा। इनमें 54 हिंदू और 12 मुस्लिम समुदाय शामिल हैं।
नई व्यवस्था में पहले की लिस्ट की तुलना में 65 मुस्लिम सब-ग्रुप्स और 9 हिंदू सब-ग्रुप्स को लिस्ट से बाहर कर दिया गया है। पश्चिम बंगाल सरकार की ‘अन्य पिछड़ा वर्ग’ (OBC) की पिछली लिस्ट में 113 सब-ग्रुप्स थे। इनमें से 77 मुस्लिम और 36 गैर-मुस्लिम थे। हाई कोर्ट ने मई 2024 में इस लिस्ट को रद्द कर दिया था। OBC रिजर्वेशन को 17% से घटाकर 7% कर दिया था।
क्या बदला है?
पहले राज्य की OBC सूची में कुल 113 उप-समुदाय शामिल थे, जिनमें 77 मुस्लिम और 36 गैर-मुस्लिम समुदाय थे। मई 2024 में कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस लिस्ट को कानूनी रूप से अस्थिर बताते हुए रद्द कर दिया था। इसके बाद OBC आरक्षण 17% से घटाकर 7% कर दिया गया था।
नई व्यवस्था में क्या होगा?
संशोधित कानून के तहत राज्य सरकार, पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिशों के आधार पर OBC आरक्षण का प्रतिशत तय करेगी और समय-समय पर उसमें संशोधन भी कर सकेगी। हालांकि कुल आरक्षण की सीमा 50% से अधिक नहीं होगी। सरकार को यह अधिकार भी होगा कि वह पिछड़ेपन के स्तर के आधार पर OBC समुदायों को अलग-अलग कैटेगरी में वर्गीकृत करे।
आयोग की भूमिका बढ़ी
संशोधन के तहत अब कोई भी व्यक्ति OBC सूची में शामिल किए जाने के लिए आवेदन कर सकेगा। यदि किसी समुदाय को सूची में गलत तरीके से शामिल या बाहर रखा गया है तो उस पर आपत्ति भी दर्ज कराई जा सकेगी। ऐसे मामलों में पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिशें सरकार पर बाध्यकारी होंगी।
हाई कोर्ट के फैसले के बाद बदलाव
मई 2024 में कलकत्ता हाई कोर्ट ने 2010 के बाद जारी किए गए OBC प्रमाणपत्रों को रद्द करते हुए कहा था कि समुदायों को OBC लिस्ट में शामिल करने की प्रक्रिया कानून के अनुरूप नहीं अपनाई गई थी। इसके बाद राज्य सरकार ने 66 OBC वर्गों को अधिसूचित करते हुए आरक्षण को 7% कर दिया था। राज्य सरकार का कहना है कि अब OBC सूची में किसी भी नए समुदाय को शामिल करने से पहले पिछड़ा वर्ग आयोग विस्तृत जांच करेगा। उसी की सिफारिश के आधार पर फैसला लिया जाएगा।
विधानसभा में जोरदार बहस
बहस के दौरान, BJP विधायकों ने आरोप लगाया कि पिछली TMC सरकार ने अपने अल्पसंख्यक वोट बैंक को खुश करने के लिए मुस्लिम समुदाय के बड़ी संख्या में लोगों को शामिल करके जानबूझकर एक पक्षपाती OBC लिस्ट तैयार की थी। पार्टी ने यह भी दावा किया कि संशोधित लिस्ट में हिंदू समुदायों की कीमत पर मुस्लिम समुदायों को अतिरिक्त लाभ दिया गया था।
फिलहाल, TMC सरकार के समय संशोधित कानून के तहत OBC आरक्षण के लिए कैटेगरी A में 65 समुदाय और कैटेगरी B में 78 समुदाय शामिल हैं। उस समय मुख्य विपक्षी पार्टी रही BJP ने TMC सरकार के समय तैयार की गई नई लिस्ट पर आपत्ति जताई थी। साथ ही दावा किया था कि उस लिस्ट में मुस्लिम पृष्ठभूमि वाले समुदायों को अतिरिक्त लाभ दिया गया, जिससे ‘हिंदू’ पृष्ठभूमि वाले समुदाय वंचित रह गए।
अब आगे क्या होगा?
इन दो बिलों के पास होने से शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली BJP सरकार के लिए पिछली ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली कैबिनेट द्वारा तैयार OBC लिस्ट को रद्द करने का रास्ता साफ हो गया है। ये संशोधन पिछड़ा वर्ग आयोग को OBC लिस्ट में किसी भी समुदाय को शामिल करने या हटाने पर आपत्ति जताने का अधिकार भी देते हैं।
नए बिल में क्या है?
