Farm Loan Waiver: महाराष्ट्र में बदले किसानों की कर्जमाफी के नियम, 2 लाख की लिमिट खत्म, जानें अब किसे मिलेगा फायदा

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के किसानों को एक बहुत बड़ी राहत देते हुए अपनी कृषि कर्जमाफी योजना के नियमों में बदलाव करने का ऐलान किया है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को विधानसभा में घोषणा की कि सरकार की नई कर्जमाफी योजना से उस शर्त को पूरी तरह हटा दिया गया है जिसके तहत बकाया कर्ज की सीमा 2 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए थी। विपक्ष द्वारा लाए गए अंतिम सप्ताह प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री (जिनके पास वित्त मंत्रालय का प्रभार भी है) ने बताया कि 2 लाख रुपये की इस ऊपरी सीमा के हटने से उन हजारों किसानों को सीधा फायदा होगा जो पहले इस शर्त के कारण योजना से बाहर हो गए थे।

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक इस नई योजना का नाम पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर कृषि कर्जमाफी योजना है। आइए विस्तार से जानते हैं कि सरकार के इस फैसले से अब किन-किन किसानों को लाभ मिलेगा और योजना के नए नियम क्या हैं।

अब 2026-27 तक का बकाया कर्ज होगा माफ

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कर्जमाफी के दायरे को बढ़ाते हुए एक और बड़ी राहत की घोषणा की है। पहले यह योजना सिर्फ वित्तीय वर्ष 2025-26 तक के बकाया कर्ज पर लागू होने वाली थी। अब इस समयसीमा को बढ़ाकर वित्तीय वर्ष 2026-27 तक के बकाया लोन के लिए विस्तारित कर दिया गया है। मुख्यमंत्री के मुताबिक राज्य में किसी भी सरकार द्वारा लिया गया यह ऐसा पहला फैसला है।

56 लाख किसानों को मिलेगा 36000 करोड़ रुपये का फायदा

इस योजना की आलोचनाओं को खारिज करते हुए वित्त मंत्री फडणवीस ने आंकड़े सदन के सामने रखे। विपक्ष के इस आरोप को उन्होंने खारिज कर दिया कि सिर्फ 12000-13000 करोड़ रुपये ही बांटे जाएंगे और 36 लाख किसान छूट जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस ऐतिहासिक योजना के तहत राज्य के करीब 56 लाख किसानों को 36000 करोड़ रुपये की कर्जमाफी सहायता का लाभ मिलेगा। इस योजना को अंतिम रूप देने से पहले बैंकिंग क्षेत्र के प्रतिनिधियों से सलाह ली गई थी। राज्य सरकार कृषि क्षेत्र को अपनी समग्र सहायता के हिस्से के रूप में पहले वर्ष में ₹20000 करोड़, दूसरे वर्ष में ₹22000 करोड़ और उसके बाद ₹25000 करोड़ खर्च करने का प्रस्ताव रखती है।

पुरानी कर्जमाफी योजनाओं से कैसे अलग है यह नियम?

मुख्यमंत्री ने साल 2019 की पुरानी ‘महात्मा ज्योतिराव फुले कर्जमाफी योजना’ का उदाहरण देते हुए मौजूदा बदलाव को समझाया। महात्मा फुले योजना में पात्रता की सीमा 2 लाख रुपये के ओवरड्यू लोन तक ही सीमित थी। अगर किसी किसान का बकाया इस सीमा से महज 1 रुपये भी ज्यादा होता था तो उसे योजना से पूरी तरह बाहर कर दिया जाता था। उस योजना से लगभग 32 लाख किसानों को लाभ मिला था।

सत्ताधारी गठबंधन के विधायकों की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए सीएम ने ₹50000 के पुनर्भुगतान से जुड़ी शर्त को हटाने से इनकार कर दिया क्योंकि इससे खजाने पर ₹4000-5000 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ता। हालांकि उन्होंने बड़ी घोषणा की कि महात्मा फुले कर्जमाफी योजना के तहत आने वाले किसानों को भी अब 2 लाख रुपये तक का कर्जमाफी लाभ मिलेगा। देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र देश का एकमात्र ऐसा राज्य है जिसने 2017, 2020 और अब 2026 में बड़े पैमाने पर कृषि कर्जमाफी को लागू किया है।

कुछ लाभार्थियों को योजना से बाहर रखने पर क्या बोले CM?

नियमित कर्जमाफी से कर्जदारों में पुनर्भुगतान में देरी करने की प्रवृत्ति बढ़ने और सहकारी बैंकों की वित्तीय स्थिति कमजोर होने की बात मुख्यमंत्री ने स्वीकार की। उन्होंने बताया कि सरकार ने कर्जमाफी के लाभार्थियों को भविष्य की योजनाओं से बाहर रखने के सुझाव पर विचार किया था लेकिन अंततः किसानों की मदद करने और बैंकिंग प्रणाली की सुरक्षा के बीच एक संतुलन बनाने का निर्णय लिया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि लाभार्थियों को बाहर रखने का फैसला कोई ऐसा नहीं है कि पहली बार लिया जा रहा हो। साल 2017 की कर्जमाफी के लाभार्थियों को 2019 की महात्मा फुले योजना से बाहर रखा गया था। ठीक इसी तरह साल 2008 की राष्ट्रीय कृषि कर्जमाफी योजना के दायरे में आए किसानों को महाराष्ट्र सरकार की 2009 की योजना से बाहर रखा गया था।

