शेख हसीना बोलीं- दिसंबर में बांग्लादेश लौटूंगी:कोर्ट में सरेंडर करूंगी, हत्या हो जाए तो भी मंजूर, देश की मिट्टी पर मरना चाहती हूं

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा है कि वह दिसंबर में भारत से बांग्लादेश देश लौटेंगी और कोर्ट में सरेंडर करेंगी। उन्होंने कहा कि उनके साथ अवामी लीग के कई सीनियर नेता भी बांग्लादेश लौटकर आत्मसमर्पण करेंगे। हसीना ने कहा कि अवामी लीग के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर लगातार कार्रवाई हो रही है। उनके मुताबिक, लगभग सभी बड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं पर मुकदमे दर्ज किए गए हैं और कई लोग छिपकर रहने को मजबूर हैं। हालांकि, उन्होंने वापसी की सटीक तारीख नहीं बताई। रॉयटर्स को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा, हसीना 2024 में सरकार विरोधी आंदोलन के बाद बांग्लादेश छोड़कर भारत आ गई थीं। इसके बाद उन्हें छात्र आंदोलन पर कार्रवाई से जुड़े मामले में मौत की सजा सुनाई गई। वह इन आरोपों से इनकार करती रही हैं। हसीना बोलीं- सरकार से वापसी पर कोई बातचीत नहीं शेख हसीना ने कहा कि उन्होंने बांग्लादेश लौटने को लेकर सरकार से कोई बातचीत नहीं की है। उनका कहना है कि लोकतंत्र, चुनाव, अवामी लीग के राजनीतिक अधिकार और न्याय जैसे मुद्दों पर पर्दे के पीछे बातचीत नहीं हो सकती। हसीना ने दावा किया कि बांग्लादेश सरकार उन्हें वापस भेजने के लिए भारत को लगातार पत्र लिख रही है। उन्होंने कहा, “मुझे वापस लाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, मैं खुद ही लौटूंगी।” हालांकि, हसीना के इस दावे पर बांग्लादेश सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। वहीं भारत ने भी फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं की। इससे पहले अप्रैल में भारत ने कहा था कि वह बांग्लादेश के प्रत्यर्पण अनुरोध पर विचार कर रहा है और नई सरकार के साथ संबंध मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। हसीना बोलीं- अगर गलती की है तो फैसला जनता करे शेख हसीना ने कहा कि उन्हें जेल जाने का डर नहीं है, क्योंकि वह पहले भी कई बार गिरफ्तार हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि सत्ता में लंबे समय तक रहने वाली किसी भी सरकार से गलतियां हो सकती हैं, लेकिन उसका फैसला अदालत नहीं, जनता को करना चाहिए। उन्होंने कहा, “अगर हमारी सरकार से गलतियां हुई हैं, तो जनता फैसला करेगी।” रॉयटर्स के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में 2024 के छात्र आंदोलन पर कार्रवाई में करीब 1,400 लोगों की मौत होने की बात कही गई है। इसी मामले में शेख हसीना को अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई गई थी। हसीना ने कहा कि उन्हें भरोसा है कि अदालत की सुनवाई शुरू होने पर सच्चाई सामने आ जाएगी। सरकार बोली- शेख हसीना को वापस लाने की कोशिश जारी बांग्लादेश सरकार के मुताबिक हसीना को वापस लाने की कोशिश जारी है। विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद इस्लाम ने मंगलवार को बताया था कि हसीना को अदालत के सामने पेश करने के लिए सरकार राजनयिक स्तर पर लगातार प्रयास कर रही है और इस प्रक्रिया में कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि हसीना को वापस लाने की प्रक्रिया अंतरिम सरकार के समय शुरू हुई थी और मौजूदा सरकार भी इसे आगे बढ़ा रही है। उनके मुताबिक, प्रत्यर्पण अंतरराष्ट्रीय नियमों और कानूनी प्रक्रिया के तहत ही होता है, इसलिए इसमें समय लगना स्वाभाविक है। जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत इस मामले में सहयोग कर रहा है, तो उन्होंने सीधे जवाब नहीं दिया।

CBSE Free online Courses 2026: 8वीं और 12वीं के छात्रों को सीबीएसई ने दिया फ्री कोर्स का तोहफा, ऑनलाइन सीख सकेंगे एआई और पाइथन

CBSE Free online Courses 2026: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 8वीं से 12वीं कक्षा तक के छात्रों के लिए डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में नई पहल की गई है। बोर्ड ने राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (NIELIT) के साथ मिलकर 19 फ्री ऑनलाइन कोर्स शुरू किए हैं।

इन कोर्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), पायथन प्रोग्रामिंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, जेनरेटिव AI, AWS DevSecOps, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग और VLSI डिजाइन जैसे हाई-डिमांड सब्जेक्ट्स की एक बड़ी रेंज शामिल है। कई कार्यक्रम इंग्लिश और हिंदी दोनों में उपलब्ध हैं, जिससे पढ़ाई की सामग्री ज्यादा छात्रों तक आसानी से पहुंच पाते हैं। बोर्ड के अनुसार, कोर्स का समय अलग-अलग होगा। कुछ शुरुआती मॉड्यूल लगभग 90 मिनट में पूरे किए जा सकते हैं, जबकि एडवांस्ड प्रोग्राम 100 घंटे से ज्यादा लंबे होते हैं, जिससे छात्र अपनी पसंद, सीखने के लक्ष्यों और उपलब्ध समय के आधार पर कोर्स चुन सकते हैं।

