Sensex लगातार दूसरे दिन लाल, एक्सपायरी को Nifty 24056 पर बंद, डूबे निवेशकों के ₹3.46 लाख करोड़

Sensex-Nifty closes red: उम्मीद से बेहतर जीडीपी ग्रोथ और निचले स्तर पर वैल्यू बाइंग से मार्केट में तेज रिकवरी आई लेकिन फिर कच्चे तेल के उबाल और बैंकिंग शेयरों की बिकवाली का दबाव अधिक भारी पड़ गया। इस दबाव में डे-हाई से सेंसेक्स 576 प्वाइंट्स टूट गया तो निफ्टी भी फिसलकर 24000 के नीचे आ गया। ब्रोडर लेवल पर मिडकैप स्पेस में अधिक दबाव दिखा। निफ्टी स्मॉलकैप 100 आज 0.25% कमजोर हुआ तो निफ्टी मिडकैप 100 भी 1.39% की गिरावट के साथ बंद हुआ।

सेक्टरवाइज एफएमसीजी और आईटी सेक्टर ने मार्केट को संभालने की काफी कोशिश की जिनके निफ्टी इंडेक्स करीब 1% मजबूत हुए। हालांकि ऑटो, बैंकिंग और फार्मा स्टॉक्स का दबाव अधिक भारी पड़ गया। निफ्टी फार्मा आज करीब डेढ़ फीसदी तो निफ्टी ऑटो और निफ्टी पीएसयू बैंक 1% से अधिक और निफ्टी प्राइवेट बैंक करीब 1% कमजोर हुआ। बिकवाली की इस आंधी में आज BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप ₹3 लाख करोड़ से अधिक गिर गया।

अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो महीने के पहले कारोबारी दिन आज 1 सितंबर निफ्टी की वीकली एक्सपायरी को सेंसेक्स (Sensex) 12.99 प्वाइंट्स यानी 0.02% की मामूली फिसलन के साथ 76,944.28 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 24.60 प्वाइंट्स यानी 0.10% की कमजोरी के साथ 24,055.80 पर बंद हुआ है।

इंट्रा-डे में आज सेंसेक्स और निफ्टी में काफी उठा-पटक दिखी। पहले तो सेंसेक्स 193.01 प्वाइंट्स गिरकर 76,764.26 तक आया था, जिससे फिर यह 467.61 प्वाइंट्स रिकवर होकर 77,231.87 के हाई तक पहुंचा लेकिन फिर इस हाई से यह 575.75 प्वाइंट्स टूटकर 76,656.12 तक आ गया। वहीं निफ्टी भी 70.90 प्वाइंट्स टूटकर 24,009.50 तक आया था, जिससे यह फिर 133.65 प्वाइंट्स ऊपर चढ़कर 24,143.15 तक पहुंचा था लेकिन फिर इस हाई लेवल से यह 190.60 प्वाइंट्स टूटकर 23,952.55 तक आ गया।

डूबे निवेशकों के ₹3.46 लाख करोड़

एक कारोबारी दिन पहले यानी 31 अगस्त 2026 को बीएसई पर लिस्टेड सभी शेयरों का कुल मार्केट कैप ₹4,91,58,204.57 करोड़ था। आज यानी 1 सितंबर 2026 को यह घटकर ₹4,88,11,607.93 करोड़ पर आ गया। इसका मतलब हुआ कि निवेशकों की पूंजी में आज ₹3,46,596.64 करोड़ की गिरावट आई है।

Sensex के 13 स्टॉक्स ग्रीन

सेंसेक्स पर 30 शेयर लिस्टेड हैं जिसमें 13 आज ग्रीन रहे। दिन के आखिरी में आज आईटीसी, एचसीएलटेक और इंफोसिस सबसे अधिक बढ़त के साथ बंद हुए तो दूसरी तरफ मारुति, एसबीआई और इंडिगो में सबसे अधिक गिरावट रही। नीचे सेंसेक्स पर लिस्टेड सभी शेयरों के लेटेस्ट भाव और आज उतार-चढ़ाव की डिटेल्स देख सकते हैं-

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

अफगानिस्तान वनडे के बाद अब टी-20 सीरीज से भी बाहर होने की कगार पर खड़े हार्दिक

जून माह में अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज से बाहर हुए हार्दिक पांड्या अब इस देश के खिलाफ इस महीने खेली जाने वाली टी-20 सीरीज से भी बाहर हो सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक उनके पैर में अकड़न है और टीम प्रबंधन उनको जल्द मैदान पर नहीं उतारना चाहता। इससे पहले अफगानिस्तान के खिलाफ एकदिवसीय सीरीज में  मांसपेशियां यानि कि हैमस्ट्रिंग के कारण वह बाहर रहे थे।

