El Nino Impact: अल नीनो और युद्ध के बीच भारत के मानसून से दुनिया को क्यों हो रही टेंशन? नए संकट की आहट!

El Nino Impact On Monsoon: वैश्विक स्तर पर खाद्य महंगाई की मार झेल चुकी दुनिया के सामने साल 2026 के अंत तक एक बार फिर से भोजन महंगा होने का नया संकट मंडराने लगा है। हमारी सहयोगी वेबसाइट ‘फर्स्टपोस्ट’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम एशिया और यूक्रेन में जारी युद्ध की वजह से फ्यूल और फर्टीलाइजर की सप्लाई काफी प्रभावित हो रही है।इसके अलावा दुनिया के सबसे बड़े चावल निर्यातक देश भारत में मानसून की धीमी और देर से हुई शुरुआत ने वैश्विक चावल उत्पादन और खाद्य सुरक्षा को लेकर दुनिया भर की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

कच्चे तेल के ऊंचे दाम, खाद आपूर्ति में रुकावट और जलवायु परिवर्तन से जुड़े जोखिम कृषि उत्पादन व उसके परिवहन की लागत को लगातार बढ़ा रहे हैं। इस वजह से दुनिया भर के उपभोक्ताओं को इस साल के अंत और वर्ष 2027 के दौरान खाद्य महंगाई का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि भारतीय अर्थव्यवस्था के संदर्भ में राहत की खबर यह है कि घरेलू स्तर पर सुधरती बारिश और पर्याप्त अनाज भंडार के दम पर भारत पर इसका असर सीमित रहने का अनुमान है।

संयुक्त राष्ट्र ने दिए संकेत: साल के अंत से फिर बढ़ेंगे खाने-पीने के सामान के दाम

साल 2022 में ग्लोबल महंगाई को बढ़ाने में खाद्य कीमतों ने मुख्य भूमिका निभाई थी लेकिन चालू वर्ष में ऊर्जा लागत अधिक रहने के बावजूद खाद्य कीमतें अपेक्षाकृत नियंत्रित रही हैं। हालांकि यह राहत अस्थाई साबित हो सकती है। रॉयटर्स को दिए इंटरव्यू में संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के मुख्य अर्थशास्त्री मैक्सिमो टोरेरो ने चेतावनी दी है कि कमोडिटी की कीमतें अब ज्यादा तेजी से बढ़ेंगी और साल के अंत तक खाद्य सामग्री के दाम बढ़ने शुरू हो जाएंगे।

इसका असर अगले साल यानी 2027 में और अधिक देखने को मिलेगा। टोरेरो के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कमोडिटी की बढ़ी हुई कीमतों का असर रिटेल यानी खुदरा बाजार में दिखने में तीन से छह महीने का समय लगता है।

हालांकि हाल के महीनों में गेहूं, मक्का और चावल जैसी प्रमुख फसलों की कीमतों में थोड़ी बढ़ोतरी देखी गई है, लेकिन यह मौजूदा समय की ठीक-ठाक पैदावार दिखा रही है। असली चुनौती अगली बुवाई के सीजन में उत्पादन लागत बढ़ने से सामने आएगी।

युद्ध की वजह से सप्लाई चेन पर बढ़ा भारी दबाव

ईरान से जुड़े मौजूदा संघर्ष ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा की है। ये दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा समुद्री मार्गों में से एक है। मैक्सिमो टोरेरो के मुताबिक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में किसी भी तरह का अवरोध कृषि प्रणालियों और उसके इनपुट्स पर सीधा असर डालता है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की ऊंची दरें सिंचाई, पैकेजिंग, प्रोसेसिंग और ट्रांसपोर्टेशन की लागत बढ़ा देती हैं। इसके अलावा नेचुरल गैस के दाम बढ़ने से खाद बनाना भी काफी महंगा हो जाता है।

इसी तरह यूक्रेन युद्ध के दौरान रूस के तेल और गैस इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुए हमलों ने डीजल और नेचुरल गैस के निर्यात पर असर डाला है। इससे दुनिया भर में किसानों की उत्पादन लागत बढ़ रही है। यूरोप, अमेरिका, ब्राजील और एशिया के किसान इस दबाव को महसूस कर रहे हैं और कम मुनाफे की वजह से फसलें उगाएं या न उगाएं, इस सवाल से जूझ रहे हैं।

भारत का मानसून बना दुनिया के लिए अहम वॉचपॉइंट

दुनिया में चावल के दूसरे सबसे बड़े उत्पादक और सबसे बड़े निर्यातक देश भारत का मानसून अंतरराष्ट्रीय खाद्य बाजारों के लिए एक प्रमुख वॉचपॉइंट बना हुआ है। भारत में मानसून की देरी से शुरुआत और औसत से कम बारिश ने चावल के उत्पादन और वैश्विक आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी थीं। अगर भारत के चावल उत्पादन में कोई बड़ी बाधा आती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई टाइट हो सकती है। इससे कीमतें तेजी से ऊपर जा सकती हैं।

भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर सीमित: बजाज एसेट मैनेजमेंट की रिपोर्ट

बजाज एसेट मैनेजमेंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में देर से आए मानसून का देश की इकॉनमी पर बड़ा निगेटिव असर पड़ने की संभावना बेहद कम है। रिपोर्ट में बताया गया है कि जून के आखिरी हफ्ते में बारिश काफी बेहतर हुई है। जुलाई में भी मानसूनी बारिश मजबूत रही। देश के प्रमुख नदी घाटियों और जलाशयों में पानी का स्तर बेहतर स्थिति में है। भारत के पास सरकारी गोदामों में अनाज का भंडार तय बफर नॉर्म्स से लगभग 5 गुना अधिक है। ये खाद्य कीमतों में उछाल को रोकने में एक मजबूत कवच का काम करेगा।

वित्त वर्ष 2027 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा महंगाई दर औसतन 5 से 5.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। ये खाद्य आपूर्ति के अस्थाई दबावों की वजह से होगी। हालांकि कोर इन्फ्लेशन दर कंट्रोल में है। भारत की रूरल इकॉनमी मजबूत बनी हुई है। मई में ट्रैक्टरों की बिक्री में सालाना आधार पर 19 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसी तरह एग्रीकल्चर क्रेडिट करीब 15 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ा। गैर-कृषि आय के मजबूत रहने से बुवाई में देरी के बावजूद ग्रामीण खपत बनी हुई है।

रिपोर्ट में ऐतिहासिक तथ्यों के हवाले से कहा गया कि जून 2026 पिछले एक सदी में सबसे शुष्क महीनों में से एक रहा लेकिन पूरे मानसून का नतीजा जून से तय नहीं होता। अगर अगस्त और सितंबर में बारिश का सिलसिला बेहतर बना रहता है तो मानसून घाटे की चिंताएं दूर हो जाएंगी और 2026 को एक रिकवरिंग मानसून वर्ष के रूप में देखा जाएगा।

बढ़ती लागत से किसानों ने घटाई बुवाई: अमेरिका से ऑस्ट्रेलिया तक संकट

बढ़ती उत्पादन लागत के कारण दुनिया भर के किसानों ने फसलों का रकबा घटाना शुरू कर दिया है। ईरान संघर्ष के शुरुआती तीन महीनों में वैश्विक स्तर पर गेहूं और मक्के की बुवाई में गिरावट आई है। कई अमेरिकी किसानों ने सोयाबीन की ओर रुख किया है क्योंकि इसमें खाद की जरूरत कम होती है। अमेरिकन फार्म ब्यूरो फेडरेशन के अनुमान के मुताबिक अतिरिक्‍त सरकारी मदद के बिना 2027 में 9 प्रमुख फसलें उगाने वाले अमेरिकी किसानों को कुल मिलाकर 32 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है।

दुनिया के बड़े कृषि निर्यातक देशों में शामिल ऑस्ट्रेलिया ने अनुमान लगाया है कि फ्यूल और खाद की अत्यधिक ऊंची कीमतों के साथ इनपुट्स की अनिश्चितता के चलते उसकी सर्दियों की फसल उत्पादन में 21 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है।

अल नीनो की आहट से खाद्य सुरक्षा पर मंडराया ‘परफेक्ट स्टॉर्म’

भू-राजनीतिक तनावों के साथ-साथ अल नीनो मौसम पैटर्न के मजबूत होने की आशंका ने संकट को और गहरा कर दिया है। एफएओ ने चेतावनी दी है कि अल नीनो की वजह से मौसम पर पड़ने वाला असर फसलों की पैदावार घट सकती है। ऐसा हुआ तो खाद्य आपूर्ति में कमी आएगी और दुनिया भर में करोड़ों लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा की चपेट में आ सकते हैं।

जलवायु का झटका, ऊर्जा की ऊंची कीमतें और फ्यूल-खाद की आपूर्ति में आ रही बाधा, ये सारी बातें मिलकर वैश्विक कृषि क्षेत्र के लिए एक परफेक्ट स्टॉर्म यानी चौतरफा संकट पैदा कर रही हैं। हालांकि कमोडिटी बाजार अब तक कुछ हद तक टिकाऊ बने रहे हैं लेकिन बढ़ती उत्पादन लागत का पूरा असर आने वाले महीनों में सुपरमार्केट और खुदरा दुकानों में सामानों के दामों में दिखाई देगा।

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इससे दुनिया भर के लोगों के लिए महंगाई का खतरा एक बार फिर बढ़ सकता है। दूसरी ओर भारत में सुधरती मानसूनी बारिश, प्रचुर अन्न भंडार और मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था के चलते देश के भीतर इसका व्यापक आर्थिक असर सीमित रहने की उम्मीद है।

Volkswagen launches Virtus Anniversary Edition at Rs 19.20 lakh

VW Virtus Anniversary Edition launched

Volkswagen has launched the Anniversary Edition of the Virtus sedan at Rs 19.20 lakh (ex-showroom, India). It arrives about four years after the model was first introduced in the India market. The Virtus Anniversary Edition is based on the top-spec GT Plus Sport trim of the VW sedan, so it shares several of the latter’s visual aesthetics and feature set. The price of the Anniversary Edition identical to the trim that it’s based on, despite offering additional equipment.

