Shravan Essay: आस्था, प्रकृति और पवित्रता का उत्सव श्रावण मास, पढ़ें रोचक निबंध

Images and photographs related to the sacred festival of the Shravan month, featuring Lord Shiva, devotees performing worship, and the Kanwar Yatra, a procession that unites religion, nature, and human life

Shravan Festival Essay: श्रावण मास के दौरान देशभर के शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। श्रद्धालु प्रातःकाल स्नान करके शिवलिंग पर जल, गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, भांग और पुष्प अर्पित करते हैं। 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप और रुद्राभिषेक का विशेष महत्व माना जाता है। इस महीने के प्रत्येक सोमवार को पड़ने वाले सावन सोमवार व्रत को अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक भगवान शिव की उपासना करने से मनोकामनाओं की पूर्ति और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

यहां श्रावण मास पर एक रोचक, सरल और ज्ञानवर्धक हिन्दी निबंध प्रस्तुत है।
 

प्रस्तावना

हिंदू कैलेंडर में 'श्रावण मास' यानी सावन को सभी महीनों में सबसे पवित्र और आनंददायक माना गया है। यह केवल एक महीना नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक आत्मा का उत्सव है। ग्रीष्म ऋतु की तपती गर्मी के बाद जब सावन की फुहारें धरती पर गिरती हैं, तो न केवल प्रकृति का श्रृंगार होता है, बल्कि इंसानी मन भी भक्ति और उत्साह से सराबोर हो उठता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो सावन में वर्षा ऋतु के कारण हमारी पाचन शक्ति यानी जठराग्नि मंद हो जाती है। इसलिए आयुर्वेद और शास्त्रों में इस महीने के दौरान हल्का, सुपाच्य और सात्विक भोजन करने की सलाह दी गई है।

 

सावन का धार्मिक महत्व और शिव भक्ति

श्रावण मास पूरी तरह से देवाधिदेव महादेव भगवान शिव को समर्पित है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी महीने में समुद्र मंथन हुआ था। मंथन से निकले हलाहल विष को ब्रह्मांड की रक्षा के लिए भगवान शिव ने अपने कंठ में समाहित कर लिया था, जिससे उनका नाम 'नीलकंठ' पड़ा। विष की तीव्र जलन को शांत करने के लिए सभी देवताओं ने शिव जी पर शीतल जल वर्षण किया था। यही कारण है कि सावन में शिव जी का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने की अनूठी परंपरा है।

 

प्रकृति का अनुपम श्रृंगार

सावन का महीना अध्यात्म के साथ-साथ पर्यावरण के उत्सव का भी समय है। रिमझिम बारिश के कारण सूखी धरती पर मखमली हरी घास उग आती है, पेड़ों पर नए पत्ते आ जाते हैं और नदियां-झरने कल-कल कर बहने लगते हैं।

 

कांवड़ यात्रा

सावन के दौरान देश भर में भक्ति का एक अद्भुत रंग देखने को मिलता है। लाखों 'कांवड़िए' केसरिया वस्त्र धारण कर, नंगे पैर पवित्र नदियों से जल भरकर लाते हैं और मीलों पैदल चलकर अपने स्थानीय शिवलिंगों का अभिषेक करते हैं। 'बम-बम भोले' के जयकारों से पूरा माहौल शिवमय हो जाता है।

 

सावन के सोमवार

इस महीने में आने वाले सोमवार के व्रत का विशेष महत्व है। कुमारी कन्याएं अच्छे वर के लिए और विवाहित महिलाएं अखंड सौभाग्य के लिए यह व्रत रखती हैं। इस महीने में हरे रंग का विशेष महत्व है। प्रकृति की इस हरियाली से तालमेल बिठाते हुए महिलाएं हरे रंग के वस्त्र और चूड़ियां पहनती हैं। यह रंग समृद्धि, खुशहाली और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।

 

सावन के लोक-रंग और परंपराएं

सावन का महीना भारतीय लोक संस्कृति को जीवंत कर देता है। गांवों से लेकर शहरों तक, बागों में पेड़ों पर झूले डाल दिए जाते हैं। मल्हार और कजरी जैसे पारंपरिक लोकगीत हवाओं में गूंजने लगते हैं।

 

रसोई के लिहाज से भी यह महीना बेहद स्वादिष्ट होता है। बारिश की फुहारों के बीच घरों में गरमा-गरम घेवर, मालपुआ, खीर और पकोड़े बनाए जाते हैं। इस महीने में सात्विक जीवनशैली का पालन किया जाता है, जिससे तन और मन दोनों शुद्ध रहते हैं।

 

सावन के प्रमुख त्योहार में हरियाली तीज, नाग पंचमी और रक्षाबंधन पर्व मनाया जाता है।

 

क्या है खास?

हरियाली तीज- महिलाएं सुहाग की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं और पारंपरिक झूले झूलती हैं।

नाग पंचमी- नाग देवताओं की पूजा की जाती है, जो जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान को दर्शाता है।

रक्षाबंधन- श्रावण पूर्णिमा के दिन भाई-बहन के पवित्र प्रेम का यह त्योहार मनाया जाता है।

 

उपसंहार

श्रावण मास हमें सिखाता है कि कैसे ईश्वर की भक्ति, प्रकृति के सौंदर्य और मानवीय रिश्तों को एक सूत्र में पिरोया जाता है। यह महीना हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है और जीवन को नए उत्साह से जीने की प्रेरणा देता है। सावन की हर बूंद धरती को जीवन देती है और इसकी भक्ति इंसानी जीवन को धन्य बनाती है। यह महीना केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि प्रकृति की हरियाली, वर्षा की फुहारों और आध्यात्मिक चेतना का भी संदेश देता है। 

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IMD Heavy Rain Alert: इन 15 राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी, कई जगहों पर आंधी-तूफान, दिल्ली से यूपी-बिहार तक ऐसा रहेगा मौसम

India Weather Update: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश के विभिन्न हिस्सों के लिए ताजा वेदर बुलेटिन जारी किया है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले 3-4 दिनों के दौरान पूर्वोत्तर भारत, पश्चिम बंगाल और बिहार में अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। इसके साथ ही 13 जुलाई को मेघालय और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में कुछ जगहों पर अत्यधिक भारी बारिश को लेकर भी चेतावनी दी गई है। उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों, पश्चिम-मध्य और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में अगले 6-7 दिनों के दौरान बारिश की गतिविधियों में थोड़ी कमी देखी जा सकती है।

अभी कहां कितनी हुई बारिश और आंधी-तूफान की स्थिति?

