सूखे में भी चमकी किस्मत! कम पानी, कम खर्च… फिर भी बंपर कमाई, सहजन की खेती ने किसान की बदल दी तकदीर

महाराष्ट्र के किसान संदीप कदम के लिए कई सालों तक खेती करना आसान नहीं रहा। सूखा, बढ़ती खेती की लागत और मौसम की मार की वजह से उन्हें लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा था। लेकिन एक छोटे से फैसले ने उनकी किस्मत बदल दी। घाटे वाली फसलों की जगह उन्होंने अपने खेत में सिर्फ 40 सहजन (मुनगा) के पेड़ लगाए और इसके बाद उनकी खेती की तस्वीर बदल गई।

30Stades की रिपोर्ट के अनुसार, बार-बार फसल खराब होने के बाद संदीप ने अपने परिवार की खेती को नए तरीके से करने का फैसला किया। महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित सांगोला क्षेत्र में कम पानी और कम खर्च में होने वाली फसल की तलाश के दौरान उन्होंने सहजन की खेती शुरू की। हालांकि शुरुआत में उन्हें यह भरोसा नहीं था कि यह प्रयोग सफल होगा, लेकिन उनका यह फैसला आगे चलकर उनके लिए बेहद फायदेमंद साबित हुआ। लेकिन यह फैसला भी उनकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा। संदीप कदम ने बताया कि अनार की खेती में भी उन्हें लगातार नुकसान हुआ। बेमौसम बारिश की वजह से फसल में बैक्टीरियल ब्लाइट और विल्ट जैसी बीमारियां फैलने लगीं। इन बीमारियों से बचाने के लिए बार-बार दवाओं का छिड़काव करना पड़ता था, जिससे खेती का खर्च लगातार बढ़ता गया। आखिरकार उन्हें किसी नई फसल की तलाश करनी पड़ी।

लगातार हो रहे नुकसान के बाद संदीप ने खेती का तरीका बदलने का फैसला किया। उन्होंने बताया कि सांगोला इलाके में भूजल का स्तर पहले से ही कम है और बारिश का कोई भरोसा नहीं रहता। इसलिए उन्हें ऐसी फसल चाहिए थी जो कम पानी में भी अच्छी तरह उग सके और जिसमें दवाओं व देखभाल पर ज्यादा खर्च न आए। इसी दौरान उन्हें सहजन की खेती का विकल्प मिला और उन्होंने इसे अपनाने का फैसला किया।

सहजन की खेती क्यों चुनी?

संदीप कदम की तलाश आखिरकार सहजन (मुनगा) की खेती पर जाकर खत्म हुई। सहजन एक ऐसी फसल है, जिसका इस्तेमाल भारत के कई हिस्सों में सब्जी, सांभर, दाल और दूसरी कई डिश बनाने में किया जाता है। स्वाद के साथ-साथ यह पोषक तत्वों से भी भरपूर होती है। सबसे बड़ी बात यह है कि दूसरी कई बागवानी फसलों के मुकाबले सहजन को बहुत कम पानी की जरूरत होती है। यही वजह है कि यह सूखा प्रभावित इलाकों के लिए एक अच्छा विकल्प माना जाता है। इन खूबियों ने संदीप को सहजन की खेती शुरू करने के लिए प्रेरित किया।

संदीप ने एक साथ पूरी खेती बदलने का जोखिम नहीं लिया। उन्होंने पहले छोटे स्तर पर इसकी शुरुआत की। साल 2010 में उन्होंने तमिलनाडु से ओडीसी (ODC) किस्म के बीज मंगवाए और अपने अनार के बाग में खाली पड़ी जगह पर सिर्फ 40 सहजन के पेड़ लगाए।

40 पौधों से शुरु हुआ सफर 

संदीप कदम ने एक साथ पूरी खेती बदलने की बजाय पहले छोटे स्तर पर सहजन की खेती शुरू की। साल 2010 में उन्होंने तमिलनाडु से ओडीसी (ODC) किस्म के बीज मंगवाए और अपने अनार के बाग की खाली जगह में सिर्फ 40 सहजन के पौधे लगाए। संदीप बताते हैं, “सिर्फ 40 पौधों से मुझे करीब 40 हजार रुपये की कमाई हुई। इससे मेरा आत्मविश्वास बढ़ा और मुझे लगा कि सूखा प्रभावित इलाकों के किसानों के लिए सहजन की खेती एक अच्छा विकल्प बन सकती है।” जैसे-जैसे पौधे बड़े हुए, हर पेड़ से सालाना औसतन करीब 60 किलो सहजन मिलने लगा।