गौरतलब है कि मुख्य चयनकर्ता अजीत आगरकर ने यह कहा था कि हार्दिक पांड्या को दक्षिण अफ्रीका में होने वाले एकदिवसीय विश्वकप के लिए भारतीय टीम में शामिल करने की योजना है।

यह चोट उस योजना को पीछे ढकेलती है क्योंकि एक बार फिर हार्दिक पांड्या की खराब फिटनेस सबके सामने उजागर हो जाती है। वह भी तब जब उनको बैंगलूरू स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से हरी झंडी मिल गई थी।इससे पहले पिछले एकदिवसीय विश्वकप में भी बीच हार्दिक पांड्या टूर्नामेंट चोटिल होकर बाहर हो गए थे।

2 टी-20 विश्वकप जीत चुके हार्दिक पांड्या टी20 टीम में पंड्या की वापसी की संभावना कम लग रही है क्योंकि अगरकर ने साफ कर दिया था कि उनका इस्तेमाल ज्यादातर 50 ओवर प्रारूप में किया जाएगा।अगरकर ने कहा था, ‘‘वह अभी अफगानिस्तान सीरीज के लिए वनडे टीम का हिस्सा हैं। बुमराह की तरह, अगर हम उनसे अच्छा प्रदर्शन करवा सकें और उन्हें वनडे क्रिकेट के लिए फिट रख सकें। इस समय यही मुख्य मक़सद है। ’’

उन्होंने कहा था, ‘‘हम उन्हें कभी भी वापस ला सकते हैं। इससे हमें नितीश रेड्डी जैसे खिलाड़ी को टी20 क्रिकेट में कुछ मौके देने का भी मौका मिलता है। इसलिए पंड्या के मामले में टी20 के लिए थोड़ा आराम और रोटेशन होगा। ’’

Share Market Holiday: 4 सितंबर को कृष्ण जन्माष्टमी पर शेयर बाजार बंद या होगी ट्रेडिंग, क्या कहती है छुट्टियों की लिस्ट

इस साल देश में कृष्ण जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami 2026) शुक्रवार, 4 सितंबर की है। इस दिन पूरा देश भगवान श्रीकृष्ण के जन्मदिन को बड़ी ही धूमधाम से मनाएगा। इस त्योहार के चलते कई जगहों पर छुट्टी रहेगी। लेकिन शेयर बाजार में इस मौके पर कारोबार बंद नहीं होगा। BSE और NSE पर जन्माष्टमी के दिन भी बाकी कारोबारी दिनों की तरह ही शेयरों की ट्रेडिंग होगी। इसके अलावा कमोडिटीज में ट्रेडिंग का प्लेटफॉर्म MCX (Multi Commodity Exchange) भी खुला रहने वाला है।

वैसे तो शेयर बाजार और MCX हर शनिवार और रविवार को बंद रहते हैं। लेकिन इसके अलावा कुछ दूसरे खास मौकों और सार्वजनिक अवकाशों पर भी इनमें छुट्टी रहती है। शनिवार और रविवार के अलावा सितंबर महीने में अब शेयर बाजार में अगली छुट्टी 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी के मौके पर होगी। BSE पर इक्विटी सेगमेंट, इक्विटी डेरिवेटिव सेगमेंट, करेंसी डेरिवेटिव्स सेगमेंट्स, NDS-RST, ट्राई पार्टी रेपो सेगमेंट्स में ट्रेडिंग हॉलिडे है।वहीं कमोडिटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट और इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीप्ट्स (EGR) सेगमेंट में शाम का सेशन (शाम 5 बजे से 11:30/11:55 बजे तक) ओपन रहने वाला है।

NSE पर भी 14 सितंबर को इक्विटीज, इक्विटी डेरिवेटिव्स, कॉरपोरेट बॉन्ड्स, न्यू डेट सेगमेंट्स, निगोशिएटेड ट्रेड रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म, इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीप्ट्स, म्यूचुअल फंड्स, सिक्योरिटी लेंडिंग एंड बॉरोइंग स्कीम्स, करेंसी डेरिवेटिव्स और इंट्रेस्ट रेट डेरिवेटिव्स सेगमेंट्स में छुट्टी रहेगी। वहीं कमोडिटी डेरिवेटिव्स में सुबह के सेशन में ट्रेडिंग बंद रहेगी लेकिन शाम के सेशन (शाम 5 बजे से 11:30/11:55 बजे तक) में ट्रेडिंग चालू रहेगी।

बाकी बचे साल में शनिवार-रविवार के अलावा और कब बाजार रहेगा बंद

2 अक्टूबर: महात्मा गांधी जयंती

20 अक्टूबर: दशहरा

10 नवंबर: दिवाली-बलिप्रतिपदा

24 नवंबर: प्रकाश पर्व श्री गुरु नानक देव

25 दिसंबर: क्रिसमस

शनिवार/रविवार को पड़ रही छुट्टियां

8 नवंबर: दिवाली लक्ष्मी पूजन

दिवाली के मौके पर मुहूर्त ट्रेडिंग रविवार, 8 नवंबर 2026 को होगी। मुहूर्त ट्रेडिंग का समय बाद में घोषित किया जाएगा।

