Shakeel Noorani: रेप केस में डायरेक्टर शकील नूरानी गिरफ्तार, एक्ट्रेस का आरोप है कि उन्होंने नशीली चीज खिलाकर धमकाया

Shakeel Noorani: ‘जोरू का गुलाम’ और ‘बड़े दिल वाला’ जैसी फ़िल्मों के लिए मशहूर अनुभवी फ़िल्ममेकर शकील नूरानी गंभीर आरोपों का सामना कर रहे हैं। एक 33 वर्षीय अभिनेत्री द्वारा बलात्कार और यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराने के बाद मुंबई में इस निर्देशक को गिरफ़्तार कर लिया गया है।

73 वर्षीय नूरानी को मालवानी पुलिस ने 8 अगस्त की सुबह गिरफ़्तार किया। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 64(2)(M), 123, 351(2) और 88 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस के मुताबिक, एक्ट्रेस की नूरानी से पहली मुलाकात 2016 में लोखंडवाला में एक अवॉर्ड इवेंट में हुई थी। ‘मिड-डे’ की रिपोर्ट के अनुसार, एक्ट्रेस का कहना है कि फिल्ममेकर ने उनसे एक आने वाली फिल्म के बारे में बात की और काम के सिलसिले में उनसे संपर्क करने को कहा।

बाद में, वह स्क्रिप्ट पढ़ने के लिए मालवानी में उनके घर गईं। अपनी FIR में एक्ट्रेस ने दावा किया कि नूरानी ने उन्हें एक ड्रिंक दी, जिसके बाद वह बेहोश हो गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि जब उन्हें होश आया तो नूरानी ने उन्हें अपने फोन पर एक वीडियो दिखाया। उनकी शिकायत के मुताबिक, नूरानी ने धमकी दी कि अगर वह पुलिस के पास गईं या अपने परिवार को बताया, तो वह उस वीडियो को शेयर कर देंगे।

एक्ट्रेस ने आगे आरोप लगाया कि नूरानी ने उस वीडियो का इस्तेमाल करके उसे धमकाया और कई बार उसका यौन शोषण किया। उसने यह भी दावा किया कि कथित यौन संबंधों के बाद नूरानी ने उसे बार-बार गर्भनिरोधक गोलियां दीं। नूरानी के वकील, एडवोकेट विकास सिंह गोअर ने इन आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि फिल्ममेकर को झूठे मामले में फंसाया गया है।

मिड-डे की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा, “एक्ट्रेस के लगाए गए आरोपों को अभी अदालत में साबित किया जाना बाकी है और जांच चल रही है। जब तक दोषी साबित न हो जाए, नूरानी को निर्दोष माना जाएगा। गिरफ्तारी के बाद, नूरानी को बोरीवली हॉलिडे कोर्ट ले जाया गया। पुलिस ने आरोपों की जांच करने वीडियो को बरामद और उसकी जांच करने और यह पता लगाने के लिए कि क्या ऐसी घटनाएं अन्य जगहों पर भी हुई हैं, उनकी कस्टडी की मांग की।

अदालत ने नूरानी को 12 अगस्त तक पुलिस कस्टडी में भेज दिया। शकील नूरानी ने ‘बड़े दिलवाला’ (1999), ‘जोरू का गुलाम’ (2000) और ‘एसिड ऑफ लव’ (2005) जैसी फिल्मों का निर्देशन किया है। ‘जोरू का गुलाम’ में गोविंदा और ट्विंकल खन्ना ने काम किया था।

न्यूजीलैंड में अमेरिका से आधे खर्च में पढ़ाई:भारतीय छात्र 1 साल में 33% बढ़े, छात्रों को पढ़ाई के बाद 3 साल का वर्क वीजा भी

अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की सख्ती और वहां महंगी पढ़ाई से भारतीय छात्र नए देश तलाश रहे हैं। न्यूजीलैंड भारतीय छात्रों का पसंदीदा देश बना है। यहां अमेरिका के मुकाबले लगभग आधे खर्च में पढ़ाई और फिर बाद में 3 साल का वर्क वीजा मिलता है। इसके कारण यहां 1 साल में भारतीय छात्रों की संख्या में 33% बढ़ी है। ऑफर… 4 यूनिवर्सिटी में मेरिट से स्कॉलरशिप न्यूजीलैंड में 4 यूनिवर्सिटी- वाइकातो, कैंटरबरी, विक्टोरिया और वेलिंगटन में मेरिट बेस से भारतीय स्टूडेंट्स को फुल स्कॉलरशिप का ऑफर भी शुरू किया गया है। एनजेड स्कॉलरशिप: पीएचडी वाले भारतीय छात्रों के लिए 14 लाख रुपए तक की फीस माफी। साथ ही हेल्थ इंश्योरेंस कवर भी मुफ्त में उपलब्ध कराया जाता है। कॉमनवेल्थ स्कॉलरशिप: फीस, रहन-सहन, यात्रा कवर। साप्ताहिक भत्ता भी। एक्सीलेंस अवॉर्ड: साढ़े 5 लाख रुपए की एकमुश्त राशि छात्रों को दी जाती है। हाई अचीवर्स स्कॉलरशिप: मेधावी भारतीय छात्रों को फीस में 11 लाख छूट। राहत…यहां इमिग्रेशन फोर्स की धरपकड़ का डर नहीं वेलिंगटन में रहने वाले छात्र आकाश का कहना है कि न्यूजीलैंड में इमिग्रेशन फोर्स का खतरा नहीं होता है। आकाश का कहना है कि अमेरिका में रहने वाले उनके साथी छात्र बताते हैं कि कैसे इमिग्रेशन की धरपकड़ का डर रहता है। भारतीय छात्रों को वहां हमेशा अपने वीसा, पासपोर्ट और अन्य डॉक्यूमेंट्स साथ रखने पड़ते हैं। स्टूडेंट ट्रैकर आईसीईएफ के अनुसार 2025 में 12 हजार छात्रों की तुलना में इस साल जुलाई दाखिले में ये संख्या 16 हजार पहुंचेगी। अमेरिका में फीस, कॉस्ट ऑफ लिविंग व हेल्थ इंश्योरेंस का खर्च 85 लाख रुपए पड़ता है। इसकी तुलना में न्यूजीलैंड में ये खर्च लगभग 44 लाख रुपए ही बैठता है। गारंटी… पार्टटाइम और फुलटाइम जॉब आसान ऑकलैंड यूनिवर्सिटी के छात्र गौरव शर्मा कहते हैं कि न्यूजीलैंड में पढ़ाई के दौरान पार्ट टाइम जॉब भी आसानी से मिल जाती है। छात्र हर हफ्ते 25 घंटे काम कर सकता है। पढ़ाई पूरी होने के बाद न्यूजीलैंड में हेल्थकेयर, आईटी, कंस्ट्रक्शन और एग्री सेक्टर की ग्रीन लिस्ट में ढेरों जॉब ऑफर होते हैं।