किसानों को संकट और साहूकारों से बचाना है मकसद: फडणवीस

योजना का बचाव करते हुए देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि संकटग्रस्त किसानों को फिर से संस्थागत ऋण (बैंकों से लोन) प्राप्त करने में मदद करने के लिए यह योजना बेहद जरूरी थी। उन्होंने कहा कि कर्जमाफी के कारण आज तक कोई भी किसान अमीर नहीं बना है लेकिन किसानों को निजी साहूकारों के चंगुल में फंसने से बचाने के लिए ऐसे कदम उठाना बेहद आवश्यक है। उन्होंने आगे कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार चाहती तो इस फैसले को टाल सकती थी क्योंकि राज्य में साल 2029 तक कोई चुनाव नहीं हैं लेकिन किसानों के वित्तीय संकट को देखते हुए सरकार ने चुनाव की परवाह किए बिना इस योजना की घोषणा की।

सीएम ने कहा कि राज्य सरकार पहले से ही किसानों को सालाना करीब ₹25000 करोड़ की बिजली सब्सिडी दे रही है। इसके साथ ही कृषि विभाग की विभिन्न सब्सिडी योजनाओं का कुल परिव्यय लगभग ₹95000 करोड़ रुपये है।

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शेख हसीना ने दिसंबर में बांग्लादेश लौटने का किया ऐलान, वहां क्या-क्या हो सकता है उनके साथ?

Sheikh Hasina: साल 2024 में छात्र आंदोलन के बाद अपना देश छोड़कर भारत में शरण लेने वाली बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने पहली बार अपने भविष्य को लेकर एक बड़ा ऐलान किया है। शेख हसीना ने कहा है कि वह और उनके सहयोगी संभवतः इसी साल दिसंबर में बांग्लादेश लौटेंगे। रॉयटर्स को दिए एक विशेष इंटरव्यू में उन्होंने यह सनसनीखेज जानकारी सार्वजिनिक की है। शेख हसीना ने इंटरव्यू में स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि बांग्लादेश लौटने पर उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है या उनकी हत्या भी की जा सकती है लेकिन इसके बावजूद उन्होंने संकेत दिया कि उन्हें अभी भी जाना होगा और वह खुद सरेंडर करेंगी।

आइए समझते हैं कि अगर शेख हसीना दिसंबर में बांग्लादेश लौटती हैं तो वहां उनके साथ कानूनी रूप से क्या-क्या हो सकता है और उनकी सुरक्षा को लेकर क्या बड़े खतरे हैं।

बांग्लादेश में एंट्री करते ही तुरंत होंगी गिरफ्तार

शेख हसीना जैसे ही बांग्लादेश की धरती पर कदम रखेंगी उनका सामना बेहद सख्त कानूनी प्रक्रिया से होगा। हवाई, जमीनी या समुद्री मार्ग किसी भी जरिए से बांग्लादेश में एंट्री की की कोशिश करते ही उन्हें वहां के इमिग्रेशन या सीमा अधिकारियों द्वारा तुरंत हिरासत में ले लिया जाएगा। हिरासत में लिए जाने के तुरंत बाद उन्हें संबंधित अदालतों के समक्ष पेश किया जाएगा। एक बार गिरफ्तार होने के बाद शेख हसीना को हिरासत में ही रहना होगा। वे जेल में रहकर ही अपने खिलाफ लंबित कई आपराधिक मामलों और अपीलों का सामना करेंगी।

कोर्ट सुना चुका है मौत की सजा, अपील की समयसीमा भी खत्म

बांग्लादेश लौटने पर पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का भविष्य बेहद अंधकारमय नजर आ रहा है क्योंकि उनके खिलाफ पहले ही देश की एक बड़ी अदालत का फैसला आ चुका है। बांग्लादेश की युद्ध अपराध अदालत ने उनकी गैर-मौजूदगी में पिछले साल नवंबर में उन्हें मौत की सजा सुनाई थी। उन पर छात्र आंदोलन के दौरान जानलेवा कार्रवाई का आदेश देने का आरोप है। बांग्लादेशी कानून के मुताबिक अगर किसी व्यक्ति को उसकी गैर-मौजूदगी में दोषी ठहराया जाता है तो उसे फैसले के 30 दिनों के भीतर आत्मसमर्पण करना होता है और अपील दायर करनी होती है। शेख हसीना के मामले में यह 30 दिनों की समयसीमा पहले ही खत्म हो चुकी है। इस सजा को अदालत में चुनौती देना कानूनी रूप से अब और अधिक जटिल हो गया है।

अगर यह सजा बरकरार रहती है और अदालत द्वारा उनकी दोषसिद्धि को बरकरार रखा जाता है तो कानूनी प्रक्रिया के तहत उन्हें या तो लंबी जेल काटनी होगी या फिर फांसी दी जा सकती है बशर्ते न्यायिक प्रक्रिया के जरिए सजा को पलटा या बदला न जाए। इस फैसले से अलग शेख हसीना के खिलाफ देश में जमीन से जुड़े अपराधों और अन्य आरोपों सहित कई अलग आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें उनके खिलाफ अरेस्ट वारंट भी एक्टिव हैं। हालांकि शेख हसीना ने इन सभी आरोपों से इनकार किया है।

जान का खतरा और राजनीतिक अस्थिरता

कानूनी पेचीदगियों से इतर शेख हसीना के बांग्लादेश लौटने पर उनकी जान को गंभीर खतरा हो सकता है। बांग्लादेश के भारी पोलराइज्ड राजनीतिक माहौल के बीच उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा को लेकर भारी चिंताएं हैं। उनपर हमले का भी खतरे का मंडरा रहा है। शेख हसीना ने रॉयटर्स से कहा है कि मेरे पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं पर जबरदस्त अत्याचार किया जा रहा है। अगर मौत आती है तो मैं चाहती हूं कि वह मेरी अपनी मातृभूमि पर आए, जहां मेरे माता-पिता दफन हैं और जहां उनका खून बहा था।

‘अदालत को तमाशा साबित करना चाहती हूं’