TBZ Share Price: ज्वेलरी कंपनी में खरीद का तूफान, 20% बढ़त के साथ अपर सर्किट; प्रमोटर बेचेंगे 74% हिस्सा

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

विश्वकप फाइनल में नाबाद अर्धशतक बनाने वाले बल्लेबाज को ऑस्ट्रेलिया ने किया वनडे टीम से ड्रॉप

मार्नस लाबुशेन को ज़िम्बाब्वे और साउथ अफ़्रीका के ख़िलाफ़ होने वाली वनडे सीरीज़ के लिए ऑस्ट्रेलिया की टीम से बाहर कर दिया गया है। इस बीच उन्हें टेस्ट टीम में अपनी जगह के बारे में फ़ैसला होने का इंतज़ार भी है।गौरतलब है कि मार्नस लाबुशेन वही बल्लेबाज हैं जिन्होंने भारत के खिलाफ एकदिवसीय विश्वकप फाइनल में  नाबाद अर्धशतक जड़ा था।

लाबुशेन ने जून में पाकिस्तान और बांग्लादेश के दौरों पर संघर्ष किया था, हालांकि बांग्लादेश के ख़िलाफ़ दूसरे वनडे में बल्लेबाज़ी क्रम में नीचे भेजे जाने के बाद उन्होंने नाबाद 55 रन बनाए थे। लेकिन ट्रैविस हेड और मिचेल मार्श की वनडे टीम में वापसी और चयनकर्ताओं के युवा खिलाड़ियों पर भरोसा दिखाने के कारण लाबुशेन टीम से बाहर हो गए हैं। साउथ अफ़्रीका के ख़िलाफ़ टेस्ट सीरीज़ के लिए टीम की घोषणा अगले सप्ताह की जाएगी।

इस दौरे पर जोएल डेविस के वनडे डेब्यू करने की संभावना है। न्यू साउथ वेल्स के इस ऑलराउंडर ने इस साल की शुरुआत में बांग्लादेश के ख़िलाफ़ T20I सीरीज़ में प्रभावित किया था। वहीं बाएं हाथ के बल्लेबाज ऑली पीक को एक और मौक़ा दिया गया है।

ऑस्ट्रेलिया के आधिकारिक वनडे कप्तान पैट कमिंस और उनके साथी तेज़ गेंदबाज़ मिचेल स्टार्क साउथ अफ़्रीका में टीम से जुड़ेंगे, वहीं जॉश हेज़लवुड दोनों वनडे सीरीज़ में खेलेंगे।

ज़िम्बाब्वे में मार्श टीम की कप्तानी करेंगे, जबकि साउथ अफ़्रीका में वह और कमिंस कप्तानी की ज़िम्मेदारी साझा करेंगे। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि कमिंस कितने मैच खेलते हैं।

ऑस्ट्रेलिया ने इस दौरे के लिए अपने तेज़ गेंदबाज़ी विकल्पों को मजबूत करते हुए स्पेंसर जॉनसन और बिली स्टेनलेक को भी टीम में शामिल किया है। बाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज़ जॉनसन ने अपना पिछला वनडे 2025 की शुरुआत में खेला था। लंबी चोट के बाद उन्होंने बांग्लादेश के ख़िलाफ़ T20I टीम में वापसी की थी।

स्टेनलेक पाकिस्तान दौरे के लिए वनडे टीम का हिस्सा थे और रावलपिंडी में खेले गए मैच में उन्होंने सात साल से अधिक समय बाद अपना पहला अंतरराष्ट्रीय मैच खेला था। हालांकि, सीरीज़ में उनके एकमात्र मैच में उन्हें कोई विकेट नहीं मिला था।

चयनकर्ताओं ने वनडे और ऑस्ट्रेलिया ए टीम के बीच खिलाड़ियों को बांटने का फैसला नहीं किया है। 
ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ वनडे मैच 15, 18 और 20 सितंबर को हरारे में खेले जाएंगे। साउथ अफ़्रीका के ख़िलाफ़ सीरीज़ के मैच 24, 27 और 30 सितंबर को क्रमशः डरबन, जोहैनसबर्ग और पोटचेफ़स्ट्रूम में होंगे।

ज़िम्बाब्वे और साउथ अफ़्रीका दौरे के लिए ऑस्ट्रेलिया की वनडे टीम

ज़ेवियर बार्टलेट, ऐलेक्स कैरी, कूपर कॉनली, पैट कमिंस (केवल साउथ अफ़्रीका, कप्तान), जोएल डेविस, नेथन एलिस, कैमरन ग्रीन, जॉश हेज़लवुड, ट्रैविस हेड, जॉश इंग्लिस, स्पेंसर जॉनसन, मिचेल मार्श, ऑली पीक, मैथ्यू रेनशॉ, बिली स्टेनलेक, मिचेल स्टार्क (केवल साउथ अफ़्रीका), ऐडम ज़ैम्पा

लेजेंड्स बूट्स क्यों टांग देते हैं?

