कनाडा में 2 गुरुद्वारों को गिराने की धमकी:एक ही नंबर से 2 बार धमकी भरी कॉल आई, कैलगरी पुलिस ने सुरक्षा बढ़ाई

कनाडा के कैलगरी स्थित प्रमुख सिख धार्मिक स्थल दशमेश कल्चर सेंटर को अज्ञात लोगों ने इमारत गिराने की धमकी दी है। लगातार आ रहे इन नस्ली और धमकी भरे फोन कॉल्स के बाद गुरुद्वारा प्रबंधन, स्थानीय प्रशासन और पुलिस की चिंता बढ़ गई है। एहतियात के तौर पर गुरुद्वारा साहिब परिसर में अतिरिक्त सुरक्षा गार्ड तैनात कर दिए गए हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, उसी नंबर से कनाडा के ही सवाना स्थित गोबिंद सरवर गुरुद्वारा साहिब को भी इसी तरह की धमकी मिली है। मामले की शिकायत मिलने के बाद कैलगरी पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और समुदाय या दोनों में से किसी भी गुरुद्वारा साहिब को किसी सक्रिय खतरे की संभावना नहीं है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि धमकी देने वाले लोग कौन थे और उनका मकसद क्या था? पहले पार्किंग खाली करने को कहा, फिर इमारत ढहाने की धमकी दशमेश कल्चर सेंटर के चेयरमैन रणबीर सिंह परमार ने बताया कि गुरुद्वारा साहिब के कार्यालय में लगातार दो संदिग्ध फोन कॉल्स आईं। पहली कॉल में अज्ञात व्यक्ति ने फोन कर गुरुद्वारा साहिब की पार्किंग खाली कराने को कहा। उसने दावा किया कि वहां कुछ तार बिछाने का काम किया जाना है। जबकि, कुछ समय बाद एक अन्य व्यक्ति ने फोन कर खुद को एक कंस्ट्रक्शन कंपनी का CEO बताया। उसने गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के चेयरमैन रणबीर सिंह परमार से बात की और सीधे गुरुद्वारा भवन को गिराने की धमकी दी। रणबीर ने बताया कि उसी नंबर से कनाडा के सवाना स्थित गोबिंद सरवर गुरुद्वारा साहिब को भी इसी तरह की धमकी भरी कॉल आई। कैलगरी पुलिस कर रही मामले की जांच कैलगरी पुलिस सर्विस ने मीडिया को दिए अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया है कि वे इस मामले की पूरी गंभीरता से जांच कर रहे हैं। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि केवल दशमेश कल्चर सेंटर ही नहीं, बल्कि एक अन्य नजदीकी गुरुद्वारे को भी इसी तरह का धमकी भरा फोन कॉल आया था। पुलिस कॉल करने वाले अज्ञात व्यक्तियों की पहचान करने और नंबरों को ट्रेस करने का प्रयास कर रही है, ताकि यह साफ हो सके कि यह कोई शरारत थी या इसके पीछे कोई नफरती मानसिकता थी। समाज सेवा से जुड़ा है गुरुद्वारा स्थानीय संगत और नियमित आने वाले लोगों ने घटना पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने कहा कि यह गुरुद्वारा सभी धर्मों के लिए खुला है और समाज सेवा, फूड बैंक और कपड़े बांटने जैसे काम करता है। दुनिया में पहले से तनाव है, ऐसे में देश के भीतर नफरत फैलाने के बजाय प्यार बांटना चाहिए। मेयर और नेताओं को दी गई सूचना घटना की गंभीरता को देखते हुए गुरुद्वारा कमेटी ने पुलिस के साथ-साथ अल्बर्टा प्रांत की प्रीमियर के कार्यालय, स्थानीय पार्षदों, सांसदों और विधायकों को सूचित किया है। कैलगरी के मेयर जेरेमी फारकस ने सोशल मीडिया पर इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए सिख समुदाय के प्रति अपना समर्थन जताया है। सिख संगठनों और गुरुद्वारा प्रबंधन के बयान गुरुद्वारा प्रबंधन के प्रतिनिधि अमनप्रीत सिंह परमार ने निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि गुरुद्वारा बिना किसी भेदभाव के सभी के लिए फूड बैंक और कपड़े दान करने जैसे सामाजिक कार्य चलाता है। जब दुनिया में पहले से ही इतनी जंग चल रही है, तो हमें देश के भीतर आंतरिक युद्ध शुरू नहीं करने चाहिए, बल्कि प्यार फैलाना चाहिए। वहीं, डायरेक्टर ऑफ ऑपरेशंस, दशमेश कल्चर सेंटर राज सिद्धू ने बताया कि धमकी भरे फोन के समय परिसर में काफी संख्या में परिवार और बच्चे मौजूद थे। यह घटना परेशान करने वाली जरूर है, लेकिन यह समय डरने का नहीं, बल्कि एकजुट होने और संवाद करने का है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गुरुद्वारे के दरवाजे हमेशा की तरह सभी संस्कृतियों और धर्मों के लोगों के लिए खुले रहेंगे। गुरुद्वारा अध्यक्ष हरपाल सिंह और अन्य सदस्यों ने चिंता जताई कि सोशल मीडिया पर चल रही कुछ तीखी और अनियंत्रित बयानबाजियां इस तरह की घटनाओं को बढ़ावा दे रही हैं। उन्होंने फोन करने वाले व्यक्ति को भी आमंत्रित किया कि वह गुरुद्वारे आए और सिख समुदाय के बारे में करीब से जाने। कनाडा में बसे पंजाबी समुदाय में गुस्सा बता दें, दशमेश कल्चर सेंटर का इतिहास गौरवमयी है और 46 साल पहले इसकी नींव रखी गई थी। यह गुरुद्वारा अब 15 हजार से अधिक पंजीकृत सदस्यों और कैलगरी के करीब एक लाख से अधिक सिख प्रवासियों की धार्मिक और सामाजिक जरूरतों को पूरा करता है। ऐसे धार्मिक स्थान को गिराने की धमकी से कैलगरी ही नहीं पूरे कनाडा में बसे पंजाबियों में गुस्सा है। यही कारण है कि इस घटना पर स्थानीय प्रशासन ने भी सख्त रुख अपनाया है। मेयर ने घटना की निंदी की कैलगरी के मेयर मेयर जेरोमी फारकास ने भी इस कायरतापूर्ण कृत्य की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि कैलगरी में नफरत, डर या कट्टरता के लिए कोई स्थान नहीं है। उन्होंने सिख समुदाय के प्रति अपनी संवेदना और समर्थन व्यक्त करते हुए कानून व्यवस्था बनाए रखने का भरोसा दिया है। फिलहाल, दशमेश कल्चर सेंटर और दूसरे गुरुद्वारे में अतिरिक्त निजी सुरक्षाकर्मी तैनात कर दिए गए हैं और आने-जाने वाले वाहनों पर पैनी नजर रखी जा रही है।

दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ा प्रदर्शन, आरक्षण और UGC नियमों के विरोध में उतरे हजारों लोग

दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ा प्रदर्शन, आरक्षण और UGC नियमों के विरोध में उतरे हजारों लोग

राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली के प्रसिद्ध धरना स्थल जंतर-मंतर पर शुक्रवार को एक बार फिर बड़ा प्रदर्शन हुआ। आरक्षण व्यवस्था में बदलाव और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के इक्विटी रेगुलेशंस के विरोध में हजारों लोग जुटे। प्रदर्शन का आयोजन ‘Reservation Reform Andolan’ के बैनर तले किया गया। इसकी अगुवाई NEET अभ्यर्थी हर्ष दुबे ने की। प्रदर्शन में General Sena, Chanakya Sena और Karni Sena समेत कई संगठनों ने हिस्सा लिया।

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प्रदर्शनकारियों की क्या मांग है?

प्रदर्शन में मुख्य रूप से सामान्य यानी अनारक्षित वर्ग से जुड़े लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने मौजूदा आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की मांग की। उनका कहना था कि आरक्षण का लाभ उन लोगों तक पहुंचना चाहिए, जिन्हें वास्तव में सरकारी सहायता की जरूरत है। कई प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण का लाभ तय करने में आर्थिक स्थिति को भी आधार बनाए जाने की मांग की। प्रदर्शन में इन्फ्लुएंसर अजीत भारती और Reservation Hatao Mission से जुड़े लोग भी नजर आए।

 

कुछ प्रदर्शनकारियों ने SC/ST Act पर भी आपत्ति जताई और इसमें बदलाव की मांग की। उनका तर्क था कि किसी भी कानून का दुरुपयोग किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं होना चाहिए। यह प्रदर्शन ऐसे समय हुआ है, जब UGC के इक्विटी रेगुलेशंस को फिलहाल रोक दिया गया है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे इन नियमों का विरोध करते हैं और सरकार से पूरी आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शन स्थल पर कुछ लोगों ने हनुमान चालीसा का पाठ किया और धार्मिक नारे भी लगाए। सामने आए वीडियो में प्रदर्शनकारी ‘सियारामचंद्र की जय’ के नारे लगाते हुए दिखाई दिए।

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पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच क्यों हुआ भ्रम?