इन तमाम जानलेवा जोखिमों के बावजूद शेख हसीना ने कहा कि वह निर्वासन में रहने के बजाय बांग्लादेश में मामलों का सामना करना चाहती हैं। उन्होंने रॉयटर्स से कहा कि ‘मैं न्याय में विश्वास करती हूं और मुझे लगता है कि एक बार कार्यवाही शुरू होने के बाद लोगों को स्पष्ट हो जाएगा कि यह अदालत कितनी बकवास है। मैं यही साबित करना चाहती हूं।’ उन्होंने आगे कहा कि हो सकता है कि उन्होंने मुझे दोषी ठहरा दिया हो और मैं शायद चुनाव न लड़ पाऊं। लेकिन वे अवामी लीग को क्यों निलंबित कर रहे हैं? अगर हमने बुरा किया है तो जनता को फैसला करने दें।

गौरतलब है कि कई कार्यकालों में दो दशकों तक बांग्लादेश पर राज करने वाली शेख हसीना को साल 2024 में हुए भारी जन-आंदोलन के बाद देश छोड़कर भागना पड़ा था। वर्तमान में ढाका प्रशासन लगातार भारत से उनके प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है। इसपर भारत ने कहा है रि वह मौजूदा न्यायिक और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत इस अनुरोध की जांच कर रहा है। हालांकि अब हसीना ने कहा है कि वह प्रत्यर्पण का इंतजार करने के बजाय खुद स्वेच्छा से वापस जाकर सरेंडर करेंगी।

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Fact Check: भारत आ रहे LPG से लदे टैंकर पर ईरान ने दागी मिसाइल? जानें वायरल दावे का सच

जांच एजेंसी ने कहा कि कुछ प्रचार करने वाले अकाउंट्स जानबूझकर पुराने फोटो और वीडियो का इस्तेमाल कर लोगों में भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे भ्रामक दावे लोगों के बीच अनावश्यक घबराहट पैदा कर सकते हैं।

प्राइवेट जेट…लग्जरी स्टे, सेंट बार्ट्स से कोस्टा रिका की हनीमून ट्रिप पर कपल ने खर्च किए 1.5 करोड़

हनीमून अक्सर शादी के बाद कपल की पहली बड़ी ट्रिप होती है। कुछ लोगों के लिए, इसका मतलब है बीच पर शांति से समय बिताना। दूसरों के लिए, यह सपनों की जगहों पर घूमने का मौका होता है। लेकिन जब पैसे की कोई कमी न हो, तो हनीमून कितना शानदार हो सकता है? एक कपल के लिए, इसका मतलब था लगभग 1.5 करोड़ रुपये खर्च करके एक ऐसी यात्रा करना जिसमें प्राइवेट जेट, कैरेबियन द्वीप, रेनफॉरेस्ट रिट्रीट और तीन देशों में फैले लग्ज़री रिसॉर्ट शामिल थे।

इस शानदार ट्रिप की जानकारी हाल ही में ‘अ ट्रैवल डुएट’ (A Travel Duet) की सीनियर लीड – बिजनेस एक्सीलेंस, अनेरी शाह ने दी। यह कंपनी लग्जरी एक्सपीरियंस-बेस्ड ट्रैवल और हनीमून प्लानिंग का काम करती है। ‘वेडमीगुड’ (WedMeGood) से बात करते हुए, शाह ने उस यात्रा का पूरा प्लान बताया, जिसे उन्होंने अपनी टीम द्वारा अब तक प्लान किया गया सबसे महंगा हनीमून कहा।

कपल की यात्रा सेंट बार्ट्स से शुरू हुई, जो कैरेबियन का एक ऐसा द्वीप है, जो अपने लग्ज़री रिसॉर्ट, बीच, यॉट और सेलिब्रिटी मेहमानों के लिए जाना जाता है। हनीमून के लिए सिर्फ़ एक जगह चुनने के बजाय, कपल के लिए ऐसा प्लान बनाया गया था जिसमें कई तरह के अनुभव मिलें – जैसे कि द्वीप का जीवंत माहौल और साथ ही शांतिपूर्ण जगहें।

ट्रिप की जानकारी देते हुए शाह ने कहा, “सबसे महंगे हनीमून का खर्च लगभग $150,000 था, जो भारतीय रुपयों में करीब 1.5 करोड़ रुपये है। यह कपल कैरिबियन के बेहद शानदार और खास पार्टी आइलैंड, सेंट बार्ट्स गया था। उन्होंने अपनी यात्रा की शुरुआत मशहूर ‘ईडन रॉक’ में रुककर की, जहां अक्सर एक साल पहले ही बुकिंग करानी पड़ती है।”

भले ही सेंट बार्ट्स एक छोटा सा आइलैंड हो, लेकिन इसने कैरिबियन की सबसे खास जगहों में से एक के तौर पर अपनी पहचान बनाई है। यह आइलैंड अपने लग्ज़री बुटीक, बेहतरीन डाइनिंग रेस्टोरेंट, बीच क्लब और सुपर-यॉट से भरे मरीना के लिए जाना जाता है।

इस आइलैंड पर आने वाले लोगों के बारे में बताते हुए शाह ने कहा, “सोचिए, मैक्स वेरस्टैपेन (डच F1 ड्राइवर) की यॉट (बड़ी नाव) वहां खड़ी है। यहां ऐसे ही लोग आते हैं। सर्दियों में यह जगह कैरिबियन का ‘सेंट ट्रोपेज़’ बन जाती है।”

सेंट बार्ट्स में समय बिताने के बाद, यह कपल अपनी अगली डेस्टिनेशन, टर्क्स एंड कैकोस के लिए रवाना हुआ। यह बदलाव एक अलग अनुभव के लिए किया गया था। जहां सेंट बार्ट्स में ज़्यादा लोगों से मिलने-जुलने वाला और जोश भरा माहौल था, वहीं टर्क्स एंड कैकोस में शांति, बीच, आराम और प्राइवेसी वाला माहौल मिला।