बिल में यह भी प्रावधान है कि राज्य सरकार, पिछड़ा वर्ग आयोग के साथ सलाह-मशविरा करके, राज्य सरकार की नौकरियों में OBC के लिए आरक्षण का प्रतिशत तय करेगी। हालांकि आरक्षण कोटा समय-समय पर बदला जा सकता है। लेकिन कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।
सरकार के पास आयोग की सलाह से OBC समुदायों को उनके पिछड़ेपन के स्तर के आधार पर अलग-अलग कैटेगरी में बांटने का अधिकार भी होगा। नया कानून, पहले की लेफ्ट फ्रंट सरकार द्वारा लाए गए आरक्षण कानून के ढांचे को फिर से लागू करता है। पश्चिम बंगाल में OBC आरक्षण, रंगनाथ मिश्रा आयोग की सिफारिशों के बाद 2010 में शुरू किया गया था।
तत्कालीन लेफ्ट फ्रंट सरकार ने (जिसका नेतृत्व स्वर्गीय बुद्धदेव भट्टाचार्य कर रहे थे) तत्कालीन पिछड़ा वर्ग विकास मंत्री योगेश चंद्र बर्मन द्वारा पेश किए गए एक बिल के ज़रिए यह कानून बनाया था। इसमें कैटेगरी A समुदायों के लिए 10 प्रतिशत और कैटेगरी B समुदायों के लिए 7 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान था।
ममता सरकार ने किया था बदलाव
2011 में सत्ता में आने के बाद TMC सरकार ने 2012 में कानून में संशोधन किया और कैटेगरी A में 65 समुदायों तथा कैटेगरी B में 78 समुदायों को बनाए रखा। अनुसूचित जातियों से धर्म परिवर्तन करके ईसाई बने लोगों को भी कैटेगरी B में शामिल किया गया था। इन संशोधनों के तहत मूल कानून की अनुसूचियों (schedules) को भी फिर से व्यवस्थित किया गया, जिसमें पहले की अनुसूची 1 और अनुसूची 2 को क्रमशः अनुसूची 2 और अनुसूची 3 में बदल दिया गया।
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सोमवार को पारित बिलों के तहत BJP सरकार ने लेफ्ट फ्रंट के समय की मूल अनुसूची 1 को फिर से लागू कर दिया है (जो TMC कानून के तहत अनुसूची 2 के बराबर थी)। जबकि TMC के समय की अनुसूची 1 और अनुसूची 3 को खत्म कर दिया है। पश्चिम बंगाल विधानसभा द्वारा सोमवार को पारित बिलों के तहत, राज्य सरकार की नौकरियों में OBC के लिए आरक्षण का प्रतिशत राज्य सरकार द्वारा पिछड़ा वर्ग आयोग के साथ सलाह-मशविरा करके तय किया जाएगा।
Eicher Motors Share Price : आज आयशर मोटर्स में तेज गिरावट दिख रही है। निचले स्तरों से ये कुछ रिकवर हुआ है,लेकिन अभी भी यह निफ्टी का टॉप लूजर बना हुआ है। फिलहाल 12 बजे के आसपास एनएसई पर यह शेयर 290 रुपए यानी 3.91 फीसदी की गिरावट के साथ 7138 रुपए के आसपास दिख रहा था। आज का इसका दिन का हाई 7,392.50 रुपए और दिन का लो 6,942.50 रुपए है। स्टॉक का 52 वीक हाई 8,230 रुपए और 52 वीक लो 5,353 रुपए है।
निफ्टी का टॉप लूजर बना शेयर
आज यह शेयर निफ्टी का टॉप लूजर बना है। इसकी वजह पर नजर डालें तो इस स्टॉक पर दिल्ली की EV पॉलिसी का निगेटिव असर संभव है। दिल्ली में 1 अप्रैल 2028 से सिर्फ EV 2-W का रजिस्ट्रेशन होगा। 1 जनवरी 2028 से दिल्ली में ICE 2W रजिस्ट्रे्शन बंद होगा। 2 व्हीकल बिक्री में दिल्ली का 3 फीसदी हिस्सा है। FY26 में कंपनी के प्रदर्शन की बात करें तो कंपनी ने FY26 में रिकॉर्ड रेवेन्यू,EBITDA और मुनाफा दर्ज किया है।
दिल्ली की EV पॉलिसी के अनुसार,दिल्ली में सभी नए पेट्रोल और CNG टू-व्हीलर्स का रजिस्ट्रेशन 1 अप्रैल,2028 से हमेशा के लिए बंद हो जाएगा। इस तारीख से शहर में बिकने वाला हर नया कम्यूटर टू-व्हीलर इलेक्ट्रिक होना जरूरी होगा। इसके लिए कोई एक्स्ट्रा समय (ग्रेस पीरियड)या हाइब्रिड गाड़ियों के लिए कोई छूट नहीं दी जाएगी।
