Lt Kashish Methwani: मॉडलिंग और ग्लैमर की दुनिया छोड़ कशिश मेथवानी ने चुना देश सेवा का रास्ता, सीडीएस में हासिल की थी एआईआर 2

Lt Kashish Methwani: कुछ लोग इतने प्रतिभावान होते हैं, वो जहां कदम रखते हैं सफलता उनके कदम चूमती है। ऐसा ही एक नाम है लेफ्टिनेंट कशिश मेथवानी का है। मुंबई में जन्मीं और पुणे में पली बढ़ीं कशिश के लिए मॉडलिंग की चकाचौंध भरी दुनिया शिखर पर बैठाने के लिए तैयार थी। लेकिन उनके मन में देश सेवा के सपने ने जन्म ले लिया था। एक मीडिया इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि पेजेंट्री हमेशा से उनका पैशन रहा, लेकिन यह उनका लॉन्ग-टर्म करियर कभी नहीं था। उन्होंने बताया कि नेशनल कैडेट कोर में शामिल होना वह टर्निंग पॉइंट था जिसने उनके सपनों को पूरी तरह से बदल दिया।

साल था 2023 का, और मंच मिस इंटरनेशनल इंडिया था। उस पैजेंट में उन्होंने विजेता का ताज अपने सिर पर सजाया। लेकिन कशिश के लिए, मॉडलिंग वो सफर नहीं था, जिस पर चलने के लिए उनके मन में बरसों पहले आस जगी थी। ये बस एक शौक था, जो अब पूरा हो चुका था। अब अगले सफर पर निकलने का समय था। उन्होंने 2024 में कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज (CDS) परीक्षा पास करने पर ध्यान देने का फैसला किया, और वहां भी वह विजेता बनीं। उन्हें ऑल इंडिया रैंक 2 मिली।

उन्होंने मॉडलिंग छोड़ने का फैसला किया और यूनिफॉर्म में सेना जॉइन कर ली। चेन्नई में ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (OTA) में ग्यारह महीने की मुश्किल मिलिट्री ट्रेनिंग लेने के बाद, उन्हें 6 सितंबर को हुई पासिंग आउट परेड में इंडियन आर्मी में लेफ्टिनेंट के तौर पर कमीशन मिला। मेथवानी का यह कदम कई लोगों के लिए एक शॉक जैसा था ।

फाइनेंशियल एक्सप्रेस के हवाले से उन्होंने कहा, “रिपब्लिक डे परेड में मार्च करना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बेस्ट कैडेट की ट्रॉफी लेना, इससे मुझे एक मकसद मिला। यह तय था कि आर्मी ही वह जगह है जहां मैं सच में होना चाहती हूं।” आर्मी एयर डिफेंस रेजिमेंट में उनकी पोस्टिंग बहुत अहम है क्योंकि यह रेजिमेंट भारत के ऑपरेशन सिंदूर में अहम काम कर रही थी।

लेफ्टिनेंट कशिश मेथवानी कौन हैं?

9 जनवरी 2001 को मुंबई के पास उल्हासनगर में जन्मी मेथवानी एक सिंधी परिवार से हैं। बाद में वह पुणे के वाकड में बस गईं, जहा उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और साथ ही कई एक्स्ट्रा करिकुलर इंटरेस्ट भी किए। उन्होंने सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी से बायोटेक्नोलॉजी में मास्टर डिग्री पूरी की और फिर इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस, बेंगलुरु से न्यूरोसाइंस थीसिस की। उन्हें हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पीएचडी करने का भी ऑफर मिला, जो उनके शानदार एकेडमिक रिकॉर्ड को और दिखाता है।