 

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस की अनुमति को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं थी। पुलिस ने सार्वजनिक सूचना जारी कर आयोजकों और प्रदर्शनकारियों से कानून का पालन करने और शांति बनाए रखने की अपील की थी। इसके साथ ही प्रदर्शन स्थल को लेकर भी विवाद सामने आया। सवाल था कि प्रदर्शन जंतर-मंतर या रामलीला मैदान में होगा। हर्ष दुबे ने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश कर रहे कुछ लोगों को बाहर ही रोक दिया गया। आयोजकों का दावा था कि उन्हें प्रदर्शन को रामलीला मैदान ले जाने के लिए कहा गया। कुछ प्रदर्शनकारियों ने बताया कि वे रामलीला मैदान गए, लेकिन बाद में वापस जंतर-मंतर लौट आए।

 

बाद में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति दे दी गई। सुरक्षा के लिए दिल्ली पुलिस के साथ रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और इंडो-तिब्बतन बॉर्डर पुलिस (ITBP) के जवानों को तैनात किया गया। प्रदर्शन स्थल के आसपास बैरिकेडिंग भी की गई। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों ने कार्रवाई करते हुए कई लोगों को हिरासत में लिया। हालांकि, प्रदर्शनकारियों का कहना रहा कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण था।

प्रधानमंत्री मोदी को ज्ञापन सौंपने की तैयारी

 

हर्ष दुबे ने कहा कि प्रदर्शनकारी तब तक जंतर-मंतर पर रहेंगे, जब तक वे अपना ज्ञापन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नहीं सौंप देते। उन्होंने कहा कि उनकी मुख्य मांग यह सुनिश्चित करना है कि आरक्षण का लाभ उन लोगों तक पहुंचे, जिन्हें वास्तव में सरकारी सहायता की जरूरत है। पिछले कुछ हफ्तों में ऑनलाइन मुहिम के जरिए इस अभियान को गति मिली है। आरक्षण सुधार और UGC के इक्विटी रेगुलेशंस के विरोध से जुड़े प्रदर्शन नागपुर, लखनऊ, जयपुर और विशाखापत्तनम में भी सामने आ चुके हैं।

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राजस्थान में श्री राजपूत करणी सेना ने इससे पहले UGC Equity Regulations के विरोध में जयपुर तक करीब 800 किलोमीटर लंबी यात्रा निकाली थी। यह मार्च 24 दिनों तक चला था। बाद में प्रदर्शनकारियों के बैरिकेड पार करने के कथित प्रयास के बाद पुलिस के साथ झड़प भी हुई थी।

 

शुक्रवार को जंतर-मंतर पर हुआ प्रदर्शन आरक्षण के मुद्दे को लेकर एक और बड़े जमावड़े के रूप में सामने आया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे अपना अभियान जारी रखेंगे और मांगें नहीं माने जाने पर आने वाले दिनों में आंदोलन और बड़ा हो सकता है।

अब प्रदर्शनकारियों का अगला कदम क्या होगा?

 

प्रदर्शनकारियों का अगला फोकस अपनी मांगों को ज्ञापन के माध्यम से केंद्र सरकार तक पहुंचाने पर रहेगा। हर्ष दुबे ने कहा है कि प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर छोड़ने से पहले अपनी मांगें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंचाना चाहते हैं। आयोजकों ने संकेत दिया है कि सरकार की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर अभियान आगे भी जारी रह सकता है। कई शहरों में पहले ही इसी तरह के प्रदर्शन सामने आने के कारण आने वाले दिनों में आंदोलन का दायरा बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

 

फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां जंतर-मंतर पर नजर बनाए हुए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे आरक्षण व्यवस्था में बदलाव और UGC नियमों से जुड़ी अपनी चिंताओं को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से अभियान जारी रखना चाहते हैं।

पहले टेस्ट के तीसरे ही दिन पाकिस्तान को मिली इंग्लैंड के हाथों पारी की हार

ENGvsPAK

ENGvsPAK तेज गेंदबाजों ओली रॉबिन्सन, जोफ्रा आर्चर और जोश टंग के तीन-तीन विकेटों की बदौलत इंग्लैंड ने पाकिस्तान को पहले टेस्ट के तीसरे ही दिन शुक्रवार को पारी और 103 रन से पीट दिया। यह सिर्फ़ दूसरी बार है जब इंग्लैंड के तेज़ गेंदबाज़ों ने टेस्ट मैच में पाकिस्तान के सभी 20 विकेट लिए हैं; इससे पहले 2001 में लॉर्ड्स में ऐसा हुआ था।लीड्स में पाकिस्तान को लगातार दूसरी बार पारी से हार का सामना करना पड़ा है; इससे पहले 2018 में भी उन्हें पारी और 55 रनों से हार मिली थी।

गेंदबाज़ी में भी उनका प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा। पाकिस्तान ने कई मौके गंवाए और दूसरे दिन लंबे समय तक कोई खास असर नहीं डाल पाए, जिससे इंग्लैंड को पहली पारी में बड़ी बढ़त बनाने का मौका मिल गया। इंग्लैंड ने खत्म होने कल के 8 विकेट पर 366 रन से आगे खेलते हुए पहली पारी में 409 रन बनाये और 238 रन की भारी बढ़त हासिल की।

हेडिंग्ले को अपनी पसंदीदा जगह बनाने वाली टीम के खिलाफ़, उन मौकों को गंवाना भारी पड़ने वाला था। इंग्लैंड ने शानदार खेल दिखाया और एक बार बढ़त बनाने के बाद, उन्होंने मेहमान टीम को मैच में वापसी का कोई मौका नहीं दिया। मैच से पहले जो रूट ने इंग्लैंड के तेज़ गेंदबाज़ी आक्रमण की विविधता और गहराई के बारे में बात की थी और बताया था कि वह अपने पास मौजूद अलग-अलग तरह के कौशल को लेकर कितने उत्साहित हैं।

उनके गेंदबाज़ निश्चित रूप से उम्मीदों पर खरे उतरे। आर्चर, एटकिंसन, रॉबिन्सन और टंग ने स्टंप्स पर लगातार गेंदबाज़ी की, सही लेंथ पर गेंद डाली और पूरे मैच के दौरान अपनी योजनाओं में बेहतरीन बदलाव किए। इन सभी ने मिलकर पाकिस्तान पर लगातार दबाव बनाए रखा और यह सुनिश्चित किया कि इंग्लैंड का मैच पर पूरा नियंत्रण रहे।

पाकिस्तान को थोड़ी किस्मत की ज़रूरत थी, और बाबर आज़म के चोट के कारण बाहर होने के बाद तो इसकी और भी ज़्यादा ज़रूरत थी। लेकिन किस्मत अक्सर उनका साथ देती है जो छोटे-छोटे मौकों का भी पूरा फ़ायदा उठाते हैं, और पाकिस्तान इस टेस्ट में ऐसा करने में नाकाम रहा। वे टॉस हार गए और फिर कई अहम मौके गंवा दिए।

मैच की शुरुआत में एक छोटा सा समय ऐसा आया जब इमाम-उल-हक और अब्दुल्ला शफ़ीक़ की 91 रनों की साझेदारी ने उन्हें कुछ हद तक नियंत्रण दिलाया, लेकिन उनमें से किसी एक को उस अच्छी शुरुआत को बड़े स्कोर में बदलने की ज़रूरत थी। इसके बजाय, जोश टंग के खिलाफ़ इमाम के आक्रामक शॉट ने पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ा दीं और टीम 117/3 से 171 रन पर ऑल आउट हो गई।

जुलाई 2023 से पाकिस्तान ने विदेश में सिर्फ़ दो टेस्ट मैच जीते थे, और अगर इंग्लैंड में कोई ऐसी जगह थी जहाँ वे अपना रिकॉर्ड सुधारने की कोशिश बिल्कुल नहीं करना चाहते, तो हेडिंग्ले उनमें से एक थी। पिछले दशक में यह इंग्लैंड के लिए एक अभेद्य किला रहा है, और इस जीत के साथ यहाँ खेले गए पिछले नौ टेस्ट मैचों में उनकी यह आठवीं जीत है। इनमें से चार जीत पारी के अंतर से मिली हैं, और दिलचस्प बात यह है कि ये सभी एशियाई टीमों के खिलाफ़ थीं – दो बार पाकिस्तान के खिलाफ़, एक बार भारत के खिलाफ़ और एक बार श्रीलंका के खिलाफ़।

पाकिस्तान की तरफ से मोहम्मद रिजवान ने 41 और शान मसूद ने 29 रन बनाये। ओली रॉबिन्सन, जोफ्रा आर्चर और जोश टंग ने तीन-तीन विकेट लेकर पाकिस्तान का दूसरी पारी में पुलिंदा 135 रन पर बाँध दिया जबकि गस एटकिंसन ने एक अन्य विकेट हासिल किया। ओली रॉबिन्सन को मैच में कुल आठ विकेट लेने के लिए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।

अमीर बनने का सीक्रेट फॉर्मूला! आज ही अपनाएं ये 5 मनी हैबिट्स, तेजी से बढ़ेगी आपकी वेल्थ