आयशर मोटर्स की रॉयल एनफील्ड के लिए यह बहुत बुरी खबर है। इस ब्रांड के पास अपनी लाइन-अप में सिर्फ़ एक इलेक्ट्रिक मॉडल है और दिल्ली के EV सेगमेंट में इसकी कोई खास मौजूदगी नहीं है। बताते चलें कि दिल्ली में रॉयल एनफील्ड की स्थिति बहुत मज़बूत है। सोसाइटी ऑफ़ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स’के आंकड़ों के मुताबिक,दिल्ली के कुल टू-व्हीलर मार्केट में इसकी हिस्सेदारी 3.3% है। मिड-साइज़ पेट्रोल मोटरसाइकिलों पर बनी कंपनी मजबूत फ्रैंचाइजी अब इलेक्ट्रिक पर स्विच करना जरूरी होने के बाद ज़्यादा काम नहीं आएगी।
बाजार जानकारों का कहना है कि इस पॉलिसी की वजह से जिन पुरानी कंपनियों के पास भरोसेमंद EV रेंज नहीं है,उन्हें या तो अपने नए प्रोडक्ट्स तेज़ी से लॉन्च करने होंगे या फिर दिल्ली के कम्यूटर सेगमेंट से पूरी तरह बाहर होना पड़ेगा। डेडलाइन में दो साल से भी कम समय बचा है,ऐसे में रॉयल एनफील्ड पर अपनी इलेक्ट्रिक रेंज बढ़ाने का दबाव काफी बढ़ गया है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो कंपनी के लिए भारत के सबसे बड़े टू-व्हीलर मार्केट में से एक में अपनी पकड़ खोने का खतरा हो सकता है।
दिल्ली EV पॉलिसी पर नोमूरा की राय
नोमूरा की राय है कि दिल्ली EV पॉलिसी से IGL को बड़ा झटका लगेगा। इससे लॉन्ग टर्म में CNG वॉल्यूम घटेंगे। दिल्ली में बढ़ते इलेक्ट्रिक व्हीकल्स धीरे-धीरे CNG की डिमांड कम करेंगे। हालांकि MGL पर कोई डायरेक्ट असर नहीं होगा। सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन सेगमेंट में गुजरात गैस पर सबसे कम असर होगा। घरेलू और इंडस्ट्रियल PNG अब ग्रोथ ड्राइवर बनेगा।
डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
Weekly monsoon tracker: बारिश की बढ़ती कमी, मॉनसून की धीमी रफ़्तार और जलाशयों के कम लेवल की वजह से खेती-बाड़ी वाले खास राज्यों में चावल और कपास जैसी गर्मियों की फसलों की बुआई पर असर पड़ा है। 25 जून तक खरीफ की बुआई पिछले साल के मुकाबले 22.7 फीसदी कम हुई है।
खरीफ फसलों का रकबा 182.72 लाख हेक्टेयर रहा, जो एक साल पहले के 236.46 लाख हेक्टेयर से कम है यानी 53.74 लाख हेक्टेयर की कमी आई। यह कमी सभी मुख्य फसलों की कैटेगरी में थी, जिसमें तिलहन, कपास, चावल और दालों का रकबा कम रहा।
तिलहन में सबसे ज़्यादा गिरावट देखी गई, जिसका रकबा एक साल पहले के 36.41 लाख हेक्टेयर से 19.42 लाख हेक्टेयर घटकर 16.99 लाख हेक्टेयर रह गया। तिलहन में, सोयाबीन की बुआई सबसे ज़्यादा प्रभावित हुई है, जो 13.05 लाख हेक्टेयर कम हुई है, इसके बाद मूंगफली की बुआई 6.42 लाख हेक्टेयर कम हुई है।
भारत का सोयाबीन इंपोर्ट बढ़ रहा है, देश चीन समेत कुछ सप्लायर्स पर निर्भर है। मई तक, भारत के कच्चे सोयाबीन तेल के इंपोर्ट में चीन का 8.1 फीसदी हिस्सा था।
कपास का रकबा 15.70 लाख हेक्टेयर घटकर 29.66 लाख हेक्टेयर रह गया, जबकि चावल की बुआई 8.65 लाख हेक्टेयर घटकर 25.75 लाख हेक्टेयर रह गई। दालों का रकबा भी कमज़ोर हुआ है, जो 6.53 लाख हेक्टेयर कम हुआ है, जिसमें अरहर और उड़द सबसे आगे हैं।
बारिश और जलाशयों की चिंताए
बारिश का डिस्ट्रीब्यूशन अभी भी अनियमित है। इंडिया मेटियोरोलॉजिकल डिपार्टमेंट (IMD) ने अगले कुछ दिनों में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, ओडिशा और विदर्भ में भारी बारिश का अनुमान लगाया है, लेकिन बिहार, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में हीटवेव की स्थिति बनी हुई है, जिससे कुछ उत्तरी इलाकों में बुआई में देरी हो रही है।