  • Based on the top-spec GT Plus Sport trim
  • Finished in an exclusive Avocado Pearl colour
  • Features puddle lamps, 360-degree cameras, front parking sensors and more
  • Only available with the 1.5 TSI engine and DSG gearbox

Volkswagen Virtus Anniversary Edition: Exterior and interior features

The Anniversary Edition of the Volkswagen Virtus comes finished in an Avocado Pearl exterior colour, which Volkswagen says is exclusive to this edition. It also gets a contrasting black roof, black alloy wheels with red brake calipers and a black boot-lip spoiler – all of which are shared with the GT Plus Sport. Other shared design features include a gloss-black front bumper trim, darkened headlamps and tail-lamps housings, an all-black interior theme with gloss-black inserts on the dashboard.

Volkswagen Virtus GT Plus Sport interior
Volkswagen Virtus GT Plus Sport’s interior shown for representational purposes only.

On the equipment front, the Virtus Anniversary Edition is offered with official Volkswagen accessories like puddle lamps, a 360-degree camera system and front parking sensors. Since it’s based on the fully loaded GT Plus Sport trim, the Anniversary Edition shares all of its other feature set too. This includes the likes of leatherette upholstery, red ambient lighting, ventilated front seats, a powered sunroof, a 10-inch touch-infotainment screen, automatic climate control, an 8-speaker audio system and paddle shifters.

Safety features of the limited-run Virtus Anniversary Edition are also familiar. This means that it gets 6 airbags, electronic stability control, traction control, hill-start assist, and ABS with EBD, among others. 

Volkswagen Virtus Anniversary Edition: Engine and gearbox

Under the bonnet of the Volkswagen Virtus Anniversary Edition is the same 1.5 TSI engine and 7-speed DSG (dual-clutch automatic) gearbox. This 1.5-litre four-cylinder turbo-petrol mill features direct injection, developing 150hp and 250Nm of torque. This engine and gearbox pairing has a claimed fuel economy of 19.62kpl. Meanwhile, the standard Virtus is also available with a 1.0-litre three-cylinder turbo-petrol engine with direct injection, which makes 115hp and 178Nm. This TSI unit can be mated with either a 6-speed manual or a 6-speed torque-converter automatic transmission.

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3 साल बाद पाकिस्तान को मिली विदेशी धरती पर जीत, इंडीज को 8 विकेट से हराया

PAKvsWI पाकिस्तान ने वेस्टइंडीज को 8 विकेटों से हराकर 3 साल (1,104 दिन )बाद किसी विदेशी धरती पर जीत का स्वाद चखा। पाकिस्तान ने इस तरह दूसरा टेस्ट 8 विकेट से जीतकर वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज 1-1 से बराबर कर ली। कप्तान बाबर आजम की वापसी के बाद यह पहली जीत है। कप्तान बाबर आजम और जस्टीन ग्रीव्स को मैन ऑफ द सीरीज पुरुस्कार से नवाजा गया।

वेस्टइंडीज ने पहली पारी में 344 रन बनाए। जिसके जवाब ने पाकिस्तान ने 387 रन बनाए। पहली पारी में मामूली 43 रनों की बढ़त काफी बड़ी दिखने लग गई जब वेस्टइंडीज सिर्फ 117 रनों पर ऑलआउट हो गई। पाकिस्तान को दिए गए 75 रनों का पीछा टीम ने सलामी बल्लेबाजों को गंवा कर पूरा कर लिया। तब क्रीज पर बाबर आजम और अबदुल्ला शफीक थे जिन्होंने पहली पारी में 160 रनों की नाबाद पारी खेली थी।

103 रनों पर 6 विकेट खो चुकी वेस्टइंडीज के अगले 4 विकेट सिर्फ 7 रनों पर गिर गए। पाकिस्तान की ओर से अजान औवेस और इमाम उल हक सस्ते में आउट हो गए। बाबर आजम और अबदुल्ला शफीक ने 35 रनों की नाबाद साझेदारी कर टीम को एतिहासिक जीत दिलाई। दोनों ही बल्लेबाजों ने नाबाद 24 रनों का योगदान दिया।

इस जीत के साथ पाकिस्तान विश्व टेस्ट चैंपियनशिप में आठवें स्थान पर पहुंच गई और वेस्टइंडीज अंतिम पायदान नौंवे पर खिसक गई है। पाकिस्तान का जीत प्रतिशन 22.22 है वहीं वेस्टइंडीज का जीत प्रतिशत 20.83 है।