FPI की खरीद जारी, अगस्त के पहले हफ्ते में भारतीय शेयरों में लगाए ₹12921 करोड़

भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की खरीदारी का सिलसिला अगस्त में भी जारी है। विदेशी निवेशकों ने अगस्त के पहले सप्ताह में भारतीय शेयरों में ₹12,921 करोड़ का निवेश किया। बेहतर होती मैक्रो इकोनॉमिक स्थिति, अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और रुपये की स्थिरता की वजह से FPI के लिए भारतीय बाजार आकर्षक बना हुआ है।

इससे पहले जुलाई में FPI ने भारतीय शेयरों में ₹20,200 करोड़ का निवेश किया था। इसके पहले लगातार 4 महीने सेलिंग की थी। सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज (इंडिया) लिमिटेड (CDSL) के आंकड़ों के मुताबिक, FPI ने जून में ₹49,340 करोड़, मई में ₹32,963 करोड़, अप्रैल में ₹60,847 करोड़ और मार्च में रिकॉर्ड ₹1.17 लाख करोड़ की बिकवाली की थी।

इससे पहले फरवरी में उन्होंने भारतीय शेयरों में ₹22,615 करोड़ का निवेश किया था। हालांकि, हालिया खरीदारी के बावजूद साल 2026 में विदेशी निवेशक अब तक भारतीय शेयर बाजार में ₹2.41 लाख करोड़ की बिक्री कर चुके हैं। साल 2025 में उन्होंने ₹1.66 लाख करोड़ की सेलिंग की थी।

एक्सपर्ट्स का क्या है कहना

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के महीनों में FPI का रुख बदलने के पीछे अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती की बढ़ती उम्मीद, कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी और रुपये की स्थिरता जैसे कारक प्रमुख हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के बेहतर ग्रोथ और महंगाई संबंधी अनुमान से भी निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, इनवेस्टमेंट प्लेटफॉर्म ट्रैक के को-फाउंडर और CEO वेदांत गुप्ते का कहना है कि भारतीय शेयरों में विदेशी हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम होने के कारण आगे विदेशी निवेश के लिए पर्याप्त गुंजाइश बनी हुई है। हाल की खरीदारी का एक बड़ा हिस्सा सेकेंडरी मार्केट के जरिए आया है। यह संकेत देता है कि विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी केवल IPO तक सीमित नहीं है, बल्कि लिस्टेड भारतीय कंपनियों में भी बढ़ रही है।

सेंसेक्स की टॉप 10 कंपनियों में से 4 का मार्केट कैप ₹1.43 लाख करोड़ बढ़ा, SBI को सबसे ज्यादा फायदा

जियोजीत इनवेस्टमेंट्स के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी.के. विजयकुमार का मानना है कि FPI की खरीदारी में एक महत्वपूर्ण रुझान यह है कि वे ऑटोमोबाइल, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और हेल्थकेयर जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दे रहे हैं। विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी भारतीय डेट या बॉन्ड बाजार में भी बनी हुई है। अगस्त में अब तक उन्होंने बॉन्ड बाजार में जनरल रूट के तहत ₹622 करोड़ का निवेश किया है।

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Video: नाई की दुकान से इंटरनेट तक… Techie ने 90s के गानों वाला ऐसा डिजिटल अड्डा बनाया कि Paytm फाउंडर भी तारीफ करने लगे

आज के दौर में जब हेयरकट के साथ प्रीमियम सैलून, हेयर स्पा और महंगे हेयर ट्रीटमेंट आम हो गए हैं, वहीं इंटरनेट पर एक छोटे से डिजिटल प्रयोग ने लोगों को पुराने दिनों की याद दिला दी है। टेक प्रोफेशनल यश भारद्वाज ने एक ऐसा अनोखा प्रोजेक्ट तैयार किया है, जिसने सोशल मीडिया यूजर्स के बीच पुरानी यादों का पिटारा खोल दिया। यह पहल उस दौर की झलक दिखाती है, जब मोहल्ले की छोटी-सी नाई की दुकान सिर्फ बाल कटवाने की जगह नहीं होती थी, बल्कि वहां बैठकर गाने सुनना और आसपास के लोगों से बातचीत करना भी अनुभव का हिस्सा हुआ करता था। आज की तेज रफ्तार जिंदगी के बीच 90s की ऐसी यादों को डिजिटल अंदाज में दोबारा सामने लाने की कोशिश लोगों को काफी पसंद आ रही है।

आखिर इस वेबसाइट में ऐसा क्या खास है, जिसने इंटरनेट यूजर्स को पुराने जमाने में पहुंचा दिया? यही वजह है कि यह अनोखा प्रयोग तेजी से चर्चा में आ गया है।

