नेहा बोरा जंतर मंतर पहुंची, सीजेपी का प्रदर्शन टला

नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी ने पहले तो 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था लेकिन अब उसे आगे बढ़ा दिया गया है। सीजेपी के नेताओं ने कहा है कि अगर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं तो सीजेपी दो अक्टूबर से देश भर में प्रदर्शन करेगी। पहले सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त को इस्तीफा देने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था।

इस बीच शुक्रवार को सीपीआई माले की छात्र ईकाई आईसा की नेहा बोरा जंतर मंतर पहुंच गईं। हालांकि उनके प्रदर्शन के ऐलान के बाद जंतर मंतर पर सुरक्षा बढ़ा दी गई। बैरिकेड्स के साथ भारी पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया और उन्हें बसों में भर कर ले गई। सीपीआई माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य भी वहां मौजूद थे। उन्हें और मशहूर वकील प्रशांत भूषण को पुलिस ने हिरासत में लिया।

सीजेपी ने 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया

नई दिल्ली। पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी पर प्रदर्शन करके तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेने वाली कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी भी मैदान में उतर गई है। सीजेपी ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे में इस्तीफा देने का अल्टीमेटम दिया। पार्टी ने कहा कि अगर उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया तो देश भर में आंदोलन किया जाएगा और इसके बाद दिल्ली में प्रदर्शन करेंगे।

सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘ज्ञानेश कुमार इस देश के सबसे बड़े गद्दार हैं। उन्होंने एसआईआर के जरिए देश में 13 करोड़ से ज्यादा वोट डिलीट किए। लोगों से वोट देने का अधिकार छीना जा रहा है’। दीपके ने कहा, ‘लोकतंत्र का मतलब है कि जनता अपनी सरकार चुने। लेकिन जब से ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त बने हैं, तब से सरकार यह तय कर रही है कि कौन वोट करेगा और कौन नहीं’।

गौरतलब है कि, बुधवार को ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने एसआईआर को लेकर पिछले 10 महीनों में आयोग के फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की, लेकिन कोई एक्शन नहीं लिया गया। इसी के हवाले प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार पर चुनाव चोरी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह संयोग नहीं हो सकता है कि जिन पार्टियों ने एक साथ आकर 2024 में केंद्र में भाजपा को हराया, उन सबको विधानसभा चुनाव में एक एक करके हराया गया।

वैष्णो देवी में 550 करोड़ के ‘नकली चांदी’ चढ़ावे की जांच जारी, 10 अक्टूबर को अगली सुनवाई

वैष्णो देवी में 550 करोड़ के ‘नकली चांदी’ चढ़ावे की जांच जारी, 10 अक्टूबर को अगली सुनवाई

Vaishno Devi Temple fake silver Scam

माता वैष्णो देवी मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित ‘नकली चांदी’ के आरोप ने अब 550 करोड़ रुपये के चढ़ावे की पारदर्शिता और उसके रखरखाव की पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब 20 टन चांदी बताए जा रहे इस चढ़ावे की जांच में पुलिस को 116 पन्नों के सरकारी रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज मिले हैं, लेकिन मामले की तस्वीर अभी साफ नहीं हुई है। ALSO READ: भारत के दुश्मन हैं CEC ज्ञानेश कुमार, SIR पर CJP नेता अभिजीत दीपके ने भी खोला मोर्चा

श्राइन बोर्ड के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के बयान अब भी दर्ज होना बाकी हैं। अदालत ने जांच पूरी करने के लिए पुलिस को और समय देते हुए अगली सुनवाई 10 अक्टूबर तय की है।

 

मामले की ताजा स्थिति यह है कि पुलिस ने अदालत को बताया है कि उसे चढ़ावे के संग्रह, छंटाई, भंडारण, परिवहन और प्रसंस्करण से जुड़े 116 पन्नों के सरकारी रिकॉर्ड, पर्याप्त सीसीटीवी फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य मिल चुके हैं। इनकी जांच और आपसी मिलान किया जा रहा है। हालांकि, श्राइन बोर्ड के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के बयान अभी दर्ज नहीं किए गए हैं, जिन्हें पुलिस ने व्यापक जांच के लिए जरूरी बताया है।