29 जून को बारिश में कमी 43 फीसदी के हाई लेवल पर पहुंच गई थी। बुआई कमजोर इसलिए है क्योंकि मॉनसून की तरक्की एक जैसी नहीं है, देश के 48 फीसदी हिस्से में कमी है और 26 फीसदी हिस्से में बड़ी कमी है।
रिजर्वॉयर का लेवल चिंता को और बढ़ा देता है। 166 बड़े रिज़र्वॉयर में लाइव स्टोरेज पिछले साल के लेवल से कम था। रिज़र्वॉयर अपनी कैपेसिटी के 26.4 फीसदी तक भरे हुए हैं, जबकि पिछले साल इसी समय में यह 36 फीसदी था, लेकिन यह पांच साल के एवरेज से 5 फीसदी ज़्यादा है।
खास तौर पर दक्षिणी और पूर्वी इलाकों में दबाव दिख रहा है, जो खरीफ की खेती के लिए ज़रूरी हैं। दक्षिणी इलाके के रिज़र्वॉयर 20.8 फीसदी पर हैं, जो पिछले साल के 44.7 फीसदी के आधे से भी कम हैं। कर्नाटक के जलाशय एक साल पहले के 48.6 फीसदी के मुकाबले सिर्फ़ 14.7 फीसदी भरे हैं, जबकि तमिलनाडु का स्टोरेज 81 फीसदी से घटकर 34.3 फीसदी हो गया है। पूर्व में, ओडिशा के जलाशय सिर्फ़ 15.3 फीसदी भरे हैं, जो पिछले साल के 22.4 फीसदी से कम है।
जलाशय का लेवल कम होने से धान, कपास और दालों जैसी फसलों के लिए सिंचाई में मदद कम हो जाती है, जिससे बुवाई समय पर बारिश पर ज़्यादा निर्भर हो जाती है। अगर जुलाई में बारिश कमज़ोर रहती है, तो फसल उत्पादन, ग्रामीण आय और खाने की चीज़ों की महंगाई, खासकर दालों और खाने के तेलों को लेकर चिंताएं बढ़ सकती हैं।
(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
पर्सनल लोन अपने तेज अप्रूवल प्रोसेस और बिना कोलेटरल (कोई एसेट गिरवी रखने की शर्त) की जरूरत के कारण भारत में एक लोकप्रिय फाइनेंसिंग विकल्प है. भारत में पर्सनल लोन पर इंटरेस्ट रेट आमतौर पर 10.5% से 24% सालाना तक होता है, जो अलग-अलग लेंडर पर निर्भर करता है. आपकी इनकम, क्रेडिट स्कोर, जॉब स्टेबिलिटी और उम्र जैसे फैक्टर यह तय करते हैं कि आपको कितने इंटरेस्ट रेट पर लोन मिलेगा.
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पर्सनल लोन पर इंटरेस्ट रेट कम कैसे करें?
लेंडर किसी ग्राहक को कम इंटरेस्ट रेट ऑफर करने से पहले कई क्राइटेरिया देखते हैं. हालांकि, सभी लेंडर इंटरेस्ट रेट नेगोशिएशन के लिए तैयार नहीं होते.
- अच्छा क्रेडिट स्कोर बनाए रखें
हाई क्रेडिट स्कोर का मतलब है बेहतर क्रेडिटवर्थिनेस. जिन ग्राहकों का स्कोर अच्छा होता है, उन्हें बैंक और फाइनेंशियल इंस्टिट्यूशन सबसे सस्ते इंटरेस्ट रेट पर पर्सनल लोन ऑफर करते हैं.
अगर आपका स्कोर 750 से कम है तो उसे सुधारने के तरीकों पर काम करें. 750 से ऊपर स्कोर होने पर आपको कम इंटरेस्ट रेट पर पर्सनल लोन मिलने की संभावना ज्यादा होती है.
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बैंक अक्सर त्योहारों या सालगिरह जैसे खास मौकों पर पर्सनल लोन पर कम इंटरेस्ट रेट का ऑफर देते हैं. इन ऑफर की जानकारी पाने के लिए बैंक की वेबसाइट चेक करें या कस्टमर केयर से संपर्क करें.
ऐसे प्रमोशनल पीरियड में लोन अप्लाई करने से कम इंटरेस्ट रेट मिल सकता है और रीपेमेंट आसान हो जाता है. हालांकि, हिडन चार्ज से बचने के लिए ऑफर की टर्म्स एंड कंडीशंस ध्यान से जरूर पढ़ लें.
- समय पर रीपेमेंट करना न भूलें
अगर आप समय पर EMI या क्रेडिट कार्ड बिल नहीं चुकाते, तो आपका क्रेडिट स्कोर गिरता है. बैंक इंटरेस्ट रेट तय करते समय आपकी पेमेंट हिस्ट्री पर खास ध्यान देते हैं. इसलिए EMI और क्रेडिट कार्ड बिल समय पर चुकाएं, बार-बार लोन के लिए अप्लाई करने से बचें और क्रेडिट कार्ड यूज लिमिट कम रखें.