Yash Bhardwaj ने बनाया Salon.wtf

डेवलपर यश भारद्वाज ने इस प्रोजेक्ट को Salon.wtf नाम दिया है। वेबसाइट पर ऐसे गानों का संग्रह उपलब्ध है, जो पुराने भारतीय बार्बरशॉप की याद दिलाते हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने प्रोजेक्ट को साझा करते हुए लिखा कि यह वेबसाइट उस दौर की याद दिलाती है, जब लोग महंगे सैलून के बजाय ‘सैलून’ या मोहल्ले की नाई की दुकान पर जाते थे और करीब ₹20 में साधारण हेयरकट के साथ ऐसे गाने सुनते थे, जो माहौल को खास बना देते थे।

इंटरनेट यूजर्स बोले- ‘इसने तो पुराना जमाना याद दिला दिया’

वेबसाइट सामने आते ही सोशल मीडिया यूजर्स के बीच इसकी चर्चा शुरू हो गई। कई लोगों ने कहा कि यह प्रोजेक्ट उन्हें ऐसे समय में वापस ले गया, जब इंटरनेट और प्रीमियम सैलून रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा नहीं थे। एक यूजर ने इसे इंटरनेट पर इंसानी रचनात्मकता का शानदार उदाहरण बताया और कहा कि ऐसी चीजें इंटरनेट की असली खूबसूरती दिखाती हैं।

वेबसाइट में गाने इस्तेमाल करने पर उठा कॉपीराइट सवाल

प्रोजेक्ट को लेकर सिर्फ तारीफ ही नहीं हुई, बल्कि इसके कानूनी पहलू पर भी सवाल उठे। एक यूजर ने, जो खुद कुछ इसी तरह के प्रोजेक्ट पर काम कर रहा था, भारद्वाज से पूछा कि ऑनलाइन संगीत इस्तेमाल करते समय कॉपीराइट से जुड़ी किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। इस पर भारद्वाज ने बताया कि वेबसाइट अपने सर्वर पर गाने स्टोर नहीं करती।

‘गाने मेरे सर्वर पर नहीं हैं’

भारद्वाज के अनुसार, वेबसाइट YouTube की मौजूदा प्लेबैक व्यवस्था का इस्तेमाल करती है। उन्होंने बताया कि वीडियो और frame को वेबसाइट के इंटरफेस में छिपाकर केवल ऑडियो अनुभव रखा गया है। उनके मुताबिक, गाने YouTube के माध्यम से ही चल रहे हैं और उन्होंने मूल प्लेयर को अपने तरीके से पेश किया है। हालांकि, किसी वेबसाइट का इस तरह का संगीत उपयोग वास्तव में कानूनी रूप से अनुमत है या नहीं, यह संबंधित प्लेटफॉर्म की शर्तों और लागू कॉपीराइट कानूनों पर निर्भर कर सकता है।

Paytm के संस्थापक भी हुए पुराने दिनों के फैन

वेबसाइट की लोकप्रियता बढ़ने के साथ यह पोस्ट Paytm के संस्थापक विजय शेखर शर्मा तक भी पहुंच गई। उन्होंने X पर इस प्रोजेक्ट को साझा किया और इसकी तारीफ की। उन्होंने इस प्रोजेक्ट को भारत की पुरानी मोहल्ला बार्बरशॉप और उस दौर के संगीत से जुड़ी यादों को फिर से जीवंत करने वाली कोशिश के तौर पर सराहा।

एक वेबसाइट ने खोल दिया यादों का पिटारा

Salon.wtf की खासियत सिर्फ पुराने गाने नहीं हैं। इसकी लोकप्रियता इस बात को दिखाती है कि तकनीक के जरिए पुरानी यादों को किस तरह नए अंदाज में पेश किया जा सकता है। जहां आज लोग हेयरकट के लिए चमकदार सैलून और डिजिटल अपॉइंटमेंट पसंद करते हैं, वहीं यह छोटा-सा इंटरनेट प्रोजेक्ट लोगों को उस दौर में वापस ले जा रहा है, जब ₹20 का हेयरकट, रेडियो पर बजता गाना और मोहल्ले की नाई की दुकान ही एक अलग तरह का अनुभव हुआ करता था।

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Lift Karadey Shoot: एक पैसा नहीं हुआ था खर्च, जब अदनान सामी के ‘लिफ्ट करा दे’ गाने में गोविंदा ना रिहर्सल हो गए थे शामिल

Lift Karadey Shoot: अदनान सामी का गाना ‘लिफ्ट करा दे’ उनके सबसे मशहूर पॉप गानों में से एक बन गया है। लेकिन शुरुआत में उनके म्यूज़िक लेबल को इस पर ज़्यादा भरोसा नहीं था। सिंगर ने बताया है कि मैग्नासाउंड ने इस गाने को “सड़क छाप” कहा, सवाल उठाया कि कई सफल गानों के बाद वह ऐसा गाना क्यों बनाना चाहते हैं, और आखिर में इसके म्यूज़िक वीडियो के लिए पैसे देने से मना कर दिया।

अदनान सामी ने ज़ूम के साथ हाल ही में हुए एक इंटरव्यू में यह कहानी शेयर की और बताया कि लेबल के मन में उनके अगले गाने के लिए कुछ और ही सोच थी। ‘कभी तो नज़र मिलाओ’ और ‘बरसात’ के हिट होने के बाद, मैग्नासाउंड चाहता था कि वह एक और रोमांटिक गाना बनाएं। लेकिन सामी के मन में कुछ और ही प्लान था।

उन्होंने ‘लिफ्ट करा दे’ गाने का सुझाव दिया, जो एक मज़ेदार और जोशीला गाना था, लेकिन उस समय लेबल ने उनके लिए जो इमेज सोची थी, यह गाना उससे मेल नहीं खाता था। इस आइडिया को सपोर्ट करने के बजाय, टीम ने सवाल किया कि वह उन “क्लासी” गानों से क्यों दूर जाना चाहते थे, जो वह पहले ही गा चुके थे।