 

पुलिस के अनुसार श्राइन के पुजारियों, बोर्ड अधिकारियों, भवन में तैनात सीआरपीएफ कर्मियों, जम्मू कश्मीर पुलिस और सुरक्षा कर्मियों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। वहीं वरिष्ठ अधिकारियों से जुड़े बयान और कुछ अहम रिकॉर्ड अभी जांच के दायरे में हैं। गौरतलब है कि शिकायत को चार महीने से अधिक समय हो चुका है, लेकिन अब तक एफआईआर दर्ज किए जाने की पुष्टि अदालत में दाखिल स्थिति रिपोर्ट में नहीं है। ALSO READ: आजमगढ़ में महामृत्युंजय जाप के दौरान पत्नी-बेटे और 2 पंडितों को गोलियों से भूना, एनकाउंटर में ढेर

 

विवाद के केंद्र में करीब 20 टन ‘सफेद धातु’ है, जिसे चांदी का चढ़ावा बताया गया। हालांकि, चांदी की वास्तविक शुद्धता और कथित वित्तीय नुकसान से जुड़े दावों को अभी जांच का अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। अदालत ने दस्तावेजों, सीसीटीवी और अन्य साक्ष्यों की विस्तृत पड़ताल पूरी करने के लिए पुलिस को समय दिया है। अब 10 अक्टूबर की सुनवाई में जांच की प्रगति पर नजर रहेगी।

भारत के दुश्मन हैं CEC ज्ञानेश कुमार, SIR पर CJP नेता अभिजीत दीपके ने भी खोला मोर्चा

भारत के दुश्मन हैं CEC ज्ञानेश कुमार, SIR पर CJP नेता अभिजीत दीपके ने भी खोला मोर्चा

Abhijit Dipke Cockroach Janata Party

Abhijit Deepke on CEC Gyanesh Kumar: चुनाव आयोग में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर आए मतभेदों के दावों के बाद देश की राजनीति में भूचाल आ गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख अभिजीत दीपके और सह-संयोजक आशुतोष रांका ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें ‘भारत का दुश्मन’ तक करार दे दिया है। वहीं, इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट का हवाला देते हुए आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और सपा समेत कई विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

 

दरअसल, एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दो चुनाव आयुक्तों— डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR प्रक्रिया पर कुल 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराई थीं, जिन्हें दरकिनार कर फैसले लागू कर दिए गए। इस बीच, रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख अभिजीत दीपके ने सीईसी ज्ञानेश पर सीधा हमला बोला। ALSO READ: क्यों भड़के CJP नेता आशुतोष रांका? कहा- बंद कर देनी चाहिए चुनाव प्रक्रिया

 

सोशल मीडिया पर अपनी भड़ास निकालते हुए दीपके ने लिखा- ज्ञानेश कुमार भारत के दुश्मन हैं। कथित तौर पर 12 करोड़ से ज्यादा नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं, जो 2024 लोकसभा चुनाव के कुल 97 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं का 12.4% है। एनडीए और विपक्ष के बीच महज 2% का अंतर है। ज्ञानेश कुमार चुनाव करा नहीं रहे, बल्कि उसकी पटकथा लिख रहे हैं। उन्होंने एसआईआर (SIR) का नया अर्थ निकालते हुए इसे ‘स्पेशल इंटेंसिव रिगिंग’ करार दिया। ALSO READ: NEET प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, दिल्ली समेत 5 राज्यों में FIR रद्द; CJP नहीं करेगी प्रोटेस्ट

लोकतंत्र बर्बाद करने वालों में दर्ज होगा नाम

सीजेपी के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने भी सीईसी पर हमला बोलते हुए कहा कि जब देश का इतिहास लिखा जाएगा, तो लोकतंत्र को बर्बाद करने वालों की सूची में ज्ञानेश कुमार का सबसे ऊपर होगा। उन्होंने दीपके की पोस्ट को शेयर करते हुए दोहराया कि ज्ञानेश कुमार को ‘भारत का दुश्मन’ कहने में किसी को संकोच नहीं होना चाहिए।

 

दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी ने भी इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाया है। आप के दिल्ली प्रदेश संयोजक और पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज ने सभी विपक्षी दलों से चुनाव आयोग के मुद्दे पर एकजुट होने का आह्वान किया है। उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा- बाकी सभी मुद्दे बाद में हैं, सबसे पहले सभी विपक्षी दलों को चुनाव आयोग से जुड़े इस गंभीर मुद्दे को उठाना चाहिए और आयोग को व्यवस्थित करने पर ध्यान देना चाहिए।

विजय के ‘पीएम दांव’ पर सियासत गर्माई : DMK और कांग्रेस का तंज, क्या 2029 में विजय बनेंगे प्रधानमंत्री?