- इंटरेस्ट रेट की तुलना करें
किसी एक बैंक से पर्सनल लोन लेने से पहले NBFCs और अन्य बैंकों के इंटरेस्ट रेट ऑफर की तुलना जरूर करें. इससे आप सबसे सस्ते रेट पर लोन पा सकते हैं.
- फाइनेंशियल स्टेबिलिटी दिखाएं
जिन ग्राहकों की इनकम रेगुलर और स्टेबल होती है, उन्हें बैंक प्राथमिकता देते हैं. सैलरी स्लिप, ITR, जॉब लेटर और बैंक स्टेटमेंट जैसे डॉक्युमेंट देकर आप अपनी फाइनेंशियल स्टेबिलिटी साबित कर सकते हैं और कम इंटरेस्ट रेट पर लोन पा सकते हैं.
- सही लेंडर से नेगोशिएशन करें
लोन अप्लाई करने से पहले अलग-अलग लेंडर के इंटरेस्ट रेट, टेन्योर, अमाउंट, रीपेमेंट शर्तों और फीस की तुलना करें. अगर आप पहले से किसी बैंक के ग्राहक हैं या आपकी उस लेंडर के साथ अच्छी रिलेशनशिप है, तो आपके पास इंटरेस्ट रेट नेगोशिएट करने का मौका होता है. सस्ता इंटरेस्ट रेट लेने के लिए लोन एप्लिकेशन के साथ लिखित में रिक्वेस्ट भेजना सबसे अच्छा तरीका है.
कुल मिलाकर, पर्सनल लोन पर कम इंटरेस्ट रेट पाने के लिए आपको अच्छे क्रेडिट स्कोर, स्टेबल इनकम और स्पेशल ऑफर पर ध्यान देना चाहिए. अलग-अलग विकल्पों की तुलना करके और शर्तों को समझकर आप बेहतर डील पा सकते हैं.
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Buying a House with Cash vs Home Loan: घर खरीदना किसी भी व्यक्ति के जीवन का सबसे बड़ा फाइनेंशियल फैसला होता है। इसके लिए लोग सालों-साल पैसे जोड़ते हैं। लेकिन अगर आपके पास पर्याप्त पैसे जमा हैं, तो आपके सामने एक बड़ा सवाल खड़ा होता है क्या पूरा पैसा एक बार में कैश देकर घर खरीद लेना चाहिए या फिर होम लोन लेकर अपनी बचत को कहीं और निवेश करना चाहिए?
साल 2026 में रियल एस्टेट और होम लोन मार्केट के मौजूदा समीकरणों को देखते हुए, दोनों ही विकल्पों के अपने नफा-नुकसान हैं। आइए समझते हैं कि आपके लिए कौन सा रास्ता चुनना सबसे समझदारी भरा फैसला होगा।
कैश में घर खरीदने के फायदे: कर्ज मुक्त जिंदगी का सुकून
बिना किसी लोन के सीधे अपने पैसों से घर खरीदने का सबसे बड़ा फायदा मानसिक शांति है। आपको हर महीने बैंक की EMI चुकाने, ब्याज दरों में होने वाले बदलावों या बैंक से लोन अप्रूवल की लंबी कागजी कार्रवाई की कोई चिंता नहीं होती। घर पहले दिन से ही पूरी तरह आपका होता है।
भले ही भारत में होम लोन की दरें प्रतिस्पर्धी बनी हुई हैं, लेकिन जब आप 15 या 20 साल के लिए लोन लेते हैं, तो ब्याज के रूप में आप मूलधन से भी बहुत ज्यादा रकम बैंक को चुका देते हैं। कैश पेमेंट से यह पूरा पैसा बच जाता है।
कैश पेमेंट का नुकसान: ‘हाउस-रिच और कैश-पुअर’ होने का खतरा
पूरे पैसे एक बार में लगा देने का सबसे बड़ा नुकसान तब होता है, जब आपकी जिंदगी भर की जमा-पूंजी एक ही जगह ब्लॉक हो जाती है। मान लीजिए आपने अपना सारा पैसा घर खरीदने में लगा दिया और अचानक कोई मेडिकल इमरजेंसी आ जाए या नौकरी चली जाए, तो आप मुश्किल में पड़ सकते हैं। प्रॉपर्टी को रातों-रात बेचकर कैश नहीं निकाला जा सकता।
फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स की मानें तो कभी भी ‘हाउस-रिच और कैश-पुअर’ नहीं होना चाहिए। यानी आपके पास करोड़ों का घर तो हो, लेकिन रोजमर्रा की जरूरतों और आपातकालीन स्थितियों के लिए हाथ में नकदी न बचे।
होम लोन लेने के फायदे: टैक्स छूट और निवेश की आजादी
अगर आपके पास पूरा कैश है, तब भी होम लोन लेना इन वजहों से फायदेमंद हो सकता है:
वित्तीय लचीलापन: लोन लेने से आपकी बचत का एक बड़ा हिस्सा सुरक्षित रहता है, जिसे आप आपातकालीन फंड, बच्चों की पढ़ाई या अपने रिटायरमेंट के लिए बचाकर रख सकते हैं।
टैक्स में बड़ी राहत: होम लोन लेने पर आपको इनकम टैक्स की विभिन्न धाराओं जैसे- ब्याज पर और मूलधन पर के तहत अच्छी-खासी टैक्स छूट मिलती है, जो कैश खरीदने पर नहीं मिलेगी।
अपॉर्चुनिटी कॉस्ट का गणित
यह पूरा फैसला इस बात पर निर्भर करता है कि ‘आपका पैसा आपको कितना कमा कर दे सकता है’।