₹50 हजार की स्कूटी पर 10 लाख रुपये का चालान! गुरुग्राम में पुलिस ने रोका तो सामने आया 96 बार नियम तोड़ने का हैरान करने वाला रिकॉर्ड

गुरुग्राम में ट्रैफिक नियमों को लेकर पुलिस की सख्ती के बीच एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सभी का ध्यान खींच लिया है। राजीव चौक पर नियमित जांच के दौरान पुलिस ने एक स्कूटी सवार को रोका, लेकिन दस्तावेजों की जांच आगे बढ़ते ही मामला काफी अलग निकला। वाहन के रिकॉर्ड में कुछ ऐसा सामने आया, जिसने पुलिस अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। यह मामला सिर्फ एक चालान या नियम उल्लंघन तक सीमित नहीं था, बल्कि लंबे समय से चली आ रही लापरवाही का खुलासा कर रहा था।

ट्रैफिक पुलिस ने कार्रवाई करते हुए वाहन को जब्त कर लिया और अन्य वाहन चालकों को भी नियमों का पालन करने की सलाह दी है। आखिर स्कूटी के रिकॉर्ड में ऐसा क्या मिला, जिसने इसे चर्चा का विषय बना दिया? आगे जानिए पूरी कहानी।

96 बार तोड़े ट्रैफिक नियम, 10 लाख रुपये का जुर्माना लंबित

जांच में पता चला कि इस स्कूटी के खिलाफ कुल 96 चालान दर्ज थे, जिनकी जुर्माना राशि करीब 10 लाख रुपये तक पहुंच चुकी थी। ये सभी चालान लंबे समय से लंबित थे। पुलिस के अनुसार, वाहन पर कई बार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन किया गया था, लेकिन चालान का भुगतान नहीं किया गया।

गलत दिशा में चला रहा था स्कूटर, हेलमेट भी नहीं था

पुलिस ने बताया कि जब युवक को रोका गया, उस समय भी वह नियमों की अनदेखी कर रहा था। वह गलत दिशा में स्कूटी चला रहा था और उसने हेलमेट भी नहीं पहना था। पूछताछ के दौरान जब उससे वाहन के दस्तावेज मांगे गए तो वह कोई कागज पेश नहीं कर सका।

कैमरों और ई-चालान से पकड़ी गईं गलतियां

ट्रैफिक अधिकारियों के मुताबिक, स्कूटी पर दर्ज चालानों में कुछ ई-चालान मशीन के जरिए जारी किए गए थे, जबकि ज्यादातर चालान कैमरा आधारित निगरानी प्रणाली से बनाए गए थे। ये चालान मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के अलग-अलग नियमों के उल्लंघन से जुड़े थे।

2017 मॉडल की स्कूटी बहन के नाम पर थी

पूछताछ में युवक की पहचान निशांत के रूप में हुई। जानकारी के मुताबिक, वह मेदांता अस्पताल के पास एक मेडिकल स्टोर पर काम करता है। यह 2017 मॉडल की स्कूटी उसकी बहन दीपिका के नाम पर रजिस्टर्ड थी।

पुलिस ने वाहन मालिकों को दी चेतावनी

गुरुग्राम ट्रैफिक पुलिस ने कार्रवाई करते हुए स्कूटी को जब्त कर लिया। अधिकारियों ने बताया कि लंबित चालान वाले वाहन मालिकों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है और लोगों से अपील की गई है कि वे समय पर अपने चालानों का भुगतान करें, ताकि भविष्य में ऐसी कार्रवाई से बचा जा सके।

Independence Day 2026: भारत का अनोखा शहर! जहां 15 अगस्त की सुबह नहीं, 14 अगस्त की रात ही फहराया जाता है तिरंगा

शाकिब अल हसन के घर पेट्रोल बम से हमला, फेंके गए पत्थर (Video)

Shakib al hasan

बांग्लादेश क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और दिग्गज ऑलराउंडर शाकिब अल हसन के बांग्लादेश के मगुरा जिले में स्थित उनके घर पर अज्ञात लोगों ने हमला कर दिया। इस हमले में ना केवल पेट्रोल बम बल्कि घरों पर पत्थर फेंके गए। इसके अलावा घर को आग लगाने की भी कोशिश हुई।

शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार के सत्ता से हटने के बाद से सुरक्षा कारणों और अपने खिलाफ चल रहे कानूनी मामलों की वजह से अवामी लीग के सांसद शाकिब बांग्लादेश नहीं लौटे हैं।हालांकि बांग्लादेश के इस महान खिलाड़ी को उम्मीद है कि क्रिकेट से संन्यास लेने से पहले वह अपने देश के लिए एक आखिरी मैच जरूर खेलेंगे।

शाकिब का रहा भारत समर्थित विमर्श

पूर्व कप्तान शाकिब अल हसन ने इस साल की शुरुआत में भारत में हुए टी20 विश्व कप से बांग्लादेश के बाहर रहने को एक ‘बड़ी गलती’ करार किया और उम्मीद जताई है कि अगर दोनों टीम कुछ श्रृंखला खेलती हैं तो उनके बीच क्रिकेट के रिश्ते बेहतर हो सकते हैं।