शाह ने बताया, “इसके बाद, कपल प्राइवेट जेट से टर्क्स एंड कैकोस गया। यानी, आप पहले पार्टी वाले आइलैंड पर जाते हैं, फिर एक आरामदायक और शांत आइलैंड पर जाते हैं, जहां वे ‘अमान्यारा’ में रुके। उसके बाद, वे प्राइवेट जेट से कोस्टा रिका गए।”

यह कपल एक लग्ज़री रिज़ॉर्ट में रुका जो अपने प्राइवेट विला, प्राकृतिक माहौल और खास अनुभवों के लिए जाना जाता है। इस स्टे ने हनीमून की रफ़्तार को थोड़ा धीमा कर दिया, जिससे कपल को अपनी जर्नी के अगले हिस्से पर जाने से पहले आराम करने का मौका मिला।

हनीमून के अगले पड़ाव में कपल कैरिबियन से दूर कोस्टा रिका के जंगलों और पहाड़ों के बीच पहुंचा। अलग-अलग आइलैंड घूमने के बाद, कपल ने बिल्कुल अलग तरह के नज़ारों का अनुभव करने के लिए प्राइवेट जेट से यात्रा की। वे ‘हसिंडा अल्टाग्रेसिया’ में रुके, जो प्रकृति से घिरा एक लग्ज़री रिट्रीट है।

भव्यता और दिखावे पर केंद्रित पारंपरिक लक्जरी होटलों के विपरीत, हैसिएंडा अल्टाग्रासिया वह है जिसे आजकल कई यात्री “शांत विलासिता” कहते हैं। शाह के अनुसार, यह एक विशिष्ट लक्जरी ब्रांड है जो व्यापक दर्शकों के बीच अपेक्षाकृत अज्ञात है, लेकिन भीड़-भाड़ वाले स्थलों से दूर विशेष अनुभवों की तलाश करने वाले यात्रियों के बीच लोकप्रिय है।

द्वीपों और वर्षावनों की सैर के बाद, कपल का अंतिम स्टे मियामी था। मियामी में रुकने के साथ ही उनकी यात्रा पूरी हुई, जिसमें तीन अलग-अलग प्रकार की यात्राएं शामिल थीं – कैरेबियन समुद्र तट और लक्जरी रिसॉर्ट से लेकर वर्षावन व्यू और सिटी लाइफ तक।

CM योगी का तंज, सपा अध्यक्ष भी भगवा पहनकर कांवड़ यात्रा में शामिल होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं

Chief Minister Yogi Adityanath News: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में अब धार्मिक आस्था का सम्मान किया जा रहा है। अयोध्या से सरयू का जल लेकर भदेश्वरनाथ धाम जाने वाले कांवड़ यात्रियों पर हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा की जाती है, जबकि पहले कांवड़ यात्रा और अन्य धार्मिक आयोजनों पर रोक लगाई जाती थी। आज श्रद्धालुओं का उत्साह और आस्था देखकर लगता है कि समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष भी भगवा वस्त्र पहनकर कांवड़ यात्रा में शामिल होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। विपक्ष को हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़ाने, जय श्रीराम बोलने वालों पर कार्रवाई कराने, परशुरामपुर दंगे और धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचाने वाली घटनाओं के लिए जनता से माफी मांगनी चाहिए।

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को बस्ती के हर्रैया व कप्तानगंज विधानसभा क्षेत्र में 504 करोड़ रुपए से अधिक लागत की 77 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/ शिलान्यास किया। इसके अलावा विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाणपत्र/ स्वीकृतिपत्र और सहायता सामग्री का वितरित किया।

सपा के जिला अध्यक्ष का सीएम योगी ने सुनाया किस्सा

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले सरकारी धन कब्रिस्तानों की बाउंड्रीवाल बनाने और अवैध कब्जों पर खर्च होता था, जबकि आज वही धन धार्मिक स्थलों के पुनरुद्धार और विकास में लगाया जा रहा है। उस समय वक्फ बोर्ड के नाम पर गरीबों, दलितों और वंचितों की जमीनों पर कब्जे किए जाते थे और समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी तथा कांग्रेस के शासन में यह आम बात थी। एक पुरानी घटना का जिक्र करते हुए कहा कि जब वह गोरखपुर के सांसद थे, तब समाजवादी पार्टी के एक जिला अध्यक्ष स्वयं उनके पास शिकायत लेकर आए थे कि उनके घर के पास कब्रिस्तान के नाम पर जबरन कब्जा किया जा रहा है। उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं को भेजकर कब्जा हटवाया और उनकी जमीन बचाई। उस समय सपा सरकार को केवल कब्रिस्तान दिखाई देता था, आम जनता नहीं।

सपा के शासन में शिक्षा व्यवस्था नकल संस्कृति की शिकार थी

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले विकास योजनाएं कागजों तक सीमित रहती थीं, जबकि आज शिलान्यास और लोकार्पण की परियोजनाएं धरातल पर दिखाई देती हैं। उन्होंने हर्रैया में बन रहे मुख्यमंत्री कंपोजिट विद्यालय का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां प्री-प्राइमरी से 12वीं तक आधुनिक शिक्षा एक ही परिसर में उपलब्ध होगी। प्रत्येक विद्यालय पर 27 से 30 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जहां स्मार्ट क्लास, आधुनिक भवन, फर्नीचर और सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

 

समाजवादी पार्टी के शासन में शिक्षा व्यवस्था नकल संस्कृति की शिकार थी और युवाओं का भविष्य अंधकारमय हो गया था। किसानों को सुविधाएं नहीं मिलती थीं, गरीबों को योजनाओं का लाभ नहीं मिलता था और बिजली व्यवस्था इतनी खराब थी कि बस्ती में लोग बिजली के तारों पर कपड़े सुखाते थे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जनता बिजली संकट से जूझ रही थी जबकि सैफई में फिल्मी कलाकारों के कार्यक्रम आयोजित किए जाते थे।