फाइनेंशियल सिक्योरिटी हासिल करना और प्रॉपर्टी या वेल्थ क्रिएट करने के लिए जरूरी नहीं कि सिर्फ आपकी कमाई ज्यादा हो। यह इस बात पर भी डिपेंड करता है कि आप अपने कमाए हुए पैसे को कितने बेहतर तरीके से मैनेज करते हैं, बचाते हैं और इन्वेस्ट करते हैं। लंबे समय में वेल्थ क्रिएशन करने और अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत बनाने के लिए सही फाइनेंशियल हैबिट्स को अपनाना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं पैसे की बचत और निवेश से जुड़े उन व्यावहारिक नियमों के बारे में जो आपकी वित्तीय स्थिति को एक मजबूत रास्ते पर ला सकते हैं।

इमरजेंसी फंड बनाएं

नौकरी छूटने, मेडिकल बिल या अचानक आए किसी भी खर्च जैसी स्थिति में इमरजेंसी फंड वित्तीय सपोर्ट देता है। फाइनेंशियल प्लानर आमतौर पर सलाह देते हैं कि आपको बेसिक खर्चों के करीब तीन से छह महीने के बराबर की राशि किसी ऐसे खाते में रखनी चाहिए जहां से उसे आसानी से निकाला जा सके।

बचत को प्राथमिकता दें

सैलरी आते ही सबसे पहले बचत की आदत डालें। इसके लिए अपने वेतन में से एक निश्चित राशि को बचत या निवेश खातों में तुरंत ऑटोमैटिक ट्रांसफर करने की व्यवस्था करें। नियमित रूप से पैसे को सेविंग्स अकाउंट में ट्रांसफर करने से बचत में निरंतरता बनी रहती है और पैसे खर्च करने का ऑप्शन भी कम होता है।

खर्चों पर नजर रखें

अपने रोजाना के खर्चों को ट्रैक करने से यह स्पष्ट हो जाता है कि आपका पैसा वास्तव में कहां जा रहा है। गैर-जरूरी सब्सक्रिप्शन, बार-बार किए जाने वाले छोटे-छोटे खर्चों और दूसरे ऐसे पैटर्न की पहचान करने के लिए बजटिंग ऐप, स्प्रेडशीट या सिंपल एक्सपेंस ट्रैकर का इस्तेमाल करें।

क्रेडिट कार्ड का समझदारी से इस्तेमाल करें

सावधानीपूर्वक इस्तेमाल करने पर क्रेडिट कार्ड काफी मददगार साबित हो सकते हैं। अपनी क्षमता से अधिक खर्च करने से बचें और ड्यू डेट तक पूरे बिल का भुगतान करने का लक्ष्य रखें। जिम्मेदारी से क्रेडिट का इस्तेमाल करने से एक स्वस्थ क्रेडिट हिस्ट्री बनाए रखने में मदद मिलती है और भारी लेट फीस या इंटरेस्ट से बचा जा सकता है।

जल्दी निवेश शुरू करें

कम उम्र में या जल्दी निवेश शुरू करने से आपके पैसे को कम्पाउंडिंग के जरिए बढ़ने का अधिक समय मिलता है। लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए निवेशक जिन विकल्पों पर विचार करते हैं उनमें कम लागत वाले इंडेक्स फंड भी शामिल हैं। हालांकि निवेश के विकल्पों का चयन हमेशा पर्सनल फाइनेंस टारगेट, जोखिम लेने की क्षमता और समय अवधि के अनुसार ही होना चाहिए।

स्किल्स बढ़ाएं और सैलरी नेगोशिएट करें

अपनी व्यावसायिक योग्यताओं और स्किल्स को सुधारने से समय के साथ आपकी कमाने की क्षमता बढ़ सकती है। सर्टिफिकेट्स, स्पेशलाइज्ड ट्रेनिंग और वर्कशॉप आपको बेहतर अवसरों के काबिल बनाने में मदद करते हैं।

इसके अलावा आपकी सैलरी आपके भविष्य के बोनस, बचत और रिटायरमेंट योगदान को प्रभावित करती है। इसलिए जॉब ऑफर या अप्रेजल के दौरान अपनी इंडस्ट्री के सैलरी लेबल का रिसर्च करें। अपने लिए उचित सैलरी को मैनेजमेंट के साथ हमेशा कॉन्फिडेंस से डिस्कस करें।

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BMW X1 LWB भारत में लॉन्च, लंबा व्हीलबेस, 8 एयरबैग और लग्जरी फीचर्स से है लैस, जानें कीमत

BMW India ने आज भारत में अपनी नई BMW X1 Long Wheelbase (LWB) लॉन्च कर दी है। कंपनी ने इसकी शुरुआती कीमत 49.90 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) रखी है। खास बात यह है कि इस SUV को भारत में ही BMW Group के चेन्नई प्लांट में तैयार किया जा रहा है। फिलहाल, नई X1 LWB को पेट्रोल इंजन के साथ बाजार में उतारा गया है। इसकी बुकिंग ग्राहक देशभर की BMW डीलरशिप से कर सकते हैं।

BMW ग्रुप इंडिया के प्रेसिडेंट और CEO हरदीप सिंह बराड़ ने कहा, “आज के ग्राहक ऐसी कार चाहते हैं, जो उनकी रोजमर्रा की जरूरतों के साथ-साथ उनकी पसंद और लग्जरी का भी ख्याल रखे। नई X1 LWB इन दोनों जरूरतों को बखूबी पूरा करती है।”

भारत में BMW X1 LWB की कीमत

इसकी शुरुआती कीमत ₹49.90 लाख है, जिसमें लागू GST तो शामिल है, लेकिन रोड टैक्स, TCS (सोर्स पर वसूला जाने वाला टैक्स), रजिस्ट्रेशन चार्ज, लोकल लेवी और इंश्योरेंस शामिल नहीं हैं। BMW ने कहा है कि इनवॉइसिंग के समय जो कीमत होगी, वही लागू होगी।

इस SUV के साथ 2 साल की स्टैंडर्ड वारंटी मिलती है, जिसमें किलोमीटर की कोई सीमा नहीं है। इसके अलावा, 2 साल की रोडसाइड असिस्टेंस भी दी जा रही है। सर्विस पैकेज की शुरुआत 3 साल या 40,000 किलोमीटर से होती है। इसे बढ़ाकर अधिकतम 10 साल या 1 लाख किलोमीटर तक किया जा सकता है। वहीं, कार की वारंटी को भी 10 साल तक बढ़ाने का विकल्प दिया गया है।

लंबा व्हीलबेस और पिछली सीट पर ज्यादा स्पेस

BMW X1 LWB की मुख्य खूबियों में 4,616 mm की लंबाई, 2,104 mm की चौड़ाई, 1,641 mm की ऊंचाई और 2,800 mm का व्हीलबेस शामिल है। BMW का दावा है कि यह अपने सेगमेंट की सबसे लंबी गाड़ी है।

इसका व्हीलबेस 108 mm बढ़ गया है, जबकि पिछली सीट पर लेगरूम और नी-रूम (घुटनों के लिए जगह) में क्रमशः 150 mm और 109 mm की बढ़ोतरी हुई है। पिछली सीट की कुशनिंग को भी 15 mm बढ़ाया गया है। पीछे बैठने वाले यात्री अपनी सीटों को 28.5 डिग्री तक पीछे झुका सकते हैं।

इसके अलावा, इसकी बूट कैपेसिटी 540 लीटर है, जिसे पिछली सीटों को फोल्ड करके 1,700 लीटर तक बढ़ाया जा सकता है।

बाहर की तरफ इसमें BMW की सिग्नेचर किडनी ग्रिल, कॉर्नरिंग फंक्शन वाली अडैप्टिव LED हेडलाइट्स, हाई बीम असिस्टेंट, एल्युमीनियम-फिनिश वाली रूफ रेल्स और 18-इंच के M लाइट अलॉय व्हील्स दिए गए हैं। पीछे की तरफ थ्री-डायमेंशनल LED लाइट्स और एक बड़ा डिफ्यूजर है।

BMW X1 LWB का इंजन और परफॉर्मेंस

नई BMW X1 LWB में 1.5-लीटर, 3-सिलेंडर वाला TwinPower Turbo पेट्रोल इंजन दिया गया है, जो 156 hp की पावर और 230 Nm का टॉर्क देता है। इसे 7-स्पीड Steptronic डुअल-क्लच ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन के साथ जोड़ा गया है। हालांकि, BMW X1 LWB में डीजल का कोई ऑप्शन नहीं है। अगर आपको डीजल इंजन चाहिए, तो आपको स्टैंडर्ड X1 लेनी होगी।

फिलहाल, यह SUV फ्रंट-व्हील ड्राइव (FWD) सिस्टम के साथ आती है और कंपनी के मुताबिक इसकी माइलेज 15.5 kmpl तक है। बेहतर आरामदायक ड्राइविंग के लिए इसमें खास तौर पर ट्यून किया गया कंफर्ट सस्पेंशन दिया गया है। साथ ही, इसमें अलग-अलग ड्राइविंग मोड्स और 50:50 वेट डिस्ट्रीब्यूशन भी मिलता है।

BMW X1 LWB के फीचर्स

BMW X1 LWB के फीचर्स की लिस्ट में ड्राइवर और आगे बैठने वाले पैसेंजर के लिए इलेक्ट्रिकली एडजस्टेबल स्पोर्ट सीट्स, एक वाइडस्क्रीन कर्व्ड डिस्प्ले और BMW का लेटेस्ट Operating System 9 शामिल है।

