सीजेपी के डर से दिल्ली बंद!

नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के डर से केंद्र सरकार ने पूरी दिल्ली बंद कर दिया है और राजधानी के साथ साथ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र को भी छावनी में तब्दील कर दिया है। सीजेपी ने शनिवार, 10 अक्टूबर को जंतर मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सीजेपी प्रदर्शन करेगी। लेफ्ट पार्टियों और आम आदमी पार्टी ने इस प्रदर्शन का समर्थन किया है। इस प्रदर्शन को रोकने के लिए मेट्रो, ट्रेन, सड़क, इंटरनेट, स्कूल, कॉलेज, कार्यालय, दुकानें सब बंद हैं।

पुलिस ने दो टूक अंदाज में कहा है कि सीजेपी ने प्रदर्शन की इजाजत नहीं मांगी है इसलिए उसको प्रदर्शन नहीं करने दिया जाएगा। यह भी कहा गया है कि जंतर मंतर के इलाके में बीएनएस की धारा 163 लागू है। यानी पांच से ज्यादा लोगों के एक साथ इकट्ठा होने की अनुमति नहीं है। दूसरी ओर सीजेपी का कहना है कि जंतर मंतर प्रदर्शन के लिए निर्धारित जगह है इसलिए उनको अनुमति लेने की जरुरत नहीं है। सीजेपी के सौरव दास ने कहा कि उनके संगठन ने नहीं, बल्कि सरकार ने खुद ही दिल्ली बंद करा दी है।

सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके और पार्टी के अन्य नेताओं ने वीडियो बना कर जंतर मंतर पहुंचने का ऐलान किया है और लोगों से वहां पहुंचने की अपील भी की है। एक दिन पहले कर्नाटक में सीजेपी ने प्रदर्शन किया था लेकिन वहां ज्यादा संख्या में लोग नहीं जुटे थे। सीजेपी के नेता दिल्ली में जुलाई के जैसे प्रदर्शन की उम्मीद कर रहे हैं, जब उनके प्रदर्शन के कारण तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हुआ था।

बहरहाल, सरकार ने इसे रोकने के लिए सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त किए हैं। लेकिन साथ ही लगभग पूरी दिल्ली को बंद कर दिया है। शनिवार को दिल्ली के स्कूल, कॉलेजों में ऑनलाइन पढ़ाई होगी। बड़ी संख्या में मेट्रो स्टेशन बंद करने की घोषणा हो गई है। राजधानी दिल्ली पहुंचने वाली और दिल्ली से बाहर जाने वाली कई ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है। कनॉट प्लेस के आसपास की दुकानों को बंद रखने का निर्देश जारी किया गया है। इतना ही कनॉट प्लेस से दूर चांदनी चौक के इलाके में भी कई मार्केट बंद रखने को कहा गया है। अगले दो दिन शराब की दुकानें बंद रहेंगी। दिल्ली पुलिस के जवान होटलों में जाकर ऐसे लोगों की तलाश कर रहे हैं, जो शनिवार के प्रदर्शन में शामिल होने के लिए बाहर से आए हैं। यह भी खबर है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश आदि राज्यों में कई शहरों में ट्रेनों में लोगों को उतारा जा रहा है।

सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए चप्पे चप्पे पर अर्धसैनिक बलों और पुलिस के जवानों की तैनाती की गई है। अर्धसैनिक बलों की 221 कंपनियां दिल्ली में तैनात हैं। अलग अलग राज्यों से अर्धसैनिक बलों के करीब 23 हजार जवान दिल्ली बुलाए गए हैं। ये जवान आठ से 12 अक्टूबर तक दिल्ली में तैनात रहेंगे। उनके अलावा दिल्ली पुलिस के 15 हजार से ज्यादा जवानों को तैनात किया गया है। जंतर मंतर तक पहुंचने वाले हर रास्ते को शुक्रवार की रात को ही बंद कर दिया गया।

दिल्ली के सभी स्कूलों और कॉलेजों ने 10 अक्टूबर की क्लास ऑनलाइन कर दी हैं। कई स्कूलों में पीटीएम का समय बदला गया है और परीक्षाएं स्थगित कर दी हैं। जनपथ और कर्तव्यपथ क्रॉसिंग के चार किलोमीटर के दायरे में शुक्रवार रात 10 बजे से शनिवार रात 10 बजे तक इंटरनेट बंद रहेगा। दिल्ली पुलिस ने टेलीकॉम कम्पनियों को पत्र लिखकर नेट बंद करने के लिए कहा है। जंतर मंतर, टॉलस्टॉय मार्ग और जनपथ पर पुलिस व आरएएफ के जवानों को तैनात किया गया है।

दिल्ली पुलिस ने दिल्ली में प्रवेश के सारे रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी है। बॉर्डर सील कर दिया गया है। पानीपत से दिल्ली तक रेलवे स्टेशनों के बाहर नाके लगाए गए हैं। टिकरी, बदरपुर, कापसहेड़ा और सिंघु बॉर्डर पर वाहनों की तलाशी के बाद ही आगे जाने दिया जा रहा है। राकेश टिकैत द्वारा इस प्रदर्शन का समर्थन करने की वजह से भी सीमा पर चौकसी बढ़ाई गई है।

