पर्यावरण संरक्षण के साथ ही राष्ट्रभक्ति का भी संदेश देगी ‘वंदे मातरम वाटिका’

पर्यावरण संरक्षण के साथ ही राष्ट्रभक्ति का भी संदेश देगी ‘वंदे मातरम वाटिका’

Vande Mataram Vatika in UP

Vande Mataram Vatika: योगी सरकार के मार्गदर्शन में वन विभाग विशिष्ट वनों की स्थापना कर रहा है। प्रदेश में बीते दिनों कई विशिष्ट वन स्थापित किए जा चुके हैं। अब 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) पर सभी 75 जनपदों में वंदे मातरम् वाटिका स्थापित की जाएगी। यह वाटिका पर्यावरण संरक्षण के साथ ही राष्ट्रभक्ति का भी संदेश देगी। राष्ट्रगीत के 150 वर्ष पूर्ण होने पर ‘एक पेड़ मां के नाम’ के तहत हर जनपद में 150 पौधों का रोपण किया जाएगा। जनसहभागिता से इस वाटिका को बसाया जाएगा। 

हर जनपद में एक चयनित स्थल पर किया जाएगा 150 पौधों का रोपण

'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत 15 अगस्त को सभी जिलों में 'वंदे मातरम् वाटिका' स्थापित की जाएंगी। इसके लिए वन विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। प्रत्येक जनपद में एक चयनित स्थान पर 150 पौधों का रोपण किया जाएगा, जो राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर प्रकृति को समर्पित श्रद्धांजलि होगी। वन विभाग प्रत्येक जनपद में 'वंदे मातरम् वाटिका' विकसित करेगा। इसमें स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप छायादार, फलदार और पर्यावरण संरक्षण में उपयोगी प्रजातियों के पौधे लगाए जाएंगे। इन पौधों के देखभाल की जिम्मेदारी स्थानीय स्तर पर तय की जाएगी, जिससे अभियान स्थायी हरित धरोहर का रूप ले सके। 

Vande Mataram Vatika in UP

लखनऊ के कुकरैल में अशोक चक्र की तीलियों के बाहर के क्षेत्र में लगाए जाएंगे पौधे

अवध वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी सितांशु पांडेय ने बताया कि स्वतंत्रता दिवस पर कुकरैल पिकनिक स्पॉट में वंदे मातरम् वाटिका को विस्तार दिया जाएगा। यहां अशोक चक्र बनवाया गया है, इसकी 24 तीलियों के बाहर के क्षेत्र में अशोक के पौधे लगाए जाएंगे। पौधों की सुरक्षा के लिए इसके चारों तरफ फेंसिंग भी होगी। इसमें भारतीय वन सेवा के सेवानिवृत्त/वर्तमान के अधिकारियों समेत समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों से पौधरोपण कराया जाएगा।

भावी पीढ़ी को राष्ट्रप्रेम, प्रकृति संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता का संदेश देंगे पौधे

अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (सामाजिक वानिकी) दीपक कुमार ने बताया कि वंदे मातरम् वाटिका ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी है। इस विशेष अभियान में आम नागरिकों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित होगी। पौधरोपण कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, विद्यालयों/महाविद्यालयों/विश्वविद्यालयों के विद्यार्थी, स्वयंसेवी संस्थाएं, सामाजिक संगठन, वंदे मातरम् फाउंडेशन/ट्रस्ट, स्वतंत्रता सेनानियों के परिवार, एनसीसी/एनएसएस, युवक/महिला मंगल दल, भारतीय वन सेवा के वर्तमान/पूर्व अधिकारी और विभिन्न सरकारी विभाग सहभागी बनेंगे। स्वतंत्रता दिवस पर लगाए जाने वाले पौधे भावी पीढ़ी को राष्ट्रप्रेम, प्रकृति संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता का संदेश देंगे।

 

Hariyali Teej 2026 Vrat Vidhi: अगर पहली बार करने जा रही हैं तीज का व्रत, जान लें पूरी विधि

Hariyali Teej 2026 Vrat Vidhi: हरियाली तीज 15 अगस्त 2026, दिन शनिवार को मनाई जाने वाली है। इस दिन सभी सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य के लिए पूरी श्रद्धा और विधि विधान से व्रत करती हैं। वहीं कुंवारी लड़कियां अच्छे वर को पाने के लिए इस व्रत को रखती हैं। सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को इसे मनाया जाता है। ये त्योहार मां पार्वती और भगवान शिव के पुनर्मिलन का प्रतीक माना गया है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन व्रत और शिव-पार्वती की पूजा करने से शादीशुदा जीवन सुखों से भरा रहता है। हालांकि, पूर्ण फल पाने के लिए व्रत को विधि-पूर्वक करना बेहद जरूरी है। ऐसे में अगर आप पहली बार हरियाली तीज का व्रत कर रही हैं, तो इसकी पूरी विधि जरूर जान लें।

जानें हरियाली तीज व्रत विधि

1- सावन मास की तृतीया तिथि पर व्रत रखने वाली महिलाओं को सुबह जल्दी उठकर साफ-सफाई करके स्नान कर लेना चाहिए। इसके बाद, साफ कपड़े पहने।