मौसम विभाग के मुताबिक पिछले 24 घंटों के दौरान देश के कई हिस्सों में भारी वर्षा और तेज हवाएं दर्ज की गईं। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में बेहद तेज बारिश रिकॉर्ड की गई। पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, असम, मेघालय और त्रिपुरा में भी बहुत भारी बारिश (12-20 सेमी) दर्ज हुई। अरुणाचल प्रदेश, गांगेय पश्चिम बंगाल, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भारी बारिश (7-11 सेमी) देखी गई।

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और पंजाब में अलग-अलग जगहों पर 60-80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज/झंझावाती हवाएं चलीं। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी राजस्थान, मध्य प्रदेश, विदर्भ, महाराष्ट्र, गुजरात राज्य, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराइकल, केरल और माहे, रायलसीमा, तेलंगाना और आंतरिक कर्नाटक में 40-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं और बिजली चमकने की घटनाएं दर्ज की गईं।

क्षेत्रीय मौसम का विस्तृत पूर्वानुमान

मौसम प्रणालियों की बात करें तो मानसून ट्रफ का पश्चिमी छोर समुद्र तल पर अपनी सामान्य स्थिति के करीब है जबकि इसका पूर्वी छोर सामान्य स्थिति से उत्तर की ओर बना हुआ है। इसके अलावा पाकिस्तान और बांग्लादेश के ऊपर चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय हैं और उत्तर-पश्चिम बिहार से मणिपुर तक एक ट्रफ रेखा भी गुजर रही है। इन सिस्टम्स के प्रभाव से आने वाले दिनों में देश का मौसम कुछ ऐसा रहेगा-

उत्तर-पश्चिम भारत (दिल्ली, यूपी, पंजाब और हरियाणा)

दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 13 से 19 जुलाई के दौरान अलग-अलग जगहों पर हल्की से छिटपुट बारिश होने की संभावना है। 18 और 19 जुलाई को पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पंजाब में अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश हो सकती है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 13-17 जुलाई तक छिटपुट बारिश और 18-19 जुलाई को व्यापक रूप से भारी बारिश होने का अनुमान है। इस दौरान 17 से 19 जुलाई के बीच पूर्वी यूपी में भारी बारिश का अलर्ट है। उत्तराखंड में 13-19 जुलाई तक व्यापक बारिश और 15-19 जुलाई के दौरान भारी बारिश की चेतावनी है। हिमाचल प्रदेश में 18-19 जुलाई को भारी बारिश हो सकती है।

जम्मू-कश्मीर-लद्दाख में 13-19 जुलाई के दौरान 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और 18-19 जुलाई को भारी बारिश की संभावना है। पूर्वी राजस्थान में 16-19 जुलाई के दौरान बारिश देखने को मिल सकती है।

पूर्वी भारत (बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल)

बिहार में 13-15 जुलाई तक व्यापक बारिश होने की संभावना है। इसके बाद 16-19 जुलाई को छिटपुट बारिश जारी रहेगी। 13-14 जुलाई को बिहार में अलग-अलग जगहों पर बहुत भारी बारिश का अलर्ट है जबकि 15-19 जुलाई के दौरान भारी बारिश होने का अनुमान है। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 13 जुलाई को अत्यधिक भारी बारिश और 14, 15, 18 व 19 जुलाई को भारी बारिश की संभावना है। गांगेय पश्चिम बंगाल में 13-17 जुलाई के दौरान भारी बारिश देखने को मिल सकती है।

झारखंड में 13, 18 और 19 जुलाई को छिटपुट बारिश और 14-17 जुलाई तक व्यापक बारिश के साथ 13-14 जुलाई को भारी बारिश का अनुमान है। ओडिशा में 14-15 जुलाई को बहुत भारी बारिश और 13 व 16 जुलाई को भारी बारिश हो सकती है।

पूर्वोत्तर भारत (असम, मेघालय और त्रिपुरा)

मेघालय में 13 जुलाई को कुछ जगहों पर अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है। असम और मेघालय में 13-15 जुलाई और 17-19 जुलाई के दौरान भारी बारिश तथा 16 जुलाई को बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। अरुणाचल प्रदेश में 13-19 जुलाई तक लगातार भारी बारिश का अनुमान है। नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 13 और 17 जुलाई को बहुत भारी बारिश हो सकती है जबकि 14-16 और 18-19 जुलाई को भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।

मध्य और पश्चिमी भारत (मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र)

पश्चिमी मध्य प्रदेश में 16-17 जुलाई को 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। छत्तीसगढ़ में 14-15 जुलाई को भारी बारिश की संभावना है। कोंकण और गोवा में 13-16 जुलाई तक छिटपुट बारिश के बाद 17-19 जुलाई के दौरान व्यापक से बहुत व्यापक बारिश होने का अनुमान है। गुजरात, मध्य महाराष्ट्र और सौराष्ट्र व कच्छ में 13-19 जुलाई तक छिटपुट बारिश जारी रहेगी।

दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत (कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु)

तटीय कर्नाटक में 17-19 जुलाई और केरल व माहे, लक्षद्वीप में 18-19 जुलाई को व्यापक बारिश होने की संभावना है। तटीय आंध्र प्रदेश और यनम, तटीय कर्नाटक, रायलसीमा और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में 13-17 जुलाई के दौरान तेज सतही हवाएं चलने की संभावना है।

हीटवेव और उमस भरी गर्मी की चेतावनी

बारिश के बीच देश के कुछ हिस्सों में गर्मी का प्रकोप भी देखने को मिलेगा। तटीय आंध्र प्रदेश और यनम में 13 से 15 जुलाई के दौरान अलग-अलग इलाकों में लू चलने की प्रबल संभावना है। ओडिशा में 13-14 जुलाई और रायलसीमा व तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराइकल में 13-15 जुलाई के दौरान मौसम बेहद गर्म और उमस भरा बना रहेगा।

सबसे तेज आधा दर्जन मैच हारने वाले पहले भारतीय T-20I कप्तान बने श्रेयस अय्यर

भारत की टी20 विश्व कप जीत के बाद सूर्यकुमार यादव की जगह कप्तान नियुक्त किए गए श्रेयस अय्यर की शुरुआत बेहद खराब रही। टीम को आयरलैंड से 0-2 से हार का सामना करना पड़ा और फिर वह पहले मैच के बारिश के कारण रद्द होने के बाद इंग्लैंड से टी20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला 0-4 से हार गई।

इस कारण वह सबसे तेज गति से बतौर कप्तान पहले  आधा दर्जन मैच हारने वाले भारतीय कप्तान बन गए हैँ।  इससे पहले बतौर कप्तान आधा दर्जन मैच हारने के लिए रोहित शर्मा और विराट कोहली को 16-16 मैच लगे थे और महेंद्र सिंह धोनी और सूर्याकुमार यादव को 33-33 मैच लगे थे। इसमें सबसे हैरत की बात यह है कि श्रेयस अय्यर को अभी भी एक टॉस हारना बाकी है।