₹1500 के टिकट का हिसाब मांग रही पुलिस! जंतर-मंतर आंदोलन से पहले इस बात पर भड़के अभिजीत दीपके

Abhijeet Dipke CJP Delhi Protest: देश की राजधानी दिल्ली में 10 अक्टूबर को बड़ा आंदोलन होने वाला है। इस प्रस्तावित बड़े विरोध प्रदर्शन से ठीक पहले राजनीतिक हलचलों के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मंगलवार को महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पुलिस और राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।

दीपके का दावा है कि 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले आंदोलन में शामिल होने से रोकने के लिए पुलिस उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं को लगातार परेशान कर रही है और उन्हें कानूनी नोटिस जारी कर रही है।

‘1500 रुपये की टिकट से क्या दिक्कत?’

अभिजीत दीपके ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान महाराष्ट्र की चंद्रपुर पुलिस की कार्रवाई पर तीखा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा, ‘मैंने हमेशा कहा है कि महाराष्ट्र पुलिस देश की सबसे बेहतरीन पुलिस फोर्स है और दिल्ली पुलिस को उनसे सीखना चाहिए। लेकिन यह बेहद दुखद है कि चंद्रपुर पुलिस ने सीजेपी कार्यकर्ताओं को नोटिस थमाकर जंतर-मंतर आंदोलन में हिस्सा न लेने की हिदायत दी है। पुलिस कार्यकर्ताओं से यह भी पूछ रही है कि उनके दिल्ली सफर का खर्च कौन उठा रहा है और पैसे कहाँ से आए?’

दीपके ने सवाल उठाया कि क्या अब देश का कोई आम नागरिक अपनी जेब से 1,000 या 1,500 रुपये का रेल टिकट खरीदकर राजधानी नहीं जा सकता? उन्होंने कहा कि यात्रा के मामूली खर्चों पर सवाल उठाना और कार्यकर्ताओं को रोकना खुलेआम तानाशाही है।

‘क्या पुलिस ने पहले ही हिंसा का प्लान बना रखा है?’

पुलिस नोटिस में आंदोलन के संभावित रूप से ‘हिंसक’ होने की बात लिखे जाने पर सीजेपी प्रमुख ने तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, ‘पुलिस को इतने दिन पहले ही कैसे पता चल गया कि आंदोलन हिंसक होने वाला है? क्या पुलिस ने पहले से ही कुछ योजना बना रखी है?’

साथ ही, पुलिस द्वारा कार्यकर्ताओं को सोशल मीडिया पर पोस्ट न करने के निर्देशों पर भी दीपके ने एतराज जताया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी महात्मा गांधी और डॉ. बी.आर. अंबेडकर के विचारों पर चलती है, तो पुलिस इसे हिंसक कैसे मान सकती है?

10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की वजह क्या है?

गौरतलब है कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक विशाल विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। पार्टी की मुख्य मांगें ये हैं:

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) का इस्तीफा: विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों की खबरों को लेकर CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग।

‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ का विरोध: केंद्र सरकार की इस योजना पर निशाना साधते हुए दीपके ने आरोप लगाया कि ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ केवल एक नारा है और इसके पीछे की असली मंशा ‘वन नेशन, वन पॉलिटिकल पार्टी’ (एक देश, एक ही राजनीतिक दल) लागू करना है।

पुलिसिया कार्रवाई और नोटिस के बावजूद सीजेपी का कहना है कि वे दिल्ली में अपना विरोध प्रदर्शन आयोजित करने के फैसले पर कायम हैं।

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क्या नया विपक्ष उभर सकता है

यह बड़ा सवाल है कि क्या देश में नया विपक्ष उभर सकता है? कांग्रेस के नेता इस सवाल को भाजपा की साजिश थ्योरी का हिस्सा मान रहे हैं लेकिन उस राजनीतिक पहलू को छोड़ दें तब भी यह स्पष्ट दिख रहा है कि देश में एक नए किस्म का विमर्श चल रहा है, जिसमें न तो भाजपा फिट हो रही है और न कांग्रेस। यह सिर्फ ‘जेन जी’ का विमर्श नहीं है, बल्कि आम आदमी का विमर्श है, जिसमें वह रोजमर्रा की समस्याओं के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों को समान रूप से जिम्मेदार मान रहा है।

यह एक व्यापक नैरेटिव का भी हिस्सा है, जिसके दम पर भाजपा ने बरसों तक कांग्रेस को किनारे किए रखा। आम लोग कांग्रेस के विपक्ष में होने के बावजूद यह मानते रहे कि उनकी और देश की समस्याओं के लिए कांग्रेस ही जिम्मेदार है। तभी भाजपा द्वारा स्थापित किया हुआ यह नैरेटिव चला कि मोदी या भाजपा को नहीं वोट दें तो क्या राहुल और अखिलेश या तेजस्वी को दे दें?