यह पहल छात्रों को बिना किसी खर्च के एडवांस्ड टेक्नोलॉजी कोर्स कराएगी, जिससे वे किसी भी जगह से अपनी स्पीड से ऑनलाइन पढ़ाई कर सकते हैं। सीबीएसई ने अपने सभी संबद्ध स्कूलों को भी इस कार्यक्रम और ज्यादा से ज्यादा छात्रों की भागीदारी को बढ़ावा देने का निर्देश दिया है। छात्र बिना किसी रजिस्ट्रेशन या कोर्स फीस के सीधे एनआईईएलआईटी डिजिटल यूनिवर्सिटी पोर्टल के जरिए इन पाठ्यक्रमों के लिए रजिस्टर कर सकते हैं। लचीले ऑनलाइन फॉर्मेट की मदद से छात्र अपने स्कूल की नियमित पढ़ाई के साथ-साथ कोर्स भी पूरा कर सकते हैं।

बोर्ड की यह पहल उसके डिजिटल लिटरेसी, कोडिंग और नई टेक्नोलॉजी को स्कूली शिक्षा में शामिल करने पर बढ़ते फोकस को दिखाती है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इंडस्ट्री से जुड़ी टेक्नोलॉजी से जल्दी परिचित होने से छात्रों को प्रैक्टिकल प्रॉब्लम-सॉल्विंग एबिलिटी, कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और इनोवेशन स्किल डेवलप करने में मदद मिल सकती है, साथ ही हायर एजुकेशन और इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस, डेटा एनालिटिक्स और दूसरे डिजिटल डोमेन में करियर के लिए उनकी तैयारी भी मजबूत हो सकती है।

इन फ्री ऑनलाइन कोर्स को शुरू करके, सीबीएसई ने स्कूली शिक्षा को डिजिटल इकॉनमी और भारत के बढ़ते टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम की स्किल जरूरतों के साथ जोड़ने की दिशा में एक और कदम उठाया है।

CBSE 12th re-evaluation results: कर्नाटक के छात्र के री-इवैल्युएशन में बढ़े इतने नंबर कि सीईटी रैंक में 1.4 लाख से ज्यादा का हुआ सुधार, कई छात्रों को मिला गजब का फायदा

India-UK FTA : 15 जुलाई से लागू होगा भारत-UK के बीच FTA, ब्रिटेन से इंपोर्ट होने वाली कारों पर नोटिफिकेशन जारी

India-UK FTA : भारत-UK के बीच FTA (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट )15 जुलाई से लागू होगा। इस बीच विदेश व्यापार महानिदेशालय (Directorate General of Foreign Trade) ने ब्रिटेन से इंपोर्ट वाली कारों पर लागू होने होने वाले टैरिफ रेट कोटा का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस खबर पर ज्यादा डिटेल्स के साथ सीएनबीसी -आवाज़ के इकोनॉमिक पॉलिसी एडिटर लक्ष्मण रॉय ने बताया कि ब्रिटेन से इंपोर्ट होने वाली कारों पर नोटिफिकेशन जारी किया जा चुका है। DGFT ने टैरिफ रेट कोटा नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। 15 जुलाई से भारत-UK के बीच FTA लागू होगा। इसके तहत पहले साल 20,000 कारें कम ड्यूटी पर इंपोर्ट हो पाएंगी। 3000cc+ से 2500cc+ की 10,000 कारें इंपोर्ट हो सकेंगी। इन कारों पर कस्टम ड्यूटी 110% से घटकर 30% होगी।

1500cc से 3000cc तक की 5,000 कारें इंपोर्ट हो सकेंगी। इन कारों पर इंपोर्ट ड्यूटी 66% से घटकर 50% होगी। 1500cc इंजन वाली 5,000 कारों पर 50% ड्यूटी लगेगी। 5 साल तक इंपोर्ट कोटा बढ़ेगा फिर 15 साल बाद कम होगा। 15 साल बाद कारों पर 10% कस्टम ड्यूटी लगेगी। पहले साल 2,500 कारें और कमर्शियल व्हीकल इंपोर्ट होंगे। EV हाइब्रिड और हाइड्रोजन कारों पर कोटा 6वें साल से लागू होगा।

लक्ष्मण रॉय ने आगे बताया कि भारत से यूके को होने वाले 99% एक्सपोर्ट पर अलग-अलग चरणों में आगे चलकर कोई ड्यूटी नहीं लगेगी। उल्टा जब यूके का सामान यहां पर आएगा तो हम उसके 91% प्रोडक्ट पर ड्यूटी में रियायत देंगे। भारत से यूके जाने वाले सामानों में कई सारे आइटम बहुत महत्वपूर्ण है। मिसाल के तौर पर टेक्सटाइल गारमेंट पर यूके में 12% की ड्यूटी लगती है। यूके में केमिकल पर 8% की ड्यूटी लगती है। बेस मेटल पर 10% की ड्यूटी लगती है। अब इस एफटीए के लागू होने के बाद इन सारे प्रोडक्ट पर यूके में कोई ड्यूटी नहीं लगेगी। इसी तरह भारत से जाने वाले प्रोसेस्ड फ़ूड पर यूके में 70% की ड्यूटी लगती है। वह भी जीरो हो जाएगी। मरीन प्रोडक्ट पर यूके में 20% की ड्यूटी लगती है। वह भी ज़ीरो हो जाएगी। ऐसे में भारत के इन सारे सेक्टरों को बहुत ज्यादा राहत मिलेगी।