2- हरियाली तीज पर महिलाओं के मायके से सिंधारा या शगुन का सामान आता है। इसमें साड़ी, चूड़ियां, मिष्ठान, श्रृंगार का सामान दिया जाता है। मायके से आए सामान में से ही साड़ी पहननी चाहिए, इसे शुभ माना जाता है। इस दिन हरे रंग की साड़ी पहनना बेहद शुभ माना गया है।

3- महिलाएं इस दिन सोलह श्रृंगार करती हैं। हरियाली तीज पर सोलह श्रृंगार का बहुत महत्व होता है। इस त्योहार को सुहाग का प्रतीक माना जाता है।

4- हरियाली तीज के दिन सबसे पहले व्रत का संकल्प लें। इसके बाद सुबह शुभ मुहूर्त में भगवान शिव और माता पार्वती की स्थापना करें और पूजा करें। माता पार्वती को पूरा श्रृंगार का सामान चढ़ाएं। वहीं शिवजी को बेलपत्र, जल, फूल आदि अर्पित करें। वहीं पूजा के दौरान हरियाली तीज व्रत कथा पाठ भी जरूर करना चाहिए। भगवान को भोग अर्पित करें।

5- मान्यताओं के मुताबिक महिलाएं हरियाली तीज पर अपनी सास को श्रृंगार का सामान देती हैं। साथी ही उनका आशीर्वाद लेती हैं। इस दिन महिलाएं को झूला भी झूलती हैं। वहीं हरियाली तीज पर मेहंदी लगाना अच्छा माना जाता है।

डिस्क्लेमर- यहां पर मौजूद जानकारी की मनीकंट्रोल पुष्टी नहीं करता है। आर्टिकल में मौजूद जानकारी मान्यताओं पर आधारित है।

80 साल बाद भी सुभाष चंद्र बोस की अस्थियां जापान में क्यों हैं? सुप्रीम कोर्ट में नेताजी की अस्थियों को लेकर दायर की गई याचिका

भारत 15 अगस्त को अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारी कर रहा है, ऐसे में देश के सबसे मशहूर स्वतंत्रता सेनानियों में से एक, नेताजी सुभाष चंद्र बोस चर्चा में आ गए हैं। दरअसल, मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से बोस की बेटी अनीता बी. फाफ की उस याचिका पर जवाब मांगा है, जिसमें टोक्यो के रेनकोजी मंदिर से उनकी “अस्थियां” वापस लाने के लिए निर्देश देने की मांग की गई है।

हालांकि अगस्त 1945 में नेताजी के गायब होने को लेकर कई तरह की बातें कही जाती रही हैं, लेकिन कुछ रिपोर्टों में यह संकेत दिया गया है कि उनके अवशेष जापान के टोक्यो स्थित रेनकोजी मंदिर में सुरक्षित रखे गए हैं। लेकिन, बोस की अस्थियां जापान में क्यों रखी गई हैं? आइए, हम आपको बताते हैं।

नेताजी की अस्थियां कहां हैं?

आम तौर पर यह माना जाता है कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत ताइवान में एक विमान दुर्घटना में हुई थी। 2017 में जारी एक RTI के जवाब में बताया गया था कि शाह नवाज कमेटी, जस्टिस जीडी खोसला कमीशन और जस्टिस मुखर्जी जांच आयोग की रिपोर्टों पर विचार करने के बाद, सरकार इस नतीजे पर पहुंची थी कि नेताजी की मौत 18 अगस्त 1945 को विमान दुर्घटना में हुई थी।

आधिकारिक बयानों के अनुसार, यह माना जाता है कि बोस की मौत 18 अगस्त 1945 को हुई थी। बयानों में यह भी बताया गया है कि दुर्घटना के बाद बोस बुरी तरह जल गए थे और दो दिन बाद उनकी मौत हो गई। ताइवान में उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार किया गया और उनकी अस्थियां जापान लाई गईं, जहां टोक्यो इंडियन इंडिपेंडेंस लीग को उनकी अस्थियों को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई। आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक, एक श्रद्धांजलि सभा के बाद 14 सितंबर 1945 को उन्हें रेनकोजी मंदिर में रखा गया था।

अवशेषों वाला कलश मंदिर के पुजारी रेवरेंड क्योई मोचिज़ुकी को सौंपा गया था, जिन्होंने उन्हें तब तक सुरक्षित रखने का वादा किया था जब तक कि उन्हें वापस भारत न ले जाया जा सके। दशकों बाद भी, वह वादा नेताजी से जुड़े रहस्य का अहम हिस्सा बना हुआ है।

हर साल नेताजी की पुण्यतिथि पर, रेनकोजी मंदिर में उनके सम्मान में एक श्रद्धांजलि सभा आयोजित की जाती है। इस समारोह में भारतीय दूतावास के अधिकारियों सहित कई प्रमुख जापानी और भारतीय नागरिक शामिल होते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत मंदिर में नेताजी के अवशेषों की देखभाल का खर्च भी उठाता रहा है?