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महान करियर का सबसे मुश्किल क्षण वह नहीं होता, जब आपको यह साबित करना हो कि आप अब भी जीत सकते हैं। मुश्किल क्षण वह होता है, जब आप यह तय करते हैं कि अब आपको कुछ और साबित करने की जरूरत नहीं है।

 

यही किसी महान खिलाड़ी की विदाई को इतना भावुक बना देता है। दुनिया आमतौर पर मानती है कि हार करियर खत्म करती है। लेकिन महान खिलाड़ी कई बार हार से पहले ही चले जाते हैं।

 

वे तब विदा होते हैं, जब तालियां अभी बाकी होती हैं। जब शरीर अभी कुछ और मुकाबले लड़ सकता है। जब दर्शक अभी एक और प्रदर्शन की मांग कर रहे होते हैं।

 

लियोनेल मेसी की विदाई कुछ ऐसी ही है।

 

39 साल की उम्र में मेसी अर्जेंटीना की जर्सी उतार रहे हैं—इसलिए नहीं कि दुनिया ने उन्हें बता दिया कि उनका समय खत्म हो गया है, बल्कि इसलिए कि उन्होंने खुद तय किया कि अब समय आ गया है।

यह फर्क महत्वपूर्ण है।

 

2022 में उन्होंने अर्जेंटीना को विश्व कप जिताया। 2026 में टीम को फिर फाइनल तक पहुंचाया और टूर्नामेंट में आठ गोल किए। अर्जेंटीना के लिए 207 मैच और 125 गोल के साथ वह अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल को अलविदा कह रहे हैं। क्लब फुटबॉल में उनकी कहानी अभी जारी है।

 

फिर भी उनके शब्दों में जीत का अहंकार नहीं, विदाई का दर्द है। फैसला उन्हें भीतर तक चोट पहुंचाता है, लेकिन वह समझते हैं कि यही सही समय है। मेसी की विदाई का सबसे मार्मिक हिस्सा यह नहीं कि वह जा रहे हैं। बल्कि यह कि वह तब जा रहे हैं जब उनके पास अभी भी देने के लिए कुछ बाकी दिखता है। 

 

यह बात सिर्फ इसलिए महत्वपूर्ण नहीं है कि मेसी दुनिया के महानतम फुटबॉलरों में से एक हैं। यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मेसी ने तब रुकने का फैसला किया जब वे अभी भी मेसी थे।

 

यही विदाई को सुंदर बनाता है। 

 

शायद यही महानता की सबसे कठिन परीक्षा है— जब आप अभी भी अच्छा खेल सकते हों, तब यह पहचानना कि अब रुक जाना चाहिए।

चार लेजेंड्स, चार अलग विदाइयां

सचिन तेंदुलकर ने क्रिकेट इसलिए नहीं छोड़ा कि उनका क्रिकेट से प्रेम खत्म हो गया था। 24 साल और 200 टेस्ट के बाद उन्होंने उस खेल से विदाई ली, जिसे 11 साल की उम्र से उन्होंने अपना जीवन बना लिया था।

 

कल्पना कीजिए—जिस व्यक्ति की सुबह, दोपहर, शाम और पहचान क्रिकेट के इर्द-गिर्द बनी हो, उसके लिए क्रिकेट छोड़ना किसी नौकरी छोड़ने जैसा नहीं था।

 

उनके लिए वो अपने ही एक हिस्से से अलग होना था।

 

रोज नेट्स पर न जाना। ड्रेसिंग रूम में न लौटना। दर्शकों का शोर न होना। बल्ले से टकराती बॉल की आवाज न सुनना। फिर भी एक समय उन्होंने समझा कि एक सपना अपनी पूर्णता तक पहुंच चुका है।

 

रोजर फेडरर के सामने सवाल कुछ और था। शरीर वर्षों से संकेत दे रहा था—चोटें, सर्जरी, लंबी रिकवरी और बार-बार लौटने की कोशिश।

 

41 की उम्र में उन्होंने आखिरकार स्वीकार किया कि कभी-कभी दिमाग अब भी दौड़ना चाहता है, लेकिन शरीर अपनी सीमा पहले ही बता चुका होता है। फेडरर ने अपने शरीर की सुनी। 

 

राफेल नडाल की कहानी में शरीर के साथ समय भी खड़ा था। 38 की उम्र में, वर्षों की चोटों से जूझने के बाद, उन्होंने स्वीकार किया कि खेल अब पहले जैसी शर्तों पर संभव नहीं था।