राम मंदिर को लेकर विपक्ष कहता था कि खून की नदियां बहेंगी

मुख्यमंत्री ने कहा कि हनुमानगढ़ी की पवित्र सीढ़ियों पर नमाज पढ़वाने का काम इन्हीं लोगों ने किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि इन लोगों ने हर प्रमुख धर्मस्थल को विवादित बनाने का प्रयास किया और अयोध्या में भी लगातार विवाद खड़ा करने की राजनीति की। एक समय ऐसा था जब अयोध्या में कोई जय श्रीराम का उद्घोष कर देता था तो उसके खिलाफ लाठी और गोली चलती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि राम मंदिर निर्माण का विरोध करने वाले कहते थे कि यदि मंदिर बना तो खून की नदियां बहेंगी। लेकिन हमने कहा था कि एक मच्छर भी नहीं मरेगा और आज पूरा देश देख रहा है कि राम मंदिर का भव्य निर्माण हुआ, प्राण प्रतिष्ठा भी संपन्न हुई और कहीं कोई अशांति नहीं हुई। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को कोई नहीं रोक पाया और यह करोड़ों रामभक्तों की आस्था, विश्वास और संकल्प की जीत है।

सीएम ने दुर्योधन के शासन से की सपा सरकार की तुलना  

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि समाजवादी पार्टी के शासनकाल में प्रदेश में यह कहावत प्रचलित हो गई थी, देख सपाई, बिटिया घबराई। उस समय महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा खतरे में थी और कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी थी। जब सरकार ही बहन-बेटियों की सुरक्षा के लिए खतरा बन जाए तो उसकी तुलना दुर्योधन के शासन से ही की जा सकती है। पहले बस्ती सहित प्रदेश में दुर्गा पूजा, होली, रामनवमी जैसे पर्वों पर दंगे होते थे। परशुरामपुर दंगे का उल्लेख करते हुए कहा कि दलितों और गरीबों की बस्तियां जला दी गईं, लेकिन सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। उस समय वे गोरखपुर से आकर पीड़ितों के बीच उनका दर्द बांटने आए थे। उन्होंने दावा किया कि पिछले नौ वर्षों में प्रदेश में कोई बड़ा सांप्रदायिक दंगा नहीं हुआ और सभी त्योहार शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुए हैं। अब अपराधी कानून से डरते हैं।

करीब 1500 मंदिरों का पुनरुद्धार कराया

सीएम योगी ने कहा कि मखौड़ा धाम वही पावन भूमि है, जहां महाराजा दशरथ ने पुत्रेष्टि यज्ञ किया था और उसके फलस्वरूप भगवान विष्णु ने श्रीराम के रूप में अवतार लिया। मखौड़ा धाम, बाबा भदेश्वरनाथ धाम, तपसी धाम तथा महान साहित्यकार आचार्य रामचंद्र शुक्ल की जन्मस्थली इस क्षेत्र की गौरवशाली पहचान हैं। जनता जब अच्छे जनप्रतिनिधियों का चुनाव करती है, तभी विकास धरातल पर दिखाई देता है। मखौड़ा धाम, भदेश्वरनाथ धाम और तपसी धाम का तेजी से विकास कराया जा रहा है। कर्ण मंदिर विवाद का समाधान होने के बाद वहां भी सौंदर्यीकरण का कार्य शुरू किया जा रहा है। 

 

सीएम योगी ने कहा कि 84 कोसी परिक्रमा का मार्ग मखौड़ा धाम से शुरू होता है और इसे श्रद्धालुओं की सुविधा के साथ अयोध्या रिंग रोड के रूप में भी विकसित किया जा रहा है। योगी ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी की सरकारें 84 कोसी, 14 कोसी और पंचकोसी परिक्रमा तक रोकती थीं, जबकि भाजपा सरकार धार्मिक आस्था का सम्मान करते हुए तीर्थ स्थलों का विकास कर रही है। प्रदेश में लगभग 1500 मंदिरों का पुनरुद्धार कराया जा चुका है और सरकार बदलने के साथ परिणाम भी बदल गए हैं। भाजपा सरकार विरासत और विकास को साथ लेकर चल रही है।

 

विकसित भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प को पूरा करने के लिए विकसित उत्तर प्रदेश और विकसित बस्ती का निर्माण किया जा रहा है। बस्ती में मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, कृषि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, मखौड़ा धाम और भदेश्वरनाथ धाम सहित अनेक विकास परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि हर्रैया और बस्ती में पिछले नौ वर्षों में जितना विकास हुआ, उतना आजादी के बाद कभी नहीं हुआ।

 

इस अवसर पर प्रदेश सरकार में मंत्री सूर्य प्रताप शाही, विधायक अजय सिंह, क्षेत्रीय अध्यक्ष विनोद राय, जिला अध्यक्ष विवेकानंद मिश्र, विधायक दूध राम, विधान परिषद सदस्य सुभाष यदुवंश, जिला पंचायत अध्यक्ष संजय चौधरी, गो सेवा आयोग के उपाध्यक्ष महेश शुक्ल, पूर्व विधायक चंद्र प्रकाश शुक्ला, दयाराम चौधरी, रवि सोनकर आदि मौजूद रहे।

Lt Kashish Methwani: मॉडलिंग और ग्लैमर की दुनिया छोड़ कशिश मेथवानी ने चुना देश सेवा का रास्ता, सीडीएस में हासिल की थी एआईआर 2

Lt Kashish Methwani: कुछ लोग इतने प्रतिभावान होते हैं, वो जहां कदम रखते हैं सफलता उनके कदम चूमती है। ऐसा ही एक नाम है लेफ्टिनेंट कशिश मेथवानी का है। मुंबई में जन्मीं और पुणे में पली बढ़ीं कशिश के लिए मॉडलिंग की चकाचौंध भरी दुनिया शिखर पर बैठाने के लिए तैयार थी। लेकिन उनके मन में देश सेवा के सपने ने जन्म ले लिया था। एक मीडिया इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि पेजेंट्री हमेशा से उनका पैशन रहा, लेकिन यह उनका लॉन्ग-टर्म करियर कभी नहीं था। उन्होंने बताया कि नेशनल कैडेट कोर में शामिल होना वह टर्निंग पॉइंट था जिसने उनके सपनों को पूरी तरह से बदल दिया।