विजय के 'पीएम दांव' पर सियासत गर्माई : DMK और कांग्रेस का तंज, क्या 2029 में विजय बनेंगे प्रधानमंत्री?

CM Vijay Thalapathy

TVK Vijay Prime Minister Demand: तमिलनाडु की राजनीति में हाल में हुए बड़े बदलाव के बाद अब एक नया सियासी भूचाल खड़ा हो गया है। अभिनेता से नेता बने सी. जोसेफ विजय (Thalapathy Vijay) की पार्टी तमिलगा वेत्री कज़गम (TVK) ने राज्य विधानसभा चुनाव में इतिहास रचते हुए 108 विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की और अकेले दम पर 35% वोट शेयर हासिल किया। लगभग 60 सालों से चले आ रहे डीएमके (DMK) और एआईएडीएमके (AIADMK) के बारी-बारी के शासन को खत्म कर विजय तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बन चुके हैं।

 

35% वोट शेयर का यह आंकड़ा तमिलनाडु के पूर्व लोकप्रिय मुख्यमंत्री एमजी रामचंद्रन (MGR) को मिले वोट शेयर से भी 2 प्रतिशत अधिक है। बिना किसी गठबंधन के अकेले चुनाव लड़कर इतना बड़ा जनादेश हासिल करने का दावा करते हुए टीवीके समर्थक अब एक कदम आगे बढ़ गए हैं और विजय को 'भारत का अगला प्रधानमंत्री' प्रोजेक्ट करने लगे हैं। ALSO READ: परिसीमन पर तमिलनाडु CM विजय ने PM मोदी को लिखा पत्र, लोकसभा सीटों की संख्या 543 पर स्थायी रूप से तय करने की मांग

विधानसभा में उठा 'दक्षिण का पीएम' का मुद्दा

हाल ही में तमिलनाडु विधानसभा के सत्र के दौरान टीवीके के वरिष्ठ नेता और मंत्री आधव अर्जुन (Aadhav Arjuna) ने यह कहकर नया विवाद छेड़ दिया कि 'दक्षिण भारत के किसी तमिल नेता को देश का अगला प्रधानमंत्री बनना चाहिए'।

 

इसके बाद से पूरे तमिलनाडु में टीवीके कार्यकर्ताओं और विजय के प्रशंसकों ने जगह-जगह पोस्टर्स और होर्डिंग्स लगा दिए हैं, जिनमें विजय को 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए प्रधानमंत्री पद के चेहरे के रूप में पेश किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी इस बहस से जुड़े रील्स और वीडियो तेज़ी से वायरल हो रहे हैं।

कांग्रेस भड़की : 'दिल्ली में राहुल गांधी ही पीएम चेहरा'

टीवीके के इस नए दांव ने उनकी सहयोगी कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व को असहज और नाराज कर दिया है।

 

कांग्रेस नेताओं का रुख : तमिलनाडु कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने स्पष्ट किया है कि भले ही विजय तमिलनाडु में एक बड़ा राजनीतिक चेहरा हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर और दिल्ली की राजनीति में राहुल गांधी ही विपक्ष के प्रधानमंत्री पद के एकमात्र उम्मीदवार हैं।

 

कांग्रेस का कहना है कि 2029 के आम चुनाव में राहुल गांधी के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा, इसलिए टीवीके कार्यकर्ताओं का विजय को पीएम पद का दावेदार बताना जल्दबाजी और अनुचित है। विजय के मंत्रिमंडल में शामिल 2 विधायकों ने भी इसका खुला विरोध किया है और मंत्री पद से इस्तीफे की धमकी भी दी है। 