उन्होंने याद करते हुए कहा, “तब सबने मेरी तरफ देखा और कहा, ‘तुम क्या बात कर रहे हो?’ मैंने कहा, ‘लिफ्ट करा दे’ एक अच्छा, जोश भरा गाना है।” उन्होंने कहा, “तुम क्या कह रहे हो? यह तो बिल्कुल सड़कछाप गाना है। ‘कभी तो नज़र मिलाओ’ और ‘भीगी-भीगी रातों में’ (बरसात) जैसे शानदार गाने कहाँ, और यह गाना कहां?” मैंने कहा, “मेरी बात सुनो। मैं हर तरह के गाने बनाता और गाता हूं।”

यह असहमति लगभग छह महीने तक चलती रही। अदनान सामी ने बताया कि मैग्नासाउंड को यकीन था कि यह गाना नहीं चलेगा और वे इसके वीडियो पर पैसे खर्च नहीं करना चाहते थे। ऐसे में सामी और उनकी टीम के पास काम करने के लिए बहुत कम साधन थे। उन्होंने ‘लिफ्ट करा दे’ का वीडियो ‘गुरिल्ला फ़ॉर्मेट’ में शूट करने का फ़ैसला किया, यानी बिना किसी बड़े बजट या मंज़ूरी के सड़कों पर जाकर शूटिंग की, जबकि आम तौर पर म्यूज़िक वीडियो के लिए ये चीज़ें ज़रूरी होती हैं।

अदनान ने आगे कहा, “यह बहस लगभग छह महीने तक चली और वे बिल्कुल भी सहमत नहीं थे। उन्हें लगा कि यह गाना नहीं चलेगा और वे इसमें कोई पैसा नहीं लगाना चाहते थे। हमने सचमुच गुरिल्ला फ़ॉर्मेट में वीडियो शूट किया। गुरिल्ला फ़िल्ममेकिंग का मतलब है कि आप बिना किसी बजट और बिना किसी मंज़ूरी के सड़कों पर जाकर शूटिंग करते हैं। हमने इसी तरह वीडियो शूट किया।”

‘लिफ़्ट करा दे’ को बाद में 2000 के दशक की शुरुआत के लोकप्रिय भारतीय पॉप गानों में से एक के तौर पर याद किया गया। इस गाने को सामी ने कंपोज़ किया और गाया था, जबकि इसके बोल रियाज़-उर-रहमान सागर ने लिखे थे।

इस म्यूज़िक वीडियो में गोविंदा भी एक कैमियो रोल में नज़र आए थे। अदनान सामी ने बताया है कि एक्टर ने बिना किसी रिहर्सल के ही शूट में हिस्सा लिया था और अपने कपड़े भी नहीं बदले थे, जिससे वीडियो में उनकी मौजूदगी एक यादगार हिस्सा बन गई।

सेंसेक्स की टॉप 10 कंपनियों में से 4 का मार्केट कैप ₹1.43 लाख करोड़ बढ़ा, SBI को सबसे ज्यादा फायदा

सेंसेक्स की टॉप 10 मोस्ट वैल्यूएबल कंपनियों में से 4 के बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) में बीते सप्ताह कुल मिलाकर 1.43 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बढ़ोतरी हुई। इस दौरान भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को सबसे अधिक फायदा हुआ। बीते सप्ताह सेंसेक्स 404.53 अंक या 0.51 प्रतिशत बढ़ा, जबकि निफ्टी 187.05 अंक या 0.76 प्रतिशत के लाभ में रहा। सेंसेक्स की टॉप 10 कंपनियों में रिलायंस इंडस्ट्रीज, भारतीय स्टेट बैंक, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) और लार्सन एंड टुब्रो के मार्केट कैप में बढ़ोतरी हुई।

वहीं भारती एयरटेल, HDFC Bank, ICICI Bank, बजाज फाइनेंस, भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) और हिंदुस्तान यूनिलीवर के मार्केट कैप में कुल मिलाकर 1.23 लाख करोड़ रुपये की गिरावट आई। सप्ताह के दौरान भारतीय स्टेट बैंक का मार्केट कैप 63,922.03 करोड़ रुपये बढ़कर 10,11,721.84 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

इसी तरह रिलायंस इंडस्ट्रीज का मार्केट कैप 32,816.4 करोड़ रुपये बढ़कर 18,01,925.19 करोड़ रुपये, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज का 31,875.35 करोड़ रुपये बढ़कर 8,87,770.13 करोड़ रुपये और लार्सन एंड टुब्रो का मार्केट कैप 14,637.76 करोड़ रुपये बढ़कर 5,56,482.45 करोड़ रुपये हो गया।

बाकी 6 कंपनियों को कितना नुकसान

इस रुख के उलट LIC के मार्केट कैप में 40,543.23 करोड़ रुपये की गिरावट आई और यह घटकर 4,96,891.82 करोड़ रुपये पर आ गया। इसी तरह बजाज फाइनेंस का मार्केट कैप 37,168.96 करोड़ रुपये घटकर 6,73,648.55 करोड़ रुपये, HDFC Bank का 24,183.16 करोड़ रुपये घटकर 11,27,967.47 करोड़ रुपये, ICICI Bank का 9,507.67 करोड़ रुपये घटकर 10,20,370.63 करोड़ रुपये, भारती एयरटेल का 7,581.65 करोड़ रुपये घटकर 12,22,423.98 करोड़ रुपये और हिंदुस्तान यूनिलीवर का मार्केट कैप 4,793.16 करोड़ रुपये की गिरावट के साथ 4,88,808.97 करोड़ रुपये पर आ गया।

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टॉप 10 कंपनियों में रिलायंस इंडस्ट्रीज टॉप पर

बाजार पूंजीकरण के लिहाज से सेंसेक्स की टॉप 10 कंपनियों की लिस्ट में रिलायंस इंडस्ट्रीज टॉप पर कायम रही। इसके बाद क्रमश: भारती एयरटेल, HDFC Bank, ICICI Bank, भारतीय स्टेट बैंक, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, बजाज फाइनेंस, लार्सन एंड टुब्रो, भारतीय जीवन बीमा निगम और हिंदुस्तान यूनिलीवर का स्थान रहा।