बांग्लादेश ने अपने तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को आईपीएल टीम कोलकाता नाइट राइडर्स से बाहर किए जाने के बाद टी20 विश्व कप के लिए भारत का दौरा नहीं किया था जिसकी मेजबानी भारत और श्रीलंका ने मिलकर की थी। जिसके बाद बांग्लादेश की जगह स्कॉटलैंड को टूर्नामेंट में शामिल किया गया।शाकिब ने कोलकाता नाइट राइडर्स और सनराइजर्स हैदराबाद के लिए आईपीएल के नौ सत्र खेले हैं।


शाकिब  जनवरी 2024  से अगस्त तक अवामी लीग के सांसद थे, उसके बाद छात्रों के नेतृत्व वाली क्रांति में सरकार गिर गई थी। हसीना 5 अगस्त को भारत भाग गईं, जबकि शाकिब तब से अब तक घर नहीं लौटे हैं। उन्होंने  साल 2024 में पाकिस्तान और भारत के ख़िलाफ टेस्ट मैच खेले थे, लेकिन पिछले 24 महीनों में उन्हें राष्ट्रीय टीम में नहीं चुना गया है, जबकि वह अन्य जगहों पर फ्रेंचाइजी लीग में खेलते रहे हैं।

Shiprocket IPO: 12 अगस्त को खुलेगा आईपीओ! ₹92-₹97 तय हुआ प्राइस बैंड, निवेश से पहले जानिए पूरी डिटेल

Shiprocket IPO Price Band and Date: एमएसएमई, डी2सी ब्रांड्स और बड़े रिटेलर्स को ई-कॉमर्स सॉल्यूशन मुहैया कराने वाली टेक प्लेटफॉर्म शिपरॉकेट अपना आईपीओ ला रही है। कंपनी ने अपने ₹1,617.5 करोड़ के इश्यू के लिए प्राइस बैंड ₹92 से ₹97 प्रति शेयर तय किया है। अपर प्राइस बैंड पर कंपनी का वैल्यूएशन ₹7,057.5 करोड़ बैठ रहा है। अगर आप भी इस टेक प्लेटफॉर्म के आईपीओ में पैसा लगाने की सोच रहे हैं, तो आवेदन करने से पहले इश्यू से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण डिटेल्स जान लें।

Shiprocket IPO: कब से कब तक कर सकेंगे आवेदन?

  • एंकर बुक ओपनिंग: 11 अगस्त 2026
  • आईपीओ ओपनिंग-क्लोजिंग डेट: 12-14 अगस्त 2026
  • न्यूनतम निवेश: ₹97 के अपर प्राइस बैंड के हिसाब से रिटेल निवेशकों को 1 लॉट के लिए कम से कम ₹14,938 लगाने होंगे।
  • अलॉटमेंट की तारीख: 17 अगस्त 2026
  • शेयर लिस्टिंग डेट: 19 अगस्त 2026

इश्यू का साइज 

गुड़गांव बेस्ड इस कंपनी के कुल ₹1,617.5 करोड़ के इश्यू में फ्रेश इश्यू और ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल हैं। कंपनी ₹885.5 करोड़ मूल्य के नए शेयर जारी करेगी। साथ ही मौजूदा निवेशक और प्रमोटर्स जैसे- Lightrock, Tribe Capital, Moore Strategic Ventures, साहिल गोयल, गौतम कपूर आदि ₹732 करोड़ के शेयर बेचेंगे। कंपनी ने अपने कर्मचारियों को अंतिम इश्यू प्राइस पर ₹9 प्रति शेयर की विशेष छूट दी है, जिनके लिए ₹1 करोड़ के शेयर आरक्षित रखे गए हैं।

आईपीओ से जुटाए पैसों का क्या करेगी कंपनी?

शिपरॉकेट नेट फ्रेश इश्यू से मिलने वाले पैसों का इस्तेमाल इस प्रकार करेगी:

₹365.6 करोड़: अपने प्लेटफॉर्म के विकास और विस्तार में खर्च करेगी।

₹210 करोड़: मौजूदा कर्ज को चुकाने में इस्तेमाल किया जाएगा। (10 जुलाई 2026 तक कंपनी पर ₹244.5 करोड़ का कुल कर्ज था)।

बकाया राशि: अधिग्रहण और सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए उपयोग होगी।

कैसी है कंपनी की वित्तीय सेहत?