 

नडाल ने अपने करियर को “much more successful than I could have ever imagined” कहकर पीछे देखा। 

सचिन ने कहा—“जब मेरा दिल कहता है कि अब समय आ गया है।”

 

फेडरर ने अपने शरीर का संदेश सुना।

 

और मेसी कह रहे हैं—दर्द हो रहा है, लेकिन समय आ गया है।

 

चार महान खिलाड़ी। चार अलग कारण।

 

लेकिन एक बात समान—  किसी ने दुनिया से यह प्रमाणपत्र नहीं मांगा कि अब उसका समय पूरा हो चुका है।

 

उन्होंने खुद पहचाना। महान खिलाड़ी सिर्फ यह नहीं जानते कि कितना खेलना है; वे यह भी जानते हैं कि कब खेलना बंद करना है।

यहीं खेल अचानक जिंदगी बन जाता है

हममें से ज्यादातर लोग कभी विश्व कप फाइनल नहीं खेलेंगे। किसी स्टेडियम में 70 हजार लोग हमारा नाम नहीं पुकारेंगे। लेकिन जीवन किसी न किसी मोड़ पर हमसे वही सवाल पूछेगा— अब रुकना कब है?

 

50 की उम्र के बाद यह सवाल और साफ सुनाई देता है। तीन दशक तक आपका परिचय आपके काम से रहा— मैं पत्रकार हूं। मैं डॉक्टर हूं। मैं अधिकारी हूं। मैं कारोबारी हूं। 

 

फिर एक दिन designation चला जाता है। विजिटिंग कार्ड बदल जाता है। कुर्सी पर कोई और बैठ जाता है। और पहली बार सवाल नौकरी का नहीं रहता।

 

सवाल यह होता है—मैं कौन हूं, जब मैं वह नहीं रहा जो इतने वर्षों तक था?

 

शायद रिटायरमेंट का असली डर वेतन या पद खोने का नहीं है। अपने उस रूप को खो देने का है, जो नौकरी के साथ बना था।

 

इसीलिए कुछ लोग रिटायर नहीं होते—भले ही उन्हें पैसों की जरूरत न हो। उन्हें काम से ज्यादा जरूरी होने का एहसास चाहिए।
 

लेकिन जरूरी होना और मूल्यवान होना एक बात नहीं

यह उम्र के साथ सीखा जाने वाला शायद सबसे कठिन सबक है। कोई संस्था हमसे बड़ी होती है।

 

अखबार हमारे बिना भी निकलता है। कंपनी नया नेतृत्व खोज लेती है। टीम नया कप्तान चुन लेती है। 

दुनिया आगे बढ़ जाती है।

 

यह समझना कि आप replaceable हैं, पहले चोट करता है। फिर मुक्त करता है। क्योंकि जब आपको हर कीमत पर अपनी जगह बचाने की जरूरत नहीं रहती, तब आप एक बेहतर सवाल पूछ सकते हैं— “अब मैं वह क्या दे सकता हूं, जो खुद को साबित करने में व्यस्त रहते हुए नहीं दे पाया?”

 

यहीं अनुभव की असली कीमत शुरू होती है।

 

खिलाड़ी कोच बनता है।

 

बॉस mentor बनता है।

 

विशेषज्ञ शिक्षक बनता है।

 

और जो व्यक्ति कभी जगह के लिए लड़ता था, वह किसी और के लिए जगह बनाने लगता है।

 

शायद उम्र का सबसे बड़ा विशेषाधिकार यही है कि कमरे का सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति बनने की जरूरत खत्म हो जाए और किसी दूसरे को महत्वपूर्ण बनाने में खुशी मिलने लगे।

 

रिटायरमेंट की कोई उम्र नहीं होती

  • फेडरर 41 पर रुके। 
  • नडाल 38 पर।
  • सचिन 40 पर।

 

कुछ लोग इससे बहुत आगे तक काम करते हैं। कुछ को करना चाहिए। कुछ को नहीं।

 

सवाल बस चार हैं— 

  • क्या मैं सीख रहा हूं?
  • क्या मैं योगदान दे रहा हूं?
  • क्या शरीर रुकने का संकेत दे रहा है?
  • और क्या मैं किसी युवा को अपनी जगह देने के लिए तैयार हूं?