सरकार द्वारा 2016 में जारी की गई नेताजी से जुड़ी सार्वजनिक की गई फाइलों के अनुसार, भारत ने 1967 और 2005 के बीच उनकी देखभाल के लिए मंदिर को 52,66,278 रुपये का भुगतान किया था।

नेताजी के परिवार का क्या कहना है?

पिछले कुछ वर्षों में, नेताजी के परिवार के कई सदस्यों – जिनमें उनके भाई, बेटी और अन्य शामिल हैं – ने भारत सरकार से अनुरोध किया है कि वह नेताजी की अस्थियों को जापान से वापस लाए। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, बोस के छोटे भाई ने 1982 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को पत्र लिखकर उनकी अस्थियों को वापस लाने का आदेश देने का अनुरोध किया था।

इसी तरह, मई 1990 में बोस के भतीजों – अशोक नाथ बोस, अमिया नाथ बोस और सुब्रत बोस – ने तत्कालीन प्रधानमंत्री वीपी सिंह को पत्र लिखा था। 2007 में, नेताजी की बेटी फाफ ने डॉ. मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर पूछा था कि भारतीय सरकार उनके पिता के अवशेषों को वापस लाने की प्रक्रिया में किस तरह शामिल होने का इरादा रखती है।

बोस के प्रपौत्र और लेखक आशीष रे ने 2018 में पीटीआई को बताया, “नेहरू सरकार से लेकर मोदी सरकार तक, भारत की हर सरकार सच्चाई से वाकिफ रही है, लेकिन उसने अवशेषों को भारत लाने की बात कही है।” गौरतलब है कि बोस के परिवार ने लगातार सरकारों से उनकी अस्थियों को भारत वापस लाने का आग्रह किया है। कई दशकों के दौरान, विभिन्न सरकारों ने भी उनके अवशेषों को वापस लाने के प्रयास किए हैं।

Independence Day 2026: 15 अगस्त को प्रधानमंत्री लाल किले पर क्यों फहराते हैं तिरंगा? इस साल देश मनाएगा 80वां स्वतंत्रता दिवस

Independence Day 2026: हर साल 15 अगस्त को, भारत के प्रधानमंत्री लाल किले पर तिरंगा फहराते हैं। यह पल अंग्रेजों से लंबे संघर्ष के बाद मिली आजादी को याद दिलाता है और देश को अपना स्वतंत्रता दिवस मनाने के लिए एक करता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि 15 अगस्त को प्रधानमंत्री ही क्यों झंडा फहराते हैं, जबकि राष्ट्रपति गणतंत्र दिवस पर इसे फहराते हैं? दोनों समारोह एक जैसे लग सकते हैं, लेकिन ये आजाद भारत के इतिहास में दो अलग-अलग मील के पत्थर हैं।

स्वतंत्रता दिवस, 15 अगस्त को, प्रधानमंत्री लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं। गणतंत्र दिवस, 26 जनवरी को, राष्ट्रपति कर्तव्य पथ पर तिरंगा फहराते हैं। अंतर इस बात में है कि दोनों दिन क्या दर्शाते हैं: 1947 में भारत की स्वतंत्रता और 1950 में संविधान को अपनाना।

स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री झंडा क्यों फहराते हैं?

15 अगस्त वह दिन है जब भारत 1947 में ब्रिटिश शासन से स्वतंत्र हुआ था। लाल किले पर झंडा फहराने का समारोह ब्रिटिश शासन के खिलाफ लंबे संघर्ष के बाद भारत की स्वतंत्रता को दर्शाता है। आजाद भारत में देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने दिल्ली में लाल किले के लाहौरी गेट के ऊपर राष्ट्रीय झंडा फहराया था। तब से, प्रधानमंत्री पारंपरिक रूप से स्वतंत्रता दिवस पर झंडा फहराते हैं और देश को संबोधित करते हैं। प्रधानमंत्री झंडे के खंभे के नीचे से झंडा फहराते हैं, जिसके बाद राष्ट्रगान होता है। यह समारोह स्वतंत्रता दिवस की मुख्य परंपराओं में से एक है और पूरे देश में इसे देखा जाता है।

गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति फहराते हैं तिरंगा

गणतंत्र दिवस आजाद भारत के इतिहास में एक अलग महत्वपूर्ण पल का प्रतीक है। 26 जनवरी, 1950 को, भारत का संविधान लागू हुआ, जिसने भारत सरकार अधिनियम, 1935 की जगह ली, और भारत एक गणतंत्र बन गया। यह दिन संविधान को अपनाने की याद में मनाया जाता है और हर साल भारत के राष्ट्रीय कार्यक्रमों में से एक के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर, राष्ट्रपति कर्तव्य पथ पर राष्ट्रीय झंडा फहराते हैं। झंडा पहले से ही झंडे के खंभे के ऊपर बंधा होता है और समारोह के दौरान इसे फहराया जाता है। इस आयोजन के बाद रिपब्लिक डे परेड होती है, जिसमें भारत की संस्कृतिक विविधता, सैन्य ताकत और नेशनल अचीवमेंट्स को दिखाया जाता है।