कंपनी का प्रदर्शन रेवेन्यू के मामले में मजबूत रहा है। वित्त वर्ष 2026 (FY26) में कंपनी का रेवेन्यू साल-दर-साल (YoY) 24% बढ़कर ₹2,024.1 करोड़ पर पहुंच गया। हालांकि कंपनी अभी भी घाटे में है, लेकिन FY24 के ₹595.1 करोड़ के शुद्ध घाटे के मुकाबले FY26 में घाटा काफी घटकर ₹79.2 करोड़ रह गया है। इस आईपीओ के मर्चेंट बैंकर्स एक्सिस कैपिटल, बोफा सिक्योरिटीज इंडिया, जेएम फाइनेंशियल और कोटक महिंद्रा कैपिटल कंपनी हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Independence Day 2026: भारत का अनोखा शहर! जहां 15 अगस्त की सुबह नहीं, 14 अगस्त की रात ही फहराया जाता है तिरंगा

स्वतंत्रता दिवस भारत के लिए गर्व और भावनाओं से जुड़ा खास दिन है। हर साल 15 अगस्त को देशभर में तिरंगा फहराकर आजादी का जश्न मनाया जाता है। लेकिन बिहार के पूर्णिया शहर में इस मौके को मनाने का अंदाज बाकी जगहों से बिल्कुल अलग है। यहां लोग 15 अगस्त की सुबह का इंतजार नहीं करते, बल्कि 14 अगस्त की आधी रात को ही तिरंगा फहराते हैं। यह परंपरा आजादी मिलने के उस ऐतिहासिक पल से जुड़ी है, जब भारत ने रात 12 बजे के बाद स्वतंत्रता की घोषणा सुनी थी।

पूर्णिया का यह अनोखा जश्न दशकों पुरानी कहानी और स्वतंत्रता सेनानियों की भावनाओं को आज भी जीवित रखता है। यही वजह है कि हर साल रात के समय झंडा चौक पर बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं और उस गौरवशाली पल को याद करते हैं।

आधी रात को मिली थी आजादी की खबर

यह परंपरा कोई नई शुरुआत नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें आजादी की उस ऐतिहासिक रात से जुड़ी हैं। 14 अगस्त 1947 की रात पूरा देश उस पल का इंतजार कर रहा था, जब भारत ब्रिटिश शासन से मुक्त होने वाला था। ऑल इंडिया रेडियो पर स्वतंत्रता की घोषणा का प्रसारण हुआ और रात 12 बजकर 1 मिनट पर देश ने आजादी की खबर सुनी।

पूर्णिया के स्वतंत्रता सेनानी ने रचा था इतिहास

जब पूरा देश उस ऐतिहासिक पल का गवाह बन रहा था, तब पूर्णिया के स्वतंत्रता सेनानी रामेश्वर प्रसाद सिंह ने सुबह होने का इंतजार नहीं किया। उन्होंने अपने दो साथियों रामरतन शाह और शमशुल हक के साथ रात में ही शहर के बीचों-बीच पहुंचकर तिरंगा फहराया। आज जिस जगह को ‘झंडा चौक’ के नाम से जाना जाता है, वहीं पहली बार उस रात आजादी का झंडा लहराया गया था।

तिरंगा फहरते ही गूंज उठा था पूरा इलाका

बताया जाता है कि जैसे ही झंडा ऊपर उठा, वहां मौजूद लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। उस पल आजादी सिर्फ रेडियो पर सुनाई देने वाली खबर नहीं रही, बल्कि लोगों के सामने एक ऐसा एहसास बन गई जिसे वे अपनी आंखों से देख और महसूस कर सकते थे।

आज भी कायम है 14 अगस्त की आधी रात वाली परंपरा

दशकों बाद भी पूर्णिया के लोग इस ऐतिहासिक परंपरा को निभा रहे हैं। हर साल 14 अगस्त की रात झंडा चौक पर लोग इकट्ठा होते हैं और उसी समय तिरंगा फहराते हैं, जब देश को पहली बार आजादी मिली थी। जब पूरा भारत 15 अगस्त की सुबह स्वतंत्रता दिवस मनाता है, वहीं पूर्णिया कुछ घंटे पहले ही उस गौरवशाली पल को याद कर लेता है।

झंडा चौक बना आजादी की यादों का प्रतीक

आज झंडा चौक सिर्फ एक स्थान नहीं, बल्कि इतिहास की उस रात का प्रतीक बन चुका है। ये जगह याद दिलाती है कि आजादी का जश्न केवल एक तारीख नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के संघर्ष और भावनाओं से जुड़ा एक ऐतिहासिक एहसास है।

आखिरी बार बेटियों का इंतजार करते रहे कारोबारी पिता, लेकिन अर्थी को मिला सिर्फ Video Call का सहारा, ₹5100 ट्रांसफर कर तोड़ा खून का रिश्ता

Samay Raina: ‘अब इस पर बोलो…’, समय रैना ने ‘इंडियाज़ गॉट लेटेंट’ शो में कश्मीरी पंडितों का जिक्र कर मुनव्वर फारूकी से मांगा रिएक्शन