 

अगर जवाब बदल रहे हैं, तो अगली पारी सामने है। जरूरी नहीं कि वह संन्यास हो—शायद सिर्फ भूमिका बदलनी हो।

 

भगवद्गीता की एक परिचित पंक्ति है— “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।”

 

हम इसे आमतौर पर कर्म और उसके फल से विरक्ति के रूप में समझते हैं। लेकिन उम्र के एक पड़ाव पर इसका एक और अर्थ खुल सकता है— आपकी कीमत हमेशा स्कोरबोर्ड से तय नहीं हो सकती।

 

जिंदगी की पहली पारी में हम स्कोर गिनते हैं—पद, पैसा, पुरस्कार, उपलब्धियां, प्रभाव। 

 

दूसरी पारी में शायद सवाल बदल जाता है— “मैंने जो सीखा, अब उसका करूंगा क्या?” यहीं करियर धीरे-धीरे उपलब्धि से विरासत में बदलता है। 

 

हर किसी को विश्व कप फाइनल, 200वां टेस्ट या आखिरी ग्रैंड स्लैम जैसा विदाई मंच नहीं मिलेगा। हममें से अधिकांश की आखिरी विदाई बहुत शांत होगी। एक खाली होती मेज।

 

बदलता हुआ विजिटिंग कार्ड। एक आखिरी ईमेल। और बंद होता हुआ एक दरवाजा। लेकिन सवाल वही रहेगा— क्या हम तब रुकेंगे जब कोई और हमें बता देगा कि हमारा समय खत्म हो गया है?

 

या हममें इतनी समझ होगी कि उससे पहले पहचान लें कि हमारी सबसे अच्छी पारी अब कहीं और है? 

 

और फिर बात मेसी पर लौटती है।  

 

उन्होंने फुटबॉल नहीं छोड़ा है।

 

तेंदुलकर ने क्रिकेट छोड़ा, उसकी समझ नहीं।

 

फेडरर ने प्रतिस्पर्धी टेनिस छोड़ा, खेल से रिश्ता नहीं।

 

नडाल ने कोर्ट छोड़ा, टेनिस नहीं।

 

शायद महान संन्यास की यही खूबसूरती है— आप मंच छोड़ते हैं। अपनी कहानी नहीं।

 

क्योंकि महानता सिर्फ यह नहीं कि आपने खेल में कितने लंबे समय तक टिके रहे। महानता यह भी है कि कब समझा कि खेल ने आपको सब कुछ दे दिया है—और अब आपकी बारी है कुछ लौटाने की।

 

शायद बूट्स इसलिए नहीं टांगे जाते कि देने को कुछ नहीं बचा। कभी-कभी इसलिए टांगे जाते हैं क्योंकि जो बचा है, वह अगली पारी के लिए है।

TBZ Share Price: ज्वेलरी कंपनी में खरीद का तूफान, 20% बढ़त के साथ अपर सर्किट; प्रमोटर बेचेंगे 74% हिस्सा

जेम्स एंड ज्वेलरी कंपनी त्रिभुवनदास भीमजीदास झवेरी (TBZ) के शेयरहोल्डर्स के लिए 1 सितंबर का दिन बेहद शानदार रहा। शेयर 20 प्रतिशत उछला और बीएसई पर 366.50 रुपये पर अपर सर्किट लगा। यह शेयर का 52 सप्ताह का नया उच्च स्तर भी है। दरअसल GRT ज्वेलर्स इंडिया, TBZ के प्रमोटर्स से कंपनी में 74.12 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीद रही है। इसके लिए एक शेयर परचेज एग्रीमेंट साइन किया गया है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 74.12 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।

शेयर बाजारों को दी गई जानकारी के मुताबिक, यह खरीद 209 रुपये प्रति शेयर के भाव पर की जाएगी। इसके चलते डील की वैल्यू 1,033.71 करोड़ रुपये रहेगी। इस खरीद के पूरा होने के बाद GRT ज्वेलर्स TBZ के पब्लिक शेयरहोल्डर्स से लगभग 26 प्रतिशत की अतिरिक्त हिस्सेदारी की खरीद के लिए एक ओपन ऑफर भी लेकर आएगी। इस हिस्सेदारी को 249.60 रुपये प्रति शेयर के भाव पर खरीदा जाएगा। GRT Jewellers के अभी भारत में 68 स्टोर हैं। एक स्टोर सिंगापुर में भी है।

TBZ का शेयर 3 महीनों में 111 प्रतिशत मजबूत

शेयर में आई तेजी के बाद त्रिभुवनदास भीमजीदास झवेरी का मार्केट कैप बढ़कर 2400 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है। शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये है। शेयर एक सप्ताह में 30 प्रतिशत, 2 सप्ताह में 46 प्रतिशत और 3 महीनों में 111 प्रतिशत चढ़ा है। 6 महीनों में शेयर की कीमत करीब 150 प्रतिशत और 2 साल में 212 प्रतिशत उछली है।

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कंपनी की वित्तीय सेहत

त्रिभुवनदास भीमजीदास झवेरी का अप्रैल-जून 2026 तिमाही में स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 840.97 करोड़ रुपये रहा। इस बीच शुद्ध मुनाफा 32.85 करोड़ रुपये और प्रति शेयर अर्निंग करीब 5 करोड़ रुपये दर्ज की गई। पूरे वित्त वर्ष 2026 के दौरान कंपनी का स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 3,202.95 करोड़ रुपये, शुद्ध मुनाफा 200.49 करोड़ रुपये और प्रति शेयर अर्निंग 30 करोड़ रुपये रही। वित्त वर्ष 2026 तक TBZ पर 886 करोड़ रुपये का कर्ज था और फाइनेंस कॉस्ट 77 करोड़ रुपये थी।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

पीएम मोदी का नया मंत्र- Wed in India, आखिर क्या है इसके मायने?