यूके से जो सामान भारत आएगा उसमें दो आइटम काफी अहम हैं। इनमें से एक है स्कॉच व्हिस्की। इस पर भारत में अभी 150% की ड्यूटी लगती है। वो किस्तों में घट करके आपको 40% पे आ जाएगा। यूके मेड इन इंग्लैंड जो कारें वहां से इंपोर्ट होती है उस पर 100% की ड्यूटी लगती है। FTA लागू होने के बाद यह किस्तों में घट कर 10% हो जाएगी।

 

 

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ONGC का महा-प्लान: मंगलुरु में जमा होगा 17.5 लाख टन कच्चा तेल, दुनिया में संकट आने पर भी नहीं रुकेगा भारत

ONGC Strategic Petroleum Reserve: मिडिल ईस्ट में एक बार फिर से तनाव बढ़ गया है। समुद्री रास्तों पर ब्लॉकबेड के खतरों के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक बेहद बड़ा फैसला लिया है। देश की सबसे बड़ी तेल और गैस खोजकर्ता कंपनी ओएनजीसी (ONGC) दक्षिण भारत के मंगलुरु में 17.5 लाख टन क्षमता का एक नया ‘नेशनल स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व’ (SPR) यानी रणनीतिक कच्चा तेल भंडार बनाएगी।

कंपनी ने शेयर बाजारों को दी गई एक रेगुलेटरी फाइलिंग में इस महत्वाकांक्षी योजना की जानकारी दी है। आइए समझते हैं कि स्ट्रैटेजिक ऑयल रिजर्व क्या होता है और संकट के समय यह भारत के लिए कितना जरूरी साबित होगा।

क्यों पड़ी नए ऑयल रिजर्व की जरूरत?

दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और उपभोक्ता देश होने के कारण भारत अपनी जरूरतों का करीब 85% कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। हाल ही में ईरान पर इजरायल-अमेरिकी हमलों के बाद जब ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के समुद्री रास्ते को ब्लॉक कर दिया गया, तो भारत को कच्चे तेल की सप्लाई में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था।

दुनिया की कुल ऊर्जा सप्लाई का लगभग पांचवां हिस्सा होर्मुज के सकरे समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है। युद्ध या किसी भी बड़ी अंतरराष्ट्रीय मुसीबत के समय जब विदेशों से तेल आना बंद हो जाए, तब देश के कामकाज को बिना रुकावट चलाने के लिए इन ‘स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व’ में जमा तेल का इस्तेमाल किया जाता है।

कमर्शियल इस्तेमाल के लिए सरकार से मांगी जाएगी मंजूरी

ONGC ने अपनी फाइलिंग में स्पष्ट किया है कि वह ‘राष्ट्रहित’ में बनाए जाने वाले इस विशालकाय स्टोरेज का एक हिस्सा व्यावसायिक यानी कमर्शियल इस्तेमाल के लिए उपयोग करने की खातिर केंद्र सरकार से अनुमति मांगेगी।

मौजूदा समय में केंद्र सरकार पहले से ही दक्षिण भारत के तीन स्थानों मंगलुरु, पादुर और विशाखापट्टनम में बने रणनीतिक भंडारों के एक हिस्से को व्यावसायिक उपयोग के लिए मंजूरी देती है। इन तीनों जगहों पर कुल मिलाकर 5.33 मिलियन मीट्रिक टन कच्चा तेल स्टोर करने की क्षमता है, जिसका प्रबंधन सरकारी कंपनी ‘इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड’ (ISPRL) करती है।

UAE और जापान के साथ बढ़ रहा है सहयोग

भारत एमर्जेंसी स्टॉक को मजबूत करने के लिए संयुक्त अरब अमीरात और जापान जैसे मित्र देशों के साथ लगातार अपनी एनर्जी पार्टनरशिप बढ़ा रहा है। मंगलुरु में ओएनजीसी की सहायक कंपनी ‘मंगलुरु रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड’ (MRPL) 3 लाख बैरल प्रतिदिन की क्षमता वाली रिफाइनरी चलाती है। यहां पहले से मौजूद 1.5 मिलियन टन के स्टोरेज का आधा हिस्सा MRPL और बाकी आधा हिस्सा यूएई की सरकारी तेल कंपनी ADNOC ने लीज पर ले रखा है।

इस साल की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यूएई दौरे के समय, ADNOC ने भारत में अपने कच्चे तेल के स्टोरेज को बढ़ाकर 3 करोड़ बैरल करने की घोषणा की थी। इसके साथ ही यूएई भारत के रणनीतिक रिजर्व के हिस्से के रूप में फुजैराह में भी तेल भंडारण की संभावनाएं तलाश रहा है।

ओडिशा और पादुर में भी बनेंगे रिजर्व

मंगलुरु में ओएनजीसी के इस नए प्रोजेक्ट के अलावा, भारत सरकार देश के अन्य हिस्सों में भी तेल भंडारण क्षमता को कई गुना बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है:

ओडिशा (पूर्वी भारत): चंडीखोल में 4 मिलियन मीट्रिक टन की क्षमता वाला एक नया रणनीतिक तेल भंडार बनाया जाएगा।

पादुर (दक्षिण भारत): कर्नाटक के पादुर में 2.5 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता वाली एक नई अतिरिक्त फैसिलिटी तैयार की जाएगी।

कुल मिलाकर ओएनजीसी का यह कदम वैश्विक तनाव के बीच भारत की तेल आत्मनिर्भरता और संकट प्रबंधन क्षमता को एक नए स्तर पर ले जाएगा, ताकि ग्लोबल मार्केट में मंदी या युद्ध होने पर भी देश के भीतर पेट्रोल-डीजल की किल्लत न हो।