Samay Raina: ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ के सिर्फ मेंबर्स के लिए बने एक एपिसोड में समय रैना ने अपनी कश्मीरी जड़ों का जिक्र किया। यह बातचीत तब शुरू हुई जब कंटेस्टेंट वानिका रैक्ता से पूछा गया कि क्या वह किसी अमीर परिवार से हैं। वानिका ने बताया कि उनके परिवार के पास शिमला में सेब के बाग हैं। उन्होंने आगे कहा कि भले ही उनके भाई ने जमीन का कुछ हिस्सा बेच दिया हो, फिर भी उनके पास कई बाग हैं, और उनके माता-पिता दोनों सरकारी टीचर हैं।

सेब के बागानों के बारे में सुनने के बाद, राघव जुयाल ने समय की ओर रुख किया और कहा, “तुम्हारा भी तो था ना सेब का बगीचा कश्मीर में?” समय ने जवाब दिया, “हमारा तो बहुत कुछ था।” यह कमेंट उग्रवाद के दौरान घाटी से कश्मीरी पंडितों के विस्थापन को संदर्भित करती प्रतीत होती है, एक ऐसा अनुभव जिसके बारे में समय ने पहले भी सार्वजनिक रूप से बात की है।

जब राघव ने धीरे से समय की पीठ थपथपाई, तो समय ने पैनल में शामिल मुनव्वर फारूकी की ओर मुड़कर मजाक में कहा, “अब इस पर बोलो?”मुनव्वर ने तुरंत जवाब दिया, “मैं नहीं था,” जिससे पैनल में मौजूद लोग हंस पड़े। समय पहले भी कश्मीरी पंडितों के पलायन के बारे में बात कर चुके हैं

यह पहली बार नहीं है जब समय ने कश्मीर से अपने परिवार के जुड़ाव के बारे में बात की है। इस साल की शुरुआत में, अपने स्टैंड-अप स्पेशल में उन्होंने बताया था कि उग्रवाद बढ़ने के बाद उनके परिवार को घाटी छोड़नी पड़ी थी। उन्होंने कहा कि वे जान बचाने के लिए वहां से भागे थे। ‘दोस्तकास्ट’ पॉडकास्ट पर उन्होंने 1990 में कश्मीरी पंडितों के पलायन के बारे में विस्तार से बात हुए बताया कि कैसे उनका परिवार रातों-रात घाटी से निकल गया और इसका उन पर कितना गहरा असर पड़ा।

समय ने अपने परिवार को बचाने का श्रेय कश्मीरी मुसलमानों को दिया था। पॉडकास्ट पर उन्होंने याद करते हुए कहा, “मेरी आंटी बहुत हिम्मत वाली थीं। वह चुपचाप उस क्लिनिक में गईं जहां मेरे दादाजी काम करते थे। किस्मत से, उनकी इतनी अच्छी छवि थी कि वहां के कश्मीरी मुसलमानों ने उन्हें और परिवार को वहां से निकलने में मदद की। उन्होंने कहा कि उन्हें कुछ नहीं होगा, क्योंकि उन्होंने लोगों के लिए बहुत कुछ किया था। कश्मीरी मुसलमानों ने ही मेरे दादाजी को उस स्थिति से बाहर निकलने में मदद की थी।”

‘इंडियाज़ गॉट लेटेंट’ का दूसरा सीज़न नेटफ़्लिक्स और समय रैना के यूट्यूब चैनल पर स्ट्रीम होता है। 20 जून, 2026 को प्रीमियर होने के बाद से ही यह शो हर दो हफ़्ते में आने वाले फ़ॉर्मेट को फ़ॉलो कर रहा है, जिसमें हर एपिसोड में नए कंटेस्टेंट और सेलिब्रिटी पैनलिस्ट शामिल होते हैं।

Oneindig Tech IPO Listing: लिस्ट होते ही अपर सर्किट, 25% प्रीमियम पर एंट्री के बाद और चढ़ा ₹96 का शेयर

Oneindig Tech IPO Listing: देश भर में सोलर पावर प्रोजेक्ट्स पर काम करने वाली वनइंडिग टेक के शेयरों की आज BSE SME प्लेटफॉर्म पर धांसू एंट्री हुई। इसका आईपीओ ओवरऑल 1.73 गुना भरा था। इसके आईपीओ के तहत ₹96 के भाव पर शेयर जारी हुए हैं। आज BSE SME पर इसकी ₹120.00 पर एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को 25% का लिस्टिंग गेन (Oneindig Tech Listing Gain) मिला। लिस्टिंग के बाद शेयर और ऊपर चढ़े। उछलकर यह ₹126.00 (Oneindig Tech Share Price) के अपर सर्किट पर पहुंच गया यानी कि आईपीओ निवेशक अब 31.25% मुनाफे में हैं।

Oneindig Tech IPO के पैसे कैसे होंगे खर्च

वनइंडिग टेक का ₹28 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 30 जुलाई से 3 अगस्त तक खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों का अच्छा रिस्पांस मिला था और ओवरऑल यह 1.73 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 1.05 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 2.40 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 1.84 गुना भरा था। इस आईपीओ के तहत ₹10 की फेस वैल्यू वाले 28.80 लाख नए शेयर जारी हुए हैं। इन शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹20.00 करोड़ वर्किंग कैपिटल की जरूरतों और बाकी पैसे आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।