अय्यर ने इंग्लैंड के खिलाफ पांचवें मैच में हार के बाद संवाददाताओं से कहा, ‘‘अपेक्षाओं से निपटना वास्तव में मुश्किल नहीं है। मैं सौभाग्यशाली हूं कि मुझे कप्तानी करने का मौका मिला है। प्रत्येक व्यक्ति भारतीय टीम की कप्तानी करने और शीर्ष स्तर पर जिम्मेदारी संभालने का सपना देखता है। निश्चित रूप से मुझे दबाव पसंद है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए दबाव में अच्छा प्रदर्शन करना, इन मैच से सीखना निश्चित रूप से मुझे आगे चलकर बेहतर बनाएगा। मेरी अभी की सोच यही है। मैं इस बात पर ज्यादा ध्यान नहीं दे रहा हूं कि लोग इस श्रृंखला के बारे में क्या सोचेंगे, क्योंकि अच्छा और बुरा इस खेल का अभिन्न अंग है।’’अय्यर ने कहा कि टीम के लिए सकारात्मक मानसिकता बनाए रखना जरूरी है क्योंकि यही आगे सफलता की कुंजी होगी।

उन्होंने कहा, ‘‘भविष्य में मुझे इस बात को लेकर बेहद सकारात्मक रहना होगा कि मैं विशेषकर विदेश की परिस्थितियों में अपने खिलाड़ियों के खेल में निखार लाने में कैसे मदद कर सकता हूं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम जानते हैं कि हमें ऑस्ट्रेलिया (अगला टी20 विश्व कप) खेलना है। उससे पहले हमें कई अन्य स्थानों पर खेलना है। हमारा लक्ष्य एक ऐसी टीम तैयार करना है जो इन परिस्थितियों में अच्छा प्रदर्शन कर सके। भविष्य के लिए हमारी यही योजना है।’’

भारत को शनिवार को पांचवें और अंतिम टी20 मैच में 56 रन से हार का सामना करना पड़ा और अय्यर ने स्वीकार किया कि उनकी टीम इस दौरे के दौरान परिस्थितियों के अनुकूल जल्दी से ढल नहीं पाई।

उन्होंने कहा, ‘‘हम एक मैदान से दूसरे मैदान पर जाते रहे और हमें लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ा। हम जितनी जल्दी परिस्थितियों से सामंजस्य बिठा सकते थे, वैसा करने में नाकाम रहे। यह पहली चुनौती थी। दूसरी चुनौती उनका हर विभाग में हमसे बेहतर प्रदर्शन करना रहा। इसलिए मुझे लगता है कि इन सब कारण से हमें हार मिली।’’

IMD की चेतावनी 13 जुलाई: इन 13 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, बिहार-बंगाल में मूसलाधार बरसात, दिल्ली से यूपी तक ऐसा रहेगा मौसम

India Weather Today 13 July: देश के कई हिस्सों में मानसून पूरी तरह से सक्रिय है और कई राज्यों में बादलों ने डेरा डाल रखा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 13 जुलाई के लिए मौसम का ताजा बुलेटिन जारी कर दिया है। मौसम विभाग के मुताबिक उत्तर-पूर्वी बिहार, दक्षिण बांग्लादेश और उत्तर-पूर्वी असम के ऊपर अलग-अलग चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय हैं जबकि एक पश्चिमी विक्षोभ भी बना हुआ है। इन सभी प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव की वजह से आज बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और असम समेत देश के लगभग 13 राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश और तेज आंधी-तूफान का अलर्ट जारी किया गया है।

आइए जानते हैं मौसम विभाग के बुलेटिन के अनुसार आज देश के अलग-अलग राज्यों में मौसम का हाल कैसा रहेगा:

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इन राज्यों में मूसलाधार और बहुत भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, आज कुछ प्रमुख राज्यों के अलग-अलग हिस्सों में मूसलाधार और बहुत भारी बारिश होने की प्रबल आशंका है। इन राज्यों में शामिल हैं:

  • बिहार
  • गंगा तटीय पश्चिम बंगाल
  • असम और मेघालय

इन राज्यों में खराब मौसम को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने और जलभराव वाले क्षेत्रों से बचने की सलाह दी गई है।

यूपी-उत्तराखंड समेत इन राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी

बुलेटिन के मुताबिक, देश के कई अन्य हिस्सों में भी आज मानसूनी हवाओं की वजह से भारी बारिश होने की संभावना है। इन राज्यों और क्षेत्रों में शामिल हैं:

  • पूर्वी उत्तर प्रदेश
  • उत्तराखंड
  • उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम
  • ओडिशा
  • अरुणाचल प्रदेश
  • नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा (संयुक्त रूप से प्रभावित क्षेत्र)

आंधी-तूफान, बिजली कड़कने और झोंकेदार हवाओं का पूर्वानुमान

बारिश के साथ-साथ मौसम विभाग ने कई राज्यों में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने और तेज रफ्तार से हवाएं चलने की चेतावनी दी है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के साथ जम्मू-कश्मीर-लद्दाख में अलग-अलग जगहों पर 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और बिजली कड़कने की संभावना है। बिहार, झारखंड, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में अलग-अलग जगहों पर आंधी-तूफान के साथ 30 से 40 किमी/घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चल सकती हैं और बिजली गिर सकती है।

उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, पूर्वी मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय तथा नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा के कुछ हिस्सों में केवल गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी है। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के अलग-अलग इलाकों में धरातल पर तेज हवाएं चलने की भी उम्मीद है।

तटीय आंध्र प्रदेश में लू और ओडिशा-तमिलनाडु में उमस का कहर

एक तरफ जहां देश के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी है, वहीं कुछ तटीय इलाकों में सूरज की तपिश और उमस लोगों को परेशान करेगी। तटीय आंध्र प्रदेश के अलग-अलग पॉकेट्स में आज लू की स्थिति बनी रहने की संभावना है। ओडिशा और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल के कुछ हिस्सों में आज मौसम बेहद गर्म और उमस भरा रहने वाला है।

मछुआरों के लिए चेतावनी: अरब सागर और बंगाल की खाड़ी का हाल

समंदर में खराब मौसम को देखते हुए मछुआरों को तटीय इलाकों में न जाने की हिदायत दी गई है। पश्चिम-मध्य और उससे सटे पूर्वी-मध्य, उत्तरी और दक्षिण-पश्चिम अरब सागर के अधिकांश हिस्सों में, सोमालिया और ओमान के तटों के साथ-साथ उत्तरी गुजरात के तटों पर 45-55 किमी/घंटे की रफ्तार से चलने वाली तूफानी हवाएं 65 किमी/घंटे की रफ्तार तक पहुंच सकती हैं। उत्तरी आंध्र प्रदेश के तटों से सटे समुद्र और अंडमान सागर में 40-50 किमी/घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की आशंका है, जो बढ़कर 60 किमी/घंटे तक पहुंच सकती हैं।

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नीला समंदर भूल जाइए, दुनिया की इन 6 खूबसूरत झीलों का देखे नजारा जहां बहता है गुलाबी पानी!