दोनों आयोजनों में मूल अंतर

15 अगस्त और 26 जनवरी दोनों ही राष्ट्रीय दिवस हैं, जिनका भारत के इतिहास में अहम स्थान है। हर साल 15 अगस्त को मनाया जाने वाला स्वतंत्रता दिवस 1947 में ब्रिटिश राज से भारत की आजादी का प्रतीक है। वहीं, 26 जनवरी को मनाया जाने वाला गणतंत्र दिवस देश में एक संविधान लागू होने की घटना का प्रतीक है।

15 अगस्त को प्रधानमंत्री का झंडा फहराने का समारोह देश की आजादी और उसके लिए हुए संघर्ष से जुड़ा है। 26 जनवरी को राष्ट्रपति का झंडा फहराने का समारोह भारत की संवैधानिक और गणतंत्र पहचान से जुड़ा है।

Independence Day 2026: स्वतंत्रता दिवस पर सबसे पहले किसने लाल किले पर फहराया था तिरंगा? जानें इतिहास में दर्ज इस घटना के बारे में

UP Heavy Rain Alert: UP में मानसून अभी और दिखाएगा रौद्र रूप! 13 अगस्त से पूरे प्रदेश में झमाझम बारिश, आईएमडी ने जारी किया अलर्ट

उत्तर प्रदेश में एक बार फिर मानसून एक्टिव होने जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, 13 से 18 अगस्त के बीच प्रदेश के कई इलाकों में भारी बारिश होने की संभावना जताई है। इस दौरान कई इलाकों में भारी बारिश के साथ आकाशीय बिजली और तेज आंधी-तूफान देखने को मिल सकता है। लखनऊ मौसम केंद्र के मुताबिक, मध्य प्रदेश और बंगाल की खाड़ी के पास बने कम दबाव के क्षेत्रों के कारण बारिश बढ़ सकती है। 13 अगस्त से पूर्वी यूपी में बारिश शुरू होगी और 14 अगस्त तक इसका असर मध्य व पश्चिमी यूपी के कुछ हिस्सों में भी देखने को मिल सकता है। आइए जानते हैं यूपी के किन राज्यों में होगी भारी बारिश

16 अगस्त तक होगी तेज बारिश

मौसम विभाग के मुताबिक, मानसूनी द्रोणी के उत्तर की ओर खिसकने से प्रदेश में मानसूनी प्रवाह मजबूत होगा। बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव क्षेत्र भी धीरे-धीरे मजबूत होने की संभावना है। आईएमडी के मुताबिक, ये सिस्टम अगले 12 घंटों में स्पष्ट निम्न दबाव क्षेत्र और उसके बाद 24 घंटे के दौरान अवदाब में बदल सकता है। 13 अगस्त को पूर्वी यूपी के कई इलाकों में बारिश के साथ गरज-चमक हो सकती है। 14 अगस्त और 15 अगस्त को यूपी के कुछ इलाकों में भी बारिश हो सकती है। 16 अगस्त को पूर्वी यूपी के लगभग सभी इलाकों और पश्चिमी यूपी के कुछ हिस्सों में बारिश होने का अनुमान है।

कई जिलों में भारी बारिश का अनुमान

मौसम विभाग के मुताबिक, 13 अगस्त को सोनभद्र, चंदौली, गाजीपुर, गोरखपुर, बलिया, देवरिया, कुशीनगर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर और बलरामपुर समेत कई जिलों में भारी बारिश की संभावना है। कई इलाकों में गरज-चमक और आकाशीय बिजली का भी खतरा रहेगा। वहीं, 14 अगस्त को प्रयागराज, सोनभद्र, मिर्जापुर, बहराइच, लखीमपुर खीरी, कानपुर, सहारनपुर, बरेली, मुरादाबाद, पीलीभीत और आसपास के कई जिलों में भारी बारिश हो सकती है।

 

बारिश ने मिलेगी राहत

मौसम विभाग के मुताबिक, 15 अगस्त को प्रयागराज, सोनभद्र, मिर्जापुर, वाराणसी, लखीमपुर खीरी, सहारनपुर, बरेली, मुरादाबाद, पीलीभीत और आसपास के कई इलाकों में भारी बारिश हो सकती है। 16 अगस्त को भी प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, बस्ती, कुशीनगर, महाराजगंज, अयोध्या और बरेली समेत कई जिलों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। 17 और 18 अगस्त को भी पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों, खासकर गोरखपुर, बस्ती, महाराजगंज, बलरामपुर, श्रावस्ती, आजमगढ़ और अंबेडकर नगर में भारी बारिश हो सकती है।

अभी भी बारिश की कमी

प्रदेश में आने वाले दिनों में बारिश बढ़ने वाली है, लेकिन इस मानसून में अब तक उत्तर प्रदेश में सामान्य से कम बारिश हुई है। 12 अगस्त तक पूर्वी यूपी में 335.4 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य से 30 फीसदी कम है। पश्चिमी यूपी में 369.8 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य से 10 फीसदी कम है। पूरे प्रदेश में अब तक 349.6 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से 22 फीसदी कम है। वहीं, मेरठ, मुजफ्फरनगर और संभल में सामान्य से 60 फीसदी से ज्यादा बारिश हुई है। एटा और फिरोजाबाद में भी सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है, जबकि कई जिलों में बारिश सामान्य से काफी कम रही है।