अब इस प्रश्न में नए आयाम जुड़ गए हैं। अगर लोग केंद्र और राज्यों की भाजपा सरकारों से उबे हैं या उनको लग रहा है कि भाजपा का कांग्रेसीकरण हो रहा है या उनको धीरे धीरे यह यकीन होता जा रहा है कि भाजपा के पास भी उनकी समस्याओं का समाधान नहीं है लेकिन वे राहुल, अखिलेश या तेजस्वी को भी वोट नहीं देना चाहते, तो उनके सामने क्या विकल्प है? यह सवाल इसलिए प्रासंगिक हो गया है क्योंकि अलग अलग राज्यों में लोगों ने नए विकल्प आजमाने शुरू कर दिए हैं। दिल्ली और पंजाब में आम आदमी पार्टी का जीतना इसका एक उदाहरण है।

ऐसा नहीं है कि दोनों राज्यों में कांग्रेस का विकल्प नहीं था। दिल्ली में भाजपा और पंजाब में अकाली दल के रूप में मजबूत विकल्प था लेकिन लोगों ने आम आदमी पार्टी को चुना। ऐसे ही तमिलनाडु में डीएमके और अन्ना डीएमके एक दूसरे के विकल्प के रूप में करीब सात दशक से थे। लेकिन उन्हें ठुकरा कर लोगों ने सी जोसेफ विजय की पार्टी टीवीके को चुना। इससे पहले 2019 में आंध्र प्रदेश में कांग्रेस को हराने के लिए लोगों ने टीडीपी का विकल्प नहीं चुना, बल्कि जगन मोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस को चुना। नए बने राज्य तेलंगाना में भी के चंद्रशेखर राव की पार्टी लगातार दो बार जीती।

तर्क के नाते कहा जा सकता है कि पहले भी अलग अलग राज्यों में प्रादेशिक पार्टियों का उदय हुआ और उन्होंने चुनाव भी जीते। बिहार में राजद, उत्तर प्रदेश में सपा व बसपा, पश्चिम बंगाल में टीएमसी, आंध्र प्रदेश में टीडीपी आदि। इनके अलावा भी कई राज्यों में प्रादेशिक पार्टियां मजबूत रहीं और चुनाव जीत कर सरकार बनाई। इसलिए अभी अगर राज्यों में नई पार्टियों का उदय हो रहा है तो यह कहना जल्दबाजी होगी कि राष्ट्रीय स्तर पर कोई नया विपक्ष उभर रहा है। लेकिन यहां दोनों परिघटनाओं के बीच के अंतर को समझना होगा।

इससे पहले जितनी भी प्रादेशिक पार्टियां बनीं उनमें से किसी के नेता की राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा नहीं रही। प्रधानमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा भले रही हो लेकिन किसी ने पार्टी का विस्तार दूसरे राज्यों में करने के बारे में गंभीरता से नहीं सोचा। कुछ पार्टियों ने एक से ज्यादा राज्यों में विस्तार किया लेकिन उनका विस्तार बहुत सीमित रहा। बहुजन समाज पार्टी इसका अपवाद है। लेकिन अब वह पार्टी भी अंतिम सांसें गिन रही है। एक दूसरा अंतर यह था कि पहले बनी ज्यादातर प्रादेशिक पार्टियां किसी स्थानीय मुद्दे या क्षेत्रीय पहचान के आधार पर बनी थीं।

पहली बार ऐसा हो रहा है कि अखिल भारतीय मुद्दों पर नई ताकतें आंदोलन कर रही हैं। आम आदमी पार्टी का उभरना किसी स्थानीय मुद्दे या प्रादेशिक पहचान का मामला नहीं है। उसने राजकाज को राजनीतिक विचारधारा बना कर राजनीति की और अपनी स्थापना के एक दशक बाद ही राष्ट्रीय पार्टी बन गई। इसी तरह कॉकरोच जनता पार्टी अभी एक राजनीतक दल नहीं बनी है फिर भी उसके मुद्दे अखिल भारतीय महत्व के हैं और किसी दूसरी पार्टी के मुकाबले देश के नौजवान उसकी बातों पर ज्यादा यकीन कर रहे हैं। आम आदमी पार्टी और कॉकरोच जनता पार्टी ने कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए मुश्किल खड़ी की है।

दोनों इस धारणा को जनता के बीच पहुंचा रहे हैं कि अगर भाजपा से नाराजगी है और लोग उसे बदलना चाहते हैं तो उसका स्वाभाविक विकल्प कांग्रेस नहीं है। यह बहुत बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम है और इसे इसी रूप में देखने की जरुरत है। कांग्रेस इस बात को समझ रही है कि भाजपा ने पहले उसे सत्ता से बेदखल किया और अब उसे स्वाभाविक विपक्ष की जगह से भी खिसकाने का अभियान चल रहा है। कांग्रेस इसके पीछे भाजपा की साजिश भी देख रही है। हो सकता है कि भाजपा धारणा के स्तर पर इस विचार को बढ़ावा दे रही हो और यह भी संभव है कि संसाधन से भी मदद मुहैया करा रही हो लेकिन अंततः यह उसके लिए भी घातक हो सकता है।