इंग्लैंड से पहली बार T-20I सीरीज हारने वाले कोच और कप्तान बने गंभीर और श्रेयस

आयरलैंड से टी-20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज हारने के बाद अब इंग्लैंड के खिलाफ भी टी-20 सीरीज हारने वाले गौतम गंभीर और श्रेयस अय्यर क्रमश पहले कोच और कप्तान बन गए हैं। श्रेयस अय्यर का यह बतौर कप्तान दूसरी सीरीज है जिसमें उनको हार मिली है।भारत ने तीसरे मैच में अय्यर के नाबाद 80 रन के बावजूद सात विकेट पर 158 रन ही बनाए। इंग्लैंड ने केवल 13.5 ओवर में लक्ष्य हासिल कर दिया।

भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने इंग्लैंड के हाथों पहली बार टी20 श्रृंखला गंवाने के बाद अपनी निराशा नहीं छिपाई और स्वीकार किया कि उनकी टीम एक बार फिर सभी विभागों में पूरी तरह से विफल रही।अय्यर ने मैच के बाद कहा, ‘‘एक बार फिर हमने निराशाजनक प्रदर्शन किया। हमने पर्याप्त रन नहीं बनाए थे। आखिरकार हमने देखा कि उन्होंने कितनी जल्दी लक्ष्य हासिल कर दिया। जब हम गेंदबाजी करने आए तो मैंने गेंदबाजों से बस यही कहा कि वे जितना संभव हो सके एक ही लेंथ पर गेंद डालें।’’

अय्यर अपने प्रदर्शन से खुश थे, लेकिन उन्होंने कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि टीम जीत हासिल नहीं कर पाई।उन्होंने कहा, ‘‘मैं अपने प्रदर्शन से काफी खुश हूं, लेकिन अगर इससे टीम को जीत नहीं मिलती तो इसका कोई मतलब नहीं। इस बात से मुझे बहुत निराशा हुई क्योंकि जब भी मैं खेलता हूं मैं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना चाहता हूं और यह सुनिश्चित करना चाहता हूं कि मेरी टीम जीते। लेकिन दुर्भाग्य से आज ऐसा नहीं हुआ। उम्मीद है कि अगले मैच में हम अच्छा प्रदर्शन करेंगे।’’

अय्यर ने कहा कि मौजूदा भारतीय टीम बदलाव के दौर से गुजर रही है और उम्मीद जताई कि खिलाड़ी अपनी गलतियों से सीखेंगे और जल्दी ही तालमेल बिठा लेंगे।उन्होंने कहा, ‘‘यह बदलाव का दौर है और हम गलतियां करेंगे। हमारे लिए यह समझना जरूरी है कि परिस्थितियों से सामंजस्य बिठाना कितना महत्वपूर्ण है।’’

SBI के इस IPO ने खुलने से पहले ही मचाई हलचल! ग्रे मार्केट से आए चौंकाने वाले संकेत, जानें सभी जरूरी डिटेल्स

SBI Funds Management IPO GMP Today: देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट का मेगा आईपीओ 14 जुलाई से सब्सक्रिप्शन के लिए खुलने जा रहा है। भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के इस सबसे बड़े खिलाड़ी के आईपीओ को लेकर बाजार में भारी उत्साह है। अनऑफिशियल मार्केट में कंपनी के अनलिस्टेड शेयरों की खूब डिमांड देखने को मिल रही है।

एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट का यह पब्लिक इश्यू ₹11,692.91 करोड़ का है। आइए जानते हैं इस बड़े आईपीओ की पूरी डिटेल, प्राइस बैंड, जरूरी तारीखें और कंपनी का बिजनेस प्रोफाइल।

IPO प्राइस बैंड और मार्केट वैल्यूएशन

  • प्राइस बैंड: ₹545 से ₹574 प्रति शेयर
  • एंकर इनवेस्टर बिडिंग: 13 जुलाई, 2026
  • आईपीओ ओपनिंग डेट: 14 जुलाई, 2026
  • आईपीओ क्लोजिंग डेट: 16 जुलाई, 2026
  • अलॉटमेंट फाइनल होने की तारीख: 17 जुलाई, 2026
  • रिफंड और डिमैट क्रेडिट: 20 जुलाई, 2026
  • शेयर बाजार में लिस्टिंग: 21 जुलाई, 2026 BSE और NSE पर

पूरी तरह ‘ऑफर फॉर सेल’ (OFS) है यह इश्यू

यह ₹11,692.91 करोड़ का आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) के तहत आ रहा है। इसका मतलब है कि कंपनी के प्रमोटर्स अपनी 10% हिस्सेदारी बेच रहे हैं और इससे मिलने वाला पूरा पैसा उन्हीं के पास जाएगा, कंपनी को अपने काम के लिए कोई फंड नहीं मिलेगा।

SBI बेचेगा: 12.83 करोड़ शेयर (6.3% हिस्सेदारी)

Amundi India Holding बेचेगी: 7.56 करोड़ शेयर (3.7% हिस्सेदारी)

इस बड़े इश्यू को संभालने के लिए कोटक महिंद्रा कैपिटल, एक्सिस कैपिटल, बोफा सिक्योरिटीज, एचएसबीसी, आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज, जेफरीज, जेएम फाइनेंशियल, मोतीलाल ओसवाल और एसबीआई कैपिटल मार्केट्स जैसी दिग्गज संस्थाएं बुक-रनिंग लीड मैनेजर्स की भूमिका निभा रही हैं।

कैसा है कंपनी का बिजनेस?

एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट देश की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) है, जो एसबीआई म्यूचुअल फंड के निवेश को मैनेज करती है। 31 दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, म्यूचुअल फंड बाजार में कंपनी की हिस्सेदारी 15.4 फीसदी है।

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कंपनी का तिमाही औसत एसेट अंडर मैनेजमेंट (QAAUM) ₹12,49,970 करोड़ रहा है। अगर इसमें पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) और अन्य एडवाइजरी फंड्स को भी जोड़ दिया जाए, तो कंपनी का कुल QAAUM ₹29,04,026 करोड़ के विशाल स्तर पर पहुंच जाता है।

लगातार बढ़ रहा ग्रे मार्केट प्रीमियम

10 जुलाई की सुबह ग्रे मार्केट को ट्रैक करने वाले प्लेटफॉर्म्स के मुताबिक, एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के अनऑफिशियल शेयरों में मजबूती देखी जा रही है। आईपीओ वॉच के मुताबिक, इसका जीएमपी फिलहाल ₹85 प्रति शेयर चल रहा है, जो करीब 14.81% के लिस्टिंग गेन की ओर इशारा करता है। वहीं इनवेस्टरगेन के अनुसार इसका जीएमपी ₹86 के आस-पास है, जो लगभग 15% का मुनाफा दिखाता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

45000 की नौकरी छोड़ दिल्ली की स्नेहा ने सीखी स्पेनिश, एक लैंग्वेज ने ऐसी बदली जिंदगी कि अब बिना जॉब भी स्विट्जरलैंड में बिता रहीं लाइफ!

बहुत से लोग मानते हैं कि फाइनेंशियल सिक्योरिटी पाने का एकमात्र तरीका एक स्टेबल नौकरी है। लेकिन एक भारतीय कंटेंट क्रिएटर का कहना है कि वह बिना किसी रेगुलर कॉर्पोरेट नौकरी के, दुनिया के सबसे महंगे देशों में से एक, स्विट्जरलैंड में छह महीने बिता पाईं।

एक इंस्टाग्राम वीडियो में, स्नेह गौर ने बताया कि कैसे उन्होंने फिक्स्ड सैलरी वाली नौकरी छोड़कर कमाई के अलग-अलग जरीये बनाए, जिससे उन्हें अपनी शर्तों पर जीने और काम करने की आजादी मिली। उनकी कहानी ने अब ऑनलाइन चर्चा छेड़ दी है।

गौर ने बताया कि उनके सफर की शुरुआत तब हुई जब वह एक कॉर्पोरेट नौकरी कर रही थीं और महीने के लगभग 45,000 रुपये कमा रही थीं। उस समय, उनका मानना ​​था कि सफलता का मतलब है डिग्री हासिल करना, अच्छी नौकरी पाना और प्रमोशन पाना।

उन्होंने कहा, “मुझे लगता था कि सफलता का मतलब यही है – डिग्री लेना, सैलरी पाना, नौकरी करना और अगला प्रमोशन पाना।” लेकिन समय के साथ उन्हें एहसास हुआ कि वह कुछ अलग करना चाहती थीं। अपनी मर्जी से रहने की जगह चुनने, घूमने-फिरने और उन चीजों पर काम करने की आजादी जो मुझे सच में पसंद थीं।” एक ही रास्ते पर चलने के बजाय, उन्होंने स्पैनिश सीखने का फैसला किया।

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गौर के मुताबिक, उस एक स्किल ने नए मौके खोले। इससे उन्हें स्पेन जाने, अलग-अलग देशों के लोगों से मिलने और इंटरनेशनल अनुभव पाने में मदद मिली। बाद में, उन्होंने उस जानकारी को एक बिजनेस में बदल दिया। उन्होंने बताया कि सबसे पहले उन्होंने स्पैनिश सिखाना शुरू किया, और फिर स्पेन ट्रैवल गाइड, डिजिटल प्रोडक्ट्स, ऑनलाइन एंटरप्रेन्योर और कंटेंट क्रिएटर्स के लिए मेंटरशिप प्रोग्राम और ब्रांड कोलैबोरेशन जैसे काम शुरू किए।

गौर ने बताया कि कमाई के कई जरिया होने का मतलब था कि अब उन्हें कंपनी की सैलरी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता था। उन्होंने कहा, “जब मैं स्विट्ज़रलैंड गई, तो मैं कंपनी की सैलरी पर निर्भर नहीं थी क्योंकि मेरा लैपटॉप और मेरी रिमोट टीम ही काफी थी।”

स्नेहा ने बताया कि “कभी-कभी आपकी जिंदगी बदलने वाली चीज सिर्फ प्रमोशन नहीं, बल्कि कोई स्किल होती है।” अपनी पोस्ट के कैप्शन में गौर ने लिखा, “कोई नौकरी नहीं। कंपनी से कोई सैलरी नहीं। फिर भी हर सुबह स्विट्जरलैंड में आंख खुली। सच तो यह है कि स्पेन में रहते हुए ही मैंने कुछ ऐसा बनाया जिससे मुझे जहां चाहूं वहां रहने की आजादी मिली। न कोई ऑफिस, न कोई बॉस, न किसी की इजाजत की जरूरत। आजादी का यही वो रूप है जिसे पाने की कोशिश करना सही है।”