इसका इंफोटेनमेंट सिस्टम QuickSelect इंटरफेस, ओवर-द-एयर सॉफ्टवेयर अपडेट और BMW डिजिटल प्रीमियम पैकेज के जरिए अतिरिक्त डिजिटल सेवाओं को सपोर्ट करता है। केबिन में वर्टिकली लगा वायरलेस स्मार्टफोन चार्जर, एम्बिएंट लाइटिंग और 12 स्पीकर्स व 205W आउटपुट वाला हरमन कार्डन ऑडियो सिस्टम भी मिलता है।

BMW X1 LWB में 9 वर्ग मीटर का पैनोरमिक सनरूफ भी मिलता है। BMW का दावा है कि यह अपने सेगमेंट में मिलने वाला सबसे बड़ा पैनोरमिक सनरूफ है।

BMW डिजिटल की प्लस (Digital Key Plus) की मदद से मालिक कम्पैटिबल स्मार्टफोन या स्मार्टवॉच का इस्तेमाल करके गाड़ी को लॉक, अनलॉक और स्टार्ट कर सकते हैं। इस Digital Key को 18 यूजर्स तक के साथ शेयर किया जा सकता है। वहीं, Comfort Access 2.0 फीचर की मदद से ऑथराइज्ड डिवाइस के कार के पास आते ही SUV अपने आप अनलॉक हो सकती है। इसके लिए दरवाजे के हैंडल को छूने की जरूरत नहीं पड़ती।

सेफ्टी और ड्राइवर असिस्टेंस

सेफ्टी फीचर्स की बात करें तो, BMW X1 LWB में 8 एयरबैग, ब्रेक असिस्ट के साथ ABS, डायनामिक स्टेबिलिटी कंट्रोल, डायनामिक ट्रैक्शन कंट्रोल, कॉर्नरिंग ब्रेक कंट्रोल, ऑटो होल्ड के साथ इलेक्ट्रॉनिक पार्किंग ब्रेक, टायर-प्रेशर मॉनिटरिंग और ISOFIX चाइल्ड-सीट माउंट्स मिलते हैं।

इसके ड्राइवर-असिस्टेंस सिस्टम में लेन-डिपार्चर वॉर्निंग, ब्लाइंड-स्पॉट असिस्टेंस, ब्रेकिंग के साथ क्रूज कंट्रोल, ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग, पैदल चलने वालों की सुरक्षा और अटेंटिवनेस असिस्टेंट शामिल हैं।

पार्किंग को आसान बनाने के लिए SUV में फ्रंट और रियर पार्किंग सेंसर, रियर-व्यू कैमरा और 360-डिग्री सराउंड-व्यू कैमरा दिया गया है। इसका Reversing Assistant फीचर पिछले 50 मीटर की ड्राइविंग को याद रख सकता है और जरूरत पड़ने पर कार को उसी रास्ते पर अपने आप पीछे ले जा सकता है।

नई BMW X1 LWB को चार एक्सटीरियर कलर ऑप्शन- Night Dusk Blue, Skyscraper Grey, Carbon Black और Mineral White में खरीदा जा सकता है। वहीं, इंटीरियर के लिए Castanea और डुअल-टोन Smoke White और Atlas Grey अपहोल्स्ट्री का विकल्प मिलता है।

BMW X1 LWB की लॉन्चिंग के बाद अब ग्राहक देशभर में मौजूद अधिकृत BMW डीलरशिप पर जाकर इसकी बुकिंग कर सकते हैं।

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UN में चीफ गुटेरेस की जगह किसे मिलेगी:आज दूसरे दौर की वोटिंग, रेस में 8 दावेदार, कोस्टा रिका की ग्रिन्सपैन सबसे आगे

संयुक्त राष्ट्र के मौजूदा महासचिव एंतोनियो गुटेरेस का दूसरा पांच साल का कार्यकाल 31 दिसंबर 2026 को खत्म होगा। उनके बाद अगला महासचिव चुनने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस पद के लिए इस समय 8 उम्मीदवार मैदान में हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 15 मेंबर सीक्रेट वोटिंग के जरिए इन उम्मीदवारों के समर्थन का अंदाजा लगा रहे हैं। पिछले महीने हुए पहले अनौपचारिक मतदान में कोस्टा रिका की रेबेका ग्रिन्सपैन सबसे आगे रहीं। आज शुक्रवार को दूसरे दौर का अनौपचारिक मतदान होगा। इसके बाद भी कई अनौपचारिक पोल हो सकते हैं, जिनमें धीरे-धीरे उम्मीदवारों की संख्या कम होगी। अक्टूबर में औपचारिक चुनाव हो सकते हैं। UN चीफ कैसे चुना जाता है? संयुक्त राष्ट्र का महासचिव सीधे जनता या सभी देशों के वोट से नहीं चुना जाता। पहले सुरक्षा परिषद उम्मीदवारों पर विचार करती है और गुप्त मतदान के जरिए यह पता लगाती है कि किस उम्मीदवार को कितना समर्थन मिल रहा है। सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य होते हैं। किसी उम्मीदवार को आगे बढ़ने के लिए कम से कम 9 वोट मिलने जरूरी हैं। लेकिन 9 वोट हासिल करना ही काफी नहीं है। सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस में से किसी एक का वीटो भी उम्मीदवार के खिलाफ नहीं होना चाहिए। इसके बाद सुरक्षा परिषद जिस उम्मीदवार पर सहमत होती है, उसका नाम संयुक्त राष्ट्र महासभा के पास भेजा जाता है। महासभा की मंजूरी के बाद वह संयुक्त राष्ट्र का नया महासचिव बनता है। गुटेरेस का कार्यकाल 31 दिसंबर 2026 को खत्म होगा। इसलिए उससे पहले नए महासचिव के चयन की प्रक्रिया पूरी करने की तैयारी है। इस रेस में शामिल 8 उम्मीदवारों का बैकग्राउंड अलग-अलग है। इनमें पूर्व राष्ट्रपति, वरिष्ठ राजनयिक और संयुक्त राष्ट्र के बड़े पदों पर काम कर चुके लोग शामिल हैं। जानते हैं कौन-कौन इस दौड़ में है और किसकी क्या दावेदारी है। 1. रेबेका ग्रिन्सपैन- कोस्टा रिका 70 साल की रेबेका ग्रिन्सपैन फिलहाल इस रेस में सबसे आगे चल रही हैं। पिछले महीने हुए पहले अनौपचारिक मतदान में उन्हें सबसे ज्यादा समर्थन मिला था। ग्रिन्सपैन कोस्टा रिका की पूर्व उपराष्ट्रपति हैं और संयुक्त राष्ट्र के व्यापार एवं विकास संगठन की प्रमुख हैं। उन्होंने महासचिव पद के लिए प्रचार करने के लिए अपनी मौजूदा जिम्मेदारियों से छुट्टी ली है। अगर ग्रिन्सपैन चुनी जाती हैं तो वह संयुक्त राष्ट्र की पहली महिला और पहली यहूदी महासचिव होंगी। उनके माता-पिता द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यूरोप से भागे यहूदी शरणार्थी थे। विवाद: UNDP में काम करने के दौरान महंगे निजी विमान के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठे थे। दुबई से ले जाने के लिए UN का चार्टर्ड विमान इस्तेमाल किया, जिसका खर्च करीब 40 हजार डॉलर था। 2. मिशेल बाचेलेट- चिली 74 साल की मिशेल बाचेलेट चिली की समाजवादी नेता हैं। वह 2006 में चिली की पहली महिला राष्ट्रपति बनी थीं। इसके बाद उन्होंने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख के रूप में काम किया। मानवाधिकार प्रमुख रहते हुए बाचेलेट ने चीन के शिनजियांग में उइगर मुसलमानों की स्थिति पर रिपोर्ट जारी की थी। इसे लेकर चीन ने उनकी आलोचना की थी। बाचेलेट को मेक्सिको और ब्राजील का समर्थन मिला है। हालांकि, दक्षिणपंथी राष्ट्रपति जोस एंतोनियो कास्ट के सत्ता में आने के बाद चिली ने उनका समर्थन वापस ले लिया। अमेरिका भी उनके गर्भपात के अधिकारों से जुड़े रुख को लेकर उनकी आलोचना करता रहा है। विवाद: बाचेलेट ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख रहते हुए भारत के कश्मीर और नागरिकता से जुड़े मामलों पर सवाल उठाए थे। 2019 में उन्होंने जम्मू-कश्मीर में संचार पर रोक और नेताओं की हिरासत पर चिंता जताई थी। भारत ने उनके बयान को गलत और अनुचित बताते हुए खारिज कर दिया था। 3. मारिया फर्नांडा एस्पिनोसा- इक्वाडोर 61 साल की मारिया फर्नांडा एस्पिनोसा इक्वाडोर की पूर्व विदेश मंत्री हैं। वह संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। एस्पिनोसा का कहना है कि दुनिया की साझा समस्याओं से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र सबसे अहम वैश्विक मंच है। हालांकि, वह संगठन में बड़े सुधार की भी वकालत करती हैं। उनकी उम्मीदवारी को एंटीगुआ और बारबुडा का समर्थन मिला है, लेकिन उनके अपने देश इक्वाडोर ने उनका समर्थन नहीं किया है। विवाद: एस्पिनोसा के राजनीतिक करियर में विवाद भी रहे हैं। 2019 में इक्वाडोर की संसद में उन्हें पद से हटाने की कोशिश हुई थी। उन पर विदेश मंत्री रहते हुए जूलियन असांजे को नागरिकता देने और कोलंबिया सीमा पर सुरक्षा संकट से ठीक से न निपटने के आरोप लगे थे। हालांकि, उन्हें हटाने के लिए जरूरी वोट नहीं मिले और वह पद पर बनी रहीं। 4. राफेल मारियानो ग्रॉसी- अर्जेंटीना 65 साल के राफेल मारियानो ग्रॉसी अर्जेंटीना के करियर राजनयिक हैं। वह 2019 से अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के (IAEA) प्रमुख हैं। ईरान के परमाणु कार्यक्रम और यूक्रेन के जापोरिज्जिया परमाणु संयंत्र को लेकर ग्रॉसी पिछले कुछ सालों से चर्चा में रहे हैं। महासचिव पद के लिए चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन उन्होंने IAEA चीफ का पद नहीं छोड़ा है। उनका कहना है कि पद छोड़ना अपनी जिम्मेदारी से पीछे हटने जैसा होगा। ग्रॉसी चाहते हैं कि संयुक्त राष्ट्र दुनिया में होने वाले बड़े संकटों में ज्यादा सक्रिय भूमिका निभाए और संगठन में जरूरी बदलाव किए जाएं। विवाद: ईरान इन पर पक्षपात करने का आरोप लगाता रहा है। 2025 में IAEA की रिपोर्ट के बाद ईरान ने कहा था कि इससे उसके खिलाफ कार्रवाई का रास्ता खुला। ग्रॉसी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि रिपोर्ट जांच के आधार पर तैयार की गई थी। 5. कैरोलिन रोड्रिग्स बिर्केट- गुयाना 52 साल की कैरोलिन रोड्रिग्स-बिर्केट गुयाना की पूर्व विदेश मंत्री हैं। वह गुयाना के आदिवासी समुदाय से आती हैं और सिर्फ 27 साल की उम्र में मंत्री बनी थीं फिलहाल वह संयुक्त राष्ट्र में अपने देश की राजदूत हैं। उनका कहना है कि संयुक्त राष्ट्र को दुनिया में अपनी विश्वसनीयता फिर से स्थापित करने की जरूरत है। विवाद: कोई बड़ा विवाद नहीं 6. इवोन ए-बाकी- इक्वाडोर 75 साल की इवोन ए-बाकी इक्वाडोर की राजनयिक और नेता हैं। वह अमेरिका में इक्वाडोर की राजदूत रह चुकी हैं। इस दौरान उनके अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से अच्छे संबंध रहे। उनकी उम्मीदवारी का प्रस्ताव टोंगा ने रखा है। खाड़ी देशों से भी उनके अच्छे रिश्ते हैं। वह कतर में इक्वाडोर की राजदूत रह चुकी हैं। विवाद: डोनाल्ड ट्रम्प से पुरानी दोस्ती है। 2004 में इक्वाडोर में मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता कराने में भी उनकी भूमिका थी, तब ट्रम्प इस प्रतियोगिता के मालिक थे। विरोधी आरोप लगाते हैं कि ट्रम्प से उनके निजी संबंधों का इस्तेमाल इक्वाडोर-अमेरिका संबंधों में कितना किया जा रहा है। 7. मैकी साल- सेनेगल 64 वर्षीय मैकी साल सेनेगल के पूर्व राष्ट्रपति हैं। वह अफ्रीकी संघ के मौजूदा अध्यक्ष भी हैं। मैकी अपने अभियान में शांति और विकास को सबसे जरूरी मुद्दा बता रहे हैं। उनकी उम्मीदवारी का प्रस्ताव बुरुंडी ने रखा था और जुलाई में सेनेगल ने भी उनका समर्थन कर दिया। विवाद: राष्ट्रपति रहते हुए 2021 से 2024 के बीच सेनेगल में कई हिंसक प्रदर्शन हुए थे। इन प्रदर्शनों को संभालने के उनके तरीके पर सवाल उठे थे। इस दौरान कई लोगों की मौत हुई थी। 8. ओलारा ओटुन्नु- युगांडा 75 साल के ओलारा ओटुन्नु संयुक्त राष्ट्र में युगांडा के राजदूत भी रह चुके हैं। वह कुछ समय के लिए अपने देश के विदेश मंत्री भी रहे। 2011 में उन्होंने युगांडा पीपुल्स कांग्रेस की ओर से राष्ट्रपति चुनाव लड़ा था। हालांकि, वह लंबे समय से सत्ता में मौजूद राष्ट्रपति योवेरी मुसेवेनी से चुनाव हार गए। विवाद: कोई बड़ा विवाद नहीं पहले दौर की वोटिंग में ग्रिन्सपैन को 10 वोट पहले दौर की अनौपचारिक वोटिंग यानी पहला स्ट्रॉ पोल 30 जुलाई 2026 को हुआ था। इसमें कोस्टा रिका की रेबेका ग्रिन्सपैन सबसे आगे रहीं। तब रेस में 7 उम्मीदवार थे। इवोन ए-बाकी इस वोटिंग में शामिल नहीं थीं। वह 18 अगस्त को आठवीं उम्मीदवार बनीं।