बारिश के दौरान बरतनी होगी सावधानी

भारी बारिश के दौरान निचले इलाकों में पानी भर सकता है और कच्चे या कमजोर मकानों को नुकसान पहुंच सकता है। बिजली सप्लाई प्रभावित होने के साथ सड़कों पर फिसलन भी बढ़ सकती है। नदियों और नालों का पानी अचानक बढ़ने का खतरा है। ऐसे में लोगों को जलभराव और बाढ़ वाले इलाकों से दूर रहने, सुरक्षित पक्की जगह पर रहने और बारिश के दौरान पेड़ों के नीचे खड़े न होने की सलाह दी गई है।

Independence Day 2026: स्वतंत्रता दिवस पर सबसे पहले किसने लाल किले पर फहराया था तिरंगा? जानें इतिहास में दर्ज इस घटना के बारे में

Independence Day 2026: हमारा देश 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजी हुकूमत से आजाद हुआ था। लंबे संघर्ष के बाद मिली आजादी से सभी उत्साहित थे। यह उत्साह आजादी के 79 साल पूरे होने के बाद आज भी कायम है। इस साल 15 अगस्त 2026 को भारत अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाएगा। इस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराकर आजादी के जश्न की शुरुआत करेंगे। नई दिल्ली स्थित लाल किले पर झंडा फहराना एक ऐसी परंपरा है, जो 1947 के पहले से चली आ रही है। आइए आज जानें कि लाल किले पर पहली पर किसने 15 अगस्त को तिरंगा फहराया था।

इतिहास के पन्नों से

आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 16 अगस्त, 1947 को पहली बार लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया था। तब से लाल किले पर तिरंगा फहराना भारतीय स्वतंत्रता और हमारे गौरव का प्रतीक बन गया है। भारत को 15 अगस्त, 1947 को आधी रात को आजादी मिली थी, लेकिन लाल किले पर झंडा 16 अगस्त, 1947 को सुबह 8:30 बजे फहराया गया था। 15 अगस्त, 1947 को आधिकारिक स्वतंत्रता दिवस पर, मुख्य झंडा फहराने की रस्म आधी रात को कॉन्स्टिट्यूएंट असेंबली (बाद में संसद भवन) में हुई थी। इसके बाद शाम को इंडिया गेट के पास एक और रस्म हुई। लाहौरी गेट की प्राचीर से नेहरू के भाषण ने भारत के सालाना स्वतंत्रता दिवस समारोह के लिए एक मिसाल कायम की, जहां प्रधानमंत्री हर 15 अगस्त को राष्ट्रीय झंडा फहराते हैं और देश को संबोधित करते हैं।

सबसे ज्यादा बार पंडित नेहरू ने फहराया तिरंगा

पंडित नेहरू ने 1947 से 17 बार लाल किले पर झंडा फहराया है, जो हमारी स्वतंत्रता के 79 सालों में किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा सबसे ज्यादा बार फहराया गया है। इस मामले में उनकी बेटी इंदिरा गांधी दूसरे नंबर पर हैं, जिन्होंने 16 बार तिरंगा फहराया है। इसके बाद, श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने छह बार लाल किले पर झंडा फहराया है, उनके बाद राजीव गांधी और पीवी नरसिम्हा राव – पांच-पांच बार, लाल बहादुर शास्त्री ने 1964 और ’65 में, मोरारजी देसाई ने 1977 और ’78 में, चरण सिंह ने 1979 में, श्री वीपी सिंह – 1990 में, श्री एचडी देवेगौड़ा – 1996 में और श्री इंद्र कुमार गुजराल – 1997 में।

चंद्रशेखर ने कभी नहीं फहराया लाला किले पर झंडा

दिलचस्प बात यह है कि गुलजारी लाल नंदा ने, अंतरिम प्रधानमंत्री के तौर पर अपने दो छोटे कार्यकाल में, चंद्रशेखर के अलावा कभी झंडा नहीं फहराया। प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह 15 अगस्त, 2007 को 10 बार लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इसके बाद वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से अब तक 12 बार तिरंगा फहरा चुके हैं। इस साल देश के स्वाधीनता दिवस की 80वीं वर्षगांठ पर वह 13वीं बार ध्वजारोहण करेंगे।

CBSE Class 12 compartment result 2026: 12वीं कंपार्टमेंट परीक्षा के रिजल्ट हुए घोषित, डिजीलॉकर से स्कोरकार्ड करें डाउनलोड

IND vs PAK: इस दिन आमने-सामने होंगे भारत और पाकिस्तान, जानें कहां देख पाएंगे हॉकी का ये मुकाबला