इस पोस्ट पर लोगों ने खूब प्रतिक्रिया दी और कई यूजर्स उनकी यात्रा के बारे में और जानना चाहते थे। एक यूजर ने लिखा, “कृपया मुझे बताएं।” एक और ने पूछा, “एक सीधा सा सवाल है कि आप किस वीजा पर 6 महीने तक रहीं? स्पेन का सामान्य रेजिडेंट परमिट तो सिर्फ 3 महीने की इजाजत देता है, या फिर आपने स्पेन की नागरिकता ले ली थी?” एक व्यक्ति ने कमेंट किया, “इसके लिए कैसे अप्लाई करें?” वहीं कई अन्य लोगों ने हार्ट और फायर इमोजी के साथ प्रतिक्रिया दी।

World Population Day 2026: विश्व जनसंख्या दिवस क्यों मनाया जाता है, जानें इतिहास, महत्व और इस साल की थीम

The image conveys a message about realizing the hopes and aspirations of the youth on World Population Day- for both today and the future

World Population Day: हर वर्ष 11 जुलाई को पूरी दुनिया में विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य बढ़ती जनसंख्या, प्रजनन स्वास्थ्य, लैंगिक समानता, परिवार नियोजन, शिक्षा और सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों के प्रति लोगों को जागरूक करना है। तेजी से बढ़ती आबादी का प्रभाव प्राकृतिक संसाधनों, पर्यावरण, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, रोजगार और जीवन की गुणवत्ता पर पड़ता है। ऐसे में विश्व जनसंख्या दिवस लोगों को जनसंख्या से जुड़े अवसरों और चुनौतियों पर विचार करने का अवसर प्रदान करता है।

 

इस दिवस से जुड़ी तारीख, इतिहास, महत्व और इस साल की खास थीम की पूरी जानकारी यहां नीचे जानें…

 

विश्व जनसंख्या दिवस 2026 की थीम

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) द्वारा हर साल इस दिन के लिए एक विशेष थीम तय की जाती है। वर्ष 2026 के लिए विश्व जनसंख्या दिवस की आधिकारिक थीम 'युवाओं की आशाओं और आकांक्षाओं को साकार करना – आज और भविष्य के लिए' (Realizing the hopes and aspirations of young people – today and for the future) तय की गई है।

 

थीम का मायने: इस साल की थीम पूरी तरह से युवा पीढ़ी पर केंद्रित है। यह इस बात पर जोर देती है कि दुनिया भर के युवाओं को बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं, रोजगार के अवसर और सही निर्णय लेने के अधिकार दिए जाएं। जब देश की युवा आबादी सशक्त होगी, तभी वैश्विक स्तर पर सतत विकास और जनसंख्या संतुलन की चुनौतियों से निपटा जा सकेगा।

 

क्यों मनाया जाता है यह दिवस?

तेजी से बढ़ती आबादी के कारण दुनिया के सामने कई गंभीर चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। इस दिवस को मनाने के पीछे मुख्य उद्देश्य हैं:

 

जागरूकता बढ़ाना: लोगों को परिवार नियोजन, लैंगिक समानता, मानवाधिकार और मातृ स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना।

 

संसाधनों पर दबाव: बढ़ती जनसंख्या का पर्यावरण, भुखमरी, गरीबी, स्वास्थ्य सेवाओं और पानी व भोजन जैसे प्राकृतिक संसाधनों पर क्या असर पड़ रहा है, इस ओर सरकारों और आम जनता का ध्यान आकर्षित करना।

 

अधिकारों की रक्षा: विशेष रूप से महिलाओं और लड़कियों को उनके प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़े फैसले खुद लेने के अधिकार के प्रति सशक्त बनाना।

 

विश्व जनसंख्या दिवस का इतिहास

शुरुआत कब हुई: विश्व जनसंख्या दिवस की स्थापना 1989 में 'संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम' (UNDP) की तत्कालीन गवर्निंग काउंसिल द्वारा की गई थी। इस बार विश्व जनसंख्या दिवस 2026 11 जुलाई, शनिवार को मनाया जाएगा।

 

11 जुलाई को ही क्यों चुना गया: इसके पीछे एक ऐतिहासिक घटना है। 11 जुलाई 1987 को दुनिया की कुल आबादी का आंकड़ा 5 अरब (5 Billion) को पार कर गया था। इस दिन को 'फाइव बिलियन डे' (Five Billion Day) कहा गया। दुनिया की इतनी तेज रफ्तार से बढ़ती आबादी को देखते हुए लोगों को जागरूक करने की जरूरत महसूस हुई और तय किया गया कि हर साल 11 जुलाई को 'विश्व जनसंख्या दिवस' मनाया जाएगा। तथा आधिकारिक तौर पर पहला विश्व जनसंख्या दिवस 11 जुलाई 1990 को 90 से अधिक देशों में मनाया गया था।

 

विश्व जनसंख्या दिवस मनाने का महत्व

वर्तमान में दुनिया की आबादी 8 अरब के आंकड़े को पार कर चुकी है, जिसमें भारत दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बना हुआ है। ऐसे समय में इस दिन का महत्व और अधिक बढ़ जाता है:

 

सतत विकास: यह दिन याद दिलाता है कि यदि जनसंख्या अनियंत्रित ढंग से बढ़ती रही, तो गरीबी उन्मूलन, भुखमरी और जलवायु परिवर्तन जैसे वैश्विक लक्ष्यों (SDGs) को हासिल करना नामुमकिन हो जाएगा।

 

नीति निर्धारण: यह सरकारों और नीति निर्माताओं को डेटा के आधार पर स्वास्थ्य, रोजगार और शहरीकरण की बेहतर योजनाएं बनाने के लिए एक मंच प्रदान करता है।

 

स्वास्थ्य और सुरक्षा: अवांछित गर्भधारण को रोकने और सुरक्षित मातृत्व के माध्यम से मातृ-शिशु मृत्यु दर को कम करने में यह वैश्विक अभियान बड़ी भूमिका निभाता है।

 

विश्व जनसंख्या दिवस- FAQs

 

1. विश्व जनसंख्या दिवस कब मनाया जाता है?