क्या आपने कभी ऐसी झील के बारे में सुना है, जिसका पानी नीला नहीं बल्कि प्राकृतिक रूप से गुलाबी दिखाई देता हो? दुनिया में कई ऐसी झीलें हैं, जिनका अनोखा गुलाबी रंग लोगों को पहली ही नजर में हैरान कर देता है। आइए जानते हैं दुनिया की सबसे खूबसूरत गुलाबी झीलों के बारे में और समझते हैं कि आखिर इनके पानी का रंग गुलाबी क्यों होता है:

टोर्रेविजा पिंक लैगून, स्पेन

Maharloo Lake: Nature's Palette, Geological Wonder - EavarTravel

स्पेन की टोर्रेविजा पिंक लैगून अपने चमकीले गुलाबी रंग के लिए दुनियाभर में मशहूर है। जून से अक्टूबर के बीच धूप वाले दिनों में इसका रंग सबसे ज्यादा निखरकर दिखाई देता है यहां बड़ी संख्या में फ्लेमिंगो पक्षी आते हैं और यह झील स्पेन के प्रमुख नमक प्रोडक्शन में भी शामिल है। यहां से निकला नमक दुनिया के कई देशों में भेजा जाता है।

डस्टी रोज़ लेक, कनाडा

Australia Has More Than One Pink Lake (Many More!) | HowStuffWorks

कनाडा की डस्टी रोज़ लेक बाकी गुलाबी झीलों से काफी अलग है। यह खारे पानी की नहीं बल्कि मीठे पानी की झील है। इसका गुलाबी रंग आसपास की गुलाबी और बैंगनी चट्टानों के महीन कणों से बनता है। यह झील बहुत दूर है, इसलिए यहां पहुंचना आसान नहीं है। इसे देखने के लिए ज्यादातर लोग हेलीकॉप्टर या स्माल एयरक्राफ्ट का सहारा लेते हैं।

हट्ट लैगून, ऑस्ट्रेलिया

200+ Hutt Lagoon Stock Photos, Pictures & Royalty-Free Images - iStock

ऑस्ट्रेलिया का हट्ट लैगून दुनिया की सबसे खूबसूरत गुलाबी झीलों में गिना जाता है। यह करीब 9 मील लंबी झील है और समुद्र से केवल रेत के टीलों की एक पतली पट्टी इसे अलग करती है। झील के किनारों पर सफेद नमक की मोटी लेयर जम जाती है, जिससे इसका नजारा और भी अट्रैक्टिव हो जाता है। सुबह से दोपहर के बीच इसका रंग सबसे ज्यादा साफ और चमकीला दिखाई देता है।

लेक रेटबा (लैक रोज़), सेनेगल

लेक रेटबा

सेनेगल की राजधानी डकार के पास लेक रेटबा, जिसे लैक रोज़ भी कहा जाता है, अपने बेहद खारे पानी के लिए जानी जाती है। साल 2022 की बाढ़ के बाद इसका रंग कुछ समय के लिए बदल गया था, लेकिन अब यह धीरे-धीरे फिर से गुलाबी होता जा रहा है। नवंबर से मई के बीच इसका रंग सबसे ज्यादा खूबसूरत नजर आता है।

लेक हिलियर, ऑस्ट्रेलिया

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ऑस्ट्रेलिया की लेक हिलियर दुनिया की सबसे पॉपुलर गुलाबी झीलों में से एक है। इसकी सबसे खास बात यह है कि झील का पानी किसी बर्तन में निकालने पर भी अपना गुलाबी रंग नहीं बदलता। भारी बारिश से रंग हल्का हुआ है, लेकिन समय के साथ इसका चमकीला गुलाबी रंग फिर लौट आएगा। यही वजह है कि यह झील दुनिया भर के टूरिस्ट को अपनी ओर अट्रैक्ट करती है।

महारलू झील, ईरान

 Lipar lake - Pink lake in Chabahar Iran - IRAN Travel Experience | Baluchestan iran, Iran central desert,

ईरान के फ़ार्स प्रांत में शिराज़ शहर के पास महारलू झील चारों ओर से पहाड़ों से घिरी हुई है। गर्मियों में झील का पानी काफी सूख जाता है और किनारों पर सफेद नमक की परत जम जाती है। यहां फ्लेमिंगो समेत कई प्रवासी पक्षी भी आते हैं, क्योंकि उन्हें यहां भरपूर भोजन मिलता है। वसंत और शुरुआती पतझड़ में इस झील का गुलाबी रंग सबसे ज्यादा खूबसूरत दिखाई देता है।

पिंक लेक्स का अनोखा राज

Maharloo Lake - Visit Our Iran - Discover Iran

इन सभी झीलों की सबसे बड़ी पहचान इनका नेचुरल पिंक कलर है, लेकिन हर झील के पीछे इसकी वजह एक जैसी नहीं होती। झीलों में पानी में मौजूद ज्यादा नमक के कारण खास तरह के सूक्ष्मजीव और शैवाल पनपते हैं, जो गुलाबी रंग पैदा करते हैं। वहीं डस्टी रोज़ लेक का रंग हिमनदीय चट्टानों के महीन कणों से गुलाबी दिखाई देता है ये झीलें बताती हैं कि पानी का रंग हमेशा नीला नहीं होता, बल्कि उसके भीतर मौजूद नेचुरल एलिमेंट, मिनरल और सूक्ष्मजीव भी उसके रंग को पूरी तरह बदल सकते हैं।

कल का मौसम 13 जुलाई: पूर्वी यूपी, बिहार-बंगाल तक मूसलाधार बरसात, IMD ने इन 11 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट दिया

India Weather Update: देश के कई हिस्सों में मानसून का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग 13 जुलाई के लिए देश का ताजा वेदर बुलेटिन जारी कर दिया है। मौसम विभाग के मुताबिक मानसून की अक्षीय रेखा इस समय श्री गंगानगर, हिसार, मेरठ, शाहजहाँपुर, गोरखपुर, मुजफ्फरपुर से होते हुए पूर्व-दक्षिण-पूर्व की ओर दक्षिण असम तक जा रही है। इसके साथ ही उत्तर-पूर्वी बिहार, दक्षिण बांग्लादेश और उत्तर-पूर्वी असम के ऊपर अलग-अलग चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय हैं। इन मजबूत वेदर सिस्टम के प्रभाव से बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल समेत कुल 11 राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

आइए जानते हैं मौसम विभाग के बुलेटिन के मुताबिक 13 जुलाई को देश के अलग-अलग राज्यों में मौसम का हाल कैसा रहने वाला है:

इन राज्यों में मूसलाधार और बहुत भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग के मुताबिक 13 जुलाई को तीन प्रमुख राज्यों के अलग-अलग हिस्सों में बादलों की भीषण गर्जना के साथ मूसलाधार और बहुत भारी बारिश होने की प्रबल संभावना है:

  • बिहार
  • गंगा तटीय पश्चिम बंगाल
  • असम और मेघालय

इन इलाकों में रहने वाले लोगों को जलभराव और खराब मौसम को देखते हुए विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

पूर्वी यूपी और उत्तराखंड समेत इन 8 राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी

देश के कई अन्य हिस्सों में भी मानसूनी हवाओं के चलते भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। इन क्षेत्रों में शामिल हैं:

  • पूर्वी उत्तर प्रदेश
  • उत्तराखंड
  • उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम
  • ओडिशा
  • अरुणाचल प्रदेश
  • नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा

आंधी-तूफान, बिजली कड़कने और बवंडर जैसी तेज हवाओं का अलर्ट

बारिश के साथ-साथ मौसम विभाग ने कई राज्यों में आकाशीय बिजली गिरने और तेज रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने का पूर्वानुमान जारी किया है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह तथा जम्मू-कश्मीर-लद्दाख में कुछ स्थानों पर 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और बिजली कड़कने की आशंका है। बिहार, झारखंड, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के अलग-अलग हिस्सों में 30 से 40 किमी/घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी और गरज-चमक के साथ बिजली गिर सकती है।

उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, पूर्वी मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में अलग-अलग स्थानों पर तेज गरज के साथ बिजली गिरने की चेतावनी दी गई है। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के कुछ इलाकों में धरातल पर बहुत तेज गति से हवाएं चलने की संभावना है।

तटीय आंध्र प्रदेश में लू और ओडिशा-तमिलनाडु में उमस का असर

एक तरफ जहां उत्तर और पूर्वी भारत में बारिश का दौर जारी है, वहीं दक्षिण और तटीय इलाकों में मौसम विपरीत रहेगा। तटीय आंध्र प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में लू की स्थिति बनी रहेगी। ओडिशा और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल के कुछ हिस्सों में मौसम बेहद गर्म और उमस भरा रहने वाला है। इससे लोगों को काफी परेशानी हो सकती है।

अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में मौसम का हाल

समंदर में उठने वाले तूफान और तेज हवाओं को लेकर मछुआरों को तटीय इलाकों में न जाने की चेतावनी दी गई है। पश्चिम-मध्य और उससे सटे पूर्वी-मध्य, उत्तरी और दक्षिण-पश्चिम अरब सागर के अधिकांश हिस्सों में, सोमालिया और ओमान के तटों के साथ-साथ उत्तरी गुजरात के तटों पर 45-55 किमी/घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाएं 65 किमी/घंटे की रफ्तार तक पहुंच सकती हैं। उत्तरी आंध्र प्रदेश के तटों से सटे समुद्र और अंडमान सागर में 40-50 किमी/घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चल सकती हैं, जिनकी गति बढ़कर 60 किमी/घंटे तक पहुंचने का अनुमान है।

सूखे में भी चमकी किस्मत! कम पानी, कम खर्च… फिर भी बंपर कमाई, सहजन की खेती ने किसान की बदल दी तकदीर

महाराष्ट्र के किसान संदीप कदम के लिए कई सालों तक खेती करना आसान नहीं रहा। सूखा, बढ़ती खेती की लागत और मौसम की मार की वजह से उन्हें लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा था। लेकिन एक छोटे से फैसले ने उनकी किस्मत बदल दी। घाटे वाली फसलों की जगह उन्होंने अपने खेत में सिर्फ 40 सहजन (मुनगा) के पेड़ लगाए और इसके बाद उनकी खेती की तस्वीर बदल गई।

30Stades की रिपोर्ट के अनुसार, बार-बार फसल खराब होने के बाद संदीप ने अपने परिवार की खेती को नए तरीके से करने का फैसला किया। महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित सांगोला क्षेत्र में कम पानी और कम खर्च में होने वाली फसल की तलाश के दौरान उन्होंने सहजन की खेती शुरू की। हालांकि शुरुआत में उन्हें यह भरोसा नहीं था कि यह प्रयोग सफल होगा, लेकिन उनका यह फैसला आगे चलकर उनके लिए बेहद फायदेमंद साबित हुआ। लेकिन यह फैसला भी उनकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा। संदीप कदम ने बताया कि अनार की खेती में भी उन्हें लगातार नुकसान हुआ। बेमौसम बारिश की वजह से फसल में बैक्टीरियल ब्लाइट और विल्ट जैसी बीमारियां फैलने लगीं। इन बीमारियों से बचाने के लिए बार-बार दवाओं का छिड़काव करना पड़ता था, जिससे खेती का खर्च लगातार बढ़ता गया। आखिरकार उन्हें किसी नई फसल की तलाश करनी पड़ी।

लगातार हो रहे नुकसान के बाद संदीप ने खेती का तरीका बदलने का फैसला किया। उन्होंने बताया कि सांगोला इलाके में भूजल का स्तर पहले से ही कम है और बारिश का कोई भरोसा नहीं रहता। इसलिए उन्हें ऐसी फसल चाहिए थी जो कम पानी में भी अच्छी तरह उग सके और जिसमें दवाओं व देखभाल पर ज्यादा खर्च न आए। इसी दौरान उन्हें सहजन की खेती का विकल्प मिला और उन्होंने इसे अपनाने का फैसला किया।

सहजन की खेती क्यों चुनी?

संदीप कदम की तलाश आखिरकार सहजन (मुनगा) की खेती पर जाकर खत्म हुई। सहजन एक ऐसी फसल है, जिसका इस्तेमाल भारत के कई हिस्सों में सब्जी, सांभर, दाल और दूसरी कई डिश बनाने में किया जाता है। स्वाद के साथ-साथ यह पोषक तत्वों से भी भरपूर होती है। सबसे बड़ी बात यह है कि दूसरी कई बागवानी फसलों के मुकाबले सहजन को बहुत कम पानी की जरूरत होती है। यही वजह है कि यह सूखा प्रभावित इलाकों के लिए एक अच्छा विकल्प माना जाता है। इन खूबियों ने संदीप को सहजन की खेती शुरू करने के लिए प्रेरित किया।

संदीप ने एक साथ पूरी खेती बदलने का जोखिम नहीं लिया। उन्होंने पहले छोटे स्तर पर इसकी शुरुआत की। साल 2010 में उन्होंने तमिलनाडु से ओडीसी (ODC) किस्म के बीज मंगवाए और अपने अनार के बाग में खाली पड़ी जगह पर सिर्फ 40 सहजन के पेड़ लगाए।

40 पौधों से शुरु हुआ सफर 

संदीप कदम ने एक साथ पूरी खेती बदलने की बजाय पहले छोटे स्तर पर सहजन की खेती शुरू की। साल 2010 में उन्होंने तमिलनाडु से ओडीसी (ODC) किस्म के बीज मंगवाए और अपने अनार के बाग की खाली जगह में सिर्फ 40 सहजन के पौधे लगाए। संदीप बताते हैं, “सिर्फ 40 पौधों से मुझे करीब 40 हजार रुपये की कमाई हुई। इससे मेरा आत्मविश्वास बढ़ा और मुझे लगा कि सूखा प्रभावित इलाकों के किसानों के लिए सहजन की खेती एक अच्छा विकल्प बन सकती है।” जैसे-जैसे पौधे बड़े हुए, हर पेड़ से सालाना औसतन करीब 60 किलो सहजन मिलने लगा।