पुरुष और महिला FIH हॉकी वर्ल्ड कप 2026 का टूर्नामेंट बेल्जियम और नीदरलैंड्स की मेजबानी खेला जाएगा। हॉकी वर्ल्ड कप 2026 का 15 से 30 अगस्त के बीच खेला जाएगा। वहीं इस वर्ल्ड कप में फैंस की नजरें भारत-पाकिस्‍तान के बीच होने वाले महामुकाबले पर टिकी है। दोनों देशों के बीच में हॉकी में कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है। भारत और पाकिस्तान की टीम को एक ही ग्रुप में रखा गया है। फैंस इस मुकबाले का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। आइए जानते हैं हॉकी वर्ल्ड कप में कब होगा भारत और पाकिस्तान के बीच महामुकाबला।

16 टीमें लेंगी हिस्सा

पुरुष और महिला हॉकी वर्ल्ड कप में 16-16 टीमें हिस्सा लेंगी। पहले चरण में इन टीमों को चार ग्रुप में बांटा जाएगा, जिनके नाम A, B, C और D होंगे। इसके बाद प्रतियोगिता के दूसरे फेज में चार नए ग्रुप E, F, G और H बनाए जाएंगे। इस चरण में हर ग्रुप से बेहतर प्रदर्शन करने वाली दो टीमें आगे बढ़ेंगी और सीधे सेमीफाइनल में जगह बनाएंगी। वहीं इस बार का बदले हुए फॉर्मेट में खेला जाएगा। खास बात ये है कि इस बार टूर्नामेंट में क्वार्टर फाइनल मुकाबले नहीं खेले जाएंगे।

कब होगा भारत और पाकिस्तान के बीच मुकाबला

भारतीय टीम को इंग्लैंड, पाकिस्तान और वेल्स के साथ पूल D में रखा गया है। भारत का पहला मुकबाला 15 अगस्त को वेल्स से भारतीय समयानुसार दोपहर 16:30 IST से शुरू होगा। दूसरा मुकाबला इंग्लैंड से शाम 18:30 IST बजे 17 अगस्त को होगा। वहीं भारत और पाकिस्तान के बीच महामुकाबला 19 अगस्त को भारतीय समयानुसार शाम 6:30 बजे (18:30 IST) से होगा। दोनों टीमें नीदरलैंड के एमस्टेलवीन स्थित वैगनर स्टेडियम में एक दूसरे से भिड़ेंगी।

कब खेला जाएगा बाकी मुकाबला

FIH हॉकी वर्ल्ड कप का दूसरा फेज 21 से 24 अगस्त तक खेला जाएगा। इस दौरान पहले चरण में टीमों की रैंकिंग के आधार पर उन्हें चार नए ग्रुप में रखा जाएगा। वहीं टूर्नामेंट का तीसरा और आखिरी फेज 27 से 28 अगस्त तक खेला जाएगा। इस दौरान पूल E, F, G और H के नतीजों के आधार पर टीमों की 5वीं से 16वीं तक की रैंकिंग तय होगी और सेमीफाइनल में पहुंचने वाली टीमों का फैसला भी होगा। पुरुष वर्ग में कांस्य पदक का मुकाबला और फाइनल 30 अगस्त को आयोजित किया जाएगा।

कहां पर देख पाएंगे मुकाबला

भारत में हॉकी वर्ल्ड कप 2026 के मुकाबलों का सीधा प्रसारण स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क के टीवी चैनलों पर किया जाएगा। वहीं, जो दर्शक मोबाइल या ऑनलाइन मैच देखना चाहते हैं, वे JioHotstar ऐप के जरिए सभी मुकाबलों की लाइव स्ट्रीमिंग देख सकेंगे।

फेज 1 में इंडिया के मैच

इंडिया बनाम वेल्स, 16:30 IST (15 अगस्त)

इंडिया बनाम इंग्लैंड, 18:30 IST (17 अगस्त)

इंडिया बनाम पाकिस्तान, 18:30 IST (19 अगस्त)

हॉकी वर्ल्ड कप 2026 के लिए भारत की पुरुष टीम

गोलकीपर: मोहित HS, सूरज करकेरा

डिफेंडर: जरमनप्रीत सिंह, हरमनप्रीत सिंह (c), अमित रोहिदास, जुगराज सिंह, संजय, सुमित, यशदीप सिवाच

मिडफील्डर: राजिंदर सिंह, आदित्य अर्जुन लालगे, हार्दिक सिंह, मनप्रीत सिंह, नीलकंठ शर्मा, विवेक सागर प्रसाद

फॉरवर्ड: दिलप्रीत सिंह, शिलानंद लाकड़ा, सुखजीत सिंह, मंदीप सिंह, अभिषेक

Cristiano Ronaldo: कभी सेल्सगर्ल का करती थीं काम…आज हजारों करोड़ की मालकिन, कौन है क्रिस्टियानो रोनाल्डो की पत्नी जॉर्जीना रोड्रिगेज?