हर वर्ष 11 जुलाई को।

 

2. विश्व जनसंख्या दिवस की शुरुआत कब हुई?

सन् 1989 में इस दिन की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम द्वारा की गई थी।

 

3. विश्व जनसंख्या दिवस का मुख्य उद्देश्य क्या है?

जनसंख्या से जुड़ी चुनौतियों का समाधान खोजते हुए प्रत्येक व्यक्ति के अधिकार, स्वास्थ्य और बेहतर जीवन की दिशा में जागरूकता फैलाना।

 

4. विश्व जनसंख्या दिवस क्यों मनाया जाता है?

परिवार नियोजन, जनसंख्या, प्रजनन स्वास्थ्य, शिक्षा और सतत विकास के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए।

 

5. विश्व जनसंख्या दिवस 2026 की थीम क्या है?

युवाओं की आशाओं और आकांक्षाओं को साकार करना – आज और भविष्य के लिए। (Realizing the hopes and aspirations of young people – today and for the future) है। 

 

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Hydrogen Trials Routes: दिल्ली-आगरा से मुंबई-पुणे तक… देश के उन 10 रूटों की फुल लिस्ट जहां शुरू हुआ हाइड्रोजन ट्रायल, जानिए क्या है पूरी तैयारी

Hydrogen Trials Routes: केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने परिवहन उद्योग के भविष्य को लेकर एक बड़ा विजन पेश किया है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, गांधीनगर में आयोजित प्रवास 5.0 और भारत प्रवास अवार्ड्स कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने घोषणा की है कि हाइड्रोजन ही परिवहन उद्योग का भविष्य है। उन्होंने इस दौरान बताया कि सरकार देश भर के 10 महत्वपूर्ण रूटों पर ईंधन के रूप में इसके इस्तेमाल का ट्रायल कर रही है।

नितिन गडकरी ने जोर देकर कहा कि वैकल्पिक ईंधन और बायोफ्यूल के क्षेत्र में भारतीय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री बहुत शानदार काम कर रही है। आने वाले समय में भारत अपनी बेहतरीन तकनीक और किफायती लागत के दम पर इस क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर नेतृत्व करेगा।

देश के वे 10 रूट जहां चल रहा है हाइड्रोजन का ट्रायल

केंद्रीय मंत्री के मुताबिक सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय जिन 10 रूटों पर हाइड्रोजन ईंधन का पायलट प्रोजेक्ट चला रहा है, उनकी पूरी लिस्ट यहां नीचे देखिए-

ग्रेटर नोएडा – दिल्ली – आगरा

पुणे – मुंबई

साहिबाबाद – फरीदाबाद – दिल्ली

अहमदाबाद – वडोदरा – सूरत

जामनगर – अहमदाबाद

भुवनेश्वर – कोणार्क – पुरी

जमशेदपुर – कलिंगा नगर

तिरुवनंतपुरम – कोच्चि

कोच्चि – एडपल्ली

नेशनल हाईवे-16 विशाखापट्टनम – बय्यावराम

नंबर 1 बनने की ओर भारतीय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री, 4.5 करोड़ नौकरियां

नितिन गडकरी ने देश की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की अभूतपूर्व तरक्की के आंकड़े भी साझा किए। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने मंत्रालय का कार्यभार संभाला था तब देश की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री का आकार 14 लाख करोड़ रुपये था और यह वैश्विक स्तर पर 7वें स्थान पर थी। आज यह 22 लाख करोड़ रुपये के आकार के साथ दुनिया में तीसरे स्थान पर पहुंच चुकी है। हमारा लक्ष्य जल्द से जल्द दुनिया में पहले स्थान पर पहुंचना है।

यह इंडस्ट्री केंद्र और राज्य सरकारों को सबसे ज्यादा राजस्व देती है और इसके जरिए देश में 4.5 करोड़ नौकरियां पैदा हुई हैं। भारत के टू-व्हीलर निर्माता आज अपनी सुरक्षा और तकनीक के दम पर 50 प्रतिशत उत्पाद विदेशों में बेच रहे हैं।

सड़क सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता, हर साल 1.80 लाख मौतें

सड़क सुरक्षा को लेकर केंद्रीय मंत्री ने गंभीर आंकड़े पेश किए और ट्रांसपोर्टर्स व निर्माताओं से मदद की अपील की। देश में हर साल 5 लाख सड़क हादसे होते हैं जिनमें 1.80 लाख लोगों की जान चली जाती है। इन हादसों में जान गंवाने वाले लोगों में से 66 प्रतिशत लोग 18 से 36 वर्ष की आयु वर्ग के होते हैं। इन दुर्घटनाओं के कारण देश को 3 प्रतिशत जीडीपी का नुकसान उठाना पड़ता है। इसलिए सड़क सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

बस निर्माताओं को बड़ी राहत, टेस्टिंग चार्ज 50% घटेगा

नितिन गडकरी ने बसों की संख्या बढ़ाने उनकी सुरक्षा और निर्माताओं को राहत देने के लिए कई महत्वपूर्ण बातें कहीं। देश में सालाना 3 लाख बसों की जरूरत है लेकिन हमारे निर्माता सिर्फ 70000 से 80000 बसें ही बना पा रहे हैं। उत्पादकता को तीन गुना बढ़ाना होगा। निर्माताओं का कर्तव्य है कि वे विश्व स्तरीय तकनीक के साथ उचित आर्थिक मूल्य पर अधिक आराम प्रदान करें। पिछले साल सितंबर में संशोधित बस बॉडी कोड लागू किया गया था।