पहले प्रयोग की सफलता के बाद संदीप ने दिसंबर 2012 में एक एकड़ जमीन पर बड़े पैमाने पर सहजन की खेती शुरू की। इसके लिए उन्होंने अपनी पहली फसल से तैयार किए गए बीजों का इस्तेमाल किया। उन्होंने करीब 680 पौधे लगाए। पौधों की कतारों के बीच 10 फीट और एक पौधे से दूसरे पौधे के बीच करीब 6 फीट की दूरी रखी गई। इसके बाद मई में पहली व्यावसायिक फसल तैयार हुई, जिसमें हर पौधे से औसतन करीब 25 किलो सहजन मिला।

25 लाख की आमदनी 

आज संदीप कदम के खेत में हर साल करीब 4.2 लाख किलो (420 टन) सहजन का उत्पादन होता है। बाजार में मौसम के अनुसार सहजन की कीमत 40 से 100 रुपये प्रति किलो तक रहती है, लेकिन उन्हें औसतन 60 रुपये प्रति किलो का भाव मिल जाता है। संदीप अपनी फसल का निर्यात दुबई भी करते हैं। इसके अलावा उनके पास खरीदारों का अच्छा नेटवर्क है, जिससे उन्हें बेहतर दाम मिलते हैं और उनकी कमाई लगातार बनी रहती है। सहजन की खेती पर उनका सालाना खर्च करीब 1.5 लाख रुपये प्रति एकड़ आता है, जबकि एक एकड़ से करीब 25 लाख रुपये की आमदनी होती है। इस तरह उन्हें लगभग 23.5 लाख रुपये प्रति एकड़ का मुनाफा मिलता है।

पौधारोपण महाभियान धरती माता के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का महायज्ञ : योगी आदित्यनाथ

Chief Minister Yogi stated that mega plantation drive is grand undertaking to express gratitude towards Mother Earth

– मुख्यमंत्री ने गोरखपुर से किया 1 दिन में 35 करोड़ पौधारोपण के लक्ष्य वाले पौधारोपण महायज्ञ 2026 का शुभारंभ

– 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत सीएम ने गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे पर रोपे पवित्र त्रिवेणी (नीम, पीपल, बरगद) के पौधे

– मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास की रफ्तार के साथ वनाच्छादन का विस्तार, सैकड़ों टन कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण करता है एक पेड़

– आरकेबीके के पास ताल रिंग रोड के किनारे भी मुख्यमंत्री ने किया पौधारोपण, लगाया मौलश्री का पौधा

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार सुबह गोरखपुर से एक दिन में 35 करोड़ रिकॉर्ड पौधारोपण के लक्ष्य वाले प्रदेशव्यापी पौधारोपण महायज्ञ 2026 का शुभारंभ किया। ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत उन्होंने गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे पर भगवानपुर टोल प्लाजा के समीप पवित्र त्रिवेणी (नीम, पीपल, बरगद) के पौधे लगाए और सेल्फी भी ली। इसके बाद गीडा सेक्टर-28 में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पौधारोपण महाभियान धरती माता के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का महायज्ञ है। विगत नौ वर्षों में प्रदेश में भौतिक विकास की रफ्तार तेज होने के साथ ही वनाच्छादन का भी विस्तार हुआ है। गोरखनाथ मंदिर लौटते समय सीएम ने आरकेबीके के पास ताल रिंग रोड के किनारे भी मौलश्री का पौधा रोपित किया।

 

जनसभा में सीएम योगी ने कहा कि वर्ष 2017 के बाद से यूपी के इंफ्रास्ट्रक्चर का वृहद विस्तार हुआ है। एक्सप्रेसवे, हाईवे के साथ बड़े पैमाने पर सड़कों का जाल बिछा है। नए-नए उद्योग लगे हैं। शहरीकरण का दायरा बढ़ा है और नई-नई कॉलोनियां विकसित हुई हैं। भौतिक विकास में तेज योगदान देने वाले इस राज्य ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति संकल्पित प्रयासों से वनाच्छादन के विस्तार में भी सफलता प्राप्त की है।

एक पेड़ सैकड़ों टन कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण करता है। 9 वर्षों में यूपी का वनाच्छादन बढ़ने से 6 करोड़ 37 लाख 74 हजार 130 टन कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण तथा 4 करोड़ 63 लाख 90 हजार 130 टन ऑक्सीजन का उत्सर्जन हुआ।

 

'माता भूमिः पुत्रो अहं पृथिव्या:'

मुख्यमंत्री ने पौधारोपण महाभियान को धरती माता के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का महायज्ञ बताया और इसमें हर व्यक्ति की तरफ से योगदान दिए जाने की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि धरती माता हम सबको अच्छा वातावरण देती हैं। आगे बढ़ने का अवसर, पेट भरने को अन्न, अच्छे-अच्छे फल, पीने के लिए जल देने के साथ घर की सभी आवश्यकताओं की पूर्ति करती हैं।

धरती माता के बारे में हमारे ऋषियों ने संकल्प भाव से कहा है- 'माता भूमिः पुत्रो अहं पृथिव्या:', अर्थात यह धरती हमारी माता हैं और हम सब इसके पुत्र हैं। एक पुत्र के रूप में धरती माता के प्रति उत्तरदायित्व का निर्वहन करने के लिए ही प्रधानमंत्री मोदी जी ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ का आह्वान किया है।  यह आने वाली पीढ़ी के भविष्य को सुंदर बनाने का राष्ट्रीय कर्तव्य है। 

 

धरती माता की आरोग्यता का भी रखें ध्यान

सीएम योगी ने पौधारोपण की थीम ‘एक पेड़ मां के नाम’ को बहुत सुंदर बताते हुए कहा कि मां हर व्यक्ति, हर जीव के लिए दुनिया का सबसे सुंदर उपहार है। हम खुद के स्वास्थ्य की चिंता करते हैं, लेकिन सबकुछ देने वाली धरती माता के स्वास्थ्य की परवाह नहीं करते। खुद की आरोग्यता के लिए हम सभी को धरती माता की आरोग्यता का भी ध्यान रखना होगा।

अनंतकाल तक जीवसृष्टि बनी रहे, इसके लिए पौधारोपण अत्यंत आवश्यक है। मोदी के आह्वान पर ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस पर इस वर्ष 5 करोड़ पौधे लगाए गए। गत वर्ष 35 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए। 9 वर्ष में अब तक प्रदेश में 242 करोड़ पौधे लगाए जा चुके हैं।

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मौसम चक्र में परिवर्तन से कृषि उत्पादन पर असर

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण पर मंडरा रहे संकट का प्रभाव मौसम चक्र पर भी पड़ा है। बारिश करीब एक महीना विलंब से शुरू हुई है। जो बीज 15 जून तक लग जाना चाहिए था, उसे 15 जुलाई को लगाएंगे तो उत्पादन में 25 से 30 प्रतिशत तक अंतर पड़ेगा।

पर्यावरण असंतुलन से कभी प्रचंड गर्मी पड़ रही है तो कभी सर्दी। लगातार ग्लोबल वार्मिंग की चेतावनी दी जा रही है। आशंका जताई जा रही है कि आने वाले समय में समुद्र के किनारे बहुत सारे शहर डूबने की स्थिति में होंगे तो कहीं भीषण जल संकट होगा।