कांग्रेस पार्टी ने पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन को इस रूप में नहीं देखा था। उसके नेता मानते रहे कि चीफ जस्टिस की टिप्पणी से त्वरित रूप में बने एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से युवा जुड़े हैं और उसने युवाओं का मुद्दा उठाया है। लेकिन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के प्रदर्शन ने कांग्रेस को अलर्ट कर दिया है। इस मुद्दे पर आम आदमी पार्टी को लेफ्ट और सिविल सोसायटी का साथ मिल रहा है तो कॉकरोच जनता पार्टी को आप का सपोर्ट मिल रहा है। कुछ और प्रादेशिक पार्टियां उनको समर्थन दे रही हैं। तभी कांग्रेस के साथ सीजेपी का विवाद शुरू हो गया है। कांग्रेस नेता सीजेपी को आम आदमी पार्टी का फ्रंट और आप को भाजपा का फ्रंट बता रहे हैं।

कांग्रेस की इस बात को लेकर सीजेपी ने उसके ऊपर तीखा हमला किया है। सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने ‘सेल्फ स्टाइल लिबरल इकोसिस्टम’ पर निशाना साधा है और कहा है, ‘यह सिस्टम अभिजीत दीपके को खारिज कर रहा है, जबकि हकीकत यह है कि बहुत अरसे बाद ऐसा हुआ है कि किसी ने आम लोगों के इमेजिवनेशन को कैप्चर किया है’। विवाद की शुरुआत कांग्रेस के एक प्रवक्ता के बयान से हुई थी, जिन्होंने कहा था कि आशुतोष रांका असम गए तो वहां कांग्रेस नेताओं से नहीं मिले, जबकि कांग्रेस ने सीजेपी के लोगों को पुलिस के बचाया था।

इसके बाद रांका ने एक पोस्ट लिखा और उस पोस्ट को सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने भी पोस्ट किया। उन्होंने कहा कि, एक खास तबका, सिर्फ भाजपा नहीं, बल्कि दूसरी पार्टी भी सोचती है कि ‘सेविंग इंडिया, सेविंग कांस्टीट्यूशन’ उन्हीं का काम है। उन्होंने आगे कहा कि ये लोग, ‘सेल्फ डिक्लेयर्ड लिबरल्स’ औऱ ‘सेल्फ डिक्लेयर्ड ठेकेदार ऑफ कांस्टीट्यूशन’ हैं। सौरव दास का कहना है कि ‘य़ह भाजपा से खराब काम करने वाला इकोसिस्टम है’।

रांका और दास का सीधा हमला कांग्रेस और उसके इकोसिस्टम पर है।

यह एक शुरुआत है, नया विपक्ष बनाने की। इसमें कितनी कामयाबी मिलेगी और कब मिलेगी यह नहीं कहा जा सकता है। लेकिन भाजपा और कांग्रेस से अलग नए विपक्ष के बारे में विचार शुरू हो गया है। आम आदमी पार्टी के साथ साथ कॉकरोच जनता पार्टी पर नजर रखने की जरुरत है। इनके अलावा बिहार में प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी, उत्तर प्रदेश में चंद्रशेखर की भीम आर्मी, तमिलनाडु में सी जोसेफ विजय की टीवीके, पंजाब में अमृतपाल की अकाली दल वारिस पंजाब दे, असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम, हुमायूं कबीर की एजेपी, बदरूद्दीन अजमल की एआईयूडीएफ जैसी पार्टियों पर भी नजर ऱखने की जरुरत है।

Piyush Mishra: ‘स्मित मच्छार की बहादुरी और LPU पर भी एक कमेंट हो जाता तो…’, CJP प्रोटेस्ट में शामिल होने पर पीयूष मिश्रा ने नसीरुद्दीन शाह पर कसा तंज

Piyush Mishra: हाल ही में पीयूष मिश्रा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें उन्होंने दिग्गज एक्टर नसीरुद्दीन शाह पर ‘चुनिंदा एक्टिविज्म’ (selective activism) का आरोप लगाया। नसीरुद्दीन शाह हाल ही में मुंबई के शिवाजी पार्क में ‘द कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के विरोध प्रदर्शन के दौरान अभिजीत दिपके से मिले थे, जहां प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की थी।

वीडियो में पीयूष ने नसीरुद्दीन से सवाल किया कि वे झारखंड में छात्रों के विरोध प्रदर्शन और लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) की घटना पर तो चुप रहे, लेकिन CJP के विरोध प्रदर्शन का समर्थन कर रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने फ्लाईदुबई के पायलट कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी पर नसीरुद्दीन शाह की चुप्पी पर भी सवाल उठाया। कैप्टन स्मित ने अपने को-पायलट द्वारा चाकू मारे जाने के बावजूद उड़ान के दौरान 174 यात्रियों की जान बचाई थी, जिसके लिए देश ने उनकी तारीफ की थी।