नए सप्ताह में मेनबोर्ड सेगमेंट में 12 अगस्त को NSE और BSE पर Ardee Industries के शेयर अपनी शुरुआत कर सकते हैं। 14 अगस्त को NSE और BSE पर LEAP India और Technocraft Ventures लिस्ट होने वाली हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

नेपाल PM बालेन सोमवार को पहले भारतीय राजदूत से मिलेंगे:बाद में चीन के दूत से बात होगी, अगले दिन अमेरिकी अधिकारी से वन-टू-वन बैठक

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह सोमवार को सबसे पहले भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव से मुलाकात करेंगे। इसके बाद वे चीन के राजदूत झांग माओमिंग से बातचीत करेंगे। मंगलवार को शाह अमेरिकी दूतावास के प्रभारी अधिकारी स्कॉट अर्बोम से वन-टू-वन बैठक करेंगे। प्रधानमंत्री बनने के बाद यह पहली बार होगा, जब बालेन किसी विदेशी राजदूत से अकेले में मुलाकात करेंगे। इससे पहले वे विदेशी राजदूतों के साथ सामूहिक बैठकों को प्राथमिकता देते रहे हैं। विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव सोमवार को दिन के पहले हिस्से में प्रधानमंत्री कार्यालय पहुंचेंगे। इसके बाद चीनी राजदूत झांग माओमिंग से मुलाकात होगी। एक ही दिन भारत और चीन के राजदूतों से बैठक के बाद अगले दिन अमेरिकी अधिकारी से बातचीत होगी। इन बैठकों में नेपाल के इन तीनों देशों के साथ रिश्तों और मौजूदा मुद्दों पर बात होने की संभावना है। दो हफ्ते पहले होनी थी मुलाकात शाह की भारत, चीन और अमेरिका के प्रतिनिधियों से मुलाकात करीब दो हफ्ते पहले ही होने वाली थी। लेकिन सुनसरी और दूसरे इलाकों में हुई हिंसा के बाद कार्यक्रम टाल दिया गया था। 27 मार्च को प्रधानमंत्री बनने के बाद बालेन शाह ने विदेशी राजदूतों से अलग-अलग मुलाकात करने से दूरी बनाए रखी थी। उन्होंने अमेरिका के कुछ बड़े अधिकारियों से मिलने के अनुरोध भी स्वीकार नहीं किए थे। इसके बजाय शाह ने काठमांडू में तैनात कई देशों के राजदूतों के साथ सामूहिक बैठक की थी। ऐसी बैठकें 9 अप्रैल और 26 मई को हुई थीं। उस समय शाह की इस नीति को नेपाल के कई राजनयिकों और विदेश नीति के जानकारों ने अच्छा कदम बताया था। उनका कहना था कि इससे सभी देशों को बराबर महत्व देने का संदेश जाता है। 100 दिन बाद बदला शाह का तरीका सरकार के 100 दिन पूरे होने के बाद शाह के सलाहकारों ने उन्हें अलग-अलग लोगों से मिलने की सलाह दी। इसके बाद शाह ने मधेश के नेताओं और सांसदों के साथ बातचीत की। वे कारोबारियों, ठेकेदारों, उद्योगपतियों और निर्यातकों से भी मिल रहे हैं। अब विदेशी राजदूतों के साथ अलग-अलग मुलाकात भी इसी बदलाव का हिस्सा है।

नेपाल PM बालेन सोमवार को पहले भारतीय राजदूत से मिलेंगे:बाद में चीन के दूत से बात होगी, अगले दिन अमेरिकी अधिकारी से वन-टू-वन बैठक