 

दूसरी ओर, राज्य के अन्य विपक्षी दलों ने विजय को प्रधानमंत्री बनाने की बात को 'एक बड़ा मज़ाक' करार देते हुए खारिज कर दिया है और कहा है कि ऐसा होने की कोई व्यावहारिक संभावना नहीं है। ALSO READ: तमिलनाडु CM विजय के यू-टर्न पर भड़के CJP नेता अभिजीत दीपके, कहा डर लग रहा है तो सुधारो व्यवस्था

DMK प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन का तीखा तंज

इस पूरे राजनीतिक घमासान के बीच डीएमके के मुख्य प्रवक्ता और कम्यूनिकेशन टीम के अध्यक्ष टीकेएस एलंगोवन (TKS Elangovan) ने टीवीके और विजय पर जोरदार कटाक्ष किया है।

 

“टीवीके को तमिलनाडु में स्पष्ट बहुमत (118 सीटें) खुद नहीं मिला था। विजय केवल कांग्रेस और वीसीके (VCK) जैसी पार्टियों के समर्थन के बल पर सरकार चला रहे हैं। जब राज्य में ही उनकी सरकार दूसरों के बैसाखियों पर टिकी है, तो वे पूरे देश के प्रधानमंत्री कैसे बन सकते हैं?”

 

उन्होंने आगे तंज कसते हुए कहा- “एक दौर था जब हमने मांग की थी कि तमिलनाडु को एक अलग देश बनाया जाए। अगर तमिलनाडु कभी एक अलग देश बनता है, तो शायद विजय वहां के प्रधानमंत्री जरूर बन सकते हैं!”

2029 के लिए क्या हैं सियासी मायने?

तमिलनाडु में सत्ता में आते ही टीवीके द्वारा राष्ट्रीय राजनीति में अपनी महत्वाकांक्षा जाहिर करना इस बात का संकेत है कि पार्टी खुद को सिर्फ राज्य तक सीमित नहीं रखना चाहती। हालांकि, कांग्रेस के साथ उभरते मतभेद और डीएमके का हमला यह दर्शाता है कि विजय के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमाना और क्षेत्रीय सहयोगियों को साधे रखना एक बड़ी चुनौती साबित होने वाला है।

Top News 4 September: देशभर में जन्माष्टमी की धूम, ISRO का EOS-05 लॉन्च, क्रूड 100 डॉलर के करीब

Top News 4 September: देशभर में जन्माष्टमी की धूम, ISRO का EOS-05 लॉन्च, क्रूड 100 डॉलर के करीब

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Top News 4 September : देशभर में कृष्ण जन्माष्टमी की धूम, इसरों ने अंतरिक्ष में ईओएस-05 उपग्रह प्रक्षेपित किया। इंडियन बास्केट में क्रूड फिर 100 डॉलर के करीब पहुंचा। नेपाल भीषण बाढ़ के बाद भूकंप से थर्राया। अभिजीत दीपके की पीएम मोदी को अनोख चुनौती। 4 सितंबर की बड़ी खबरें :   

 

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की धूम 

देशभर में जन्माष्‍टमी पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। मथुरा, वृंदावन समेत देशभर के कृष्ण मंदिरों में उमड़ी भक्तों की भीड़। शुक्रवार मध्यरात्रि 12 बजे होने वाले कृष्ण जन्मोत्सव की सभी तैयारियां हो चुकी है। पीएम नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दी। ALSO READ: कान्हा की नगरी में गूंजा कृष्ण नाम, जन्मभूमि से निकली भव्य श्रीकृष्णोत्सव शोभायात्रा, भक्तों का उमड़ा सैलाब

 

इसरो ने अंतरिक्ष में भेजा ईओएस-05 उपग्रह

इसरो ने ईओएस-05 उपग्रह का आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपण किया। जीएसएलवी-एफ17 रॉकेट के माध्यम से प्रक्षेपित उपग्रह भारत का पहला अत्याधुनिक भू-तुल्यकालिक इमेजिंग सैटेलाइट है।

 