पीएम मोदी का नया मंत्र- Wed in India, आखिर क्या है इसके मायने?

मेक इन इंडिया के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों को एक नया मंत्र दिया है 'Wed in India'। देश की मजबूत आर्थिक वृद्धि के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से 'स्वदेशी' और 'आत्मनिर्भरता' को अपनाने की भावुक अपील की है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की 7.8 प्रतिशत GDP विकास दर का हवाला देते हुए पीएम मोदी ने विशेष रूप से विदेशों में होने वाली खर्चीली शादियों पर चिंता जताई और 'Wed in India' (भारत में शादी) के मंत्र पर जोर दिया।

विदेशों में शादियों के चलन पर चिंता

पीएम मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि घूमने के अलावा अनावश्यक विदेश यात्राओं से बचना चाहिए और विदेशों में शादियां रचाने के चलन पर विराम लगना चाहिए। उन्होंने कहा कि विदेश यात्राएं अगर घूमने के लिए जाते हैं, तो नहीं जाना चाहिए। अगर विदेश में शादियां करते हैं, तो नहीं करनी चाहिए। ‘वेड इन इंडिया’ के मंत्र को जीना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने घरेलू उत्पादों की खपत बढ़ाने और बिना जरूरत के सोना न खरीदने की भी सलाह दी। ALSO READ: शहबाज शरीफ के सामने गरजे पीएम मोदी, आतंकवाद पर दोहरे मापदंड नहीं चलेंगे, जड़ से खत्म करना होगा इकोसिस्टम

विदेशी डेस्टिनेशन वेडिंग का सच

उद्योग अनुमानों और रिपोर्टों के अनुसार, भारत में हर साल लगभग 5000 अंतरराष्ट्रीय डेस्टिनेशन वेडिंग्स (विदेशों में) आयोजित की जाती हैं। हालांकि इसका कोई आधिकारिक सरकारी आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। लेकिन, कंज्यूमर और वेडिंग इंडस्ट्री रिपोर्ट्स के अनुसार हर साल इन 5000 शादियों के जरिए भारतीय परिवारों का लगभग 50 हजार करोड़ रुपए का खर्च देश से बाहर विदेशी वेडिंग डेस्टिनेशन (जैसे थाईलैंड, यूएई, श्रीलंका, वियतनाम और यूरोप) में चला जाता है। ALSO READ: 7.8% विकास दर पर गदगद हुए पीएम मोदी: बोले- दुनिया संकटों में फंसी है, फिर भी तेजी से आगे बढ़ रहा भारत

पीएम मोदी की अपील का उद्देश्य

पीएम मोदी की सीधी अपील का उद्देश्य इसी धन को देश के भीतर बनाए रखना है। भारत में डेस्टिनेशन वेडिंग का औसतन खर्च करीब 58 लाख रुपए आता है, वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह बजट बढ़कर लगभग 1.5 करोड़ रुपए तक पहुंच जाता है। भारतीयों के लिए थाइलैंड सबसे लोकप्रिय विदेशी वेडिंग डेस्टिनेशन बना हुआ है। इसके अलावा UAE, वियतनाम और श्रीलंका (2025 में 25% की वृद्धि) भी प्रमुख विकल्प हैं, जबकि इटली, स्पेन और ग्रीस का चयन लक्जरी शादियों के लिए किया जाता है। Policybazaar के आंकड़े दर्शाते हैं कि अंतरराष्ट्रीय शादियों के लिए ट्रैवल इंश्योरेंस की खरीद में लगातार दो वर्षों तक 27.4% की सालाना वृद्धि हुई है।

फाइनल की हार से टूट चुके थे मेस्सी, नहीं कर पाए करियर का परिकथा अंत

शायद दुनिया के महानतम फुटबॉलर और इस खेल के जादूगर ने 20 जुलाई की रात को ही तय कर लिया था कि बस अब बहुत हुआ अब मैदान से विदाई ले लेने में ही भलाई है। 20 जुलाई की रात को उनके आंखो में आसूं थे क्योंकि वह लगातार अर्जेंटीना को विश्वकप नहीं जिता पाए थे और ना ही अपने करियर का परिकथा अंत कर पाए थे।