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह सोमवार को सबसे पहले भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव से मुलाकात करेंगे। इसके बाद वे चीन के राजदूत झांग माओमिंग से बातचीत करेंगे। मंगलवार को शाह अमेरिकी दूतावास के प्रभारी अधिकारी स्कॉट अर्बोम से वन-टू-वन बैठक करेंगे। काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री बनने के बाद यह पहली बार होगा, जब बालेन किसी विदेशी राजदूत से अकेले में मुलाकात करेंगे। इससे पहले वे विदेशी राजदूतों के साथ सामूहिक बैठकों को प्राथमिकता देते रहे हैं।। एक ही दिन भारत और चीन के राजदूतों से बैठक के बाद अगले दिन अमेरिकी अधिकारी से बातचीत होगी। इन बैठकों में नेपाल के इन तीनों देशों के साथ रिश्तों और मौजूदा मुद्दों पर बात होने की संभावना है। दो हफ्ते पहले होनी थी मुलाकात, हिंसा के बाद टली शाह की इन राजदूतों से मुलाकात करीब दो हफ्ते पहले ही तय थी। लेकिन सुनसरी और दूसरे जिलों में हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद कार्यक्रम टाल दिया गया था। अब सरकार ने फिर से इन मुलाकातों का कार्यक्रम बनाया है। प्रधानमंत्री के एक सलाहकार के मुताबिक, दोनों देशों के दूतावासों को मुलाकात का समय बता दिया गया है। पहले बालेन ने भारतीय विदेश सचिव से मिलने से किया था इनकार बालेन शाह के प्रधानमंत्री बनने के शुरुआती दौर में नेपाल और भारत के रिश्तों में कुछ दूरी नजर आई थी। काठमांडू पोस्ट के मुताबिक उस समय भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री की नेपाल यात्रा भी टल गई थी। मिस्री को 11-12 मई को काठमांडू जाना था। नेपाल के अधिकारियों के मुताबिक, यात्रा टलने की एक वजह बालेन का मिस्री से वन-टू-वन मुलाकात नहीं करना भी थी। बालेन ने उस समय विदेश मंत्री के स्तर से नीचे के विदेशी अधिकारियों से अकेले में मुलाकात नहीं करने की नीति अपनाई थी। बालेन अकेले में मुलाकात से बचते रहे प्रधानमंत्री बनने के बाद शाह ने विदेशी राजदूतों और बड़े विदेशी अधिकारियों से अलग-अलग मुलाकात नहीं करने का तरीका अपनाया था। इस दौरान उन्होंने अमेरिकी दूतावास की कई मुलाकात की रिक्वेस्ट भी नहीं मानीं। इनमें अमेरिका के दक्षिण और मध्य एशिया मामलों के सहायक विदेश मंत्री समीर पॉल कपूर और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के विशेष दूत सर्जियो गोर से मुलाकात शामिल थी। अमेरिकी विदेश विभाग की पब्लिक डिप्लोमेसी की अंडर सेक्रेटरी सारा बी. रोजर्स भी नेपाल दौरे पर आई थीं, लेकिन शाह से उनकी मुलाकात नहीं हो सकी। इसके बजाय शाह ने काठमांडू में तैनात कई देशों के राजदूतों के साथ साथ बैठकर बैठकें की थीं। ऐसी बैठकें 9 अप्रैल और 26 मई को हुई थीं। अकेले विदेशी राजदूतों से क्यों नहीं मिलते थे बालेन? बालेन की राजदूतों के साथ सामूहिक बैठक करने की नीति को नेपाल के कई राजनयिकों और विदेश नीति के जानकारों ने अच्छा कदम बताया था। उनका मानना था कि सभी राजदूतों से एक साथ मिलने पर किसी एक देश को ज्यादा तवज्जो देने का संदेश नहीं जाता। इससे नेपाल सभी देशों के साथ बराबरी का व्यवहार करता दिखता था और बातचीत भी ज्यादा साफ तरीके से होती थी। हालांकि, बाद में बालेन ने नेपाल के घरेलू मामलों से जुड़े लोगों से अलग-अलग मुलाकातें शुरू कर दीं। ऐसे में विदेशी राजदूतों के साथ भी पहले वाली सामूहिक बैठक की नीति को लंबे समय तक जारी रखना मुश्किल हो गया। 100 दिन बाद बालेन ने बदला अपना तरीका शाह की सरकार के 100 दिन पूरे होने के बाद उनके राजनीतिक सलाहकार आसिम शाह और दूसरे सलाहकारों ने उन्हें देश के अंदर भी अलग-अलग लोगों से मिलने की सलाह दी। इनमें कारोबारी, मीडिया से जुड़े लोग, ठेकेदार और दूसरे बड़े लोग शामिल थे। इसके साथ ही काठमांडू में तैनात विदेशी राजदूतों से भी अलग-अलग मुलाकात शुरू करने की तैयारी हुई। हाल के हफ्तों में शाह का तरीका बदला हुआ नजर आया है। वे अब अलग-अलग लोगों से मिलकर बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने मधेश के राजनीतिक दलों और सांसदों के साथ बैठकें की हैं। इसके अलावा कारोबारियों, ठेकेदारों, उद्योगपतियों और निर्यातकों से भी अलग-अलग मुलाकात की है।

Kisan Credit Card: किसानों को सस्ता लोन पाना हुआ आसान! जानें KCC के लिए कौन कर सकता है अप्लाई और क्या लगेंगे कागजात

Kisan Credit Card Scheme: भारतीय किसानों को खेती और उससे जुड़ी जरूरतों के लिए समय पर और किफायती ब्याज दर पर कर्ज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से केंद्र सरकार की किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना बेहद कारगर साबित हो रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को महाजनों या साहूकारों के भारी-भरकम ब्याज के जाल से बचाना और उन्हें बैंकिंग सिस्टम से जोड़ना है।

शुरुआत में केसीसी का फोकस मुख्य रूप से फसल उगाने के मौसमी खर्चों तक सीमित था, लेकिन अब इसका विस्तार पशुपालन, डेयरी फॉर्मिंग, मत्स्य पालन, पोल्ट्री और मधुमक्खी पालन जैसी संबद्ध गतिविधियों तक कर दिया गया है। आइए जानते हैं कि इस कार्ड को पाने के लिए कौन-कौन पात्र है, क्या-क्या दस्तावेज चाहिए और इसका आवेदन कैसे होता है।

कौन-कौन ले सकता है किसान क्रेडिट कार्ड?

केसीसी योजना का फायदा उठाने के लिए पात्रता के नियम काफी आसान बनाए गए हैं:

खुद की जमीन वाले किसान: व्यक्तिगत या संयुक्त रूप से खेती करने वाले जमीन के मालिक किसान।

बटाईदार व किरायेदार किसान: पट्टेदार, बटाईदार और किराये पर जमीन लेकर खेती करने वाले किसान।

किसान समूह: स्वयं सहायता समूह (SHGs) या संयुक्त देयता समूह (JLGs)।

संबद्ध क्षेत्रों के किसान: पशुपालन, डेयरी, मुर्गी पालन, झींगा और मत्स्य पालन से जुड़े किसान।

केसीसी के मुख्य लाभ और ब्याज दर

सस्ता ब्याज दर: केसीसी पर सामान्य ब्याज दर 7% होती है। लेकिन समय पर लोन चुकाने वाले किसानों को सरकार 3% की अतिरिक्त छूट देती है, जिससे प्रभावी ब्याज दर केवल 4% प्रति वर्ष रह जाती है।

बिना गारंटी लोन: बिना किसी जमीन या संपत्ति को गिरवी रखे ₹2 लाख तक का लोन आसानी से मिल जाता है।

रिवाल्विंग क्रेडिट लिमिट: केसीसी एक क्रेडिट कार्ड की तरह काम करता है, जिसमें एक तय क्रेडिट लिमिट मिलती है और किसान जरूरत के हिसाब से पैसे निकाल और जमा कर सकते हैं।

इन दस्तावेजों की पड़ेगी जरूरत

केसीसी के लिए आवेदन करते समय आपको निम्नलिखित मूलभूत दस्तावेजों की आवश्यकता होगी:

  • पहचान पत्र: आधार कार्ड, वोटर आईडी, पैन कार्ड, या ड्राइविंग लाइसेंस।
  • पते का प्रमाण: आधार कार्ड, राशन कार्ड या बिजली का बिल।
  • जमीन के दस्तावेज: जमीन की खतौनी/खसरा/7/12 एक्सट्रैक्ट या पट्टेदारी/किरायेदारी का प्रमाण पत्र।
  • फसल की जानकारी: खेत में बोई जाने वाली फसल और रकबे की स्व-घोषणा।
  • पासपोर्ट साइज फोटो: आवेदक के 2 पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ।

किसान क्रेडिट कार्ड के लिए कैसे करें अप्लाई?