साल था 2023 का, और मंच मिस इंटरनेशनल इंडिया था। उस पैजेंट में उन्होंने विजेता का ताज अपने सिर पर सजाया। लेकिन कशिश के लिए, मॉडलिंग वो सफर नहीं था, जिस पर चलने के लिए उनके मन में बरसों पहले आस जगी थी। ये बस एक शौक था, जो अब पूरा हो चुका था। अब अगले सफर पर निकलने का समय था। उन्होंने 2024 में कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज (CDS) परीक्षा पास करने पर ध्यान देने का फैसला किया, और वहां भी वह विजेता बनीं। उन्हें ऑल इंडिया रैंक 2 मिली।

उन्होंने मॉडलिंग छोड़ने का फैसला किया और यूनिफॉर्म में सेना जॉइन कर ली। चेन्नई में ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (OTA) में ग्यारह महीने की मुश्किल मिलिट्री ट्रेनिंग लेने के बाद, उन्हें 6 सितंबर को हुई पासिंग आउट परेड में इंडियन आर्मी में लेफ्टिनेंट के तौर पर कमीशन मिला। मेथवानी का यह कदम कई लोगों के लिए एक शॉक जैसा था ।

फाइनेंशियल एक्सप्रेस के हवाले से उन्होंने कहा, “रिपब्लिक डे परेड में मार्च करना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बेस्ट कैडेट की ट्रॉफी लेना, इससे मुझे एक मकसद मिला। यह तय था कि आर्मी ही वह जगह है जहां मैं सच में होना चाहती हूं।” आर्मी एयर डिफेंस रेजिमेंट में उनकी पोस्टिंग बहुत अहम है क्योंकि यह रेजिमेंट भारत के ऑपरेशन सिंदूर में अहम काम कर रही थी।

लेफ्टिनेंट कशिश मेथवानी कौन हैं?

9 जनवरी 2001 को मुंबई के पास उल्हासनगर में जन्मी मेथवानी एक सिंधी परिवार से हैं। बाद में वह पुणे के वाकड में बस गईं, जहा उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और साथ ही कई एक्स्ट्रा करिकुलर इंटरेस्ट भी किए। उन्होंने सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी से बायोटेक्नोलॉजी में मास्टर डिग्री पूरी की और फिर इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस, बेंगलुरु से न्यूरोसाइंस थीसिस की। उन्हें हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पीएचडी करने का भी ऑफर मिला, जो उनके शानदार एकेडमिक रिकॉर्ड को और दिखाता है।

परिवार का रोल काफी अहम रहा

लेफ्टिनेंट कशिश के पिता, डॉ. गुरमुख दास, डायरेक्टरेट जनरल ऑफ क्वालिटी एश्योरेंस में सीनियर पोस्ट संभालने से पहले एक साइंटिस्ट के तौर पर काम करते थे। उनकी मां आर्मी पब्लिक स्कूल, घोरपडी में टीचर थीं। मेथवानी की भरतनाट्यम, डिबेट, एकेडमिक्स, बास्केटबॉल और नेशनल लेवल पिस्टल शूटिंग जैसी अलग-अलग चीजों में दिलचस्पी रही है। सेना में शामिल होने से पहले, मेथवानी ने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझते हुए डेडिकेशन क्रिटिकल कॉज नाम का एक एनजीओ भी शुरू किया था। इसका मकसद लोगों को अपना खून, प्लाज्मा और ऑर्गन डोनेट करने के लिए प्रोत्साहित करना था।

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कल का मौसम 11 जुलाई: IMD ने इन 12 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट दिया, बिहार-पूर्वी यूपी समेत पूर्वोत्तर में बरसेंगे बादल, यहां आंधी-तूफान

India Weather Update: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 11 जुलाई के लिए देश भर का विस्तृत मौसम बुलेटिन जारी कर दिया है। मौसम विभाग के इवनिंग वेदर बुलेटिन के मुताबिक इस समय मध्य उत्तर प्रदेश के उत्तरी हिस्सों पर कम दबाव का क्षेत्र लगातार बना हुआ है। इसके साथ ही इससे जुड़ा चक्रवाती परिसंचरण समुद्र तल से 9.5 किलोमीटर ऊपर तक फैल गया है। मानसून की अक्षीय रेखा इस समय गंगानगर, रोहतक, मध्य उत्तर प्रदेश के कम दबाव वाले केंद्र, गोरखपुर, मुजफ्फरपुर से होते हुए पूर्व-दक्षिण-पूर्व की ओर मिजोरम तक जा रही है। इन मजबूत मौसमी प्रणालियों, पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवाती हवाओं के सक्रिय होने के चलते 11 जुलाई को देश के 12 से अधिक राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश और कई हिस्सों में आंधी-तूफान का अलर्ट जारी किया गया है।

आइए जानते हैं मौसम विभाग के बुलेटिन के मुताबिक 11 जुलाई को देश के अलग-अलग राज्यों में कैसा रहेगा मौसम का मिजाज-

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इन 7 राज्यों में बहुत भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग के मुताबिक 11 जुलाई को देश के 7 राज्यों में मूसलाधार और बहुत भारी बारिश होने की आशंका है। इन राज्यों में शामिल हैं-

  • बिहार
  • पूर्वी उत्तर प्रदेश
  • असम और मेघालय
  • उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम
  • नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा

इन सभी राज्यों में अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने का पूर्वानुमान जारी किया गया है। इससे स्थानीय लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