 

मानवता को चुकानी पड़ रही प्रकृति से खिलवाड़ की कीमत

मुख्यमंत्री ने कहा कि सर्दियों के मौसम में बहुत सारे शहर ऐसे हैं, जहां गैस चैंबर जैसी स्थिति बन जाती है। वहां अलर्ट जारी करना पड़ता है कि बुजुर्ग, बीमार और बच्चे घर से बाहर न निकलें, जरूरी हो तो मास्क लगाकर निकलें। आखिर यह स्थिति पैदा ही क्यों हुई? क्योंकि प्रकृति के साथ खिलवाड़ किया गया। अंधाधुंध पेड़ काटे गए, जल दोहन किया गया लेकिन जल संरक्षण के लिए कोई प्रयास नहीं हुआ। तालाबों पर अवैध कब्जे हो गए। अपने स्वार्थ के लिए लोगों ने प्रकृति के साथ जो खिलवाड़ किया है, आज उसकी कीमत विश्व मानवता को चुकानी पड़ रही है। 

 

पर्यावरण अनुकूल एलईडी लाइट से बचे 100 करोड़ रुपए

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 में जब डबल इंजन की भाजपा सरकार बनी तब हैलोजन लाइटों को हटाकर उसकी जगह पर्यावरण अनुकूल एलईडी स्ट्रीट लाइट लगाने का अभियान शुरू किया गया। प्रदेश में 16 लाख एलईडी स्ट्रीट लाइट लगाई गईं, इससे प्रदेश सरकार को 100 करोड रुपए की बचत हुई।

साथ ही हैलोजन में जलकर मरने वाले कीड़े-मकोड़ों की भयंकर बदबू से भी मुक्ति मिली। सरकार नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा दे रही है। पीएम सूर्य घर बिजली योजना से लोगों के बिजली बिल आधे हो रहे हैं। ग्रीन एनर्जी का नया स्रोत लोगों को उपलब्ध कराया गया है।

 

उज्जवला योजना ने दी धुएं से मुक्ति

मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम मोदी के विजन से उज्जवला योजना के तहत 10 करोड़ परिवारों को निशुल्क एलपीजी कनेक्शन बांटे गए, जो कांग्रेस सरकार में ब्लैक में मिलते थे। 10 करोड़ परिवारों में माताओं-बहनों को चूल्हे के धुएं से मुक्ति मिली। अकेले उत्तर प्रदेश में 2 करोड़ परिवारों को यह लाभ मिला है। इंटरनेशनल सोलर अलायंस के अध्यक्ष के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने दुनिया से इसके बारे में आह्वान किया है। अयोध्या प्रदेश की पहली सोलर सिटी बनी है। वहां समस्त स्ट्रीट लाइट में सोलर एनर्जी का इस्तेमाल किया जाता है।

 

पौधा लगाकर देखभाल भी करें

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें न सिर्फ पौधे लगाने हैं, बल्कि उनकी उचित देखभाल भी करनी है। जिन किसानों ने अपने खेत में पेड़ लगाए हैं, उन्हें कार्बन क्रेडिट फाइनेंस स्कीम के अंतर्गत पैसा भी प्राप्त होता है। मुख्यमंत्री ने हर व्यक्ति से ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का हिस्सा बनने की अपील करते हुए कहा कि अपने पूर्वजों व परिजनों की स्मृति में और परिवार के सदस्यों के नाम से एक पौधा अवश्य लगाएं।

 

’हरित गाथा’ लघु फिल्म और ‘वानिकी कैलेंडर’ का विमोचन

पौधारोपण महायज्ञ 2026 के अवसर पर आयोजित जनसभा के मंच से मुख्यमंत्री ने ‘उत्तर प्रदेश के नौ वर्ष की हरित गाथा’ लघु फिल्म और ‘वानिकी कैलेंडर’ का विमोचन किया। लघु फिल्म में यूपी में पिछले नौ सालों में पर्यावरण संरक्षण के लिए किए गए प्रयासों और हासिल उपलब्धियों को दर्शाया गया है, जबकि वानिकी कैलेंडर में वर्ष 2026-27 के लिए वन विभाग की कार्ययोजना का उल्लेख है। 

 

सीएम ने किया पौध वितरण, किसानों को सौंपे प्रमाण-पत्र

कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी ने मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना की लाभार्थी गीता देवी, मधुरा, इशरावती, शीला, कालिंदी को घर के सामने रोपने के लिए सहजन के पौधे भेंट किए। उन्होंने कार्बन क्रेडिट फाइनेंस योजना के अंतर्गत 700 से अधिक पौधारोपण करने वाले नरपति (कैम्पियरगंज गोरखपुर), 650 से अधिक पौधारोपण करने वाले अशफाक खान (देसही देवरिया),  800 पौधारोपण करने वाली रंजना देवी (हाटा कुशीनगर) और 850 पौधे लगाने के लिए अरविंद कुमार (पडरौना कुशीनगर) को कार्बन क्रेडिट के लिए मिलने वाली राशि का प्रमाण-पत्र सौंपा। 

 

सीएम योगी के मार्गदर्शन में यूपी में बढ़ी हरियाली : वनमंत्री

कार्यक्रम में वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने कहा कि सीएम योगी के मार्गदर्शन में यूपी में हरियाली बढ़ी है। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया देहरादून की रिपोर्ट के अनुसार देश में ग्रीनरी वृद्धि के मामले में उत्तर प्रदेश प्रगति करते हुए दूसरे स्थान पर पहुंच गया है।

आज का पौधारोपण पूर्ण होते ही यूपी में पिछले 10 सालों में पौधारोपण की कुल संख्या 275 करोड़ हो जाएगी। इस बार के पौधारोपण महाभियान में 30 प्रतिशत फलदार पौधे लगाए जा रहे हैं। गोरखपुर में मुख्यमंत्री द्वारा घोषित वानिकी विश्वविद्यालय के निर्माण की शुरुआत जल्द ही की जाएगी।

 

पीएम मोदी-सीएम योगी पर्यावरण संरक्षण के लिए बेहद संवेदनशील : रविकिशन

इस मौके पर सांसद रविकिशन शुक्ल ने कहा कि पीएम मोदी और सीएम योगी पर्यावरण संरक्षण को लेकर बेहद संवेदनशील हैं। वे सदैव लोगों को पौधारोपण के लिए प्रेरित करते रहते हैं। इसी विजन के अनुरूप पर्यावरण संरक्षण के लिए मुख्यमंत्री ने एक दिन में 35 करोड़ पौधारोपण का लक्ष्य रखा है। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में यूपी का इतना विराट विकास हुआ है, जितना कोई सोच भी नहीं सकता।

 

नौ वर्ष में हुआ सौ वर्ष से अधिक का विकास : प्रदीप शुक्ल

सहजनवा के विधायक प्रदीप शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में सहजनवा विधानसभा का अभूतपूर्व विकास हो रहा है। उन्होंने नौ वर्षों में जितना विकास किया, वह सौ वर्षों में भी नहीं हो पाता। प्रधान मुख्य वन संरक्षक सुनील कुमार चौधरी ने भी मुख्यमंत्री का स्वागत किया।