परिवार का रोल काफी अहम रहा

लेफ्टिनेंट कशिश के पिता, डॉ. गुरमुख दास, डायरेक्टरेट जनरल ऑफ क्वालिटी एश्योरेंस में सीनियर पोस्ट संभालने से पहले एक साइंटिस्ट के तौर पर काम करते थे। उनकी मां आर्मी पब्लिक स्कूल, घोरपडी में टीचर थीं। मेथवानी की भरतनाट्यम, डिबेट, एकेडमिक्स, बास्केटबॉल और नेशनल लेवल पिस्टल शूटिंग जैसी अलग-अलग चीजों में दिलचस्पी रही है। सेना में शामिल होने से पहले, मेथवानी ने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझते हुए डेडिकेशन क्रिटिकल कॉज नाम का एक एनजीओ भी शुरू किया था। इसका मकसद लोगों को अपना खून, प्लाज्मा और ऑर्गन डोनेट करने के लिए प्रोत्साहित करना था।

CBSE Free online Courses 2026: 8वीं और 12वीं के छात्रों को सीबीएसई ने दिया फ्री कोर्स का तोहफा, ऑनलाइन सीख सकेंगे एआई और पाइथन

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CBSE Free online Courses 2026: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 8वीं से 12वीं कक्षा तक के छात्रों के लिए डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में नई पहल की गई है। बोर्ड ने राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (NIELIT) के साथ मिलकर 19 फ्री ऑनलाइन कोर्स शुरू किए हैं।

इन कोर्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), पायथन प्रोग्रामिंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, जेनरेटिव AI, AWS DevSecOps, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग और VLSI डिजाइन जैसे हाई-डिमांड सब्जेक्ट्स की एक बड़ी रेंज शामिल है। कई कार्यक्रम इंग्लिश और हिंदी दोनों में उपलब्ध हैं, जिससे पढ़ाई की सामग्री ज्यादा छात्रों तक आसानी से पहुंच पाते हैं। बोर्ड के अनुसार, कोर्स का समय अलग-अलग होगा। कुछ शुरुआती मॉड्यूल लगभग 90 मिनट में पूरे किए जा सकते हैं, जबकि एडवांस्ड प्रोग्राम 100 घंटे से ज्यादा लंबे होते हैं, जिससे छात्र अपनी पसंद, सीखने के लक्ष्यों और उपलब्ध समय के आधार पर कोर्स चुन सकते हैं।

यह पहल छात्रों को बिना किसी खर्च के एडवांस्ड टेक्नोलॉजी कोर्स कराएगी, जिससे वे किसी भी जगह से अपनी स्पीड से ऑनलाइन पढ़ाई कर सकते हैं। सीबीएसई ने अपने सभी संबद्ध स्कूलों को भी इस कार्यक्रम और ज्यादा से ज्यादा छात्रों की भागीदारी को बढ़ावा देने का निर्देश दिया है। छात्र बिना किसी रजिस्ट्रेशन या कोर्स फीस के सीधे एनआईईएलआईटी डिजिटल यूनिवर्सिटी पोर्टल के जरिए इन पाठ्यक्रमों के लिए रजिस्टर कर सकते हैं। लचीले ऑनलाइन फॉर्मेट की मदद से छात्र अपने स्कूल की नियमित पढ़ाई के साथ-साथ कोर्स भी पूरा कर सकते हैं।

बोर्ड की यह पहल उसके डिजिटल लिटरेसी, कोडिंग और नई टेक्नोलॉजी को स्कूली शिक्षा में शामिल करने पर बढ़ते फोकस को दिखाती है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इंडस्ट्री से जुड़ी टेक्नोलॉजी से जल्दी परिचित होने से छात्रों को प्रैक्टिकल प्रॉब्लम-सॉल्विंग एबिलिटी, कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और इनोवेशन स्किल डेवलप करने में मदद मिल सकती है, साथ ही हायर एजुकेशन और इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस, डेटा एनालिटिक्स और दूसरे डिजिटल डोमेन में करियर के लिए उनकी तैयारी भी मजबूत हो सकती है।

इन फ्री ऑनलाइन कोर्स को शुरू करके, सीबीएसई ने स्कूली शिक्षा को डिजिटल इकॉनमी और भारत के बढ़ते टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम की स्किल जरूरतों के साथ जोड़ने की दिशा में एक और कदम उठाया है।

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