CM मोहन यादव का बड़ा एक्शन, लापरवाह जिला पंजीयक सहकारिता निलंबित, टीकमगढ़ में सुनीं जनशिकायतें

CM मोहन यादव का बड़ा एक्शन, लापरवाह जिला पंजीयक सहकारिता निलंबित, टीकमगढ़ में सुनीं जनशिकायतें

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 21 अगस्त को जन विश्वास अभियान के अंतर्गत टीकमगढ़ में सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों को सुना। उन्होंने शिकायतकर्ताओं की समस्याओं को सुनकर उनका निराकरण किया। उन्होंने इस दौरान कार्य में लापरवाही बरतने पर जिला पंजीयक सहकारिता एसके कौशिक को निलंबित करने के निर्देश दिए। दयाराम लोधी की मां स्व. रानीबाई की मृत्यु होने पर सहकारी बैंक की मवई शाखा द्वारा नॉमिनी के खाते में राशि अंतरित नहीं किए जाने की शिकायत पर यह कार्रवाई की गई।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी विभागीय अधिकारी सतत रूप से फील्ड भ्रमण कर विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन का जायजा लें। स्थानीय स्तर पर जनता की शिकायतों का समय सीमा में प्रभावी निराकरण किया जाये। क्षेत्र विशेष में मिलने वाली शिकायतों का भी समुचित निराकरण सुनिश्चित हो।

 

अधिकारियों को दिए निर्देश

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शिकायतकर्ता महेश प्रसाद लोधी, कमलेश नामूलिया, दयाराम लोधी, कालीचरण सिंह राजपूत और हरिराम विश्वकर्मा से संवाद किया और उनके प्रकरणों के संबंध में जानकारी प्राप्त की। सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों के संबद्ध निराकरण के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आवश्यक निर्देश अधिकारियों को दिए। उन्होंने कहा कि कार्य में लापरवाही बरतने वाले अधिकारी और कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई होगी, जबकि उत्कृष्ट कार्य पर शासकीय सेवक सम्मानित किए जाएंगे।

 

उचित मूल्य की दुकानों पर हुई चर्चा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मौके पर जिले में विभिन्न शासकीय उचित मूल्य दुकानों के वास्तविक स्थान पर संचालन के लिए आवश्यक कार्रवाई पर भी चर्चा हुई। बैठक में राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं टीकमगढ़ जिले की प्रभारी मंत्री कृष्णा गौर, पूर्व राज्य मंत्री एवं विधायक जतारा हरिशंकर खटीक सहित मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, सचिव मुख्यमंत्री डॉ. सुदाम खाड़े, आयुक्त जनसंपर्क मनीष सिंह सहित कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय एवं अन्य अधिकारीगण भी उपस्थित रहे।

UP-Japan Meet : जापानी प्रतिनिधिमंडल ने देखी वीमेन पावर लाइन 1090 की कार्यप्रणाली, समझा महिला सुरक्षा मॉडल

UP-Japan Meet : जापानी प्रतिनिधिमंडल ने देखी वीमेन पावर लाइन 1090 की कार्यप्रणाली, समझा महिला सुरक्षा मॉडल

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यूपी–जापान इन्वेस्टमेंट मीट 2026 के तहत जापानी प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश की महिला सुरक्षा के लिए संचालित वीमेन पावर लाइन 1090 का दौरा किया। प्रतिनिधिमंडल ने यहां महिलाओं की सुरक्षा, शिकायतों पर त्वरित सहायता, काउंसलिंग और जागरूकता से जुड़ी व्यवस्थाओं को समझा। इस दौरान उत्तर प्रदेश के अधिकारियों और जापानी प्रतिनिधिमंडल के बीच महिला सुरक्षा, स्कूली स्तर पर जागरूकता, बच्चों को सुरक्षा संबंधी जानकारी देने और महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने के तरीकों पर विस्तार से अनुभव साझा किए गए।

 

दौरे के दौरान जापानी प्रतिनिधिमंडल को बताया गया कि वीमेन पावर लाइन 1090 महिलाओं को कठिन, भय या उत्पीड़न की स्थिति में सहायता उपलब्ध कराने के लिए महत्वपूर्ण व्यवस्था के रूप में कार्य करती है। प्रतिनिधिमंडल ने यह समझने में रुचि दिखाई कि किसी महिला की ओर से सहायता के लिए संपर्क किए जाने के बाद उसकी समस्या को किस तरह समझा जाता है और कैसे उस तक उचित सहायता पहुंचाई जाती है।