दिल्ली-एनसीआर और उत्तराखंड समेत इन 9 राज्यों में भारी बारिश का अनुमान

IMD ने 11 जुलाई को देश के कई अन्य हिस्सों और उत्तर-पश्चिम भारत के राज्यों में भी भारी बारिश की चेतावनी दी है:

  • हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली
  • उत्तराखंड
  • हिमाचल प्रदेश
  • पश्चिमी उत्तर प्रदेश
  • पंजाब
  • जम्मू-कश्मीर, लद्दाख
  • अरुणाचल प्रदेश
  • गंगा तटीय पश्चिम बंगाल

आंधी-तूफान, बिजली गिरने और तेज हवाओं की चेतावनी

बारिश के साथ-साथ मौसम विभाग ने 11 जुलाई देश के विभिन्न हिस्सों में गरज-चमक, आंधी-तूफान और तेज हवाएं चलने का भी अलर्ट जारी किया है। IMD के मुताबिक 11 जुलाई को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, आंध्र प्रदेश, पूर्वी मध्य प्रदेश और तेलंगाना में अलग-अलग स्थानों पर 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने, गरज-चमक होने और बिजली गिरने की पूरी संभावना है। बिहार, कर्नाटक, ओडिशा, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराइकल, पश्चिम बंगाल और सिक्किम के साथ पश्चिमी मध्य प्रदेश में अलग-अलग इलाकों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज धूलभरी हवाएं चलने और बिजली कड़कने की चेतावनी दी गई है। अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय, छत्तीसगढ़, झारखंड तथा नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा के कुछ हिस्सों में आंधी-तूफान के साथ सिर्फ बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया गया है। 11 जुलाई को आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना के कुछ हिस्सों में सतह पर बहुत तेज गति से हवाएं चलने की संभावना मौसम विभाग ने जताई है।

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DDA Dwarka Commercial Hub Plan: दिल्ली का अगला ‘गुड़गांव’ बनेगा द्वारका! डीडीए बनाएगा मेगा इकोनॉमिक हब, जानिए क्या है पूरा प्लान

DDA Dwarka Plan: दिल्ली का द्वारका उप-शहर आने वाले समय में राजधानी का सबसे बड़ा बिजनेस और कमर्शियल हॉटस्पॉट बनने जा रहा है। दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने द्वारका को एक प्रमुख आर्थिक और वाणिज्यिक केंद्र के रूप में मजबूत करने के लिए उद्योग जगत के टॉप रिप्रेजेंटेटिव के साथ एक इंटरैक्टिव बैठक की अध्यक्षता की है। इस बैठक के दौरान उपराज्यपाल ने साफ किया कि दिल्ली के दीर्घकालिक आर्थिक विकास को बनाए रखने के लिए शहरी पुनर्विकास, बुनियादी ढांचे के अपग्रेडेशन और योजना सुधारों को लागू करना बेहद जरूरी है। उन्होंने द्वारका में एक स्वच्छ, प्रदूषण मुक्त और लेबर सेंट्रिक इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम की वकालत की है। ऐसा सिस्टम जो लोकल के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा कर सके।

एयरपोर्ट से नजदीकी और बेहतरीन कनेक्टिविटी बनेगी ताकत

एलजी ने कहा रि एशिया की सबसे बड़ी प्लांड सब सिटी में से एक होने की वजह से द्वारका इन्वेस्टमेंट के लिए एक टॉप डेस्टिनेशन के रूप में उभरने के लिए सही स्थिति में है। इसकी कनेक्टिविटी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से काफी आसान है। यहां मजबूत ट्रांसपोर्ट सिस्टम है। एलजी ने स्पष्ट किया कि द्वारका पूरी तरह विकसित हो चुकी है। इस लिहाज से ये कॉमर्स, हॉस्पिटैलिटी, हेल्थकेयर और टेक्नोलॉजी जैसे अलग अलग-अलग क्षेत्रों में निवेश पाने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

प्रदूषण मुक्त उद्योगों और रोजगार पर रहेगा मुख्य फोकस

उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने विशेष रूप से जोर दिया कि द्वारका का औद्योगिक विकास पूरी तरह से स्वच्छ, टिकाऊ और गैर-प्रदूषणकारी होना चाहिए। यहां ऐसे उद्योगों से पूरी तरह दूरी बनाई जाएगी जो उप-शहर की पर्यावरणीय गुणवत्ता से समझौता करते हों।

एफएआर (FAR) मानदंडों की होगी समीक्षा, सिंगल-विंडो सिस्टम पर जोर

इस उच्च स्तरीय बैठक में रीयल एस्टेट, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, हॉस्पिटैलिटी और हेल्थकेयर सेक्टर के प्रमुख प्रतिनिधियों के साथ-साथ डीडीए के उपाध्यक्ष, दिल्ली सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और आईटीपीओ (ITPO) के प्रबंध निदेशक ने हिस्सा लिया। उपराज्यपाल ने उद्योग जगत के रचनात्मक सुझावों की सराहना की और कहा कि उभरती शहरी आवश्यकताओं के अनुरूप फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) सहित योजना और विकास मानदंडों की समीक्षा और उन्हें तर्कसंगत बनाने की आवश्यकता है। उद्योग प्रतिनिधियों ने द्वारका और दिल्ली में निवेश के अनुकूल माहौल बनाने के लिए बुनियादी ढांचे में सुधार, अनुसंधान एवं नवाचार सुविधाएं, एक सुव्यवस्थित सिंगल-विंडो क्लीयरेंस मैकेनिज्म और सिंप्लिफाई अप्रूवल्स की व्यवस्था करने का सुझाव दिया।

इसके अलावा नॉलेज-बेस्ड इंडस्ट्रीज, आईटी, आईटीईएस और जीसीसी को प्रोत्साहित करने के साथ यशोभूमि और भारत मंडपम जैसे प्रमुख कन्वेंशन और एग्जीबिशन इंफ्रास्ट्रक्चर का लाभ उठाने पर जोर दिया गया।