क्रूड फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब

अमेरिका और ईरान के बीच जंग से तेल की कीमतें एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचती नजर आ रही है। इंडियन बास्केट में आज कच्चे तेल के दाम 99.35 डॉलर प्रति बैरल हो गए। ब्रेंट क्रूड 96 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड 91.92 डॉलर प्रति बैरल है। 

 

नेपाल में भूकंप

नेपाल और तिब्बत में ग्लेशियर आपदा के बाद आई विनाशकारी बाढ़ के बीच गुरुवार को तिब्बत में 5.0 तीव्रता का भूकंप आया। भारत के नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के मुताबिक, भूकंप का केंद्र उत्तराखंड के जोशीमठ से करीब 128 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में था। भूकंप के बाद फिलहाल किसी तरह के जान-माल के नुकसान की जानकारी सामने नहीं आई है। ALSO READ: Tibet Earthquake : भीषण बाढ़ की तबाही के बाद नेपाल पर एक और मुसीबत, हिमालयी क्षेत्र में क्यों मंडरा रहा है खतरा

 

अभिजीत दीपके की पीएम मोदी को चुनौती

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपनी शैक्षणिक योग्यता पर उठ रहे सवालों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक अनोखी चुनौती दी है। अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी से अपनी पढ़ाई के रिकॉर्ड पर हाल ही में शुरू हुए विवाद के बाद दीपके ने पीएम मोदी से कहा कि चलिए दोनों अपनी-अपनी डिग्री सार्वजनिक करते हैं। ALSO READ: अमेरिका में पढ़ाई पर घिरे अभिजीत दीपके ने PM मोदी को दी चुनौती, जानिए क्या कहा…

Manish Brahmbhatt: कॉकरोच जनता पार्टी में बगावत! जानिए कौन हैं मनीष ब्रह्मभट्ट, अभिजीत दिपके से अलग होकर बनाई CJP-लोकतांत्रिक

Who is Manish Brahmbhatt: सामाजिक कार्यकर्ता मनीष ब्रह्मभट्ट ने गुरुवार (3 सितंबर) को नई राजनीतिक पार्टी ‘कॉकरोच जनता पार्टी-लोकतांत्रिक (CJP-D)’ के गठन की घोषणा की। उन्होंने इसे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विकल्प के रूप में पेश किया। ब्रह्मभट्ट ने CJP के मुखिया अभिजीत दीपके के नेतृत्व वाले पार्टी पर उस छात्र आंदोलन से दूर जाने का आरोप लगाया, जिससे यह संगठन उभरा था। ब्रह्मभट्ट ने पहले CJP की राष्ट्रीय कार्यसमिति के गठन का विरोध किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन अब आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल के करीबी लोगों की मनमाने ढंग से चुनी गई टीम बन गया है। उन्होंने कहा कि आंदोलन में शामिल रहे स्वयंसेवकों तथा प्रदर्शनकारियों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं कर रहा है।

पीटीआई के मुताबिक ब्रह्मभट्ट ने कहा, “आज हम कॉकरोच जनता पार्टी-लोकतांत्रिक की शुरुआत कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि नया मंच आंदोलन में शामिल रहे लोगों की सामूहिक ताकत को एकजुट करने का प्रयास करेगा। CJP की शुरुआत पहले एक ऑनलाइन व्यंग्य मंच के रूप में हुई थी। बाद में इसने पेपर लीक और एजुकेशन से जुड़े अन्य मुद्दों को लेकर दिल्ली में छात्रों के नेतृत्व में आंदोलन किया। इसके बाद संगठन ने देशभर में अपनी गतिविधियों का विस्तार करने की योजना की घोषणा की।

दीपके पर AAP से जुड़े होने का आरोप!

ब्रह्मभट्ट ने आरोप लगाया कि CJP के नए नेतृत्व में आंदोलनकारियों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी से जुड़े कई लोगों को इसमें शामिल किया गया। जबकि अन्य राजनीतिक दलों से जुड़े स्वयंसेवकों और प्रदर्शनों में हिस्सा लेने वाले लोगों को बाहर रखा गया। ब्रह्मभट्ट ने सवाल किया, “आम आदमी पार्टी से जुड़े आठ लोगों को ही क्यों शामिल किया गया है?”