 

शिकायत से काउंसलिंग तक की प्रक्रिया समझी

जापानी प्रतिनिधिमंडल ने 1090 की कार्यप्रणाली को करीब से समझते हुए कॉल रिसीव करने से लेकर महिला की समस्या को समझने, आवश्यक काउंसलिंग उपलब्ध कराने और जरूरत के अनुसार संबंधित सहायता तंत्र से जोड़ने की प्रक्रिया की जानकारी ली। अधिकारियों ने बताया कि ऐसी परिस्थितियों में महिलाओं की बात ध्यानपूर्वक सुनना और उन्हें सहज एवं सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराना बेहद महत्वपूर्ण होता है। विशेष रूप से काउंसलिंग और भावनात्मक सहयोग को लेकर चर्चा हुई। प्रतिनिधिमंडल को बताया गया कि कई बार महिलाएं डर, तनाव या झिझक के कारण अपनी बात खुलकर नहीं रख पातीं। ऐसे मामलों में प्रशिक्षित कर्मी संवेदनशीलता के साथ उनकी बात सुनते हैं, उनकी चिंताओं को समझते हैं और उन्हें उपयुक्त सहायता एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की दिशा में काम करते हैं।

 

स्कूलों में बचपन से सुरक्षा जागरूकता पर जोर

बैठक के दौरान महिला सुरक्षा को केवल शिकायत निवारण तक सीमित न रखते हुए प्रीवेंटिव अवेयरनेस पर भी चर्चा हुई। जापानी प्रतिनिधिमंडल और उत्तर प्रदेश के अधिकारियों ने स्कूलों में विद्यार्थियों को कम उम्र से ही सुरक्षा, अधिकारों और जरूरत पड़ने पर सहायता लेने के तरीकों के बारे में जागरूक करने की आवश्यकता पर विचार साझा किए। बच्चों में पांच वर्ष की आयु के बाद सुरक्षा संबंधी जागरूकता विकसित करने के तरीकों पर भी चर्चा हुई। इसमें बच्चों को अपनी सुरक्षा, संवाद करने और किसी कठिन परिस्थिति में भरोसेमंद व्यक्ति से मदद मांगने के बारे में सहज तरीके से जानकारी देने के दृष्टिकोण पर विचार किया गया।

 

जापान और यूपी के अनुभवों पर हुआ संवाद

जापानी प्रतिनिधिमंडल ने जापान में महिलाओं की सुरक्षा और जागरूकता से जुड़े कार्यक्रमों के बारे में अपने अनुभव साझा किए। वहीं उत्तर प्रदेश के अधिकारियों ने प्रदेश में संचालित महिला सुरक्षा और सहायता तंत्र की जानकारी दी। दोनों पक्षों ने माना कि जापान और उत्तर प्रदेश की सामाजिक एवं संस्थागत परिस्थितियां अलग हैं, इसलिए किसी भी मॉडल को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप समझना और लागू करना आवश्यक है। इसके बावजूद महिला सुरक्षा, बच्चों में जागरूकता, प्रभावी संवाद, काउंसलिंग और महिलाओं को सहायता उपलब्ध कराने जैसे क्षेत्रों में अनुभवों का आदान-प्रदान दोनों पक्षों के लिए उपयोगी हो सकता है।

 

सुरक्षा से आत्मविश्वास और सशक्तीकरण तक

चर्चा में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि महिला सुरक्षा का उद्देश्य केवल किसी घटना के बाद सहायता उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि महिलाओं में आत्मविश्वास और सुरक्षा की भावना विकसित करना भी है। जब महिलाएं यह महसूस करती हैं कि कठिन परिस्थिति में उन्हें समय पर सहायता मिल सकती है, तो वे अपनी समस्याओं को सामने रखने और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने में अधिक सहज महसूस करती हैं। प्रतिनिधिमंडल ने माना कि महिला सुरक्षा, जागरूकता, काउंसलिंग और सहायता सेवाएं एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। इन व्यवस्थाओं को मजबूत करने से महिलाओं की सामाजिक भागीदारी और आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिलता है।

 

अनुभवों के आदान-प्रदान से सहयोग की नई संभावनाएं

यूपी–जापान इन्वेस्टमेंट मीट 2026 के तहत हुआ यह दौरा भारत-जापान संबंधों के सामाजिक आयाम को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। महिला सुरक्षा और सशक्तीकरण जैसे विषयों पर दोनों पक्षों के बीच अनुभव साझा होने से भविष्य में जागरूकता, काउंसलिंग, बच्चों की सुरक्षा शिक्षा और महिला सहायता सेवाओं के क्षेत्र में सहयोग की नई संभावनाएं बन सकती हैं। जापानी प्रतिनिधिमंडल ने वीमेन पावर लाइन 1090 की व्यवस्था को समझते हुए उत्तर प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा और सहायता के लिए विकसित किए गए संस्थागत तंत्र की जानकारी हासिल की। वहीं इस संवाद से उत्तर प्रदेश के अधिकारियों को जापान में अपनाई जा रही महिला सुरक्षा और जागरूकता की विभिन्न कार्यप्रणालियों को समझने का अवसर मिला।

UP-Japan Investment Meet 2026: यूपी और जापान के यामानाशी में पर्यटन सहयोग, सारनाथ-फुजिसान से मजबूत होंगे रिश्ते

UP-Japan Investment Meet 2026: यूपी और जापान के यामानाशी में पर्यटन सहयोग, सारनाथ-फुजिसान से मजबूत होंगे रिश्ते

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उत्तर प्रदेश सरकार अब अपने तेजी से विकसित हो रहे बौद्ध पर्यटन को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। इस कड़ी में जापान को प्रदेश का एक स्वाभाविक और महत्वपूर्ण साझेदार माना जा रहा है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने शुक्रवार को यामानाशी प्रीफेक्चर के प्रतिनिधिमंडल के साथ हुए संवाद सत्र में कहा कि 'यामानाशी, जापानी पर्यटकों को उत्तर प्रदेश के बौद्ध और आध्यात्मिक स्थलों से जोड़ने में अहम भूमिका निभा सकता है।'

 

लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान (आईजीपी) में आयोजित कार्यक्रम में यामानाशी के गवर्नर कोटारो नागासाकी और डिप्टी-गवर्नर जुनिची इशिदेरा के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया। संवाद सत्र में उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और पर्यटन उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों ने दोनों क्षेत्रों के बीच मौजूद सांस्कृतिक संबंधों को पर्यटन गतिविधियों और संस्थागत सहयोग में बदलने की संभावनाओं पर चर्चा की।

 

बौद्ध सर्किट को वैश्विक बाजार से जोड़ने पर जोर

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि 'मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में वर्ष 2017 के बाद प्रदेश में बौद्ध पर्यटन के विकास की सोच में व्यापक बदलाव आया है। अब सरकार का फोकस केवल स्मारकों के विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि बेहतर कनेक्टिविटी, पर्यटक सुविधाओं, ठहरने की व्यवस्था और पर्यटन स्थलों पर बेहतर अनुभव उपलब्ध कराने पर भी है। उन्होंने कहा कि बौद्ध सर्किट के प्रमुख स्थलों पर मजबूत आधारभूत ढांचा तैयार किया गया है। अब सरकार की प्राथमिकता इस विकास को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने की है। भगवान बुद्ध की विरासत सदियों से भारत और जापान के लोगों को सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रूप से जोड़ती रही है, इसलिए जापान उत्तर प्रदेश के लिए एक स्वाभाविक और महत्वपूर्ण साझेदार है।'

 

यामानाशी बनेगा जापान में यूपी पर्यटन का नया प्रवेश द्वार : जयवीर सिंह

मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि 'यामानाशी जापानी पर्यटकों को उत्तर प्रदेश से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की मंशा यामानाशी को उत्तर प्रदेश के पर्यटन के लिए जापान में एक मजबूत प्रवेश द्वार के रूप में विकसित करने की है। वहीं, उत्तर प्रदेश को बौद्ध धर्म, अध्यात्म, वेलनेस और भारतीय संस्कृति में रुचि रखने वाले जापानी पर्यटकों के लिए स्वाभाविक पर्यटन गंतव्य बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। सारनाथ, कुशीनगर, श्रावस्ती, कपिलवस्तु, कौशाम्बी और संकिसा जैसे स्थल भगवान बुद्ध के जीवन और उनकी यात्राओं के अलग-अलग अध्यायों से पर्यटकों को जोड़ते हैं।

 

'आर्थिक प्रगति और बौद्ध विरासत से निवेशकों को लुभा रहा यूपी' 

अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग अमृत अभिजात ने कहा कि उत्तर प्रदेश अब सिर्फ अपनी समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत ही नहीं, अपितु तेज आर्थिक विकास और मजबूत होते बुनियादी ढांचे के कारण भी निवेशकों की पसंद बन रहा है। उन्होंने कहा कि हाईवे, नागरिक उड्डयन, उद्योग और निवेश के क्षेत्र में प्रदेश ने तेजी से प्रगति की है। साथ ही उत्तर प्रदेश भगवान बुद्ध से जुड़े छह प्रमुख स्थलों की भूमि है, जहां जापानी पर्यटकों को शांति और आध्यात्मिक अनुभव के साथ समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि जापानी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम से पहले आगे बढ़ाया जाना उत्तर प्रदेश और जापान के बीच बढ़ते संवाद और मजबूत होते संबंधों का सकारात्मक संकेत है। अमृत अभिजात ने जापानी निवेशकों को प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र में मौजूद संभावनाओं का लाभ उठाने और पर्यटन उत्पादों व अनुभवों के विकास में निवेश करने के लिए आमंत्रित किया।

 

उत्तर प्रदेश की पर्यटन विविधता को कोइजुमी ने सराहा

यामानाशी के पर्यटन, संस्कृति एवं खेल विभाग के महानिदेशक योशीयुकी कोइजुमी ने उत्तर प्रदेश की पर्यटन विविधता और प्रतिनिधिमंडल के आत्मीय स्वागत की सराहना की। उन्होंने कहा कि 'प्रदेश में विरासत, आध्यात्मिकता, प्राकृतिक सौंदर्य और संस्कृति का अनूठा संगम है। कोइजुमी ने यह भी कहा कि यामानाशी और उत्तर प्रदेश के बीच मौजूद गहरे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंध दोनों प्रान्त के लोगों के बीच पर्यटन, आपसी आदान-प्रदान और बेहतर समझ को बढ़ावा देने का मजबूत आधार बन सकते हैं।'

 

दोनों ओर पर्यटकों की आवाजाही बढ़ाने पर संवाद

संवाद सत्र में उत्तर प्रदेश और यामानाशी के बीच पर्यटकों की आवाजाही बढ़ाने के लिए व्यावहारिक अवसरों और आवश्यकताओं पर भी चर्चा हुई। इस बीच, टॉर्नोस के संस्थापक एवं सीईओ तथा फिक्की पर्यटन समिति के अध्यक्ष प्रतीक हीरा ने कहा कि 'उत्तर प्रदेश और जापान की साझा सांस्कृतिक विरासत पर्यटन सहयोग के लिए स्वाभाविक आधार तैयार करती है। उत्तर प्रदेश भगवान बुद्ध की भूमि है और जापान में शिव, गणेश, सरस्वती, कुबेर, लक्ष्मण और यहां तक कि भगवान कृष्ण जैसे भारतीय देवी-देवताओं के प्रति भी श्रद्धा का भाव देखने को मिलता है। यामानाशी को जापान के 'फ्रूट बाउल' के रूप में जाना जाता है और उत्तर प्रदेश की मजबूत कृषि पहचान दोनों क्षेत्रों के बीच एक और समानता है। उन्होंने यह भी कहा कि हर वर्ष करीब दो लाख भारतीय जापान की यात्रा करते हैं और दोनों दिशाओं में पर्यटन बढ़ाने की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।'

 

सत्र के दौरान तबीज़ुकी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के राजन कुमार ने कहा कि उत्तर प्रदेश की आतिथ्य परंपरा और खान-पान जापानी पर्यटकों के साथ सांस्कृतिक जुड़ाव को मजबूत करने का अहम माध्यम बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत का समृद्ध इतिहास और विविधता, उत्तर प्रदेश की आतिथ्य परंपरा तथा लखनऊ के मशहूर खानपान को जापान की प्रसिद्ध खाद्य संस्कृति के साथ जोड़कर पर्यटन के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं।

 

जापानी पर्यटकों के अनुरूप आतिथ्य सुविधाओं पर जोर

पर्यटन पर संवाद सत्र में जापानी पर्यटकों की जरूरतों और उनकी पसंद के अनुरूप आतिथ्य सुविधाएं विकसित करने पर भी जोर दिया गया। लोटस निक्को की नेहा राय ने कहा कि 'जापानी पर्यटकों के लिए विश्वसनीयता, समयबद्ध सेवाएं और खान-पान का विशेष महत्व है। उन्होंने बताया कि उनका समूह श्रावस्ती और कुशीनगर में होटल संचालित कर रहा है और जापानी पर्यटक बाजार के साथ भी उसका अनुभव रहा है। बौद्ध सर्किट से गुजरने वाले जापानी पर्यटकों की सुविधा को देखते हुए इन होटलों में जापानी भोजन की भी व्यवस्था की गई है।'

 

शीराज टूर्स की निदेशक हिना शीराज जैदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच पर्यटन को लेकर रुचि लगातार बढ़ रही है। खासकर युवा भारतीय पर्यटक जापानी संस्कृति, खान-पान, चेरी ब्लॉसम, माउंट फूजी और वहां के आधुनिक पर्यटन आकर्षणों को लेकर उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि स्कूल समूहों की यात्राएं भी दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक समझ बढ़ाने और संपर्क मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

 

बौद्ध पर्यटन को मिल रही रफ्तार- मृदुल चौधरी

विशेष सचिव एवं पर्यटन निदेशक मृदुल चौधरी ने कहा कि 'उत्तर प्रदेश सरकार बौद्ध पर्यटन के नए चरण के लिए जरूरी पर्यटन सुविधाओं और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने में जुटी है। उन्होंने बताया कि राज्य योजना के तहत बौद्ध स्थलों पर 51 पर्यटन परियोजनाओं पर 218 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से विकास कार्य कराए जा रहे हैं। वहीं, विश्व बैंक की सहायता से सारनाथ और कुशीनगर में एकीकृत पर्यटन विकास की योजना पर काम चल रहा है, जबकि श्रावस्ती में एसएएससीआई के तहत बड़े स्तर पर विकास कार्य प्रस्तावित हैं। उन्होंने कहा कि विभाग का प्रयास पर्यटन सुविधाओं, स्थलों की बेहतर व्याख्या, आतिथ्य सेवाओं और विभिन्न बौद्ध स्थलों के बीच सुगम आवागमन को एक साथ विकसित करने का है, ताकि पर्यटक पूरे बौद्ध सर्किट को अलग-अलग पड़ावों के बजाय एक संपूर्ण यात्रा के रूप में अनुभव कर सकें।'

 

बौद्ध पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी

उत्तर प्रदेश के बौद्ध पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की बढ़ती संख्या ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग की संभावनाओं को और मजबूत किया है। प्रदेश के छह प्रमुख बौद्ध पर्यटन स्थलों पर वर्ष 2022 में 22.4 लाख पर्यटक पहुंचे थे, जो वर्ष 2025 में बढ़कर 81.8 लाख से अधिक हो गए। इसी अवधि में विदेशी पर्यटकों की संख्या 48 हजार से बढ़कर करीब 4.43 लाख पहुंच गई। वर्ष 2026 में जनवरी से जून के बीच ही बौद्ध सर्किट के प्रमुख स्थलों पर 30.07 लाख पर्यटक पहुंचे, जिनमें 2.02 लाख विदेशी पर्यटक शामिल रहे।

 

यूपी और यामानाशी मिलकर बढ़ाएंगे पर्यटन, एमओयू पर हस्ताक्षर

उत्तर प्रदेश सरकार और यामानाशी प्रीफेक्चर के बीच पर्यटन सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह मौजूद रहे। एमओयू के तहत पर्यटन क्षेत्र में ज्ञान और अनुभवों का आदान-प्रदान, संयुक्त प्रचार अभियान, पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों के बीच संपर्क, धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन मार्गों का विकास और दोनों क्षेत्रों के बीच पर्यटकों की आवाजाही बढ़ाने की दिशा में सहयोग किया जाएगा। समझौते में विशेष रूप से बौद्ध, आध्यात्मिक और वेलनेस पर्यटन को शामिल किया गया है। इसके अलावा संयुक्त प्रचार अभियान, प्रदर्शनियां, सेमिनार और डिजिटल सामग्री के माध्यम से दोनों क्षेत्रों के पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा।

 

एमओयू के तहत उत्तर प्रदेश के सारनाथ और जापान के फुजिसान से जुड़े यूनेस्को विश्व धरोहर मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर भी सहमति बनी है। इसके साथ ही भविष्य में दोनों क्षेत्रों के बीच बौद्ध विरासत की बेहतर व्याख्या, बहुभाषी पर्यटक सुविधाओं, ध्यान और वेलनेस पर्यटन, आतिथ्य, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, पेशेवर प्रशिक्षण और ज्ञान हस्तांतरण जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी।

 

अब वाराणसी और सारनाथ का दौरा

जापानी प्रतिनिधिमंडल की उत्तर प्रदेश यात्रा को प्रदेश की पर्यटन विविधता से परिचित कराने के उद्देश्य से विशेष रूप से तैयार किया गया है। आगरा में ताजमहल और ब्रज की सांस्कृतिक परंपराओं से रूबरू होने तथा लखनऊ में पर्यटन और उद्योग से जुड़े संवाद के बाद जापानी प्रतिनिधिमंडल वाराणसी और सारनाथ का दौरा करेगा। यहां काशी की आध्यात्मिक परंपराएं, गंगा आरती और सारनाथ की बौद्ध विरासत जापानी मेहमानों को भारत और जापान के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक व आध्यात्मिक रिश्तों से रूबरू कराएंगी।

UP-Japan Investment Meet 2026: लखनऊ में दिखी स्वदेशी तकनीक की ताकत, तेजस्वान ड्रोन से दिव्यास्त्र तक छाए अत्याधुनिक उत्पाद