 

इस अवसर पर प्रदेश सरकार के मत्स्य विभाग के मंत्री संजय निषाद, राज्यसभा सदस्य संगीता यादव, एमएलसी एवं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह, विधायक फतेह बहादुर सिंह, श्रीराम चौहान, राजेश त्रिपाठी, विपिन सिंह, डॉ. विमलेश पासवान, महेंद्रपाल सिंह, सरवन निषाद, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी, पौधारोपण महायज्ञ के लिए गोरखपुर के नोडल अधिकारी सुहास एलवाई, भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष विनोद राय, जिलाध्यक्ष जनार्दन तिवारी, पूर्व जिलाध्यक्ष युधिष्ठिर सिंह, ब्लॉक प्रमुख दिलीप यादव आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

Kashmir Cloudburst : अनंतनाग में बादल फटने से मची तबाही, घरों में घुसा पानी; फसलें और सेब के बाग बर्बाद

दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के चिटरगुल स्थित नाला चोटीहाल (Nala Chotihall) क्षेत्र में रविवार को बादल फटने (क्लाउडबर्स्ट) के बाद अचानक आई बाढ़ (फ्लैश फ्लड) ने भारी तबाही मचा दी। इस प्राकृतिक आपदा में कृषि भूमि, सेब के बाग, धान की फसलें और कई रिहायशी इलाकों को गंभीर नुकसान पहुंचा है। घटना के तुरंत बाद जिला प्रशासन ने राहत एवं बचाव दलों को प्रभावित क्षेत्रों में भेजा। टीमें नुकसान का आकलन करने के साथ राहत कार्य और आवश्यक एहतियाती कदम उठा रही हैं। प्रशासन ने बताया कि प्रभावित इलाकों में आपातकालीन टीमें तैनात कर दी गई हैं और नुकसान का विस्तृत आकलन किया जा रहा है। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए आवश्यक कदम भी उठाए जा रहे हैं।

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स्थानीय लोगों के अनुसार, अचानक आई बाढ़ का पानी कई घरों में घुस गया, जिससे लोगों को रातों-रात अपने घर छोड़ने पड़े। धान के खेत जलमग्न हो गए और सेब के बागों को भारी नुकसान पहुंचा है। ग्रामीणों ने सरकार से जल्द नुकसान का सर्वे कर उचित मुआवजा देने की मांग की है।

 

भारी बारिश के बाद आई बाढ़ ने किसानों की आजीविका पर गहरा असर डाला है। उन्होंने कहा कि सेब के बाग और धान की फसल लगभग पूरी तरह बर्बाद हो गई है। उन्होंने सरकार से फसलों और पेड़ों के नुकसान का आकलन कर उचित मुआवजा देने की अपील की।

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पहाड़ों से तेज बहाव के साथ पानी नीचे आया और चिटरगुल अपर में बहने वाले नाले का रास्ता बदल गया। इससे आसपास के खेतों, बागों और मकानों को भारी नुकसान हुआ। उन्होंने बताया कि कई परिवारों को तत्काल घर खाली कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा। लोगों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से निष्पक्ष सर्वे कर जल्द मुआवजा देने की मांग की है।

 

इस घटना से पूरे इलाके में दहशत फैल गई। आधी रात तक लोग अपने घर छोड़कर सड़कों और मस्जिदों में शरण लेने को मजबूर हो गए क्योंकि बाढ़ का पानी लगातार घरों में घुस रहा था। उन्होंने संबंधित विभागों से बागवानी, कृषि भूमि, पशुधन और सड़क को हुए नुकसान का तत्काल निरीक्षण कर राहत पैकेज जारी करने की मांग की।

Heavy rain alert: मुंबई में समंदर से उठने लगीं ऊंची लहरें, IMD ने जारी कर दिया इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

India Weather Update: देश के कई हिस्सों में मानसून पूरी तरह से मेहरबान है। मुंबई के मरीन ड्राइव पर रविवार 12 जुलाई को समंदर में ऊंची लहरें यानी हाई टाइड देखने को मिली हैं। इसी बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश के कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी कर दिया है। मौसम विभाग ने अलग-अलग राज्यों के लिए बारिश, आंधी-तूफान और बिजली गिरने की विस्तृत चेतावनी दी है।

इन राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग के अनुसार, आज 12 जुलाई को देश के कुछ हिस्सों में मूसलाधार बारिश होने की पूरी संभावना है। IMD ने नीचे दिए गए राज्यों के अलग-अलग इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया है:-

बिहार

असम और मेघालय

पूर्वी उत्तर प्रदेश (यहां कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश की विशेष चेतावनी है)

उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम

दिल्ली-एनसीआर के करीब समेत इन 13 राज्यों में भारी बारिश का अनुमान

देश के कई अन्य राज्यों में भी आज भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। इन इलाकों में शामिल हैं:-

उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश

हरियाणा और चंडीगढ़ (उत्तरी हिस्से)

पंजाब (उत्तरी हिस्से)

जम्मू और कश्मीर-लद्दाख

झारखंड और ओडिशा

छत्तीसगढ़

गंगा तटीय पश्चिम बंगाल

अरुणाचल प्रदेश

नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा

60 किमी/घंटे की रफ्तार से आंधी और बिजली गिरने की चेतावनी

मौसम विभाग ने बारिश के साथ-साथ कई राज्यों में तेज रफ्तार हवाओं और गरज-चमक का भी अलर्ट जारी किया है। जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में अलग-अलग स्थानों पर गरज-चमक के साथ बिजली गिरने और तेज झोंकेदार हवाएं चलने की संभावना है।

विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर में 40-60 किमी/घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, पूर्वी मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर-लद्दाख और झारखंड में अलग-अलग स्थानों पर बिजली कड़कने के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की उम्मीद है।

गंगा तटीय पश्चिम बंगाल, ओडिशा और पश्चिमी मध्य प्रदेश में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और आंधी-तूफान के साथ बिजली गिरने की गतिविधि हो सकती है। अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय, बिहार, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम और उत्तराखंड के अलग-अलग हिस्सों में आकाशीय बिजली गिरने का अनुमान जताया गया है।

अरब सागर में मौसम का हाल और तटीय आंध्र प्रदेश में लू

अरब सागर के ऊपर मौसम खराब रहने की आशंका है। मध्य और उससे सटे उत्तरी अरब सागर, उत्तरी गुजरात तट के कुछ हिस्सों, उत्तर-पूर्वी अरब सागर, सोमालिया से सटे दक्षिण-पश्चिमी अरब सागर और ओमान के तटों पर 45-55 किमी/घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। इनकी गति बढ़कर 65 किमी/घंटे तक पहुंच सकती है। इन सबके बीच मौसम विभाग ने यह भी अनुमान लगाया है कि तटीय आंध्र प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में आज लू की स्थिति बनी रह सकती है।