FIFA World Cup का टूर्नामेंट जिस हिसाब से जा रहा था ऐसा लग रहा था कि लियोनेल मेस्सी के करियर का परिकथा अंत होगा। लेकिन उनके हाथ ना ही खिताब लगा और ना ही पैर पर गोल्डन बूट लगा। मेस्सी के लिए बस एक बात अच्छी रही कि  वह पिछले साल विजेता टीम का हिस्सा थे अन्यथा इस महान फुटबॉलर को बिना किसी वैश्विक खिताब के रवाना होना पड़ता।

आखिरी सीटी बजने पर उनकी आंखों में नमी और चेहरे पर निराशा को सभी ने देखा। एक तरफ स्पेन के खिलाड़ी जश्न मना रहे थे तो दूसरी तरफ मेस्सी और उनकी टीम स्टेडियम के दक्षिणी छोर पर अर्जेंटीना के समर्थकों को धन्यवाद दे रही थी और शायद माफी भी मांग रही थी।

बार्सीलोना और पेरिस सेंट जर्मेन के साथ 12 लीग और चार चैम्पियंस लीग खिताब जीतने के बाद मेस्सी ने जब यूरोपीय फुटबॉल से विदा लेकर तीन साल पहले एमएलएस का रूख किया तो लोगों को लगा कि वह रिटायर होकर अमेरिका में बस जायेंगे ।

लेकिन वह एक बार फिर अर्जेंटीना को विश्व कप फाइनल तक ले गए जिनमें उनके खाते में आठ गोल आये और चार में वह सहायक रहे। विश्व कप में उनके 21 गोल हो गए हैं और शनिवार को तीसरे स्थान के मुकाबले में फ्रांस के कीलियन एमबाप्पे (22 गोल) के आगे निकलने तक वह शीर्ष पर थे। तीन विश्व कप फाइनल खेलने वाले पहले खिलाड़ी मेस्सी के 125 अंतरराष्ट्रीय गोल हैं और वह सिर्फ क्रिस्टियानो रोनाल्डो (146) से पीछे हैं।

स्पेन के खिलाड़ी आखिरी सीटी बजने के बाद मेस्सी को ढांढस बंधाने आये। मेस्सी मैदान पर बैठ गए और हाथ पीछे रखकर एकटक देखते रहे। उपविजेता का पदक लेने आये तो मुस्कुराने की कोशिश की लेकिन नाकाम रहे।फिर अपने विचारों में खोये हुए, दुख को छिपाने की कोशिश करते मैदान के एक कोने से चुपचाप बाहर चले गए। विश्व कप से आखिरी बार।इस मैच के लगभग 1.5 महीने बाद लियोनेल मेस्सी ने जूता टांग दिया।

खटीमा में सीएम धामी ने उठाया चाय का लुत्फ, राहुल गांधी पर साधा निशाना

खटीमा में सीएम धामी ने उठाया चाय का लुत्फ, राहुल गांधी पर साधा निशाना

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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लोकल फॉर वोकल अभियान को बढ़ावा देने के लिए मेलाघाट रोड पर पैदल चलकर एक स्थानीय डेरी पहुंचे और चाय-फैन का लुत्फ उठाया। इस दौरान उन्होंने मेलाघाट मार्ग के दुकानदारों और स्थानीय नागरिकों से बातचीत की और राहुल गांधी पर भी तंज कसा। ALSO READ: उत्तराखंड सरकार का बड़ा कदम: महिला स्वयं सहायता समूहों को मिलेगा 5 लाख तक का ब्याज मुक्त ऋण

 

सीएम धामी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, खटीमा के मेलाघाट रोड पर भ्रमण के दौरान मिलन डेरी में चाय की चुस्कियों के साथ स्थानीय दुकानदारों और नागरिकों से आत्मीय संवाद किया। स्थानीय उत्पादों, दुकानदारों और छोटे कारोबारियों को प्रोत्साहित करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

 

उन्होंने कहा कि ‘वोकल फॉर लोकल’ आत्मनिर्भर उत्तराखंड की मजबूत नींव है। जब हम स्थानीय दुकानों और उत्पादों को अपनाएंगे, तभी हमारे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और स्वरोजगार की प्रेरणा मिलेगी।

राहुल गांधी की मानसिकता पर सवाल उठाए

चाय पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी की मानसिकता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों के साथ बैठकर चाय पीते हुए मुझे चाय का स्वाद और लोगों का अपनापन तो साफ दिखाई दिया, लेकिन कहीं भी कोई जाति नजर नहीं आई। राहुल गांधी द्वारा चाय के कप में भी जाति और भेदभाव तलाशना संकीर्ण राजनीति की पराकाष्ठा है। कप डिस्पोजेबल हो सकता है, लेकिन सोच इतनी डिस्पोजेबल नहीं होनी चाहिए कि चाय में भी जाति और राजनीति ढूंढ ली जाए।