‘कृपया स्मित मच्छार की बहादुरी पर भी कमेंट करें’

सोशल मीडिया पर पीयूष का शेयर किया गया वीडियो अब ऑनलाइन खूब देखा जा रहा है। इसमें उन्होंने कहा- “नसीर साहब, आपको मेरा नमस्कार। मैं पीयूष मिश्रा हूं, आपका पुराना परिचित। आपको अभिजीत दीपके से मिलते हुए देखकर अच्छा लगा। सर, हाल ही में एक बड़ा हादसा टल गया। यह घटना फ्लाई दुबई की फ्लाइट 1073 में हुई, जो दुबई से तेल अवीव जा रही थी।

इसमें मिस्टर स्मित मच्छार ने बहादुरी दिखाई और 180 लोगों की जान बचाई। कृपया इस पर भी कमेंट करें, कैप्टन को बधाई दें, उन्हें अच्छा लगेगा।” पीयूष ने LPU की घटना और झारखंड में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन पर नसीरुद्दीन की चुप्पी पर सवाल उठाए। उन्होंने आगे कहा, “दूसरी बात, सर, कृपया लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) के छात्रों को भी कोई संदेश दें। वे भी वहां पढ़ते हैं और वहां एक बहुत खतरनाक घटना हुई है।

ज्ञानेश है भाजपा का हथियारः उद्धव

मुंबई। शिवसेना (उबाठा) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने रविवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के ‘हथियार’ के रूप में काम करने का आरोप लगाया। वहीं महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे ने महाराष्ट्र में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को रद्द करने और भविष्य के चुनाव मतपत्र से कराने की मांग की।

सीईसी और एसआईआर के खिलाफ ठाकरे बंधुओं के नेतृत्व में मुंबई में निकाले गए ‘विराट गर्जना मोर्चा’ में हजारों लोग शामिल हुए। मार्च के बाद हुई रैली में कांग्रेस नेता बालासाहेब थोराट और विजय वडेट्टीवार तथा शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के जयंत पाटिल, शशिकांत शिंदे, जितेंद्र आव्हाड और अनिल देशमुख भी शामिल हुए।

उद्धव ठाकरे ने सवाल किया कि अगर एसआईआर मतदाता सूची से बांग्लादेशियों को बाहर करने के लिए कराया गया था तो सरकार बताए कि देश में अवैध रूप से रह रहे कितने बांग्लादेशियों का पता लगाया गया है। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया, ‘ज्ञानेश कुमार भाजपा का हथियार हैं।’

निर्वाचन आयोग को निशाना बनाते हुए उद्धव ने दावा किया कि महाराष्ट्र में एसआईआर के दौरान दो करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। उन्होंने कहा कि इसी तरह की कवायद में पश्चिम बंगाल में 30 लाख और तमिलनाडु में 70 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।

उद्धव ठाकरे ने नूर्नबर्ग मुकदमों की तर्ज पर भाजपा नेताओं के खिलाफ अभियोजन की चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा, ‘भाजपा और इन अधिकारियों को समझ लेना चाहिए कि देश में भी ऐसा ही होगा।’

उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों की लड़ाई किसी एक पार्टी या नेता, धर्म या जाति के लिए नहीं, बल्कि देश की स्वतंत्रता के लिए है। उद्धव ने दावा किया, ‘भाजपा को समझ लेना चाहिए कि लोग आज शांत हैं। अगर वे आक्रोशित हो गए तो वे उसका सिंहासन जला देंगे।’

उद्धव ने भाजपा पर न केवल वोट और विधायकों को ‘चुराने’ का आरोप लगाया, बल्कि अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले चढ़ावे को भी ‘चुराने’ का आरोप लगाया।

शिवसेना (उबाठा) प्रमुख ने इस सप्ताह की शुरुआत में पश्चिम बंगाल में एसआईआर से जुड़े मामले की तत्काल सुनवाई नहीं करने को लेकर उच्चतम न्यायालय की भी आलोचना की। यह मामला राज्य में उपचुनाव से एक दिन पहले तत्काल सुनवाई के लिए उठाया गया था। अदालत इस मामले पर पांच अक्टूबर को सुनवाई करेगी, जबकि राज्य की दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव छह अक्टूबर को होने हैं।

उद्धव ने दावा किया, ‘यह दिखाता है कि वे सभी संस्थानों को किस तरह नियंत्रित कर रहे हैं।’ राज ठाकरे ने महाराष्ट्र में एसआईआर की प्रक्रिया रद्द करने की मांग करते हुए कहा कि देश में भविष्य के चुनाव मतपत्र के जरिए कराए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि वे 2017-18 से ही राजनीतिक नेताओं को निर्वाचन निकाय में कथित ‘अनियमितताओं’ के बारे में बताते रहे हैं।

मनसे प्रमुख ने कहा कि उन्होंने ईवीएम और मतदाता सूची के मुद्दे पर तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की थी। उन्होंने दोनों नेताओं से इन मुद्दों के स्पष्ट होने तक चुनाव का बहिष्कार करने का आग्रह भी किया था।