UP Scholarship 2026-27: यूपी में कक्षा 9 से 12 के छात्रों के लिए स्कॉलरशिप आवेदन शुरू, नए और रिन्यूवल के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर करें अप्लाई

UP Scholarship 2026-27: उत्तर प्रदेश में शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए स्कॉलरशिप प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके तहत कक्षा 9 से 12 में पढ़ने वाले छात्र उत्तर प्रदेश सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट के आधिकारिक स्कॉलरशिप पोर्टल scholarship.up.gov.in के जरिए ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं। इसके एक मैंडेट में कक्षा 9 से 12 के छात्र के लिए मैट्रिक पूर्व और मैट्रिक (इंटरमीडिएट) के बाद की स्कॉलरशिप शामिल हैं। वहीं, दूसरे मैंडेट में कक्षा 12 के बाद उच्च शिक्षा वाले छात्रों के लिए पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप शामिल हैं।

यह स्कॉलरशिप जनरल, शेड्यूल्ड कास्ट (SC), शेड्यूल्ड ट्राइब (ST), अदर बैकवर्ड क्लास (OBC), और अल्पसंख्य समुदाय के योग्य छात्रों के लिए बहुत अहम मानी जाती है। इस स्कॉलरशिप प्रक्रिया के तहत पहले से चल रही छात्रवृत्ति को रिन्यू कराने या नई छात्रवृत्ति के लिए आवेदन कर सकते हैं।

कक्षा 10 और 12 के रिन्यूअल छात्र : ऑनलाइन आवेदन 11 अगस्त से 25 अगस्त, 2026 तक जमा किए जा सकते हैं। जरूरी हार्ड कॉपी भी तय समय के अंदर जमा करनी होगी।

कक्षा 9 और 11 में नए आवेदक : ऑनलाइन एप्लीकेशन 11 अगस्त से 21 सितंबर, 2026 तक खुले रहेंगे।

जिन स्टूडेंट्स ने 12वीं कक्षा पूरी कर ली है और ग्रेजुएशन, पोस्ट-ग्रेजुएशन, डिप्लोमा, ITI, या दूसरे मैट्रिक के बाद वाले पाठ्यक्रम कर रहे हैं, उनके लिए अलग एप्लीकेशन शेड्यूल होगा।

ऑनलाइन करें आवेदन

ऑनलाइन आवेदन जमा करना सिर्फ पहला स्टेप है। स्कॉलरशिप आवेदन कई चरण की स्क्रूटनी और सत्यापन प्रक्रिया है। सबसे पहले, स्कूल या शैक्षिक संस्थान योग्य छात्रों के आवेदन को सत्यापित करता है और उन्हें आगे की प्रक्रिया के लिए फॉरवर्ड करता है। फिर जिला स्कूल इंस्पेक्टर छात्रों से जुड़ी जानकारी सत्यापित करता है, जिसमें योग्य छात्रों की संख्या भी शामिल है।

इसके बाद, नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) की टेक्निकल टीम आवेदन के आंकड़ों की जांच करती है और संभावित गलतियों या अंतरों की पहचान करती है। जरूरी वेरिफिकेशन स्टेज पूरे होने के बाद, जिला समिति सत्यापित सूची को फाइनल करती है। इसके बाद स्कॉलरशिप की रकम सीधे योग्य छात्रों के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर दी जाती है।

रिन्यूअल छात्रों को अक्टूबर में स्कॉलरशिप मिलने की उम्मीद

कक्षा 9 से 12 के रिन्यूअल छात्रों के लिए सत्यापन प्रक्रिया नए आवेदकों के मुकाबले पहले पूरा होने की उम्मीद है। बताए गए शेड्यूल के मुताबिक, योग्य रिन्यूअल छात्रों के लिए स्कॉलरशिप फंड 25 अक्टूबर से 31 अक्टूबर, 2026 के बीच ट्रांसफर होने की उम्मीद है।

नए आवेदकों के लिए, वेरिफिकेशन प्रोसेस में ज्यादा समय लगने की उम्मीद है। एलिजिबल नए स्टूडेंट्स के लिए स्कॉलरशिप पेमेंट 25 जनवरी से 31 जनवरी, 2027 के बीच ट्रांसफर होने की उम्मीद है।

आधार से लिंक्ड बैंक अकाउंट जरूरी

आवेदकों को यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि उनका बैंक अकाउंट उनके अपने नाम पर हो और स्कीम के तहत जहां भी जरूरी हो, आधार से लिंक हो। दरअसल, स्कॉलरशिप की रकम सीधे स्टूडेंट के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर की जाती है। छात्रों को आवेदन जमा करने से पहले अपने बैंक अकाउंट की डिटेल्स ध्यान से डालनी चाहिए और उन्हें वेरिफाई करना चाहिए। बैंक डिटेल्स में कोई भी गलती पेमेंट प्रोसेस के दौरान दिक्कतें पैदा कर सकती है।

स्नातक छात्रों के लिए अलग शेड्यूल

कक्षा 12 पास कर चुके छात्र और ग्रेजुएशन, पोस्ट-ग्रेजुएशन, डिप्लोमा, ITI, या दूसरे पाठ्यक्रम कर रहे हैं, वे पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप स्कीम के तहत अप्लाई करेंगे। इन छात्रों के लिए आवेदन कार्यक्रम कक्षा 9 से 12 के शेड्यूल से अलग है।

पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप रिन्यूअल आवेदकों के लिए, ऑनलाइन पंजीकरण और हार्ड-कॉपी सबमिशन 15 सितंबर से 15 अक्टूबर, 2026 तक होगा।

नए आवेदकों के लिए, ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन 15 सितंबर से 31 अक्टूबर, 2026 तक खुला रहेगा।

इंस्टीट्यूशनल मास्टर डेटा तैयार करने का काम 22 जुलाई से 15 अगस्त, 2026 तक तय है। इसके बाद कोर्स-फीस सत्यापन होगा, जो 23 जुलाई से 30 अगस्त, 2026 तक संबंधित यूनिवर्सिटी या उससे जुड़ी एजेंसी के जरिए होगा।

शेड्यूल के मुताबिक, पोस्ट-मैट्रिक रिन्यूअल वाले स्टूडेंट्स को स्कॉलरशिप पेमेंट 16 जनवरी से 25 जनवरी, 2027 के बीच मिलने की उम्मीद है। नए पोस्ट-मैट्रिक आवेदकों को स्कॉलरशिप पेमेंट 27 जनवरी से 31 जनवरी, 2027 के बीच मिलने की उम्मीद है।

International Linguistics Olympiad 2026: लिंग्विस्टिक ओलंपियाड में भारतीय छात्रों ने झटका सोना, पाणिनी लिंग्विस्टक ओलंपियाड से हुआ था चयन

15 अगस्त पर लाल किले में दिखेगा नया इतिहास! जश्न में पहली बार दो ऐतिहासिक पल

15 अगस्त से पहले दिल्ली में स्वतंत्रता दिवस समारोह की तैयारियां तेज हो गई हैं। लाल किले के पास दंगल पार्क में भारतीय सेना के जवानों ने पारंपरिक 21 तोपों की सलामी रिहर्सल की जा रही है। इस बार समारोह में ‘युवा शक्ति’, ‘विकसित भारत 2047’ और ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे होने को खास जगह दी जाएगी।

युवा शक्ति और Gen-Z

13 INDIAN NAVY ideas | navy day images hd, how to celebrate indian navy day, indian navy day quotes

इस बार लाल किले पर होने वाला स्वतंत्रता दिवस समारोह देश की युवा शक्ति और Gen-Z पर फोकस रहेगा। इसमें युवाओं की अचीवमेंट, उनकी नई सोच और देश के डेवलपमेंट में उनके योगदान को सामने रखा जाएगा। साथ ही 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने के लक्ष्य में युवाओं की भूमिका को भी खास तरीके से दिखाया जाएगा। सेरेमनी में युवा अचीवर्स को स्पेशल गेस्ट के तौर पर बुलाया गया है।

स्वतंत्रता दिवस समारोह

इस साल ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे हो रहे हैं, इसलिए स्वतंत्रता दिवस समारोह में इसे खास जगह दी जाएगी। पहली बार लाल किले की प्राचीर से ‘वंदे मातरम’ गाया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले से तिरंगा फहराएंगे और देश को संबोधित करेंगे।

टेक्नोलॉजी और साइंस

स्वतंत्रता दिवस समारोह में भारत की तकनीकी और वैज्ञानिक अचीवमेंट को भी दिखाया जाएगा। न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी, स्पेस और मॉडर्न टेक्निक सेक्टर में देश ने जो प्रगति की है, उसकी झलक विजुअल्स के जरिए दिखाई जाएगी। इन्विटेशन कार्ड में ‘सेवा तीर्थ’ को प्रायोरिटी दी गई है, जो पब्लिक सर्विस और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को दिखाती है।

इंटर्नशिप और डेवलपमेंट स्कीम

इस बार समारोह में देश के युवा प्रतिभाओं को खास सम्मान दिया जाएगा। इंटरनेशनल फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी और मैथमैटिक्स ओलंपियाड 2026 में मेडल जीतने वाले 19 स्टूडेंट्स को सम्मानित किया जाएगा। इसके अलावा युवा इनोवेटर्स, स्टार्टअप फाउंडर्स, प्रधानमंत्री इंटर्नशिप स्कीम के इंटर्न, स्किल डेवलपमेंट स्कीम का लाभ लेने वाले और MY भारत के वॉलंटियर्स जैसे युवा अचीवर्स भी समारोह में शामिल होंगे।

जल संरक्षण

इस साल स्वतंत्रता दिवस समारोह में बैठने की जगहों के नाम भारत की प्रमुख झीलों के नाम पर रखे जाएंगे। इसका मकसद लोगों का ध्यान जल संरक्षण और पानी बचाने की जरूरत की ओर अट्रैक्ट करना है।

इस बार का स्वतंत्रता दिवस समारोह देश की परंपरा, युवाओं की ताकत और भारत की तरक्की की झलक एक साथ दिखाएगा। ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे होने से यह मौका और खास बन गया है। युवा प्रतिभाओं के सम्मान और देश की वैज्ञानिक उपलब्धियों के साथ समारोह में विकसित भारत 2047 का संदेश भी मिलेगा।