UP-Japan Investment Meet 2026: लखनऊ में दिखी स्वदेशी तकनीक की ताकत, तेजस्वान ड्रोन से दिव्यास्त्र तक छाए अत्याधुनिक उत्पाद

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट 2026 की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री ने विभिन्न स्टॉल पर पहुंचकर प्रदर्शित उत्पादों और उनकी तकनीक की जानकारी ली। प्रदर्शनी में आधुनिक तकनीक के साथ स्वदेशी उत्पादों की क्षमता भी देखने को मिली। एयरोस्पेस, डिफेंस, कृषि और कंस्ट्रक्शन क्षेत्र से जुड़े अत्याधुनिक उत्पादों ने खासा आकर्षण बटोरा। आईआईटी कानपुर से इनक्यूबेटेड स्टार्टअप मराल एयरोस्पेस का तेजस्वान ड्रोन प्रमुख आकर्षण रहा। इसके अलावा एस्कॉर्ट्स कुबोटा के कृषि उपकरण, होवेरिट का दिव्यास्त्र एमके-1 तथा एमकेयू के बैलेस्टिक हेलमेट और सुरक्षा उपकरणों ने भी लोगों का ध्यान खींचा। मुख्यमंत्री ने इन उत्पादों की तकनीकी विशेषताओं और उपयोगिता के बारे में जानकारी ली।

 

12 घंटे तक आसमान में रह सकेगा तेजस्वान

 

प्रदर्शनी में सबसे ज्यादा चर्चा मराल एयरोस्पेस के स्वदेशी फिक्स्ड-विंग यूएवी तेजस्वान की रही। मराल एयरोस्पेस के फाउंडर विवेक कुमार पांडेय ने बताया कि कंपनी भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर (आईआईटी कानपुर) में इनक्यूबेट हुआ डीप-टेक एयरोस्पेस स्टार्टअप है। कंपनी रक्षा, सुरक्षा और वाणिज्यिक क्षेत्रों के लिए स्वदेशी डिजाइन वाले लंबे समय तक उड़ान भरने में सक्षम मानवरहित हवाई प्रणालियां विकसित कर रही है। कंपनी के प्रमुख प्लेटफॉर्म तेजस्वान को लंबे समय तक आसमान में बने रहने के उद्देश्य से तैयार किया जा रहा है। यह करीब 12 घंटे तक लगातार उड़ान भरने में सक्षम है। साथ ही समुद्र तल से करीब 6000 मीटर की ऊंचाई तक संचालन के लिए डिजाइन किया जा रहा है। इसमें 5 किलोग्राम तक पेलोड ले जाने और करीब 120 से 150 किलोमीटर की एकतरफा रेंज प्रस्तावित है। कंपनी के मुताबिक, रात में भी यह करीब चार घंटे तक उड़ान भरने में सक्षम होगा। तेजस्वान में उच्च दक्षता वाले सोलर सेल, हल्की कंपोजिट संरचना, अधिक ऊर्जा घनत्व वाली बैटरियां, स्वायत्त उड़ान प्रणाली और सुरक्षा के लिए रिडंडेंट सिस्टम जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। इसकी उपयोगिता खुफिया, निगरानी एवं टोही (आईएसआ), सीमा निगरानी, आपदा प्रबंधन, संचार रिले और बुनियादी ढांचे के निरीक्षण जैसे क्षेत्रों में बताई गई है।

 

90 दिन तक आसमान में रहने वाले एचएपीएस पर भी काम

 

मराल एयरोस्पेस केवल तेजस्वान तक सीमित नहीं है। कंपनी हाई-एल्टीट्यूड स्यूडो-सैटेलाइट यानी एचएपीएस प्लेटफॉर्म पर भी काम कर रही है। इसे करीब 90 दिनों तक लगातार संचालन के लिए तैयार किया जा रहा है। ऐसे प्लेटफॉर्म लंबे समय तक ऊंचाई पर रहकर निगरानी, संचार और अन्य रणनीतिक जरूरतों में उपयोगी हो सकते हैं।

 

प्रदर्शनी में 27 लाख का कंबाइन हार्वेस्टर से लेकर 6 लाख का कॉम्पैक्ट ट्रैक्टर रहा आकर्षण का केंद्र

 

प्रदर्शनी में एस्कॉर्ट्स कुबोटा लिमिटेड कंपनी के कृषि और कंस्ट्रक्शन उपकरण भी आकर्षण का केंद्र रहे। कंपनी के एग्री सॉल्यूशन प्रोडक्ट मैनेजर आतसुया ओता ने बताया कि कंपनी ने उत्तर प्रदेश में करीब 154 एकड़ जमीन 90 साल की लीज पर ली है। यहां आने वाले सात वर्षों में ट्रैक्टर, कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट और पार्ट्स सेंटर विकसित करने की योजना है। कंपनी की ओर से इस परियोजना में 2,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की तैयारी है।

 

प्रदर्शनी में कंपनी की ओर से कंबाइन हार्वेस्टर, राइस ट्रांसप्लांटर, कॉम्पैक्ट ट्रैक्टर और डीजल जेनसेट लगाए गए थे। कंबाइन हार्वेस्टर की बिक्री के मामले में वह देश में दूसरे स्थान पर है, जबकि राइस ट्रांसप्लांटर की बिक्री में नंबर वन है। कंपनी के प्रदर्शित उत्पादों में कंबाइन हार्वेस्टर की कीमत करीब 27 लाख रुपये, राइस ट्रांसप्लांटर की करीब 14 लाख रुपये, कॉम्पैक्ट ट्रैक्टर की करीब 6 लाख रुपये और डीजल जेनसेट की कीमत करीब 7 लाख रुपये है। कंपनी भारत में कंस्ट्रक्शन क्षेत्र के लिए क्रेन, बैकहो लोडर और ट्रैक्टर जैसे उपकरणों का निर्माण कर रही है, जबकि कंबाइन हार्वेस्टर और राइस ट्रांसप्लांटर का आयात किया जाता है। कंपनी कृषि और निर्माण क्षेत्र के लिए मशीनरी और उपकरण तैयार करती है।

 

400-500 किलोमीटर रेंज वाला दिव्यास्त्र एमके वन भी प्रदर्शनी में

 

डिफेंस टेक्नोलॉजी की झलक होवेरिट प्राइवेट लिमिटेड के दिव्यास्त्र एमके वन में भी देखने को मिली। कंपनी के फ्लाइट टेस्टिंग इंजीनियर लारिब ने बताया कि दिव्यास्त्र एमके वन एक लोइटरिंग म्यूनिशन/आत्मघाती ड्रोन प्लेटफॉर्म है, जिसे लक्षित स्थान तक पहुंचकर हमला करने के लिए डिजाइन किया गया है। लारिब ने बताया कि इसकी प्रस्तावित रेंज 400 से 500 किलोमीटर तक है और यह करीब 800 से 1,000 मीटर की ऊंचाई पर उड़ान भर सकता है। इसकी लगातार उड़ान क्षमता करीब 5 घंटे है। इसमें थर्मल इमेजिंग कैमरा लगाया गया है और यह आईसी इंजन से संचालित होता है। इसका मई 2026 में भारतीय सेना द्वारा सफल परीक्षण किया गया था। दिव्यास्त्र एमके वन करीब 20 किलोग्राम तक पेलोड ले जाने में सक्षम है और लोड के साथ इसका कुल वजन करीब 40 किलोग्राम है। इसकी गति करीब 250 से 350 किलोमीटर प्रति घंटा है। कंपनी इसे मेड इन इंडिया प्लेटफॉर्म के तौर पर विकसित कर रही है। होवेरिट कंपनी यूपी डिफेंस कॉरिडोर के तहत काम कर रही है। दिव्यास्त्र का नया एमके-3 वेरिएंट जेट इंजन से संचालित होगा और इसका कानपुर में परीक्षण किया जा चुका है।

 

कारगिल से आधुनिक बैलेस्टिक सुरक्षा तक पहुंचा एमकेयू

 

प्रदर्शनी में सैनिकों की सुरक्षा से जुड़े उपकरणों ने भी लोगों का ध्यान खींचा। दशकों पुरानी एमकेयू लिमिटेड ने बैलेस्टिक हेलमेट, बैलेस्टिक जैकेट, नाइट विजन बाइनोक्युलर और थर्मल वेपन साइट जैसे उत्पाद प्रदर्शित किए। कंपनी के सीनियर सेल्स मैनेजर सोहम सेठ ने बताया कि कंपनी ने कारगिल युद्ध के दौरान जूतों की आपूर्ति की थी। इसके बाद कंपनी ने बैलेस्टिक हेलमेट और बैलेस्टिक जैकेट के क्षेत्र में विस्तार किया। आज कंपनी भारत में सुरक्षा उपकरणों के निर्माण के क्षेत्र में काम कर रही है।

 

सीनियर सेल्स मैनेजर ने बताया कि उसके उत्पाद करीब 90 देशों तक पहुंच रहे हैं। प्रदर्शनी में सैनिकों और सुरक्षा बलों के लिए आधुनिक बैलेस्टिक सुरक्षा उपकरणों के साथ-साथ कम रोशनी और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में निगरानी एवं लक्ष्य पहचान में इस्तेमाल होने वाली तकनीकों का भी प्रदर्शन किया गया है।