दक्षिण मुंबई के मेट्रो सिनेमा से शुरू हुआ विरोध मार्च कुछ ही दूरी तय कर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) मुख्यालय पहुंचा। एसआईआर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के विरोध में आयोजित इस मार्च में सीईसी ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने या उनके इस्तीफे की मांग की गई।

मार्च में राजनीतिक दलों के झंडे ले जाने की अनुमति नहीं थी। प्रतिभागियों से केवल राष्ट्रीय तिरंगा साथ रखने को कहा गया था। प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि शहर एक बार फिर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आया है। सभी भारतीयों से एकजुट होने का आह्वान करते हुए दीपके ने कहा, ‘अब या कभी नहीं।’

दिल्ली में सीजेपी का अलग आंदोलन

विपक्षी पार्टियों के गठबंधन ‘इंडिया’ ब्लॉक की 30 सितंबर की बैठक में तय किया गया कि दो से आठ अक्टूबर तो पूरे एक हफ्ते प्रदर्शन होगा और मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा मांगा जाएगा। इस प्रदर्शन के दौरान छह अक्टूबर को सभी विपक्षी पार्टियों के बड़े नेता निर्वाचन सदन की ओर मार्च करेंगे और घेराव करेंगे। इसके अलावा भी बैठक में कई प्रस्ताव मंजूर किए गए। इस बीच अलग अलग हिस्सों में प्रदर्शन चलता रहेगा। इस बीच कॉकरोच जनता पार्टी ने 10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शन का ऐलान कर दिया है। दो अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में हुए प्रदर्शन के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने ऐलान किया कि वे 10 अक्टूबर को दिल्ली आ रहे हैं।

हालांकि अभी यह तय नहीं है कि दिल्ली में किसी जगह पर उनको प्रदर्शन करना है या प्रेस कॉन्फ्रेंस करनी है। अभी तक जंतर मंतर या किसी और जगह पर प्रदर्शन की इजाजत सीजेपी ने नहीं मांगी है। हालांकि उनको प्रदर्शन की इजाजत मिल जाती है। छह जून को भी जब दीपके अमेरिका से लौटे थे तब दिल्ली पुलिस ने हवाईअड्डे पर ही उनसे आवेदन लेकर जंतर मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति दे दी थी। यही शिवाजी पार्क के मामले में भी हुआ। पहले पुलिस ने परमिशन नहीं दी थी। लेकिन सीजेपी ने ऐलान किया कि अगर अनुमति नहीं मिली तो जेल भरो अभियान करेंगे। इसके बाद उनको अनुमति मिल गई।

तभी कहा जा रहा है कि भले लेफ्ट और आम आदमी पार्टी को जंतर मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिली लेकिन हो सकता है कि सीजेपी को मिल जाए। बहरहाल, जो हो ऐसा लग रहा है कि पेपर लीक और परीक्षा में ग़ड़बड़ी के मामले में जिस तरह युवाओं की प्रतिनिथि आवाज सीजेपी बन गई थी वैसे ही मतदाताओं के मामले में भी सीजेपी के प्रदर्शन और उनकी अपील को ज्यादा तवज्जो मिल रही है। दिल्ली के मुकाबले मुंबई में ज्यादा व्यवस्थित प्रदर्शन हुआ, जिसका मैसेज पूरे देश में गया। यह कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियों के लिए चिंता की बात है। खास कर कांग्रेस के लिए, जो सोशल मीडिया में लड़ रही है, जबकि सीजेपी जमीन पर लड़ रही है।

दीपके की पोस्ट पर पाबंदी

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयोग ज्ञानेश कुमार और एसआईआर की प्रक्रिया के खिलाफ मुंबई के शिवाजी पार्क में सफल प्रदर्शन के बाद कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके की एक पोस्ट बैन कर दी गई है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने ममता बनर्जी को समर्थन के लिए धन्यवाद किया था। लेकिन इस पोस्ट को प्रतिबंधित कर दिया गया।

तृणमूल कांग्रेस के ममता बनर्जी गुट के सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने पहले की गई धन्यवाद पोस्ट और बैन पोस्ट का स्क्रीनशॉट शेयर किया है। इसके बाद दीपके ने शनिवार को कहा कि 10 अक्टूबर से पहले उनका एक्स हैंडल हटाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा होता है तो उन्हें हैरानी नहीं होगी। गौरतलब है कि दीपके ने 10 अक्टूबर को दिल्ली में मार्च का ऐलान किया है।

इससे पहले शुक्रवार को सीजेपी ने मुंबई के शिवाजी पार्क में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर के विरोध में बड़ा प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद दीपके ने कहा कि अगर ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं, तो 10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शन किया जाएगा। इस बीच मुंबई पुलिस ने दो अक्टूबर को शिवाजी पार्क में हुए सीजेपी के प्रदर्शन के आयोजकों के खिलाफ केस दर्ज किया है। इसमें चार से पांच सौ अज्ञात प्रदर्शनकारियों को आरोपी बनाया गया है।