उन्होंने कहा कि शिवसेना, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल (RJD), भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस समेत विभिन्न दलों से जुड़े लोगों ने आंदोलन में हिस्सा लिया था। लेकिन नए संगठनात्मक ढांचे में उन्हें प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया। ब्रह्मभट्ट ने कहा कि उनके नेतृत्व वाला संगठन लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए एक राष्ट्रीय टीम बनाने और फैसले लेने की प्रक्रिया में स्वयंसेवकों और प्रदर्शनकारियों को शामिल करने की कोशिश करेगा।

कौन हैं मनीष ब्रह्मभट्ट?

सामाजिक कार्यकर्ता मनीष ब्रह्मभट्ट CJP आंदोलन से जुड़े प्रमुख वालंटियर और कोऑर्डिनेटर रहे हैं। चुनावी राजनीति में भी वे कोई नया चेहरा नहीं हैं। ‘कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) में बगावत’ करने वाले नेता के तौर पर उभरने से पहले ब्रह्मभट्ट ने 2022 का गुजरात विधानसभा चुनाव पालनपुर से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर लड़ा था। इस चुनाव में उन्हें 964 वोट (0.53%) मिले थे। वे पांचवें स्थान पर रहे थे। इस सीट से राज्य में सत्ताधारी BJP के अनिकेत गिरीशभाई ठाकर ने 95,588 वोट पाकर जीत दर्ज की थी।

पेशेवर और शैक्षणिक पृष्ठभूमि

‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ के ‘MyNeta’ प्लेटफॉर्म पर मौजूद ब्रह्मभट्ट के चुनावी हलफनामे के अनुसार, चुनाव के समय वे 37 साल के मैनेजमेंट कंसल्टेंट थे। उन्होंने हेमचंद्राचार्य नॉर्थ गुजरात यूनिवर्सिटी से B.Com और F.Y. LLB की पढ़ाई की है।

संपत्ति और विवाद से जुड़े मामले

चुनावी हलफनामे में उनकी घोषित संपत्ति लगभग 44.42 लाख रुपये थी। उन्होंने कोई देनदारी (कर्ज) नहीं बताई थी। उनके चुनावी हलफनामे में चार लंबित आपराधिक मामलों का भी जिक्र है। इनमें IPC की धारा 325 (जानबूझकर गंभीर चोट पहुंचाना), 505(2) (समूहों के बीच दुश्मनी या नफरत फैलाने वाले बयान), 114 (अपराध के समय मौजूद रहकर उकसाना), 323 (जानबूझकर चोट पहुंचाना), 153 (दंगा भड़काने के इरादे से उकसाना), 501 (मानहानि करने वाली सामग्री छापना) और 502 के तहत आरोप शामिल हैं। हालांकि, ये मामले लंबित हैं। इनमें उन्हें दोषी नहीं ठहराया गया है।

CJP में विवाद और भूख हड़ताल की वजह!

बताया जा रहा है कि ब्रह्मभट्ट का हालिया राजनीतिक उभार जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व में हुए छात्र-युवा आंदोलन से हुआ। विवाद तब शुरू हुआ जब अगस्त में CJP ने अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी और शीर्ष नेतृत्व का ऐलान किया। इसमें अभिजीत दीपके को राष्ट्रीय संयोजक, जबकि सौरव दास और आशुतोष रांका को सह-संयोजक बनाया गया। ब्रह्मभट्ट का दावा है कि इस आंदोलन से करीब 450 कोऑर्डिनेटर जुड़े थे। लेकिन 12 सदस्यीय कोर टीम बनाते समय जमीनी कार्यकर्ताओं को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।

अगस्त में जब दीपके ने अपने आवास पर कोर टीम की बैठक बुलाई, तो ब्रह्मभट्ट अपने साथी राहुल पांड्या के साथ विरोध दर्ज कराने पहुंचे थे। इस फैसले में प्रतिनिधित्व न मिलने पर कार्यकर्ताओं ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। हेल्थ बिगड़ने पर ब्रह्मभट्ट और पांड्या को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। उन्होंने कहा कि मूल आंदोलन देश का था। यह इसलिए सफल हुआ क्योंकि लोगों ने इसमें अपना खून-पसीना लगाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन की सफलता के बाद इसे बेच दिया गया।

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