TOD पॉलिसी और 5-स्टार होटल

निवेश और विकास को रफ्तार देने के लिए विभिन्न विभागों ने अपनी तैयारियों की जानकारी साझा की। डीडीए के उपाध्यक्ष ने बताया कि भविष्य के निवेश के लिए जमीन उपलब्ध करा दी गई है। हाल ही में उपराज्यपाल के मार्गदर्शन में तैयार की गई ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) पॉलिसी के तह टीओडी समिति पात्र परियोजनाओं के लिए सिंगल-पॉइंट और समयबद्ध मंजूरी की सुविधा प्रदान कर रही है। दिल्ली सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव (उद्योग) ने आश्वासन दिया कि द्वारका और दिल्ली में निवेश के लिए बड़ा ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सुधार चल रहा है।

इसके तहत एक नई औद्योगिक नीति तैयार की जा रही है और विभागों के बीच मंजूरी प्रक्रियाओं को इंटिग्रेट किया जा रहा है। दिल्ली सरकार के पर्यटन सचिव ने बताया कि दिल्ली की इवनिंग इकोनॉमी को बढ़ावा देने और पर्यटन को आकर्षित करने के लिए अर्बन डेस्टिनेशन डेवलप किए जा रहे हैं। आईटीपीओ (ITPO) के प्रबंध निदेशक ने कहा कि दिल्ली के हॉस्पिटैलिटी इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए फाइव-स्टार होटल इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर विचार किया जा रहा है।

विकसित दिल्ली की ओर बढ़ते कदम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए उपराज्यपाल ने अंत में दोहराया कि प्रशासन एक पारदर्शी, कुशल और निवेशक-अनुकूल इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह केंद्रित है। यह पहल सतत विकास को गति देगी, बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करेगी और दिल्ली के विकसित दिल्ली बनने के सफर को और मजबूत करेगी।

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ढाका में दिखा भारत का गलत नक्शा, तो भारतीय ऑफिसर पूजा कुमारी झा ने भरी बैठक में लगा दी क्लास

India Protest Wrong Map Dhaka Seminar: बांग्लादेश की राजधानी ढाका में एक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार आयोजित हुआ। इस सेमीनार में एक ऐसा वाकया हुआ जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। दरअसल भारत के नक्शे के साथ छेड़छाड़ का एक गंभीर मामला सामने आया है। सेमिनार में जम्मू-कश्मीर (J&K) को पाकिस्तान का हिस्सा दिखाए जाने पर वहां मौजूद भारतीय उच्चायोग की सचिव पूजा कुमारी झा ने तुरंत कड़े शब्दों में इस पर अपना विरोध दर्ज कराया।

भारतीय राजनयिक ने मंच से कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग है, और इस तरह के गलत नक्शों को बिल्कुल भी स्वीकार नहीं किया जा सकता।

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद ढाका में ‘बांग्लादेश इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल एंड स्ट्रेटेजिक स्टडीज’ (BIISS) द्वारा आयोजित एक विदेश मामलों के सेमिनार के दौरान शुरू हुआ। सेमिनार में बांग्लादेश के पूर्व राजदूत तारिक ए. करीम अपना मुख्य भाषण दे रहे थे। भाषण के दौरान स्क्रीन पर एक स्लाइड दिखाई गई, जिसमें भारत के नक्शे में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को पाकिस्तान के क्षेत्र में दिखाया गया था।

दर्शक दीर्घा में मौजूद भारतीय उच्चायोग की अधिकारी पूजा कुमारी झा ने जैसे ही इस गलत नक्शे को देखा, उन्होंने तुरंत हस्तक्षेप किया। पूजा झा ने कहा, ‘यहां दिखाया गया भारत का नक्शा पूरी तरह गलत है। जम्मू-कश्मीर भारत का एक अभिन्न और अटूट हिस्सा है, और मेरा मानना है कि यहां प्रस्तुत नक्शा सही नहीं है।’

पूर्व राजदूत ने दी सफाई

भारत की कड़ी आपत्ति के बाद, पूर्व राजदूत तारिक ए. करीम ने इस पर सफाई देने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि इस नक्शे का इस्तेमाल केवल ‘प्रस्तुतीकरण के उद्देश्य’ से किया गया था और इसका इरादा वास्तविक अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को प्रदर्शित करना या प्रोजेक्ट करना नहीं था।

नेपाल एयरलाइंस भी कर चुकी है ऐसी ही बड़ी गलती

अंतरराष्ट्रीय मंचों या विज्ञापनों में भारत के गलत नक्शे को दिखाए जाने का यह कोई पहला मामला नहीं है। कुछ महीने पहले नेपाल की राष्ट्रीय विमानन कंपनी, नेपाल एयरलाइंस कॉरपोरेशन (NAC) को भी ऐसी ही एक हरकत के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी विरोध का सामना करना पड़ा था।

नेपाल एयरलाइंस ने अपने सोशल मीडिया हैंडल्स पर एक प्रमोशनल रूट मैप और विज्ञापन शेयर किया था। इस ग्राफिक में एयरलाइंस ने भारत के केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को भारत के बजाय पाकिस्तान के क्षेत्र के रूप में रंग दिया था।

#BoycottNepalAirlines हुआ था ट्रेंड

यह इमेज सोशल मीडिया पर देखते ही देखते वायरल हो गई थी। भारतीय यूजर्स ने इसे नेपाल एयरलाइंस की ‘नक्शा आक्रामकता’ करार दिया था। इसके बाद सोशल मीडिया पर #BoycottNepalAirlines ट्रेंड करने लगा था और भारतीय विदेश मंत्रालय से इस पर कड़ा राजनयिक विरोध दर्ज कराने की मांग की गई थी। बाद में नेपाल एयरलाइंस को इस बड़ी चूक के लिए सार्वजनिक रूप से औपचारिक माफी मांगनी पड़ी थी।