ममता बनर्जी ने सीजेपी के इस प्रदर्शन को समर्थन दिया था। उन्होंने शुक्रवार को कहा था कि वे सीजेपी, युवाओं और छात्रों के साथ पूरी तरह खड़ी हैं। उनके बयान को डेरेक ओ ब्रायन ने शेयर किया था। डेरेक ओ ब्रायन की पोस्ट पर दीपके ने ममता को टैग करते हुए आंदोलन के समर्थन के लिए उनको धन्यवाद दिया था। हालांकि, बाद में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स ने इस पोस्ट को बैन कर दिया। पोस्ट खोलने पर लिखा आ रहा है, स्थानीय नियमों के कारण यह कंटेंट एक्स पर बैन है। डेरेक ओ ब्रायन ने आरोप लगाया कि सरकार के दबाव में पोस्ट को बैन किया गया।

मुंबई में जंतर मंतर जैसा प्रदर्शन

मुंबई। कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी ने मुंबई के शिवाजी पार्क को जंतर मंतर में बदल दिया। शुक्रवार, दो अक्टूबर को महात्मा गांधी की जयंती के दिन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग लेकर मुंबई के लोग सड़कों पर उतरे। बड़ी संख्या में लोग शिवाजी पार्क में इकट्ठा हुए और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने आंदोलन का नेतृत्व किया। उनके साथ राजनीति और फिल्म जगत की बड़ी हस्तियां भी शामिल हुईं। देर शाम तक प्रदर्शनकारी शिवाजी पार्क में जमा रहे।

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और उनके बेटे आदित्य ठाकरे भी आंदोलन में शामिल हुए। फिल्मी हस्तियों की बात करें तो नसीरूद्दीन शाह से लेकर शबाना आजमी और विशाल ददलानी से लेकर विशाल भारद्वाज तक अनके अभिनेता, गायक, गीतकार, संगीतकार, निर्माता और निर्देशक शिवाजी पार्क पहुंचे और आंदोलन में शामिल हुए। इससे पहले सीजेपी ने ऐलान किया था कि अगर प्रशासन ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी तो जेल भरो अभियान चलेगा। हालांकि उसकी नौबत नहीं आई।

सीजेपी के इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में युवा शामिल हुए। वे सोशल मीडिया में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे मीम्स के पोस्टर बना कर पहुंचे थे। सब एक सुर में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान मंच पर मौजूद सभी लोगों ने महात्मा गांधी की तस्वीर वाली टीशर्ट पहनी थी। गौरतलब है कि इससे पहल सीजेपी ने 20 जून से 25 जुलाई तक दिल्ली में जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया था, जो धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ खत्म हुआ था।

बहरहाल, शुक्रवार के प्रदर्शन में अभिजीत दीपके ने कहा, ‘जब भारत के प्रधानमंत्री अमेरिका जाते हैं, तब भी वहां कहा जाता है कि ये गांधी के देश से आए हैं। गांधी देश की आत्मा हैं, आंबेडकर रीढ़ की हड्डी और नेहरू दिमाग हैं’। दीपके ने भाजपा पर हमला करते हुए कहा कि भाजपा ‘एक देश, एक पार्टी’ चाहती है। प्रदर्शन के दौरान सीजेपी ने सरकार के सामने अपनी तीन मांगें रखीं, जिसमें पहली मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की है। इसके बाद जनवरी 2025 की मतदाता सूची बहाल करने और मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया को बंद करने की मांग की गई।

सीजेपी के प्रदर्शन में अभिनेत्री शबाना आजमी ने कहा, ‘हमारा वोट हमारा अधिकार है, हमारी आवाज है। जब मतदाता सूची से हमारे नाम हटा दिए जाएं, तो हम क्या करेंगे’? गायक संगीतकार विशाल ददलानी ने प्रदर्शन के दौरान गाना गाया। मशहूर फिल्मकार विशाल भारद्वाज अपनी पत्नी रेखा भारद्वाज के साथ प्रदर्शन में पहुंचे थे। उन्होंने इस दौरान कहा, ‘मैं यहां केवल अपना समर्थन देने आया हूं’। मुंबई में विरोध प्रदर्शन के दौरान सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई का जिक्र किया और कहा, ‘दिल्ली पुलिस ने फिर से बर्बरता की है, सुधर जाओ वरना हम तुम्हें सुधार देंगे’।

सीजेपी का जेल भरो आंदोलन का ऐलान

नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देने के लिए दो अक्टूबर तक की समय सीमा दी है। सीजेपी ने कहा है कि अगर दो अक्टूबर तक इस्तीफा नहीं होता है या उनको नहीं हटाया जाता है तो मुंबई के शिवाजी पार्क में आंदोलन करेंगे और अगर आंदोलन की अनुमति नहीं मिली तो जेल भरो आंदोलन शुरू होगा। इस बीच आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने सीजेपी को सलाह दी है कि उनको ज्ञानेश कुमार का नहीं, बल्कि नरेंद्र मोदी का इस्तीफा मांगना चाहिए। केजरीवाल ने कहा है कि ज्ञानेश कुमार ने जो किया वह अपने बॉस यानी प्रधानमंत्री मोदी के लिए किया।