ऑप्शन- 1: अगर आपका पैसा किसी ऐसे सेविंग्स अकाउंट या कम रिटर्न वाले विकल्प में पड़ा है जहां ब्याज बहुत कम है, तो लोन के ब्याज से बचने के लिए कैश में घर खरीदना बेहतर है।
ऑप्शन- 2: अगर आप उस पैसे को म्यूचुअल फंड, इक्विटी या किसी ऐसे एसेट क्लास में निवेश करते हैं जहां लॉन्ग-टर्म में मिलने वाला रिटर्न (जैसे 12-15%), आपके होम लोन की ब्याज दर (जैसे 8-9%) से काफी ज्यादा है, तो लोन लेना गणित के हिसाब से ज्यादा फायदेमंद सौदा साबित होगा।
सबसे बेस्ट तरीका: बीच का रास्ता
ज्यादातर मामलों में एक्सपर्ट्स ‘बीच का रास्ता’ चुनने की सलाह देते हैं। इसका मतलब है कि आप न तो अपना पूरा कैश घर में लगाएं और न ही अपनी क्षमता से ज्यादा बड़ा लोन लें। सबसे समझदारी भरा तरीका यह है कि आप एक बड़ा डाउन पेमेंट कैश में कर दें और बाकी बची रकम के लिए छोटा होम लोन ले लें। इससे आपका ब्याज का बोझ भी कम हो जाएगा, टैक्स का फायदा भी मिलेगा और आपके हाथ में भविष्य की जरूरतों के लिए पर्याप्त लिक्विड कैश भी बचा रहेगा।
Ramco Systems Share Price: रैमको सिस्टम्स के शेयरों में लगातार जारी तेजी ने इनवेस्टर्स को चौंकाया है। 30 जून को भी इस शेयर में जबर्दस्त तेजी देखने को मिली। बाजार खुलते ही यह शेयर रॉकेट बन गया। एक समय तक यह 7 फीसदी से ज्यादा चढ़ गया था। 29 जून को भी इस शेयर में तूफानी तेजी दिखी थी। इससे शेयर का भाव 52 हफ्ते के हाई पर पहुंच गया था।
एक महीने में 90 फीसदी चढ़ा शेयर
Ramco Systems का शेयर बीते एक महीने में करीब 90 फीसदी चढ़ चुका है। इस तेजी ने इनवेस्टर्स को चौंकाया है। खास बात यह है कि इस स्टॉक में ट्रेडिंग वॉल्यूम भी बढ़ी है। 29 जून को शेयर बाजार में गिरावट के बीच भी इसमें तेजी आई। 30 जून को भी शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में गिरावट के बावजूद रैमको सिस्टम्स के शेयरों में तेजी दिखी। इस तेजी से शेयर की वैल्यूएशन अचानक काफी बढ़ गई है।
FY21 के बाद पहली बार मुनाफे में आई कंपनी
30 जून को 10:15 बजे रैमको सिस्टम्स का शेयर 7.37 फीसदी चढ़कर 850 रुपये पर चल रहा था। यह कंपनी वर्ल्ड-क्लास एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर प्रेडक्ट/प्लेटफॉर्म ऑफर करती है। इसने अपने मल्टी-टेनेंट क्लाउड एंड मोबाइल आधारित एंटरप्राइज सॉफ्टेवर से बड़ी हलचल मचाई है। कंपनी ने FY26 में 41.84 करोड़ रुपये का प्रॉफिट कमाया है। FY21 के बाद पहली बार कंपनी मुनाफे में आई है।
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शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में गिरावट
30 जून को शेयर बाजार में गिराव देखने को मिला। 10:25 बजे निफ्टी 0.34 फीसदी यानी 55 अंक गिरकर 23,892 पर चल रहा था। सेंसेक्स 0.15 फीसदी यानी 109 अंक की कमजोरी के साथ 76,615 पर चल रहा था। बैंक निफ्टी और मिडकैप इंडेक्स में हरे निशान में कारोबार हो रहा था। निफ्टी आईटी इंडेक्स में गिरावट दिखी। हालांकि, 29 जून को अमेरिकी बाजारों खासकर नैस्डेक में अच्छी तेजी आई थी। इसके बावजूद 30 जून को भारतीय आईटी कंपनियों के शेयरों पर दबाव दिखा। टीसीएस और इंफोसिस में 2 फीसदी से ज्यादा गिरावट दिखी।
डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।
LPG Price Today: मंगलवार, 30 जून को भी देश में घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर के दामों में कोई भी बढ़ोतरी नहीं की गई। इससे पहले घरेलू सिलेंडर की कीमतों में आखिरी बार बदलाव 7 जून, 2026 को हुई थी, जब तेल कंपनियों ने कीमतों में 29 रुपये की बढ़ोतरी की थी। वहीं, जून माह में कमर्शियल सिलेंडर के दाम में 42 रुपये से 53.50 रुपसे का इजाफा किया गया था।
1 जुलाई से कीमतों में हो सकता है बदलाव
कल 1 जुलाई है, ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि तेल कंपनियां कल गैसे सिलेंडरों के रेट में कुछ बदलाव कर सकती हैं। यह बढ़ोतरी सरकारी तेल कंपनियों (IOCL, HPCL, BPCL) के द्वारा पिछले महीने के वैश्विक मार्केट ट्रेंड की समीक्षा करने के बाद की जा सकती है। बता दें कि गैस सिलेंडर की कीमतें पूरी तरह से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) और LPG की औसत कीमतों पर निर्भर करती हैं।