पहले प्रयोग की सफलता के बाद संदीप ने दिसंबर 2012 में एक एकड़ जमीन पर बड़े पैमाने पर सहजन की खेती शुरू की। इसके लिए उन्होंने अपनी पहली फसल से तैयार किए गए बीजों का इस्तेमाल किया। उन्होंने करीब 680 पौधे लगाए। पौधों की कतारों के बीच 10 फीट और एक पौधे से दूसरे पौधे के बीच करीब 6 फीट की दूरी रखी गई। इसके बाद मई में पहली व्यावसायिक फसल तैयार हुई, जिसमें हर पौधे से औसतन करीब 25 किलो सहजन मिला।

25 लाख की आमदनी 

आज संदीप कदम के खेत में हर साल करीब 4.2 लाख किलो (420 टन) सहजन का उत्पादन होता है। बाजार में मौसम के अनुसार सहजन की कीमत 40 से 100 रुपये प्रति किलो तक रहती है, लेकिन उन्हें औसतन 60 रुपये प्रति किलो का भाव मिल जाता है। संदीप अपनी फसल का निर्यात दुबई भी करते हैं। इसके अलावा उनके पास खरीदारों का अच्छा नेटवर्क है, जिससे उन्हें बेहतर दाम मिलते हैं और उनकी कमाई लगातार बनी रहती है। सहजन की खेती पर उनका सालाना खर्च करीब 1.5 लाख रुपये प्रति एकड़ आता है, जबकि एक एकड़ से करीब 25 लाख रुपये की आमदनी होती है। इस तरह उन्हें लगभग 23.5 लाख रुपये प्रति एकड़ का मुनाफा मिलता है।

सिर्फ 0.25 एकड़ में ड्रैगन फ्रूट उगा 5 लाख की कमाई! मुंबई में टाइल्स लगाने का काम छोड़ लक्ष्मण ने खेती को यूं बनाया मुनाफे का सौदा

ओडिशा के बलांगीर जिले में रहने वाले लक्ष्मण डांसना ने यह साबित कर दिया है कि बड़ी कमाई के लिए बड़ी जमीन नहीं, बल्कि सही सोच और मेहनत जरूरी होती है। कभी मुंबई में टाइल लगाने का काम करने वाले लक्ष्मण आज अपने गांव लौटकर खेती से अच्छी आमदनी कमा रहे हैं। उन्होंने सिर्फ एक चौथाई एकड़ जमीन पर ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की और इसे एक सफल बिजनेस मॉडल में बदल दिया। शुरुआत में उन्होंने सब्जियों की खेती भी की, लेकिन सीमित कमाई के कारण उन्होंने कुछ नया करने का फैसला किया।

सही जानकारी, धैर्य और लगातार सीखने की आदत ने उनकी जिंदगी बदल दी। आज उनकी यह छोटी सी खेती उन्हें हर साल करीब 7.5 लाख रुपये की स्थिर आय दे रही है, जो कई लोगों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन चुकी है।

पहले टाइल वर्कर, फिर बने स्मार्ट किसान

लक्ष्मण पहले मुंबई में टाइल लगाने का काम करते थे। कई साल बाहर काम करने के बाद जब वे अपने गांव लौटे, तो उन्होंने तय किया कि अब परिवार के पास रहकर भी अच्छी कमाई करनी है। यही सोच उन्हें खेती की तरफ ले आई।

सब्जियों से शुरू, फिर आया बड़ा आइडिया

शुरुआत में उन्होंने छोटी जमीन पर सब्जियों की खेती की, लेकिन इससे ज्यादा फायदा नहीं हुआ। ज्यादातर उपज घर में ही इस्तेमाल हो जाती थी, जिससे कमाई सीमित रह गई। इसके बाद उन्होंने कुछ नया करने की ठानी।

ड्रैगन फ्रूट ने बदल दी किस्मत

एक दिन उन्हें ड्रैगन फ्रूट खेती का वीडियो मिला, जिसने उनकी सोच बदल दी। उन्होंने तुरंत खेती शुरू नहीं की, बल्कि पहले कई साल तक रिसर्च की, किसानों से मिले और सफल फार्म देखने गए।

छोटी जमीन से लाखों की कमाई

पूरी तैयारी के बाद उन्होंने अपनी छोटी सी जमीन पर ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की। मेहनत और सही प्लानिंग का नतीजा यह हुआ कि आज वही जमीन उन्हें हर साल लाखों की स्थिर आय दे रही है।

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