इस बीच खबर है कि मुंबई पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी को दो अक्टूबर को शिवाजी पार्क में प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दी। इसे लेकर सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा है, ‘नागरिकों की आवाज दबाने की ऐसी कोशिशें स्वीकार्य नहीं हैं। अगर हमें प्रदर्शन करने के अधिकार से वंचित किया गया, तो सीजेपी गांधी जयंती के दिन मुंबई में जेल भरो आंदोलन शुरू करेगी’। गौरतलब है कि सीजेपी ने 24 सितंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे में इस्तीफा देने का अल्टीमेटम दिया था। हालांकि बाद में इसे बढ़ा कर दो अक्टूबर तक कर दिया गया।

कांग्रेस ने शुरू की आंदोलन की तैयारी

नई दिल्ली। कांग्रेस पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की मनमानी को लेकर ‘इंडियन एक्सप्रेस’ में हुए खुलासे पर बड़ा आंदोलन करने की तैयार कर रही है। पार्टी इसे छोड़ने के मूड में नहीं है। तभी अगले तीन दिन तक लगातार राजनीतिक कार्यक्रम तय किए गए हैं। सोमवार, 28 सितंबर को कांग्रेस कार्यकर्ता जिला मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। इसके अगले दिन मंगलवार, 29 सितंबर को कांग्रेस कार्य समिति की बैठक होगी और उसके अगले दिन 30 सितंबर को विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ब्लॉक की बैठक होगी। अगर बीजद के प्रतिनिधि इसमें हिस्सा लेते हैं तो इसे विपक्ष की बैठक कहा जाएगा।

बहरहाल, कांग्रेस पार्टी इस मसले पर अपनी रणनीति बनाने के लिए 29 सितंबर को कार्य समिति यानी सीडब्लुसी की बैठक करेगी। सोनिया व राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा इसमें शामिल होंगे। इसमें विपक्षी गठबंधन की बैठक को लेकर भी बात होगी। अगले दिन ‘इंडिया’ ब्लॉक की बैठक होगी। लगभग सभी विपक्षी पार्टियों के नेता इसमें शामिल होंगे। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव खुद बैठक में नहीं पहुंच पाएंगे लेकिन उनकी पार्टी के नेता इसमें हिस्सा लेंगे।

बताया जा रहा है कि कांग्रेस और सपा के अलावा इस बैठक की पहल करने वाली ममता बनर्जी और लेफ्ट के नेता भी शामिल होंगे। इसमें डीएमके और आम आदमी पार्टी के भी शामिल होने की संभावना है। गौरतलब है कि पिछली बैठक में इन दोनों पार्टियों ने दूरी बनाई थी। बताया जा रहा है कि बीजू जनता दल को भी इसमें शामिल होने का न्योता भेजा गया है और कहा जा रहा है कि नवीन पटनायक का कोई प्रतिनिधि बैठक में शामिल हो सकता है। अगर बीजद का कोई नेता आता है तो इस बैठक को ‘इंडिया’ ब्लॉक की बजाय विपक्ष की बैठक नाम दिया जा सकता है।

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर में गड़बड़ी और चुनाव आयोग के आंतरिक मतभेद की खबरों के बाद विपक्षी पार्टियां नए सिरे से एकजुट हो रही हैं। पश्चिम बंगाल में एक दूसरे के धुर विरोधी रहे तृणमूल कांग्रेस और सीपीएम के बीच बातचीत शुरू हो गई है। असल में सीपीएम के महासचिव एमए बेबी ने ‘इंडिया’ ब्लॉक के सभी नेताओं को पत्र लिखा और चुनाव आयोग के हालात पर विचार के लिए बैठक बुलाने की अपील की।

एमए बेबी की चिट्ठी के जवाब में ममता बनर्जी ने सीपीएम महासचिव को फोन कर दिया। कोई 30 साल के बाद ममता की उनसे बात हुई। ममता बनर्जी ने एमए बेबी को कहा कि पूरे विपक्ष को मिलकर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक साझा रणनीति बनाने की जरूरत है। इसके बाद ही बैठक की तारीख तय की गई।

विपक्ष के जानकार नेताओं का कहना है कि गठबंधन की ओर से 2029 का लोकसभा का चुनाव पुरानी मतदाता सूची से ही कराने की मांग की जाएगी। यानी एसआईआर को रद्द करने की मांग की जा सकती है। इस बैठक में यह सवाल भी पूछा जा सकता है कि एसआईआर के बाद कितने बांग्लादेशी नागरिक पकड़े गए और कितनों को वापस बांग्लादेश भेजा गया? इस बीच कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने चुनौती दी है कि वे सोमवार को दिल्ली आ रहे हैं और सरकार में हिम्मत है तो उनको पकड़ कर दिखाए।