जानकारी के लिए बता दें कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एलपीजी की कीमतें मुख्य रूप से सऊदी अरामको के कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (CP) से तय होती हैं। हर महीने के अंत में सऊदी अरामको नई कीमतों का ऐलान करती है। इसी आधार पर भारत की तेल कंपनियां भी हर महीने की पहली तारीख को सुबह करीब 6 बजे नए रेट जारी करती हैं।
अपने शहर का कैसे चेक करें रेट?
अगर आप अपने शहर का ताजा LPG सिलेंडर रेट जानना चाहते हैं, तो इसे बहुत आसानी से ऑनलाइन चेक किया जा सकता है। इसके लिए आप Indane, HP Gas या Bharat Gas की आधिकारिक वेबसाइट या उनके मोबाइल ऐप पर जा सकते हैं। वहां अपने शहर का नाम या पिन कोड डालकर आप तुरंत अपडेटेड गैस सिलेंडर कीमत देख सकते हैं।
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Aaj Ka Mausam 30 जून: देश के बड़े हिस्से में मानसून की रफ्तार तेज होने के साथ ही मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आज यानी 30 जून को देश के 20 से अधिक राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश और 15 से ज्यादा राज्यों में तेज आंधी-तूफान व बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया है। दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश और बिहार समेत उत्तर-पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में आज मौसम का डबल अटैक देखने को मिल सकता है। एक तरफ तेज हवाएं चलेंगी तो दूसरी तरफ मूसलाधार बारिश लोगों को प्रभावित करेगी।
मौसम विभाग के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून के अगले दो दिनों में उत्तर अरब सागर, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ और हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हैं। इस बीच आइए जानते हैं क्षेत्रवार मौसम का पूरा पूर्वानुमान।
उत्तर-पश्चिम भारत: दिल्ली में हीटवेव के साथ बारिश और यूपी में भारी अलर्ट
उत्तर-पश्चिम भारत में मानसून और वेस्टर्न डिस्टर्बेंस (जो 2 जुलाई से सक्रिय होगा) के चलते मौसम में बड़ा बदलाव आ रहा है। 4 जुलाई तक यहां के तापमान में 4 से 5 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की जा सकती है।
दिल्ली, हरियाणा और पंजाब: आज दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ के कुछ इलाकों में लू की स्थिति बनी रह सकती है, लेकिन इसके साथ ही आज और कल यानी 1 जुलाई को हल्की से मध्यम बारिश की भी संभावना है। इसके बाद 2 से 4 जुलाई के बीच दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में व्यापक रूप से भारी बारिश होगी। 1 से 6 जुलाई के दौरान 40-50 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का भी अनुमान है।
उत्तर प्रदेश: यूपी में आज मौसम का तगड़ा असर दिखेगा। पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश में आज से 2 जुलाई के बीच भारी बारिश की चेतावनी है। पूरे राज्य में 30 जून से 6 जुलाई के दौरान गरज-चमक के साथ 40-50 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज धूलभरी हवाएं चलने का अलर्ट जारी किया गया है।
उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश: उत्तराखंड में 30 जून से 6 जुलाई तक व्यापक बारिश होगी। 1 और 2 जुलाई को बहुत भारी बारिश का अलर्ट है। हिमाचल प्रदेश में भी 2 और 3 जुलाई को अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। जम्मू-कश्मीर में 2 से 4 जुलाई के बीच भारी बारिश होगी।
राजस्थान: पूर्वी राजस्थान में 1 और 2 जुलाई को 50-60 किमी/घंटा (झोंके 70 किमी/घंटा तक) की रफ्तार से गंभीर आंधी-तूफान आने की आशंका है। यहां 2 से 6 जुलाई के बीच भारी बारिश होगी। पश्चिमी राजस्थान में 2 से 6 जुलाई के बीच धूलभरी आंधी चलने की संभावना है।
पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत: बिहार और बंगाल में अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी
पूर्वी भारत के राज्यों में मानसूनी सिस्टम पूरी तरह सक्रिय हो चुका है, जिससे कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बन सकते हैं।
बिहार: बिहार में आज (30 जून) और कल (1 जुलाई) मौसम विभाग ने बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इसके साथ ही आज और कल 40-50 किमी/घंटा की रफ्तार से आंधी चलने और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका है। 2 से 6 जुलाई के बीच भी बारिश का दौर जारी रहेगा।
पश्चिम बंगाल और सिक्किम: उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में आज अत्यंत भारी बारिश होने का अनुमान है। वहीं गांगेय पश्चिम बंगाल में 5 और 6 जुलाई को बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।
ओडिशा और झारखंड: ओडिशा में 1 से 4 जुलाई के बीच बहुत भारी बारिश की संभावना है जबकि झारखंड में 30 जून और 1 जुलाई को भारी बारिश के साथ 40-50 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अलर्ट है।
पूर्वोत्तर भारत: असम और मेघालय में आज बहुत भारी बारिश का अलर्ट है, जबकि अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 2 जुलाई तक भारी बारिश और गरज-चमक की स्थिति बनी रहेगी।
मध्य और पश्चिमी भारत: मध्य प्रदेश से गुजरात तक मूसलाधार आफत
मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश में 1 से 6 जुलाई के दौरान व्यापक बारिश होगी। मौसम विभाग ने 2 से 4 जुलाई के बीच पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। 3 जुलाई तक यहां 40-50 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चलेंगी।
विदर्भ और छत्तीसगढ़: विदर्भ में 3 और 4 जुलाई को बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। वहीं छत्तीसगढ़ में 30 जून से 6 जुलाई के दौरान लगातार भारी बारिश का दौर जारी रहेगा।
गुजरात और महाराष्ट्र: कोंकण, गोवा और मध्य महाराष्ट्र के घाट इलाकों में आज और कल (1 जुलाई) और दोबारा 4 से 6 जुलाई के बीच अत्यधिक भारी बारिश होने की आशंका है। गुजरात क्षेत्र में 3 से 6 जुलाई के बीच भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान है, जिससे तापमान में 3 से 4 डिग्री की गिरावट आएगी।
दक्षिण भारत: कर्नाटक और केरल में रेड अलर्ट जैसी स्थिति, तटों पर हाई अलर्ट
दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के तटीय इलाकों में समुद्र बेहद अशांत रहने वाला है, जिसके लिए मछुआरों को चेतावनी जारी की गई है।
कर्नाटक: तटीय कर्नाटक में 30 जून से 6 जुलाई तक लगातार बहुत भारी बारिश का अनुमान है। दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में 3 से 6 जुलाई के बीच अत्यंत भारी बारिश होने की संभावना है।
केरल और तेलंगाना: केरल और माहे में आज बहुत भारी बारिश का अलर्ट है। इसके बाद 1 से 6 जुलाई तक भारी बारिश जारी रहेगी। तेलंगाना में भी 30 जून से 6 जुलाई के बीच लगातार भारी बारिश और आंधी-तूफान की चेतावनी दी गई है।
राष्ट्रीय मौसम पूर्वानुमान केंद्र की ओर से जारी 30 जून का पूरे देश का वेदर मैप देखिए
मछुआरों के लिए चेतावनी: कोंकण, गोवा, कर्नाटक, केरल के तटों, लक्षद्वीप क्षेत्र और पूर्वी-मध्य अरब सागर में 40-50 किमी/घंटा से लेकर 60 किमी/घंटा की रफ्तार से खतरनाक हवाएं चलने की संभावना है। इसके अलावा मन्नार की खाड़ी और श्रीलंका के तटीय इलाकों में भी 45-55 किमी/घंटा की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं के कारण समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है।
डिस्क्लेमर: Moneycontrol पर दिए गए मौसम के ये अनुमान भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की आधिकारिक बुलेटिन पर आधारित हैं। किसी भी क्षेत्र में यात्रा करने या घर से बाहर निकलने से पहले स्थानीय मौसम चेतावनियों का पालन जरूर करें।