Oneindig Tech के बारे में

वनइंडिंग टेक एक रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी है जो देश भर में सोलर पावर प्रोजेक्ट्स के लिए EPC (इंजीनियरिंग, प्रोक्यूरमेंट एंड कमीशनिंग) सर्विसेज मुहैया कराती है। यह रेजिडेंशियल, C&I (कमर्शियल एंड इंडस्ट्रियल) रूफटॉप, ग्राउंड-माउंटेड सोलर प्रोजेक्ट्स और O&M (ऑपरेशंस एंड मेंटेनेंस) सर्विसेज ऑफर करती है तो PPA (पावर पर्चेज एग्रीमेंट्स) के जरिए IPP (इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर) एक्टिविटीज करती है। साथ ही यह सोलर पीवी मॉड्यूल्स, इंवर्टर्स, बैट्रीज, एनर्जी स्टोरेज सिस्टम्स, माउंटिंग स्ट्रक्चर्स, सोलर पम्प्स, कंट्रोलर्स और इनसे जुड़े इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट्स जैसे सोलर प्रोडक्ट्स की सप्लाई करती है।

कंपनी ने दिल्ली, हरियाणा,यूपी, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब, उत्तराखंड, तेलंगाना, अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा, जम्मू-कश्मीर और पश्चिम बंगाल जैसे कई राज्यों में सोलर प्रोजेक्ट पूरे किए हैं। कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2026 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 47.72% बढ़कर ₹6.16 करोड़ और टोटल इनकम 24.75% उछलकर ₹57.56 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 के आखिरी में कंपनी पर ₹1,559.13 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹1,006.52 करोड़ पड़े थे।

Juniper Green Energy IPO Listing: ₹245 पर लिस्ट ₹225 का शेयर, खुदरा निवेशकों का हिस्सा नहीं भरा था पूरा

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

देश में अव्वलः 38.8 मिलियन मीट्रिक टन दुग्ध उत्पादन के साथ उत्तर प्रदेश शीर्ष पर

CM Yogi Adityanath

 दुग्धशाला विकास विभाग की स्थापना के 50 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में बुधवार को सभी 75 जनपदों में डेयरी कॉन्क्लेव-2026 आयोजित किया गया। दुग्धशाला विकास विभाग एवं पशुपालन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में यह कार्यक्रम हुआ। दुग्ध आयुक्त धनलक्ष्मी के. ने बताया कि वर्ष 2024-25 में भारत लगभग 248 मिलियन मीट्रिक टन दुग्ध उत्पादन के साथ विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है, जिसमें उत्तर प्रदेश लगभग 38.8 मिलियन मीट्रिक टन दुग्ध उत्पादन एवं लगभग 16 प्रतिशत योगदान के साथ देश में प्रथम स्थान पर है। डेयरी क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तीकरण, रोजगार सृजन एवं किसानों की आय बढ़ाने का सशक्त माध्यम है।

 

उन्होंने बताया कि नंद बाबा दुग्ध मिशन के अंतर्गत विभिन्न योजनाओं से कुल 17,994 लाभार्थियों को लाभान्वित किया जा रहा है तथा 4,951 प्रारम्भिक दुग्ध सहकारी समितियों के गठन से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 2.25 लाख रोजगार सृजित हुए हैं। इस कार्यक्रम में पूरे प्रदेश में 2100 नव चयनित मुख्यमंत्री स्वदेशी गो-सवंर्धन योजना, 1500 से अधिक मिनी नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना तथा 450 से अधिक नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना के लाभार्थियों को चयन पत्र वितरित किए गये हैं। साथ ही डेयरी क्षेत्र में 28,000 करोड़ रुपये से अधिक के 829 एमओयू  किए गए हैं। उत्तर प्रदेश दुग्धशाला विकास एवं दुग्ध उत्पाद प्रोत्साहन नीति-2022 के अंतर्गत 39 लाख लीटर प्रतिदिन दुग्ध प्रसंस्करण एवं अवशीतन क्षमता में वृद्धि हुई है तथा लगभग 10,000 रोजगार सृजित हुए हैं। निवेशकों को डीबीटी के माध्यम से लगभग 42 करोड़ रुपये का अनुदान भी उपलब्ध कराया गया है।

 

कॉन्क्लेव में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, पशुपालन एवं कृषि विज्ञान केन्द्रों, दुग्ध संघों के प्रतिनिधियों, प्रगतिशील दुग्ध उत्पादक किसानों, पशुपालकों, स्वयं सहायता समूहों तथा दुग्ध सहकारी समितियों के सदस्यों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। विभागीय अधिकारियों एवं विशेषज्ञों ने आधुनिक डेयरी तकनीकों वैज्ञानिक पशुपालन, पशु स्वास्थ्य, संतुलित पशु आहार तथा विभागीय योजनाओं की जानकारी दी।