किसान क्रेडिट कार्ड आप वाणिज्यिक बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों या सहकारी बैंकों के जरिए बनवा सकते हैं:

1. बैंक शाखा के जरिए

अपने नजदीकी बैंक शाखा या कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाएं।

वहां से KCC का आवेदन फॉर्म प्राप्त कर भरें।

फॉर्म के साथ सभी जरूरी आईडी प्रूफ, एड्रेस प्रूफ और जमीन के कागजात संलग्न कर जमा करें।

बैंक द्वारा आपके दस्तावेजों के सत्यापन और लोन अप्रूवल के बाद आपको केसीसी जारी कर दिया जाएगा।

2. ऑनलाइन प्रक्रिया

स्टेप 1- जिस बैंक में आपका खाता है, उसकी आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल बैंकिंग ऐप पर जाएं।

स्टेप 2- ‘Kisan Credit Card’ सेक्शन में जाकर एप्लीकेशन फॉर्म भरें।

स्टेप 3- मांगे गए दस्तावेजों की डिजिटल कॉपी अपलोड करें और फॉर्म सबमिट करें।

स्टेप 4- अगर आप PM-Kisan योजना के लाभार्थी हैं, तो आपकी ई-केवाईसी और लैंड डिटेल्स पहले से वेरीफाइड होने के कारण एक पन्ने के आसान फॉर्म के जरिए तुरंत मंजूरी मिल जाती है।

Jharkhand Students Protest: झारखंड में अनशन पर बैठे छात्र नेता की बिगड़ी तबीयत! कविता, कटाक्ष और पोस्टर बने हथियार, सरकार आज फिर करेगी बातचीत

Jharkhand Students Protest: झारखंड सरकार भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ 16वें दिन भी जारी छात्रों के आंदोलन के बीच रविवार (9 अगस्त) को प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों के साथ फिर बातचीत करेगी। सरकार और छात्र संगठनों के बीच शुक्रवार रात और शनिवार को दिनभर हुई बैठकों के बावजूद गतिरोध दूर नहीं हो सका। इसके बाद रविवार को एक और दौर की बातचीत करने का फैसला लिया गया। इस बीच, रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में करीब एक सप्ताह से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की हालत शनिवार देर रात करीब तीन बजे अचानक बिगड़ गई। डॉक्टरों ने उसका ब्लड शुगर लेवल 53 दर्ज किया।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार ने आंदोलन का नेतृत्व कर रहे जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच के साथ शुक्रवार रात बातचीत की थी। इसके बाद शनिवार को सरकार ने विभिन्न छात्र संगठनों के साथ चार दौर की बातचीत की जिनमें कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई, झारखंड छात्र मोर्चा और आदिवासी छात्र संघ शामिल हैं। ये बैठकें बेनतीजा रहने के बाद सरकार ने रविवार दोपहर करीब 12 बजे छात्र प्रतिनिधियों के साथ छठे दौर की बातचीत करने का फैसला किया।

राजनीतिक चालबाजी का आरोप

इस फैसले के तुरंत बाद जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच ने सरकार पर राजनीतिक चालबाजी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस कदम का मकसद आंदोलन कर रहे छात्रों के बीच फूट डालना और उनकी मुख्य मांगों से लोगों का ध्यान भटकाना है। जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच के नेता रविंद्र पासवान ने आरोप लगाया कि सरकार ऐसे संगठनों के साथ बातचीत कर आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश कर रही है, जिनकी मौजूदा आंदोलन में कोई भूमिका नहीं रही।

पासवान ने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में पत्रकारों से कहा, “यह सरकार की राजनीतिक चाल है। वह छात्रों में विभाजन पैदा करने और लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। लेकिन उसे पता होना चाहिए कि सभी छात्र एकजुट हैं।” पासवान ने दावा किया कि जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच ने शुक्रवार रात पांच सदस्यीय सरकारी समिति के सामने अपनी सभी मांगें रख दी थीं।

हालांकि, शनिवार को मंत्रियों दीपिका पांडेय सिंह, सुदिव्य कुमार, चामरा लिंडा और संजय प्रसाद यादव वाली समिति ने एनएसयूआई, झारखंड छात्र मोर्चा और आदिवासी छात्र संघ सहित विभिन्न छात्र संगठनों के साथ अलग-अलग बैठकें कीं। इस दौरानलउनसे उनकी मांगों का डिटेल्स मांगा।

सरकार बातचीत जारी रखेगी

सरकार ने हालांकि कहा कि बातचीत सकारात्मक माहौल में हुई। वह प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों की चिंताओं पर विचार कर रही है। रविवार को फिर बातचीत करने का फैसला शनिवार शाम सरकारी समिति और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के बीच चार घंटे की बैठक के बाद लिया गया। ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि समिति ने मुख्यमंत्री को छात्र प्रतिनिधिमंडलों की ओर से उठाई गई मांगों और चिंताओं से अवगत कराया। मंत्री संजय प्रसाद यादव ने कहा कि झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग में व्यापक सुधार की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों के साथ सरकार बातचीत जारी रखेगी।