अब सरकार ने 600 से अधिक बस बॉडी निर्माता इकाइयों (जिसमें 75000 कर्मचारी कार्यरत हैं) को राहत देते हुए टेस्टिंग चार्ज को 50 प्रतिशत कम करने और प्रोसेसिंग की समयसीमा को 16 सप्ताह से घटाकर 6 सप्ताह करने का निर्णय लिया है। गडकरी ने इलेक्ट्रिक बस निर्माताओं से अपील की कि वे लिथियम-आयन बैटरी की घटी हुई कीमतों का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाएं।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में चार्जिंग के लिए 20 रुपये की बिजली दर अधिक है। उनका मंत्रालय बसों, ट्रकों व कारों के लिए इसे कम करने पर काम कर रहा है। मंत्रालय देश में प्राइवेट बसपोर्ट बनाने पर काम कर रहा है। इसके अलावा ग्रीन एक्सप्रेस हाईवे के निर्माण से यात्रा का समय कम होगा जिससे ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री का टर्नओवर और मुनाफा बढ़ाने में मदद मिलेगी।

Stock Market Rally: सेंसेक्स 846 अंक तक उछला, निफ्टी फिर 24200 के पार; 6 कारणों से लगातार दूसरे दिन तेजी

शेयर बाजार में शुक्रवार, 10 जुलाई को लगातार दूसरे दिन तेजी का आलम है। सेंसेक्स हरे निशान में खुलने के बाद 846 अंक तक चढ़ गया। इसके पीछे IT शेयरों में खरीदारी, कच्चे तेल की कीमत में गिरावट, एशियाई बाजारों की तेजी जैसे कई फैक्टर हैं। सेंसेक्स की ओपनिंग हरे निशान में 77,395.63 पर हुई। फिर यह पिछली क्लोजिंग से 846.26 अंक से ज्यादा चढ़कर 77,588.08 के हाई तक गया। इसी तरह निफ्टी बढ़त के साथ 24,124.70 पर खुला और फिर 263.25 अंक उछलकर 24,226.05 के हाई तक गया।

गुरुवार को सेंसेक्स 238.22 अंक या 0.31 प्रतिशत की बढ़त के साथ 76,741.82 पर और निफ्टी 80.75 अंक या 0.34 प्रतिशत बढ़कर 23,962.80 पर बंद हुआ था। आइए जानते हैं शुक्रवार की तेजी के अहम कारण…

US-ईरान युद्ध के समाधान की उम्मीद

गुरुवार को एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि अमेरिका, ईरान के साथ मसलों को सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध है और हालिया तनाव के बावजूद तकनीकी बातचीत जारी है। इस खबर से भू-राजनीतिक मोर्चे पर तनाव बढ़ने की चिंता कम हुई है, जिससे बाजार को सहारा मिला है।

IT शेयरों में खरीदारी

TCS के शेयरों में 3% से ज्यादा की बढ़त के बाद निफ्टी IT इंडेक्स में जबरदस्त तेजी है। यह 3% तक चढ़ गया। TCS के अप्रैल-जून तिमाही के नतीजों और मैनेजमेंट की बातों से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। उम्मीद जगी है कि दूसरी तिमाही से मांग में धीरे-धीरे सुधार होगा, जिसके चलते ब्रोकरेज हाउस ने इस स्टॉक पर अपना पॉजिटिव नजरिया बरकरार रखा है।

TCS का जून तिमाही के लिए कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 4.61% की बढ़ोतरी के साथ ₹13,349 करोड़ रहा। कंपनी ने कहा है कि पश्चिम एशिया संकट से प्रभावित मांग में मौजूदा तिमाही में सुधार की उम्मीद है।

एशियाई बाजारों की तेजी

एशियाई बाजार बढ़त में हैं। इसका असर भी देश के शेयर बाजार पर है। दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) 4% से ज्यादा चढ़ा है, जापान का निक्केई 225 1.91% बढ़ा है। इसी तरह शंघाई का SSE कंपोजिट 0.76% और हांगकांग का हैंग सेंग 1.73% की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा है। गुरुवार को अमेरिकी बाजार भी बढ़त के साथ बंद हुए थे।

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट

ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क, ब्रेंट क्रूड की कीमत 76.19 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रही है। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बावजूद, तेल की कीमतों में नरमी है। कच्चे तेल की कम कीमतें भारत के लिए इसलिए अच्छी हैं क्योंकि देश अपनी तेल की जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। सस्ते तेल से आयात लागत कम होती है, महंगाई का दबाव घटता है, जिससे बाजार का सेंटीमेंट मजबूत होता है।

रुपये की मजबूती

रुपया शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में 15 पैसे मजबूत होकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.32 पर पहुंच गया। अमेरिकी डॉलर में कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से घरेलू मुद्रा को बल मिला। रुपया गुरुवार को एक पैसे की बढ़त के साथ अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.47 पर बंद हुआ था।

इंडिया VIX में गिरावट

बाजार में अस्थिरता को मापने वाला इंडिया VIX, लगभग 6 प्रतिशत तक गिरकर 12.63 पर आ गया। इंडिया VIX में गिरावट का मतलब है कि निकट भविष्य में बाजार में उतार-चढ़ाव की उम्मीदें कम हो रही हैं और निवेशकों का भरोसा बढ़ रहा है।