छात्र मोर्चा ने रखी 5 मांगें

झारखंड छात्र मोर्चा ने पांच मांगें रखी हैं, जिनमें 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा रद्द करना शामिल है। वहीं एनएसयूआई ने छह मांगें रखीं, जिनमें संदेह के घेरे में आने वाली सभी जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं की 90 दिनों के भीतर सीआईडी जांच और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की तर्ज पर झारखंड परीक्षा एजेंसी की स्थापना शामिल है। आदिवासी छात्र संघ के नेता कार्तिक उरांव ने भर्ती परीक्षाओं में जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं को अनिवार्य योग्यता वाले विषयों के रूप में शामिल करने तथा जिन परीक्षाओं में अनियमितताएं पाई गई हैं, उन्हें रद्द करने की मांग की।

उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में सुधार के संबंध में अभ्यर्थियों से सुझाव लेने के लिए सरकार ने एक ईमेल आईडी जारी की है। बातचीत जारी रहने के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने कहा है कि सभी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने सरकार के रविवार तक मांगें पूरी नहीं करने पर 10 अगस्त को विधानसभा मार्च निकालने की भी घोषणा की है।

आइसा ने अलग मंच बनाया

इस बीच, अखिल भारतीय छात्र संघ (आइसा) ने शनिवार को स्टेडियम में अपना अलग मंच बनाया। हालांकि, उसके नेताओं ने कहा कि इसे अलग आंदोलन नहीं माना जाना चाहिए। आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा, जिन पर शुक्रवार को बिरसा चौक के पास विधानसभा मार्च के दौरान स्याही फेंकी गई थी। इसके बाद थोड़ी देर के लिए प्रदर्शन में शामिल हुईं। उन्होंने 14वीं जेपीएससी और जेएसएससी-सीजीएल परीक्षाओं को रद्द करने की मांग को लेकर नारे लगाए।

संगठन की रांची इकाई के प्रमुख विजय कुमार ने कहा कि उसके सदस्य 10 अगस्त के मार्च में शामिल होंगे। लेकिन अखिल भारतीय छात्र संघ के बैनर के बिना। आंदोलन के दौरान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सदस्यों ने भी प्रदर्शन किया है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास के पास अवरोधक तोड़ने की कोशिश के दौरान उनकी पुलिस से झड़प हुई थी।

विधानसभा मार्च निकालने की घोषणा

उप पुलिस अधीक्षक (मुख्यालय) अजय आर्यन ने बताया कि मार्च के दौरान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के करीब आठ से 10 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था, जिन्हें बाद में रिहा कर दिया गया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने 11 अगस्त को अलग विधानसभा मार्च निकालने की घोषणा की है। जेपीएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के संबंध में अब तक 19 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पूर्व परीक्षा पैनल अध्यक्ष एल. खियांग्ते से 28 जुलाई के बाद से चार बार पूछताछ की जा चुकी है।

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कविता, कटाक्ष और पोस्टर बने हथियार

सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे झारखंड के छात्र अपने गुस्से को हिंसा या अपशब्दों के बजाय रचनात्मक अंदाज में आवाज दे रहे हैं। प्रदर्शन स्थल पर कहीं सरकारी नौकरियों का फर्जी ‘रेट कार्ड’ लगा है। कहीं व्यंग्यात्मक पोस्टर हैं तो कहीं ‘रश्मिरथी’ की पंक्तियां गूंज रही हैं। रांची के बीचोंबीच स्थित जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में 500 रुपये के नोट जैसी दिखने वाली गड्डियों से लदा एक तराजू सरकारी नौकरियों के नकली रेट कार्ड के पास रखा है। वहीं कुछ दूरी पर छात्र रामधारी सिंह दिनकर की प्रसिद्ध कृति रश्मिरथी की पंक्तियां सुनाते नजर आते हैं।

प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच इस कविता का ‘कृष्ण की चेतावनी’ खंड सबसे अधिक लोकप्रिय है। इसके जरिए महाभारत के प्रसंग को मौजूदा भर्ती आंदोलन से जोड़ा जा रहा है। प्रदर्शनकारी छात्र खासकर ये पंक्तियां सुनाते नजर आते हैं, “वर्षों तक वन में घूम-घूम, बाधा-विघ्नों को चूम-चूम, सह धूप-घाम, पानी, पत्थर, पांडव आए कुछ और निखर।” छात्र इन पंक्तियों के जरिए पांडवों के वर्षों के संघर्ष की तुलना सरकारी भर्तियों और नियुक्तियों को लेकर अनिश्चितता के बीच प्रतियोगी परीक्षाओं की अपनी तैयारी से कर रहे हैं।

‘नौकरी बिक्री केंद्र’

कुछ छात्रों ने व्यंग्यात्मक ‘नौकरी बिक्री केंद्र’ बनाया है, जिसमें सहायक शिक्षक के पद की कीमत 15 लाख रुपये, पुलिस उपाधीक्षक की 1.2 करोड़ रुपये, प्रखंड विकास अधिकारी की 90 लाख रुपये और अंचल अधिकारी की एक करोड़ रुपये बताई गई है। कुछ पोस्टर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की तस्वीर के साथ काल्पनिक ‘मुख्यमंत्री सीट बेचो योजना’ का जिक्र किया गया है। यहां व्यंग्यात्मक अंदाज में लिखा है, “पेमेंट करो आराम से, नौकरी पाओ सम्मान से।”

प्रदर्शनकारी छात्र विवेक ने सफेद टी-शर्ट पर स्याही से लिखा है, “व्यवस्था ने हमें निराश किया है।” एक अन्य स्थान पर एक छात्रा झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के दिवंगत संस्थापक शिबू सोरेन के बड़े पोस्टर के सामने सिर झुकाकर उनके बेटे एवं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से छात्रों के साथ ‘अन्याय करने वालों के खिलाफ कार्रवाई’ की अपील करती नजर आई।